वैचारिक दोगलापन का गढ़ कहलाने वाली वेबसाइट न्यूजलॉन्ड्री लगातार अपने खासियत के अनुसार हिन्दूघृणा का जहर उगलती आई है। लगातार हिन्दुओं के खिलाफ विष-वमन करते हुए यह वेबसाइट जमीर बेचकर की जाने वाली पत्रकारिता का झंडा सबसे आगे उठाए चल रही है। एक सामान्य और सामजिक अपराध को भी सम्प्रदायिक रंग देकर रिपोर्ट करने और हर बार बिना आधार के किसी हिन्दू या हिंदूवादी संस्था पर आरोप लगाने में इसका कोई विकल्प नहीं है।
वेबसाइट के को-फाउंडर अभिनंदन सेकरी खुद हिन्दुओं को विलेन बनाकर दिखाने में सिद्धहस्त हैं और मानसिक दोगलेपन की बेशर्म हँसी इनके चेहरे पर हमेशा विराजमान रहती है। नक्सलवाद के हिमायती अभिनंदन सेकरी ने झूठ और प्रपंच फैलाकर हिन्दुओं के ख़िलाफ़ डिजिटल जिहाद का बीड़ा उठाया हुआ है और उस पूर्व नक्सली की बातों का मजाक उड़ाते हैं, जो शहरों में बुद्धिजीवियों के वेश में छुपे हुए अर्बन नक्सलों की कलई खोलता है।
भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार (जून 26, 2020) को आरोप लगाया कि यूपीए के वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) राजीव गाँधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था और सार्वजनिक धन परिवार के खातों में डाइवर्ट कर दिया गया था। गौरतलब है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सार्वजनिक धन को परिवार द्वारा चलाए जाने वाले संगठन के लिए इस्तेमाल किया गया और यह न केवल एक ‘धोखाधड़ी’ है, बल्कि भारत की जनता के साथ एक ‘बड़ा विश्वासघात’ भी है। यूपीए सरकार में लोग राजीव गाँधी फाउंडेशन में दान करते थे, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गाँधी थीं।
PMNRF, meant to help people in distress, was donating money to Rajiv Gandhi Foundation in UPA years.
Who sat on the PMNRF board? Smt. Sonia Gandhi
Who chairs RGF? Smt. Sonia Gandhi.
Totally reprehensible, disregarding ethics, processes and not bothering about transparency. pic.twitter.com/tttDP4S6bY
कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि PMNRF का पैसा संकट के समय लोगों की मदद के लिए होता है लेकिन यूपीए के दौर में राजीव गाँधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था। उन्होंने कहा – “PMNRF बोर्ड में कौन बैठा था? सोनिया गाँधी। RGF की अध्यक्षता कौन करता है? सोनिया गाँधी।”
PMNRF, meant to help people in distress, was donating money to Rajiv Gandhi Foundation in UPA yrs. Who sat on PMNRF board? Sonia Gandhi. Who chairs RGF? Sonia Gandhi. Totally reprehensible, disregarding ethics, processes & not bothering about transparency: BJP President(file pic) pic.twitter.com/qYrVTiDyGZ
ट्वीट करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि यह पूरी तरह से निंदनीय है, इसमें नैतिकता की अवहेलना की गई और पारदर्शिता की परवाह तक नहीं की गई है। उन्होंने आगे कहा कि धन के लिए एक परिवार की भूख ने देश का बहुत खर्च किया है। इसके साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस को अपने लाभ के लिए बेहिसाब लूट के लिए माफी माँगने को कहा है।
गौरतलब है कि UPA के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन में चीन की सरकार द्वारा किए गए डोनेशन ऐसे समय में सामने आए हैं, जब कॉन्ग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर भारत की जमीन चीन को सौंपने का दुष्प्रचार किया जा रहा था।
राजीव गाँधी फाउंडेशन ने पीएमएनआरएफ से एक बार नहीं बल्कि तीन बार ‘डोनेशन’ हासिल किया था
ऑपइंडिया ने बताया था कि किस प्रकार राजीव गाँधी फाउंडेशन ने न केवल चीन के दूतावास से बल्कि चीन सरकार से भी एक बार नहीं बल्कि कम से कम तीन बार वर्ष 2005 और 2009 के बीच ‘वित्तीय सहायता’ प्राप्त की थी।
चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा किए गए इस पहली ‘सहायता’ में 10 लाख रुपए और दूसरी में 90 लाख रुपए दीए गए थे। रिपोर्ट के बाद कॉन्ग्रेस से सवाल उठाए गए थे और इसकी शुरुआत करते हुए, बीजेपी ने पूछा था कि कॉन्ग्रेस का चीन को लेकर हमेशा से ही लचीला रुख था और साथ ही गलवान घाटी में जारी गतिरोध के बीच चीन और कॉन्ग्रेस के बीच हुए ‘व्यापारिक समझौते’ के कारण ही इस प्रकार के बयान दे रही थी।
यह पता चला है, राजीव गाँधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट में चीन की सरकार से वित्तीय सहायता मिली थी, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गाँधी ने की है और इसमें राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा, मनमोहन सिंह और चिदंबरम ट्रस्टी के रूप में सूचीबद्ध हैं। जैसा कि वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है, यूपीए के दौरान राजीव गाँधी फाउंडेशन को एक बार नहीं बल्कि कई बार प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दान मिला था।
