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भूमिपूजन पर भगवा झंडे-पटाखे दिए जलाना डरा रहा है संप्रदाय विशेष को: शन्नो की शिकायत पर ‘वायर’ की तरफदारी

प्रोपेगेंडा न्यूज़ वेबसाइट ‘द वायर’ ने अपनी एक सनसनीखेज रिपोर्ट में दावा किया है कि अयोध्या श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन के अगले दिन दिल्ली की एक ‘मस्जिद’ वाली गली में भगवा झंडे लगा दी गए। द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के सुभाष मोहल्ले में लेन नंबर 2 क्षेत्र के निवासियों ने ‘द वायर’ के पास शिकायत की है कि वहाँ पर भूमिपूजन के बाद ‘अशोभनीय’ और ‘सांप्रदायिक ‘ नारेबाजी की गईं।

इस बेहद काल्पनिक घटना का विवरण देते हुए ‘द वायर’ ने अपनी इस तथाकथित रिपोर्ट में लिखा है कि इस साल की शुरुआत में फरवरी में दिल्ली के दंगों से पहले ये लेन खुली होती थी, लेकिन अब इस पर गेट लग चुके हैं।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वहाँ के निवासियों ने वायर को बताया कि भूमिपूजन की रात को ‘मीडिया हाइप’ और आरएसएस की कारस्तानी से लोगों ने दीए जलाए और रात के करीब 1 बजे वहाँ मौजूद लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए ‘गद्दारों को बाहर निकालो’ और ‘मुल्लों बाहर निकलो’ की आवाजें लगाईं।

हालाँकि, वायर ने ये रिपोर्ट किसी ‘अनम*’ नाम के हवाले से लगाए हैं लेकिन इसमें नाम के साथ लगे हुए स्टार के चिन्ह के बारे में द वायर ने कोई नोट नहीं लिखा है कि ये नाम वास्तविक हैं या फिर वायर की इस रिपोर्ट के अनुसार ही मनगढ़ंत किरदार हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार, “अनम को एहसास हुआ कि उस रात उसके पति ने जो कहा, वह सच था। यह अहसास तब हुआ जब उसने शनिवार रात उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा पुलिस स्टेशन में एक घटना के बारे में सुना।”

द वायर के अनुसार, शन्नो नाम की एक महिला ने रोते-बिलखते हुए आरोप लगाए हैं कि उनके गाल पर थप्पड़ के भी निशान हैं और उनकी 17 साल की बेटी को भी चांटे मारे गए साथ ही, उनकी छाती पर हाथ मार कर उसका कुरता फाड़ दिया गया।

वायर की रिपोर्ट के अनुसार, शन्नो ने कहा कि वो लोग भगवा झंडे लेकर ‘संप्रदाय विशेष’ की गली में घुसे जिससे गली में साम्प्रदायिक तनाव का माहौल हो गया है। शन्नो का कहना है कि
आज उन्होंने मस्जिद के पास भगवा झंडे बाँध दिए हैं और उसके गेट के बाहर पटाखे फोड़ रहे हैं, अगर उन्हें दंड नहीं मिला तो वो कल मस्जिद के अंदर ऐसा करेंगे।”

संप्रदाय विशेष के पत्रकार लोगों से मिलकर कर रहे हैं फर्जी रिपोर्टिंग

जब ऑपइंडिया ने सुभाष मोहल्ले के स्थानीय लोगों से इस सम्बन्ध में बातचीत की तो उन लोगों ने बताया कि भूमिपूजन की रात उन्होंने दीए जलाए और पटाखे जरुर फोड़े लेकिन किसी प्रकार की नारेबाजी नहीं की।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सब कुछ सामान्य ही था लेकिन इसके कुछ दिन बाद संप्रदाय विशेष के पत्रकारों ने वहाँ मौजूद परिवारों से बातचीत कर इसे मजहबी रंग देने का प्रयास किया। जब भूमिपूजन के उत्साह में लोगों ने दीए जलाए और पटाखे फोड़े तो शन्नो नाम की इस महिला ने लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की।

आज भी कुछ संप्रदाय विशेष के पत्रकार उस गली में गए थे, लेकिन आज वहाँ मौजूद लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दी कि ये लोग मामले की गलत रिपोर्टिंग कर रहे हैं जिसके बाद पुलिस उन पत्रकारों को ही थाने ले गई।

शन्नो को लेकर दर्ज हुई है शिकायत

उल्लेखनीय है कि ‘द वायर’ की रिपोर्ट में शन्नो के किए गए दावों के विपरीत सुभाष मोहल्ला के लोगों ने सलीम की पत्नी शन्नो के खिलाफ लोगों को परेशान करने और उन्हें अपनी ‘ऊँची पहुँच’ को लेकर धमकाने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

पूर्वोत्तर दिल्ली के भजनपुरा थाने में दर्ज शिकायत में स्थानीय लोगों ने कहा है कि फरवरी माह में हुए दंगों के बाद से ही इलाके माहौल शांतिपूर्ण है लेकिन शन्नो जबरन यहाँ तनाव पैदा करने का प्रयास करती हैं।

