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‘सचिन पायलट अब BJP में’ – कॉन्ग्रेस नेता पीएल पूनिया ने अपने बयान को कहा मानवीय भूल

राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच कॉन्ग्रेस नेता पीएल पूनिया ने बड़ा बयान दिया। पीएल पूनिया ने अपने बयान में सचिन पायलट को अब भाजपा में शामिल बताया है।

हालाँकि इसके तुरंत बाद उन्होंने एक वीडियो ट्वीट कर इसे मानवीय भूल बताया।

छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेस प्रभारी पीएल पूनिया ने कहा है कि सचिन पायलट अब बीजेपी में हैं। उन्होंने कहा, “हम सभी जानते हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रति भाजपा का रवैया कैसा है। हमें भाजपा से प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी में सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाता है।”

गौरतलब हो कि पीएल पूनिया का ये बयान ऐसे वक्त में आया है, जब राजस्थान में सचिन पायलट के बगावती तेवर देखने को मिल रहे हैं और सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। सचिन पायलट के ऑफिस से दावा किया गया है कि उनके साथ 30 विधायक हैं और इसी कारण गहलोत सरकार अल्पमत में आ गई है।

रिपोर्ट्स बताती है कि इस उठापटक के बीच कॉन्ग्रेस पार्टी के राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि सभी विधायकों को मुख्यमंत्री के घर बुलाया गया है और साथ ही ये भी कहा गया है कि जो विधायक नहीं आएगा उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। बता दें अब इसी आदेश के मद्देनजर विधायक दल की बैठक में पार्टी के करीब 90 विधायक पहुँचे हैं।

हालाँकि, विधायक दल की बैठक और पीएल पूनिया के बयान के बीच पूर्व कॉन्ग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने ट्विटर पर अपनी दिल की बात लिख डाली है। उन्होंने सचिन पायलट को अपना समर्थन देते हुए लिखा, “मैं पूर्ण रूप से सचिन पायलट के पीछे हूँ।”

उन्होंने आगे लिखा, “एक बार तथ्यों को देखिए। साल 2013 के चुनाव में सीएम गहलोत के नेतृत्व में भाजपा को 163 मिली और कॉन्ग्रेस को 21 (सबसे कम)। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 73 सीटें आईं और कॉन्ग्रेस को 100। एक आदमी ने इसके लिए 5 साल दिए- सचिन।मगर सीएम कौन बना? “

यहाँ बता दें कि करीब पौने दो साल पहले राजस्थान में सत्ता में आई कॉन्ग्रेस 24 दिन पहले राज्यसभा चुनाव के बाद पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रही थी। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी आलाकमान आश्वस्त थे कि उनकी सरकार के पास पूरा बहुमत है और पाँच साल कोई मुश्किल होने वाली नहीं है, लेकिन गहलोत सरकार अब संकट से घिरती नजर आ रही है।

पायलट के नाराज होने की वजह विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) का नोटिस बताया जा रहा है। एसओजी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत अन्य मंत्रियों को भी नोटिस भेजा है। हालाँकि, सीएम ने कहा है कि यह सामान्य प्रक्रिया है। नोटिस के बाद पायलट समर्थक विधायक नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार ने सभी हदें पार कर दी हैं और अब अशोक गहलोत के साथ काम करना असंभव है।

‘4 मस्जिद तेज आवाज में अजान बजा कर कॉम्पिटिशन कर रहे कि किसकी आवाज अल्लाह तक जाएगी’

मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अजान बजाए जाने को लेकर अब एक और सेलेब्रिटी ने आवाज उठाई है। ‘बिग बॉस 8’ से लोकप्रियता पाने वाले प्रीतम सिंह ने सोनू निगम की राह पर चलते हुए मस्जिद में तेज आवाज में अजान के विरुद्ध आवाज उठाई है।

सोमवार (जुलाई 13, 2020) की सुबह प्रीतम सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिख कर अपना दर्द साझा किया। हालाँकि, इसके बाद उन्होंने अपने पेज को डीऐक्टिवेट कर दिया है।

प्रीतम सिंह के खिलाफ कई इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी टिप्पणी की। बता दें कि कुछ इसी तरह का वाकया सोनू निगम के साथ भी हुआ था। प्रीतम सिंह ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट मे लाउड्स्पीकर पर अजान पर तंज कसते हुए लिखा:

“ये समझने वाली बात है कि एक जगह पर चार मस्जिद हैं, इनसे 5 बजे अजान की तेज आवाज आनी शुरू हो जाती है। बात ये है कि आपस में ही इन सब के बीच प्रतियोगिता चल रही है कि कौन कितनी जोर से अजान बजाएगा। सोचने वाली बात तो ये है कि किसकी आवाज अल्लाह तक जाएगी। आप भी सोचिए और मैं भी सोचता हूँ। आपका दिन शुभ हो! सबका मालिक एक।”

