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राम मंदिर के साथ Happy Independence Day का पोस्टर: पुलिस ने उतार दिया हैदराबाद में, BJP ने की जाँच की माँग

हैदराबाद में एक मौजूमजही मार्केट है। यहाँ एक पोस्टर लगाया गया। पोस्टर के बीच में राम मंदिर की फोटो है, उसके नीचे Happy Independence Day लिखा है। एक कॉर्नर पर PM मोदी के साथ स्वतंत्रता सेनानियों की फोटो है जबकि दूसरे कॉर्नर पर गृहराज्य मंत्री की फोटो। पोस्टर पर चर्चा से पहले इसे देख लिया जाए एक बार।

वो पोस्टर जिस पर है बवाल (फोटो साभार: इंडिया TV)

हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (GHMC) ने अब इस पोस्टर को हटा दिया है। क्यों? पोस्टर देख कर समझ पाना मुश्किल है। लेकिन प्रशासन ने ऐसा किया। इसलिए किया क्योंकि प्रशासन को इसके बारे में लिखित शिकायत मिली थी। शिकायत किससे मिली थी? जिससे मिली थी, उसका नाम और किस पार्टी से वो जुड़ा है, जानने के बाद आप इसके पीछे की राजनीति को आसानी से समझ जाएँगे।

शिकायत ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक समर्थक अब्दुल काशिफ ने की थी। अब्दुल काशिफ ने पुलिस को बताया था कि इस पोस्टर से दो समुदायों के बीच घृणा पैदा हो सकता है। इसलिए इसे हटाया जाना चाहिए। इस शिकायत के बाद पुलिस और हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की तरफ से कार्यवाही की गई और पोस्टर को हटा दिया गया।

लेकिन मामला बढ़ गया। क्योंकि मौजूमजही मार्केट BJP विधायक राजा सिंह के विधानसभा क्षेत्र में आता है। पोस्टर को हटाने की कार्रवाई निश्चित तौर पर विधायक राजा सिंह के लिए एक चुनौती हुई। इस मामले पर उन्होंने कहा कि PM मोदी ने राम मंदिर बनाने का रास्ता दिखाया, जिसके लिए उनका धन्यवाद किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्टर में लिखे जिस नारे को लेकर विवाद हो रहा है, वह भगत सिंह ने कहा था और उनके नारे को पोस्टर में लिखना किसी भी तरह से अनुचित नहीं है।

विवाद क्यों?

पोस्टर को ध्यान से देखेंगे तो राम मंदिर की फोटो के नीचे लिखा है – “बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है।” विवाद इसी नारे पर है। मजलिस बचाओ तहरीक के अध्यक्ष अमजदुल्लाह ने भी इस पोस्टर को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अमजदुल्लाह के अनुसार पोस्टर लगाने वाले की नीयत ठीक नहीं है और उन्होंने आरोप लगाया कि दो समुदायों के बीच ईर्ष्या पैदा करने के लिए इस पोस्टर को लगाया गया है।

पोस्टर विवाद पर हिंदू पक्ष नीचे के वीडियो में

सुदीक्षा भाटी की मौत को लेकर पुलिस एवं प्रशासन ने किया छेड़खानी की बात से इनकार, भाई ने कहा- ब्रेक लगाने से टकराई बाइक

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की एक युवती की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने को लेकर इसे छेड़छाड़ की घटना बताया जा रहा है। हालाँकि, बुलंदशहर पुलिस और जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की तरफ से एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने इसे छेड़छाड़ की घटना से इनकार करते हुए कहा है कि दुर्घटना के समय बाइक सुदीक्षा का भाई चला रहा था।

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी ने कहा कि सोमवार (अगस्त 10, 2020) सुबह सुदीक्षा अपने भाई के साथ बुलंदशहर अपने मामा के घर जा रही थी। औरंगाबाद से 3 किलोमीटर पहले ट्रैफिक के कारण इनके आगे जा रही एक बाइक ने अचानक ब्रेक मारा, जिससे उनकी बाइक उससे टकरा गई।

वहीं, सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे छेड़छाड़ की घटना से जोड़ते हुए दावा किया जा रहा है कि सड़क पर एक बुलेट बाइक पर एक व्यक्ति ने सुदीक्षा और उनके भाई की बाइक का पीछा करना शुरू किया और उसे परेशान किया।

