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पॉवर ग्रिड फेल होंगे, कुत्ते डर गए, प्रदूषण हुआ: दिवाली को गाली देने वाले लोग, जिन्हें जमातियों का मजहब नहीं दिखता

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में तबलीगी जमात का जमावड़ा लगा। स्पष्ट है, एक मस्जिद में एक के बाद एक मजहबी कार्यक्रम हुए और उसमें हज़ारों लोगों ने शिरकत की। मौलानाओं का भाषण हुआ, जिसमें अल्लाह, इस्लाम और सुन्नत की बातें करते हुए कोरोना पर मेडिकल सलाहों और सरकार के दिशा-निर्देशों को धता बताया गया। ये चीजें एक मस्जिद में चल रही थीं, जिसे खाली कराने के लिए ख़ुद एनएसए अजीत डोभाल को लगना पड़ा। अब कोई पूछे कि इसमें मजहब कहाँ से आ गया और किसने लाया तो जवाब स्पष्ट है। उन जमातियों ने, जिन्होंने इस्लाम और इस्लामिक कार्यक्रमों के कारण महामारी फैलाई।

क़रीब ढाई हज़ार लोग विभिन्न राज्यों में गए, जहाँ से वो कई अन्य के संपर्क में आए। इनमें से काफ़ी सारे चिह्नित हो गए हैं, कइयों की तलाश जारी है। जब पुलिस समुदाय विशेष बहुल इलाक़ों में उनकी तलाश में गई तो उन पर हमला किया गया। डॉक्टरों और नर्सों तक को नहीं बख्शा गया। आप बिहार के मधुबनी से लेकर मध्य प्रदेश के इंदौर तक के उदाहरण देख सकते हैं। मजहबी मोहल्लों में ही ऐसी घटनाएँ क्यों हुईं? पत्थरबाजी में कट्टरपंथी भीड़ ही क्यों शामिल थी? टिक-टॉक वीडियोज में इस्लाम का नाम लेकर ही क्यों इस महामारी को लेकर लोगों को भड़काया जा रहा है?

अस्पतालों में नमाज के नाम पर कौन लोग इकट्ठे हुए और सोशल डिस्टन्सिंग का पालन नहीं किया? इन सवालों के जवाब स्पष्ट होने के बावजूद कुछ लोगों ने ये गीत गाना शुरू कर दिया कि लोग कोरोना को समुदाय विशेष से क्यों जोड़ रहे हैं? मुनव्वर राणा ने कहा कि लोग कोरोना को इस्लाम से जोड़ रहे हैं। ‘द वायर’ की आरफा ने कहा कि तबलीगी जमात वालों का नाम लेकर उन पर निशाना साधना ठीक नहीं है। बचाव में अजीब-अजीब तर्क दिए गए। लिबरल गैंग के लोगों ने एक साथ आकर तबलीगी वालों को डिफेंड करने में ताकत लगाई।

सबसे बड़ी बात कि इसमें वही लोग शामिल थे, जिन्हें ‘9 बजे 9 मिनट’ में दीवाली ढूँढ ली और उसमें धर्म और हिंदुत्व घुसा कर पीएम मोदी के उस इनिशिएटिव का माखौल उड़ाया, जिसे देश-विदेश से समर्थन मिला। कुछ लोग सोशल मीडिया पर गिद्ध की तरह इसी ताक में बैठे थे कि कहीं से किसी घास-फूस में आग लगने तक की भी ख़बर आए तो उसे इससे ही जोड़ा जा सके। लेकिन, हुआ इसके एकदम उलट। 27 मंजिली एंटीलिया में रहने वाले अम्बानी परिवार से लेकर बेघर और बेसहारा ग़रीबों तक ने पीएम की एक अपील पर दीये जलाए। सोशल मीडिया के गिद्ध हाथ मलते रह गए।

इसके साथ ही पावर ग्रिड के नए-नए एक्सपर्ट जो पैदा हो गए थे, वो भी बिलों में छुप गए। ऐसी स्थिति में गिरोह विशेष ने सेलेब्रिटीज को आगे किया। किसी को पटाखों से दिक्कत हो गई तो किसी के कुत्ते-बिल्ली को डर लगने लगा। अभिनेत्री सोनम कपूर ने अपना ‘कुत्ता कार्ड’ खेला। जब लोगों ने उन्हें जवाब दिया तो वो कहने लगीं कि बेवकूफों से बहस नहीं करनी चाहिए। बाद में लोगों ने कहा कि वो सोनम से बहस नहीं करेंगे। इलेक्ट्रिसिटी के विशेषज्ञों ने पशु अधिकार कार्यकर्ता बनने के बाद तीसरे चरण में पर्यावरण प्रेमी बनने का ढोंग किया। अंत में हार कर सारी बहस प्रदूषण पर आकर रुक गई।

लेकिन, इस बीच राजदीप सरदेसाई जैसे लोग अपने गेम खेलते रहे। उन्होंने इसे ‘ब्लडी दीवाली’ कह दिया। क्या राजदीप सरदेसाई कहीं किसी बकरे को कटते हुए देखते हैं तो उनके मुँह से ‘ब्लडी ईद’ निकलता है? नहीं। हालाँकि, दोनों ही ग़लत हैं। कइयों ने न्यूट्रलिटी दिखाने के चक्कर में कहा कि उन्होंने ताली और थाली बजाने का समर्थन तो किया था लेकिन अबकी वो दीये नहीं जलाएँगे। इनमें सागरिका घोष भी थीं। यकीन मानिए, इन्होने ताली भी इसीलिए बजाई थी क्योंकि पीएम मोदी का जनसमर्थन देख कर इनके होश उड़ गए थे। ये अंत तक इस आशा में थे कि इस बार लोगों का समर्थन पूर्ववत नहीं मिलेगा लेकिन इनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।

ट्विटर पर अब्दुल कादिर ने अपने बूढ़े अब्बा की एक तस्वीर ट्वीट कर के बताया कि वो 95 वर्ष के हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर मोमबत्ती जलाई। उनके अब्बा ने समुदाय विशेष से देशहित में पीएम मोदी के साथ क़दम से क़दम मिला कर चलने की अपील की। क्या ये भी हिंदुत्व है? अब्दुल कादिर और उनके अब्बा जैसे कई लोग हैं, जिन्होंने जाति-पाती, धर्म-मजहब, अमीरी-ग़रीबी और राजनीति की सीमा से परे पीएम मोदी के इस अभियान में भाग लिया। लेकिन, वामपंथी इसे धर्म से जोड़ते रहे। अब आप समझ गए होंगे कि जमातियों से लेकर ‘9 बजे 9 मिनट’ तक, साम्प्रदायिकता का जहर किसने बोया।