कॉन्ग्रेस के चीनी प्रेम और राजीव गॉंधी फाउंडेशन पर सरकारी दरियादिली को लेकर संपादक अजीत भारती का नजरिया
वर्ष 2005-2006 में, वार्षिक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दान मिला। 2006-2007 की रिपोर्ट में भी यही खुलासा किया गया है। और इसके बाद 2007-2008 में भी पीएमएनआरएफ से फाउंडेशन को ‘दान’ मिला था।
हालाँकि, इस तरह के दान की राशि अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह निश्चित है कि वास्तव में दान किया गया था। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) वर्ष 1948 में स्थापित किया गया था। प्रारंभ में, निधि का उद्देश्य भारत के विभाजन के बाद और उसके ठीक बाद पाकिस्तान से विस्थापित लोगों को सहायता प्रदान करना था।
पीएमएनआरएफ के संसाधनों का उपयोग अब मुख्य रूप से बाढ़, चक्रवात और भूकंप आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिवारों को और प्रमुख दुर्घटनाओं और दंगों के पीड़ितों को तत्काल राहत देने के लिए किया जाता है। इस फंड में पूरी तरह से सार्वजनिक योगदान होता है और इसे कोई बजटीय समर्थन नहीं मिलता है।
PMNRF और कॉन्ग्रेस की पारदर्शिता
इससे पहले, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के लिए पीएमएनआरएफ के बोर्ड में होना आवश्यक था। हालाँकि, बाद में इसे बदल दिया गया था और यह अनिवार्य किया गया था कि प्रधानमंत्री के विवेक पर पीएमएनआरएफ से फंड संवितरण किया जाएगा। इससे पीएमएनआरएफ से राजीव गाँधी फाउंडेशन को किया गया ‘दान’ और अधिक संदिग्ध हो जाता है।
यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि 2005 से 2008 तक, जिस अवधि में पीएमएनआरएफ से राजीव गाँधी फाउंडेशन को दान दिया गया था, तब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे, जिनका सरकार पर थोड़ा बहुत ही नियंत्रण था। सोनिया गाँधी के पास ही उस दौरान सरकार का पूरा नियंत्रण था। वास्तव में, एनएसी फाइलों से पता चला था कि सोनिया गाँधी वास्तव में ‘सुपर पीएम’ थीं और मनमोहन सिंह द्वारा लिए गए निर्णयों पर उनका पूरा नियंत्रण था।
यहाँ पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि PMNRF में सभी धन भारत के नागरिकों द्वारा दिया गया योगदान होता है और इसका उपयोग राष्ट्रीय आपदाओं और आपदाओं के दौरान किया जाता है। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि लोगों के धन का उपयोग राष्ट्रीय आपदाओं के दौरान लोगों को राहत देने के लिए किया जाना था, जिसे सोनिया गाँधी द्वारा निजी तौर पर नियंत्रित कोष (RGF) में बदल दिया गया था।
PMNRF बनाम PM CARES फंड
ये वही सोनिया गाँधी हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस की महामारी के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए PM CARES (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) पर संदेह था और लगातार इसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल करती देखी जा रहीं थीं। सोनिया गाँधी और यहाँ तक कि राहुल गाँधी ने बार-बार जोर देकर कहा था कि पीएमएनआरएफ इस से कहीं अधिक पारदर्शी है और जब राष्ट्रीय आपात स्थितियों से लड़ने के लिए इस तरह के फंड मौजूद थे, तो ‘पीएम-केयर्स’ की आवश्यकता नहीं थी। पूरा ‘लिबरल’ वर्ग भी यह बताते नजर आया कि पीएम केयर्स फंड के तहत मिलने वाले फंड का इस्तेमाल विवेकपूर्ण और पारदर्शी तरीके से नहीं किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि पीएमएनआरएफ को ट्रस्ट मानने के बाद से पीएमएनआरएफ ‘पीएमकेयर्स’ के मुकाबले काफी कम पारदर्शी है। क्योंकि आज तक किसी को भी यह नहीं पता कि पीएमएनआरएफ को संचालित करने वाले दिशानिर्देश क्या हैं।
पीएमएनआरएफ के तहत निधियों के रोजगार में पारदर्शिता की कमी अब इस बात से स्पष्ट हो गई है कि सोनिया गाँधी द्वारा राजीव गाँधी फाउंडेशन में जनता के धन को कैसे डाइवर्ट कर दिया गया और कैसे हस्तांतरित किया गया, इसकी जानकारी किसी ‘खुलासे’ के जरिए ही सामने आ सकी है।
भाजपा ने साधा कॉन्ग्रेस पर निशाना
इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया था कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन ने पैसे दिए। उन्होंने पूछा था कि कॉन्ग्रेस ये बताए की ये प्रेम कैसे बढ़ गया। इनके कार्यकाल में चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया। कॉन्ग्रेस स्पष्ट करे कि इस डोनेशन के लिए क्या सरकार से मंजूरी ली गई थी?
