आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान देने वाले अभिनेता एजाज खान का शिवसेना ने समर्थन किया है। जहाँ एक तरफ लोग उनकी हरकतों की आतंकियों से तुलना करते हुए उनकी गिरफ़्तारी की माँग कर रहे हैं, महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी ने उनका समर्थन कर के ये जता दिया है कि राज्य में अब ऐसे बयान देने वालों को सत्ता का साथ प्राप्त है। शिवसेना ‘युवा सेना’ की कोर कमिटी के सदस्य राहुल कनाल ने एजाज खान के समर्थन में ट्वीट किया है। कनाल बीएमसी की एजुकेशन कमिटी के भी सदस्य हैं।
एजाज ख़ान को ‘भाई’ कह कर सम्बोधित करते हुए कनाल ने लिखा कि आपको और शक्ति मिले। साथ ही कनाल ने लिखा कि सच्चाई के साथ रहने वाले का कुछ ग़लत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एजाज ख़ान यूँ ही चमकते रहें। वहीं सोशल मीडिया पर एजाज की गिरफ़्तारी की माँग करने वाले लोगों का मखौल उड़ाते हुए कनाल ने कहा कि एजाज ख़ान ने सच्चाई और अच्छे की तारीफ़ की है, इसीलिए ये नाराज़ हैं। कनाल ने आगे लिखा कि एजाज ने कुछ ग़लत नहीं किया है।
कनाल ने एजाज की हरकतों को लेकर ख़बर प्रकाशित करने वालों को ‘भक्त मीडिया’ करार दिया। कनाल ने ये सब तब किया, जब एजाज ख़ान एक समय में शिवसेना के कट्टर आलोचक रहे थे। उन्होंने शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत को ‘कुत्ता’ कह कर सम्बोधित किया था। कनाल से लोगों से पूछा कि क्या वो एजाज ख़ान द्वारा पूर्व में शिवसेना और पार्टी के नेताओं के बारे में कहे आपत्तिजनक बातों का भी समर्थन करते हैं?
More power to you my brother @AjazkhanActor sachai ke saath hamesha rehnewale ka kuch galat nahi hoga… keep shining and Satyameva Jayate… aapne sachai ke aur achai ki taarif ki Isliye yeh naaraz hai… Jai Hind !!! Jai Maharashtra !!!#BhaktMediaVSAjazKhan
ये पूरा मामला एजाज ख़ान के एक फेसबुक लाइव वीडियो से जुड़ा हुआ है। इसमें एजाज ने दुआ की थी कि जो भी लोग तबलीगी जमात की हरकतों की निंदा कर रहे हैं, उन्हें कोरोना हो जाए। उन्होंने दावा किया था कि एक चींटी के मर जाने पर भी समुदाय विशेष को जिम्मेदार बता दिया जाता है। एजाज ने कहा था कि वो सीएम उद्धव ठाकरे पर भरोसा करते हैं।
एजाज ख़ान ने अक्टूबर 2019 में संजय राउत को अपशब्द कहे थे
एजाज खान विवादित क्यों?
ट्विटर पर काफ़ी देर तक ‘अरेस्ट एजाज़ ख़ान’ नंबर एक पर ट्रेंड होता रहा। एजाज ने आरोप लगाया था कि कोरोना से ध्यान हटाने के लिए इस पूरे मामले को जमात से जोड़ा जा रहा है। इससे पहले अपनी ऐसी ही हरकतों के कारण एजाज खान जेल भी जा चुका है, जिसके बाद वो लँगड़ाते हुए निकला था। ताज़ा वीडियो में एजाज ने कहा था कि एजाज खान ने ना सिर्फ पीएम मोदी को समुदाय विशेष के खिलाफ पूर्वग्रह से ग्रसित होने का आरोपित बताया बल्कि रजत शर्मा, सुधीर चौधरी, अर्नब गोस्वामी जैसे पत्रकारों को गाली देते हुए कहा कि उनको, उनके परिवार को और उनकी पूरी टीम को कोरोना वायरस हो जाए।
आईएसआईएस की मदद करने की कोशिश और हमले की इच्छा व्यक्त करने के मामले में एक पाकिस्तानी डॉक्टर अमेरिका में गिरफ्तार किया गया। अमेरिका के मिनेसोटा जिला अटॉर्नी एरिका मैक्डोनल्ड और राष्ट्रीय सुरक्षा सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन डेमर्स ने जानकारी दी कि मोहम्मद मसूद (28) आईएसआईएस के प्रति वफादार है। जनवरी और मार्च के बीच मसूद ने कई बयान दिए और आतंकवादी समूह के लिए लड़ने के लिए पाकिस्तानी डॉक्टर अमेरिका से सीरिया जाने की भी इच्छा जता चुका था।
अधिकारियों ने बताया कि मसूद ने अमेरिका में ‘लोन वुल्फ’ (मतलब अकेले ही आतंकी घटना को अंजाम देना) आतंकवादी हमले करने की भी मंशा जताई थी। मसूद को मिनियापोलिस-सेंट पॉल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। मसूद पाकिस्तान का एक लाइसेंसधारी चिकित्सक है और वह एच1 बी वीजा के तहत मिनेसोटा में एक मेडिकल क्लीनिक के लिए अनुसंधान समन्वयक के तौर पर भी काम कर चुका है।
FBI ने जनवरी 2020 में एक जाँच शुरू की। यह एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (SMP) यूजर ‘BB’ द्वारा आईएसआईएस को सामग्री व समर्थन प्रदान करने की योजना बनाने से संबंधित खोजबीन थी। यूजर BB ने आईएसआईएस ग्रुप और उसके नेता के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए हिजड़ा (माइग्रेशन) बनाने में सहायता का अनुरोध किया था। बाद में जाँच के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि ‘BB’ नाम का यूजर कोई और नहीं बल्कि डॉक्टर मसूद ही था।
