Home Blog Page 4613

‘मंदिर वहीं बनाएँगे, पर तारीख़ नहीं बताएँगे’: देखिए आज ‘भक्त’ बने कॉन्ग्रेस-केजरी-ठाकरे-लिबरल जमात ने कैसे उड़ाया था मजाक

अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के सम्पन होने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और दिल्ली में उन्हीं के समकक्ष अरविंद केजरीवाल ने बुधवार (04 अगस्त, 2020) को राम मंदिर भूमिपूजन का अनिच्छा से स्वागत किया है।

हालाँकि, ऐसा करने वालों की लिस्ट बेहद लम्बी है, और इसमें कई इस्लामी विचारधारा के समर्थक और कॉन्ग्रेसी नेता भी मौजूद हैं, जिन्होंने कानूनी अड़चनों के कारण विलम्ब होने पर अतीत में राम मंदिर निर्माण का मखौल उड़ाया था, और अब हिन्दुओं क बीच अपनी छवि सुधारने के प्रयास में राम मंदिर निर्माण की बधाई देते देखे जा रहे हैं।

वर्ष 2015 में, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक रैली को संबोधित करते हुए राम मंदिर के निर्माण में देरी पर कटाक्ष किया था। लगभग 30 सेकंड के वीडियो में कोई भी ठाकरे को यह कहते हुए सुन सकता है कि ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, लेकिन तारीख नहीं बताएँगे।’

इसी तरह, 2019 के आम चुनावों के दौरान, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी राम मंदिर के निर्माण का मजाक उड़ाया था।

कॉन्ग्रेसी नेताओं ने भी समय-समय पर इस कटाक्ष के रूप में इस्तेमाल किया है।

दिलचस्प बात यह है कि नई-नई रामभक्त प्रियंका गाँधी वाड्रा को भी श्रीराम मंदिर भूमिपूजन पर सॉफ्ट हिंदुत्व वाले कारनामों के लिए लोगों द्वारा निशाना बनाया गया।

JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद भी इस जुमले को कई बार इस्तेमाल कर चुकी हैं।

स्वघोषित फैक्ट चेकर और इस्लामिक प्रोपेगेंडाबाज मोहम्मद जुबैर भी ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, तारीख नहीं बताएँगे’ को ट्विटर पर कटाक्ष की तरह लिखते देखा गया है।

गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी का भी यह पसंदीदा वाक्यांश रहा है।

स्वाति चतुर्वेदी की सहयोगी और ‘द वायर’ की पत्रकार रोहिणी सिंह भी कई मौकों पर श्रीराम मंदिर निर्माण का मजाक बना चुकी हैं।

दागी पूर्व पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट, जो इन्टरनेट लिब्रल्स के बीच बेहद पसंदीदा थे, ने भी श्रीराम मंदिर का मजाक उड़ाया था।

आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया हेड अंकित लाल भी श्रीराम मंदिर निर्माण का मज़ाक बना चुके हैं।

तमाम इन्टरनेट लिबरल और प्रोपेगेंडाबाजों के दावों के विपरीत कल, अगस्त 05, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या श्रीराम मंदिर का शिलान्यास किया। भाजपा ने 2019 के आम चुनावों से पहले अपने घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा शामिल किया था और मंदिर निर्माण को लेकर संकल्प जाहिर किया था।

ट्रंप के वीडियो पर कोरोना वायरस से जुड़ी अफ़वाह फैलाने का आरोप: ट्विटर-फेसबुक ने बंद किया कैम्पेन एकाउंट

बुधवार के दिन दो बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक और ट्विटर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कैम्पेन एकाउंट प्रतिबंधित कर दिया। दरअसल, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट से एक वीडियो साझा किया था। फेसबुक और ट्विटर के दिशा निर्देशों के मुताबिक़ ट्रंप द्वारा साझा किया गया वीडियो कोरोना महामारी को लेकर लोगों में भ्रम फैला रहा था। जिसके बाद ट्रंप का एकाउंट बंद करने का फैसला लिया गया। 

