अगस्ता वेस्टलैंड से लेकर बैंक घोटालों में आरोपित मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। इस बार स्विस सरकार रतुल पूरी और उनके पिता को नोटिस जारी किया है।
स्विट्जरलैंड के टैक्स अधिकारियों ने बुधवार (अप्रैल 15, 2020) को रतुल पुरी, उनके पिता और उनसे जुड़ी दो फर्मों के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किए हैं, दरअसल, स्विस सरकार द्वारा यह सार्वजानिक नोटिस भारत सरकार द्वारा अवैध काला धन रखने के लिए रतुल पुरी के स्विस बैंक खातों का विवरण माँगने के बाद जारी किया गया है।
Switzerland govt issues notices to businessman Ratul Puri, his father and two offshore firms after India seeks their Swiss bank details
स्विस सरकार द्वारा प्रकाशित अलग-अलग नोटिसों में कहा है कि यदि रतुल पुरी और उनके पिता दीपक पुरी भारत सरकार द्वारा की गई माँग के खिलाफ अपील करना चाहते हैं तो उन्हें स्विट्जरलैंड के टैक्स प्रशासन को इस बारे में 10 दिनों के भीतर सूचित करना होगा।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे और हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स के अध्यक्ष रतुल पुरी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है और इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग द्वारा उनकी जाँच की जा रही है।
पुरी और उनके समूह द्वारा स्विस सरकार के नोटिसों के बारे में कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, हालाँकि, वे इस घोटाले या किसी अन्य गलत काम में संलिप्त होने से इनकार करते आए हैं।
उल्लेखनीय है कि पुरी को पिछले साल अगस्त माह में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एक बैंक धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, जबकि उन पर अभी भी अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलिकॉप्टर घोटाले में जाँच चल रही है।
रतुल पुरी हिंदुस्तान पॉवर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष हैं। पुरी की माँ नीता, कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ की बहन हैं। अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में ही पुरी अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलीकॉप्टर मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए। ईडी ने बताया था कि पुरी को इस मामले के कथित बिचौलिये सुशेन मोहन गुप्ता का सामना कराने के लिए तलब किया गया है।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कोरोना संक्रमण की जॉंच करने पहुॅंची मेडिकल टीम पर हमला किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भीड़ ने जमकर पत्थरबाजी की। डॉक्टर एससी अग्रवाल को गंभीर चोटें आई है। एंबुलेंस भी क्षतिग्रस्त हो गया।
घटना बुधवार दोपहर की है। मेडिकल टीम मुरादाबाद के नवाबपुरा इलाके में पहुॅंची थी। यहॉं कोरोना संक्रमण से दो युवक की मौत हो चुकी है। टीम इनके घर के आसपास रहने वाले लोगों की जॉंच करने के लिए पहुॅंची थी। इसी दौरान मस्जिद हाजी नेब के पास स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस को घेर कर अचानक हमला कर दिया। ईंट, पत्थर के साथ लाठी-डंडों का भी इस्तेमाल किया गया।
इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी टीम के साथ थे। लेकिन हमला इतना जबर्दस्त था कि उन्हें भी जान बचाकर भागना पड़ा। बाद में पुलिस की टीम दल-बल के साथ मौके पर पहुॅंची और हालात पर काबू पाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों पर एनएसए के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक सोमवार को यहाँ एक व्यक्ति की मौत हुई थी। इससे दो दिन पहले उसके भाई की संक्रमण से मौत हो गई थी।
एंबुलेंस के ड्राइवर ने बताया, “हमें 108 नंबर से कॉल आई थी। हम कोरोना मरीज लेने गए थे। जब हम वहाँ गए तो कुछ डॉक्टर खड़े थे। उनकी सुरक्षा में 4 सिपाही थे। हमला अचानक हुआ। ऐसा लग रहा था कि इसकी तैयारी पहले से की गई थी। जैसे ही हमने मरीज से बाहर निकलने को कहा पत्थरबाजी शुरू हो गई। हम वहाँ से भाग निकले, मगर कुछ डॉक्टर को उन्होंने पकड़ लिया है। हमारी गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।”
दैनिक जागरण को एडीजी लॉ एंड ऑर्डर पीवी रामाशास्त्री ने बताया कि मौके पर डीएम और एसएसपी पहुँच गए हैं। उन्होंने कहा कि यह जघन्य अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाज पूरी तरह से सहयोग कर रहा है, लेकिन कुछ लोग अफवाह के चक्कर में ऐसी हरकतें कर रहे हैं। आरोपितों की शिनाख्त कर एनएसए के तहत कार्रवाई की जाएगी।
#BREAKING – Government ambulance attacked in Uttar Pradesh’s Moradabad.