पाकिस्तानी डॉक्टर अमेरिका में ऐसे फँसा
अभियोजकों का कहना है कि अदालत के हलफनामे में दिए गए तथ्य, दो विश्वसनीय गोपनीय ह्यूमन सोर्स द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर आधारित हैं। जिनकी पहचान गुप्त रखने के लिए “CHS-1” और “CHS-2” के रूप में संदर्भित किया गया है। BB इन दोनों गवाहों CHS-1 और CHS-2 को ISIS का सदस्य मानता था। दोनों गवाहों द्वारा दी गई जानकारी में कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग और एफबीआई के विशेष एजेंटों द्वारा की कई समीक्षाएँ शामिल हैं। इसके अलावा BB के अन्य लोगों के साथ की गई बातचीत के कंप्यूटर रिकॉर्ड भी हैं।
24 जनवरी 2020 को, BB ने CHS-1 से संपर्क किया और CHS-1 के साथ खिलाफत (इस्लामी खिलाफत) और अल-दावला अल-इस्लामिया (इस्लामिक राज्य) पर चर्चा की। BB ने CHS-1 को बताया कि वो हिजड़ा इसलिए बनाना चाहता है ताकि उसे काफिरों के सामने झूठमूठ के हँसने से आजादी मिले। और वो ऐसा सिर्फ इसलिए करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो।
बीबी ने आईएसआईएस और उसके नेता के प्रति निष्ठा या ‘बयात’ (निष्ठा की शपथ) की शपथ ली और संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ‘लोन वुल्फ’ हमलों को अंजाम देकर सीरिया की यात्रा करने और आईएसआईएस के लिए लड़ने की अपनी इच्छा को कबूल किया।
मसूद की गिरफ्तारी से पहले बीबी की “CHS-1” और “CHS-2” के साथ कई बार बातें हुईं। BB का मानना था कि “CHS-1” और “CHS-2” दोनों आईएसआईएस के सदस्य थे, जो उसकी सीरिया की यात्रा को सुविधाजनक बनाने में मदद करेंगे। रिकॉर्डिंग में BB उन दोनों को ‘भाइयों’ के रूप में संदर्भित करता है। उसने कहा कि वो मुजाहिदीन की मदद करना चाहता है। BB ने कहा था, “मेरे जैसे इंसान को कहीं और नहीं बल्कि अग्रिम पंक्ति में होना चाहिए।” BB ने CHS-1 को समझाया कि वह हिजड़ा बनाना चाहता था क्योंकि वह कफ़र (काफिर) पर मुस्कुराने से नफरत करता है, ताकि उन्हें शक न हो। बातचीत के दौरान वह आत्मघाती ड्रोन बनाने की भी बात कहता है।
25 जनवरी 2020 को मसूद (BB) के साथ एक बातचीत में CHS-1 ने मसूद से कहा, “मैं भाइयों से बात करूँगा और मैं हिजड़ा प्रक्रिया अखी (भाई या मेरा भाई, दो मुस्लिम पुरुषों के बीच संबंध का एक शब्द) पर काम करना शुरू कर दूँगा।” मसूद ने इस पर सहमति जताते हुए कहा, “ठीक है इंशाअल्लाह।” इसके बाद BB ने CHS-1 से पूछा कि क्या “भाइयों ने उसके लिए यात्रा की कोई व्यवस्था की है।” मसूद बिना किसी शक के हिजड़ा बनाना चाहता था और अमेरिकी अधिकारियों से अपने असली इरादों को छिपा रहा था।
इस तरह बनाई गई थी योजना
मसूद ने आगे बताया कि उसे ISIS में शामिल होने के लिए हथियारों के प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही उसने छोटे ड्रोन के उपयोग पर चर्चा की, जिसे ऑनलाइन खरीदा जा सकता है और इसे सीरिया या संयुक्त राज्य अमेरिका में उपयोग के लिए ‘इत्तिशादी’ (शहीद या आत्महत्या) ड्रोन में तब्दील किया जा सकता है।
वह चाहता था कि उसका अंतिम गंतव्य सीरिया हो, क्योंकि उसका मानना था, “क़ियामह (फैसले का दिन) बहुत करीब हो सकता है… और इंशाअल्लाह मैं उस सेना का हिस्सा बनना चाहता हूँ जो डबिक या अमाक में रम से मिलती है। इंशाअल्लाह… क्योंकि अगर आप जिहाद नहीं करते हैं और जिहाद करने का इरादा नहीं रखते हैं तो आप निफ़ाक (पाखंड) की डाल पर मर जाते हैं।” बता दें कि डबिक और अमाक एक लड़ाई है, जो जिहादी विचारधारा में अंतिम समय से पहले होती है।
“मैं मारना और मरना चाहता हूँ”
CHS-1 ने मसूद से कहा, “आप हिजड़ा अखी को दावला करने जा रहे हैं और आपको लोगों को मारना पड़ सकता है और यह आपके और आपके ईमान के लिए महत्वपूर्ण क्षण है। इसलिए आपको यह अखी करना पड़ सकता है और मैं नहीं चाहता कि आप यह सोचें कि अखी ने आपकी कुछ ऐसी मदद की, जिसके बारे में आप निश्चित नहीं हैं।” मसूद ने इसका जवाब देते हुए कहा, “अखी”, “मैं मारना और मरना चाहता हूँ… मारना और मरना चाहता हूँ, बार-बार चाहता हूँ। रसूल अल्लाह सास ने भी यही कामना की है (अल्लाह के दूत की यही इच्छा है) यहाँ तक कि अल्लाह ने कहा कि वाल्का यासिमुका मिन नाज़ (और अल्लाह तुम लोगों की रक्षा करेगा)।”
