उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में मॉर्निंग वॉक पर निकले पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर की हत्या कर दी गई है। ये घटना मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की सुबह हुई। तीन अपराधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया और फिर फरार हो गए। संजय खोखर को तीन गोलियाँ लगी हैं, जिसके बाद मौके पर ही उनकी मौत हो गई। छपरौली थाना क्षेत्र में ये वारदात हुई, जब वो तड़के सुबह सैर के लिए निकले थे।
भाजपा नेता की हत्या के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस ने बताया है कि भाजपा नेता संजय खोखर के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हॉस्पिटल भेजा गया है और अपराधियों की धर-पकड़ के लिए टीम का गठन कर दिया गया है। पुलिस ने हत्यारोपितों की जल्द गिरफ़्तारी कर इस हत्याकांड के खुलासे की बात कही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनकी मौत पर गहरी संवेदना प्रकट की है। कहा जा रहा है कि सीएम ने इस मामले में सख्ती दिखाई है और पुलिस को घटना के खुलासे के लिए 24 घंटे का वक़्त दिया है। मुख्यमंत्री ने आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। संजय खोखर काकोर कला गाँव के जूनियर हाईस्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत थे। वो तिलवाड़ा मार्ग से सुबह की सैर के लिए निकले थे।
यूपी के बागपत में बीजेपी के पूर्व ज़िलाध्यक्ष संजय खोखर की गोली मार कर हत्या। संजय खोखर सवेरे सैर करने अपने खेतों की तरफ गये थे वहीं पर बदमाशों ने गोली मार कर हत्या की। pic.twitter.com/tKqq3bA1Xr
वहाँ से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर एक खेत में उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई। वो अकेले ही घूमने निकले थे। स्थानीय एसपी, सीओ और थानाध्यक्ष ने पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँच कर स्थिति का जायजा लिया। बताया गया है कि अपराधी पहले से ही घात लगा कर बैठे हुए थे। संजय खोखर 3 वर्षों तक बागपत में भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे थे और उनके कार्यकाल में ही पार्टी ने बड़ौत व बागपत विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।
हाल ही में इसी तरह से बडगाम में भाजपा OBC मोर्चा के जिलाध्यक्ष अब्दुल हामिद नज़र की हत्या कर दी गई। आतंकियों ने उन्हें रविवार (अगस्त 9, 2020) को गोली मार दी थी। भाजपा ओबीसी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अब्दुल हामिद सिक्यॉरिटी सेंटर से सैर के लिए निकले थे। तभी बाइक सवार आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी थी। 38 वर्षीय अब्दुल हामिद नज़र बडगाम के मेहदीपोरा के रहने वाले थे।
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के एक ऐसे कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है, जो हथियारों का एक बड़ा रैकेट चला रहा था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में मोहम्मद इंसार खान को गिरफ्तार किया है, जो आर्म्स रैकेट का संचालक था। जब उसे गिरफ्तार किया गया, तब वो इंडिया गेट पर हथियारों की डिलीवरी देने के लिए पहुँचा था। उसका सहयोगी पारस चोपड़ा भी गिरफ्तार हुआ है।
पारस हरियाणा के करनाल में एक गन हाउस चलाता था। इस मामले में तलाश किए जा रहे तीसरे अभियुक्त का नाम दीपक है, जो बागपत का हिस्ट्री शूटर है। वो फ़िलहाल फरार है। ये गैंग गन हाउस से फेक लाइसेंस बनवा कर बंदूकें उठाता था और फिर उसे दुर्दांत अपराधियों को बेच दिया करता था। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के हिस्ट्रीशीटर अपराधी इस गैंग से हथियार ख़रीदा करते थे।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी भीष्म सिंह ने बताया कि उन्हें ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति दिल्ली से हथियार लेकर यूपी के बदमाशों को बेचने के लिए आने वाला है। इसके बाद पुलिस सतर्क हो गई और इंडिया गेट के पास तिलक मार्ग से इंसार खान दबोचा गया, जो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का कर्मचारी निकला। पूछताछ में उसने बताया कि वो दीपक से पिस्टल खरीद कर आ रहा था।
वह फर्जी लाइसेंस बनवा कर गन हाउस से अब तक कई पिस्टल खरीद चुका था। पुलिस ने दीपक के घर पर भी छापेमारी की, जहाँ से 14 करतूत और एक पिस्टल की मैगजीन बरामद हुई। ‘चोपड़ा गन हाउस’ का संचालक पारस चोपड़ा भी धरा गया है। इंसार के पास से जो पिस्टल बरामद हुई, उसे भी पारस ने दीपक को बेचा था। हथियार के सत्यापन के बिना ही उसे बेच दिया जाता था।
Khan’s associate, Paras Chopra, owner of a gunhouse in Karna, Haryana, nabbed as well. Third accused, Deepak, a history sheeter of Baghpat, UP, is absconding. The gang procured weapons from the gunhouse on fake licence and sold to criminals in Delhi, UP and Haryana. pic.twitter.com/BA9Rt7bGzS
पुलिस को हथियारों की खरीद-बिक्री का कोई रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। पूछताछ में इंसार खान ने बताया कि कर्मचारी चयन आयोग (SSC) नई दिल्ली द्वारा आयोजित आशुलिपिक की परीक्षा के बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में उसकी नौकरी लगी थी। उसने बताया कि वो सोचता था कि वो सरकारी कर्मचारी है, इसीलिए उस पर किसी का भी शक नहीं जाएगा। इसी आड़ में वो आर्म्स रैकेट चला रहा था।
इंसार खान ही उत्तर प्रदेश से हथियारों की सप्लाई लेता था और फिर दिल्ली में डिलीवरी करता था। इससे पहले भी लखनऊ में उस पर धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का ममला दर्ज किया गया था। 2012 में उसकी सरकारी नौकरी लगी थी। अमीनाबाद पुलिस ने उसे स्टेनोग्राफर की परीक्षा में चीटिंग से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार भी किया था। बावजूद इसके वह मंत्रालय में नौकरी पाने में कामयाब रहा था।