अगस्त 11, 2020 को दर्ज इस शिकायत के अनुसार, “हमारे क्षेत्र में एक शन्नो, पत्नी सलीम, रहती है जो कि हर आए दिन हमारे क्षेत्र में माहौल ख़राब करने में लगी रहती है और झगड़ा करने की कोशिश करती है। वह लगातार झूठी शिकायत करती रहती है और कहती है कि मेरी हाईकोर्ट के वकील से पहचान है। मैं सबको दंगों और लड़ाई के साथ अन्य आरोपों में फँसा दूँगी। साथ ही, अन्य महिलाओं को भी हमारे खिलाफ भड़का रही है, जिससे मोहल्ले का माहौल ख़राब होने का अंदेशा है। हम सभी क्षेत्रवासी परेशान हैं। आपसे अनुरोध करते हैं कि इस महिला से हमें बचाया जाए और ऐसे साम्प्रदायिक माहौल ख़राब करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।”

शिकायत की कॉपी

इस शिकायत में दीपक गोस्वामी, रवि तिवारी और फखरुद्दीन समेत कुल 14 लोगों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। ऐसे में सवाल यह उठते हैं कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की इस खोजी रिपोर्ट और इसके कथित पीड़ित किरादारों में से एक शन्नो के सभी आरोप कितने सही हैं?

इस रिपोर्ट और इसके आरोपों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गली में यदि कोई भगवा झंडे लेकर घुसा भी है तो वह पाकिस्तान की गली में नहीं बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली की ही किसी गली में घुसे होंगे और यदि वो कथित तौर पर भगवा झंडे लगा रहे हैं तो फिर भगवा झंडे लगा देने में शन्नो को सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की उम्मीद क्यों नजर आ रही है?

जिस तरह की भूमिका द वायर जैसे प्रपंचकारियों ने श्रीराम मंदिर के शुरुआत से लेकर इसके आखिरी फैसले, और अब भूमिपूजन के दौरान इसे दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों से जोड़ने के लिए किए, उससे यही साबित होता है कि यह इस्लामिक विचारधारा के समर्थक तथाकथित मीडिया चैनल्स अभी तक भी राम मंदिर में विवाद पैदा करने की अपनी हर आखिरी कोशिश में जुटें हुए हैं।

द वायर की इसी रिपोर्ट में शन्नो विवाद पर भजनपुरा के SHO अशोक शर्मा ने कहा है कि इस इलाके में हिंदू और संप्रदाय विशेष दोनों तरह के लोग रहते हैं। उन्होंने पटाखे भी फोड़े। अब वे हमें उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कह रहे हैं। जब राष्ट्र में हर कोई जश्न मना रहा है, दीया जला रहा है और पटाखे फोड़ रहा है, तो फिर मुद्दा क्या है?

SHO शर्मा ने कहा कि यह एक समस्या तब होती, जब उनके घर के दरवाजे पर यह किया गया होता, दीया जलाना और केसरिया झंडे लगाना कोई अपराध नहीं है। अशोक शर्मा ने कहा है कि इस विषय में स्थानीय लोगों के साथ बात करने पर ही पता चल पाएगा कि यह मुद्दा क्या है और यदि कोई विवाद है तो क्या यह आपसी बातचीत से हल किया जा सकता है।

‘मैं कहाँ चला जाऊँ, राजदीप? मैं तो गर्त में हूँ!’ भूमिपूजन पर विलाप करते ओवैसी के जवाब पर राजदीप हुए ट्रोल

ऐसा लग रहा है कि प्रोपेगैंडिस्ट-इन-चीफ राजदीप सरदेसाई अब अपने ही प्रशंसकों के बीच अलोकप्रिय हो रहे हैं। हाल ही में एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी के साथ इंटरव्यू की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, राजदीप सरदेसाई को इस्लामवादियों और अन्य लोगों द्वारा सरकारी लाइन पर बोलने के लिए ट्रोल किया गया था।

वायरल हुआ वीडियो क्लिप 5 अगस्त को भूमि पूजन से एक दिन पहले के लाइव शो का है। जिसमें हैदराबाद के नेता और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का मेल्टडाउन होते हुए देखा जा सकता है।

क्लिप में साक्षात्कार के दौरान राजदीप सरदेसाई द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने बड़े ही चतुराई से प्रश्न को घुमा दिया।

सवाल इस संबंध में था कि क्या यह हिंदू और संप्रदाय विशेष के लोगों दोनों के लिए भविष्य में “अतीत के मनमुटाव के साथ जीने की बजाय” दोनों समुदायों के लिए एक नई कॉम्पैक्ट खोजने का समय है।

हालाँकि, असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल को अलग संदर्भ में ले लिया और इसका मतलब यह निकाला कि उन्हें राजदीप सरदेसाई द्वारा ‘मूव ऑन’ करने के लिए कहा जा रहा था। इसके बाद संप्रदाय विशेष वाला नेता ओवैसी का भारी मेल्टडाउन देखने को मिला। उन्होंने पूछा कि क्या देश को मोहनदास करमचंद गाँधी की हत्या, 1984 में कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा किए गए सिख नरसंहार और 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस को भूल कर आगे बढ़ जाना चाहिए।

फिर असदुद्दीन ओवैसी ने, “राजदीप, आप मुझे कहाँ ले जाना चाहते हो? मैं पहले से गर्त में हूँ।” उन्होंने पूरे मामले पर ‘धर्मनिरपेक्ष दलों’ को भी उनकी चुप्पी के लिए जमकर फटकार लगाई। इसके साथ ही उन्होंने राजदीप सरदेसाई जैसे लिबरलों को भी लताड़ा, जो हिन्दुओं के बढ़ते वर्चस्व को रोकने में नाकाम रहे।

