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महेश भट्ट की फिल्म सड़क 2 में हिन्दू आस्था को अपमानित करने का आरोप: VHP ने की कार्रवाई की माँग

बॉलीवुड निर्देशक महेश भट्ट निर्देशित फिल्म ‘सड़क-2’ रिलीज से पहले ही विवादों में आ गई है। बता दें कि यह आलिया भट्ट की पहली होम प्रोडक्शन फिल्म है और उनके पिता महेश भट्ट की 21 साल बाद निर्देशक के रूप में वापसी भी है।

फिल्म को लेकर विश्व हिन्दू परिषद ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। वहीं फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। अब वीएचपी नेता विजय शंकर तिवारी ने फिल्म ‘सड़क-2’ को लेकर हिन्दू आस्था को अपमानित करने का आरोप लगाया है।

बॉलीवुड में अक्सर पंडितों और साधु-संतों को धोखेबाज और बलात्कारी दिखाया जाता रहा है जबकि संप्रदाय विशेष के किरदारों को ईमानदार और देश के लिए मर-मिटने वाला प्रदर्शित किया जाता रहा है। इसी तरह ‘सड़क-2’ में भी महेश भट्ट एक ऐसी कहानी लेकर आ रहे हैं, जिसमें एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा और उसके काले कृत्यों का खुलासा किया जाएगा।

वीएचपी नेता विजय शंकर तिवारी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म सड़क 2 में एक बार फिर हिन्दू आस्था को अपमानित किया गया है जिसे हॉटस्टार में दिखाया जाएगा, फिल्म में केवल नेपोटिज्म के प्रोडक्ट्स भरे पड़े हैं, जिन्हें महेश भट्ट आगे बढ़ा रहे हैं। केन्द्र सरकार इस पर कार्यवाही करे।”

संजय दत्त, आलिया भट्ट और आदित्य रॉय कपूर अभिनीत फिल्म “नकली साधु” के साथ नायक की मुठभेड़ के चारों ओर घूमती है। इस फिल्म में आलिया भट्ट का किरदार एक ऐसी महिला का होगा, जो एक ‘फेक बाबा’ से पंगा लेती है। दिखाया जाएगा कि दुनिया के सामने अच्छा बना रहे वाला गुरु कितना बड़ा अपराधी है और उसका असली चेहरा कुछ और है। ये आलिया बनाम एक आश्रम चलाने वाले बाबा की कहानी है। संजय दत्त का किरदार बाबा को ‘एक्सपोज’ करने में आलिया की मदद करेगा।

पिछले महीने, जब फिल्म का पोस्टर जारी किया गया था, तब भी विवादों में घिर गई थी। उस समय बिहार के मुजफ्फरपुर में एक अदालत के समक्ष दायर शिकायत में, फिल्म निर्माता महेश भट्ट और मुकेश भट्ट, अभिनेत्री आलिया भट्ट के अलावा, पोस्टर के माध्यम से ‘हिंदू भावनाओं को आहत’ करने का आरोप लगाया गया था।

फिल्म में कैलाश पर्वत के फोटो पर सड़क 2 लिखकर वायरल किया गया है जिसे हिन्दुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने को लेकर परिवाद दाखिल किया गया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि फिल्म निर्देशक महेश भट्ट, निर्माता मुकेश भट्ट अभिनेत्री आलिया भट्ट पर फिल्म सड़क 2 में कैलाश पर्वत की तस्वीर को लेकर फोटो दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि कैलाश पर्वत हिन्दुओं के लिए धर्मिक रूप से महत्वपूर्ण है इसलिए इन लोगों पर केस दाखिल हुआ है।

वीएचपी नेता विजय शंकर तिवारी ने एक अन्य ट्वीट में इस तरफ ध्यान दिलाया कि किस तरह से महेश भट्ट की यह फिल्म भाई-भतीजावाद का समर्थन करती है। उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है, “सुनील दत्त के बेटे हैं संजय दत्त, महेश भट्ट की बेटियाँ हैं पूजा और आलिया, सिद्धार्थ रॉय कपूर के भाई हैं आदित्य, इन सबकी फिल्म है सड़क-2, जो आज रिलीज हुई है, अब महेश भट्ट को बताना होगा कि तुम्हारा और तुम्हारी फिल्म का हश्र खान ब्रदर्स जैसा ही होगा। यही नेपोटिज्म है।”

फिल्म का पहला पोस्टर रिलीज होने के बाद भी आलिया भट्ट और महेश भट्ट को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया गया था। कई यूजर्स ने फिल्म को 2020 का अगला डिजास्टर बताते हुए फिल्म के बॉयकॉट की बात कही थी और अभी भी सोशल मीडिया पर ऐसे ही रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस दौरान ‘अनइंस्टॉल हॉटस्टार’ ट्रेंड होता रहा क्योंकि लोगों का कहना है कि इस फिल्म में केवल नेपोटिज्म के प्रोडक्ट्स भरे पड़े हैं, जिन्हें महेश भट्ट आगे बढ़ा रहे हैं। चूँकि इसे ‘डिजनी हॉटस्टार’ पर रिलीज किया जाना है, इसीलिए इसका विरोध हो रहा है। सोशल मीडिया में कई लोगों ने हॉटस्टार को अनइंस्टॉल कर के स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए। 

सोशल मीडिया पर हर तरफ आलिया भट्ट की फिल्म को बॉयकॉट करने की माँग उठ रही है। सोशल मीडिया पर सड़क 2 को लेकर मुहिम शुरू कर दी गई है। फिल्म के खिलाफ #BoycottBollywoodFilms ट्रेंड कर रहा है। नेपोटिज्म को लेकर हर कोई आलिया पर निशाना साध रहा है और उनकी आने वाली फिल्म को फ्लॉप बोल रहा है।

वहीं दूसरी तरफ एक्ट्रेस ने ट्रोल्स से परेशान हो कर अपना कमेंट सेक्शन बंद कर रखा है, जिसे लेकर भी उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। हर कोई उनसे सवाल कर रहा है कि आखिर उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के कमेंट सेक्शन बंद क्यों कर रखा है।

बता दें कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा के अपने घर में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। 8 जून को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या की थी। खुलासा हुआ है कि इसी दिन सुशांत का घर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चकवर्ती ने छोड़ा था। 8 से 13 जून के बीच महेश भट्ट और रिया चकवर्ती के बीच फोन पर कई बार बात हुई।

सौ या हजार नहीं… 60000 की भीड़ ने किए दंगे: बेंगलुरु से प्रत्यक्षदर्शी ने बताया सब कुछ, दलित MLA की बहन का बुरा हाल

