कोरोना वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार (अप्रैल 8, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कई जानकारियाँ व सूचनाएँ साझा की। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि भारत में अभी तक 402 लोग ठीक होकर अस्पतालों से डिस्चार्ज हो चुके हैं। फ़िलहाल देश में 5194 कंफर्म कोरोना पॉजिटिव केस अब तक रिपोर्ट हुए हैं। पिछले एक दिन में 773 कोरोना पॉजिटिव केस मिले हैं, जो कि बड़ी उछाल है। अब तक कोरोना की वजह से 149 लोगों की मौत हुई है। मंगलवार को ही अकेले 32 लोगों की मौत हुई थी
मंत्रालय ने बताया कि सरकार कोरोना वायरस से उपजे ख़तरों को देशव्यापी स्तर पर मॉनीटर करना चाहती है। इसी के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कोविड-19 मैनेजमेंट के लिए एक ट्रेनिंग मॉड्यूल लॉन्च किया है, जिसका नाम है ‘इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग पोर्टल’। स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि ये पोर्टल दीक्षा प्लेटफॉर्म से संबंधित है। इस प्लेटफॉर्म के द्वारा डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स और साथ ही राज्यों के अधिकारी गण, सिविल डिफेंस अधिकारी, एनसीसी, एनएसएस और रेड क्रॉस सोसाइटी के स्वयंसेवकों को और फ्रंटलाइन वर्कर्स को जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाए जाएँगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अप्रैल को सभी मुख्यमंत्रियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें विचार किया जाएगा कि लॉकडाउन बढ़ाई जाए या नहीं। आगे की रणनीति क्या होगी, इस सम्बन्ध में पीएम मोदी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से विचार-विमर्श करने के बाद तय करेंगे। प्रधानमंत्री ने आज सांसदों के साथ भी बातचीत की, जिसमें उन्होंने कहा कि देश में स्थिति ‘सामाजिक आपातकाल’ के समान है इसके लिए कड़े फैसलों की जरूरत है। पीएम मोदी ने सलाह दी कि हमें सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि राज्यों, जिला प्रशासन और विशेषज्ञों ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है।
Till date total 402 people have been discharged, total 5194 positive confirmed case have been reported. In last one day 773 positive cases were reported. Total 149 deaths have been reported and around 32 people have died yesterday: Lav Aggarwal,Joint Secy,Health Ministry #COVID19pic.twitter.com/JUaLNCT270
भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान परिषद ने बताया कि अभी तक उसने कुल 1,21,271 टेस्ट किए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आश्वस्त किया कि देश में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की कोई कमी नहीं होगी। मंत्रालय ने कहा कि न कोई कमी है और न ही भविष्य में ऐसा होने की कोई संभावना है। वहीं यूपी के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि आगरा में कोरोना वायरस के सर्वाधिक 22 हॉटस्पॉट हैं, जिसके बाद गाजियाबाद (13), गौतम बुद्ध नगर (12) और कानपुर (12) का नंबर आता है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए लॉकडाउन की अवधि पर विचार करने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (अप्रैल 8, 2020) को विपक्ष के नेताओं व राज्यों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इस कॉन्फ्रेंसिंग में उन्होंने देश में व्याप्त हालातों पर विपक्षी नेताओं से चर्चा की। साथ ही इस बात के संकेत दिए कि लॉकडाउन 14 अप्रैल के बाद भी बढ़ सकता है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस के बढ़ते केसों को देखते हुए उनके विचार से यह संभव नहीं है कि लॉकडाउन को 14 अप्रैल को खत्म कर दिया जाए। पीएम मोदी ने कहा कि वह मुख्यमंत्रियों से इस विषय में बात करेंगे लेकिन उन्हें यह मुश्किल लग रहा है कि लॉकडाउन को जल्द ही खत्म किया जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस से पहले और उसके बाद का जीवन बिल्कुल भी एक सा नहीं रहेगा। पीएम मोदी ने राजनेताओं से कहा कि कोरोना वायरस के खत्म होने के बाद कई व्यावहारिक, सामाजिक और व्यक्तिगत बदलाव होंगे।
Situation in country is akin to a ‘social emergency’; it has necessitated tough decisions and we must continue to remain vigilant. States, District administrations and Experts have suggested extension of Lockdown to contain spread of the virus: PM during interaction with MPs https://t.co/UcFwyPlgQA
प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में कहा कि देश में अभी सामाजिक आपातकाल जैसी स्थिति है और ऐसे में मुश्किल फैसले लेने जरूरी हैं। हमें सतर्क रहना होगा। राज्यों, जिला प्रशासन और विशेषज्ञों ने वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन बढ़ाने की सलाह दी है।
बैठक में शामिल हुए ओडिशा के सांसद व बीजू जनता दल के नेता पिनाकी मिश्रा ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन एक बार में नहीं खोला जाएगा। पिनाकी मिश्रा के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सदन में विपक्षी पार्टी के नेताओं व अन्य पार्टियों से संसद में कहा कि 14 अप्रैल को देशभर में एक दम से लॉकडाउन नहीं खुलने जा रहा है।