अगर कुछ लोगों के घरों में पटाखे रखे हुए थे और उन्होंने फोड़ ही दिए तो इसमें किसी हिन्दू त्यौहार को गाली देने का क्या तुक बनता है? लॉकडाउन में कोई पटाखे ख़रीदने गया नहीं होगा और पटाखों की दुकानें खुली भी नहीं हैं, ऐसे में जाहिर है कि लोगों ने घरों में रखे पटाखे ही फोड़े। चंद लोगों ने अगर उत्साह में ग़लती कर भी दी तो उसकी तुलना उस गलती से की जा सकती है क्या, जिसने भारत में हज़ारों लोगों के बीच महामारी फैलाने का काम किया? क्या एक फुलझड़ी उड़ा देना और कुछेक हज़ार लोगों को कोरोना से संक्रमित कर देना एक तराजू में तौला जा सकता है? लिबरल गैंग यही कर रहा।

अरशद वारसी जैसे लोगों ने पूरे देश को ही ‘स्टुपिड’ बता दिया और कहा कई कोरोना से भी ज्यादा ज़रूरी है कि किसका इलाज ढूँढा जाए? आवाज़ उठाने वालों में अधिकतर वही सेलेब्रिटी हैं, जो आजकल बेरोजगार चल रहे हैं, जिनके दिन नहीं कट रहे हैं। कल को अगर कहीं इन्होने किसी बच्चे को पानी से खेलते हुए देख लिया तो मीडिया और सेलेब्रिटीज का ये गैंग इसे ‘ब्लडी होली’ कह कर पीएम मोदी को गाली देते हुए देश की पूरी जनता को ही बेवकूफ बताएगा। ये वही लोग हैं, जो ‘अर्थ ऑवर’ और क्रिसमस को ‘कूल’ मानते हैं। लेकिन, होली और दीवाली का नाम आते ही इनके मुँह पर गालियाँ आती हैं।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने कहा है कि भारत कोरोना वायरस से काफ़ी सही तरीके से निपट रहा है। इजरायल से लेकर सार्क देशों तक ने पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा की है। लोग घरों में बंद हैं, कई देशों में इसके कारण डिप्रेशन और आत्महत्या के मामले भी आए हैं। ऐसे में जो हमारे लिए रिस्क ले रहे हैं, उन्हें धन्यवाद करने के लिए अगर लोग कुछ कर रहे हैं तो वामपंथी गैंग चिढ़ा क्यों हुआ है? इन चीजों को धर्म से जोड़ने वाले ये क्यों नहीं बता रहे कि जमाती किस मजहब के कार्यक्रमों में शिरकत कर रहे थे?

दिल्ली में 523 कोरोना संक्रमितों में 330 तबलीगी जमात वाले: CM केजरीवाल ने भी माना; ऑर्डर किए गए 1 लाख टेस्ट किट

दिल्ली में सोमवार (मार्च 6, 2020) को कोरोना वायरस के 20 नए मामले सामने आए। इनमें से 10 तबलीगी जमात से जुड़े मामले हैं। निजामुद्दीन स्थित मरकज़ मस्जिद में हजारों लोग जुटे थे, जिसके बाद वो कई राज्यों में निकल गए और भारत में इस महामारी का प्रकोप बढ़ गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बताया है कि अब तक दिल्ली में कोरोना वायरस के 523 मामले सामने आए हैं। इनमें से 330 मामले तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं। इनमें 61 विदेशी भी शामिल हैं।

पिछले 24 घंटों में दिल्ली में एक व्यक्ति की मौत हुई है। 25 ऐसे मरीज हैं, जिन्हें आईसीयू में रखा गया है। 8 को वेंटीलेटर की ज़रूरत पड़ी है। बाकियों की स्थिति अभी ठीक है। दिल्ली के सीएम ने माना है कि मरकज़ में हुए इस्लामी कार्यक्रम से ही कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में वृद्धि हुई है। केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में कोविड-19 की टेस्टिंग प्रक्रिया में भी तेजी लाई जा रही है। रोज क़रीब 1000 सैम्पल्स टेस्ट किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1 लाख टेस्टिंग किट के लिए पहले ही ऑर्डर दिया जा चुका है।

केजरीवाल ने कहा कि जितनी ज्यादा टेस्टिंग होगी, कोरोना से लड़ने में उतनी ज्यादा मदद मिलेगी। केंद्र सरकार ने भी दिल्ली को 27,000 ‘पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स’ किट दिए हैं। केजरीवाल ने घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली के 421 स्कूलों में लोगों को मंगलवार से राशन दिया जाएगा। सभी लोगों को 4 किलो गेहूँ और 1 किलो चावल दिया जाएगा। दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि 10 लाख लोगों को राशन दिया जाए। केजरीवाल ने बताया कि लोगों को ज़रूरत पड़ने पर केंद्र से भी अनाज लिया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि राशन वितरण सेंटरों पर भीड़ न जुटे।

बता दें कि पूरे भारत में अब तक कोरोना के 4600 मामले आ चुके हैं, जिनमें से 4126 सक्रिय मामले हैं। 340 लोग इलाज के बाद ठीक होकर घर जा चुके हैं, वहीं 129 लोगों की मृत्यु हुई है। महाराष्ट्र 781 मामलों के साथ टॉप पर है जबकि तमिलनाडु में अब तक 621 मामले सामने आए हैं। सबसे ज्यादा 49 लोगों की मौत भी महाराष्ट्र में ही हुई है। मध्य प्रदेश में 14 लोगों को जान गँवानी पड़ी। तबलीगी जमात वाली घटना के बाद से अचानक से कोरोना के मामलों में भारी वृद्धि आई है।