क्लिप के वायरल होने के बाद, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने राजदीप सरदेसाई और भारत के बहुसंख्यक समुदाय के ‘प्रमुख वर्चस्ववादी’ होने की निंदा की। असदुद्दीन ओवैसी से सऊदी और ईरान के इस्लामिक शासन पर सावल पूछने को लेकर इंडिया टुडे के एंकर की भी निंदा की गई।

इन टिप्पणियों के बाद राजदीप सरदेसाई ने माना कि इस्लामिक देशों के संबंध में प्रश्न को गलत तरीके से रखा गया था लेकिन उन्होंने कहा कि हैदराबाद के नेता अपनी पार्टी की अल्पसंख्यक राजनीति के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, “हमें प्रमुखतावाद और अल्पसंख्यकवाद को खारिज करना चाहिए।” हालाँकि, इस्लामवादियों और धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी खेमे ने उनकी बातों पर नरमी नहीं दिखाई।

राजदीप सरदेसाई को उनके सवाल की लाइन के साथ-साथ अल्पसंख्यकवाद के बारे में उनकी टिप्पणी के लिए भी लताड़ा गया था। कथित स्वास्थ्य पत्रकार विद्या कृष्णन ने राजदीप सरदेसाई पर अपनी पत्रकारिता के बारे में अच्छा महसूस करने के लिए ओवैसी पर ‘धौंस’ दिखाने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनकी पत्रकारिता केवल संप्रदाय विशेष के लिए जवाबदेह है। विद्या कृष्णन ने यह भी कहा कि यह ‘अविश्वसनीय’ था कि उसने माफी माँगने से इनकार कर दिया।

एक अन्य व्यक्ति ने इंडिया टुडे के एंकर द्वारा की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि ‘उदारवादी संघियों के गधे हैं।’

एक अन्य व्यक्ति ने टिप्पणी की कि राजदीप सरदेसाई के दिमाग में ‘पूरा गोबर’ भरा हुआ है।

राजदीप सरदेसाई पर सरकार के ‘दलाल’ होने का आरोप भी लगाया गया था।

ओवैसी के साथ के साथ कई अन्य लोगों का भी मेल्टडाउन होते देखा गया, जिन्होंने दावा किया कि भारत में सामूहिक हत्यारे का शासन है और उत्तर प्रदेश में एक ‘अतिवादी भिक्षु’ का शासन है।

राजदीप सरदेसाई को यह भी कहा गया था कि उन्हें AIMIM और अकालियों जैसी पार्टियों को ‘निशाना’ नहीं बनाना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें अपना ध्यान भाजपा, शिवसेना और आरएसएस पर केंद्रित करना चाहिए जो ‘प्रमुख राजनीति’ करते हैं।

काफी सारी प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि लोगों की राय थी कि ‘अल्पसंख्यकवाद’ नाम की कोई चीज मौजूद नहीं है। हालाँकि, हम निश्चित तौर पर नहीं कह सकते हैं कि राजदीप सरदेसाई के शब्दों से क्या मतलब है। मगर ऐसा लग रहा है कि वह एआईएमआईएम नेता के भड़काऊ बयानबाजी के संदर्भ में बात कर रहे थे।

उदाहरण के लिए, AIMIM सुप्रीमो के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने एक बार खुलेआम हिंदुओं को धमकी दी थी और कहा था कि अगर 15 मिनट के लिए देश भर में पुलिस हटा ली गई, तो संप्रदाय विशेष के लोग हिंदुओं को दिखा देंगे कि मालिक कौन है। अभी हाल ही में, एआईएमआईएम के वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा था कि 15 करोड़ संप्रदाय विशेष के लोग 100 करोड़ हिंदुओं पर हावी होंगे। पठान ने हिंदू समुदाय से कहा, “कल्पना करें कि हम आपके साथ क्या कर सकते हैं।”

‘मेरठ से हूँ, हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं.. पता दे फिर देखते हैं किसमें कितना दम है’: हम्जा ने धमकी के बाद अकाउंट किया डिलीट

पूर्व एमनेस्टी इंडिया के प्रमुख आकार पटेल ने एक ट्वीट में संप्रदाय विशेष को आरक्षित सीट या पृथक निर्वाचन क्षेत्र की माँग की वकालत करते हुए एक ट्वीट किया, जिसमें हम्ज़ा नाम के एक युवक ने एक महिला को धमकी देते हुए उसका पता पूछकर कहा है कि हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है।

दरअसल, रविवार (अगस्त 09, 2020) को आकार पटेल ने एक ट्वीट में लिखा- “संप्रदाय विशेष को आरक्षित सीट या पृथक निर्वाचन क्षेत्र के लिए माँग करनी चाहिए। हिंदू राष्ट्र अधिकारों को स्वीकार नहीं करेगा।”

इस पर एक ट्विटर यूजर निधि बहुगुणा ने लिखा, “मेरे परिवार को पलायन के बाद सियालकोट से मेरठ प्रवास करने के लिए मजबूर किया गया था। मेरठ में संप्रदाय विशेष अपने पैतृक घरों में रहे। मेरे परिवार को पाकिस्तान में बहुसंख्यक संप्रदाय विशेष से कोई सुरक्षा या अलग निर्वाचन का विकल्प नहीं दिया गया।”

लेकिन निधि बहुगुणा के इस ट्वीट से हम्ज़ा (@hamza63714280) नाम के एक युवक को बेहद आपत्ति हुई और इसके विरोध के लिए उसने निधि बहुगुणा को धमकी दे डाली।