चीन के कर्ज में डूबे पाकिस्तान की हालत इस खबर से अच्छे ढंंग से समझी जा सकती है। परमाणु संपन्न देश (धमकी देते वक्त वो यही कहता है) की सेना को दूसरे देश के मजदूर सरेआम धो देते हैं, वो भी जम कर। और ऊपर के अधिकारियों से आदेश से क्या आता है – “कुछ मत करना, पलट कर मारने की सोचना भी मत।” यह आदेश निश्चित ही अंग्रेजी में था लेकिन उसके हिंदी अनुवाद का सार यही है।
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) पर काम करने वाले चीन के मजदूरों ने पाकिस्तान के दो सैनिकों को खूब पीटा। पाकिस्तानी सेना के हवलदार असदउल्ला और सिपाही फजल-उर-रहमान को चीनी मजदूरों ने पीटा है।
पाकिस्तानी सैनिकों की चायनीज मजदूरों द्वारा थुराई के संबंध में वहाँ के लेफ्टिनेंट कर्नल इमरान कासिम ने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भी लिखा। लेकिन चायनीज मजदूरों पर कार्रवाई के बजाए सेना और सरकार के अधिकारियों ने खामोश रहने का आदेश दिया। ऊपर से जवानों को संयम बरतने की सलाह दी गई।
लेफ्टिनेंट कर्नल इमरान कासिम के लिखे लेटर के अनुसार, चायनीज मजदूरों और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच मारपीट की घटना 21 जुलाई की है। यह उन पाकिस्तानी सैनिकों के साथ हुआ, जिन्हें चार चायनीज मजदूरों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। लेटर में बताया गया कि सैनिकों के पास कोई ट्रांसलेटर नहीं था, जिससे यह विवाद मारपीट तक बढ़ गया।
हुआ यह कि चायनीज मजदूर चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) के लिए काम कर रहे थे। तभी इनमें से एक (जिसे मीडिया रिपोर्ट में मजदूरों का लीडर बताया गया है), इस साइट को छोड़कर दूसरी साइट पर जाना चाहता था। लेकिन शायद सुरक्षा कारणों से पाकिस्तानी सैनिक बिना आदेश के उसे जाने देने के लिए तैयार नहीं थे।
सुरक्षा में लगे पाकिस्तानी सैनिक ने इस संबंध में आदेश के लिए आर्मी कैंप में फोन लगाने का फैसला किया। लेकिन सैनिकों के पास कोई ट्रांसलेटर नहीं था, इसलिए उसके कॉल करने से पहले ही संवाद की कमी के कारण चीनी मजदूरों ने मारपीट शुरू कर दी।
पहले भी हुआ है यह सब
जून 2019 में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी। तब दो बार चायनीज वर्कर्स की तरफ से पाकिस्तानी सेना की गाड़ियों के प्रयोग की बात कही गई थी। उस समय का मामला पाकिस्तानी सेना के लिए काफी शर्मनाक था। तब की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना की गाड़ियों से चायनीज वर्कर्स रेड लाइट एरिया (जिस्म के बाजार) जाते थे।
अब से दो साल पहले 2018 में भी ऐसा ही एक वाकया हुआ था। तब एक चायनीज इंजीनियर ने पाकिस्तान के पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की थी। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था। वीडियो में साफ देखा जा सकता था कि एक नाराज चायनीज इंजीनियर पाकिस्तान की पुलिस की गाड़ी के बोनेट पर खड़ा है और हंगामा कर रहा है।
आज जन्माष्टमी है अर्थात जनमानस में प्रेम, संघर्ष और आनंद के पर्याय भगवान कृष्ण का जन्म दिवस। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को श्री कृष्ण ने जन्म लिया थ। उनका जन्म लेना अपने आप में एक युगांतकारी घटना थी। जो अपने कर्मों से संसार को जीवन का अमूल्य पाठ पढ़ाने का निहीत उद्देश्य लेकर इस धरा पर अवतरित हुए थे। शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस दिन चंद्रमा वृष राशि में और सूर्य सिंह राशि में था।
अब अगर इसी आलोक में इस वर्ष को देखें तो इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार 11-12 अगस्त 2020 को है। यह दो दिन क्यों है इसकी भी वजह हैं। दरअसल, यह माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद यानी कि भादो माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। 12 अगस्त को ही कृतिका नक्षत्र लगेगा। जबकि चंद्रमा मेष और सूर्य राशि में संचार करेंगे। कृतिका नक्षत्र और राशियों की स्थिति के कारण वृद्धि योग बन रहा है।
ऐसे में अगर कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देखा जाए तो जन्माष्टमी 11 अगस्त की होनी चाहिए, लेकिन अगर रोहिणी नक्षत्र को भी ध्यान में रखें तो फिर 12 अगस्त को भी कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। गृहस्थों और सन्यासियों का भी भेद है। किसी के लिए अष्टमी तिथि का महत्व अधिक है तो वहीं कुछ अन्यों के लिए रोहिणी नक्षत्र का अधिक महत्व है। ऐसे में मथुरा में जन्माष्टमी 12 अगस्त को मनाई जा रही है। वहीं नंदलाल के गाँव ब्रज में 11 अगस्त यानि आज धूमधाम से जन्माष्टमी मनाई जा रही है।
अब इस विशेष स्थिति में श्री कृष्ण के जन्म के कारण यदि जन्माष्टमी के व्रत के माहात्म्य की भी बात किया जाए तो इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को चंद्रमा और सूर्य देवता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वैसे जन्माष्टमी को शास्त्रों में ‘व्रतराज’ भी कहा गया है और ऐसा माना गया है कि इस एक दिन व्रत रखने से समस्त विघ्न बाधाएँ दूर होती हैं और कई पुण्यों का फल प्राप्त होता है।
भारतीय संस्कृति में हज़ारों वर्षों से भगवान कृष्ण आस्था के केंद्र रहे हैं। हिन्दू जनमानस में कृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति और प्रेम का भाव युगों से व्याप्त है। खासतौर से समूचा भारत कृष्ण को न केवल अपना आराध्य मानता है बल्कि कृष्ण उनकी जीवनशैली में इस प्रकार रचे बसे हैं जैसे देह में आत्मा। भक्तिकाल के कवियों की एक समूची पीढ़ी ने अपना सम्पूर्ण जीवन कृष्ण की आराधना करते, उनपर कविताएँ और गीत लिखते हुए बिता दिया।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी न सिर्फ अपने आराध्य नटखट बाल-गोपाल नन्दलाल के जन्मोत्सव के उल्लास और आनंद का उत्सव मनाने का दिन है बल्कि यह अवसर है, उनके उन मूलभूत गुणों से भी दो-चार होने का, कि कैसे एक कारागार में जन्में, ग्वालों संग पले-बढ़े, लेकिन जीवन के तमाम संघर्षों, संकटों और विसंगतियों को आनंद पूर्वक पार करने के कारण, वो लोगों के आराध्य और आस्था के केंद्र बन गए।