Situation in country is akin to a ‘social emergency’; it has necessitated tough decisions and we must continue to remain vigilant. States, District administrations and Experts have suggested extension of Lockdown to contain spread of the virus: PM during interaction with MPs https://t.co/UcFwyPlgQA
उल्लेखनीय है कि ये बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार लॉकडाउन को बढ़ाने को लेकर मंथन करने में जुटी है। इसके अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूदा स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन बढ़ाने की सलाह दे चुके हैं। ताजा जानकारी के अनुसार 5 राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और केरल के मुख्यमंत्री भी लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के पक्ष में हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आज इस बैठक में कॉन्ग्रेस के गुलाम नबी आजाद, तृणमूल कॉन्ग्रेस के सुदीप बंधोपध्याय, शिवसेना के संजय राउत, बीजद के पिनाकी मिश्रा, राकांपा के शरद पवार, सपा के रामगोपाल यादव, शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, वाईएसआरसीपी के विजय साई रेड्डी, मिथुन रेड्डी और जदयू के राजीव रंजन समेत कई सांसद शामिल हुए थे। बता दें यह पहली बार है जब मोदी ने विपक्षी सांसदों के साथ कोरोना पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की। इससे पहले वे सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, क्रिकेटर्स, फिल्मी सितारों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों के कारण योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य के उन 15 जिलों को सील करने का फैसला किया है जहाँ संक्रमण का ख़तरा ज्यादा बढ़ गया है। ये जिले राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण का हॉटस्पॉट माने जा रहे हैं। यह आदेश बुधवार (अप्रैल 8, 2020) की रात 12 बजे से लागू हो जाएगा और 15 अप्रैल की सुबह तक जारी रहेगा। सील करने का अर्थ है कि ये जिले ‘कम्प्लीट शटडाउन’ में रहेंगे और किसी को भी बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी।
जिन जिलों को सील किया जा रहा, वे हैं- वाराणसी, लखनऊ, महराजगंज, बस्ती, बुलंदशहर, नोएडा, गाज़ियाबाद, शामली, कानपुर, सीतापुर, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, फ़िरोज़ाबाद और बरेली। आगरा में आज ही कोरोना वायरस से पहली मौत होने की ख़बर है। इसके अलावा एक माँ-बेटी भी संक्रमित पाई गई है। राज्य में कोरोना के मामले बढ़ कर 332 तक पहुँच गए हैं। इनमें से 3 लोगों की मौत हो चुकी है और 21 लोग ठीक हुए हैं। ऐसे में सरकार सभी एहतियाती क़दम उठा रही है।
The 100% lockdown in the hotspots of the 15 districts will remain till the morning of April 15: Additional Chief Secretary (Home) Awanish Awasthi pic.twitter.com/dRZyleKWii
राज्य के मुख्य गृह सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि इन जिलों में अन्य इलाकों से ज्यादा सख्ती रखी जाएगी। जिलों को सील करने के बाद किस प्रकार की रणनीति अपनाई जाएगी, इसका खाका वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की बैठक में तैयार किया जाएगा। जहाँ कोरोना के मरीज मिले हैं, वहाँ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ऐसा गृह सचिव ने बताया। आगरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों को सील कर ‘कम्प्लीट लॉकडाउन’ किया गया, वहाँ कोरोना के संक्रमण को रोकने में सफलता मिली। यही फॉर्मूला अब इन 15 राज्यों में आजमाया जाएगा।
15 districts – including Noida, Ghaziabad, Meerut, Lucknow, Agra, Shamli, Saharanpur – which have viral load of #COVID19, to be sealed. Only home delivery & medical teams will be allowed there. It’s being done to prevent community spread,as numbers are high: RK Tiwari, Chief Secy pic.twitter.com/5x3xfkFoV4
इस दौरान सभी ज़रूरी सामान लोगों के घरों तक पहुँचाए जाएँगे, ताकि उन्हें किसी भी चीज की ख़रीददारी के लिए बाहर न निकलना पड़े। ज़रूरी सामग्रियों की ‘होम डिलीवरी’ की व्यवस्था की गई है। यहाँ तक कि अभी तक जो कर्फ्यू पास जारी किए गए हैं, उन सभी की समीक्षा की जाएगी। शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूपी सरकार बताएगी कि शटडाउन के अंतर्गत कैसे काम होगा। बाकी डिटेल्स भी तभी दिए जाएँगे।
24 मार्च से लागू हुए 21 दिन के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को आज 15 दिन बीत चुके हैं। अब जैसे-जैसे 14 अप्रैल नजदीक आ रहा है। सबके मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोरोना के बढ़ते कहर के बावजूद ये लॉकडाउन आने वाले 7 दिन में समाप्त हो जाएगा और लोग सड़कों पर खुलेआम संक्रमण के खतरे में घूमेंगे या फिर राज्य सरकारें इस स्थिति को काबू करने के लिए लॉकडाउन को आगे बढ़ाएगी?
मौजूदा जानकारी के अनुसार, भारत में इस समय कोरोना से प्रभावित केसों की संख्या 5 हजार के पार चली गई है और लगातार लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की माँग की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के मुख्यमंत्रियों से कहा भी है कि वे इसपर विचार करें। जिसके बाद कई राज्य के मुख्यमंत्रियों ने इसे बढ़ाने पर बात की है और इसके खुलने पर अपनी चिंता जाहिर की है। साथ ही राज्यों ने कई सुझाव भी दिए हैं।
PM मोदी ने क्या कहा?
