बंगलुरु में दंगे हो गए, कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे ने किसी हिन्दूघृणा से रिसते पोस्ट के नीचे कोई कमेंट किया और अल्पसंख्यक समुदाय को बुरा लग गया। जिस हिसाब से आजकल रेखाएँ क्षीण और धुँधली होती जा रही हैं, भाजपा वालों के काम भी कॉन्ग्रेस वाले करते नजर आ रहे हैं। खैर, बुरा इसलिए लगा क्योंकि बुरा लगने पर सिर्फ उनका ही हक है।
‘आहत होना’ या ‘संवेदनशील मैटर’ आदि का मसला भारतीय समाज के उन संसाधनों जैसा है जिस पर मनमोहन सिंह ने कहा था कि इस पर पहला हक अल्पसंख्यकों का ही है। हिन्दू लोग कट्टर होते हैं। अब किसी ने कृष्ण को थोड़ा सा बलात्कारी कह ही दिया तो क्या हो गया? अनभिज्ञ होगा, पढ़ता-लिखता नहीं होगा, कह दिया थोड़ा सा। अब कह ही दिया तो बात बढ़ाने की क्या जरूरत थी? क्या एक अल्पसंख्यक संविधान प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सकता?
बॉलीवुड का हिन्दूफोबिया थमता नहीं दिख रहा है। अभी महेश भट्ट की ‘सड़क-2’ को लेकर विवाद ख़त्म भी नहीं हुआ था कि प्रकाश झा अपनी नई सीरीज ‘आश्रम’ लेकर आ धमके हैं। इसमें वे एक बाबा को विलेन बना कर आस्था और अपराध के संयोग को दिखाने का दावा कर रहे हैं।
अजय देवगन को लेकर ‘अपहरण’, ‘गंगाजल’ ‘राजनीति’ और ‘सत्याग्रह’ जैसे फ़िल्में निर्देशित कर चुके प्रकाश झा इस सीरीज से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स में कदम रख रहे हैं।
इस सीरीज में मुख्य भूमिका बॉबी देओल की है, जिन्होंने एक बाबा का किरदार निभाया है। इसके ट्रेलर की शुरुआत में ही बाबा का भव्य आश्रम दिखाया जाता है, जहाँ वो कह रहा होता है, “एक रूप, महास्वरूप! मैं आप सबको मोक्ष की राह पर लेकर जाऊँगा। जापनाम! जापनाम!” इसके बाद बाबा और आश्रम की भव्यता और जनता में उनके प्रभाव को लेकर ये दिखाया जाता है कि अंधविश्वासी है।
ट्रेलर में ‘हमारे देश में जब लोग विश्वास करना शुरू करते हैं तो बाढ़ सी आ जाती है” डायलॉग के जरिए ये दिखाने की कोशिश की गई है कि हिन्दुओं में साधु-संतों के सारे शिष्य या अनुयायी मूर्ख होते हैं। बाबा को अलग-अलग तरीके से दिखाया गया है। बाबा को सिंहासन पर बैठे और लोगों को उसका पाँव छूते दिखाया गया है। एक व्यक्ति कहता है कि जब तक बाबा जैसे लोग हैं, हमारे समाज को आगे जाने से कोई नहीं रोक सकता।
इसके बाद फिर बॉलीवुड के उसी घिसे-पिटे ढर्रे पर चलते हुए कहानी में कुछ राजनेताओं की एंट्री होती है और बाबा के बारे में राजनीतिक हलकों में चर्चा होती है। साथ ही बाबा के डायलॉग ‘मैं उपदेश नहीं, सन्देश देता हूँ – शांति का‘ के जरिए उसे डरावना दिखाने का प्रयास किया गया है। इसके बाद बाबा को ‘गॉडमैन’ की जगह ‘कॉनमैन’ कह कर बताया गया है कि वो कितना बड़ा अपराधी है।
बॉबी देओल अभिनीत प्रकाश झा की सीरीज ‘आश्रम’ एमेक्स प्लेयर पर रिलीज होगी
दिलचस्प बात ये है कि बाबा को दिखाया तो गया है सूफी वाले लुक्स में लेकिन आश्रम में यज्ञाग्नि, शुद्ध हिंदी और उसके अनुयायियों को देख कर स्पष्ट पता चलता है कि ये सीरीज हिन्दुओं और हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने के लिए बनाई गई है। इसके बाद बाबा को बलात्कारी और खूनी दिखाया जाता है। 9 लड़कियाँ गायब होती हैं और बाबा को अव्वल दर्जे का व्यभिचारी दिखाया जाता है, जो बलात्कार कर के लड़कियों का खून कर देता है।
