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शिव मंदिर में लाउडस्पीकर बैन, मजिस्ट्रेट ने ऑर्डर देकर कहा – ‘इसे बजाने से कोरोना फैलेगा’

गुजरात के भुज क्षेत्र के मजिस्ट्रेट ने सावन के पवित्र महीने में शिव मंदिरों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति देने से मना कर दिया है। मजिस्ट्रेट ने अपना फैसला कोरोना वायरस का हवाला देते हुए सुनाया। उन्होंने कहा है कि लाउडस्पीकर से वायरस तितर-बितर हो जाएगा और ज्यादा जगहों पर फैलेगा।

मजिस्ट्रेट के इस आदेश में लिखा है कि भुज में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा है। इसलिए लाउडस्पीकर चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है क्योंकि माइक्रोफोन से निकलने वाली ध्वनि तरंगे संक्रमण को फैला सकती हैं।

गौरतलब है कि सावन महीने की शुरुआत में शिवमंदिर के प्रतिनिधियों ने भुज प्रशासन को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने 20 जुलाई से लेकर 20 अगस्त के बीच में सुबह 8 से दोपहर 1 बजे और रात 8 बजे से 10 बजे तक लाउडस्पीकर चलाने की अनुमति माँगी थी। लेकिन अनुमति देने की जगह मजिस्ट्रेट की ओर से ऐसा अजीबोगरीब बहाना लिखित तौर पर आया।

यहाँ बता दें कि हिंदू धर्म में सावन महीने को बेहद पावन माना जाता है। इस महीने में श्रद्धालु भगवान शिव को आराध्य मानकर अपनी पूजा अर्चना करते हैं। इस महीने में शिवभक्त व्रत रखते हैं।

इसके अलावा इस माह में हरिद्वार और गंगोत्री में स्नान की भी एक पुरानी परंपरा है, जिसे पिछले कई दशकों से लोग निभाते हुए आ रहे हैं। शिवभक्तों के लिए इस दौरान जगह-जगह विशेष इंतजाम होता है। काँवड़ ले जाते हुए वह इन जगहों पर विश्राम करते हैं।

मगर, इस साल कोरोना वायरस के कारण ये सब सावन महीने में संभव नहीं हो पाया। जिसके कारण लोगों अपने इलाकों में स्थित मंदिरों में ही इस महीने को पर्व की तरह मना रहे हैं।

ईद पर बदले की कमस खाने वाले शाह फैसल ने कहा- ‘मैं देशद्रोही नहीं, जो गलतियाँ हुईं, सुधारना चाहता हूँ’

जम्मू कश्मीर के पूर्व IAS अधिकारी शाह फैसल ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीति में शामिल होने का फैसला लिया था लेकिन अब उनका राजनीति से मोहभंग हो गया है। उन्होंने ‘जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट’ से नाता तोड़ लिया है। शाह फैसल ने कहा कि जम्मू कश्मीर की राजनीतिक वास्तविकता अब पूरी तरह बदल गई है और वो राज्य के लोगों को कल्पनायुक्त और अव्यावहारिक सपने नहीं दिखाना चाहते।

शाह फैसल ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को कहा कि जब उनके पास उन सपनों को पूरा करने के लिए कोई ताकत ही नहीं है तो फिर उनका राजनीति में रहने से क्या फायदा। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनके बारे में एक धारणा बना दी गई है कि वो देशद्रोही हैं। पूर्व IAS अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में उनके समस्यात्मक बयानों के कारण उनके देशविरोधी होने की बात कही गई।

उन्होंने कहा कि पिछले एक सालों में उन्होंने अपने बयानों से कई ऐसे लोगों को दुःख पहुँचाया है, जो उनके लिए अपने मन में सकारात्मक सोच रखते थे। शाह फैसल ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों को नाराज़ किया है। उन्होंने कहा कि अब उनसे जो भी गलतियाँ हुई हैं, उन्हें वो सुधारना चाहते हैं। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि राजनीति में लोगों को वास्तविकता का भान कराना खासा मुश्किल कार्य है।

शाह फैसल ने कहा कि वो जम्मू कश्मीर को सुनहरे सपने दिखा कर उन्हें बाद में निराश नहीं करना चाहते। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो फिर से IAS ज्वाइन करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि उनके आगे एक पूरी ज़िंदगी पड़ी हुई है और वो कुछ प्रोडक्टिव करना चाहते हैं, वो आगे बढ़ना चाहते हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके लिए क्या है और वो कहाँ जाएँगे, कुछ भी निश्चित नहीं है।

शाह फैसल ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और रोजगार उत्पन्न करने से जुड़े क्षेत्रों में उनकी रुचि है और वो इन्हीं क्षेत्रों में योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो अब काफी साफ़-सफाई से कुछ शुरू करना चाहते हैं क्योंकि जम्मू कश्मीर के लिए उनके पास कुछ सपने हैं। उन्होंने अपनी हिरासत अवधि में हुए अनुभवों के बारे में भी कहा। शाह फैसल ने इस बारे में बात करते हुए ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा:

“हिरासत में मैं जब तक रहा, वो मेरे लिए अनगिनत चीजें सीखने का एक अनुभव साबित हुआ। मुझे इस वास्तविकता का भान हुआ कि सब सब कुछ ख़त्म हो जाता है तो आप अंत में अकेले ही बचते हैं। इन सबमें सबसे ज्यादा आपका परिवार कष्ट उठाता है और आप जिसके लिए संघर्ष कर रहे हैं, वही लोग आपकी विपत्ति में अपना मजा ढूँढ लेते हैं। हिरासत ने मुझे बताया है कि मैं कहीं और से सम्बन्ध रखता हूँ। मैं उनके लिए अपनी ज़िंदगी को बर्बाद नहीं कर सकता, जो मेरी विपत्ति पर रो तक नहीं सकते।”

शाह फैसल ने ये भी कहा कि उन्होंने पिछले एक साल से कोई बयान नहीं दिया है। एक साल से वो चुप हैं, उन्होंने समय लिया, फिर भी राजनीति छोड़ने को उनका उतावलेपन में लिया गया निर्णय बताया गया। 2009 में UPSC की परीक्षा में पूरे देश में पहला स्थान पाने वाले पहले कश्मीरी फैसल ने कहा कि उनके लिए जम्मू कश्मीर की मेनस्ट्रीम राजनीति में कोई जगह है या नहीं, इस बारे में भी उन्हें कोई आइडिया नहीं है।

बता दें कि शाह फैसल का विवादों से पुराना नाता रहा है और वो अक्सर देशविरोधी ब्यान देते रहे हैं। शाह फैसल को अगस्त 2019 में दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लेकर कश्मीर में नजरबंद किया गया था। अगर 14 अगस्त को शाह फैसल दिल्ली में नहीं रोके गए होते तो वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत के खिलाफ मामला दर्ज करा चुके होते। वह घाटी में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने की तैयारी में थे

