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पदोन्नत होकर एडिशनल DCP बने अनुज कुमार, दिल्ली दंगों में जान पर खेल कर बचाई थी पुलिसकर्मियों की जान

पुलिस ने शुक्रवार (जून 26, 2020) को इस बात की जानकारी दी कि पूर्वोत्तर दिल्ली के पूर्व एसीपी अनुज कुमार, जो गत फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी के पूर्वोत्तर हिस्से में हुई हिंसा के दौरान घायल हुए थे, को पदोन्नत किया गया और उन्हें दक्षिण दिल्ली के अतिरिक्त डीसीपी के रूप में नियुक्त किया गया है। गत 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंसा के में डीसीपी शाहदरा अमित शर्मा और अनुज कुमार सहित कम से कम 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

इस हिंसा में एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल सहित कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 200 लोग घायल हो गए। अनुज कुमार ने कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी उनसे साझा की थी।

दिल्ली पुलिस के ट्रांसफर ऑर्डर की प्रति

उन्होंने उस दिन की भयावह स्थिति के बारे में बताया कि, किस तरह हिंसक मुस्लिम भीड़ ने उन पर हमला किया था और किन हालातों में उन्होंने डीसीपी अमित शर्मा सहित अपने सहयोगियों को बचाया था।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, एसीपी ने बताया कि गत 24 फरवरी को, शाहदरा डीसीपी अमित शर्मा चाँदबाग में हिंसक भीड़ के बीच वजीराबाद रोड के डिवाइडर के पास घायल होकर बेहोश हो गए थे। स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ वे डीसीपी को लेकर यमुना विहार की तरफ भागे।

उन्होंने आगे बताया कि भीड़ की तरफ से लगातार उन पर पत्थरबाजी हो रही थी। जब उनकी टीम शांति से भीड़ के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रही थी और उन्हें मुख्य सड़क के बजाय सर्विस रोड तक सीमित रहने के लिए कहा जा रहा था, उसी दौरान ऐसी अफवाह फैली कि पुलिस की गोलीबारी में कुछ महिलाएँ और बच्चे घायल हो गए। जिस कारण लोग भड़क गए और हिंसक हो गए।

इस वीभत्स घटना को याद करते हुए अनुज शर्मा ने बताया कि वहाँ कुल मिलाकर लगभग 250 की संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे, जबकि पथराव कर रही हिंसक भीड़ में लगभग 25,000 से 30,000 लोग शामिल थे।

उन्होंने कहा- “हम लगातार वहाँ मौजूद महिलाओं और भीड़ को मनाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और ईंटें उठाकर अचानक पथराव शुरू कर दिया और स्थिति बेकाबू हो गई।” एसीपी ने बताया कि पुलिस ने भीड़ को अलग करने के लिए आँसू गैस के गोले दागे लेकिन प्रदर्शनकारियों के बीच पर्याप्त दूरी होने के कारण यह कोशिश नाकाम रही।

हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की इन दंगों के दौरान ही फरवरी 24, 2020 को हत्या हो गई थी। जब वे अपने सीनियर्स के साथ गश्त पर थे तभी उन्हें दंगाइयों ने गोली मार दी थी। वहीं, पुलिस ने अपनी चार्जशीट में यह आरोप लगाया है कि 22 फरवरी को 45 लोगों के एक समूह ने एक घर के बेसमेंट में एक बैठक की थी। उसी जगह दंगों की पूरी साजिश रची गई।

साजिश के तहत 23 फरवरी को दंगाइयों ने वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को घर के अंदर रहने के लिए कहा था। क्योंकि उन्होंने उस दिन अपनी योजना के अनुसार सड़कों पर दंगा भड़काना था।

फ्रीलांसर एक्टिविस्ट स्वरा भास्कर का ‘रसभरी’ अवतार: सॉफ्ट पोर्न को लाल सलामी

Ullu TV और ALTBalaji, जिन्हें हम सस्ता PornHub भी कह सकते हैं, OTT प्लेटफॉर्म्स की दुनिया में एक अलग ही किस्म की क्रांति लेकर आए हैं। इसी क्रांति में अपनी लाल सलामी लगाने को Amazon Prime Video भी उत्सुक दिखता है।

पाताल लोक के प्रोपेगेंडा से भरपूर स्क्रीनप्ले में कुछ संवाद एवं पात्र डालने के बाद Prime Video ने सोचा कि व्हाई शुड Ullu TV ऐंड ALTBalaji हैव ऑल द फन। इसी सोच और पार्ट टाइम अदाकारा एवं फुल टाइम एक्टिविस्ट स्वरा भास्कर के साथ उसने एक कथित वेब सीरीज बना डाली है। इसका नाम है, रसभरी।

इसके भी प्री प्रोडक्शन की विधि एकदम वही है जो पाताल लोक की थी। वहॉं प्रोपेगेंडा के साथ संवाद और पात्र परोसे गए थे, यहॉं सॉफ्ट पोर्न के साथ संवाद और पात्र उतारे गए हैं।

यदि आप यूट्यूब पर जाकर रसभरी का ट्रेलर देखें (जिसमें लाइक से ज्यादा डिसलाइक्स का अनुपात चल रहा है), जो कि आप तभी करेंगे अगर आपको अपने दिन के 2GB डाटा दिमाग एवं आँखों से लगाव न हो, तो आप पाएँगे कि कहानी मेरठ शहर को मस्तिष्क में रखकर गढ़ी गई है। जैसे अब तक हर तरीके का अपराध मेरठ, मुज़फ्फरनगर, गाज़ियाबाद, अलीगढ़ या यूँ कहें कि उत्तर प्रदेश एवं बिहार में ही होता था, अब से सॉफ्ट पोर्न भी इन्हीं शहरों या प्रदेशों को दिमाग में रखकर गढ़ी जाया करेंगी।

इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि मेरठ वह शहर है जहॉं से मंगल पांडे ने 1857 में स्वतंत्रता का पहला बिगुल बजाया था। आज के समय की बात करें तो यह शहर भारत के सबसे बड़े खेल समानों के बाज़ारों में से एक है। राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी क्रिकेट बैट्स से लेकर हॉकी स्टिक्स एवं टेनिस रैकेट्स की आपूर्ति करता है।

इसी तरह अलीगढ़ के हार्डवेयर हब और गाज़ियाबाद के एजुकेशन हब होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको कोई फ़िल्म या वेब सीरीज़ इसके इर्द-गिर्द कहानी लिखती नहीं मिलेंगी। OTT प्लेटफॉर्म्स और बॉलीवुड की नज़र में यहॉं की छवि सिर्फ यह है कि यहॉं के छात्र मध्य उम्र की अध्यापिकाओं के वक्ष स्थल एवं स्तनों को घूरते हैं।

वैसे सारी गलती इन प्लेटफॉर्म्स की भी नहीं है। वह वही दिखाते हैं जो जनता देखना चाहती है। जब आम लोग इस तरह के वेब शोज़ और फिल्मों को देखेंगे, प्रचलित करेंगे, इस तरह की घिनौनी सामग्री के लिए पसीना बहा कर कमाया हुआ पैसा खर्च करेंगे, उनके बारे में बातें करेंगे तो उन्हें इसके लिए भी तैयार रहना पड़ेगा कि उनके बच्चों, छात्रों, शहर एवं प्रदेश की छवि धूमिल होना निश्चित है।

उन्हें उसी मेरठ से आए भुवनेश्वर कुमार, प्रवीण कुमार और सुदीप त्यागी जैसों की असली कहानियॉं और संघर्ष नहीं दिखेंगे। वे आप ही के किशोर बच्चों को आपके आगे चरित्रहीन और कुत्सित मानसिकता से भरपूर दिखाकर पेश करेंगे। आप भी चटकारे लेकर यही सोच कर देख लेंगे कि ‘वाह शहर का नाम आया है फ़िल्म में, ये वाली तो ज़रूर देखेंगे’।

अगर सामाजिक स्तर से हट कर इस वेब सीरीज़ के बारे में बात करें तो ज़बरदस्ती एवं बिना मतलब का हवा से साड़ी के पल्लू का गिर जाना, छात्रों का बड़ी-बड़ी आँखें फाड़ कर अध्यापिका को घूरना, चलते हुए पीछे से अध्यापिका के वक्ष स्थल के शॉट्स, छाती के शॉट्स, होठ एवं कमर के शॉट्स से ज़्यादा इस सीरीज़ में कुछ खास नहीं है। सिनेमा की थोड़ी सी जानकारी रखने वाले लोग समझ जाएँगे कि यह हाई डेफिनेशन में में Red या Arri cams के साथ शूट हुई और अच्छी कलर ग्रेडिंग के साथ परोसी गई कांति शाह की उन 15-20 साल पुरानी घटिया C- ग्रेड फिल्मों से ज़्यादा और कुछ नहीं है।

अब सवाल यह है कि ऐसे समय में जब इंडस्ट्री में अच्छा काम भी हो रहा है एवं कुछ लोग अच्छे सिनेमा एवं कलाकारों को भी पहचान रहे हैं, वेब सीरीज़ की ही बात करें तो Pitchers एवं Permanent roommates से शुरू हुआ अच्छी लिखाई, सामग्री और अभिनय का सिलसिला ये मेरी फैमिली, कोटा फैक्ट्री और पंचायत तक जाती है, तो इस समय में इस घटिया वेब सीरीज़ की इतनी चर्चा क्यों हो रही है।

इस बात का जवाब है मार्केटिंग और एडवर्टाइजमेंट। लेकिन इसी क्रम में जब महिला सशक्तिकरण के कथित ठेकेदार और हर छोटी से छोटी बात, टिप्पणी या गाने को महिला के सम्मान से जोड़ देने वाले लोग इस सीरीज़ का ट्विटर पर प्रचार करते देखे गए तो इनके हिप्पोक्रेसी का चोला उतर गया।

जेएनयू से पढ़ी और महिला सशक्तिकरण की कथित ध्वजवाहक स्वरा भास्कर जब इस तरह की फ़ूहड़ सीरीज में महिलाओं को भोग की वस्तु की तरह पेश किए जाने पर अपनी लाल सलामी देती हैं, तो इस बात पर चर्चा करना और जरूरी हो जाता है। स्वरा ने जब रसभरी का ट्रेलर ट्विटर पर शेयर किया तो जवाब में उन्हीं के फैंस (जिनको वह इस आलोचना के बाद IT cell की उपाधि प्रदान कर देंगी) ने अपनी टिप्पणियों से निराशा जाहिर कर दी।

वैसे एक विशेष विचारधारा के लोगों में यह कुछ नया नहीं है, इनके साथी कामरेड अनुराग कश्यप यह कई सालों से करते आ रहे हैं। उनकी फिल्म या सीरीज़ की आलोचना करने वालों को वह अक्सर ‘मूर्ख’ एवं ‘आर्ट का टेस्ट’ ना रखने वालों जैसी उपाधि दे देते हैं।

मज़े की बात यह भी थी की एक विशेष विचारधारा रखने वाले सारे बॉलीवुड सहकर्मी जब इस सीरीज़ का प्रचार करने साथ में आए और उन्होंने ‘साथी हाथ बढ़ाना एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना’ का उदाहरण दिया तो मीम के तौर पर उसका एक बहुत मज़ेदार चित्रण देखने को मिला;

चित्र में दिखाए गए पात्र काल्पनिक हैं तथा इनका किसी जीवित एवं मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है

स्वरा के ट्वीट करते ही आपनी सुपरहिट ‘एक्शन-थ्रिलर’ फिल्म दस के सुपरहिट गाने पर अर्धनग्न अवस्था में महिलाओं को नचाने के बाद फिल्म थप्पड़ में अपने नाम के पीछे माँ का नाम लगाकर महिला सशक्तिकरण का संदेश देने वाले वाले कॉमरेड अनुभव सिन्हा का ट्वीट आया कि वह इस सीरीज़ को देखेंगे और उसके बाद स्वरा को फ़ोन करेंगे।

