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स्टार किड्स की फिल्में नहीं देखो, किसी ने जबर्दस्ती किया है: नेपोटिज्म पर बहस को करीना कपूर ने बताया अजीब

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से बॉलीवुड में नेपोटिज्म का मुद्दा चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में इस मसले पर करीना कपूर ने भी अपनी राय रखी थी। इसकी वजह से वह आलोचना का शिकार हो रही हैं।

करीना ने बरखा दत्त के साथ बातचीत में नेपोटिज्म पर चर्चा को अजीब बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उन्हें किसी भी प्रकार का विशेष फायदा स्टार किड होने के नाते मिला।

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर करीना कपूर ट्रेंड करने लगीं और लोग उन्हें अपने-अपने तरह से बताने लगे कि कैसे एक स्टार किड होने के नाते ही वह अब तक बॉलीवुड में बनी हुई हैं।

बरखा के यूट्यूब चैनल मोजो स्टोरी पर अपलोड इस इंटरव्यू में करीना कपूर ‘बरादरी प्रोजेक्ट’ पर बात करते हुए उन कारीगरों पर चर्चा कर रही थीं जिनके काम को फैशन क्षेत्र के केंद्र में लाने के लिए नम्रता जकारिया नामक पत्रकार ने इस प्रोजेक्ट को शुरू किया है।

वीडियो लगभग 27 मिनट का है। मगर इस वीडियो 18 मिनट के स्लॉट के आसपास बरखा दत्त करीना कपूर के सामने नेपोटिज्म पर सवाल करती हैं। इसके बाद करीना कहती हैं कि दरअसल लोग स्थिति को समझना नहीं चाहते हैं। वह बस हमलावर रहते हैं। चाहे कोई किसी भी बैकग्राउंड से आता है। उनकी मानें तो यह उनका संघर्ष है जो आज वो बॉलीवुड के नामी सितारों में गिनी जाती हैं। वरना कौन इस इंडस्ट्री में 2 दशक बिता पाता है।

वह कहती हैं, “21 साल तक काम में बने रहना मुझे नहीं लगता नेपोटिज्म से मुमकिन हो पाता है। ये मुमकिन नहीं है। मैं लंबी लिस्ट बता सकती हूँ ऐसे लोगों की जिनके लिए यह आसान नहीं था।”

नेपोटिज्म को उचित ठहराते हुए वह डॉक्टर के बच्चे का उदहारण देती हैं और कहती हैं कि एक डॉक्टर का लड़का भी चाहता है कि वह डॉक्टर बने। इसके बाद बरखा दत्त भी भाई-भतीजावाद को उचित ठहराने के लिए कहती हैं कि वह एक पत्रकार की बेटी हैं और वह भी कई लोगो को जानती हैं जिनके बच्चे भी उसकी प्रोफेशन में हैं। लेकिन उन पर ऐसे हमले नहीं होते।

करीना अपनी बात को बढ़ाते हुए कहती हैं कि उन्हें लगता है स्टार किड्स लोगों के लिए बहुत आसान टारगेट होते हैं। वे इन सबके समाधान के रूप में कहती हैं कि हमें बस काम करते रहना चाहिए। उनका मानना है कि उन्हें नहीं लगता कि उन्हें कुछ भी उनके बैकग्राउंड के कारण मिला। उनकी पहचान बनाने में उनका संघर्ष था। हाँ ये बात और है कि उनका स्ट्रगल उतना दिलचस्प नहीं था जितना कि किसी बाहरी का होता है, जो ट्रेन से जेब में 10 रुपए लेकर आता है। वह कहती हैं कि किसी का संघर्ष दिलचस्प हो सकता है लेकिन उनके पास भी उनकी कहानी है। उनका मानना है कि किसी पर ऊँगली उठाना काफी खराब बात है।

सबसे हैरानी की बात इस पूरी बातचीत में ये होती है कि जब करीना आगे इस बारे में बात करती हैं तो वह नेपोटिज्म के लिए जिम्मेदार दर्शकों को ठहरा देती हैं। वह कहती हैं,”दर्शकों ने ही हमें बनाया है। किसी और ने नहीं बनाया। यही लोग ऊँगली उठा रहे हैं। जिन्होंने स्टार्स के बच्चों को स्टार बनाया। आप जा रहे हो न फिल्म देखने? मत जाओ। किसी ने आपको जबरदस्ती किया है। मैं नहीं समझ पाती। मुझे तो यह चर्चा ही अजीब लगती है।”

वह अक्षय कुमार, शाहरूख खान, आयुष्मान खुराना और राजकुमार राव का उदहारण देकर कहती हैं कि यह सब बाहरी हैं। लेकिन आज सफल इसलिए हैं क्योंकि इन्होंने मेहनत की। ऐसे ही आलिया हो या करीना कपूर, सबने मेहनत की। लोग फिल्म देखते हैं और इंजॉय करते हैं। इसलिए ये दर्शक ही होते हैं जो कलाकार को बनाते हैं और बिगाड़ते हैं।

गौरतलब है कि इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद एक हफ्ते के भीतर करीना कपूर सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं। लोग कह रहे हैं कि उनकी आने वाली मूवी कोई मत देखो, क्योंकि वह खुद कह रही हैं कि दर्शक उनकी फिल्म न देखने जाएँ।