अनुच्छेद 370 का विरोध करते हुए शाह फैसल ने कहा था, “कैसी ईद। दुनिया भर के कश्मीरी अपनी जमीन पर अवैध कब्जे का शोक मना रहे हैं। तब तक कोई ईद नहीं मनेगी, जब तक 1947 से हमसे छीनी गई हर चीज वापस नहीं ले ली जाती। जब तक हर अपमान का बदला पूरा नहीं होता, ईद नहीं मनेगी।” उन्होंने कहा था कि वो तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में बॉंटने के फैसले से हुई ‘पीड़ा’ का बदला नहीं ले लेते।

रायटर्स के पत्रकार देवज्योत घोषाल के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2019 में शाह फैसल से बात की थी। पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर में ‘संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प’ होने का दावा करते हुए लिखा था कि सैटेलाइट टीवी चालू थे और कई लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। घोषाल से बातचीत में शाह फैसल ने कहा कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर के भभक उठने की संभावना है, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं। घोषाल ने दावा किया है कि इसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई।

‘भारत के लिए कोरोना से भी घातक है कुरान’ – फेसबुक पर युवक ने लिखा, हाईकोर्ट ने दी जमानत

सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने 32 वर्षीय युवक को अग्रिम जमानत दे दी। युवक पर आरोप है कि उसने लॉकडाउन के समय कोरोना वायरस की तुलना कुरान से करके उसका अपमान किया और समुदाय विशेष की भावनाएँ भी आहत कीं।

न्यायमूर्ति के नटराजन ने कुसुमधरा कन्नियूर (kusumdhara kaniyoor) को अग्रिम जमानत देते हुए 25000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड जमा करवाया। इसके बाद उसे इस आदेश की तारीख के ठीक 15 दिन के भीतर स्वयं जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होने को कहा। साथ ही निर्देश दिए गए कि वह दोबारा ऐसा कोई अपराध न करें।

जानकारी के अनुसार बेल्लारी पुलिस ने आरोपित के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153ए और 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में मोहम्मद शहीर की ओर से तहरीर दी गई थी। केस दर्ज होने के बाद आरोपित ने मंगलोर के सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया मगर वहाँ से उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद वह हाईकोर्ट पहुँचा।

यहाँ वकील सचिन बीएस ने याचिकाकर्ता के मामले की पैरवी की। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता निर्दोष है, उसके खिलाफ़ गलत मामले में केस दर्ज हुआ है। इतना ही नहीं उसने कुछ भी ऐसा नहीं किया, जिसके कारण आईपीसी की धारा 153 ए और 505 (2 ) के तहत मामला दर्ज हो। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई अपराधिक कार्य नहीं किया, जो प्राथमिक दृष्टि में समाज के विभिन्न वर्गों में शत्रुता पैदा करे।

वहीं, वकील महेश शेट्टी ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाला था, जिसमें उसने लिखा कि भारत के लिए कोरोना वायरस से भी ज्यादा कुरान घातक है- और ये धारा 153ए और 505 (2) के तहत दण्डनीय है। उन्होंने कहा कि जबसे ये केस शुरू हुआ, उसी वक्त से आरोपित फरार है। अगर ऐसे में इसे बेल मिल गई तो ये इस केस से भी बच निकलेगा। इसलिए इसे कस्टडी में लेकर जाँच करने की आवश्यकता है।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद बेंच ने कहा कि सरकार के वकील की ओर से कोई भी ऐसा सबूत नहीं दिखाया गया, जिससे साबित हो कि पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से पहले इजाजत ली। इस मामले में जिलाधिकारी को संज्ञान लेना था।

“इसलिए तथ्यों और केस के हालातों को देखते हुए, मंजर सईद खान के केस में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों के मद्देनजर व याचिकाकर्ता के मैसेज को देखते हुए, इस समय यह नहीं कहा जा सकता कि जो उसने किया वह दण्डनीय अपराध है, जिससे समाज के दो समुदायों में साम्प्रदायिक हिंसा भड़के या दोनों के बीच तनाव हो।” – जज ने बेल देते हुए यह तर्क दिया।

इस्लामी आतंक का बर्बर चेहरा: मात्र 1 हफ्ते में ली 221 लोगों की जान, 11 देशों पर हुए 38 हमले – मीडिया रिपोर्ट

इस्लामी आतंकियों ने विश्व के हर कोने में कहर मचा रखा है। कुछ देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने अभी हाल ही में इनकी बर्बरता झेली। एक जानकारी के अनुसार, अगस्त माह में केवल 7 दिनों के भीतर इस्लामी आतंकियों ने 11 देशों पर आक्रमण किया और 221 लोगों को मारा।

वहीं, 9 दिन के आँकड़े देखें तो इस्लामी आतंक का शिकार कुल 280 लोग हुए। इसके अलावा 30 दिन के अंदर 135 इस्लामी हमले 21 देशों में हुए, जिसमें करीब 662 लोग मारे गए और 646 घायल हुए।

सभी आँकड़े द रिलिजियन ऑफ पीस वेबसाइट के अनुसार:

1 अगस्त 2020:

  • अफ़गानिस्तान के तरीन कोट में तालिबानियों ने एक बाग में बम फिट किया, जिसके कारण एक निवासी की मौत हो गई।
  • इसी दिन अफ़गानिस्तान के खोदजे में सामाजिक कार्यकर्ता का अपहरण हुआ और बाद में कट्टरपंथियों ने उसे मार डाला।
  • नाइजीरिया के नसरवा में भी इस दिन गोलीबारी की घटना हुई। इस घटना में 5 लोग मारे गए और 14 घायल हुए। वेबसाइट बताती है कि इस घटना के पीछे भी संप्रदाय विशेष के आतंकियों का हाथ संदिग्ध है।
  • साइरिया के डेर एज्जोर में ISIS का हमला हुआ, जिसमें 4 लोग मारे गए और 2 घायल हुए। 

2 अगस्त 2020:

  • इथियोपिया के गुबा में संप्रदाय विशेष के आतंकियों के हमले में 13 नागरिकों को अपनी जान गँवानी पड़ी और 6 घायल हुए।
  • बुर्किना फासो के औएहिगौया में कट्टरपंथियों ने एक आईडी हमला किया। इस हमले में 6 लोग मारे गए और 4 घायल हुए।
  • साइरिया के डेर एज्जोर में ISIS ने दो लोगों की हत्या की। इनमें एक तो लोकल इंवेस्टिगेटर था, जिसे पकड़कर ISIS ने मारा। दूसरा एक आम व्यक्ति था, जिसका पहले अपहरण हुआ और फिर उसका गला काटा गया।
  • कैमरूप के Nguetchewe में इस दिन बोको हरम नाम के इस्लामिक ग्रुप ने एक कैंप में ग्रेनेड फेंका। जिसके कारण यहाँ 18 लोगों की मौतें हुईं और 11 लोग घायल हुए।
  • माली के गोमा कौरा में स्थानीय सैनिक जिहादियों द्वारा घात लगाकर मारे गए।
  • अफ़गानिस्तान के जलालाबाद में एक जेल पर हमला किया गया, जिसमें 29 लोगों की जानें गईं और 50 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
  • सोमालिया के Wanlaweyn में अलकायदा के आतंकियों ने एक घर पर ग्रेनेड का हमला किया, जिसके कारण उस घर का 1 व्यक्ति मारा गया और 1 गंभीर रूप से घायल हुआ।