रांझणा के कुंदन के पुराने मित्र, ऑन स्क्रीन पंडित और ऑफ स्क्रीन भूतपूर्व AMU छात्र मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब ने भी ट्रेलर की तारीफों के पुल बॉंधते हुए ट्वीट किया और कुछ अलग शब्दों के माध्यम से स्वरा को ‘you go girl’ जैसा ही कुछ कहा।

इन सब के ट्वीट्स से प्रतीत होता है कि ये स्वरा भास्कर के वैसे मित्र हैं, जो नाई द्वारा बाल पूरे तरीके से बिगाड़ देने के बाद भी कहता है- यार कसम से बहुत सही लग रहा है, एकदम ब्रेंडन फ्रेजर। क्योंकि स्वरा के फैंस की ट्रेलर और सीरीज़ पर टिप्पणियों को देखकर कोई भी यह कह सकता है कि उन्होंने वेब सीरीज़ कर रुबिका लियाकत से CAA पर बहस करने के बाद दूसरी सबसे बड़ी भूल की है।

अब स्वरा चाहें तो हर बार की तरह टिप्पणी करने वालों को IT cell या संघी कहकर संबोधित कर सकती हैं। लेकिन, सच्चाई यही है कि इस सीरीज़ में देखने लायक सामग्री उतनी ही है, जितनी कि स्वरा की पिछली फिल्म वीरे दी वेडिंग में थी और प्रतिक्रिया भी लगभग वैसे ही मिल रही है।

रसभरी के एक्टिंग करियर का हाल देख तो स्वरा भास्कर के मित्र अनुराग कश्यप की ही एक फिल्म का संवाद याद आ रहा है;

चित्र में दिखाए गए पात्र बिल्कुल काल्पनिक नहीं हैं तथा इनका जीवित एवं मृत व्यक्तियों सेे संबंध भी है!

सूफी संत को ‘लूटेरा चिश्ती’ कहने के मामले में जर्नलिस्ट अमीश देवगन को राहत, SC ने जाँच और कार्रवाई पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में न्यूज 18 इंडिया के पत्रकार और एंकर अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर में जाँच और कार्रवाई करने पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसके साथ ही शुक्रवार (जून 26, 2020) को सुनावाई के दौरान कोर्ट ने राज्य व शिकायतकर्ताओं को नोटिस जारी करते हुए आठ जुलाई तक जवाब माँगा है।

कोर्ट में अमीश देवगन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने शो के दौरान अनजाने में गलती की थी। जिसके लिए उन्होंने बाद में सार्वजनिक तौर पर माफी भी माँगी थी। लेकिन पत्रकार के खिलाफ ‘जुबान फिसलने’ के कारण एफआईआर दर्ज करना अन्यायपूर्ण है और उत्पीड़न के दायरे में है।

लूथरा ने कहा कि अगर ऐसा होने लगे, जहाँ लोगों को जुबान फिसलने के कारण ऐसी समस्या का सामना करना पड़े तो क्या होगा? लोग गलती करते हैं। उन्होंने माफी भी माँगी है।

उन्होंने कहा कि देवगन के खिलाफ राजस्थान, महाराष्ट्र और तेलंगाना में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं और अगर एफआईआर के सिलसिले में उन्हें देश भर में अलग-अलग जगहों पर पेश होने के लिए कहा जाता है, तो यह उनके लिए गंभीर पूर्वग्रह पैदा करेगा। लूथरा ने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों को भी धमकाया और परेशान किया जा रहा है।

महाराष्ट्र के दो शिकायतकर्ताओं की ओर से पेश हुए वकील रिजवान मर्चेंट ने कहा कि देवगन ने अपने शो के दौरान एक बार से ज्यादा “लुटेरा चिश्ती” शब्द का इस्तेमाल किया।

अमीश के खिलाफ शिकायतों और देश भर में एक के बाद एक एफआईआर दर्ज होने पर सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ दायर सभी एफआईआर पर रोक लगाने और उन्हें खारिज करने की माँग करते हुए एक याचिका दायर की गई थी, जिस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई।

गौरतलब है कि 15 जून को अपने शो ‘आर पार’ पर पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम के संबंध में पीआईएल के बारे में एक बहस की मेजबानी करते हुए, अमीश ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जिन्हें ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के रूप में जाना जाता है, उन्हें “हमलावर” और “लुटेरा” कहकर बुलाया था।

इसके बाद, एंकर के खिलाफ देश भर में कई पुलिस शिकायतें और एफआईआर दर्ज की गईं। विवादास्पद इस्लामिक संगठन रज़ा अकादमी, जिसे आज़ाद मैदान दंगों में शामिल होने के लिए जाना जाता है, ने भी अमीश देवगन के खिलाफ धारा 295 ए, 153 ए, 34, 120 बी और 505 (2) के तहत FIR दर्ज करवाई।

हालाँकि, अमीश देवगन ने सूफी संत को “लुटेरा” के रूप में संदर्भित करने के लिए भी माफी माँगी थी और इसे “अनजाने में हुई गलती बताया था। उन्होंने सार्वजनिक रुप से माफी माँगते हुए ट्विटर पर लिखा था, “मेरे एक डिबेट में मैंने अनजाने में खिलजी को चिश्ती कह दिया। इस गलती के लिए मैं तहेदिल से माफी माँगता हूँ। इससे सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती, जिनका मैं सम्मान करता हूँ, उनके अनुयायियों को दुख हो सकता है। मैंने इस दरगाह पर दुआएँ माँगी हैं। मुझे अपनी गलती पर खेद है।“

मगर इसके बावजूद उनके खिलाफ एफआईआर करवाए गए और कट्टरपंथियों ने तो उन्हें हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या की बात याद दिलाई।