जिलाधिकारी के बयान से इस केस में सबसे बड़ा खुलासा दुर्घटना के दौरान बाइक चला रहे व्यक्ति को लेकर हुआ है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि हादसे के वक्त जिस बाइक पर सुदीक्षा बैठी थी वह कौन चला रहा था? क्योंकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा था कि दुर्घटना के दौरान बाइक सुदीक्षा के मामा चला रहे थे

इन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अज्ञात बदमाश द्वारा उन्हें ओवरटेक करने के बाद सुदीक्षा के मामा ने अपनी बाइक पर नियंत्रण खो दिया, जिसने बाइक में सवार सुदीक्षा और उसके मामा, दोनों ही सड़क पर गिर गए। सुदीक्षा के मामा दुर्घटना में बच गए, जबकि सुदीक्षा के सिर पर गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

वास्तव में, मृतक सुदीक्षा का छोटा भाई, जो कि सड़क हादसे के समय बाइक चला रहा था, उसका एक वीडियो के जरिए बयान सामने आया है कि वह दीदी (सुदीक्षा) को लेकर मामा के घर जा रहा था। उसी समय एक बाइक उनसे आगे निकलकर तेजी से जा रही थी और जब उसने अचानक ब्रेक मारा तो उनकी बाइक उससे टकरा गई। सुदीक्षा के भाई ने इस वीडियो में कहा है कि इस टक्कर से वो और दीदी (सुदीक्षा) नीचे गिर गए।

गौरतलब है कि अमेरिका के बॉबसन कॉलेज में पढ़ने वाली उत्तर प्रदेश की छात्रा सुदीक्षा भाटी की सोमवार रात सड़क हादसे में मौत हो गई। वह अपने भाई के साथ मामा के घर जा रही थी तभी एक बाइक ने टक्कर मारी और वह सड़क पर गिर गई।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस और प्रशासन सुदीक्षा की मौत में छेड़खानी की बात बेबुनियाद बता रही है जबकि, मृतक युवती के पिता इसे छेड़छाड़ का मामला बता रहे हैं।

5 अगस्त के बाद अब 15 अगस्त को भी टाइम्स स्क्वायर पर दिखेगी भारत की छवि: स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार नजर आएगा तिरंगा

राम मंदिर भूमिपूजन के बाद एक बार दोबारा वह अवसर आया है जब भारत की छवि फिर अमेरिका की प्रसिद्ध इमारत टाइम्स स्क्वायर पर नजर आएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15 अगस्त के मौके पर पहली बार तिरंगा टाइम्स स्क्वायर पर नजर आने वाला है। इसकी पुष्टि स्वयं न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और कनेक्टिकट के फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन (FIA) की ओर से जारी बयान में की गई हैं।

इस बयान में कहा गया है कि इस बेहद खास मौके पर भारत के महावाणिज्य दूत रणधीर जायसवाल विश‍िष्‍ट अतिथि होंगे।

गौरतलब है कि यह पहली बार होगा जब भारत का राष्ट्रीय ध्वज इस इमारत पर लहराता दिखेगा। अमेरिका के मैनहट्टन में भी भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए विशेष कार्यक्रम रखा गया है।

ज्ञात हो कि इस वर्ष FIA के लिए स्वतंत्रता दिवस एक गौरवशाली पल है। दरअसल, FIA इस साल अपनी गोल्डन जुबली मना रहा है। इसकी स्थापना 1970 में हुई थी और आज यह भारतीय समुदाय की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक है।

1981 से लेकर अब तक FIA हर साल इंडियन डे परेड आयोजित करता आया है। इस परेड में भारत का गौरवशाली इतिहास दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाता है।

जानकारी के मुताबिक 15 अगस्त को होने जा रहे इस समारोह को डंकिन डोनट्स द्वारा स्पांसर किया जाएगा। इसके अलावा न्यूयॉर्क सिटी के मेयर बिल डे ब्लासियो और उनके पूरे स्टाफ के साथ-साथ न्यूयॉर्क पुलिस के द्वारा भी इस कार्यक्रम को सपोर्ट किया जा रहा है।

बता दें, इससे पहले 5 अगस्त को भूमिपूजन के अवसर पर राम मंदिर की तस्वीर और भगवान श्री राम की तस्वीर को टाइम्स स्क्वायर पर दिखाने का ऐलान हुआ था।