इन दिशा निर्देशों को मूल रूप से लागू करने की वजह कोरोना महामारी है। जिससे डिजिटल दुनिया में कोरोना से संबंधित कोई अफ़वाह न फैलाई जा सके। साथ ही आम लोग इससे प्रभावित न होने पाएँ। बुधवार के दिन ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए गए एक साक्षात्कार का वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा बच्चे कोरोना वायरस से “वर्चुअली इम्यून” हैं। इसके अलावा ट्रंप ने कहा “उन्हें (बच्चों को) कोई परेशानी नहीं है, उन्हें कोई भी परेशानी नहीं है।” 

अमेरिका में स्कूल खोलने की बात पर ट्रंप ने कहा बच्चों पर कोरोना वायरस का असर नहीं होता है। ट्रंप के मुताबिक़ उन्होंने कई चिकित्सकों को ऐसा दावा करते हुए सुना था कि बच्चों पर इस वायरस का असर नहीं पड़ता है। इसके बाद ट्विटर के प्रवक्ता निक पसीलियो ने इस बारे में रीट्वीट करते हुए ट्विटर का पक्ष रखा। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए कहा—

“TeamTrump की तरफ से किया गया असल ट्वीट ट्विटर के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करता है। यह कोरोना वायरस महामारी के संबंध में अफ़वाह भी फैला रहा है। नतीजतन उन्हें इस ट्वीट को हटाने की सिफ़ारिश करनी पड़ी। ट्विटर ने ट्रंप के निजी ट्विटर एकाउंट पर कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि उस एकाउंट से उन्होंने रीट्वीट किया था।”  

इसके बाद ट्रंप के चुनावी अभियान के प्रवक्ता Tim Murtaugh ने इस कार्रवाई पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा ट्विटर डोनाल्ड ट्रंप के मामलों में एकतरफ़ा कार्रवाई करता है। ट्विटर के सारे दिशा निर्देश और नियम क़ायदे बस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ही लागू होते हैं। इसके अलावा निक ने इस बात का भी ज़िक्र किया कि वह कमला हैरिस के प्रेस सेक्रेटरी थे। हैरिस साल 2017 से अमेरिका जूनियर सेनेटर हैं, वह डेमोक्रेटिक पार्टी से इस पद पर मौजूद हैं। 

इसके पहले भी ट्विटर डोनाल्ड ट्रंप पर बड़ी कार्रवाई कर चुका है। हाल ही के मई महीने में ट्विटर ने ट्रम्प के mail in ballots पर किए गए दो ट्वीट पर कार्रवाई की थी। इस मामले में ट्विटर का आरोप था कि दोनों ट्वीट मतदान के मुद्दे पर जनता में भ्रम फैला रहे थे। इसके अलावा ट्विटर ने यह भी आरोप लगाया कि ट्वीट हिंसा को भी बढ़ावा दे रहे थे। ट्वीट में ट्रंप ने कहा था जैसे ही लूट शुरू होगी वैसे ही गोलीबारी भी शुरू होगी। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ बच्चों और वयस्कों में इस बीमारी की संभावनाएं सबसे कम होती हैं। लेकिन गंभीर मामलों में उनकी जान जाने का ख़तरा बना रहता है। Centres for Disease Control and Prevention (CDC) के मुताबिक़ इस बात के पूरे सबूत मिले हैं।

बच्चों पर कोरोना वायरस का ख़तरा कम रहता है। बच्चे इस वायरस से कम संख्या में प्रभावित होते हैं जबकि युवाओं में प्रभावित मामलों का प्रतिशत काफी ज़्यादा है। भले बड़ी संख्या में युवा इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं लेकिन बच्चे पूरी तरह इम्यून नहीं कहे जा सकते हैं। उन्हें भी बाकियों की तरह ही तय नियमों का पालन करना चाहिए।     

टाइम्स स्क्वायर पर श्रीराम मंदिर की तस्वीर वाला ट्वीट डिलीट करने पर पाक क्रिकेटर दानिश कनेरिया को लोगों ने दी सुरक्षित रहने की सलाह

अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन की खुशियाँ सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्वभर में मनाई गई। इस ख़ुशी में शामिल होने वालों में से एक नाम पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया का भी है।

दानिश कनेरिया ने बुधवार (अगस्त 05, 2020) को अमेरिका के न्यूयॉर्क, टाइम्स स्क्वायर में श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के शो की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा – “जय श्री राम।”

दानिश ने अयोध्या में हुए भूमि पूजन को लेकर इस तस्वीर को रीट्वीट करते हुए कहा है कि भगवान राम हमारे आदर्श हैं और ये दुनियाभर हिंदुओं के लिए एक ऐतिहासिक दिन है।