CHS-1 से बातचीत के दौरान ही उसने अमेरिका में ‘लोन वुल्फ’ हमले का भी जिक्र किया। साथ ही उसने यह भी जानने की कोशिश की कि आईएसआईएस में विदेशी लड़ाकों की भर्ती किस तरह से की जाती है। FBI ने बताया कि मसूद, पॉल इंटरनेशनल एयरपोर्ट (MSP) से लॉस एंजिल्स के लिए उड़ान भरने से पहले वह एक व्यक्ति से मिलने जा रहा था, जो संभवतः सीरिया में आईएसआईएस क्षेत्र में कार्गो जहाज से यात्रा करने में मदद कर सकता था।
लॉकडाउन में आदिवासियों और गरीबों से नक्सली माँग रहे राशन! सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन वामपंथी आतंकियों ने हमेशा सर्वहारा के नाम पर ऐसे ही घटिया काम किए हैं। दरअसल लॉकडाउन के चलते भूखे घूम रहे नक्सली आदिवासियों के घरों से राशन और रुपए माँग रहे हैं। इतना ही नहीं राशन नहीं देने पर वह घरों में लूटपाट भी कर रहे हैं और परिवार के लोगों के साथ मारपीट भी कर रहे हैं। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस ने गाँव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
दरअसल लॉकडाउन के बीच राशन नहीं होने से नक्सलियों के खाने के लाले पड़ गए हैं। इसके बाद वह हथियारों के साथ गाँव में भूखे घूम-घूमकर आदिवासियों के घरों से राशन के साथ पाँच सौ रुपए भी माँग कर रहे हैं। आदिवासियों द्वारा राशन और रुपया नहीं देने पर उनके घर में हथियारों के बल पर लूटपाट की जा रही है और फिर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट भी की जा रही है।
इसे लेकर ग्रामीण ज्यादा बोलने काे तैयार नहीं हैं, लेकिन इसके बाद भी कुछ शिकायतें पुलिस के पास आई हैं। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। साथ ही छत्तीसगढ़ से लगे मध्य प्रदेश बॉर्डर पर पुलिस नजर बनाए हुए है। गाँव में पुलिस की सुरक्षा को बढ़ता देख नक्सली परेशान हैं और भूखे होने के कारण उनकी टोलियों में हड़कंप मचा हुआ है।
दरअसल कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान आदिवासी लोगों को राज्य सरकार दो माह का राशन एक साथ दे रही है। इसका मकसद यह है कि आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में लोगों को परेशानी नहीं हो। ग्रामीणों को मिलने वाले दो महीने के इसी राशन को नक्सली दो हिस्सो में बाँट रहे हैं। एक हिस्सा अपने लिए और दूसरा ग्रामीणों काे दे रहे हैं। बात नहीं मानने पर ग्रामीणों से मारपीट की जा रही है।
बालाघाट एसपी अभिषेक तिवारी ने बताया कि लगातार ये सूचना आ रही थी कि राशन के लिए नक्सली, गाँव वालों को परेशान कर रहे हैं. जिन इलाकों से यह सूचनाएँ मिली हैं, वहाँ सभी जगह सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस की सख्ती की वजह से अब इस तरीके की शिकायत कम हो गई हैं। जिन ग्रामीण इलाकों में राशन की कमी है, वहाँ पर पुलिस की मदद से राशन गाँव वालों तक पहुँचाया भी जा रहा है।
खबरों के मुताबिक छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद नक्सली मध्य प्रदेश को अपनी पनाहगार बना रहे हैं। नक्सली संगठन छत्तीसगढ़ अक्सर पेंच-कान्हा कॉरीडोर से बालाघाट में प्रवेश कर मंडला-अमर कंटक की ओर आते हैं। बालाघाट के बैहर और मंडला के बिछिया-मवई तहसील में ग्रामीणों ने पुलिस को भी संदिग्ध लोगों को देखे जाने की सूचना कई बार दी है।
देश में भले ही लगातार कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशवासियों को राहत भरी खबर दी है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा है कि अन्य बड़े देशों की तुलना में भारत में 80 प्रतिशत मरीज ठीक हो रहे हैं। मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 24 घंटे में देश में 1007 नए कोरोना के मामले सामने आए हैं और 24 घंटे में 23 लोगों की मौत हुई है, इसी के साथ देश में कोरोना से मौत का आँकड़ा बढ़कर 452 हो गया है।
भारत लगातार कोरोना के खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ रहा है। इस दिशा में सफलता मिलती भी दिख रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने आज देश का हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए कहा कि अन्य बड़े देशों की तुलना में भारत में 80 प्रतिशत मरीज ठीक हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 1,007 नये मामले सामने आए और 23 लोगों की मौत हुई है।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शुक्रवार मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना से जंग लड़ने के लिए हमें हर मोर्चे तैयार रहना होगा। इसीलिए कोशिश की जा रही है कि इसकी वैक्सीन जल्द से जल्द अपने देश में तैयार हो सके। हम बीसीजी, प्लाज्मा थेरेपी, मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज पर काम कर रहे हैं, क्योंकि हमारे लिए एक भी मौत बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि कोरोना वायरस के मामलों में दूसरे देशों की तुलना में भारत की स्थिति बेहतर है।
