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रूस ने किया पहली कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा, WHO सहित अमेरिका और ब्रिटेन संशय में

कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन तैयार करने की रेस में रूस से आज (अगस्त 11, 2020) एक बड़ी खुशखबरी आई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने मंगलवार को ऐलान किया है कि देश में तैयार की गई कोरोना वैक्सीन को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है और खुद पुतिन की बेटी को इसका पहला टीका भी लगाया जा चुका है।

सरकारी बैठक में बात करते हुए पुतिन ने कहा कि इस वैक्सीन के परिणाम बहुत अच्छे आए हैं और यह कोरोना वायरस से इम्युनिटी विकसित करने में कारगर है। राष्ट्रपति पुतिन ने इस बात पर भी जोर दिया कि वैक्सीन के लिए कई आवश्यक परीक्षण किए गए।

उन्होंने आगे कहा, “मेरी बेटी ने भी इस वैक्सीन का टीका लिया है, शुरू में उसे हल्का बुखार था, लेकिन अब वह बिल्कुल ठीक है।” उन्होंने बताया कि उनकी बेटी न सिर्फ़ ठीक है बल्कि बढ़िया महसूस कर रही है। उसने भी इस पूरे परीक्षण में हिस्सा लिया था।

रूसी अधिकारियों के मुताबिक, Gam-Covid-Vac Lyo नाम की इस वैक्सीन को तय योजना के अनुसार रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय और रेग्युलेटरी बॉडी का अप्रूवल मिल गया है।

गौरतलब है कि इस ऐलान के साथ ही रूस अब पहला देश बन गया है, जिसने इस वैश्विक महामारी से बचाव हेतु वैक्सीन बनाने का दावा किया है। रूस ने कहा है कि अब यह वैक्सीन पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों को दी जाएगी, फिर इसका इस्तेमाल बुजुर्गों पर होगा।

खबरों की मानें तो मॉस्को ने कई देशों को वैक्सीन सप्लाई करने की बात कही हैं। इसके लिए वह बड़े पैमाने पर उत्पादन सितंबर माह में शुरू कर सकता है।

इससे पहले रूस ने महीने भर पूर्व ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि उनकी वैक्सीन ट्रायल में सबसे आगे है और वे उसे 10 से 12 अगस्त के बीच रजिस्टर्ड करा लेंगे। हालाँकि, उस समय किसी देश ने उनकी बात को इतनी गंभीरता से नहीं लिया था।

वहीं, WHO सहित अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश अभी तक भी रूस के इस दावे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं और रूस पर वैक्सीन का फार्मूला चुराने के आरोप भी लगा रहे हैं।

WHO ने भी रूस द्वारा तैयार की गई कोरोना की वैक्सीन को लेकर कई तरह के संदेह जताए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वैक्सीन के तीसरे चरण को लेकर संशय में है।

संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अगर किसी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है, तो इसे खतरनाक मानना ही पड़ेगा।

रिया से SC ने पूछा- आप CBI जाँच चाहती हैं या नहीं? केस मुंबई ट्रांसफर करने की याचिका पर फैसला रखा सुरक्षित

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में आरोपित उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर आज सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती से सवाल किया है कि वो इस मामले में सीबीआई जाँच चाहती हैं या नहीं?

रिया चक्रवर्ती ने पटना में दर्ज केस मुंबई ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई है। उन्होंने दलील दी है कि सुशांत के पिता की एफआईआर का पटना में किसी अपराध से कोई कनेक्शन नहीं है और राज्य इसमें भारी दखल दे रहा है।

रिया चक्रवर्ती की केस ट्रांसफर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से बृहस्पतिवार (अगस्त 13, 2020) तक अदालत के समक्ष संकलित सभी पूर्ववर्ती निर्णयों का लिखित नोट दाखिल करने को कहा। अब सुशांत केस की जाँच मुंबई पुलिस करेगी या सीबीआई, इस पर अपना आखिरी फैसला सुप्रीम कोर्ट आगामी बृहस्पतिवार को दे सकता है।

