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भोपाल पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 64 विदेशी, 10 देशी तबलीगी जमातियों के साथ 13 मदद करने वालों के खिलाफ कई धाराओं में FIR दर्ज

कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी टूटा है, और मध्य प्रदेश इससे सबसे ज्यादा प्रभावित सूबों में से एक है। वहीं, तबलीगी जमात के लोगों की लापरवाही के चलते इस वायरस का प्रसार कई ऐसे इलाकों में भी हो गया है, जहाँ कुछ दिन पहले तक इसका नामो-निशान तक नहीं था। यही वजह है कि अब विभिन्न राज्यों की सरकारें तबलीगियों पर शिकंजा कस रही हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पुलिस ने 64 विदेशी और 10 देशी जमातियों पर मामला दर्ज किया है। भोपाल पुलिस ने 24 घंटे में लॉकडाउन उल्लंघन करने वालों पर 57 केस दर्ज किए हैं।

भोपाल पुलिस ने तबलीगी जमात के लोगों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए 74 जमातियों पर केस दर्ज किया है। इनमें 64 विदेशी और 10 देशी जमाती शामिल हैं। इनके अलावा जमातियों का सहयोग करने वाले 13 अन्य लोगों पर भी केस दर्ज हुए हैं। इस तरह पुलिस ने 64 विदे‍शी जमातियों समेत 87 लोगों पर FIR दर्ज की है।

जानकारी के मुताबिक, भोपाल के ऐशबाग, मंगलवारा, श्यामला हिल्स और पिपलानी तलैया थानों में मामले दर्ज किए गए हैं। इनके ऊपर धारा 188, 269, 270 आईपीसी की धारा 51 राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 13 और 14 एवं विदेशी विषयक अधिनियम 1964 के तहत केस दर्ज किया गया है।

इन पर वीजा का उल्लंघन करने का भी आरोप है। विदेशों से आए इन जमातियों ने भोपाल पहुँचने पर स्थानीय पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी थी। साथ ही लॉकडाउन के दौरान शासकीय आदेशों को भी नहीं माना था। विदेशों से आई जमात पर आरोप है कि यह सभी बिना किसी सूचना भोपाल में डेरा जमाए हुए थे।

बाकी 23 लोगों को अलग से आरोपित बनाया गया है। इन सभी को फिलहाल ईंटखेड़ी स्थित मस्जिद में शिफ्ट किया गया है। तलैया थानाप्रभारी डीपी सिंह का अनुसार यह सभी विदेशी इलाके में घूम रहे थे। चेतावनी देने के बाद उनका इलाके में भ्रमण बंद नहीं हो रहा था। पुलिस ने भोपाल के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले 10 लोगों पर इनका सहयोग करने का मामला दर्ज किया है। बाकी 10 जमात के लोगों पर उनके साथ रहने के बाद भी पुलिस को सूचना न देने का मामला दर्ज किया गया है।

सभी आरोपितों में कजाकिस्तारन का एक, किर्गिस्तान के चार , उज्वेकिस्तान के एक जमाती पर वीजा उल्लंजघन का आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। उनके साथ समस्तीपुर बिहार के दो लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। आरोपित इस्‍लामपुरा मस्जिद में बिना किसी सूचना के रूके थे। इसी तरह ऐशबाग मंगलवारा में भी अपराध दर्ज किया गया है। सभी को फिलहाल क्वारंटाइन में रखा गया है।

जिस इलाके में मोहम्मद असलम ने सफाईकर्मी को मारा था, वहाँ के लोग अब इंफोर्समेंट टीम पर थूक रहे, FIR दर्ज करने का आदेश

झारखंड की राजधानी राँची के हिंदपीढ़ी इलाके में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद भी वहाँ लोग अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे। इसलिए अब जिला प्रशासन ने वहाँ पूरे इलाके को ही सील कर दिया है और लोगों को घरों से निकलने से रोकने के लिए वहाँ पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात है। मगर, फिर भी स्थानीय लोग बदसलूकी कर रहे हैं। खबर है कि इस क्षेत्र में सफाई कार्य करने वाले सफाईकर्मियों, कूड़ा उठाने वाले वाहनों व इंफोसर्मेंट टीम के ऊपर कुछ लोग अपने-अपने घर की छत पर खड़े होकर थूक रहे हैं। जिसके मद्देनजर गुरुवार को इंफोर्समेंट टीम के सदस्यों ने उप नगर आयुक्त रजनीश कुमार व सहायक लोक स्वास्थ्य से इस मामले को लेकर शिकायत भी की।

राँची नगर निगम में सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी डॉ. किरण कुमारी का इस मामले पर कहना है कि टीम ने उन्हें शिकायत की है कि सैनिटाइजेशन करा रहे इंफोर्समेंट टीम के ऊपर स्थानीय लोग ने थूका है। इस मामले को गंभीरता पूर्वक लेते हुए दूसरी पाली की इंफोर्समेंट टीम को निर्देश दिया गया है कि थूकने वालों की वीडियो बनाएँ। इस मामले की सूचना जिला प्रशासन को भी दी जाएगी, ताकि इस प्रकार की हरकत करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।

हिंदपीढ़ी इलाके के लोगों से तंग आकर इंफोर्समेंट टीम के सदस्यों ने अधिकारियों से कहा है कि यदि इलाके में लोग यूँ ही उनके ऊपर थूकते रहेंगे तो वे उस क्षेत्र में सैनिटाइजेशन का काम कराने नहीं जाएँगे। उधर प्रशासन ने ऐसे लोगों को खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है।