बताया जा रहा है कि हमलावरों ने एंबुलेंस में मौजूद डॉ. एससी अग्रवाल को खींचकर बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया और चारों तरफ से पथराव भी शुरू हो गया। ऐसे में वहाँ मौजूद पुलिस के सिपाही किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकले। साथ ही मौका देखकर मेडिकल स्टाफ भी जान बचाकर भागे। लेकिन भीड़ में फँसे डॉक्टर की लोगों ने जमकर पिटाई की।
बता दें, इस घटना की सूचना बाद में स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को दी गई। मौके पर पुलिस अधिकारी और अन्य अधिकारी पहुँचे। अब मामले की जाँच जारी है। वहीं घायल डॉक्टर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इधर घटना के बाद एंबुलेंस स्टाफ ने काम करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अपनी जान इस तरह से जोखिम में डालकर वे काम नहीं करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर खुद संज्ञान लिया है। दोषी व्यक्तियों के खिलाफ आपदा नियंत्रण अधिनियम और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की बात कही है। सीएम ने कहा कि जिला पुलिस प्रशासन ऐसे उपद्रवी तत्वों की तत्काल पहचान करें और हर नागरिक की सुरक्षा के साथ ही उपद्रवी तत्वों पर पूरी सख्ती करे।
मुरादाबाद में डॉक्टरों की टीम पर हमला मामले का CM योगी ने लिया संज्ञान। @myogiadityanath ने कहा आरोपियों पर NSA लगाया जायेगा।सम्पत्ति के नुकसान की भरपाई आरोपियों से ही कराई जायेगी। pic.twitter.com/su4QdanpHz
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर भी कोरोना आपदा के बीच राहत-कार्य में जुटा हुआ है। भले ही मंदिर के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए बंद हो गए हैं लेकिन मंदिर ने अपने भक्तों को नहीं छोड़ा है। गोरखनाथ पीठ से कई संस्थान जुड़े हुए हैं, जो अपने-अपने स्तर से जनसेवा का काम कर रहे हैं। मंदिर का अस्पताल भी है, जिसने मरीजों के लिए अपने कई बेड्स समर्पित कर दिए हैं, वहीं यहाँ के शिक्षण संस्थान सैनिटाइजर के वितरण में लगे हुए हैं। मास्क व अन्य ज़रूरी चीजों का भी वितरण किया जा रहा है।
गोरखनाथ मंदिर कार्यालय देश-प्रदेश के विभिन्न इलाक़ों में फँसे लोगों की मदद करने में लगा हुआ है। आसपास के लोगों को सामग्रियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। भंडारा भी कराया जा रहा है, जिसमें सोशल डिस्टन्सिंग और साफ़-सफाई का उचित ध्यान रखा जा रहा है। मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी अपनी टीम के साथ पूरी व्यवस्था की देखरेख में लगे रहते हैं और वो सुबह से शाम तक वहाँ रुक कर ख़ुद सारी स्थिति का जायजा लेते हैं। उन्होंने बताया कि रोज कम से कम 200 लोगों की मदद की जा रही है।
नाथ पीठ ने गुरु श्रीगोरक्षनाथ अस्पताल के 300 बेड, 10 वेंटीलेटर और बलरामपुर स्थित माँ पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ के अस्पताल के 50 बेड जिला प्रशासन को उपलब्ध कराए हैं, ताकि अस्पताल में मरीजों के इलाज में संसाधन की कोई कमी न रहे। गोरखपुर में एक कोरोना अस्पताल बनाया जाएगा, ऐसा स्वास्थ्य विभाग ने निर्णय लिया है। इस अस्पताल में गुरु गोरक्षनाथ अस्पताल के 154 बेड्स और 4 वेंटिलेटर का इस्तेमाल किया जाएगा। महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज ने सैनिटाइजर और मास्क बनाकर उनका वितरण भी शुरू कर दिया है। इस कॉलेज को नाथ पीठ ही सञ्चालित करती है। ग्रामीण इलाक़ों में ख़ास ध्यान दिया जा रहा है।