काम केंद्र का, क्रेडिट खाने की कोशिश केजरीवाल की: दिल्ली में 10000 बेड्स के कोविड अस्पताल को लेकर AAP की राजनीति

जहाँ एक तरफ दिल्ली में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कह रहे हैं कि राजधानी में हालात काबू में है। इतना ही नहीं, जब केजरीवाल की AAP सरकार की नाकामी के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मैदान में उतरे और उन्होंने कोरोना से निपटने की तैयारियों का जिम्मा सम्भाला, तब आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र द्वारा किए जा रहे कार्यों का क्रेडिट खाने के मूड में भी है।

आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर के कहा कि राधास्वामी सत्संग ब्यास सेंटर में कोविड केयर सेंटर की स्थापना की गई है, जहाँ 10,000 बेड्स में से 2000 बेड्स को सक्रिय कर दिया गया है। साथ ही पार्टी ने ये भी दावा किया कि ये दुनिया का सबसे बड़ा कोविड केयर फैसिलिटी है जिसे अरविन्द केजरीवाल सरकार ने तैयार किया है। यहाँ भी पार्टी केंद्रीय गृह मंत्रालय का क्रेडिट खाने के प्रयास से बाज नहीं आई।

भाजपा सरकार के काम की क्रेडिट लेना तो दूर की बात थी, आप नेता संजय सिंह ने तो एक क़दम और आगे बढ़ कर केंद्र सरकार द्वारा किए गए काम को लेकर केंद्र को ही कोसना शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि जहाँ लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की स्मृति में जहाँ भाजपा ने सबसे ऊँची प्रतिमा बनवाई, वहीं आप सरकार ने सबसे बड़ा अस्पताल बनवाया। जबकि सच्चाई ये है कि दोनों काम केंद्र सरकार ने ही कराए हैं।

बता दें कि जिस हॉस्पिटल की बात की जा रही है, वहाँ ब्यास का शेड पहले से ही तैयार था। ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो ने कई दिनों पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष प्रस्ताव रखा था कि अभी ब्यास में अनुयायियों का कोई आवागमन नहीं हो रहा है, ऐसे में उसे कोरोना से निपटने के लिए समर्पित किया जा सकता है। इसमें केजरीवाल सरकार की कोई भूमिका नहीं थी लेकिन अभी वो क्रेडिट खा रहे हैं।

इससे पहले अमित शाह ने केजरीवाल को ट्वीट कर पहले ही कहा था कि ये पहले ही बैठक में निर्णय लिया जा चुका है कि 10,000 बेड्स का अस्पताल बनवाया जाएगा। जब सीएम केजरीवाल ने उन्हें अस्पताल के इंस्पेक्शन के लिए आमंत्रित किया था, तब शाह ने उन्हें जवाब देते हुए ये बात लिखी थी। यहाँ आईटीबीपी और सेना के डॉक्टरों की सेवाएँ भी ली जाएँगी। पूरा काम शाह की निगरानी में ही हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर आईटीबीपी के अनुभवी डॉक्टरों और प्रशासकों की टीम द्वारा केयर सेंटर की तैयारियाँ युद्ध स्तर पर की जा रही है। दिल्ली में बिगड़ते हालात को लेकर गृहमंत्री ने सबसे पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इसके बाद स्थिति का जायजा लेने के लिए एलएनजेपी अस्पताल में कोरोना वायरस की तैयारियों को देखते हुए अस्पताल का दौरा भी किया था।

केजरीवाल सरकार द्वारा टेस्टिंग बढ़ने के दावों के बाद भाजपा ने जवाब देते हुए कहा है कि दिल्ली में टेस्टिंग की संख्या मोदी सरकार के हस्तक्षेप के बाद बढ़ी। साथ ही पूछा कि ‘आप’ ने इसमें क्या किया? पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में हुई भयानक स्थिति के ज़िम्मेदार सिर्फ़ ‘आप’ हैं। बताया गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दिल्ली का मोर्चा संभालना पड़ा क्योंकि ‘आप’ जनता को परेशान देखकर भी चुप बैठे रहे।

दिल्ली में बढ़ते कोरोना के आँकड़े दुनिया भर के 167 देशों से भी ज़्यादा हैं। इसके अलावा संक्रमण से हो रहीं मौतों ने भी 166 देशों को पीछे कर दिया है। ये सभी देश कम जनसंख्या वाले ही नहीं हैं। इनमें इंडोनेशिया, जापान और मिस्र जैसे बड़े देश भी शामिल हैं। दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के 73,780 मामले सामने आए हैं। इनमें 26,586 एक्टिव केस हैं। 2429 लोगों की मौत हुई है। अब तक लगभग 44,765 हजार मरीज ठीक हो चुके हैं।

TikTok रखता है आईफ़ोन के ‘क्लिपबोर्ड डाटा’ पर नजर, चायनीज कम्पनी ने कहा- ऐसा एक ‘फीचर’ की वजह से होता है

चायनीज सोशल मीडिया वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप, टिकटोक लगातार विवाद का विषय रहा है। फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह चायनीज ऐप IOS 14 (आईफ़ोन का ऑपरेटिंग सिस्टम) में एक ‘बग’ के जरिए क्लिपबोर्ड को चुपचाप एक्सेज़ कर लोगों की गोपनीय जानकारी जुटाते हुए पाया गया है।

फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईफ़ोन निर्माता कंपनी एप्पल ने शुरुआत में चीनी ऐप में कमजोरियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मीडिया के हंगामे के बाद एक समाधान लेकर आया था। इस रिपोर्ट में टिकटोक उपयोगकर्ताओं को इसे अपडेट करने का आग्रह किया और यह ध्यान रखने की बात कही कि ऐप की यह अपडेट जारी होने से पहले किसी व्यक्ति के मोबाइल के क्लिपबोर्ड तक पहुँच है।

