संजय झा ने एक बार कॉन्ग्रेस की अंदरूनी राजनीति गरमा दी है। उन्होंने आज (अगस्त 17, 2020) ट्वीट कर दावा किया कि लगभग 100 कॉन्ग्रेस नेता (सांसद सहित) पार्टी के आंतरिक मामलों से परेशान हैं और इसे लेकर उन्होंने पार्टी हाईकमान को पत्र लिखा है।
झा को पार्टी ने पिछले दिनों निलंबित कर दिया था। अब इस ट्वीट के बाद पार्टी ने उनसे पूरी तरह पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हुए कहा है कि वे बीजेपी के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं।
संजय झा ने अपने ट्वीट में दावा किया कि सोनिया गाँधी को लिखे पत्र में इन नेताओं ने राजनीतिक नेतृत्व बदलने की माँग की है। साथ ही कॉन्ग्रेस कार्यसमिति में पारदर्शी चुनावों की भी माँग की है।
इस ट्वीट के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। कॉन्ग्रेस ने उनके दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई चिट्ठी ने लिखी गई और न उन्हें मिली है।
It is estimated that around 100 Congress leaders (including MP’s) , distressed at the state of affairs within the party, have written a letter to Mrs Sonia Gandhi, Congress President, asking for change in political leadership and transparent elections in CWC.
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “गलत सूचना फैलाने वाले टीवी चैनलों को आज वॉट्सऐप पर निर्देश आ चुका है कि क्या करना है। आज उनको कॉन्ग्रेस नेताओं के ऐसे पत्र पर स्टोरी चलाने को कहा गया है, जो कभी लिखा ही नहीं गया है। ये फेसबुक से भाजपा के लिंक की खबरों से ध्यान हटाने की एक कोशिश है।”
TO WHOM IT MAY CONCERN
“Special Misinformation Group on Media-TV Debate Guidance” in its what’sapp of today directed to run the story of a non existant letter of Congress leaders to divert attention from Facebook-BJP links.
Of course, BJP stooges have started acting upon it.
गौरतलब है कि पिछले दिनों संजय झा को कॉन्ग्रेस ने प्रवक्ता पद से हटा दिया था। गहलोत-पायलट के विवाद के बीच ट्वीट को लेकर उन्हें बाद में पार्टी से निलंबित कर दिया गया। महाराष्ट्र प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी ने पार्टी के खिलाफ काम करने और अनुशासन तोड़ने को लेकर संजय झा के खिलाफ ये कार्रवाई की थी।
बता दें, इससे पहले जून में एक लेख लिखने पर उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया गया था। संजय झा ने कोरोना के दौरान कॉन्ग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए एक प्रमुख अखबार में एक लेख लिखा था और पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी की बात कही थी।
कोरोना वायरस महामारी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर फंड बनाया। आम लोगों से निवेदन किया कि वह इसके लिए अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ दान और सहयोग करें।
27 मार्च को पीएम केयर फंड ट्रस्ट की आधिकारिक घोषणा हुई थी। प्रधानमंत्री इसके चेयरमैन हैं और गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री इसके सदस्य हैं। जैसे ही इस योजना का ऐलान हुआ वैसे ही विरोधी दलों ने इस पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए थे। उनके मुताबिक़ सरकार इस फंड का दुरुपयोग कर सकती है, क्योंकि उसका ऑडिट CAG नहीं करेगा। सोनिया गाँधी ने तो आरोपों की झड़ी ही लगा दी थी।
उन्होंने इस फंड के तहत इकट्ठा की गई राशि पीएम नेशनल रिलीफ फंड में स्थानांतरित करने की मॉंग की थी। जबकि इस कोष में भी इकट्ठा राशि का CAG ऑडिट नहीं करता। इसमें भी लोगों को अपनी मर्ज़ी से सहयोग करना होता है। पीएम केयर फंड के बारे में दुष्प्रचार यहीं पर खत्म नहीं होता।
द हिंदू का ट्वीट
हाल-फ़िलहाल में इस फंड के बारे में दुष्प्रचार का एक नया दौर चला है। द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि एक आरटीआई में पीएम केयर फंड से जुड़ी कुछ जानकारी माँगी गई थी। लेकिन ट्रस्ट ने किसी भी तरह की जानकारी साझा करने से साफ़ मना कर दिया है।
एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक आरटीआई से जुड़ी जानकारी साझा करने से साफ़ मना कर दिया है। कार्यालय का कहना है कि इससे कार्यालय के संसाधन प्रभावित होंगे।”
Narendra Modi denies to reveal the amount of PM Cares Fund!