हालाँकि संप्रदाय विशेष के विरोध के बाद एक कंपनी ने ऐसा करने से मना कर दिया। जिससे आतिश तासिर समेत कई कट्टरपंथियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन भूमिपूजन के बाद जब टाइम्स स्क्वायर पर राम मंदिर की तस्वीर नजर आई तो वहाँ का पूरा माहौल राममय हुआ दिखा।

इसी दिन वाशिंगटन डीसी में भारतीय समुदाय के लोग पारंपरिक कपड़ों में जश्न मनाते दिखे थे। यहाँ तक कि US कैपिटोल हिल से व्हाइट हाउस तक रथयात्रा भी निकाली गई थी। वहीं, कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन, टेक्सस और फ्लोरिडा के मंदिरों में भी विशेष आयोजन किए गए थे।

सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिथानी का पकड़ा गया झूठ! चौकीदार ने कहा- सुशांत की बॉडी के बारे में नहीं बताया गया

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में हर दिन एक नया सबूत या फिर एक नया खुलासा सामने आ रहा है। अब सुशांत सिंह सुशांत के फ्लैटमेट रहे सिद्धार्थ पिथानी का एक झूठ सामने आया है। टाइम्स नाउ के स्टिंग ऑपरेशन में झूठ उजागर हुआ है।

जानकारी के मुताबिक सिद्धार्थ पिथानी ने पहले दावा किया था कि उन्होंने सुशांत की बॉडी देखने के बाद चौकीदार को सूचित किया था, मगर चौकीदार का कहना है कि उसे किसी ने कुछ भी नहीं बताया।

सिद्धार्थ और सुशांत एक साल फ्लैटमेट रहे थे। आत्महत्या से कुछ घंटों पहले तक भी सुशांत उनके ही साथ थे। पिथानी आईटी प्रोफेशनल हैं। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा रिया चक्रवर्ती और सुशांत के 74 वर्षीय पिता केके सिंह द्वारा लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर पिथानी से मुंबई में पूछताछ की जा रही है।

इससे पहले सिद्धार्थ पिथानी ने समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि वह सुशांत को एक डॉक्टर के कहे अनुसार दवाइयाँ देते थे। उन्होंने कहा था, “मैंने दो गोलियाँ दीं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे किस चीज़ की थी।”

हालॉंकि, रिया चकवर्ती से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सिद्धार्थ बीच में ही रिपब्लिक टीवी का इंटरव्यू छोड़कर चले गए। इससे पहले उन्होंने रिया को जानने से इनकार किया था। साथ ही सुशांत के पिता केके सिंह के आरोपों को भी खारिज कर दिया था।

सुशांत सिंह राजपूत केस में पैसों के लेनदेन की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिया चक्रवर्ती, उनके भाई और उनके पिता ले मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिए हैं। ख़बरों के मुताबिक ED ने चक्रवर्ती परिवार के 4 मोबाइल फ़ोन 2 आई पैड और एक लैपटॉप ज़ब्त किया है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक ED ने रिया चक्रवर्ती के 2 मोबाइल फ़ोन के अलावा उनके पिता और भाई शोविक के फ़ोन भी ज़ब्त कर लिए हैं। ED अभी तक 2 बार रिया चक्रवर्ती से इस केस में पूछताछ कर चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने पहली बार 7 अगस्त को रिया के बयान दर्ज किए थे, रिया के जवाबों से संतुष्ट नहीं होने पर ED ने 10 अगस्त को दोबारा रिया चक्रवर्ती, उनके भाई और पिता से पूछताछ की थी।

इसके साथ ही सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह की रिया चक्रवर्ती और सुशांत की एक्स मैनेजर श्रुति मोदी के बीच हुई बातचीत का व्हाट्सऐप चैट सामने आया है। इस चैट में सुशांत के पिता श्रुति मोदी से कहते हैं, “मैं जानता हूँ कि सुशांत के सारे कर्ज और उसे भी तुम देखती हो। वह अभी किस स्थिति में है, इसके लिए बात करना चाह रहे थे। सुशांत से बात हुई थी तो कह कह रहा था कि मैं बहुत परेशान हूँ। अब तुम सोचो कि एक पिता को कितनी चिंता होगी उसके लिए। इसलिए तुमसे बात करना चाह रहा था। अब तुम बात नहीं कर रही हो तो मैं मुंबई जाना चाहता हूँ। फ्लाइट का टिकट भेज दो।”

