अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की एक छात्रा ने अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समक्ष एक छात्र के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा गया है कि छात्र ने यूनिवर्सिटी में उसे परेशान करने की धमकी दी है।
13 जुलाई, 2020 को अपनी शिकायत में, छात्रा ने कहा कि 9 जुलाई को, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रहबर दानिश नाम के एक छात्र ने सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ “असभ्य भाषा” का इस्तेमाल किया था। छात्रा ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसे अभी भी अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए दो साल तक यूनिवर्सिटी में रहना है। उसने कहा कि वह डर गई है कि विश्वविद्यालय फिर से खुलने के बाद दानिश उसे परेशान करेगा।
Complained filed with Aligarh police by the AMU’s female student on July 13, 2020
दरअसल छात्रा ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि कैसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्याल के हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों को खुद को ढँकने के लिए मजबूर किया जाता है और महिलाओं को उनके कपड़ों के आधार पर कैसे ऑब्जेक्टिफाइड किया जाता है। छात्रा के इस पोस्ट के बाद दानिश और उसके बाकी साथी उस पर हमलावर हो गए और अपमानक और भद्दी भद्दी-भद्दी गालियाँ देने लगे। जिसका छात्रा ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए शिकायत दर्ज कराई है।
Abusive messages to AMU student
उसने लिखा कि उसके पोस्ट के बाद एएमयू के मुस्लिम छात्रों द्वारा लागातार हमला किया जा रहा था। उसके पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों ने उसे धमकी दी थी कि जब लॉकडाउन के बाद फिर से विश्वविद्यालय खुलेगा, तो उसे “पीतल से बना हिजाब” पहनने के लिए मजबूर किया जाएगा।
Abusive messages to AMU student
उसका यह कहकर मज़ाक उड़ाया कि छात्रावास में उसे नग्न घूमने से नहीं रोका जा सकता।
Abusive messages to AMU student
“ये संघी कॉलेज नहीं है दीदी” कहकर मजाक उड़ाया गया।
Abusive messages to AMU student
शिकायत में कहा गया है कि छात्रा को तभी से लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जब से CAA, NRC बिल पास हुआ है। चूँकि छात्रा ने इस बिल का समर्थन किया था, इसलिए ये लोग लगातार उस पर हमलावर हैं। उसने कहा कि उस समय भी, उसे कई अपमानजनक संदेश मिले थे।
शिकायतकर्ता ने अलीगढ़ पुलिस से उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। उसने अलीगढ़ पुलिस से मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है।
छात्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि उसे उस समय भी निशाना बनाया गया था जब उसने नागरिकता संशोधन विधेयक (अब एक अधिनियम) और NRC के पक्ष में बात की थी, लेकिन उसने तब शिकायत दर्ज करने पर विचार नहीं किया था। मगर अब उसे फिर से निशाना बनाया गया है। इस बार उसने मामले में पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी करते या अन्य छात्रों को धमकाते हुए पकड़े गए हैं।
8 मई को, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुछ इस्लामिक चरमपंथी और हिंदूफोब्स ने कुछ हिंदू छात्रों के सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर धमकी भरे मैसेज पोस्ट करके उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी।
उसी महीने, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दो छात्रों शेख अरफात और शाकिब रसूल भट के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अतरौली पुलिस स्टेशन में फेसबुक पर भारत विरोधी पोस्ट शेयर करने का मामला दर्ज किया गया था। इन दोनों छात्रों ने पाकिस्तान को ‘अपना देश’ बताते हुए, कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बनने की कामना की थी।
दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के षड्यंत्र की जड़ें अलग-अलग स्तर पर तैयार की गई थीं। चाँद बाग़ स्थित मुख्य वज़ीराबाद मार्ग के पास हुए दंगों की वजह से पुलिसकर्मी रतन लाल की हत्या हुई थी।
इस्लामी भीड़ ने पहले तो उन्हें ख़ूब पीटा, इसके बाद रॉड से भी मारा और अंत में गोली भी मारी। वज़ीराबाद मुख्य मार्ग में हुए दंगों के मामले में तैयार की गई रतन लाल चार्जशीट में सफूरा ज़रगर का भी नाम शामिल है। यह भी उसी तरह बड़ी साजिश का इशारा करती है जैसा चाँद बाग़ दंगों की चार्जशीट में दिखता है।
ऑपइंडिया पहले ही बता चुका है कि सीएम विरोधी दंगों के दौरान लंगर लगाने के कारण जिस व्यक्ति को ‘मसीहा’ बताया जा रहा था उसने कैसे दंगे भड़काने में अहम भूमिका निभाई थी। चार्जशीट में इस बात का उल्लेख भी है कि डीएस बिंद्रा ने दंगे भड़काने में सक्रिय भूमिका निभाई जिसके चलते रतन लाल की हत्या हुई। चार्जशीट में यह भी लिखा था कि प्रदर्शन करने वालों और षड्यंत्रकारियों को इस बात का अनुमान था कि दंगे कभी भी शुरू हो सकते हैं और उन्होंने हालात के मुताबिक़ हथियारबंद रहने के आदेश दिए।
इसके बाद चार्जशीट में लिखा है कि 23.02.2020 को आरोपित समेत दंगों के आयोजक, साज़िशकर्ता और दंगे भड़काने वालों ने चाँद बाग़ इलाके में एक बैठक रखी थी। बैठक में उन्होंने स्थानीय लोगों को अगले दिन डंडा, लोहे की रॉड और पेट्रोल बम लेकर हथियारबंद रहने की बात कही। 24.02.2020 को दिन के लगभग 1 बजे तय योजना के मुताबिक़ दंगाई आक्रामक हुए और उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इस्लामी भीड़ के इस सुनियोजित हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे और हेड कोंस्टेबल रतन लाल मार दिए गए थे।
चार्जशीट में इस बात का भी उल्लेख है कि इलाकों में दंगा भड़काने के लिए डीएस बिंद्रा, सफूरा ज़रगर और दूसरे मजहब के तमाम स्थानीय लोगों ने मिल कर गहरी साज़िश रची थी। चार्जशीट के अनुसार 23 और 24 तारीख़ को दंगा भड़काने वालों और दंगे की साज़िश रचने वालों के बीच एक खुफ़िया बैठक हुई थी। इस बैठक में बनाई गई योजना के बाद इस्लामी भीड़ ने दंगा भड़काया और उसकी वजह से ही रतन लाल की हत्या हुई।
चार्जशीट में मौजूद जानकारी के अनुसार भीम आर्मी के आह्वान पर चाँद बाग़ से राजघाट तक के लिए गैर क़ानूनी मार्च की शुरुआत हो चुकी थी, जिसकी योजना भी पहले ही तैयार कर ली गई थी। इस मार्च का लक्ष्य महज़ भीड़ को भड़काना था, जबकि इस मार्च के लिए इजाज़त नहीं दी गई थी।
रतन लाल मामले की चार्जशीट
इस ग़ैरक़ानूनी मार्च में सफूरा ज़रगर, जेसीसी (जामिया कोओर्डिनेशन कमेटी) के सदस्य समेत तमाम स्थानीय षड्यंत्रकर्ता शामिल थे। इनके नाम अतहर, सुलेमान, शादाब, रवीश, सलीम खान और सलीम मुन्ना हैं। इसके अलावा भी दंगों में तमाम लोग शामिल थे। लेकिन मार्च को रोक कर उसके मूल स्थान चाँद बाग़ मज़ार तक ही सीमित कर दिया गया था।
चार्जशीट के मुताबिक़ इतना होने के बाद 23 और 24 फरवरी की देर रात चाँद बाग़ मज़ार पर दंगे भड़काने वालों और दंगे की योजना बनाने वालों के बीच गुप्त बैठक हुई थी। चार्जशीट में दी जानकारी के मुताबिक़ ‘मौके पर हुए दंगों में डीएस बिंद्रा, सलमान सिद्दीकी, सलीम खान और सलीम मुन्ना समेत कई स्थानीय दंगाई भी शामिल थे।