अग्रवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना के केसों के ग्रोथ फैक्टर में 40 फीसदी की कमी आई है। इतना ही नहीं कोरोना के मामले दोगुने होने की दर में भी पिछले 7 दिनों के अंदर कमी आई है और कोरोना महामारी की चपेट में आए अब तक 13.06 फीसदी लोग रिकवर हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि केंद्र की और से राज्यों को पाँच लाख रैपिट टेस्ट किट दिया जा रहा है, जिससे मात्र 30 मिनट में कोरोना की रिपोर्ट आ जाएगी।
वहीं गृह मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि फसलों की कटाई के लिए लॉकडाउन में छूट मिलेगी। कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसयटी और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों को न्यूनतम स्टाफ के साथ काम करने की अनुमति दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों के लिए जलापूर्ति, बिजली, दूरसंचार से जुड़ी परियोजनाओं को छूट है। इसमें भारतीय डाक सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के विभिन्न हिस्सों में मोबाइल पोस्ट ऑफिस काम कर रहे हैं।
बात करें पूरे भारत की तो देश में अब तक कोरोना मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 11616, इससे मरने वालों की संख्या 452 हो गई है। राहत की बात यह कि इनमें से 1766 मरीज ऐसे हैं जो कि अस्पतालों से ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं। वहीं देश में कोरोना वायरस से सबसे अधिक मौतें 194 लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई हैं। यहाँ अब इस महामारी से पीड़ितों की संख्या 3205 हो गई है।
बिहार से एक के बाद एक कोरोना योद्धाओं पर हमले की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ इसी तरह बिहार के दरभंगा से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक गाँव में सर्वे के लिए गई कुछ आशा कार्यकर्ताओं की टीम पर समुदाय विशेष के लोगों ने हमला कर दिया। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने पहले तो आशा कार्यकर्ताओं के हाथों में लगे कागजों को फाड़ा और फिर उनके कपड़े भी खींचने की कोशिश की। हालाँकि, पुलिस ने एक आरोपित को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया।
दरभंगा में स्वास्थ्यकर्मी महिलाओं से बलात्कार की कोशिश, अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा.. pic.twitter.com/l5NxKqyKi9
जानकारी के मुताबिक दरभंगा भालपट्टी के ओपी गाँव में शुक्रवार को कोविड-19 का सर्वे करने के लिए कुछ आशा कार्यकर्ताएँ पहुँची हुई थीं, जो कि अपना सर्वे करते हुए पाँच घरों के बाद छटे घर में सर्वे कर ही रही थीं कि अचानक से घर के बाहर से आए एक अल्पसंख्यक समुदाय के युवक ने आशा कार्यकर्ताओं के हाथ से कागजों को छीनकर और उन्हें फाड़कर फेंक दिया। इस दौरान युवक ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी करते हुए उनके कपड़े खींचने की भी कोशिश की।
इसके बाद घटना की सूचना पर स्थानीय पुलिस के साथ ओपी प्रभारी मोहम्मद मोहसिन खान, सदर बीडीओ रवि सिन्हा और सीओ अरुण कुमार सक्सेना मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मौके से आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इस पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। यहाँ तक कि ग्रामीणों ने आरोपित को पुलिस की गाड़ी से उतारने का भी प्रयास किया।
वहीं सूचना पर कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ गाँव पहुँचे एसडीपीओ अनोज कुमार ने लोगों को समझा बुझाकर शांत किया। इसके बाद आरोपित युवक को गिरफ्तार कर थाना ले जाया गया। वहीं दंगा नियंत्रण बल के जवानों के साथ पुलिस ने गाँव में फ्लैग मार्च किया। मामले में डीएम डॉक्टर त्यागराजन एसएम ने कहा कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। गाँव की स्थिति नियंत्रण में है।
न्यूज 18 की खबर के मुताबिक खंड विकास अधिकारी रवि सिन्हा ने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रवासियों के लिए एक सर्वे चल रहा है। इसी बीच जानकारी मिली थी कि इस गाँव में बाहर से कुछ लोग आए हुए हैं, इसकी जानकारी पर आशा और आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पाँच दिनों तक सर्वे किया जाना है। इसी क्रम में कुछ कार्यकर्ता भालपट्टी पंचायत के वार्ड नंबर 4 में गई थीं तभी हम लोगों को इनके साथ हुई बदसलूकी की सूचना मिली।