श्रुति मोदी और रिया चक्रवर्ती से सुशांत के पिता की बातचीत

वहीं, सुशांत के पिता ने व्हाट्सऐप पर रिया से बात करते हुए कहा था, “जब तुम जान गई कि मैं सुशांत का पापा हूँ, तो बात क्यों नहीं की। आखिर बात क्या है? फ़्रेंड बनकर उसका देखभाल और उसका इलाज करवा रही हो तो मेरा भी फर्ज बनता है कि सुशांत के बारे में सारी जानकारी मुझे भी रहे। इसलिए कॉल कर मुझे भी सारी जानकारी दो।”

सुशांत के पिता द्वारा भेजे गए मैसेज के चैट स्क्रीनशॉट में साफ देखा जा सकता है कि दोनों ही मैसेजेस में ब्लू टिक शो हो रहे हैं जिसका साफ अर्थ है कि मैसेज देख लिए गए हैं। फिर भी सुशांत के पिता को जवाब देना मुनासिब नहीं समझा गया। इस चैट के स्क्रीन शॉट में तारीख और समय दोनों साफ साफ देखे जा सकते हैं। रिया को सुशांत के पिता ने 29 नवंबर 2019 को ये मैसेज दिन में 12.34 पर भेजा था। वहीं श्रुति मोदी को सुशांत के पिता ने इसी दिन 12.16 मिनट पर मैसेज भेजा था।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुंबई में स्थित अपने घर में फाँसी लगाकर जान दे दी थी, जिसके बाद से मुंबई पुलिस लगातार इस मामले की जाँच कर रही थी। वहीं, पटना में सुशांत के पिता द्वारा एफआईआर दर्ज करवाने के बाद बिहार पुलिस की एक टीम भी इस मामले की जाँच के लिए मुंबई पहुँची थी। अब यह मामला सीबीआई के पास है। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी अपनी जाँच में जुटी हुई है।

PTI का पकड़ा गया झूठ: PM मोदी के कोरोना आँकड़ों से गायब किया शब्द, बदल गए मायने

सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ PM मोदी की आज मीटिंग हुई। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना से संबंधित आँकड़ों को लेकर क्या कहा, यह आप नीचे के आधिकारिक ट्वीट में देख सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कोरोना से संबंधित एक्टिव केस का प्रतिशत कम हो रहा है। ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि एक्टिव केस कम हो रहा है। एक्टिव केस का प्रतिशत कम होना और एक्टिव केस का कम होना – दो अलग-अलग बातें हैं। लेकिन शायद PTI को यह गणित नहीं मालूम।

PTI को यह गणित नहीं मालूम, यह आप उसके ट्वीट से समझ सकते हैं। PTI जैसी संस्था सोशल मीडिया पर पड़ती गाली को देख कर अपने ट्वीट डिलीट भी कर सकती है। इसलिए उसका ट्वीट नहीं बल्कि स्क्रीनशॉट नीचे देखिए।

PTI के ट्वीट के नीचे PM मोदी के लिए जो संबोधन आए हैं, उससे फेक न्यूज फैलाने वाली इस संस्था का काम हो गया, भले पत्रकारिता चूल्हे में गई!

अब बात करते हैं आँकड़ों की। इसके लिए थोड़ा ग्राफ देखा जाए। समझा जाए कि एक्टिव केस बढ़ रहा है या घट रहा है? या फिर एक्टिव केस का प्रतिशत बढ़ रहा है या घट रहा है?

गणित अच्छा हो तो ऊपर का ग्राफ देख कर समझ सकते हैं कि एक्टिव केस का प्रतिशत हर दिन घट रहा रहा है। लेकिन PTI को इससे क्या मतलब! उसे फेक न्यूज फैलाने से मतलब था, और वो काम उसने बखूबी कर दिया।

PTI, फेक न्यूज और विवाद

देश के सबसे बड़े पत्रकारों के संगठन आईएफडब्लूजे (इण्डियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) ने पीटीआई में होने वाले भाई-भतीजावाद, गलत वित्तीय प्रबंधन और निहित स्वार्थों का खुलासा करते हुए बताया है कि किस प्रकार पीटीआई हमेशा सत्ताधारी पार्टी, मुख्यतः कॉन्ग्रेस के मुखपत्र के रूप में काम करता आया है।