कोरोना वायरस महामारी के इस आपद्काल में लोक कल्याण व जनसेवा के उद्देश्यों के साथ नाथ पीठ अहर्निश सक्रिय है।
पीठ से संबद्ध विभिन्न चिकित्सालय एवं विद्यालय अपने समस्त संसाधनों के साथ जन रक्षा हेतु निरंतर हर संभव योगदान कर रहे हैं।
मास्क व सैनिटाइजर प्राचार्य डॉक्टर प्रदीप राव की देखरेख में तैयार किए जा रहे हैं। महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज द्वारा भी हज़ारों की संख्या में मास्क तैयार किया जा रहा है। गोरखनाथ मंदिर अन्य राज्यों में भी स्थित है, जहाँ से न सिर्फ़ पीएम राहत फंड में रुपए दिए गए हैं बल्कि उन राज्यों के मुख्यमंत्री कोष में भी दान दिए गए हैं। यूपी के गोरखपुर मंदिर परिसर में अन्य संस्थाओं के लोगों को भी जनसेवा अभियान चलाने की अनुमति दी जाती है। वहाँ मेडिकल दिशानिर्देशों और सरकारी सलाहों का पालन करते हुए सारी व्यवस्था की गई है।
एक ओर तबलीगी जमात ने अपनी करतूतों से देश में कोरोना संक्रमण के खतरे को बढ़ा दिया है। दूसरी और सोशल मीडिया पर कुछ मुस्लिम कथित कॉमेडी के नाम पर हिंदू देवी-देवताओं का उपहास उड़ा रहे हैं। भगवान राम और सीता पर आपत्तिजनक कमेंट करने के कारण फारूकी मुनव्वर पर FIR दायर की गई है।
Bala नामक ट्विटर एकाउंट ने फारूकी मुनव्वर नामक एक स्टैंडअप कॉमेडियन का वीडियो शेयर किया है। इसमें फारूकी मुनव्वर ने भगवान राम और सीता को लेकर भद्दे और आपत्तिजनक बाते कर रहा है।
बॉलीवुड के एक गाने का जिक्र करते हुए फारूकी कह रहा है, “मेरा पिया घर आया ओ राम जी। राम जी डोंट गिव अ फ़*** अबाउट पिया। यह सुन राम जी कहते हैं मैं खुद चौदह साल से घर नहीं गया। अगर सीता ने सुन लिया, वो तो शक करेगी। सीता को तो माधुरी पे पहले से ही शक है। वो गाना है तेरा करूँ गिन-गिन इंतजार। उसे लग रहा है वनवास गिन रही है 14 पर आकर रुक गई।”
फारूकी मुनव्वर के इस कॉमेडी के नाम पर बनाए गए बिना सर-पैर के चुटकुलों पर ट्विटर ही नहीं, बल्कि उसके यूट्यूब चैनल पर भी आपत्ति जताई गई है। दर्शकों का कहना है कि हिंदुत्व पर चुटकुले बनाना आसान है, लेकिन उसे अल्लाह या पैगम्बर पर भी चुटकुले बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
इसके साथ ही कुछ दर्शकों ने शार्ली एब्दो की घटना का भी किस्सा याद दिलाया है, जब इस्लामिक आतंकवादियों ने एक हास्य मैगजीन के लोगों को सिर्फ इसलिए मार दिया था क्योंकि उन्होंने अल्लाह पर कार्टून बनाया था।
Bala ने एक अन्य ट्वीट में मुम्बई पुलिस के पास दायर की गई ऑनलाइन FIR का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है, “इस पर पहले ही FIR दर्ज हो चुकी है।”
यह पहली बार नहीं है जब सोशल मीडिया पर किसी को हिन्दू-देवी देवताओं का उपहास बनाते देखा गया हो। हाल ही में वासु यादव नाम का एक अकाउंट फेसबुक पर देवी-देवताओं के अश्लील चित्र पोस्ट करने को लेकर चर्चा का विषय रहा।
लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन की समय सीमा को बढ़ाकर 3 तक मई कर दिया है। वहीं जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में लॉकडाउन का उल्लघंन करने की सूचना पर पहुँची पुलिस टीम पर लोगों ने ईट-पत्थरों से हमला कर दिया। हमले में एक पुलिसकर्मी जख्मी हो गया। वहीं अब जम्मू पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूर्व सरपंच सहित 35 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
