देश के अलग-अलग राज्यों के विभिन्न इलाकों से स्वास्थकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ बदसलूकी की खबरें आने के बाद सोमवार को इस सूची में छत्तीसगढ़ का नाम भी सामने आया। यहाँ भिलाई जिले में स्थित फरीदनगर सुपेला क्षेत्र में ये घटना उस समय घटी, जब होम क्वारंटाइन में रखे गए लोगों का सर्वे करने 2 महिला स्वास्थ्यकर्मी पहुँची और उन्होंने उन लोगों से पूछताछ शुरू की। जिसके बाद वहाँ कुछ लोग उनपर भड़क गए। फिर उनपर हमला कर दिया। इस दौरान बीच-बचाव करने पर भीड़ से भी मारपीट हुई। अब ताजा जानकारी के अनुसार, इस संबंध में पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार की दोपहर करीब 2 बजे विनीता साहू और रश्मि राय नाम की दो ANM फरीदनगर पहुँची। इसके बाद दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने नदीम टेक्सटाइल्स लिखे एक मकान की ओर जाँच के लिए गईं। जहाँ दो लोगों को होम क्वारंटाइन किया गया था। मगर जैसे ही वे वहाँ पहुँची और उनकी व्यक्तिगत जानकारी माँगी। घर की महिलाएँ दोनों स्वास्थ्यकर्मियों पर भड़क उठीं।
उन लोगों ने दोनों स्वास्थ्यकर्मियों को एनआरसी का सर्वे करने वाला बताया। फिर उनसे विवाद शुरू कर दिया। महिला द्वारा जोर-जोर से चिल्लाने पर आरोपित निगारा खातून सहित आसपास की करीब 30 महिलाएँ व कुछ पुरुष वहाँ पहुँच गए। सभी ने मिलकर दोनों स्वास्थ्यकर्मियों को घेर लिया और उनसे मारपीट की।
पुलिस को सूचना मिलने पर सुपेला थाने की पेट्रोलिंग टीम वहाँ पहुँची। लेकिन आरोपितों ने पुलिसकर्मियों से भी हाथापाई की। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस किसी तरह से दोनों महिला स्वास्थ्यकर्मियों को भीड़ से निकालकर थाने लाई। दोनों ने लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के बीएमओ व कोरोना वायरस के प्रभारी नोडल अधिकारी संजय जामगाड़े को इस घटना की जानकारी दी।
इसके बाद सीएमएचओ डॉ गंभीर सिंह ठाकुर से निर्देश लेने के बाद बीएमओ संजय जामगाड़े ने इसकी थाने में शिकायत की। जिसके आधार पर सुपेला पुलिस ने आरोपित निगारा खातून व अन्य आरोपितों के खिलाफ शासकीय सेवकों से मारपीट और प्रतिबंध का उल्लंघन करने की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। बता दें इस घटना के बाद महिलाएँ काफी डरी हुई हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें निकाला नहीं जाता तो उनकी जान पर बन आती। क्योंकि लोग गुस्से में उन्हें मारने पर उतारू हो गए थे।
गौरतलब है कि इस समय कोरोना संदिग्धों की तलाश में जुटी पुलिस और उनकी जाँच करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों पर जगह-जगह हमले किए जा रहे हैं। इन घटनाओं में मुख्यत: समुदाय विशेष के लोग शामिल हैं। किसी के बहकावे में आकर कहिए या फिर जान बूझकर कहिए, मगर ये लोग न देश में फैली महामारी को गंभीरता से ले रहे हैं और न ही अपने सरकार की सुन रहे हैं। इन्हें इस आपदा के समय में भी एनआरसी का डर है कि स्वास्थ्यकर्मी उनकी जानकारी उनका नुकसान करने के लिए ले रहे हैं।
कोरोना से जंग लड़ने के लिए देश में जारी लॉकडाउन के बीच क्वारंटाइन सेंटर्स पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने के बाद गिरफ्तार किए गए असम से विधायक अमीनुल इस्लाम के खिलाफ पुलिस ने देशद्रोह की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। दरअसल, विधायक इस्लाम की एक वीडियो क्लिप बीते दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसमें विधायक ने देश में अलग-अलग स्थानों पर सरकार द्वारा बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर्स को डिटेंशन सेंटर करार दिया था। साथ ही आरोप लगाया था कि यहाँ इंजेक्शन देकर लोगों को मारा जा रहा है।
असम के डीजीपी महंत ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि विधायक इस्लाम के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके संबंध में असम विधानसभा अध्यक्ष को भी जानकारी दे दी गई है। इसके बाद इस्लाम को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतम डी की अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जानकारी के मुताबिक विधायक को नौगाँव की केन्द्रीय कारागार में भेजा गया है।
