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अमेरिकी जज के सामने ‘खतरे में खालिस्तानी सिख’ के नाम पर गिड़गिड़ाया, मदद के नाम पर भारत में बैठे खालिस्तानी नेता ने भी मारी ‘लात’: US से बेइज्जत कर भगाया

अमेरिका में खालिस्तानी होने के सहारे शरण माँग रहे व्यक्तियों की बात सुनने से जजों ने इनकार कर दिया। अमेरिका गए इन घुसपैठियों को निकाल बाहर फेंका गया है। खालिस्तान के नाम पर शरण की बात करने वाले लोगों का साथ उन नेताओं ने नहीं दिया जो उन्हें पीड़ित होने का प्रमाण पत्र भारत में बना कर दे रहे थे। ऐसी ही आपबीती अमेरिका से निकाल बाहर किए जाने वाले ने सोशल मीडिया लिखी है और लोगों को फर्जी तरीके से अमेरिका जाने पर चेताया है।

खालिस्तान पर लगातार बोलते रहने वाले पुनीत सहनी ने यह पोस्ट साझा की है। इस सिख ने लिखा, “भाइयों, मुझे निर्वासित किए जाने के आदेश जारी हो चुके हैं। कल मेरी कोर्ट में सुनवाई थी। जज ने मुझे बताया कि आपको अगली दो फ्लाइट में वापस भेज दिया जाएगा। यह मेरी आखिरी पोस्ट है, मैं यह अकाउंट बंद करने वाला हूँ ताकि मुझे भारत में कोई परेशानी न हो।”

इसके बाद उसने खालिस्तान को लेकर बात बताई। उसने लिखा, “जज ने पूछा, आपको भारत में क्या खतरा है? हमने बताया कि हम खालिस्तान का समर्थन करते हैं और भारत हम पर अत्याचार करता है। लेकिन जज ने कहा, आपके खालिस्तानी नेता ही वहाँ चुनाव जीत रहे हैं और सांसद बन रहे हैं – उन्होंने सिमरनजीत मान और भाई अमृतपाल का जिक्र किया।”

उसने अपनी पोस्ट में बताया कि अमेरिकी सरकार ने MP सिमरनजीत सिंह को फोन भी किया। सिमरनजीत सिंह ने ही उसे यह लिख कर दिया था कि अमेरिका में शरण माँगने वाले युवक भारत में खालिस्तान का समर्थन करने के लिए प्रताड़ित किए जाते हैं। सिमरनजीत सिंह जज के फोन पर पूरी तरह मुकर गए और कहा कि उनके लोगों को भारत में कोई भी खतरा नहीं है।

अमेरिका से वापस भेजे जाने वाले ने बताया, “मुझे मेरे वकील ने कहा था कि मैं खालिस्तान के बारे में बोलूँ। जबकि मेरा खालिस्तान से कोई लेना-देना नहीं था। मुझसे जज ने कहा, आपका मामला फर्जी है। आपने अदालत को गलत जानकारी दी। अपने वकील के कहने पर, तुम खालिस्तान के प्रदर्शनों में फोटो खिंचवाने चले गए थे जबकि भारत में अब कोई ऐसा आंदोलन नहीं है।”

अमेरिका ने निकाले जाने वाले शख्स ने अवैध रूप से अमेरिका में घुसने की सोचने वालों को चेताया, “भाइयों, अब अदालतें और जज बहुत सख्त हो गए हैं और साथ ही जिन्होंने तुम्हें ये शरण वाले लेटर बेचे थे,वो भी अब तुम्हारी नहीं सुन रहे हैं। ये खरीदा हुआ पत्र अब काम का नहीं है।”

गौरतलब है कि बड़ी संख्या में विदेश जाने की चाह रखने वाले सिख युवा कई बड़े नेताओं या फिर ऐसी ही किसी मान्य संस्था से खुद के उत्पीड़न का एक झूठा प्रमाण पत्र बनवा लेते हैं। अधिकांश मौकों पर इस पत्र में उस व्यक्ति के कथित तौर पर खालिस्तान का समर्थन किए जाने के कारण पीड़ित होना बताया जाता है।

यह लोग फिर अधिकांश मौकों पर यूरोप, अमेरिका या फिर कनाडा आदि में इस पत्र के आधार पर शरण माँगते हैं। यह इन देशों में अवैध रूप से घुसते हैं। सांसद रहे खालिस्तान समर्थक सिमरनजीत सिंह मान खुद स्वीकार चुके हैं कि वह पैसा लेकर ऐसे पत्र जारी करते थे।”

18 गैर हिंदू कर्मचारियों को TTD ने तिरुपति मंदिर से निकाला, दूसरे सरकारी विभागों में भेजा: ‘बीफ वाले लड्डू’ के बाद चल रहा ‘स्वच्छता अभियान’, ओवैसी ने रोया वक्फ बिल का रोना

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर का प्रबंधन करने वाला तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने मंदिर के 18 गैर-हिंदू कर्मचारियों के खिलाफ ऐक्शन लिया है। TTD के अध्यक्ष बीआर नायडू ने इन कर्मचारियों को हटाने का आदेश दिया है। ये सभी गैर-हिंदू धार्मिक गतिविधियों में शामिल हैं। इस पर AIMIM के मुखिया और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि इससे गलत संदेश जाएगा। 

ट्रस्ट ने 18 कर्मचारियों के सामने दो शर्तें रखी हैं- या तो वे किसी दूसरे सरकारी विभाग में स्थानांतरण करवा लें या फिर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले लें। नायडू का कहना है कि ऐसा कदम मंदिर की पवित्रता को बनाए रखने के लिए उठाया जा रहा है। अब इन लोगों के मंदिर एवं उससे संबंधित विभाग में भाग लेने पर रोक रहेगी।

TTD द्वारा 1 फरवरी 2025 को जारी कार्यकारी आदेश के अनुसार, इन 18 कर्मचारियों में से 6 टीटीडी द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक हैं। इसके अलावा एक उप-कार्यकारी अधिकारी (कल्याण), एक सहायक कार्यकारी अधिकारी, एक सहायक तकनीकी अधिकारी (विद्युत), एक छात्रावास कार्यकर्ता, दो इलेक्ट्रीशियन और दो नर्स शामिल हैं।