Why is he deliberately hiding? Is it not a cheat to one who belived him he’s a transparent & genuine?
One who cheats people in politics became history in the history books! https://t.co/SEAxRzWe4P
2 तोले सोने की खरीद औऱ 20000 के होटल बिल पर सरकार को जानकारी देनी होगी…. साहब पीएमकेयर्स का न ऑडिट होने देंगे न किसी को RTI का अधिकार है क्या पीएमकेयर्स आय,व्यय जानने का हक देश को नही है !#PMCares
इस ट्वीट से साफ़ तौर पर यही नज़र आता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने फंड से जुड़ी जानकारी साझा करने से साफ़ मना कर दिया है। कॉन्ग्रेस से जुड़े तमाम लोगों ने इस रिपोर्ट को बिना समझे कई गंभीर आरोप लगाना भी शुरू कर दिया। इस ख़बर को आगे रख कर ऐसा दुष्प्रचार किया गया जैसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने कोई जानकारी देने से साफ़ मना कर दिया हो। जबकि इस पूरे मामले की सच्चाई कुछ और ही थी।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार एक्टिविस्ट लोकेश बत्रा ने एक आरटीआई दायर की थी। जिसमें उन्होंने पूछा था कि अप्रैल 2020 से अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय को कितनी आरटीआई मिली और उनमें से कितनी निरस्त की जा चुकी हैं। साथ ही उन्होंने अपनी आरटीआई में यह भी पूछा था कि पीएम केयर फंड और पीएम नेशनल रिलीफ फंड से संबंधित कितनी आरटीआई दायर की गई है। इसके आधार पर कहा जा सकता है कि आरटीआई में फंड के इस्तेमाल से जुड़ी कोई बात नहीं पूछी गई थी। इसमें साफ़ तौर पर आरटीआई की संख्या के बारे में सवाल किया गया है।
जवाब में पीएमओ ने कहा कि ‘जिस तरह की जानकारी आरटीआई में माँगी गई है उसका कोई ब्यौरा अलग-अलग या खण्डों में नहीं रखा जाता है। जानकारी देने के लिए इसे अलग करना पड़ेगा और उससे कार्यालय के संसाधन प्रभावित होंगे। इसलिए अधिनियम की धारा 7 (9) को मद्देनज़र रखते हुए ऐसा नहीं किया गया है।
इसमें सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि आरटीआई में फंड के इस्तेमाल से संबंधित कोई सवाल ही नहीं था। बल्कि फंड का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है इसकी जानकारी समय समय पर दी जा रही थी। 3100 करोड़ रुपए कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जारी किए गए थे। इस राशि का उपयोग वेंटिलेटर बनाने के लिए हुआ।
द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत में ही आरोप लगा दिया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने जानकारी देने से साफ़ मना कर दिया है। रिपोर्ट में उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा गया है। इस तर्क के आधार पर जानकारी का प्रारूप ज़रूर बदला जा सकता है, पर जानकारी देने से मना नहीं किया जा सकता है। इसके बाद रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग कोई भी जानकारी खण्डों में नहीं बल्कि एक साथ रखता है। इसलिए जितनी जानकारी साझा की गई है वह संयुक्त रूप से की गई है।
पीएमओ द्वारा धारा 7 (9) का हवाला देने पर द हिंदू ने कई और आरोप लगाए हैं।
द हिंदू ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पीएमओ ने जिस धारा के आधार पर जानकारी देने से मना किया है वह गलत है। हिंदू के मुताबिक़ अगर पीएमओ कोई जानकारी देने से मना करता है तो उसके लिए धारा 8 (1) का प्रावधान है। धारा 7 (9) इस प्रक्रिया के लिए सही नहीं है। इसके अलावा द हिंदू की रिपोर्ट में जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, उससे ही मंशा स्पष्ट हो जाती है। पीएमओ द्वारा जिस धारा का इस्तेमाल किया गया है उसे गलत बता कर द हिंदू ने क़ानून का अपमान किया है। इतना ही नहीं द हिंदू ने जानकारी नहीं देने से जुड़े दावे करके भी नियमों की अनदेखी की है।