उत्तर प्रदेश में कुल कोरोना पॉजिटिव 305 मामलों में 159 मामले तबलीगी जमात से जुड़े हैं। अभी जमातियों की स्क्रीनिंग हो रही है उनके संपर्क में आने वाले लोगों को चिन्हित करना है। इन संवेदनशील परिस्थितियों में 14 को लॉक डाउन खोलने के निर्णय पर या किस प्रकार खोलना होगा इस पर विचार किया जाना है यानी तबलीगी जमात से जुड़े केसों के आने के कारण लॉक डाउन आगे बढ़ सकता है।

50 करोड़ भारतीयों को वायरस से मारने की दुआ करने वाले मौलवी ने माँगी माफी, पर ऐंठन बरकरार

कुछ दिन पहले जिस बंगाली मौलवी ने अल्लाह से ऐसा वायरस भेजने की माँग की थी जिससे 50 करोड़ हिन्दुस्तानी मारे जाएँ। आज उसने अपने उस नफरत भरे बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि उसका इरादा ऐसा कुछ नहीं था और उसके वीडियो को लोगों ने एडिट किया है। पीरज़ादा शिद्दीकी नामक यह घृणा से भरा मौलाना माफ़ी माँगते हुए भी ऐसा लगता है जैसे कोई एहसान कर रहा हो। जैसे इसका यह स्पष्टीकरण भी किसी दबाव में आया हो क्योंकि बात करने की टोन से साफ पता चलता है कि इसकी ऐंठन बरकरार है। माफी माँगते वक्त भी वो ऐसे पढ़ रहा है जैसे कोई जबरदस्ती हो। उसकी आवाज में माफी माँगने वाले का लोच नहीं, बल्कि ऐंठन है। लगता है कि वो बस ख़ानापूर्ति कर रहा है माफीनामा पढ़ कर।

बांग्लाहंट नामक मीडिया साइट के अनुसार अपने माफीनामे में पीरज़ादा सिद्दीकी कहता है, “मैं पीरज़ादा सिद्दीकी हूँ। मैं यहाँ कुछ महत्त्वपूर्ण बात पर विचार करना चाहता हूँ। मैं देख रहा हूँ कि पिछले कुछ दिनों से मेरे एक भाषण को तोड़-मरोड़ कर संदर्भ से काट कर प्रस्तुत किया जा रहा है। मैं सबको यह बता देना चाहता हूँ कि मैं भारत के लोगों से और इसके संविधान से प्यार करता हूँ। मैं भारत की धर्मनिरपेक्षता का सम्मान करता हूँ। मैं बगैर किसी की जाति या धर्म देखे, लोगों के अधिकारों के लिए काम करता आया हूँ। मैं पुलवामा शहीदों के परिवारों के साथ भी खड़ा रहा हूँ। मैंने पार्थ चक्रवर्ती की हत्या करने वालों के लिए फाँसी की माँग करते हुए धरने प्रदर्शन और जुलुस भी निकाले हैं।”

“मेरे वीडियो को कुछ लोगों ने एडिट किया है जिससे वो मुझे हरा सकें। मुझे इससे बेहद तकलीफ पहुँची है। बतौर समाज सुधारक जिसकी पिछली 4 पीढ़ियाँ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रही हों, मैं कभी भी भारत के लोगों के खिलाफ नहीं जा सकता। देश एक मुश्किल समय से गुजर रहा है। लोगों को जाति, धर्म, नस्ल की सभी दीवारों के परे इस कोरोना वायरस के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़नी होगी। मैंने मुख्यमंत्री के सहायता फंड में एक लाख एक रुपए का सहयोग किया है। मैंने दूसरे राज्यों से आए मजदूरों को हेल्पलाइन नंबर के जरिए मदद पहुँचाई है, मैंने गरीबों और वंचित तबकों के बीच अन्न और ज़रूरी सामग्रियों का भी वितरण किया है।”

माफीनामे में आगे वो कहता है, “मैंने मुख्यमंत्री से प्रार्थना की है कि वे हमारे अस्पताल को लेकर लोगों के लिए अस्थायी आइसोलेशन वार्ड के रूप में प्रयोग करें। मैंने उनसे यह भी प्रार्थना की है कि वे प्रवासी मजदूरों को उनके गाँव वापस जाने के लिए सुरक्षित रास्ता मुहैय्या कराएँ साथ ही 15 दिनों तक 10,000 प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन का इंतजाम करें। मेरा उद्देश्य किसी की भावना आहत करना नहीं था। अगर किसी को मेरी कही बात से दुःख हुआ है तो मैं उनसे माफ़ी माँगना पसंद करूँगा। बतौर एक इस्लामिक धर्मगुरु मेरा कर्त्तव्य है कि मुझसे किसी की भावनाएँ आहत न हों। मैं आने वाले दिनों के सुख और दुःख दोनों में आपके साथ खड़े होने के लिए संकल्पित हूँ। डॉक्टरों की सलाह मानिए और प्रशासन के साथ सहयोग करिए। अंत में में अल्लाह से दुआ करता हूँ कि वो इस महामारी से हमारे देश को बचाए।”

याद रहे कि अपने वायरल वीडिओ में यह कहते हुए सुना जा सकता है- “बहुत जल्द मेरे पास खबर आई है कि पिछले दो दिनों से मस्जिदों में आग लगाईं जा रही है, माइक जलाए जा रहे हैं। मुझे लगता है कि एक महीने के अंदर ही कुछ होने वाला है। अल्लाह हमारी दुआ कबूल करे। अल्लाह हमारे भारतवर्ष में एक ऐसा भयानक वायरस दे कि भारत में दस-बीस या पचास करोड़ लोग मर जाएँ। क्या कुछ गलत बोल रहा मैं? बिलकुल आनंद आ गया इस बात में।” इसके बाद वहाँ मौजूद भीड़ मौलवी की कही बात पर खूब शोर के साथ अपनी सहमती दर्ज कराती है।

@porbotialora ने ट्विटर पर यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा था कि बंगाली सुन्नी कह रहा है कि उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि वह मरेगा या बचेगा लेकिन वो हिन्दुओं को अपने साथ लेकर जाएगा।

यह वीडियो ऐसे समय पर सामने आया है जब दिल्ली स्थित निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मौलाना साद समेत तबलीगी के सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। हाल ही में दिल्ली निजामुद्दीन इलाके में हुए इस्लामिक धार्मिक आयोजन (तबलीगी जमात मरकज) के बाद मरकज में शामिल कई मुस्लिमों के देशभर में फ़ैल जाने से बवाल खड़ा हो गया है।