बता दें इसी इलाके में 4 अप्रैल को हिंदपीढ़ी क्षेत्र में वाटर टैंकर से सैनिटाइजेशन का काम कर रहे चालक मुके मुकेश कुमार के साथ वार्ड-22 के पार्षद पति मोहम्मद असलम ने मारपीट की थी। इस मामले को लेकर सफाईकर्मियों ने 5 अप्रैल को काम बंद कर दिया था। हिंदपीढ़ी में कोरोना के दहशत से सफाईकर्मी काम करने के लिए तैयार नहीं थे।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ हिंदीपाढी इलाके में स्थानीयों द्वारा ऐसे कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर कोरोना पॉजिटिव 5 और नए मामले सामने आए हैं। जिसके बाद पूरे हिंदपीढ़ी क्षेत्र को अभी और 72 घंटे के लिए सील कर दिया गया है। साथ ही पूरे क्षेत्र में पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि लोग अपने घरों से बाहर न निकलें। दैनिक जागरण के अनुसार, उपायुक्त राय महिमापत रे ने बताया कि आवश्यक वस्तुओं के लिए वॉलिंटियर्स की नियुक्ति की गई है। हिंदपीढ़ी क्षेत्र में इन वॉलिंटियर्स के माध्यम से आवश्यक सामान लोगों के घर तक पहुँचाए जा रहे हैं।

दैनिक जागरण में हिंदपीढ़ी से प्रकाशित खबर

उपायुक्त का कहना है कि राँची में 7 लोग कोरोना पॉजिटिव हैं, इनमें छह एक ही परिवार के हैं। 5 नए कोरोना पॉजिटिव के मामले सामने आए हैं। इन सभी व्यक्तियों को रिम्स के आइसोलेशन सेंटर में रखा गया है। जो नए पाँच मामले कोरोना पॉजिटिव के आए हैं, उनकी कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा चुकी है और जो भी उनके संपर्क में आए हैं उनकी सैंपलिंग का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने लोगों से एक बार फिर से अपील की है कि अगर उनमें कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं या वे किसी कोरोना संक्रमित के संपर्क में आए हैं या किसी अन्य शहर की यात्रा कर लौटे हैं तो खुद जाँच के लिए जिला प्रशासन से संपर्क करें। डीसी ने लोगों से यह भी अपील की है कि वो मास्क का इस्तेमाल करें। मास्क के इस्तेमाल से कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। रांची के एसएसपी अनीश गुप्ता ने बताया कि पूरे इलाके की निगरानी 4 ड्रोन कैमरे से की जा रही है।

लॉकडाउन में घोटाले के आरोपित वाधवान परिवार को VIP ट्रीटमेंट: महाबलेश्वर भेजने पर घिरी महाराष्ट्र सरकार, 23 पुलिस हिरासत में

कोरोना संक्रमण को देखते हुए देश भर में लॉकडाउन जारी है। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले हैं और मुंबई तो हॉटस्पॉट बना हुआ है। मुंबई में संक्रमित लोगों का आँकड़ा 1 हजार के ऊपर पहुँच गया है। एक तरफ महाराष्ट्र सरकार लोगों से घरों में रहने की अपील कर रही है, लेकिन वहीं दूसरी तरह महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग द्वारा खुद नियमों की धज्जियाँ उड़ाने का मामाला सामने आया। महाराष्ट्र का गृह विभाग मुंबई के रसूखदार परिवारों पर इतना मेहरबान है कि एक या दो नहीं बल्कि पाँच कारों के साथ वाधवा परिवार के काफिले को मुंबई से महाबलेश्वर जाने की इजाजत दे दी।

जिसके बाद लॉकडाउन के नियम तोड़ने पर कपिल वाधवान, धीरज वाधवान सहित पूरे परिवार पर केस दर्ज हो गया है। साथ ही उन्हें हिरासत में भी ले लिया गया है। यह केस महाबलेश्वर के पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। बता दें कि मुंबई के प्रसिद्ध कारोबारी वाधवान ब्रदर्स लॉकडाउन के नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए 22 लोगों के साथ मुंबई से महाबलेश्वर पिकनिक मनाने गए थे। इसके लिए उन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से पास भी जारी किए थे। इस मामले में लापरवाही को लेकर विशेष सचिव अमिताभ गुप्ता को छुट्टी पर भेज दिया गया है। वहीं विपक्ष महाराष्ट्र के गृहमंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहा है।

इस घटना के बाद शिवसेना के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, क्योंकि राज्य के वरिष्ठ नौकरशाहों ने वाधवानों को फार्महाउस की यात्रा करने के लिए एक स्पेशल पास दिया था। 

वाधवान परिवार 9 अप्रैल की सुबह महाबलेश्वर पहुँचे थे। बता दें कि उन्होंने यह यात्रा ‘फैमिली इमरजेंसी’ की आड़ में की थी। स्थानीय लोगों को जब इसके बारे में पता चला तो उन्होंने प्रशासन को इसकी सूचना दी। जिसके बाद तहसीलदार ने फॉर्महाउस में रहने के दौरान ही उनके खिलाफ कार्रवाई की।

सतारा एसपी तेजस्विनी सतपुते ने पुष्टि की है कि वाधवान परिवार के सदस्यों को महाबलेश्वर से हिरासत में लिया गया था और उन्हें पंचगनी के एक सरकारी अस्पताल में क्वारंटाइन किया गया था। सतपुते ने कहा कि उनके खिलाफ आईपीसी 188, 269 और 270 के तहत मामला दर्ज किया गया है और जल्द ही जाँच शुरू होगी।