पीएमओ द्वारा रखे गए पक्ष में यह स्पष्ट किया गया है पीएमओ किसी भी आरटीआई का जवाब खण्डों में नहीं देता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि पीएम केयर फंड और पीएम नेशनल फंड रिलीफ दोनों से जुड़ी जानकारी संयुक्त रूप से रखी जाती है। द हिंदू की रिपोर्ट में खुद उच्च न्यायालय के हवाले से लिखा गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय जानकारी का प्रारूप बदल सकता है, लेकिन जानकारी देने से मना नहीं कर सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ठीक ऐसा ही किया भी है। कार्यालय ने पूरी जानकारी दी है, लेकिन अलग प्रारूप में।
द हिंदू ने जिस तरह प्रधानमंत्री कार्यालय की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाया। उसके आधार पर विरोधी दलों ने दुष्प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगा दिया कि इस फंड के तहत भ्रष्टाचार हो रहा है। द हिंदू ने इसके पहले भी दस्तावेज़ों की गलत तरीके से व्याख्या करके सीधे प्रधानमंत्री पर आरोप लगाए हैं। उसने राफेल डील में पीएमओ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए राहुल गाँधी और उनकी पार्टी के तमाम लोगों ने भी आरोप लगाना शुरू कर दिया था। सही जानकारी सामने आने के बावजूद द हिंदू ने सुधार करने से साफ़ मना कर दिया था।
अदालत की अवमानना के दोषी ठहराए जाने के बाद 41 वकील प्रशांत भूषण के समर्थन में आगे आए हैं। इनमें आधे वरिष्ठ हैं। इन वकीलों का कहना है कि इस मामले में कोर्ट अपने फैसले को अमल में नहीं लाए। वहीं, खुद प्रशांत भूषण ने सोमवार (अगस्त 17, 2020) को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सार्वजनिक हित के लिए भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाने वाले वकीलों को फ्री स्पीच के तहत ऐसा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
भूषण 2009 में तहलका पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में अपनी टिप्पणी पर आपराधिक अवमानना के आरोपों का जवाब दे रहे थे। वहीं, उनके वकील वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वे इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण ने पूर्व CJI पर जो बयान दिया था, वो अवमानना कैसे हो गया?
वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मामले में वो रिव्यू पीटिशन दायर करेंगे। 2009 में भूषण के खिलाफ दर्ज अवमानना के मुकदमे का ज़िक्र करते हुए धवन ने कहा कि उस समय इनका ये कथन कोर्ट की अवमानना कैसे हो सकता है, जिसमें भूषण ने कहा था कि हाल ही में रिटायर हुए जजों में से 16 भ्रष्ट हैं, उन्होंने सेवारत जजों के बारे में तो कुछ कहा ही नहीं था।
राजीव धवन ने दलील दी कि स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले प्रशांत भूषण को दोषी तय करने वाले अपने फैसले के एक हिस्से में तो कोर्ट ने विवादास्पद ट्वीट्स को अवमानना बताया है, लेकिन दूसरे हिस्से में उसे अवमानना नहीं माना है, ऐसे में भूषण कोर्ट के सामने पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे ताकि स्थिति स्पष्ट हो।
शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना वाले मामले में दोषी करार दिया था। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने भूषण को अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि इसकी सजा पर 20 अगस्त को बहस सुनी जाएगी।
प्रशांत भूषण ने देश के सर्वोच्च न्यायालय और मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के खिलाफ ट्वीट किया था, जिस पर स्वत: संज्ञान लेकर कोर्ट कार्यवाही कर रहा है। गत 27 जून को प्रशांत भूषण ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ और दूसरा ट्वीट मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे के खिलाफ किया था। 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रशांत भूषण को नोटिस मिला था।