आज याचिका की सुनवाई के दौरान रिया चक्रवर्ती के वकील ने कहा कि पटना में सुशांत के पिता द्वारा दर्ज करवाई गई FIR का मामला भी मुंबई में ट्रांसफर किया जाए, वरना रिया चक्रवर्ती को इंसाफ नहीं मिल पाएगा।

इस पर रिया चक्रवर्ती के वकील ने केस को मुंबई पुलिस को ट्रांसफर करने और जाँच में पूर्वग्रह की आशंका की दलील देते हुए कहा – “मैं निष्पक्ष जाँच चाहता हूँ। जिस तरह से बिहार पुलिस की माँग पर इस केस को सीबीआई द्वारा टेक ओवर किया गया, मेरी चिंता इस बात को लेकर थी। इस मामले को पहले मुंबई जाना चाहिए। और अगर सीबीआई को आना है, तो बाद में आ सकती है।”

आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि रिया के खिलाफ मामले की जाँच कौन करेगा? दरअसल, इस मामले में रिया चक्रवर्ती चाहती हैं कि उनके खिलाफ पटना में दर्ज एफआइआर मुंबई ट्रांसफर की जाए। और अगर सीबीआइ जाँच हो तो उसका क्षेत्राधिकार मुंबई ही रहे।

इस पर महाराष्‍ट्र सरकार का कहना है कि यह सीबीआइ की जाँच का कोई मामला ही नहीं है। बिहार सरकार ने कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि अब यह जाँच सीबीआई कर रही है, इसलिए रिया की याचिका का कोई अर्थ नहीं रहा। सुशांत के पिता भी सीबीआई जाँच के समर्थन में हैं। सुनवाई के दौरान रिया के वकील श्‍याम दिवान ने कहा है कि इस मामले में पक्षपात की पूरी आशंका है।

इससे पहले रिया चक्रवर्ती ने कहा कि बिहार में FIR कानूनन गलत और पूर्वग्रहयुक्त है। जस्टिस ऋषिकेश रॉय की बेंच में रिया चक्रवर्ती की ओर से पेश हुए वकील श्याम दीवान ने कहा, “यह ट्रांसफर के लिए एक आवेदन है और हमारी संक्षिप्त दलील यह है कि जहाँ तक सुशांत के पिता द्वारा दर्ज की गई FIR का सवाल है, इसका पटना से कोई लेना-देना नहीं है।

राज्य द्वारा भी काफी हस्तक्षेप है, जिसका मतलब है कि पूर्वाग्रह की आशंका है। FIR पटना में दर्ज की गई, जबकि वहाँ घटना हुई ही नहीं थी। FIR 38 दिन की देरी से दर्ज करवाई गई। अगर मामला पटना से मुंबई ट्रांसफर नहीं होता, तो रिया को इंसाफ नही मिल पाएगा।”

गौरतलब है कि इस केस में रिया चक्रवर्ती की ओर से श्याम दीवान, महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी, बिहार सरकार की ओर से मनिंदर सिंह और भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपने-अपने पक्ष रखे।

‘किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़े ही है’ के शायर राहत इंदौरी का निधन, इंटरनेट पर प्रशंसक सदमे में

मशहूर शायर डॉ राहत इंदौरी का कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मंगलवार (अगस्त 11, 2020) निधन हो गया है। उनका कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आया था। इसके बाद वे इलाज के लिए इंदौर के अरविंदो अस्पताल में भर्ती हुए थे। राहत इंदौरी ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी थी।

मंगलवार सुबह ही राहत इन्दौरी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था – “कोविड के शरुआती लक्षण दिखाई देने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है। ऑरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूँ। दुआ कीजिए जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूँ। एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी ख़ैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती रहेगी।”

कोरोना संक्रमण के कारण राहत इंदौर को आज सुबह ही अस्पताल में भर्ती किया गया था और इसकी जानकारी उन्होंने खुद अपने फेसबुक अकाउंट पर भी दी थी। शाम को अचानक उन्हें तीन दिल के दौरे आए और उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। डाक्टरों के अनुसार दोनों फेफड़ों में कोरोना का संक्रमण, किडनी में सूजन थी और साँस लेने में तकलीफ होने के कारण वे अस्पताल में भर्ती हुए थे।