पूर्वी बेंगलुरु में पुल्केशी नगर के विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के एक रिश्तेदार नवीन पर आरोप लगा कि उसने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर फेसबुक पोस्ट डाला है और इसके बाद संप्रदाय विशेष की हज़ारों की भीड़ ने दंगे व आगजनी की। पहले संप्रदाय विशेष की भीड़ में दंगाइयों की संख्या 100 बताई जा रही थी लेकिन ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने एक प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से दावा किया है कि वहाँ 50-60 हजार दंगाई रुके हुए थे।

अपडेट: हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट से 60000 वाली संप्रदाय विशेष की दंगाइयों की भीड़ की बात हटा दी है। लेकिन नीचे आप सिविल डिफेंस से जुड़े लड़के शरीफ का बयान सुन सकते हैं, जिसमें वो स्पष्ट यह कह रहे हैं कि भीड़ की संख्या लगभग 50-60 हजार थी।

विधायक के आवास और केजी हल्ली पुलिस थाने की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात भड़की इस हिंसा में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने न सिर्फ विधायक बल्कि थाने की गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया। डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन पर भी हमला किया गया और शरीफ नाम का प्रत्यक्षदर्शी वहीं पर मौजूद था। उसने पुलिस में भी अपना बयान दर्ज कराया है। वो सिविल डिफेंस का सदस्य है, जो पुलिसकर्मियों को दंगाइयों से बचाने की कोशिश कर रहा था।

उसने स्पष्ट कहा है कि इस पूरे काण्ड में पुलिस की कोई गलती नहीं है बल्कि हिंसा कर रहे दंगाइयों ने सब कुछ किया। उसने कहा कि ये पुलिस थाना उसके लिए मंदिर-मस्जिद की तरह है और वो पुलिस का सहयोग करना चाहता है। अब तक इस मामले में 165 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दोनों पुलिस थानों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। साथ ही पूरे बेंगलुरु में धारा-144 लागू कर दिया गया है।

उधर ‘न्यूज़ 18’ की एक खबर के अनुसार, पूरा पुल्केशी नगर विधानसभा क्षेत्र किसी युद्धस्थल की तरह दिख रहा है, जहाँ चीजें अस्त-व्यस्त पड़ी हुई हैं। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया, उसके मलबे पड़े हुए हैं। घरों की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं और दरवाजे क्षतिग्रस्त हैं। सूनी पड़ी सड़कों पर ईंट और पत्थर पड़े हुए हैं। पुलिस की फायरिंग में 3 लोगों के मारे जाने की ख़बर है।

बुधवार को भी तड़के सुबह तक दंगे जारी रहे और पुलिस से संघर्ष होता रहा। दलित कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति की बहन जयंती ने रोते हुए बताया कि जब ये सब हो रहा था तब वो लोग घर पर नहीं थे। उन्होंने कहा कि सांत्वना की बात ये है कि उनके भाई और परिवार के लोग सुरक्षित हैं। पुलिस थाने की दीवार पर अभी भी काले निशान दिख रहे हैं, जो जलाने के कारण आए हैं।

कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा है कि लूटपाट, दंगा और आगजनी- ये सब आपराधिक कृत्य हैं। उन्होंने कहा कि लोग कुछ भी कहना चाहते हों, कोई भी माँग उठाना चाहते हों, उन्हें ये सब क़ानूनी रूप दे करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को कार्रवाई के लिए खुली छूट दे दी गई है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिसने भी क़ानून को अपने हाथों में लिया है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने की माँग की है।

पता चला है कि मुजम्मिल पाशा के साथ SDPI के दो और नेता साथ थे जो लगातार लोगों को भड़का रहे थे। उसके सहयोगी नेताओं जफ़र और खलील ने संप्रदाय विशेष की भीड़ को पत्थरबाजी करने और थाने के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले करने के लिए भड़काया था। जहाँ पुलिस मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार करने में कामयाब रही है, वहीं बाकी 2 नेता फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज से भी इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

‘जल्दी अपलोड कर’ – बेंगलुरु में संप्रदाय विशेष के लोगों का मंदिर बचाने का ड्रामा अंत के 5 सेकंड में फुस्स, नए वीडियो से खुली पोल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो बेंगलुरु के उस जगह का है, जहाँ पर पैगंबर मुहम्मद पर कथित रूप से आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट को लेकर दंगे भड़के। इसके बाद संप्रदाय विशेष की दंगाई भीड़ ने पुलिस स्टेशन और पुलिस पर हमला किया।

यह वीडियो कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और सोशल मीडिया प्रभारी जाकिया खान ने शेयर किया। 11-12 अगस्त की रात लगभग 2 बजे इस वीडियो को शेयर किया गया। इस वीडियो को शेयर करते हुए जाकिया खान ने दावा किया कि संप्रदाय विशेष के युवकों ने मंदिर को ‘अनियंत्रित भीड़’ से ‘बचाने के लिए’ ‘मानव श्रृंखला’ का निर्माण किया।

इस ट्वीट में बड़ी ही चतुराई से ‘temples’ हैशटैग का इस्तेमाल किया गया और ‘अनियंत्रित भीड़’ के धर्म को छिपाया गया, जबकि ‘मानव श्रृंखला’ बनाने वाले युवकों के धर्म को उजागर किया गया। जबकि सच्चाई यह है कि ‘अनियंत्रित भीड़’ का धर्म भी इस्लाम था।

हिंदुओं ने तो शायद कभी अपनी कल्पना में भी नहीं सोचा था कि अचानक से कोई आ जाएगा और फेसबुक पोस्ट की वजह से उनके मंदिरों को नष्ट कर देगा। हालाँकि, यह ‘मंदिर की रक्षा’ एक खतरा सा मालूम होता है कि मंदिरों को एक ऐसी पोस्ट पर ध्वस्त किया जा सकता है, जिसे संप्रदाय विशेष के लोग अपमानजनक मानते हैं।

यह विशेष रूप से राम मंदिर भूमिपूजन की पूर्व संध्या पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा की गई धमकी के बाद और अधिक भयावह प्रतीत होता है, जहाँ इस्लामी निकाय ने हागिया सोफिया का उदाहरण दिया था और धमकी दी थी कि कैसे एक बार बनी मस्जिद हमेशा एक मस्जिद ही बनी रहेगी।

ट्वीट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लिखा था, “बाबरी मस्जिद थी, और हमेशा एक मस्जिद रहेगी। हागिया सोफिया हमारे लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण वाले फैसले से भूमि का पुनर्निमाण इसे बदल नहीं सकता है। दुखी होने की जरूरत नहीं है। परिस्थति हमेशा के लिए नहीं रहती है।”