@hamza63714280 ने लिखा – “मैं भी मेरठ से हूँ, हापुड़ रोड मेरठ। कहाँ से है तू? और हम भी हिन्दुस्तानी हैं, हिन्दुस्तान किसी के बाप का नहीं है, समझा? एड्रेस (पता) दे अपना, देखते हैं किसमें कितना दम है।”

निधि बहुगुणा को @hamza63714280 द्वारा दी गई धमकी का स्क्रीनशॉट

निधि बहुगुणा को @hamza63714280 नाम के ट्विटर यूजर के इस यूजर द्वारा दी गई खुली धमकी पर एहतियात के तौर पर एक अन्य ट्विटर यूजर ने मेरठ पुलिस को टैग करते हुए लिखा कि ये आदमी एक महिला को खुली धमकी दे रहा है और वह मेरठ से ही है।

इस पर मेरठ पुलिस ने फ़ौरन जवाब देते हुए लिखा कि इस मामले में साइबर सेल को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

लेकिन ख़ास बात यह रही कि मेरठ पुलिस के ट्वीट के फ़ौरन बाद @hamza63714280 नाम के ट्विटर यूजर ने अपना धमकी भरा ट्वीट डिलीट कर दिया और अपना अकाउंट भी डिलीट कर दिया है। यह अकाउंट अगस्त, 2020 में ही बनाया गया है, और सम्भव है कि यह हिन्दुओं को इसी प्रकार की धमकियाँ देने के लिए इस्तेमाल किया जाता हो।

गौरतलब है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने वर्ष 2013 में भी हिन्दुओं को ठीक इसी तरह की धमकी देते हुए कहा था कि ‘हम (संप्रदाय विशेष) 25 करोड़ हैं और तुम (हिंदू) 100 करोड़ हो, 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो, देख लेंगे किसमें कितना दम है।’

किसी ने सुशांत को लटकते हुए नहीं देखा, गले पर बेल्ट के निशान दिख रहे थे: SC में बोले सुशांत के पिता

सुशांत सिंह राजपूत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती की याचिका पर फैसला रिजर्व कर लिया है। वहीं मृत अभिनेता के पिता ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि किसी ने भी सुशांत सिंह राजपूत की बॉडी को पंखे से लटकते हुए नहीं देखा था और जब उनकी बहन कमरे के अंदर घुसी, तब तक बॉडी उतारी जा चुकी थी। वहीँ रिया चक्रवर्ती के वकील ने केस को मुंबई ट्रांसफर करने की माँग की।

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दूसरे राज्य (बिहार) में FIR करा कर सीबीआई को जाँच ट्रांसफर की गई है, इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

वहीं, सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह के वकील विकास सिंह ने कहा कि जानबूझ कर रिया द्वारा सुशांत को उनके परिवार से दूर किया जा रहा था। सुशांत के पिता ने कई बार अपने बेटे के इलाज के बारे में पूछा और आने देने को कहा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया।

सुशांत सिंह राजपूत के पिता के वकील विकास सिंह ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की लाश को देख कर ये नहीं कहा जा सकता था कि उन्होंने आत्महत्या की है, बल्कि उनके गर्दन पर बेल्ट के निशान प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने कहा कि दूसरा पक्ष मीडिया रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया दे रहा है।

इससे पहले महाराष्ट्र सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “देश मे संघीय ढाँचा है और क्या शिकायतकर्ता की सुविधा के लिए कहीं भी केस दर्ज कर लिया जाएगा? उन्होंने कहा कि इस केस में हर कोई वकील और जज बन गया है, कोई कह रहा है आत्महत्या है, कोई हत्या! लेकिन यह तय है कि मामले में आपराधिक मुकदमा प्रक्रिया की हत्या हो रही है।”

सिंघवी ने पूछा कि CrPC 406 के तहत चल रही इस कार्रवाई में मुकदमा एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर किया जा सकता है लेकिन क्या सिंगल जज खुद सीबीआई को जाँच सौंप सकते हैं? उन्होंने कहा कि मीडिया चाहे इस मामले को जितना भी सनसनीखेज बनाए, इससे कोर्ट को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में संघीय ढाँचा है, कहीं का केस कहीं भी दर्ज नहीं किया जा सकता।

वहीं, बिहार की तरफ से पेश हो रहे वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि अगर सुशांत के बैंक अकाउंट से 15 करोड़ रुपए गायब हुए हैं तो सुशांत के पिता को पटना में रिपोर्ट दर्ज करवाने का पूरा अधिकार था। उन्होंने मुंबई पुलिस की जाँच को मीडिया के सामने किया गया दिखावा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मुंबई पुलिस पर मामले को दबाने के लिए कोई दबाव है।

उधर ईडी ने श्रुति मोदी से पूछताछ की। रिया व सुशांत की पूर्व मैनेजर श्रुति मोदी ने अपने बयान में किसी भी तरह के गैरकानूनी वित्तीय लेन-देन से इनकार कर दिया या बैंक फंड से पैसे लेने की बात कही। उन्होंने रिया के बारे में खुलासा किया कि सुशांत की ज़िंदगी में आने के बाद सारे फैसले वही ले रही थी। रिया की जब श्रुति से मुलाकात हुई, तब वो उनकी बिजनेस पार्टनर थी। हालाँकि, फ़रवरी, 2020 के बाद उनकी बहुत कम बातचीत होती थी।

रिया चक्रवर्ती के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मुंबई पुलिस काफी काम कर रही है क्योंकि उसने 56 लोगों के बयान लिए हैं। रिया की तरफ से उनके वकील ने कहा कि रिया ने खुद ही सीबीआई जाँच की माँग की थी, लेकिन अब सोशल मीडिया पर लगातार मिल रही धमकियों के कारण वो परेशान हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले का पटना से कोई लेना-देना नहीं है।

