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भगवा झंडों से डरा नागरिक, कल हमारी मस्जिद में भी बाँध देंगे: अजीत भारती का वीडियो । Ajeet Bharti on Muslims Playing Victim On Bhumipujan

द वायर में एक खबर आती है कि दिल्ली के उस इलाके के समुदाय विशेष के लोग डरे हुए हैं, जिस इलाके में 5 महीने पहले हिन्दू विरोधी दंगे हुए थे। इन लोगों के डर के पीछे की वजह अयोध्या में भूमिपूजन के दौरान दीया जलाना और भगवा झंडा लहराना था। ये लोग कह रहे हैं कि आज सोसाइटी के गेट पर भगवा झंडा बाँधा है, कल को हमारी मस्जिद में न बाँध दें।

आर्टिकल में कहा गया है कि ‘मुल्ले बाहर निकलो’, ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए गए। जब हमने गली नंबर 2 के हिन्दुओं से बात की, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने दीए जलाए और झंडे लगाए, मगर कोई मजहब विरोधी नारे नहीं लगाए। कुछ लोगों ने जानबूझकर मजहबी पत्रकारों को फोन करके बुलाया और साम्प्रदायिक रंग दे रहे हैं।

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कोरोना संकट: PM ने राज्यों से की टेस्टिंग बढ़ाने की अपील, बोले- अपनाएँ 72 घंटे वाला फॉर्मूला, देश जीत जाएगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बीच मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 राज्यों के सीएम के साथ बैठक की। पीएम ने बैठक में इन राज्यों को कोरोना से जीतने का मंत्र दिया।

उन्होंने कहा कि अगर ये 10 राज्य कोरोना को हरा दें तो देश जीत जाएगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 केस की 72 घंटे में पहचान और ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग के जरिए हम इस बीमारी को मात दे सकते हैं। पीएम के साथ बैठक में आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार, गुजरात, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के सीएम शामिल हुए।

पीएम ने कहा कि देश में ऐक्टिव केस 6 लाख से ज्यादा हो चुके हैं। इनमें से ज्यादा मामले हमारे इन 10 राज्यों में ही है। इसीलिए हम समीक्षा के लिए बैठे हैं। आज की चर्चा से हमें एक-दूसरे के अनुभवों से काफी कुछ सीखने को मिला। एक बात निकलकर आया है कि अगर हम मिलकर अपने इन 10 राज्यों में कोरोना को हरा देते हैं, तो देश भी जीत जाएगा।

मोदी ने कहा कि टेस्टिंग की संख्या बढ़कर हर दिन 7 लाख पहुँच चुकी है। इससे संक्रमण को पहचानने और रोकने में जो मदद मिल रही है, आज हम उसके परिणाम देख रहे हैं। हमारे यहाँ मौत की दर पहले भी दुनिया के मुकाबले कम था और संतोष की बात है कि यह लगातार और कम हो रहा है। ऐक्टिव केस कम हुआ है, रिकवरी रेट बढ़ता जा रहा है। लोगों के बीच भी आत्मविश्वास बढ़ा है।

इस दौरान पीएम ने कहा कि बिहार, गुजरात, यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तेलंगाना में टेस्टिंग रेट बढ़ाने की जरूरत है। कोरोना के खिलाफ कंटेनमेंट, कंटैक्ट ट्रेसिंग और सर्विलांस सबसे प्रभावी हथियार है। हम सब कोशिशों से अच्छे परिणाम की ओर आगे बढ़े हैं। शुरुआत के 72 घंटे में केस की पहचान कर लें तो इसका संक्रमण नहीं फैल सकता है।

पीएम ने कहा कि अस्पतालों पर दबाव, हमारे स्वास्थ्य कर्मियों पर दबाव, रोजमर्रा के काम में निरंतरता का ना आ पाना, ये हर दिन एक नई चुनौती लेकर आते हैं। ये लगातार मिलना, चर्चा करना जरूरी भी है, क्योंकि जैसे-जैसे कोरोना महामारी को समय बीत रहा है, नई-नई परिस्थितियाँ भी पैदा हो रही हैं।

बैठक के दौरान पीएम ने कहा कि हरियाणा, यूपी के कुछ जिले और दिल्ली में एक समय ऐसा आया कि लगा कि अब कोरोना काबू में नहीं आएगा। दिल्ली सरकार ने तो ऐसी घोषणा की कि बहुत बड़ा संकट आएगा। पीएम ने कहा, “लेकिन हमने गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की। दिल्ली कार्ययोजना पर काम किया गया और हमें सफलता मिली। आज हम सबका प्रयास सामने है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “आपके राज्यों में जमीनी हकीकत की निरंतर निगरानी करके जो नतीजे पाए गए सफलता का रास्ता उसी से बन रहा है! मुझे विश्वास है कि आपके इस अनुभव की ताकत से देश ये लड़ाई पूरी तरह से जीतेगा, और एक नई शुरुआत होगी।”

स्वप्ना सुरेश को केरल सरकार से मिले ₹1 करोड़, CM विजयन को UAE से मिले ₹20 करोड़: केरल सोना तस्करी का पूरा ब्यौरा