कुछ दिनों पहले PTI ने नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वेडोंग का एक इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने भारत के विरोध में बातें कर के चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था। लेकिन PTI ने इस दौरान भारत का पक्ष रखते हुए सवाल तक नहीं किए थे। और तो और, उसने चीन के राजदूत द्वारा किए गए झूठे दावों पर पलट कर कोई सवाल भी नहीं पूछा था। PTI के इस रुख को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने विरोध जताया था।

अयोध्या मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट में हो सरकारी प्रतिनिधि: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज, सुन्नी बोर्ड की बयानबाजी को बनाया आधार

अयोध्या में राम मंदिर के लिए नींव तो डाल दी गई है लेकिन वहाँ 5 एकड़ मस्जिद के लिए जो जमीन दिए गए हैं, उसे लेकर लगातार विवाद ही हो रहे हैं। ट्रस्ट ने वहाँ मस्जिद निर्माण के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पहुँच गई है, जिसमें माँग की गई है कि मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट में सरकार का कोई न कोई प्रतिनिधि होना चाहिए। अयोध्या के करुणेश शुक्ला ने ये याचिका दायर की है।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ ने हाल ही में जो बयानबाजी की है, उसे देखते हुए सरकार का कोई न कोई प्रतिनिधि अयोध्या में मस्जिद वाले ट्रस्ट में होना ही चाहिए, भले ही वो संप्रदाय विशेष से ही क्यों न हो। उन्होंने कहा है कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और वक़्फ़ एक्ट के अनुसार, सर्वधर्म समभाव अथवा धर्मनिरपेक्ष कार्यों में सरकार अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर सकती है।

करुणेश का कहना है कि उन्होंने संवैधानिक और क़ानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ही ये याचिका दायर की है। बता दें कि मस्जिद के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसने स्पष्ट किया है कि अयोध्या में बनाए जाने वाली मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर नहीं रखा जाएगा। मस्जिद के शिलान्यास के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को भी बुलावा भेजे जाने की बात भी कही गई है।

ट्रस्ट के भवन और अस्पताल के लिए नींव रखे जाने की बात भी हो रही है। कम्युनिटी सेंटर और कम्युनिटी किचन बनाने की बात भी कही गई है। हालाँकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया था कि मस्जिद के शिलान्यास में वो नहीं जाने वाले हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद अब इस मामले में विवाद बढ़ता ही जा रहा है। अब ट्रस्ट में सरकारी नुमाइंदगी होगी या नहीं, ये आगे पता चलेगा।

वक्फ़ बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वह इस ज़मीन पर मस्जिद बनाएँगे। जिस पर साधू संतों ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि संप्रदाय विशेष समाज के लोग चाहें तो मिली हुई ज़मीन पर अस्पताल या विद्यालय बनवा सकते हैं। संत समाज इस पहल में उनकी आर्थिक मदद भी करेगा। इस मुद्दे पर राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने भी अपना मत रखा है। उन्होंने कहा उनका (वक्फ़ बोर्ड) का जो मन करे वह बनवाएँ।

लेकिन, बाबर के नाम की मस्जिद किसी भी सूरत में नहीं बनाई जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो संत समाज इसका पूरी ताकत से विरोध करेगा। तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि बाबर के नाम की मस्जिद पूरे देश में नहीं है। दान की भूमि पर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता है, ऐसा होने पर मस्जिद में की गई दुआ कबूल नहीं होती है।

भगवा झंडों से डरा नागरिक, कल हमारी मस्जिद में भी बाँध देंगे: अजीत भारती का वीडियो । Ajeet Bharti on Muslims Playing Victim On Bhumipujan

द वायर में एक खबर आती है कि दिल्ली के उस इलाके के समुदाय विशेष के लोग डरे हुए हैं, जिस इलाके में 5 महीने पहले हिन्दू विरोधी दंगे हुए थे। इन लोगों के डर के पीछे की वजह अयोध्या में भूमिपूजन के दौरान दीया जलाना और भगवा झंडा लहराना था। ये लोग कह रहे हैं कि आज सोसाइटी के गेट पर भगवा झंडा बाँधा है, कल को हमारी मस्जिद में न बाँध दें।