वहीं ‘टाइम्स नाउ’ न्यूज़ चैनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, UPA के दौरन फ्री ट्रेड के नाम पर किए गए चीन की सरकार और गाँधी परिवार के बीच अन्य गोपनीय समझौतों के साथ ही यह वित्तीय मदद करीब 300000 अमेरिकी डॉलर (उस समय के एक्सचेंज रेट के हिसाब से करीब 1.5 करोड़ रुपए) के आस-पास थी।
यह सब समझौते चीन के साथ खराब सम्बन्ध होने के बावजूद कॉन्ग्रेस ने गठबंधन सरकार में रहने के दौरान साइन किए थे और देश से समझौते का ब्योरा छुपाया गया। समझौते के ब्यौरे को सार्वजनिक नहीं किया गया।
2006 में चीन की सरकार द्वारा राजीव गाँधी फाउंडेशन में 10 लाख रूपए की वित्तीय मदद
एक और खुलासे में गाँधी परिवार के चीन के साथ अपने गोपनीय संबंधों के दावों को और मजबूती मिलती है। नए खुलासे से पता चलता है कि चीनी सरकार ने वर्ष 2006 में ‘राजीव गाँधी फाउंडेशन’ को ‘वित्तीय सहायता’ के लिए 10 लाख रुपए दान दिए थे।
चीनी दूतावास पर उपलब्ध एक दस्तावेज़ के अनुसार, भारत में तत्कालीन चीनी राजदूत सुन युक्सी (Sun Yuxi) ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 10 लाख रुपए दान दिए थे, जो कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है और कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा चलाया जाता है।
लद्दाख के गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए खुनी हिंसक झड़प के दौरान मारे गए चीनी सैनिकों की जानकारी को लेकर अभी तक चीनी सरकार ने चुप्पी साधी हुई है। वहीं ग्लोबल टाइम्स के रिपोर्ट्स के अनुसार बुधवार (24 जून, 2020) को चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने झड़प में मारे गए सैनिकों के परिजनों से बातचीत कर उन्हें सांत्वना देने की कोशिश की है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के मुखपत्र द ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू जिन (Hu Xijn) ने दी है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि, “सेना में सर्वोच्च सम्मान के साथ मृतकों के साथ व्यवहार किया गया है और यह जानकारी आखिर सही समय पर समाज को दी जाएगी, ताकि नायकों को सम्मानित किया जा सके और उन्हें याद किया जा सके।” साफ है कि इसकी आड़ में कहीं न कहीं आँकड़े छिपाने और चीन की जनता को शांत करने की कोशिश की गई।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, लद्दाख में भारत-चीन की झड़प में मारे गए चीनी सैनिकों के परिजनों का दो दिन पहले एक वीडियो सामने आया था। उस वीडियो में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में तैनात जवानों की मृत्यु को लेकर परिवारवाले काफी आक्रोशित नजर आए थे। क्योंकि देश के लिए शहीद होने के बावजूद जवानों को सरकार की तरफ से कोई सम्मान या श्रद्धांजली अर्पण नहीं की गई थी। संपादक ने वायरल वीडियो के बाद अपने लेख में इस बात का जिक्र किया था। यह सब संभवतः इसलिए हुआ क्योंकि एक तरफ जहाँ भारत ने न सिर्फ अपने बलिदानी सैनिकों के बारे में बताया बल्कि उन्हें मरणोपरांत उचित गौरव और सम्मान भी दिया वहीं चीन अब भी आँकड़े छिपाता हुआ झूठ बोल रहा है।
हालाँकि, अपने देश के सैनिकों की संख्या को कम बताते हुए ग्लोबल टाइम्स ने स्वीकार किया है कि लद्दाख में हिंसक झड़प में 20 से कम चीनी सैनिक मारे गए हैं। मगर शी जिनपिंग सरकार ने आधिकारिक रूप से नहीं स्वीकारा की इस झड़प में उसके कितने सैनिको को क्षति पहुँची है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल टाइम्स के संपादक हू ने अपने लेख के माध्यम से बताया कि पीएलए अधिकारियों और सैनिकों को श्रद्धांजली दी गई है। हमारे सैनिकों की वजह से ही चीन सुरक्षित है। देश की शांति पूरी तरह से उनके जवानों पर निर्भर करती है। अपने बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा पूर्व सैनिक और वर्तमान में मीडियाकर्मी के तौर पर मैं समझता हूँ कि यह दोनों देशों में, विशेष रूप से भारत में, जनता की राय को उत्तेजित नहीं करने के उद्देश्य से एक आवश्यक कदम है। यह बीजिंग की सद्भावना है। इसीलिए चीन ने शायद चीनी सेना ने मृतकों की संख्या नहीं जाहिर की है।
वहीं भारतीय मीडिया के दावे को झूठ बताते हुए उन्होंने कहा कि हमारे 40 चीनी सैनिक नहीं मारे गए है। और न ही भारत हमे हमारे 16 चीनी सैनिकों के शव को सौंपा हैं। साथ ही इन सभी बातों को दरकिनार कर ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने बताया कि भारतीय मीडिया सिर्फ ‘बिना चुनौती वाली अफवाहें’ फैला रहीं है।
गौरतलब है, संपादक हू ने अपने लेख में हिंसक झड़प को लेकर अपनी भड़ास को भी बाहर निकाला। उन्होंने लिखा कि भारत को पीएलए सैनिकों ने बड़ा सबक सिखाया है, जिसने हमेशा चीनी लोगों के दृढ़ संकल्प पर अपनी गलत राय बनाई है। पीएलए ने जरूरत के अनुसार अपने शौर्य और दृढ़ संकल्प के साथ भारत के खिलाफ ठोस कदम उठाया है। जो कि भारतीय पक्ष, विशेष रूप से उनके अग्रिम पंक्ति के सैनिकों के लिए एक मजबूत निवारक है। पीएलए की वजह से ही स्थिति को काबू में किया गया हैं। सहीं वक्त पर हमारे जवानों ने अपनी क्षमता दिखाई है।
