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राजगढ़: असहाय व बुजुर्गों तक राशन और दवाई पहुँचाएगी शिवराज की पुलिस, ताकि बुजुर्ग न हो परेशान

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश को लॉकडाउन किया गया है। इस समय ज्यादातर लोग अपने घरों में बंद हैं। जबकि पुलिस वाले दिन रात ड्यूटी में लगे हुए हैं ताकि लॉकडाउन का पालन पूरी तरह कराया जा सके। इसी क्रम में कोरोना संकट के दौर में परेशान हो रहे असहाय एवं बुजुर्ग लोगों के लिए शिवराज सिंह द्वारा शासित मध्य प्रदेश के राजगढ़ की पुलिस ने अनोखा कदम उठाया है। जिसके तहत पुलिस द्वारा उनके घरों तक दवा, राशन, चश्मा सहित अन्य ऐसी जरूरी सामग्री पहुँचाने का काम किया जाएगा जो उनके जीवन के लिए जरूरी है।

“वरिष्ठ नागरिक पुलिस पंचायत” के तहत जिले के पुलिस एसपी प्रदीप शर्मा ने बुजुर्गों की मदद के लिए अलग से स्टाफ की तैनाती की है। इसके लिए उन्होंने बकायदा सभी थानों पर एक-एक महिला आरक्षक को इसी कार्य के लिए नियुक्त भी कर दिया है। जिनके मोबाइल नंबर पर फोन लगाकार बुजुर्ग व्यक्ति बेहिचक अपनी परेशानी बता सकते हैं।

लॉकडाउन के चलते जिले में कई ऐसे बुजुर्ग एवं असहाय लोग हैं जो या तो अकेले ही निवास करते हैं या फिर वह चलने-फिरने में सक्षम नहीं है। ऐसे में लॉकडाउन की अवधि में उनके लिए जरूरी सामग्री भी एकत्रित करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इसी को देखते हुए जिला पुलिस ने ऐसे बुजुर्गों की मदद करने के लिए यह निर्णय लिया है कि सूचना मिलने पर पुलिस मध्यस्ता करते हुए उनतक सामग्री पहुँचाएगी।

जरूरत की सामग्री का बनाया लिस्ट

पुलिस ने उन सभी सामग्रियों की लिस्ट तैयार की हैं जो उनके रोजाना की जरूरतों को पूरा करेगी। मुख्य रूप से बुजुर्गों को मास्क उपलब्ध कराए जाएँगे। चश्मा टूटने पर उसे ठीक कराया जाएगा। सुनने की मशीन आदि खराब होने पर उसे ठीक कराने एवं उपलब्ध कराने का इंतजाम किया जाएगा। ऐसे बुजुर्ग जिनकी कोई दवाएँ चल रही है, लेकिन वह प्राप्त करने में अभी असफल हैं। उन्हें टेली मेडिसिन एवं डॉक्टरों से ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। राशन का सामान, सब्जी एवं आवश्यक दवाएँ, मोबाइल-टीवी रिचार्ज, मिर्च, आटा, हल्दी आदि पिसवाई जाएगी। आवश्यक ऑनलाइन काम आने पर सहायता पहुँचाना। पढ़ने के लिए विशेष पुस्तकें उपलब्ध करवाने का काम भी पुलिस करेगी।

अक्सर यह देखा गया हैं कि बुजुर्ग अपने बुढ़ापे और बीमारी के कारण अपनी रोजमर्रा की चीजों को करने में सक्षम नही होते। बच्चों को पढ़ा लिखा कर बेहतर भविष्य देने के लिए उन्हें अपने से दूर कर देते हैं। जिसकी वजह से उन्हें अकेले या फिर नौकर चाकर के भरोसे जीवन व्यतीत करना पड़ता है। देश में फैली इस भयानक महामारी की वजह से सरकार ने लॉकडाउन किया हैं ताकि संक्रमण एक से दूसरे में न फैले। और फिर इस हालात में बुजुर्ग वर्ग सबसे अकेला हो गया है। इस मुश्किल घड़ी को देखते हुए राजगढ़ पुलिस सुरक्षा के साथ अब एक बेटे का भी फ़र्ज अदा कर बुजुर्गों के मदद के लिए हरसंभव प्रयास करने में जुटी है।

लॉकडाउन के वक़्त अलग अलग राज्यों की पुलिस मदद की पूरी कोशिश में जुटी हैं। जैसे UP पुलिस को लॉकडाउन के दौरान अगर कोई भूखा दिखा तो उसे खाना खिलाना। किसी पास राशन नहीं था तो गाड़ी से उसके घर राशन पहुँचाना। तो वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे भी ज़ाहिल लोग है जो सुरक्षा कर रही पुलिस पर ही, ईंट और पत्थर बरसा रहे हैं।

कानपुर: 3 मदरसों के 53 बच्चे मिले कोरोना पॉजिटिव, जमातियों से फैले संक्रमण ने मचाई तबाही