जिन लोगों को हटाया गया है, उनके नाम हैं- तिरुपति के एसवी आयुर्वेदिक कॉलेज में प्रोफेसर डॉक्टर केवी विजय भास्कर रेड्डी और प्रिंसिपल डॉक्टर रेणु दीक्षित, तिरुपति के एसपीडब्ल्यू डिग्री एवं पीजी कॉलेज में लेक्चरर के सुजाता और प्रिंसिपल जी असुंथा, एसजीएस आर्ट्स कॉलेज में लेक्चरर के प्रताप, एसवी आर्ट्स कॉलेज में लेक्चरर के मानेकशॉ दयान एवं अनुबंध कर्मचारी एनसी भीमन्ना शामिल हैं।

इसके अलावा, TTD के कल्याण विभाग के डिप्टी एग्जीक्यूटिव अधिकारी ए आनंद राजू और TTD के ही नीलामी विभाग के सहायक कार्यकारी अधिकारी ए राजशेखर बाबू को तबादला के लिए कहा गया है। स्थानांतरित किए गए अन्य लोगों में श्री वेंकटेश्वर कर्मचारी प्रशिक्षण अकादमी (एवीईटीए) के निदेशक कार्यालय की वीबी कोमला देवी शामिल हैं।

इसके अलावा, टीटीडी के बिजली विभाग में इलेक्ट्रीशियन एम शेखर, बीआईआरआरडी अस्पताल की हेड नर्स टी कल्याणी और स्टाफ नर्स ए सौभाग्यम और एस रोजी, एसवी पुअर होम में मेडिको नर्सिंग अधिकारी टी नारायण स्वामी, सहायक तकनीकी अधिकारी (इलेक्ट्रिकल) जी असरवदम और सेंट्रल हॉस्पिटल, तिरुपति में रेडियोग्राफर जी गोपी शामिल हैं।

आंध्र प्रदेश के धर्मस्व मंत्री अनम रामनारायण रेड्डी ने बताया कि जो कर्मचारी ‘गैर-हिंदू धार्मिक गतिविधियों में शामिल’ का मतलब है कि ऐसे कर्मचारी या तो ईसाई हैं या फिर मुस्लिम और वे हिंदू मान्यताओं का अनुसरण नहीं करते। दरअसल, नवंबर 2024 में TTD की बैठक में गैर-हिंदुओं को मंदिर एवं उससे संबंधित विभाग से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पास किया गया था।

सांसद ओवैसी का सवाल

TTD के निर्णय को लेकर सांसद असुद्दीन ओवैसी ने सवाल आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने पोस्ट में लिखा, “बताया जा रहा है कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने 18 ऐसे कर्मचारियों की पहचान की है जो हिंदू परंपराओं का पालन नहीं करते या गैर-हिंदू हैं। टीटीडी का तर्क है कि चूँकि यह एक हिंदू संस्था है, इसलिए गैर-हिंदुओं को इसमें काम नहीं करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चंद्रबाबु नायडू को यह बताना चाहिए कि उनकी पार्टी ने संयुक्त कार्यसमिति में भाजपा के वक्फ विधेयक का समर्थन क्यों किया। विधेयक में केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में कम-से-कम दो गैर-मुस्लिमों का होना अनिवार्य किया गया है। विधेयक में यह अनिवार्यता भी हटा दी गई है कि परिषद और बोर्ड में मुस्लिमों का बहुमत होना चाहिए।”

वक्फ संशोधन विधेयक को बीच में लाते हुए ओवैसी ने आगे कहा, “आंध्र प्रदेश हिंदू बंदोबस्ती अधिनियम पर एक नज़र डालें: ट्रस्टी गैर-हिंदू नहीं हो सकता, कोई आयुक्त या सहायक आयुक्त आदि गैर-हिंदू नहीं हो सकता, धारा 12 के तहत निरीक्षक भी गैर-हिंदू नहीं हो सकता। धारा 96 के तहत अधिनियम टीटीडी के बारे में भी यही बात कहता है। अब वक्फ बिल क्या कह रहा है? इसमें गैर-मुस्लिम होने चाहिए।”

AIMIM सांसद ने कहा, “मुस्लिम सीडब्ल्यूसी और मुस्लिम वक्फ बोर्ड के कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। सीडब्ल्यूसी या वक्फ बोर्ड का बहुमत गैर-मुस्लिम हो सकता है। सीडब्ल्यूसी या वक्फ बोर्ड का बहुमत गैर-मुस्लिम हो सकता है। पहले ये सदस्य चुने जाते थे, अब उन्हें सरकार द्वारा नामित किया जाएगा, और सरकार गैर-मुस्लिम बहुमत वाले सीडब्ल्यूसी/बोर्ड को रखने में बहुत सक्षम है।”

ओवैसी ने कहा कि अगर हिंदू बंदोबस्त पर केवल हिंदुओं का ही शासन होना चाहिए और वहाँ केवल हिंदुओं को ही कर्मचारी होना चाहिए तो मुस्लिम वक्फ के खिलाफ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है? उन्होंने कहा, “अब टीटीडी गैर-हिंदू कर्मचारियों को भी नहीं चाहता है, लेकिन वक्फ में न केवल अनिवार्य रूप से गैर-मुस्लिम होने चाहिए, बल्कि वे सदस्यों में बहुमत भी हो सकते हैं!”