अक्सर कृष्ण पर बात करते समय बाँसुरी, मक्खन और गोपियों का ज़िक्र होने लगता है परन्तु यह बेहद एकांगी और संकुचित दृष्टि है। कृष्ण को एक सम्पूर्ण चरित्र यूँ ही नहीं माना गया है बल्कि उनका जन्म ही मानव जाति के आध्यात्मिक और लौकिक जीवन को व्यवस्थित करने के लिए हुआ था। भगवान विष्णु के अवतार के रूप में वह सभी सोलह कलाओं से युक्त थे। अब तक के अन्य किसी अवतार में यह परिपूर्णता नहीं पाई जाती।
कृष्ण की सोलह कलाएँ उनके विशेष सोलह गुणों से सम्बंधित हैं। जो आज भी यदि किसी में हों तो जिस अनुपात में इन गुणों की व्याप्ति होगी उसी अनुपात में उस मनुष्य में भी प्रभाव देखने को मिलेंगे, ऐसा तत्वदर्शियों का कहना है। नर से नारायण हो जाने की बात भी यूँ ही नहीं कही गई है। श्री कृष्ण की सोलह कलाओं पर संक्षेप में बात की जाए तो उनका क्रम इस प्रकार है:
भगवान श्री कृष्ण की सोलह कलाएँ
श्री सम्पदा
इस कला से युक्त व्यक्ति धन से तो समृद्धशाली होता ही है, साथ ही मन क्रम वचन से भी समृद्धशाली होता है। ऐसा माना जाता है कि इस कला के स्वामी के पास माँ लक्ष्मी का स्थाई वास होता है अतः श्री सम्पदा से युक्त व्यक्ति को कभी भी आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ता।
भू सम्पदा
इस कला से युक्त व्यक्ति के पास बड़ी मात्रा में ज़मीन और संपत्ति होती है जिसपर वह न केवल कुशलता से शासन करने की योग्यता रखता है बल्कि दिन प्रतिदिन अपनी संपत्ति को बढ़ाने की योग्यता भी रखता है।
कीर्ति सम्पदा
इस कला से युक्त व्यक्ति की ख्याति और उपलब्धि विश्व में लोकप्रियता का मानक बन जाती हैं। इस कला के होने पर व्यक्ति अन्य के बीच न केवल लोकप्रिय बल्कि विश्वासपात्र व प्रिय व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान स्थापित करता है।
वाणी सम्मोहन
कहा जाता है कि जिव्ह्या बड़े से बड़े कार्य को बनाने और बिगाड़ने का हुनर जानती है। इस कला से युक्त व्यक्ति की वाणी बेहद मधुर, सौम्य और मन को मोह लेने वाली होती है। ऐसे लोग शत्रु को भी अपनी बातों से आकर्षित कर लेते हैं। इनकी बातें सुनकर भयंकर क्रोध भी शांत हो जाता है।
लीला
इस कला से युक्त व्यक्ति चमत्कारी होता है जो अशुभ को शुभ में परिवर्तित करने की शक्ति रखता है। इनके दर्शन मात्र से ही व्यक्ति को अलौकिक आनंद और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
कांति
इस कला से युक्त व्यक्ति के मुख पर एक सुंदर और सौम्य आभा विराजमान रहती है। यह देखने में अत्यंत सुंदर और मनमोहक होते हैं। कोई व्यक्ति इनकी ओर आकर्षित हुए बिना नहीं रहता है।
विद्या
इस कला से युक्त व्यक्ति बेहद बुद्धिमान और ज्ञान संपन्न होता है। ऐसा व्यक्ति वेदों का ज्ञाता, संगीत और कला का मर्मज्ञ, युद्ध कला में पारंगत और राजनीति तथा कूटनीति में निपुण होता है।
विमला
इस कला से युक्त व्यक्ति विमल अर्थात् छल-कपट और भेद भाव से दूर होता है। इनके मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं होती और ये श्रेष्ठ आचार-विचार और निर्मल स्वभाव के होते हैं।
उत्कर्षिणी शक्ति
इस कला से युक्त व्यक्ति दूसरों को अकर्मण्यता से दूर करके कर्म की ओर प्रवृत्त करता है। ऐसे व्यक्तियों में दूसरों का अज्ञान हरने और उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाने का कौशल भी होता है। अपने प्रेरणादायी वक्तव्यों से यह सामने वाले की चिंता और भय को दूर करने में सक्षम होते हैं।
नीर-क्षीर विवेक
इस कला से युक्त व्यक्ति अपने विवेक से सही और गलत का निर्धारण करने की योग्यता रखता है साथ ही दूसरों को भी कर्तव्य पथ पर सही परिस्थिति की ओर इंगित करता है।
कर्मण्यता
इस कला से युक्त व्यक्ति कर्मठ होता है और जीवन में कर्म को प्रमुख मानता है। वह अपने साथ-साथ दूसरों को भी कर्म का महत्त्व समझाता है और निस्वार्थ भाव से कर्म करने की प्रेरणा देता है।
योग शक्ति
इस कला से युक्त व्यक्ति आत्मा को परमात्मा का अंश मानते हुए योग के माध्यम से इसकी शुद्धि की ओर जागरूक रहते हैं। ये आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।
विनय
इस कला से युक्त व्यक्ति अहंकार विहीन तथा शालीन होते हैं। इनके पास अथाह धन, सौन्दर्य और ख्याति होते हुए भी उसका प्रचार या दिखावा नहीं करते, न ही उसके बल पर स्वयं को श्रेष्ठ और दूसरों को हीन समझते हैं।
सत्य धारणा
इस कला से युक्त व्यक्ति सत्यवादी होते हैं जो किसी भी परिस्थिति में सत्य का साथ नहीं छोड़ते। यह सत्य के मार्ग पर बड़े से बड़े संकट को ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर लेते हैं परन्तु सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होते।
आधिपत्य
इस कला से युक्त व्यक्ति का व्यवहार ऐसा होता है जिसके साथ दूसरे व्यक्ति को सुरक्षा और अपनेपन का एहसास होता है जिसके कारण दूसरा व्यक्ति इनके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होकर इनका आधिपत्य स्वीकार करना चाहता है और इनके साहचर्य में रहना चाहता है।
अनुग्रह क्षमता
इस कला से युक्त व्यक्ति सदैव दूसरों का कल्याण करने वाले कार्य करता है और उसके जीवन का उद्देश्य दूसरों की सेवा करना और उनके कष्ट हरना होता है।
एक व्यक्ति में इतने सारे गुणों का होना किंचित सुखद आश्चर्य है तथापि श्री कृष्ण के चरित्र में यह सोलह विशेषताएँ पाई जाती हैं इसलिए ही हिन्दू धर्म में इन्हें ईश्वर की उपाधि प्राप्त है। वर्तमान युग में जब परिवर्तन की धारा बड़ी तेज़ी से बह रही है, लेकिन कृष्ण का जीवन चरित और उनकी दी हुई शिक्षाएँ हमारे लिए आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। महाभारत का ‘गीता प्रसंग’ तो मानव मात्र की समस्याओं को सुलझाने का एक अचूक मंत्र है।
कृष्ण के जीवन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। बाल्यावस्था की तमाम विपरीत परिस्थितियों और शत्रुओं के बीच रहकर भी कृष्ण ने न केवल गोकुल में आनंदमय जीवन बिताया बल्कि प्रेम का एक ऐसा रूपक गढ़ा जिसकी गाथा युगों-युगों से भारतीय समाज गाता चला आ रहा है। इसका अभिप्राय यह है कि जीवन आनंद का दूसरा नाम है। व्यक्ति को हर परिस्थिति में प्रसन्न और संतुष्ट रहना चाहिए। प्रेम और साहचर्य से ही स्थितियाँ स्वयं के अनुकूल बनाई जा सकती हैं।