लोग उनकी पुरानी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं जिसमें उन्होंने कठुआ को लेकर अपने हिंदू होने पर शर्म व्यक्त की थी। इसके अलावा कुछ लोग उनके फिल्मों की कमाई को शेयर कर कह रहे हैं कि करीना को ऐसे दावे करने से पहले कि दर्शक ही उन लोगों को बनाते-बिगाड़ते हैं, एक बार अपनी पिक्चरों की कमाई देखने की जरूरत है। अगर वाकई उन्हें दर्शकों ने बनाया होता तो कभी फिल्में फ्लॉप नहीं होतीं।

किसी ने उन्हें नेपो क्वीन कहा तो किसी ने उनकी मूवी न देखने की अपील की। एक यूजर ने उन्हें एक्टिंग में जीरो बताते हुए यह पूछा कि आखिर लोग इन्हें ट्रेंड ही क्यों करवा रहे हैं। इन्होंने ही एक इंटरव्यू में कहा था कि सारा अली खान को अपनी पहली फिल्म के एक्टर को डेट नहीं करना चाहिए।

संप्रदाय विशेष के लिए हो अलग निर्वाचन समूह, संसद में मिले आरक्षण: आकार पटेल की संविधान विरोधी माँग, जिन्ना का समर्थन

मानवतावादी संस्था के रूप में खुद को प्रचारित करने वाले ‘एमनेस्टी इंडिया’ के प्रमुख रह चुके आकार पटेल ने संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की माँग की है। उन्होंने पाकिस्तान के स्थापना का भी बचाव किया और मुहम्मद अली जिन्ना के सिद्धांतों को आगे बढ़ाया। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए अब संसद से लेकर अन्य प्रतिनिधित्व समूहों में अपने लिए अलग जगह माँगने का वक्त आ गया है।

आकार पटेल ने विभाजन के असली कारणों को छिपाते हुए दावा किया कि कॉन्ग्रेस ने संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए अनुपात के आधार पर प्रतिनिधित्व देने से इनकार कर दिया था, इसलिए पाकिस्तान का गठन हुआ। उन्होंने कहा कि अब स्वतंत्र भारत ने जिन्ना के डर को सही साबित कर दिया है। साथ ही आकार पटेल संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए अलग इस्लामिक स्टेट की माँग करते हुए इसके लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराने से भी नहीं चूके।

उन्होंने आनुपातिक प्रतिनिधित्व की बात करते हुए कहा की हर एक जनप्रतिनिधियों के समूह में संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए एक निश्चित संख्या में सीटें आरक्षित होनी चाहिए। कुछ लोगों ने इसका अर्थ ये भी निकाला की सेना से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक में संप्रदाय विशेष के लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये सबसे काम है जो हम संप्रदाय विशेष के लोगों के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू राष्ट्र इस माँग को नहीं ठुकरा सकता, क्योंकि ये वैध है।

हिंदुओं के कत्लेआम के लिए ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ की बात करने वाले मुहम्मद अली जिन्ना का बचाव करते हुए आकर पटेल ने कहा कि वो दक्षिणी मुंबई में रहने वाले गुजराती थे, जो आम भारतीयों से कहीं ज्यादा शहरी थे। नरेंद्र मोदी को संविधान के खिलाफ काम करने वाला प्रधानमंत्री कहने वाले आकार पटेल इस दौरान ये भी भूल गए कि वो जो कह रहे हैं, उसे संविधान सभा पहले ही ठुकरा चुका है।

मुहम्मद इस्माइल ने कहा था कि संप्रदाय विशेष के लोगों को जब तक अलग निर्वाचन क्षेत्र नहीं मिलता और उन्हें इस तरह का प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तब तक उनके साथ न तो न्याय हो सकता है और न ही वो जगह मिल सकती है, जिसके लिए वो इच्छुक हैं। आरके सिधवा ने तब कहा था अगर वो अब भी ऐसा सोचते हैं तो फिर वो आज भी न सिर्फ टू नेशन थ्योरी में विश्वास रख रहे हैं, बल्कि सांप्रदायिकता को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

उन्होंने ये भी बताया था कि ये सिस्टम भारत में क्यों काम नहीं करेगा। उन्होंने कहा था कि छोटे देशों में ये चल सकता है, लेकिन यहाँ नहीं। ये एक ऐसा सिस्टम है जिसे बुद्धिजीवी वर्ग ही समझ सकता है। उन्होंने गिनाया था कि बेल्जियम और स्विट्जरलैंड में कुछ लाख ही जनसंख्या है, जबकि भारत में 40 करोड़ है और यहाँ के संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों में ही लाख तक जनसंख्या होती है।

यहाँ तक कि जवाहरलाल नेहरू भी इस तरह के आरक्षण के खिलाफ थे और उन्होंने कहा था कि एक लोकतंत्र में इस तरह की व्यवस्था इसके विरुद्ध ही हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जब एक राजनीतिक लोकतंत्र में ऐसा किया जा रहा है तो इसका अर्थ है कि आप उस अल्पसंख्यक समुदाय को अलग-थलग कर रहे हो। उन्होंने कहा था कि इसका अर्थ यह हुआ कि उनमें हमारा विश्वास नहीं है।

आकार पटेल इससे कोरोना पीड़ित अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों के लिए नफ़रत फैला चुके हैं। पटेल के मुताबिक़ यह 3 हस्तियाँ साबित करती हैं कि ‘पैसे से क्लास नहीं आता।’ अपनी विकृत मानसिकता का प्रदर्शन करते हुए आकार ने तीनों को ‘मिडिल क्लास ऑपोरच्युनिस्ट’ (मध्यमवर्गीय अवसरवादी) भी कहा था। कहा था कि यह छोटे ही रहने वाले हैं, इनकी मानसिकता कुएँ के मेढक जैसी ही है।’