हालाँकि, सभी आरोपों को खारिज करते हुए, टिकटोक की निर्माता कंपनी ‘बाइटडांस’ ने कहा कि समस्या एक पुराने Google विज्ञापन सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट किट (SDK) से संबंधित थी। अपने बचाव में चीनी ऐप टिकटोक ने कहा कि फोन पर क्लिपबोर्ड (जहाँ कॉपी किया गया लेख/अक्षर/शब्द सुरक्षित रहता है) का इस्तेमाल एक ‘फ़ीचर’ के कारण हुआ।

टिकटोक निर्माताओं के अनुसार यह ‘फीचर’ ऐप में दोहराव वाले स्पैम व्यवहार की पहचान करने के लिए ऐसा करता है। वहीं, फोर्ब्स ने उल्लेख किया है यह तब हो रहा है, जब कि टिकटोक ने इस ‘आक्रामक क्रियाकलाप’ को समाप्त करने की कसम खाई थी, लेकिन यह अप्रैल के अंत तक भी जारी रहा।

इमोजीपीडिया (Emojipedia) के जेरेमी बर्ज ने iOS 14 बेटा में पाया कि टिकटोक एप्लीकेशन आईफोन के क्लिपबोर्ड से जो भी टाइप करता है, उसकी प्रतिलिपि यानी कॉपी बना लेता है। उन्हें इसका पता तब लगा जब iOS 14 लगातार ‘पॉप-अप’ संदेश दिखाते हुए कह रहा था कि “टिकटॉक ने इंस्टाग्राम से जोड़ा (पेस्ट किया) है”। इसके बाद टिकटोक ने तुरंत जवाब दिया है कि वे iPhone उपयोगकर्ताओं के क्लिपबोर्ड को पढ़ना बंद कर देंगे।

IPhone ऑपरेटिंग सिस्टम में लागू नवीनतम सिक्योरिटी अपडेट iOS14, ने नोट किया कि चायनीज ऐप टिकटोक एप्लीकेशन यह जाँचता है और निगरानी करता है कि क्लिपबोर्ड पर क्या कॉपी किया गया है। जो उपयोगकर्ता iOS 14 बेटा ऐप को जाँच रहे हैं, वे देख सकते हैं कि टिकटोक जैसे ऐप लगातार क्लिपबोर्ड तक पहुँच रहे हैं, जबकि इस ऐप का उस समय उपयोग भी नहीं किया जा रहा है। आईफ़ोन की निर्माता कम्पनी एप्पल के अनुसार, आप देख सकते हैं कि कोई एप्लिकेशन क्या कॉपी कर रही है, या इसकी समीक्षा कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, टिकटोक ने आश्वासन दिया कि यह समस्या ठीक हो गई है। कम्पनी ने इमेल के माध्यम से कहा- “टिकटोक को डेटा तक पहुँच नहीं मिलती है, लेकिन फिर भी हम इसे हल करने के लिए अपडेट कर रहे हैं।” हालाँकि, एप्पल के नए iOS 14 के में यह पता चला था कि चीनी ऐप अभी भी क्लिपबोर्ड संदेशों तक पहुँच रहा था, जो पहले के दावों के विपरीत था।

भारत-चीन तनाव के बीच PTI के ‘देश विरोधी’ रिपोर्टिंग पर प्रसार भारती सख्त, करोड़ों का करार खत्म होने की संभावना

न्यूज़ एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के हालिया कवरेज से प्रसार भारती सख्त नाराज है। वह न्यूज एजेंसी को दी जाने वाली वित्तीय मदद रोकने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

ऑपइंडिया को विश्वस्त सूत्रों से प्रता चला है कि पीटीआई की ‘देश विरोधी’ रिपोर्टिंग प्रसार भारती को नागवार गुजरी है। न्यूज एजेंसी ने भारत-चीन के तनाव के बीच बीजिंग को अपने प्रोपेगेंडा का प्रचार करने के लिए मंच मुहैया करवाया था।

बता दें कि PTI को विभिन्न की फीस के रूप में प्रसार भारती से दशकों से करोड़ों रुपए प्राप्त होते रहे हैं। इस उसे भारी फायदा होता रहा है। सूत्रों के अनुसार PTI को प्रसार भारती से प्रत्येक वर्ष 9 करोड़ रुपए प्राप्त होते हैं।

इसके अलावा PIB (प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो) से भी PTI को भारी रकम मिलती आई है। PTI की ‘देश विरोधी’ रिपोर्टिंग देख प्रसार भारती का मानना है कि इस करार के साथ आगे बढ़ना ठीक नहीं होगा।

प्रसार भारती 2016-17 से ही इस करार की समीक्षा करने के पक्ष में रहा है। अब चीन के सम्बन्ध में PTI की रिपोर्टिंग के बाद समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार प्रसार भारती जल्द ही PTI को अपने निर्णय को लेकर अवगत करा देगा।

बता दें कि हाल ही में PTI ने नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वेडोंग का एक इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने भारत के विरोध में बातें कर के चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था। लेकिन PTI ने इस दौरान भारत का पक्ष रखते हुए सवाल तक नहीं किए।

उसने चीन के राजदूत द्वारा किए गए झूठे दावों पर पलट कर कोई सवाल भी नहीं पूछा। PTI के इस रुख को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने विरोध जताया था।

बता दें कि गलवान में हुए संघर्ष में भले ही भारतीय सेना के जवानों की संख्या चीनियों से काफ़ी कम थी, भले ही चीनी पहले ही उचित स्थान देखकर हमले के लिए बैठे थे, भले ही चीनियों के पास जानलेवा हथियार थे, लेकिन जब बिहारी रेजिमेंट ने जवाबी कार्रवाई की तो उनके छक्के छूट गए। जवानों पर लगातार पत्थर बरस रहे थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 3 घंटे तक चले युद्ध में  हमारे 20 जवान भी वीरगति को प्राप्त हुए। हमारे कुल 100 जवान थे, जिन्होंने 350 चीनी सैनिकों को परास्त किया। उनके 43 जवान मरे।