सिर्फ सेलेब्रिटीज ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया में कई अन्य लोग भी अजान के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं। आशी चौधरी नामक एक युवती ने एक प्लाकार्ड के जरिए अजान के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि अजान करो लेकिन आवाज़ कम करो। साथ ही उन्होंने पूछा कि लाउडस्पीकर से क्या प्रूव करना चाहते हो? इसके बाद उन्हें इस्लामी कट्टरपंथियों की धमकियाँ मिलीं।

फरदीन मंडल नामक व्यक्ति ने आशी को मैसेज कर के धमकाया कि वो उनका रेप कर लेगा और चोटी पकड़ के बताएगा कि मजहब के एक आदमी से टक्कर लेने का परिणाम क्या होता है। उसने उन्हें ‘धंधा करने वाली’ बताते हुए धमकी दी कि जो उखाड़ना है, उखाड़ ले।

फरदीन ने दावा किया कि कट्टर किसी के बाप से भी नहीं डरता है। साथ ही उसने आपत्तिजनक तस्वीरें भी भेजी। वो इंदौर का रहने वाला है।

बता दें कि हाल ही में लाउडस्पीकर से अजान और गाजीपुर जिले में डीएम द्वारा लॉकडाउन के दौरान अजान पर लगाई गई पाबंदी को लेकर इलाहबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया था। हाईकोर्ट ने माना था कि लाउडस्पीकर से अजान पर प्रतिबंध वैध है, क्योंकि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है।

अदालत ने कहा था कि किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर से अजान करना दूसरे लोगों के अधिकारों में दखल देना है। दूसरों को सुनने के लिए मजबूर करने का अधिकार किसी को नहीं है।

गीतकार जावेद अख्तर ने भी लाउडस्पीकर पर अजान देने का विरोध किया था। कट्टरपंथियों और AIMIM के नेताओं के अलावा देवबंदी उलेमा ने इस पर नाराजगी जाहिर की थी।

मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा था कि संविधान इसकी इजाजत देती है तो फिर किसी को बयानबाजी कर सुर्खियाँ बटोरने का कोई मतलब नहीं है। उनका कहना था कि जावेद अख्तर जो माँग कर रहे हैं, यह पहले पहले भी होती आई है। देश के लोगों को इन पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

अखबार का मालिक प्यारे मियाँ, जिसने 14-17 साल की 5 लड़कियों को शराब पिलाई, नचवाया और रेप भी किया

भोपाल से एक अखबार निकलता है। नाम है – अफ़कार। जो इसे प्रकाशित करता है, वो पत्रकार है और मालिक भी। उसका नाम है – प्यारे मियाँ। प्यारे मियाँ की उम्र 68 साल है। पत्रकार, अखबार छापने वाली कंपनी का मालिक भी और उम्र साठ के ऊपर! मतलब इलाके में रसूख पूरा। भोपाल में प्यारे मियाँ ने इसी का फायदा उठाया और कम उम्र की लड़कियों को अपना शिकार बनाया। लेकिन फँस गया।

हुआ यह कि देर रात गश्त करती पुलिस पार्टी को 5 लड़कियाँ सड़क पर दिखीं। कारण पूछा गया तो जवाब देने के हालत में एक भी लड़की नहीं थी। सब शराब के नशे में थीं। नाबालिग लड़कियों का शराब के नशे में होना पुलिस को खटका। पुलिस ने सभी 5 लड़कियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। फिर इनकी काउंसलिंग की गई। जब पूछताछ हुई तो इन्होंने यौन शोषण का खुलासा किया।

घटना वाली रात इन पाँच लड़कियों में से सिर्फ एक लड़की के साथ प्यारे मियाँ ने रेप किया। लेकिन बाकी चार लड़कियों के साथ कभी कुछ नहीं हुआ है, ऐसा नहीं है। ऊपर पुलिस के द्वारा दिए प्रेस नोट को पढ़ेंगे तो पाएँगे कि प्यारे मियाँ अपने असिस्टेंट स्वीटी के साथ मिलकर काफी दिनों से इन लड़कियों का यौन शोषण करता रहा है।

पार्टियों में पैसे के बदले डांस करने और उसके बाद यौन शोषण (संभोग, रेप) के लिए प्यारे मियाँ ने इन नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फँसाया। और इस काम के लिए उसका साथ दिया असिस्टेंट स्वीटी ने। इस मामले में अब तक की जाँच में भोपाल के 5 बड़े नाम सामने आ रहे हैं। लड़कियों ने पुलिस को बताया है कि उन्हें शाहपुरा क्षेत्र में शनिवार की रात एक जन्मदिन की पार्टी में नाचने के लिए ले जाया गया था।

प्यारे मियाँ ने अपनी सहायक स्वीटी विश्वकर्मा की मदद से इन लड़कियों को अपने यहाँ नाचने के लिए बुलाया था। विष्णु हाइट्स स्थित फ्लैट में पार्टी के दौरान प्यारे मियां द्वारा एक नाबालिग का यौन शोषण करने की बात भी सामने आई है। इन पाँचों लड़कियों ने भी प्यारे मियां पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर उस फ्लैट में ले जाया जाता था। उन्हें इसके लिए धनराशि भी दी जाती थी।