वाधवानों ने महाराष्ट्र के प्रधान सचिव (विशेष), गृह विभाग अमिताभ गुप्ता से ‘फैमिली इमरजेंसी’ का हवाला देते हुए खंडाला से महाबलेश्वर तक की यात्रा करने के लिए विशेष पास लिया था। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने डीएचएफएल के प्रवर्तकों कपिल और धीरज वाधवान को उनके परिवार के 22 अन्य सदस्यों, दोस्तों के साथ पाँच कारों में जाने के लिए मंजूरी दी थी।

अमिताभ गुप्ता द्वारा वाधवान परिवार को दिया गया फ्री पास

वाधवान परिवार को मंजूरी देने वाला पत्र भी सामने आया है। जिसमें महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग के विशेष सचिव और एडिशनल डीजीपी अमिताभ गुप्ता ने अपने आधिकारिक पत्र पर वाधवा परिवार के सदस्यों को ‘फैमिली इमरजेंसी’ के तहत खंडाला से महाबलेश्वर जाने की इजाजत दी है।

इस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने जाँच का आदेश दिया। गृह मंत्री अनिल देशमुख ने गुरुवार की देर शाम इस मामले में जाँच की घोषणा की। महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ट्वीट किया, “इस बारे में जाँच की जाएगी कि वाधवान परिवार के 23 सदस्यों को खंडाला से महाबलेश्वर की यात्रा करने की अनुमति कैसे मिली।” इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार द्वारा भारी शर्मिंदगी झेलने के बाद गृह विभाग के विशेष सचिव और एडिशनल डीजीपी अमिताभ गुप्ता को तत्काल प्रभाव से अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया।

गौरतलब है कि डीएचएफएल के सीएमडी कपिल वाधवान और गैर-कार्यकारी निदेशक धीरज वाधवान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जाँच चल रही है, जिसमें कपिल वाधवान को ईडी ने गिरफ्तार भी किया था। फिलहाल वह जमानत पर हैं।

वहीं YES बैंक फर्जीवाड़े मामले में राणा कपूर के खिलाफ जाँच चल रही है, इसमें भी मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के दायरे में अब वाधवान बंधु भी ईडी और सीबीआई के रडार पर हैं। पिछले महीने ईडी ने वाधवान बंधुओं को यस बैंक मामले में पूछताछ के लिए समन किया था। तब कपिल वाधवान ने ईडी को भेजे जवाब में कहा था, “मैं स्वास्थ्य परेशानियों से गुजर रहा हूँ कोरोना वायरस महामारी और मेरी उम्र के चलते मेरी पहले से खराब सेहत को अधिक जोखिम है। इसलिए मेरे लिए मुंबई की यात्रा करना मुश्किल है।” उनके भाई धीरज वाधवान ने भी कुछ इसी तरह का पत्र ईडी को भेजा था।

तमिलनाडु: 24 घंटे में 96 नए कोरोना पॉजिटिव आए सामने, 84 तबलीगी जमात से जुड़े, कुल 834 में 763 मरकज की सौगात

देश में लगातार बढ़ते कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या के बीच तमिलनाडु से लोगों की आँखे खोल देने वाले आँकड़े सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु में पिछले 24 घंटो के भीतर 96 नए केस सामने आए हैं, चौंकाने वाली बात यह कि इनमें से 84 केस तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं। इसी के साथ पूरे प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 834 हो गई है।

राज्य की स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि तमिलनाडु में बुधवार शाम से किसी संक्रमित व्यक्ति की मौत नहीं हुई है बल्कि ठीक हो चुके 27 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 96 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 84 संक्रमित लोग दिल्ली निजामुद्दीन में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम से जुड़ हुए हैं।

स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश ने आगे बताया कि राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमण का आँकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इसी के साथ अब राज्य में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 834 हो गई है। गौर करने वाली बात यह कि इनमें से 763 केस तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों की देन है। सचिव बीला राजेश के मुताबिक अब सरकार का उद्देश्य कोरोना वायरस के संक्रमण को तीसरे चरण में प्रवेश करने से रोकना है और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी इस दिशा में लगातार काम भी कर रहे हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली मरकज से निकाले गए जमातियों के बाद सामने आए आँकड़ों के मुताबिक दिल्ली मरकज में तमिलनाडु राज्य से सबसे अधिक जमातियों ने हिस्सा लिया था, जिसका परिणाम आज पूरे प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। वहीं अगर देश की बात करें तो स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अब तक 199 लोगों की मौत, जबकि इससे संक्रमित सक्रीय मरीजों की संख्या 5709 हो गई है। वहीं 503 संक्रमित लोग ठीक होकर अस्पतालों से घर जा चुके हैं।

नशे को हाथ न लगाने वाला मकरज से लौटा जमाती कोरोना पॉजिटिव: लोगों के साथ गुड़गुड़ाया हुक्का, पी चाय-पानी, कई गाँवों में मिलने गया

हरियाणा के भिवानी में मानहेरू और संडवा गाँव में निजामुद्दीन से आए जमात के दो लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि के बाद एक नया पॉजिटिव केस सामने आया है। अब चरखी दादरी के हिंडोल में भी एक युवक को कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया है। यह भी जमात से संबंध रखता है। यह भी निजामुद्दीन के मरकज से ही 20 मार्च को गाँव लौटा था। यह युवक भिवानी के एक कोरोना पॉजिटिव युवक के संपर्क में आया था। चरखी दादरी के सीएमओ मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रदीप शर्मा ने कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि की है।