बता दें कि बिहार के औरंगाबाद में हेल्थ टीम पर बुधवार को ग्रामीणों ने अचानक हमला बोल दिया था। गोह थाना क्षेत्र के एकौनी गाँव की इस घटना में स्वास्थ्य परीक्षण करने पहुँची टीम के कई कर्मियों को चोटें भी आईं थीं। मोतिहारी में लोगों को जागरूक करने गए अफसरों पर ग्रामीणों ने हमला किया था, इसमें बीडीओ घायल हो गए थे।
वहीं बिहार से लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों पर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार को कहा था कि जो लोग ऐसा करेंगे उनको जेल में सड़ा देंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों का नाम गुंडा पंजी में भी दर्ज होगा और स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी। लेकिन उनका आदेश बिहार में समुदाय विशेष पर कोई असर नहीं दिखा रहा है।
तबलीगी जमात के बाद अब कोरोना वायरस से रोहिंग्या का भी सम्बन्ध सामने आया है। इस सम्बन्ध में गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर निर्देश दिया है कि रोहिंग्या और तबलीगी जमात के बीच कनेक्शन की जाँच की जाए। गृह मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि रोहिंग्या और उनके परिचितों का भी कोरोना टेस्ट होना चाहिए। साथ ही, पत्र में यह भी कहा है कि इसके संबंध में जरूरी कदम भी उठाए जाएँ।
MHA writes to all States & UTs to trace Rohingyas after it was reported that they attended religious congregations of Tablighi Jamaat&there is a possibility of their contracting COVID-19. MHA has given locations in New Delhi, J&K, Punjab and Haryana where Rohingyas are living. pic.twitter.com/LLaNkSdQyT
गृह मंत्रालय के अनुसार तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर इनमें से कई लोग अभी तक अपने कैंप में नहीं लौटे हैं। ये कैंप तेलांगना, पंजाब, दिल्ली और जम्मू में हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को इनकी कांटेक्ट ट्रेसिंग का आदेश जारी किया है।
As per sources, Rohingyas residing in camps at Hyderabad had attended Tablighi event at Mewat and visited Nizamuddin Markaz. Also Rohingyas living in Shaheen Bagh who had gone for TJ activities have not returned
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पत्र में लिखा गया है कि ऐसी रिपोर्ट आई है कि रोहिंग्याओं ने तबलीगी जमात के इज्तिमा और अन्य धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लिया था। ऐसे में उनके भी कोरोना से संक्रमित होने की आशंका है।
उल्लेखनीय है कि रोहिंग्या कैंप हैदराबाद में भी हैं। तेलंगाना में रहने वाले रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने तबलीगी जमात के जलसे में हरियाणा के मेवात में हिस्सा लिया था। यही लोग दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में भी शामिल हुए थे। यही नहीं, रोहिंग्या समुदाय से जुड़े लोग श्रम विहार और शाहीनबाग भी गए थे।
गौरतलब है कि तबलीगी जमात के लोग पहले से ही देश-विदेश में संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरे हैं। इनका पता लगाने और जाँच करने में पुलिस-डॉक्टर्स और सरकारी कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा खासा परेशान रहा है।
इससे पहले भी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पिछले दिनों झारखंड के लोहरदगा में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के छिपी होने की बात सामने आई थी। इस संबंध में रिपोर्ट देने वाले विशेष शाखा (खुफिया विभाग) के डीएसपी जितेंद्र कुमार का तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह इमदाद अंसारी लेंगे। उन्हें लातेहार से यहॉं भेजा गया है।
इस बीच, देश में कोरोनावायरस संक्रमितों की संख्या 14 हजार 192 पहुँच गई है जबकि मृतकों का आँकड़ा 468 है। केरल में शुक्रवार को सिर्फ एक कोरोना पॉजिटिव मिला। जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में 34 नए मामले सामने आए।
लॉकडाउन के बीच राजस्थान के शहर कोटा में फँसे उत्तर प्रदेश के लगभग 7500 छात्रों को वहाँ से निकालने के लिए यूपी सरकार ने पहल शुरू कर दी है। योगी सरकार द्वारा यह पहल राजस्थान सरकार से बसें चलाने की अनुमति और कोचिंग के छात्रों द्वारा की गई अपील के बाद की गई है। योगी सरकार ने यूपी से 252 बसों को राजस्थान रवाना करने का फैसला किया है।