साथ ही बताया गया है कि आश्रम में आने वाली लड़कियों का बलात्कार किया जाता है और फिर मार डाला जाता है। इसके बाद ‘भक्ति और भ्रष्टाचार’ जैसे टैगलाइन्स देकर बाबा को ज्यादा से ज्यादा बुरा दिखाने की कोशिश होती है। जल अर्पण करती महिलाओं से लेकर बाबा के बोलचाल तक, स्पष्ट पता चलता है कि ये हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश है। ये सीरीज एमेक्स प्लेयर पर रिलीज होगी।
बॉलीवुड में अक्सर पंडितों और साधु-संतों को धोखेबाज और बलात्कारी दिखाया जाता रहा है, जबकि संप्रदाय विशेष के किरदारों को ईमानदार और देश के लिए मर-मिटने वाला प्रदर्शित किया जाता रहा है। इसी तरह ‘सड़क-2’ में भी महेश भट्ट एक ऐसी कहानी लेकर आ रहे हैं, जिसमें एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा और उसके काले कृत्यों का खुलासा किया जाएगा। इसमें भी एक डरावने बाबा को विलेन दिखाया गया है। फ़िलहाल इसका ट्रेलर यूट्यूब पर डिसलाइक का रिकॉर्ड बना रहा है।
ZEE5 (जी-5) ने वेब सीरीज ‘अभय 2’ में भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के क्रांतिकारी खुदीराम बोस को क्रिमिनल और आतंकवादी दिखने पर माफ़ी माँगी है। ZEE5 ने इस सीन को लेकर माफ़ी माँगते हुए स्पष्टीकरण में कहा है कि इस सीन को अब ब्लर (धुँधला) कर दिया गया है। चैनल और सीरीज के डायरेक्टर केन घोष की ओर से माफी माँगी जा चुकी है और इस सीन को ब्लर करने के बाद फिर से जारी किया जाएगा।
दरअसल, कुणाल खेमू स्टारर वेब सीरीज ‘अभय’ के दूसरे सीजन के एक सीन को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। लोगों की आपत्ति ‘अभय 2’ के एक सीन में क्रिमिनल बोर्ड पर स्वतन्त्रता सेनानी खुदीराम बोस की फोटो को लेकर थी। शो के दूसरे एपिसोड में, बोस की एक तस्वीर को गलत तरीके से एक आपराधिक बोर्ड पर इस्तेमाल किया गया था, जिस पर दर्शकों ने आपत्ति जाहिर की।
ट्विटर पर लोगों ने जी-5 से इस सीन के बैकग्राउंड में स्वतन्त्रता संग्राम के बलिदानी खुदीराम बोस की तस्वीर वाले सीन को पूरी तरह से हटाने और जी-5 चैनल से माफी माँगने की माँग की थी। खुदीराम बोस की तस्वीर को अपराधियों के साथ दिखाने से नाराज ट्विटर यूजर्स ने जी-5 के बायकॉट करने की भी बात रखी और यह ट्रेंड ट्विटर पर जोर पकड़ने लगा।
The producers, show & the platform, have no intent whatsoever to offend any community or hurt anybody’s sentiments. Keeping in mind the feedback received and with utmost respect to our audience, we have blurred the image (inadvertently) used in one of the scenes of Abhay2
इसके स्पष्टीकरण में जी-5 ने सोमवार (अगस्त 17, 2020) को ट्वीट करते हुए लिखा, “निर्माता, शो और प्लेटफ़ॉर्म, किसी भी समुदाय को अपमानित करने या उनकी भावनाओं को आहत करने का कोई इरादा नहीं रखते हैं। दर्शकों से मिली प्रतिक्रिया और सम्मान को ध्यान में रखते हुए, हमने अभय-2 के एक दृश्य में भूलवश इस्तेमाल किए गए चित्र को धुँधला कर दिया है। हम इसके लिए क्षमा चाहते हैं।”
The episode will be available soon. We unconditionally apologize for this error.