प्रशांत भूषण ने अपने पहले ट्वीट में लिखा था कि जब भावी इतिहासकार देखेंगे कि कैसे पिछले छह साल में बिना किसी औपचारिक इमरजेंसी के भारत में लोकतंत्र को खत्म किया जा चुका है, वो इस विनाश में विशेष तौर पर सुप्रीम कोर्ट की भागीदारी पर सवाल उठाएँगे और मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को लेकर पूछेंगे। न्यायालय ने इस मामले में एक याचिका का संज्ञान लेते हुये प्रशांत भूषण के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही के लिए उन्हें 22 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
हाल ही में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के एक हिस्से में विवादास्पद फेसबुक पोस्ट पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर हुई हिंसा के सिलसिले में बेंगलुरु पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। बेंगलुरु के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) संदीप पाटिल ने कहा कि 11 अगस्त की रात को डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन में हुई हिंसा के सिलसिले में उनके द्वारा समीउद्दीन को हिरासत में लिया गया है।
शीर्ष पुलिस ने कहा कि जाँच के दौरान समीउद्दीन आरएसएस कार्यकर्ता रूद्रेश हत्या मामले के एक आरोपित के संपर्क में पाया गया। इसके अलावा, समीउद्दीन पिछले कुछ वर्षों से अल-हिंद आतंकवादी समूह के सदस्यों के साथ भी संपर्क बनाए हुए था।
इस बीच कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने सोमवार (अगस्त 17, 2020) को कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति, जिनके घर पर 11 अगस्त की रात हिंसा हुई थी, ने एफआईआर में किसी का नाम नहीं लिया है।
कर्नाटक के मंत्री ने आगे कहा, “लेकिन उन्होंने (अखंड श्रीनिवास मूर्ति) कहा कि जब भी उन्हें पता चलेगा कि इसमें कौन शामिल है, तो वह सूचित करेंगे। हम उनका सहयोग चाहते हैं। उनके घर को जलाने की जाँच कराने के लिए हमारे पास अपने गवाह हैं। हम जल्द जाँच शुरू करेंगे।”
गौरतलब है कि कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने पिछले महीने राज्य में अल-हिंद आतंकवादी समूह की कथित उपस्थिति पर टिप्पणी की थी। मंत्री ने एक अखबार को बताया था कि इस साल की शुरुआत में जनवरी में पुलिस द्वारा एक अल-हिंद मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया था। 2018-19 में एक और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया। दोनों मामलों में लगभग 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
उल्लेखनीय है कि फेसबुक पर विवादित पोस्ट पर कथित विवादित टिप्पणी श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे पी नवीन ने की थी। बेंगलुरु पुलिस ने हिंसा में अपनी जाँच जारी रखी है, जिसमें चार लोग मारे गए। आगजनी में कथित रूप से शामिल होने के लिए 58 और लोगों को गिरफ्तार किया गया।
बेंगलुरु पूर्व के लिए पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) एसडी शरणप्पा ने आईएएनएस को बताया, “हमने शुक्रवार से अब तक 58 और लोगों को गिरफ्तार किया है, दंगों में उनकी भूमिका के लिए आयोजित किए गए संदिग्धों की कुल संख्या अब तक 264 है।”
एसडी शरणप्पा ने आगे कहा, “गिरफ्तार किए गए लोगों में से मुख्य आरोपित पूछताछ के लिए हमारी (पुलिस) हिरासत में हैं, जबकि अन्य को शहर के बाहरी इलाके में केंद्रीय जेल और 14 दिनों की न्यायिक हिरासत के तहत बल्लारी जेल में रखा गया है। उनके दंगों में उनकी भूमिका पर जाँच प्रक्रिया जारी है।”
