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फायरब्रांड तपन घोष: दूसरे मजहब की लड़कियों की उनके हिंदू प्रेमियों से शादी करवाई, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की

पश्चिम बंगाल के हिंदुत्व आइकन तपन घोष की रविवार (जुलाई 12, 2020) शाम मौत हो गई। तपन घोष कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और वो कोलकाता के एक अस्पताल भर्ती थे, जहाँ उनका निधन हो गया

दक्षिणपंथी संगठन हिंदू समहती के संस्थापक तपन घोष ने कट्टरपंथी इस्लाम के प्रति कट्टर विरोध और हिंदू समुदाय के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण व्यापक लोकप्रियता हासिल की थी।

तपन घोष पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे। 2007 में मतभेद होने के कारण उन्होंने आरएसएस को छोड़ दिया। एक साल बाद 2008 में हिंदू समहती संगठन बनाया और 2018 में संगठन के भीतर मतभेदों की वजह से इसको भी छोड़ दिया था।

अपने जीवन के दौरान, तपन घोष को अपने मन की बात कहने के लिए जाना जाता था। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हिंदुओं की स्थिति को मजबूत करने के लिए कई सारे रणनीति अपनाए। कुछ अन्य हिंदुत्व संगठनों के विपरीत, वह वैलेंटाइन डे के विचार के खिलाफ नहीं थे। वो हिंदू लड़कों को हिंदू और दूसरे मजहब, दोनों लड़कियों के साथ प्यार के लिए प्रोत्साहित किया करते थे।

उन्होंने एक बार कहा था, “अगर हिंदू लड़के हिंदू लड़कियों के साथ घुल-मिल नहीं पाए तो वो क्या करेंगी? मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप हिंदू और दूसरे मजहब, दोनों लड़कियों के साथ प्यार में पड़ें। यदि आप पारिवारिक दबाव में ऐसा नहीं करते हैं, तो लड़कियाँ दूसरे मजहब वालों के साथ मिल जाएँगी।” तपन घोष ने राज्य में भी तृणमूल सरकार के बारे में अपने मन की बात कहने में संकोच नहीं किया।

उन्होंने एक बार कहा था, “सिद्दीकुल्लाह चौधरी द्वारा आयोजित एक सभा के दौरान रेड रोड पर भीड़ द्वारा पुलिस अधिकारियों पर किए गए हमले का क्या हुआ? चौधरी अभी मंत्री हैं। लेकिन मामलों की स्थिति क्या है? क्या वे अभी भी सक्रिय हैं?” तपन घोष अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों द्वारा किए जा रहे हिंसा को रोकने के लिए राज्य की अक्षमता के बारे में बेहद चिंतित थे।

घर वापसी का मुद्दा उनके दिल के बेहद करीब था। फरवरी 2018 में हिंदू समहती की स्थापना दिवस की रैली में, एक दूसरे मजहब के परिवार के 14 सदस्यों को वापस हिंदू धर्म में परिवर्तित किया गया। तपन घोष ने गर्व के साथ घोषणा की थी कि उनका संगठन उन लोगों का स्वागत करेगा, जिन्हें जबरदस्ती धर्मांतरित किया गया था, और अब वो अपनी आस्था के साथ वापस अपने धर्म में लौटना चाहते हैं।

इसके अलावा तपन घोष ने हिंदू पुरुषों और दूसरे मजहब की महिलाओं के बीच शादी की भी वकालत की थी। वे काफी गर्व के साथ कहते थे कि हिंदू समहती की स्थापना के बाद से, उन्होंने दूसरे मजहब की महिलाओं और हिंदू युवकों के बीच तीन सौ शादियाँ करवाईं। हिंदुत्व आइकन का कहना था कि ये महिलाएँ उन्हें अपने पिता के रूप में मानती थीं, क्योंकि उनमें से ज्यादातर को उनके परिवार ने ठुकरा दिया था।

घोष ने एक बार कहा था, “बंगाल में जमाई षष्ठी मनाते हैं, हम मे (बेटी) षष्ठी मनाते हैं। यह प्यार को गले लगाने के बारे में है। इनमें से अधिकांश अपने माता-पिता के संपर्क में नहीं हैं और इसलिए वे लोग मेरे साथ अपने पिता की तरह व्यवहार करते हैं। वे मेरे घर को अपने मायके की तरह मानती हैं। जब भी उनके और उनके पति के बीच किसी वैवाहिक मुद्दे पर झगड़े होते हैं तो वे मुझे बुलाते हैं। मेरे पास सभी पुरुषों के लिए सख्त दिशा-निर्देश हैं कि वे अपनी पत्नियों को खुश और सुरक्षित रखें। मैंने अपनी सभी बेटियों को भी कहा है कि अगर उनके पति कभी मौखिक या शारीरिक शोषण करते हैं तो मुझे सूचित करें।”

हिंदू समहती के संस्थापक काफी खुले तौर पर कहते थे कि दूसरे मजहब की महिलाएँ हिंदू में वापस आना चाहती हैं, लेकिन हिंदू पुरुष अक्सर ऐसे रिश्तों के लिए साहस नहीं दिखाते हैं। इसलिए, उनके संगठन से ऐसे जोड़ों को उचित घरों में बसने में मदद मिली है।

उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “हम देख रहे हैं कि दूसरे मजहब की लड़कियाँ अपने समाज में हो रहे उनकी दुर्दशा के प्रति जागरुक हो रही है और हिंदू लड़कों से शादी करना पसंद कर रही हैं। लेकिन कई हिंदू लड़कों में ऐसे संबंधों के लिए साहस की कमी है। हमने कई ऐसी लड़की-हिंदू लड़के जोड़ों को घर बसाने में मदद की है।”

कई मामलों में, हिंदू समहती ने ऐसे हिंदू पुरुषों को नौकरी खोजने में मदद की है, ताकि नवविवाहित जोड़े एक आरामदायक जीवन जी सकें। यदि लड़के के परिवार का विरोध होता, तो हिंदुत्व संगठन ने उनसे इस मामले को सुलझाने के लिए भी बात की।

चंदन सरदार ने दूसरे समुदाय की लड़की इसपा नैया से शादी की थी, बाद में इसपा का नाम छंदा सरदार हो गया। चंदन ने तपन घोष के बारे में बताया “वे मेरे परिवार से मिले और उन्हें बताया कि समुदाय एक लड़की से शादी करना हिंदू धर्म की सेवा है।”

इसी तरह गोपाल कोनरा से शादी करने और हिंदू धर्म अपनाने के बाद निरूपा सुल्ताना ने अपना नाम रूपा कोनरा कर लिया। उन्होंने बताया, “मुझे गोपाल कोनरा से प्यार हो गया लेकिन मैं अपने धर्म को छोड़ने का साहस नहीं जुटा पाई। फिर मैं हिंदू समहती के तपन घोष के पास गई। उन्होंने मुझे बताया कि मेरा मूल धर्म हिंदू था और मुझे वापस आना चाहिए, अपना जीवन अपने प्यार के साथ बिताना चाहिए। मैं घर से भाग गई और एक आश्रय में रहने लगी। मैं अब खुश हूँ। मैं रोज कॉलेज जाती हूँ। मेरे परिवार ने मुझे अस्वीकार कर दिया है। मैंने वह भी स्वीकार कर लिया है।”

रुकैया खातून, जो बाद में रुमपा चटर्जी बन गई ने कहा, “हमारे साथ तीन जोड़े थे। हम वहाँ लगभग छह महीने रहे। हिंदू समहती के तपन घोष ने मुझे बताया कि वह सब कुछ ठीक कर देंगे। तब से मैं उन्हें बाबा कहती हूँ। 9 सितंबर, 2014 को हमारी शादी हुई।” उनके पिता सिराजुद्दीन मोल्ला ‘सुरक्षा’ के लिए SUCI छोड़ने के बाद भाजपा में शामिल हो गए।

तपन घोष के बारे में ऐसी कई कहानियाँ हैं, जहाँ उन्होंने प्रेम करने वाले जोड़ों को मिलवाया। साथ ही, उन्होंने राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव के खिलाफ बात की और इसकी कठोर आलोचना की। उन्होंने मौजूदा पश्चिम बंगाल सरकार की अल्पसंख्यक नीतियों की भी आलोचना की और हमेशा बंगाली हिंदू समुदाय के कल्याण के लिए बात की।

तपन घोष ने भले ही इस दुनिया को त्याग दिया हो, लेकिन बंगाल में उन्होंने हिंदुत्व की जो आग जलाई, वह आने वाले सालों तक चमकती रहेगी। ऐसे समय में जब राज्य में कट्टरपंथी इस्लाम और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का अंधेरा व्याप्त हो गया था, उन्होंने हिंदू धर्म के पक्षधर बनकर कदम आगे बढ़ाया था। उनकी विरासत आने वाली बंगाली हिंदुओं की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

सरकारी घर में रहता था लड़कियों को शराब पिला नचवाने और रेप करने वाला प्यारे मियाँ: CM शिवराज ने रद्द की मान्यता

अख़बार मालिक प्यारे मियाँ से शिवराज सरकार ने सरकारी घर छीन लिया है। वह मध्य प्रदेश के भोपाल में लड़कियों को पार्टी में बुला शराब पिलाता था और फिर उनका रेप करता था। उसके रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसे सरकारी आवास तक मिला हुआ था।

अब मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने उसके घर का अलॉटमेंट वापस ले लिया है क्योंकि सीएम शिवराज इस मामले पर सख्त हैं। ‘अफ़कार’ अख़बार चलाने के लिए उसे मिले पत्रकार की अधिमान्यता भी रद्द कर दी गई है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क़ानून-व्यवस्था बिगड़ने पर भी कई अधिकारियों को फटकार लगाते हुए नाराज़गी जताई है। उन्होंने निर्देश दिया है कि अपराधों में शामिल सफेदपोशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने राज्य में अभियान चला कर अपराधियों, माफिया, अतिक्रमणकारियों, अवैध शराब का कारोबार करने वालों और चिटफंड घोटालेबाजों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने को कहा है।

‘न्यूज़ 18’ की ख़बर के अनुसार, अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री के संज्ञान में भोपाल के पत्रकार प्यारे मियाँ का भी मामला आया और उन्होंने कहा, “बेटियों के साथ अपराध करने वालों को मैं छोड़ूँगा नहीं।” उन्होंने ऐसे लोगों को मानवता का दुश्मन करार दिया। उन्होंने कहा कि ह्वाइट कॉलर अपराधियों को चिह्नित किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने भोपाल के प्यारे मियाँ को भी जघन्य अपराधी करार दिया।

शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रालय में प्रदेश की सुरक्षा-व्यवस्था की समीक्षा की और अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। बैठक में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी और अपर मुख्य सचिव ग्रह एस एन मिश्रा उपस्थित थे। प्यारे मियाँ को पत्रकार के रूप में दी गई अधिमान्यता के साथ-साथ उसे अलॉट किया गया घर भी वापस लिया जाए। उन्होंने कहा:

“बेटियों के विरुद्ध अपराध करने वाले पूरी मानवता के दुश्मन है, मैं उन्हें छोड़ूँगा नहीं। अपराधों में संलग्न सफेदपोशों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। भोपाल में नाबालिग बेटियों के साथ अपराध करने वाला जघन्य अपराधी है, जहाँ कहीं भी हो, उसे ढूँढ कर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। प्रदेश में अभियान चलाकर आदतन अपराधियों, माफियाओं, अतिक्रमणकारियों, अवैध शराब का कारोबार करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करें। भोपाल में बेटियों के विरुद्ध अपराध के आरोपी प्यारे मियाँ को आवंटित शासकीय आवास एवं उसको पत्रकार के रूप में दी गई अधिमान्यता को तुरंत निरस्त करने की कार्रवाई की जाए।”

दरअसल, मामला ये है कि देर रात गश्त करती पुलिस पार्टी को 5 लड़कियाँ सड़क पर दिखीं। कारण पूछा गया तो जवाब देने के हालत में एक भी लड़की नहीं थी। सब शराब के नशे में थीं। नाबालिग लड़कियों का शराब के नशे में होना पुलिस को खटका। पुलिस ने सभी 5 लड़कियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। फिर इनकी काउंसलिंग की गई। जब पूछताछ हुई तो इन्होंने यौन शोषण का खुलासा किया।

घटना वाली रात इन पाँच लड़कियों में से सिर्फ एक लड़की के साथ प्यारे मियाँ ने रेप किया। लेकिन बाकी चार लड़कियों के साथ कभी कुछ नहीं हुआ है, ऐसा नहीं है। ऊपर पुलिस के द्वारा दिए प्रेस नोट को पढ़ेंगे तो पाएँगे कि प्यारे मियाँ अपने असिस्टेंट स्वीटी के साथ मिलकर काफी दिनों से इन लड़कियों का यौन शोषण करता रहा है। पार्टियों में पैसे के बदले डांस करने और उसके बाद यौन शोषण (संभोग, रेप) के लिए प्यारे मियाँ ने इन नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फँसाया। 

प्यारे मियाँ ने अपनी सहायक स्वीटी विश्वकर्मा की मदद से इन लड़कियों को अपने यहाँ नाचने के लिए बुलाया था। विष्णु हाइट्स स्थित फ्लैट में पार्टी के दौरान प्यारे मियाँ द्वारा एक नाबालिग का यौन शोषण करने की बात भी सामने आई है। इन पाँचों लड़कियों ने भी प्यारे मियाँ पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर उस फ्लैट में ले जाया जाता था। उन्हें इसके लिए धनराशि भी दी जाती थी।

कट्टर मुस्लिम किसी के बाप से नहीं डरता: अजान की आवाज कम करने की बात पर फरदीन ने रेप की धमकी दी

सोशल मीडिया पर आए दिन कट्टरपंथियों का असली चेहरा उजागर होता रहता है। दीन और ईमान के नाम पर ये लोग खुलेआम अपराध की धमकियाँ देते हुए मिलते हैं। इन्हीं की भीड़ का एक युवक जो खुद को कट्टर मुस्लिम बताता है, वो रीमा टंडन (परिवर्तित नाम) नाम की हिंदू लड़की को रेप की धमकी देता पाया गया है। अब उसके मैसेज के स्क्रीनशॉट ट्विटर पर वायरल हो रहे हैं।

दरअसल, कुछ दिनों पहले रीमा टंडन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक फोटो शेयर की थी। इस तस्वीर में उन्होंने एक प्लेकार्ड लिया हुआ था। जिसमें लिखा था, “अजान करो पर आवाज कम करो। लाउडस्पीकर से क्या प्रूव करना चाहते हो?”

इसी फोटो पर फरदीन नाम के इंस्टा यूजर ने रीमा टंडन को धमकी दी। फरदीन ने पहले रीमा टंडन के साथ आपत्तिजनक भाषा में बात की और फिर लिखा, “फरदीन मोडल नाम है मेरा। उखाड़ लेना जो कुछ भी उखाड़ना हो तुझे। समझी। धंधा करने वाली।” आगे फरदीन अपने मजहब का हवाला देकर लिखता है,”कट्टर मुस्लिम किसी के बाप से नहीं डरता।”

बता दें कि ये तस्वीर रीमा ने ट्विटर पर भी 28 जून को शेयर की थी। इस ट्वीट पर भी सुहेल खान नाम के लड़के ने रीमा के साथ बहुत अभद्रता से बात की थी। रीमा ने इस तस्वीर को करिश्मा भोसले के समर्थन में अपलोड किया था।