सब कुछ स्वीटी विश्वकर्मा ही मैनेज करती थी और प्यारे मियां की तरफ से उन लड़कियों को धनराशि देने का प्रलोभन दिया करती थी। उन्हें पार्टियों के बहाने बुलाया जाता था और उनके साथ सेक्स किया जाता था। पुलिस 68 वर्षीय आरोपित की तलाश में लगी हुई है और उसकी सहायिका 21 वर्षीय स्वीटी को गिरफ्तार कर चुकी है। प्यारे के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस अब ये पता लगाने में जुटी है कि प्यारे मियाँ ने अब तक कितनी लड़कियों के साथ ज्यादती की है और कितनों की जबरन शादी कराई है। इस मामले में कई रसूखदारों के नाम सामने आने के कारण भी ये बड़ा मुद्दा बन सकता है।

‘मोदी का चमचा अमिताभ क्यों हुआ अस्पताल में भर्ती?’ – हिंदुओं से नफरत करने वाले प्रोफेसर ने उगला जहर

शिक्षित व्यक्ति समझदार ही हो- ये हर बार जरूरी नहीं होता। कई दफा पढ़े-लिखे इंसान भी ऐसी जाहिलियत भरी बातें करते हैं कि मानवता भी स्तब्ध रह जाए।

अशोक स्वैन इस बात का बिलकुल सटीक उदहारण हैं। जो साबित करते हैं कि कुत्सित मानसिकता वाला व्यक्ति केवल किताबों के सहारे पद को हासिल करना जानता है, उसका संवेदनाओं से कोई सरोकार नहीं होता।

एक ओर जहाँ अमिताभ बच्चन के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद पूरा देश उनकी सलामती की कामनाएँ कर रहा है। प्रशंसक हों या आलोचक उन्हें जल्द ठीक होने का संदेश दे रहे हैं। वहीं स्वीडन की उपसला यूनिवर्सिटी में पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट के प्रोफेसर अशोक स्वैन उन्हें मोदी का चमचा कहकर उनपर अपनी कुँठा निकाल रहे हैं।

अशोक स्वैन अपने ट्वीट में अमिताभ बच्चन के लिए लिखते हैं- “ये मोदी चमचा, कोरोना के हल्के लक्षण पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती हुआ है। इसने आयुष मत्रालय की voodoo दवाइयाँ क्यों नहीं ली। ये धोखेबाजी बिलकुल ऐसी है, जैसे भाजपा नेता कैंसर होने पर सीधे अमेरिका भागते हैं। मगर, बेवकूफों को गौमूत्र पीने को कहते हैं।”

बात इस अकेले ट्वीट की नहीं है। स्वीडन के इस प्रोफेसर को अमिताभ बच्चन से या उनकी बॉलीवुड यात्रा से कोई लेना-देना नहीं है। उनका गुस्सा तो मोदी सरकार और हिंदुओं पर है, जिसके चलते वह सदी के महानायक को भी नहीं बख्शना चाहते और उनके काम को नजरअंदाज करके सिर्फ़ उन्हें मोदी के प्रशंसक के तौर पर घेर रहे हैं।

अशोक स्वैन क्या है, इसके लिए आपको उसके कुछ अन्य ट्विट्स देखने होंगे। जो बताते हैं कि आखिर मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ करने वाले अमिताभ बच्चन को हुआ कोरोना उनके लिए संवेदना व्यक्त करने का मसला न होकर जहर उगलने का विषय क्यों है? अशोक के ट्विटर से गुजरते हुए मालूम चलता है कि उन्हें केवल हिंदुओं से नफरत नहीं है। बल्कि चीनियों के प्रति भी उनके मन में अपार प्रेम है।

इसके अलावा उन्हें मोदी सरकार के एक अन्य प्रशंसक व बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर से भी इतनी दिक्कत है कि वो तबलीगी जमात पर उठे सवालों को काउंटर करने के लिए अनुपम खेर की माता व भाई के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर निशाना साधने से नहीं चूकते और पूछते हैं कि आखिर ये लोग कौन सी जमात से हैं।

अशोक स्वैन के जहर उगलने का सिलसिला इतने पर नहीं थमता। वह आगे छत्रपति शिवाजी का अपमान करने वाली कॉमेडियन के प्रति अपनी सहानुभूति दिखाते हैं। लेकिन अर्णब गोस्वामी समेत भारतीय पत्रकारों के प्रति उनके मन में कुँठा साफ नजर आती है। वो स्वीडन में बैठे-बैठे विकास दुबे के एनकाउंटर को स्पष्ट हत्या बताते हैं और भगवा को आतंक का पर्याय बताने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

…एक और हिंदू बच्ची का अपहरण, सिंध के मो. शौकत गैंग का हाथ: जबरन इस्लाम कबूली सविता अभी भी खौफ में