जो हिंदू नहीं, जिन्हें एजेंसियों ने मना किया, फिर भी वे आए प्रयागराज: महाकुंभ में भगदड़ के पीछे वही लोग जिन्होंने लगाई थी CAA-NRC पर आग? रिपोर्ट में दावा- 10 हजार संदिग्ध रडार पर

महाकुंभ में हुई भगदड़ के दौरान वहाँ पर CAA-NRC का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी मौजूद थे। कई आपराधिक इतिहास वाले लोग भी महाकुंभ में मौजूद थे। पुलिस इन सबको अब महाकुंभ में हुई भगदड़ के बाद जाँच के दायरे में लिया है। वह लोग भी पुलिस के राडार में हैं, जो लगातार महाकुंभ को लेकर भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर डाल रहे थे। इनमें से कई ने महाकुंभ को लेकर कई नकारात्मक पोस्ट की थीं।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, जाँच एजेंसी NIA, UPATS समेत प्रदेश की पुलिस मौनी अमावस्या की भगदड़ को साजिश के एंगल से देख कर जाँच कर रही हैं। उन्होंने इसके लिए महाकुंभ में मौजूद लोगों का डाटा निकालना चालू कर दिया है। रिपोर्ट बताती है कि पुलिस उन लोगों को अब नोटिस भेज रही है, जो मना किए जाने के बावजूद प्रयागराज महाकुंभ में गए। पुलिस ने महाकुंभ से पहले ही 1 लाख लोगों को प्रयागराज जाने को मना किया था। लेकिन कई लोग फिर भी पहुँचे।

पुलिस उनकी भी जाँच कर रही है जो बड़े प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं। वाराणसी के ही 50 से अधिक गैर हिन्दू प्रयागराज में पाए गए, उन्हें भी मना किया गया था। इसके अलावा जाँच के दायरे में प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI के एजेंटों को भी लिया गया है। यह वह लोग हैं जो बीते कुछ महीनों में पकड़े गए हैं। सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के बाक़ी हिस्सों से भो पकड़े गए लोगों से पूछताछ हुई है। प्रयागराज महाकुंभ को लेकर जिन लोगों ने लगातार सोशल मीडिया पर सर्च किया, वह भी घेरे में हैं।

पुलिस को जाँच में मिला है कि महाकुंभ को लेकर इन्टरनेट पर अधिक ही रुचि दिखाने वाले बड़ी संख्या में गैर हिन्दू हैं। उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। इसके अलावा महाकुंभ की शुरुआत से ही जो लोग इसको लेकर नकारात्मकता फैला रहे हैं और बार बार भ्रामक सूचनाएँ डाल रहे हैं, उनको भी राडार पर लिया गया है। पुलिस इसके अलावा मेला क्षेत्र में लगे AI कैमरों की फुटेज खंगाल कर संदिग्धों को पहचान रही है। 600 ऐसे संदिग्ध पहचाने जा चुके हैं।

इससे पहले पुलिस ने यहाँ नम्बर खँगालना चालू किया था। इससे पहले मौनी अमावस्या की भगदड़ में फंसी कुछ महिलाओं ने दावा किया था कि हुडदंगी लड़कों के भीड़ में घुसने के बाद भगदड़ चालू हुई। पुलिस ने उस समय भगदड़ वाली जगह पर मौजूद नम्बरों को भी खंगाला था। इस बीच महाकुंभ में स्नान करने वालों की संख्या लगभग 40 करोड़ के पार पहुँच चुकी है।

मुस्लिम-मस्जिद-दलित-कॉन्ग्रेस-AIMIM… और खुद के 20+ विधायक: AAP की आपदा के 6 फैक्टर

दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए मतदान 5 फरवरी को संपन्न हो चुके हैं। अब सबकी निगाह 8 फरवरी को आने वाले नतीजों पर है। इस बीच तमाम एग्जिट पोल आम आदमी पार्टी (AAP) की वर्तमान सरकार के लिए बुरी खबर दे रहे हैं। वहीं, अधिकांश सर्वे में भाजपा के 27 साल के वनवास खत्म होने की बात कही जा रही है। रही बात कॉन्ग्रेस की तो उसके लिए खुशखबरी में 1-2 सीटों का मिलना ही है।

पीपुल पल्स नाम की एजेंसी ने अपने सर्वे में तो आम आदमी पार्टी की सरकार के लिए सबसे डरावने आँकड़े दिए हैं। इस सर्वे में AAP को 10-19 सीटें दी गई हैं, जबकि भाजपा को 51-60 सीटें दी गई हैं। माइंड ब्रिंक (44-49), Matrize (32-37 सीटें) और WeePreside (46-52 सीटें) ने AAP को बहुमत का आँकड़ा दिया है, जबकि अधिकतर भाजपा के सत्ता में लौटने की भविष्यवाणी कर रहे हैं।

पिछले 10 सालों से दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के लिए इस बार मुश्किल खड़ी करने में मुस्लिम वोटरों का पार्टी से दूरी प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इसके बाद जिन नेताओं का AAP ने टिकट काटा, उन्होंने भी मुश्किलें पैदा कीं। इसके अलावा, मुस्लिम बहुल इलाकों में कॉन्ग्रेस और AIMIM की अतिसक्रियता ने वोटरों को AAP से दूर किया है। साथ ही जातीय समीकरण की अनदेखी ने भी AAP को नुकसान पहुँचाया।

दिल्ली में हिंदुओं की आबादी 77 प्रतिशत, मुस्लिमों की लगभग 18 प्रतिशत आबादी है। वहीं, 4 प्रतिशत सिख, जैन एक प्रतिशत है। इस दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में कम-से-कम 8 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इसके अलावा, 15 ऐसी सीटें हैं जो सरकार को बनाने और बिगाड़ने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस बार इन सीटों के मुस्लिम AAP से नाराज दिखे।

दरअसल, सिर्फ मुस्लिम की बात करने वाले हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने दिल्ली की दो सीटों- ओखला और मुस्तफाबाद पर अपने उम्मीदवारे उतारे हैं। ओखला में मुस्लिमों की आबादी लगभग 57 प्रतिशत है। वहीं, मुस्तफाबाद में भी लगभग इसी के आसपास है। इन दोनों सीटों पर मुस्लिम समुदाय का AIMIM के प्रत्याशियों के प्रति लोगों में देखी गई।

AIMIM ने मुस्ताफाबाद से साल 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ता ताहिर हुसैन को मैदान में उतारकर एक तीर से कई निशाने करने की कोशिश की। ताहिर हुसैन के नाम पर दिल्ली, खासकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में ध्रुवीकरण करने की कोशिश की गई, जिसका असर AIMIM के उम्मीदवारों के पक्ष में साफ दिखता है। ओखला से AIMIM प्रत्याशी शिफा-उर-रहमान के पक्ष में भी लोगों का रुझान रहा।