IAS से नेता बने शाह फैसल का पॉलिटिक्स डेढ़ साल में ही बंद, शेहला रशीद ने भी छोड़ दिया था साथ

आईएएस अधिकारी से नेता बने शाह फैसल ने पॉलिटिक्स से तौबा कर ली है। जम्मू-कश्मीर में उनकी सियासी दुकान करीब डेढ़ साल ही चली। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वे दोबारा नौकरशाही का हिस्सा बन सकते हैं।

शाह फैसल प्रतिष्ठित परीक्षा पास करने वाले पहले कश्मीरी थे। 2019 की शुरुआत में उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद मार्च 2019 में जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) का गठन किया। जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद भी उनके साथ थीं।

बीते साल अक्टूबर में शेहला ने भी राजनीति से किनारा करते हुए पार्टी छोड़ दी थी। अब फैसल ने भी JKPM के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।

JKPM के वरिष्ठ नेता फ़िरोज़ पीरज़ादा ने उनके इस्तीफे की पुष्टि की है। साथ ही बताया है कि अब पार्टी की सारी जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी गई है।

ख़बरों की मानें तो इस बात के आसार हैं कि शाह फैसल फिर से प्रशासन में शामिल हो सकते हैं। हालॉंकि शुरुआत से ही फैसल का रवैया सरकार विरोधी रहा है। ऐसे में दोबारा उनके प्रशासन का हिस्सा बनने की खबर कई सवाल खड़े करती है।

रविवार के दिन शाह फैसल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से JKPM का ज़िक्र हटा दिया है। फ़िरोज़ पीरज़ादा ने बताया, “हम नहीं जानते कि वह क्या करेंगे। वह इस बारे में अक्सर बात करते थे कि वह अमेरिका जाकर आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं। ख़बरें यह भी आ रही हैं कि वह प्रशासन में फिर से शामिल होंगे। इसलिए अभी हमारे पास इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है।”    

साल 2018 में शाह फैसल पढ़ाई के लिए हार्वर्ड, अमेरिका में गए थे। वापस आने के बाद उन्होंने अपना राजनीतिक दल बनाने का फैसला लिया था। इसके बाद साल 2019 में फैसल ने जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट JKPM नाम का राजनीतिक दल शुरू किया था। लेकिन राज्य से विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। साल 2019 के अगस्त महीने में शाह फैसल को दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लेकर कश्मीर में नजरबंद किया गया था। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर 14 अगस्त को शाह फैसल दिल्ली में नहीं रोके गए होते तो वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत के खिलाफ मामला दर्ज करा चुके होते। वह घाटी में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने की तैयारी में थे।

इसके पहले रायटर्स के एक पत्रकार देवज्योत घोषाल ने शाह फैसल के बारे में हैरान कर देने वाला दावा किया था।देवज्योत के मुताबिक़ उन्हें शाह फैसल ने बताया था कि सैटेलाइट टीवी से लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। इस दौरान फैसल ने कहा था कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर भभक उठेगा, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं।

फैसल ने 2016 में भी इस्तीफा देने की धमकी भी दी थी। उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा था कि बुरहान वानी से उनकी उनकी तुलना कर उनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार किया जा रहा है। इसके अलावा इस साल जुलाई में उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भी समर्थन किया था। इमरान ख़ान का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा था कि वो तो शांति की प्रक्रिया स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन भारत में ही ऐसे लोग हैं जो ये होना नहीं देना चाहते। उन्होंने इमरान को बदलाव लाने वाला नेता भी बताया था।

शिवसेना वालों की भी बहुत कहानी है, सुशांत की मौत पर टुच्चापन मत दिखाओ: संजय राउत पर भड़के निरुपम

शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी मुखपत्र सामना के एक लेख में सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को लेकर कई गंभीर दावे किए थे। इस मसले पर कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद संजय निरुपम ने उन्हें आड़े हाथों लिया है।

राउत का नाम लिए बिना निरुपम ने ट्वीट किया, “शिवसेना के सांसद सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के बारे में ओछी बातें कर रहे हैं। हर परिवार की कुछ कहानी होती है। शिवसेना वालों की भी बहुत हैं। लेकिन सुशांत की मृत्यु एक संवेदनशील विषय है। शिवसेना को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, न कि टुच्चापन।”

राउत ने दावा किया था कि सुशांत के पिता केके सिंह ने दो शादी की थी। सुशांत ने उनकी दूसरी शादी कभी स्वीकार नहीं की और उनका भावनत्मक लगाव नहीं था। राउत ने परिवार के साथ सुशांत के संबंध अच्छे नहीं होने की भी बात की थी।

राउत के दावे को गलत बताते हुए सुशांत के मामा आरसी सिंह ने कहा था कि बिहार में रहने वाले जानते हैं कि सुशांत के पिता ने एक ही शादी की थी। संजय राउत झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा था, “संजय राउत ने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के इशारे पर गलत बयान दिया है। संजय राउत इस तरह की बात बोलकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी बात बोलकर किसी की छवि खराब करना क्या अच्छी बात है।”

सोमवार (अगस्त 10, 2020) को सुशांत के रिश्ते के भाई नीरज बबलू ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संजय राउत को इस बेबुनियाद बयान के लिए माफी माँगनी चाहिए। नीरज का कहना है कि संजय राउत द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह फर्जी है। सुशांत के पिता ने कोई दूसरी शादी नहीं की है। अगर संजय राउत अपने इस बयान के लिए वह सुशांत सिंह राजपूत के परिवार से सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं माँगते हैं, तो सुशांत का परिवार उनके खिलाफ न्यायिक कार्रवाई करेगा। 