केरल में डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। अब स्वप्ना सुरेश ने कहा है कि उनके अकाउंट से जो 1 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं, वो उन्हें केरल सरकार से ‘लाइफ मिशन प्रोजेक्ट’ के एजेंट के रूप में काम करने के लिए बतौर कमीशन मिले थे। ये केरल सरकार का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है जिसे 2017 में लॉन्च किया गया था।

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है कि भूमिहीन और जिनके पास आवास नहीं है, ऐसे परिवारों को बसाया जाए और उनके लिए घर बनाए जाएँ। अब इसमें केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम इसीलिए आता है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के मुखिया वही हैं और उन्होंने UAE की यात्रा भी की थी ताकि इसके लिए 20 करोड़ का डोनेशन जुटा सकें। UAE के ‘Red Crescent’ से उन्हें 20 करोड़ रुपए मिले, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

स्वप्ना सुरेश ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट को पास कराने के लिए उन्हें 1 करोड़ रुपए कमीशन मिले। कॉन्ग्रेस का तो यहाँ तक आरोप है कि केरल सीएम के UAE जाने के बाद ही स्वप्ना सुरेश और IT सचिव एम शिवशंकर भी दुबई गए थे। ऐसे में विपक्षी नेताओं का सवाल है कि विजयन ने जो MoU पर हस्ताक्षर किया, वो कहाँ और किसकी मौजूदगी में किया। क्या उस समय वहाँ स्वप्ना सुरेश भी उपस्थित थी?

उधर स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका भी NIA की स्पेशल कोर्ट ने खारिज कर दी है। सबूतों और केस डायरी के अध्ययन के बाद ये फैसला लिया गया। सोने की तस्करी में स्वप्ना सुरेश के खिलाफ कई सबूत हैं, ऐसा कोर्ट ने माना है। इस अपराध में UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई हो रही है। आतंकी गतिविधियों के भी इससे जुड़े होने की आशंका है। इस प्रकरण में अब तक क्या-क्या हुआ और कब हुआ, ये हम आपको बताते हैं।

केरल: सोने की तस्करी मामले में अब तक क्या हुआ

NIA ने खुलासा किया था कि पिछले 10 महीनों में केरल में लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई थी। एजेंसी ने अदालत को बताया था कि जाँच में यह भी पता चला है कि तस्करी मुख्य रूप से आभूषण बनाने में नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था, क्योंकि नकदी में लेन-देन करना मुश्किल हो गया था। एनआईए ने अदालत में कहा था कि आरोपितों ने सोना तस्करी के लिए यूएई दूतावास की सील और राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर अपराध को अंंजाम दिया।

राजनयिक के सामान के जरिए सोने की तस्करी करने की कोशिश करने वाली महिला स्वप्ना सुरेश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक जाँच की थी और पाया था कि तस्करी का सोना आतंकवादी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता था। स्वप्ना सुरेश और सरिथ, जो पहले यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे, ने राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में सीखा और सोने की तस्करी करने के लिए इसे मॉडस ऑपरेंडी के रूप में इस्तेमाल किया।

फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर के गुरुवार (जुलाई 2, 2020) को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर के खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी हुई। इतना सारा सोना डिप्लोमैटिक बैग में भर कर लाया गया था। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी सरिथ से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात रहा था। कहा जा रहा है कि 6 महीने पहले स्वप्ना को आईटी विभाग में इतना बड़ा पद दिए जाने के पीछे एम शिवशंकर ही है।

स्वप्ना सुरेश की फोन कॉल से यह खुलासा हुआ है, इतना ही नहीं वह केरल के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील से भी टच में थी। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री और CPI (M) नेता केटी जलील और आरोपित स्वप्ना सुरेश के बीच कॉल डेटा रिकॉर्ड से पता चला कि दोनों के बीच 16 कॉल किए गए थे और वह निरंतर सम्पर्क में थे। मंत्री और स्वप्ना सुरेश के बीच मई और जून के महीने में कई कॉल हुए थे।

स्वप्ना सुरेश के साथ मुख्यमंत्री विजयन के नजदीकी को लेकर केरल में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। विपक्ष मुख्यमंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहा है। एनआइए के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में सोना तस्करी सीधे तौर पर देश की आर्थिक स्थिरता पर हमले की कोशिश है। साथ ही इसका उपयोग आतंकी फंडिंग के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। मामला खुलने के बाद केरल के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर को पद से हटा दिया गया था।

NIA इस मामले में पाँचवे आरोपित रमीज़ को पूरे प्रकरण की अहम कड़ी मान रहा है और उससे पूछताछ में कई राज़ खुलने की सम्भावना है। सामान्यतः रमीज़ 2 महीने के लिए दुबई जाया करता था और फिर कुछ दिनों के लिए केरल वापस लौटता था। वो विजिटिंग वीजा लेकर दुबई में रुकता था। वो बिजनेस का बहाना बना कर वहाँ जाता था लेकिन जाँच में पता चला है कि वहाँ न तो उसका कोई बिजनेस है और न ही वो वहाँ कोई नौकरी करता है।

‘गलती नहीं सुधारी तो परिवार को नहीं छोड़ा जाएगा’: भूमिपूजन पर खुश BJP-RSS से जुड़े संप्रदाय विशेष को बंगाल इमाम एसोसिएशन की धमकी