लेकिन, PTI ने चीन को मंच देकर भारत के पक्ष को एकदम से गौण कर दिया। जबकि केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने खुलासा किया था कि भारत ने चीन के कई सैनिकों को पकड़ा था जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। वीके सिंह ने गलवान घाटी संघर्ष को लेकर जानकारी दी थी कि इस झड़प में चीन के दोगुने सैनिक मारे गए थे। उन्होंने कहा था कि लेकिन चीन कभी भी सार्वजनिक रूप से इस बात को स्वीकार नहीं करेगा और PTI की इंटरव्यू में भी यही हुआ।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई मौकों पर पीटीआई फेक न्यूज फैलाते पकड़ा जा चुका है। अप्रैल में उसने दावा किया था कि कोरोना संक्रमित होने के संदेह में महबूब अली की मॉब लिंचिंग कर दी गई। लेकिन, महबूब अली जिंदा निकला।

राजनीतिक मसलों पर भी न्यूज एजेंसी फेक न्यूज को हवा देती रही है। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पीटीआई ने दावा किया था कि आप के केवल 25 फीसदी उम्मीदवारों पर ही गंभीर आपराधिक मामले हैं। असल में यह संख्या 50 फीसदी से ज्यादा थी।

अहमद पटेल के घर ₹14,500 करोड़ के फर्जीवाड़ा के बारे में पूछताछ के लिए पहुँची ED, कॉन्ग्रेस नेता ने हाजिर होने में जताई थी असमर्थता

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और सोनिया गाँधी के करीबी अहमद पटेल के आवास पर शनिवार (जून 27, 2020) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पूछताछ के लिए पहुँची। बताया जा रहा है कि उनसे संदेसरा बंधुओं के पीएमएलए मामले में बयान दर्ज किया किया जा रहा है। 

एजेंसी ने पटेल को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं और कोविड-19 को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के कारण पूछताछ के लिए नहीं आ सकते हैं। एजेंसी के सामने हाजिर होने से एक दिन पहले कॉन्ग्रेस नेता ने ED को पत्र लिखकर कहा, “65 से ज्यादा की उम्र का हूॅं, कृपया फिलहाल माफ करें।” एजेंसी ने उसी समय कहा था कि वह पूछताछ के लिए उनके आवास पर ही आ जाएँगे। आज उनका बयान लेने के लिए ED की टीम खुद उनके घर पहुँच गई।

ED ने दावा किया है कि संदेसरा भाइयों ने भारतीय बैंको को नीरव मोदी से कहीं ज्यादा चूना लगाया है। एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि जाँच में स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड/ संदेसरा समूह और इसके मुख्य प्रमोटरों, नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा ने भारतीय बैंकों में लगभग 14,500 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा किया। वहीं नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक को 11,400 करोड़ रुपए का चूना लगाने का आरोप है।

आरोप है कि संदेसारा भाइयों ने अहमद पटेल के कहने पर ही दिल्ली के वसंत विहार में घर खरीदा और फिर उसे रेनोवेट करवा कर उनके दामाद इरफान सिद्दीकी को रहने के लिए दिया। ईडी ने उनके बेटे फैसल पटेल और दामाद इरफान सिद्दीकी से पूछताछ की थी। जिसमें दोनों ने कबूला था कि वे स्टर्लिंग बायलॉज लिमिटेड के निदेशक नितिन संदेसरा के छोटे भाई चेतन संदेसरा को जानते थे।

पिछले साल ईडी ने इस मामले की जाँच के तहत स्टर्लिंग बायोटेक की 9,000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की थी। इसमें नाइजीरिया में तेल रिग, पोत, एक कारोबारी विमान और लंदन में एक आलीशान फ्लैट शामिल है।

ED के अधिकारियों ने पहले खुलासा किया था कि संदेसरा समूह के एक कर्मचारी सुनील यादव ने बताया कि सिद्दीकी और फैसल पटेल को चेतन संदेसरा द्वारा कोड नाम दिए गए थे। चेतन और गगन ने सिद्दीकी को इरफान भाई का नाम दिया था। इरफान का कोड i2 और फैसल का कोड i3 था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल का पूछताछ से बचने के लिए स्वास्थ्य का बहाना बनाना कोई नई बात नहीं है। पिछले साल भी जब पटेल को आयकर विभाग ने हवाला केस में पूछताछ के लिए बुलाया था तो उन्होंने स्वास्थ्य का हवाला दिया था। कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यालय में हवाला द्वारा 400 करोड़ रुपए नकद पहुँचने का आरोप था, लेकिन उस वक्त भी कॉन्ग्रेस नेता अपनी खराब सेहत का बहाना बनाकर पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। उस समय उन्होंने साँस लेने में तकलीफ की शिकायत की थी और खुद को फरीदाबाद, हरियाणा के मेट्रो अस्पताल में भर्ती करवा लिया था। 

दिलबर नेगी को आग में झोंकने वाले दंगाइयों का सरगना निकला डॉ. अनवर: दिल्ली पुलिस की चार्जशीट से खुलासा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगे के दौरान 20 वर्षीय दिलबर नेगी की हत्या मामले में दाखिल चार्जशीट से नया खुलासा हुआ है। इसमें मुस्तफाबाद में हुए दंगों का मास्टरमाइंड डॉक्टर एमए अनवर को भी बताया गया है।

पीड़ितों के इलाज का दावा करने वाला डॉक्टर अनवर, न्यू मुस्तफाबाद स्थित अल हिंद हॉस्पिटल का मालिक है। अल हिंद हॉस्पिटल फारुकिया मस्जिद और उस मिठाई दुकान से एक किलोमीटर दूर है, जहाँ दिलबर नेगी काम करता था।

आरोप-पत्र में कहा गया है कि 15 जनवरी के बाद से ही फारुकिया मस्जिद से कई वक्ताओं ने लोगों को उकसाना शुरू कर दिया था। यहाँ पर अवैध रूप से CAA और NRC का विरोध चल रहा था, जिसमें अलग-अलग तारीख में भाषण देकर लोगों को यह कहा जाता था कि NRC लागू होने के बाद उन्हें नागरिकता नहीं दी जाएगी, उन्हें डिटेंशन कैंप में डाल दिया जाएगा। 