अमर उजाला की खबर के मुताबिक देश में लॉकडाउन की समय सीमा बढ़ने के बाद भी पुंछ जिले की मंडी तहसील के बेदार गाँव में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। इसकी जानकारी जब इलाका पुलिस को हुई तो वह अपनी टीम के साथ गाँव में पहुँच गई। जहाँ पता चला कि एक पूर्व सरपंच लोगों को लेकर सड़क के निर्माण कार्य में लगाया हुआ था।
पुलिस ने इसका विरोध करते हुए पूर्व सरपंच को लॉकडाउन का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से कार्य बंद करने को कहा। इसके बाद पुलिस ने काम बंद कराके पूर्व सरपंच को साथ थाने चलने को कहा। इस पर सहमति जताते हुए पूर्व सरपंच पुलिस के साथ चल दिया। इसी बीच सामने से दर्जनों की संख्या में लोग एकत्र होकर पूर्व सरपंच को थाने ले जाने का विरोध करने लगे।
इस पर पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों को कई बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने और देखते ही देखते पुलिस के खिलाफ नारेबाजी के साथ विरोध कर रहे लोगों ने ईंट-पत्थरों से पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस टीम अपनी जान बचाकर वहाँ से मंडी थाने पहुँची। इतना ही नहीं पथराव में कई पुलिसकर्मी जख्मी भी हो गए। विरोध करने वालों में महिलाएँ भी शामिल थीं।
इसके बाद पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बेदार के पूर्व सरपंच सहित 35 लोगों के खिलाफ लॉकडाउन का उल्लंघन करने, पुलिस दल पर हमला करने और कानूनी कार्रवाई में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने एफआईआर में धारा 188, 353, 323, 336, 269,2 71 और 147 के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही पुलिस अब इस मामले की जाँच में जुट गई है। हालाँकि अभी तक किसी भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों की हालत बेहद खराब है। सैकड़ों कामगार यमुना किनारे एक पुल के नीचे रहने को विवश हैं। वे करीब एक सप्ताह से इसी दयनीय स्थिति में गुजारा कर रहे हैं। भोजन के लिए वे पास ही स्थित एक गुरुद्वारे पर आश्रित हैं। सरकारी सहायता नाम की कोई चीज उन्हें अब तक नहीं मिली है। इसने लाखों लोगों को रोजाना भोजन उपलब्ध कराने के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दावों की पोल खोल दी है।
पत्रकार अरविन्द गुणाशेकर ने सोशल मीडिया पर इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने ट्विटर पर मजदूरों की समस्या को उजागर करते हुए लिखा कि ये दिहाड़ी कामगार दयनीय स्थिति में रह रहे हैं। यमुना नदी के किनारे स्थित एक पुल के नीचे एक-दो नहीं, बल्कि ऐसे सैकड़ों मजदूर रह रहे हैं। उन्हें दिन में बस एक समय ही भोजन नसीब हो पाता है और वो भी पास के एक गुरुद्वारे से मिलता है। गुणाशेकर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को टैग कर उनसे इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की है।
मजदूरों की ऐसी हालत देख कर लोगों ने दिल्ली सरकार की आलोचना की है। लोगों ने कहा कि एक तरफ तो मुख्यमंत्री ये दावे कर रहे हैं कि वो प्रवासी मजदूरों की देखभाल करेंगे और उनकी सरकार सभी को पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध करा रही है। लेकिन, सच्चाई ये है कि यमुना किनारे कीचड़ में रहने को मजबूर मजदूरों की सुनने वाला कोई नहीं है। कब तक वो गुरुद्वारे के भरोसे वहाँ पर ऐसे ही पड़े रहेंगे?