मेरठ में जुनैद समेत दर्जन भर कट्टरपंथियों ने किया हिंदू युवकों पर तलवार, चाकू, बेल्ट से हमला: 3 घायल, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के मेरठ में खेल-खेल में दो संप्रदाय के बच्चों के बीच हुआ छोटा सा विवाद सांप्रदायिक हिंसा में तब्दील हो गया। मामूली घटना को लेकर समुदाय विशेष के लोगों ने तीन हिंदू युवकों पर हॉकी स्टिक, चमड़े की बेल्ट, तलवार और चाकू से हमला किया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक मौके पर पहुँची पुलिस ने तीनों घायल हिंदू युवकों को सीएचसी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया और उनकी शिकायतों के आधार पर फरार संप्रदाय विशेष के युवकों के खिलाफ FIR दर्ज की।

जानकारी के मुताबिक सोमवार (अगस्त 10, 2020) की शाम मेरठ की तहसील रोड पर एक खेल के मैदान पर दोनों समुदायों से संबंधित कुछ बच्चे खेल रहे थे। इसी दौरान उनके बीच किसी बात पर मामूली बहस छिड़ गई थी। हालाँकि, इस लड़ाई को कुछ बुजुर्ग लोगों ने बैठकर सुलझा दिया था।

मगर बाद में जब मेरठ के मवाना जिले के मोहल्ला मुन्ना लाल निवासी राकेश का बेटा करण, अपने चौहान चौक, मोहल्ला काबलीगेट के दोस्तों शुभम (पुत्र देवेंद्र) और विशाल चौहान (पुत्र राजपाल) के साथ तहसील रोड स्थित मैदान में घूम रहे थे। तभी समुदाय विशेष के जुनैद (पुत्र फराहीम) समेत दर्जन भर युवक डंडे, हॉकी और चाकू और तलवार से लैस होकर वहाँ पहुँचे और तीनों हिंदू युवकों पर हमला कर दिया।

हमले में तीनों युवक विशाल, करण और शुभम घायल हो गए। सूचना पर एसओ सतीश कुमार पुलिस बल के साथ पहुँचे, लेकिन आरोपित तब तक फरार हो चुके थे। आरोप है कि इस दौरान कई राउंड फायरिग भी की। पीड़ित पक्ष की ओर से दो नामजद समेत दर्जन भर हमलावरों के खिलाफ तहरीर दी गई है।

हालाँकि, एसओ सतीश कुमार का कहना है तनाव जैसी बात नहीं है। फायरिग भी नहीं हुई है। आरोपितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जल्द गिरफ्तारी होगी। ऑपइंडिया ने मेरठ पुलिस के बयान लेने की कोशिश की, मगर संपर्क नहीं हो सका।

शाह फैसल ने छोड़ी राजनीति, दोबारा बनेंगे IAS? अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Shah Faesal Quitting Politics

भारत को रेपिस्तान कहने वाले शाह फैसल (Shah Faesal) के बारे में खबर आ रही है कि वो राजनीति छोड़कर फिर से प्रशासनिक सेवा से जुड़ना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने जो त्यागपत्र दिया था, उसे अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। हालाँकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। 

‘भारत सरकार कश्मीरियों की हत्या कर रही है और समुदाय विशेष के 20 करोड़ लोगों के साथ अत्याचार हो रहा है’, इसे मुद्दा बनाते हुए जनवरी 09, 2019 को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया था। शाह फैसल के राजनीति में आने पर खास मजहब वालों ने बढ़-चढ़कर दान के साथ अपना समर्थन दिया था और अब, जब उनके फिर से प्रशासनिक सेवा में जुड़ने की खबर आ रही है, तो वो लोग इसे कौम के साथ गद्दारी बता रहे हैं।

इस मुद्दे पर विस्तृत विश्लेषण आप इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक कर के देख सकते हैं

राम मंदिर का समर्थन करने पर अजीत पवार के बेटे को NCP सांसद सुप्रिया सुले ने अनुभवहीन बताकर किया किनारा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री व NCP नेता अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार ने 5 अगस्त को हुए अयोध्या राम मंदिर भूमिपूजन का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए इसे सांस्कृतिक जीत बताया है। इस ट्वीट में उन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन को भारत की सभ्यता का जागरण बताया।

पार्थ ने राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया और जय श्रीराम लिखते हुए अपने ट्वीट को समाप्त किया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा –

“आखिरकार श्रीराम,जो भारत की आस्था व संस्कृत के प्रतीक हैं। अब शांति से अपने घर में रहेंगे। लड़ाई बहुत कड़वी और लंबी थी। और अंत में, हम एक पीढ़ी के रूप में ऐसे ऐतिहासिक दिन तक पहुँचे हैं, जब हम हिंदू विश्वास की पुनर्स्थापना के गवाह होंगे।”

इसके बाद पार्थ ने गाँधीजी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि सभी को उन लोगों का भी सम्मान करना चाहिए, जिन्होंने इस विवाद में अपनी जमीन खोई।

उन्होंने लिखा, “भले ही कमजोर या तर्कहीन बहस थी, लेकिन कुछ लोगों की भावनाएँ बाबरी मस्जिद से जुड़ी थी। चलिए उनका सम्मान करें जिन्होंने खोया है। उनके तर्कों और दावों को वैसे भी हरा दिया गया है। इसलिए थोड़ा आगे बढ़कर उन्हें भी शामिल करते हैं, जिन्हें हमारी जीत में अपनी हार लग रही हैं।”