एक सोशल मीडिया यूजर मुहम्मद नुम्मिर ने भी इसी वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि यही तो भारत की सुंदरता है। लेकिन मंदिर को बचाने के लिए मानव श्रृंखला का उल्लेख करते हुए नुम्मिर यह आसानी से भूल गए कि हमलावर भी उनके अपने भाई थे।

कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी ने भी दंगाई को ‘भीड़’ के रूप में प्रदर्शित किया, मगर मंदिरों को बचाने के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई’ थी।

बता दें कि निजामी ने 2001 के संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को शहीद बताया था और 5 अगस्त को ‘काला दिन’ घोषित किया था, जिस दिन भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किया था।

समाचार एजेंसी एएनआई ने भी उस इलाके का वीडियो शेयर किया, जिसमें उसने दंगाइयों को ‘आगजनी करने वाला’ बताया।

इंडिया टुडे के कर्मचारी राजदीप सरदेसाई ने भी संप्रदाय विशेष के लोगों को ‘मानव श्रृंखला’ कहा। इन आगजनी करने वालों का कोई धर्म नहीं है, मगर मंदिरों की रक्षा के लिए मानव श्रृंखला बनाने वाले युवकों का धर्म है।

हालाँकि कई सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यह वीडियो फर्जी है। इसे कॉन्ग्रेस के नेताओं ने पीआर स्टंट के लिए बनवाया है, क्योंकि कॉन्ग्रेस नेता ही इस वीडियो को वायरल करने में लगे हुए हैं।

उसी स्थान से एक और वीडियो अब सामने आया है। वीडियो शूट करने वाले व्यक्ति को बैकग्राउंड से किसी को ये कहते हुए सुना जा सकता है कि इसे ‘जल्दी से अपलोड करे।’

यह इस बात की उत्सुकता जागृत करती है कि क्या सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से शहर को उपद्रवियों द्वारा जला दिए जाने के बाद मंदिर की रक्षा के लिए संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा मानव श्रृंखला का वीडियो महज एक पब्लिसिटी स्टंट था।

अब्दुल अब्दुल अब्दुल… सौ में लगा धागा, अब्दुल आग लगा कर भागा

अब्दुल के पीछे पुलिस, पुलिस के पीछे अब्दुल, अब्दुल-अब्दुल-अब्दुल… आगे आगे अब्दुल, पीछे पीछे अब्दुल… कहाँ जा रहा अब्दुल? अब्दुल के दो आगे अब्दुल, अब्दुल के दो पीछे अब्दुल… अक्कड़ बक्कड़ बैंग्लोर बो, अब्दुल शहर को फूँक दो! सौ में लगा धागा, अब्दुल मशाल ले के भागा! मशाल में डाला तेल, अब्दुल जाएगा जेल!

अटकन मटकन दही चटाकन, थाने में बस आग लगावन। अब्दुल अब्दुल अब्दुल… अब्दुल आग लगाएगा, फिर ह्यूमन चेन बनाएगा, फिर फोटो भी खिंचवाएगा, फिर अच्छा अब्दुल कहलाएगा! पर अब्दुल भाई ये तो बोलो, अपने दिल के राज तो खोलो, मंदिर को बचा रहे थे किस से? जलाने वाले थे किस मजहब के!

माँ, कह एक कहानी, बेटा क्या समझ लिया है तूने मुझको अपनी नानी? कह माँ, कह लेटी ही लेटी, अब्दुल था या थी सलमा रानी? माँ, कह एक कहानी! तू है हठी मानधन मेरे! सुन, बैंग्लोर में साँझ के बेरे, तात भ्रमण पर निकले तेरे, आई व्हाट्सएप्प पर वाणी। आई व्हाट्सऐप पर वाणी? टेक्नीकल हुई कहानी। व्हाट्सएप्प जब अब्दुल ने पाया, पढ़ कर उसका मन हर्षाया, उसने तब मशाल उठाया, जम कर उसको तेल पिलाया, तेल नहीं था पानी, अब बढ़ चली कहानी! अब्दुल ने तब भीड़ जुटाई, झूठी सबको बात बताई, बोला कर लो सब तैयारी, फूँकना है सब अबकी बारी, हिंसक हुई कहानी? हाँ, बेटे हिंसक हुई कहानी! एक हजार अब्दुल तब आए, कोई पत्थर-ईंट उठाए, पेट्रोल बम भी साथ में लाए, सबने तब दंगे भड़काए, खून बहा जैसे था पानी, रक्तिम हुई कहानी! खूनी हुई कहानी? नॉट अ गुड कहानी!

उठो लाल अब आँखें खोलो, पेट्रोल लाई हूँ मुँह को धो लो। बीती रात, सलमा है आई, कैसी तूने आग लगाई, कपड़े काले हुए हैं जल कर, लिबरल चहक रहे ट्विटर पर, ह्यूमन चेन लगे अतिसुंदर। बैंग्लोर ने क्या जली छवि पाई, अब्दुल तूने ही आग लगाई! भोर हुई सूरज अग आया, जल में है कलुषित सी छाया। तेरे मशाल की किरणें आईं, थाने जले, समुदाय मुस्काई। इतना सुंदर समय मत खोओ, अब्दुल प्यारे अब मत सोओ?

नमस्कार,
मैं बकैत कुमार! बैंग्लोर में दंगे हो गए, कॉन्ग्रेस के विधायक के भतीजे ने किसी हिन्दूघृणा से रिसते पोस्ट के नीचे कोई दूसरा कमेंट किया और अल्पसंख्यक समुदाय को बुरा लग गया। जिस हिसाब से आजकल रेखाएँ क्षीण और धुँधली होती जा रही हैं, भाजपा वालों के काम भी कॉन्ग्रेस वाले करते नजर आ रहे हैं। हालाँकि, हमारे चैनल या रिपोर्टरों की फौज ने उस भतीजे के बचपन के दोस्तों के फेसबुक पोस्ट निकालने शुरु कर दिए हैं कि कोई भाजपाई या बजरंग दल का निकल आए तो हम आपको कह सकें कि वास्तव में भतीजा तो ठीक-ठाक था, लेकिन उसी भाजपाई के संगत में आ कर साम्प्रदायिकता फैलाने लगा था। हम लगे हुए हैं, जैसा भी होगा, कभी भी फेसबुक आदि पर सूचित करेंगे आपको।

खैर, बुरा इसलिए लगा क्योंकि बुरा लगने पर सिर्फ उनका ही हक है। ‘आहत होना’ या ‘संवेदनशील मैटर’ आदि का मसला भारतीय समाज के उन संसाधनों जैसा है जिस पर मनमोहन सिंह ने कहा था कि इस पर पहला हक अल्पसंख्यकों का ही है। हिन्दू लोग कट्टर होते हैं। अब किसी ने कृष्ण को थोड़ा सा बलात्कारी कह ही दिया तो क्या हो गया? अनभिज्ञ होगा, पढ़ता-लिखता नहीं होगा, कह दिया थोड़ा सा। अब कह ही दिया तो बात बढ़ाने की क्या जरूरत थी? क्या एक अल्पसंख्यक संविधान प्रदत्त अधकारों का प्रयोग नहीं कर सकता?