‘संजय राउत माफी माँगे या कार्रवाई के लिए तैयार रहें’ – पिता की 2 शादी मामले पर सुशांत के भाई की चेतावनी

सुशांत सिंह राजपूत की कथित तौर पर आत्महत्या के मामले में नए तथ्य और दावे लगातार सामने आ रहे हैं। बीते दिन शिवसेना सांसद संजय राउत ने सुशांत सिंह राजपूत के पिता को लेकर एक बयान दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि सुशांत के पिता ने दो शादियाँ की हैं। इस पर सुशांत के भाई नीरज बबलू ने आज (10 अगस्त 2020) अपना पक्ष रखा। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि संजय राउत को इस बेबुनियाद बयान के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए।   

नीरज ने कहा, “संजय राउत द्वारा किया गया यह दावा पूरी तरह फ़र्ज़ी है। उन्होंने कोई दूसरी शादी नहीं की है। अगर अपने इस बयान के लिए वह सुशांत सिंह राजपूत के परिवार से सार्वजनिक तौर पर माफ़ी नहीं माँगते हैं, तब सुशांत का परिवार उन पर न्यायिक कार्रवाई के लिए बाध्य होगा।”

इतना ही नहीं संजय राउत शुरुआत से ही इस मामले की सीबीआई जाँच के खिलाफ़ थे। अब उनका दावा है कि सुशांत के पिता ने दूसरी शादी की थी और इसकी वजह से सुशांत और उनके पिता के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। संजय राउत ने तो इस बारे में सवाल तक किया था, “वह (सुशांत) अपने पिता से कितनी बार मिले थे?”

सुशांत सिंह राजपूत के भाई नीरज बबलू, चित्र साभार – डेक्कन क्रोनिकल

शिवसेना सांसद ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार की सिफारिश के बाद 1 ही दिन में सीबीआई जाँच के लिए स्वीकृति दे दी गई, जो बताता है कि सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों का राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और यह झकझोर देने वाला है।

राउत ने इसे राज्य सरकार की स्वायत्तता पर हमला करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर ये मामला मुंबई पुलिस के हाथ में रहता तो इससे आसमान नहीं टूट पड़ता। लेकिन इस मामले में राजनीतिक दबाव और रुचि के कारण इसे सीबीआई को दिया गया है। 

उन्होंने आरोप लगया कि इस मामले की पटकथा पहले ही लिख ली गई थी और परदे के पीछे कुछ भी हुआ हो सकता है ताकि महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ साजिश रची जाए। उन्होंने मुंबई पुलिस को दुनिया की सर्वोच्च जाँच तंत्र बताते हुए कहा कि वो प्रोफेशनल हैं और दबाव में नहीं आते।

संजय राउत का यह भी कहना है कि इस मामले में सिर्फ राजनीतिक षड्यंत्र रचे जा रहे हैं, जिसके चलते सच सामने न आ पाए। उनका पूछना है, “जब मुंबई पुलिस इस मामले की जाँच कर रही थी तब यह मामला उससे वापस क्यों ले लिया गया?”

उन्होंने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित होने वाले अपने साप्ताहिक स्तंभ में यह भी लिखा कि जब घटना मुंबई में हुई है, तब उसकी प्राथमिकी पटना में कैसे दर्ज की गई। सुशांत सिंह के परिवार ने इस मामले में पूरे 40 दिन बाद कानूनी सहारा लिया था।   

इसके पहले सुशांत के मामा आरसी सिंह ने भी संजय राउत के दावों को सिरे से खारिज किया था। एनबीटी के मुताबिक सुशांत के पिता ने दो शादियॉं नहीं की हैं। आरसी सिंह ने कहा, “बिहार में रहने वाले जानते हैं कि सुशांत के पिता ने एक ही शादी की है। संजय राउत झूठ बोल रहे हैं।”

आरसी सिंह ने कहा, “संजय राउत ने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के इशारे पर गलत बयान दिया है। संजय राउत इस तरह की बात बोलकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी बात बोलकर किसी की छवि खराब करना क्या अच्छी बात है?”

वहीं कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम ने भी राउत के इन दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि दिवंगत अभिनेता के परिवार पर ऐसे निचले स्तर की टिप्पणी करना सही नहीं है। हालाँकि इस दौरान उन्होंने किसी नेता का नाम लेकर उसकी आलोचना नहीं की। इसके अलावा संजय निरुपम ने यह कहा कि सुशांत सिंह की कथित तौर पर आत्महत्या का मामला संवेदनशील है। इस पूरे मामले की जाँच संवेदनशीलता से होनी चाहिए। ऐसे बयानों का केवल नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।   

वहीं दूसरी तरफ आज सुबह रिया चक्रवर्ती और उनके भाई प्रवर्तन निदेशालय में पूछताछ के लिए पेश हुए थे। सुशांत सिंह की कथित तौर पर आत्महत्या के मामले में दोनों मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोपित हैं। दोनों के साथ शुक्रवार और शनिवार के दिन भी पूछताछ का लंबा दौर चला था। इसके अलावा रिया चक्रवर्ती की प्रबंधक श्रुति मोदी से भी इस मामले में पूछताछ जारी है।                