देश में हर जगह कोरोना संक्रमण जिस तरह से फैल रहा है उसको नियंत्रण करना बहुत ही मुश्किल हो रहा है। यह मामला यूपी का है। जहाँ कानपुर जिले में 3 मदरसों के 53 बच्चे कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं। इन सभी बच्चों की उम्र 10 से 20 साल के बीच की है। जिसकी वजह से यहाँ संक्रमितों का आँकड़ा बढ़ कर 170 पहुँच गया हैं। आए दिन बढ़ते मामलों के कारण कानपुर की स्थिति बद से बदत्तर होती चली जा रही हैं। उत्तर प्रदेश में अब कानपुर शहर कोरोना हॉटस्पॉट के रूप में उभरा है।

छोटे बच्चें भी आए कोरोना के चपेट में

जिला स्वास्थ्य और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में शामिल होने के बाद जमाती शहर की विभिन्न मस्जिदों और मदरसों में ठहरे थे। ये जमाती मदरसों में दीनी तालीम देने के लिए जाते थे। मरकज के जमातियों के संक्रमित होने के बाद कानपुर में भी कई जमाती पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद उनके सम्पर्क मे रहने वाले लोगों की जाँच की गई। इनमें बड़े पैमाने पर मदरसें के छात्रों में कोराना संक्रमण पाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, मजिस्ट्रेट ब्रह्म देव तिवारी का कहना है कि कानपुर सिटी में कई जिले हॉटस्पॉट हैं, लेकिन पिछले 12 दिनों में तीन मदरसों से बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं। संक्रमित लोगों में बहुत छोटे बच्चे हैं। जो इन मदरसों में पढ़ रहे हैं।

कुली बाजार क्षेत्र बन सकता है सबसे बड़ा हॉटस्पॉट

साथ ही डीएम ने कहा कि तीन मदरसों में से सबसे ज्यादा मामले कुली बाजार मदरसा में सामने आए हैं। इस मदरसे में ज्यादातर छात्र बिहार, झारखंड के रहने वाले है। यहाँ लगभग 38 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके बाद एक मदरसा हाते वाली मस्जिद के पास है, जो तबलीगी जमात वालों के कनेक्शन में रहने के कारण एक हॉटस्पॉट रूप में उभरा है। इसमे राहत की बात यह है कि नए पॉजिटिव केसेस में अभी किसी की हालत गंभीर नही है। राज्य निगरानी अधिकारी विकासेंदु अग्रवाल के अनुसार, कुली बाज़ार लखनऊ के सदर क्षेत्र के बाद राज्य का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन सकता है, जहाँ से 80 से अधिक सकारात्मक मामले सामने आए हैं।

अस्पताल प्रशासन के साथ जमातियों द्वारा की गई बदसुलूकी

इससे पहले कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती जमातियों का अस्पताल प्रशासन के साथ की गई बदसुलूकी की हरकतें भी सामने आयी थी। जहाँ उनकी मनमानी और उपद्रव के बारे में बताते हुए मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. आरती लालचंदानी ने कहा था कि बीते दिनों जमातियों ने वार्ड बॉय के साथ मारपीट की। खाने की थाली में लात मार दी। क्योंकि वें शाकाहारी खाने की जगह बिरयानी और नॉनवेज माँग रहे थे।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में अभी तक 1873 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। जबकि 30 लोगों की इस जानलेवा वायरस से मौत हो गई। इनमें से 327 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। वहीं कानपुर में अब 170 लोग कोरोना से संक्रमित हैं। जिसमें सात लोग स्वस्थ हो चुके जबकि तीन लोगों की मौत हो गई है। फिलहाल इस वक़्त यूपी में कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे अधिक 372 मामले आगरा से हैं। आगरा में 49 लोग पूर्णतया स्वस्थ हो चुके हैं जबकि दस लोगों की मौत हो गई है।

क्या बंगाल में हैं लाखों-लाख कोरोना मरीज? ममता बनर्जी के बयान के बाद लोगों ने पूछे दनादन कई सवाल

कोरोना को परास्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, वहीं कुछ राज्य सरकारें इस महामारी पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही हैं। इसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम भी शामिल है।

दरअसल, आशंका जताई जा रही है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या को छिपा रही हैं। अब उनके ताजा बयान से ये आशंका ज्यादा गहरी हो गई है कि पश्चिम बंगाल में कोरोना मरीजों की संख्या लाखों में हो सकती है।  

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि उन्होंने एक निर्णय लिया है कि अगर किसी व्यक्ति को कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है और उसके पास अपने घर पर खुद को आइसोलेट करने की जगह है तो वह शख्स खुद को क्वारंटाइन कर सकता है। लाखों लाख लोगों को क्वारंटाइन नहीं किया जा सकता है, सरकार की भी अपनी सीमाएँ हैं। 

ममता बनर्जी के इस ट्वीट के बाद से लोग उनसे सवाल पूछने लगे। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट करते हुए उनसे पूछा, “क्या ममता बनर्जी आखिरकार स्वीकार कर रही हैं, जो हम सब कह रहे हैं कि बंगाल में कोरोना वायरस के कई मामले हो सकते हैं? उन्होंने संख्या को ‘लाख’ में रखा है और संभावना है कि उनके पास कोरोना मरीज की सटीक संख्या हैं। अब कृपया सार्वजनिक डोमेन में भी बंगाल के वास्तविक कोराना वायरस आँकड़ें को रखें।”

एक यूजर ने लिखा, “मतलब, कितने लाख कोरोना केस हैं कि ऐसा डिसीजन….?”