राम मंदिर निर्माण के लिए हुए भूमिपूजन के बाद से जगह-जगह समुदाय विशेष के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसी संबंध में 7 अगस्त को बंगाल इमाम एसोसिएशन ने अपने बयान में भाजपा और आरएसएस से जुड़े संप्रदाय विशेष के लोगों को धमकी दी।

बयान में कहा गया कि अगर उन लोगों ने अपनी गलती नहीं सुधारी तो उनके परिवारों को नहीं छोड़ा जाएगा। एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा है कि संप्रदाय विशेष का जो भी कोई राम मंदिर के भूमिपूजन की खुशियाँ मना रहा है, वो इस्लाम को मानने वाला नहीं है। वो गैर-इस्लामी है।

बयान में कहा गया कि हाल ही में राम मंदिर निर्माण करने के लिए उस जगह पर भूमिपूजन हुआ जहाँ कभी बाबरी मस्जिद हुआ करती थी। इसलिए यह बात साफ है कि आरएसएस और भाजपा संप्रदाय विशेष के लोगों के मित्र नहीं है।

इस फरमान में यह भी कहा गया कि संप्रदाय विशेष का एक आदमी कभी भी तब संप्रदाय विशेष का नहीं रहता अगर वह उस व्यक्ति के पक्ष में हो जो इस्लाम विरोधी है। इसलिए जो सदस्य आरएसएस और वीएचपी के सदस्य हैं या उनसे जुड़े हुए हैं। उन्हें अपनी स्थिति के बारे में गौर करना चाहिए। उन्हें निर्णय लेना होगा कि वह भाजपा-आरएसएस में रहना चाहते हैं या फिर अपनी भूल सुधारना चाहते हैं।

फरमान में आगे भाजपा व आरएसएस से जुड़े संप्रदाय विशेष के लोगों को धमकी भी दी गई। इसमें लिखा गया कि इन लोगों को यह याद रखना चाहिए कि आने वाले समय में इनके परिजनों को बख्शा नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि यह बयान बंगाल इमाम एसोसिएशन की ओर से ठीक उसी समय आया था जब ऑलइंडिया इमाम एसोसिएशनन के साजिद रशीदी ने कहा था कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगा और शायद अब एक मंदिर उसे बनाने के लिए ध्वस्त किया जाए।

इसके अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने भी तभी कहा था कि बाबरी मस्जिद वहाँ था और हमेशा वहाँ मस्जिद ही रहेगा। अपने बयान में AIMPB ने इस भूमिपूजन से निराश लोगों को समझाते हुए यह भी कहा था कि दिल दुखाने की जरूरत नहीं है। स्थिति कभी एक जैसी नहीं रहती।

बता दें, बंगाल इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याहिया ने कहा, “यह संप्रदाय विशेष के उन लोगों को चेतावनी देना है जो आरएसएस-बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें अब यह तय करना चाहिए कि वे आने वाले दिनों में किसे समर्थन देना चाहते हैं। यह कोई फतवा नहीं है, लेकिन उन्हें यह समझने की जरूरत है कि वे उन्हें मदद कर रहे हैं जो संप्रदाय विशेष के लोगों को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।”

शिव मंदिर में लाउडस्पीकर बैन, मजिस्ट्रेट ने ऑर्डर देकर कहा – ‘इसे बजाने से कोरोना फैलेगा’

गुजरात के भुज क्षेत्र के मजिस्ट्रेट ने सावन के पवित्र महीने में शिव मंदिरों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति देने से मना कर दिया है। मजिस्ट्रेट ने अपना फैसला कोरोना वायरस का हवाला देते हुए सुनाया। उन्होंने कहा है कि लाउडस्पीकर से वायरस तितर-बितर हो जाएगा और ज्यादा जगहों पर फैलेगा।

मजिस्ट्रेट के इस आदेश में लिखा है कि भुज में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा है। इसलिए लाउडस्पीकर चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है क्योंकि माइक्रोफोन से निकलने वाली ध्वनि तरंगे संक्रमण को फैला सकती हैं।

गौरतलब है कि सावन महीने की शुरुआत में शिवमंदिर के प्रतिनिधियों ने भुज प्रशासन को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने 20 जुलाई से लेकर 20 अगस्त के बीच में सुबह 8 से दोपहर 1 बजे और रात 8 बजे से 10 बजे तक लाउडस्पीकर चलाने की अनुमति माँगी थी। लेकिन अनुमति देने की जगह मजिस्ट्रेट की ओर से ऐसा अजीबोगरीब बहाना लिखित तौर पर आया।

यहाँ बता दें कि हिंदू धर्म में सावन महीने को बेहद पावन माना जाता है। इस महीने में श्रद्धालु भगवान शिव को आराध्य मानकर अपनी पूजा अर्चना करते हैं। इस महीने में शिवभक्त व्रत रखते हैं।

इसके अलावा इस माह में हरिद्वार और गंगोत्री में स्नान की भी एक पुरानी परंपरा है, जिसे पिछले कई दशकों से लोग निभाते हुए आ रहे हैं। शिवभक्तों के लिए इस दौरान जगह-जगह विशेष इंतजाम होता है। काँवड़ ले जाते हुए वह इन जगहों पर विश्राम करते हैं।