आज विपक्षी नेताओं के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि यह मुश्किल प्रतीत हो रहा है कि लॉकडाउन को जल्द ही खत्म किया जा सके। उन्होंने कहा कोरोना वायरस से पहले और उसके बाद का जीवन बिल्कुल भी एक सा नहीं रहेगा। कई सामाजिक, व्यवहारिक, व्यक्तिगत बदलाव होंगे।
बता दें, कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर विचार किया जा रहा है कि आने वाले समय में लॉकडाउन की समयावधि बढ़ाई जाएगी या नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों और लेफ्टिनेंट गवर्नर से बातचीत करके अपना फैसला लेंगे।
याद दिला दें, पीएम मोदी ने पिछली बैठक में लॉकडाउन हटाने को लेकर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सुझाव माँगे थे, जिससे कि गरीब और प्रवासी श्रमिकों की परेशानी खत्म हो सके। न्यूज 18 की खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि सचिवों के साथ ही नीति आयोग के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि 15 अप्रैल के बाद भी पूर्ण रूप से लॉकडाउन के चलते अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान होगा। इसलिए वे उन क्षेत्रों में प्रतिबंध खत्म करने के पक्ष में हैं जो ‘रेड जोन’ नहीं है।
लॉकडाउन आगे बढ़ाने की राज्यों ने दी सलाह
उल्लेखनीय है कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच लॉकडाउन की अवधि 14 अप्रैल की रात खत्म हो जाएगी। जिसे लेकर कई राज्य चिंता में हैं। जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली समेत कई प्रदेशों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है। इसी कारण वे तो किसी भी हाल में अपने राज्यों से लॉकडाउन खोलने के बारे में सोच भी नहीं सकते। इसलिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि लॉकडाउन को और दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया जाए। क्योंकि अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को सुधारा जा सकता है, लेकिन लोगों की जान ज्यादा जरूरी है।
पुडुचेरी के मुख्यमंत्री ने बयान दिया कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की माँग करेगी। लोगों का घरों में रहना ही कोरोना वायरस को फैलने से बचा सकता है। बता दें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से भी इसी तरह की अपील की गई।
बिना अपवाद जून तक बंद होंगे स्कूल-कॉलेज और धार्मिक स्थल?
इंडिया टुडे के मुताबिक लॉकडाउन को लेकर आई अपीलों में सभी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को कहा जा रहा है। राज्यों का कहना है कि प्रतिबंध सभी धर्मों के लिए लागू हो और इसमें कोई छूट नहीं होनी चाहिए।
राज्यों का यह भी कहना है कि स्कूल और कॉलेज बिना किसी अपवाद के जून तक बंद रखने होंगे। साथ ही सरकारी क्षेत्र में सभी स्थानांतरण और पोस्टिंग को छह महीने के लिए टालनी होगी, क्योंकि, अगर ऐसा हुआ तो बड़े पैमाने पर भीड़ शामिल होगी।
उनका कहना है कि स्थिति में सुधार होने तक होटल, रेस्टोरेंट और बार पूरी तरह से लॉकडाउन के तहत बंद होंगे। जब तक स्थिति में सुधार नहीं होता तब तक शादियों, अंतिम संस्कारों, कॉर्पोरेट टाउन हॉल बैठक जैसे सार्वजनिक कार्यों को लॉकडाउन के तहत बंद रहना चाहिए।
पूरे देश में इस आपदा की स्थिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूरी तत्परता से जनसेवा में लगा हुआ है। संघ से ही सम्बद्ध संगठन ‘सेवा भारती’ ने ही अकेले इतना काम किया है और कर रही है, जिससे कई लोगों को भोजन-पानी-घर से लेकर दवाएँ तक मिली हैं। ‘सेवा भारती’ का मुख्यालय दिल्ली में है, जहाँ से पूरे देश में हो रहे राहत कार्य की मॉनिटरिंग की जाती है। केरल में इसके सबसे ज्यादा स्वयंसेवक लगे हुए हैं। वहाँ ‘सेवा भारती’ के क़रीब 1 लाख स्वयंसेवक जनसेवा में लगे हुए हैं। बता दें कि केरल वही राज्य है जहाँ वामपंथियों की सरकार चल रही और संघ से जुड़े लोगों पर अक्सर हमले होते रहते हैं।
‘सेवा भारती’ के अखिल भारतीय महामंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि संगठन यह नहीं देखता कि किस राज्य में किसकी सरकार है? जिसे मदद की ज़रूरत है उसका जाति-धर्म या पहचान क्या है? उन्होंने बताया कि संगठन विशेषकर उन जगहों तक पहुँचने में लगा हुआ है, जहाँ सरकारी कर्मचारी भी नहीं पहुँचे है।
देश भर में 2.1 लाख स्वयंसेवक काम में लगे हुए हैं, जो ‘सेवा भारती’ के बैनर तले कार्यरत हैं। संगठन ने भारत में कुल 1200 संस्थाओं के साथ संपर्क साधा है और उन सभी के साथ मिल-जुलकर काम कर रही है। इन 1200 संस्थाओं के साथ मिल कर ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई इलाक़ा छूट न जाए। श्रवण ने बताया कि 26 लाख लोगों तक उनकी सीधी पहुँच है, जिन्हें भोजन कराया जा रहा है। ऐसे कई लोग हैं जिनके भोजन की पूरी जिम्मेदारी ‘सेवा भारती’ ने ही उठाई है।