देश के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण स्थिति वाकई बेहद खराब है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक ऐसी घटना सामने आई, जहाँ स्थिति ऐसी हो गई थी कि मौसम खराब होने के बावजूद IAF को खुद मौके पर पहुँचना पड़ा।
A Young man jumped in the waste water wier of khutaghat near Ratanpur district Bilaspur . The flow was very heavy and he couldn’t come out . Sharing few videos pic.twitter.com/6ip5frMkzS
दरअसल, बिलासपुर के पास खूंटाघाट डैम में तेज बारिश के दौरान एक शख्स फँस गया था। जिसे पहले बिलासपुर टीम ने रेस्क्यू करने की बहुत कोशिश की। लेकिन वह इस प्रयास में असफल रहे। इसके बाद उन्होंने IAF को संपर्क किया।
बिलासपुर रेंज के इंस्पेक्टर जनरल दिपांशु काबरा ने स्वयं इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि 34 वर्षीय जीतेंद्र कुमार कश्यप खूँटाघाट में कूदा लेकिन पानी के भारी बहाव के कारण वह वहाँ से निकल नहीं पाया।
The man continued sitting on the stone catching a tree . Heavy water flow and bad weather made rescue nearly impossible . Finally we requested the #indianairforce for chopper for today morning . pic.twitter.com/CjEh2LXUEQ
उन्होंने पहले बताया कि डैम में फँसा हुआ युवक रविवार से छोटे से पेड़ से टिका हुआ था। आसपास लोगों की भीड़ उमड़ी थी। अंधेरा होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई। दीपक काबरा ने बताया कि बिलासपुर पुलिस, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (एसडीआरएफ), एनटीपीसी और एसईसीएल की टीमों ने रात भर उसे बचाने और निकालने की कोशिश की, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद उस व्यक्ति को रेस्क्यू नहीं किया जा सका।
Incredible Rescue hapenned . IAF’s MI 17 Chopper arrived early morning today & he was airlifted. Thanks to @IAF_MCC@PoliceBilaspur and Vigilant Police Team & locals, he’s safe. pic.twitter.com/hrZu7j7np5
एसपी प्रशांत अग्रवाल ने भी कहा कि रेस्क्यू टीम रविवार शाम से मौके पर थी, लेकिन बहाव बहुत तेज था। इसके चलते रेस्क्यू में दिक्कत हो रही थी।
Breathtaking! What seems impossible to us, #IndianAirForce makes it look so simple… The @IAF_MCC‘s #SkyWarrior first himself attempted to go down & bring the man up, risking his own life. But due to fast wind it wasn’t possible, later the guy was rescued with other technique. pic.twitter.com/3xfpbScTbP
दीपक काबरा ने भी अपने ट्वीट में यही बताया कि जब बहुत हालत बहुत खराब हो गई तो भारतीय वायु सेना से हेलीकॉप्टर भेजने का अनुरोध किया गया।
वे आगे लिखते हैं, “जो हमारे लिए असंभव लग रहा था, उसे भारतीय वायुसेना ने बेहद आसान कर दिया।” उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए दिखाया कि कैसे एक वायु सैनिक ने स्वयं की जान को खतरे में डालकर खुद पानी में जाकर व्यक्ति को लाने का फैसला किया। लेकिन तेज हवा के कारण ये मुमकिन नहीं हो पाया। बाद में किसी और तरीके से युवक का रेस्क्यू किया गया।
Big Salute to Indian Airforce for launching rescue operation on our request in such adverse weather condition.
Applause for Bilaspur police, admn, sdrf, ntpc, secl, local public who kept on trying to rescue him thruout last night, and kept hope alive in him.
पूरे ऑपरेशन के वीडियो को शेयर करते हुए बिलासपुर पुलिस ने भारतीय वायु सेना को इतने प्रतिकूल मौसम में भी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सैल्यूट किया। छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश भगेल ने भी युवक को बचाने के लिए IAF को शुभकामनाएँ दीं।
Incredible rescue operation by Indian Airforce at Khutaghat dam, Bilaspur.