मौके पर मौजूद एक गवाह जिसके बयान पर भरोसा किया गया था, वह पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट से बराबर मिलता है। दूसरे मजहब के गवाह (पहचान सुरक्षित रखी गई है) ने घटना से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। दंगे भड़कने के ठीक एक दो दिन पहले जिस गुप्त बैठक का आयोजन किया गया था, उसके दो हफ्ते पहले इसी मुद्दे पर एक बैठक हो चुकी थी। रात के 12 बजे हुई इस बैठक में यमुना नदी के आस-पास हर उस स्थान से 2-2 लोग बुलाए गए थे जहां दंगा हो रहा था।
रतन लाल चार्जशीट में चश्मदीद का बयान
23 फरवरी के दिन भीम आर्मी के बंद के ऐलान को समर्थन देने की प्रस्ताव भी उस दिन ही स्वीकार लिया गया था। जब कुछ लोगों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि शांति से बैठ कर आन्दोलन करने से कोई नतीजे हासिल नहीं हो रहे हैं। ‘उपासना, अतहर और शादाब ने उन्हें अनसुना कर दिया था। ’यह उल्लेखनीय है कि पुलिस की जाँच में यह बात सामने आई कि अतहर और शादाब जिनके नामों का ज़िक्र चश्मदीद ने किया था, शुरू से ही सफूरा के साथ घटनाक्रम में शामिल थे।
एक और चश्मदीद ने कई हैरान कर देने वाली बातों का खुलासा किया। चश्मदीद (नाम सुरक्षित रखा गया है) के मुताबिक़ दूसरे समुदाय के तमाम लोग और दलित छात्र भीम आर्मी द्वारा बुलाई गई मार्च के लिए एकत्रित हुए थे जिसे बाद में पुलिस ने रोक दिया था। इसके बाद पुलिस ने वज़ीराबाद रोड भी पूरी तरह बंद कर दी थी। जिसके बाद वहाँ अफ़वाह फैली थी कि जाफराबाद इलाके में विरोध-प्रदर्शन के स्थान पर हिंसा हुई है।
चश्मदीद का बयान
यह ठीक वही जगह थी जहाँ समुदाय विशेष की औरतें, जेसीसी के सदस्य, अन्य लोग और खास कर पिंजरा तोड़ समूह के सदस्यों ने मेट्रो रोड बंद की जिसके बाद वहाँ हिंसा शुरू हो गई। चार्जशीट में यह भी बेहद स्पष्ट तौर पर लिखा है कि वह सीएए का विरोध करने वाले दूसरे समुदाय के ही थे, जिन्होंने पहले पत्थर चलाना शुरू किया। इतना ही नहीं अलग-अलग जगहों पर हिंसा भड़काने में भी उनका पूरा हाथ था। इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट ऑपइंडिया में प्रकाशित भी हो चुकी है।
यह 23 फरवरी की जाफराबाद की कुछ तस्वीरें हैं,
23 फरवरी 2020 को मजहबी भीड़ द्वारा की गई पत्थरबाजी 23 फरवरी2020 को मजहबी भीड़ द्वारा की गई पत्थरबाजी23 फरवरी 2020 को भीड़ द्वारा की गई पत्थरबाजी
चश्मदीद ने इसके बाद यह भी बताया कि जाफराबाद में हिंसा की घटना होने के बाद चाँद बाग़ की चौथी लेन में फिर गुप्त बैठक बुलाई गई थी। बैठक के बाद कुछ लोग मंच पर गए और उन्होंने कहा ‘यही समय है उन लोगों को अपनी ताकत दिखाने का’ और डोनाल्ड ट्रंप के दौरे की वजह से पूरी दुनिया की निगाहें हम पर होंगी। 24 तारीख़ के दिन उन्हें अधिक से अधिक संख्या में आने के लिए कहा गया। फिर चश्मदीद ने कहा 24 तारीख़ को जैसे ही वह अपने घर से निकला, उसने देखा सामने सैकड़ों लोगों की भीड़ है और सभी के हाथ में रॉड, तलवार, पत्थर और डंडे जैसे हथियार थे और सब के सब हिंदुओं पर हमले के लिए तैयार थे।
दूसरे चश्मदीद ने बताया कि गुप्त बैठक के बाद मौके पर इकट्ठा हुए लोगों से अतहर और उसके साथियों ने कहा सभी को हथियार लेकर आना है। क्योंकि यही समय है सरकार और देश को दिखाने का कि यह प्रदर्शन जारी ही रहेगा।
रतन लाल की चार्जशीट में चश्मदीद का एक और बयान
रतन लाल की चार्जशीट में सफूरा का किरदार
इस चार्जशीट में सफूरा का नाम कई बार सामने आया है, उस पर सबसे पहला आरोप यह है कि वह 23 फरवरी को चाँद बाग़ से राजघाट के बीच हुई गैर क़ानूनी मार्च की आयोजकों में से एक थी। साथ ही 24 फरवरी के दिन हुई बैठक में तैयार किए गए षड्यंत्रों में भी सफूरा की भूमिका अहम थी।
आरोपित शादाब कवलप्रीत कौर (आइसा), देवांगना कलिता (पिंजरा तोड़), सफूरा, योगेन्द्र यादव सहित अन्य को अच्छे से जानता था। शादाब के बारे में चार्जशीट में लिखा है, 23 फरवरी की बैठक में इसकी योजना तैयार हुई थी कि 24 फरवरी के दिन क्या-क्या होगा। इस हरकत को अंजाम देने के लिए शादाब अपने साथियों के साथ उस दिन चाँद बाग़ में ही रुका। उसने विरोध-प्रदर्शन करने वालों को हिंसा के लिए प्रेरित किया। साथ ही ऐसी योजना तैयार कि उसके पास आन्दोलन को हिंसक बनाने के लिए हर हथियार मौजूद हो।
चार्जशीट में इस बात का भी ज़िक्र है कि पुलिस पर हमला करने के लिए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए सही मात्रा में हथियार और अन्य चीज़ें अचानक ही इकट्ठा नहीं की जा सकती हैं। 24 फरवरी 2020 के दिन चाँद बाग़ के आस-पास दंगे भड़काने की योजना पहले ही तैयार कर ली गई थी जिसके चलते जान और माल की हानि हुई। जिस तरह से डीएस बिंद्रा (एआईएमआईएम), कवलप्रीत कौर (आइसा), देवांगना कलिता (पिंजरा तोड़) के एक-दूसरे से संपर्क मिले हैं, उससे यह साफ़ हो जाता है कि इनका असल एजेंडा क्या था। जानकारी आने बाद यह भी पता चला था कि इस दौरान यह सभी लोग लगातार संपर्क में थे। इतना ही नहीं इन सभी ने अपने-अपने मोबाइल फोन में 23 से 24 फरवरी के बीच का लगभग हर डाटा हटा दिया था।
सलमान सिद्दीकी नाम का युवक भी दंगा भड़काने वाले कुछ मुख्य लोगों में से एक था जिसकी वजह से रतन लाल की हत्या हुई थी। चार्जशीट में मौजूद कॉल रिकोर्ड्स के अनुसार सलमान इस दंगे की योजना तैयार करने वाले लोगों डीएस बिंद्रा, अतहर, रवीश, सलीम मुन्ना, सलीम खान, अयूब, इब्राहिम, सफूरा और अन्य से लगातार संपर्क में था। सफूरा का नाम चार्जशीट के कई अन्य हिस्सों में भी मौजूद है। जाँच के दौरान यह बात भी सामने आई कि दिसंबर के दौरान हुए दंगों में और फरवरी के दौरान चाँद बाग़ सहित दिल्ली के अन्य इलाकों में हुए दंगों में बराबर संबंध था। कहना गलत नहीं होगा कि जेसीसी ने शुरुआत में जिस तरह की योजना तैयार की वह उस पर ही चले और काफी हद तक कामयाब भी हुए।
जाँच में यह बात भी सामने आई कि जेसीसी की प्रतिनिधि, सफूरा शुरू से चाँद बाग़ मज़ार के पास मौजूद थी और दंगे भडकाने में उसका अहम किरदार था। इसके बाद सफूरा को स्पेशल सेल के जाँच अधिकारी ने एफआईआर 59/20 के तहत गिरफ्तार किया था। इन तथ्यों के आधार पर यह बात साफ़ है कि जो भीड़ रतन लाल की हत्या के लिए ज़िम्मेदार थी उसे भड़काने में सफूरा जैसे लोगों की भूमिका सबसे ज्यादा रही है। इसके अलावा 24 फरवरी के दिन चाँद बाग़ में हुए दंगों की योजना तैयार करने में सफूरा का नाम शुरूआती तौर पर ही आता है। फिलहाल जाँच भले जारी है, लेकिन इतने तथ्य घटना की तस्वीर काफी हद तक साफ़ कर देते हैं।
राजस्थान में सियासी संकट के बीच उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 102 विधायकों के समर्थन के दावे को ‘गलत’ बताया है। उन्होंने यह बातें समाचार चैनल आज तक से बातचीत में कही। उप मुख्यमंत्री ने कहा, “25 विधायक मेरे साथ बैठे हैं। हम विधायक दल की बैठक में भाग लेने के लिए जयपुर नहीं जा रहे हैं।”
पिछले कुछ दिनों से राजस्थान में उभरे राजनीतिक संकट के बीच, कॉन्ग्रेस के विधायक एक बार फिर से ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ में उलझते नजर आए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद विधायकों बसों से जयपुर के फेयरमोंट होटल भेजा गया।
#Rajasthan : Buses seen outside the residence of Chief Minister Ashok Gehlot in Jaipur.