सभी राज्यों के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। कोई व्यक्ति अगर किसी समस्या में फँस जाता है तो वो इन नंबरों पर कॉल कर मदद माँग सकता है। रेलवे स्टेशनों से लेकर बस स्टेशनों तक फँसे लोगों की मदद की जा रही है। सबसे बड़ी बात है कि दिल्ली के रेडलाइट एरिया में रहने वाली 986 महिलाओं तक लगातार राशन-सामग्री पहुँचाई जा रही है।
‘सेवा भारती’ का ज्यादा जोर नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों तक है, जहाँ सुदूर सीमावर्ती इलाक़ों तक पहुँचने के लिए सरकारी कर्मचारियों की मदद ली जा रही है। अब तक संगठन जो भी कर रहा है, वो सिर्फ़ अपने संसाधनों के दम पर बिना किसी सरकारी सहायता के कर रहा है। श्रवण कुमार बताते हैं कि संगठन सरकार से वित्तीय सहायता लेता भी नहीं है। सिर्फ़ सुदूर इलाक़ों में पहुँचने के लिए प्रशासन की मदद ली जाती है। नॉर्थ-ईस्ट में रेलवे स्टेशनों पर चादर और कम्बल वितरित किए जा रहे हैं। लोगों तक स्वच्छ जल पहुँचाया जा रहा है। उन्हें सरकारी और मेडिकल दिशा-निर्देशों के बारे में बता कर जागरूक भी किया जा रहा है।
इसके अलावा घुमंतू लोगों का भी ध्यान रखा जा रहा है, जिनके पास सरकार भी नहीं पहुँच पाती है। बर्मा सीमा पर ‘सेवा भारती’ जनसेवा कर रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पदाधिकारी और स्वयंसेवक एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं और सारे काम सुचारु रूप से चलते रहते हैं। नॉर्थ-ईस्ट के कई छात्र ‘सेवा भारती’ के स्कूलों में पढ़ते हैं। कइयों को उनके घर सकुशल पहुँचाया गया है। वहीं कई की अभी भी देखभाल की जा रही है। जिन इलाक़ों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, वहाँ ख़ास ध्यान दिया जा रहा है।
इन सबके अलावा ‘सेवा भारती’ घरेलू मास्कों का उत्पादन भी कर रहा है। अकेले जम्मू में 1 लाख मास्क बाँटे गए हैं। जगह-जगह मास्क तैयार किए जा रहे हैं। जम्मू के बाद केरल में सबसे ज्यादा मास्क वितरित किए गए हैं। हालाँकि, श्रवण कहते हैं कि उनके संगठन का सभी राज्यों पर बराबर ध्यान है और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचने की कोशिश की जा रही है। कोरोना की आपदा ख़त्म होने तक ‘सेवा भारती’ इस कार्य में लगातार लगा रहेगा।
इससे पहले हमने बताया था कि अकेले दिल्ली में सेवा भारती के 45 किचेन काम कर रहे हैं। समाजसेवा में डॉक्टरों और सरकार की सलाहों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सोशल डिस्टन्सिंग का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वो एक स्थानीय बुजुर्ग की पूरी जिम्मेदारी उठाए और उनकी दवाओं से लेकर भोजन तक का इंतजाम किया जा रहा है। पूरी दिल्ली में क्राउड मैनेजमेंट के लिए भी काम किया जा रहा है। जैसे, आनंद विहार में जब मजदूरों की भीड़ उमड़ पड़ी तो 250 संघ कार्यकर्ताओं ने वहाँ जाकर लोगों को सँभालने में पुलिस की मदद की।
‘आज तक’ ने दिल्ली में ‘सेवा भारती’ के कम्युनिटी किचेन के लिए केजरीवाल की पीठ थपथपा कर फेक न्यूज़ फैलाया था। सच्चाई ये है कि इस कम्युनिटी किचेन को ‘झंडेवालान मंदिर कमिटी’ और समाजसेवा संगठन ‘सेवा भारती’ मिल कर चला रही है। इसीलिए आजतक ने बाद में हेडिंग को बदल दिया और ‘कैसा है केजरीवाल का कम्युनिटी किचेन’ की जगह ‘कैसा है मंदिर का कम्युनिटी किचेन’ कर दिया।
मध्य प्रदेश में पुलिस को निशाना बनाने की घटनाएँ थम नहीं रही। अब इंदौर से ऐसी दो घटनाएँ सामने आई है। इनमें से एक में गश्ती कर रहे जवानों पर पत्थरबाजी की गई तो दूसरी घटना में बाइक सवार युवकों ने रोके जाने पर पुलिसकर्मियों पर थूक दिया।
मंगलवार (अप्रैल 7, 2020) की शाम शहर के चंदन नगर में पुलिस पर हमला किया गया। यह इलाका कोरोना वायरस संक्रमण के लिहाज से संवदेनशील है। नगर सुरक्षा समिति के सदस्यों के साथ गश्ती कर रहे कॉन्स्टेबल सुरेंद्र सिंह मोहल्ले में ये देखने गए थे कि लॉकडाउन का सही से पालन किया जा रहा है या नहीं। कुछ लोग सड़क पर खुलेआम मँडरा रहे थे।
जब पूछताछ की गई तो स्थानीय लोगों ने बहाना बनाया कि वो सब्जी ख़रीदने के लिए निकले हैं लेकिन सारी दुकानें जिला प्रशासन द्वारा बंद कराई जा चुकी हैं। जब उन्होंने स्थानीय लोगों से घर के अंदर जाने को कहा तो उन्होंने बात मानना तो दूर, उलटा पत्थर उठा कर चलाने लगे। पुलिस और समिति के पास कोई और विकल्प नहीं बचा तो उन्हें वहाँ से भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी।
पुलिस ने इस मामले में नासिर, इस्लाम, समीर और सलीम को गिरफ्तार किया है। इन सब पर ‘नेशनल सिक्योरिटी एक्ट’ के तहत कार्रवाई की जाएगी। पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और एसपी ने आदेश दिया है कि कॉन्स्टेबल 6 जवानों को लेकर ही गश्ती पर जाएँ। एसपी ने बताया कि पुलिस क़ानून का उल्लंघन करने वाले ऐसे लोगों से प्रभावी तरीके से निपट रही है। ‘न्यूज़ नेशन टीवी’ के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया ने आरोपितों का नाम बताते हुए कहा कि मानवता एक बार फिर से शर्मसार हुई है।