पाकिस्तान के सिंध इलाके में एक और हिंदू नाबालिग लड़की के अपहरण का मामला उजागर हुआ है। घटना 11 जुलाई को मीरपुर खास के नफीस नगर गाँव की है। 12 साल की बच्ची का अपहरण करने के पीछे मोहम्मद शौकत नामक व्यक्ति के गैंग का हाथ है।

ट्विटर पर इस मामले की जानकारी पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने ट्वीट करते हुए दी है। राहत ने अपने ट्वीट के साथ बच्ची के परिजनों के बयान की वीडियो भी साझा की है। इस वीडियो में बच्ची के परिजन पाकिस्तान में अपनी हालत की कहानी स्वयं सुनाते नजर आ रहे हैं।

इस घटना के अलावा राहत ने सिंध की एक अन्य घटना को भी शेयर किया है। ट्वीट के अनुसार, सिंध के संघर में एक हिंदू लड़की सविता का कुछ समय पहले अपहरण हुआ था। इसके बाद उससे रेप किया गया और फिर उसे इस्लाम कबूल करवा लिया गया।

इतने के बावजूद सविता किसी तरह कट्टरपंथियों की चंगुल से भाग निकली और अपने परिवार से मिल गई। लेकिन, परिवार के पास लौटने के बाद भी उसके अंदर से डर खत्म नहीं हुआ। क्योंकि (ट्वीट के अनुसार) पाकिस्तान में इस्लाम को छोड़ना या फिर उसे छुड़वाने में मदद करने की सजा केवल मौत होती है। फिर चाहे किसी ने जबरन ही इस्लाम क्यों न कबूल करवाया हो।

यहाँ बता दें कि इन दोनों घटनाओं से पहले पिछले माह भी सिंध से अपहरण और धर्मांतरण का मामला सामने आया था। उस समय एक नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण वजीर हुसैन ने किया था। और, फिर बाद में उसने लड़की का धर्म परिवर्तन करवाकर उससे निकाह भी कर लिया था। मगर, मामले के तूल पकड़ने के बाद आरोपित पक्ष ने पीड़िता पर दबाव बनाकर हलफनामा दायर करवा दिया था और दावा किया था कि लड़की ने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूला है।

गौरतलब हो पाकिस्ताम में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार की घटनाएँ बेहद आम हैं। हिंदू लड़कियों के अपहरण और धर्म परिवर्तन की खबरें मीडिया में आए दिन आती रहती है। ऐसी घटनाओं पर सरकार और प्रशासन की चुप्पी भी कोई नई बात नहीं है। 

वहाँ भले ही इमरान सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बड़े-बड़े दावे करती है। मगर, वास्तविकता यही है कि वहाँ पर अल्पसंख्यकों का दमन धड़ल्ले से जारी है। आलम ये है कि अब पाकिस्तान के हालातों से पूरा विश्व वाकिफ हो गया है कि पाकिस्तान वो देश है जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता में किसी का जबरन धर्मांतरण बनाने का अधिकार भी निहित है।

‘अल्पमत में गहलोत सरकार’ – सचिन पायलट के बयान से बिगड़े सारे समीकरण, राजस्थान पहुँचे कॉन्ग्रेस के 3 बड़े नेता

राजस्थान में कॉन्ग्रेस के दो शीर्ष नेताओं अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। जहाँ सोमवार (जुलाई 13, 2020) को कॉन्ग्रेस ने विधायक दल की बैठक बुलाई हुई है, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट का दावा है कि मुख्यमंत्री आशिक गहलोत की सरकार अब बहुमत में है ही नहीं। राजस्थान में सरकार गिराने की साजिश को लेकर एफआईआर भी दर्ज की गई है।

इस मामले में राजस्थान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट को भी तलब किया गया है। अब उन्होंने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि अशोक गहलोत अब बहुमत खो चुके हैं और 30 कॉन्ग्रेस व निर्दलीय विधायक उनके साथ हैं। सचिन पायलट पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं और कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने पुराने साथी ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुलाकात की है।

हालाँकि, अब तक सचिन पायलट और भाजपा के बीच किसी समझौते की कोई ख़बर नहीं है लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान में भी कुछ वैसा ही हो सकता है लेकिन सचिन पायलट को भाजपा मुख्यमंत्री का पद ऑफर नहीं करेगी। अब सबकी नज़रें अशोक गहलोत द्वारा सोमवार को बुलाई गई बैठक में पहुँचने वाले विधायकों की संख्या पर टिकी हुई है।

राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से बहुमत के लिए 101 विधायकों का समर्थन होना चाहिए। मौजूदा कॉन्ग्रेस सरकार 107 विधायकों और निर्दलीयों के समर्थन से है। बता दें कि कॉन्ग्रेस के 107 विधायकों में से 6 वो हैं, जो बसपा तोड़ कर पार्टी में आए थे। अब जब सचिन पायलट को स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप का नोटिस मिला है, उन्होंने अपने बगावती तेवर को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