एक ने लिखा, “लाखों-लाख? क्या ये ममता बनर्जी सरकार की विफलता नहीं है?”

एक अन्य यूजर ने लिखा कि अभी तक सब कुछ ममता सरकार के अनुसार सुचारू रुप से चल रहा था, लेकिन अब जब असली रिपोर्ट और आँकड़े सामने आने लगे हैं तो ये रिएक्शन सामने आ रहा है।

एक ने तो कोरोना मरीजों की असली संख्या बताने के लिए उनका शुक्रिया अदा भी किया।

प्रीतम नाम के यूजर ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “होम क्वारंटाइन हुए मरीजों का इलाज कौन करेगा? आपको अपने राज्य में उतने ही अवैध प्रवासियों को शरण देनी चाहिए, जिसको आप संभाल सको और आज अगर ये लाखों-लाख हुए हैं तो इसकी वजह भी आप ही है, क्योंकि आप उसे रोकने में असमर्थ रहीं। भगवान बचाए बंगाल को।”

एक यूजर ने ममता की अंतिम पंक्ति की तरफ इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने परोक्ष रूप से स्वीकार कर लिया है कि पश्चिम बंगाल की स्थिति काफी गंभीर है और उनकी सरकार इससे निपटे में असमर्थ है।

खुशहाल सिंह कोरांगा ने लिखा, “ममता दीदी का खेल तो देखो! मरीजों को अगर हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ेगा तो परिचय तो देना ही पड़ेगा! लेकिन ममता नही चाहती की उसके प्यारे रोहिंग्या को कोई पहचान ले, अतएव दुनिया की सबसे विचित्र राह निकाल डाली उपचार की वो भी करोना की! मर जाएँगे लेकिन मज़ाल रोहिंग्या पर कोई आँच आने पाए?”

अर्नब पर हमला करने वाले कॉन्ग्रेसियों की जमानत पर रिपब्लिक मीडिया ने जताई नाराजगी, कहा- कवर-अप करने में जुटी मुंबई पुलिस

रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी पर हमले के मामले में गिरफ्तार किए गए 2 आरोपितों को भोईवाड़ा कोर्ट ने सोमवार (अप्रैल 27, 2020) को जमानत दे दी। रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मुंबई पुलिस ने चैनल के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी से सुबह के 9 बजे से लेकर तकरीबन 11 घंटों तक पूछताछ की और उन्होंने इसमें पूरा सहयोग भी दिया।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क का कहना है कि उनके बार-बार आग्रह करने के बाद भी अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी सामिय गोस्वामी पर हमला करने वाले दोनों कॉन्ग्रेस नेताओं को ₹15,000 पर जमानत दे दी गई। अर्नब और उनकी पत्नी पर किया गया हमला कॉन्ग्रेस की सोची-समझी साजिश थी और मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज करने से मना कर दिया। मुंबई पुलिस को इस तरह से कवर-अप नहीं करना चाहिए।

बता दें कि इससे पहले भी अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया था कि मुंबई पुलिस उन पर हुए हमलों के मामले में कॉन्ग्रेस की साज़िश को कवर-अप करने में जुट गई है। उन्होंने मुंबई के एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर को पत्र लिख कर ये आरोप लगाए थे।

अर्नब ने पत्र में लिखा था कि एक राष्ट्रीय पार्टी की इस हमले में भागीदारी है, जिसे पुलिस नज़रअंदाज़ कर रही है। अर्नब ने कहा कि एफआईआर फॉर्म में सिर्फ़ पकड़े गए यूथ कॉन्ग्रेस के दोनों कार्यकर्ताओं का नाम है, जबकि उनके साथ इस साज़िश में शामिल अन्य लोगों के नाम नहीं हैं। अर्नब ने कहा कि शिकायत कॉपी में उन सभी के नाम, डिटेल्स और लिंक्स दिए गए थे। इस पर अर्नब के सिक्योरिटी इंचार्ज ने भी हस्ताक्षर किया था, जो शिकायतकर्ताओं में से एक है।

इससे पहले मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को तत्काल पूछताछ के लिए 12 घंटे के भीतर दो नोटिस भेजा था। उन्होंने पालघर मॉब लिंचिंग में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए थे। रिपब्लिक टीवी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुंबई पुलिस ने पिछले 12 घंटे में अर्नब को 2 नोटिस भेजे हैं। कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में अर्नब आज (27 अप्रैल, 2020) पूछताछ के लिए जाएँगे।

गौरतलब है कि अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी सामिया गोस्वामी पर मुंबई में 23 अप्रैल को दो कॉन्ग्रेस नेताओं ने हमला किया था। हमला उस वक्त किया गया, जब दोनों अपने स्टूडियो से घर जा रहे थे। अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया कि दोनों आरोपितों ने स्वीकार किया था कि उन्हें कॉन्ग्रेस के उच्चाधिकारियों ने ‘उन्हें सबक सिखाने’ के लिए भेजा था। यूथ कॉन्ग्रेस के दोनों कार्यकर्ता ‘मार डालेंगे’ और ‘ख़त्म कर देंगे’ जैसी बातें भी चिल्ला रहे थे।