चौंकाने वाली बात यह है कि हिंडोल से मिलने वाला कोरोना पॉजिटिव मरीज ने निजामुद्दीन से लौटने के बाद इस मरीज ने अपने स्तर पर संक्रमण को फैलाने की पूरी कोशिश की। न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस मरीज ने कभी बीड़ी तक को हाथ नहीं लगाया था। लेकिन निजामुद्दीन मरकज से लौटने के बाद उसने गाँव में दो जगहों पर ग्रामीणों संग जमकर हुक्का भी पीया। इसके साथ ही कुछ लोगों के रुपयों की देनदारी भी बिना माँगे चुकता कर दी। उसका सिलसिला यहीं तक नहीं रुका। उसने बिना काम गाँव के दो घरों में जाकर चाय-पानी भी पिया। इसके अलावा कई गाँवों में भी मिलने गया था।

उसने गाँव वालों से मरकज के मजहबी सभा में शामिल होने वाली बात को सबसे छुपाया। जब ग्रामीणों ने उससे इस संबंध में पूछा तो भी उसने झूठी और मनगढ़ंत कहानी सुनाकर उनको बरगलाया। लोगों ने भी आसानी से उसकी बातों को मान लिया और उसके साथ हिलने-मिलने लगे। जब स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली, तो वो तुरंत हरकत में आ गई और रातों-रात कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आने वाले 72 लोगों की सूची तैयार करते हुए स्क्रीनिंग शुरू कर दी। स्वास्थ्य विभाग ने 638 लोगों की सूची तैयार की, जिसमें 119 लोग मुस्लिम समाज के हैं।

स्वास्थ्य विभाग कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आए 40 लोगों की अब तक पहचान कर उनकी स्वास्थ्य जाँच कर चुका है। अब विभाग ने सांजरवास और हिंडोल गाँव में रहने वाले पंद्रह और लोगों के सैंपल भेजे हैं। इनमें से कुछ कोरोना पॉजिटिव मिले युवक के संपर्क में आए थे। सतर्कता बरतते हुए इनको आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। बता दें कि कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य कर रहा है। जहाँ से भी सूचना मिलती है, तुरंत उन लोगों का मेडिकल चेकअप किया जा रहा है। 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भिवानी के मानहेरू और संडवा गाँव के दो व्यक्तियों में कोरोना मिला था। इसमें एक की उम्र 52 तो दूसरी की 28 साल है। इन दोनों मरीजों को अस्पताल लाने वाले तीन कर्मचारियों को भी क्वॉरंटीन किया गया है। भिवानी में दिल्ली निजामुद्दीन मरकज से लौटे 22 व्यक्तियों को बाबा योगीनाथ अस्पताल लोहानी में बने क्वॉरंटीन सेंटर भेजा गया है। इन 22 व्यक्तियों में से 8 व्यक्तियों के सैंपल लेकर कोरोना वायरस की जाँच के लिए भेजा गया।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन मिलने से इजराइल के प्रधानमंत्री भी हुए गदगद, PM मोदी को कहा- प्रिय दोस्त, धन्यवाद!

कोरोना वायरस महामारी के ईलाज में इस्तेमाल की जा रही मलेरिया की दवाई हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की माँग इन दिनों चारों ओर से है। ऐसे में इसके निर्यात को भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद कई देश फूले नहीं समा रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना संकटमोचक हनुमान की तरह कर रहे हैं। अभी कल की यदि बात करें तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत से मदद मिलने के बाद देश के लोगों व पीएम मोदी को आभार प्रकट किया था और कहा था कि वे इस मदद को कभी नहीं भूलेंगे। अब इसी सूची में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का नाम भी जुड़ गया है।

इजराइल के प्रधानमंत्री ने गुरुवार को ट्वीट कर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्लीन उपलब्ध कराने पर पीएम मोदी को अपना प्रिय दोस्त बताते हुए धन्यवाद कहा। नेतन्याहू ने अपने ट्वीट में लिखा, “क्लोरोक्वीन भेजने के लिए शुक्रिया, मेरे प्रिय दोस्त नरेंद्र मोदी। इजराइल के सभी नागरिकों की ओर से आपको धन्यवाद।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 अप्रैल को बेंजामिन नेतन्याहू के साथ टेलीफोन पर बातचीत की थी। जहाँ दोनों नेताओं ने कोरोना वायरस महामारी और स्वास्थ्य संकट के लिए अपनाई गई रणनीतियों पर चर्चा की थी। इसके अलावा खबर ये भी है कि इजराइल इस कोविड-19 वायरस को लेकर मार्च से ही भारत के संपर्क में रहा। जिसके चलते बेंजामिन नेतन्याहू ने इस संबंध में 13 मार्च को भारतीय प्रधानमंत्री से आग्रह कियाथा कि वे मास्क और अन्य जरूरी चीजें निर्यात करने की छूट दें।

उनके अलावा कई अन्य देशों ने भी भारत से ये गुहार लगाई थी। फिर भारत ने मंगलवार को इसके निर्यात पर लगी रोक को आंशिक रूप से हटा लिया और गुरुवार को भारत द्वारा भेजी गई 5 टन दवाइयाँ इजरायल पहुँच गईं, जिनमें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन भी शामिल थी। जिसके बाद नेतन्याहू का ट्वीट आया।

बता दें कि भारत दुनिया में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का सबसे बड़ा निर्माता है। लेकिन विदेश व्यापार महानिदेशालय ने देश में संक्रमण से संबंधित मामलों में तेजी से वृद्धि को देखते हुए दवा और इसके अवयवों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। भारत की ओर से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर खुशी जताते हुए ट्रंप ने कहा था कि संकट की इस घड़ी में भारत की मदद को भुलाया नहीं जाएगा। उन्होंने मोदी की सराहना करते हुए उन्हें महान नेता बताया।