राहत इंदौरी मशहूर शायर थे। उन्होंने बॉलीवुड की कई फिल्मों के लिए गाने लिखे हैं। उनकी एक मशहूर शायरी ‘सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’ प्रगतिशील युवाओं के बीच ख़ास तौर पर लोकप्रिय रही है। खासकर CAA विरोध प्रदर्शन के दौरान और मोदी सरकार के विरोध में ये पंक्तियाँ खूब इस्तेमाल की गई हैं।

राहत इंदौरी के निधन के समाचार से सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक बेहद हैरान हैं। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर उनकी मौत पर संवेदना प्रकट करते हुए लिखा है – “राहत इंदौरी नहीं रहे। प्रभु उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति।”

नोएडा के स्पा सेंटर में काम करने वाली माधुरी की छुरी से गला रेतकर हत्या: आरोपित मुस्तफा गिरफ्तार, नहर में मिला शव

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली और नोएडा के एक स्पा सेंटर में काम करने वाली महिला की हत्या कर शव नहर में फेंकने का मामला सामने आया है। आरोपित मुस्तफा ने छुरे से महिला की हत्या करने के बाद शव को वैशाली में हिंडन नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। महिला तीन दिन से लापता थी।

नोएडा के स्पा सेंटर में काम करने वाली महिला 6 अगस्त को लापता हो गई थी। रविवार (अगस्त 9, 2020) देर रात पुलिस ने वैशाली सेक्टर 4-5 की पुलिया के पास से महिला के शव को बरामद किया। पुलिस ने शव के पास से महिला का मोबाइल और हत्या में प्रयोग की गई छुरी भी बरामद किया है। परिजनों की शिकायत के आधार पर आरोपित मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वहीं मृतक महिला की पहचान माधुरी उर्फ पलक (36) निवासी के रूप में पहचान हुई है। माधुरी के पति की पाँच साल पहले मृत्यु हो गई थी। वह इंदिरापुरम में तीन बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती थी और बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए जगतपुर फार्म नोएडा स्थित एक स्पा सेंटर में नौकरी करती थीं।

पूछताछ में मुस्तफा ने बताया कि महिला से उसका परिचय था। अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए वह अक्सर उससे पैसों की माँग करती थी। कुछ दिन पहले उसने दस हजार रुपए महिला को दिए थे। फिर और पैसों की माँग करने पर दोनों के बीच कई बार झगड़ा हुआ था। इसके बाद उसने माधुरी की हत्या करने की योजना बनाई। आरोपित मुस्तफा ने बताया कि 6 अगस्त को महिला जब ग्रेटर नोएडा से घर जा रही थी, तो उसे कॉल कर शुक्र बाजार स्थित अपनी मीट की दुकान में बुला लिया। फिर दुकान के अंदर ही छुरी से गला रेत कर उसकी हत्या कर दी और शव को नहर की झाड़ियों में फेंक दिया।

जानकारी के मुताबिक हत्यारोपित मुस्तफा मीट बेचने का काम करता है। इंदिरापुरम थाना प्रभारी निरीक्षक संजीव शर्मा ने बताया कि मुस्तफा मूलरूप से ग्राम दासपारा थाना चोपरा जिला उत्तर दिनारपुर पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने माधुरी की हत्या करने की बात कबूल की। इंदिरापुरम के सीओ अंशु जैन ने बताया कि आरोपित मुस्तफा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

राम मंदिर के साथ Happy Independence Day का पोस्टर: पुलिस ने उतार दिया हैदराबाद में, BJP ने की जाँच की माँग

हैदराबाद में एक मौजूमजही मार्केट है। यहाँ एक पोस्टर लगाया गया। पोस्टर के बीच में राम मंदिर की फोटो है, उसके नीचे Happy Independence Day लिखा है। एक कॉर्नर पर PM मोदी के साथ स्वतंत्रता सेनानियों की फोटो है जबकि दूसरे कॉर्नर पर गृहराज्य मंत्री की फोटो। पोस्टर पर चर्चा से पहले इसे देख लिया जाए एक बार।