क्या वो एक पोस्ट भी नहीं कर सकता? थोड़ा सा कह दिया तो क्या हो गया? मैं भी हिंदू हूँ, दिन भर फेसबुक पर ही बकैती लिखता रहता हूँ, लेकिन मुझे आपने देखा कहीं लिखते हुए कि किसकी कितनी बीवियाँ थीं, कौन किस बीवी के साथ, कब क्या कर रहा था? नहीं, लिखा क्योंकि मैं 2014 के बाद से कटवा-छिलवा के लिबरल हो गया हूँ। मैंने तय कर लिया कि कब लिखना है, क्या लिखना है। ऐसे ही मगशैसे नहीं मिल जाता है, आत्मा बेचनी पड़ती है। हें, हें, हें…

आप ही बताइए कि अब्दुल कहाँ जाएगा? तीन तलीक छीन लिया, उसके कौमी भाइयों के नरसंहार की छूट पर पाबंदी लगा दी 370 हटा कर, राम मंदिर में ये मान लिया कोर्ट ने कि नीचे मंदिर था, फिर CAA ले आए… ये सारी बातें अब्दुल को पसंद नहीं इसलिए अब्दुल भारत के बड़े शहरों को अपनी मशाल से जला देगा।

आप ही बताइए कि सारे फैसले अल्पसंख्यकों के विरोध में ही जा रहे हैं तो वो क्या करेंगे? कहाँ जाएँगे? क्या उनके द्वारा फैसला सड़कों पर नहीं होना चाहिए? बिलकुल होना चाहिए क्योंकि सड़क का टैक्स तो सब भरते हैं, किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़े ही है?

कुछ लोग कह रहे हैं कि घंटे भर में भीड़ जुटा ली गई! वाह मोदी जी, वाह! मतलब कोई समुदाय व्यवस्थित है, ऑर्गेनाइज्ड है, व्हाट्सऐप पर संगठित है, डिसिप्लिन में रहता है, एक आवाज लगाने पर लोगों के सुख-दुख में निकल आते हैं सड़कों पर इंसाफ की उम्मीद में… इससे भी दिक्कत है लोगों को? ये फासीवाद नहीं है तो और क्या है? ये आपातकाल नहीं है तो और क्या है? ये अत्याचार हो रहा है… बचाओ, बचाओ… बिनोद-बिनोद… बिनोद को बचाओ! नहीं-नहीं, अब्दुल को बचाओ!

सताया हुआ अब्दुल, डरा हुआ अब्दुल, खौफजदा अब्दुल, सलमा का आशिक अब्दुल, अहमद का जानूँ अब्दुल… अब्दुल ही अब्दुल, तकिए ही तकिए, अल तकिया ही अल तकिया, फ्लोर ही फ्लोर, तौलिए ही तौलिए…

आखिर अब्दुल के सामने विकल्प क्या थे इस फासीवादी समाज में? जब सारे तंत्र आपके विचारों के विपरीत हो जाएँ तो मन के विकार बाहर आएँगे ही। अब्दुल ने आत्मनिर्भर भारत के नारे को शब्दशः लिया और घर ही में बम बनाया, तौलिए को तेल से भिगा कर मशाल बना ली, वाइपर के डंडे पर तौलिए को लपेट दिया और बताया कि शांतिप्रिय मजहब के खिलाफ कोई पोस्ट-कमेंट बर्दाश्त नहीं की जाएगी, भले ही वो हिन्दुओं के खिलाफ लिखे पोस्ट के जवाब में हो।

अब्दुल की सोच तो यह है कि हिन्दुओं के भगवान को अब्दुल के भाई या सलमा के जाने जिगर जानेमन सलीम ने बलात्कारी कह दिया तो उस पर प्रतिक्रिया देना हिन्दुओं का काम है, अब्दुल को इससे क्या? अब्दुल को बस इससे मतलब है कि उसके मजहब के किसी बात को ले कर तो किसी ने कुछ नहीं लिखा न। हिन्दू आग नहीं लगाते, बम नहीं बना सकते, तो ये उनकी समस्या है, अब्दुल की नहीं। अब्दुल तो मुद्रा लोन ले कर कुटीर उद्योग लगा कर मिनटों में मशाल और बम बना लेता है।

किसी किताब में पढ़ा था कि अगर आप कोई काम दस हजार घंटे करेंगे तो आप परफैक्ट हो जाएँगे। हिन्दुओं ने ये पूछने में परफैक्शन पाई है कि ‘आज लिबरल चुप क्यों हैं’, जबकि अब्दुल गुल के डिब्बे में बारूद रख कर, सुतली बाँध कर धीरे से रैक पर रख देता है! अब्दुल के घर में भले ही अँधेरा रहे, लेकिन वो कनस्तर का तेल मशाल पर डाल कर मजहब की रक्षा के लिए बाहर निकल जाएगा। हिन्दू का हेडेक अब्दुल काहे लेगा?

और हाँ, ये बैंग्लोर है कहाँ? है भी कि नहीं? क्या आप गए हैं देखने कि भारत में ऐसी जगह है या फिर बस एक समुदाय के लोगों को निशाना बनाने के लिए ऐसी एक जगह गढ़ दी गई, कुछ तस्वीरें दिखा दी गईं और आप एक समुदाय पर साम्प्रदायिक टिप्पणियाँ करने लगे? जैसा कि सोशल मीडिया यूजर डीके उर्फ धैर्यकांत ने लिखा है कि जब तक ऑल्ट न्यूज का फैक्टचेक इस पर नहीं आता, मैं, बैंग्लोर के दंगे क्या, बैंग्लोर इस देश में है भी कि नहीं, ये भी नहीं मानूँगा। बात करते हैं!