महाराष्ट्र: ‘जय बजरंग’ लिखकर गाड़ी पर हो रहा था अवैध गो-तस्करी, नईम फारूक कुरैशी समेत पाँच गिरफ्तार

देश भर में कोरोना वायरस के मद्देनजर जारी लॉकडाउन के बीच रविवार (26 अप्रैल 2020) को गो-तस्करी के एक गिरोह को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया। इस गिरोह में पाँच पशु तस्कर थे। इन पशु तस्करों के नाम नईम फारूक कुरैशी (28), शाहरुख सलीम कुरैशी (23) अल्तमस सलीम कुरैशी (21) सलीम सुलेमान कुरैशी (50) और मुन्ना बशीर सैयद (35) हैं। इन पाँचों को महाराष्ट्र के नासिक में पशुओं के अवैध ट्रांसपोर्टिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

बता दें कि महाराष्ट्र में जिस गाड़ी पर लेकर ये मवेशियों का गो-तस्करी करते थे, उस पर ‘जय बजरंग’ लिखा हुआ था। एक स्थानीय मराठी समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक स्थानीय किसान अनिल बोरस्ते ने 26 अप्रैल की रात को नासिक में ओझर सकोरे मिग रोड पर गोंडकर वस्ती के पास एक गाड़ी में 2 गाय और 4 बछड़े की हत्या करने के लिए अमानवीय तरीके से ले जाते हुए देखा। उस गाड़ी पर महाराष्ट्र का रजिस्ट्रेशन नंबर था। किसान ने देखते ही शोर मचाकर लोगों को इस घटना के बारे में बताया। जिसके बाद स्थानीय लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुँचे और गाड़ी रोककर गोवंशों को बचाया।

सूचना मिलने के बाद, पुलिस निरीक्षक भगवान मठुर उस इलाके में पहुँचे, जहाँ स्थानीय लोगों ने वाहन को रोक कर रखा था। उन्होंने पाँच लोगों को गिरफ्तार किया और गोवंशों को अपनी कस्टडी में ले लिया। नासिक पुलिस ने गाड़ी को भी जब्त कर लिया। इसके साथ ही अपराधियों की दो मोटरसाइकिल को भी जब्त किया गया है, जिसकी कीमत दो लाख से अधिक है।

पाँचों आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज

महाराष्ट्र में गो-तस्करी के इन पाँचों आरोपितों के खिलाफ महाराष्ट्र पशु संरक्षण अधिनियम 1976 की आईपीसी धारा 11, और 11 (डी) (डी) के तहत ओझर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। साथ ही लॉकडाउन में जिला कलेक्टर के कर्फ्यू पास के उल्लंघन मामले में भी केस दर्ज किया गया है।

राजस्थान के बाँसवाड़ा में गौ हत्या

गौरतलब है कि राजस्थान के बाँसवाड़ा में 23 अप्रैल 2020 को कुछ लोगों ने नशे में गौ हत्या कर दी। अखिल भारत कृषि गौ सेवा संघ की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक पाटन थाना क्षेत्र में ईसाई धर्मांतरण गतिविधियाँ पहले से ही सक्रिय थी। गौ हत्या के पीछे भी कहीं न कहीं ईसाई मिशनरी के लोगों का ही हाथ है। आरोप यह भी लगाया है कि कुशलगढ़ विधायक अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है एवं मामले को दबाने के लिए राजनीतिक दबाव डाल रही है।

मंदिर के सामने भाला मारकर गौ हत्या

इससे पहले 18 जुलाई, 2018 को उत्तर प्रदेश नोएडा के गौतम बुद्ध नगर जिले के दनकौर थाना क्षेत्र में अकबर, जाफर, जुल्फिकार और फरियाद ने खेत में घुसी गाय की मंदिर के सामने भाला मारकर हत्या कर दी थी। 

उत्तराखंड हिंदू नाई यूनियन: कोरोना संक्रमण के डर से देहरादून में जारी हुई लिस्ट, घरों पर जाकर काट रहे बाल

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हिंदू नाइयों की एक यूनियन बनी है। ये नाई लोगों के घरों में जा-जाकर उनके बाल काट रहे हैं। दरअसल लॉकडाउन की वजह से देश की सभी नाई की दुकान बंद है। इसलिए ये नाई लोगों के बुलाने पर उनके घर जाकर उनके बाल काटते हैं।

पर्वतजन ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने अपनी एक्सक्लुसिव स्टोरी में बताया है कि नाई की दुकान बंद होने और अधिकतर जमातियों के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद से लोग मुस्लिम समुदाय के नाइयों से बाल कटवाने से बचने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि उन्हें भी कोरोना हो जाएगा।

अब लोग हिंदू धर्म से आने वाले सैनी समुदाय के लोगों से बाल कटवाने को तरजीह दे रहे हैं। यही कारण है कि देहरादून में हिंदू नाइयों ने मिलकर एक यूनियन बनाया है। इतना ही नहीं, इस यूनियन ने एरिया के आधार पर मोबाइल नंबर के साथ एक पीडीएफ भी जारी किया है। ताकि लोग अपने क्षेत्र के नाई को फोन करके उन्हें अपने घर बुला सकें। यह पीडीएफ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसका नाम दिया गया है- “हिंदू बार्बर शॉप्स इन देहरादून।”