उल्लेखनीय है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल में आठवीं कक्षा की पुस्तक में स्वतन्त्रता सेनानी खुदीराम बोस को आतंकी बताया गया था। बोस ने 1908 में भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों पर कठोर शासन के लिए कुख्यात ब्रिटिश न्यायाधीश मैजिस्ट्रेट डगलस किंग्सफोर्ड की हत्या करने की कोशिश की थी। उन्हें असफल प्रयास के बाद 18 वर्ष की आयु में मौत की सजा सुनाई गई थी और उनकी किशोरावस्था में शहीद हो गए थे। बोस देश के सबसे कम उम्र के स्वतंत्रता सेनानियों में से एक रहे हैं।
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में जन्मे बोस को उन्हीं के राज्य में ‘आतंकी’ बता दिया गया। सोशल मीडिया पर पुस्तक के उस भाग की तस्वीरें वायरल हो गईं, जिसके बाद लोगों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाने पर लिया। राज्य में लापरवाह शिक्षा विभाग ने अमर क्रांतिकारी को आतंकी बता दिया गया था।
इन दिनों लिबरल गिरोह ट्विटर पर फेसबुक डिलीट करने का कैंपेन चला रहे हैं। ऐसा वो इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इनके हिसाब से फेसबुक, भाजपा और मोदी समर्थक है। हालाँकि ये इनकी नौटंकी से ज्यादा कुछ नहीं है, क्योंकि इस दुनिया में ऐसा होना संभव नहीं है। लिबरलों ने फेसबुक अकाउंट इसलिए बंद नहीं किया कि बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ ने दलित कॉन्ग्रेस विधायक के घर तोड़-फोड़ की और सामान लूटे।
दंगाइयों ने 250 गाड़ियाँ फूँक दीं और लगभग 60 पुलिसकर्मी घायल हुए। इन सबके पीछे की वजह पैगंबर मोहम्मद के संबंध में कथित फेसबुक टिप्पणी रही। लिबरलों ने अपना फेसबुक अकाउंट इसलिए बंद किया, क्योंकि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि फेसबुक के एक (बेनाम) शीर्ष अधिकारी ने कहा कि एंटी मुस्लिम (मुस्लिम विरोधी) पोस्ट को ‘हेट स्पीच’ के दायरे में नहीं रखा जाएगा।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने 4 अगस्त 2020 को एक खबर प्रकाशित की। इसमें दावा किया गया था कि भारतीय रेलवे की एक भर्ती में स्थानीय तमिलों पर उत्तर भारतीयों को प्राथमिकता दी गई।
रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया था कि भर्ती से जुड़े कागज़ात सत्यापन कराने के लिए तमाम उत्तर भारतीय हवाई जहाज़ से आए। तमिलनाडु के त्रिचि में हुई इस भर्ती में शामिल होने से पहले उन्होंने कोविड 19 की जाँच भी नहीं करवाई। फिर उन्होंने खुद को ‘सेल्फ आइसोलेट’ कर लिया। दक्षिण रेलवे ने रिपोर्ट में किए गए सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक़ पॉनमलाई वर्कशॉप में तकनीकी सहायक (ग्रेड 3) के 581 पद निकाले गए थे। इतने पदों में सिर्फ 12 पदों पर स्थानीय यानी तमिलनाडु के लोगों की भर्ती हुई थी। इसके अलावा 163 पदों पर बिहार के लोग और 115 पदों पर राजस्थान के लोगों की भर्ती हुई थी।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ नए प्रशिक्षुओं ने आरोप लगाया था कि रेलवे भर्ती में भ्रष्टाचार किया जा रहा है। भर्तियों में उत्तर भारतीयों को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशिक्षुओं ने यह सवाल किया था कि महामारी के दौर में उत्तर भारतीयों को कैसे बुलाया गया।
रिपोर्ट में एक पूर्व प्रशिक्षु का बयान भी दर्ज किया गया था। इसके मुताबिक़ तमिलनाडु के स्थानीय लोग जिनकी भर्ती साल 2008 में हुई थी, वह अभी तक स्थायी नौकरी की राह देख रहे हैं। रेलवे उनके बारे में न सोच कर उत्तर भारतीयों को पहले नौकरी पर रख रहा है। इसके अलावा रिपोर्ट में पूर्व प्रशिक्षु ने यह भी पूछा है कि क्या दस्तावेज़ का सत्यापन कराने से पहले लोगों ने दिशा-निर्देशों का पालन किया था।
इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के ठीक 2 हफ़्ते के बाद भारतीय रेलवे ने जवाब दिया है। भारतीय रेलवे ने रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