आर्टिकल में कहा गया है कि ‘मुल्ले बाहर निकलो’, ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए गए। जब हमने गली नंबर 2 के हिन्दुओं से बात की, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने दीए जलाए और झंडे लगाए, मगर कोई मजहब विरोधी नारे नहीं लगाए। कुछ लोगों ने जानबूझकर मजहबी पत्रकारों को फोन करके बुलाया और साम्प्रदायिक रंग दे रहे हैं।

पूरी वीडियो इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक कर के देखें

कोरोना संकट: PM ने राज्यों से की टेस्टिंग बढ़ाने की अपील, बोले- अपनाएँ 72 घंटे वाला फॉर्मूला, देश जीत जाएगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बीच मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 राज्यों के सीएम के साथ बैठक की। पीएम ने बैठक में इन राज्यों को कोरोना से जीतने का मंत्र दिया।

उन्होंने कहा कि अगर ये 10 राज्य कोरोना को हरा दें तो देश जीत जाएगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 केस की 72 घंटे में पहचान और ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग के जरिए हम इस बीमारी को मात दे सकते हैं। पीएम के साथ बैठक में आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार, गुजरात, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के सीएम शामिल हुए।

पीएम ने कहा कि देश में ऐक्टिव केस 6 लाख से ज्यादा हो चुके हैं। इनमें से ज्यादा मामले हमारे इन 10 राज्यों में ही है। इसीलिए हम समीक्षा के लिए बैठे हैं। आज की चर्चा से हमें एक-दूसरे के अनुभवों से काफी कुछ सीखने को मिला। एक बात निकलकर आया है कि अगर हम मिलकर अपने इन 10 राज्यों में कोरोना को हरा देते हैं, तो देश भी जीत जाएगा।

मोदी ने कहा कि टेस्टिंग की संख्या बढ़कर हर दिन 7 लाख पहुँच चुकी है। इससे संक्रमण को पहचानने और रोकने में जो मदद मिल रही है, आज हम उसके परिणाम देख रहे हैं। हमारे यहाँ मौत की दर पहले भी दुनिया के मुकाबले कम था और संतोष की बात है कि यह लगातार और कम हो रहा है। ऐक्टिव केस कम हुआ है, रिकवरी रेट बढ़ता जा रहा है। लोगों के बीच भी आत्मविश्वास बढ़ा है।

इस दौरान पीएम ने कहा कि बिहार, गुजरात, यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तेलंगाना में टेस्टिंग रेट बढ़ाने की जरूरत है। कोरोना के खिलाफ कंटेनमेंट, कंटैक्ट ट्रेसिंग और सर्विलांस सबसे प्रभावी हथियार है। हम सब कोशिशों से अच्छे परिणाम की ओर आगे बढ़े हैं। शुरुआत के 72 घंटे में केस की पहचान कर लें तो इसका संक्रमण नहीं फैल सकता है।

पीएम ने कहा कि अस्पतालों पर दबाव, हमारे स्वास्थ्य कर्मियों पर दबाव, रोजमर्रा के काम में निरंतरता का ना आ पाना, ये हर दिन एक नई चुनौती लेकर आते हैं। ये लगातार मिलना, चर्चा करना जरूरी भी है, क्योंकि जैसे-जैसे कोरोना महामारी को समय बीत रहा है, नई-नई परिस्थितियाँ भी पैदा हो रही हैं।

बैठक के दौरान पीएम ने कहा कि हरियाणा, यूपी के कुछ जिले और दिल्ली में एक समय ऐसा आया कि लगा कि अब कोरोना काबू में नहीं आएगा। दिल्ली सरकार ने तो ऐसी घोषणा की कि बहुत बड़ा संकट आएगा। पीएम ने कहा, “लेकिन हमने गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की। दिल्ली कार्ययोजना पर काम किया गया और हमें सफलता मिली। आज हम सबका प्रयास सामने है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “आपके राज्यों में जमीनी हकीकत की निरंतर निगरानी करके जो नतीजे पाए गए सफलता का रास्ता उसी से बन रहा है! मुझे विश्वास है कि आपके इस अनुभव की ताकत से देश ये लड़ाई पूरी तरह से जीतेगा, और एक नई शुरुआत होगी।”