उधर नौगाँव के पुलिस अधीक्षक गौरव अभिजीत दिलीप ने बताया कि पुलिस पूछताछ के दौरान इस्लाम ने कुबूल किया कि क्लिप में सुनाई दे रही आवाज उन्हीं की है और उन्होंने स्वीकार किया कि क्लिप उन्होंने ही बनाई थी, जिसे दूसरे कई लोगों को भेजा भी गया था। यह ऑडियों क्लिप विधायक के मोबाइल फोन पर भी पाई गई, इसके बाद पुलिस ने इस्लाम की मोबाइल को भी जब्त कर लिया है।
वहीं बदरुद्दीन अजमल की अगुवाई वाली पार्टी ने विधायक इस्लाम के विवादित बयान से खुद को अलग कर लिया है। पार्टी का कहना है कि ये विधायक के अपने विचार हैं। पार्टी इनका समर्थन नहीं करती है। वहीं बीजेपी ने इस मुद्दे पर AIUDF को अपने निशाने पर लिया है।
इससे पहले असम के डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने बताया कि ऑल इंडिया डेमोक्रैटिक यूनाइटेड फ्रंट (AIUDF) के विधायक अमीनुल इस्लाम को सोमवार को क्वारंटाइन सेंटर्स पर सांप्रदायिक टिप्पणी के करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दरअसल ढिंग क्षेत्र से विधायक अमीनुल इस्लाम के ऊपर लगे सभी आरोप प्राथमिक जाँच के बाद सही पाए गए थे। सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो क्लिप में विधायक इस्लाम नें सरकार पर समुदाय के खिलाफ साजिश रचने के भी आरोप लगाए थे।
साथ ही क्वारंटाइन सेंटर्स को डिटेंशन सेंटर बताते हुए इस्लाम ने आरोप लगाया था कि वहाँ इंजेक्शन देकर लोगों को मारा जाता है और इसके बाद सरकार ये भी कह सकती है कि इनकी मौत कोरोना से हुई है।
Probably #AminulIslam Dhing MLA of #Assam will be First MLA in India to be arrested under #DisasterManagementAct. He gave a telephonic interview where he is alleged to have said that #COVID19 Quarantine centres are actually detention centre & conspiracy to kill thru injection. pic.twitter.com/acNIh7gv9s
यहाँ बता दें कि इससे पहले ढिंग विधायक ने निजामुद्दीन मरकज़ का भी बचाव किया था। इस दौरान इस्लाम का कहना था कि मरकज़ में कोई भी संक्रमित नहीं पाया गया है और इस बीमारी के फैलने के पीछे मरकज़ का हाथ नहीं है। विवादित टिप्पणी करने पर AIUDF विधायक ने मीडिया पर भी आरोप लगाया था कि निजामुद्दीन मरकज़ पर झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। इससे पहले एक फेसबुक पोस्ट में उनका ये भी दावा था कि असम में आया पहला केस दिल्ली के मरकज़ भी नहीं गया था।
दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ का मुखिया मौलाना साद अब जल्द पुलिस के हत्थे चढ़ सकता है। उसके होने के संकेत हरियाणा में मिले हैं। तबलीगी जमात का मामला उजागर होने के बाद से ही वह फरार है। पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ नोटिस जारी किया हुआ है। मगर, उसका कहना है कि उसने खुद को क्वारंटाइन किया हुआ है। लेकिन कहाँ? इसके बारे किसी को कोई जानकारी नहीं हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में इस समय खूफिया एजेंसियों के सूत्रों का हवाला देकर बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार ने साद की लोकेशन ट्रेस कर ली है और उसे पकड़ने के लिए एक टीम का गठन भी कर लिया गया है। इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियाँ मौलाना साद को पकड़ने के लिए ट्रैप भी लगा रही हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा गठित टीम में कौन-कौन है एवं किसके निर्देशन में यह टीम कैसे काम करेगी, फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। किंतु, हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने दावा किया है कि अगर मौलाना साद हरियाणा में हुआ तो उसे दो दिन के भीतर पकड़ लिया जाएगा।
मौलाना साद के हरियाणा में होने की जानकारी, विज ने कहा- ऐसा है तो दो दिन में होगा गिरफ्तारhttps://t.co/gC8zCvjjKi
