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पहले से ही बनाई हुई थी लोगों ने पत्थरबाजी और हमले की योजना: मुरादाबाद हमले में घायल डॉक्टर का बयान

पूरे देशभर में डॉक्टर्स और पुलिसकर्मियों के साथ की जा रहीं थूकने से लेकर तमाम बदसलूकियों की घटनाओं के बीच आज उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में डॉक्टर्स पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई है जिसमें डॉक्टर्स बुरी तरह से जख्मी हो गए। घायल डॉक्टर ने उपचार के दौरान अपने दल पर हुई इस घटना के बारे में बताया है।

जाँच दल के साथ पत्थरबाजी की घटना में चोटिल डॉ. एससी अग्रवाल ने कहा, “हम मुरादाबाद के नवाबपुरा में एक COVID-19 पॉजिटिव मरीज के 4 परिवार वालों को लेने गए थे। जैसे ही हमने उन्हें एम्बुलेंस में बिठाया, कुछ लोगों ने हमें घेर लिया और विवाद शुरू हो गया। लोगों ने हम पर हमला कर दिया।”

इस घटना के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें महिलाओं और पत्थरबाजों को पत्थर फेंकते हुए देखा जा सकता है। महिलाएँ भी बड़ी संख्या में छतों से ईंट पत्थर चला रहीं थी। डॉक्टर ने बताया कि वहाँ मौजूद एक बुजुर्ग ने आगे आकर उनकी जान बचाई और उसके कुछ देर बाद वहाँ पुलिस भी आ गई थी।

इस घटना से सोशल मीडिया पर भी आक्रोश देखा जा रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को लेकर सख्त रवैया अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ रासुका (NSA) लगाने और नुकसान की भरपाई आरोपितों की संपत्ति से करने का आदेश जारी कर दिया है।

जिसके बाद हरकत में आई पुलिस ने उपद्रवियों की पहचान करते हुए दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें एक दर्जन महिलाएँ भी शामिल हैं। महिलाओं ने भी छतों से ईंट पत्थर बरसाए थे। जिसकी पुष्टि ड्रोन कैमरे से भी हो रही है।

डॉक्टर के साथ मौजूद मेडिकल स्टाफ ने बताया कि लोगों ने वहाँ जाँच दल को पीटने की पहले से ही तैयारी कर रखी थी। पत्थरबाजी की इस घटना में पुलिस की गाड़ी और एम्बुलेंस आदि को भारी नुकसान पहुँचा है।

उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद में नागफनी इलाके के नवाबपुरा स्थित हाजी नेब वाली मस्जिद के पास सरताज अली रहते थे। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण उनकी मौत हो गई थी। उनके करीबियों को क्वारंटाइन करने के लिए ही बुधवार (अप्रैल 15, 2020) दोपहर डॉक्टर एससी अग्रवाल के नेतृत्व में आठ सदस्यीय टीम हाजी नेब वाली मस्जिद पहुँचे थे। उसी समय उनके दल को हमले का शिकार बनाया गया। फ़िलहाल पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। 

राम से भी बड़ा दुष्ट है मोदी, हम लॉकडाउन तोड़ेंगे: छत्तीसगढ़ CM के पिता का बयान; DD News के पत्रकार का दावा

जहाँ एक तरफ पूरा देश कोरोना वायरस की आपदा से जूझ रहा है, कुछ राजनेता अभी भी अपनी गन्दी राजनीति का दामन थामे ही हुए हैं। इन्हीं में से एक है छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नन्द कुमार बघेल, जिन्होंने पीएम मोदी ही नहीं बल्कि भगवान श्रीराम पर भी भद्दी टिप्पणी की है। एक वरिष्ठ पत्रकार की मानें तो नन्द कुमार बघेल ने सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर ये टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “मोदी राम से भी ज्यादा दुष्ट है।” बाद में अपनी भद्द पिटने के बाद उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट को डिलीट कर दिया।

दूरदर्शन न्यूज़ के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने नन्द कुमार बघेल के उस फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया। इस फेसबुक पोस्ट में नन्द कुमार बघेल ने लिखा है कि वो लॉकडाउन का उल्लंघन करेंगे। उन्हें ‘राष्ट्रीय मतदाता जाग्रति मंच एवं कल्याण समिति’ का अध्यक्ष बताया गया है। इसमें दावा किया गया है कि ‘मोदी कोरोना’ से निपटने के लिए बुद्ध और गाँधी के रास्ते पर चलते हुए छत्तीसगढ़ के 13 स्थानों पर लॉकडाउन का उल्लंघन किया जाएगा।