इतने पर ही ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने अपनी बात को खत्म नहीं किया। उन्होंने भारत को धमकी देते हुए आगह किया की पीएलए के साथ खिलवाड़ मत करो। जो भी लोग अंतरराष्ट्रीय स्थिति में बदलाव लाकर उसका लाभ उठाना चाहते उनके लिए यह चीन के तरफ से एक कड़ी चुनौती है। हमारे सीमा में घुसपैठियों के लिए पुख्ता इंतजाम किया गया है। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात हमारे जवानों का उद्देश्य अधिक संघर्षों की घटना से बचना है।
उल्लेखनीय हैं कि एलएसी के निकट चीन सैनिकों को जमावड़े को लेकर भारत भी अब चौकन्ना हो गया है। वह फिर कोई भूल नहीं करना चाहता। यही कारण है कि भारतीय सेना भी चीनियों का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई है। आपको बता दें कि इससे पहले ही सरकार सेना को खुली छूट दे चुकी है।
चीनी सैनिकों के मौत के आँकड़ो पर बीजिंग ने तो चुप्पी बनाई रखी है, लेकिन भारत सरकार ने कहा कि चीनी पक्ष ने करीब 43-45 पीएलए सैनिक या तो गंभीर रूप से घायल हुए या मारे गए। अब, यूएस की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 35 चीनी सैनिक गलवान घाटी में मारे गए हैं।
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन के बीच हुई खूनी हिंसक झड़प के बाद भी सीमा पर तनाव का माहौल बना हुआ है। निहत्थे भारतीय सैनिकों पर धोखेबाजी से हमला करने पर दुनिया चीन के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त कर रही हैं। इसी बीच अमेरिका से बड़ी खबर सामने आई है। चीन की तानाशाही को देखते हुए अमेरिका ने यूरोप से अपनी सेना हटा ली है। और उस सेना का इस्तेमाल कर उसे एशिया में तैनात करने का फैसला लिया है।
Pompeo talks of China’s provocative military actions, says US will posture appropriately to counter PLA
यह जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने जर्मन मार्शल फंड के वर्चुअल ब्रसेल्स फोरम 2020 में एक सवाल के जवाब देते हुए दिया था। उन्होंने बताया कि अमेरिका यह फैसला ऐसे समय में कर रहा है, जब चीन ने भारत में पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। सिर्फ भारत ही नहीं चीन वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और साउथ चाइना सी में खतरा बना हुआ है।
There’ll be fewer US resources at certain places, they’ll be at other places as there’s threat from Chinese Communist Party to India, Vietnam, Indonesia, Malaysia, South China Sea. We’ll make sure we are postured appropriately to counter People’s Liberation Army: US Secy of State pic.twitter.com/2R0fdpu6Su
रिपोट्स के अनुसार चीन को उसकी चालबाजी का जवाब देने के लिए अमेरिका ने जर्मनी में तैनात 52 हजार अपने सैनिकों में से लगभग 9,500 सैनिकों को एशिया में तैनात करने का फैसला लिया है। यहीं नहीं चीन से बढ़ते खतरे को मद्देनजर रखते हुए और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीन की सेना) को मुहतोड़ जवाब देने के लिए अमेरिका पूरी दुनिया में अपनी सेना को तैनात करने जा रहा है।
वहीं अपने संबोधन में अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने कहा चीन अपने अनुसार शासन चलाने के लिए नए नियम-कायदे लागू करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका हालत के अनुसार सेना तैनाती की रणनीति से अच्छे से वाकिफ है। ट्रंप प्रशासन ने दो साल पहले अमेरिकी सेना की एक लंबी बहुप्रतीक्षित रणनीतिक स्थिति की समीक्षा की थी। अमेरिका हर तरह के सिचुएशन से अवगत है। उसने खतरों को देखा है और समझा भी है कि साइबर, इंटेलिजेंस और मिलिट्री जैसे संसाधनों को हालात के अनुकूल कैसे बाँटा जाए।
Citing threats from Chinese communist party to India & South East Asia, US will be "postured appropriately" & that is why reducing troops in Europe: US Secretary of state Mike Pompeo pic.twitter.com/HUE8PPqwSP
माइक ने चीन की दादागिरी को लेकर यूरोपियन यूनियन से बात करने की भी बात कही है। इससे पहले यूरोपियन यूनियन ने अमेरिकी प्रशासन पर जर्मनी से सेना वापस बुलाए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने बाद में चीन को आर्थिक रूप से कमजोर करने को लेकर ये भी कहा कि चीनी कंपनियों के खिलाफ दुनिया को एकजुट करने का प्रयास भी किया जा रहा है। दरअसल, बीजिंग कोविड-19 महामारी के चलते रणनीतिक और आर्थिक रूप से फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है।
पोंपियो ने चीन को सभी देशों के लिए खतरा बताते हुए यह भी कहा कि अमेरिका के अलावा पूरी दुनिया चीन का सामना कर रही है। यूरोपियन यूनियन के विदेश मंत्रियों से बातचीत के दौरान मुझे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में बहुत सा फीडबैक मिला। जिसमें मंत्रियों ने भारत के साथ लद्दाख में घातक झड़प, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने उकसावे वाले कार्रवाई की बात जैसे कई तथ्यों को सामने लाया। इसमें दक्षिण चीन सागर में उसकी आक्रामता और शांतिपूर्ण पड़ोसियों के खिलाफ खतरे का जिक्र किया गया था।
I spoke this month with EU Foreign Ministers, I got a lot of feedback on China’s Communist Party, laid out a series of facts that talked about People’s Liberation Army’s provocative military actions…: US Secretary of State, Mike Pompeo (1/2) pic.twitter.com/Vl7SRsERHh