कोरोना के भय से माओवादियों ने सीजफायर कर सरकार से लगाई मदद की गुहार

कोरोना से आम जन-जीवन तो भयभीत है ही, लेकिन इसके संक्रमण के भय का अंदाजा अब शायद माओवादी भी लगा चुके हैं। यही कारण है कि उन्होंने सरकार के सामने सीजफायर की घोषणा की है।

ओडिशा में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वहाँ अब तक कोरोना वायरस के कुल 39 मामले सामने आए हैं। इनमें से 37 सक्रिय मामले हैं। 2 लोग ठीक हो गए हैं लेकिन राहत की बात ये है कि किसी की भी मौत नहीं हुई है।

ओडिशा में माओवादियों ने सीजफायर घोषित किया है औऱ सरकार से अपील की है कि जंगली और रिमोट एरिया में रहने वाले लोगों की मदद करें।

हाल ही में कुछ दिनों पहले सीआरपीएफ के 17 जवानों को मार डाला था। ओडिशा में माओवादियों का कहर पहले भी बरपता रहा है। कुछ दिनों पहले माओवादियों के हमले में तीन बीएसएफ जवानों की मौत हो गई थी। मिली जानकारी के अनुसार माओवादियों ने राज्य के मलकानगिरी के चित्रकोंडा इलाके में घात लगाकर बारूदी सुरंग विस्फोट किया था।

कोरोना से जंग के लिए मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: सांसदों के वेतन में 30% की कटौती, सांसद निधि दो साल के लिए खत्म

आज कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़े निर्णय की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। जिसमें दो महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पहले फैसले में सांसदों की सैलरी में एक साल के लिए 30% की कटौती का प्रावधान किया गया है। जिसके लिए जरूरी अध्यादेश पर आज कैबिनेट ने मुहर लगा दी। कैबिनेट ने अपने दूसरे फैसले में सांसद विकास निधि यानी एमपीएलएडी फंड को अगले दो सालों के लिए खत्म करने का निर्णय लिया है। सांसद निधि का यह पैसा कोरोना संकट से लड़ने में खर्च किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज की कैबिनेट मीटिंग के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ये जानकारी दीं। उन्होंने बताया कि देश के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और राज्यपालों ने भी स्वेच्छा से अपने वेतन में 30 फीसदी कटौती की सिफारिश की है। सांसद निधि को अगले दो सालों तक खत्म करने का मतलब है कि इस मद की 7900 करोड़ रूपए की राशि देश की संचित निधि में जाएगी जिसका प्रयोग कोरोना से लड़ने में किया जाएगा।

याद रहे कि प्रत्येक सांसद को प्रति वर्ष अपने लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड के लिए 5 करोड़ रूपए मिलते थे यानी प्रत्येक सांसद 10 करोड़ रूपए जो इन दो वित्तीय वर्षों 2020-21 और 2021-22 में नहीं आवंटित किए जाएँगे। इस राशि का उपयोग अब कोरोना महामारी को देखते हुए हेल्थ और डिजास्टर मैनेजमेंट में किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज की बैठक में मोदी ने कोरोना संकट की पृष्ठभूमि में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने और दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने पर भी चर्चा की। उन्होंने अपने मंत्रियों से राज्यों और जिला प्रशासन के संपर्क में रहने और इस कोरोना महामारी से लड़ने के दौरान जो समस्याएँ सामने आ रही हैं उनका हल निकालने का निर्देश दिया।

इस महामारी के चलते देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के 8 दिन पहले हुई इस बैठक में मोदी ने अपने मंत्रियों के साथ रोजगार और मेक इन इंडिया पर विस्तार में बात की। इस बैठक में पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री आवास पर मौजूद थे। वहीं मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य अपने-अपने घरों अथवा कार्यालयों से वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा: अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ तेरा बाप कौन है; ओलंपिक मेडल विजेता ने दिया गरिमामयी जवाब

कॉन्ग्रेस नेताओं ने अब देश के लिए मेडल लाने वाले खिलाड़ियों का भी सम्मान करना बंद कर दिया है। पूर्व-विधायक अलका लाम्बा ने हद पार करते हुए पहलवान योगेश्वर दत्त पर ओछी टिप्पणी की। योगेश्वर न सिर्फ़ भारत के लिए ओलम्पिक से लेकर कॉमनवेल्थ में मेडल ला चुके हैं बल्कि उन्होंने बजरंग पुनिया जैसे अन्य पहलवानों को प्रशिक्षित भी किया है। अलका लाम्बा ने योगेश्वर दत्त पर टिप्पणी करते हुए लिखा:

“अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ कि तेरा बाप कौन है? लगता है कि अपने बाप के साथ तस्वीर लगाने में भी तुझे शर्म आती है? ऐसा क्या? जिसके साथ तूने तस्वीर लगा रखी है, अगर तेरी माँ कहती है कि वही तुम्हारा बाप है तो मान जाना। ऐसा इसीलिए, क्योंकि तेरी माँ झूठ नहीं बोलती। यूँ ही दर्द नहीं हुआ है तुझे?”

साथ ही अलका लाम्बा ने योगेश्वर दत्त का अपमान करते हुए अपनी ट्वीट के साथ हँसने वाली इमोजी का भी प्रयोग किया। दत्त ने धैर्य और संयम का परिचय देते हुए अलका लाम्बा की इस आपत्तिजनक टिप्पणी के बावजूद गरिमामयी जवाब ही दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंच पर ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाली को जब अपनी गरिमा का ध्यान नहीं तो वो इनसे अपने, अपनी माँ के अथवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गौरव का ध्यान रखने की आशा कैसे कर सकते हैं?