Congress Legislative Party (CLP) meeting is underway here, 107 MLAs present at the meet. pic.twitter.com/0D2gayciYG
#Rajasthan : Congress MLAs taken to Hotel Fairmont in Jaipur after the Congress Legislative Party (CLP) meeting at Chief Minister Ashok Gehlot’s residence earlier today. Visuals of MLAs Madan Prajapat, Amit Chachan, Ganesh Ghogra and others, inside the hotel. pic.twitter.com/0xSXDhNhbo
इससे पहले सचिन पायलट के करीबी सूत्रों ने कहा था, “अशोक गहलोत सरकार के पास संख्या-बल नहीं है जिसका वो दावा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का गार्डन बहुमत साबित करने की जगह नहीं है, वो विधानसभा में होता है। अगर उन्होंने जो दावा किया है, उतने विधायक उनके पास हैं तो गिनती क्यों नहीं कराते हैं, उन्हें राज्यपाल के पास ले जाने के बजाय होटल क्यों ले जा रहे हैं?” वहीं राजस्थान सरकार के मंत्री रमेश मीणा ने कहा, “मैं सचिन पायलट के साथ हूँ।”
Ashok Gehlot govt doesn’t have numbers they claim. CM’s back garden isn’t the place to prove majority, it’s done in Assembly. If they have numbers as claimed then why not do a head count, take them to Guv instead of moving them to hotel?: Sources close to Sachin Pilot (file pic) pic.twitter.com/lDoUM8zsOH
नम्बर गेम में उलझे गहलोत खेमे को अब भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने भी झटका दे दिया है। पार्टी ने ह्विप जारी कर अपने दोनों विधायकों को निर्देश दिया है कि फ्लोर टेस्ट (Floor Test) की स्थिति में वे हिस्सा नहीं लेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेशभाई सी वसावा ने साफ कहा है कि पार्टी के विधायक ना तो कॉन्ग्रेस और ना ही भाजपा के लिए वोट करेंगे। साथ ही ना तो अशोक गहलोत और ना ही सचिन पायलट को वोट देने के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दोनों विधायकों को ये भी चेतावनी दी है कि अगर पार्टी के ह्विप की अनदेखी की गई, तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
Bharatiya Tribal Party (BTP) issues letter to its two MLAs to abstain in the event of a trust vote in the assembly. These two MLAs had earlier supported the Ashok Gehlot led government in #Rajasthan. pic.twitter.com/6J2GVbDVn4
बता दें कि जिन बसों से विधायकों को जयपुर के होटल में भेजा जा रहा था, उसमें खुद मुख्यमंत्री भी शामिल थे। बस में सवार होते समय मंत्री ममता भूपेश ने कहा, “सब ठीक है।” इससे पहले राजस्थान कॉन्ग्रेस ने दावा किया था कि राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों को लुभाकर कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। कॉन्ग्रेस को अपने विधायकों के टूटने का खतरा लग रहा है। इसलिए कॉन्ग्रेस ने अपने विधायकों को जयपुर के होटल में शिफ्ट कर दिया है।
Rajasthan: 20 MLAs didn’t attend the Congress Legislative Party (CLP) meeting held at Chief Minister Ashok Gehlot’s residence today. https://t.co/fuL74N0yYY
इससे पहले सोमवार (जुलाई 13, 2020) को विधायक दल की बैठक में शामिल होने के लिए सचिन पायलट नहीं पहुँचे। मुख्यमंत्री गहलोत के मीडिया सलाहकार ने बैठक में 107 विधायकों की मौजूदगी का दावा किया है।
इस बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है, “कॉन्ग्रेस सरकार के बेहतरीन कार्यों व जनसेवा से घबराकर भाजपा के नेतृत्व वाली षड्यंत्रकारी ताकतों द्वारा कॉन्ग्रेस की राज्य सरकार को अस्थिर करने, विधायकों की खरीद-फरोख्त करने, पैसों का प्रलोभन दे निष्ठा खरीदने तथा धनबल व सत्ताबल का दुरुपयोग कर प्रजातंत्र की हत्या करने का प्रयास किया जा रहा है। दुर्भाग्य की बात यहै है कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों की करारी हार के बावजूद भाजपा ने कोई सबक नहीं लिया और भ्रष्ट तरीकों से कॉन्ग्रेस सरकार को अस्थिर करने का फड्यंत्र बदस्तूर जारी है।”
Copy of the resolution passed in the Congress Legislature party meeting
प्रस्ताव में आगे कहा गया है, “कॉन्ग्रेस विधायक दल की यह बैठक कॉन्ग्रेस पार्टी व कॉन्ग्रेस सरकार को कमजोर करने वाले सभी अलोकतांत्रिक कुकृत्यों की कठोर शब्दों में निंदा करती है व यह माँग करती है कि कॉन्ग्रेस का कोई पदाधिकारी या विधायक दल का कोई सदस्य अगर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में कॉन्ग्रेस सरकार या पार्टी विरोधी गतिविधि करता है यै ऐसे षड्यंत्र में संलिप्त है, तो उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।”
बताया जा रहा है कि राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी, अहमद पटेल, पी चिदंबरम और केसी वेणुगोपाल जैसे शीर्ष कॉन्ग्रेस नेता पिछले 72 घंटों से सचिन पायलट के संपर्क में हैं और पार्टी के दरवाजे ‘खुले’ रखे हैं। प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कॉन्ग्रेस पार्टी को एक ‘परिवार’ के रूप में संदर्भित करते हुए कहा कि परिवार में उत्पन्न होने वाले मुद्दों को परिवार के भीतर ही हल किया जाना चाहिए।
जब से कॉन्ग्रेस विधानमंडल की बैठक संपन्न हुई है, तब से राजस्थान में विधायकों के समर्थन को लेकर असमंजस की स्थिति है। News 18 की रिपोर्ट के मुताबिक 102 विधायक मीटिंग में शामिल हुए थे। वहीं स्वराज्य ने बताया कि मीटिंग में 18 कॉन्ग्रेस विधायक नदारद रहे। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि लगभग 100 विधायक मौजूद थे, जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी के पास राज्य विधानसभा में 107 विधायक हैं।