ये सभी बसें आज अपने तय स्थानों से सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए रवाना होकर शनिवार को उत्तर प्रदेश वापस लौटेंगी। हालाँकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 300 बसें भेजने की भी बात कही जा रही है।
— Special Coverage News (@SpecialCoverage) April 17, 2020
25 अप्रैल से देश में जारी लॉकडाउन के बाद से ही कई प्रदेशों से विभिन्न विषयों की तैयारी के लिए कोटा शहर में रह रहे हजारों छात्र इस बीच फँसे हुए हैं। कोटा में फँसे छात्रों ने पिछले दिनों कई किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करने बाद डीएम से मुलाकात कर अपने घर वापस भेजने की अनुमति माँगी थी, जिसे डीएम ने ठुकरा दिया।
इसके बाद परेशान छात्रों ने ट्विटर पर घर वापसी के लिए #SendUsBackHome नाम से एक ट्रेंड चलाया, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संज्ञान लेते हुए सुरक्षा ऐजेंसियों से बात की, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। वहीं अब बताया जा रहा है कि अब केंद्रीय एजेंसियों के कहने पर ही कोटा से बच्चों को निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
इसके बाद राजस्थान ने अपने यहाँ फँसे हजारों छात्रों को वापस बुलाने के लिए सभी राज्य सरकारों को परमिट देने का भरोसा दिया। इसी का फायदा उठाते हुए योगी सरकार ने कोटा में फँसे अपने करीब 7500 छात्रों को वापस बुलाने का निर्णय ले लिया। इसी के साथ यूपी से राजस्थान को भेजे जाने वाली बसों की तैयारी शुरू हो गई। जानकारी के मुताबिक यूपी से आज 252 बसें राजस्थान कोटा के लिए रवाना होंगी, जोकि शनिवार को यूपी वापस लौटेंगी।
जानकारी के मुताबिक बसों में बैठाने से पहले सभी छात्रों की थर्मल स्कैनिंग की जाएगी। इसके बाद उन्हें मास्क देकर बसों में बैठाया जाएगा। किसी भी बस में 35 छात्रों से ज्यादा नहीं बैठेंगे। उनके अलावा बसों में सुरक्षा कर्मी भी मौजूद रहेंगे। इतना ही नहीं कोटा भेजने से पहले सभी बसों को सैनेटाइज किया गया है। साथ ही बस के ड्राइवर कंडक्टर सहित सुरक्षाकर्मियों को भी मास्क दिए गए हैं।
दरअसल, राजस्थान के कोटा में उत्तर प्रदेश-बिहार-झारखंड समेत देश के दूसरे राज्यों के हजारों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग विषयों की कोचिंग के लिए आते हैं। इसी बीच सभी छात्र 25 मार्च से शहर में फँसे हैं। चिंता इस बात की है कि शहर में तेजी से कोरोना का संक्रमण फैल रहा है, क्योंकि अकेले कोटा शहर में अभी तक 64 कोरोना के मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं पूरे राजस्थान में अब तक 1131 कोरोना के केस सामने आ चुके हैं।
देश-विदेश में कोरोना वायरस के कहर और खासकर इसमें तबलीगी जमात की भागीदारी के बीच कोरोना वायरस के इलाज के बाद चेन्नई के एक अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने वाले रोगियों की आज एक पत्रकार द्वारा कुछ तस्वीरें जारी की गईं। रिपब्लिक टीवी के पत्रकार संजीव सदगोपन ने चेन्नई अस्पताल से रिहा होने वाले मरीजों की तीन तस्वीरें ट्वीट कीं, इन तस्वीरों में ज्यादातर मुस्लिम थे।
इन तस्वीरों में एक ख़ास बात सामने आई है, जिसने सबका ध्यान आकर्षित किया है; वो ये कि दो मरीज अपनी तर्जनी को आसमान की ओर उठाकर वही इशारा करते हुए नजर आए, जिसका प्रयोग आतंकवादी संगठन ISIS वाले भी करते नजर आते हैं।
चेन्नई के अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा रहे मरीजों की तस्वीर
चेन्नई के अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा रहे मरीजों की तस्वीर
चेन्नई के अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा रहे मरीजों की तस्वीर
माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर कई लोगों ने इन मरीजों के इस इशारे का अर्थ आईएसआईएस के साथ संबंध या फिर सहानुभूति से जोड़ा है। कुछ लोगों ने यह तस्वीर देखने के बाद ट्वीट करते हुए लिखा है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को इसका संज्ञान लेकर इसकी जाँच करनी चाहिए क्योंकि 3 जमाती आतंकवादी संगठन आईएसआईएस को सलामी देते हुए नजर आ रहे हैं।