कृष्ण ने व्यक्ति को समय एवं परिस्थिति के अनुकूल आचरण करने की शिक्षा दी है। वे व्यर्थ की नैतिकता और मान्यताओं से मुक्त होने की बात करते हैं | वर्तमान समय की यही माँग है। वे मानते हैं कि मनुष्य को अपनी और अपने सम्बन्धियों की रक्षा हेतु दुर्जनों पर दया नहीं दिखानी चाहिए भले ही वह आपके कितने भी प्रिय क्यों न हो। वे अन्याय के खिलाफ़ लड़ने और हथियार उठाने की प्रेरणा देते हैं क्योंकि धर्म और सत्य की स्थापना में जो बाधक बन रहा है, वो आपका अपना नहीं है।
महाभारत में कृष्ण को हम एक कुशल राजनेता और कूटनीतिज्ञ के रूप में देखते हैं। कृष्ण राजनीति के पुरोधा हैं। शत्रुओं पर किन नीतियों से विजय प्राप्त की जाए और अपनी वृत्तियों से कैसे छुटकारा प्राप्त हो, इसका सन्देश गीता के माध्यम से कृष्ण ने अर्जुन को दिया है। आज भी व्यक्ति अपने आंतरिक लोभ, मोह और माया से स्वयं को मुक्त कर यदि बड़े परिप्रेक्ष्य में अपनी नीतियाँ बनाता है तो निश्चय ही वह जीवनरूपी रणक्षेत्र का विजेता सिद्ध होता है। कृष्ण ने सही समय आने पर हर तरह के मोह और बंधन से निकल जाने का सिद्धांत दिया है।
वह स्वयं सोलह वर्ष की उम्र में गोकुल छोड़ कर चले आए थे और फिर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रतिज्ञा ली तो द्वारकाधीश बनने के बाद भी कभी गोकुल लौट कर नहीं गए। उन्होंने गीता में निष्काम कर्म का उपदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति को केवल अपने कर्म से प्रयोजन होना चाहिए। फल की चिंता उसे नहीं करनी चाहिए क्योंकि समय आने पर प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है।
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगो$स्तवकर्मणि।”
कृष्ण के जीवन से कलाओं के महत्त्व को भी समझा जा सकता है। कृष्ण बाँसुरी बजाते थे। मोरपंख धारण करते थे। इन प्रतीकों के माध्यम से यह पता चलता है कि जीवन में प्रकृति और संगीत कितने महत्वपूर्ण हैं। इनके बिना मनुष्य का जीवन नीरस हो जाएगा। यूँ भी कृष्ण को आनंद का देवता कहा जाता है। उनके जन्मदिन पर मेले लगते हैं, बाज़ार सजता है, झूले झुलाए जाते हैं, झाकियाँ तैयार होती हैं और भजन कीर्तन का सुन्दर वातावरण हर तरफ दिखाई देता है अतः कृष्ण जीवन में उल्लास और प्रसन्नता का भाव देने वाले हैं। वे मानते हैं कि जीवन सबसे बड़ा है। कोई घटना, स्थिति या व्यक्ति जीवन से बड़ा नहीं है अतः हर हाल में व्यक्ति को अपनी भीतरी प्रसन्नता व उत्साह को बनाए रखना चाहिए।
कृष्ण ने सदैव समाज में कमजोर, निर्बल और असहाय व्यक्ति की सहायता करने की प्रेरणा दी है। उन्होंने सुदामा, गोपियों और पाण्डवों के माध्यम से यह दिखाया कि सत्य के पक्ष में खड़ा व्यक्ति चाहे जितना भी हीन या दुर्बल क्यों न हो, साथ उसी का देना चाहिए क्योंकि समाज में समता व समानता की स्थापना तभी सम्भव है जब समाज के सबसे निचले दर्जे पर खड़े व्यक्ति को साथ लिया जाएगा। शोषित और वंचितों की पीड़ा दूर करके ही एक सुंदर और नैतिक मूल्यों वाले समाज की स्थापना की जा सकती है।
वर्तमान पीढ़ी कृष्ण से यह भी सीख सकती है कि मनुष्य को वर्तमान में जीना चाहिए। उसे भूत और भविष्य की चिंता में अपना समय और ऊर्जा नष्ट नहीं करनी चाहिए। “क्यों व्यर्थ चिंता करते हो?, किससे व्यर्थ डरते हो?” उनका मानना है कि व्यक्ति को अपनी समस्त शक्ति का प्रयोग वर्तमान को बेहतर बनाने में करनी चाहिए और यदि असफलता मिलती है तो उस पर दुखी न होकर उसके कारणों की पड़ताल करनी चाहिए जिससे अग्रिम प्रयास में उन गलतियों का दोहराव न हो। यह सफलता का एक अचूक उपाय है। साथ ही व्यक्ति को दूरदर्शी भी होना चाहिए क्योंकि सीमित मनःस्थिति के आधार पर किया गया कार्य भविष्य में कष्टों का कारण बन सकता है।
इस प्रकार से यह देखा जा सकता है कि कृष्ण ने अपने जीवन में इतनी समस्याओं के होते हुए भी न केवल उन सभी समस्याओं पर विजय पाई बल्कि प्रत्येक विषम परिस्थिति में मजबूती के साथ खड़े रहे और जीवन को अपने चरम आनंदमयी रूप में जीया। जिनका समूचा बचपन राक्षसों से लड़ते बीता, घर परिवार, रिश्ते नाते, प्रेमिका और संगी साथी सब छूट गए। आजीवन विभिन्न संकटों का सामना करते रहे और अंत में एक भयंकर युद्ध जिसकी परिणति थी- भीषण नरसंहार। इसके बावजूद जीवन में दुःख और आँसू का कोई स्थान नहीं।
यह सब केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि कृष्ण इस संसार को आनंदमय जीवन का सन्देश देने आए थे। उनके जन्म से लेकर मृत्यु तक की यात्रा आनंद की यात्रा है जो मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य है। कृष्ण ने यह सिखाया कि व्यक्ति अकेले इस दुनिया में आया है और अकेले ही जाना है इसलिए दुनियायवी वस्तुओं का मोह त्यागकर शुद्ध रूप से जीवन जिओ और चरम आनंद की प्राप्ति करो। यही जीवन की सफलता का महत्वपूर्ण सूत्र है।
पत्रकार बरखा दत्त ने कॉन्ग्रेस के ‘रंगीनमिजाज’ नेता शशि थरूर के साथ बातचीत की। हालाँकि, ये बातचीत तो राम मंदिर पर कॉन्ग्रेस के रुख पर हुई लेकिन इसमें ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दाढ़ी को लेकर हुई। इस ‘गंभीर चर्चा’ के दौरान देश की मौजूदा स्थिति पर चर्चा कम हुई और पीएम मोदी की दाढ़ी कितनी बढ़ रही है, इस पर ज्यादा हुई। ‘मोजो’ पर आई इस चर्चा के बारे में आपको बताते हैं।
शशि थरूर ने कहा कि उन्हें अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा किए गए राम मंदिर भूमिपूजन से कोई समस्या नहीं है लेकिन जिस तरह से धार्मिक दृश्यों को प्रस्तुत किया गया और जिस तरह से धर्म और राजनीति मिल कर एक हो गए, उससे उन्हें समस्या है। बता दें कि कॉन्ग्रेस के ही नेता दिग्विजय सिंह और प्रमोद कृष्णन भूमिपूजन का विरोध कर रहे थे और अशुभ मुहूर्त की बातें करते हुए हर बुरी घटना को इससे जोड़ रहे थे।