वहीं ब्राजील के राष्ट्रपति ने कहा कि वह ब्राजील के लोगों की समय पर की गई इस मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों को धन्यवाद देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी को भेजे अपने पत्र में राष्‍ट्रपति जायर एम बोल्‍सोनारो ने लिखा कि भगवान राम के भाई लक्ष्‍मण की जिंदगी बचाने के लिए हिमालय से दवा (संजीवनी बूटी) लेकर आने वाले भगवान हनुमान और बीमारों को स्‍वस्‍थ करने वाले यीशु मसीह की तरह भारत और ब्राजील मिलकर इस वैश्‍विक संकट का सामना करेंगे।

मधुबनी: दलित महिला के हत्यारों को बचाने के लिए सरपंच फकरे आलम ने की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बदलवाने की कोशिश

बिहार के मधुबनी में 5 अप्रैल की रात एक 70 वर्षीय दलित महिला काला देवी (उर्फ कैली देवी) की हत्या कर दी जाती है। हत्या को अंजाम देने के बाद सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ फरार हैं। फरार होने से पहले और उसके बाद भी आरोपित लगातार गाँव के सरपंच फकरे आलम के संपर्क में है। वो उनसे मुलाकात भी करते हैं और अब पता चला है कि फकरे आलम हत्यारों को बचाने की पूरी कोशिश में जुट भी गए हैं। उन्होंने हत्यारों को बचाने के लिए पूर्व मुखिया को फोन करके पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को बदलवाने की कोशिश की।

इन सारी बातों का खुलासा किया है खुद मृतक महिला के बेटे सुरेंद्र मंडल ने। उन्होंने बताया कि फकरे आलम ने जिस व्यक्ति को फोन करके रिपोर्ट बदलवाने की कोशिश की, उन्होंने खुद आकर उनको बताया। सुरेंद्र ने बताया कि फकरे आलम रिपोर्ट बदलवाने के लिए उस व्यक्ति से मिलने भी गया था। हालाँकि, फिलहाल सुरेंद्र उस शख्स का नाम उजागर नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने हमसे फिलहाल उनके नाम को गुप्त रखने के लिए कहा है। मगर उन्होंने इतना जरूर कहा है कि समय आने पर वो उनके नाम का भी खुलासा करेंगे।

इतना ही नहीं, सुरेंद्र ने तो हमें यह भी बताया कि न सिर्फ हत्यारों को बचाने की कोशिश की जा रही है, बल्कि उनके परिवार को बदनाम भी किया जा रहा है। सुरेंद्र ने कहा, “गाँव में लोगों ने अफवाह उड़ा दी है कि हमने दूसरे मजहब के परिवार से 2 लाख रुपए लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया है। ये बिल्कुल गलत बात है। हमने ऐसा कुछ भी नहीं किया है और न ही करेंगे। हम तो कहते हैं कि 1 लाख रुपया मेरे से और ले लो और दोषियों को सजा दो। हमें पैसे नहीं, इंसाफ चाहिए। हमारी माँ चली गई, उनकी मौत नहीं हुई, उनकी हत्या की गई। हमारा एक जान चला गया। हम पैसा लेकर क्या करेंगे? हमें तो बस इंसाफ चाहिए।”

ऑपइंडिया से बात करने के दौरान उन्होंने प्रशासन से भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि उन्हें लोगों से पता चल रहा है कि तीनों आरोपित लगातार सरपंच फकरे आलम से मिलने आते हैं, तो फिर पुलिस उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं कर पा रही है। इस पर उन्होंने आगे कहा, “प्रशासन ने हमसे कहा था कि आरोपितों को गुरुवार (अप्रैल 9, 2020) तक पकड़ लिया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। अब हम और यहाँ के स्थानीय नागरिक चाहते हैं कि आरोपितों को जिस किसी ने भी अपने यहाँ शरण दिया है, अपने यहाँ छुपाया है, उसे भी दोषी माना जाए और कठोर से कठोर सजा दी जाए।” वैसे ये तो कानून भी है कि गुनाह में साथ देने वालों को भी गुनहगार माना जाएगा।

जैसा कि हमने अपनी पिछली रिपोर्ट में बताया था कि दोषियों को बचाने में राष्ट्रीय जनता दल के विधायक फैयाज अहमद का भी हाथ माना जा रहा है। हालाँकि, इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन सुरेंद्र ने बताया कि सरपंच फकरे आलम, फैयाज का रिश्तेदार है और दोनों एक ही समुदाय और एक ही जगह के रहने वाले हैं। ऐसे में उन्होंने आशंका जताई है कि हो न हो इसमें फैयाज अहमद की भी मिलीभगत है। वरना कथित अल्पसंख्यकों के दो घरों में छोटी से छोटी समस्या में दौड़कर आने वाले विधायक जी इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी गाँव में क्यों नहीं आए? क्या वो हिंदुओं के विधायक नहीं हैं?

अब सोचने वाली बात यह है कि एक बुजुर्ग दलित महिला की गला दबाकर हत्या कर दी जाती है, लेकिन असहिष्णुता का राग अलापने वाले ये झंडाबरदारों ने एक शब्द तक नहीं कहा। आखिर क्यों? इस हत्या पर न तो तथाकथित सेक्युलर बोल रहे और न ही असहिष्णुता के पैरोकार। इस हत्या पर असहिष्णुता के पैरोकारों ने क्यों चुप्पी साध रखी है? हम आपको बताते हैं कि इस घटना पर कोई सेक्युलर पैरोकार आगे क्यों नहीं आया, क्योंकि यहाँ पर एक हिंदू मारा गया था। आखिर क्यों इन बुद्धिजीवी लोगों को सिर्फ मजहब विशेष के लोगों मरने पर देश में असहिष्णुता नजर आती है? अवार्ड वापसी इन्हें तब ही क्यों याद आती है?