स्वप्ना सुरेश को केरल सरकार से मिले ₹1 करोड़, CM विजयन को UAE से मिले ₹20 करोड़: केरल सोना तस्करी का पूरा ब्यौरा

केरल में डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। अब स्वप्ना सुरेश ने कहा है कि उनके अकाउंट से जो 1 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं, वो उन्हें केरल सरकार से ‘लाइफ मिशन प्रोजेक्ट’ के एजेंट के रूप में काम करने के लिए बतौर कमीशन मिले थे। ये केरल सरकार का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है जिसे 2017 में लॉन्च किया गया था।

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है कि भूमिहीन और जिनके पास आवास नहीं है, ऐसे परिवारों को बसाया जाए और उनके लिए घर बनाए जाएँ। अब इसमें केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम इसीलिए आता है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के मुखिया वही हैं और उन्होंने UAE की यात्रा भी की थी ताकि इसके लिए 20 करोड़ का डोनेशन जुटा सकें। UAE के ‘Red Crescent’ से उन्हें 20 करोड़ रुपए मिले, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

स्वप्ना सुरेश ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट को पास कराने के लिए उन्हें 1 करोड़ रुपए कमीशन मिले। कॉन्ग्रेस का तो यहाँ तक आरोप है कि केरल सीएम के UAE जाने के बाद ही स्वप्ना सुरेश और IT सचिव एम शिवशंकर भी दुबई गए थे। ऐसे में विपक्षी नेताओं का सवाल है कि विजयन ने जो MoU पर हस्ताक्षर किया, वो कहाँ और किसकी मौजूदगी में किया। क्या उस समय वहाँ स्वप्ना सुरेश भी उपस्थित थी?

उधर स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका भी NIA की स्पेशल कोर्ट ने खारिज कर दी है। सबूतों और केस डायरी के अध्ययन के बाद ये फैसला लिया गया। सोने की तस्करी में स्वप्ना सुरेश के खिलाफ कई सबूत हैं, ऐसा कोर्ट ने माना है। इस अपराध में UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई हो रही है। आतंकी गतिविधियों के भी इससे जुड़े होने की आशंका है। इस प्रकरण में अब तक क्या-क्या हुआ और कब हुआ, ये हम आपको बताते हैं।

केरल: सोने की तस्करी मामले में अब तक क्या हुआ

NIA ने खुलासा किया था कि पिछले 10 महीनों में केरल में लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई थी। एजेंसी ने अदालत को बताया था कि जाँच में यह भी पता चला है कि तस्करी मुख्य रूप से आभूषण बनाने में नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था, क्योंकि नकदी में लेन-देन करना मुश्किल हो गया था। एनआईए ने अदालत में कहा था कि आरोपितों ने सोना तस्करी के लिए यूएई दूतावास की सील और राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर अपराध को अंंजाम दिया।

राजनयिक के सामान के जरिए सोने की तस्करी करने की कोशिश करने वाली महिला स्वप्ना सुरेश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक जाँच की थी और पाया था कि तस्करी का सोना आतंकवादी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता था। स्वप्ना सुरेश और सरिथ, जो पहले यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे, ने राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में सीखा और सोने की तस्करी करने के लिए इसे मॉडस ऑपरेंडी के रूप में इस्तेमाल किया।

फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर के गुरुवार (जुलाई 2, 2020) को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर के खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी हुई। इतना सारा सोना डिप्लोमैटिक बैग में भर कर लाया गया था। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी सरिथ से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात रहा था। कहा जा रहा है कि 6 महीने पहले स्वप्ना को आईटी विभाग में इतना बड़ा पद दिए जाने के पीछे एम शिवशंकर ही है।

स्वप्ना सुरेश की फोन कॉल से यह खुलासा हुआ है, इतना ही नहीं वह केरल के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील से भी टच में थी। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री और CPI (M) नेता केटी जलील और आरोपित स्वप्ना सुरेश के बीच कॉल डेटा रिकॉर्ड से पता चला कि दोनों के बीच 16 कॉल किए गए थे और वह निरंतर सम्पर्क में थे। मंत्री और स्वप्ना सुरेश के बीच मई और जून के महीने में कई कॉल हुए थे।