दक्षिण भारतीय रेलवे ने जवाब में कहा है भारत में कुल 21 रेलवे भर्ती बोर्ड हैं। सारे ही भर्ती बोर्ड आवेदन के लिए एक ही अधिसूचना जारी करते हैं। अधिसूचना में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि किस क्षेत्र या इकाई में कितनी भर्तियाँ होनी हैं। इसका ब्यौरा रेलवे भर्ती बोर्ड की वेबसाइट पर भी दिया जाता है। इसका यह मतलब हुआ कि देश के कोई भी नागरिक किसी भी रेलवे भर्ती बोर्ड में आवेदन कर सकता है। आवेदन के वक्त उन्हें किसी एक बोर्ड का चुनाव करना होता है। इसके बाद उनके चुनाव के आधार पर उन्हें एक ज़ोन में नियुक्त किया जाता है। एक बार बोर्ड का चुनाव करने के बाद इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता है।
इसके बाद आरोप का ज़िक्र करते हुए बोर्ड ने कहा जितने लोगों का चयन हुआ है उसमें से 17 फ़ीसदी तमिलनाडु के थे। यह भर्तियाँ कुल दो पदों के लिए हुई थीं, पहला सहायक लोको पायलट और दूसरा तकनीकी सहायक। सहायक लोको पायलट के पद पर लगभग 53 फ़ीसदी तमिलनाडु के लोगों की भर्ती हुई है। इसके बाद बोर्ड ने अपने बयान में कहा कि तकनीकी सहायक के पदों पर तमिलनाडु के स्थानीय लोगों की भर्ती इसलिए कम हुई है, क्योंकि यहाँ के लोगों की योग्यता उसके हिसाब से कहीं ज़्यादा थी। इस पद के लिए व्यक्ति के पास आईटीआई की डिग्री होनी चाहिए। इंजीनियरिंग की डिग्री और डिप्लोमा वालों को इसके लिए नहीं चुना जा सकता है।
वहीं दूसरी तरफ सहायक लोको पायलट के लिए इंजीनियरिंग की डिग्री अनिवार्य होती है। इसलिए इस पद पर तमिलनाडु के लोगों की भर्ती ज़्यादा संख्या में हुई है। इसके अलावा बोर्ड ने उन दावों को खारिज किया है जो कोरोना महामारी के दौर में दस्तावेज़ सत्यापन के लिए दूसरे राज्य से आए लोगों पर लगाए गए थे। बोर्ड ने कहा आवेदन करने वालों को 4 अगस्त को बुलाया गया था। उन्हें इसकी जानकारी बहुत पहले ही दे दी गई थी। इसके अलावा उन सभी लोगों ने 14 दिन की आइसोलेशन अवधि भी पूरी की। इसके बाद दिशा-निर्देशों के आधार पर उनकी जाँच भी की गई। उनकी जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
अंत में बोर्ड ने यह भी साफ़ किया कि रेलवे भर्ती सेल में लगभग 20 फ़ीसदी पद चिन्हित किए ही जाते हैं। इसके तहत जितने भी लोगों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है वह आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड के मुताबिक़ रिपोर्ट में जितने भी आरोप लगाए गए हैं उनमें कोई सच्चाई नहीं है। बोर्ड जितनी भी परीक्षाएँ करवाता है वह पारदर्शी प्रणाली के तहत होता है। आवेदन करने वालों के पास कोई भी बोर्ड चुनने का अधिकार होता है, इसमें किसी भी तरह की पाबंदी नहीं होती है। हर व्यक्ति का चुनाव तय मानदंडों और उसकी योग्यता के आधार पर ही किया जाता है। दक्षिण रेलवे ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस से इस मामले से जुड़े सही तथ्य प्रकाशित करने को भी कहा है।
पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में रविवार (अगस्त 16, 2020) को पारिवारिक झगड़े के बाद एक महिला ने अपने 45 वर्षीय शौहर पर चाकू से हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। महिला ने पहले मछली काटने वाले चाकू से पति के सिर पर वार किया और फिर उसका गुप्तांग काट दिया।
पुलिस ने बताया कि घटना पंचाला थाना अंतर्गत जुजारसाहार गाँव के मालिपुकुर में हुई। सूचना मिलने पर मोहसिन मलिक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया और बीवी मनिरा को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके साथ ही घटना को अंजाम देने के लिए प्रयोग किया गया हथियार भी बरामद कर लिया गया है।
West Bengal: 45-year-old man dies in Howrah as wife hits on head, chops off genitals over family fight https://t.co/mpTinb8WN4
पुलिस ने बताया कि महिला दिमागी रूप से विकलांग है और ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि पारिवारिक झगड़े के कारण इस घटना को अंजाम दिया गया। दंपत्ति के दो बेटे भी हैं। इनमें से एक ने पुलिस को बताया कि जब वह सुबह उठे कि तो उनकी माँ ने उनसे कहा कि वह बेडरूम में जाकर देखें कि उसने उनके पिता के साथ क्या किया।