इसके बाद चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दाढ़ी को लेकर होने लगी। शशि थरूर ने कहा कि दिन पर दिन पीएम मोदी की दाढ़ी-मूँछ बढ़ती ही जा रही है, वो ऐसा कर के दिखाना चाहते हैं कि वो नए भारत के ‘ऋषिराज’ हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद ने कहा कि पीएम एक राजर्षि की भूमिका में खुद को प्रदर्शित करना चाहते हैं, जो भगवा वस्त्र पहने हुए हैं। इसके बाद बरखा दत्त ने भी इसे ‘मॉडर्न पॉलिटिक्स’ बताया।
उन्होंने कहा कि आप क्या दिखाना चाहते हैं, क्या सन्देश देना चाहते हैं और कैसी छवि प्रदर्शित करना चाहते हैं- ये सब आजकल की आधुनिक राजनीति का अंग बन गए हैं। इसके बाद शशि थरूर को इस बात से समस्या हो गई कि पीएम मोदी संप्रदाय विशेष की टोपी क्यों नहीं पहनते? उन्होंने दावा किया कि वो हर धार्मिक आयोजन में उनके प्रतीक चिह्नों को अपनाते हैं लेकिन इस्लामी चिन्हों से दूर भागते हैं।
शशि थरूर ने कहा कि ‘ऋषिराज’ वाली छवि दिखाने के पीछे कारण ये है कि वो खुद को एक पवित्र व्यक्ति के रूप में दिखा सकें, जो एक राजा भी है। बकौल थरूर, पीएम मोदी चाहते हैं कि लोग उन्हें एक ऐसे ऋषि के रूप में जानें, जो एक योद्धा भी है। बरखा दत्त ने भी शशि थरूर की बातों का समर्थन किया। इस तरह चर्चा तो राम मंदिर पर थी लेकिन ये पीएम मोदी की दाढ़ी-मूँछ पर आकर रुक गई।
अनुराग दीक्षित ने इस चर्चा पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि अगर दिसंबर तक पीएम मोदी की दाढ़ी-मूँछ और बढ़ जाती है तो कहीं ये लोग उनकी तुलना सांता क्लॉज से नहीं करने लगें। कहीं ये लोग ये इल्जाम न लगा दें कि पीएम उन्हीं से प्रभावित हैं। साथ ही कई लोगों ने ये भी पूछा कि भगवा वस्त्रों से किसी को क्या समस्या है? बता दें कि सोशल मीडिया में फैंस पीएम मोदी के लुक्स की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से भी करते रहे हैं।
Did Congress play a Me too card on Ram Mandir? @shashitharoor has this to say on Hinduism Vs Hindutva. But he also has a view on PM @NarendraModi beard for the big moment. “He wanted to appear a Rishi Raj, to say I am sage, I am warrior”- Full intvw coming to @themojo_inpic.twitter.com/75zPTWDe9h
हाल ही में बरखा दत्त ने सुशांत सिंह की थेरेपिस्ट के इस बयान से ठीक एक दिन पहले एक ट्वीट किया था। ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि सुशांत सिंह के मामले में जिस तरह निजी जानकारी साझा की जा रही है। जिस तरह उनकी जिंदगी से संबंधित मुद्दों पर बात हो रही है उस पर उन्हें दुःख है। वह इस माध्यम का हिस्सा बन कर निराश हैं। बरखा दत्त ने 1 अगस्त के दिन सुशांत सिंह राजपूत की तथाकथित थेरेपिस्ट सुसैन वॉकर मोफत के साक्षात्कार का एक वीडियो साझा किया था।
14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा के अपने घर में लटके मिले थे। 8 जून को उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या की थी। इसी दिन सुशांत का घर उनकी गर्लफ्रेंड रिया चकवर्ती ने छोड़ा था। 8 से 13 जून के बीच महेश भट्ट और रिया चकवर्ती के बीच फोन पर कई बार बात हुई।
टाइम्स नाउ ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। इसमें बताया गया है कि 8 से 13 जून के बीच दोनों के कॉल में अचानक इजाफा देखा गया। इस दरम्यान रिया ने 16 बार महेश के नंबर पर कॉल किया। ईडी सूत्रों के हवाले से रिया के कॉल डिटेल्स के आधार पर यह दावा किया गया है।
ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जॉंच कर रही है। रिया पर सुशांत के पैसों का हेरफेर करने का आरोप है। इस संबंध में जॉंच एजेंसी रिया और उनके भाई से लगातार पूछताछ कर रही है।
इस बीच सुशांत सिंह के शव को लेने आई एम्बुलेंस के एक अटेंडेंट ने खुलासा किया कि उनका शरीर पीला पड़ा हुआ था। अटेंडेंट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति फाँसी लगाकर आत्महत्या करता है, तो उसका शरीर पीला नहीं पड़ता है। लेकिन सुशांत सिंह का शरीर पीला पड़ा हुआ था। यह उनके लिए हैरान कर देने वाली बात थी।
टाइम्स नाउ के संवाददाता अरुणिल साडेकर से फोन पर बात करते हुए, एम्बुलेंस अटेंडेंट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति खुद को लटका लेता है, तो शरीर पीला नहीं होगा, लेकिन सुशांत सिंह का शरीर पीला पड़ गया था। वहीं जब सुशांत की गर्दन पर निशान के बारे में पूछा गया, तो एम्बुलेंस अटेंडेंट ने कहा, “जब कोई खुद को लटकाएगा, तो सभी जगह निशान होगा। आज तक इस तरह की घटनाओं में तो हमने ऐसा ही देखा और सुना है।”
एम्बुलेंस अटेंडेंट ने कहा कि सुशांत सिंह की गर्दन के हिस्से में ही निशान था। उसके मुताबिक़ यह भी सामान्य नहीं कहा जा सकता है। इसके बाद उसने कहा कि सुशांत सिंह के पैर भी ज़रा सा मुड़े हुए थे। अगर एक इंसान ने खुद को फाँसी लगाई है तो उसके पैर कैसे मुड़ सकते हैं? हमने फाँसी लगाने वाले मामलों में ऐसा नहीं देखा है।
पैर कुछ इस तरह मुड़े थे जैसे किसी चीज़ को किक करने के दौरान होते हैं। अटेंडेंट का यह भी कहना था कि ऐसे मामलों में मृतक के मुँह से सफ़ेद झाग भी आता है। लेकिन सुशांत सिंह के मामले में ऐसा कुछ देखने के लिए नहीं मिला था। यह बात भी हमारे लिए हैरान करने वाली थी।
इस रिपोर्ट पर भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत के मामले में एम्बुलेंस अटेंडेंट द्वारा दी गई जानकारी की अहम है।
उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि सीबीआई के लिए डॉ. आरसी कूपर म्यूनिसिपल हॉस्पिटल के उन 5 डॉक्टर्स से बात करना सार्थक होगा, जिन्होंने सुशांत सिंह राजपूत का पोस्टमार्टम किया था। जो एम्बुलेंस सुशांत सिंह का शव लेकर गई थी, उसके कर्मचारियों ने कहा है कि उनके पैर का निचला हिस्सा मुड़ा हुआ था (जैसे कि वह टूटा हुआ हो)।
CBI will find it worthwhile to grill the Dr. R.C. Cooper Muncipal Hospital the five doctors who did the autopsy. According to the Ambulance staff that took SSR’s body to the hospital, SSR’s feet was twisted below his ankle (as if it was broken). Case is unravelling!!