योगेश्वर दत्त ने कहा कि इस देश में पुरुष होने के कुछ घाटे भी हैं क्योंकि अलका लाम्बा जैसे लोग तुरंत ‘महिला कार्ड’ खेलने लगते हैं। दरअसल, ये सब शुरू हुआ अलका द्वारा भाजपा नेताओं को संघ की नाजायज पैदाइश बताने से। उन्होंने कहा कि संघ का भले राजनीति से कोई लेना-देना नहीं हो लेकिन सारे भाजपा नेता संघ की ही नाजायज औलाद हैं। ऐसा उन्होंने उस तस्वीर को कोट करते हुए लिखा, जिसमें नरेंद्र मोदी 70 के दशक में संघ के गणवेश में एक कार्यक्रम में दिख रहे हैं।

इसी पर योगेश्वर दत्त ने उन्हें पीएम मोदी का अपमान न करने की सलाह दी। इस पर योगेश्वर दत्त ने कहा कि नाजायज पैदाइश कौन है, ये अलका लाम्बा की बातों से ही पता चल रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों की सोच से ही उनकी परवरिश का पता चल जाता है। उन्होंने समझाया कि जिस इंसान की फ़ोटो पर लाम्बा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की है, उसके लिए देश वासियो का प्यार सब ने देख भी लिया होगा। उन्होंने ‘9 बजे 9 मिनट्स’ की सफलता की बात करते हुए कहा कि पूरा देश पीएम मोदी के साथ में खड़ा है, बस लाम्बा जैसे कुछ मानसिक रोगियों को छोड़ कर।

जब देशहित के लिए अपनी पहचान खो कर BJP का हुआ निर्माण: सावरकर से लेकर अटल-आडवाणी तक का इतिहास

सोमवार (अप्रैल 6, 2020) को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के 40 वर्ष पूरे हो गए। भारतीय जनता पार्टी के पूर्ववर्ती भारतीय जनसंघ ने 1977 लोकसभा चुनाव जनता पार्टी समूह के अंतर्गत लड़ा था। हालाँकि, दोनों के बीच कोई आधिकारिक विलय नहीं हुआ था। जनता पार्टी ने 405 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 299 जीत कर उसने इतिहास रच दिया और 93 सीटों के साथ जनसंघ इसकी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। लेकिन, इसके नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी या लालकृष्ण आडवाणी ने कभी भी प्रधानमंत्री बनने की अभिलाषा नहीं जताई।

जनसंघ के लिए राष्ट्रहित पहली प्राथमिकता थी, इसीलिए उसने इस गुट की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद पीएम पद की लालसा नहीं रखी और निःस्वार्थ भाव से जनता पार्टी एक्सपेरिमेंट का हिस्सा बनी। यही संस्करण है, जिसका अनुसरण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ का नारा देते हुए पार्टी और देश का नेतृत्व किया, कर रहे हैं। 1977 में जनता पार्टी वाला एक्सपेरिमेंट चौधरी चरण सिंह व अन्य नेताओं की पीएम बनने की लालसा के कारण असफल रहा। 1980 के चुनाव में जनता पार्टी मात्र 31 सीटों पर सिमट गई लेकिन जनसंघ फिर भी लगभग आधी यानी 15 सीटें जीत कर इस गुट का सबसे बड़ा दल बना।

1977 और 1980 के चुनावों में जनसंघ के अच्छे प्रदर्शन के बाद जनता पार्टी के ही कुछ नेताओं में असुरक्षा की भावना ने घर कर लिया। वो ‘दोहरी सदस्यता’ का मुद्दा उठाने लगे और कहने लगे कि जनता पार्टी का कोई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य नहीं हो सकता। पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने ज़रूर जनसंघ के नेताओं को पार्टी में बनाए रखने के लिए मेहनत की लेकिन अप्रैल 4, 1980 को जनता पार्टी की एग्जीक्यूटिव कमिटी ने जनसंघ के सभी नेताओं को जनता पार्टी से निलंबित कर दिया। हालाँकि, ये वाजपेयी, अडवाणी जैसे कद के नेताओं और उनके अनुयायियों के लिए झटका भी रहा, और इससे राहत भी मिली।

ये झटका इसीलिए था क्योंकि 1977 में जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर जनसंघ ने बाकी सारी चीजों को पीछे रखते हुए जनता पार्टी का हिस्सा बनना स्वीकार किया था, ताकि देश को एक नया और मजबूत राजनीतिक विकल्प मिले। ये राहत इसलिए था क्योंकि उन्हें लगातार दबाव के बाद वहाँ से छुटकारा मिल गया। अप्रैल 5-6, 1980 को जनसंघ के नेताओं ने दिल्ली में दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नई भारतीय जनता पार्टी बनाने का निर्णय लिया और अटल बिहारी वाजपेयी इसके संस्थापक सदस्य बने। इस तरह एक नई पार्टी देश को मिली और वाजपेयी एक सर्वमान्य नेता बन कर उभरे।

वाजपेयी ने उस दौरान अपने सम्बोधन में कहा कि अब जब हम पार्टी को फिर से नवनिर्माण कर के एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं, हमें भूत नहीं बल्कि भविष्य की तरफ़ देखने की ज़रूरत है। उन्होंने आह्वान किया कि अब हमें अपने वास्तविक सिद्धांतों और सोच को स्थापित करने की दिशा में पूरी मजबूती के साथ बढ़ना होगा। हिंदी में भाषण देने वाले वाजपेयी के सम्बोधन ने सबको उनका कायल बना दिया। उन्होंने ‘अँधेरा छँटेगा, सूरज निकलेगा और कमल खिलेगा’ का नारा दिया। उनके सम्बोधन को राजनीतिक और मीडिया जगत से काफ़ी प्रशंसा मिली।

आज अटल-अडवाणी द्वारा स्थापित भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और इसके 18 करोड़ सदस्य हैं। 2019 में इसने देश में 5वीं बार सरकार बनाई। पिछले लगातार दो बार से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है। आज देश के 18 राज्यों में इसकी सरकार है (भाजपा व गठबंधन दलों की मिला कर)। केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी इसके वोट शेयर में लगातार वृद्धि हो रही है। इसे पहले ‘काऊ बेल्ट’ की पार्टी या सिर्फ़ उत्तर भारत की पार्टी कहा जाता था, जिस मान्यता को इसने तोड़ दिया है। भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभाध्यक्ष- ये सभी भाजपा से हैं। भारतीय राजनीतिक इतिहास में किसी भी नॉन-कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस तरह की सफलता नहीं प्राप्त की।