वहीं, कॉन्ग्रेस ने अपने परंपरागत मुस्लिमों और वोटरों को साधने की कोशिश की। राहुल गाँधी और उनकी सांसद बहन प्रियंका गाँधी ने मुस्लिम और दलित इलाकों में कई रैलियाँ और रोड शो किए। राहुल गाँधी ने तो अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत ही मुस्लिम बहुल सीलमपुर से की। आम आदमी पार्टी के मुस्लिम वोटरों में बहुत बड़ी सेंध कॉन्ग्रेस और AIMIM ने लगाई है।

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाकों में औसतन 57 प्रतिशत का मतदान हुआ। मध्य दिल्ली की बल्लीमारान, मटिया महल, चाँदनी चौक व सदर बाजार तथा दक्षिण-पूर्व के ओखला सीट पर अपेक्षाकृत कम मतदान हुआ। हालाँकि, उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीलमपुर और मुस्तफाबाद और शाहदरा जिले के बाबरपुर में जमकर मतदान हुए। कई मुस्लिम इलाकों में मस्जिदों से वोटिंग का ऐलान किया गया।

बल्लीमरान में तो आम आदमी पार्टी के मंत्री इमरान हुसैन के खिलाफ बकायदा मस्जिद से ऐलान किया गया। इस तरह सीलमपुर, सीमापुरी, बाबरपुर, चाँदनी चौक, मटिया महल, जंगपुरा, सदर बाजार, ओखला, मुस्तफाबाद जैसी मुस्लिम बहुल सीटों पर AAP का खेल खराब हो गया है। मैट्रिज के सर्वे के मुताबिक, दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP को सिर्फ 67 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिल सकते हैं।

यह AAP के लिए सबका बड़ा सबक हो रहा है, क्योंकि 2020 के विधानसभा चुनावों में AAP को 87 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले थे। सर्वे में इस बार लगभग 13 प्रतिशत मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस और 9 प्रतिशत भाजपा को जाने की बात कही जा रही है। इसका सीधा नुकसान AAP को होगा। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस को जितना फायदा होगा, उतना नुकसान AAP को होगा, क्योंकि दोनों के वोटर वर्ग एक हैं।

इस तरह AAP का कटने के बाद इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। इसके अलावा, दिल्ली में AAP से जुड़े निम्न-मध्यम वर्ग एवं मध्यम वर्ग ने इस बार भाजपा की ओर रुख किया। मोदी सरकार ने बजट में 12 लाख रुपए तक को करमुक्त बनाकर उनके लिए बड़ी राहत दी है। इससे इन दोनों वर्गों का बड़ा हिस्सा BJP की तरफ शिफ्ट हो गया।

AAP के पुराने नेताओं ने भी पार्टी को करारी चोट पहुँचाई है। जिन नेताओं के पार्टी ने टिकट काटे हैं, उन्होंने पार्टी के खिलाफ काम किया। कई नेता तो पार्टी छोड़कर भाजपा आदि में शामिल हो गए। कई आम आदमी पार्टी के विधायक टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मैदान में उतर आए। ऐसी कई सीटें बताई जा रही हैं, जहाँ ये अपनी पार्टी के प्रत्याशी को ही हराने में लगे हैं।

बता दें कि AAP ने इस बार 20 से अधिक विधायकों के टिकट काटे थे। आम आदमी पार्टी के आठ विधायक तो भाजपा में ही शामिल हो गए। जिन विधायकों के टिकट काटे गए हैं उनमें तिमारपुर से विधायक दिलीप पांडेय, शाहदरा से विधायक एवं दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल, देवली से प्रकाश जरवाल, मुस्तफाबाद से हाजी यूनुस भी शामिल हैं।

अंतिम समय में हरिनगर से विधायक राज कुमारी ढिल्लों का टिकट काट दिया गया। इस तरह इन सीटों के अलावा पालम, कस्तूरबा नगर, महरौली, देवली, मुस्तफाबाद, आदर्श नगर में अपने लोगों से ही AAP का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, AAP में टिकट बँटवारे में जातीय समीकरण की अनदेखी भी AAP के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में 15 सीटों पर ब्राह्मण और 12 सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारे थे। दलितों को उनके लिए रिजर्व 12 सीटों पर दिया गया है। पूर्वांचल के वोटरों के बीच के जातीय समीकरण को साधने में भी AAP नाकाम रही। इसमें क्षेत्रीय विविधता भी नहीं समा पाई। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी ने क्षत्रिय समाज, सिख, मुस्लिम और जाटों की अनदेखी की।

आम आदमी पार्टी ने सिर्फ 5 मुस्लिम, 4 क्षत्रिय और 4 सिख को उम्मीदवारों को मैदान में उतारा। इससे इस वर्ग के लोग दूसरी पार्टियों में शिफ्ट हुए, जिसका नुकसान AAP को दिख रहा है। AAP ने जाट और बनिया समुदाय को भी उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। इससे आम आदमी पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

हालाँकि, आँकड़ों और वोटरों के बीच के कुछ लोगों के बयान एवं हालात के आधार पर ही इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। दिल्ली की स्थिति 8 फरवरी को साफ हो जाएगी, जब वोटों की गिनती होगी। हमें याद रखना होगा 2020 का दिल्ली विधानसभा चुनाव भी। उस समय भी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर BJP की वापसी की बात कही जा रही थी, लेकिन आखिरकार नतीजे सारे सर्वे रिपोर्ट को धत्ता बता गए।

44 नाबालिग लड़कियों ने कर ली आत्महत्या, क्योंकि अपना यौन उत्पीड़न नहीं झेल पाईं: केरल में 8 साल में POCSO के 31000+ मामले, वामपंथी शासन में बेटियाँ नहीं महफूज