अपनी ओर से जारी बयान में वायुसेना ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास रतनपुर में बाढ़ की चपेट में आए एक व्यक्ति को बचाने के लिए 16 अगस्त को रात 10 बजे एंटी नक्सल टास्क फोर्स के मुख्यालय को सूचना मिली। इसके बाद IAF Mi-17 V5 ने रायपुर से खूघाट बांध के लिए सुबह 05:49 बजे बचाव अभियान के लिए उड़ान भरा।
Mi-17 V5 क्रू ने घटनास्थल पर पहुँचकर मौसम और अवरोधों को देखते हुए साइट को नेविगेट किया। इसके बाद बचाव पट्टी के साथ केबल को नीचे उतारा गया और जीवित बचे व्यक्ति को सुरक्षित बचाया गया। चुनौतीपूर्ण मौसम और प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद बचाव मिशन को बेहद व्यावसायिकता के साथ अंजाम दिया गया, जिससे किसी का जीवन बच पाया।
भगवान कृष्ण को बियर बार में बिकनी वाली लड़कियों से घिरा दिखाने के बाद असम के विवादित कलाकार अकरम हुसैन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग दोबारा से तेज हो गई है। हालाँकि, उसने अपनी घृणित सोच का पहली बार प्रदर्शन नहीं किया है।
साल 2015 में अकरम हुसैन की एक अन्य पेंटिंग चर्चा में आई थी। ये पेंटिंग तिरंगे की थी। इस पेंटिग में अकरम ने दिखाया था कि तिरंगे जैसी आकृति में से शराब की बोतलें और अंडरगार्मेंट्स निकल रहे हैं।
इस पेंटिंग के सामने आने के बाद गुवाहाटी में बहुत विवाद हुआ था। इसे एक प्रदर्शनी में लगाया था गया था, जहाँ वकील धर्मनंदा ने इसे देखकर एफआईआर दर्ज करवाई थी। उनके अलावा हिंदू संगठनों ने भी इस पर विवाद किया था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अकरम हुसैन की निंदा हुई थी। ऑल इंडिया पैट्रियाटिक फोरम की असम ब्रांच ने यह कहते हुए हुसैन की निंदा की थी कि उन्होंने कला की स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है।
फोरम ने कहा था, “तिरंगे की पेंटिंग बनाकर उसमें से प्रतीकात्मक रूप से शराब की बोतलें, अंडरगार्मेंट्स और अन्य आपत्तिजनक चीजें बाहर निकलते हुए दिखाकर हुसैन ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति, धर्म और धरोहर को कमजोर तरीके से पेश किया है। उनकी हरकत बिलकुल माफी लायक नहीं है।”
फोरम ने आगे कहा था, “प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट ट्रू नेशनल ऑनर ऐक्ट ऑफ 1971 के अंतर्गत यदि कोई भी व्यक्ति सार्वजिनक या किसी अन्य जगह पर राष्ट्रीय ध्वज के प्रति लोगों की भावना को भड़काता या अपमानित करता है तो वह सजा का हकदार होगा।”
बता दें, अकरम हुसैन द्वारा श्रीकृष्ण की पेंटिग की आलोचना भी असम सत्र महासभा में उस समय की गई थी। कुछ संस्थानों ने हुसैन के लिए कड़ी सजा की माँग की थी। हालाँकि वहीं, कुछ लोगों ने इसे कलाकार की अभिव्यक्ति कहते हुए हुसैन को बचाने का प्रयास किया था।
बता दें श्रीकृष्ण की विवादित पेंटिंग पर अंतरराष्ट्रीय संस्था इस्कॉन ने भी इस पेंटिंग पर आपत्ति जताते हुए असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल से अकरम हुसैन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। संस्था ने इस पेंटिंग को ऑफेंसिव करार देते हुए कहा कि सरकार को पेंटर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जब 2015 में इसे लेकर विवाद हुआ था तो पेंटर अकरम हुसैन ने माफ़ी माँगते हुए इस पेंटिंग को हटा लिया था।
नवीन पटनायक के बीजू जनता दल (BJD) के सांसद अनुभव मोहंती ने प्रेस रिलीज जारी कर एक मीडिया संस्थान और पत्रकारों को धमकाया है। सांसद मोहंती ने धमकी देते हुए कहा कि वो इन पत्रकारों का वही हस्र कर देंगे, जो अभिजीत अय्यर मित्रा का किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ओडिशा टेलीविजन नेटवर्क (OTN)’ हर वो गलत चीजें कर रहा है, जो मीडिया को नहीं करनी चाहिए।
BJD सांसद ने कहा कि डिजिटल माध्यमों के उद्भव के बाद फेक न्यूज़ फैलाना आसान हो गया है। उन्होंने मीडिया को सलाह देते हुए कहा कि वो पक्षपात न करे और ठीक तरीके से काम करे। अनुभव मोहंती ने दावा किया कि OTV ने काफी पहले ही पत्रकारिता के सारे मूल्यों को त्याग दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब ये चैनल भाजपा नेता विजयंत पांडा के हाथों की कठपुतली बन गया है।