ऑपइंडिया ने केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के CEO पद से हटाए जा चुके दीपक कुमार के ईसाई मिशनरियों के साथ साँठगाँठ को लेकर कई खुलासे किए हैं। हमने पूर्व की रिर्पोटों में बताया है कि किस तरह विदेशों में ईसाईयों को बच्चे एडॉप्शन के लिए दे दिए जाते हैं, वहीं भारत के हिन्दू परिवारों को लगातार प्रतीक्षा सूची में रखा जाता है। CARA के सीईओ रहते दीपक कुमार के कई कारनामों के बारे में हम आपको बता चुके हैं। अब उसके फेसबुक प्रोफइल का पोस्टमॉर्टम करते हैं।
CARA सीईओ रहे दीपक कुमार के फेसबुक पर अश्लील तस्वीरें
दीपक कुमार ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर ऐसी-ऐसी तस्वीरें डाल रखी थीं, जो उसके जैसे पद पर रहने वाले अधिकारी या नेता कभी नहीं करते। हम यहाँ उन तस्वीरों के बारे में आपको बताएँगे जिसमें से कई में दीपक कुमार बिना कपड़ों के दिख रहा है और उसने एडिट कर तस्वीर में किसी युवती को घुसा रखा है। CARA सीईओ रहते भी उसने ये तस्वीरें लगा रखी थीं, जिनमें से कई उसने हाल ही में डिलीट की है।
यहाँ सवाल ये है कि ये तस्वीरें ग़लत नहीं थीं तो फिर दीपक कुमार ने इन्हें डिलीट क्यों किया? ऐसे पद पर बने रहने वाले व्यक्ति जिस पर इतने सारे आरोप लग रहे हैं, उसके लिए ये सब शोभनीय है या नहीं, ये आप तस्वीरें देख कर निर्णय ले सकते हैं। दीपक कुमार की इन तस्वीरों में से कुछ अश्लीलता को भी बढ़ावा देती दिख रही हैं। नीचे हम आपके समक्ष उन तस्वीरों को रख रहे हैं, जो उसने ही अपलोड की थी (इसीलिए ये कोई सीक्रेट नहीं है):
उसकी तस्वीर को चूमती हुई युवती: दीपक कुमार के फेसबुक से तस्वीर
इसमें भी एक बैनर पर एडिट कर के दीपक ने अपनी तस्वीर डाल दी और एक युवती को वहाँ इन्तजार करते हुए दिखा दिया
दीपक कुमार पहले सेना में कार्यरत था, इस तस्वीर में भी उसने एडिट कर के लड़की घुसाई है
दीपक कुमार एक सरकारी संस्था में सर्वोच्च पद पर था, जिसकी गरिमा को बनाए रखना उसका कर्तव्य था, लेकिन सार्वजनिक रूप से उसके सोशल मीडिया पोस्ट्स में वो गंभीरता कभी नहीं दिखती। उसकी तस्वीरों से स्पष्ट होता है कि वो हर तस्वीर में किसी न किसी लड़की को एडिट कर के डाल दिया करता था। हालाँकि, अब इनमें से अधिकतर उसके प्रोफाइल से गायब हैं, क्योंकि उसने डिलीट कर दिया है।
हिन्दू पेरेंट्स को एडॉप्शन के लिए तरसाया, ईसाइयों पर मेहरबानी
ऐसे ही एक हिन्दू पेरेंट्स की पीड़ा के बारे में हमें पता चला, जिन्होंने 2010 में हिमांशी शर्मा नामक बच्ची को अडॉप्ट किया था। लेकिन उन्हें CARA की तरफ से NOC सर्टिफिकेट नहीं दिया गया। दीपक कुमार ने बार-बार अनुरोध के बावजूद इसे रोके रखा। सुनीता शर्मा बताती हैं कि ‘हिन्दू एडॉप्शन प्रक्रिया’ के तहत सारे वैध डाक्यूमेंट्स उनके पास थे, लेकिन फिर भी NOC नहीं दिया गया। 7 साल तक इसे लटकाए रखा गया था।
सुनीता शर्मा और उनके पति के वकीलों ने बार-बार दीपक कुमार से संपर्क करना चाहा, लेकिन उसने इनके कॉल्स उठाने ही बंद कर दिए। बार-बार पत्र लिख कर कहा जाता रहा कि एडॉप्शन की प्रक्रिया को पूरा किया जाए लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। पेरेंट्स को अपनी बच्ची को यूके से वापस लाना था, लेकिन NOC के कारण सब अटका पड़ा था। इससे हिमांशी के एडमिशन में भी दिक्कतें आ रही थीं।
वहीं गोविंदईया यतीश ने CARA से 2 साल तक की स्वस्थ बच्ची के एडॉप्शन की माँग की थी, लेकिन उन्हें पल्ल्वी नामक जो बच्ची दी गई उसको एक बड़ी बीमारी थी। ये बात पेरेंट्स से छिपाई गई। यानी, हिन्दू पेरेंट्स को सूटेबल मैच के लिए लगातार तरसाया गया। बच्ची की बीमारी के बारे में न बताया जाना ये भी दिखाता है कि ‘चाइल्डल्ड्स राइट्स एक्ट’ के तहत उनकी देखभाल और इलाज के लिए भी समुचित व्यवस्था नहीं की जाती है।
CARA से हटाए जाने के बावजूद दीपक करता रहा मनमानी
पद से हटाए जाने की आहट के बावजूद दीपक कुमार ने आनन-फानन में स्टियरिंग कमेटी के लिए विज्ञापन निकाल दिया। कई आरोपों में फँसे और कुर्सी जाने की आशंका के पीछे इस तरह की हरकत का कारण क्या हो सकता है? बता दें कि स्टियरिंग कमेटी CARA के मामलों के लिए सर्वोच्च फोरम है। नीचे हम जून 15, 2020 को जारी किए गए उस आधिकारिक विज्ञापन का अंश पेश कर रहे हैं:
स्टीयरिंग कमिटी के लिए जारी किया गया विज्ञापन
इतना ही नहीं, विदाई होने के बावजूद दीपक कुमार ने CARA के रिक्त पदों को भरने के लिए जून 20, 2020 को विज्ञापन जारी कर दिया। शक है कि मौजूदा स्टियरिंग कमेटी में बैठे नामित लोग भी एनजीओ की आड़ में ईसाई मिशनरियों के लिए काम करते हैं। दीपक ने अपने प्रभाव से स्टियरिंग कमेटी में भी अपने लोग बिठा रखे थे। इसलिए जाते-जाते वो पुनः अपने लोगों को बिठाने की फिराक में था।
संविदा पर काम कर रही जिन महिलाओं पर ऑनलाइन बच्चे छुपाने का आरोप सिद्ध हुआ था, उनको भी दीपक कुमार ने जाते-जाते एक वर्ष का सेवा विस्तार और 10 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी का इनाम दे दिया है। मिनी जॉर्ज, अपर्णा सहित सभी ईसाई मिशनरियों के लिए कार्य करने वाली संविदा कर्मचारियों का अगले साल 30 जून तक कार्यकाल बढ़ाया गया है। आरोप है कि वेतन बढ़ाने के लिए कोई मूल्यांकन नहीं किया गया है। दीपक कुमार ने सीधे वेतन भी बढ़ाया और प्रशस्ति-पत्र भी बाँट दिया।
अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वैज्ञानिक बिस्वास जैसे अनुभवी व्यक्ति को CARA से हटा कर दीपक कुमार ने अपने इशारों पर काम करने वाली अपर्णा, मिनी जार्ज, गरिमा व शालिनी आदि जिन्हें सरकारी कार्यालयों में कार्य का कोई अनुभव नहीं था, को लाया ताकि उनसे मिशनरी योजना अनुसार कार्य करवा सके। इन सबके बावजूद मीडिया में उसके लिए एक शब्द भी नहीं लिखा गया। मीडिया क्यों चुप है?