मगर, इस साल कोरोना वायरस के कारण ये सब सावन महीने में संभव नहीं हो पाया। जिसके कारण लोगों अपने इलाकों में स्थित मंदिरों में ही इस महीने को पर्व की तरह मना रहे हैं।

ईद पर बदले की कमस खाने वाले शाह फैसल ने कहा- ‘मैं देशद्रोही नहीं, जो गलतियाँ हुईं, सुधारना चाहता हूँ’

जम्मू कश्मीर के पूर्व IAS अधिकारी शाह फैसल ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीति में शामिल होने का फैसला लिया था लेकिन अब उनका राजनीति से मोहभंग हो गया है। उन्होंने ‘जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट’ से नाता तोड़ लिया है। शाह फैसल ने कहा कि जम्मू कश्मीर की राजनीतिक वास्तविकता अब पूरी तरह बदल गई है और वो राज्य के लोगों को कल्पनायुक्त और अव्यावहारिक सपने नहीं दिखाना चाहते।

शाह फैसल ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को कहा कि जब उनके पास उन सपनों को पूरा करने के लिए कोई ताकत ही नहीं है तो फिर उनका राजनीति में रहने से क्या फायदा। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनके बारे में एक धारणा बना दी गई है कि वो देशद्रोही हैं। पूर्व IAS अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में उनके समस्यात्मक बयानों के कारण उनके देशविरोधी होने की बात कही गई।

उन्होंने कहा कि पिछले एक सालों में उन्होंने अपने बयानों से कई ऐसे लोगों को दुःख पहुँचाया है, जो उनके लिए अपने मन में सकारात्मक सोच रखते थे। शाह फैसल ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों को नाराज़ किया है। उन्होंने कहा कि अब उनसे जो भी गलतियाँ हुई हैं, उन्हें वो सुधारना चाहते हैं। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि राजनीति में लोगों को वास्तविकता का भान कराना खासा मुश्किल कार्य है।

शाह फैसल ने कहा कि वो जम्मू कश्मीर को सुनहरे सपने दिखा कर उन्हें बाद में निराश नहीं करना चाहते। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो फिर से IAS ज्वाइन करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि उनके आगे एक पूरी ज़िंदगी पड़ी हुई है और वो कुछ प्रोडक्टिव करना चाहते हैं, वो आगे बढ़ना चाहते हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके लिए क्या है और वो कहाँ जाएँगे, कुछ भी निश्चित नहीं है।

शाह फैसल ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और रोजगार उत्पन्न करने से जुड़े क्षेत्रों में उनकी रुचि है और वो इन्हीं क्षेत्रों में योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो अब काफी साफ़-सफाई से कुछ शुरू करना चाहते हैं क्योंकि जम्मू कश्मीर के लिए उनके पास कुछ सपने हैं। उन्होंने अपनी हिरासत अवधि में हुए अनुभवों के बारे में भी कहा। शाह फैसल ने इस बारे में बात करते हुए ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा:

“हिरासत में मैं जब तक रहा, वो मेरे लिए अनगिनत चीजें सीखने का एक अनुभव साबित हुआ। मुझे इस वास्तविकता का भान हुआ कि सब सब कुछ ख़त्म हो जाता है तो आप अंत में अकेले ही बचते हैं। इन सबमें सबसे ज्यादा आपका परिवार कष्ट उठाता है और आप जिसके लिए संघर्ष कर रहे हैं, वही लोग आपकी विपत्ति में अपना मजा ढूँढ लेते हैं। हिरासत ने मुझे बताया है कि मैं कहीं और से सम्बन्ध रखता हूँ। मैं उनके लिए अपनी ज़िंदगी को बर्बाद नहीं कर सकता, जो मेरी विपत्ति पर रो तक नहीं सकते।”

शाह फैसल ने ये भी कहा कि उन्होंने पिछले एक साल से कोई बयान नहीं दिया है। एक साल से वो चुप हैं, उन्होंने समय लिया, फिर भी राजनीति छोड़ने को उनका उतावलेपन में लिया गया निर्णय बताया गया। 2009 में UPSC की परीक्षा में पूरे देश में पहला स्थान पाने वाले पहले कश्मीरी फैसल ने कहा कि उनके लिए जम्मू कश्मीर की मेनस्ट्रीम राजनीति में कोई जगह है या नहीं, इस बारे में भी उन्हें कोई आइडिया नहीं है।

बता दें कि शाह फैसल का विवादों से पुराना नाता रहा है और वो अक्सर देशविरोधी ब्यान देते रहे हैं। शाह फैसल को अगस्त 2019 में दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लेकर कश्मीर में नजरबंद किया गया था। अगर 14 अगस्त को शाह फैसल दिल्ली में नहीं रोके गए होते तो वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत के खिलाफ मामला दर्ज करा चुके होते। वह घाटी में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने की तैयारी में थे।

अनुच्छेद 370 का विरोध करते हुए शाह फैसल ने कहा था, “कैसी ईद। दुनिया भर के कश्मीरी अपनी जमीन पर अवैध कब्जे का शोक मना रहे हैं। तब तक कोई ईद नहीं मनेगी, जब तक 1947 से हमसे छीनी गई हर चीज वापस नहीं ले ली जाती। जब तक हर अपमान का बदला पूरा नहीं होता, ईद नहीं मनेगी।” उन्होंने कहा था कि वो तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में बॉंटने के फैसले से हुई ‘पीड़ा’ का बदला नहीं ले लेते।