अनुभव मोहंती ने मारोप लगाया कि मीडिया संस्थान सालों से उनके खिलाफ दुष्प्रचार फैला रहा है, वो भी बिना किसी सबूत के। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि अब समय या गया है जब उससे कानूनी तरीके से निपट जाए। अनुभव मोहंती ने आरोप लगाया कि चैनल अब पांडा के ‘गंदे राजनीतिक इरादों’ को पूरे करने के चक्कर में प्रोपेगेंडा चैनल बन गया है।
उन्होंने खुद के बारे में कहा कि जब एक सांसद इस कठिन समय में अपने लोगों के लिए काम करने में लगा हुआ है, ऐसे में उस पर झूठे आरोप लगाना और उनके खिलाफ दुष्प्रचार करना अफसोसजनक, खेदजनक और गैर पेशेवर है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ‘फ्री स्पीच’ के ठेकेदार इस मामले में चुप हो जाते हैं, जबकि ओडिशा के बाहर के ऐसे मामलों पर खुल कर बोलते हैं।
BJD नेता अनुभव मोहंती ने चैनल को धमकी देते हुए ये भी आरोप लगाया कि उसने अपने इस गंदे खेल में कोविड-19 वॉरियर्स को भी नहीं बख्शा और एक ऐसा वीडियो को शेयर किया, जिससे डॉक्टरों की बदनामी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कार्रवाई की जा रही है और उन पर निशाना साधने वालों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया गया है। साथ ही जेल भेजने की धमकी भी दी।
अनुभव मोहंती ने लिखा कि उनसे भिड़ने का क्या अंजाम होता है, ये जानने के लिए वो लोग अपने उस मित्र से बात करें, जो कोणार्क मंदिर गए थे। बता दें कि उनका इशारा पत्रकार और विश्लेषक अभिजीत अय्यर मित्रा की ओर था, जिन्हें ओडिशा में काफी दिनों तक जेल मे बंद कर कर रखा गया था। अपने धमकी भरे पत्र में BJD सांसद अनुभव मोहंती ने अंत में ‘जय जगन्नाथ’ भी लिखा है।
We all grow up with idols in our heart
My idol,till date is @BeingSalmanKhan As a child, once I shut myself in Pujaroom,praying to MaaDurga 2 make me looklike #SalmanKhan
When I met him in person,itwas an amazing experience
जहाँ तक अनुभव मोहंती की बात है, वो सलमान खान के बड़े फैन नजर आते हैं। वो अक्सर सोशल मीडिया पर सलमान खान की तस्वीरें डालते रहते हैं और उनसे लाइक करने की गुहार भी लगाते रहते हैं। उन्होंने एक बार लिखा था कि सलमान खान उनके आइडल हैं और उन्होंने एक बार माँ दुर्गा की कमरे में बंद होकर पूजा की थी और भगवान से माँगा था कि वो सलमान खान की तरह दिखने लगे। वो सलमान खान से मिल भी चुके हैं।
बेंगलुरु के दंगे की अगर आप पूरी डिटेल को न भी देखें कि सड़क पर कितने लोग उतरे, किसने क्या किया, तो भी समझ जाएँगे कि ये काम किसका है, किस स्टाइल में होता है और हर बार इसका स्क्रीनप्ले पूर्वनियोजित तरीके से लिखा हुआ रहता है। ये हर जगह सेम स्क्रिप्ट इस्तेमाल करते हैं, चाहे वो दिल्ली हो, यूपी हो, गुजरात हो या फिर झारखंड।
इनका स्क्रिप्ट ये है कि ये बहुत आहत होने वाले समुदाय हैं। और इनका शिकार होते हैं काफिर और स्टेट मशीनरी। जब इनकी जनसंख्या 1% होगी, ये सहिष्णु बनकर रहने का दिखावा करेंगे, मगर जैसे-जैसे ये बढ़ता है, ये अपना दायरा बढ़ाते हैं और उसमें किसी को आने की इजाजत नहीं देते। फिर ये नीचता दिखाते हुए महिलाओं से छेड़छाड़ करते हैं। 10% पर पहुँचने पर दंगा भड़काते हैं। दंगा भड़काने का इनका मकसद होता है कि हम तुम्हें बता रहे हैं कि हमारी ताकत क्या है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार (अगस्त 17, 2020) को कहा कि राज्य सरकार बेंगलुरु के केजी हल्ली, डीजी हल्ली में हुई हिंसक घटनाओं में सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन करेगी और दोषियों से ही नुकसान की लागत वसूल करेगी।
सीएम येदियुरप्पा ने ट्वीट करते हुए कहा, “हमारी सरकार ने केजी हल्ली और डीजी हल्ली में हुई हिंसक घटनाओं में सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन करने और दोषियों से लागत वसूलने का फैसला किया है। हम माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएँगे और क्लेम कमिश्नर की नियुक्ति करेंगे। गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत डीजे हल्ली और केजी हल्ली हिंसक घटनाओं के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है।”