इस ट्वीट के बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई। पार्थ की बुआ और अजीत पवार की बहन, जो कि एनसीपी सांसद भी हैं, सुप्रीया सुले ने अपने ही भतीजे की टिप्पणी पर पार्टी की ओर सफाई दी। उन्होंने कहा कि पार्थ ने जो कुछ भी कहा वह सब उनकी निजी राय है और लोकतंत्र में सभी को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है।

गौरतलब की एनसीपी से जुड़े होने के बावजूद पार्थ की राय की महत्ता इसलिए भी है क्योंकि राम मंदिर मुद्दे पर महाराष्ट्र की महा अघाड़ी सरकार चुप रही। इसके अलावा, बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मुद्दे पर भी हम पार्थ को उनके पिता की लीक से हटकर चलते हुए देख सकते हैं।

एक ओर जहाँ पर महाराष्ट्र सरकार सुशांत मामले में सीबीआई को जाँच देने से मना कर रही थी। वहीं, पार्थ ने पिछले महीने इस मामले में सीबीआई जाँच की गुहार लगाई थी और इन्हीं सब को देखते हुए उनके रवैए पर सवाल भी उठने लगे थे।

महाविकास अघाड़ी सरकार के हितैषी पत्रकार निखिल वाघले ने ट्वीट पर कहा, “मुझे समझ ही नहीं आ रहा कि अजीत पवार के बेटे पार्थ भाजपा की मदद क्यों कर रहे हैं। पहले उन्होंने सुशांत मामले में सीबीआई जाँच की माँग की और फिर भूमिपूजन के लिए मोदी को बधाई दी। आखिर पक क्या रहा है?”

एक अन्य एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक ने भी इस मुद्दे पर पार्थ के बयानों पर बोला और उन्हें गैर अनुभवी बताया। मलिक ने कहा, “पार्थ पवार अभी नौजवान और नए हैं। उनमें अनुभवों की कमी हैं। इसलिए ऐसी चीजें हो जाती हैं। लेकिन इससे उनके बीच कोई अनबन नहीं होगी।”

हिंदुओं को भगाने, मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले साजिद को यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

UP की सुल्तानपुर पुलिस ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को साजिद नाम के एक शख्स को बलात्कार की धमकी देने और हिंदू समुदाय के खिलाफ फेसबुक पर हिंसक टिप्पणी शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

फेसबुक पर साजिद और अरशद नाम के दो आरोपितों की आपत्तिजनक टिप्पणियों का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए, एक ट्विटर यूजर ने शिकायत की, “अरशद और साजिद अली, जो सुल्तानपुर के निवासी हैं, ने हिंदुओं को भगाने और मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी दी है। जब सूरज पांडेय नाम के एक व्यक्ति ने सांप्रदायिक टिप्पणी पर आपत्ति जताई, तो दोनों ने उनकी नाबालिग बहन का बलात्कार करने की धमकी दी। कृपया उनके खिलाफ कार्रवाई करें।”

अरशद और साजिद सोशल मीडिया पर पंडित सूरज नाम के इस युवक को धमकी देते हुए देखे गए कि हिंदू धर्म के लोग उस इलाके में रहने के लिए उनसे भीख माँगेंगे और वो उनकी नाबालिग बहन का बलात्कार कर देंगे।

Screenshot of the abusive comments, via Twitter
Screenshot of the abusive comments, via Twitter

NCIB ने लिया संज्ञान

एक ट्विटर यूजर की शिकायत के बाद, उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय अपराध जाँच ब्यूरो (NCIB) ने इस मामले का संज्ञान लिया और सुल्तानपुर पुलिस को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

एक आरोपित गिरफ्तार

राष्ट्रीय अपराध जाँच ब्यूरो के ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए सुल्तानपुर पुलिस ने बताया कि इनमें से एक आरोपित साजिद को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे जिला जेल भेज दिया गया है। NCIB के ट्वीट के जवाब में पुलिस ने बताया कि आरोपित साजिद उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के सरकंडेडीह का रहने वाला है।

ट्वीट में आगे जानकारी दी गई कि साजिद को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295 ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का जान बूझकर किया गया प्रयास), 504 (भड़काना), 506 (आपराधिक धमकी), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप से यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सचिन पायलट की वापसी से और गहराया संकट: फूट पड़ी कॉन्ग्रेस में, थूका-चाटा कॉन्ग्रेसियों ने, लेकिन दोषी कौन है? भाजपा…

‘सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं’- राजस्थान में जब सियासी ड्रामा शुरू हुआ था, तब सचिन पायलट का यही ट्वीट सामने आया था। ये राजस्थान का ड्रामा कम और कॉन्ग्रेस का अंदरूनी कलह ज्यादा था। अब स्थिति ये है कि ‘सत्य’ परेशान भी रहा, पराजित भी हो गया और अब वापस जमीन पर धड़ाम से गिरा भी है। पायलट के प्लेन ने वहीं लैंडिंग कर दी, जहाँ से वो उड़ा था। एक ‘यू-टर्न’ के बाद सब शांत होता दिख रहा है।

मंगलवार (अगस्त 10, 2020) को सचिन पायलट इस पूरे विवाद के बीच पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए और उन्होंने कहा कि पार्टी से उनके द्वारा किसी भी पद की माँग नहीं की गई है। बकौल पायलट, उन्होंने तो सिर्फ सरकार के कामकाज के तौर-तरीके और पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान का मुद्दा उठाया था। 45 विधायकों में से एक पर राष्ट्रद्रोह तक का केस लगाए जाने और फिर इस 25 दिनों के सियासी चकल्लास के बाद आरोप वापस लिए जाने वाली प्रक्रिया पर भी उन्होंने नाराजगी जताई।