फॉरेन अफेयर्स पर एक लेखक ने स्पष्ट किया है- “जब आईएसआईएस इस इशारे का प्रयोग करता है, तो यह एक ऐसी विचारधारा का समर्थन कर रहा होता है जो पश्चिम के साथ-साथ, किसी भी प्रकार के बहुलवाद (Pluralism) के भी विनाश की माँग करता है। दुनिया भर में संभावित जिहादी लड़कों के लिए भी यह उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि वे दुनिया पर हावी हो जाएँगे।”
अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी सीआईए की वेबसाइट पर एक लेख में ‘तौहीद’ के बारे में बताया गया है:
“वस्तुतः तौहीद का अर्थ है अद्वैत, एकीकरण या ‘एकता पर जोर देना’, और यह एक अरबी क्रिया (वहाड़ा) से आता है, जिसका अर्थ खुद को एकजुट करना, या समेकित करना है। हालाँकि, जब तौहीद शब्द का उपयोग अल्लाह के संदर्भ में किया जाता है, तब अल्लाह (यानी, तौहीदुल्लाह) का अर्थ है, मनुष्य के सभी कार्यों में अल्लाह की एकता को महसूस करना और बनाए रखना जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उससे संबंधित है।”
शरीअत की शब्दावली में तौहीद की परिभाषा है कि अल्लाह तआला को उस के साथ विशिष्ट उलूहियत (उपास्यता, देवत्व), रूबूबियत (प्रभुता) और नामों एवं गुणों में एकता और अकेला मानना। यानी, अल्लाह को इस प्रकार भी परिभाषित कर सकते हैं कि यह विश्वास और आस्था रखना कि अल्लाह तआला अपनी रूबूबियत, उलूहियत और नामों एंव गुणों में अकेला है उसका कोई साझी नहीं।
सीआईए की वेबसाइट पर यह लेख लिखने वाली नथानियल जेलिंस्की का मत था कि आसमान की ओर तर्जनी का यह इशारा चरमपंथी आतंकवादी ‘तौहीद’ के साथ वर्णित अल्लाह के उस संदेश को ही जताने के लिए करते हैं, जिसमें किसी भी अन्य सत्ता की कल्पना को भी कुफ़्र बताया गया है।
एक अन्य वेबसाइट www.dar-alifta.org, जिसमें इस्लाम के प्रचलित रिवाजों का विवरण मिलता है, पर भी तर्जनी आसमान की ओर उठाने और तौहीद के बारे में लिखा है। वेबसाइट के अनुसार, आसमान की ओर उठाई गई तर्जनी इस्लाम के जिन तीन सिद्धांतों का संकेत देती हैं। वो हैं:
तशहुद में एक की तर्जनी को उठाने से तौहीद (एकेश्वरवाद) का संकेत मिलता है।
तर्जनी को ‘इल्ला अल्लाह’ कहते समय उठाया जाना चाहिए।
‘ला इल्हा’ (कोई देवता नहीं है)।
इल्ला अल्लाह ‘तौहीद’ को ही दर्शाता है।
इसके अलावा, वेबसाइट कुरान से उदाहरणों का हवाला देती है जहाँ इमाम द्वारा ऊँगली उठाकर किए गए इशारे के महत्व के बारे में बताया गया है –
1- अल-बहाकी ने अल-सुन्न अल-कुबरा में इब्न ‘अब्बास के माध्यम से सूचना दी कि इस्लाम के पैगंबर ने कहा: ‘यह’, और उन्होंने अपनी तर्जनी की ओर इशारा किया ‘इखलास’ (विश्वास की ईमानदारी) और ‘यह’, और उन्होंने उसे उठाया। उसके कंधों पर हाथ ‘दुआ’ को दर्शाता है। और ‘यह’, और उसने अपने हाथों को ऊँचा किया ‘इब्तिहाल’ (आह्वान) को दर्शाता है। 2- हदीस के एक अन्य वाक्यांश में, इमाम अबू बक्र इब्न अबू शायबा और अल-सुअन अल-कुबरा में अल-सुन्न अल-कुबरा ने इब्न ‘अबास के माध्यम से सूचना दी कि इस्लाम के पैगंबर ने कहा: ‘यह इख़लास है’ अर्थात इल्ला अल्लाह कहते समय तर्जनी उठाना। 3- इब्न शायबा ने इब्राहिम अल-नखाई के माध्यम से सूचना दी, जिन्होंने कहा था: “अल्लाह अल्लाह कहते समय ऊँगली उठाना तौहीद है। लेकिन दो उँगलियाँ उठाना ठीक नहीं।”
जेलिंस्की ने इस लेख में लिखा है – “ऐसे ही इशारों का इस्तेमाल वर्षों से जिहादियों द्वारा किया जा रहा है, जिसमें ओसामा बिन लादेन जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। जिहादी संदर्भ में भी उठी हुई तर्जनी राजनीतिक रूप में मानी जाती है, अर्थात हर उस सत्ता का विरोध, जो शरिया कानून के तहत नहीं आती है”। इसके बाद से यह इशारा सिर्फ ISIS तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि, उनके हर समर्थक ने इसका इस्तेमाल किया।
उल्लेखनीय है कि यही इशारा इस्लामी सिद्धांतों में निहित है और शायद इसी कारण आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के साथ भी गहराई से जुड़ा हुआ है। आईएसआईएस द्वारा मोसुल पर कब्जा करने के बाद भी बगदादी ने अपने पहले जुमे के भाषण में इसी इशारे का इस्तेमाल किया था।
मोसुल पर कब्जा करने के बाद बगदादी
यहाँ तक कि तर्जनी उठाने का यह तरीका खोजी और ऐसे पत्रकारों ने भी लोगों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए हैं, जो ISIS समर्थक रहे हैं। जिससे यह स्पष्ट होता है कि तर्जनी उठाने का यह इशारा सिर्फ कट्टरपंथी जिहादी ही नहीं बल्कि सभी चरमपंथियों के बीच प्रचलित है।
चेन्नई के मरीज का ‘तौहीद’ से क्या रिश्ता है