उल्लेखनीय हैं कि लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष हुआ था। जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि चीन के 43 से अधिक जवानों के बलिदान होने की सूचना सामने आई थी। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है। लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
बता दें चीनी सेना ने पहले से ही अपने पास लाठी-डंडे, रॉड, हॉकी स्टिक, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पाईप, पत्थर, कीलें, बूट की नोक जमा कर लिया था। और उसी का इस्तेमाल वे हिंसा के दौरान कर रहे थे। वहीं पहाड़ी पॉइंट 14 पर पहले से मौजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हुए उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थरों को फेक कर भी हमला किया। बिना किसी हथियार के भारतीयों सैनिकों ने उनका डट कर मुकाबला किया। हालाँकि, इस झड़प में कई भारतीय सैनिकों को तो संभलने तक का मौका नहीं मिला था।
जम्मू-कश्मीर राज्य से 370 हटने के बाद संघ शासित राज्य बने जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में नागरिकता सम्बंधित प्रावधानों में बदलाव के तहत लम्बे समय से कार्यरत आईएएस अधिकारी नवीन चौधरी प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के कैडर से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले स्थाई निवासी बन गए हैं।
आईएएस नवीन चौधरी मूल रूप से दरभंगा, बिहार के रहने वाले हैं।
खुशखबरी- धारा 370 हटाने के बाद, पहली बार जम्मू-कश्मीर से बाहर के व्यक्ति को निवासी प्रमाण पत्र जारी किया गया है, बिहार के रहने वाले IAS नवीन चौधरी को जारी किया गया निवासी प्रमाण पत्र। pic.twitter.com/ZSSLyuahPt
— Vikas Bhadauria (ABP News) (@vikasbha) June 26, 2020
आईएएस नवीन चौधरी का डोमिसाइल सर्टिफिकेट
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 31, 2019 से जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में गठित किया गया है- जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख। पिछले माह ही केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए प्रक्रिया की अधिसूचना जारी की थी। जम्मू कश्मीर की नागरिकता हासिल करने के लिए डोमिसाइल प्रमाण पत्र जारी करने की ये प्रक्रिया नये नियमों पर आधारित है।
दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश में किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट का होना पहली शर्त है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत अधिकार और जम्मू-कश्मीर नागरिक सेवा अधिनियम, 2010 के नियमों के अंतर्गत ये डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। जम्मू कश्मीर में डोमिसाइल प्रमाणपत्र के आवेदन के लिए प्रारूप भी जारी कर दिया गया है। डोमिसाइल प्रमाणपत्र के लिए जो भी व्यक्ति तय शर्तें पूरी करेगा, उसे सक्षम प्राधिकारी प्रमाणपत्र देंगे।
केंद्र सरकार के अधिकारियों के बच्चे, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, सार्वजनिक उपक्रमों व केंद्र सरकार के स्वायत्त संस्थाओं के अधिकारियों, सार्वजनिक उपक्रमों के बैंक, केंद्रीय विश्वविद्यालयों व पंजीकृत शोध संस्थाओं के अधिकारी, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में 10 साल तक नौकरी की हो, उन्हें और उनके बच्चों को भी डोमिसाइल प्रमाणपत्र का पात्र माना जाएगा।
जम्मू कश्मीर राज्य के विघटन से पहले जहाँ ये प्रावधान था कि जम्मू कश्मीर की बेटियाँ अगर राज्य से बाहरी व्यक्तियों से शादी करती थीं, तो उनकी नागरिकता छिन जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, अब उनकी और उनके बच्चों को भी राज्य का स्थाई निवासी होने का प्रमाणपत्र मिलेगा।
पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते डोमिसाइल सर्टिफिकेट कानून को राज्य के लोगों के साथ धोखा बताया था, जबकि बीजेपी ने इसका स्वागत करते इसे लोगों के हित में लिया गया फैसला बताया है।
भारत से लगातार जारी शांति वार्ता और कूटनीतिक प्रयासों के तहत इंटरनेशनल दवाब के चलते चीन अब झुकता हुआ नजर आ रहा है। एएनआइ द्वारा सूत्रों के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक चीन ने फ्रंट इलाके से कुछ जवान और गाड़ियों को पीछे हटा लिया है। हालाँकि, इसे लेकर अभी तक सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
On June 22, the Chinese side had given assurance that they will move back troops from front to the depth areas. In this regard, some troops and vehicles were moved back by them in the Galwan area: Sources pic.twitter.com/Eq13M3xsUX
22 जून को हुई कमांडर स्तर की वार्ता में चीन ने भरोसा दिया था कि वह अपने सैनिकों को फ्रंट इलाके से पीछे हटाएँगे। अब इसका असर वहाँ दिखाई देने लगा है। दरअसल, 23 और 24 जून, 2020 को हुई सैन्य स्तर की वार्ता में भी भारत ने साफ किया था कि सीमा पर शांति स्थापित करने के लिए चीनी सैनिकों को अपने क्षेत्र में लौटना ही होगा।
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने हिंसक झड़प के मसले को उठाते हुए कहा था कि दोनों देशों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। बैठक में भारत ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत और उसमें बनी सहमति को भी दोहराया था।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने धमकी भरे अंदाज में कहा था कि भारत सीमा पर तनाव पैदा करके बहुत ज्यादा जोखिम मोल ले रहा है, जिसके नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।