अंत में, ऐसे साहित्यिक ह्यूमन चेन मौके पर, दो गजलें सुनाना चाहूँगा। जैसा कि आहत इंदौरी कह कर गए हैं (ये मैं कर के दिखाऊँगा):

मेरे एक-एक शेर करोड़ों रुपयों के हैं, इसलिए किसी दो कौड़ी के दंगाई समुदाय का नाम ले कर जीभ गंदा नहीं करूँगा। अर्ज किया है… मेरा जहर आप तक पहुँचे विश्वास भाई तो हिन्दू होने के बाद भी दाद जरूर दीजिएगा कि…

मशाल लाए हो? इधर रख दो
देख रहे हो थाना? खाक कर दो

दस मंदिर जलाने के बाद,
ह्यूमन चेन दिखा कर सब साफ कर दो

बैंग्लोर हो कि दिल्ली या बंबई
मजहब के नाम पर ‘पाक’ कर दो

अरे! बुज्दिलों की कौम हो क्या?
राह में जो भी आए, हलाक कर दो

और इस गजल का अंतिम शेर देखें के…
हमारे भी बाप का है हिन्दोस्तान
जब जी चाहे, जला कर राख कर दो

एक और गजल देखिए कि,

सलमा बुलाती है, मगर जाने का नय
शहर फूँक देने का, पर उससे पहले इश्क लड़ाने का नय

प्यार, इक्स, प्रेम, मोहब्बत, सेस्क तो होतो रहेगो ससुर
चुपके से मंदिर जलाने का, पर कैमरे के सामने दिखाने का नय

वामपंथी तो अपनी मुट्ठी में है, लिब्रांडुओं की मर गई मैया
तुमको बस आग लगाने का, मीडिया से खौफ खाने का नय

ह्यूमन चेन बनाते रहने का, फोटो खिंचवाते रहने का
वायर, स्क्रॉल, NDTV खुद करेगा अपना काम, गिड़गिड़ाने का नय

विक्टिम कार्ड निकाल के, तलवार-मशाल ले कर उतर जा
कोई पुलिस आए, सरकार आए, इन सब से डर जाने का नय

और यहाँ, एक जहरीला शेर देखें के…
हाथ जल जाए अपना, तो जल जाने दे
लेकिन उनके घरों को राख किए बिना, अपने घर वापस आने का नय

और अम्मी कर रही होगी घर पर इंतज़ार
हलाल गोश्त खाने का, शर्माने का नय

गुंजन सक्सेना में दिखाया भारतीय वायु सेना की खराब इमेज: नहीं सुधर रहा बॉलीवुड, IAF ने दागा लेटर

भारतीय वायु सेना वो संस्था है, जहाँ पुरुष और महिला दोनों को समान अवसर प्रदान किया जाता है। लेकिन बॉलीवुड को इससे क्या मतलब! वो तो धनबाद की कहानी में भी स्विट्जरलैंड घुसाता आया है। ठीक वैसे ही तड़का लगाने के लिए इंडियन एयर फोर्स की कहानी गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल (Gunjan Saxena: The Kargil Girl) में भी मसाला डाल दिया।

गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल (Gunjan Saxena: The Kargil Girl) में ‘अनुचित नकारात्मक चित्रण’ को लेकर भारतीय वायु सेना ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से लिखित शिकायत की है। श्रीदेवी की बेटी जाह्णवी कपूर की फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ आज नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही है।

इंडियन एयर फोर्स ने सेंसर बोर्ड को लिखे अपने पत्र में बातें साफ-साफ समझाईं। IAF के अनुसार, “नेटफ्लिक्स और धर्मा प्रोडक्शंस ने भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व प्रामाणिकता के साथ करने की सहमति व्यक्त की थी ताकि यह फिल्म अगली पीढ़ी को वायु सेना में जॉइन करने के लिए प्रेरित करने में मदद करती।”

IAF के अनुसार जब फिल्म का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया, तो यह देखा गया कि इसमें भारतीय वायुसेना को अनुचित ढंग से नकारात्मक तरह से दिखाया गया है। गुंजन सक्सेना मतलब श्रीदेवी की बेटी जाह्णवी कपूर (बॉलीवुड में नेपोटिजम) के स्क्रीन कैरेक्टर को महिमामंडित करने के लिए फिल्म में जबरन ऐसी परिस्थितियाँ प्रस्तुत की गईं, जो वायु सेना की कार्य संस्कृति के विपरीत है।

गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल (Gunjan Saxena: The Kargil Girl) में यह दिखाया गया है कि इंडियन एयर फोर्स पुरुष और महिला में फर्क किया जाता है। जबकि वास्तविकता में ऐसा कुछ भी नहीं है। इसी को लेकर IAF ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) को पत्र लिख कर आपत्ति जताई है।

सोपोर में सेना पर घात लगाकर आतंकी हमले में एक जवान घायल, जैश आतंकी आजाद अहमद आज पुलवामा में हुआ ढेर

उत्तरी कश्मीर के बारामूला-श्रीनगर मार्ग पर ह्यागम क्रॉसिंग के पास भारतीय सेना के काफिले पर घात लगाकर बैठे आतंकवादियों ने हमला किया है। बताया जा रहा है कि बारामूला जिले के सोपोर के ट्रूमगुंड-ह्यगाम क्रासिंग (Trumgund Hygam crossing) पर संदिग्ध आतंकियों ने आर्मी की पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला किया जिसमें सेना के एक जवान को चोटें आईं हैं। इस हमले के फ़ौरन बाद घायल जवान को तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकवादियों ने सेना, CRPF और पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी पर ह्यागम में एक होटल के पास फायरिंग की, जिसकी जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी फायर किया, लेकिन आतंकवादी वहाँ से भागने में सफल रहे। इस बारे में अभी तक किसी प्रकार के आधिकारिक बयान का इन्तजार है।

‘आज तक’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आतंकियों की फायरिंग में सेना के एक जवान को चोटें आई हैं और उनका इलाज किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस हमले के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है और तलाशी ली जा रही है।

पुलवामा एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने 1 आतंकी को मार गिराया, 1 जवान बलिदान

गौरतलब है कि बुधवार (अगस्त 12, 2020) की सुबह ही एक अन्य मुठभेड़ में पुलवामा एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने 1 आतंकी को मार गिराया है। वहीं, इस मुठभेड़ के दौरान 1 जवान के बलिदान होने की भी खबर सामने आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षाबलों को पुलवामा के कमराज़ीपोरा इलाके में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। जिसके बाद पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप, राष्ट्रीय राइफल्स और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने बुधवार की सुबह इलाके में घेराबंदी करके सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

इस दौरान सुरक्षाबलों ने आतंकियों को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई में फायरिंग करते हुए एक आतंकी को मार गिराया।

हालाँकि, इस ऑपरेशन के दौरान एक जवान वीरगति को प्राप्त हुए। मारे गए आतंकी की पहचान आजाद अहमद/आजाद लालहरी (Azaad Lalhari) के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि आजाद अभी हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन में भर्ती हुआ था। सुरक्षाबलों द्वारा इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है।

बेंगलुरु दंगा: PFI समर्थित SDPI के दंगाइयों की गिरफ्तारी पर ओवैसी से लेकर कॉन्ग्रेस में पसरा मौन, वोट बैंक का चक्कर