सचिन पायलट ने याद किया कि कैसे उनके ख़िलाफ़ कई मामले दर्ज किए गए। उनका कहना है कि ये सब नहीं होना चाहिए था। पायलट ने ये भी कहा कि उन्होंने तो बस कुछ मुद्दे उठाए थे। अब बदले की राजनीति नहीं होनी चाहिए। साथ ही कॉन्ग्रेस के प्रति श्रद्धा जताते हुए वो ये भी कहते नज़र आए कि वो पार्टी द्वारा दी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। वो ये कहने से भी नहीं चूके कि उन्होंने कभी पार्टी, इसकी विचारधारा और नेतृत्व को लेकर कुछ भी गलत नहीं कहा।

यहाँ पर सवाल उठता है कि अगर सब कुछ इतना ही सीधा और सपाट था तो वो गए ही क्यों थे? एक तरफ तो वो कहते हैं कि सरकार के कामकाज की प्रक्रिया को लेकर वो नाराज़ थे और दूसरी तरफ वो ये भी कहते हैं कि सरकार के ख़िलाफ़ तो उन्होंने कुछ कहा ही नहीं। जब कहने की बात आती है तो गहलोत ने पायलट को निकम्मा, नकारा कर धोखेबाज से लेकर और न जाने क्या-क्या कहा। अब यही सचिन पायलट कह रहे हैं कि अशोक गहलोत तो सम्मानित और बुजुर्ग हैं।

कॉन्ग्रेस में ड्रामा चल रहा था और मीडिया के साथ-साथ पार्टी के कई नेता इसे अमित शाह और भाजपा की चाल बताते रहे। मीडिया ने इसे ऐसे पेश किया जैसे भाजपा ही अशोक गहलोत की सरकार गिराने की कोशिश कर रही हो। अगर ऐसा था तो फिर सचिन पायलट अब वापस मान गए हैं तो फिर वो या उनकी पार्टी खुलासा क्यों नहीं करती कि इसमें भाजपा का क्या रोल था? अब सब एक हैं तो बता दें।

कॉन्ग्रेस में सोनिया गाँधी की बैठक में घमासान हुआ। ‘बुजुर्ग बनाम युवा’ की लड़ाई छिड़ गई। कुछ नेताओं द्वारा मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार पर ठिकरा फोड़ने के बाद ये बहस सोशल मीडिया पर आ गई और शशि थरूर व आनंद शर्मा जैसे नेताओं ने आगे आकर यूपीए के 10 साल के कार्यकाल का समर्थन करते हुए ‘आलोचक नेताओं’ से नाराज़गी जताई। अगर कोई मुद्दा ही नहीं था तो कलह ट्विटर पर क्यों हुआ?

अब मीडिया का एक बड़ा वर्ग ये प्रचारित करने में सक्रिय हो गया है कि कैसे राहुल गाँधी ने चुटकियों में इस मसले को सुलझा लिया। कैसे उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए सचिन पायलट को मनाम लिया और राजस्थान की सरकार गिराने से बचा कर भाजपा की साजिश को नाकाम कर दिया। राहुल गाँधी को हर महीने नए तरीके से लॉन्च किया जाता है। सचिन पायलट के बहाने भी उन्हें एक बार और लॉन्च किया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस के अंदरूनी रायते भाजपा के लिए झटका कैसे?

अब आते हैं उन लोगों पर, जो इसे भाजपा के लिए झटका बता रहे हैं। भाजपा को झटका, ‘ऑपेरशन लोटस’ नाकाम, अमित शाह से बड़े चाणक्य निकले अशोक गहलोत, राहुल ने भाजपा की चाल पर फेरा पानी और विधायकों को नहीं खरीद पाई भाजपा- मीडिया में ऐसी बातें चल रही हैं। उन लोगों से एक ही सवाल है कि इस पूरे मामले में भाजपा थी कहाँ? सिर्फ कॉन्ग्रेस नेताओं ने बयानों के अलावा? फिर भाजपा को झटका कैसे?

ये स्वाभाविक है कि अगर विरोधी पार्टी कमजोर होगी तो किसी भी दल को फायदा होगा। लेकिन, वहाँ चल रहे ड्रामे से भाजपा को झटका कैसे लग गया? कॉन्ग्रेस का संकट टला नहीं है। विधायकों को मनाने का दौर जारी है। गहलोत कैम्प के ही विधायकों की नाराजगी की खबर आ रही है, जो ये कह रहे हैं कि उनकी सरकार रहते हुए भी उन्हें बन्दी की तरह रहना पड़ रहा है। रेगिस्तानों में विधायकों को भटकाया जा रहा है।

जैसलमेर के सूर्यागढ़ में ठहरे विधायक मायूस हैं। उन्होंने रणदीप सुरजेवाला के सामने ही पूछा है कि जिन लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए सरकार को संकट में डाला, सरकार के काम-काज को प्रभावित किया और जिनके कारण ये पूरा ड्रामा चला, अब पार्टी उनके लिए ही बाहें फैलाए खड़ी हैं। परिवार से दूर रहे विधायक नाराज़ हैं कि वो वैसे के वैसे ही रह गए और जिनके कारण ये सब हुआ उनका स्वागत किया जा रहा है।

विधायकों के मान-मनव्वल का एक दौर फिर से चलेगा। एक बगावत टलने के बाद कई छोटे-छोटे बगावतों से पार्टी को नुकसान होने की पूरी संभावना है। कॉन्ग्रेस के जिन विधायकों को उम्मीद थी, झटका उन्हें लगा है, भाजपा को नहीं! अब सचिन पायलट अपने गुट के विधायकों को मंत्री बनवाएँगे, तो इन विधायकों के अरमान धरे के धरे रह जाएँगे। इन सबसे कॉन्ग्रेस को ही निपटना है, भाजपा को नहीं!