रायटर्स के पत्रकार देवज्योत घोषाल के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2019 में शाह फैसल से बात की थी। पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर में ‘संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प’ होने का दावा करते हुए लिखा था कि सैटेलाइट टीवी चालू थे और कई लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। घोषाल से बातचीत में शाह फैसल ने कहा कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर के भभक उठने की संभावना है, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं। घोषाल ने दावा किया है कि इसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई।

‘भारत के लिए कोरोना से भी घातक है कुरान’ – फेसबुक पर युवक ने लिखा, हाईकोर्ट ने दी जमानत

सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने 32 वर्षीय युवक को अग्रिम जमानत दे दी। युवक पर आरोप है कि उसने लॉकडाउन के समय कोरोना वायरस की तुलना कुरान से करके उसका अपमान किया और समुदाय विशेष की भावनाएँ भी आहत कीं।

न्यायमूर्ति के नटराजन ने कुसुमधरा कन्नियूर (kusumdhara kaniyoor) को अग्रिम जमानत देते हुए 25000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड जमा करवाया। इसके बाद उसे इस आदेश की तारीख के ठीक 15 दिन के भीतर स्वयं जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होने को कहा। साथ ही निर्देश दिए गए कि वह दोबारा ऐसा कोई अपराध न करें।

जानकारी के अनुसार बेल्लारी पुलिस ने आरोपित के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153ए और 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में मोहम्मद शहीर की ओर से तहरीर दी गई थी। केस दर्ज होने के बाद आरोपित ने मंगलोर के सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया मगर वहाँ से उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद वह हाईकोर्ट पहुँचा।

यहाँ वकील सचिन बीएस ने याचिकाकर्ता के मामले की पैरवी की। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता निर्दोष है, उसके खिलाफ़ गलत मामले में केस दर्ज हुआ है। इतना ही नहीं उसने कुछ भी ऐसा नहीं किया, जिसके कारण आईपीसी की धारा 153 ए और 505 (2 ) के तहत मामला दर्ज हो। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई अपराधिक कार्य नहीं किया, जो प्राथमिक दृष्टि में समाज के विभिन्न वर्गों में शत्रुता पैदा करे।

वहीं, वकील महेश शेट्टी ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाला था, जिसमें उसने लिखा कि भारत के लिए कोरोना वायरस से भी ज्यादा कुरान घातक है- और ये धारा 153ए और 505 (2) के तहत दण्डनीय है। उन्होंने कहा कि जबसे ये केस शुरू हुआ, उसी वक्त से आरोपित फरार है। अगर ऐसे में इसे बेल मिल गई तो ये इस केस से भी बच निकलेगा। इसलिए इसे कस्टडी में लेकर जाँच करने की आवश्यकता है।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद बेंच ने कहा कि सरकार के वकील की ओर से कोई भी ऐसा सबूत नहीं दिखाया गया, जिससे साबित हो कि पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से पहले इजाजत ली। इस मामले में जिलाधिकारी को संज्ञान लेना था।

“इसलिए तथ्यों और केस के हालातों को देखते हुए, मंजर सईद खान के केस में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों के मद्देनजर व याचिकाकर्ता के मैसेज को देखते हुए, इस समय यह नहीं कहा जा सकता कि जो उसने किया वह दण्डनीय अपराध है, जिससे समाज के दो समुदायों में साम्प्रदायिक हिंसा भड़के या दोनों के बीच तनाव हो।” – जज ने बेल देते हुए यह तर्क दिया।

इस्लामी आतंक का बर्बर चेहरा: मात्र 1 हफ्ते में ली 221 लोगों की जान, 11 देशों पर हुए 38 हमले – मीडिया रिपोर्ट

इस्लामी आतंकियों ने विश्व के हर कोने में कहर मचा रखा है। कुछ देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने अभी हाल ही में इनकी बर्बरता झेली। एक जानकारी के अनुसार, अगस्त माह में केवल 7 दिनों के भीतर इस्लामी आतंकियों ने 11 देशों पर आक्रमण किया और 221 लोगों को मारा।

वहीं, 9 दिन के आँकड़े देखें तो इस्लामी आतंक का शिकार कुल 280 लोग हुए। इसके अलावा 30 दिन के अंदर 135 इस्लामी हमले 21 देशों में हुए, जिसमें करीब 662 लोग मारे गए और 646 घायल हुए।

सभी आँकड़े द रिलिजियन ऑफ पीस वेबसाइट के अनुसार:

1 अगस्त 2020:

  • अफ़गानिस्तान के तरीन कोट में तालिबानियों ने एक बाग में बम फिट किया, जिसके कारण एक निवासी की मौत हो गई।
  • इसी दिन अफ़गानिस्तान के खोदजे में सामाजिक कार्यकर्ता का अपहरण हुआ और बाद में कट्टरपंथियों ने उसे मार डाला।
  • नाइजीरिया के नसरवा में भी इस दिन गोलीबारी की घटना हुई। इस घटना में 5 लोग मारे गए और 14 घायल हुए। वेबसाइट बताती है कि इस घटना के पीछे भी संप्रदाय विशेष के आतंकियों का हाथ संदिग्ध है।
  • साइरिया के डेर एज्जोर में ISIS का हमला हुआ, जिसमें 4 लोग मारे गए और 2 घायल हुए। 