स्वप्ना सुरेश के साथ मुख्यमंत्री विजयन के नजदीकी को लेकर केरल में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। विपक्ष मुख्यमंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहा है। एनआइए के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में सोना तस्करी सीधे तौर पर देश की आर्थिक स्थिरता पर हमले की कोशिश है। साथ ही इसका उपयोग आतंकी फंडिंग के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। मामला खुलने के बाद केरल के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर को पद से हटा दिया गया था।

NIA इस मामले में पाँचवे आरोपित रमीज़ को पूरे प्रकरण की अहम कड़ी मान रहा है और उससे पूछताछ में कई राज़ खुलने की सम्भावना है। सामान्यतः रमीज़ 2 महीने के लिए दुबई जाया करता था और फिर कुछ दिनों के लिए केरल वापस लौटता था। वो विजिटिंग वीजा लेकर दुबई में रुकता था। वो बिजनेस का बहाना बना कर वहाँ जाता था लेकिन जाँच में पता चला है कि वहाँ न तो उसका कोई बिजनेस है और न ही वो वहाँ कोई नौकरी करता है।

‘गलती नहीं सुधारी तो परिवार को नहीं छोड़ा जाएगा’: भूमिपूजन पर खुश BJP-RSS से जुड़े संप्रदाय विशेष को बंगाल इमाम एसोसिएशन की धमकी

राम मंदिर निर्माण के लिए हुए भूमिपूजन के बाद से जगह-जगह समुदाय विशेष के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसी संबंध में 7 अगस्त को बंगाल इमाम एसोसिएशन ने अपने बयान में भाजपा और आरएसएस से जुड़े संप्रदाय विशेष के लोगों को धमकी दी।

बयान में कहा गया कि अगर उन लोगों ने अपनी गलती नहीं सुधारी तो उनके परिवारों को नहीं छोड़ा जाएगा। एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा है कि संप्रदाय विशेष का जो भी कोई राम मंदिर के भूमिपूजन की खुशियाँ मना रहा है, वो इस्लाम को मानने वाला नहीं है। वो गैर-इस्लामी है।

बयान में कहा गया कि हाल ही में राम मंदिर निर्माण करने के लिए उस जगह पर भूमिपूजन हुआ जहाँ कभी बाबरी मस्जिद हुआ करती थी। इसलिए यह बात साफ है कि आरएसएस और भाजपा संप्रदाय विशेष के लोगों के मित्र नहीं है।

इस फरमान में यह भी कहा गया कि संप्रदाय विशेष का एक आदमी कभी भी तब संप्रदाय विशेष का नहीं रहता अगर वह उस व्यक्ति के पक्ष में हो जो इस्लाम विरोधी है। इसलिए जो सदस्य आरएसएस और वीएचपी के सदस्य हैं या उनसे जुड़े हुए हैं। उन्हें अपनी स्थिति के बारे में गौर करना चाहिए। उन्हें निर्णय लेना होगा कि वह भाजपा-आरएसएस में रहना चाहते हैं या फिर अपनी भूल सुधारना चाहते हैं।

फरमान में आगे भाजपा व आरएसएस से जुड़े संप्रदाय विशेष के लोगों को धमकी भी दी गई। इसमें लिखा गया कि इन लोगों को यह याद रखना चाहिए कि आने वाले समय में इनके परिजनों को बख्शा नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि यह बयान बंगाल इमाम एसोसिएशन की ओर से ठीक उसी समय आया था जब ऑलइंडिया इमाम एसोसिएशनन के साजिद रशीदी ने कहा था कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगा और शायद अब एक मंदिर उसे बनाने के लिए ध्वस्त किया जाए।

इसके अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने भी तभी कहा था कि बाबरी मस्जिद वहाँ था और हमेशा वहाँ मस्जिद ही रहेगा। अपने बयान में AIMPB ने इस भूमिपूजन से निराश लोगों को समझाते हुए यह भी कहा था कि दिल दुखाने की जरूरत नहीं है। स्थिति कभी एक जैसी नहीं रहती।

बता दें, बंगाल इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याहिया ने कहा, “यह संप्रदाय विशेष के उन लोगों को चेतावनी देना है जो आरएसएस-बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें अब यह तय करना चाहिए कि वे आने वाले दिनों में किसे समर्थन देना चाहते हैं। यह कोई फतवा नहीं है, लेकिन उन्हें यह समझने की जरूरत है कि वे उन्हें मदद कर रहे हैं जो संप्रदाय विशेष के लोगों को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।”