3 अगस्त 2020:

  • अफ़गानिस्तान के शिकल में एक शादी समारोह में ही बम विस्फोट कर दिया गया। इसमें दो महिलाएँ और एक बच्चा मारे गए।
  • नाइजीरिया के वाशो में एक पत्रकार को उसके घर में ही जान से मार दिया गया। इसके पीछे फुलानी कट्टरपंथियों का हाथ संदिग्ध है।
  • सोमालिया के मोगादिशु में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को रेस्ट्रां के बाहर उड़ा लिया, जिसके कारण वहाँ मौजूद दो सुरक्षाकर्मी मारे गए।
  • अफ़गानिस्तान के स्पिन बोलदोक में एक बम हमले में 2 नागरिक मारे गए और 2 घायल हुए।

4 अगस्त 2020:

  • अफ़गानिस्तान के चेमई शेर में 12 पुलिसकर्मी एक बंदी को गाड़ी में बैठाकर ले जा रहे थे। तभी तालिबानियों ने हमला बोला और बर्बरता से सभी की हत्या कर दी।
  • अफ़गानिस्तान के इजाना में एक कट्टरपंथी ने एक स्थानीय गायक की हत्या की।
  • अफ़गानिस्तान के फराह में तालिबानियों ने एक डॉक्टर को मार डाला।
  • सीरिया के मायादीन में इस दिन 3 लोग ISIS का शिकार हुए। एक सुरक्षाकर्मी और दो आम नागरिक। सुरक्षाकर्मी को तो एक बंदूकधारी ने मारा। जबकि बाकी दो बम ब्लास्ट का शिकार हुए। इस बम हमले में 8 अन्य घायल भी हुए।

5 अगस्त 2020:

  • इथिओपिया के गुबा में 3 लोग इस्लामिक अटैक में घायल होने के बाद मारे गए।
  • इराक के माताबजिया में ISIS ने 3 आम जनों की हत्या की।
  • पाकिस्तान के बिन साही में तालिबानियों ने सीमा पर तैनात के सुरक्षाकर्मी को गोलियों से भून डाला।
  • अफ़गानिस्तान का Hadurokali में एक दुकानदार की हत्या की गई।
  • अफ़गानिस्तान के खशरोड में मजहबी उन्मादियों ने बम हमला करके 7 नागरिकों की जान ले ली जबकि 1 नागरिक इसमें घायल हुआ।
  • इराक के सालादीन में ISIS ने दो इराकियों को मार डाला और 3 गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • सोमालिया के Daynuney में 8 लोगों को अल शबाब द्वारा मारा गया।

6 अगस्त 2020:

  • अफ़गानिस्तान के चश्माए शिर में एक बम हमले में 11 लोग मारे गए।
  • नाइजीरिया के कुरमीन मसारा में स्थित एक गाँव पर आतंकियों ने सुनियोजित हमला किया। इसमें 13 ग्रामीण मारे गए और 5 गंभीर रूप से घायल हुए।
  • नाइजीरिया के तकमावई में 7 ग्रामीणों को संप्रदाय विशेष के आतंकियों ने मारा।
  • अफ़गानिस्तान के नावा में 6 पुलिसकर्मियों की हत्या कट्टरपंथियों ने की।
  • भारत के काजिगुंड में ग्राम प्रधान को उसके घर के पास मुजाहिद्दिनों ने मार डाला।
  • अफ़गानिस्तान के तागाब में एक तालिबानी हमला हुआ, जिसमें 3 मारे गए।
  • इराक में खानाकिन में इस्लामिक स्टेट ने हमला किया, जिसमें दो इराकियों की जान चली गई।
  • यमन के रादा में अलकायदा ने एक शिया समुदाय के व्यक्ति को मार डाला।

7 अगस्त 2020:

  • नाइजीरिया के जंगो कतफ में फुलानी आतंकियों ने 12 से अधिक ग्रामीणों को मार डाला।
  • बुर्किना फासो के Namoungou में फिर एक बड़ा हमला हुआ। इस्लामिक आतंकी इस बार मशीन गन के साथ पशु बाजार में आए और 20 लोगों को मौत के घाट उतार गए।
  • नाइजीरिया में कदूना में जमात अल-अंसार अल-मुस्लीमीन ने दो दर्जन से अधिक “धर्म त्यागने” वालों को मारने का दावा किया।

8 अगस्त 2020:

  • सोमालिया के मोगादिशु में एक स्पोर्ट्स स्टेडियम के बाहर सुसाइड बॉम्बर ने खुद को बम से उड़ा लिया। जिसमें आसपास के 8 लोग मारे गए और 14 घायल हुए।
  • अफ़गानिस्तान के गजनी में एक तालिबानी हमला हुआ, जिसमें 7 लोग मारे गए और 15 को गंभीर चोट पहुँची।
  • पाकिस्तान के क्लिफ्टन में एक 19 वर्षीय महिला के सिर पर बुलेट मार दी गई।
  • अफ़गानिस्तान के शेरजाद में एक परिवार पर मोर्टर दागा गया। 9 लोग इसके कारण घायल हुए और 1 को अपनी जान गँवानी पड़ी।
  • अफ़गानिस्तान के मायवंद में एक कट्टरपंथी समूह ने स्थानीय पुलिस पर बर्बर हमला किया और 4 पुलिसकर्मियों को मार डाला।

9 अगस्त 2020:

  • भारत के जम्मू कश्मीर के शोपियाँ में एक सुरक्षागार्ड की हत्या कर दी गई।
  • अफ़गानिस्तान के मातखान में एक मोटरसाइकिल को अपना निशाना बनाया और रोडसाइड बम के इस्तेमाल से दो लोगों को मार डाला।
  • अफ़गानिस्तान के शी नारी में तालिबानियों ने 8 नागरिकों को मारा।
  • अफ़गानिस्तान के काबुल में कट्टरपंथियों ने बम हमले में दो लोगों की जान ली।
  • नाइजर के कोर में फ्रांसिसियों को गाइड और ड्राइवर सहित मार दिया गया।

मर चुके पिता को आखिरी बार देखने के लिए जब बेटे से माँगे ₹51000: पश्चिम बंगाल की कहानी