बता दें कि पीडीएफ की इस लिस्ट में 61 नाइयों को नाम, फोन नंबर और पते दिए गए हैं। ये नाई अपने साथ सिर्फ कैंची, ब्रश और कंघी लेकर चलते हैं और बाकी पानी, बाल काटने के लिए कपड़ा आदि घर के लोगों से ही माँग लेते हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी कम रहता है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के रायसेन का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें शेरू मियाँ नाम का एक शख्स थूक लगा कर फल बेचता हुआ दिखा था। इसी तरह दक्षिणी मध्य प्रदेश के बैतूल बाजार में अब्दुल रफीक, सादी अहमद, रितेश मधाना ऑटो रिक्शा से तरबूज बेच रहे थे। ये तीनों चाकू पर थूक लगाकर तरबूज काट रहे थे। इस तरह की कई और वीडियो और घटनाएँ सामने आई हैं, जिसकी वजह से लोगों के मन में ये डर बैठ गया है।

Alt न्यूज का फैक्ट चेक फिर से सवालों के घेरे में, पेट्रोल पंप पर नोट फेंकने वाले इलियास को बताया पैरलाइज़्ड

बीते दिनों देश में कोरोना के कहर के बीच कुछ वीडियोज वायरल हुईं। इन वीडियोज में समुदाय विशेष के लोग आपत्तिजनक हरकतें करते नजर आए। इसके बाद सोशल मीडिया पर इनपर खूब सवाल उठे। मगर स्वघोषित फैक्टचेकर Alt न्यूज इनका लगातार बचाव करता रहा। इस बार भी कहानी बिलकुल इसी क्रम में हैं। सोशल मीडिया पर एक पेट्रोल पंप की वीडियो वायरल हुई। वीडियो में हमने देखा कि एक मुस्लिम युवक अपनी स्कूटी में पेट्रोल भरवाने पेट्रोल पंप पर आया और जब पेट्रोल भर गया तो वहाँ से जाते हुए अपने सीधे हाथ से 20 रुपए का नोट गिरा गया।

गौरतलब है कि ऐसे समय में जब सोशल मीडिया पर 500 रुपए के नोट में थूक लगाकर कोरोना फैलाने की धमकियाँ दी जा रही हैं, उस समय में ऐसी घटना भय व्याप्त कराने के अतिरिक्त कुछ और नहीं समझीं जा सकतीं। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर लोगों ने इस वीडियो के बाद व्यक्ति की मंशा पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। लेकिन, जैसे ही लोग हमलावर हुए और वीडियो सबके संज्ञान में आनी शुरू हुई। Alt न्यूज मसीहा बनकर उस व्यक्ति के कर्म को जस्टिफाई करने के लिए सामने आ गया।

मुस्लिम समुदाय के कुकर्मों को अकसर अपने घटिया तर्कों से छिपाने वाले प्रतीक सिन्हा की वेबसाइट ने इसपर भी अपना ज्ञान दिया। उन्होंने इस वीडियो का फैक्ट चेक किया और बताया कि इसकी हकीकत जानने के लिए उन्होंने नवसारी पुलिस से संपर्क किया और इसके बारे में पड़ताल की। जहाँ पुलिस ने बताया कि उन्हें पेट्रोल पंप के मालिक ने इस बारे में सूचना दी थी, जिसके बाद जब उन्होंने उस व्यक्ति का पता लगाया तो उसका नाम मो यूसुफ इलियास शेख मालूम हुआ, जो कि वलसाड का रहने वाला है।

ऑल्ट न्यूज ने फैक्ट चेक में ये भी कहा कि पुलिस ने उन्हें यहाँ तक बताया कि उनकी पूछताछ में उन्हें मालूम चला कि आरोपित का हाथ पैरलाइज्ड है। इसलिए उसके हाथ से वो नोट गिर गया। इसके बाद पुलिस ने उसका मेडिकल टेस्ट कराया व होम क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी।

अब हालाँकि, जो तथ्य ऑल्टन्यूज ने अपने फैक्ट चेक में पेश किए। उससे साबित होता है कि फैक्टचेक वेबसाइट ने पूरी जी जान से इस मामले में इलियास को निर्दोष साबित करने की कोशिश की। लेकिन यदि इस केस में कुछ महत्तवपूर्ण बिंदुओं पर गौर करें तो मालूम चलेगा कि केवल इलियास ही नहीं बल्कि प्रतीक सिन्हा की वेबसाइट भी खुलेआम एक बार फिर झूठ बोल रही है।

सबसे पहले ये गौर करिए कि इस फैक्ट चेक में कहा गया कि मोहम्मद युसूफ इलियास का सीधा हाथ पैरलाइज्ड है। लेकिन वीडियो देखने पर मालूम चलता है कि वे उसी हाथ से स्कूटर चलाकर 30 किमी दूर पेट्रोल पंप तक आया। जी हाँ, गूगल के मुताबिक, जो जगह इलियास ने पूछताछ में पुलिस को बताई उसकी दूरी उसके निवास से 30 किमी की दूरी पर है और जहाँ बिना ट्रैफिक के भी सफर करने में लगभग 40 मिनट लगते हैं।