वो पोस्टर जिस पर है बवाल (फोटो साभार: इंडिया TV)

हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (GHMC) ने अब इस पोस्टर को हटा दिया है। क्यों? पोस्टर देख कर समझ पाना मुश्किल है। लेकिन प्रशासन ने ऐसा किया। इसलिए किया क्योंकि प्रशासन को इसके बारे में लिखित शिकायत मिली थी। शिकायत किससे मिली थी? जिससे मिली थी, उसका नाम और किस पार्टी से वो जुड़ा है, जानने के बाद आप इसके पीछे की राजनीति को आसानी से समझ जाएँगे।

शिकायत ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक समर्थक अब्दुल काशिफ ने की थी। अब्दुल काशिफ ने पुलिस को बताया था कि इस पोस्टर से दो समुदायों के बीच घृणा पैदा हो सकता है। इसलिए इसे हटाया जाना चाहिए। इस शिकायत के बाद पुलिस और हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की तरफ से कार्यवाही की गई और पोस्टर को हटा दिया गया।

लेकिन मामला बढ़ गया। क्योंकि मौजूमजही मार्केट BJP विधायक राजा सिंह के विधानसभा क्षेत्र में आता है। पोस्टर को हटाने की कार्रवाई निश्चित तौर पर विधायक राजा सिंह के लिए एक चुनौती हुई। इस मामले पर उन्होंने कहा कि PM मोदी ने राम मंदिर बनाने का रास्ता दिखाया, जिसके लिए उनका धन्यवाद किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्टर में लिखे जिस नारे को लेकर विवाद हो रहा है, वह भगत सिंह ने कहा था और उनके नारे को पोस्टर में लिखना किसी भी तरह से अनुचित नहीं है।

विवाद क्यों?

पोस्टर को ध्यान से देखेंगे तो राम मंदिर की फोटो के नीचे लिखा है – “बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है।” विवाद इसी नारे पर है। मजलिस बचाओ तहरीक के अध्यक्ष अमजदुल्लाह ने भी इस पोस्टर को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अमजदुल्लाह के अनुसार पोस्टर लगाने वाले की नीयत ठीक नहीं है और उन्होंने आरोप लगाया कि दो समुदायों के बीच ईर्ष्या पैदा करने के लिए इस पोस्टर को लगाया गया है।

पोस्टर विवाद पर हिंदू पक्ष नीचे के वीडियो में

सुदीक्षा भाटी की मौत को लेकर पुलिस एवं प्रशासन ने किया छेड़खानी की बात से इनकार, भाई ने कहा- ब्रेक लगाने से टकराई बाइक

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की एक युवती की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने को लेकर इसे छेड़छाड़ की घटना बताया जा रहा है। हालाँकि, बुलंदशहर पुलिस और जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की तरफ से एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने इसे छेड़छाड़ की घटना से इनकार करते हुए कहा है कि दुर्घटना के समय बाइक सुदीक्षा का भाई चला रहा था।

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी ने कहा कि सोमवार (अगस्त 10, 2020) सुबह सुदीक्षा अपने भाई के साथ बुलंदशहर अपने मामा के घर जा रही थी। औरंगाबाद से 3 किलोमीटर पहले ट्रैफिक के कारण इनके आगे जा रही एक बाइक ने अचानक ब्रेक मारा, जिससे उनकी बाइक उससे टकरा गई।

वहीं, सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे छेड़छाड़ की घटना से जोड़ते हुए दावा किया जा रहा है कि सड़क पर एक बुलेट बाइक पर एक व्यक्ति ने सुदीक्षा और उनके भाई की बाइक का पीछा करना शुरू किया और उसे परेशान किया।

जिलाधिकारी के बयान से इस केस में सबसे बड़ा खुलासा दुर्घटना के दौरान बाइक चला रहे व्यक्ति को लेकर हुआ है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि हादसे के वक्त जिस बाइक पर सुदीक्षा बैठी थी वह कौन चला रहा था? क्योंकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा था कि दुर्घटना के दौरान बाइक सुदीक्षा के मामा चला रहे थे