बंगाल में एक बेटे को अपने मृत पिता के अंतिम दर्शन के लिए अस्पताल प्रशासन से लेकर पुलिस और मीडियाकर्मियों तक से गुहार लगानी पड़ी। अस्पताल के स्टाफ ने पहले तो बेटे को उसके पिता की मृत्यु के बारे में सूचना नहीं दी और जब बेटे ने पूछा तो पता चला कि शव दाह संस्कार के लिए जा चुका है। बेटा जब श्मशान घाट पहुँचा तो वहाँ उससे मोटी रकम माँगी गई। इसके बाद उस बेटे ने पुलिस से गुहार लगाई और मीडिया से दबाव बनवाया। तब जाकर वह अपने पिता को आखिरी बार देख पाया।

हरि गुप्ता के पुत्र सागर गुप्ता के अनुसार, उनके पिता की मृत्यु कोरोना के कारण शनिवार को हुई। लेकिन अस्पताल ने उन्हें इस संबंध में समय से सूचित नहीं किया और रविवार को फोन करके जानकारी दी कि उनके पिता की मृत्यु हो गई है। जब उन्होंने इस बारे में अस्पताल स्टाफ से सवाल किए, तो जवाब मिला कि उनके पास कॉन्टैक्ट नंबर नहीं था।

परिजन भागते-भागते अस्पताल पहुँचे, पर वहाँ बताया गया कि शव को दाह संस्कार के लिए भेज दिया गया। इसके बाद परिवार श्मशान घाट भी पहुँचा। लेकिन वहाँ अस्पताल के स्टाफ ने उनसे 51000 रुपए की माँग की। इसी बात को सुनकर परिवार वालों की उनसे बहस भी हुई, जिससे अस्पताल का स्टाफ 51000 रुपए की जगह 31000 रुपए माँगने लगा।

स्टाफ का ऐसा बर्ताव देखकर परिवार ने पुलिस को संपर्क किया और अधिकारियों को भी बताया कि पुलिस पहुँच रही है। मगर, तब भी अस्पातल अधिकारियों ने उनकी नहीं सुनी। अधिाकिरयों ने पुलिस को भी कह दिया कि वह वापस जाएँ और उच्चाधिकारियों से इस संबंध में बात करें।

परिवार ने इस बीच ये सारी घटना अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करने की कोशिश की। किंतु उन लोगों ने परिजनों का फोन भी छीन लिया। बाद में मीडिया के दबाव में आकर अधिकारियों ने डिपोजिट अमाउंट के रूप में केवल 2500 रुपए लिए और बॉडी को दिखाया। परिवार ने कहा कि यह सब मीडिया दबाव के कारण संभव हो पाया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जब इस संबंध में हावड़ा कॉर्पोरेशन कमिशनर धवल जैन से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि श्मशान घाट पर बड़े अक्षरों में नंबर लिखा हुआ है। अगर किसी को कोई बात की चिंता है या शिकायत है तो वह हमें इस नंबर पर कॉल कर सकता है। लेकिन तब भी परिवार ने कोई शिकायत नहीं की। शायद उन्होंने यह नंबर ही नहीं देखा। हमें जैसे ही इस संबंध में शिकायत मिलेगी, तब जाँच करेंगे।

महेश भट्ट की ‘सड़क-2’ में किया जाएगा हिन्दुओं को बदनाम: आश्रम के साधु के ‘असली चेहरे’ को एक्सपोज करेगी आलिया

सुनील दत्त के बेटे हैं संजय दत्त। महेश भट्ट की बेटियाँ हैं पूजा और आलिया। सिद्धार्थ रॉय कपूर के भाई हैं आदित्य। इन सबकी फिल्म आ रही है सड़क-2, जिसे निर्देशित कर रहे हैं महेश भट्ट और इसका निर्माण वो अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ मिल कर कर रहे हैं। ऐसे में लाजिमी है कि नेपोटिज्म विवाद के बीच इस फिल्म का विरोध हो क्योंकि सुशांत मामले में भी महेश भट्ट को लेकर कई खुलासे हुए हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस दौरान ‘अनइंस्टॉल हॉटस्टार’ ट्रेंड होता रहा क्योंकि लोगों का कहना है कि इस फिल्म में केवल नेपोटिज्म के प्रोडक्ट्स भरे पड़े हैं, जिन्हें महेश भट्ट आगे बढ़ा रहे हैं। चूँकि इसे ‘डिजनी हॉटस्टार’ पर रिलीज किया जाना है, इसीलिए इसका विरोध हो रहा है। सोशल मीडिया में कई लोगों ने हॉटस्टार को अनइंस्टॉल कर के स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए। अब एक और कारण से फिल्म का विरोध हो रहा।

ये कारण है- इस फिल्म की कहानी। हम जानते हैं कि बॉलीवुड में अक्सर पंडितों और साधु-संतों को धोखेबाज और बलात्कारी दिखाया जाता रहा है जबकि संप्रदाय विशेष के किरदारों को ईमानदार और देश के लिए मर-मिटने वाला प्रदर्शित किया जाता रहा है। इसी तरह ‘सड़क-2’ में भी महेश भट्ट एक ऐसी कहानी लेकर आ रहे हैं, जिसमें एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा और उसके काले कृत्यों का खुलासा किया जाएगा।

‘मुंबई मिरर’ ने फिल्म के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया कि इस फिल्म में आलिया भट्ट का किरदार एक ऐसी महिला का होगा, जो एक ‘फेक बाबा’ से पंगा लेती है। दिखाया जाएगा कि दुनिया के सामने अच्छा बना रहे वाला गुरु कितना बड़ा अपराधी है और उसका असली चेहरा कुछ और है। ये आलिया बनाम एक आश्रम चलाने वाले बाबा की कहानी है। संजय दत्त का किरदार बाबा को ‘एक्सपोज’ करने में आलिया की मदद करेगा।

सड़क-2 में आलिया भट्ट का फर्स्ट लुक

सिने इंडस्ट्री में कई खलनायक वाले किरदारों को जीवंत कर चुके गुलशन ग्रोवर का भी इस फिल्म में अहम किरदार है लेकिन महेश भट्ट का कहना है कि मुख्य विलेन बाबा के किरदार में वो नहीं ‘महान अभिनेता’ ने प्ले किया है। मई 2019 में जब फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली थी, तभी महेश भट्ट ने ये बातें कही थीं। अब पता चला है कि विलेन बाबा या गुरु का किरदार महशूर थिएटर एक्टर मकरंद देशपांडे प्ले करेंगे।

सड़क-2 को अगस्त 28, 2020 को हॉटस्टार पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म के फर्स्ट लुक पोस्टर्स देखने पर पता चलता है कि आलिया भट्ट और संजय दत्त किसी तांत्रिक के तरह के व्यक्ति से टकरा रहे हैं, जिसे पिशाच की तरह प्रदर्शित किया गया है। साथ ही पोस्टर्स में ये अभिनेता-अभिनेत्री ‘आग से खेलते’ भी नज़र आते हैं। आलिया के पोस्टर के साथ ‘असली हिम्मत वो होती है जो डर के बावजूद भी जुटानी पड़ती है” टैगलाइन लिखा है।