बकौल इस फेसबुक पोस्ट, समिति ने इसकी सूचना मुख्यमंत्री बघेल को भी दे दी है। इस पोस्ट में लिखा है कि बुद्ध के पंचशील और गाँधी के असहयोग आन्दोलनों के माध्यम से जनता को जागृत किया जाएगा और ‘मोदी कर्फ्यू’ से आज़ादी दिलाई जाएगी। हालाँकि, ऑपइंडिया इस फेसबुक पोस्ट के सत्यता की पुष्टि नहीं करता लेकिन दूरदर्शन न्यूज़ के वरिष्ठ पत्रकार ने इसे ट्विटर पर शेयर किया है और उन्हीं के हवाले से ये दावा किया गया है।

मुंबई अस्पताल के 35 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव: कई निजी अस्पताल बंद, कुल 100 डॉक्टर-नर्स संक्रमण के शिकार

देश में लगातार बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या के बीच महाराष्ट्र कोरोना का मुख्य केन्द्र बनकर उभरा है। भले ही मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता हो, लेकिन इन दिनों कोरोना मरीजों की संख्या प्रदेश में सबसे अधिक है, जो कि तेजी से हर दिन बढ़ती चली जा रही है। एक बार फिर मुंबई के भाटिया अस्पताल में स्टाफ के 10 लोगों को कोरोना पाॉजीटिव पाया गया है।

महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ते मरीजों की संख्या के बीच मुंबई के भाटिया अस्पताल में कोरोना का संकट और गहरा गया है। यहाँ स्टाफ के 10 और सदस्य कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाए गए हैं। इन्हें मिलाकर अब तक अस्पताल के 35 सदस्य कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाए गए हैं। बता दें कि महाराष्ट्र देश में कोरोना वायरस का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार फिलहाल इनका इलाज इसी अस्पताल में किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक इससे पहले मुंबई के भाटिया अस्पताल में तीन मरीज कोरोना वायरस से पॉजिटिव मिले थे। इसके बाद इनके संपर्क में आए डॉक्टरों और नर्सों के कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाए जाने के बाद से प्रशासन ने सभी कर्मचारियों की जाँच शुरू की दी थी। इस बीच अस्पताल के 25 लोग कोरोना से पॉजिटिव पाए गए थे। वहीं का वॉकहार्ट अस्पताल सबसे बड़ा कोरोना केन्द्र बन हुआ है, जहाँ 52 कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

एनबीटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक लगातार मेडिकल स्टाफ और नर्सों के कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद मुंबई के कई बड़े निजी अस्पताल कोरोना के डर से बंद हो चुके हैं। मुंबई में अब तक 100 मेडिकल स्टाफ कोरोना पॉजिटिव हैं, जिनमें से 10 डॉक्टर और 60 से अधिक नर्सें शामिल हैं। वहीं ब्रीच कैंडी अस्पताल में दो और नर्सें कोरोना पॉजिटिव पाई गईं हैं। यहाँ कुछ दिन पहले 180 नर्सों को क्वारंटीन करने के बाद सिर्फ इमर्जेंसी और आईसीयू सेवाएँ दी जा रही थीं।

अगर बात करें तो पूरे महाराष्ट्र की तो स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 178, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 2687 हो गई है। राहत की बात यह है कि प्रदेश में अब तक 259 कोरोना के मरीज ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं। हालांकि पीपीई किट की कमी और अधिक संक्रमित मरीजों के चलते मुंबई में अस्पतालों की स्थिति चिंताजनक हो गई है।

‘कोरोना काफिरों के लिए है, वुज़ू करने वालों को सिर्फ मौत आ सकती हैं, ये बीमारी नहीं’

एक ओर जहाँ तबलीगी जमात का मरकज देश-विदेश में कोरोना वायरस (COVID-19) का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है वहीं यह भी हकीकत है कि समुदाय विशेष ही अभी तक भी इस बात की गंभीरता को मजहबी विश्वासों के सामने छोटा मानकर चल रहा है।

ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है जिसमें पाकिस्तान में मौजूद कुछ लोग कहते सुने जा सकते हैं कि कोरोना सिर्फ काफ़िरों को होता है और वुज़ू करने वालों को इससे डर नहीं लगता।

ट्विटर पर “साउथ चाइना मोर्निंग पोस्ट” (SCMP) ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है- “पाकिस्तान के कुछ लोग सरकार द्वारा मजहबी जमावड़ों को प्रतिबंधित करने को बेकार मानते हुए कह रहे हैं कि COVID-19 वायरस सिर्फ काफिरों को ही संक्रमित कर सकता है।”

इस वीडियो में वकास अहमद कहते हैं- “ये जो बिमारी है, ये इंशा अल्लाह हम सब.. जो भी हैं उनको बिलकुल भी नहीं आएगी, हमारा भरोसा अल्लाह पर है। जो काफिर हैं, वही डरते हैं इससे, उनको इस चीज का ज्यादा खौफ है।”