अगर हाथ वाकई ही पैरलाइज्ड है तो फिर 30 किलोमीटर स्कूटर को कैसे चलाया गया? क्योंकि दुपहिया, जिसे लेकर यूसुफ निकला, उसमें एस्कलेटर तो दाईं तरफ ही होता है। अगर उसे वाकई दिक्कत होती, तो इतनी दूर अकेले सफर करना कैसे संभव होता। लेकिन फिर भी हम वीडियो को थोड़ा ध्यान से देखें तो मालूम चलेगा कि नोट फेंकने के बाद इलियास ने आराम से स्कूटर का दायाँ हैंडल पकड़ा और उसे चलाया।

पुलिस ने उसे निर्दोष नहीं बताया

अपनी रिपोर्ट में एक जगह ऑल्ट न्यूज ने पुलिस के बयान का उल्लेख करते हुए ये जताने की भी कोशिश की है कि शेख निर्दोष है, फिर भी उसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। जबकि हकीकत ये है कि पुलिस ने कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि वे बेगुनाह है और उसकी ये हरकत कोरोना महामारी के बीच में लोगों में भय व्याप्त करने वाली नहीं है। पुलिस अब भी इस मामले में जाँच कर रही है और पुलिस के किसी बयान से उसकी मंशा साफ नहीं होती है

मोहम्मद युसूफ को क्यों क्वारंटाइन रहने की सलाह दी गई

आल्ट न्यूज की खबर में एक जगह इलियास के कोरोना संक्रमित होने पर भी पुलिस से सवाल किया गया। जहाँ पुलिस ने उसे संक्रमित होने की बात नहीं कही। बल्कि ये कहा कि वे उसे मेडिकल जाँच के लिए लेकर गए थे और उसमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। लेकिन फिर भी उसे क्वारंटाइन रहने की सलाह दी गई है। अब किसी भी आम फैक्टचेकर के लिए ये संदेह वाला बिंदु हो सकता है। लेकिन चूँकि ऑल्ट न्यूज को अपना मनचाहा प्वाइंट यहीं से मिलता है इसलिए वे पुलिस से ये भी सवाल पूछना जरूरी नहीं समझते कि आखिर जब लक्षण नहीं थे तो उसे क्वारंटाइन होने को क्यों कहा गया।

लेकिन, जब ऑपइंडिया ने इस तथ्य की पुष्टि के लिए इंस्पेक्टर से बात की। तो उन्होंने ये स्पष्ट कहा कि उन्होंने इसलिए उसे क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी है। क्योंकि उसका सैंपल मेडिकल टेस्ट के लिए गया है। इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि आजकल सोशल मीडिया पर बहुत सी वीडियोज घूम रही है, जिनमें कोरोना संक्रमित मरीज नोटों पर थूक लगाकर सड़कों पर फेंक रहे हैं। ताकि कोरोना फैल सके। इसलिए जब तक उसके रिजल्ट सामने नहीं आ जाते तब तक इलियास को क्वारंटाइन रहने के लिए कहा गया है।

सीधे हाथ में कैसे आया 20 का नोट?

सबसे दिलचस्प और हास्यास्पद बात जो ऑल्टन्यूज अपने अजेंडे को चलाने के लिए गौर करना और उसपर सफाई देना भूल जाता है, वो ये कि आखिर जब यूसुफ पैसों का लेन देन अपने उल्टे हाथ से कर रहा था तो फिर उसके सीधे हाथ में वो 20 का नोट कैसे आया? क्या उसने पहले से अपने हाथ में वो नोट फँसाया हुआ था? जो उसके हाथ से स्कूटर चलाते वक्त जमीन पर आकर गिर गया और सामने पड़े होने के बावजूद उसकी नजर उसपर नहीं गई, न उसने उसे उठाने की जहमत की।

इतना ही नहीं, जब ऑपइंडिया ने उसी पुलिस इंस्पेक्टर से बात की, जिसकी बात की तर्ज पर ऑल्ट न्यूज ने पूरा फैक्ट चेक किया। तो उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि दरअसल, आरोपित का एक एक्सिडेंट हो रखा है। इसलिए, ये नहीं कहा जा सकता कि उसके हाथ में वाकई फालिश हुई थी। इंस्पेक्टर ब्रह्मदत्त ने बताया कि एक्सिडेंट के कारण आरोपित की 3 उंगलियाँ काम नहीं कर रही थी। मगर, 2 उंगलियाँ एकदम ठीक थी।

अब खुद सोचिए अगर, शेख के हाथ की दो उंगलियाँ भी काम कर रही हैं, तो इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता कि उसे ये चीज महसूस न हुई हो कि उसके हाथ से 20 का नोट गिरा। क्योंकि उस समय भी उसका हाथ इतना काम कर रहा था कि स्कूटर के एस्कलेटर को संभाल सके।

कोर्ट करेगा फैसला!