1999 में आई ‘कारतूस’ के बाद से महेश भट्ट ने निर्देशन से एक तरह का संन्यास ले रखा था, जो सड़क-2 के साथ ख़त्म होगा। बता दें कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा के अपने घर में लटके मिले थे। 8 जून को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या की थी। खुलासा हुआ है कि इसी दिन सुशांत का घर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चकवर्ती ने छोड़ा था। 8 से 13 जून के बीच महेश भट्ट और रिया चकवर्ती के बीच फोन पर कई बार बात हुई।

BJP जिलाध्यक्ष की गोली मार कर हत्या, निकले थे मॉर्निंग वॉक पर: CM योगी ने पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मॉर्निंग वॉक पर निकले पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर की हत्या कर दी गई है। ये घटना मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की सुबह हुई। तीन अपराधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया और फिर फरार हो गए। संजय खोखर को तीन गोलियाँ लगी हैं, जिसके बाद मौके पर ही उनकी मौत हो गई। छपरौली थाना क्षेत्र में ये वारदात हुई, जब वो तड़के सुबह सैर के लिए निकले थे।

भाजपा नेता की हत्या के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने बताया है कि भाजपा नेता संजय खोखर के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हॉस्पिटल भेजा गया है और अपराधियों की धर-पकड़ के लिए टीम का गठन कर दिया गया है। पुलिस ने हत्यारोपितों की जल्द गिरफ़्तारी कर इस हत्याकांड के खुलासे की बात कही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनकी मौत पर गहरी संवेदना प्रकट की है। कहा जा रहा है कि सीएम ने इस मामले में सख्ती दिखाई है और पुलिस को घटना के खुलासे के लिए 24 घंटे का वक़्त दिया है। मुख्यमंत्री ने आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। संजय खोखर काकोर कला गाँव के जूनियर हाईस्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत थे। वो तिलवाड़ा मार्ग से सुबह की सैर के लिए निकले थे।

वहाँ से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर एक खेत में उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई। वो अकेले ही घूमने निकले थे। स्थानीय एसपी, सीओ और थानाध्यक्ष ने पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँच कर स्थिति का जायजा लिया। बताया गया है कि अपराधी पहले से ही घात लगा कर बैठे हुए थे। संजय खोखर 3 वर्षों तक बागपत में भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे थे और उनके कार्यकाल में ही पार्टी ने बड़ौत व बागपत विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।

हाल ही में इसी तरह से बडगाम में भाजपा OBC मोर्चा के जिलाध्यक्ष अब्दुल हामिद नज़र की हत्या कर दी गई। आतंकियों ने उन्हें रविवार (अगस्त 9, 2020) को गोली मार दी थी। भाजपा ओबीसी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अब्दुल हामिद सिक्यॉरिटी सेंटर से सैर के लिए निकले थे। तभी बाइक सवार आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी थी। 38 वर्षीय अब्दुल हामिद नज़र बडगाम के मेहदीपोरा के रहने वाले थे।

आर्म्स रैकेट चला रहा मंत्रालय का कर्मचारी इंसार खान धराया, कई अपराधियों को दिए थे फर्जी लाइसेंस वाले हथियार

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के एक ऐसे कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है, जो हथियारों का एक बड़ा रैकेट चला रहा था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में मोहम्मद इंसार खान को गिरफ्तार किया है, जो आर्म्स रैकेट का संचालक था। जब उसे गिरफ्तार किया गया, तब वो इंडिया गेट पर हथियारों की डिलीवरी देने के लिए पहुँचा था। उसका सहयोगी पारस चोपड़ा भी गिरफ्तार हुआ है।

पारस हरियाणा के करनाल में एक गन हाउस चलाता था। इस मामले में तलाश किए जा रहे तीसरे अभियुक्त का नाम दीपक है, जो बागपत का हिस्ट्री शूटर है। वो फ़िलहाल फरार है। ये गैंग गन हाउस से फेक लाइसेंस बनवा कर बंदूकें उठाता था और फिर उसे दुर्दांत अपराधियों को बेच दिया करता था। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के हिस्ट्रीशीटर अपराधी इस गैंग से हथियार ख़रीदा करते थे।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी भीष्म सिंह ने बताया कि उन्हें ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति दिल्ली से हथियार लेकर यूपी के बदमाशों को बेचने के लिए आने वाला है। इसके बाद पुलिस सतर्क हो गई और इंडिया गेट के पास तिलक मार्ग से इंसार खान दबोचा गया, जो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का कर्मचारी निकला। पूछताछ में उसने बताया कि वो दीपक से पिस्टल खरीद कर आ रहा था।

वह फर्जी लाइसेंस बनवा कर गन हाउस से अब तक कई पिस्टल खरीद चुका था। पुलिस ने दीपक के घर पर भी छापेमारी की, जहाँ से 14 करतूत और एक पिस्टल की मैगजीन बरामद हुई। ‘चोपड़ा गन हाउस’ का संचालक पारस चोपड़ा भी धरा गया है। इंसार के पास से जो पिस्टल बरामद हुई, उसे भी पारस ने दीपक को बेचा था। हथियार के सत्यापन के बिना ही उसे बेच दिया जाता था।

पुलिस को हथियारों की खरीद-बिक्री का कोई रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। पूछताछ में इंसार खान ने बताया कि कर्मचारी चयन आयोग (SSC) नई दिल्ली द्वारा आयोजित आशुलिपिक की परीक्षा के बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में उसकी नौकरी लगी थी। उसने बताया कि वो सोचता था कि वो सरकारी कर्मचारी है, इसीलिए उस पर किसी का भी शक नहीं जाएगा। इसी आड़ में वो आर्म्स रैकेट चला रहा था।

इंसार खान ही उत्तर प्रदेश से हथियारों की सप्लाई लेता था और फिर दिल्ली में डिलीवरी करता था। इससे पहले भी लखनऊ में उस पर धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का ममला दर्ज किया गया था। 2012 में उसकी सरकारी नौकरी लगी थी। अमीनाबाद पुलिस ने उसे स्टेनोग्राफर की परीक्षा में चीटिंग से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार भी किया था। बावजूद इसके वह मंत्रालय में नौकरी पाने में कामयाब रहा था।

चायनीज मजदूरों ने पाकिस्‍तानी सैनिकों को जम कर पीटा, ‘ऊपर’ से आदेश आया – ‘पलट कर मत मारना’

चीन के कर्ज में डूबे पाकिस्तान की हालत इस खबर से अच्छे ढंंग से समझी जा सकती है। परमाणु संपन्न देश (धमकी देते वक्त वो यही कहता है) की सेना को दूसरे देश के मजदूर सरेआम धो देते हैं, वो भी जम कर। और ऊपर के अधिकारियों से आदेश से क्या आता है – “कुछ मत करना, पलट कर मारने की सोचना भी मत।” यह आदेश निश्चित ही अंग्रेजी में था लेकिन उसके हिंदी अनुवाद का सार यही है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) पर काम करने वाले चीन के मजदूरों ने पाकिस्तान के दो सैनिकों को खूब पीटा। पाकिस्‍तानी सेना के हवलदार असदउल्‍ला और सिपाही फजल-उर-रहमान को चीनी मजदूरों ने पीटा है।