उन्होंने आगे कहा कि मामले में विस्तृत जाँच करने के लिए एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया है। येदियुरप्पा ने ट्वीट में लिखा, “मामले की विस्तृत जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल का गठन पहले ही किया जा चुका है और तीन विशेष अभियोजकों की एक टीम नियुक्त की जाएगी। वारंट जारी होने पर एसआईटी गुंडा अधिनियम को लागू करने पर विचार करेगी।”
बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने अपने आदेश में कहा कि 18 अगस्त तक दंगा प्रभावित इलाकों में किसी भी स्थान पर दो से अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने, किसी भी तरह के हथियार ले जाने और किसी भी सार्वजनिक बैठक को आयोजित करने पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि हिंसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। एहतियात के तौर पर, शहर की पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेशों को 18 अगस्त तक बढ़ा दिया है।
कॉन्ग्रेस विधायक आर श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार पी नवीन द्वारा मोहम्मद पैगम्बर को लेकर कथित रूप से एक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर डीजे हल्ली और आसपास के इलाकों में संप्रदाय विशेष की दंगाई भीड़ द्वारा हिंसा करने में तीन लोगों की मौत हो गई था और कई वाहन जला दिए गए थे।
उल्लेखनीय है कि गत मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात पूर्वी बेंगलुरु केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर में अल्लाह-हो-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच हिंसा फैल गई। 1000 से भी अधिक की संप्रदाय विशेष की भीड़ ने अल्लाह-हो-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच पुलिस स्टेशन को जला डाला। यह दंगे पैगंबर मुहम्मद पर कथित रूप से आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट को लेकर भड़के थे।
संप्रदाय विशेष की 1000 से भी अधिक की भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। सबसे पहले तो केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के सामने एक हज़ार से ज्यादा की संख्या में संप्रदाय विशेष के लोग इकट्ठे हो गए और कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के रिश्तेदार नवीन की गिरफ्तारी की माँग करने लगे। इसके बाद उन्होंने विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी तरह विधायक के आवास के बाहर भी विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया। उनके घर के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। कई घण्टों तक आगजनी चली।
पुलिस स्टेशन के बाहर मजहबी नारेबाजी हुई, पत्थरबाजी की गई और गाड़ियों को फूँक दिया गया। पूर्वी भीमाशंकर के डीसीपी को डंडों और पत्थरों से निशाना बनाया गया। वहीं डीजे हल्ली में पुलिस की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। रात के करीब 10:30 बजे अतिरिक्त पुलिस बल की टुकड़ियाँ आईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग की। यहाँ तक कि पुलिस को थाने के भीतर घुसने के लिए भी संप्रदाय विशेष की भीड़ ने जगह नहीं दी।
उत्तराखंड के देवलसारी स्थित कोणेश्वर महादेव मंदिर बनने के पीछे की मान्यता है कि एक दिन भगवान शिव यहाँ पर घूमने आए। उन्हें यह जगह बहुत अच्छी लगी। उन्होंने साधु का वेश बनाकर ग्रामीणों से यहाँ पर बसने के लिए थोड़ी सी जगह माँगी। मगर ग्रामीणों ने यह कहकर मना कर दिया कि यहाँ पर जौ के खेत हैं। इसलिए उन्हें बसने के लिए नहीं दे सकते।
भगवान शिव ने रातोंरात सारे जौ के खेतों को देवदार में बदल दिया। इस तरह से मंदिर का निर्माण हुआ। यहाँ पर मंदिर के बाहर के दो पत्थरों की कहानी है कि यह एक शिवलिंग था। एक गौमाता यहाँ पर सुबह-शाम आकर दूध गिराकर चली जाती थी। घर पर किसान को गाय का दूध ही नहीं मिलता था। जब किसान को यह बात पता चली तो उसने हथौड़े से पत्थर पर वार किया, पत्थर का तो कुछ नहीं हुआ, हथौड़ा टूट गया। इसके बाद से मंदिर में आने वाले ग्रामीण पत्थर की भी पूजा करने लगे।