वीडियो में कुछ तथ्य दिए गए हैं, उनमें बताया गया है कि पाकिस्तान में हजारों लोग मजहबी सामूहिक जमावड़ों के लिए प्रतिबंधों का उलंघन कर रहे हैं। जबकि पकिस्तान की सरकार ने पाँच से ज्यादा लोगों के एक जगह पर रहने पर प्रतिबन्ध लगाया हुआ है। बावजूद इसके, लोग रोजाना मस्जिदों में नमाज पढ़ने के लिए जा रहे हैं।

वीडियो में वकास अहमद आगे कहते हैं- “मैं मास्क और ग्लव्स इसलिए नहीं पहनता क्योंकि मैं अल्लाह की प्रार्थना करता हूँ, मुझे अल्लाह पर भरोसा है। कोई भी शख्स अगर इस बात पर अमल करेगा…हम सब लोगों का इस बात पर यकीन है कि जो शख्स वज़ू कर के घर से आएगा, उसे कभी कोई बिमारी नहीं होगी सिवाए मौत के।”

विडियो में एक अन्य तथ्य में बताया गया है कि पाकिस्तान में 15 अप्रैल तक COVID-19 के संक्रमण से अब तक 5,988 केस सामने आ गए हैं जिनमें से अब तक 107 लोगों की मौत हो चुकी है।

पाकिस्तान में भी 60% से भी ज्यादा कोरोना वायरस का संक्रमण महज मजहबी जमावड़ों में शामिल होने से फैला है। साथ ही मध्य-एशिया के मजहबी कार्यक्रमों से लौटे लोग भी इसके संक्रमण का बड़ा स्रोत हैं। फिर भी सभी तथ्यों को दरकिनार कर जुम्मे की नमाज में बड़ी संख्या में लोग मस्जिद में इकट्ठे होते हैं।

वीडियो में दिखाया गया है कि मजहब के सामने पाकिस्तान के पुलिसकर्मी और सुरक्षा में तैनात लोग कितने बेबस हैं। उनका कहना है क्योंकि यह मजहबी मामला है इस कारण इसके संवेदनशील होने की वजह से लोगों से ज्यादा सख्ती नहीं कर सकते।

पकिस्तान ही नहीं बल्कि भारत में भी मजहबी जुटान प्रशासन के सामने बड़ा सरदर्द बने हुए हैं। लॉकडाउन के दौरान भी निरंतर यह संदेश देना पड़ रहा है कि सोशल डिस्टेंस के द्वारा ही कोरोना के संक्रमण पर अंकुश लगाया जा सकता है।

लेकिन फिर एक विशेष स्रोत का एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो अभी भी मानता है कि कोरोना का कहर सिर्फ काफिरों पर ही बरस सकता है और नमाज पढ़ने वाले इससे सुरक्षित हैं।

निजामुद्दीन के बाद अब बिहार के मरकज ने उड़ाई राज्य सरकार की नींद, नालंदा में जुटे थे 640 जमाती

दिल्ली निजामुद्दीन स्थित मरकज से निकले जमाती अभी तक केन्द्र से लेकर राज्य सरकारों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। इतना ही नहीं देश में अचानक से बढ़ी कोरोना मरीजों की संख्या के पीछे जमातियों का विशेष हाथ रहा है। इसी बीच बिहार से आई एक और खबर ने सरकार की टेंशन को बढ़ा दिया है। दरअसल, बिहार नालन्दा के शेखना मस्जिद में पिछले महीने तबलीगी मरकज का एक सम्मेलन हुआ था, जिसमें करीब 640 लोगों ने हिस्सा लिया था।

दिल्ली निजामुद्दीन के बाद अब बिहार में हुए तबलीगी जमात के सम्मेलन ने अचानक से राज्य सरकार की परेशानियाँ बढ़ा दी हैं। जानकारी के मुताबिक 14 और 15 मार्च को नालंदा जिले के बिहारशरीफ के शेखना मस्जिद में हुए एक जमात में तकरीबन 640 लोगों ने हिस्सा लिया था। इस सूचना के आने के बाद नालंदा और दरभंगा जिला प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए हैं।

मामले की जानकारी देते हुए दरभंगा के एसएसपी बाबू राम ने कहा कि जमात में शामिल दूसरे जिले के लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इसके संबंध में पत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन ने यह कदम उठाया है। साथ ही सभी को मेडिकल सुरक्षा में रखा गया है। यानि कि जमात में शामिल कुछ लोगों को डीएमसीएच के आइसोलेशन वार्ड और कुछ को घर में क्वारंटाइन किया गया है।