पाकिस्‍तानी सैनिकों की चायनीज मजदूरों द्वारा थुराई के संबंध में वहाँ के लेफ्टिनेंट कर्नल इमरान कासिम ने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भी लिखा। लेकिन चायनीज मजदूरों पर कार्रवाई के बजाए सेना और सरकार के अधिकारियों ने खामोश रहने का आदेश दिया। ऊपर से जवानों को संयम बरतने की सलाह दी गई।

लेफ्टिनेंट कर्नल इमरान कासिम के लिखे लेटर के अनुसार, चायनीज मजदूरों और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच मारपीट की घटना 21 जुलाई की है। यह उन पाकिस्तानी सैनिकों के साथ हुआ, जिन्हें चार चायनीज मजदूरों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। लेटर में बताया गया कि सैनिकों के पास कोई ट्रांसलेटर नहीं था, जिससे यह विवाद मारपीट तक बढ़ गया।

हुआ यह कि चायनीज मजदूर चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) के लिए काम कर रहे थे। तभी इनमें से एक (जिसे मीडिया रिपोर्ट में मजदूरों का लीडर बताया गया है), इस साइट को छोड़कर दूसरी साइट पर जाना चाहता था। लेकिन शायद सुरक्षा कारणों से पाकिस्तानी सैनिक बिना आदेश के उसे जाने देने के लिए तैयार नहीं थे।

सुरक्षा में लगे पाकिस्तानी सैनिक ने इस संबंध में आदेश के लिए आर्मी कैंप में फोन लगाने का फैसला किया। लेकिन सैनिकों के पास कोई ट्रांसलेटर नहीं था, इसलिए उसके कॉल करने से पहले ही संवाद की कमी के कारण चीनी मजदूरों ने मारपीट शुरू कर दी।

पहले भी हुआ है यह सब

जून 2019 में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी। तब दो बार चायनीज वर्कर्स की तरफ से पाकिस्तानी सेना की गाड़ियों के प्रयोग की बात कही गई थी। उस समय का मामला पाकिस्तानी सेना के लिए काफी शर्मनाक था। तब की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना की गाड़ियों से चायनीज वर्कर्स रेड लाइट एरिया (जिस्म के बाजार) जाते थे।

अब से दो साल पहले 2018 में भी ऐसा ही एक वाकया हुआ था। तब एक चायनीज इंजीनियर ने पाकिस्तान के पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की थी। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। वीडियो में साफ देखा जा सकता था कि एक नाराज चायनीज इंजीनियर पाकिस्तान की पुलिस की गाड़ी के बोनेट पर खड़ा है और हंगामा कर रहा है।

जन्माष्टमी: सम्पूर्णता में जीने का सन्देश – श्री कृष्ण की 16 कलाएँ, उनके ग्वाले से द्वारकाधीश होने की सम्पूर्ण यात्रा

आज जन्माष्टमी है अर्थात जनमानस में प्रेम, संघर्ष और आनंद के पर्याय भगवान कृष्ण का जन्म दिवस। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को श्री कृष्ण ने जन्म लिया थ। उनका जन्म लेना अपने आप में एक युगांतकारी घटना थी। जो अपने कर्मों से संसार को जीवन का अमूल्य पाठ पढ़ाने का निहीत उद्देश्य लेकर इस धरा पर अवतरित हुए थे। शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस दिन चंद्रमा वृष राशि में और सूर्य सिंह राशि में था।

अब अगर इसी आलोक में इस वर्ष को देखें तो इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार 11-12 अगस्त 2020 को है। यह दो दिन क्यों है इसकी भी वजह हैं। दरअसल, यह माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद यानी कि भादो माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। 12 अगस्त को ही कृतिका नक्षत्र लगेगा। जबकि चंद्रमा मेष और सूर्य राशि में संचार करेंगे। कृतिका नक्षत्र और राशियों की स्थिति के कारण वृद्धि योग बन रहा है।

ऐसे में अगर कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देखा जाए तो जन्माष्टमी 11 अगस्त की होनी चाहिए, लेकिन अगर रोहिणी नक्षत्र को भी ध्यान में रखें तो फिर 12 अगस्त को भी कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। गृहस्थों और सन्यासियों का भी भेद है। किसी के लिए अष्टमी तिथि का महत्व अधिक है तो वहीं कुछ अन्यों के लिए रोहिणी नक्षत्र का अधिक महत्व है। ऐसे में मथुरा में जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनाई जा रही है। वहीं नंदलाल के गाँव ब्रज में 11 अगस्त यानि आज धूमधाम से जन्माष्टमी मनाई जा रही है।

अब इस विशेष स्थिति में श्री कृष्ण के जन्म के कारण यदि जन्माष्टमी के व्रत के माहात्म्य की भी बात किया जाए तो इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को चंद्रमा और सूर्य देवता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वैसे जन्माष्टमी को शास्त्रों में ‘व्रतराज’ भी कहा गया है और ऐसा माना गया है कि इस एक दिन व्रत रखने से समस्त विघ्न बाधाएँ दूर होती हैं और कई पुण्यों का फल प्राप्त होता है।

भारतीय संस्कृति में हज़ारों वर्षों से भगवान कृष्ण आस्था के केंद्र रहे हैं। हिन्दू जनमानस में कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति और प्रेम का भाव युगों से व्याप्त है। खासतौर से समूचा भारत कृष्ण को न केवल अपना आराध्य मानता है बल्कि कृष्ण उनकी जीवनशैली में इस प्रकार रचे बसे हैं जैसे देह में आत्मा। भक्तिकाल के कवियों की एक समूची पीढ़ी ने अपना सम्पूर्ण जीवन कृष्ण की आराधना करते, उनपर कविताएँ और गीत लिखते हुए बिता दिया।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी न सिर्फ अपने आराध्य नटखट बाल-गोपाल नन्दलाल के जन्मोत्सव के उल्लास और आनंद का उत्सव मनाने का दिन है बल्कि यह अवसर है, उनके उन मूलभूत गुणों से भी दो-चार होने का, कि कैसे एक कारागार में जन्में, ग्वालों संग पले-बढ़े, लेकिन जीवन के तमाम संघर्षों, संकटों और विसंगतियों को आनंद पूर्वक पार करने के कारण, वो लोगों के आराध्य और आस्था के केंद्र बन गए।

अक्सर कृष्ण पर बात करते समय बाँसुरी, मक्खन और गोपियों का ज़िक्र होने लगता है परन्तु यह बेहद एकांगी और संकुचित दृष्टि है। कृष्ण को एक सम्पूर्ण चरित्र यूँ ही नहीं माना गया है बल्कि उनका जन्म ही मानव जाति के आध्यात्मिक और लौकिक जीवन को व्यवस्थित करने के लिए हुआ था। भगवान विष्णु के अवतार के रूप में वह सभी सोलह कलाओं से युक्त थे। अब तक के अन्य किसी अवतार में यह परिपूर्णता नहीं पाई जाती।