गहलोत गुट का कहना है कि पायलट सबसे पहले कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दें लेकिन पायलट अड़े हुए हैं। दो भाजपा नेताओं की गिरफ़्तारी के बाद माना जा रहा है कि गहलोत अब सरकार बचाने के लिए हर क़दम उठा रहे हैं। आज सोमवार को ही सचिन पायलट का विस्तृत बयान आने की उम्मीद भी है। कॉन्ग्रेस ने प्रभारी अविनाश पांडेय, CWC सदस्य रणदीप सुरजेवाला और वरिष्ठ नेता अजय माकन को राजस्थान भेजा है।

वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी ने आधी रात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के जानकारी दी कि सभी विधायकों को व्हिप जारी कर के मुख्यमंत्री की बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। राजस्थान कॉन्ग्रेस के प्रभारी ने धमकाया है कि जो भी विधायक व्हिप का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ पार्टी कार्रवाई करेगी। पार्टी अब भी 109 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है। कॉन्ग्रेस ने कहा कि विधायकों ने सोनिया गाँधी और गहलोत में विश्वास जताया है।

सचिन पायलट ने स्पष्ट कर दिया है कि वो विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होने वाले हैं। मध्य प्रदेश में जिस तरह से कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं को झटका लगा है, उसी तरह राजस्थान में ऐसा न हो इसके लिए पार्टी प्रयास कर रही है। कई ख़बरों में आज पायलट के भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात की सम्भावना भी जताई जा रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि गहलोत ने पायलट को हाशिए पर धकेल दिया था।

गौरतलब है कि करीब पौने दो साल पहले राजस्थान में सत्ता में आई कॉन्ग्रेस 23 दिन पहले राज्यसभा चुनाव के बाद पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रही थी। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी आलाकमान आश्वस्त थे कि उनकी सरकार के पास पूरा बहुमत है और पाँच साल कोई मुश्किल होने वाली नहीं है, लेकिन गहलोत सरकार अब संकट से घिरती नजर आ रही है। रविवार को दिनभर जयपुर से लेकर दिल्ली तक कॉन्ग्रेस की गतिविधियाँ तेज रहीं।

पायलट पावर से हिली राजस्थान सरकार: 30 MLA के साथ होने का दावा, विधायक दल की बैठक में नहीं जाएँगे

राजस्थान में अशोक गहलोत की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस सरकार का संकट गहरा गया है। उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपने साथ 30 विधायकों के होने का दावा किया है। सूत्रों के अनुसार सोमवार को कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक में भी वे शामिल नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री गहलोत ने आज (जुलाई 12, 2020) रात पार्टी के विधायकों और मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। इसमें 75 विधायकों के उपस्थित होने का दावा किया जा रहा है। कॉन्ग्रेस विधायक राजेंद्र गुड्डा ने कुछ बीजेपी विधायक के भी साथ होने की बात कही है।

पार्टी सूत्रों से जानकारी मिली है कि पायलट कल यानी सोमवार (जुलाई 13, 2020) की सुबह होने वाली कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होंगे। पायलट के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि 30 से ज्यादा कॉन्ग्रेस विधायक और कुछ निर्दलीय विधायक पायलट के समर्थन में हैं। यदि उनका दावा सही है तो कॉन्ग्रेस सरकार अल्पमत में आ चुकी है।

बैठक सुबह 10.30 बजे मुख्यमंत्री गहलोत के आवास पर होगी। सभी विधायकों को जयपुर पहुँचने को कहा गया है। इस बैठक में वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन और अविनाश पांडे भी शामिल होंगे। ये यहाँ पर विधायकों से बातचीत करेंगे।

राजस्थान में सत्ताधारी कॉन्ग्रेस सरकार के लिए संकट के बादल गहराते जा रहे हैं। विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में एसओजी (विशेष संचालन समूह) की ओर से पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद राज्य के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट विधायकों के साथ दिल्ली पहुँचे हैं।

पायलट के नाराज होने की वजह विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) का नोटिस बताया जा रहा है। एसओजी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत अन्य मंत्रियों को भी नोटिस भेजा है। हालाँकि, सीएम ने कहा है कि यह सामान्य प्रक्रिया है। नोटिस के बाद पायलट समर्थक विधायक नाराज हैं। उनका कहना है कि सरकार ने सभी हदें पार कर दी हैं और अब अशोक गहलोत के साथ काम करना असंभव है।

गौरतलब है कि करीब पौने दो साल पहले राजस्थान में सत्ता में आई कॉन्ग्रेस 23 दिन पहले राज्यसभा चुनाव के बाद पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रही थी। खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी आलाकमान आश्वस्त थे कि उनकी सरकार के पास पूरा बहुमत है और पाँच साल कोई मुश्किल होने वाली नहीं है, लेकिन गहलोत सरकार अब संकट से घिरती नजर आ रही है।