इन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अज्ञात बदमाश द्वारा उन्हें ओवरटेक करने के बाद सुदीक्षा के मामा ने अपनी बाइक पर नियंत्रण खो दिया, जिसने बाइक में सवार सुदीक्षा और उसके मामा, दोनों ही सड़क पर गिर गए। सुदीक्षा के मामा दुर्घटना में बच गए, जबकि सुदीक्षा के सिर पर गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

वास्तव में, मृतक सुदीक्षा का छोटा भाई, जो कि सड़क हादसे के समय बाइक चला रहा था, उसका एक वीडियो के जरिए बयान सामने आया है कि वह दीदी (सुदीक्षा) को लेकर मामा के घर जा रहा था। उसी समय एक बाइक उनसे आगे निकलकर तेजी से जा रही थी और जब उसने अचानक ब्रेक मारा तो उनकी बाइक उससे टकरा गई। सुदीक्षा के भाई ने इस वीडियो में कहा है कि इस टक्कर से वो और दीदी (सुदीक्षा) नीचे गिर गए।

गौरतलब है कि अमेरिका के बॉबसन कॉलेज में पढ़ने वाली उत्तर प्रदेश की छात्रा सुदीक्षा भाटी की सोमवार रात सड़क हादसे में मौत हो गई। वह अपने भाई के साथ मामा के घर जा रही थी तभी एक बाइक ने टक्कर मारी और वह सड़क पर गिर गई।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस और प्रशासन सुदीक्षा की मौत में छेड़खानी की बात बेबुनियाद बता रही है जबकि, मृतक युवती के पिता इसे छेड़छाड़ का मामला बता रहे हैं।

5 अगस्त के बाद अब 15 अगस्त को भी टाइम्स स्क्वायर पर दिखेगी भारत की छवि: स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार नजर आएगा तिरंगा

राम मंदिर भूमिपूजन के बाद एक बार दोबारा वह अवसर आया है जब भारत की छवि फिर अमेरिका की प्रसिद्ध इमारत टाइम्स स्क्वायर पर नजर आएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15 अगस्त के मौके पर पहली बार तिरंगा टाइम्स स्क्वायर पर नजर आने वाला है। इसकी पुष्टि स्वयं न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और कनेक्टिकट के फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन (FIA) की ओर से जारी बयान में की गई हैं।

इस बयान में कहा गया है कि इस बेहद खास मौके पर भारत के महावाणिज्य दूत रणधीर जायसवाल विश‍िष्‍ट अतिथि होंगे।

गौरतलब है कि यह पहली बार होगा जब भारत का राष्ट्रीय ध्वज इस इमारत पर लहराता दिखेगा। अमेरिका के मैनहट्टन में भी भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए विशेष कार्यक्रम रखा गया है।

ज्ञात हो कि इस वर्ष FIA के लिए स्वतंत्रता दिवस एक गौरवशाली पल है। दरअसल, FIA इस साल अपनी गोल्डन जुबली मना रहा है। इसकी स्थापना 1970 में हुई थी और आज यह भारतीय समुदाय की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक है।

1981 से लेकर अब तक FIA हर साल इंडियन डे परेड आयोजित करता आया है। इस परेड में भारत का गौरवशाली इतिहास दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाता है।

जानकारी के मुताबिक 15 अगस्त को होने जा रहे इस समारोह को डंकिन डोनट्स द्वारा स्पांसर किया जाएगा। इसके अलावा न्यूयॉर्क सिटी के मेयर बिल डे ब्लासियो और उनके पूरे स्टाफ के साथ-साथ न्यूयॉर्क पुलिस के द्वारा भी इस कार्यक्रम को सपोर्ट किया जा रहा है।

बता दें, इससे पहले 5 अगस्त को भूमिपूजन के अवसर पर राम मंदिर की तस्वीर और भगवान श्री राम की तस्वीर को टाइम्स स्क्वायर पर दिखाने का ऐलान हुआ था।