जिला प्रशासन के साथ प्रदेश सरकार के लिए राहत की बात यह है कि दरभंगा के जो 12 लोग नालंदा मरकज में शामिल हुए थे, उन सभी को दरभंगा पुलिस ने चिह्नित कर लिया है। साथ ही अब जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ सभी के सैंपल लेकर ऐसे लोगों की तलाश में जुट गया है। जो कहीं न कहीं इन लोगों के संपर्क में आए। वहीं प्रशासन को चिंता है कि अगर इनमें से कुछ लोग कोरोना पॉजीटिव पाए जाते हैं तो यह चेन लंबी भी हो सकती है।

न्यूज 18 हिंदी की खबर के मुताबिक नालंदा समाहरणालय बिहारशरीफ जिला गोपनीय शाखा से 12 अप्रैल को एक पत्र प्रधान सचिव आपदा प्रबंधक विभाग को जारी किया गया था। पत्र के माध्यम से बताया गया था कि बिहार शरीफ स्थित शेखना मस्जिद में 14 से 15 मार्च तक तबलीगी मरकज का एक सम्मेलन हुआ था, जिसमें बिहार के करीब 640 लोगों ने हिस्सा लिया था। इसमें 13 व्यक्ति नालंदा जिले से, जबकि शेष सभी बिहार के अन्य जिलों के शामिल हुए थे।

वहीं आपदा प्रबंधन को भेजे गए पत्र में यह भी चिंता जताई गई थी कि कुछ व्यक्ति इसमें झारखंड के भी हो सकते हैं। दरअसल, नालंदा मरकज में हिस्सा लेने वाले नवादा जिले के एक व्यक्ति के संपर्क में आने वाला एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया है। गौरतलब है कि बिहार में तेजी से कोरोना के नए मामले सामने आ रहे हैं। इसी के साथ बिहार में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 70 हो गई है।

मदरसों में भेंड़-बकरियों की तरह रखे गए हैं बच्चे: बाल आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, होगी कार्रवाई

‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ ने मदरसों में बच्चों को रखे जाने पर स्वतः संज्ञान लिया है। बता दें कि ‘इंडिया टुडे’ ने एक ख़बर चलाई थी, जिसमें दिखाया गया था कि मदरसों में छात्रों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन करते हुए रखा गया है और सरकारी दिशानिर्देशों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। एनसीपीसीआर ने रिपोर्ट के हवाले से माना है कि उन मदरसों में लॉकडाउन का खुला उल्लंघन हो रहा है। ये मामला मदनपुर खादर एक्सटेंशन स्थित दारुल उल-उलूम उस्मानिया और मदरसा इस्लाहुल मूमिनीन का है।

एनसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन्स का जिक्र करते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। एनसीपीसीआर ने सभी हॉस्टलों, मदरसों और स्कूलों के लिए पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी थी। साथ ही कहा कि उन लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी एक्शन लिया जाएगा, जो बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जल्द से जल्द कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है। जल्द ही उन मरदसा के संचालकों से पूछताछ होगी।

मदरसों में बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ पर NCPCR ने लिया एक्शन

दरअसल, ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकारों ने पाया था कि दिल्ली के मदरसों में छात्रों को कमरों में भेंड़-बकरियों की तरह रखा जा रहा है। मदरसा के शिक्षकों ने बताया कि वे छात्रों को छिपा के रखते हैं, ताकि पुलिस उन्हें लेकर नहीं जाए। उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों को घूस तक देने का दावा किया, ताकि मदरसा के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न हो। ‘इंडिया टुडे’ ने अपनी इस इन्वेस्टीगेशन को ‘मदरसा हॉटस्पॉट्स’ नाम दिया।

पाया गया था कि एक मदरसा में तो 18 बच्चे हैं और पड़ोस में 6 को छिपाया गया है। बता दें कि बच्चों और बुजुर्गों में कोरोना के संक्रमण का ख़तरा तुलनात्मक रूप से ज्यादा है। ऐसे में छात्रों के साथ इस तरह का ख़तरनाक खेल खेलने को लेकर आवाज़ नहीं उठाई जानी चाहिए? मदरसा के लोग निजामुद्दीन के मरकज़ से जुड़े हुए हैं, जो तबलीगी जमात का मुख्यालय है। बच्चों को भी मरकज़ ले जाया जाता है। ज्ञात हो कि इसी एक इमारत में हुए मजहबी कार्यक्रमों के कारण देश भर में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या में अचानक से इजाफा हो गया है।

TOI की कश्मीरी पत्रकार सामिया लतीफ ने PM मोदी-शाह को कोरोना होने की माँगी दुआ, फिर किया डिलीट ट्विटर अकाउंट

कोरोना वायरस से उपजी आपदा के बीच जब लोग एक-दूसरे के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, ऐसे में धूर्त मीडिया वर्ग के कई पत्रकार नकारात्मकता और घृणा फैलाने में तन-मन-धन से जुटे हुए हैं। कुछ ऐसा ही काम ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की कश्मीरी पत्रकार सामिया लतीफ ने किया। लतीफ ने दुआ माँगी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाएँ। कोरोना के कारण दुनिया में 20 लाख से भी अधिक लोग पीड़ित हैं और 1.3 लाख लोगों की मौत हो चुकी है।