इस मामले में कुल 6 आरोपित थे, जिसमें से एक अभी भी फरार है। एसपी एमसी जैन ने पुलिस कॉन्स्टेबल सुरेंद्र की भी तारीफ़ की और कहा कि उन्होंने बहादुरी दिखाई। कॉन्स्टेबल ने वापस लौट कर हमलावरों को चिह्नित किया था। इससे पहले ताप्ती बाखल में महिला डॉक्टरों को निशाना बनाया गया था। उस मामले में 13 में से 4 आरोपितों के ख़िलाफ़ रासुका लगाया गया है। इंदौर में अब तक कोरोना के 173 मामले आ चुके हैं और 16 लोग मौत का ग्रास बन चुके हैं, इसीलिए यहाँ स्थिति चिंताजनक है।
दूसरी घटना शहर के छावनी चौराहे की है। पुलिसकर्मियों ने बाइक सवार युवकों मोइज अली और जुजेर हुसैन को रोका। उन्होंने मास्क नहीं पहन रखा था और बाहर निकलने की वजह भी नहीं बता पाए। पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई की बात कही तो उन्होंने उन पर थूक दिया। एफआईआर दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले इंदौर में डॉक्टरों की टीम पर भी हमला हो चुका है। भोपाल में भी विशेष समुदाय की भीड़ ने पुलिस पर धारदार हथियारों से हमला कर 2 से 3 पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। उससे पहले 3 अप्रैल 2020 को खरगोन में पुलिस पर हमला किया गया था।
खुशबूदार मसाले देखकर जिस तरह कोई भी लजीज खाना बनाने के लिए उत्सुक हो उठता है। वैसे ही मीडिया गिरोह के लोग एक शब्द को भी अपने पक्ष में देखकर उसे अपना एंगल देने के लिए आतुर हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही कल डोनॉल्ड ट्रंप की स्पीच के बाद हुआ। जिसमें उन्होंने रिटैलिएट शब्द का प्रयोग किया। इस शब्द का हिंदी मतलब ‘बदला लेना’ होता है। इस शब्द का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति ने एंटी मलेरिया ड्रग ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ की सप्लाई बंद करने की बात सुनकर भारत के संदर्भ पर किया।
अब इसके बाद मीडिया में खबरें चलीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को धमकाया है कि अगर सप्लाई रोकी तो इसका बदला लेंगे और इसी आधार पर लिबरल गिरोह ने इस शब्द को खूब भुनाया। साथ ही इसे मोदी सरकार की विफलता के रूप में प्रदर्शित किया। लेकिन आपको बता दें जहाँ मीडिया गिरोह अपनी रूचि दिखाता है, उसका वास्तविकता में सच या तो सरकार के ख़िलाफ़ होता है या फिर किसी के सीधे से बयान का ऑल्टर्ड वर्जन।
सोमवार को भी डोनॉल्ड ट्रंप ने ऐसा कुछ नहीं कहा, जैसे मीडिया में प्रेषित हुआ। उन्होंने एक रिपोर्टर के सवाल पर अपनी टिप्पणी की। जिसमें डोनॉल्ड ट्रंप से एक रिपोर्टर ने पूछा था कि यदि मोदी सरकार ने ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो क्या वे भारत के खिलाफ प्रतिशोध दिखाएँगे?
एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक रिपोर्टर द्वारा पूछे गए इस सवाल का जवाब देते हुए, डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह आश्चर्यचकित होंगे यदि भारत दवा के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं हटाता है और ये भी कहा कि उन्होंने दवा की आपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी से भी इस मुद्दे पर बात की थी। इसके अलावा सबसे दिलचस्प ये दिखा कि ट्रम्प ने भी अपने संबोधन में कई बार दोहराया और बताया कि आखिर भारत अमेरिका के लिए कैसे एक महत्वपूर्ण साझेदार है और उम्मीद करता है कि भारत अमेरिका को आवश्यक दवाओं की आपूर्ति करेगा।
अपने बयानों के अंत में, डोनाल्ड ट्रम्प ने एकदम सामान्य तरह से कहा कि यदि भारत ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं हटाता तो किसी प्रकार का तो रिटैलियट होगा।
यहाँ याद दिला दें कि डोनॉल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उनका फर्ज इस समय अपने लोगों को आश्वास्त करना हैं। ऐसे में यदि कोई पत्रकार ऐसे सवाल करेगा तो उन्हें इसके बदले जवाब देना होगा। पत्रकार के सवाल के बदले जो प्रतिक्रिया दी थी। वो ये थी कि आखिर प्रतिशोध क्यों नहीं होगा। ये जवाब अपने आप में संकेत हैं कि उन्होंने भारत पर आक्रमण या उससे कोई सुविधा छीनने जैसी बातें नहीं की थी। बल्कि उन्होंने एक गैर-गंभीर सवाल का जवाब स्थिति को परखते और अपने पद को देखते हुए दिया था।
अब यहाँ पर डोनॉल्ड ट्रंप और पत्रकार के बीच हुई बातचीत का अंश है। खुद समझिए कि आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति और पत्रकार ने किस तरह बात की और इसे सोशल मीडिया पर किस तरह संप्रेषित किया गया।
रिपोर्टर:धन्यवाद महोदय। क्या आप मेडिकल सामानों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के अपने निर्णय के प्रति चिंतित हैं, जैसे कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’का निर्यात नहीं करने का निर्णय लिया है?