हालाँकि संप्रदाय विशेष के विरोध के बाद एक कंपनी ने ऐसा करने से मना कर दिया। जिससे आतिश तासिर समेत कई कट्टरपंथियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन भूमिपूजन के बाद जब टाइम्स स्क्वायर पर राम मंदिर की तस्वीर नजर आई तो वहाँ का पूरा माहौल राममय हुआ दिखा।

इसी दिन वाशिंगटन डीसी में भारतीय समुदाय के लोग पारंपरिक कपड़ों में जश्न मनाते दिखे थे। यहाँ तक कि US कैपिटोल हिल से व्हाइट हाउस तक रथयात्रा भी निकाली गई थी। वहीं, कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन, टेक्सस और फ्लोरिडा के मंदिरों में भी विशेष आयोजन किए गए थे।

सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिथानी का पकड़ा गया झूठ! चौकीदार ने कहा- सुशांत की बॉडी के बारे में नहीं बताया गया

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में हर दिन एक नया सबूत या फिर एक नया खुलासा सामने आ रहा है। अब सुशांत सिंह सुशांत के फ्लैटमेट रहे सिद्धार्थ पिथानी का एक झूठ सामने आया है। टाइम्स नाउ के स्टिंग ऑपरेशन में झूठ उजागर हुआ है।

जानकारी के मुताबिक सिद्धार्थ पिथानी ने पहले दावा किया था कि उन्होंने सुशांत की बॉडी देखने के बाद चौकीदार को सूचित किया था, मगर चौकीदार का कहना है कि उसे किसी ने कुछ भी नहीं बताया।

सिद्धार्थ और सुशांत एक साल फ्लैटमेट रहे थे। आत्महत्या से कुछ घंटों पहले तक भी सुशांत उनके ही साथ थे। पिथानी आईटी प्रोफेशनल हैं। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा रिया चक्रवर्ती और सुशांत के 74 वर्षीय पिता केके सिंह द्वारा लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर पिथानी से मुंबई में पूछताछ की जा रही है।

इससे पहले सिद्धार्थ पिथानी ने समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि वह सुशांत को एक डॉक्टर के कहे अनुसार दवाइयाँ देते थे। उन्होंने कहा था, “मैंने दो गोलियाँ दीं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे किस चीज़ की थी।”

हालॉंकि, रिया चकवर्ती से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सिद्धार्थ बीच में ही रिपब्लिक टीवी का इंटरव्यू छोड़कर चले गए। इससे पहले उन्होंने रिया को जानने से इनकार किया था। साथ ही सुशांत के पिता केके सिंह के आरोपों को भी खारिज कर दिया था।

सुशांत सिंह राजपूत केस में पैसों के लेनदेन की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिया चक्रवर्ती, उनके भाई और उनके पिता ले मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिए हैं। ख़बरों के मुताबिक ED ने चक्रवर्ती परिवार के 4 मोबाइल फ़ोन 2 आई पैड और एक लैपटॉप ज़ब्त किया है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक ED ने रिया चक्रवर्ती के 2 मोबाइल फ़ोन के अलावा उनके पिता और भाई शोविक के फ़ोन भी ज़ब्त कर लिए हैं। ED अभी तक 2 बार रिया चक्रवर्ती से इस केस में पूछताछ कर चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने पहली बार 7 अगस्त को रिया के बयान दर्ज किए थे, रिया के जवाबों से संतुष्ट नहीं होने पर ED ने 10 अगस्त को दोबारा रिया चक्रवर्ती, उनके भाई और पिता से पूछताछ की थी।

इसके साथ ही सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह की रिया चक्रवर्ती और सुशांत की एक्स मैनेजर श्रुति मोदी के बीच हुई बातचीत का व्हाट्सऐप चैट सामने आया है। इस चैट में सुशांत के पिता श्रुति मोदी से कहते हैं, “मैं जानता हूँ कि सुशांत के सारे कर्ज और उसे भी तुम देखती हो। वह अभी किस स्थिति में है, इसके लिए बात करना चाह रहे थे। सुशांत से बात हुई थी तो कह कह रहा था कि मैं बहुत परेशान हूँ। अब तुम सोचो कि एक पिता को कितनी चिंता होगी उसके लिए। इसलिए तुमसे बात करना चाह रहा था। अब तुम बात नहीं कर रही हो तो मैं मुंबई जाना चाहता हूँ। फ्लाइट का टिकट भेज दो।”