2 अगस्त 2020:

  • इथियोपिया के गुबा में संप्रदाय विशेष के आतंकियों के हमले में 13 नागरिकों को अपनी जान गँवानी पड़ी और 6 घायल हुए।
  • बुर्किना फासो के औएहिगौया में कट्टरपंथियों ने एक आईडी हमला किया। इस हमले में 6 लोग मारे गए और 4 घायल हुए।
  • साइरिया के डेर एज्जोर में ISIS ने दो लोगों की हत्या की। इनमें एक तो लोकल इंवेस्टिगेटर था, जिसे पकड़कर ISIS ने मारा। दूसरा एक आम व्यक्ति था, जिसका पहले अपहरण हुआ और फिर उसका गला काटा गया।
  • कैमरूप के Nguetchewe में इस दिन बोको हरम नाम के इस्लामिक ग्रुप ने एक कैंप में ग्रेनेड फेंका। जिसके कारण यहाँ 18 लोगों की मौतें हुईं और 11 लोग घायल हुए।
  • माली के गोमा कौरा में स्थानीय सैनिक जिहादियों द्वारा घात लगाकर मारे गए।
  • अफ़गानिस्तान के जलालाबाद में एक जेल पर हमला किया गया, जिसमें 29 लोगों की जानें गईं और 50 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
  • सोमालिया के Wanlaweyn में अलकायदा के आतंकियों ने एक घर पर ग्रेनेड का हमला किया, जिसके कारण उस घर का 1 व्यक्ति मारा गया और 1 गंभीर रूप से घायल हुआ।

3 अगस्त 2020:

  • अफ़गानिस्तान के शिकल में एक शादी समारोह में ही बम विस्फोट कर दिया गया। इसमें दो महिलाएँ और एक बच्चा मारे गए।
  • नाइजीरिया के वाशो में एक पत्रकार को उसके घर में ही जान से मार दिया गया। इसके पीछे फुलानी कट्टरपंथियों का हाथ संदिग्ध है।
  • सोमालिया के मोगादिशु में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को रेस्ट्रां के बाहर उड़ा लिया, जिसके कारण वहाँ मौजूद दो सुरक्षाकर्मी मारे गए।
  • अफ़गानिस्तान के स्पिन बोलदोक में एक बम हमले में 2 नागरिक मारे गए और 2 घायल हुए।

4 अगस्त 2020:

  • अफ़गानिस्तान के चेमई शेर में 12 पुलिसकर्मी एक बंदी को गाड़ी में बैठाकर ले जा रहे थे। तभी तालिबानियों ने हमला बोला और बर्बरता से सभी की हत्या कर दी।
  • अफ़गानिस्तान के इजाना में एक कट्टरपंथी ने एक स्थानीय गायक की हत्या की।
  • अफ़गानिस्तान के फराह में तालिबानियों ने एक डॉक्टर को मार डाला।
  • सीरिया के मायादीन में इस दिन 3 लोग ISIS का शिकार हुए। एक सुरक्षाकर्मी और दो आम नागरिक। सुरक्षाकर्मी को तो एक बंदूकधारी ने मारा। जबकि बाकी दो बम ब्लास्ट का शिकार हुए। इस बम हमले में 8 अन्य घायल भी हुए।

5 अगस्त 2020:

  • इथिओपिया के गुबा में 3 लोग इस्लामिक अटैक में घायल होने के बाद मारे गए।
  • इराक के माताबजिया में ISIS ने 3 आम जनों की हत्या की।
  • पाकिस्तान के बिन साही में तालिबानियों ने सीमा पर तैनात के सुरक्षाकर्मी को गोलियों से भून डाला।
  • अफ़गानिस्तान का Hadurokali में एक दुकानदार की हत्या की गई।
  • अफ़गानिस्तान के खशरोड में मजहबी उन्मादियों ने बम हमला करके 7 नागरिकों की जान ले ली जबकि 1 नागरिक इसमें घायल हुआ।
  • इराक के सालादीन में ISIS ने दो इराकियों को मार डाला और 3 गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • सोमालिया के Daynuney में 8 लोगों को अल शबाब द्वारा मारा गया।

6 अगस्त 2020:

  • अफ़गानिस्तान के चश्माए शिर में एक बम हमले में 11 लोग मारे गए।
  • नाइजीरिया के कुरमीन मसारा में स्थित एक गाँव पर आतंकियों ने सुनियोजित हमला किया। इसमें 13 ग्रामीण मारे गए और 5 गंभीर रूप से घायल हुए।
  • नाइजीरिया के तकमावई में 7 ग्रामीणों को संप्रदाय विशेष के आतंकियों ने मारा।
  • अफ़गानिस्तान के नावा में 6 पुलिसकर्मियों की हत्या कट्टरपंथियों ने की।
  • भारत के काजिगुंड में ग्राम प्रधान को उसके घर के पास मुजाहिद्दिनों ने मार डाला।
  • अफ़गानिस्तान के तागाब में एक तालिबानी हमला हुआ, जिसमें 3 मारे गए।
  • इराक में खानाकिन में इस्लामिक स्टेट ने हमला किया, जिसमें दो इराकियों की जान चली गई।
  • यमन के रादा में अलकायदा ने एक शिया समुदाय के व्यक्ति को मार डाला।