सिर्फ एक साल में 937% बढ़ गया रिया चक्रवर्ती का फिक्स्ड एसेट्स: ED की पूछताछ के बाद ITR डिटेल्स से खुलासा

फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती से लगातार पूछताछ चल रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले शुक्रवार और फिर आज सोमवार (अगस्त 10, 2020) को रिया, उनके भाई, पिता और मैनेजर से पूछताछ की।

पूछताछ के दौरान जाँच एजेंसी को रिया की कमाई को लेकर कई अहम जानकारियाँ हाथ लगी हैं। रिया ने ईडी को ITR (Income Tax Return) सौंपा है।

वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 के ITR में रिया चक्रवर्ती की कमाई में अचानक इजाफा हो गया। ये आखिर कैसे हुआ? क्या था इनकम का सोर्स? इसके बारे फिलहाल कुछ भी पता नहीं चला है।

रिया की साल 2017-18  में सलाना कमाई 18.75 लाख रुपए थी जो कि साल 2018-19 में ये 18.23 लाख रुपए हो जाती है। रिया की साल 2017-18 में बाहर के सोर्स से होने वाली कमाई 1,27,625 होती है लेकिन अचानक ही साल 2018-19 में ये बढ़कर 2,38,334 हो जाती है। हालाँकि साल 2017-18 में सालाना सभी सोर्सेज से होने वाली नॉर्मल बिजेनस इनकम 17,57,442 से घटकर 16,04,936 हो जाती है।

एक और अहम बात रिया के ITR में दिखी है, जिसमें उनके फिक्स्ड एसेट्स साल 2017-18 में 96 हजार है जबकि साल 2018-19 में ये फिक्स्ड एसेट्स बढ़कर 9 लाख तक पहुँच जाते हैं। ये एक बड़ा मार्जिन है। रिया के शेयर होल्डर फंड साल 2017-18 में 34,05,727 है जबकि साल 2018-19 में ये शेयर होल्डर फंड्स 42,06,338 हो गए।

ईडी इसकी भी जाँच कर रही है कि रिया ने 2017-18 में 34 लाख रुपए के शेयर कहाँ से खरीदे, जबकि कमाई 18 लाख ही है। रिया का शेयर होल्डर फंड 2017-18 में 34 लाख से 2018-19 में 42 लाख तक पहुँच गया। यानी दो साल में शेयर की कीमत में 8 लाख की बढ़ोतरी हुई। ITR में 2017-2019 के बीच किसी बड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी नहीं है। इसके अलावा HDFC बैंक, ICICI बैंक में उनकी एफडी की भी जाँच हो रही है।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि सुशांत के बैंक अकाउंट में से 15 करोड़ रुपए निकले हैं। इसके अलावा भी कई और पैसों के लेन-देन की बात कही गई थी। इसी के बाद से ही ईडी ने इस पूरे मामले में पूछताछ तेज की है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ईडी की पूछताछ में फर्जी शेल कंपनी का खुलासा हुआ था। जानकारी के मुताबिक जाँच में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का मामला सामने आया है। ईडी को शक है कि सुशांत के अकाउंट से जो पैसा ट्रांसफर हुआ है, वह फर्जी शेल कंपनी के जरिए किया गया। इन शेल कंपनियों का ताल्लुक रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शोविक से बताया जा रहा है।

खबरों के मुताबिक 18 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली पूछताछ के बावजूद ईडी, शोविक के जवाब से संतुष्ट नहीं हो सका। उन्होंने कई सवालों के गोलमोल जवाब दिए। वहीं रिया भी अपने और पिता के नाम पर रजिस्टर्ड दो फ्लैट्स के बारे में स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं दे सकीं थीं। वो अपनी आय और खर्चों पर भी ठीक से जवाब नहीं दे पाई थी। इसलिए ईडी ने रिया को फिर से सोमवार को तलब किया।

राम का गुणगान, अब परशुराम की मूर्ति और ब्राह्मण सम्मलेन: जानिए 11% ब्राह्मणों को लुभाने के लिए क्यों पगलाई सपा-बसपा

किन्तु, कौन नर तपोनिष्ठ है यहाँ धनुष धरनेवाला?
एक साथ यज्ञाग्नि और असि की पूजा करनेवाला?
कहता है इतिहास, जगत् में हुआ एक ही नर ऐसा,
रण में कुटिल काल-सम क्रोधी तप में महासूर्य-जैसा!

मुख में वेद, पीठ पर तरकस, कर में कठिन कुठार विमल,
शाप और शर, दोनों ही थे, जिस महान् ऋषि के सम्बल।
यह कुटीर है उसी महामुनि परशुराम बलशाली का,
भृगु के परम पुनीत वंशधर, व्रती, वीर, प्रणपाली का।

रामधारी सिंह दिनकर के ‘रश्मिरथी’ की ये पंक्तियाँ आज इसीलिए और ज्यादा प्रासंगिक हो गई हैं, क्योंकि भगवान विष्णु के अंशावतार माने जाने वाले भगवान परशुराम की उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक से वापसी हो गई है। यदा-कदा ब्राह्मणवाद और ब्राह्मणों को गाली देकर राजनीति करने वाले सपा-बसपा अब उनकी आराधना में लगी है। यहाँ हम इसी बदलाव का पोस्टमॉर्टम करने की कोशिश करेंगे।

उत्तर प्रदेश में अब राजनीति की धुरी फिर से ब्राह्मणों पर ही आकर टिक गई है। राज्य की दोनों स्थानीय पार्टियाँ सपा और बसपा ब्राह्मणों को रिझाने के लिए एक से बढ़ कर एक वादे कर रही हैं। राज्य की 60 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहाँ ब्राह्मण जनसंख्या 20% के पार है। ऐसे में आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए कि सपा-बसपा ब्राह्मणों को रिझाने और भगवान परशुराम की मूर्ति बनवाने की बात कर रही है। लेकिन, आखिर उन्हें इसका एहसास कैसे हुआ कि ब्राह्मण उनके लिए ज़रूरी हैं?