इस बीच सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से सामने आ रही जानकारियों के आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि एलएसी में गलवान घाटी के दोनों तरफ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की मौजूदगी बढ़ गई है।
एलएसी के निकट चीन सैनिकों को जमावड़े को लेकर भारत भी अब चौकन्ना हो गया है। वह फिर कोई भूल नहीं करना चाहता। यही कारण है कि भारतीय सेना भी चीनियों का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई है। आपको बता दें कि इससे पहले ही सरकार सेना को खुली छूट दे चुकी है।
इससे पहले भारतीय सेना के पूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर पैंगोंग त्सो क्षेत्र में एक बार फिर से तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। इस संभावना को दोहराते हुए उन्होंने 15 जून की तरह एक बार फिर से LAC के पास दूसरे क्षेत्र में हिंसक झड़प होने की संभावना भी जताई थी।
जनरल कपूर ने यह भी कहा था कि वह चीनी विश्वासघात से बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं इन चीनी दाँव पेंच से हैरान नहीं हूँ। जब तक हम किसी निष्कर्ष पर पहुँचते हैं, दोनों पक्ष सहमत होते हैं और सभी तथ्यों को सत्यापित किया जाता है, तब तक हमें चीनी पक्ष की तरफ से किसी भी गतिविधियों के लिए तैयार रहना होगा, चाहे वह गलवान सेक्टर, डेपसांग सेक्टर, चुमार सेक्टर, डोंगचोंग क्षेत्र, सिक्किम हो या फिर अरुणाचल सेक्टर की तरफ हो।”
गौरतलब है कि 15 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़पों में कमांडिंग ऑफिसर सहित कम से कम 20 भारतीय सैनिकों ने शहादत प्राप्त की थी। सेना ने शुरू में दावा किया था कि झड़पों में एक कमांडिंग अधिकारी सहित 3 सैनिक मारे गए थे, लेकिन बाद में शाम को भारतीय सेना ने 20 सैनिकों की बलिदान की पुष्टि की।
हालाँकि, बीजिंग इस हिंसक झड़प में हताहत हुए लोगों की संख्या बताने पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन भारत सरकार ने कहा कि चीनी पक्ष ने करीब 43-45 पीएलए सैनिक या तो गंभीर रूप से घायल हुए या मारे गए। अब, यूएस की एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 35 चीनी सैनिक गलवान घाटी में मारे गए हैं।
मैंगलुरु के स्थानीय भाजपा नेता मनोहर शेट्टी की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हें हर ओर से लगातार सराहा जा रहा है।
इस तस्वीर में कादरी-कंबाला वार्ड के नगरसेवक मनोहर शेट्टी एक गटर (manhole) के भीतर पाइप ठीक करने के लिए जाते दिख रहे हैं। लोगों का इस तस्वीर को देखने के बाद कहना है कि एक जनप्रतिनिधि का ऐसा रूप उन्होंने कभी नहीं देखा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कूड़े से भर चुके पाइप को साफ करवाने की जुगत मनोहर शेट्टी बहुत बार मजदूरों को बुलाके कर चुके थे। मगर, जान का खतरा होने के कारण मजदूरों ने गटर के भीतर जाने से मना कर दिया। ऐसे में मनोहर शेट्टी ने नाले को साफ करवाने के लिए हाइ स्पीड वाटर जेट के साथ एक गाड़ी को भेजा। लेकिन ये युक्ति भी काम न आ सकी।
ऐसे में भाजपा नेता ने जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए खुद नाले में जाकर पाइप को ठीक करने की ठानी। जिसके कारण इलाके की स्थिति खराब हो रही थी। पानी सड़कों पर भर रहा था।
The pictures of a BJP corporator from Mangaluru are going viral, Kadri-Kambala ward corporator Manohar Shetty entered a manhole to fix a clogged pipe.https://t.co/ydrwyCH5sr
मनोहर शेट्टी ने चार कर्मचारियों के साथ मिलकर इस पाइप को साफ करने का निर्णय लिया। उन्होंने आधा दिन खर्च करके पाइप में चिपका कूड़ा निकाला।
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक शेट्टी कहते हैं, “हम गरीब लोगों को गटर में जाकर पाइप साफ करवाने के लिए जबरदस्ती नही कर सकते। अगर कुछ गलत होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? बस इसीलिए मैंने ये काम खुद करने का निर्णय लिया। हम हर कार्य के लिए अधिकारियों पर आश्रित नहीं हो सकते।”
उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर शेट्टी की तस्वीरें आने के बाद उनको लेकर कई तरह की टिप्पणियाँ सामने आई हैं। अधिकांश लोगों ने जहाँ शेट्टी को उनके इस कार्य के लिए सराहा है। वहीं बहुत से वो लोग भी है- जिनका मानना है कि ये सब शेट्टी पब्लिसिटी पाने के लिए किया।
लेकिन शेट्टी ने मीडिया से बातचीत करते हुए इन सवालों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ये सब पब्लिसिटी का हिस्सा कतई नहीं है। ये हमारी ड्यूटी है। हम चुने गए प्रतिनिधि है। अगर हम कुछ जल्दी कर सकते हैं। तो हमें उसे जल्दी करना चाहिए।”
शेट्टी इस दौरान ये भी कहते हैं कि अगर उन्हें गटर में दोबारा जाने की आवश्यकता पड़ी तो वो उसमें दोबारा जाएँगे। उनका मानना है कि यदि उनके इलाके में कोई इंसान नगर से जुड़ी परेशानी का सामना कर रहा है। तो यह मेरा कर्तव्य है कि मैं उसकी मदद करूँ।
उत्तर प्रदेश के कानपुर शेल्टर होम केस को लेकर सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी की ‘भ्रामक’ टिप्पणी ने उनकी परेशानियाँ बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी को उनकी टिप्पणी के कारण नोटिस भेजा है।