पाकिस्तान जैसे इस्लामिक देश में रहकर श्रीराम की जय-जयकार करने पर जब ऑपइंडिया सीईओ राहुल रौशन ने दानिश कनेरिया को सुरक्षित रहने की सलाह दी, तो इस पर दानिश ने जवाब दिया, ‘”हम सुरक्षित हैं, हमारे धार्मिक विश्वास से किसी को कोई दिक्कत नहीं है। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें एकता और भाईचारा सिखाता है।”

लेकिन दानिश कनेरिया ने यह ट्वीट कुछ देर बाद डिलीट कर दिया। दानिश के इस ट्वीट को डिलीट करने पर लोगों के बीच कई प्रकार की आशंकाएँ चर्चा का विषय बन गई।

दानिश कनेरिया द्वारा डिलीट किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हालाँकि, माना जा रहा है कि दानिश ने टाइम्स स्क्वायर में श्रीराम के भव्य मंदिर के भूमि पूजन के मौके पर न्यूयॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर में हो रहे ब्रॉडवे पर भगवान राम के हाई-डेफिनिशन डिजिटल डिस्प्ले की तस्वीर वाले ट्वीट को इस वजह से डिलीट कर दिया क्योंकि कई इस्लामिक संगठन टाइम्स स्क्वायर में इसके प्रदर्शन को लेकर विरोध कर रहे थे। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद इसी विरोध और दबाव के चलते दानिश कनेरिया ने वह तस्वीरें डिलीट की होंगी।

हालाँकि, दानिश कनेरिया ने वो ट्वीट तो डिलीट कर दिया, जिसमें उन्होंने टाइम्स स्क्वायर के डिस्प्ले वाली भगवान श्रीराम की तस्वीरें शेयर की थीं, लेकिन इसके बाद एक और ट्वीट में श्रीराम का चित्र ट्वीट करते हुए लिखा – “भगवान राम की सुंदरता उनके चरित्र में है, न कि उनके नाम में, और वो बुराई के खिलाफ अच्छाई के जीत के प्रतीक हैं। आज दुनियाभर में खुशी की लहर है, ये बड़ी संतुष्टि का क्षण है।”

उल्लेखनीय है कि हिन्दू आस्था के चलते आखिरी बार दानिश कनेरिया पिछले साल ही तब चर्चा में आए थे जब पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख़्तर ने खुलासा किया था कि कुछ पाकिस्तानी क्रिकेटर दानिश कनेरिया के साथ खाना खाने से भी परहेज करते थे क्योंकि दानिश कनेरिया एक हिंदू थे।

शोएब अख्तर के इस दावे को दानिश कनेरिया ने सही बताते हुए कहा था कि शोएब अख्तर बिल्कुल सही कह रहे हैं। कनेरिया ने कहा, “हिंदू होने के कारण साथी क्रिकेटर मेरे खाना खाने को लेकर समस्या पैदा करते थे। अब मैं उन खिलाड़ियों के नामों का खुलासा करूँगा जो हिंदू होने के कारण मुझसे बात करना पसंद नहीं करते थे। उस समय मेरे पास यह कहने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन अब मैं करूँगा।”

अहमदाबाद के कोरोना अस्पताल में लगी आग: 8 की मौत, राज्य सरकार ने दिए जाँच के आदेश, PM मोदी ने किया मुआवज़े का ऐलान

गुजरात के अहमदाबाद स्थित एक अस्पताल में आग लग गई जिसमें कोरोना वायरस से प्रभावित मरीज़ों का इलाज चल रहा था। इस दुर्घटना में अब तक कुल 8 लोगों ने अपनी जान गँवा दी है जिसमें 3 औरतें और 5 आदमी शामिल हैं। इस दौरान 35 अन्य मरीज़ जिनका इलाज जारी था उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

अहमदाबाद के नवरंग इलाके में स्थित श्रेय अस्पताल में बीती रात भीषण आग लगी। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में लगी आग इतनी भीषण थी कि दो शवों की पहचान तक मुश्किल से हुई। एक और मरीज़ की हालत नाज़ुक बनी हुई है। राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉ. जयंती रवि ने इस मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। 