7 अगस्त 2020:

  • नाइजीरिया के जंगो कतफ में फुलानी आतंकियों ने 12 से अधिक ग्रामीणों को मार डाला।
  • बुर्किना फासो के Namoungou में फिर एक बड़ा हमला हुआ। इस्लामिक आतंकी इस बार मशीन गन के साथ पशु बाजार में आए और 20 लोगों को मौत के घाट उतार गए।
  • नाइजीरिया में कदूना में जमात अल-अंसार अल-मुस्लीमीन ने दो दर्जन से अधिक “धर्म त्यागने” वालों को मारने का दावा किया।

8 अगस्त 2020:

  • सोमालिया के मोगादिशु में एक स्पोर्ट्स स्टेडियम के बाहर सुसाइड बॉम्बर ने खुद को बम से उड़ा लिया। जिसमें आसपास के 8 लोग मारे गए और 14 घायल हुए।
  • अफ़गानिस्तान के गजनी में एक तालिबानी हमला हुआ, जिसमें 7 लोग मारे गए और 15 को गंभीर चोट पहुँची।
  • पाकिस्तान के क्लिफ्टन में एक 19 वर्षीय महिला के सिर पर बुलेट मार दी गई।
  • अफ़गानिस्तान के शेरजाद में एक परिवार पर मोर्टर दागा गया। 9 लोग इसके कारण घायल हुए और 1 को अपनी जान गँवानी पड़ी।
  • अफ़गानिस्तान के मायवंद में एक कट्टरपंथी समूह ने स्थानीय पुलिस पर बर्बर हमला किया और 4 पुलिसकर्मियों को मार डाला।

9 अगस्त 2020:

  • भारत के जम्मू कश्मीर के शोपियाँ में एक सुरक्षागार्ड की हत्या कर दी गई।
  • अफ़गानिस्तान के मातखान में एक मोटरसाइकिल को अपना निशाना बनाया और रोडसाइड बम के इस्तेमाल से दो लोगों को मार डाला।
  • अफ़गानिस्तान के शी नारी में तालिबानियों ने 8 नागरिकों को मारा।
  • अफ़गानिस्तान के काबुल में कट्टरपंथियों ने बम हमले में दो लोगों की जान ली।
  • नाइजर के कोर में फ्रांसिसियों को गाइड और ड्राइवर सहित मार दिया गया।

मर चुके पिता को आखिरी बार देखने के लिए जब बेटे से माँगे ₹51000: पश्चिम बंगाल की कहानी

बंगाल में एक बेटे को अपने मृत पिता के अंतिम दर्शन के लिए अस्पताल प्रशासन से लेकर पुलिस और मीडियाकर्मियों तक से गुहार लगानी पड़ी। अस्पताल के स्टाफ ने पहले तो बेटे को उसके पिता की मृत्यु के बारे में सूचना नहीं दी और जब बेटे ने पूछा तो पता चला कि शव दाह संस्कार के लिए जा चुका है। बेटा जब श्मशान घाट पहुँचा तो वहाँ उससे मोटी रकम माँगी गई। इसके बाद उस बेटे ने पुलिस से गुहार लगाई और मीडिया से दबाव बनवाया। तब जाकर वह अपने पिता को आखिरी बार देख पाया।

हरि गुप्ता के पुत्र सागर गुप्ता के अनुसार, उनके पिता की मृत्यु कोरोना के कारण शनिवार को हुई। लेकिन अस्पताल ने उन्हें इस संबंध में समय से सूचित नहीं किया और रविवार को फोन करके जानकारी दी कि उनके पिता की मृत्यु हो गई है। जब उन्होंने इस बारे में अस्पताल स्टाफ से सवाल किए, तो जवाब मिला कि उनके पास कॉन्टैक्ट नंबर नहीं था।

परिजन भागते-भागते अस्पताल पहुँचे, पर वहाँ बताया गया कि शव को दाह संस्कार के लिए भेज दिया गया। इसके बाद परिवार श्मशान घाट भी पहुँचा। लेकिन वहाँ अस्पताल के स्टाफ ने उनसे 51000 रुपए की माँग की। इसी बात को सुनकर परिवार वालों की उनसे बहस भी हुई, जिससे अस्पताल का स्टाफ 51000 रुपए की जगह 31000 रुपए माँगने लगा।

स्टाफ का ऐसा बर्ताव देखकर परिवार ने पुलिस को संपर्क किया और अधिकारियों को भी बताया कि पुलिस पहुँच रही है। मगर, तब भी अस्पातल अधिकारियों ने उनकी नहीं सुनी। अधिाकिरयों ने पुलिस को भी कह दिया कि वह वापस जाएँ और उच्चाधिकारियों से इस संबंध में बात करें।