इसके बाद अंत में यह स्पष्ट कर दें, कि पुलिस का बयान ऑल्ट न्यूज के फैक्ट चेक का उद्देश्य दोनों में जमीन आसमान का फर्क है। क्योंकि पुलिस ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने उसके ख़िलाफ़ आपदा कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उनका कहना है कि अब कोर्ट इस बात का निर्णय लेगा कि वो निर्दोष या फिर दोषी।

अब हालाँकि, इन सवालों के जवाब आपको प्रतीक सिन्हा के फैक्ट चेक से कहीं भी नहीं मिलते। लेकिन उनके पहले के प्रोपेगैंडों की लिस्ट देखकर ये पुष्टि जरूर होती है कि ये सब लीपापोती फिर से इनके अजेंडे का हिस्सा है। क्योंकि इससे पहले इसी ऑल्ट न्यूज ने जामिया में भड़की हिंसा में पुलिस पर पत्थरबाजी करने वाले छात्र को लेकर ये दावा किया था कि लोग उसे लेकर झूठ फैला रहे हैं क्योंकि उसके हाथ में वॉलेट था। जबकि वीडियो में साफ दिखता है कि उसके हाथ में पत्थर था।

इसी प्रकार फल विक्रेता शेरू मियाँ की हरकत पर भी ऑल्ट न्यूज ने ऐसे तथ्यों से उसकी हरकत को हल्की बात दिखानी चाही थी। साथ ही ये अपने फैक्ट चेक में ये तर्क दिया था कि शेरू ने फलों पर थूक कोरोना महामारी के बीच नहीं लगाया बल्कि ये वीडियो फरवरी की है।

ममता बनर्जी ने कोरोना पॉजिटिव को क्वारंटाइन करने में जताई असमर्थता, कहा- लाखों लोगों को आइसोलेट नहीं किया जा सकता

देश के कई राज्यों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है। कोरोना पर नियंत्रण करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि वो इस वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए तमाम एहतियाती कदम उठा रही हैं। हालाँकि, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करते हुए उन्होंने कोरोना पॉजिटिव मरीजों को क्वारंटाइन करने में असमर्थता जताई।

सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “हमने फैसला किया है कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव मिलता है और उसके घर में क्वारंटाइन करने की व्यवस्था है तो वो व्यक्ति खुद को आइसोलेट कर सकता है। हम लाखों लोगों को क्वारंटाइन नहीं कर सकते हैं और सरकार की भी अपनी सीमा है।”

ममता बनर्जी के इस बयान के बाद से सवाल उठने लगे कि क्या राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या लाखों में है, जिसे वो छुपा रही हैं। क्योंकि एक तरफ जहाँ ममता बनर्जी अपने राज्य की जनता को क्वारंटाइन करने की सुविधा देने में असमर्थता जता रही हैं, तो वहीं वो दूसरे प्रदेशों में फँसे पश्चिम बंगाल को लोगों को वापस लाने का आश्वासन दे रही हैं।

सीएम ने सोमवार (अप्रैल 27, 2020) को ट्वीट करते हुए लॉकडाउन के कारण राज्य से बाहर फँसे लोगों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया और कहा कि उन लोगों तक पहुँचने के लिए किए जा रहे प्रयासों की वह व्यक्तिगत रूप से निगरानी करेंगी। ममता बनर्जी ने कहा कि राजस्थान के कोटा शहर में फँसे छात्रों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और वे जल्द ही अपने घर लौटने के लिए यात्रा शुरू करेंगे। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब तक वह मुख्यमंत्री हैं, पश्चिम बंगाल के कहीं भी फँसे लोगों को असहाय महसूस करने की जरूरत नहीं है।

ममता ने ट्वीट किया, “पश्चिम बंगाल सरकार लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फँसे बंगाल के लोगों को घर लौटने में हरसंभव मदद शुरू करेगी। मैंने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ज़रूरतमंदों की मदद करें। जब तक मैं यहाँ हूँ, बंगाल के किसी भी निवासी को असहाय महसूस नहीं करना चाहिए। मैं इन कठिन समय में आपके साथ हूँ।”

उन्होंने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी कर रही हूँ और हम यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि सभी को जरूरी मदद मिले। प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और कोटा में फँसे बंगाल के सभी छात्र जल्द ही अपने घर लौटेंगे।”

इससे पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी पश्चिम बंगाल को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं, उन्होंने कहा था कि राज्य में राशन वितरण में अनियमितताओं को लेकर लगातार शिकायत आ रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि गरीबों के राशन का राजनीतिक आवंटन हो रहा।

कॉन्ग्रेस पार्टी के विपरीत जाकर अधीर रंजन चौधरी ने की कोरोना जंग में मोदी सरकार की तारीफ, कहा- ग्लोबल लीडर बनेगा भारत

कोरोना वायरस से निपटने के लिए की गई तैयारियों को लेकर जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी केन्द्र सरकार को घेरती रहती है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने मोदी सरकार की तारीफ की है। अधीर रंजन चौधरी ने माना कि सरकार और मेडिकल स्टाफ बाकी दुनिया के मुकाबले भारत में अच्छा काम कर रहा है और कहा कि जिस तरह से अब तक देश इस बीमारी से निपटा है उसको देखते हुए अगर कोरोना संकट से भारत बाहर निकलता है भारत ग्लोबल लीडर भी बन सकता है।