ये झटका किसे है? सचिन पायलट अब राजस्थान में कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नहीं रहे। न ही वो अब राज्य के उप-मुख्यमंत्री हैं। महीने भर उनका अपमान हुआ। कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें भला-बुरा कहा। अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम का पद वापस मिल भी जाता है तो फिर उन्हें क्या फायदा हुआ? साथ में उनका जो अपमान किया गया, वो भी तो रह गया। कल अगर उनकी कोई नाराज़गी होती है तो क्या उन्हें वैसा ही समर्थन मिलेगा, जैसा अभी मिला था?

हो सकता है कि इसी बीच गैंगस्टर विकास दुबे, भारत-चीन गतिरोध और सुशांत सिंह राजपूत के मुद्दे मीडिया में ऐसे छाए हुए थे कि एक समय के बाद सचिन पायलट को फुटेज मिलनी बन्द हो गई थी और उन्होंने सोच-विचार में इतना समय ले लिया कि अब उनके पास विकल्प ही नहीं बचे थे। भाजपा ने उनके मन-मुताबिक पद देने से मना कर दिया हो, ये भी हो सकता है। इस स्थिति में भी तो झटका सचिन पायलट को ही है।

शेहला रशीद के लिए मेडिकल किट बुर्का है, और मास्क हिजाब… बकैती से कुप्रथाओं का कर रही समर्थन

शेहला रशीद मानती हैं कि कोरोना वायरस के आने के बाद से पूरी दुनिया ने पीपीई के रूप में बुर्का और मास्क के रूप में नकाब को स्वीकारा है।

अपनी इस बात को शेहला ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू के एक ट्वीट के रिप्लाई में कहा है। उन्होंने भले ही इस मुद्दे को तंज भरे अंदाज में कहा है। लेकिन लोग इसे सुनकर अब शेहला का ही मजाक बना रहे हैं और उनसे इस बचकाने जवाब पर सवाल कर रहे हैं

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने 10 अगस्त को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने द वायर की पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी और शेहला रशीद की हालिया बातचीत पर सवाल उठाए। पूर्व जज काटजू ने पूछा कि आखिर आरफा जेएनयू की पूर्व छात्रा से शरिया, बुर्का, मदरसा जैसे मुद्दों पर क्यों नहीं पूछतीं।

उन्होंने ट्वीट में लिखा, “मैंने यूट्यूब पर शेहला राशिद का आरफा के साथ इंटरव्यू देखा। आरफा ने एक भी बार इस इंटरव्यू में नहीं पूछा कि शेहला कभी भी बुर्का, मदरसा, मौलानाओं की निंदा क्यों नहीं करती, जिनके कारण संप्रदाय विशेष के लोग पीछे हो रखे हैं। शेहला भविष्य के चुनावों में संप्रदाय विशेष के वोट बैंक खोने के डर से कभी भी आलोचना नहीं करती हैं। लेकिन आरफा इस पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं?”

अब इसी ट्वीट के रिप्लाई में शेहला रशीद बुर्के और नकाब का समर्थन करते हुए कहती हैं, “अंकल अब तो पूरी दुनिया बुर्का (पीपीई) और निकाब (मास्क) पहन रही है। शांत हो जाओ।” अपने इस ट्वीट के साथ शेहला हँसी वाले इमोजी भी लगाती हैं।

इसके बाद उनके ट्वीट पर लोगों की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो जाती है। लोग कहते हैं कि जब इंसान के पास दिमाग नहीं होता है, तो वह ऐसे ही जवाब देता है। ऐसे ही एक यूजर उनके इस तंज का उन्हें दूसरा पहलू बताता है और पूछता है कि क्या संप्रदाय विशेष की महिलाएँ जो बुर्का और नकाब पहनती हैं, वो हमेशा महामारी झेलती हैं।

एक विशाल नाम का यूजर कहता है,”ऐसे बेवकूफाना रिप्लाई देने से बेहतर होता कि आप इनका जवाब देतीं। मैने हमेशा देखा है कि लोग अपने समुदाय और धर्म की कुरीतियों की आलोचना करते हैं। लेकिन मैंने कभी भी एक संप्रदाय विशेष को पिछड़े रिवाजों की आलोचना करते नहीं देखा।”

बता दें, जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के एक साल पर आरफा खान्नुम ने शेहला रशीद के साथ बातचीत की थी। इस बातचीत में उन्होंने केवल ऐसे मुद्दे उठाए जिनसे यह पता चले कि मोदी सरकार के फैसले के बाद वहाँ चीजें कितनी बिगड़ीं।

द वायर पर अपलोड हुई करीब 33 मिनट की वीडियो में के नीचे कमेंट्स से भी हम देख सकते हैं कि अब लोग वास्तविकता में सेकुलरिज्म की आड़ में इस्लामिक एजेंडा चलाने वालों की सच्चाई जान चुके हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=Jei0mRMi1Ro