Plight of migrant workers and daily wagers. Hundreds of them have taken shelter below a bridge in the banks of Yamuna river. Living in an appalling condition for over a week with one meal a day from a nearby Gurudwara.@ArvindKejriwal@msisodia – need your intervention. pic.twitter.com/EpNy9idVYV
इधर मुंबई में मजदूरों के जुटाव के बाद दिल्ली पुलिस भी सतर्क हो गई है। यहाँ भी मजदूरों का गुस्सा कभी भी बाहर आ सकता है, इसीलिए पुलिस पहले से इंतजाम कर रही है ताकि ऐसी किसी भी घटना से बचा जा सके। बांद्रा की हालत देखने के बाद केजरीवाल ने भी प्रवासी मजदूरों व कामगारों से अपील करते हुए कहा- “दिल्ली सरकार ने आपके आवास और भोजन की समुचित व्यवस्था की है। मैं आपसे आप जहाँ हैं, वहीं रहने का अनुरोध करता हूँ।” अब देखना ये है कि मजदूरों के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।
उत्तरप्रदेश के कुशीनगर जिले के तुर्कपट्टी थाने के मधुरिया चौकी की पुलिस ने बुधवार (अप्रैल 11, 2020) को 11 संदिग्ध नेपाली जमातियों को पकड़ा। हिरासत में लिए गए सभी जमाती 5 मार्च को सोनौली सीमा पार कर भारत में आए थे। फिर 7 मार्च को सभी खैरी गाँव स्थित मस्जिद में इज्तिमा में शामिल हुए और तब से ही अलग-अलग गाँवों के मस्जिद में छिपकर रह रहे थे। मगर आज सुबह जोकवा बाजार से गुजरते हुए पुलिस ने इन्हें पकड़ लिया। पूछताछ में मालूम चला कि ये लोग बिहार के रास्ते वापस नेपाल जा रहे थे। लेकिन उससे पहले पकड़ लिए गए।
बता दें, बुधवार को क्षेत्र के चौहानपट्टी गाँव के शंभू चौहान व जोकवा बाजार के राजेंद्र शर्मा ने 11 नेपाली जमातियों को फोरलेन के रास्ते जाते हुए देखा और इसके बाद पुलिस को सूचित किया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों की पहचान अहमद हुसैन, एमडी कमरुल हुसैन, मुजेबुर रहमान, मो तैयब, मो सफीद रहमान, मो जावेद अख्तर, इस्लाम मियाँ, अब्दुल गफूर, मो नजीर, मो वकील के रूप में हुई है।
हालाँकि, अभी तक ये लोग इस बात की जानकारी नहीं दे पाएँ हैं कि लॉकडाउन होने के बावजूद 22 दिन ये कहाँ-कहाँ रहे। मगर, पुलिस फिर भी इनसे ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी। प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र सिंह का इस मामले में कहना है कि नेपाली जमातियों को सपहा क्वारंटाइन केंद्र पर एम्बुलेंस से भेजा गया है। मेडिकल जाँच के बाद ही आगे कुछ कहा जा सकता है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों खबर आई थी नेपाल में बैठा हथियार तस्कर जालिम मुखिया नेपाल से कोरोना पॉजिटिवों को यूपी और बिहार में घुसाने की फिराक में है। जिसके लिए उसने 300 से ज्यादा जमाती इकट्ठा भी किए हुए हैं। अब इस खबर के बाद जब नेपाल से लगी भारतीय सीमा सील है और वहाँ कड़ा पहरा है। तो इन नेपालियों का इस तरह मिलना बेहद महत्तवपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में जालिम मुखिया को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
बता दें, इससे पहले कुशीनगर में पुलिस ने तबलीगी जमात से जुड़े असम के 10 लोगों को पकड़ा था। इनमें 5 महिलाएँ व 5 पुरूष थे। इस दौरान कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक ने बताया था कि उन्हें एक ईमेल आया था, जिसमें ये सूचना थी कि असम के रहने वाले 10 लोग दिल्ली के जमात में शामिल होकर 9 मार्च को वहाँ से निकले थे। वे जनपद कुशीनगर में छिपे हो सकते हैं। ऐसे में पहले जब सूचना के आधार पर तलाशी कराई गई, तो ये लोग नहीं मिल पाए। बाद में इनके पीछे सूचना तंत्र और विश्वासपात्र लोगों को लगाया गया। जिससे 2 लोग पकड़ में आए और इनको चिह्नित करके क्वारंटाइन कराया गया। बाद में 3 व्यक्ति पकड़े गए। उन्हें भी एंबुलेंस से भिजवाकर क्वारंटाइन कराया गया। इसके बाद पाँच महिलाएँ शेष थीं। पर उन्हें भी चिह्नित करते सेंटर भेजा गया।
?जनपद कुशीनगर में दिल्ली के जमात से फरार 10 जमाती चिन्हित करके कोरेंटाइन एवं अन्य आवश्यक कार्यवाही हेतु अस्पताल भेजे गए। अभियोग पंजीकृत कर पुलिस द्वारा विधिक कार्यवाही जारी तथा शरणदाताओं पर भी अभियोग पंजीकृत, जिसके सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक कुशीनगर की बाइट.. @Uppolicepic.twitter.com/7djIFAmfYA