साथ ही इसमें यह भी जिक्र किया गया है कि समुदाय विशेष को केंद्र सरकार के खिलाफ उकसाया गया। 23 फरवरी को हिंसा में भाग लेने वालों और हिंसा के लिए उकसाने वालों के खिलाफ दयालपुर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है।

आरोप-पत्र के अनुसार फारुकिया मस्जिद में होने वाले विरोध-प्रदर्शन के आयोजक अरशद प्रधान और अल हिन्द हॉस्पिटल के मालिक डॉक्टर एमए अनवर थे। हालाँकि इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में अनवर का कहना है कि चार्जशीट में अपना नाम होने की उसे जानकारी नहीं है, क्योंकि वे काफी व्यस्त हैं। उसका दावा है कि उसे फँसाया जा रहा है।

पुलिस ने आरोप-पत्र में 12 लोगों को आरोपित बनाया है। ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं। इनकी पहचान मोहम्मद शाहनवाज उर्फ शानू, मोहम्मद फैजल, आजाद, अशरफ अली, राशिद उर्फ मोनू, शाहरुख, मोहम्मद शोएब, परवेज, राशिद उर्फ राजा, मोहम्मद ताहिर, सलमान और सोनू सैफी के रूप में हुई है।

गौरतलब है कि दिलबर अनिल स्वीट हाउस में काम करते थे। दंगाइयों की भीड़ ने उन्हें तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में आग के हवाले कर दिया था।

उत्तराखंड के रहने वाले नेगी के करीबी श्याम सिंह ने ऑपइंडिया को बताया था कि 23 फरवरी की शाम कुछ दंगाई शाहदरा इलाके में शोर मचाते हुए घुसे। दंगाइयों ने नेगी को अपना पहला निशाना बनाया। उनके हाथ-पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया। उनके साथ बिल्डिंग में उनके दो अन्य साथी भी मौजूद थे, लेकिन वो वहाँ से भाग निकलने में कामयाब रहे।

26 फरवरी को जब दुकान मालिक अनिल पाल पुलिस के साथ अपनी दुकान का हाल जानने पहुँचे तो उन्हें मृतक नेगी का शरीर दूसरी मंजिल पर सीढ़ी के पास मिला।

ऑपइंडिया से बातचीत में दिलबर नेगी के छोटे भाई देवेंद्र ने बताया था कि दिलबर का सेना में जाने की सपना था। आखिरी बार जब फ़ौज की भर्ती आई थी तो दिलबर दौड़ में सेलेक्ट भी हो गया था, लेकिन लम्बाई कम होने के कारण उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर होना पड़ा था।

घुटने तोड़कर मलद्वार में डाली लाठियाँ, जननांग क्षतिग्रस्त: तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पुलिस की यातनाओं से पिता-पुत्र की मौत

तूतीकोरिन में पुलिस हिरासत में एक पिता और बेटे की की मौत ने तमिलनाडु में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पुलिस ने तूतीकोरिन में पी जयराज (59) और उनके बेटे जे बेनिक्स (Benicks)(फ़ेनिक्स- Fenix) (31) को निर्धारित समय के बाद भी मोबाइल की दुकान खोले रखने पर 19 जून को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उनकी हिरासत में ही मृत्यु हो गई। आरोप है कि उन्हें हिरासत में यातना दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई।

चेन्नई स्थित समाचार वेबसाइट ‘द फेडरल’ ने उन चश्मदीदों का जिक्र किया है, जिन्होंने यह दावा किया था कि दोनों जेल में रहते हुए यौन उत्पीड़न के शिकार हुए थे। मृतक जे फ़ेनिक्स के एक दोस्त राजकुमार ने कहा- “20 जून को सुबह 7 से 12 बजे के बीच, पिता और पुत्र ने कम से कम सात लुंगियाँ (शरीर के निचले भाग में पहना जाने वाला कपड़ा) बदली थीं, क्योंकि वे अपने मलाशय से खून बहने के कारण गीले हो गए थे।”

बेनिक्स के मित्र ने यह भी कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे दोनों को सतकुलम के सरकारी अस्पताल में ले जाने के लिए एक वाहन की व्यवस्था करें। फिर, पिता-पुत्र ने स्पष्ट रूप से अपने मलाशय में दर्द की शिकायत की थी। उन्हें काफी खून बह रहा था और उनकी लुंगी को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में बदलना पड़ा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरफ्तारी के चार दिन बाद दोनों पिता-पुत्र की अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि तमिलनाडु पुलिस ने पिता और बेटे की हिरासत में खूब पिटाई की थी और पुलिस द्वारा की गई मारपीट और हिंसा के निशान मृतकों के शरीर पर थे। घर वालों की माँग है कि आरोपित पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए।

मृतक जे बेनिक्स (फ़ेनिक्स) के मित्र राजकुमार ने कहा कि पुलिस उसे जयराज समझकर 19 जून को स्टेशन पर ले गई। इसके बाद बेनिक्स ने स्टेशन पर जाकर पूछताछ की। राजकुमार के अनुसार, “जब उसने अपने पिता के खिलाफ पुलिस की बर्बरता पर सवाल उठाया, तो पुलिसकर्मियों ने उसे उसके कॉलर से पकड़ लिया और उसे दीवार की ओर धकेल दिया। सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल सहित कम से कम पाँच पुलिसकर्मियों ने उसे हमारे सामने बुरी तरह से पीटा।”

सोशल मीडिया पर लोगों का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने पिता और पुत्र के मलद्वार में लाठियाँ डालकर घुमाया और उन्हें यातनाएँ दीं। यह भी दावा किया जाता है कि पुलिस हिरासत में उनकी बेरहमी से पिटाई की गई जिससे पिता-पुत्र के जननांग भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।