टाइम्स नाउ से बात करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, “मैंने अपने हर संपर्क से पता लगाने की कोशिश की। क्या आरसी कूपर अस्पताल में हुए सुशांत सिंह के पोस्टमार्टम की तस्वीरें उपलब्ध हैं। ऐसा लगता है जैसे सभी इस बात से डरे हुए हैं। सभी के पास अपनी पटकथा तैयार थी।
गौरतलब है कि पूछताछ के दौरान ED को रिया की कमाई को लेकर कई अहम जानकारियाँ हाथ लगी हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 के ITR में रिया चक्रवर्ती की कमाई में अचानक इजाफा हो गया। ये आखिर कैसे हुआ? क्या था इनकम का सोर्स? इसके बारे फिलहाल कुछ भी पता नहीं चला है। दो साल में रिया के शेयर की कीमत में 8 लाख की बढ़ोतरी हुई। वहीं फिक्स्ड एसेट 96 हजार से बढ़कर 9 लाख हो गई।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रविवार (अगस्त 9, 2020) रात बदमाशों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील और बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव अभिषेक शुक्ला पर फायरिंग की। हमले में वे बाल-बाल बच गए। बदमाशों ने उनके साथ मारपीट और लूटपाट भी की।
जख्मी हालत में उन्हें एसआरएन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। फिलहाल डॉक्टरों ने वकील अभिषेक शुक्ला की हालत खतरे से बाहर बताई है।
वारदात राजरूपपुर चौकी क्षेत्र में जागृति चौराहे की है। गोलीकांड की सूचना पाकर तमाम अधिवक्ता मौके पर पहुँच गए। उन्होंने राजरूपपुर पुलिस चौकी का घेराव कर रास्ता जाम कर दिया। इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों से तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। सभी ने आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की। साथ ही जल्द कार्रवाई न होने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी।
इस हमले में बाहुबली अतीक अहमद गैंग का हाथ होने का दावा किया जा रहा है। हालाँकि एसएसपी अभिषेक दीक्षित का कहना है कि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।
बताया जा रहा है कि नीमसराय निवासी अधिवक्ता अभिषेक शुक्ला रविवार रात सवा नौ बजे के करीब राजरूपुपर में जागृति चौराहे के पास अपने साथियों संग खड़े थे। इसी दौरान वहाँ बाइक से पहुँचे चार बदमाशों ने उन पर फायर कर दिया। फायरिंग में अधिवक्ता बाल-बाल बच गए तो हमलावरों ने मारपीट शुरू कर दी। यह देख आसपास के लोग दौड़े तो हमलावर अधिवक्ता की सोने की चेन व लॉकेट लूटकर भाग निकले।
एडीजी प्रेम प्रकाश का कहना है कि बदमाशों ने अधिवक्ता अभिषेक शुक्ला पर फायरिंग की, लेकिन अधिवक्ता को गोली नहीं लगी। उनके साथ मारपीट की गई।
वहीं हिन्दू विधिज्ञ परिषद की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अभिषेक के हाथ और पैर में 3 गोलियाँ लगी हैं। इसमें कहा गया है कि अधिवक्ता अभिषेक शुक्ला ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय परिसर में अवैध मस्जिद बनाए जाने के विरुद्ध याचिका प्रविष्ट की थी, जो अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसे लेकर भी अभिषेक शुक्ला जिहादियों के निशाने पर थे और इसी वजह से उन पर हमला किया गया है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक मदरसे में पढ़ाने वाले 25 साल के मौलवी को 9 साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने का आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ख़बरों के मुताबिक़ घटना रविवार (9 अगस्त 2020) की है।
पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ आरोपित का नाम मौलाना अरशद रहमानी है। रायपुर शहर के खमारडीह थाना क्षेत्र में शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अरशद रहमानी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि आरोपित मौलाना रहमानी पंडरी क्षेत्र के मदरसे में शिक्षक है। वह बच्ची और उसकी बहन को अरबी पढ़ाने उनके घर जाता था। आरोपित मौलाना पिछले 15 दिनों से अरबी पढ़ाने बच्ची के घर जा रहा था। रविवार के दिन उसने बच्ची को अकेला देख कर उसके साथ बलात्कार किया।
9 साल की बच्ची ने इस घटना की जानकारी अपने घर वालों को दी। उन्होंने इस मामले में पुलिस से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित मौलाना अरशद रहमानी को गिरफ्तार किया। मौलाना पर भारतीय दं संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 506 (आपराधिक धमकी) और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने घटना के बारे में यह भी बताया कि आरोपित मौलाना अरशद मूल रूप से भिलाई का रहने वाला है। लेकिन पिछले लगभग 3-4 सालों से रायपुर स्थित मदरसे में रह रहा था। पुलिस ने कहा है कि इसके पहले भी मौलाना पर छेड़छाड़ के आरोप लग चुके हैं।
पिछले ही महीने भी इस तरह की एक घटना सामने आई थी। गुजरात के कच्छ जिले में एक मदरसा शिक्षक मौलाना समसुद्दीन हाजी सुलेमान जाट को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोपों के मुताबिक़ मदरसा शिक्षक ने चार साल तक एक छात्रा के साथ कथित रूप से बलात्कार किया था।
ऐसे ही झारखंड के रांची में मदरसे में पढ़ने वाली 12 साल की एक बच्ची से रेप का मामला सामने आया था। आरोपित मौलाना शाहिद था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शाहिद ने बच्ची से कई बार रेप किया था। जब वह गर्भवती हो गई तो उसका जबरन गर्भपात करा दिया गया। जिस मदरसे में यह घटना हुई है वहॉं 100 से अधिक बच्चियॉं तालीम ले रही थीं। मामला सामने आने के बाद लोग अपनी बच्चियों को वापस घर बुला लिया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
Maulana raped minor girl in raipur he used to teach arabic language in madarsa
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मँजूरी मिल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने इस नीति को मँजूरी देते हुए कहा कि यह विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में “परिवर्तनकारी सुधार” का मार्ग प्रशस्त करेगा।
पिछले दिनों कुछ अंतरराष्ट्रीय अखबारों में खबर छपी थी कि इस नीति का विवादास्पद निर्णय यह है कि प्राथमिक स्कूल, चाहे वह निजी हों या सार्वजनिक, बच्चों को “मूल भाषा” या “क्षेत्रीय भाषा” में शिक्षित करने की आवश्यकता होनी चाहिए, ना कि अंग्रेजी में।
इस निर्णय को विवादास्पद बताते हुए वहाँ यह तर्क दिया गया है, “उच्च शिक्षा, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के विस्तार के लिए अंग्रेजी भाषा की दक्षता को महत्वपूर्ण माना जाता है।” उनके द्वारा दिए गए तर्क के कुछ गूढ़ निहितार्थ हैं। जिसका सीधा संबंध देश की शिक्षण-अधिगम व्यवस्था में छिपी अंग्रेजी मानसिकता की निर्भरता को बरकरार रखने से है ना कि आत्मनिर्भर भारतीय गौरव के प्रफुल्लित और उन्मुक्त होने से।