अगर सभी मानकों को देखें तो भाजपा आज वहीं खड़ी है, जहाँ कॉन्ग्रेस 1950 के दशक में हुआ करती थी। भारतीय जनता पार्टी का गठन भले ही 1980 में हुआ हो लेकिन इसका इतिहास 1951 में जनसंघ की स्थापना से शुरू होता है। जनसंघ की जड़ें आरएसएस और अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रवादी आन्दोलनों और संगठनों से जुड़ी थीं। इसीलिए, भाजपा का इतिहास समझने के लिए हमें संघ के साथ-साथ आर्य समाज और हिन्दू महासभा के इतिहास को भी देखना पड़ेगा। आज के ‘घर वापसी’ अभियान को ही लें तो इसकी जड़ें आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन में है, जिसमें स्वामी श्रद्धानन्द को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। तबलीगी जमात के एक सदस्य ने उन्हें मार डाला था।

आज जो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा का भाजपा अनुसरण कर रही है, उसकी जड़ें वीर सावरकर के चिंतन से जुड़ी हैं। गोरक्षा 1881 के आन्दोलंब से प्रेरणा पाता है। जहाँ तक मुस्लिम तुष्टिकरण की बात है, इसकी नींव सर सैयद अहमद की विभाजनकारी नीतियों में है। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किया जाना, राम मंदिर निर्माण और एनआरसी का लागू होना- ये सब कॉन्ग्रेस द्वारा की गई बड़ी ग़लतियों को सही करने की दिशा में प्रयास है। ‘नीति आयोग’ का गठन भी जनसंघ के शुरुआती घोषणापत्र के अनुसार ही हुआ है।

मेरा तो यही मानना है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले भारतवर्ष का राजनीतिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक और ऐतिहासिक अस्तित्व हमेशा से रहा है। भारत एक प्राचीन राष्ट्र है और भारतीय राष्ट्रवाद एकता पूरे देश की एकता से जुड़ा है, जो इसे बाकी भूखंडों से अलग बनाता है। भाजपा का आज जो रूप हम देख रहे हैं, वो सदियों से चले आ रहे राष्ट्रवाद के आन्दोलनों का ही परिणाम है। आज भाजपा के 40 वर्ष पूरे होने पर उसी इतिहास को देखने और समझने की ज़रूरत है।

Note: यह लेख मूलतः अंग्रेजी में लिखा गया था, जिसकी हिंदी कॉपी अनुपम ने तैयार की है।

जमात से लौटकर डॉ इदरीस मरीज देखते रहे, ऑपरेशन किया: उन पर सवाल उठाना साथी डॉ को पड़ा भारी, कट्टरपंथी दे रहे धमकियाँ

एक नामी अस्पताल का एक बड़ा डॉक्टर तबलीगी जमात द्वारा आयोजित भीड़-भाड़ वाले कार्यक्रम में शामिल होता है। कार्यक्रम खत्म होने के बाद अपने घर लौटता है। ड्यूटी ज्वाइन करता है। ओपीडी में कम से कम सौ मरीजों को रोज देखता है और 100 के करीब सर्जरी करता है। इसके बाद मालूम पड़ता है कि वो तबलीगी जमात गया था और उसने ये बात सबसे छिपाई। प्रशासन उसे फौरन क्वारंटाइन करता है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जाता है। अब ये खबर मीडिया में आती है। एक लड़की इसे लेकर चिंता जताती है और डॉ की लापरवाही उजागर करती है। मगर, डॉक्टर के मजहब के कारण पूरा कट्टरपंथियों का गिरोह उसे गरियाने लगता है। डॉ के परिजन उसे धमकाने लगते हैंं। जिसे देखकर लड़की को एहसास होता है कि उसने भले ही आजीवन हर इंसान को इंसान समझा, उन्हें धर्म के रंग में तोले बिना आँका। मगर ये लोग, उससे अलग है और मजहब को ही सर्वेसर्वा मानते हैं। इसलिए उसे झुंड बनाकर धमकी दे रहे हैं, गाली दे रहे हैं, उससे बदसलूकी कर रहे हैं।

लड़की का नाम डॉक्टर दीपा शर्मा है। दीपा ने 4 अप्रैल को एक खबर की जानकारी देते हुए उसके ऊपर अपनी प्रतिक्रिया ट्वीट की। इस ट्वीट में उन्होंने बताया कि तेलंगाना के आदिलाबाद के रिम्स अस्पताल में ऑप्थामोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ इंदरीस अकबानी ने तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने अपने अधिकारियों से इसकी जानकारी छिपाई। बाद में ये अस्पताल जाने लगे। ओटी में इन्होंने 100 लोगों की सर्जरी की और 100 से ज्यादा मरीजों को एक दिन में ओपीडी में देखा। उन्होंने कई बेगुनाहों को जानबूझकर संक्रमित किया।

अब हालाँकि ये खबर एक दम सच है और मीडिया रिपोर्ट्स ने इसे प्रकाशित भी किया है। मगर मुस्लिम ने इस पर चिंतित होने की बजाय इसे भी अपनी आन पर ले लिया। किसी ने समुदाय को बदनाम करने के लिए एक अजेंडा बताया। तो किसी ने योगी आदित्यनाथ का मुद्दा बीच में ले आते हुए हिंदू धर्म का हवाला दिया और इदरीस अकबानी की लापरवाही को जस्टिफाई किया।

डॉ के कई हितैषियों ने इस ट्वीट को देखकर इदरीस की नेगेटिव रिपोर्ट शेयर की। और डॉ दीपा के लिए लिखा कि पहले तथ्य जान लो, फिर भौंको। कट्टरपंथियों ने लड़की के ख़िलाफ़ शिकायत भी कर डाली और तेलंगाना सीएमओ और डीजीपी को टैग करके उनपर एक्शन लेने के लिए कहा कि वे गलत न्यूज फैला रही हैं।

इसी तरह एक और यूजर ने किया। जिसपर डॉ दीपा ने साफ कर दिया कि वो फाइनल रिजल्ट के बारे में बात नहीं कर रहीं। उनकी चिंता ये है कि अगर वो पॉजिटिव आ जाते तो क्या होता? उनका कहना है कि स्वैब टेस्ट 100% सही नहीं है। चूँकि जो लोग शुरू में नेगेटिव आ रहे हैं, बाद में पॉजिटिव पाए जाते हैं। डॉ दीपा की शिकायत है कि डॉ इदरीस ने जानकारी छिपाई और ड्यूटी जारी रखी। और उनका ट्वीट सिर्फ़ इसी बारे में हैं। और ये 100% सही है।