कृष्ण की सोलह कलाएँ उनके विशेष सोलह गुणों से सम्बंधित हैं। जो आज भी यदि किसी में हों तो जिस अनुपात में इन गुणों की व्याप्ति होगी उसी अनुपात में उस मनुष्य में भी प्रभाव देखने को मिलेंगे, ऐसा तत्वदर्शियों का कहना है। नर से नारायण हो जाने की बात भी यूँ ही नहीं कही गई है। श्री कृष्ण की सोलह कलाओं पर संक्षेप में बात की जाए तो उनका क्रम इस प्रकार है:

भगवान श्री कृष्ण की सोलह कलाएँ

  • श्री सम्पदा

                     इस कला से युक्त व्यक्ति धन से तो समृद्धशाली होता ही है, साथ ही मन क्रम वचन से भी समृद्धशाली होता है। ऐसा माना जाता है कि इस कला के स्वामी के पास माँ लक्ष्मी का स्थाई वास होता है अतः श्री सम्पदा से युक्त व्यक्ति को कभी भी आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता।

  • भू सम्पदा

                  इस कला से युक्त व्यक्ति के पास बड़ी मात्रा में ज़मीन और संपत्ति होती है जिसपर वह न केवल कुशलता से शासन करने की योग्यता रखता है बल्कि दिन प्रतिदिन अपनी संपत्ति को बढ़ाने की योग्यता भी रखता है।

  • कीर्ति सम्पदा

                         इस कला से युक्त व्यक्ति की ख्याति और उपलब्धि विश्व में लोकप्रियता का मानक बन जाती हैं। इस कला के होने पर व्यक्ति अन्य के बीच न केवल लोकप्रिय बल्कि विश्वासपात्र व प्रिय व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान स्थापित करता है।

  • वाणी सम्मोहन

                           कहा जाता है कि जिव्ह्या बड़े से बड़े कार्य को बनाने और बिगाड़ने का हुनर जानती है। इस कला से युक्त व्यक्ति की वाणी बेहद मधुर, सौम्य और मन को मोह लेने वाली होती है। ऐसे लोग शत्रु को भी अपनी बातों से आकर्षित कर लेते हैं। इनकी बातें सुनकर भयंकर क्रोध भी शांत हो जाता है।

  • लीला  

           इस कला से युक्त व्यक्ति चमत्कारी होता है जो अशुभ को शुभ में परिवर्तित करने की शक्ति रखता है। इनके दर्शन मात्र से ही व्यक्ति को अलौकिक आनंद और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

  • कांति

            इस कला से युक्त व्यक्ति के मुख पर एक सुंदर और सौम्य आभा विराजमान रहती है। यह देखने में अत्यंत सुंदर और मनमोहक होते हैं। कोई व्यक्ति इनकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रहता है।

  • विद्या

          इस कला से युक्त व्यक्ति बेहद बुद्धिमान और ज्ञान संपन्न होता है। ऐसा व्यक्ति वेदों का ज्ञाता, संगीत और कला का मर्मज्ञ, युद्ध कला में पारंगत और राजनीति तथा कूटनीति में निपुण होता है।

  • विमला

              इस कला से युक्त व्यक्ति विमल अर्थात् छल-कपट और भेद भाव से दूर होता है। इनके मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं होती और ये श्रेष्ठ आचार-विचार और निर्मल स्वभाव के होते हैं।

  • उत्कर्षिणी शक्ति

                             इस कला से युक्त व्यक्ति दूसरों को अकर्मण्यता से दूर करके कर्म की ओर प्रवृत्त करता है। ऐसे व्यक्तियों में दूसरों का अज्ञान हरने और उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाने का कौशल भी होता है। अपने प्रेरणादायी वक्तव्यों से यह सामने वाले की चिंता और भय को दूर करने में सक्षम होते हैं।

  • नीर-क्षीर विवेक

                                      इस कला से युक्त व्यक्ति अपने विवेक से सही और गलत का निर्धारण करने की योग्यता रखता है साथ ही दूसरों को भी कर्तव्य पथ पर सही परिस्थिति की ओर इंगित करता है।

  • कर्मण्यता

                           इस कला से युक्त व्यक्ति कर्मठ होता है और जीवन में कर्म को प्रमुख मानता है। वह अपने साथ-साथ दूसरों को भी कर्म का महत्त्व समझाता है और निस्वार्थ भाव से कर्म करने की प्रेरणा देता है।

  • योग शक्ति

                              इस कला से युक्त व्यक्ति आत्मा को परमात्मा का अंश मानते हुए योग के माध्यम से इसकी शुद्धि की ओर जागरूक रहते हैं। ये आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।

  • विनय

                       इस कला से युक्त व्यक्ति अहंकार विहीन तथा शालीन होते हैं। इनके पास अथाह धन, सौन्दर्य और ख्याति होते हुए भी उसका प्रचार या दिखावा नहीं करते, न ही उसके बल पर स्वयं को श्रेष्ठ और दूसरों को हीन समझते हैं।

  • सत्य धारणा

                                  इस कला से युक्त व्यक्ति सत्यवादी होते हैं जो किसी भी परिस्थिति में सत्य का साथ नहीं छोड़ते। यह सत्य के मार्ग पर बड़े से बड़े संकट को ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर लेते हैं परन्तु सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होते।

  • आधिपत्य

                            इस कला से युक्त व्यक्ति का व्यवहार ऐसा होता है जिसके साथ दूसरे व्यक्ति को सुरक्षा और अपनेपन का एहसास होता है जिसके कारण दूसरा व्यक्ति इनके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होकर इनका आधिपत्य स्वीकार करना चाहता है और इनके साहचर्य में रहना चाहता है।

  • अनुग्रह क्षमता

                                     इस कला से युक्त व्यक्ति सदैव दूसरों का कल्याण करने वाले कार्य करता है और उसके जीवन का उद्देश्य दूसरों की सेवा करना और उनके कष्ट हरना होता है।

एक व्यक्ति में इतने सारे गुणों का होना किंचित सुखद आश्चर्य है तथापि श्री कृष्ण के चरित्र में यह सोलह विशेषताएँ पाई जाती हैं इसलिए ही हिन्दू धर्म में इन्हें ईश्वर की उपाधि प्राप्त है। वर्तमान युग में जब परिवर्तन की धारा बड़ी तेज़ी से बह रही है, लेकिन कृष्ण का जीवन चरित और उनकी दी हुई शिक्षाएँ हमारे लिए आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। महाभारत का ‘गीता प्रसंग’ तो मानव मात्र की समस्याओं को सुलझाने का एक अचूक मंत्र है।