गहलोत और पार्टी आलाकमान की मुश्किलें उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट व उनके समर्थकों ने बढ़ा दी हैं। रविवार को दिनभर जयपुर से लेकर दिल्ली तक कॉन्ग्रेस की गतिविधियाँ तेज रहीं। गहलोत की दिन में कई बार राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल व राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे से बात हुई। गहलोत से बात होने के बाद पांडे ने पायलट से भी संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो सकी।

बता दें कि अशोक गहलोत सुबह से ही अपने आवास पर कॉन्ग्रेस के विधायकों और मंत्रियों से मिल रहे हैं। सभी मंत्रियों और विधायकों को कहा गया है कि वह अपने क्षेत्र को छोड़कर जयपुर पहुँचे। इससे पहले कपिल सिब्बल ने अपनी ही पार्टी पर तंज कसते हुए कहा था कि क्या कॉन्ग्रेस तभी जागेगी, जब उसके अस्तबल से घोड़े चले जाएँगे?

वहीं पायलट अपने पुराने साथी ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिले थे। जिसके बाद सिंधिया ने राजस्थान की सियासी हालात को निराशाजनक बताते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस में काबिलियत की कद्र नहीं है। बताया जा रहा है कि पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सचिन पायलट को मिलने के लिए बुलाया था लेकिन वो नहीं पहुँचे। अब दोनों की फोन पर बातचीत हो रही है। राहुल गाँधी के दफ्तर के अधिकारियों का कहना है कि दोनों नेताओं की फोन पर ही बातचीत हो रही है।

इससे पहले अशोक गहलोत खेमे के अधिकारियों ने सचिन पायलट के बीजेपी के साथ संपर्क में होने का भी आरोप लगाया था। हालाँकि फिलहाल अभी तक कुछ साफ नहीं हो पाया है। इस मामले में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि तमाम घटनाक्रम, इस बात का सबूत हैं कि कॉन्ग्रेस के भीतर अंतर्कलह चरम पर है। मुख्यमंत्री खुद गृहमंत्री हैं और विभाग के मुखिया को एक साधारण  डिप्टी एसपी द्वारा नोटिस दिया जाना ताज्जुब की बात है।

इससे पहले पायलट ने शनिवार देर रात दिल्ली में अहमद पटेल से मुलाकात की थी। पायलट ने अहमद पटेल से मुलाकात के बाद रविवार को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी व राहुल गाँधी को साफ संदेश पहुँचा दिया था कि गहलोत उन्हें साइडलाइन करने में जुटे हैं, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे।

क्या रूस ने बना ली कोरोना की वैक्सीन? इंसानों पर ट्रायल पूरा करने का किया दावा

कोरोना वायरस संकट के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। रूस का दावा है कि उसने कोरोना की वैक्सीन तैयार कर ली है। रिपोर्ट के अनुसार रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्‍सीन का वालंटियर्स पर ट्रायल पूरा कर लिया है। यह वैक्‍सीन रूस की सेचनोव फर्स्ट मास्को स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी ने डेवलप की है।

यह जानकारी इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक वदिम तरासोव ने दी है। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन को गेमली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी यूनिवर्सिटी द्वारा निर्मित किया गया है। इसका परीक्षण यूनिवर्सिटी ने 18 जून को शुरू किया था।

तरासोव ने कहा, सेचेनोव विश्वविद्यालय ने कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया के पहले वैक्सीन का वालंटियर्स पर सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा कर लिया है। इस अध्ययन में शामिल हुए पहले वालंटियर्स के समूह को बुधवार ( 8 जुलाई, 2020) को छुट्टी दे दिया गया था। दूसरे ट्रायल में शामिल वालंटियर्स के समूह को 20 जुलाई को छुट्टी दी जाएगी।

वहीं इस वैक्सीन की जानकारी देते हुए सेचनोव यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल पैरासिटोलॉजी, ट्रॉपिकल एंड वेक्टर-बॉर्न डिजीज के निदेशक अलेक्जेंडर लुकाशेव के कहा कि इस पूरे अध्ययन का मकसद मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कोविड 19 के वैक्सीन को सफलतापूर्वक तैयार करना था।

लुकाशेव ने एएनआई को बताया, “वैक्सीन की सुरक्षा की पुष्टि की जा चुकी है।” वैक्सीन को जल्‍द ही इसे मानव हित में बाजार में उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है। महामारी की स्थिति को देखते हुए इसका प्रोडक्शन किया जाएगा।

सेचेनोव विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए वैक्सीनपर तारसोव ने यह भी कहा कि इस महामारी की स्थिति में सेचेनोव यूनिवर्सिटी ने न केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में, बल्कि एक वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान केंद्र के रूप में भी प्रशंसा के योग्य काम किया है। उन्‍होंने कहा कि हमने प्रीक्लिनिकल स्टडीज और प्रोटोकॉल डेवलपमेंट के साथ, कोरोना वैक्सीन को बनाने का काम करना शुरू किया था। अब क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