इसके बाद कुछ कट्टरपंथी कनिका कपूर का मुद्दा उठाते हैं क्योंकि वो हिंदू हैं और इसे मुद्दा बनाते हैं। मगर कुछ अन्य यूजर इसपर साफ करते हैं कि उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो चुकी है और उनका कोई सपोर्ट भी नहीं कर रहा। लेकिन फिर भी लोग उन्हें फेक न्यूज फैलाने वाली फेक डॉक्टर आदि कहते रहते हैं।

डॉ लुकमान नाम का यूजर इस ट्वीट पर कई प्रतिक्रिया देता है और एक ट्वीट में पीएम मोदी को कोसने के लिए लिखता है- ये कैसा जिहाद मोदी ने किया? असफल लॉकडाउन से अपने लोगों को मारा और अब एक जमात को दोष दे रहा है। ऐसे 100 अलग-अलग जमात हैं। हमें उन्हें ढूँढना चाहिए और उनपर कार्रवाई करनी चाहिए।

अब इन्हीं ट्वीट्स को देखते हुए और इदरीस में पक्ष में समुदाय विशेष की भीड़ को देखकर डॉ दीपा तंग आ गई। उन्होंने अपने ट्वीट को सही साबित करने के लिए एक खबर को शेयर किया और निवेदन किया कि जो भी समुदाय के लोग उनके पोस्ट पर घटिया कमेंट लिख रहे है, वो कहीं और अपनी नफरत निकालें। ये खबर 100% सच है। अब आखिरी परिणाम कुछ भी निकले। मगर ये बात आदिलाबाद के पुलिस, सरकार, मीडिया सबको मालूम है।

वे आगे लिखती हैं। कृपा करके ये नकारात्मकता यहाँ न फैलाएँ और मुझे सिर्फ इसलिए धमकाना बंद करें क्योंकि मैंने एक डॉक्टर की लापरवाही पर प्रश्न किए।  वे लिखती हैं, “डॉक्टर ने तबलीगी जमात का कार्यक्रम अटेंड किया और किसी को जानकारी नहीं दी। बाद में अस्पताल में कार्य जारी रखा। पुलिस को ये सूचना 1 अप्रैल को मिली। अब इसके परिजन, साथी और मजहबी लोग मुझे डरा-धमका रहे हैं।” 

उनका कहना है कि वे एक आम परिवार से आती हैं और उन्हें किसी राजनैतिक पार्टी का सपोर्ट नहीं है। डॉ इदरीस अकबानी ये बात अच्छे से जानते थे कि यदि वे कोरोना संक्रमित निकले तो कई मासूमों तक ये फैल सकता है। मगर बावजूद इसके उन्होंने मरीजों को देखना जारी रखा। अब उसके परिजन और मुस्लिम मुझे धमका रहे हैं। 

वे कहती है, ”अगर डॉ इदरीस अकबानी हिंदू होता तो भी मैं यही सब लिखती। पर उस समय झुंड बनाकर लोग मुझे धमकाते नहीं। जैसा कि अभी मुस्लिम डॉक्टर के लिए कर रहे हैं। झुंड में लड़की पर बेवजह हमला करना बंद करो कभी हिन्दू मुस्लिम से ऊपर उठके देश के बारे मे सोचो।”

वे ये प्रतिक्रियाएँ देखकर हताश होती हैं और लिखती हैं, ”आप हिंदुओं को इस्लामोफोबिया का शिकार कहते हो, मुस्लिमों के लिए नफरत फैलाने वाला बोलते हो। मेरे जैसा इंसान जिसने इंसान को इंसान समझा, धर्म के रंग से नही तोला, पर आए दिन आप लोग जो मुझपे झुंड बनाकर सोशल मीडिया पर धमकियाँ देते हो उससे मुझे मुस्लिमों से डर लगने लगा है।”

वे आखिर में सभी मुस्लिमों से प्रार्थना करती हैं कि वे सब अपने, अपनों और देश के बारे में सोचे। क्वारंटाइन में रहें। सोशल डिस्टेंसिंग रखें। साथ ही जो लोग नमाज़ अब भी मस्जिद मे पढ़ रहे हैं या जिन्होंने तबलीगी जमात में भाग लिया उनके खिलाफ खुद रिपोर्ट करें, जिम्मेदार भारतीय बनें, जिससे पूरा देश उनका सम्मान करेगा, प्यार देगा। साथ ही वो यह भी लिखती हैं कि कैसे टेस्ट में निगेटिव आया व्यक्ति भी अचानक से पॉजिटिव आ सकता है। इसलिए 28 दिनों का एकांतवास निहायत जरूरी है।

पड़ोसियों ने पालतू कुत्ते को लेकर सुनाई खरी-खोटी, डॉक्टर ने कहा- कोरोना वायरस की वजह से किया जा रहा परेशान

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें एक आदमी को एक महिला डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार करते देखा जा सकता है। वह आदमी, जो डॉक्टर का पड़ोसी है, ने कथित तौर पर उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उस पर शारीरिक हमला करने की कोशिश की।

वीडियो में, गुलाबी टी-शर्ट में एक शख्स को महिला को गालियाँ देते हुए सुना जा सकता है। इसके साथ ही वह शख्स कहता है कि क्या हो गया, अगर वो डॉक्टर है तो? वीडियो में आगे एक जगह पर वो महिला की तरफ लपकता है और उसका फोन छीनने की कोशिश करता है, जिससे वह इस घटना को रिकॉर्ड कर रही होती है।

जानकारी के मुताबिक यह विवाद डॉक्टर के पालतू कुत्ते के पड़ोसी पर हमला करने को लेकर शुरू हुआ था। गुलाबी टी-शर्ट में आदमी की पहचान चेतन मेहता के रूप में है, जबकि डॉक्टर का नाम संजीवनी पाणिग्रही है। पड़ोसियों के मुताबिक, रविवार शाम जब मेहता की पत्नी बाहर निकल रही थीं, तो डॉ संजीवनी के पालतू कुत्ते ने उन पर भौंकना शुरू कर दिया और फिर उन पर हमला किया।