मगर जैसे ही किसी दूसरे मजहब के व्यक्ति की मौत होती है, मामले को तूल देकर ऐसा रंग दिया जाता है, जिससे लगे कि देश में ‘मजहब विशेष पर अत्याचार’ हो रहे हैं। दरअसल सच्चाई तो यह है कि इनकी इस समुदाय के लोगों के साथ भी कोई सहानुभूति नहीं है। ये तो अपने पेशे को चमकाने और राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए ये लोग ऐसा करते हैं। ये लोग किसी एक घटना को इस तरीके से दुनिया को बताने और जताने का प्रयास करते हैं मानो पूरे भारतवर्ष का यही माहौल हो। जबकि इसके उलट जो मामले इनको ‘फायदे वाले’ नहीं लगते उन पर चुप्पी साध लेते हैं।  

यदि कोई हिंदू की हत्या की जाती है, तो चुप्पी साध ली जाती है। स्क्रीन काली कर डालने वाले, हर चीज में ‘मजहब पर अत्याचार’ ढूँढ़ने वाले मीडिया के एक खास वर्ग के लिए यह खबर नहीं होती। सेकुलरिज्म का चश्मा लगाए चैनलों पर बहस करने वाले पत्रकार ऐसी घटनाओं पर खामोश हो जाते हैं। कथित बुद्धिजीवी दलीलें देते हैं कि मामले को मजहब के नजरिए से न देखा जाए।

‘सेलेक्टिव जर्नलिज्म’ (मजहब, जात, सुविधा देखकर होने वाली पत्रकारिता) और ‘सेलेक्टिव क्रिटिसिज्म’ (सुविधा के हिसाब से मुद्दों को आलोचना के लिए चुनना) वाला एक तबका लंबे समय से देश के मीडिया पर काबिज है। ये वही लोग हैं, जिनके लिए अपराध में जहाँ मजहब विशेष के लोग शामिल हों, इनकी परिभाषा बहुत सरल है- अपराध का और अपराधियों का कोई मजहब नहीं होता। पूरी दुनिया में फैले मजहबी आतंकवाद का इनकी निगाह में ‘कोई मजहब नहीं’ है।

‘चायनीज’ कोरोना देने के बाद चीन ने चली कश्मीर पर चाल: भारत ने दिया करारा जवाब, कहा- हमारे घर में न दें दखल, हमारा आंतरिक मामला

एक तरफ पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। लेकिन पूरे विश्व को कोरोना की सौगात देने वाला चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीन ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखाते हुए पाकिस्तान की भाषा में कश्मीर राग अलापा है, लेकिन इस बार भारत ने साफ शब्दों में जवाब देते हुए कहा है कि चीन को अच्छी तरह पता है कश्मीर पर भारत का रुख क्या है, लिहाजा चीन हमारे आंतरिक मामले में दखल न दे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने चीन के प्रवक्ता द्वारा कश्मीर पर दिए गए बयान को खारिज करते हुए कहा कि कहा, “चीन को इस मुद्दे पर हमारा रुख पता है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। जम्मू-कश्मीर से जुड़ा मुद्दा भारत का आंतरिक मसला है। कश्मीर मुद्दे पर भारत किसी भी देश की टिप्पणी को स्वीकार नहीं कर सकता।”

श्रीवास्तव ने आगे कहा कि इसलिए हमारी अपेक्षा है कि चीन सहित सभी देशों को हमारे आतंरिक मामले से दूर रहना चाहिए और भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। हम चीन से यह भी उम्मीद करते हैं कि वह सीमा पार से हो रहे आतंकवाद और इससे भारत में जीवन पर पड़ रहे असर को समझेगा।

आपको बता दें कि इससे पहले चीनी प्रवक्ता ने कहा था कि पेइचिंग कश्मीर के हालात पर नजर रखे हुए हैं और हमारा रुख इस पर नहीं बदला है। कश्मीर मुद्दे का इतिहास शुरू से ही विवादित रहा है और इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय तरीके से होना चाहिए।” याद रहे कि कश्मीर पर चीन की यह कोई पहली टिप्पणी नहीं बल्कि पाकिस्तान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए चीन समय-समय पर पाक के साथ कश्मीर राग अलापता रहता है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में विशेष बिल पेश कर जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की सिफारिस की थी। इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा अनुमोदित होते ही जम्मू-कश्मीर के सभी विशेष अधिकार समाप्त हो गए थे। तभी से जम्मू-कश्मीर में पूरे देश के समान कानून लागू होते हैं। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद से ही चीन और पाकिस्तान कश्मीर पर अपना-अपना राग अलापते रहते हैं।

1 लाख से ज्यादा हिंदुस्तानियों को मारना चाहते थे तबलीगी जमाती, जाकिर नाइक की B टीम की तरह कर रहे काम: वसीम रिजवी

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव के लिए तबलीगी जमात के लोग जिम्मेदार हैं। पूरा देश इस समय उन्हें, उनकी हरकतों के लिए कोस रहा है। इस बीच शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने भी इस जमात पर एक गंभीर आरोप लगाया है।