अहमदाबाद शहर के मंडलायुक्त एलबी जाला ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया रात के लगभग 3:30 बजे अस्पताल के आईसीयू वार्ड में आग लगी थी। हालाँकि, फिलहाल इस आग पर फिलहाल काबू किया जा चुका है। इस आग की वजह से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है।     

जानकारी के मुताबिक़ इस अस्पताल में कोरोना वायरस से प्रभावित लगभग 50 लोगों का इलाज चल रहा था। अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने आग लगने के काफी समय बाद दमकल विभाग को सूचित करने में देरी की। क्योंकि अस्पताल में कोरोना प्रभावित मरीज़ मौजूद थे इसलिए उन्हें निकालने में भी बहुत समय खर्च हुआ। लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन थोड़ी सक्रियता दिखाता तो दुर्घटना इतने बड़े पैमाने पर नहीं होती। 

दुर्घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुःख जताया है। इसके अलावा उन्होंने ट्वीट में यह भी बताया कि वह दुर्घटना के बारे में मुख्यमंत्री विजय रुपानी और मेयर से बात कर चुके हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 2 लाख रूपए के मुआवज़े का ऐलान किया है। घायल होने वाले लोगों के लिए 50 हज़ार रूपए का ऐलान किया है। यह राशि प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड (PMNRF) से दी जाएगी।

वहीं दूसरी तरफ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने श्रेय अस्पताल में लगी आग की जाँच के आदेश दे दिए हैं। राज्य के गृह विभाग की अतिरिक्त सचिव संगीता सिंह इस जाँच की अगुवाई करेंगी। साथ ही मुख्यमंत्री ने 3 दिन के भीतर इस दुर्घटना की जाँच रिपोर्ट माँगी है। दुर्घटना में अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में 5 आदमी और 3 महिलाएँ शामिल हैं। साथ ही घायल होने वाले लगभग 35 अन्य लोगों को नज़दीक के एसवीपी अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है।

जम्मू-कश्मीर: कुलगाम में BJP नेता और सरपंच सज्जाद खांडे की आतंकियों ने की गोली मारकर हत्या

कश्मीर के कुलगाम जिला स्थित काजीगुंड ब्लॉक के वेसू गाँव में आतंकवादियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद खांडे की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।

सज्जाद अहमद खांडे एक सुरक्षित प्रवासी शिविर में कई सरपंचों के साथ रह रहे थे। वह बृहस्पतिवार (अगस्त 05, 2020) सुबह अपने घर जाने वाले थे और उन्हें आतंकवादियों ने तब गोली का निशाना बनाया जब जब वह अपने घर से मात्र 20 मीटर दूर थे।

भाजपा पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने सभी सरपंचों के लिए सुरक्षा की माँग करते हुए कहा, “यह हताशा के कारण उठाया गया कदम है क्योंकि भाजपा पैर जमा रही है। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि लड़ाई वैचारिक होनी चाहिए। आप उन लोगों को मारते हैं जो गरीबों और वंचितों के लिए लड़ते हैं। मुझे लगता है कि उन सभी सरपंचों को जिन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है, अब उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि पिछले दो दिनों में भाजपा नेता पर किया गया यह दूसरा हमला है। इससे पहले आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में उसी जिले के पंच आरिफ अहमद की मौत हो गई थी।

घाटी में पिछले दो महीनों में, दो अन्य प्रमुख राजनीतिक नेताओं को आतंकवादियों ने मार डाला। वसीम अहमद बारी को उनके भाई और पिता के साथ 9 जुलाई को मार दिया गया था, जबकि, कश्मीरी पंडित समुदाय के सरपंच अजय पंडिता भारती की जून के माह में हत्या कर दी गई थी।

मनोज सिन्हा होंगे जम्मू-कश्मीर के नए LG: भौचक्के उमर अब्दुल्ला ने कहा- सरकार ऐसे ही नाम चुनती है जिसकी उम्मीद न हो

भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व रेलमंत्री (राज्य) मनोज सिन्हा अब जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल पद संभालने वाले हैं। जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल गिरीश चन्द्र मुर्मू ने इस्तीफ़ा दे दिया था जिसके बाद यह फैसला लिया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जीसी मुर्मू का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है। 