केरल में नाबालिगों के यौन शोषण के मामले गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। जानकारी सामने आई है कि वहाँ 2016 से अब तक में 44 पीड़ितों ने दुष्कर्म के बाद आत्महत्या कर ली है। केरल में यह स्थिति कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकाल में पैदा हुई है, जिसमें पिछले आठ वर्षों में 31,000 से अधिक POCSO मामले दर्ज किए गए हैं। इन आँकड़ों को देख राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग चिंतित है।

केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ितों को उचित मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता होती है। आघात से गुजरने वाले बच्चे अक्सर गहरे अवसाद का सामना करते हैं, जो उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। आयोग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे पीड़ितों को हर प्रकार की सहायता प्रदान करें।

इंडियन एक्सप्रेस में सरकार द्वारा जारी आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि जून 2016 से लेकर साल 2024 तक में केरल ने 31, 171 केस पॉक्सो में रिपोर्ट किए। वहीं गिरफ्तारी 28, 728 की हुई। रिपोर्ट ये भी बताती है कि साल 2022 के बाद से नाबालिगों से संबंधित यौन उत्पीड़न के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जहाँ 2016 और 2021 के बीच हर साल लगभग 3,000 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 4,518 हो गई।

इसके बाद 2023 में 4,641 और 2024 में 4,594 मामले दर्ज हुए। इस प्रकार की घटनाओं ने समाज और सरकार दोनों को चिंतित किया है। केवल 2025 की बात करें तो साल की शुरुआत के 17 दिनों में 271 केस पॉक्सो के तहत दर्ज हो चुके हैं और करीबन 175 गिरफ्तारियाँ भी हुई हैं।

बता दें कि केरल में नाबालिगों की स्थिति पर ये रिपोर्ट उस समय सामने आई है जब पिछले दिनों एक पठानमठिठ्ठा की दलित लड़की ने आरोप लगाया था कि 62 लोगों ने उसका यौन शोषण किया। इसमें उसके रिश्तेदार से लेकर उसके टीचर और दोस्त भी शामिल हैं। लड़की की शिकायत के बाद ये मामला सनसनी की तरह फैला, फिर राज्य में अन्य मामलों पर चर्चा शुरू हो गई और सामने आया कि कैसे नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न मामले न केवल बढ़े हैं बल्कि उनके आत्महत्या के मामले भी दर्ज किए गए हैं।

‘यशु के प्रकोप से डरो, भगवान की मूर्तियाँ तोड़ो’ : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चल रहा धर्मांतरण का घिनौना खेल, पादरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से फिर धर्मांतरण का मामला उजाहर हुआ है। यहाँ सकरी थाना क्षेत्र के संबलपुरी गाँव में पादरी संतोष मोसेस और उसकी पत्नी अनु मोसेस गरीब, बेरोजगार और महिलाओं को निशाने पर लेकर उन्हें जबरन ईसाई धर्म स्वीकार करवा रहे हैं। ये जानकारी खुद एक पीड़ित ने दी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में इस पर विस्तृत खबर प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट में संबलपुरी के रहने वाले उत्तरा कुमार साहू ने बताया कि वो ईसाई बनना भी नहीं चाहते लेकिन पादरी और उसकी पत्नी उन्हें लगातार ब्रेनवॉश करने में लगी है। उन लोगों ने उनके परिवार और ससुराल वालों को ईसाई बना दिया है और अब वह उनके पीछे पड़े हैं।

साहू कहते हैं कि पादरी और उसकी पत्नी दोनों लोग घूम-घूमकर बीमार, मजबूर, गरीब और कमजोर वर्ग को टारगेट करके लालच देते हैं। ये लोग ऐसे लोगों को ढूँढकर उन्हें चर्च बुलाते हैं, प्रार्थना करवाई जाती है, घर में सभा आयोजित होती है, फिर मदद का भरोसा देकर उन्हें धर्मांतरित करवा दिया जाता है।

इसी तरह महिलाओं को निशाने पर तब लिया जाता है जब उनके पति घर से बाहर होते हैं। तभी, चंगाई सभा में महिलाओं को इकट्ठा करके मूर्ति पूजा के खिलाफ जहर भरा जाता है। समझाया जाता है कि कैसे मंदिर में होने वाले पूजा-पाठ गलत हैं और प्रसाद लेना ‘शैतान’ स्वीकारने जैसा है। फिर उन्हें भगवान की मूर्ति तोड़ने, देवी-देवताओं की तस्वीर वाली टाइल्स उखाड़ने को कहा जाता है।

जो लोग ईसाई धर्म से विमुख होने का प्रयत्न करते हैं उन्हें यशु के प्रकोप से डरने को कहा जाता है। किसी का विचार न बदले इसके लिए प्रेयर के नाम पर उन्हें घर से दूर रखकर लगातार ब्रेनवॉश किया जाता है। करीबन 3-4 दिन बाद चर्च से उन्हें वापस घर भेजा जाता है। इस दौरान उन्हें चिकन-मटन खिलाया जाता है।

उत्तरा साहू के अनुसार, ये लोग अब चूँकि उनके भी पीछे पड़े हैं इसलिए उन्होंने इस मामले में सकरी थाने में शिकायत दर्ज करवा दी है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। आरोपितों के विरुद्ध सबूत मिलने पर विधिवत कार्रवाई होगी।

बता दें कि इस रिपोर्ट में धर्म जागरण के पदाधिकारी का भी बयान है जिन्होंने बताया कि जनवरी माह में धर्मांतरण के 12 नए केस आए हैं। क्षेत्र में मिशनरी वाले मेल-जोल बढ़ाने के लिए पिकनिक और खाने-पीने के बहाने जोड़ते हैं फिर उनका धीरे-धीरे लालच देकर ईसाई बनने को कहा जाता है। सबसे ज्यादा शिकायतें चिंगराजपारा, चांटीडीह, सिरगिट्‌टी, पचपेड़ी, बेलगहना, रतनपुर, सीपत, सकरी, हाफा, मोपका, घुरू, तिफरा मन्नाडोल, मस्तूरी, लखराम और हरदीकला टोना इलाके से आई हैं।

‘केजरीवाल को देख लिया है हमने… अब BJP आए’: पाकिस्तानी हिंदुओं ने पहली बार दिल्ली चुनाव में डाला वोट, CAA से मिली है भारत की नागरिकता