माँ की बात सुनकर बच्चे भागते हुए कमरे में गए तो उन्होंने अपने अब्बा को बहुत सारे खून के बीच एक कंबल में लिपटा हुआ जमीन पर पाया।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि महिला बहुत समय से दवाई पर चल रही है और दोनों पति-पत्नी के बीच झगड़ा होता रहता था। अब पुलिस इस मामले में आगे की पड़ताल कर रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले एक ऐसी ही खबर झारखंड से भी आई थी। वहाँ 55 वर्षीय पत्नी ने गुस्से में आकर अपने 60 वर्षीय पति का गुप्तांग धारधार हथियार से काटकर जख्मी कर दिया था। जख्मी शहाबुद्दीन ने इसके बाद सीधा लहूलुहान अवस्था में बलियापुर थाने में जाकर अपनी पत्नी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया था और पुलिस ही उसे स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुँची थी।
इसके अलावा पाकिस्तान के फैसलबाद से भी इसी वर्ष एक ऐसा मामला आया था जब एक महिला ने एक युवक के निकाह से एक दिन पहले उसका गुप्तांग काट दिया। महिला ने इस घटना के बाद युवक पर आरोप लगाया कि वह उसके घर बिना किसी कारण आया और अकेला पाकर उसके साथ जबरदस्ती की। इसके बाद महिला भागकर रसोई में गई और चाकू लेकर आई। जैसे ही युवक ने दोबारा उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की उसने उसका गुप्तांग काट दिया।
फेसबुक इंडिया की पॉलिसी डायरेक्टर आँखी दास ने दिल्ली पुलिस की साइबर सेल से शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया के जरिए उन्हें जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही है। ज्ञात हो कि आँखी दास को ये धमकियाँ कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और नेता राहुल गाँधी द्वारा फेसबुक पर भाजपा का पक्ष लेने के आरोप लगाने के बाद मिल रही है।
इंडिया टुडे की पत्रकार ऐश्वर्या पालीवाल द्वारा शेयर की गई जानकारी के अनुसार, आँखी दास ने एक शिकायत दर्ज की और दिल्ली पुलिस से धारा 354A, 499, 500, 506, 507, और 509 के अलावा, उनकी जान और शरीर से सम्बन्धित, लैंगिक टिप्पणी करने और उन्हें बदनाम करने को लेकर IPC की अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है।
#Facebook Complaint filed by Ankhi Das (Director Public Policy, Facebook) She has lodged a complaint against people who have been threatening her. pic.twitter.com/b4Hu07S3LY
आँखी दास ने फेसबुक और ट्विटर पर कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले और अरशद खान (राष्ट्रीय समन्वयक, सोशल मीडिया, एनएसयूआई) सहित कई यूजर्स का नाम लिया है। उन्होंने कहा कि वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा प्रकाशित लेख में लगे आरोपों के बाद उन पर हमले हुए हैं।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने विदेशी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेख का हवाला देते हुए रविवार (अगस्त 16, 2020) को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को पर भारत में फेसबुक (Facebook) और व्हॉट्सएप (Whatsapp) पर नियंत्रण या कब्जा करने का आरोप लगाया था। लेख में फेसबुक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए थे।
BJP & RSS control Facebook & Whatsapp in India.
They spread fake news and hatred through it and use it to influence the electorate.
इसके साथ ही ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के हवाले से कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि भारत में फेसबुक की प्रमुख आँखी दास ने भाजपा नेताओं के नफरत फैलाने वाले भाषण और पोस्ट पर कार्रवाई में रुकावट डाली थी। कॉन्ग्रेस ने कहा कि फेसबुक इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर आँखी दास ने दलील दी कि बीजेपी नेताओं पर कार्रवाई करने से फेसबुक के व्यापारिक हित प्रभावित होंगे।
कॉन्ग्रेस ने यह भी दावा किया कि आँखी दास की नज़दीकी रिश्तेदार रश्मि दास जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एबीवीपी की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के लेख में कहा गया है कि फेसबुक ने बीजेपी को लेकर व्यापक पैमाने पर अनुचित तरजीही दी है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने दावा किया है कि भारत में फेसबुक ने भाजपा नेताओं के ‘हेट स्पीच’ वाली पोस्ट्स के खिलाफ जान-बूझकर कोई एक्शन नहीं लिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में फेसबुक की टॉप पब्लिक पॉलिसी एग्जीक्यूटिव आँखी दास ने भाजपा से जुड़े ग्रुप्स और कम से कम 4 लोगों पर हेट स्पीच रूल्स लागू करने का विरोध किया था और यह उस विस्तृत योजना का हिस्सा था, जिसके तहत फेसबुक ने भाजपा और ‘कट्टरपंथी हिंदुओं को फेवर’ किया।