भाजपा नेता मनोज सिन्हा मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। संगठन के विश्वसनीय नेताओं में से एक गिने जाने वाले मनोज सिन्हा उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से सांसद रह चुके हैं। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह रेलवे और दूरसंचार के राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनका नाम मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में भी आगे था। लेकिन 2019 के आम चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  

मनोज सिन्हा भारतीय जनता पार्टी से दो बार सांसद रह चुके हैं। इस पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी बयान दिया था। उन्होंने कहा, “बीती रात जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल पद के लिए एक या दो नामों की चर्चा सबसे ज़्यादा थी। उन दोनों नामों से मनोज सिन्हा का दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं था। इस सरकार पर एक बात के लिए भरोसा ज़रूर किया जा सकता है। भले अंतिम योजना कैसी भी बनी हो लेकिन यह सरकार कुछ न कुछ ऐसा लेकर आती है जो सभी के लिए अप्रत्याशित होता है।”  

गुज़रे वर्ष 31 अक्टूबर के दिन जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटा गया था। इसमें जम्मू कश्मीर को एक हिस्से में रखा गया और लद्दाख को दूसरे हिस्से में। जीसी मुर्मू केंद्र शासित राज्य के पहले उप राज्यपाल बने थे। उनके पहले सत्यपाल मलिक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे। जीसी मुर्मू गुजरात कैडर के 1985 बैच के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। 

नरेन्द्र मोदी के गुजरात में मुख्यमंत्री पद के कार्यकाल के दौरान जीसी मुर्मू प्रधान सचिव का पद भी संभाल चुके हैं। उन्होंने 5 अगस्त 2020 के दिन इस्तीफ़ा दिया, ठीक इसी दिन बीते साल जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिया गया था। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-ए को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया था।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुर्मू का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया था। जीसी मुर्मू आज यानी गुरूवार के दिन जम्मू कश्मीर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।  

UNSC में PAK की फिर फजीहत, कहा- द्विपक्षीय मुद्दा है कश्मीर, हमारा समय बर्बाद ना करे पाकिस्तान

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने बुधवार (अगस्त 05, 2020) को पाकिस्तान के कश्मीर प्रलाप के एक और प्रयास को खारिज कर दिया। और, यह स्पष्ट कर दिया कि यह विषय भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से ही हल किया जाना चाहिए है। UNSC के 5 स्थाई सदस्यों में से चार – अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस – भारत का पक्ष मजबूती से रखते आ रहे हैं।

UN में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने एक ट्वीट में कहा- “पाकिस्‍तान का एक और प्रयास विफल रहा। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की आज की बैठक बंद कमरे में हुई थी, अनौपचारिक थी, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया और इसका कोई परिणाम नहीं निकला। लगभग सभी देशों ने माना कि जम्‍मू-कश्‍मीर एक द्विपक्षीय मसला है और सुरक्षा परिषद के समय और ध्‍यान का हकदार नहीं है।”

टीएस त्रिमूर्ति ने कहा कि पाकिस्तान ने जो दावा किया है, उसके विपरीत उसने जम्मू कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा बनाने और मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने का प्रयास किया। 

पाकिस्तान के कश्मीर राग को इस बार करारा तमाचा लगा है क्योंकि पाकिस्‍तान के लिए शर्मिंदगी की बात यह रही कि अमेरिका ने बेनतीजा बैठक पर जोर दिया, जिस पर चीन ने भी अपनी सहमति जता दी।

राजदूत त्रिमूर्ति ने कहा कि नवंबर, 1965 से भारत-पाकिस्तान मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है। UNSC ने अगस्त, 2019 में पहली बार और बाद में जनवरी 2020 में कश्मीर पर दो बार अनौपचारिक बैठकें की हैं।

अगस्त 2019 की बैठक भारत में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने के बाद दशकों में पहली बार हुई थी। बैठक में चीन ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने के कदम की कड़ी आलोचना की थी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट रूप से बताया कि संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करना उसका आंतरिक मामला था।

‘जो सबके नाम बदलते थे, मोदी जी ने उनका ही बदल दिया’: PM मोदी के कारण ट्विटर पर मीम्स की बौछार