इस वीडियो में बताया गया है कि पहले पुलिस द्वारा दोनों के घुटनों को लाठियों से तोड़ा गया। उन्हें पूरी तरह नग्न कर के दीवारों पर रगड़ा गया। उन्हें यातना देने के लिए ऐसी जगह पर ले जाया गया जहाँ CCTV कैमरा नहीं लगे थे। यहाँ उन्हें लाठियों और डंडों से बुरी तरह मारा गया। और लाठियाँ उनके मलद्वार में डाली गईं। परिजनों ने कहा कि उनके जननांगों पर बहुत ही बुरे घाव थे।

इस घटना के प्रकाश में आने के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। तूतीकोरिन के कलेक्टर संदीप नंदूरी ने कहा कि ऐसी शिकायतें थीं कि वे पुलिस की पिटाई से मारे गए थे। न्यायिक जाँच के आदेश दिए गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने आश्वासन दिया है कि जाँच के निष्कर्षों के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राहुल गाँधी के ट्वीट क्यों होते हैं वैसे? मिल गया जवाब, मिलिए उनके ट्विटर हैंडल के ‘गेटकीपर’ से

लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव जारी है। वहीं चीन से कॉन्ग्रेस पार्टी और उनके नेताओं की निकटता और आपसी संबंधों का पता चलने के बाद पार्टी मुश्किलों से घिरती नजर आ रही है।

सबसे पहले यह सामने आया कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने 2008 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद एक और सच्चाई सामने आई कि सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाले राजीव गाँधी फाउंडेशन को चीन से डोनेशन मिलने की बात सामने आई।

चीन के साथ पार्टी के संबंधो का खुलासा होने के बाद सोशल मीडिया में कई लोगों ने चीनी नेताओं के साथ कॉन्ग्रेस नेताओं की तस्वीरें पोस्ट की है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर के जरिए सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी की तस्वीर चीनी अधिकारी के साथ पोस्ट किया।

संबित पात्रा के ट्वीट से चिढ़ कर कॉन्ग्रेस नेता और मार्गरेट अल्वा के बेटे, निखिल अल्वा ने एक तस्वीर पोस्ट की। इस तस्वीर के जरिए उन्होंने चीन के साथ पीएम मोदी की अंतरंगता साबित करने की कोशिश की। इस चक्कर में तस्वीर में नजर आ रहे किर्गिस्तान के राष्ट्रपति को चीनी बता दिया।

कॉन्ग्रेस का सिपाही बनने के लिए IQ लेवल कोई जरूरत नहीं होती, यह बात निखिल अल्वा ने साबित कर दिया। क्योंकि उन्होंने यह मान लिया कि मोनगोलोइड फीचर्स वाले सभी लोग चाइनीज़ होते है।

बता दे यह तस्वीर 2019 में पीएमओ के ट्विटर हैंडल से ट्वीट की गई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी को किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जीनबकोव द्वारा पारंपरिक किर्गिस्तान पोशाक भेंट की गई थी।

PMO ने उस समय तस्वीरों को ट्वीट कर लिखा, “बिश्केक में, राष्ट्रपति जेनबकोव ने PM @narendramodi को एक कल्पक, पारंपरिक किर्गिज़ टोपी, एक चापान, किर्गिस्तान का पारंपरिक कोट और समोवर, पानी गर्म करने के लिए एक कंटेनर भेंट किया है।”

कौन है निखिल अल्वा

निखिल अल्वा को 2018 में राहुल की सोशल मीडिया स्ट्रेटजी सॅंभालने वाली दिव्या स्पंदना की जगह जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय दिव्या को यह कह कर नौकरी से निकाल दिया गया था, कि वह कॉन्ग्रेस से परेशान थी क्योंकि उसकी भूमिका को सीमित करते हुए कॉन्ग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा के बेटे निखिल अल्वा को कार्यभार संभालने का जिम्मा दे दिया था।

2018 बिजनेस स्टैंडर्ड के रिपोर्ट के अनुसार, “पूर्व मीडिया उद्यमी निखिल जे अल्वा कॉन्ग्रेस के बदलाव के पीछे एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। कॉन्ग्रेस संगठन में 48 वर्षीय अल्वा को गाँधी के ट्विटर हैंडल के ‘गेटकीपर’ के रूप में जाना जाता है।

अपने ट्विटर एकाउंट के बायो में अल्वा ने बताया है कि वह “एक राजनीतिक कार्यकर्ता के साथ मीडिया उद्यमी है, जो एक न्यायसंगत और समान्य दुनिया का निर्माण करना चाहता है।” अल्वा कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल मार्गरेट अल्वा के तीन बेटों में से एक हैं। अल्वा के साथ उनके बड़े भाई नीरत और छोटे भाई निवेदिथ भी जाने-माने मीडिया उद्यमी हैं। छोटे भाई निवेदिथ भी अब राजनीति की तरफ अपने कदम बढ़ाने शुरू किए है।

दिलचस्प बात यह है कि निखिल अल्वा पर पहले 2018 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाथा। उनके पड़ोसी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर उन पर घूरने और अश्लील ईमेल भेजने का आरोप लगाया गया था।

निखिल अल्वा के खिलाफ दर्ज एफआईआर में, 47 वर्षीय शिकायतकर्ता ने कहा था, “निखिल अल्वा ने जान-बूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से कई ग्रुप्स में ईमेल पोस्ट किए हैं। जिसमें अत्यधिक अनुचित और घोर आपत्तिजनक भाषा का उपयोग किया गया है। मेरे बार-बार मना करने के बावजूद निखिल नहीं रुका और बाद में अश्लील मैसेज भेजने लगा।”

उसने कम से कम 14 बार अल्वा पर अपमानजनक ईमेल भेजने का आरोप लगाया था।

अल्वा के पोस्ट ने बता दिया है कि राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल से जिस तरह के पोस्ट किए जाते है, वह राहुल गाँधी और निखिल अल्वा के दिमाग के घटिया कॉम्बिनेशन का परिणाम है।