श्रुति मोदी और रिया चक्रवर्ती से सुशांत के पिता की बातचीत

वहीं, सुशांत के पिता ने व्हाट्सऐप पर रिया से बात करते हुए कहा था, “जब तुम जान गई कि मैं सुशांत का पापा हूँ, तो बात क्यों नहीं की। आखिर बात क्या है? फ़्रेंड बनकर उसका देखभाल और उसका इलाज करवा रही हो तो मेरा भी फर्ज बनता है कि सुशांत के बारे में सारी जानकारी मुझे भी रहे। इसलिए कॉल कर मुझे भी सारी जानकारी दो।”

सुशांत के पिता द्वारा भेजे गए मैसेज के चैट स्क्रीनशॉट में साफ देखा जा सकता है कि दोनों ही मैसेजेस में ब्लू टिक शो हो रहे हैं जिसका साफ अर्थ है कि मैसेज देख लिए गए हैं। फिर भी सुशांत के पिता को जवाब देना मुनासिब नहीं समझा गया। इस चैट के स्क्रीन शॉट में तारीख और समय दोनों साफ साफ देखे जा सकते हैं। रिया को सुशांत के पिता ने 29 नवंबर 2019 को ये मैसेज दिन में 12.34 पर भेजा था। वहीं श्रुति मोदी को सुशांत के पिता ने इसी दिन 12.16 मिनट पर मैसेज भेजा था।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुंबई में स्थित अपने घर में फाँसी लगाकर जान दे दी थी, जिसके बाद से मुंबई पुलिस लगातार इस मामले की जाँच कर रही थी। वहीं, पटना में सुशांत के पिता द्वारा एफआईआर दर्ज करवाने के बाद बिहार पुलिस की एक टीम भी इस मामले की जाँच के लिए मुंबई पहुँची थी। अब यह मामला सीबीआई के पास है। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी अपनी जाँच में जुटी हुई है।

PTI का पकड़ा गया झूठ: PM मोदी के कोरोना आँकड़ों से गायब किया शब्द, बदल गए मायने

सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ PM मोदी की आज मीटिंग हुई। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना से संबंधित आँकड़ों को लेकर क्या कहा, यह आप नीचे के आधिकारिक ट्वीट में देख सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कोरोना से संबंधित एक्टिव केस का प्रतिशत कम हो रहा है। ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि एक्टिव केस कम हो रहा है। एक्टिव केस का प्रतिशत कम होना और एक्टिव केस का कम होना – दो अलग-अलग बातें हैं। लेकिन शायद PTI को यह गणित नहीं मालूम।

PTI को यह गणित नहीं मालूम, यह आप उसके ट्वीट से समझ सकते हैं। PTI जैसी संस्था सोशल मीडिया पर पड़ती गाली को देख कर अपने ट्वीट डिलीट भी कर सकती है। इसलिए उसका ट्वीट नहीं बल्कि स्क्रीनशॉट नीचे देखिए।

PTI के ट्वीट के नीचे PM मोदी के लिए जो संबोधन आए हैं, उससे फेक न्यूज फैलाने वाली इस संस्था का काम हो गया, भले पत्रकारिता चूल्हे में गई!

अब बात करते हैं आँकड़ों की। इसके लिए थोड़ा ग्राफ देखा जाए। समझा जाए कि एक्टिव केस बढ़ रहा है या घट रहा है? या फिर एक्टिव केस का प्रतिशत बढ़ रहा है या घट रहा है?