इससे पहले क्या हुए थे खुलासे?
दीपक कुमार ने 2017 में मध्य प्रदेश में ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित दो संस्थाओं को रातों-रात एडॉप्शन एजेंसी के रूप में मान्यता दिलाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया था। महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों की मदद से उसने इन संस्थाओं को मान्यता दिलवा भी दी थी। मध्य प्रदेश में ईसाई मिशनरियों द्वारा ये संस्थाएँ पिछड़े इलाक़े बुंदेलखंड के सागर और दमोह में संचालित हैं।
वैज्ञानिक एसके डे विश्वास ने बताया था कि संस्था में उनके पीठ पीछे अपमानजनक बातें कही जाती हैं। उन्होंने बताया था कि उनके वेतन में जान-बूझकर देरी की जाती है और बिना किसी कारण के वेतन में से रकम काट ली जाती है। साथ ही उन्होंने ये भी आरोप लगाया था कि सीसीटीवी कैमरों में से एक को उन पर ही केंद्रित रखा जाता है, ताकि उनकी सारी गतिविधियाँ रिकॉर्ड की जा सके। CEO दीपक कुमार पर काउन्सलेट्स के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया गया था।
भारतीयों को कारा से बच्चा गोद लेने के लिए तीन से सात साल तक प्रतीक्षा सूची में रहना पड़ता है, लेकिन विदेशी ईसाई परिवारों को बहुत कम समय में बच्चा मिल जाता है। ईसाई मिशनरियों के प्रभाव का आलम यह है कि कारा के सीईओ दीपक कुमार ने कोरोना संकट और लॉकडाउन के समय भी बच्चों को विदेश भेजा। अप्रैल माह में भी विशेष विमान से ये बच्चे इटली, अमेरिका, माल्टा और जॉर्डन भेजे गए।
उनके दो भतीजे हैं अमन और शिशिर। इन दोनों को पहले तीन महीने तक एमटीएस के पद पर 10 हजार रुपए के मासिक वेतन के साथ रखा गया, उसके बाद यंग प्रोफेशनल्स के पद पर बिठा कर वेतन तीन गुना बढ़ा दिया गया। 9 महीने बाद तो इन दोनों को सलाहकार का पद थमा दिया गया और 60 हज़ार रुपए प्रतिमाह दिए जाने लगे। इस तरह की उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि कई नियुक्तियाँ की हैं।
केरल में नन के साथ बलात्कार के आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल को पिछले साल मिली जमानत रद्द हो गई है। इससे साथ-साथ एक स्थानीय अदालत ने सोमवार (जुलाई 13, 2020) को उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया है।
यह मामला पहले 1 जुलाई को सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया था। हालाँकि, आरोपित ‘कोरोना वायरस कंटेनमेंट जोन में रहने’ का हवाला देते हुए अदालत में उपस्थित नहीं हुआ था।
Kerala: Kottayam Additional Dist Court cancels the bail granted to Franco Mulakkal, an accused in the nun rape case & has issued non-bailable arrest warrant against him. Order was passed by Judge G Gopakumar after Mulakkal repeatedly failed to appear before the court. (file pic) pic.twitter.com/6XrN3sWblN
सोमवार को, जब मामला फिर से उठाया गया, तो विशेष अभियोजक ने बताया कि जालंधर सिविल लाइन किसी भी कंटेनमेंट जोन का हिस्सा नहीं है। इसके बाद अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए बिशप फ्रैंको मुल्क्कल की जमानत रद्द कर दी।
बता दें कि लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद ट्रायल कोर्ट ने 10 जून को मामले को फिर से शुरू कर दिया था। उस समय अदालत ने बिशप की अनुपस्थिति पर गंभीर संदेह व्यक्त किया और उसे 1 जुलाई को पेश होने के लिए कहा था।
बिशप के वकील ने तब अदालत को सूचित किया था कि वह यात्रा करने में सक्षम नहीं है, क्योंकि जालंधर से कोई घरेलू उड़ान नहीं थी और उसे सरकारी गाइडलाइन्स के अनुसार 14 दिन के क्वरंटाइन से गुजरना होगा।
इससे पहले 7 जुलाई को केरल उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने नन द्वारा दायर यौन शोषण के मामले में बरी करने की अपील की थी।
न्यायमूर्ति वी शिरसी ने जालंधर क्षेत्र के बिशप को निर्देश दिया कि बलात्कार मामले में वह ट्रायल का सामना करे। केरल में उसी क्षेत्र की एक नन ने उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। अदालत ने बिशप की याचिका खारिज करते हुए अभियोजन के इस तर्क को स्वीकार किया कि बलात्कार मामले में मुलक्कल के खिलाफ प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य मौजूद हैं।
इस वर्ष मार्च में निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने की याचिका खारिज करने के बाद रोमन कैथोलिक गिरजाघर के वरिष्ठ पादरी ने समीक्षा याचिका दायर की। बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने बलात्कार का मामला दर्ज किया था।
गौरतलब है कि बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया था। हाई कोर्ट में दायर याचिका में पादरी ने कहा कि जब उन्होंने पीड़िता नन से वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल किया तो उसने उन्हें फँसा दिया।
उल्लेखनीय है कि इस मामले की प्रमुख गवाहों में से एक सिस्टर लिसी ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि उनके वरिष्ठ लोग लगातार उन पर फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ दिए गए बयान को बदलने के लिए दबाव डाल रहे हैं। वहीं आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया गया था।
लॉर्डस की बालकनी में टीशर्ट उतार हवा में लहराते सौरव गांगुली आपकी जेहन में आज भी जिंदा होंगे। पर क्या वे 30 हिंदू भी हैं, जिनकी हत्या इसी मैच को देखने के दौरान आतंकियों ने कर दी थी?