कृष्ण के जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। बाल्यावस्था की तमाम विपरीत परिस्थितियों और शत्रुओं के बीच रहकर भी कृष्ण ने न केवल गोकुल में आनंदमय जीवन बिताया बल्कि प्रेम का एक ऐसा रूपक गढ़ा जिसकी गाथा युगों-युगों से भारतीय समाज गाता चला आ रहा है। इसका अभिप्राय यह है कि जीवन आनंद का दूसरा नाम है। व्यक्ति को हर परिस्थिति में प्रसन्न और संतुष्ट रहना चाहिए। प्रेम और साहचर्य से ही स्थितियाँ स्वयं के अनुकूल बनाई जा सकती हैं।

कृष्ण ने व्यक्ति को समय एवं परिस्थिति के अनुकूल आचरण करने की शिक्षा दी है। वे व्यर्थ की नैतिकता और मान्यताओं से मुक्त होने की बात करते हैं | वर्तमान समय की यही माँग है। वे मानते हैं कि मनुष्य को अपनी और अपने सम्बन्धियों की रक्षा हेतु दुर्जनों पर दया नहीं दिखानी चाहिए भले ही वह आपके कितने भी प्रिय क्यों न हो। वे अन्याय के खिलाफ़ लड़ने और हथियार उठाने की प्रेरणा देते हैं क्योंकि धर्म और सत्य की स्थापना में जो बाधक बन रहा है, वो आपका अपना नहीं है।

महाभारत में कृष्ण को हम एक कुशल राजनेता और कूटनीतिज्ञ के रूप में देखते हैं। कृष्ण राजनीति के पुरोधा हैं। शत्रुओं पर किन नीतियों से विजय प्राप्त की जाए और अपनी वृत्तियों से कैसे छुटकारा प्राप्त हो, इसका सन्देश गीता के माध्यम से कृष्ण ने अर्जुन को दिया है। आज भी व्यक्ति अपने आंतरिक लोभ, मोह और माया से स्वयं को मुक्त कर यदि बड़े परिप्रेक्ष्य में अपनी नीतियाँ बनाता है तो निश्चय ही वह जीवनरूपी रणक्षेत्र का विजेता सिद्ध होता है। कृष्ण ने सही समय आने पर हर तरह के मोह और बंधन से निकल जाने का सिद्धांत दिया है।

वह स्वयं सोलह वर्ष की उम्र में गोकुल छोड़ कर चले आए थे और फिर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रतिज्ञा ली तो द्वारकाधीश बनने के बाद भी कभी गोकुल लौट कर नहीं गए। उन्होंने गीता में निष्काम कर्म का उपदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति को केवल अपने कर्म से प्रयोजन होना चाहिए। फल की चिंता उसे नहीं करनी चाहिए क्योंकि समय आने पर प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है।

                             “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगो$स्तवकर्मणि।”

कृष्ण के जीवन से कलाओं के महत्त्व को भी समझा जा सकता है। कृष्ण बाँसुरी बजाते थे। मोरपंख धारण करते थे। इन प्रतीकों के माध्यम से यह पता चलता है कि जीवन में प्रकृति और संगीत कितने महत्वपूर्ण हैं। इनके बिना मनुष्य का जीवन नीरस हो जाएगा। यूँ भी कृष्ण को आनंद का देवता कहा जाता है। उनके जन्मदिन पर मेले लगते हैं, बाज़ार सजता है, झूले झुलाए जाते हैं, झाकियाँ तैयार होती हैं और भजन कीर्तन का सुन्दर वातावरण हर तरफ दिखाई देता है अतः कृष्ण जीवन में उल्लास और प्रसन्नता का भाव देने वाले हैं। वे मानते हैं कि जीवन सबसे बड़ा है। कोई घटना, स्थिति या व्यक्ति जीवन से बड़ा नहीं है अतः हर हाल में व्यक्ति को अपनी भीतरी प्रसन्नता व उत्साह को बनाए रखना चाहिए।

कृष्ण ने सदैव समाज में कमजोर, निर्बल और असहाय व्यक्ति की सहायता करने की प्रेरणा दी है। उन्होंने सुदामा, गोपियों और पाण्डवों के माध्यम से यह दिखाया कि सत्य के पक्ष में खड़ा व्यक्ति चाहे जितना भी हीन या दुर्बल क्यों न हो, साथ उसी का देना चाहिए क्योंकि समाज में समता व समानता की स्थापना तभी सम्भव है जब समाज के सबसे निचले दर्जे पर खड़े व्यक्ति को साथ लिया जाएगा। शोषित और वंचितों की पीड़ा दूर करके ही एक सुंदर और नैतिक मूल्यों वाले समाज की स्थापना की जा सकती है।

वर्तमान पीढ़ी कृष्ण से यह भी सीख सकती है कि मनुष्य को वर्तमान में जीना चाहिए। उसे भूत और भविष्य की चिंता में अपना समय और ऊर्जा नष्ट नहीं करनी चाहिए। “क्यों व्यर्थ चिंता करते हो?, किससे व्यर्थ डरते हो?” उनका मानना है कि व्यक्ति को अपनी समस्त शक्ति का प्रयोग वर्तमान को बेहतर बनाने में करनी चाहिए और यदि असफलता मिलती है तो उस पर दुखी न होकर उसके कारणों की पड़ताल करनी चाहिए जिससे अग्रिम प्रयास में उन गलतियों का दोहराव न हो। यह सफलता का एक अचूक उपाय है। साथ ही व्यक्ति को दूरदर्शी भी होना चाहिए क्योंकि सीमित मनःस्थिति के आधार पर किया गया कार्य भविष्य में कष्टों का कारण बन सकता है।

इस प्रकार से यह देखा जा सकता है कि कृष्ण ने अपने जीवन में इतनी समस्याओं के होते हुए भी न केवल उन सभी समस्याओं पर विजय पाई बल्कि प्रत्येक विषम परिस्थिति में मजबूती के साथ खड़े रहे और जीवन को अपने चरम आनंदमयी रूप में जीया। जिनका समूचा बचपन राक्षसों से लड़ते बीता, घर परिवार, रिश्ते नाते, प्रेमिका और संगी साथी सब छूट गए। आजीवन विभिन्न संकटों का सामना करते रहे और अंत में एक भयंकर युद्ध जिसकी परिणति थी- भीषण नरसंहार। इसके बावजूद जीवन में दुःख और आँसू का कोई स्थान नहीं।

यह सब केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि कृष्ण इस संसार को आनंदमय जीवन का सन्देश देने आए थे। उनके जन्म से लेकर मृत्यु तक की यात्रा आनंद की यात्रा है जो मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य है। कृष्ण ने यह सिखाया कि व्यक्ति अकेले इस दुनिया में आया है और अकेले ही जाना है इसलिए दुनियायवी वस्तुओं का मोह त्यागकर शुद्ध रूप से जीवन जिओ और चरम आनंद की प्राप्ति करो। यही जीवन की सफलता का महत्वपूर्ण सूत्र है।