इस नोटिस में उन्हें आयोग ने उनसे उनकी टिप्पणी का तीन दिन के अंदर खंडन करने को कहा है। साथ ही, चेतावनी दी है कि अगर समय से खंडन न किया गया तो आयोग अधिनियम -2005 की धारा-13 की उपधारा -1 (जे) के साथ धारा-14 व 15 के तहत उचित कार्रवाई करेगा।
बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी सूचित किया गया है।
The Uttar Pradesh child rights panel issued a notice to Congress general secretary Priyanka Gandhi, asking her to file a reply within three days for her “misleading” comment on the Kanpur shelter home.https://t.co/OlkFgMmvVV
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों कानपुर में स्वरूप नगर स्थित संवासिनी गृह में सात संवासिनियों के गर्भवती और 57 के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद प्रियंका गाँधी ने कानपुर शेल्टर होम को लेकर टिप्पणी की थी।
उन्होंने कहा था, “कानपुर के सरकारी बाल संरक्षण गृह में 57 बच्चियों को कोरोना की जाँच होने के बाद एक तथ्य आया कि दो गर्भवती और एक एड्स पॉजिटिव है। मुजफ्फरपुर (बिहार) के बालिका गृह का पूरा किस्सा देश के सामने है। यूपी में भी देवरिया से ऐसा मामला सामने आ चुका है। ऐसे में पुनः इस तरह की घटना सामने आना दिखाता है कि जाँचों के नाम पर सब कुछ दबा दिया जाता है लेकिन सरकारी बाल संरक्षण गृहों में बहुत ही अमानवीय घटनाएँ घट रही हैं।”
प्रिंयका गाँधी की इसी टिप्पणी को उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भ्रामक और तथ्यहीन बताया और इसे बालिकाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला करार दिया।
अखिलेश यादव ने भी की थी टिप्पणी
कानपुर शेल्टर होम केस को लेकर अखिलेश यादव ने भी ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा था “कानपुर के सरकारी बाल संरक्षण गृह से आई खबर से उप्र में आक्रोश फैल गया है। कुछ नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने का गंभीर खुलासा हुआ है। इनमें 57 कोरोना से व एक एड्स से भी ग्रसित पाई गई है, इनका तत्काल इलाज हो। सरकार शारीरिक शोषण करने वालों के खिलाफ तुरंत जाँच बैठाए।”
बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद अब एक ऐसा ही मामला दिल्ली से सामने आया है। जहाँ एक 16 वर्षीय टिकटॉक स्टार सिया कक्कड़ ने 25 जून, 2020 को फाँसी का फंदा लगा मौत को गले लगा लिया। दिल्ली के प्रीत बिहार स्थित आवास से मिले शव के साथ पुलिस ने उनके मोबाईल को जब्त कर लिया है। हालाँकि, अभी तक आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है।
खबरों के मुताबिक बुधवार देर रात को सिया कक्कड़ ने अपने कमरे में फाँसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। रात में ही सूचना पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पॉस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने कमरे से सिया के मोबाइल को कब्जे में ले लिया। हालाँकि, अभी तक सिया के आत्महत्या करने का कारण साफ नहीं हो सका है। गुरुवार को पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करा के शव परिजनों को सौंप दिया।
दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक पिता इंदर कक्कड़ ने किसी से भी बात करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं बहन और भाई का कहना है कि वह जा चुकी है और सभी लोग उसकी आत्मा की शांति के लिए दुआ करें।
वहीं जानकारी मिली है कि सिया को कुछ लोगों से धमकियाँ मिल रही थीं। इसे लेकर वह बेहद परेशान थीं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है। फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। जाँच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
आपको बता दें कि सिया कक्कड़ अपने परिवार के साथ 13 ब्लॉक, गीता कॉलोनी, दिल्ली में रहती थी। बुधवार (24 जून, 2020) की रात को उन्होंने अपना आखिरी वीडियो टिक टॉक पर अपलोड किया था। इस बीच सिया ने अपने मैनेजर अर्जुन से भी किसी गाने को लेकर बात की थी। अर्जुन का कहना है कि बातचीत से ऐसा नहीं लगा कि वह परेशान है।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक अर्जुन ने बताया, “इसके पीछे कुछ व्यक्तिगत कारण हो सकते हैं। काम के लिहाज से वह अच्छा कर रही थी। बीती रात एक काम को लेकर उनसे बात हुई थी तब वह मुझे सामान्य लग रही थी। मैं और मेरी कंपनी फेम एक्सपर्ट्स बहुत सारे कलाकारों का प्रबंधन करते हैं और सिया बहुत ही टैलेंटेड थीं।”
इस घटना को लेकर लोकप्रिय सेलिब्रिटी फ़ोटोग्राफ़र वायरल भयानी ने अपने इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से सिया की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, “16 वर्षीय मीठी टिक-टॉक स्टार @siya_kakkar का आत्महत्या करना दुखद है। इसे लेकर मैंने अर्जुन सरीन से बात की थी, जिन्होंने बताया था कि आखिरी रात एक गीत को लेकर उनसे बात हुई थी।
उस समय वह सामान्य लग रही थी। उन्होंने बताया कि पता नहीं उनके साथ गलत क्या हुआ। यह दुखद है। भयानी ने लिखा कि अगर आप खुद को निराश महसूस कर रहे हैं तो कृपया यह न करें।”