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान के कारण व्यापक दंगे और आगजनी हुई। संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा मंगलवार (अगस्त, 11, 2020) देर रात हुई इस हिंसा में प्रमुख विपक्षी कॉन्ग्रेस इसके जवाब को लेकर दुविधा में नजर आ रही है और अभी तक भी यह निर्णय नहीं ले पार ही है कि आखिर उसे दंगों पर क्या राय रखनी है।

राज्य के अधिकांश कॉन्ग्रेस नेताओं ने इन दंगों पर चुप्पी साध ली है। जिसके पीछे एक कारण इन दंगों में इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा के संगठन PFI द्वारा समर्थित SDPI की संलिप्तता को माना जा सकता है।

वहीं, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने आखिरकार इन दंगों में बेहद चालाकी से अपनी जुबान खोलते हुए कहा है कि बेंगलुरु में हुई हिंसा और ‘आपत्तिजनक सोशल मीडिया’ पोस्ट बेहद निंदनीय हैं। इसके साथ ही ओवैसी ने कहा है कि सभी लोगों को शांति से पेश आना चाहिए।

कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने एक बयान में इस हिंसा में साजिश की आशंका जताते हुए इसके पीछे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) का हाथ बताया है। बेंगलुरु पुलिस ने डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन पर हुई हिंसा मामले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के नेता मुजम्मिल पाशा (Muzammil Pasha) को गिरफ्तार भी कर लिया है। मुज़म्मिल के अलावा, एक अन्य एसडीपीआई कार्यकर्ता अयाज़ भी दंगाइयों को उकसाने के लिए जाँच के दायरे में है।

ज्ञात हो कि ये वही एसडीपीआई है, जिस पर दिल्ली दंगों में CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान यह आरोप लगा था कि इसके नेता हिंसा भड़काने में इस्लामिक कट्टरपंथी पीएफआई का सहयोग कर रहे थे। पीएफआई और एसडीपीआई नाम भले ही अलग हों, लेकिन इनके पीछे आइडलॉजी एक ही है।

हालाँकि, पीएफआई के कागजी दस्तावेज आतंकी संगठन सिमी से सम्बन्ध से इनकार करते हैं लेकिन ख़ुफ़िया एजेंसियाँ अक्सर खुलासा करती आई हैं कि पीएफ़आई की जड़ों में सिमी का जहर मौजूद है। एसडीपीआई पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया द्वारा शुरू की गई एक कट्टरपंथी राजनीतिक पार्टी है।

कर्नाटक में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेता अमित शाह ने दावा किया था कि कॉन्ग्रेस द्वारा चुनाव मैदान में उतारे गए दो उम्मीदवार वास्तव में एसडीपीआई के सदस्य थे।

अब बेंगलुरु दंगों में एसडीपीआई की संलिप्तता पर भी अभी तक कॉन्ग्रेस ने चुप्पी साध रखी है, जिसके पीछे प्रमुख वजह यह हो सकती है कि यहाँ पर कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक वोटबैंक के मामले में एसडीपीआई के साथ सीधे टकराव में है। कुछ रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

कर्नाटक में एसडीपीआई की मौजूदगी और इसके प्रसार से कॉन्ग्रेस को होने वाले नुकसान के बारे में इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहाँ पर कॉन्ग्रेस के विरोध में एसडीपीआई चुनाव लड़कर कॉन्ग्रेस को उन सीटों पर भी नुकसान पहुँचा चुकी है, जहाँ कॉन्ग्रेस को सीट जीतने की उम्मीदें थीं।

ऐसे में सम्भव है कि कॉन्ग्रेस इसी एसडीपीआई के साथ शायद ही कोई जोखिम लेने के मूड में हो! अपने बढ़ते नेटवर्क के माध्यम से, SDPI यहाँ पर लोकप्रियता हासिल करने में कामयाब रही है, जिससे संप्रदाय विशेष के वोटों पर कॉन्ग्रेस की पकड़ का खतरा पैदा हो गया।

ऐसे में यदि कॉन्ग्रेस जोर-शोर से इस हिंसा की निंदा करती है, तो यह डर है कि वह एसडीपीआई का रास्ता ही साफ़ कर रही होगी, जो पहले से ही किसी भी तरह अल्पसंख्यक वोटों और समुदाय के स्वामित्व पर नजर गड़ाए हुए है। और यदि कॉन्ग्रेस इन दंगों की निंदा नहीं करती है, तो बहुसंख्यक वर्ग कॉन्ग्रेस से दूर जा सकता है।

यही वजह है कि राज्य के अधिकांश नेता, जिनमें विपक्ष के नेता सिद्धारमैया और दर्जनों अन्य नेता भी शामिल हैं, ने कल रात से इस घटना पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालाँकि, कुछ मुट्ठी भर नेताओं ने अभी तक ट्वीट के जरिए इसकी निंदा की है।

कॉन्ग्रेस के संप्रदाय विशेष के नेता भी, जो कि एसडीपीआई को अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए खतरे के रूप में देखते हैं, वे एसडीपीआई की इस सांप्रदायिक राजनीति पर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं, और बस दबी जुबान से इन दंगों के बारे में बोल रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, दलित कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर किए गए हमले, दंगे, आगजनी और पत्थरबाजी और हिंसा के मामले में बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने कहा है कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

डीजे हल्ली एवं केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा है और शहर के अन्य हिस्सों में धारा 144 लगाई गई है। किसी भी प्रकार की हिंसा की आशंका के चलते शांति बनाए रखने के लिए आरएएफ, सीआरपीएफ एवं सीआईएसएफ की टुकड़ियाँ भी पहुँच रही हैं।

कमल पंत ने कहा कि इस हिंसा में पत्थरबाजी की वजह से करीब 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस के वाहनों को आग के हवाले किया गया। हिंसा करने वाले लोगों का एक समूह एक बेसमेंट में दाखिल होकर वहाँ 200 से 250 वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस हिंसा मामले की जाँच की जा रही है।

जो बना CAA विरोधी उपद्रव का गढ़, जहाँ नसीरुद्दीन शाह ने उगला था जहर: बेंगलुरु में कट्टरपंथी भीड़ ने वहीं किया दंगा

भारत के लिबरल गैंग जिस भी चीज का हद से ज्यादा गुणगान करे, उसके बारे में समझ जाना चाहिए कि वो उतना ही ज्यादा खतरनाक है। उदाहरण के लिए दिल्ली के शाहीन बाग को ही ले लीजिए। इसी क्रम में बेंगलुरु के बिलाल बाग को भी प्रचारित किया गया। ये वही क्षेत्र है, जिस क्षेत्र में मंगलवार (अगस्त 11,2020) की रात दंगे भड़क गए और कॉन्ग्रेस के दलित विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वहाँ नसीरुद्दीन शाह भी पहुँचे थे।