तथाकथित पत्रकार ने ऐसी असंवेदनशीलता ऐसे समय में दिखाई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देश को कोरोना के प्रभाव से बचाने की कोशिश में लगे हैं और इसके लिए बैठकें कर रहे हैं, लगातार चीजों की समीक्षा कर रहे हैं। दरअसल, गुजरात के कॉन्ग्रेस विधायक इमरान खेड़वाला कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इससे कुछ देर पहले ही उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी के साथ एक बैठक में हिस्सा लिया था। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की असिस्टेंट एडिटर लतीफ़ ने इस ख़बर को ट्विटर पर शेयर किया।

इसके साथ ही सामिया लतीफ ने लिखा कि विधायक इमरान पीएम मोदी या अमित शाह से क्यों नहीं मिले। लतीफ़ का इशारा था कि पीएम मोदी और एचएम शाह को भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो जाए। वो चाहती हैं कि कोई कोरोना पॉजिटिव मरीज मोदी-शाह से मिले, ताकि वो इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ जाएँ। इमरान अहमदाबाद स्थित जमालपुर-खड़िया क्षेत्र से विधायक हैं। वो सीएम रुपानी के घर पर उनके साथ हुई बैठक में शामिल थे। लतीफ़ ने इस ट्वीट के वायरल होने के बाद अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर लिया।

सामिया लतीफ़ ने डिलीट किया अपना ट्विटर अकाउंट

वैसे ये पहली बार नहीं है जब किसी लिबरल-सेक्युलर गैंग के पत्रकार ने पीएम मोदी के लिए ऐसी दुआ माँगी हो। इनका पुराना इतिहास ही ऐसा ही रहा है। अभी 1 महीने पहले पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी पीएम मोदी को कोरोना संक्रमण होने के लिए दुआ की थी। एनडीटीवी की पत्रकार रहीं सुनेत्रा चौधरी ने कहा था कि पीएम मोदी को स्वाइन फ्लू हो जाए तो ये ख़बर उन्हें काफ़ी ख़ुशी देगी। ‘द क्विंट’ के सुप्रतीक चटर्जी ने भी पीएम मोदी के मौत की भविष्यवाणी की थी।

थूकने वाले लोग: अगर हर हिन्दू सबा नकवी वाले लॉजिक से सोचने लगे तो क्या होगा

सबा नकवी ने एक वीडियो शेयर किया और बाकायदा बताया कि वो सिर्फ पत्रकार ही नहीं, बल्कि दिल्ली में बेस रखने वाली पत्रकार हैं। दिल्ली लगा देने से वजन आ जाता है। उसके बाद उन्होंने ऐसी बकैती छाँटी कि दिल्ली से बाहर रहने वाले पत्रकार बाप-बाप करने लगे। ख़ैर, सुश्री नकवी जी ने फरमाया कि उन्होंने कुछ खबरें सुनीं जहाँ समुदाय विशेष के सब्जी वालों को मुहल्लों में लोग घुसने नहीं दे रहे।

फिर सबा जी, नामानुसार बहने लगीं, कभी इधर, कभी उधर। सबा मतलब ‘सुबह की हवा’। सुबह की ताजी हवा वाले नाम के साथ ऐसी बासी बात बताई सब जी ने कि क्या कहा जाए- ‘बताओ तुम्हें पता है सिप्ला कम्पनी का मलिक कौन है?’, ‘शाहरुख खान का नाम सुना है’, ‘अजीम प्रेम जी का नाम सुना है’, ‘ताजमहल वाष्पीकृत हो जाए?’, ‘हम चले जाएँ यहाँ से?’।

फिर मैं सोचने लगा कि इतना ज़हर अगर किसी हिन्दू के भीतर आ जाए, और ऐसा शातिरपन भी कि एक रैंडम सी बात को पूरे भारत में लागू होने वाले उदाहरण की तरह बता कर, चार मुस्लिमों और ताजमहल का नाम गिनवा कर, विक्टिम कार्ड स्वाइप करने लगे, तो कैसा दिखेगा?

सबा नकवी के वीडियो में एक फेक न्यूज का भी जिक्र है ताकि बातों को वजन मिले। अंग्रेजी में बोलती हैं तो वजन वैसे ही बढ़ जाता है। दिल्ली में बेस्ड हैं, तो दस-बारह किलो उधर का बन जाएगा! सबा नकवी के लहजे से अगर कोई हिन्दू वीडियो बनाएगा तो कैसा लगेगा?