चेन्नई के अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए इन दो मरीजों के द्वारा किए गए तौहीद के इस इशारे ने इसी वजह से सबका ध्यान आकर्षित किया है। ब्रिटेन में इस्लामोफोबिया अवेयरनेस माह को मुस्लिम एंगेजमेंट एंड डेवलपमेंट (MEND) नामक संस्था द्वारा चलाया जाता है। MEND का कहना है कि एक तर्जनी का ऊपर की ओर इशारा करते हुए लोगो ‘इस्लामिक प्रार्थना अनुष्ठान में एकेश्वर अल्लाह’ को दर्शाता है, लेकिन आईएसआईएस के साथ इशारे के जुड़ाव के कारण, बेडफोर्डशायर पुलिस द्वारा एक बार लोगों की प्रतिक्रिया के बाद ऐसे ही एक पोस्टर को ट्वीट करने के बाद डिलीट कर दिया गया था।
बेडफोर्डशायर पुलिस द्वारा यह पोस्टर डिलीट कर दिया गया था
इस प्रकार चेन्नई के इन मरीजों के तर्जनी के इशारे का सिर्फ यही अर्थ नहीं होता कि उनका सम्बन्ध आईएसआईएस से हो, क्योंकि यह इशारा कट्टरपंथी एकेश्वरवादी मुस्लिमों द्वारा भी इस्तेमाल किया जाता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके अनुसार राजस्थान में एक कॉन्ग्रेस विधायक की कार रोकने पर IAS अधिकारी तेजस्वी राणा का तबादला कर दिया गया। विधायक जिस गाड़ी में सवार थे उसके ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था। आईएस अधिकारी ने विधायक के ड्राइवर पर लगाया जुर्माना, तबादला (IAS officer fines MLA’s driver, transferred) शीर्षक से यह खबर प्रकाशित की गई है। इसमें कहा गया है कि राणा ने 14 अप्रैल को बेगूं से विधायक राजेंद्र बिधूड़ी की कार के ड्राइवर पर जुर्माना लगाया। इसके बाद राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने उनका तबादला कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार आईएएस अधिकारी राणा चित्तौड़गढ़ के एसडीएम के तौर पर तैनात थीं। इस घटना के एक दिन बाद ही उन्हें जयपुर में राज्य स्वास्थ्य आश्वासन प्राधिकरण में संयुक्त निदेशक के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस खबर ने लोगों को चौंका दिया।
लेकिन, टाइम्स ऑफ इंडिया यहाँ एक जरूरी बात बताना भूल गई। असल में इस घटना से दो दिन पहले से ही राणा चित्तौड़गढ़ में व्यापारियों और स्थानीय नेताओं के विरोध का सामना कर रही थीं। शायद यही तबादले की असली वजह थी। दरअसल मंगलवार को एसडीएम राणा सब्जी बाजार गईं थी। यहॉं उन्होंने कथित तौर पर दुकानदारों के साथ दुर्व्यवहार किया। यहॉं तक कि कुछ दुकानों में तोड़फोड़ भी की। यह पूरा घटनाक्रम वहाँ लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया।
बाजार में राणा ने कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए अनिवार्य रूप से सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए लोगों को डाँट फटकार लगाई। जब विक्रेताओं ने इसके जवाब में उनके द्वारा जारी पास दिखाए, तो गुस्से में उन्होंने पास भी फाड़ दिए। इसके बाद, दुकानों के रजिस्टरों को फेंकने के लिए आगे बढ़ीं और कुर्सियों और मेजों को भी दूर फेंक दिया।
इस घटना के बाद गुस्साए व्यापारियों ने डीसी के पास जाकर उनकी शिकायत की। डीसी ने सभी सबूतों के आधार पर घटना की रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेज दी। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य सचिव ने रिपोर्ट के आधार पर तेजस्वी राणा को स्थानांतरित करने का फैसला किया।
दिलचस्प बात तो यह है कि टाइम्स ऑफ इंडिया के हिंदी संस्करण नवभारत टाइम्स के प्रकाशन में 14 अप्रैल की घटना को सीसीटीवी फुटेज सहित बताया गया है। वीडियो में स्पष्ट रूप से राणा, रजिस्टर को फाड़ते और फर्नीचर फेंकते नजर आती हैं।
इसके अलावा, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में खुद बिधूड़ी के हवाले से कहा गया है कि अधिकारी के स्थानांतरण में उनकी कोई भूमिका नहीं है। मीडिया से बात करते हुए, बिधूड़ी ने बताया कि वे एक कार्यकर्ता के वाहन से अपने क्षेत्र में जा रहे थे तो गाड़ी रोकी थी। ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था और उन्होंने जुर्माना अदा कर दिया था। बकौल विधायक इस दौरान अधिकारी उनके साथ बेहद नम्रता से पेश आईं।
बिधूड़ी ने कहा कि उन्हें तबादले का कारण नहीं पता है। उन्होंने कहा, “मैंने किसी से कोई शिकायत नहीं की है। वे अपनी ड्यूटी कर रही थीं। मैंने उन सभी अधिकारियों की सराहना की है जो इस वक्त COVID-19 से लड़ रहे हैं।” संभव है कि कॉन्ग्रेस विधायक के ड्राइवर पर जुर्माना भी तबादले की एक वजह हो। लेकिन, इसका मुख्य कारण बाजार में हुई घटना ही नजर आती है। इसकी औपचारिक शिकायत भी हुई थी और आधिकारिक रिपोर्ट भी तैयार की गई थी।