किस तरह से बेंगलुरु के इस इलाके में इस्लामिक कट्टरवाद को ऊर्जा मिलती रही, इसे समझने के लिए हमें 5 महीने पहले जाना होगा। उसी समय बिलाल बाग में महिलाओं के सीएए विरोधी प्रदर्शन का काफी महिममंडन किया जा रहा था। उसे दक्षिण भारत का शाहीन बाग साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। तभी बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी वहाँ पहुँचे थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया था।

बेंगलुरु: जब नसीरुद्दीन शाह पहुँचे थे CAA विरोधी प्रदर्शन में

गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी और अभिनेता नसीरुद्दीन शाह फरवरी 14, 2020 के दिन वहाँ पहुँचे थे। उस दिन जुमा भी था। रात के 9 बजे उपद्रवियों को संबोधित करने पहुँचे नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि महिलाओं को प्रदर्शन करते हुए देख कर उन्हें बोलने का साहस मिला है। नसीरुद्दीन शाह ने उन महिलाओं को बहादुर बताते हुए कहा था कि उन्हें सड़क पर उतरने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

जिग्नेश मेवाणी तो एक कदम और आगे बढ़ गए थे। उन्होंने वहाँ प्रदर्शन कर रही महिलाओं के ‘चेहरे की चमक’ की बात करते हुए दावा कर दिया था कि अगर पीएम मोदी ने उन्हें एक बार भी देख लिया तो वो इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने उन महिलाओं को क्रांतिकारी करार देते हुए कहा कि वो उनके ज्वलंत चेहरे देखने आए हैं। उन्होंने इस दौरान वहाँ पटना और दिल्ली में महिलाओं द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों का जिक्र किया।

क्या आपको पता है कि ये बिलाल बाग कहाँ स्थित है? ये Tannery Road के पास है, जो केजी हल्ली थाना क्षेत्र से 5 किलोमीटर से भी कम की दूरी पर है। वही थाना क्षेत्र, जहाँ पुलिस की गाड़ियों तक को जला डाला गया। फिलहाल वहाँ कर्फ्यू लगा हुआ है। अब ये साबित हो रहा है कि भारत के विभिन्न स्थानों में, जो सीएए विरोधी प्रदर्शनों का हब बना, वहाँ दंगे भड़क रहे हैं। दिल्ली के बाद बेंगलुरु इसका उदाहरण है।

सरकारों ने इन महिलाओं को सड़क जाम करने से लेकर भारत-विरोधी नारे लगाने तक छोड़ दिया और उन्हें उपद्रव करने दिया, जिसका अंजाम आज जनता और पुलिस दोनों को ही भुगतना पड़ रहा है। अगर समय रहते इन उपद्रवियों पर कार्रवाई की गई होती तो शायद नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के दंगे और नहीं होते और केजी हल्ली में एक छोटे से फ़ेसबुक पोस्ट पर इतना बड़ा हंगामा नहीं होता। इसे समय रहते रोका जा सकता था।

जहाँ तक बिलाल बाग की बात है, वहाँ 200 महिलाओं ने डेरा डाला हुआ था। शाहीन बाग की तरह ही वहाँ महिलाओं को उनके छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिठाया गया था। बिलाल मस्जिद के सामने पिलाना रोड को ब्लॉक कर के रखा गया। मीडिया में कई ऐसे लेख ये थे, जिनमें यहाँ की महिलाओं के बयान लेकर उन्हें बहादुर साबित करने का प्रयास किया गया था। सरकार इन चीजों को नजरअंदाज करती रही।

क्या हुआ बेंगलुरु में भड़के दंगे में

केजी हल्ली थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के मामले में ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)’ के नेता मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि वो इन दंगों का मास्टरमाइंड है। मुजम्मिल पाशा ने ही इन दंगों को भड़काया था। SDPI का नेता मुजम्मिल पाशा नवीन नामक व्यक्ति के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज करवाने केजी हल्ली थाना पहुँचा था।

फिर उसने भड़काऊ भाषण देते हुए पुलिस थाने के बाहर खड़ी कट्टरपंथी भीड़ को सम्बोधित किया। सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है। बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है।

ज्ञात हो कि मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात पूर्वी बेंगलुरु में दंगे और आगजनी का भीषण नज़ारा देखने को मिला। केजी हल्ली, डीजे हल्ली और पुल्केशी नगर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। 1000 से भी अधिक की कट्टरपंथी भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। उनका आरोप था कि विधायक के रिश्तेदार ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट किया है।

पैगंबर मुहम्मद पर खबर, भड़के दंगे और 17 लोगों की मौत: घटना भारत की, जब दो मीडिया हाउस पर किया गया अटैक

इस्लामिक भीड़ का आतताई चेहरा एक बार फिर बेंगलुरु में मंगलवार को देखने को मिला। अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच संप्रदाय विशेष के 1000 से भी अधिक ने एक पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया।

बताया जा रहा है कि एक स्थानीय विधायक के किसी संबंधी ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर पैगंबर मुहम्मद को लेकर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। जिसके बाद समुदाय विशेष की भीड़ इतनी भड़क गई कि उन्होंने पहले उस विधायक के घर पर हमला बोला। फिर वाहनों में आग लगाई और बाद में थाने को ही जला डाला।

यह पहली बार नहीं है, जब पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के बाद इस्लामिक भीड़ का ऐसा रूप देखने को मिला हो। इतिहास के पन्नों में ऐसे कई मामले दर्ज हैं, जब लोकतंत्र की दुहाई देने वाले समुदाय विशेष के लोग पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी सुनकर कानून को भूल गए और भीषण हिंसा को अंजाम दिया गया।

इनमें कुछ मामले बहुत हालिया हैं और कुछ थोड़े पुराने हैं। आज हम उन 5 मौकों का जिक्र करेंगे, जब पैगंबर मुहम्मद के नाम पर इस्लामिक कट्टरता का भयावह चेहरा देखने को मिला।

कमलेश तिवारी हत्याकांड

18 अक्टूबर 2019 को हिंदू महासभा के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की उनके आवास स्थित कार्यालय में बर्बरता से हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद मालूम चला था कि इसके पीछे कट्टरपंथियों का हाथ है, जो बहुत पहले से तिवारी के खिलाफ़ साजिश रच रहे थे। कमलेश तिवारी का अपराध केवल यह था कि उन्होंने साल 2015 में पैगंबर मुहम्मद पर विवादित टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद से ही उन्हें मारने के प्रयास और ऐलान किए जा रहे थे।