तारीख थी 13 जुलाई 2002। पूरे भारत की नजर लॉर्डस के मैदान पर थी। नेटवेस्ट सीरिज का फाइनल मैच था। किसी की नजरें टीवी पर गड़ी थी तो किसी के कानों से रेडियो सटा था। लेकिन, उस वक्त भी आतंकी हिंदू शिकार की तलाश में थे और उनका निशाना था जम्मू का हिंदू बहुल कासिम नगर।
13 जुलाई की वह रात कासिम नगर के हिंदुओं के लिए बेहद खौफनाक गुजरी। कच्ची बस्ती वाले इस पूरे इलाके में ज्यादातर हिंदू मजदूर रहते थे। उस रात अचानक मैच के दौरान रात के 8 बजे इलाके की लाइट चली गई। मगर, क्रिकेट के शौकीनों ने रेडियो पर उसकी कमेंट्री सुनना शुरू कर दिया। आस-पास कई बच्चे और महिलाएँ भी थीं।
सबके भीतर किसी भी अन्य भारतीय की तरह एक अलग ही उत्साह था। लेकिन उन्हें ये नहीं मालूम था कि वह अन्य भारतीयों की तरह उस रात भारत की जीत का जश्न नहीं मना पाएँगे, क्योंकि उनपर तो लश्कर के आतंकी नजर जमाए बैठे थे।
उस रात करीब 8 आतंकी अलग भेष में कासिम नगर पहुँचे और देखते-देखते ही सारी मुस्कुराहटें सिसकियों में बदल गईं। इन आतंकियों ने मैच की कमेंट्री सुन रहे हिंदुओं पर ग्रेनेड की बरसात की और फिर Ak-56 से ताबड़तोड़ फायरिंग की।
2 से 3 मिनट के इस खूनी खेल में उन्होंने लगभग 30 हिंदुओं को मौत के घाट उतार दिया, जबकि 30 लोग इस आतंकी हमले में बुरी तरह घायल हो गए। मरने वालों में 1 बच्चा, 13 महिलाएँ, कुछ भिखारी और 2 नेत्रहीन भी शामिल थे।
बताया जाता है कि हिंदुओं की लाशें बिछाने के बाद भी आतंकियों को चैन नहीं मिला। उन्होंने हिंदुओं के मंदिरों पर भी हमला किया। बाद में अंधेरे और जंगलों का फायदा उठाकर सभी वहाँ से फरार हो गए। घायलों को किसी तरह से अस्पताल पहुँचाया गया। लेकिन वहाँ भी कुछ लोगों ने दम तोड़ दिया।
भारतीय भले ही 13 जुलाई की इस तारीख को सौरव गांगुली की टीशर्ट और भारत की जीत के लिहाज से याद करें। लेकिन इस्लामिक आतंकियों के लिए इस दिन को याद करने की वजह कुछ और है। दरअसल, इस्लामिक आतंकी व अलगाववादी महाराजा हरि सिंह के डोगरा रूल के ख़िलाफ़ इस दिन को ब्लैक डे के तौर पर मनाते हैं। इसी दिन 13 जुलाई 1931 को श्रीनगर में सैंकड़ो इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जेल पर हमला बोल दिया था। उनका मकसद भड़काऊ भाषण देने वाले अब्दुल कादिर को जेल से निकालना था। इसी हुड़दंग को रोकने के लिए पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी थी, जिसमें करीब 10 दंगाई मारे गए थे।
पुलिस ने अपनी जाँच में इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा का हाथ पाया था। बाद में मोहम्मद इदनाम नाम के आतंकी को गिरफ्तार कर उसके 7 अन्य साथियों को भी गिरफ्तार किया गया। जाँच में पता चला था कि इन लोगों को पाकिस्तान की ISI ने इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिहाज से भर्ती किया था।
पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति ने इस घटना को सुनते ही इससे इस्लामबाद के किसी भी प्रकार के कनेक्शन पर अपना पल्ला झाड़ लिया था। जबकि पाकिस्तान के यूनाइटेड जेहादी काउंसिल ने ये बयान दिया था कि जिहाद को कभी भी एक व्यक्ति या फिर राज्य द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
यशवंत सिन्हा की आत्मकथा Relentless: An Autobiography से साभार
यहाँ बता दें, 13 जुलाई के उस खौफनाक मंजर का जिक्र उस समय विदेश मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने अपनी आत्मकथा में भी किया है। इस किताब में उन्होंने बताया है कि हमले की सूचना मिलने के बाद इस संबंध में फौरन मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बंगाल भाजपा के विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की मौत पर संवेदना जताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा अध्यक्ष ने इसे जघन्य और संदिग्ध हत्या बताया है और साथ ही यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं से साबित होता है कि पश्चिम बंगाल में पूरी तरह ‘गुंडा राज’ है। ममता बनर्जी की सरकार में पूरे राज्य की क़ानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है।
सुदर्शनपुर के रायगंज में हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का मृत शरीर एक फंदे से झूलता हुआ पाया गया। उनके दोनों हाथ बंधे हुए थे। नड्डा ने अपने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा:
“पश्चिम बंगाल के हेमताबाद से भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की जघन्य, संदिग्ध हत्या हैरान और निराश कर देने वाली है। इस घटना से पता चलता है कि ममता बनर्जी के राज में प्रदेश की क़ानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। जनता ऐसी सरकार के तौर तरीकों को कभी नहीं भूलती है। हम इस घटना की पुरजोर निंदा करते हैं।”
The suspected heinous killing of Debendra Nath Ray, BJP MLA from Hemtabad in West Bengal, is extremely shocking and deplorable. This speaks of the Gunda Raj & failure of law and order in the Mamta govt. People will not forgive such a govt in the future. We strongly condemn this.
इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस मामले से जुड़ी कुछ और जानकारी अपने ट्विटर एकाउंट पर साझा की। ट्वीट में दी गई जानकारी के मुताबिक़ देबेन्द्र नाथ रॉय की शर्ट की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है। जिसमें हत्या के लिए दो ज़िम्मेदार लोगों का नाम सामने आया है।
पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की मौत संबंधी जाँच के लिए सारे ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं, मौके पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट पहुँच चुके हैं और ट्रैकर डॉग भी छोड़े जा चुके हैं। अभी पोस्टमॉर्टम होना है, लोगों से यह अपील है कि वह किसी नतीजे पर न जाकर जांच पूरी होने का इंतज़ार करें।
Today morning the dead body of MLA Hemtabad, Debendra Nath Roy was detected hanging from the verandah ceiling of a mobile shop at Balia, Deben More, Raigunj, Uttar Dinajpur…(1/3)
भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय रविवार (जुलाई 12, 2020) को ही अपने पैतृक गाँव बिंडोल पहुँचे थे। परिजनों का कहना है कि रविवार रात 1 बजे कुछ युवक उन्हें बुलाने आए थे। इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई। सोमवार की सुबह 7 बजे कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें फंदे से झूलता हुआ पाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने बताया है कि विधायक का मृत शरीर बंद चाय की एक दुकान के सामने झूलता हुआ मिला। फ़िलहाल पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। भाजपा विधायक के परिजनों का कहना है कि देबेन्द्र नाथ रॉय की हत्या हुई है। उनका कहना है कि एक साजिश के तहत उन्हें लटका दिया गया। रायगंज के सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री देबाश्री चौधरी ने उनकी मौत की जाँच की माँग की है।