ट्रंप- अगर वे ऐसा निर्णय लेंगे तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मुझे अभी उनका निर्णय नहीं पता। मुझे मालूम है कि उन्होंने दवाई अन्य देशों के लिए प्रतिबंधित की हैं। मैंने उनसे कल बात की। हमारी अच्छे से बात हुई। हम देखेंगे कि अब आगे क्या होगा। मुझे बहुत हैरानी होगी कि अगर ऐसा होता है। क्योंकि आप जानते हैं कि भारत हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अच्छा व्यवहार करता है। कई वर्षों से, वे यहाँ के व्यापार का लाभ उठा रहे हैं। इसलिए मुझे आश्चर्य होगा कि अगर ये उनका निर्णय होगा। वह मुझे फोन करके बताएँगे।
ट्रंप- मैंने रविवार सुबह उनसे बात की। मैंने उन्हें फोन किया और कहा, “अगर आप हमारे लिए दवाइयों की आपूर्ति करेंगे तो हम इसकी सराहना करेंगे।” इसके बावजूद अगर वे दवाई नहीं भेजते, तो भी कोई बात नहीं। लेकिन हाँ, इसके मद्देनजर बदला लिया जाएगा। आखिर क्यों नहीं लेंगे?
इसके अलावा यदि बाकी की बातचीत आपको सुननी है तो आप नीचे दिए लिंक पर पूरी बात को सुन सकते हैं। उक्त अंश सिर्फ़ ये बात स्पष्ट करने के लिए हैं कि बदला लेने की कोई बात ट्रंप ने भारत के लिए नहीं की।
यहाँ बता दें कि ट्रंप से पूछे गए सवालों का पर्याय रिपोर्टर के लिए यह जानना था कि ट्रंप के लिए दवाई पर बैन लगना एक चिंता का विषय है या फिर नहीं। जिसपर ट्रंप ने सीधे रीटैलिएशन की बात नहीं की। बल्कि उसके बदले पीएम मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत का उल्लेख किया।
हालाँकि, यदि सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियोज को बिना संदर्भ के देखा जाए तो बिलकुल यही लगेगा कि उन्होंने धमकी ही दी। मगर, इसपर यदि पूरी बातचीत सुनी जाए। सवाल संदर्भ और जवाब के क्रम पर गौर किया जाए तो स्पष्ट होगा कि रिपोर्टर द्वारा पूछे गए प्रश्न के संदर्भ में ट्रम्प वास्तव में अपने स्वयं के निर्णय के खिलाफ संभावित प्रतिशोध के संबंध में उत्तर दे रहे थे। इसलिए ये कह सकते हैं कि डोनॉल्ड ट्रंप को मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया सही फ्रेम में देनी चाहिए थी। मगर ये नहीं कह सकते हैं कि उन्होंने प्रतिशोध की बात की।
उल्लेखनीय है कि जब से कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ तब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दवा के उपयोग की वकालत कर रहे हैं और ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ को एक “गेम-चेंजर” के रूप में पेश किया है, भले ही स्वास्थ्य सलाहकारों ने महामारी के खिलाफ इसकी प्रभावकारिता के बारे में अनिश्चितता की बात की है।
बता दें कि मलेरिया के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक पुरानी और सस्ती दवा ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ है। जिसे राष्ट्रपति ट्रम्प कोरोनोवायरस के लिए एक व्यवहार्य चिकित्सीय समाधान के रूप में देखते हैं। वे इसे इस समय इसलिए भी महत्तवपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस से अब तक वहाँ 10,000 से अधिक अमेरिकी मर चुके हैं और 3.6 लाख से अधिक संक्रमित हैं। ऐसे में भारत ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, जो एक मलेरिया-रोधी दवा है, जिसकी इस महामारी से रोगियों की मदद करने में संभावित उपयोगिता को देखते हुए बहुत माँग है।
शायद, डोनाल्ड ट्रम्प ने उम्मीद की थी कि भारत, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है, वह अमेरिका में ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ के निर्यात मानदंडों में ढील दे सकता है। लेकिन भारत द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद डोनॉल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके मदद माँगी थी ताकि वे अमेरिका अपने देश में कोरोनोवायरस रोगियों की बढ़ती संख्या के इलाज के लिए ‘हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन’ की गोलियों की बिक्री की अनुमति दे सकें।
बता दें, कई देशों की गुहार के बाद भारत ने दवाई के निर्यात का दोबारा फैसला ले लिया है और अब भारत कुछ देशों के मामलों के आधार पर विशिष्ट खेपों के निर्यात की अनुमति देगा।
कोरोना महामारी से जूझ रहे पूरे विश्व के बीच भारत दूसरे कई देशों के लिए अपनी पहचान के अनुरूप मददगार साबित हो रहा है। इतना ही नहीं अपने यहाँ स्थिति तो काबू में किए हुए है। इसे लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर दूसरे कई देश मोदी सरकार के लॉकडाउन को सरकार का साहसिक फैसला बताते हुए भारत सरकार की नीतियों की प्रशंसा कर चुके हैं। कुछ इसी तरह से ब्राजील के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख ब्राजील को हनुमान की तरह संजीवनी देने के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया है।
कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहे कई देशों को भारत द्वारा मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन उपलब्ध कराए जाने के बाद से पूरे विश्व में भारत की प्रशंसा हो रही है। दरअसल, दूसरे देशों की मदद के लिए काफी कारगर मानी जा रही इस दवा के निर्यात पर लगे बैन को भारत सरकार ने हटा लिया है। इसी क्रम में भारत से ब्राजील दवा पहुँचने के बाद राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की सप्लाई के लिए भारत का खूब शुक्रिया अदा किया।
ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिख कर उनका शुक्रिया अदा किया और कहा कि कोरोना वायरस की महामारी के समय में जिस तरह भारत ने ब्राजील की मदद की है, वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा रामायण में हनुमान जी ने राम के भाई लक्ष्मण की जान बचाने के लिए संजीवनी लाकर की थी।
ब्राजील के राष्ट्रपति द्वारा पीएम मोदी को लिखे गए पत्र का कुछ अंश, साभार- न्यूज 18
आपको बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस दवा के लिए पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत ने अपनी जरूरत के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवाई के निर्यात पर रोक लगाई थी, लेकिन पीएम मोदी सही हैं, उन्होंने मदद की। बता दें कि अब तक 30 देश भारत सरकार से इन दवाओं की माँग कर चुके हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले WHO के विशेष दूत डॉक्टर डेविड नाबरो ने कहा था कि समय से पहले पूरे देश में लॉकडाउन लगाना सरकार का एक साहसिक फैसला है। इससे महामारी को स्थानीय स्तर पर रोकने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश में इसे देरी से लागू किया होता तो शायद भारत जैसे देश में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते। उन्होंने अमेरिका जैसे देश की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ देशों में लॉकडाउन का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
WHO के विशेष दूत डॉक्टर डेविड नाबरो का कहना है कि भारत में लॉकाडउन को जल्दी लागू करना एक दूर की सोच थी। साथ ही ये सरकार का साहसिक फैसला था। #IndiaFightsCoronahttps://t.co/EifxlW1qwn
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि कोरोनावायरस महामारी के समय भारत ने हमेशा कहा है कि ऐसे कठिन हालात में पूरे विश्व को एक होकर इससे लड़ना होगा। इसमें मानवीय पहलू के बारे में भी सोचना होगा। भारत ने कहा कि वह इन दवाओं को उन जरूरतमंद देशों को भी भेजेगा जो इस बीमारी से सबसे अधिक ग्रसित हैं।
इंदौर में पिछले एक हफ्ते में मुस्लिमों के कब्रगाह पर आने वाले शवों में औचक बढ़ौतरी देखने को मिली है। जानकारी के अनुसार, इंदौर में मुस्लिमों के 4 कब्रिस्तान हैं जिनमें 1 से 6 तारीख के बीच में 127 लोगों के शवों को दफनाया गया और 7 वें दिन तक ये आँकड़ा 145 पहुँच गया। जबकि पुरानी डेटा को देखें तो मालूम पड़ता है कि पूरे मार्च में इन 4 कब्रिस्तान में सिर्फ़ 130 लोगों के शव आए।
भास्कर का दावा है कि एक दिन में ही 18 जनाजे सिर्फ उन्हीं चार कब्रिस्तान में पहुँचे जो क्वारंटाइन एरिया के लिए ही हैं। बता दें 7 अप्रैल तक जितने भी कोरोना के कारण मौत के मामले आए उनमें से अकेले 13 सिर्फ़ इंदौर से हैं। इसलिए प्रशासन के लिए ये खुलासा एक चिंता का विषय है।
रिपोर्ट के अनुसार, खजराना, चंदनगर, रानीपुर-दौलतगंज-हाथीपाला, आज़ादनगर, टाटपट्टी बाखल-सिलावटपुरा और बॉम्बे बाज़ार क्षेत्रों में कोरोनोवायरस पॉजिटिव के सबसे ज्यादा मामले पाए गए।
इसके बाद ही भास्कर ने इन क्षेत्रों के चार प्रमुख मुस्लिम कब्रिस्तानों में अप्रैल के पहले सप्ताह में दफनाए गए शवों की संख्या की पड़ताल की। हालाँकि, कब्रिस्तान में बनाए गए रजिस्टर में इन लोगों के मौत का कारण ब्लडप्रेशर, डायबिटीज़, आदि का उल्लेख किया गया। मगर, यदि मार्च के आँकड़ों के साथ इनकी तुलना करें तो ये काफी खतरनाक है।
रिपोर्ट् के मुताबिक महू नाका मुस्लिम कब्रिस्तान में मार्च माह में 46 शवों को दफनाया गया था, जबकि अप्रैल में ये आँकड़ा केवल 6 दिन में (1-6 अप्रैल) 42 था। इसी तरह टाटपट्टी बाखल और आसपास के इलाकों के लिए मुस्लिम कब्रिस्तान में मार्च में दफन किए गए शवों की संख्या 36 थी और अप्रैल के 6 दिनों में ये संख्या 44 है। अन्य दो मुस्लिम कब्रिस्तानों में भी मार्च माह में 20 और 28 शव दफन किए गए। लेकिन, अप्रैल के 6 दिनों में यहाँ 20 और 21 शव दफन किए गए।