मौका कोई भी हो वामपंथियों और मोदी विरोधियों को बस एक मौका चाहिए बीजेपी नेताओं को नीचा दिखाने का। राममंदिर भूमि पूजन से लिबरल मीडिया गैंग इतना निराश हो चुका है कि बीजेपी को निशाना बनाने के लिए अब ये लोग तुच्छ हरकतों पर भी उतर आएँ है। वैसे जो कुछ करके ये मजे ले रहे हैं प्रधानमत्री ने कई बार ऐसे क्रिएटिविटी का भी स्वागत किया है।

आज, 29 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (5 अगस्त) को राम मंदिर पूजन के भव्य आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुँचे और पूरी विधि विधान से ‘श्रीराम जन्मभूमि मंदिर’ का शिलान्यास किया। राम मंदिर शिलान्यास करने के बाद पीएम मोदी ने लोगों को इस शुभ अवसर पर संबोधित किया। भाषण के दौरान गलती से मोदी ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को “आदित्य योगीनाथ” कहकर संबोधित कर दिया।

फिर क्या था, खाली बैठे बीजेपी विरोधियों और लिबरल गैंग ने इस बात को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने पूरे भाषण में से उस क्लिप को वायरल करना शुरू कर दिया जिसमें पीएम मोदी राम मंदिर को राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बताते हुए कहते है, “मंच पर विराजमान, उत्तर प्रदेश के ऊर्जावान लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान आदित्य योगीनाथ जी।”

वामपंथियों ने तमाम तरीके के मीम्स और फोटोशॉप तस्वीरों को बना कर योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी का सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया। लोगों ने यह कहते हुए सोशल मीडिया में बाढ़ ला दिया कि, जो सबके नाम बदलते थे, मोदी जी ने उनका ही बदल दिया।

ऐसे ही कुछ ट्वीट्स हम यहाँ शेयर कर रहे है। जिनसे आप पता लगा सकते है लोग मंदिर निर्माण के गुस्से को ऐसी फालतू चीजें वायरल करके शांत कर रहे है।

अर्जुन नाम के यूजर योगी आदित्यनाथ की पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखते है, “जब आप अपने घर वालों को पूरे दिल से चाहते है और वो इसके बदले पूरे देश के सामने आपको गलत (आदित्य योगीनाथ) नाम से बुलाते है।”

वहीं सागरजीत धर नाम के यूजर मोदी और योगी की फ़ोटो साथ में लगा कर तंज कसते हुए ट्वीट करते है।


वहीं इन लोगों का ही मज़ाक उड़ाते हुए पृथ्वी रापर्टी नाम के यूजर अनिल कपूर की फ़ोटो के साथ लिखते है कि बोलने दो बहुत तकलीफ (राम मंदिर निर्माण) हुआ है बेचारों को

ऐसे कई ट्वीट्स और मीम्स सोशल मीडिया पर आपको मिल जाएँगे। जिनसें आप इनकी मानसिकता को समझ सकते है। साथ ही साथ आप भी इस अवसर का आनंद लीजिए कोई खास आहत होने वाली बात नहीं है।

दिशा सालियान के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर और प्राइवेट पार्ट में चोट के निशान: बीजेपी नेता ने लगाया ‘बलात्कार’ और ‘हत्या’ का आरोप

सुशांत सिंह सुसाइड केस में पुलिस हर एंगल से जाँच कर रही है। वहीं अब सुशांत सिंह राजपूत की मौत का कनेक्शन उनकी पूर्व सेक्रेटरी दिशा की मौत से भी की जा रही है। इंडिया टुडे की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार दिशा सालियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और अन्य जगहों पर चोट लगने की बात सामने आई है।

बता दें दिशा मुंबई के एक अपार्टमेंट के 14 वीं मंजिल पर रहती थी। दिशा ने उसी फ्लोर से कूद कर आत्महत्या की थी। इंडिया टुडे ने दिशा सलियान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को एक्सेस किया है, जिसमें उनके शरीर पर चोटों का विवरण है।

दिशा की मौत और उसके बाद कि गई जाँच कई सवाल पैदा करती है। जैसे कि सुशांत की मौत से पाँच दिन पहले यानी 9 जून की रात 2 बजे दिशा ने आत्महत्या की थी। लेकिन उसका पोस्टमार्टम 2 दिन बाद किया गया था। आखिर क्यों बोरीवली पोर्टमार्टम सेंटर पर ऑटोप्सी को दो दिन लेट किया गया।