2016 के विधानसभा चुनाव में देबेन्द्र नाथ रॉय सीपीएम के टिकट पर चुनाव जीते थे। उन्होंने नार्थ दिनाजपुर के हेमताबाद से जीत दर्ज की थी। वो ग्राम पंचायत चुनाव में भी सीपीएम के लिए हैट्रिक जीत दर्ज कर चुके थे। उन्होंने कोआपरेटिव सोसाइटी की मदद से गाँव में कई लोगों की वित्तीय रूप से मदद की थी। उन्होंने 2019 में दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली थी।
Mamata Banerjee’s government has deteriorated law and order, spread across the state ‘ Punk Raj ‘ – JP Nadda
उत्तर प्रदेश के मथुरा से 50 किमी दूर के गाँव है- मडोरा। मडोरा में कुछ दिन पहले कपूर प्रजापति से ‘कासिफ’ बना व्यक्ति अपनी अपनी दो नाबालिग बच्चियों का निकाह दूसरे समुदाय के मेवात के दो युवकों से करवाने जा रहा था।
हिंदूवादी संगठनों को इसकी सूचना मिलते ही नाबालिग लड़कियों की जिंदगी तबाह होने से बचा ली गई और आरोपित पिता को जेल में बंद कर दिया गया। लेकिन इस धर्म-परिवर्तन के खेल को रचने वाला तैयब अब भी पुलिस की पकड़ से फरार है।
कपूर प्रजापति की भाभी से ऑपइंडिया की बात
ऑपइंडिया ने पूरे मामले पर जानकारी जुटाने के लिए कपूर प्रजापति के परिजनों से बात करने की कोशिश की। हमारा संपर्क उसकी भाभी महेंद्री से हो पाया। महेंद्री ने हमें बताया, “कपूरा (शिकायत में नाम कपूर है) ने करीब 20 साल पहले दो लड़कियों और 1 आदमी को मारा था। उस समय गाँव के दूसरे समुदाय के लोगों ने कहा कि यदि वो धर्मान्तरण कर लेगा तो उस पर कोई केस नहीं होने देंगे। इसी के बाद उसने इस्लाम अपनाया। लेकिन हम सबको बोलता रहा कि मैंने अपनी मर्जी से इसे कबूल किया है।”
महेंद्री बताती हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में गाँव के एक तैयब नामक व्यक्ति ने कपूरा को खूब उकसाया था। उन्होंने कहा, “उसने अपने ऊपर लगे आरोपों के कारण करीब एक साल जेल भी काटी। इस दौरान भी तैयब उसके साथ ही था। मगर, बाद में कपूरा के भैया ने जमानत देकर उसे छुड़वा लिया। इसके बाद वह हिंदू बना और हमारे ससुर ने उसके नाम जमीन कर दी। जमीन पाते ही कपूरा फिर तैयब की दोस्ती में पड़ गया और एक साल पहले ही फिर से इस्लाम कबूल कर लिया।”
कपूरा की भाभी अपनी भतीजियों की शादी की जानकारी हमसे साझा करते हुए कहती हैं कि कपूरा और उसकी पत्नी अपनी नाबालिग बच्चियों की शादी मेवात के दूसरे मजहब के युवकों से करवाना चाहते थे और साथ ही उनको भी धमकी देते थे कि या तो वह अपने आप इस्लाम अपना लें या फिर वे लोग उन्हें मजबूर कर बना देंगे।
कपूर प्रजापति “काशिम” बन गया, तो गोपाल का बेटा दिनेश “अबदुल्ला” हो गया है और अपनी दोनों नाबालिग बेटियों का निक़ाह #मेवात में कर रहा है, गाँव वाले बताते हैं की उसे निक़ाह के बदले ट्रैक्टर और जमीन मिल रही है, घटना #मथुरा के गांव मरोड़ा गाँव की है। #महिला बता रही है मैं मजबूर हूँ pic.twitter.com/PB6yexfNsU
— Gaurav Mishra गौरव मिश्रा ?? (@gauravstvnews) July 12, 2020
महेंद्री के मुताबिक, इस बात पर कई बार कपूरा और उनके जेठ के बेटे ने उनसे मारपीट भी की थी। वे बताती हैं कि आखिरी बार मारपीट की घटना 5-6 महीने पहले हुई थी। उन्होंने इस घटना पर शिकायत दर्ज करवानी चाही थी। लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
8 बेटियों और 1 बेटे की माँ महेंद्री का कहना है कि कपूरा और उनके जेठ के लड़के ने उनके धर्मांतरण के लिए उनके बच्चों को मारने की धमकी भी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर हमने धर्मांतरण नहीं किया तो बच्चों को मार देंगे।
उनके मुताबिक कपूरा के दिमाग में धर्म परिवर्तन की बात तैयब ही डालता है। लेकिन, फिलहाल उसे नाबालिग बेटियों की शादी करवाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। पर, तैयब अभी भी फरार है।
यहाँ बता दें, लड़कियों के नाबालिग होने का सबूत उनके स्कूल से भी मिले हैं, जिसे हिंदूवादी संगठनों ने अपनी शिकायत के साथ संलग्न किया है। इससे पता चलता है कि कपूरा की दोनों बेटियाँ नाबालिग हैं। मगर बावजूद इसके वो उनका निकाह करवाना चाहता था।
ऑपइंडिया की पुलिस से बात
ऑपइंडिया ने कपूरा की गिरफ्तारी की पुष्टि करने के लिए गोवर्धन एसएचओ से भी बात की। उन्होंने बताया कि इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिनका नाम कपूरा और दिनेश है। पुलिस के मुताबिक कुछ आरोपित अभी फरार चल रहे हैं। उनपर भी कार्रवाई होगी। अभी उनके लिए छानबीन जारी है। गाँव में पुलिसवालों को तैनात किया गया है। लड़कियों के नाबालिग होने का भी प्रमाण मिल चुका है।
हिंदू संगठन का पक्ष
इसके बाद ऑपइंडिया ने इस संबंध में हिंदू संगठन से संपर्क किया। हमारी बात हिंदू दल रक्षा के जिला प्रमुख ऋषि कुमार शर्मा से हुई। हमने उनसे जानना चाहा कि आखिर ये मामला उनके संज्ञान में कैसा आया। उन्होंने बताया कि उन्हें किसी ने इस घटना के बारे में फोन करके बताया था। अब चूँकि वो उस गाँव से 20-25 किमी दूर रहते थे। तो उन्होंने अपने कुछ साथियों से इस मामले की प्रमाणिकता का पता लगाने को कहा। पड़ताल में उन्हें पता चला कि मामला शत-प्रतिशत सही है।
इसके बाद उन्होंने एसपी देहात को इस घटना की लिखित में जानकारी दी और अगले दिन स्वयं कुछ साथियों के साथ मरोडा गाँव में पहुँच गए। इस बीच उन्होंने पूरे मामले के बारे में वहाँ के विधायक, थानाध्यक्ष और सीओ को जानकारी दे दी। लेकिन जब वे वहाँ पहुँचे तो तादाद में ज्यादा होने के कारण कुछ अधिकारियों ने उन लोगों को गाँव में जाने से मना कर दिया। अधिकारियों का मानना था कि इस तरह भीड़ के गाँव में जाने से वहाँ का माहौल बिगड़ सकता है या आपसी झड़प भी हो सकती है।
हिंदूवादी संगठन के जिला प्रमुख ऋषि बताते हैं कि उनके संगठन की पहली प्राथमिकता सिर्फ़ लड़कियों की शादी रुकवानी थी, क्योंकि उनके स्कूल से मिला प्रमाण भी यही बता रहा था कि वो नाबालिग हैं। ऋषि के अनुसार, इस घटना की जानकारी होने के बाद कई स्थानीय युवकों और संगठन से जुड़े लोगों में काफी गुस्सा था, जिसको भाँपते हुए ये तक कह दिया गया था कि अगर हिंदूवादी नेता कोई भी हंगामा करता है तो उसे जेल में डाल दो। लेकिन, एक स्थानीय भाजपा नेता के बेटे जीतू ने उन युवकों को समय रहते समझाया और शांत रहने की अपील करते हुए एक हफ्ते का समय माँगा।
उन्होंने आश्वासन दिया कि वे ये शादी नहीं होने देंगे और घर के मुखिया पर भी कार्रवाई करवाएँगे जिसने नाबालिग लड़कियों की शादी मेवात के दूसरे समुदाय से करवाने के बारे में सोची। ऋषि स्पष्ट शब्दों में कहते हैं कि उनकी माँग ये है कि कपूरा के साथ जो हुआ, वो अच्छा है। लेकिन तैयब पर भी जल्द से जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए। क्योंकि, कपूरा सिर्फ़ एक मोहरा था। लेकिन असली खेल रचने वाला तैयब है। अगर मास्टरमाइंड बाहर रहता है तो वो आने वाले समय में और लोगों को भी अपना शिकार बनाएगा।
ऋषि कहते हैं, “पुलिस ने हम लोगों से कहा कि हड़कंप न मचाएँ। प्रशासन अपना काम कर रहा है। लेकिन आप खुद सोचिए। अगर प्रशासन वाकई अपना काम कर रहा है, तो लोगों ने हमें फोन करके इस बारे में जानकारी क्यों दी? हम तो उन्हें जानते भी नहीं थे। हमारा नंबर फेसबुक से निकालकर हमें इस संबंध में बताया गया।”