वहीं गदर एक प्रेम कथा के निर्देशक अनिल शर्मा ने सिया की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए सिया की आत्महत्या पर दुख प्रकट किया। उन्होंने लिखा ये बच्चे अपने परिवारों के बारे में क्यों नहीं सोचते हैं। इस भयानक कदम को उठाने से पहले प्यार करते भी हैं, दुख की बात है। परिवार के प्रति हार्दिक संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ।
दरअसल, सिया कक्कड़ को उनके डांसिंग वीडियो के लिए जाना जाता था। वह टिकटॉक पर काफी लोकप्रिय थी। इस बात का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि सिया को टिक टॉक पर 11 लाख लोग फॉलो करते थे और वहीं इंस्टाग्राम पर भी करीब 91 हजार लोग उनसे जुड़े हुए थे।
भारत-चीन सेना के बीच हुई झड़प के बाद कॉन्ग्रेस सरकार लगातार भाजपा पर सवाल दाग रही है। ऐसे में भाजपा ने भी आज कॉन्ग्रेस पर जोरदार पलटवार किया है। गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, समेत पूरी पार्टी पर निशाना साधा है।
जेपी नड्डा ने आज मध्यप्रदेश में जनसंवाद रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा, “मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि 2005-06 में राजीव गाँधी फाउंडेशन (Rajeev Gandhi Foundation) को चीनी दूतावास और चीन की ओर से 3 लाख डॉलर बतौर चंदे के रूप में मिले थे। यह कॉन्ग्रेस और चीन के बीच गुप्त रिश्ता है।”
#WATCH I am amazed that the Rajiv Gandhi Foundation received 3 hundred thousand USD from the People’s Republic of China & Chinese Embassy in 2005-06. This is the secret relation of Congress & China: BJP pres JP Nadda during Madhya Pradesh Jan Samvad Rally via video conferencing pic.twitter.com/rYJFixYbOx
जेपी नड्डा ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ये वही लोग हैं, जो चाइना से फंड लेकर देश में माहौल बनाते हैं। सभी राजनैतिक दल के लोगों ने पीएम से कहा कि वह सभी देशहित में एक साथ खड़े हैं। बस एक परिवार ने विरोध किया। इनके खाने के दाँत कुछ, और दिखाने के लिए कुछ और है।
डोकलाम के वक्त की घटना को नड्डा ने याद दिलाते हुए राहुल गाँधी पर हमला किया। जेपी नड्डा ने कहा कि गलवान घाटी में घटी घटना पर भी कॉन्ग्रेस ने राजनीति की है। ये वही कॉन्ग्रेस है, जब 2017 के अगस्त में चीन और भारत का स्टैंड ऑफ हो रहा था, उस समय राहुल गाँधी चीन के राजदूत से गुपचुप मुलाकात कर रहे थे।
जेपी नड्डा कॉन्ग्रेस पर वार करते हुए पूछते हैं कि आखिर राजीव गाँधी फाउंडेशन को इतना पैसा किस बात के लिए दिया गया था और उन्होंने देश में क्या स्टडी की थी, ये भी देश जानना चाहता है।
इसके अलावा बता दें भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आपातकाल के लिए कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। साथ ही आपातकाल को कॉन्ग्रेस की अधिनायकवादी मानसिकता का परिचायक करार दिया। भाजपा अध्यक्ष ने एक ट्वीट में लिखा, “भारत उन सभी महानुभावों को नमन करता है, जिन्होंने भीषण यातनाएँ सहने के बाद भी आपातकाल का जमकर विरोध किया। ये हमारे सत्याग्रहियों का तप ही था जिससे भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों ने एक अधनियाकवादी मानसिकता पर सफलतापूर्वक जीत प्राप्त की।”
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने खोला कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ मोर्चा
उल्लेखनीय है कि जेपी नड्डा के अलावा कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कॉन्ग्रेस पर गुरुवार को आरोप लगाया। दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, उन्होंने कहा कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन ने 2005-06 में तीन लाख डॉलर (करीब 2 करोड़ 26 लाख रुपए) का डोनेशन दिया था। उन्होंने कॉन्ग्रेस से सवाल किया कि यह रुपए किन शर्तों पर लिए गए और इन रुपयों का क्या किया गया?
उन्होंने कहा, कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा किया। कॉन्ग्रेस बताए कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को यह रुपए चीन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) यानी कि बिना रोक-टोक के आयात-निर्यात को प्रमोट करने के लिए मिला।
केंद्रीय कानून मंत्री ने बताया कि फॉरेन कांट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट के तहत कोई भी राजनीतिक पार्टी विदेश से पैसा नहीं ले सकती है। साथ ही कोई भी एनजीओ बिना सरकार की अनुमति के विदेश से रुपया नहीं ले सकता है।
उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा कि कानून के मुताबिक कोई भी संस्थान अगर विदेशी फंड लेता है तो उसे इससे संबंधित सभी जानकारी सरकार को देनी होती है। क्या राजीव गाँधी फाउंडेशन ने सरकार को चीन से लिए गए डोनेशेन की जानकारी दी थी? क्या उन्होंने बताया था कि किन शर्तों पर डोनेशन लिया और उन्होंने इसका क्या उपयोग किया?
कानून मंत्री का सवाल है कि अगर कॉन्ग्रेस ने इन सबकी जानकारी नहीं दी तो क्यों नहीं दी और अगर दी तो क्या ये बताया कि वे चीन के साथ फ्री ट्रेड के बदले में ये पैसा ले रहे हैं?
यहाँ बता दें कि डोनेशन देने की शुरुआत तब हुई जब राजीव गाँधी फाउंडेशन ने कई सारे स्टडीज का हवाला देते हुए यह बताने की कोशिश की थी कि भारत और चीन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) यानी कि बिना रोक-टोक के आयात-निर्यात का होना बेहद जरूरी है