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर मंगलुरू पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान मोहम्मद इलियास और अब्दुल बशीर के रूप में हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों कोरोना वायरस के संबंध में देश में प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के ख़िलाफ़ नफरत भरे मैसेज फैलाने का काम कर रहे थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने दोनों को मंगलवार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने कट्टरपंथी समूह पीएफआई से संबंध रखने की बात कबूली है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इलियास और बशीर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के खिलाफ मिकाल्टो बिसाया (Mikalto Bisaya) नामक फेसबुक पेज पर भड़काऊ पोस्ट साझा कर रहे थे। साथ ही कोरोनोवायरस महामारी को लेकर गलत जानकारी भी फैला रहे थे।
मंगलुरू के पुलिस कमिश्नर हर्ष ने दोनों युवक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है, “भारत के प्रधान मंत्री और गृह मंत्री सहित भारत सरकार की सर्वोच्च आनुषंगिक संस्थाओं (Highest funtionaries of government of India) के खिलाफ भड़काऊ संदेश फैलाने वाले दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके नाम – मोहम्मद इलियास और अब्दुल बशीर हैं। ये दोनों मिकाल्टो बिसाया फेसबुक पेज से जुड़े हुए थे।”
Two persons spreading inciting messages against highest funtionaries of government of india including the prime minister and Home minister of india have been arrested Particulars are 1. Muhammed ilyas 2. Abdul basheer Primarilyconnected to facebook pages Mikalto bisaya pic.twitter.com/tIT7SfrYby
— Harsha IPS CP Mangaluru City (@compolmlr) April 14, 2020
जानकारी के अनुसार, प्राथमिक जाँच में आरोपितों का संबंध कट्टरपंथी इस्लामिक समूह पीएफआई और SDPI से उजागर हुआ। पूछताछ में दोनों ने बड़े नेटवर्क का भी खुलासा किया है। अब पुलिस की साइबर टीम इन जानकारियों के आधार पर अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। इनमें से कुछ बॉर्डर पार भी हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होगी।
On preliminary investigation accused have confessed their affiliation with PFI/ SDPI and have given details of a broader network … Epidemic Diseases Act 1897, Sec 67 Information Technology Act, Sec 54 Disaster Management Act 2005, & Sec 188, 153, 505 IPC. have been invoked.
— Harsha IPS CP Mangaluru City (@compolmlr) April 14, 2020
एक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति कोरोना पर काबू पाने के प्रयासों को विफल करने की कोशिश करेगा, तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। इन आरोपितों के खिलाफ़ महामारी रोग अधिनियम 1897, धारा 67 सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, धारा 54 आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, और धारा 188, 153, 505 आईपीसी के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या राजस्थान में 1000 के पार हो गई है। राजधानी जयपुर में अब तक संक्रमण के 453 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 409 अकेले रामगंज इलाके से हैं। आप ये जान कर भी चौंक जाएँगे कि 408 लोगों को संक्रमण सिर्फ़ एक व्यक्ति के कारण हुआ है। यानी, एक व्यक्ति ने जयपुर के कुल ममलों में से 90% को संक्रमित किया है।
इससे आप कोरोना से बचाव में सोशल डिस्टेसिंग के महत्व और जरूरत को समझ सकते हैं। रामगंज के अलावा जयपुर के जमात क्षेत्र में 23 मरीज मिले हैं। अकेले मंगलवार (अप्रैल 14, 2020) को जयपुर में 83 नए रोगी मिले, जिनमें से 67 रामगंज से थे।