सबसे पहले बात समाजवादी पार्टी की। सपा ने वादा किया है कि वो भगवान परशुराम की 108 फीट ऊँची प्रतिमा का निर्माण करवाएगी। इसके लिए जगह ढूँढने की बात भी कही जा रही है। बताया गया है कि प्रतिमा बनवाने के लिए समाजवादी पार्टी देश के लोकप्रिय मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति और लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में लगी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भव्य मूर्ति बनाने वाले राजकुमार के संपर्क में है।

इतना ही नहीं, सपा हर जिले में भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाने और ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कराने की योजना बना रही है। मंगल पांडेय से भी पार्टी का प्रेम उमड़ा हुआ है। पहले स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानी मंगल पांडेय की मूर्ति लगाने पर विचार किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने कई ब्राह्मण नेताओं के साथ बैठक की है। पार्टी गरीब ब्राह्मण घर की बेटियों की शादी भी कराएगी। सपा अब प्रदेश के 11% जनसंख्या वाले ब्राह्मणों को साधने में जुटी है।

अब बात बहुजन समाज पार्टी की, जिसकी पूरी विचारधारा ही दलितों के इर्द-गिर्द घूमती है। पार्टी की मुखिया मायावती ने तो यहाँ तक कहा कि वो सपा से भी ऊँची परशुराम की प्रतिमा लगवाएँगी। उन्होंने भगवान परशुराम के नाम पर अस्पताल बनवाने से लेकर साधु-संतों के ठहरने के लिए स्थल बनाने तक की बात कही। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज को बसपा ने पूरा प्रतिनिधित्व दिया है और ब्राह्मणों का बसपा पर पूरा विश्वास है।

मायावती का पूरा जोर इस बात पर है कि वो ब्राह्मण हितों की रक्षा के मामले में सपा से ऊपर हैं। उन्होंने सपा से पूछा कि जब वो सत्ता में थी तब उसने परशुराम की मूर्ति क्यों नहीं लगवाई? उन्होंने कहा कि किसी भी महापुरुष को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। साथ ही ये इशारा किया कि सपा ब्राह्मणों को इसीलिए लुभा रही है, क्योंकि राज्य में उसकी स्थिति अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा के शासन में ही ब्राह्मणों का सबसे ज्यादा शोषण और उत्पीड़न हुआ।

दोनों ही दलों की बेचैनी को देख कर ये सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर एक ब्रेक के बाद ब्राह्मण फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीति में इतने महत्वपूर्ण कैसे हो गए कि कथित अल्पसंख्यक और दलित तुष्टिकरण करने वाली पार्टियाँ उनके पास भाग रही हैं? इसके पीछे 2 सबसे स्पष्ट कारण नज़र आते हैं। पहला, राम मंदिर और दूसरा, विकास दुबे का एनकाउंटर। इन दोनों ही मुद्दों का सपा-बसपा ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहती है।

बिकरू गाँव में विकास दुबे ने 8 पुलिसकर्मियों को मार गिराया था। ये एक बड़ा मुद्दा बना। विकास दुबे नाटकीय तरीके से पकड़ा गया और उससे भी बड़े नाटकीय अंदाज़ में एनकाउंटर में मारा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उसके समर्थन में कई पोस्ट हुए। इसमें जातिवाद घुसा और योगी आदित्यनाथ को ठाकुर बताते हुए ब्राह्मणों का विरोधी करार दिया गया। इसमें कॉन्ग्रेस समर्थक ट्रोल सबसे ज्यादा सक्रिय रहे।

बस यहीं पर सपा-बसपा के कान खड़े हो गए। यूपी में प्रियंका गाँधी के कारण कॉन्ग्रेस का वोट प्रतिशत जरा भी बढ़ता है तो खास मजहब के वोटों का बँटवरा होना तय है। हो सकता है कि इसके 3 हिस्से हो जाएँ। ऐसे में उन पर दाँव न लगा कर प्रदेश की 11% जनसंख्या को साधने की कोशिश हो रही है। नॉन-यादव ओबीसी भाजपा के पक्ष में दिख रहा है। हालाँकि दलितों का एक वर्ग अभी भी बसपा के साथ है, लेकिन चंद्रशेखर उर्फ रावण ने मायावती की नींद उड़ा रखी है।

प्रियंका गाँधी ने जिस तरह से अस्पताल जाकर रावण से मुलाकात की थी, उसके बाद मायावती बिफर पड़ी थीं। न तो सपा सिर्फ यादवों के सहारे सरकार बना सकती है और न ही बसपा दलितों के खंडित वोटों से जनादेश ला सकती हैं। ऐसे में ब्राह्मणों को लुभाना उन्हें कारगर लग रहा है। सामान्य वर्ग और नॉन-यादव ओबीसी की भाजपा की गोलबंदी तोड़ने के लिए ये जुगत अपनाई जा रही है।