परिवार ने इस बीच ये सारी घटना अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करने की कोशिश की। किंतु उन लोगों ने परिजनों का फोन भी छीन लिया। बाद में मीडिया के दबाव में आकर अधिकारियों ने डिपोजिट अमाउंट के रूप में केवल 2500 रुपए लिए और बॉडी को दिखाया। परिवार ने कहा कि यह सब मीडिया दबाव के कारण संभव हो पाया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जब इस संबंध में हावड़ा कॉर्पोरेशन कमिशनर धवल जैन से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि श्मशान घाट पर बड़े अक्षरों में नंबर लिखा हुआ है। अगर किसी को कोई बात की चिंता है या शिकायत है तो वह हमें इस नंबर पर कॉल कर सकता है। लेकिन तब भी परिवार ने कोई शिकायत नहीं की। शायद उन्होंने यह नंबर ही नहीं देखा। हमें जैसे ही इस संबंध में शिकायत मिलेगी, तब जाँच करेंगे।

महेश भट्ट की ‘सड़क-2’ में किया जाएगा हिन्दुओं को बदनाम: आश्रम के साधु के ‘असली चेहरे’ को एक्सपोज करेगी आलिया

सुनील दत्त के बेटे हैं संजय दत्त। महेश भट्ट की बेटियाँ हैं पूजा और आलिया। सिद्धार्थ रॉय कपूर के भाई हैं आदित्य। इन सबकी फिल्म आ रही है सड़क-2, जिसे निर्देशित कर रहे हैं महेश भट्ट और इसका निर्माण वो अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ मिल कर कर रहे हैं। ऐसे में लाजिमी है कि नेपोटिज्म विवाद के बीच इस फिल्म का विरोध हो क्योंकि सुशांत मामले में भी महेश भट्ट को लेकर कई खुलासे हुए हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस दौरान ‘अनइंस्टॉल हॉटस्टार’ ट्रेंड होता रहा क्योंकि लोगों का कहना है कि इस फिल्म में केवल नेपोटिज्म के प्रोडक्ट्स भरे पड़े हैं, जिन्हें महेश भट्ट आगे बढ़ा रहे हैं। चूँकि इसे ‘डिजनी हॉटस्टार’ पर रिलीज किया जाना है, इसीलिए इसका विरोध हो रहा है। सोशल मीडिया में कई लोगों ने हॉटस्टार को अनइंस्टॉल कर के स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए। अब एक और कारण से फिल्म का विरोध हो रहा।

ये कारण है- इस फिल्म की कहानी। हम जानते हैं कि बॉलीवुड में अक्सर पंडितों और साधु-संतों को धोखेबाज और बलात्कारी दिखाया जाता रहा है जबकि संप्रदाय विशेष के किरदारों को ईमानदार और देश के लिए मर-मिटने वाला प्रदर्शित किया जाता रहा है। इसी तरह ‘सड़क-2’ में भी महेश भट्ट एक ऐसी कहानी लेकर आ रहे हैं, जिसमें एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा और उसके काले कृत्यों का खुलासा किया जाएगा।

‘मुंबई मिरर’ ने फिल्म के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया कि इस फिल्म में आलिया भट्ट का किरदार एक ऐसी महिला का होगा, जो एक ‘फेक बाबा’ से पंगा लेती है। दिखाया जाएगा कि दुनिया के सामने अच्छा बना रहे वाला गुरु कितना बड़ा अपराधी है और उसका असली चेहरा कुछ और है। ये आलिया बनाम एक आश्रम चलाने वाले बाबा की कहानी है। संजय दत्त का किरदार बाबा को ‘एक्सपोज’ करने में आलिया की मदद करेगा।

सड़क-2 में आलिया भट्ट का फर्स्ट लुक

सिने इंडस्ट्री में कई खलनायक वाले किरदारों को जीवंत कर चुके गुलशन ग्रोवर का भी इस फिल्म में अहम किरदार है लेकिन महेश भट्ट का कहना है कि मुख्य विलेन बाबा के किरदार में वो नहीं ‘महान अभिनेता’ ने प्ले किया है। मई 2019 में जब फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली थी, तभी महेश भट्ट ने ये बातें कही थीं। अब पता चला है कि विलेन बाबा या गुरु का किरदार महशूर थिएटर एक्टर मकरंद देशपांडे प्ले करेंगे।

सड़क-2 को अगस्त 28, 2020 को हॉटस्टार पर रिलीज किया जाएगा। फिल्म के फर्स्ट लुक पोस्टर्स देखने पर पता चलता है कि आलिया भट्ट और संजय दत्त किसी तांत्रिक के तरह के व्यक्ति से टकरा रहे हैं, जिसे पिशाच की तरह प्रदर्शित किया गया है। साथ ही पोस्टर्स में ये अभिनेता-अभिनेत्री ‘आग से खेलते’ भी नज़र आते हैं। आलिया के पोस्टर के साथ ‘असली हिम्मत वो होती है जो डर के बावजूद भी जुटानी पड़ती है” टैगलाइन लिखा है।

1999 में आई ‘कारतूस’ के बाद से महेश भट्ट ने निर्देशन से एक तरह का संन्यास ले रखा था, जो सड़क-2 के साथ ख़त्म होगा। बता दें कि 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा के अपने घर में लटके मिले थे। 8 जून को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या की थी। खुलासा हुआ है कि इसी दिन सुशांत का घर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चकवर्ती ने छोड़ा था। 8 से 13 जून के बीच महेश भट्ट और रिया चकवर्ती के बीच फोन पर कई बार बात हुई।