शार्ली ऐब्दो मैग्जीन में जब पैगंबर पर कार्टून छापने से गई 17 लोगों की जान

शार्ली ऐब्दो नामक मैग्जीन कुछ साल पहले पैगंबर मुहम्मद का कार्टून छापने के कारण चर्चा में आई थी। इसके बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों ने उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया। साल 2011 में इसके कार्यालय पर गोलीबारी हुई और बम फेंके गए। फिर 7 जनवरी, 2015 को कट्टरपंथियों ने इसे एक बार दोबारा निशाना बनाया और अल्लाह हू अकबर कहते हुए 12 लोगों को मौत के घाट उतार गए। इनमें तीन पुलिसकर्मी थे।

पैगंबर मुहम्मद की शादी पर आधारित किताब रंगीला रसूल के कारण गई प्रकाशक की जान

साल 1924 में अनाम लेखक के नाम से रंगीला रसूल नाम की एक किताब प्रकाशित हुई थी। इस किताब में मुहम्मद साहब और एक औरत के परस्पर संबंधों का कथानक था। जिसके कारण संप्रदाय विशेष के लोगों ने इसका काफी विरोध किया और इसके प्रकाशक को वैमनस्यता फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन प्रकाशक के रिहा होते ही इल्मुद्दीन नामक कट्टरपंथी ने महाशय राजपाल की हत्या कर दी और इल्मुद्दीन को बचाने के लिए केस फिर मुहम्मद अली जिन्ना ने लड़ा।

700 वर्ष पुरानी किताब से कोट लेने पर समाचार पत्र ने देखा संप्रदाय विशेष की भीड़ का चेहरा

साल 2000 में न्यू इंडियन एक्सप्रेस नामक समाचार पत्र ने 700 साल पुरानी एक किताब से एक कोट लेकर अपना आर्टिकल लिखा। जिसके कारण संप्रदाय विशेष की भीड़ भड़क गई और बेंगलुरू के इस अखबार ने संप्रदाय विशेष की भीड़ का एक भयानक चेहरा देखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 1000 की भीड़ ने सिर्फ़ आर्टिकल में पैगंबर का नाम आने से कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था और 20 उलेमाओं ने बाद में अखबार के चीफ रिपोर्टर से मिलकर माँग की कि लेख लिखने वाले अखबार के सम्पादकीय सलाहकार टीजेएस जॉर्ज माफी माँगें।

साल 1986 में दंगा, 17 की गई थी जान

साल 1986 में डेक्कन हेराल्ड को ऐसे आक्रोश का सामना करना पड़ा था, जब एक छोटी से स्टोरी के कारण देश में साम्प्रदायिक हिंसा भड़क गई और 17 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी। बाद में अखबार ने रेडियो और टेलीविजन के जरिए समुदाय से माफी माँगी। इस घटना में भी संप्रदाय विशेष के लोगों को स्टोरी में यही लगा था कि लिखने वाले ने पैगंबर का अपमान किया है।

बेंगलुरु दंगा के पीछे SDPI का हाथ: मुजम्मिल पाशा ने हिंसा भड़काने के लिए बाँटे थे रुपए, 165 हिरासत में

पूर्वी बेंगलुरु के पुल्केशी नगर के दलित कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर ओर संप्रदाय विशेष की 1000 से भी अधिक की भीड़ ने हमला कर आगजनी, पत्थरबाजी और दंगे किए, जिसके बाद इलाक़े में कर्फ्यू लगा दिया गया है। केजी हल्ली थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के मामले में ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)’ के नेता मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि वो इन दंगों का मास्टरमाइंड है।

मुजम्मिल पाशा ने ही इन दंगों को भड़काया था। स्थानीय ‘सुवर्ण न्यूज़’ के अनुसार, SDPI का नेता मुजम्मिल पाशा नवीन नामक व्यक्ति के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज करवाने केजी हल्ली थाना पहुँचा था। फिर उसने भड़काऊ भाषण देते हुए पुलिस थाने के बाहर खड़ी संप्रदाय विशेष की भीड़ को सम्बोधित किया। इसके बाद वो कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास के आवास पर हिंसक भीड़ के साथ प्रदर्शन करने पहुँचा।

इस दौरान मुजम्मिल पाशा के साथ SDPI के दो और नेता साथ थे जो लगातार लोगों को भड़का रहे थे। उसके सहयोगी नेताओं जफ़र और खलील ने संप्रदाय विशेष की भीड़ को पत्थरबाजी करने और थाने के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले करने के लिए भड़काया था। जहाँ पुलिस मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार करने में कामयाब रही है, वहीं बाकी 2 नेता फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज से भी इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि दंगाइयों को रुपए बाँटे गए थे (फोटो साभार: सुवर्ण न्यूज़)

पुलिस को पता चला है कि पाशा दंगाइयों के बीच रुपए बाँट रहा था, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। सीसीटीवी फुटेज से ये भी पता चला है कि पुलिस पर किए गए हमले की साजिश पहले ही अच्छी तरह से रच ली गई थी। सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए पहले ही दंगाइयों को पूरी साजिश के बारे में बता दिया गया था और वो व्यवस्थित तरीके से वहाँ आए थे। पाशा ने BBMP का चुनाव भी लड़ा था लेकिन वो हार गया था।

वहीं एक अन्य आरोपित खलील स्थानीय कॉर्पोरेटर का पति है। दंगाइयों में से तीन की मौत हुई है, जिनमें से दो के नाम वाजिद और यासीन हैं। इन सबका कोरोना टेस्ट कर के पोस्टमॉर्टम किया जाएगा और फिर लाश परिवारों को सौंप दिए जाएँगे। अब तक 165 लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया जा चुका है। राज्य के गृह मंत्री ने सीएम येदियुरप्पा को घटना से अवगत कराया गया है, जिसके बाद उन्होंने कड़ी कार्रवाई की बात कही।

कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने भी कहा है कि ये एक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया दंगा था। उनकी मानें तो फेसबुक पोस्ट के 1 घंटे के भीतर ही हज़ारों लोग जमा हो गए और उन्होंने 200-300 गाड़ियाँ फूँक डाली व विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। मंत्री ने कहा कि साजिशन इस हिंसा को अंजाम दिया गया है और इसके पीछे SDPI का हाथ है।

सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है। बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस प्रकार की भड़काऊ हरकतों और अफवाहों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 10 मिनट तक पुलिस ये सब होते हुए देखती रही और उसने कुछ नहीं किया। वो असहाय नज़र आ रही थी। यहाँ तक कि आधी रात के बाद भी पुलिसकर्मी दंगाइयों से काफी कम संख्या में थे और संघर्ष कर रहे थे। कमिश्नर कमल पंत भी घटनास्थल पर पहुँचे लेकिन फिर पुलिस की एक गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पुलिस ने विधायक अखंड श्रीनिवास के रिश्तेदार नवीन को गिरफ्तार कर लिया है।