अभिनेता आमिर खान आजकल अपने तुर्की दौरे को लेकर चर्चे में हैं। भारत विरोध का गढ़ बन रहे तुर्की में वे अपनी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग कर रहे हैं। तुर्की की प्रथम महिला एमिनी एर्दोगन से उन्होंने मुलाकात भी की है। सोशल मीडिया में यूजर्स उनकी इस पहले से नाराज हैं।
इस बीच आमिर खान को लेकर तरह-तरह के दावे शेयर हो रहे हैं। ये दावा भी शेयर हो रहा है कि एक इंटरव्यू में आमिर खान ने कहा था कि भले ही उनकी पत्नी हिन्दू हों, लेकिन उनके बच्चे हमेशा इस्लाम को ही अपनाएँगे।
अभिजीत अय्यर मित्रा ने ट्विटर पर लिखा कि आमिर खान ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करने से तो इनकार कर दिया था, लेकिन वो ऐसे आदमी के साथ मस्ती कर रहे हैं जो ISIS और अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों का समर्थन करता है।
‘द सियासत डेली’ में आमिर खान के हवाले से प्रकाशित खबर
इस पर रिप्लाई करते हुए एक ट्विटर यूजर ने आमिर खान से जुड़े कई स्क्रीनशॉट्स शेयर किए। उसने दावा किया है कि आमिर खान एकदम पक्के संप्रदाय विशेष वाले हैं, जिनकी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जाँच की जानी चाहिए क्योंकि क्योंकि चीन में ‘दंगल’ की बड़ी सफलता शक का विषय है। साथ ही उन पर भगवान शिव का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि तुर्की हमारे खिलाफ जिहाद कर रहा है और मोदी सरकार आमिर खान का समर्थन करती है।
अपने दावे के समर्थन में उसने उस खबर को शेयर किया, जिसमें आमिर खान ने पीएम मोदी द्वारा आह्वान किए गए ‘जनता कर्फ्यू’ का समर्थन करते हुए लोगों को कोरोना से बचने के लिए अपने घर में ही रहने की सलाह दी थी। साथ ही आमिर खान की हज यात्रा पर जाते हुए फ़ोटो भी शेयर की और तुर्की से जुड़ी ऑपइंडिया की खबर का स्क्रीनशॉट डाला, जिसमें बताया गया है कि कैसे वहाँ भारत-विरोधी अभियान चलाया जा रहा है।
Aamir Khan is a devout Muslim
He should be probed by ED for inexplicable success of Dangal in China
He said that his kids from Hindu wives will be raised as Muslims
लेकिन, सबसे चौंकाने वाला दावा है आमिर खान द्वारा ये कहना कि उनके बच्चे उनकी तरह इस्लाम का ही अनुसरण करेंगे, भले ही उनकी पत्नी हिन्दू हैं। बता दें कि ये दावे अक्सर शेयर होते रहे हैं। हमने इस बारे में पड़ताल की तो जो भी पाया, वो हम आपके समक्ष रख रहे हैं। ये दावा कहाँ से आया और यह कितना सत्य है, ये आपको जानने की जरूरत है। हमने पाया,
अक्सर ये दावा शेयर होता है कि आमिर खान एक कट्टर परिवार (संप्रदाय विशेष) से आते हैं और इसीलिए उनके बच्चे भी इस्लाम का ही अनुसरण करेंगे। कहा जाता है कि माँ भले ही हिन्दू हैं, लेकिन आमिर खान के बच्चे इस्लाम ही अपनाएँगे हैं।
अभी जब तुर्की में आमिर खान अपनी फिल्म की शूटिंग कर के वहाँ के पर्यटन उद्योग को सुधार रहे हैं और वहाँ के नेताओं से मिल रहे हैं, ये दावा फिर शेयर हो रहा है क्योंकि तुर्की के भारत-विरोधी हब होने के कारण आमिर खान आलोचना का शिकार हुए हैं।
जब हमने आमिर खान के बच्चों वाले दावे को इंटरनेट पर खँगाला तो पाया कि अधिकतर लोगों ने ‘संता बंता’ नाम की वेबसाइट के हवाले से इस खबर को चलाया है, जो अब डिलीट हो गया है।
हालाँकि, संप्रदाय विशेष के पब्लिकेशन के रूप में जाने जाने वाले ‘द सियासत डेली’ नामक वेबसाइट पर ये खबर अभी भी मौजूद है। इस मीडिया संस्थान की खबर कॉन्ग्रेस पार्टी से लेकर कई बड़े पत्रकार तक शेयर करते रहे हैं। उसने खबरिया अजेंसियों के हवाले से इस खबर को प्रकाशित किया है।
कुल मिला कर देखें तो इंटरनेट पर कई जगहों पर ये दावा उपलब्ध है और इसके कुछ स्रोत भी हैं लेकिन ‘संता बंता’ और ‘द सियासत डेली’ ही इन सबमें से जाने-पहचाने नाम हैं। यहीं दो जगहों पर ये खबर प्रमुख रूप से आई है।
हालाँकि, ये इंटरव्यू फेक है या नहीं इस बारे में हम फिलहाल कुछ कह सकने की स्थिति में इसीलिए नहीं हैं क्योंकि दो स्रोतों में से एक ने इसे डिलीट कर दिया है जबकि एक ने रखा हुआ है। हालाँकि, ‘संता बंता’ के आर्काइव पर ये उपलब्ध है।