उनका कहना है कि इन जमातियों का उद्देश्य पूरे देश में 1 लाख से ज्यादा लोगों को मारने का था। उनका आरोप है कि ये जमात इस समय मलेशिया में छिपे भगौड़े जाकिर नाइक की बी टीम की तरह काम कर रही है और इन्हीं जमातियों की मदद से उसने भारत में आत्मघाती हमले की साजिश रची है। गुरुवार को दिए इस बयान को शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने किस आधार पर बोला, ये निश्चित ही पड़ताल के बाद मालूम होगा। लेकिन अभी उनके इस खुलासे ने हलचल मचा दी है।

उन्होंने कहा कि मुमकिन है कि इस साजिश में मलेशिया में रह रहे जाकिर नाइक भी शामिल हों। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मलेशिया के जमाती मिल रहे हैं, उससे जाकिर नाइक की साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि तबलीगी जमात जाकिर नाइक की बी टीम की तरह काम कर रहा है।

इसके बाद, देश में लगातार डॉक्टरों के साथ मारपीट करने की जमातियों की खबर पर वसीम रिजवी ने कहा कि डॉक्टरों को परेशान करके उनका मनोबल कम करने की कोशिश की जा रही है। यह भी इन सभी तबलीगी जमातियों की साजिश का एक हिस्सा है।

बता दें, वसीम रिजवी के इस बयान के बाद इसपर सियासत तेज हो गई है। शिया धर्म गुरु सैय्यद मोहम्मद मेंहदी ने वसीम रिजवी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘वसीम क्राइम ब्रांच अथवा सीबीआई के डायरेक्टर हैं क्या जो इन्हें इस तरह की जानकारी मिल रही है? साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि उनके (रिजवी) बयान से साफ है कि वे साजिशकर्ताओं के संपर्क में है जिसके कारण उन्हें इस तरह की जानकारी मिली है, इसलिए सबसे पहले इन्हें जेल में डालकर इनसे पूछताछ होनी चाहिए। उन्होंने कहा रिजवी जैसे लोग सांप्रदायिकता की राजनीति कर रहे है और समाज में विद्वेष फैला रहे है।

धर्मगुरु का कहना है कि राम मंदिर के फैसले के समय भी वसीम रिजवी ने उल्टे सीधे बयान देकर समाज को बाँटने का प्रयास किया था और अब जमातियों के बारे में बयान दिया जा रहा है। उन्होंने वसीम रिजवी को सलाह देते हुए कहा कि वो शिया वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन हैं इसलिए वो वक्फ़ की बात करें और उसकी भलाई के बारे में सोचें यही उनके लिए बेहतर है। उन्होंने कहा कि रिजवी जितना षडयंत्र यह बता रहे हैं और कह रहे हैं कि जमाती एक लाख लोगों को मारना चाहते हैं तो इस संबंध में उन्हें सुबूत देना चाहिए।

गौरतलब है कि वसीम रिजवी इससे पहले ईरान से एक फतवा मँगाकर इन तबलीगी जमातियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर चुके हैं। वसीम ने कहा था कि ईरान के फतवे में यह कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति महामारी को फैलाता है तो इसका जिम्मेदार वही होता है। अगर इसकी वजह किसी की मौत हो जाती है तो उसका जि़म्मेदार भी वही होगा। इतना ही नहीं इलाज का पूरा खर्चा भी उसी को देना होगा। लिहाजा मरकज के मुखिया होने के नाते मौलाना साद से जुर्माना वसूला जाए। 

I-CAN से अंत्योदय के नाम एक अलख: 2000 से ज्यादा वॉरियर्स, 25000+ जरूरतमंद लोगों की मदद

आज पूरी दुनिया कोरोना जैसी भीषण महामारी से जूझ रही है, लड़ रही है। दुनिया का शायद ही ऐसा कोई कोना बचा होगा, जहाँ ये महामारी ना पहुँची हो। सभी पीड़ित राष्ट्र अपने-अपने तरीकों से अपने लोगों को बचाने में लगे हुए हैं। भारत समेत कई सारे राष्ट्र इस महामारी से बचने के लिए वैक्सीन की खोज में भी लगे हुए है परंतु अभी तक कुछ ठोस नहीं हो पाया है।

सारे पीड़ित राष्ट्रों में पीपीई किट एवं मास्क की बढ़ती माँग को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई है। इस संदर्भ में भारत अग्रणिम राष्ट्रों में से एक है, जिसने चीन से लेकर कई सारे राष्ट्रों की मदद की है। भारत विश्वगुरु की तरह ये मदद अभी भी कर रहा है। अभी हाल ही में भारत ने अमेरिका, ब्राजील एवं कई पड़ोसी मुल्कों की हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दवा की माँग को पूरा किया है। किसी राष्ट्र ने भारत को जबरदस्त दोस्त, तो किसी ने PM मोदी को प्रभु हनुमान का नाम दे दिया। यहाँ हमारे प्रधानमंत्री का अलग रूप देखने को मिलता है, जिसे अगर मानवता का दैवीय रूप कहें तो अतिरेक ना होगा।

ये तो रही बात दवा एवं बीमारी की, जो फिलहाल बेहद महत्वपूर्ण बात है। लेकिन एक और सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसकी तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा वो है कि जब भारत समेत पूरी दुनिया लॉकडाउन मोड में है तो क्या ये न सोचा जाए कि कोई भूख से ना मरे? जरूरतमंद लोगों की कतार बड़ी लंबी है, जो भूख से परेशान हैं।