पूरी दुनिया में कोरोना की वैक्‍सीन की खोज चल रही है, मगर किसी देश ने अभी तक वैक्‍सीन का ट्रायल पूरा नहीं किया है। कई देश ट्रायल स्तर पर विफल भी हो चुके है। भारत, चीन, अमेरिका समेत अन्‍य कई देशों की वैक्‍सीन ट्रायल के फेज 2 या 3 में है। बता दें कोरोनोवायरस दुनिया भर में अब तक 12 मिलियन से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है।

कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकना है तो ‘मुहम्मद: द मैसेंजर ऑफ गॉड’ पर लगाओ रोक: रजा अकादमी की धमकी

रजा अकादमी ने रविवार (जुलाई 12, 2020) को एक बयान जारी कर ईरान के विख्यात फिल्मकार माजिद माजिदी की फिल्म ‘मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ गॉड’ पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है। यह फिल्म पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवन पर आधारित है।

फिल्म को 2015 में ईरान में रिलीज़ किया गया था। इस फिल्म को 88 वें अकादमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए ईरानी एंट्री के रूप में चुना गया था।

बता दें कि डॉन सिनेमा द्वारा ऑस्कर नामित ईरानी निर्देशक माजिद मजीदी की फिल्म ‘मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ गॉड’ को रिलीज़ किया जा रहा है। इसी बारे में बात करते हुए डॉन को संबोधित पत्र में रजा अकादमी ने कहा है कि उन्हें समाचार-पत्रों के माध्यम से पता चला है कि वो 21 जून को फिल्म ‘मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ गॉड’ को डिजिटली रिलीज कर रहे हैं।

अकादमी ने कहा है, “जब से इसकी रिलीज़ की खबर प्रकाशित हुई है, तब से समुदाय में हंगामा मचा हुआ है और हमें फिल्म को प्रतिबंधित करने के लिए सैकड़ों कॉल आ रहे हैं क्योंकि यह पूरी तरह से ईशनिंदा है।”

रजा अकादमी ने आगे कहा, “हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि क्यों बार-बार समुदाय को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाया जाता है ताकि देश के भीतर समस्या पैदा हो सके। फिल्म में पवित्र पैगंबर को एक बच्चे के रूप में दिखाया गया है और यहाँ तक कि पवित्र पैगंबर के माता-पिता को भी दिखाया गया है। इस्लाम के पवित्र पैगंबर को कभी भी चित्रित नहीं किया जा सकता है और जिन्होंने ऐसा किया है उन्होंने निंदा की है जो किसी भी कीमत पर असहनीय है।”

रजा अकादमी ने धमकी देते हुए कहा, “एक मुस्लिम अपने पवित्र पैगंबर पर थोड़ी सी भी अपमान देखने या सुनने की तुलना में सम्मान में मर जाएगा।” बता दें कि माजिद ने यह फिल्म दुनिया भर में इस्लाम की नकारात्मक धारणा को बदलने और लोगों को यह दिखाने के लिए बनाई थी कि इस्लाम शांति, दया और प्रेम का धर्म है। आगे रजा अकादमी ने कहा कि इससे पहले कि इसको लेकर शहर में कानून-व्यवस्था बिगड़ जाए, इसे रिलीज होने से रोक दिया जाए।

गौरतलब है कि 2015 में भी रजा अकादमी ने इस फिल्म में पैगंबर का मजाक बनाए जाने का आरोप लगाते हुए रहमान और माजिद माजिदी के खिलाफ फतवा जारी कर कहा था कि दोनों ने इस्लाम का अपमान किया है। फतवे में समुदाय के लोगों का आह्वान करते हुए कहा गया है कि वे व्यक्तिगत और कानूनी स्तर पर फिल्म का विरोध करें। उस समय भी फिल्म को बैन करने की माँग उठाई गई थी।

उल्लेखनीय है कि रजा अकादमी एक विवादास्पद संगठन है, जिसे आजाद मैदान दंगों में शामिल होने के लिए जाना जाता है। अगस्त 2011 में, इसके नेताओं ने आजाद मैदान में एक तथाकथित विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया था, जो हिंसक दंगों में बदल गया था। रजा अकादमी के दंगाइयों ने सीएसटी के बाहर स्थित बहुचर्चित अमर जवान स्मारक को तोड़ दिया था। दंगों के कारण विभिन्न सार्वजनिक संपत्तियों को लगभग 2.72 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इसी विवादित संगठन ने रिपब्लिक भारत के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी और न्यूज 18 इंडिया के पत्रकार और एंकर अमीश देवगन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी।

शूट टू किल: अमेरिका से आएँगे 72000 असॉल्ट राइफल, 1.5 लाख जवान इसी हथियार का करेंगे इस्तेमाल

लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन से तनातनी के बीच भारतीय सेना ने अपनी तैयारियों को और मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसी के तहत भारतीय सेना ने 72 हजार अमेरिकन असॉल्ट राइफल खरीदने का फैसला लिया है। इसके लिए सेना की तरफ से ऑर्डर भी दे दिया गया है। ये सभी अत्याधुनिक हथियार अमेरिका से खरीदे जाएँगे।

भारतीय सेना के एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि सीमा विवाद के बाद भारत सरकार ने जरूरी सामानों की खरीद की छूट सेना को दी थी। इसी के तहत सेना अमेरिका से 72 हजार असॉल्ट राइफलें खरीदने जा रही है।

बता दें कि पहले बैच के ऑर्डर के पूरा हो जाने के बाद सेना की तरफ से इस बंदूक के दूसरे बैच के लिए ऑर्डर दिया गया है। इससे पहले सेना को 72 हजार अमेरिकी असॉल्ट रायफलें मिल चुकी हैं, जिसका इस्तेमाल उत्तरी कमांड और ऑपरेशनल एरिया में किया जा रहा है। भारत ने फास्ट ट्रैक खरीद के तहत राइफलों का प्राप्त किया था। नई राइफलों को मौजूदा भारतीय स्माल आ‌र्म्स सिस्टम (FTP) 5.56 गुणा 45 एमएम राइफलों की जगह इस्तेमाल किया जाएगा और स्थानीय रूप से आयुध कारखाना बोर्ड की ओर से निर्मित किया जाएगा।

इस रायफल की सबसे खास बात ये है कि इसकी रेंज 500 मीटर (आधा किलोमीटर) तक है। इसमें 7.62mm का बोर है। साथ ही इसकी गोली दूसरे बंदूकों के मुकाबले बड़ी होती है जो ज्यादा घातक है। इस बंदूक से लगाया गया निशाना बेहद सटीक होता है और एक गोली में ही दुश्मन को ढेर करने की क्षमता है। यही वजह है कि इसे शूट टू किल राइफल भी कहा जाता है।

भारतीय सेना कई वर्षो से अपने मानक INSAS असॉल्ट राइफलों को बदलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन यह प्रयास बार-बार विफल हो रहे थे। दूसरी ओर अभी हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने इन राइफलों की कमी को दूर करने के लिए इजरायल से भी 16,000 लाइट मशीनगन का ऑर्डर दिया था।

जानकारी के मुताबिक भारत अमेरिका से 1.5 लाख राइफल खरीदेगा, जिसका इस्तेमाल कश्मीर और एलओसी पर तैनात जवान करेंगे। वहीं बाकी जवानों को AK-203 राइफल मुहैया करवाई जाएगी, जो अमेठी आयुध कारखाने में भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से उत्पादन किया जाएगा। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमेरिकी एविएशन कंपनी बोइंग ने इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) को अटैक हेलीकॉप्‍टर अपाचे और हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्‍टर चिनूक की डिलीवरी की थी। बोइंग ने शुक्रवार (11 जुलाई, 2020) को जानकारी देते हुए कहा था, “22 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से आखिरी पाँच को पिछले महीने हिंडन एयर बेस पर भारतीय वायुसेना (IAF) को सौंप दिए गए।” यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना को 15 सीएच -47F (I) चिनूक हेवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर पहले ही मार्च में सौंपा जा चुका है।

इसके अलावा फ्रांस से 6 राफेल लड़ाकू विमानों के 27 जुलाई को भारत पहुँचने की संभावना है। ये विमान पहले मई में भारत पहुँचने वाले थे, लेकिन कोरोना वायरस के कारण ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया। वहींं खबर है कि रक्षा मंत्रालय Spice-2000 बम खरीद कर वायु सेना को और मजबूत करने की रणनीति बना रहा है। Spice-2000 बम से 70 किमी दूर तक टारगेट को नष्ट कर सकता है। साथ ही बंकर को भी ध्वस्त करने की क्षमता रखता है।

चीन के साथ सीमा पर तनाव बढ़ने के मद्देनजर नरेंद्र मोदी सरकार ने हथियार और गोला बारूद खरीदने के लिए सेना के तीनों अंगों को 500 करोड़ रुपए तक का कोई भी हथियार खरीदने की छूट दी है। इसके साथ ही भारत सरकार ने सीमा पर तैनात भारतीय सेना को मौका आने पर अपने हिसाब से कार्रवाई करने की खुली छूट दे दी है। सेना को सरकार की ओर से यह साफ कर दिया गया कि वह कोई भी एक्शन ले सकती है।

इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने रूस से 33 फाइटर जेट खरीदने का ऐलान किया। इसमें 12 सुखोई-30 विमान और 21 मिग-29 भी शामिल हैं। इसके साथ ही पहले से मौजूद 59 मिग-29 को अपग्रेड भी करवाया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,148 करोड़ रुपए बताई गई है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना और नौसेना के लिए 248 एस्ट्रा बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइलों को खरीदने को भी मँजूरी दी है।