आमिर खान ने पीके फिल्म की रिलीज के दौरान एक पाकिस्तान वेबसाइट को कानूनी नोटिस भेजी थी। आरोप लगा था कि उसने फेक न्यूज शेयर किया। इसीलिए फेक इंटरव्यूज के मामले अक्सर आते रहे हैं।
हालाँकि, इस दावे को लेकर आमिर खान ने कोई लीगल नोटिस अगर भेजा होता तो ये मीडिया में जरूर होता, इसीलिए ऐसा प्रतीत होता है कि आमिर ने इस इंटरव्यू को लेकर न तो कोई कानूनी कार्रवाई की है और न ही इसका खंडन किया है।
अगर ये खबर झूठी है और ये इंटरव्यू फेक है तो आमिर खान को खुले में आकर न सिर्फ इसका खंडन करना चाहिए बल्कि ‘द सियासत डेली’ को कानूनी नोटिस भी भेजना चाहिए, वरना ये खबरें चलती ही रहेगी और इन दावों को लेकर उनकी आलोचना होती ही रहेगी।
‘संता बंता’ की आर्काइव पर आमिर खान का इंटरव्यू
यहाँ गालीबाज पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी की चर्चा करना आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस का इंटरव्यू लेने का दावा किया था, जो फेक निकला। आरोप है कि उन्होंने 2001 में रक्षा मंत्री रहे जॉर्ज फर्नांडिस का फेक इंटरव्यू ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में प्रकाशित कर दिया था। जैसे ही जॉर्ज को इसका पता चला, उन्होंने कॉन्ग्रेस से जुड़े परिवार से आने वाली HT मीडिया की चेयरमैन शोभना भरतिया को फोन कर के कहा कि उन्होंने स्वाति नामक किसी पत्रकार को इंटरव्यू दिया ही नहीं है।
दावा किया जाता है कि जब इसकी जाँच हुई तो स्वाति की पोल खुल गई और उन्हें HT मीडिया से निकाल बाहर किया गया था। इसके बाद भी वो यदा-कदा उस फेक इंटरव्यू के अंश शेयर करती रहती हैं कि जॉर्ज फर्नांडिस गुजरात में सेना भेजना चाहते थे और वो काफी गुस्से में थे। इसी तरह आमिर खान को सामने आकर ये कहना चाहिए कि ये इंटरव्यू फेक है और वो इसमें लिखी बातों का खंडन करते हैं।
ज्ञात हो कि भारत के खिलाफ जहर उगलने और इस्लाम मानने वालों का मसीहा बनने की कोशिश में लगे तुर्की की प्रथम महिला एमीन एर्दोगन से बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने शनिवार (अगस्त 15, 2020) को मुलाकात की थी। इस्तांबुल के ह्यूबर मेंशन के राष्ट्रपति निवास में यह मुलाकात हुई। आमिर खान ने मुलाकात का अनुरोध किया था। वे वाटर फाउंडेशन के काम के बारे में एर्दोगन को जानकारी देना चाहते थे।
पिछले दिनों खबर आई थी कि आमिर खान अपनी अगली फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग के लिए तुर्की गए हैं। तुर्की की मीडिया का कहना है कि आमिर खान वहाँ की तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, सिनेमा के लिए एडवांस फ़ैसिलिटी और वर्कफोर्स कैपेसिटी से खुश हैं। इससे पहले उन्होंने वहाँ के दौरों मे इन चीजों को देखा था। तुर्की का पर्यटन मंत्रालय उनकी सहायता कर रहा है। भारत में कोरोना के कारण वो शूटिंग के लिए तुर्की गए।
लिबरल गिरोह के आरोपों को खारिज करते हुए फेसबुक ने साफ किया है कि वह भाजपा समर्थक नहीं है। फेसबुक का दावा है कि वो बिना किसी पार्टी से संबंद्धता रखते हुए केवल हेट स्पीच और ऐसी सामग्री को प्रतिबंधित करती है, जो हिंसा भड़काती हो।
फेकबुक प्रवक्ता ने ANI को बताया, “हम घृणा फैलाने वाले भाषण और सामग्री पर प्रतिबंध लगाते हैं, जो हिंसा को उकसाता है और हम किसी राजनीतिक स्थिति/पार्टी की संबद्धता के बिना इन नीतियों को विश्व स्तर पर लागू करते हैं। निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी प्रक्रिया का नियमित ऑडिट करते हैं।”
We prohibit hate speech&content that incites violence&we enforce these policies globally without regard to anyone’s political position/party affiliation. We’re making progress on enforcement&conduct regular audits of our process to ensure fairness&accuracy: Facebook spokesperson pic.twitter.com/8zHJhZuXXJ
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में विपक्षी पार्टियों ने और उनके समर्थकों ने फेसबुक पर आरोप मढ़ा था कि वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों द्वारा दी गई हेट स्पीच को इग्नोर करते हैं। इसी आरोप को खारिज करते हुए फेसबुक ने कहा है कि वह किसी पार्टी या पद का समर्थन नहीं करते। वह अपनी नीतियों को वैश्विक स्तर पर लागू करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके राजनीतिक जुड़ाव के बावजूद वह अभद्र भाषा का प्रयोग करने के लिए सभी को दंडित करते हैं।