राजस्थान में चल रहे सियासी खींचतान के बीच भारतीय जनता पार्टी की नेता उमा भारती ने राहुल गाँधी पर प्रतिक्रिया दी है। उमा भारती ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कॉन्ग्रेस की हालत के लिए राहुल गाँधी को ज़िम्मेदार ठहराया है। उनके मुताबिक़ सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे युवा नेताओं से ईर्ष्या रखने की वजह से कॉन्ग्रेस की आज यह हालत हो चुकी है।
उमा भारती पहली दिग्गज नेता हैं जिन्होंने खुले तौर पर सचिन पायलट को भाजपा में शामिल होने का न्यौता दिया है। उमा भारती ने अपने बयान में कहा सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों ही योग्य दावेदार हैं। दोनों मेरे भतीजे जैसे हैं। अगर सचिन यहाँ (भाजपा) आते हैं तो हमें बहुत ख़ुशी होगी।
उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य और सचिन जैसे युवा नेताओं से राहुल गाँधी की जलन के चलते देश के दो बड़े राज्यों में कॉन्ग्रेस की हालत इतनी बुरी हो चुकी है। उमा भारती ने कहा, “राहुल गाँधी को ऐसा लगता है कि सचिन जैसे नेताओं को बड़ी ज़िम्मेदारी मिली तो पार्टी में उनका महत्व नहीं रह जाएगा। दोनों ही नेता योग्य और कुशल हैं, उनमें नेतृत्व करने की क्षमता है। ऐसे में यदि वह (सचिन पायलट) भाजपा में शामिल होते हैं तो यहाँ उनकी क़द्र होगी। राहुल गाँधी के जेहन में जिस तरह ईर्ष्या मौजूद है, उससे केवल कॉन्ग्रेस का नुकसान ही होने वाला है।”
Rahul Gandhi is responsible for what’s happening now in Rajasthan&happened in Madhya Pradesh. He doesn’t allow young leaders in Congress to grow. He feels that if educated&able leaders like Jyotiraditya Scindia&Sachin Pilot get high posts then he’ll be left behind:Uma Bharti, BJP pic.twitter.com/Uz54LPWZ35
इस बीच राजस्थान में राजनीतिक उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। हर क्षण कोई न कोई नया परिवर्तन हो रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पर संकट बराबर बना हुआ है, आज सुबह ही जयपुर के पार्टी कार्यालय से सचिन पायलट के पोस्टर हटा दिए गए थे। लेकिन दोपहर होते-होते उन्हें फिर लगा दिया गया था। कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने उनसे बात करने की भी अपील की थी।
इस दौरान कॉन्ग्रेस के नेताओं की तरफ से बयानबाज़ी भी जारी है, राज्य का राजनीतिक समीकरण सुधारने की हर कोशिश जारी है। राजस्थान में कॉन्ग्रेस दो हिस्सों में बँट चुकी है, ऐसे में हर कोई अपनी तरफ से दावे किए जा रहा है। सचिन पायलट के गुट का दावा है कि उनके साथ करीब 30 विधायक हैं, जबकि और भी साथ आ सकते हैं। जल्द ही इन विधायकों के इस्तीफा देने की बात भी कही जा रही है। दूसरी ओर क़ॉन्ग्रेस इस दावे को नकार रही है।
राजस्थान की राजनीति हर घंटे नई करवट लेती जा रही है। हालॉंकि अभी भी अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार का संकट टल नहीं है। पार्टी उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के मनुहार में लगी हुई है।
सुबह जयपुर के पार्टी दफ्तर से पायलट के पोस्टर हटा दिए गए थे। लेकिन दोपहर होते-होते उन्हें फिर लगा दिया गया है। पार्टी ने उनसे बात करने की भी अपील की है।
पायलट सोमवार (जुलाई 13, 2020) को विधायक दल की बैठक में शामिल होने के लिए नहीं पहुँचे। मुख्यमंत्री गहलोत के मीडिया सलाहकार ने बैठक में 107 विधायकों की मौजूदगी का दावा किया है।
हालाँकि, बैठक से पायलट समेत कम से कम 19 विधायक नदारद रहे जो बताता है कि संकट अभी खत्म नहीं हुआ। बैठक के बाद जिस तरह से सभी विधायकों को होटल में सुरक्षित कर लिया गया है, उससे भी साफ है कि इस सियासी पटकथा के कई पन्ने अभी लिखे जाने शेष हैं।
इसी बीच कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा अशोक गहलोत और सचिन पायलट के साथ बातचीत कर प्रदेश के राजनीतिक संकट को दूर करने की कोशिश कर रही हैं।
#WATCH Rajasthan: Chief Minister Ashok Gehlot, Congress leaders and party MLAs show victory sign, as they gather at CM’s residence in Jaipur.
वहीं मुख्यमंत्री आवास पर मौजूद 100 से ज्यादा विधायकों ने मीडिया के सामने विक्ट्री साइन दिखाया। कॉन्ग्रेस का दावा है कि उसके पास 109 विधायकों का समर्थन है।
The beginning of the end of BJP govt at the Centre will start from Rajasthan. Ppl of Rajasthan want govt led by CM Ashok Gehlot to complete its full term. 115 MLAs were with us last night, now 109 are with us. We’re winning the number game: State Min Pratap Singh Khachariyawas pic.twitter.com/K9P4yfvTIE
राजस्थान के मंत्री प्रताप सिंह ने कहा, “केंद्र में भाजपा सरकार के अंत की शुरुआत राजस्थान से होगी। राजस्थान के लोग चाहते हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे। कल रात 115 विधायक हमारे साथ थे, अब 109 हमारे साथ हैं। हम संख्याबल जीत रहे हैं।”
दूसरी तरफ पायलट गुट अभी भी 30 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है। पायलट ने दावा किया था कि कॉन्ग्रेस के 30 से अधिक विधायकों और कुछ निर्दलीय विधायकों द्वारा उन्हें समर्थन देने के वादे के बाद अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है।
इसके अलावा रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी सचिन पायलट के संपर्क में है और उन्हें मनाने की कोशिश की जा रही हैं। उनसे 48 घंटों में अनेकों बार कॉन्ग्रेस नेतृत्व की तरफ से बात की गई है।
उन्होंने आगे कहा, “एक बात मैं बता दूँ कि हम राजस्थान में पूरे पाँच का कार्यकाल पूरा करेंगे। भाजपा कितने भी हथकंडे अपनाए। ईडी, सीबीआई और आयकर के जरिए वह लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को नहीं गिरा पाएगी।”
#WATCH If anyone is upset in family, they should find a solution by sitting with members of the family…On behalf of Congress leadership, including Sonia ji & Rahul ji, I convey that doors of Congress party are always open for Sachin ji or any member: Randeep Surjewala, Congress pic.twitter.com/x4sYvVs4Gk
सुरजेवाला ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “सभी विधायकों के लिए दरवाजे खुले हैं, खुले रहेंगे। सोनिया-राहुल गाँधी से बात कीजिए। व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को अस्थिर करना गलत है। सभी विधायक विधायक दल की बैठक में शामिल हों। पार्टी फोरम में अपनी बात रखें, न की पार्टी के बाहर। भाजपा सीबीआई, आयकर, ईडी के जरिए लोकतंत्र की हत्या करती है।”
राजस्थान में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सोमवार को विश्वास जताया कि उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट कॉन्ग्रेस नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने पायलट को ‘सच्चा कॉन्ग्रेसी’ बताया।
राजस्थान में कॉन्ग्रेस दो धड़ों में बँट चुकी है, ऐसे में हर किसी की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं। सचिन पायलट के गुट का दावा है कि उनके साथ करीब 30 विधायक हैं, जबकि और भी साथ आ सकते हैं। जल्द ही इन विधायकों के इस्तीफा देने की बात भी कही जा रही है। दूसरी ओर क़ॉन्ग्रेस इस दावे को नकार रही है।