आज का भारत नया भारत है। हमारा देश बहुभाषी है। हमारे देश में जितनी भाषाएँ एकल भारतीय संस्कृति और सभ्यता को वहन करती हैं उतनी तो बाकी पूरे विश्व की भाषाएँ पृथक निवास करती हैं। इतिहास साक्षी है कि उन्नीसवीं-बीसवीं सदी में औपनिवेशिकता या किसी एक विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए जिस मानव मूल्यों पर सर्वप्रथम प्रहार किया गया, वह थी भाषा।
औपनिवेशिकता जहाँ समाज को गुलामी की जंजीरों में कैद कर देती है, वहीं विचारधारा संस्कृति के मूल्यों को बाँध लेती है। बात स्पष्ट है कि समाज में किसी भी रूप में परिवर्तन कराना हो तो भाषा को पकड़ो।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में कहीं भी इस बात का बिल्कुल ही जिक्र नहीं है कि अंग्रेजी को एकदम हटाया जाए। इस नीति में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो भी विदेशी भाषा है, उसको विदेशी भाषा के रूप में पढ़ाया जाए। कक्षा पाँच तक कोई भी बालक/ बालिका अंग्रेजी को पढ़कर अंतरर्राष्ट्रीय रोजगार के लिए नहीं जाता है ना ही हमारे देश में यह सिस्टम शुरू है कि कक्षा पाँच तक अंग्रेजी माध्यम से पढ़कर नौकरी दी जाए।
रोजगार के लिए भी एक उम्र निर्धारित है। उस उम्र से पहले आप रोजगार नहीं कर सकते। इस नीति में दिए गए त्रि-भाषा फार्मूला से एक बात सत्य है और वह यह है कि बालक का संज्ञानात्मक और मनौवैज्ञानिक विकास के साथ-साथ संरचनात्मक देशज विकास हो।
यह सर्वविदित है कि अंग्रेजी भाषा के विद्यालय पारंपरिक रूप से अमीर भारतीय परिवारों के पक्षधर रहे हैं। अब ‘सबका साथ, सबका विश्वास और सबका विकास’ की बात पूरे देश में गूँजायमान है । भाषा इसकी प्रमुख कड़ी है। आप इस बात का खुद अंदाजा लगा लीजिए कि एक मुहल्ले में रहने वाले बच्चों के बीच शाम को जब एक बच्चा उड़िया या अपनी मातृभाषा में बोले और दूसरा अंग्रेजी में तो बाल मनोविज्ञान पर क्या असर पड़ेगा।
इस नीति की आत्मा साफ है। त्रि-भाषा फॉर्मूला ना केवल हमें आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उस गौरवमयी ऐतिहासिक संस्कृति का भी साक्षात्कार करने का मौका देगा जिसकी वैज्ञानिकता और उसको संवहन करने वाली मानव सभ्यता का प्राकृतिक स्वरूप आज भी अंग्रेजी भाषियों के लिए कॉपीराइट के रूप में जीविका चलाने तक सीमित हैं।
अगले दशक में भारत सबसे अधिक युवा संपन्न देश होगा। इस आधार पर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में प्रत्यक्ष रूप से एक बात तय कर दी गई है कि ‘मैं भी आत्मनिर्भर हूँ’ का आत्मसंबल प्रत्येक युवा को प्रेरित करेगा। जिस गरीब वंचित और पिछड़े लोगों की केवल बात अब तक की जाती रही है, वो सबसे अधिक आँगनबाड़ी या प्राथमिक विद्यालयों से ही शिक्षित होने का प्रयास करते रहे हैं।
इस नई शिक्षा नीति में जो प्रमुख बातें विद्यमान हैं, उनमें– विद्यालय स्तर पर 2025 तक पूर्व प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण करना, मध्याह्न भोजन को पूर्ण रूप से विस्तारित करना, आँगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक मजबूत करना, प्री-स्कूलिंग से ही सभी के लिए मूलभूत साक्षरता जिसमें विशेष रूप से भाषा और गणित गुणवत्ता शिक्षण-अधिगम पर अधिक ध्यान देना, ‘चलो स्कूल चलें’ जैसी तैयारी के लिए विशेष मॉड्यूल बनाना। एक महत्वपूर्ण, बात जो कि आज भी सबसे भयावह स्वरूप में है कि शिक्षक-बालक अनुपात को 1:30 से भी कम करना और विशेष रूप से शिक्षा अधिकार को ग्रेड-12 तक बढ़ाने की बात को लक्षित किया गया है।
पूरे देश में प्रत्येक बच्चे के लिए एकसमान और समावेशी शिक्षा का प्रावधान किया गया है, जिसमें विशेषकर शैक्षिक संरचना को लचीला और एकीकृत पाठ्यक्रम एवम् मूल्यांकन को समावेशी और प्रौद्यौगिकी सुलभ किए जाने का प्रावधान है। पाठ्यक्रम के राष्ट्रीय पाठ्यचर्चा की रूपरेखा को सभी भाषाओं में सर्वसुलभ करवाया जाएगा।
पाठ्यचर्चा में वैज्ञानिक स्वभाव, नैतिक तर्क, भाषा प्रगाढ़ता, डिजिटल साक्षरता एवं अन्य विषयो को समावेशित की जाने की बात कही गई है। केवल यही नहीं, महिला, ट्रांसजेंडर, सीखने में कमजोर और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए, संप्रदाय विशेष और अन्य शैक्षिक रूप से अल्पसंख्यकों को प्रोत्साहित करने के लिए हस्तक्षेप की बात की गई है।
कुछ विशेष रणनीतियाँ बनाई गई हैं, जिनमें प्रमुख हैं- राष्ट्रीय छात्रवृत्ति कोष, वंचित जिलों में विशेष शिक्षा क्षेत्र बनाना, कमजोर जिलों को वित्तपोषण और अन्य सहायता प्रदान कराना, कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों के शिक्षकों की भर्ती, शहर में रहने वाले गरीबों पर ध्यान देना इत्यादि। इस आधार पर चलते हुए 2030 तक सभी विद्यालयों में सकल नामांकन अनुपात को शत प्रतिशत या यूँ बोलें कि पूर्ण करना रखा गया है।
उच्चतर शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था में संस्थागत पुनर्गठन और उनका समेकन करना शामिल है। अर्थात लगभग पंद्रह हजार बड़े और बहुविषयक संस्थानों में आठ सौ विश्वविद्यालयों और चालीस हजार महाविद्यालयों को एकीकृत कर दिया जाएगा। इनका वितरण मिशन नालंदा और मिशन तक्षशिला के आधार पर किया जाएगा।
मिशन तक्षशिला के द्वारा 2030 तक हर जिले में कम से कम एक उच्चतर शिक्षण संस्थान और मिशन नालंदा के तहत समान क्षेत्रीय वितरण के साथ पूरे देश में 2030 तक 100 टाइप-1 और 200 टाइप-2 के उच्चतर शिक्षण संस्थान व्यवस्थापित किए जाएँगे।
उच्चतर शिक्षण संरचना में उच्च गुणवत्ता के साथ उदार शिक्षा की बात की गई है। प्रभावी शिक्षण माध्यम के आधार पर सीखने के अनुभवों को उभारना, शिक्षा का अंतरराष्ट्रीय करण सुगम करना, प्रौद्यौगिकी का अभीष्टतम प्रयोग करना, इसके लिए एक स्वायत्त निकाय राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्यौगिकी फोरम का निर्माण करना, मुक्त और दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा देना आदि बातों का समावेश है।
शिक्षण वातावरण इस प्रकार पैदा किया जाएगा, जिससे देश में वंचित समूहों को सुगमता से शैक्षिक पहुँच प्राप्त हो सके। कई निकास विकल्पों के साथ चार और पाँच साल का एकीकृत स्नातक और परास्नातक कार्यक्रम होगा, जिसमें प्रथम वर्ष पूर्ण होने पर- सर्टिफिकेट, द्वितीय वर्ष- डिप्लोमा, तृतीय वर्ष- डिग्री, चतुर्थ वर्ष -डिग्री (ऑनर्स), पंचम वर्ष -स्नातकोत्तर की डिग्री दी जाएगी।