अगर सबा नकवी के पास एक-दो अपुष्ट खबरें हैं कि किसी मुहल्ले में हिन्दुओं ने समुदाय विशेष के सब्जीवाले को घुसने नहीं दिया, तो मेरे पास तो कई खबरें हैं जिसमें शेरू मियाँ के थूक लगा कर फल बेचने से ले कर, किसी मुस्लिम द्वारा तरबूज में थूक लगा कर काटने की खबर है, किसी जावेद का खुद को संजय बता कर थूक लगा कर सब्जी बेचना आदि शामिल है।

एक हिन्दू अगर सबा नकवी वाले हिसाब से सोचेगा तो…

नमस्कार! मैं नंदन हूँ, छोटे से गाँव गोपालपुर में रहता हूँ। कई दिनों से खबरें सुन रहा हूँ कि विशेष मजहब के लोग सब्जियों और फलों में थूक-थूक कर बेच रहे हैं। मैंने कई वीडियो भी देखे हैं जिसमें कहीं वो चाकू पर थूक कर तरबूज काट रहा है, तो कहीं अपना नाम संजय बता कर हिन्दुओं के मुहल्ले में जाता है, सब्जी पर थूकता है और बेचता है। जबकि उसका असली नाम जावेद है।

इस समुदाय को हिन्दुओं से इतनी घृणा क्यों है? और क्या वो इतने मूर्ख हैं कि वो सोचते हैं कोई बाद में उनकी थूकी सब्जी ले जाएगा और बिना धोए बना लेगा? लेकिन, कोरोना के समय में अगर समुदाय विशेष वाले फलों और सब्जियों पर थूक कर बेच रहे हैं, तो हमारा कर्तव्य बनता है कि न सिर्फ स्वयं को, बल्कि पूरे समाज को ऐसे लोगों की मजहबी घृणा के बारे में सूचित करें, और उन्हें मरने से बचाएँ।

इस महामारी के फैलने का एक तरीका ‘थूक’ भी है। समुदाय विशेष के लोग ये जानते हैं, और वो हिन्दू मुहल्ले में सब्जी बेचने आते हैं, और थूक कर बेचते हैं। इनकी मंशा क्या है? कि हर हिन्दू मुहल्ले में कोरोना एक व्यक्ति से दूसरे तक फैल जाए? हम तो नहीं जानते कि जो बेचने आया है उसमें लक्षण हैं या कल को हो जाएगा, लेकिन वो अपनी तरफ से तो पूरी कोशिश कर रहा है कि अगर एक प्रतिशत भी चान्स है, तो वो थूक कर हिन्दुओं को कोरोना से मार दे।

आप सोचिए कि डॉक्टरों पर कोरोना के मजहबी मरीज थूक रहे हैं। क्या लक्ष्य है इनका? ये चाहते हैं कि कोरोना फैले, सारे हिन्दू मर जाएँ और गजवा-ए-हिन्द का सपना पूरा हो? हिन्दू इलाकों में कोई थूक कर दस रुपए का नोट छोड़ रहा है, कोई वीडियो बना रहा कि ‘ये लोग, मैंने 500 के नोट पर थूक दिया, अब काफिरों को दूँगा’।

क्यों! क्या इस सवाल का कोई जवाब है सिवाय इसके कि हिन्दुओं को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है? क्या ये लोग जानते हैं कि दवाई कि कितनी बड़ी कम्पनियों के मालिक गैर-मुस्लिम हैं? क्या इन्हें पता है कि इन्हीं में से कोई कम्पनी दवाई बनाएगी और उससे ईरान के भी मुस्लिमों का उपचार होगा, अमरीका के भी, भारत के भी और शायद चीन के भी।

क्या भारत का मुस्लिम तब भी ये सोचेगा कि ये दवाई तो हलाल नहीं है क्योंकि इसे बनाने वाली कम्पनी का मालिक, वहाँ काम करने वाले कर्मचारी, वैज्ञानिक आदि गैरमुस्लिम हैं, उसमें दवाई का नाम प्रिंट करने वाला आदमी गैरमुस्लिम है? इतनी घृणा लेकर नफरती अहमद कहाँ जाएगा? आखिर, भारत के गैर मुस्लिमों से इतनी घृणा का क्या कारण है? मैं चैलेंज करता हूँ नफरती लोगों को कि जा कर बड़ी कम्पनियों के नाम देखो, घर में रखी दवाइयाँ देखो, और फिर उसके मालिक का नाम देखो।

और हाँ, किन-किन मंदिरों ने कितने करोड़ का दान दिया है ये भी पता करो। महावीर मंदिर पटना से ले कर तिरुपति बालाजी, सिद्धीविनायक, गोरखनाथ मंदिर, समेत शायद ही कोई ऐसा बड़ा मंदिर होगा जो प्रधानमंत्री के फंड में आर्थिक मदद देने से ले कर अपने इलाके के गरीबों को भोजन नहीं दे रहा। टाटा, अम्बानी, अडानी, महिन्द्रा आदि कम्पिनयों के भी हिन्दू-मुस्लिम होने का पता करोगे?