लॉकडाउन की वजह से गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के पास रोजी-रोटी के साधन छिन गए हैं। ये वो लोग हैं, जो रोज कमाते और उसी कमाई से रोज खाते हैं। इन्हें आप चाहे तो दिहाड़ी का मजदूर भी कह सकते हैं। जिनके पास कोई बैंक बैलेंस नहीं होता है। ये तबका हमेशा चोट खाता है। आज फिर से इन्हें चोट खानी पड़ रही है परंतु इस बार दोष सरकार का नहीं बल्कि इस गंभीर बीमारी का है, जिसने लोगों में त्राहिमाम जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

हमारी संस्कृति एवं सभ्यता के अनुरूप हमेशा की भाँति इस विपरीत परिस्थिति में बहुत लोग सड़कों पर आकर गरीब एवं जरूरतमंद लोगों में खाना एवं जरूरत की चीजों को बाँट रहे हैं। हर कोई अपने-अपने तरीकों से गरीब एवं असहाय की मदद कर रहा है। इस पंक्ति में कई सारे व्यक्ति, नेता, समाज सेवक, समाजसेवी संस्था, व्यापारी शामिल हैं।

परंतु कुछ लोगों का तो प्रयास ही अनूठा है, जिसमें बीजेपी के नेशनल गुड गवर्नेंस सेल के प्रमुख, राज्यसभा सांसद एवं पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ विनय सहस्रबुद्धे का नाम अग्रणी है। आप यूँ भी कह सकते हैं कि इनका प्रयास सबसे अलग है। इनका प्रयास दो स्तरों पर जारी है:

फूड पैकेट्स तैयार करते डॉ विनय सहस्रबुद्धे

पहला प्रयास वो जो काफी लोगों से मेल खाता है और वह है लोगों हेतु भोजन एवं जरूरत की चीजों की व्यवस्था करना। डॉ विनय सहस्रबुद्धे के निर्देशन में दिल्ली के करीब 1700-2000 गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को प्रतिदिन मुफ्त भोजन वितरित किया जा रहा है। इस संदर्भ में गुड गवर्नेंस सेल के सदस्य वीरेंद्र सचदेवा की अहम भूमिका है, जिन्होंने दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 में एक स्पेशल किचन तैयार करवाया है। यहाँ दिन-रात काम जारी है।

फूड पैकेट्स का वितरण करते डॉ विनय सहस्रबुद्धे

मयूर विहार के किचन में प्रतिदिन जरूरत के हिसाब से खाने के पैकेट्स तैयार किए जाते हैं और इसे दिल्ली के विभिन्न इलाकों की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद लोगों में वितरित किया जाता है। समय-समय पर डॉ विनय सहस्रबुद्धे इस किचन का दौरा भी करते रहते हैं और उसी के अनुरूप जरूरी दिशा-निर्देश भी देते रहते हैं।

यह पुनीत कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा किए जाने के बाद से ही प्रारंभ कर दिया गया था। तब से ही भोजन वितरण काम शुरू कर दिया गया था। भोजन के अलावा जो जरूरत की चीजें जरूरतमंद लोगों के बीच बाँटी जाती है, उनमें दाल, चावल, तेल, मसाले व अन्य चीजें भी शामिल हैं।

बात इतने से ही नहीं रुकती। डॉ विनय के निर्देशन में इंडियन सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी नेटवर्क (आईएसआरएन) नाम की संस्था भी काम कर रही है। ये संस्था आनंद विहार और अन्य जगहों पर लोगों में जरूरत की चीजों का वितरण करवा रही है। साथ ही साथ, इस संस्था ने एक ‘वॉलिंटियर रिज़र्व फोर्स’ का गठन भी किया है। जो लोग इस संकट की घड़ी में समाज और देश के लोगों की मदद करना चाहते हैं, वे इस प्लेटफॉर्म से जुड़ कर मदद कर सकते हैं।

और सबसे अंत में डॉ विनय सहस्रबुद्धे के दूसरे अनूठे प्रयास की कहानी। इसका भी उद्देश्य वही है, यानी समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की मदद, जिसे महान विचारक स्वर्गीय दीनदयाल उपाध्याय ने अंत्योदय की संज्ञा दी है। इस नए तरह के प्रयास/व्यवस्था के माध्यम से लोग मदद प्राप्त भी कर भी सकते हैं और मदद कर भी सकते हैं।

इसमें एक अलग तरीके के प्लेटफॉर्म की स्थापना की गई है, जहाँ दो तरह के लोगों को आपस में कनेक्ट किया जा रहा है। एक वो जो सहायता पाना चाहते हैं और दूसरे वो जो सहायता करना चाहते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इसे “सीकर्स एंड गिवर्स” प्लेटफॉर्म के नाम से भी समझा जा सकता है। इस अनूठे प्लेटफॉर्म का नाम आई-कैन: इंडिया को-विन ऐक्शन नेटवर्क (I-CAN: India Co-Win Action Network)” है, जिसे डॉ विनय सहस्रबुद्धे ने दो संस्थाओं (अटल इन्क्यूबेशन सेंटर-रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी एवं कनेक्टिंग ड्रीम्स फाउंडेशन) के संयुक्त माध्यम से लॉन्च किया है।

अब तक 25 राज्यों से करीब 2,000 से ज्यादा कोविन वॉरियर्स (सहायता देने वाले) इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं। साथ ही साथ करीब 25,000 जरूरतमंद लोगों को मदद भी मिल चुकी हैं। डॉ विनय का उद्देश्य बड़ा ही पुनीत है और वो यह है कि “कोई भी भूखा ना रहे। वो प्रधानमंत्री मोदी के उद्देश्य “सबका साथ, सबका विकास” को लेकर सदैव आगे बढ़े हैं। और आज एक बार फिर इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए वो बहुतेरे कदम उठा रहे हैं, जो कि सराहनीय है।