धार्मिक प्रताड़ना के कारण पाकिस्तान से भागकर आए कुछ हिंदुओं नागरिकता मिलने के बाद दिल्ली विधानसभा चुनावों में पहली बार मतदान किया। इन्होंने कहा कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बननी चाहिए। बता दें कि दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी 2025 को वोट डाले गए। नतीजे 8 फरवरी को आने हैं। एग्जिट पोल्स के अनुसार, भाजपा दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद वापसी कर रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान से आए राधेकृष्ण आडवाणी और उनका परिवार पहली बार भारत में मतदान किया। आडवाणी साल 2013 में अपनी माँ, पिता, पत्नी और दो बच्चों के साथ भारत आए थे। वे अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण के लिए पास के ही एक मोबाइल मरम्मत की दुकान पर काम करते हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनावों में पहली बार वोट देने के बाद उन्होंने कहा, “मैंने पाकिस्तान में कभी मतदान नहीं किया और जब हम दिल्ली आए तो हमें घर जैसा महसूस हुआ। आज हमें लगता है कि हम वाकई यहीं के हैं।” उन्होंने अपना वोटर कार्ड दिलाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं का धन्यवाद दिया। हालाँकि, उनके घर की महिलाओं के वोटर आईडी नहीं मिले, क्योंकि प्रमाण पत्र देरी से जमा किए गए थे।

राधेकृष्ण आडवाणी की तरह ऐसे 150 से अधिक हिंदुओं हैं, जिन्होंने वोट किया। पिछले साल मोदी सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के तहत इन्हें भारतीय नागरिकता दी थी। आडवाणी की तरह ही पाकिस्तान से आए हजारों हिंदू दिल्ली स्थित मजनू का टीला और आदर्श नगर में स्थापित किए गए दो शिविरों में रह रहे हैं।

राधेकृष्ण का कहना है कि सरकार अब उन लोगों की समस्याओं पर नजर डाले। उनका कहना है, “हमारे इलाके में एक निजी कंपनी (टाटा पावर) बिजली सप्लाई करती है, जो बहुत महंगी है। हमें उम्मीद है कि सरकार हमें दिल्ली के दूसरे इलाकों की तरह ही सब्सिडी वाली बिजली मुहैया कराएगी।” इसके साथ ही इलाका खाली करने के लिए मिलने वाले नोटिस से भी वे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।

आम आदमी पार्टी की वर्तमान सरकार को लेकर उन्होंने कहा, “केजरीवाल को हमने देख लिया। हम चाहते हैं कि भाजपा सत्ता में आए। बीजेपी कार्यकर्ता हमारे लिए काम करते रहते हैं। आम आदमी पार्टी ने हमारे लिए कुछ नहीं किया।” राधेकृष्ण और उनके 21 वर्षीय भाई लक्ष्मण का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान AAP से कोई नहीं आया, जबकि बीजेपी के लोग आते रहे।

ये सिर्फ राधेकृष्ण और लक्ष्मण की बात नहीं है। हाल ही में नागरिकता पाए हिंदुओं ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी की सरकार की जगह भाजपा की सत्ता की उम्मीद जताई। उनका कहना है कि भाजपा उनके लिए बेहतर कर सकती है। वे भारत की नागरिकता दिलाने से लेकर उनके लिए विभिन्न सुविधाओं की माँग तक के लिए भाजपा कार्यकर्ता आगे रहे हैं।

भारतीय नागरिकता पाए इन अप्रवासी हिंदुओं की तरह ही दिल्ली का मूड भी इस बार बदला-बदला सा दिख रहा है। एग्जिट पोल में अरविंद केजरीवाल के जीत के आसार नहीं हैं। वहीं कॉन्ग्रेस का खाता खुलता नहीं दिख रहा है। MATRIZE के एग्जिट पोल में बीजेपी को 35-40 सीटें तो AAP को 32-37 सीटें मिलने के आसार जताए गए हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस को एक भी सीट नहीं दी गई है।

चाणक्य स्ट्रैटजी के एग्जिट पोल में बीजेपी की स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बन रही है। इसके मुताबिक, बीजेपी को 39-44 सीटें मिल सकती है। AAP फिसलकर 25-28 सीटों पर सिमट सकती है। कॉन्ग्रेस को 2-3 सीटों पर जीत मिलने की संभावना दिख रही है। पोल डायरी के एग्जिट पोल में AAP को 18-25 सीटें दी गई हैं। वहीं, बीजेपी को 42-50 सीटें और कॉन्ग्रेस को 0-2 सीटें दी गई हैं।

इनसाट के अनुसार बीजेपी को 40 से 44 सीटें मिल सकती हैं। आप को 25 से 29 सीटें मिलने का अनुमान है। पी-मार्क के पोल में बीजेपी को 39-49 तो आप को 21-31 सीटों का अनुमान लगाया गया है। वहीं WeePreside के एग्जिट पोल में AAP की सत्ता कायम रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार उसे 46 से 52 सीटें तो बीजेपी को 18 से 23 सीटें मिल सकती है।

दिल्ली में डबल इंजन सरकार के आसार, एग्जिट पोल्स में BJP को बहुमत: AAP की वापसी नहीं, कॉन्ग्रेस के लिए ‘अच्छे दिन’ बहुत दूर

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी 2025 को वोट डाले गए। नतीजे 8 फरवरी को आने हैं। उससे पहले ज्यादातर एग्जिट पोल्स बता रहे हैं कि दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद बीजेपी की वापसी होने जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत के आसार नहीं हैं। वहीं कॉन्ग्रेस का खाता मुश्किल से ही खुलता दिख रहा है।

MATRIZE के एग्जिट पोल में बीजेपी और आप के बीच कड़ी टक्कर दिख रही है। बीजेपी 35-40 तो AAP को 32-37 सीटें मिलने के आसार जताए गए हैं। कॉन्ग्रेस को एक भी सीट मिलने के आसार नहीं हैं। चाणक्य स्ट्रैटजी के एग्जिट पोल में बीजेपी की स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बन रही है। इसके मुताबिक बीजेपी को 39-44 सीटें मिल सकती है। आप 25-28 सीटों पर सिमट सकती है। कॉन्ग्रेस को 2-3 सीटों पर जीत मिलने की संभावना दिख रही है।