अक्षय कुमार से भी पूछोगे? नाम तो सुना होगा उसका भी? अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, धोनी, कोहली सबके नाम तो पता होंगे? तुम्हारी घृणा का आहार बन कर धरती से गायब हो जाएँ ये लोग? गुलजार, प्रसून जोशी गीत लिखना छोड़ दें? अमित त्रिवेदी, शंकर महादेवन से ले कर हर हिन्दू संगीतकार के संगीत को धरती से गायब कर दिया जाए?

भारत के मंदिर देखें हैं? उनकी स्थापत्य कला देखी है जिसमें दस-दस ताजमहल खो जाएँगे? बम मार दें सारे मंदिरों पर क्योंकि वो तुम्हें पसंद नहीं और ले-दे कर हर बार ताज महल का नाम ले लेते हो! बलात्कारी मुगलों, लुटेरे मुगलों, हत्यारे मुगलों द्वारा बनाई गई चीजों को छोड़ कर बाकी सब में डायनामाइट बाँध दें, ताकि तुम्हारे हिन्दू-घृणा में डीपफ्राइ किए कलेजे को ठंढक मिले?

चाहते क्या हो? गायब हो जाएँ हम लोग धरती से?

जब नेगेटिव में होगी विश्व की आर्थिक विकास दर, तब पॉजिटिव में बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था: IMF का विश्लेषण

कोरोना वायरस के कारण पूरे विश्व की अर्थवयवस्था पर भी जबरदस्त मार पड़ी है। न सिर्फ़ विकाशशील देशों, बल्कि सभी संसाधनों से युक्त विकसित देशों की अर्थवयवस्था भी लगातार नीचे गिर रही है और आशंका है कि ‘पोस्ट कोरोना वर्ल्ड’ में डिमांड काफ़ी कम हो जाएगा, जिससे उत्पादन में भी कमी आएगी और इस तरह से मार्किट में रुपए का प्रवाह धीमा हो जाएगा क्योंकि जिनके पास धन होगा, वो भी ख़र्च करने से हिचकेंगे। अब ‘इंटरनेशनल मोनेटरी फण्ड (IMF)’ का नया आउटलुक आया है, जिसमें भारत बाकी देशों से बेहतर प्रदर्शन करता दिख रहा है।

आईएमएफ के आँकड़ों के अनुसार, 2020 में पूरे विश्व की अर्थवयवस्था -3% की रफ़्तार से बढ़ेगी, यानी वैश्विक जीडीपी में गिरावट आएगी। फिलहाल विश्व की अर्थव्यवस्था 2.9% की रफ़्तार से आगे बढ़ रही है। भारत की बात करें तो इसकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 1.9% की रफ़्तार से बढ़ेगी, जो 2019 में 4.2% थी। अगर भारत और चीन की तुलना करें तो चीन 2020 में 1.2% की आर्थिक विकास दर के साथ भारत से पीछे छूट जाएगा। इस दौरान अमेरिका (-5.9%), जर्मनी (-7%), फ़्रांस (-7.2%) और इटली (-9.1%) जैसे देशों की अर्थवयवस्था में गिरावट दर्ज की जाएगी, ऐसा आईएमएफ का मानना है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और ‘स्वदेशी जागरण मंच’ के सदस्य डॉक्टर फूल चंद ने कहा कि 2020 में भारत की अर्थवयवस्था पॉजिटिव रफ़्तार से बढ़ेगी, इसका श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है क्योंकि जिस तरह से उन्होंने कोरोना आपदा को हैंडल किया है, वो काबिले तारीफ़ है। उन्होंने कहा कि पहले जो ‘ग्रेट रिसेशन’ आया था, उसके बाद से पहली बार अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ नेगेटिव विकास दर का सामना करेंगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था 2021 में पटरी पर लौटेगी, जब इसका आर्थिक विकास दर 5.8% होने की संभावना है। अगर भारत के टक्कर के विकासशील देशों की बात करें तो ब्राजील (-5.3%) और दक्षिण अफ्रीका (-5.8%) की आर्थिक विकास दर भी नेगेटिव में रहेगी।

IMF की वेबसाइट के आधिकारिक आँकड़े

बता दें कि इससे पहले 1930 के ‘ग्रेट डिप्रेशन’ के दौरान विश्व की इकॉनमी को इस तरह के संकट का सामना करना पड़ा था। भारत कई वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर करेगा, बावजूद इसके कि यहाँ की दर पहले से ही कई कारणों से धीमी हो रही थी और पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी व अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर का भी इस पर असर पड़ रहा था। फिलहाल कोरोना के कारण आर्थिक विकास दर का गिरना तय है।

विनय दुबे की कुंडली: पवार, बनारस, ठाकरे सबसे लिंक, NCP के टिकट पर लड़ चुका है चुनाव