अधीर रंजन चौधरी ने कोरोना वायरस और भारत पर बात करते हुए कहा, “हिंदुस्तान में जहाँ 130 करोड़ आबादी है वहाँ सरकार, राज्य सरकार, डॉक्टर और बाकी प्रतिष्ठानों ने अच्छा काम किया है। जब हम अमेरिका, यूरोप को देखते हैं तब पता चलता है कि हम उन लोगों से काफी आगे निकल चुके हैं। अगर इस मौके को इसी ढंग से हमने इस्तेमाल किया तो भारत आगे निकल जाएगा। आने वाले दिनों में भारत रैंकिंग में कहाँ से कहाँ पहुँच जाएगा। अगर हम कोरोना से लड़ने के लिए ऐसे ही ठोस कदम उठाते रहे तो आने वाले दिनों में भारत एक मॉडल देश के रूप में उभरने की संभावना है। भारत ग्लोबल लीडर बनेगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी वक्त-वक्त पर सरकार की तैयारियों को नाकाफी बता चुकी है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर लॉकडाउन की तुलना नोटबंदी से भी की थी।

सोनिया ने शनिवार को लिखे पत्र में MSME सेक्टर की परेशानियों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर का जीडीपी में योगदान एक तिहाई है और 11 करोड़ लोग काम करते हैं। दूसरी तरफ राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी लगातार कह रहे हैं कि सरकार लॉकडाउन से कोरोना को सिर्फ रोक सकती है, उसे खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर टेस्टिंग की कमी है। गौरतलब है कि इससे पहले कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी और मिलिंद देवड़ा भी मोदी सरकार की तारीफ कर चुके हैं।

पुलिस के हत्थे चढ़ा जामिया एल्यूमनी एसोसिएशन का अध्यक्ष शिफा उर्र रहमान, दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगा भड़काने का आरोप

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जामिया एल्यूमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा उर्र रहमान (Shifa Ur Rahman) को गिरफ्तार कर लिया है। शिफा उर्र रहमान पर दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में दंगा भड़ाकने का आरोप है। उसे सोमवार (अप्रैल 27, 2020) को UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया।

जानकारी के मुताबिक रविवार (अप्रैल 26, 2020) को पुलिस ने शिफा को पूछताछ के लिए बुलाया था। पूछताछ के दौरान दिल्ली दंगो में कई जगह उनकी संलिप्तता पाई गई। उनके खिलाफ तमाम सबूत पुलिस के हाथ लगे हैं। जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस ने बताया कि जामिया के छात्र सरूफा जरगर और मीरान हैदर को गिरफ्तार करने के बाद पूछताछ की गई। जिसके बाद शिफा का नाम सामने आया। सरूफा जरगर और मीरान हैदर को UAPA एक्ट के तहत पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि उनके पास रहमान के खिलाफ तकनीकी सबूत हैं जो ये साबित करते हैं कि वह भीड़ को उकसाने का काम कर रहा था। रहमान हिंसा प्रभावित इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज में भी कैद हुआ है।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने रहमान के मैसेजेस, व्हाट्सएप आदि सब जाँचे हैं जिसमें साफ है कि वह हिंसा में संलिप्त था। पुलिस के अनुसार उसे कोर्ट में पेश किया गया जहाँ उसे 10 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।

अब तक हिंसा मामले में 10 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। एक FIR के मुताबिक दिल्ली हिंसा एक सांप्रदायिक हिंसा थी जो पहले से बुना गया षड्यंत्र था और इसे पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद और दो अन्य छात्रों ने रचा था। इस साजिश के तहत दो अलग-अलग जगहों पर उमर खालिद ने भड़काऊ भाषण दिए थे जिनकी जाँच की जा रही है।

उमर खालिद पर दर्ज FIR में लगे आरोपों के अनुसार, उमर खालिद और उसके सहयोगियों ने औरतों-बच्चों को सड़कों पर उतारकर हिंसा भड़काने की साजिश रची थी। इसके बाद यमुनापार के मौजपुर, कर्दमपुरी, जफराबाद, चाँदबाग, शिव विहार में और इसके आस-पास के इलाकों में दंगे हुए थे।

FIR कॉपी में उमर खालिद के बारे में लिखा गया है कि साज़िश के तहत दिल्ली के मौजपुर, कर्दमपुरी, जाफराबाद, चाँदबाग़, गोकुलपुरी और शिव विहार जैसे इलाक़ों में जगह-जगह घरों में बंदूकें, पेट्रोल बम, एसिड बोतल और पत्थर बड़ी संख्या में जुटाए गए। इन्हें फेंकने के लिए गुलेल सहित अन्य घातक सामानों की व्यवस्था की गई। दंगों में भीड़ जुटाने के लिए उमर खालिद और दानिश ने अलग-अलग इलाक़ों से लोगों को लाने में अहम भूमिका निभाई। जाफराबाद मेट्रो स्टेशन को इसी साज़िश के तहत जाम किया गया और आसपास के लोगों को परेशान करने के लिए वहाँ महिलाओं व बच्चों को जुटा कर रास्ते अवरुद्ध किए गए।

गौरतलब है कि इस हिंदू विरोधी दंगे में कई लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल भी हुए थे। इस मामले को लेकर पिछले महीने दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखने के लिए पुलिस को निर्देश देने संबंधी याचिका पर केंद्र, पुलिस और आम आदमी पार्टी सरकार से जवाब माँगा था।