गणित अच्छा हो तो ऊपर का ग्राफ देख कर समझ सकते हैं कि एक्टिव केस का प्रतिशत हर दिन घट रहा रहा है। लेकिन PTI को इससे क्या मतलब! उसे फेक न्यूज फैलाने से मतलब था, और वो काम उसने बखूबी कर दिया।

PTI, फेक न्यूज और विवाद

देश के सबसे बड़े पत्रकारों के संगठन आईएफडब्लूजे (इण्डियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) ने पीटीआई में होने वाले भाई-भतीजावाद, गलत वित्तीय प्रबंधन और निहित स्वार्थों का खुलासा करते हुए बताया है कि किस प्रकार पीटीआई हमेशा सत्ताधारी पार्टी, मुख्यतः कॉन्ग्रेस के मुखपत्र के रूप में काम करता आया है।

कुछ दिनों पहले PTI ने नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वेडोंग का एक इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने भारत के विरोध में बातें कर के चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था। लेकिन PTI ने इस दौरान भारत का पक्ष रखते हुए सवाल तक नहीं किए थे। और तो और, उसने चीन के राजदूत द्वारा किए गए झूठे दावों पर पलट कर कोई सवाल भी नहीं पूछा था। PTI के इस रुख को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने विरोध जताया था।

अयोध्या मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट में हो सरकारी प्रतिनिधि: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज, सुन्नी बोर्ड की बयानबाजी को बनाया आधार

अयोध्या में राम मंदिर के लिए नींव तो डाल दी गई है लेकिन वहाँ 5 एकड़ मस्जिद के लिए जो जमीन दिए गए हैं, उसे लेकर लगातार विवाद ही हो रहे हैं। ट्रस्ट ने वहाँ मस्जिद निर्माण के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पहुँच गई है, जिसमें माँग की गई है कि मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट में सरकार का कोई न कोई प्रतिनिधि होना चाहिए। अयोध्या के करुणेश शुक्ला ने ये याचिका दायर की है।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ ने हाल ही में जो बयानबाजी की है, उसे देखते हुए सरकार का कोई न कोई प्रतिनिधि अयोध्या में मस्जिद वाले ट्रस्ट में होना ही चाहिए, भले ही वो संप्रदाय विशेष से ही क्यों न हो। उन्होंने कहा है कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और वक़्फ़ एक्ट के अनुसार, सर्वधर्म समभाव अथवा धर्मनिरपेक्ष कार्यों में सरकार अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर सकती है।

करुणेश का कहना है कि उन्होंने संवैधानिक और क़ानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ही ये याचिका दायर की है। बता दें कि मस्जिद के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसने स्पष्ट किया है कि अयोध्या में बनाए जाने वाली मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर नहीं रखा जाएगा। मस्जिद के शिलान्यास के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को भी बुलावा भेजे जाने की बात भी कही गई है।

ट्रस्ट के भवन और अस्पताल के लिए नींव रखे जाने की बात भी हो रही है। कम्युनिटी सेंटर और कम्युनिटी किचन बनाने की बात भी कही गई है। हालाँकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया था कि मस्जिद के शिलान्यास में वो नहीं जाने वाले हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद अब इस मामले में विवाद बढ़ता ही जा रहा है। अब ट्रस्ट में सरकारी नुमाइंदगी होगी या नहीं, ये आगे पता चलेगा।

वक्फ़ बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वह इस ज़मीन पर मस्जिद बनाएँगे। जिस पर साधू संतों ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि संप्रदाय विशेष समाज के लोग चाहें तो मिली हुई ज़मीन पर अस्पताल या विद्यालय बनवा सकते हैं। संत समाज इस पहल में उनकी आर्थिक मदद भी करेगा। इस मुद्दे पर राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने भी अपना मत रखा है। उन्होंने कहा उनका (वक्फ़ बोर्ड) का जो मन करे वह बनवाएँ।

लेकिन, बाबर के नाम की मस्जिद किसी भी सूरत में नहीं बनाई जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो संत समाज इसका पूरी ताकत से विरोध करेगा। तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि बाबर के नाम की मस्जिद पूरे देश में नहीं है। दान की भूमि पर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता है, ऐसा होने पर मस्जिद में की गई दुआ कबूल नहीं होती है।