बता दें, एक ओर जहाँ मुस्लिम कब्रगाह में शवों के दफनाए जाने की सूचना इस तरह अचानक बढ़ी है। वहीं श्मशान घाटों में हिंदुओं के दाह संस्कार करने की संख्या पहले जैसी है।
भास्कर की रिपोर्ट से यह पता चलता है कि मृतकों के मामले में, उनके यात्रा के इतिहास और कोरोना लक्षण दिखने के बावजूद उनके नमूने नहीं लिए गए। जैसे, इस बीच ट्रेवल हिस्ट्री का इतिहास रखने वाले 42 वर्षीय नावेद की मृत्यु हुई। मगर, उनका न तो परीक्षण हुआ और न इलाज हुआ।
इसके बाद नावेद के 48 वर्षीय चचेरे भाई इरफान को 26 मार्च को साँस लेने की समस्या हुई। जिसे सीएचएल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें गोकुलदास अस्पताल में भर्ती करवाया लेकिन अगले दिन उनकी मृत्यु हो गई। बाद में इरफान की टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई। और उनके भाई ने कहा कि इरफान तो दहशत में ही चले गए।
बता दें कि भास्कर की रिपोर्ट में ऐसे चौंकाने वाले नंबर सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियों ने अब इसकी जाँच शुरू कर दी है। साथ ही इन आँकड़ों पर रिपोर्ट माँगी है। भास्कर द्वारा प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को उपरोक्त चार मुस्लिम कब्रिस्तानों में 20 और शवों को दफनाया गया था।
दिल्ली मरकज में शामिल हुए जमातियों को खोज-खोजकर लगातार क्वारंटाइन किया जा रहा है, लेकिन इस बीच क्वारंटाइन किए जा रहे लोगों की एक के बाद एक गंदी हरकतें जारी हैं। एक बार फिर दिल्ली के एक क्वारंटाइन सेंटर परिसर में मूत्र से भरी दो बोतने मिलीं है। आशंका जताई जा रही है कि संक्रमण को फैलाने के लिए इस गंदी हरकत को किया गया है। वहीं शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ में मामला दर्ज कर लिया है।
An FIR has been registered against unidentified persons in connection with the recovery of two bottles filled with urine at the premises of a quarantine facility under Dwarka North Police Station area, under Section 269 & 270 of the IPC: Delhi Police pic.twitter.com/dE9LBkIvdf
ताजा मामला पश्चिमी दिल्ली में द्वारका नॉर्थ पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है। मामले पर दिल्ली पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि यहाँ बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर से मूत्र से भरी दो बोतलें पाई गई हैं। इसके बाद दोनों बोतलों को बरामद कर दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 269 और 270 के तहत एक FIR दर्ज कर ली है। वहीं दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह एफआईआर दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के सिविल डिफेंस कर्मियों की शिकायत पर दर्ज की गई है।
The complaint by civil defence personnel of Delhi Urban Shelter Improvement Board (DUSIB), on the basis of which the FIR has been registered, states that some people had thrown bottles filled with urine in the premises of the quarantine facility. https://t.co/7cgGeTgt20
जानकारी के मुताबिक बोर्ड के कर्मचारी सेंटर की साफ-सफाई में लगे हुए थे, इस बीच उन्हें सेंटर से यह दो बोतलें मिली, इतना ही नहीं कर्मचारियों ने इसका वीडियो भी बनाया, जिसे साक्ष्य के तौर पर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया है। वहीं दिल्ली पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज करने के बाद मामले की जाँच में जुट गई है। मामले की जाँच के लिए पुलिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाल सकती है। दरअसल, सेंटर में 200 लोगों को रखा गया है, जो कि मरकज से जुड़े हुए हैं।
गौरतलब है कि क्वारंटाइन किए गए लोगों की हरकतों का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले दिल्ली के नरेला क्षेत्र में बनाए गए क्वारंटाइन केन्द्र के बाहर कुछ लोगों ने शौच कर दिया था। इसके बाद सफाईकर्मी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने नरेला क्वारंटाइन केंद्र में उपद्रव करने वाले दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। दरअसल, यहाँ दिल्ली मरकज से निकाले गए जमातियों को क्वारंटाइन किया गया था।
वहीं इससे पहले गाजियाबाद के एक अस्पताल में भी जमातियों द्वारा नर्सों के सामने नग्न घूमने, गंदी हरकतें करने और नियमों की अनदेखी करने की खबरें आई थी। इस पर नर्सों ने सीएमओ को शिकायत की थी। सीएमओ द्वारा पुलिस को की गई लिखित शिकायत के बाद पुलिस द्वारा की गई जाँच में यह सभी आरोप सही पाए गए थे। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने योगी सरकार के आदेश के मुताबिक एनएसए के आरोपित जमातियों के खिलाफ में कार्रवाई की थी।