पोल डायरी के एग्जिट पोल में भी AAP हार रही है। उसे 18-25 सीटें मिल सकती है। बीजेपी 42-50 सीटें हासिल कर सरकार बनाती दिख रही है। कॉन्ग्रेस को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। पीपुल्स इनसाट के अनुसार बीजेपी को 40 से 44 सीटें मिल सकती हैं। आप को 25 से 29 सीटें मिलने का अनुमान है।

पी-मार्क के पोल में बीजेपी को 39-49 तो आप को 21-31 सीटों का अनुमान लगाया गया है। वहीं WeePreside के एग्जिट पोल में AAP की सत्ता कायम रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार उसे 46 से 52 सीटें तो बीजेपी को 18 से 23 सीटें मिल सकती है।

ज्यादातर एग्जिट पोल बता रहे हैं कि इस बार केंद्र शासित प्रदेश में लोगों ने डबल इंजन सरकार के लिए मतदान किया है। वहीं 15 साल तक लगातार दिल्ली पर शासन करने वाली कॉन्ग्रेस के दिन बदलने के आसार नहीं हैं, जबकि 12 साल सत्ता में रहने के बाद AAP की विदाई होती दिख रही है।

एग्जिट पोल्स के बाद बीजेपी में उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मालवीय नगर से प्रत्याशी सतीश उपाध्याय ने कहा है कि झाड़ू के तिनके बिखर गए हैं और कमल खिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। वहीं AAP ने एग्जिट पोल्स को खारिज कर दिया है। पार्टी नेता सौरव भारद्वाज ने कहा है कि इससे पहले के चुनावों में भी आप की हार दिखाई गई थी, लेकिन पार्टी बड़ी बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही थी।

पहले अपने ही बच्चों की खाई झूठी कसम, अब बुजुर्ग माँ-बाप की निकाली ‘परेड’… मौका कोई भी हो अरविंद केजरीवाल हर बार ‘नीचता’ का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ डालते हैं

अरविंद केजरीवाल कभी डंके की चोट पर कहा करते थे कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। वे जीवन में कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। कोई राजनीतिक पद नहीं लेंगे। पर जब मौका आया तो वे अपने ही मुँह से निकली इन सारी बातों से पलट गए। उन्होंने वह सब कुछ किया जिसको लेकर वे दूसरों को खाँस-खाँसकर कोसते थे।

इतना तो चलता है, क्योंकि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का रास्ता राजनीति से ही निकलता है। लेकिन इस राजनीति के लिए केजरीवाल की गिरने की खुद से ही जो प्रतिस्पर्धा रहती है, उस मामले में उनकी टक्कर का कोई दूसरा दूर-दूर तक नहीं दिखता। हर बार वे ‘नीचता’ का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ डालते हैं।

भारतीय राजनीति की कुछेक बीमारियों में से एक परिवारवाद भी है। ऐसे बहुतेरे नेता हैं (करीब-करीब सभी दलों में) जो राजनीति में अपने बाल-बच्चों/रिश्तेदारों को ही आगे बढ़ाते हैं। कई राज्यों में तो परिवारवादी दलों का अच्छा-खासा प्रभाव तक भी है। बिहार में तो भनसाघर से पत्नी को निकालकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा देने की परंपरा 90 के दशक में ही लिख दी गई थी।

लेकिन शायद ही किसी ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए अपनों की झूठी कसम खाई हो। शायद ही राजनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए अपने बुजुर्ग माँ-बाप की प्रदर्शनी लगाई हो। केजरीवाल इस मामले में इकलौते हैं।

उन्होंने कभी अपने ही बच्चों की कसम खाकर कहा था कि आम आदमी पार्टी बीजेपी या कॉन्ग्रेस से कभी हाथ नहीं मिलाएगी। लेकिन उन्होंने अपनी पहली ही सरकार कॉन्ग्रेस के समर्थन से बनाई। बाद में कॉन्ग्रेस की छतरी के नीचे जमा भी हुए। उसके साथ मिलकर चुनाव भी लड़ा।

इस नीचता का अगला अध्याय उन्होंने तब लिखा जब दारू घोटाले के छींटों से भ्रष्टाचार से लड़ने का उनका मुखौटा उतरा, जब उन्हें तिहाड़ की हवा खानी पड़ी, जब ‘शीशमहल’ खाली करना उनकी मजबूरी हो गई, उन्होंने अपनी सियासत को आगे बढ़ाने के लिए बुजुर्ग माँ-बाप को मीडिया के आगे कर दिया।

इस उम्मीद में कि उनकी उम्र, उनकी बीमारी से उनके दाग छिप जाएँगे। अब इससे भी आगे निकलते हुए उन्होंने बुजुर्ग माँ-बाप की ‘परेड’ तब निकाली है, जब 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों को आम आदमी पार्टी के लिए अब तक की सबसे कड़ी परीक्षा बताई जा रही है।

5 फरवरी को मतदान करने के बाद उन्होंने ट्विटर/एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “आज पूरे परिवार के साथ जाकर मतदान किया। हर दिल्लीवासी की तरक्की और हर गरीब परिवार के सम्मानजनक जीवन के लिए वोट दिया। आप भी अपने परिवार के साथ मतदान करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। दिल्ली की तरक्की रुकनी नहीं चाहिए। गुंडागर्दी हारेगी, दिल्ली जीतेगी।”

अपने समर्थकों को वोट के लिए प्रेरित करने में कोई बुराई नहीं है। हर राजनीतिक दल ऐसा करते हैं। अपने परिवार के साथ मतदान भी आम है। लेकिन इस पोस्ट के साथ शेयर किए गए वडियो में जिस तरह का ‘प्रदर्शन’ दिखता है, वह सामान्य नहीं है। वीडियो में आप मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल को खाँसते भी देख सकते हैं।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि चुनावी मौसम में अक्सर केजरीवाल की यह दबी बीमारी बाहर आ जाती है। बुजुर्गों को वोटिंग के लिए ले जाना कोई गलत बात नहीं है। लोकतंत्र के पर्व में सबकी भागीदारी हो, यह सबसे अच्छी बात है। लेकिन बात-बात पर माँ-बाप को बीमार बताने वाले केजरीवाल उन्हें बाकायदा गाड़ी में भी बिठा कर ले जा सकते थे।