रीमा ने इसके साथ लिखा था, “मैं करिश्मा को उसके अधिकारों के लिए खड़े होने पर सराहती हूँ। अजान को लाउडस्पीकर पर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। या साउंड की फ्रीक्वेंसी में कोई न कोई नियमन किए जाने चाहिए। ये बहुत परेशान करने वाला होता है। इससे हमारी धार्मिक मानसिक दोनों शांति पर प्रभाव पड़ता है।”

इसी पोस्ट के बाद उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों से धमकियाँ मिलनी शुरू हुई। अब लोग इन्हीं स्क्रीनशॉट्स को शेयर करते हुए रीमा के लिए न्याय की माँग कर रहे हैं। कई पत्रकार और कई सोशल मीडिया यूजर्स इस मामले के मद्देनजर इंदौर पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग को फरदीन की रिपोर्ट कर रहे हैं। इन सभी का कहना है कि फरदीन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

गौरतलब है कि अजान के मामले पर बिग बॉस के एक्स कंटेसटेंट प्रीतम सिंह ने भी आवाज उठाई है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लाउड्स्पीकर पर दी जाने वाली अजान पर तंज कसते हुए लिखा:

“ये समझने वाली बात है कि एक जगह पर चार मस्जिद हैं, इनसे 5 बजे अजान की तेज आवाज आनी शुरू हो जाती है। बात ये है कि आपस में ही इन सब के बीच प्रतियोगिता चल रही है कि कौन कितनी जोर से अजान बजाएगा। सोचने वाली बात तो ये है कि किसकी आवाज अल्लाह तक जाएगी। आप भी सोचिए और मैं भी सोचता हूँ। आपका दिन शुभ हो! सबका मालिक एक।”

अपडेट: सुरक्षा के मद्देनजर पीड़ित लड़की का नाम बदल दिया गया है और चेहरा छिपा दिया गया है।

भारत में ₹75,000 करोड़ निवेश करेगा Google: PM मोदी से बातचीत के बाद CEO सुन्दर पिचाई का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (जुलाई 13, 2020) को सर्च इंजिन जायंट गूगल के सीईओ दुंदर पिचाई के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि गूगल सीईओ सुन्दर पिचाई के साथ सोमवार की सुबह हुई उनकी बातचीत काफी फलदायक रही। इस दौरान दोनों हस्तियों ने विभिन्न मुद्दों पर विमर्श किया, जिसमें सबसे प्रमुख था तकनीक की शक्ति को और उन्नत कर के इससे किसानों को लाभ पहुँचाना।

इसके बाद सुन्दर पिचाई ने घोषणा की है कि गूगल भारत में ‘इंडिया डिजिटलाइजेशन फंड’ के जारी 10 बिलियन डॉलर, अर्थात करीब 75,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगा। अगले 5-7 वर्षों मे गूगल क्रमवार तरीके से ये निवेश करेगा। सुंदर पिचाई ने पीएम मोदी के साथ बैठक के बाद कहा कि वो इसकी घोषणा करते हुए रोमांचित हैं। इनमें से अधिकतर इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम के लिए निवेश किया जाएगा।

दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच न सिर्फ प्राइवेट कंपनियों बल्कि सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज के तौर-तरीके बदल रहे हैं। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने को कह रखा है। ऐसे में एक नया ‘वर्क कल्चर’ विकसित हो रहा है। पीएम मोदी और पिचाई के बीच इस नए ‘वर्क कल्चर’ पर भी चर्चा हुई। कोरोना के बीच भारत में भी आर्थिक जगत में कामकाज पर प्रभाव पड़ा है।

खेल जगत भी दोनों के बीच चर्चा का हिस्सा बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि खेल के क्षेत्र में कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के कारण बड़ी चुनौती आ गई है। इसके दुष्प्रभावों और उससे निपटने के तरीकों पर दोनों के बीच चर्चा हुई। बता दें कि सुन्दर पिचाई भी कह चुके हैं कि वो क्रिकेट को काफी मिस कर रहे हैं। कई बड़े स्पोर्ट्स आयोजनों को भी टालना पड़ा है। इससे खेल जगत में रुपए का फ्लो रुका हुआ है।

इस साल IPL और T20 वर्ल्ड कप पर भी संशय पैदा हो गया है। आईपीएल भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय स्पोर्ट्स आयोजन है। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने जानकारी दी है कि आईसीसी विश्व कप कराने के लिए अपने स्तर पर भी प्रयास कर रही है, क्योंकि यह राजस्व कमाने का बड़ा माध्यम है। भारतीय टीम को विदेशी दौरों पर क्वारंटाइन अवधि में भी छूट देने की बात गांगुली ने की है।

प्रधानमंत्री मोदी नरेंद्र मोदी और गूगल के सीईओ सुन्दर पिचाई के बीच डेटा सिक्योरिटी और साइबर सिक्योरिटी को लेकर भी चर्चा हुई। चीन ने अब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में हैकिंग हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे साइबर सिक्योरिटी आज सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। चीन द्वारा इंटरनेट जगत में छद्म युद्ध के बाद सभी देश अपनी-अपनी साइबर सिक्योरिटी को धारदार बनाने में जुटे हैं और डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

शिक्षा और लर्निंग के क्षेत्र में ‘गूगल इंडिया’ द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वो इन कार्यों से ख़ुश हैं। उन्होंने बताया कि गूगल डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास कर रहा है, जो काबिले तारीफ है। ज्ञात हो कि हाल ही में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी कई बड़ी हस्तियों से वीडियो कॉल से बातचीत कर अपनी किरकिरी कराई थी।