ये वही रामगंज है, जहाँ अप्रैल के पहले हफ्ते में स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदतमीजी की गई थी। एक मेडिकल टीम वहाँ स्क्रीनिंग के लिए गई थी, जिस पर हमला बोल दिया गया। कुछ लोगों ने सैंपल दिए भी तो अपनी पहचान ग़लत बताई। प्रशासन को गुमराह करने का काम किया। आशा कर्मचारियों तक को नहीं बख्शा गया। लोगों ने वहाँ से भागने का भी प्रयास किया। कर्फ्यू तक को धता बताया। जयपुर के रामगंज से कई थानों व नाकों को पार कर जमाती सीकर के पलसाना तक पहुँच गए। एक कोरोना पॉजिटिव जमाती तो पलसाना में रुका था और जयपुर के रामगंज की कई मस्जिदों व जमात से होकर 10 अप्रैल को सुबह पहुँचा था।
तीन जमाती गाड़ी में बैठ रामगंज पहुँचे थे। इसके बाद उनके संपर्क में आने वाले लोगों को चिह्नित कर क्वारंटाइन करने में पुलिस व प्रशासन के पसीने छूट गए। शनिवार को जयपुर में जो 80 नए केस सामने आये थे उनमें से 79 अकेले रामगंज के ही थे। रामगंज के बारे में बता दें कि यह समुदाय विशेष बहुल इलाक़ा है। यहाँ समुदाय विशेष की सघन बस्तियाँ हैं और एक घर में कई-कई लोग रहते हैं। यहाँ मुसाफिर खाने में जब जाँच के लिए कैम्प लगाया गया, तो लोग पहुँचे ही नहीं। थक-हार कर प्रशासन को मस्जिदों से ऐलान करवाना पड़ा।
‘दैनिक भास्कर’ के जयपुर संस्करण में छपी विस्तृत रिपोर्ट
मस्जिदों की माइकों से कहवाया गया कि बीमारी का पता चलने पर ही आप ख़ुद को और अपने परिजनों को बचा सकते हैं। मस्जिदों से ऐलान होने के बाद क़रीब 100 लोगों ने कैम्प में आकर अपने-अपने सैम्पल उपलब्ध कराए। रामगंज में एक युवक ओमान से पहुँचा था, जिसके बाद संक्रमण बढ़ता ही चला गया। अकेले उस युवक के परिवार, रिश्तेदार और दोस्त वगैरह मिला कर 95 लोग संक्रमित पाए गए। रामगंज की आबादी 2.6 लाख है, ऐसे में इन 400 लोगों ने कितनों को संक्रमित किया है, ये पता करना मुश्किल हो रहा है।
कहा जा रहा है कि रामगंज का जो हिस्सा हॉटस्पॉट बना हुआ है उसकी आबादी 15,000 है। सारा जोर इसी इलाके पर दिया जा रहा है। कर्फ्यू के बाद भी एक बुजुर्ग, 9 युवक और 2 युवतियाँ वहाँ से निकल कर भाग खड़े हुए। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यहाँ के एक घर में 20-25 लोग रहते हैं। वे लोग क्वारंटाइन सेंटर भी नहीं जाना चाह रहे हैं। यहाँ कई मदरसे, मुसाफ़िर खाने, जमात खाने और सामुदायिक सेंटर हैं। लोगों को होम क्वारंटाइन करने की भी व्यवस्था की जा रही है।
कारवाँ ने एक बार फिर से इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को लेकर फेक न्यूज़ फैलाया है। उसने लिखा है कि भारत सरकार ने ज़रूरी निर्णय लेने और विचार-विमर्श करने से पहले आईसीएमआर के कोरोना टास्क फोर्स से कोई सलाह नहीं ली। आईसीएमआर ने तुरंत इस ख़बर को नकारा और कारवाँ का नाम लिए बिना कहा कि उसके टास्क फोर्स के बारे में जो ख़बर चलाई जा रही है, वो झूठी है। सच्चाई ये है कि टास्क फोर्स की पिछले एक महीने में 14 बार बैठक हुई है। साथ ही ये भी जानकारी दी गई कि जो भी फ़ैसले लिए गए, उसकी जानकारी टास्क फोर्स के हर सदस्य को थी और सबसे विचार-विमर्श करने के बाद ही कुछ भी हुआ। आईसीएमआर ने ऐसे दावों को नज़रअंदाज़ करने की सलाह दी है।
बता दें कि कारवाँ ने अपने लेख में दावा किया है कि आईसीएमआर के टास्क फोर्स में 21 वैज्ञानिक हैं जो मोदी सरकार को कोरोना से निपटने के उपायों पर सलाह देने वाले थे, लेकिन उन्हें नज़रंदाज़ किया जा रहा है। एक अनाम सदस्य के हवाले से ये सूचना दी गई कि पिछले एक सप्ताह में टास्क फोर्स की एक भी बैठक नहीं हुई। सच्चाई ये है कि पिछले 1 महीने में 14 बैठकें हुईं। साथ ही ये दावा भी किया गया कि पीएम मोदी ने लॉकडाउन बढ़ाने से पहले भी उनकी कोई सलाह नहीं ली।
नीति आयोग के सदस्य और इस टास्क फोर्स के अध्यक्ष विनोद पॉल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “भारत के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ COVID-19 की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएँ दे रहे हैं। यह टास्क फोर्स इस लड़ाई में तमाम विशेषज्ञों को जोड़ने और इस विषय में निर्णायक कार्य करने में अग्रणी है। साथ ही, मैं स्वयं प्रधानमंत्री जी को लगातार सूचित करता रहता हूँ और उनके सुझाव भी पाता रहता हूँ। ऐसे समय में, इस तरह की सनसनी फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। मीडिया की ऐसी हरकतों से, महामारी के इस दौर में, एक राष्ट्रीय स्तर की लड़ाई में हानि ही होती है।”