यहाँ बता दें कि ये पूरा विवाद वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट से शुरू हुआ था। जिसमें भाजपा विधायक टी राजा सिंह को भी निशाने पर लिया गया था, जिन्होंने रोहिंग्या और संप्रदाय विशेष पर पोस्ट किया था। वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में इसका ज़िक्र था।
साथ ही यह भी कहा गया था कि फेकबुक की उच्च अधिकारी अंखी दास ने टी राजा के संप्रदाय विशेष विरोधी पोस्ट हेट स्पीच के दायरे में रखने का विरोध किया। क्योंकि ऐसा करने से भारत में फेसबुक का व्यावसायिक प्रभाव कम होगा। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसा सिर्फ टी राजा ही नहीं बल्कि 3 और हिंदूवादी नेताओं के मामले में किया गया है। उनके भड़काऊ भाषणों को हेट स्पीच के दायरे में नहीं रखा गया है।
एक ओर भारत में 15 अगस्त के दिन 74वें स्वतंत्रता दिवस की खुशियाँ मनाई जा रही थीं। वहीं, दूसरी ओर पाकिस्तान में हिंदुओं के धर्म परिवर्तन का सिलसिला जारी था। स्वतंत्रता दिवस के दिन हुई ये घटना किसी एक परिवार की आपबीती नहीं है। इस दिन पूरे 204 अल्पसंख्यक हिंदुओं का पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन करवाया गया।
पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, धर्म परिवर्तन करने वाले अधिकांश हिंदू भील समाज के थे। इनमें से कुछ अभी हाल में धार्मिक वीजा से हिंदुस्तान से लौटे थे। रिपोर्ट बताती है कि 194 हिंदू सादिकाबाद में रहने वाले हैं जबकि 10 (एक ही परिवार के) रहिमयारखान के निवासी हैं। इस धर्मपरिवर्तन की सूचना जोधपुर में रहने वाले लोक संगठन के प्रेमचंद भील ने दी है। वह लगातार हिंदुओं के संपर्क में हैं और उनके साथ ज्यादतियों को साझा करते रहते हैं।
इसी प्रकार सीमांत लोक संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढ़ा का कहना है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता है। ऐसे में वहाँ के अल्पसंख्यक भारत आते हैं। लेकिन यहाँ भी तीन स्तर के अधिकारियों का जाल है और दलाल भी काफी सक्रिय हैं। यहाँ उन्हें सुकून नहीं मिलता। तो वापस जाकर धर्म परिवर्तन का ही रास्ता उनके पास रह जाता है।
गौरतलब है कि जोधपुर में हुआ 11 पाकिस्तानी हिंदुओं के शव वाला मामला पाकिस्तान में काफी चर्चा में है। ऐसे में वहाँ के सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर उस खबर को प्रमुखता से चलाया जा रहा है और अल्पसंख्यकों में भारत के ख़िलाफ़ डर भरने की कोशिश भी हो रही है।
पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन भी इस संबंध में एक खबर को शेयर करते हुए लिखते हैं, “स्वतंत्रता दिवस पर पाकिस्तान में एक और तोहफा। हिंदू भील समुदाय के दस सदस्यों ने रहिमयरखां में इस्लाम कबूल कर लिया। यही एक जगह थी जगहाँ हिंदुओं की बड़ी आबादी मौजूद थी। अब 35 जिलों में हिंदुओं को ढूँढ पाना लगभग मुश्किल है। वे वाकई खत्म हो चुके हैं।”
Another gift of Indipendance day in Pakistan. 10 Members of Hindu Bheel community converted to Islam in Rahimyar Khan,Punjab. This is the only District in Punjab where Hindu, sizeable population exist. Its hard to find a Hindu in all other 35 Districts.They are litterly vanished pic.twitter.com/U3yyNpI6Ja
वे अपने अगले ट्वीट में लिखते हैं, “हिंदुओं के साथ बुद्ध, पारसी, केलाश और अन्य धर्म पाकिस्तान से गायब हो रहे हैं। यहाँ धर्म परिवर्तन ही जीने का मात्र तरीका है। ऐसा ही अफगानिस्तान, इरान और इराक जैसा अनेक महान सभ्यताओं में भी हुआ था। वहाँ भी अन्य धर्मों का सफाया हुआ। धर्म परिवर्तन करवा के या मारकर।”
Hindus, along with Buddhists, Parsis, Kelash and other religions are litterly vanished from Pakistan. Conversion is the only option here to servive. Same was happened with Afghanistan, Iran, Iraq and various other great civilizations. All religions are wiped out, convert or die.