ज्ञात हो कि दिसंबर 2019 में सुंदर पिचाई सर्च इंजन गूगल की मालिक कम्पनी अल्फ़ाबेट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने थे। 2015 में बनी अल्फ़ाबेट कम्पनी के पास गूगल सर्च इंजन, जीमेल, यूट्यूब समेत गूगल ग्रुप की सभी कंपनियों को नियंत्रित करने का हक है। उस समय तक अल्फ़ाबेट के अध्यक्ष सर्गेई ब्रिन और सीईओ लैरी पेज थे, लेकिन दोनों ने ही रिटायरमेंट की घोषणा कर दी। गूगल कम्पनी की शुरुआत इन्हीं दोनों ने की थी।

COVID-19 की जाँच में 11 लाख का आँकड़ा पार कर अग्रणी राज्य बना UP, सरकार ने दिए डोर टू डोर मेडिकल स्क्रीनिंग के निर्देश

कोरोना वायरस के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तय किया है कि घर-घर से संक्रमितों को ढूँढा जाएगा। इसके लिए डोर टू डोर कैंपेन चलाने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि घर-घर मेडिकल स्क्रीनिंग में संदिग्ध लक्षण वालों के सैंपल लेकर जाँच कराएँ और अस्वस्थ पाए जाने पर समुचित उपचार की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 52 हजार जाँच की व्यवस्था की जाए। इसमें आरटीपीसीआर से 30 हजार, रैपिड एंटीजन टेस्ट से 20 हजार टेस्ट और ट्रूनैट मशीन से 2 हजार रोजाना जाँच की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए औद्योगिक इकाइयाँ चलवाई जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बाबत ट्वीट करते हुए लिखा, “कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मेडिकल स्क्रीनिंग और टेस्टिंग सबसे अहम माध्यम है। आपकी सरकार ने घर-घर मेडिकल स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए हैं। अगर किसी में लक्षण मिलेंगे तो उनका सैम्पल लेकर टेस्ट किया जाएगा। आप सब जागरूक रहें, सतर्क रहें। बचाव ही इसका उपचार है।”

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), अवनीश अवस्थी ने शनिवार (जुलाई 11, 2020) को प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा, “मेडिकल स्क्रीनिंग टास्क के लिए 1.40 लाख से अधिक टीमों का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने परीक्षण क्षमता को लगातार बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, इसलिए राज्य में आरटीपीआरसी परीक्षण के माध्यम से परीक्षण क्षमता 30,000 प्रति दिन तक पहुँच गई है। अब प्रति दिन 15,000 से 20,000 एंटीजन टेस्ट आयोजित किए जाएँगे और ट्रू नेट मशीन के माध्यम से प्रति दिन 2,000 परीक्षण किए जाएँगे।”

जानकारी के मुताबिक प्रति दिन लगभग 40,000 कोरोना वायरस परीक्षण किए जाने के साथ ही उत्तर प्रदेश कोविड परीक्षणों में भारत के अग्रणी राज्यों के समूह में शामिल हो गया। बता दें कि राज्य में टेस्ट की संख्या 650 गुना बढ़ गए हैं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा और स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि राज्य में कोविड परीक्षण तेज गति से किया जा रहा है।

उन्होंने रविवार को संवाददाताओं से कहा, “शनिवार को एक दिन में अधिकतम 39,623 सैंपलों की जाँच की गई। इस तरह, COVID-19 की जाँच में 11 लाख का आँकड़ा पार करते हुए, राज्य में अब तक कुल 11,56,089 नमूनों का परीक्षण किया गया है। इसके साथ, राज्य कोरोना वायरस परीक्षणों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।”

‘शूद्र स्तर की राजनीति कर रहे PM मोदी, प्रियंका गाँधी को जिंदगी भर मिलना चाहिए सरकारी बंगला’

देश के कई नेता राजनीति के चंद नकारात्मक पहलुओं से खुद को कभी उबार नहीं पाते हैं। सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर अक्सर उनके भीतर बैठी ‘जातिवादी कुंठा’ बाहर आ ही जाती है। हाल ही में कुछ इस तरह की मानसिकता का प्रदर्शन किया है एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने।

दरअसल कुछ ही दिन पहले कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव को 35 लोधी रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया गया था। जिस पर शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जातिवादी कटाक्ष करते हुए इसे ‘शूद्र स्तर की राजनीति’ बताया।   

पूरे 33 सालों में पहली बार शिवसेना के मुखपत्र सामना में ऐसे नेता का साक्षात्कार प्रकाशित हुआ, जो शिवसेना से संबंध नहीं रखता है। तीन हिस्सों में तैयार हुए इस साक्षात्कार के दौरान शरद पवार ने कई अहम मुद्दों पर बात की, जिसमें महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी से लेकर प्रियंका गाँधी का सरकारी आवास खाली कराने का आदेश तक शामिल था।   

सामना के उप संपादक संजय राउत से बात करते हुए शरद पवार ने कहा:

“नेहरू जैसा कद देश के किसी दूसरे नेता का नहीं है। उनकी बेटी इंदिरा गाँधी ने देश के लिए बलिदान दिया, उनके बेटे राजीव गाँधी ने भी देश के लिए बहुत योगदान दिए। अपने पिता की मौत के बाद अपनी माँ के साथ मिल कर वह पार्टी को अच्छी सूरत देने की हर संभव कोशिश कर रही हैं। हमारे राजनीतिक मतभेद भले हो सकते हैं लेकिन उन्हें सरकारी आवास से निकलने का आदेश जारी करना बदले की राजनीति नहीं बल्कि निम्न जाति के स्तर की राजनीति है।”

संजय राउत ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार के इस आदेश पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने पहले कहा था कि मोदी सरकार बदले की राजनीति कर रही है। इस पर शरद पवार ने कहा कि यह बदले की राजनीति नहीं बल्कि शूद्र स्तर की राजनीति है। 

शरद पवार के अनुसार भारत में लोकतंत्र नेहरू-गाँधी परिवार की जागीर है। और इसी आधार पर प्रियंका गाँधी को सरकारी बंगला जिंदगी भर के लिए मिलना चाहिए। पवार के अनुसार अगर सरकार हद से ज्यादा सब्सिडी वाले ऐसे बंगलों में रहने का प्रियंका गाँधी का अधिकार छिनती है तो यह ‘शूद्र स्तर की राजनीति’ है।   

प्रियंका गाँधी को सरकारी बंगला छोड़ने का आदेश

सरकार ने कुछ ही समय पहले प्रियंका गाँधी के लिए आदेश जारी किया था कि उन्हें 35 लोधी रोड स्थित सरकारी आवास खाली करना होगा। जिस पर एनसीपी मुखिया शरद पवार ने सामना के साक्षात्कार में यह प्रतिक्रिया दी। आपको बता दें कि इसके पहले पिछले साल नवंबर महीने में प्रियंका गाँधी की एसपीजी सुरक्षा भी वापस ले ली गई थी।   

प्रियंका गाँधी को यह बंगला केंद्र सरकार की तरफ से दिया गया था। उन्हें यह बंगला इसलिए दिया गया था क्योंकि उन्हें एसपीजी सुरक्षा मिली हुई थी। कुछ समय पहले उन्हें एक पत्र के माध्यम से सूचना जारी की गई थी, जिसके मुताबिक़ उन्हें 1 महीने के भीतर बंगला खाली करना था। उल्लेखनीय बात यह भी है कि यह बंगला 23 साल से उन्हें ही मिला हुआ था।   

मोदी पर जातिवादी टिप्पणी

यह कोई पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए इस तरह की अमर्यादित और जातिवादी भाषा का उपयोग किया गया है। इसके पहले कॉन्ग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री मोदी पर अनैतिक टिप्पणी की थी। जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द का इस्तेमाल किया था। मणिशंकर अय्यर ने अपने बयान में कहा था:

“मुझे लगता है कि यह आदमी बहुत नीच किस्म का आदमी है। इसमें कोई सभ्यता नहीं है और ऐसे समय पर इस किस्म की गंदी राजनीति करने की क्या आवश्यकता थी?”

मणिशंकर अय्यर ने साल 2017 में हुए गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान प्रचार करते हुए यह बयान दिया था।   

राजस्थान: दर्जन भर ठिकानों पर IT और ED का छापा, CM गहलोत के बेटे वैभव पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

राजस्थान में जारी राजनीतिक संकट के बीच इनकम टैक्स विभाग (IT) के 200 अधिकारियों ने अशोक गहलोत, उनके बेटे वैभव व उनके करीबियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। राज्य में कॉन्ग्रेस के दूसरे नंबर के नेता सचिन पायलट ने बगावती तेवर अपना लिए हैं और अशोक गहलोत सरकारी मशीनरी का उपयोग कर के किसी तरह सरकार गिराने से बचने ने लिए लगे हुए हैं।

इसी बीच इनकम टैक्स (IT) विभाग की कार्रवाई से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। न सिर्फ इनकम टैक्स बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी राजस्थान में कई ठिकानों पर छापेमारी की है। इसमें सबसे प्रमुख है जयपुर के एक पाँच सितारा होटल पर छापा।

इस होटल के सबसे बड़े निवेशक रतनकांत शर्मा पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि वो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव के लिए मनी लॉन्ड्रिंग करता है। इनकम टैक्स (IT) विभाग ने कॉन्ग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ और ज्वेलरी व्यवसायी राजीव अरोड़ा के दर्जन भर ठिकानों पर भी छापेमारी की।

इन दोनों को गहलोत का करीबी माना जाता है। जयपुर, कोटा, दिल्ली और मुंबई सहित कई शहरों में छापेमारी जारी है। कहा जा रहा है कि टैक्स मे गड़बड़ी की एक शिकायत के बाद ये कार्रवाई की जा रही है। इसमें देश से बाहर से लेन-देन का मामला भी शामिल है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेता छापेमारी की टाइमिंग पर सवाल खड़े कर के इसे राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक संकट से जोड़ कर देख रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाते हुए कहा कि आखिर अंत में भाजपा के वकील लोग मैदान में उतर ही गए। उन्होंने पूछा कि जब जयपुर में इनकम टैक्स (IT) विभाग पहुँच ही गया है तो फिर ईडी (ED) कब आएगी? इसे संयोग ही कह सकते हैं कि उनके इस ट्वीट के बाद ईडी (ED) ने भी अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। दरअसल, ईडी को सूचना मिली थी कि मैनेजमेंट एक्ट 1999 का उल्लंघन करते हुए मॉरीशस के रास्ते कालधान ट्रांसफर किया गया है।

बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत पर 2015 में पहली बार मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा था। तभी इस मामले में जाँच की माँग की गई थी। मॉरीशस स्थित कम्पनी शिवनार होल्डिंग लिमिटेड और स्थानीय कम्पनी ‘ट्राइटन होटल्स एन्ड रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के बीच अवैध ट्रांजैक्शन को लेकर जाँच चल रही है। इस कम्पनी के लीगल एडवाइजर वैभव गहलोत ही थे।

2015 में ईडी (ED) के जयपुर स्थित जोनल ऑफिस में शिकायत आई थी कि मॉरीशस की एक कम्पनी के जरिए हुए विदेशी लेनदेन में वैभव गहलोत ने वित्तीय लाभ प्राप्त किया है। सूरज कुमार सोनी और राजकुमार शर्मा ने ये शिकायतें दर्ज कराई थीं। राजस्थान के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने भी इन आरोपों को दोहराया था। इस मामले में ईडी को कई दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए थे।

आरोप है कि जुलाई 2011 में शिवनार ने ट्राइटन के 2500 शेयर्स ख़रीदे। शिवनार होल्डिंग लिमिटेड को जुलाई 2006 में रजिस्टर किया गया था। आरोप है कि ये एक फर्जी कम्पनी है, जिसका निर्माण ही कालाधन के लेन-देन के लिए किया गया था। वकील सोनी का आरोप है कि ये गहलोत का ही कालाधन था। वहीं ट्राइटन होटल को मार्च 2007 में रतनकान्त शर्मा के नाम से रजिस्टर किया गया था, जो वैभव गहलोत के पुराने मित्र हैं।

वैभव को कम्पनी का लीगल एडवाइजर रहते 50,000 रुपए की सैलरी मिलती थी, ऐसा आरोप है। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने 2013 में इन आरोपों को दोहराया था। 2011 में राजस्थान में अशोक गहलोत और उनके बेटे से जुड़े कई कंपनियों को सैकड़ों करोड़ के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स देने का मामला सामने आया था। वैभव ‘ओम मेटल्स’ से भी जुड़े थे, जहाँ उन्हें 10,000 रुपए की सैलरी मिलती थी।

मई 2010 में इस कम्पनी को हाइड्रो पॉवर का 457 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। कोटा के पास कालीसिंध नदी पर बाँध बनाने के लिए ये कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। इसके बाद इस कम्पनी को जयपुर और भीलवाड़ा के बीच 200 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए 250 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया। वैभव ने सनलाइट टूर एंड ट्रैवेल्स नामक कम्पनी बना कर इसे अपने दोस्त को बेच दिया था।

उधर राजस्थान के राजनीतिक संकट पर छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेस प्रभारी पीएल पूनिया ने कहा है कि सचिन पायलट अब बीजेपी में हैं। उन्होंने कहा, “हम सभी जानते हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रति भाजपा का रवैया कैसा है। हमें भाजपा से प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी में सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाता है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन में त्रावणकोर राजपरिवार का अधिकार बना रहेगा: SC

केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी को लेकर प्रबंधन और प्रशासन के बीच सालों से चल रहे कानूनी विवाद पर आज (जुलाई 13, 2020) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन में त्रावणकोर राजपरिवार के अधिकार को बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मंदिर के मामलों के प्रबंधन वाली प्रशासनिक समिति की अध्यक्षता तिरुवनंतपुरम के जिला न्यायाधीश करेंगे और मुख्य कमिटी के गठन तक यही व्यवस्था रहेगी। कोर्ट ने आदेश में यह स्पष्ट कहा कि मुख्य कमिटी में राजपरिवार की अहम भूमिका रहेगी।

गौरतलब है कि मंदिर प्रबंधन को लेकर पिछले 9 साल से विवाद चल रहा था। इससे पहले केरल हाईकोर्ट ने 31 जनवरी 2011 को इस संबंध में फैसला सुनाया था। इसमें श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का नियंत्रण लेने के लिए न्यास गठित करने को कहा गया था।

इसके बाद त्रावणकोर के राजपरिवार ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और SC ने 2 मई, 2011 को केरल HC के फैसले पर रोक लगा दी थी।

पिछले साल करीब 3 महीने तक दलीलें सुनने के बाद जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस इंदु मल्‍होत्रा की बेंच ने 10 अप्रैल को इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।

सोशल मीडिया पर कई लोग इसे पुन: धर्म की विजय बता रहे हैं। स्वयंसेवक सत्येंद्र त्रिपाठी लिखते हैं, “श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर का पुनः अधिकार हुतअधिकारी परिवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया जाना पुनः धर्म की विजय है। और यह भी ध्यान में लाने की ज़रूरत है कि आए दिन जो अलग-अलग प्रदेश में देवस्थानम ट्रस्ट बना कर मंदिरों की सम्पत्ति पर नज़र है उसे बदलने की ज़रूरत है। धर्मों रक्षति रक्षित:।”

यहाँ बता दें कि केरल के तिरुवनंतपुरम में 18वीं सदी में त्रावणकोर राजकुल ने भगवान विष्णु के इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था और स्वतंत्रता के बाद तक भी मंदिर का संचालन पूर्ववर्ती राजपरिवार के नियंत्रण वाला ट्रस्ट ही करता रहा।

ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा – ‘दिल्ली दंगों की साजिश की जड़ें काफी गहरी’

दिल्ली के एक सेशन कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका खारिज कर दी है। ताहिर हुसैन पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की है।

सेशन कोर्ट ने कहा कि दिल्ली मे हुए दंगों को काफ़ी संगठित तरीके से अंजाम दिया गया था और इसके पीछे एक ऐसी साजिश थी, जिसकी जड़ें काफ़ी गहरी हैं। ताहिर हुसैन कि जमानत याचिका खारिज होने के साथ ही उसे बड़ा झटका लगा है।

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने गुरुवार (जुलाई 9, 2020) को ही इस मामले में ऑर्डर रिजर्व कर लिया था। अडिशनल सेशन जज विनोद यादव ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ये फैसला सुनाया। ये मामला आईबी में कार्यरत रहे अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा हुआ है।

अंकित के पिता रवींद्र कुमार द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर पर ताहिर हुसैन के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वो नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों का मुख्य आरोपित भी है।

चार्जशीट में ताहिर हुसैन ने कबूल किया है कि सीएए के समर्थन में भी रैलियाँ होने वाली थीं, इसीलिए उसने ‘हिन्दुओं को सबक सिखाने’ के लिए दंगों की साजिश रची। इसी क्रम में उसने अपने घर को इस्लामी भीड़ के लिए लॉन्चपैड बनाया, ताकि हिन्दुओं को निशाना बनाया जा सके।

ताहिर हुसैन ने ईंट-पत्थर व अन्य हथियार जमा करने की बात भी कबूल की थी। उसने बताया कि उसके समर्थक ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘काफिरों को मारो’ चिल्ला रहे थे।

अंकित शर्मा वाला चार्जशीट में कहा गया है कि अंकित शर्मा की हत्या चाँदबाग़ में 10 लोगों ने मिल कर की थी। इनमें ताहिर हुसैन के साथ-साथ हलील सलमान और समीर नामक आरोपित भी शामिल हैं।

नाजिम और कासिम नाम के दो कुख्यात अपराधी भी इस जघन्य हत्याकांड में शामिल थे। चार्जशीट में कुचल 96 गवाहों के बयान पेश किए गए हैं। बता दें कि इसी तरह का दो अन्य चार्जशीट दिल्ली दंगों के मामले में पेश किया जा चुका है।

BJP विधायक पश्चिम बंगाल में फाँसी के फंदे से झूलते मिले, बँधे हुए थे हाथ: परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के राज में भाजपा नेताओं की हत्याओं का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। अब एक भाजपा विधायक की लाश संदिग्ध अवस्था में मिलने के बाद राज्य में क़ानून-व्यवस्था पर फिर से सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

ताज़ा घटना सुदर्शनपुर के रायगंज की है, जहाँ हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का मृत शरीर एक फंदे से झूलता हुआ पाया गया। भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय रविवार (जुलाई 12, 2020) को ही अपने पैतृक गाँव बिंडोल पहुँचे थे।

परिजनों का कहना है कि रविवार रात 1 बजे कुछ युवक उन्हें बुलाने आए थे। इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई। सोमवार की सुबह 7 बजे कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें फंदे से झूलता हुआ पाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने बताया है कि विधायक का मृत शरीर बंद चाय की एक दुकान के सामने झूलता हुआ मिला। फ़िलहाल पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

हालाँकि, पुलिस ने अभी तक इस बारे में कुछ नहीं कहा है कि ये हत्या है या फिर आत्महत्या। जहाँ उनकी लाश मिली, वो जगह उनके पैतृक पंचायत बलिया स्थित बिंडोल गाँव में उनके घर से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर ही है।

भाजपा विधायक के परिजनों का कहना है कि देबेन्द्र नाथ रॉय की हत्या हुई है। उनका कहना है कि एक साजिश के तहत उन्हें लटका दिया गया। रायगंज के सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री देबाश्री चौधरी ने उनकी मौत की जाँच की माँग की है।

विधायक की पत्नी और पूर्व पंचायत प्रमुख चांदीमा रॉय ने भी अपने पति की साजिशन हत्या की आशंका जताई है। वहीं देबाश्री ने कहा है कि भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की मौत काफी संदेहास्पद है। उन्होंने पूछा कि अगर किसी व्यक्ति का हाथ बंधा हुआ हो तो वो आत्महत्या कैसे कर सकता है? उन्होंने पुलिस को इस घटना की अच्छी तरह जाँच कर के दोषियों को सज़ा दिलाने को कहा है।

2016 के विधानसभा चुनाव में देबेन्द्र नाथ रॉय सीपीएम के टिकट पर चुनाव जीते थे। उन्होंने नार्थ दिनाजपुर के हेमताबाद से जीत दर्ज की थी। वो ग्राम पंचायत चुनाव में भी सीपीएम के लिए हैट्रिक जीत दर्ज कर चुके थे। उन्होंने कोआपरेटिव सोसाइटी की मदद से गाँव में कई लोगों की वित्तीय रूप से मदद की थी। उन्होंने 2019 में दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली थी। उनकी मौत से भाजपा के कई नेता अचंभित हैं।