मायावती के हालिया बयानों को देखिए। उन्होंने कहा कि विकास दुबे की आड़ में सम्पूर्ण ब्राह्मण समाज का शोषण किया जा रहा है। विकास दुबे के एनकाउंटर के तुरंत बाद भी उन्होंने कहा था कि एक गलत व्यक्ति के करतूतों को सज़ा पूरे समुदाय को दिए जाने के कारण ब्राह्मण समाज भयभीत और प्रताड़ित नज़र आ रहा है। 2007 में ब्राह्मण-दलित वाला फॉर्मूला अपना चुकीं मायावती ने कहा कि ये समुदाय आतंकित महसूस कर रहा है।

सपा को लगा था कि कहीं इस मुद्दे का फायदा बसपा और कॉन्ग्रेस न उठा ले, इसीलिए उसने परशुराम की प्रतिमा का दाँव खेल दिया। सपा नेताओं के साथ विकास दुबे की तस्वीरें वायरल होने पर भी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कोई सफाई नहीं दी। इसके पीछे ब्राह्मणों के समर्थन का दिखावा भी हो सकता है। बेचैन सपा-बसपा के नेता योगी आदित्यनाथ को अजय सिंह बिष्ट भी कहते रहे हैं।

अब बात राम मंदिर की। जब भी बात मंदिर और पूजा-पाठ की आती है, कुछ दल इसे ब्राह्मणों से जोड़ते हैं। शायद सपा-बसपा को धीरे-धीरे ये पता चल रहा है कि भाजपा को आँधी में कर्मकांड अब हर जाति तक पहुँच चुका है और इससे भावनाएँ जुड़ती जा रही हैं लोगों की। साधु-संतों के लिए स्थल बनाने के पीछे यही सोच हो सकती है। सैकड़ों सालों से अटके राम मंदिर निर्माण की काट शायद किसी दल के पास नहीं है।

प्रियंका गाँधी, मायावती और अखिलेध यादव को राम और राम मंदिर के पक्ष में बोला पड़ा। इससे पता चलता है कि वो जनभावनाओं को समझ तो रहे हैं, लेकिन ये नहीं समझ रहे कि जनता अब दिखावे और श्रद्धा के बीच का अंतर समझने लगी है। मायावती भले अखिलेश से सवाल पूछें लेकिन उन्होंने अपनी सत्ता रहते कांशीराम की मूर्तियों की झड़ी लगा दी थी। अब ये पार्टियाँ और असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

जिस महिला ने खुले सीवर के पास 7 घंटे खड़े होकर दिखाया रास्ता, मुंबई में उन्हें अधिकारियों ने दी गाली

भारी बारिश के कारण मुंबई की सड़कों की हालत बेहद खराब है। ऐसे में एक महिला को बीच रोड पर खड़े होकर गाड़ियों को दिशा दिखाते देखा गया। उस महिला का नाम कांता मूर्ति है, जिनकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई।

वीडियो में हमने देखा था कि कैसे महिला खुले सीवर के पास खड़े होकर लोगों को उधर आने से रोक रही हैं और उन्हें दूसरी ओर से जाने का इशारा कर रही हैं। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर बहुत शेयर किया गया।

एएनआई समाचार एजेंसी के अनुसार, यह वीडियो 4 अगस्त को मुंबई के मतुंगा के एक रोड की है। जहाँ भारी बारिश के कारण पानी भर गया था और कांता ने उस पानी को निकालने के लिए सीवर खोल दिया। लेकिन जिम्मेदारियों को समझते हुए वह उस जगह पर 7 घंटे खड़ी रहीं। उन्होंने वाहनों को किसी भी दुर्घटना से बचाने के लिए उन्हें हाथ से इशारा करके अलग से जाने को कहा।

रिपोर्ट के अनुसार कांता ने कहा, “मैंने पानी निकालने के लिए सीवर का ढक्कन खोला और फिर वहाँ लोगों को चेतावनी देने के लिए खड़ी भी रही। लेकिन बीएमसी अधिकारी बाद में आए और मुझे इसके लिए गाली दी।”

कांता बताती हैं कि वह अपने जीवनयापन के लिए फूल बेचती हैं और उसी से अपने तीन बच्चों की शिक्षा का खर्च भी उठाती हैं। वे कहती हैं कि उनके 5 बच्चे और भी हैं, लेकिन सबकी शादी हो गई है। अभी फिलहाल वही घर में कमाने वाली हैं। पति हैं लेकिन एक रेल दुर्घटना के बाद उन्हें लकवा मार गया और अब वह कोई काम करने में अक्षम हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मुंबई में बारिश का भयंकर रूप देखने को मिला है। वहाँ से आई वीडियो में यह देखने को मिला कि सड़कों पर इकट्ठा पानी ने और उसके बहाव ने लोगों के घरों को काफी नुकसान पहुँचाया, जिससे घरों के सामान तक बाहर तैरने लगे। इसके अलावा ऐसी बारिश के कारण मुंबई में कई हादसे भी हुए।

अधिकारियों को डराने के लिए 4-5 गुंडे साथ लेकर जाएँ: कार्यकर्ताओं से महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष

बाला साहेब थोराट महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं। राज्य की उद्धव सरकार में मंत्री भी। वो कोरोना वायरस के कारण पैदा हालात की समीक्षा करने सोलापुर पहुॅंचे। यहॉं उन्होंने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को अधिकारियों के साथ सख्ती से पेश आने को कहा। इसके लिए अपने साथ 4-5 गुंडे लेकर चलने का सुझाव दिया।