कारवाँ मैगजीन और उसके झूठे दावों का संसार
कारवाँ ने लेख में दावा किया है कि ये कमिटी सिर्फ़ दिखावे के लिए बनाई गई है। एक दूसरे अनाम सदस्य के हवाले से ये भी दावा किया गया कि बैठकों के डिटेल्स सीधे कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए, लेकिन टास्क फोर्स के साथ साझा नहीं किए गए। साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में कोविड-19 की टेस्टिंग की अदालती सुनवाई के डिटेल्स भर इस लेख में हेडिंग में किए गए दावों की पुष्टि के लिए कोई सबूत भी नहीं पेश किया गया है।
There is a media report which makes false claims about the COVID-19 Task Force. The fact is that the task force met 14 times in the last month and all decisions taken involve the members of the task force. Please avoid such conjectures. #COVID2019india#IndiaFightsCorona
कोरोना वायरस से भारत सरकार युद्ध स्तर पर निपट रही है, जैसे किसी प्राकृतिक आपदा के समय एक्शन लिया जाता है। केंद्र सरकार और उसकी मदद से अन्य राज्य सरकारें भी इसके संक्रमण के प्रसार की रोकथाम में जुटी है। लेकिन कुछ मीडिया संस्थान ऐसे भी हैं, जो जनता में भ्रम फैलाने और सरकारी कामकाज के बारे में दुष्प्रचार फैलाने में लगे हुए हैं। पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति है जो 3 मई तक चलेगी, लेकिन इससे मीडिया के इस वर्ग को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ रहा। कारवाँ ने इससे पहले भी इसी प्रकार का एक फेक न्यूज़ फैलाया था।
कारवाँ मैगजीन का भारत सरकार के कामकाज को लेकर झूठ फैलाने का इतिहास रहा है। मार्च 14, 2020 को प्रकाशित एक आर्टिकल में मैगजीन ने दावा कर दिया था कि भारत सरकार कोरोना वायरस से जुड़े मामलों को छिपाने में लगी हुई है, ताकि सही आँकड़े पता न चले। इस लेख का शीर्षक था- “WHO ने कहा है कि भारत अब कोरोना के लोकल ट्रांसमिशन के स्टेज में है, लेकिन सरकार लगातार इससे इनकार कर रही है“। लेखक विद्या कृष्णन ने झूठा दावा किया। आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन फैक्ट्स को नकार दिया।
झूठा दावा किया गया कि भारत सरकार ये कह रही है कि भारत में कोरोना केवल विदेश से आए लोगों से ही फ़ैल रहा है और अभी फ़िलहाल लोकल ट्रांसमिशन शुरू नहीं हुआ है। यानी, भारत सरकार के हवाले से दावा किया गया कि लोकल इन्फेक्शन नहीं हो रहे हैं। ये झूठा दावा इसीलिए है क्योंकि आईसीएमआर ने पहले ही कहा था कि भारत अब संक्रमण के स्टेज-2 में है, जिसे लोकल ट्रांसमिशन स्टेज भी कहते हैं। कोरोना के चार स्टेज ये रहे- विदेश से आने वाले मामले, लोकल ट्रांसमिशन, कम्युनिटी ट्रांसमिशन और एपिडेमिक। लेकिन, कारवाँ ने इन सबका खिचड़ी बना दिया।
कारवाँ के पूरे लेख में कहा जाता रहा कि WHO जो कह रहा है, भारत सरकार और आईसीएमआर इसके उलट काम कर रहा है। कारवाँ ने WHO के एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा कि भारत अब इटली और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की श्रेणी में आ गया है और लोकल ट्रांसमिशन चालू हो जाएगा। उसने दावा किया कि भारत सरकार सिर्फ़ विदेश से आने वाले मामलों की ही जाँच में लगी है और उसका मानना है कि देश में फिलहाल कोरोना के सिर्फ़ ‘इम्पोर्टेड केसेज’ ही हैं, लोकल ट्रांसमिशन नहीं हो रहा। सोशल मीडिया में कारवाँ का झूठ पकड़ा गया तो उसने अपने लेख को ‘अपडेट’ कर दिया।
इस तरह कारवाँ ने पहला झूठ ये फैलाया कि सरकार और WHO अलग-अलग बातें कर रहे हैं। दूसरा झूठ ये फैलाया कि आईसीएमआर के टास्क फोर्स को किनारे कर दिया गया है। दोनों ही झूठे साबित हुए और आईसीएमआर ने ख़ुद आगे आकर उसके दावों का खंडन किया है। अब सवाल उठता है कि क्या आईसीएमआर के ट्वीट के बाद कारवाँ मैगजीन माफ़ी माँगेगा?