14वीं मंजिल से गिरने की वजह से ऑटोप्सी के रिपोर्ट में सिर में चोट लगने और कई तरह की अप्राकृतिक चोंटो की वजह से दिशा की मौत हुई थी।

वहीं दिशा की मौत पर भाजपा सांसद नारायण राणे ने भी बेहद संगीन खुलासे किए थे। उन्होंने कहा था कि दिशा का ‘बलात्कार’ और ‘हत्या’ किया गया था। सालियान की ऑटोप्सी रिपोर्ट में उनके प्राईवेट पार्ट्स में चोट के निशान सामने आए थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के में निजी भागों पर चोटों के बारे में कोई विशेष उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन ऊँचाई से गिरने के कारण ‘कई चोटों’ का उल्लेख हुआ है। बता दें अप्राकृतिक मौत के मामलों में फीमेल बॉडी के वजाइनल स्वैब टेस्टिंग के लिए रखे जाते हैं और इस मामले में भी ऐसा किया गया था।

गौरतलब है कि, केंद्र ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की सीबीआई जाँच शुरू करने के बिहार सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अब बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच सीबीआई करेगी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश पर राजीव नगर थाना कांड संख्या 241/ 20 की सीबीआई जाँच की सिफारिश मंगलवार (अगस्त, 04, 2020) को केन्द्र सरकार को भेज दी गई थी। इससे पहले राज्य पुलिस मुख्यालय ने इसका प्रस्ताव तैयार किया। जल्द ही सीबीआई इस मामले में नई एफआईआर दर्ज कर पड़ताल शुरू कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में हर दिन नए खुलासे सामने आए हैं। इसमें उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के साथ उनके संबंधों से लेकर उनके मानसिक स्वास्थ्य, बैंक अकाउंट से लेकर उनकी मैनेजर रही दिशा सालियान की मौत से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं।

सुशांत सिंह की कथित आत्महत्या को लेकर उनके पिता कृष्ण किशोर सिंह ने पटना के राजीवनगर थाने में FIR दर्ज कराई है। 25 जुलाई को यह प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें आईपीसी की धारा 341, 342, 380, 406, 306, 420, 506 और 120 (बी) की धाराओं के अंतर्गत मामले दर्ज किए गए हैं।

केरल नन रेप केस: बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत को SC ने भी किया रद्द, पादरी को मुकदमे का सामना करने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (5 अगस्त, 2020) को नन से बलात्कार मामले में आरोपित केरल के बिशप फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) की आरोप मुक्त करने की याचिका बुधवार को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है।

मुलक्कल ने इस याचिका में केरल उच्च न्यायालय के सात जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें नन द्वारा दायर बलात्कार याचिका के मामले में आरोप मुक्त करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने जालंधर डायोसिस के अपदस्थ बिशप को बलात्कार के मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए कहा था। बिशप के खिलाफ केरल में डायोसिस की नन ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। नन की इसी शिकायत के अधार पर बिशप के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था।

इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी करने की याचिका को खारिज कर दिया था। जिसमें उसने नन द्वारा दायर यौन शोषण के मामले में बरी करने की अपील की थी।

न्यायमूर्ति वी शिरसी ने जालंधर क्षेत्र के बिशप को निर्देश दिया कि बलात्कार मामले में वह ट्रायल का सामना करे। केरल में उसी क्षेत्र की एक नन ने उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। अदालत ने बिशप की याचिका खारिज करते हुए अभियोजन के इस तर्क को स्वीकार किया कि बलात्कार मामले में मुलक्कल के खिलाफ प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य मौजूद हैं।

इस वर्ष मार्च में निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने की याचिका खारिज करने के बाद रोमन कैथोलिक गिरजाघर के वरिष्ठ पादरी ने समीक्षा याचिका दायर की। बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने बलात्कार का मामला दर्ज किया था।

गौरतलब है कि बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया था। हाई कोर्ट में दायर याचिका में पादरी ने कहा कि जब उन्होंने पीड़िता नन से वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल किया तो उसने उन्हें फँसा दिया।

उल्लेखनीय है कि इस मामले की प्रमुख गवाहों में से एक सिस्टर लिसी ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि उनके वरिष्ठ लोग लगातार उन पर फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ दिए गए बयान को बदलने के लिए दबाव डाल रहे हैं। वहीं आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया गया था।