मुंबई के बांद्रा में मस्जिद के पास मंगलवार को लॉकडाउन के बावजूद सैकड़ों लोग जुट गए। इस मामले में मुंबई पुलिस ने विनय दुबे को गिरफ्तार किया है। उस पर प्रवासी श्रमिकों को उकसाने का आरोप है। अब दुबे के तार शरद पवार की एनसीपी से जुड़ रहे हैं। वह महाराष्ट्र के गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख तथा मनसे प्रमुख राज ठाकरे का करीबी बताया जाता है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एनसीपी के टिकट पर उसने 2012 में विधानसभा का चुनाव वाराणसी उत्तरी सीट से लड़ा था। चुनाव के बाद वह पार्टी से अलग हो गया, लेकिन कई नेताओं से करीबी बरकरार रही। 2019 में उसने लोकसभा का चुनाव मुंबई से ही निर्दलीय लड़ा था। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाला दुबे उत्तर भारतीय महापंचायत नाम से एक संगठन चलाता है। फेसबुक पर उसके 2,18,573 फॉलोवर्स है।

मूल रूप से दुबे यूपी के भदोही का रहने वाला है। उसके पिता जटाशंकर दुबे ऑटो चलाते हैं। हाल ही में कोरोना से लड़ने के लिए उन्होंने अपनी बचत में से 25 हजार रुपया मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया था। इसका चेक उन्होंने देशमुख को सौंपा था। राज्य के गृह मंत्री देशमुख ने 10 अप्रैल को बकायदा ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी।

13 अप्रैल को दुबे ने प्रवासी श्रमिकों के घर लौटने के लिए ट्रेन सेवा बहाल नहीं करने पर सरकार को चेताया था। उसने पोस्ट कर श्रमिकों को घर ले जाने के लिए 40 बसों की व्यवस्था करने का भी दावा किया था। इससे पहले एक वीडियो शेयर करते हुए उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लॉकडाउन को बगैर किसी यो​जना के लागू करने को लेकर आलोचना की थी। 11 अप्रैल को पोस्ट कर उसने कहा कि महाराष्ट्र में फॅंसे उत्तर भारतीय मजदूरों को उनके गॉंव तक पहुॅंचाने में उसे जेल भी जाना पड़े तो पीछे नहीं हटेगा। उसने 18 अप्रैल को श्रमिकों से फुट मार्च की अपील कर रखी थी।

अमर उजाला को विनय के परिवार ने बताया है कि वह राजनीति का शिकार हो रहा है। बांद्रा की इस भीड़ से उसका कोई लेना-देना नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, विनय के पिता जटाशंकर से जब संपर्क साधने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन अपने दूसरे बेटे निर्भय को दे दिया। निर्भय ने कहा कि हमारे भाई को राजनीति का शिकार बना दिया गया है।

विनय के छोटे भाई निर्भय के अनुसार, उन्होंने (विनय दुबे) जो पोस्ट की थी, उसमें 18 अप्रैल को पैदल निकलने की बात कही थी, जबकि यह भीड़ 15 को ही एकत्र हो गई। इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। बाद की पोस्ट को भी अगर देखा जाए तो वह पोस्ट शाम के चार बजे की गई है, जबकि बांद्रा में भीड़ सुबह 10 बजे से ही लगनी शुरू हो गई थी। उनके साथ राजनीति हो रही है।

पुलिस को धमकियाँ देने के अलावा विनय ने फेसबुक पर वीडियो डालकर महाराष्ट्र के प्रवासियों को सड़कों पर आने के लिए। पूरे देश के प्रवासियों से लॉकडाउन को खारिज करने की अपील की। उसने वीडियो में बार-बार दोहराया है कि भूख से मरने से अच्छा है कि कोरोना से मर जाया जाए।

अपने वीडियोज़ में उसने जहाँ केंद्र व राज्य सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने की बात कही है, वहीं बालासाहेब ठाकरे के प्रति सम्मान भी जताया है। उसने महाराष्ट्र सीएम को अपनी माँगों पर ध्यान देने की नसीहत दी। उसने कहा कि अगर बालासाहेब ठाकरे जिंदा होते तो शिवसेना के लोग उनकी बातों पर ध्यान देते।

सोशल मीडिया पर जब हमने विनय की प्रोफाइल खँगाली तो राज ठाकरे के साथ भी उसकी तस्वीरें मिलीं। फेसबुक पर वह लगातार बीजेपी और पीएम मोदी के खिलाफ जहर भी उगलता रहा है।

ऐसे में इस बात का जवाब विनय दुबे ही बेहतर दे सकता है कि उसने राजनीतिक हसरत पूरा करने के लिए ये सब किया या फिर किसी के इशारे पर वह ऐसा कर रहा था।