उनके पास गाड़ियों का पूरा काफिला है, कभी वैगनआर से चलने वाले केजरीवाल आज ₹50 लाख की गाड़ी से चलते हैं। पत्रकार आदेश रावल ने खुलासा किया था कि केजरीवाल की सेवा में पंजाब से आई लैंड क्रूजर गाड़ियाँ भी रहती हैं। लेकिन इन सभी का उपयोग ना करके माँ-बाप की प्रदर्शनी रोड पर निकाली गई।

वह चाहते तो चुनाव आयोग की घर बैठ कर वोट वाली सुविधा का फायदा भी उठा ही सकते थे। उनके पिता इसके लिए योग्य भी हैं। लेकिन उन्होंने बुजुर्ग माँ-बाप का व्हीलचेयर पर परेड निकाल सहानुभूति और वोट जुटाने की कोशिश की।

वोटिंग के दिन बूढ़े माँ-बाप को सड़क पर लेकर घूमने वाले केजरीवाल मई, 2024 में उन्हें परेशान ना किए जाने की अपील कर रहे थे। वो नहीं चाहते थे कि दिल्ली पुलिस उनके घर पर स्वाति मालीवाल कि पिटाई के मामले में पूछताछ करने पहुँचे। इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी तक को घेरा था। अब उन्हें अपने बूढ़े माँ-बाप को सड़क पर घुमाने में कोई समस्या नहीं है।

केजरीवाल ने सोचा कि यह सब देख कर दिल्ली की जनता उनके 10 साल के कुकर्मों को भूल जाएगी। खुद को फैमिली मैन दिखने वाले केजरीवाल का यह स्टंट बताता है कि उनके लिए राजनीति ही सब कुछ है। इसके लिए वह कुछ भी कर सकते हैं।

वे राजनीतिक तौर पर अति महत्वाकांक्षी हैं। वे कुर्सी के लिए, सत्ता के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। ऐसा करते हुए केजरीवाल को शायद ही एहसास हो कि जनता की लाठी जब पड़ती है तो आवाज नहीं होती।

‘शुरू हो गया खेल, बिना डाले पड़ गया वोट, BJP के गुंडों ने ऊँगली में लगा दी स्याही’: जिसका वीडियो दिखा चुनाव आयोग को AAP सांसद संजय सिंह ने कोसा, उसका जानिए सच

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग से पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसमें भाजपा से जुड़े लोगों पर वोटरों के स्याही लगाने का आरोप लगाया गया। एक वीडियो भी संजय सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर डाल दी। बाद में इस मामले की सच्चाई दिल्ली पुलिस ने बयान कर दी।

मंगलवार (4 फरवरी, 2025) को AAP सांसद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो डाल कर लिखा, “भाइयों गाँधी नगर में शुरू हो गया खेल “बिना वोट डाले वोट पड़ गया” BJP के गुंडों ने उँगली में स्याही लगा दी। क्या चुनाव आयोग को ये सब कुछ नहीं दिख रहा।”

इस वीडियो में दिखता है कि कुछ लोग खड़े हैं। इनमें से एक आदमी ने ट्रैकसूट पहन रखा है और वह एक खाकी वर्दी पहने एक आदमी को कुछ डीटेल्स बता रहा है। ट्रैकसूट पहने हुए आदमी बताता है कि कुछ लोगों की झुग्गी में एक आदमी आके ₹500 देकर साइन करवाए और उंगली पर स्याही लगवाई। AAP ने इस वीडियो को लेकर भाजपा में चुनावी गड़बड़ी का आरोप जड़ा।

संजय सिंह के इस दावे पर पुलिस ने इस मामले की जाँच की। इसके बाद इस पूरे वीडियो की हकीकत सामने आई। पता चला कि वीडियो में पैसे बाँट कर स्याही लगाने का दावा करने वाला एक शराबी है और उसने नशे में ही यह दावे किए थे। वह हिस्ट्रीशीटर भी है।

दिल्ली पुलिस के शाहदरा DCP ने इस मामले में संजय सिंह को जवाब दिया। DCP शाहदरा ने लिखा, “04 फरवरी को शाम 5 बज कर 58 मिनट पर पुलिस स्टेशन गांधी नगर में एक मतदाता की उंगली पर स्याही लगाने के संबंध में एक पीसीआर कॉल मिली थी।”

आगे उन्होंने बताया, “पूछताछ करने पर पता चला कि जिस व्यक्ति ने यह दावा किया कि उस की उंगली पर स्याही लगी है उसका नाम फिरोज खान उम्र 40 वर्ष है और वह हिस्ट्रीशीटर है। वह एक कुख्यात अपराधी है, उसके खिलाफ पहले से 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह नशे की हालत में पाया गया था। इसके अलावा, उसकी उंगलियों पर स्याही नहीं लगी हुई पाई गई।”

पुलिस ने बताया कि फिरोज खान चुनाव के समय मीडिया में चर्चा बटोरने के लिए यह मनगढ़ंत कहानी बनाई। दिल्ली पुलिस ने उसका एक वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में कहता है कि पुलिस को फोन उसने नहीं बल्कि आसपड़ोस वालों ने की थी। फिरोज खान ने कहा कि दोस्तों में आपस बात करते समय यह सब बात की थी और किसी ने पुलिस बुला ली।

फिरोज खान ने बताया कि उसके हाथ कोई स्याही भी नहीं लिखी और खाली का आरोप कोई लगा रहा है। पुलिस के इस खुलासे के बाद संजय सिंह का दावा फर्जी साबित हो गया। हालाँकि, पुलिस के खुलासे के बाद भी अपना ट्वीट नहीं हटाया और ना ही माफ़ी माँगी।