इसके बाद मेहता की पत्नी ने पड़ोसी के साथ लड़ाई शुरू कर दी और जल्द ही चेतन भी इस लड़ाई में शामिल हो गया। इसी समय डॉक्टर ने पूरी घटना को रिकॉर्ड किया और विधायक को इसके बारे में सूचित किया। इसके बाद अदजान पुलिस ने मौके पर जाकर मेहता को गिरफ्तार कर लिया।

मेहता की पत्नी ने आरोप लगाया है कि पालतू कुत्ते को लेकर शुरू होने वाली बहस को कोरोना वायरस तक ले जाया गया। बताया जा रहा है कि चूँकि डॉ संजीवनी सिविल अस्पताल में डॉक्टर हैं, तो उनके कोरोना वायरस के संपर्क में आने को लेकर मेहता पहले भी कई बार सवाल-जवाब कर चुके हैं। 

25 मार्च को दोनों पड़ोसियों में इस बात को लेकर लड़ाई भी हुई थी। रविवार को जब डॉ संजीवनी के पालतू कुत्ते ने मेहता की पत्नी पर हमला किया, तो मेहता उसके बचाव में आए, जिसके बाद पालतू कुत्ता घर के अंदर वापस चला गया। मेहता की पत्नी ने आरोप लगाया है कि डॉ संजीवनी ने वायरल वीडियो में इस मामले को कोरोना वायरस से जोड़ दिया है। चेतन मेहता की पत्नी ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने वीडियो शूट किया और इसे उसके पति को बदनाम करने के लिए वायरल कर दिया।

मौलाना साद सिर्फ छुप कर बैठा नहीं है, खुद के लिए जुटा रहा समर्थन, फैला सकता है हिंसा: रिपोर्ट्स

तबलीगी जमात का सरगना मौलाना साद, जिसने दावा किया था कि वो कोरोना संक्रमण के चलते एहतियात बरतते हुए क्वारंटीन में है, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अपने समर्थकों के यहाँ छुप कर खुद के लिए समर्थन जुटाने में लगा है। TV9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार साद, जो जाकिर नगर का रहने वाला है, आजकल दिल्ली के बाहरी इलाके में अपने एक समर्थक के घर में छुपा हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने बताया है कि साद खुद के फोन का उपयोग न कर दूसरे फोनों के जरिए लगातार अपने वकीलों से सम्पर्क में बना हुआ है। ये इस्लामिक सरगना अच्छी तरह से जानता है कि किसी घनी बस्ती में छिपकर वो अपनी गिरफ़्तारी से बच सकता है। एक स्रोत के अनुसार पुलिस एक्शन लेने में हुई देरी के कारण साद को छिपने का पर्याप्त मौका मिल गया। पुलिस ने जब उसे नोटिस देते हुए 26 सवालों के जवाब चाहे, उसने खुद के क्वारंटीन में होने का बहाना बनाते हुए उसके बाद ही जवाब देने की बात कही।

रिपोर्ट में एक जमात सदस्य के हवाले से लिखा गया, “हम अपने लोगों को बता रहे हैं कि एक साजिश के तहत हमारे नेता को फँसाया जा रहा है, जिसने इस्लाम के लिए महान काम किए हैं। हम अपने भाइयों से कह रहे हैं कि वो लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहें।”

यह भी आशंका जताई जा रही है कि साद अपनी गिरफ्तारी पर अशांति और हिंसा फ़ैलाने की कोशिश कर सकता है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मौलाना साद ने उन मजहबी धर्मगुरुओं की भी बात नहीं मानी, जिन्होंने उसे निजामुद्दीन क्षेत्र में 13-15 मार्च के बीच धार्मिक जलसा न करने की सलाह दी थी। साद की जिद और 3400 जमातियों की ऐच्छिक भागीदारी के कारण आज आम लोगों की जान पर बन आई है।

तबलीग़ी जमात का एक सदस्य मोहम्मद आलम सीधे तौर पर मौलाना साद को इस सबका जिम्मेदार ठहराते हुए कहता है कि मौलाना साद ने अपने अज्ञान और जिद के कारण समुदाय विशेष को इस महामारी के मुँह में ढकेल दिया है। लियाकत अली खान नाम का दूसरा व्यक्ति सवाल करता है कि वो छिपा क्यों बैठा है, क्यों नहीं अपनी वायरस जाँच करवा रहा?

हालाँकि इस तमाशे के कर्ताधर्ता के एक सहयोगी मौला हैरिस ने सरकार को इस सबका जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सरकार ने विदेशियों को भारत आने ही क्यों दिया? यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरकार ने इन विदेशियों को टूरिस्ट वीजा दिया था, जिन्होंने वीजा नियमों का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए इस जमात के धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। अब एक्शन लेते हुए इस कार्यक्रम से संबंधित 960 लोगों के वीजा को निरस्त तथा ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

शनिवार को स्वास्थ्य सचिव ने जानकारी दी थी कि 17 राज्यों में अब तक 1023 कोरोना संक्रमण के ऐसे केसेस की पुष्टि हुई है, जिनका संबंध तबलीगी जमात के दिल्ली मरकज में हुए कार्यक्रम से है। COVID-19 के कुल मामलों में तबलीगी जमात के कारण हुए संक्रमण की संख्या जहाँ 30% है, वहीं उत्तर प्रदेश के कुल कोरोना पॉजिटिव मामलों में से भयावह ढंग से 50% मामले तबलीगी जमात से ही संबंधित हैं।

इससे पहले व्हाट्सअप पर एक फेक मैसेज वायरल था, जिसमें दावा किया गया था कि 28 मार्च को मौलाना साद ने पीएम मोदी रिलीफ फंड में एक करोड़ रुपए दान किए हैं, इस झूठी रिपोर्ट के अनुसार मौलाना साद ने अपना योगदान गुप्त रखा था। यह झूठा प्रोपेगेंडा एक और साक्ष्य है कि किस प्रकार समाज के कुछ सेक्शन साद के लिए समर्थन जुटाने में जुटे हैंस जिससे उसे गिरफ्तारी से बचाया जा सके।

तब्लीग़ी जमात के मौलाना साद ने एक ऑडियो भी रिलीज किया था, जो शायद किसी स्टूडियो में रिकॉर्ड किया गया था, जिसमें वो अपने से समर्थकों से अपील करता हुआ सुना जा सकता है कि प्रशासन और डॉक्टरों से सहयोग करो, और इस बीमारी से डरने की बजाय अल्लाह का नाम लो।