थोराट ने कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “सरकारी अधिकारियों को हमसे डरना चाहिए। प्रशासन पर हमारी पकड़ होनी चाहिए। इस डर को मन में बैठाने के लिए अपने साथ 4-5 लोगों को ले जाएँ।”

थोराट से पहले, बैठक में मौजूद कॉन्ग्रेस विधायक यशोमति ठाकुर ने भी इसी तरह की विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपने संबोधन में, अधिकारियों से निपटने के दौरान कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को अत्यधिक आक्रामक होने के लिए कहा।

यशोमति ठाकुर ने कहा, “अगर आपका काम पूरा नहीं हो रहा है, तो हंगामा करें। अनुरोध की भाषा कोई नहीं समझता। आपको इसे छीनने का अधिकार मिला है। हर नेता को अपने तालुका का ध्यान रखना होगा। आपकी तरफ से कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए। हम आपका समर्थन करेंगे।”

इस बैठक में महिला और बाल विकास मंत्री, यशोमति ठाकुर, मंत्री दत्तात्रेय भारें, कलेक्टर मिलिंद शंभरकर, पुलिस आयुक्त अंकुश शिंदे, नगर आयुक्त पी शिवशंकर, जिला पुलिस अधीक्षक मनोज पाटिल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश वैचल उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान बालासाहेब थोराट ने यह भी कहा कि राज्य कोरोना महामारी के प्रकोप से गुजर रहा है और विदेशी नागरिकों के कारण इसका संक्रमण तेजी से फैल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हालाँकि मुंबई में कोरोना वायरस के प्रसार में सुधार है, लेकिन यह राज्य के अन्य क्षेत्रों में बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी की सरकार में मतभेद के संकेत देते हुए थोराट ने कहा था, “महाविकास अघाड़ी के सहयोगियों में कुछ मुद्दे हैं, जिनका समाधान बातचीत से निकल आएगा। लेकिन हम यह कहना चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस को सरकार के निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिकार मिलना चाहिए।”

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने कहा था कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र में निर्णय लेने की भूमिका में नहीं है। उन्होंने कहा था कि सरकार चलाने और राज्य में सरकार का समर्थन करने के बीच अंतर है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में निर्णय लेने वाली भूमिका में माना जा सकता है, लेकिन महाराष्ट्र में नहीं।

ऑटो में महिलाओं से रेप करने वाले नदीम और इमरान को मारी गोली: ‘जान बच गई पर विकलांग हो सकते हैं’

यूपी पुलिस ने नदीम और इमरान नाम के दो अपराधियों को पकड़ा है। ये ऑटो में महिला सवारी को बिठाकर उनके साथ दुष्कर्म करते थे।

असल में 4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा में 19 साल की एक युवती के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। पुलिस ने देर रात मुठभेड़ के बाद नदीम और इमरान को पकड़ा था।

पीड़िता मूल रूप से हाथरस की रहने वाली है और सूरजपुर में काम करती है। 4 अगस्त को उसने ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर से परी चौक के लिए ऑटो लिया। ऑटो में चालक के अलावा एक और आदमी बैठा था। थोड़ी देर बाद उसे एहसास हुआ कि ऑटो उसे दूसरी जगह लेकर जा रहा है। उसने विरोध किया तो दूसरे व्यक्ति ने बंदूक निकाल कर दुष्कर्म की धमकी दी। इसके बाद उस व्यक्ति ने कपड़े की मदद से युवती के हाथ और पैर बॉंधे। फिर दोनों ने एक-एक कर उसके साथ दुष्कर्म किया।

वह ऑटो के भीतर से मदद के लिए लगातार चीख लगा रही थी। कुछ समय बाद नदीम और इमरान को समझ में आया कि पुलिस उनका पीछा कर रही है। फिर उन्होंने पुलिस पर फा​यरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वे घायल हो गए।

नदीम बिजनौर का तो इमरान गौतमबुद्ध नगर का रहने वाला है। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों महिला सवारी को ऑटो रिक्शा में बैठाते थे। इसके बाद बंधक बनाकर उन्हें सुनसान जगह पर ले जाते और उनके साथ बलात्कार करते थे।  

पुलिस उपायुक्त ज़ोन तृतीय विशाल पाण्डेय ने यह जानकारी दी। धानाध्यक्ष वरुण पंवार ने बताया कि वह अपनी टीम के साथ हिंडन नदी के पुस्ता पर चेकिंग कर रहे थे। तभी रात एक बजे के करीब एक ऑटो सफीपुर गाँव के रास्ते आया। रुकने का इशारा किए जाने के बाद भी ऑटो नहीं रुका।   

ऑटो रिक्शा से एक महिला की चिल्लाने की आवाज़ आने पर पुलिस ने उसका पीछा किया। कुछ दूरी के बाद बदमाश स्वयं को घिरा देखर ऑटो छोड़कर भागने लगे। फिर बदमाशों ने पुलिस पर गोली चलाई। उन्होंने बताया कि पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई। बदमाशों के पैर में गोली लगी है। जानकारी के मुताबिक़ आरोपित ऑटो के भीतर से चिल्ला रहे थे ‘मारो सालों को पुलिस वाले हैं।’ दोनों के पास से अवैध हथियार भी बरामद हुए हैं। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने भी इस घटना का वीडियो साझा किया। समें साफ नज़र आ रहा है कि पुलिस नदीम और इमरान को गिरफ्तार करके ले जा रही है।

नदीम और इमरान पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इउन पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पूछताछ में पता चला कि नदीम पर पहले भी महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने के आरोप लग चुके हैं।