इनमें विषयों का चुनाव मेजर और माइनर के रूप में होगा। इसमें मेजर रूप में मुख्य विषय और माइनर रूप में वैकल्पिक विषय होंगे। एमफिल डिग्री को समाप्त कर दिया गया है। इस नीति के द्वारा अध्ययन के विषयों का रचनात्मक संयोजन इस प्रकार किया जाएगा कि स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की शिक्षा अनुसंधान आधारित विशेषज्ञता प्रदान करे।
उच्चतर शिक्षा प्रणाली के अभिन्न अंग के रूप में व्यावसायिक शिक्षा को और अधिक विकसित किया जाएगा। इस उच्चतर शिक्षा के क्रियान्वयन, शासन और विनियमन के लिए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामक प्राधिकरण, उच्च शिक्षा अनुदान परिषद (यूजीसी का परिवर्तित और परिवर्धित स्वरूप), व्यावसायिक मानक सेटिंग बॉडीज, राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद, सामान्य शिक्षा परिषद एवं अन्य परिषदों, नियामक, प्राधिकरण, विनियमन शासन की व्यवस्था या तो परिवर्धित होगी नहीं तो नए स्वरूप से की जाएगी।
अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी जिसमें कम से कम बीस हजार करोड़ का वार्षिक अनुदान सरकार की तरफ से दिया जाएगा जो उत्तरोत्तर रूप से प्रत्येक दशक में बढ़ता रहेगा। इसका प्रमुख उद्देश्य सामाजिक विज्ञान, कला और मानविकी, प्रौद्यौगिकी और विज्ञान जैसे विषयों में अनुसंधान को प्रोत्साहित कर उसकी क्षमता को बढ़ावा देना, गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि करना आदि विषय शामिल हैं।
सार्वजनिक सर्वसुलभ शिक्षा के आधार पर शिक्षक शिक्षण-प्रशिक्षण व्यवस्था को बड़े ही गंभीरता से लिया गया है। विद्यालयी शिक्षा के रूप में शिक्षण व्यवस्था को चार वर्षीय पाठ्यक्रम में बदल दिया गया है। उच्चतर शिक्षण व्यवस्था को परिणाम आधारित बनाया जाएगा। इस शिक्षण व्यवस्था में और अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान विषयों को बढ़ावा दिया जाएगा।
कुल मिलाकर कहा जाए तो इस नई शिक्षा नीति-2020 में जितने भी मानक तय किए गए हैं उनमें शिष्य-शिक्षक-व्यवस्था तीनों ही अंगों के प्रत्येक पहलुओं को बहुत ही विस्तृत ढंग से सहआधारित और विकासोन्मुखी बताने का प्रयास किया गया है। विगत पाँच वर्षों में जिस अमृत को निचोड़कर नई शिक्षा नीति के रूप में देश के सम्मुख लाया गया है, उसके समुचित क्रियान्वयन को लेकर हम आशान्वित हैं।
(लेखक डॉ. संदीप कुमार पाण्डेय, रूसी अध्ययन संस्थान, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं)
पाकिस्तानी अभिनेत्री सबा कमर अपने एक डांस वीडियो की वजह से इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गई हैं। इस वीडियो का कुछ हिस्सा मस्जिद में शूट किया गया है। इसके बाद उन पर मामला दर्ज करने की माँग उठाई जा रही है। वीडियो में सबा कमर के साथ बिलाल सईद भी हैं।
यह वीडियो पाकिस्तान के लाहौर स्थित वजीर खान मस्जिद के भीतर शूट किया गया है। वीडियो के चर्चा में आने बाद बड़े पैमाने पर इसकी आलोचना होने लगी। लोगों का आरोप है कि इस डांस वीडियो की वजह से मस्जिद नापाक हो गई है। कट्टरपंथियों का कहना है इसके लिए अभिनेत्री सबा कमर और बिलाल सईद जिम्मेदार हैं। सबा कमर को निशाने पर लेते हुए जावेद इकबाल नाम के यूजर ने लिखा है कि मस्जिद एक्टर और सिंगर के जाने की जगह नहीं है।
साभार – ट्विटर साभार – ट्विटर
घटना के सुर्ख़ियों में आने के बाद Punjab Auqaf & Religious Affairs Department ने वजीर खान मस्जिद के प्रबंधक को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा सवाल भी किया है कि मस्जिद में यह सब करने की इजाज़त किसने दी? उन्होंने इस मामले की जाँच के आदेश भी दिए हैं। ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की बात कही है।
अभिनेत्री सबा कमर ने इस घटनाक्रम पर ट्वीट कर अपनी बात कही है। उन्होंने लिखा है, “हम यहाँ निकाह का वीडियो शूट कर रहे थे। शूट के दौरान पृष्ठभूमि में कोई संगीत नहीं बज रहा था।” इसके बाद उन्होंने लिखा, “BTS का वीडियो, कबूल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हमने इस वीडियो का पोस्टर लेने के लिए मस्जिद के अंदर स्टिल लिए थे। इसमें निकाह के बाद खुश जोड़े को दिखाया गया है। इसके बावजूद हमने अगर किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाया है तो इसके लिए माफ़ी चाहते हैं। कबूल 11 अगस्त को रिलीज़ हो रही है।”
Presenting the “Qubool” teaser
This is also the only sequence that was shot at the historical Wazir Khan Mosque. It’s a prologue to the music video featuring a Nikah scene. It was neither shot with any sort of playback music nor has it been edited to the music track.#SabaQamarpic.twitter.com/iYRswlLWLd
बिलाल सईद ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है, “मुझे अंदाजा है कि बीते दिनों में हमसे क्या हुआ और इससे आप लोगों को कितना ठेस पहुँचा है। हम लोग कलाकार भी हैं। इसलिए हम इस्लाम या किसी दूसरे धर्म, जाति और समूह का अपमान नहीं कर सकते हैं। अगर हमारी इस हरकत की वजह से किसी की भावनाओं को ठेस पहुँची है तो हम उसके लिए दिल से माफ़ी चाहते हैं।”
Islam has come under threat bcoz Saba Qamar & Bilal Saeed shooted dance for song in Masjid Wazir Ali Lahore. Entire Nation of Ghazis is behind them now, who never raised a voice, when thousands of children are raped in mosques & madrasahs. With an act of dance, Islam is in danger pic.twitter.com/DfL68orPL0
वीडियो शूट करने वाली कंपनी ने भी अपनी तरफ से मामले पर सफाई दी है। कंपनी ने आधिकारिक बयान में कहा हमने वीडियो शूट करने के लिए पहले इजाज़त ली थी। हमने इसके पहले भी इजाज़त लेकर मस्जिद में वीडियो शूट किया है।
मस्जिद के प्रबंधक का कहना है कि वीडियो में जो डांस नज़र आ रहा है वह मस्जिद के अंदर नहीं किया गया था। वीडियो में बदलाव करके उसे सोशल मीडिया पर डाला गया है जो कि शूटिंग से पहले का है।
सबा कमर पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट्री में मशहूर अभिनेत्री हैं। बॉलीवुड में उन्होंने हिंदी मीडियम फिल्म से शुरुआत की थी। इस फिल्म में उनके साथ मुख्य अभिनेता की भूमिका दिवंगत इरफ़ान खान ने निभाई थी। सबा कमर ने ‘मैं औरत हूँ’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी, यह काफी चर्चा में भी रहा था। लेकिन उन्हें सबसे ज़्यादा नाम दिलाया ‘धूप में अंधेरा है’ और ‘जिन्नाह के नाम से’। ‘मात’ धारावाहिक के लिए भी उन्हें खूब सराहना मिली थी। इसके अलावा उन्हें अपने अभिनय के लिए कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।