हरियाणा के गृह मंत्री ने इस बात की पुष्टि की है कि मौलाना साद के संबंध में उन्हें सूचनाएँ मिली हैं। उनका कहना है कि मौलाना साद नूंह इलाके में कहीं छिपा हुआ है, लेकिन उनकी खुफिया एजेंसियाँ अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँची हैं। उनकी इंटेलीजेंस को ये भी संदेह है कि वह उत्तर प्रदेश में कहीं छिपा हुआ है, लेकिन यदि साद ने हरियाणा को अपने छिपने का ठिकाना बना रखा है तो ऐसी सूचनाओं को सरकार किसी सूरत में नजर अंदाज नहीं करेगी और जल्द से जल्द उसे गिरफ्तार करेगी। इसलिए टीम का गठन किया जा चुका है।
यहाँ बता दें कि मौलाना साद के हरियाणा में होने की जानकारी सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियाँ और पुलिस टीम बना कर नूँह के तमाम इलाकों को खंगाल रही हैं। इसके साथ ही कई मस्जिदों में भी मौलाना साद की तलाश की जा रही है। हालाँकि, केंद्रीय जाँच एजेंसियों ने अभी तक हरियाणा से संपर्क नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि वे भी जल्द ही हरियाणा सरकार से संपर्क करेंगी।
गौरतलब है कि मजहब का हवाला देकर कोरोना के कहर को नजरअंदाज करने के लिए एक पूरी भीड़ को उकसाने वाला मौलाना साद कई दिनों से फरार है। उसके अनुयाई उसकी जान बचाने के लिए फेक न्यूज फैला रहे हैं और उसे एक महान व्यक्तित्व बताने का प्रयास कर रहे हैं। मगर, इसी बीच प्रशासन उसे जल्द से जल्द ढूँढने की कोशिशों में लगी है। अभी कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने मौलाना समेत 7 लोगों को नोटिस जारी किया है। इसमें इन सभी से 26 सवालों के जवाब मॉंगे गए हैं।
उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ में दो दिन पुराने विवाद को लेकर दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। इस बीच दोनों ओर से घंटों तक पथराव हुआ, जिसमें 12 लोग घायल हो गए। वहीं प्रधान पक्ष पर फायरिंग करने का भी आरोप है। सूचना पर पहुँची पुलिस ने फायरिंग के आरोप में प्रधान सहित 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए गाँव में पुलिस फोर्स के साथ आरएएफ को तैनात कर दिया गया है। साथ ही समुदाय विशेष के प्रधान सहित 50 नामजद और 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
अमर उजाला में प्रकाशित खबर की कटिंग
अमर उजाला की खबर के मुताबिक अलीगढ़ शहर से सटे थाना गाँधीपार्क क्षेत्र के गाँव कमालपुर में जारी लॉकडाउन के बीच मंगलवार दोपहर को ग्राम प्रधान चमन खाँ की मौजूदगी में राशन वितरण किया जा रहा था। राशन लेने के लिए गाँव का ही सौरभ पुत्र ओमप्रकाश राशन डीलर के यहाँ पहुँचा। आरोप है कि दो दिन पुराने विवाद का बदला लेने के लिए प्रधान पक्ष के लोगों ने युवक के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस बात की जानकारी पीड़ित युवक ने घर आकर बताई।
इसके बाद ही प्रधान पक्ष के लोगों ने युवक के घर पर हमला करते हुए पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते दोनों ओर से जमकर पथराव होने लगा। इस दौरान दोनों समुदाय के बीच घंटों तक पथराव जारी रहा। इस बीच प्रधान पक्ष पर फायरिंग करने का भी आरोप है। इसकी सूचना जैसे ही अलीगढ़ पुलिस को हुई तो प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ गए। तत्काल बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स के आला अधिकारी गाँव में पहुँच गए और सख्ती के साथ स्थिति को काबू में किया।
दोनों समुदाय के बीच घंटों चले पथराव में सौरभ, विवेक, इंद्रपाल, सुमित, टीटू, शरद, पुनीत, सोनू, पप्पू, माया, कल्लो, पूरन सहित कुल 12 लोग घायल हो गए। सभी को पुलिस ने अलीगढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। वहीं पुलिस ने मौके पर पीछा कर प्रधान चमन खाँ पक्ष के 6 लोगों को हिरासत में ले लिया है। इतना ही नहीं पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कानूनी कार्रवाई करते हुए पूरन सिंह की तहरीर के आधार पर प्रधान चमन खाँ सहित 50 लोगों के नामजद, जबकि 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
अमर उजाला में प्रकाशित खबर की कटिंग
जानकारी के मुताबिक दो दिन पहले राशन वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंस को तोड़ते हुए राशिद नाम का युवक बीच में घुस गया था। इस पर कुछ युवकों ने उसके साथ मारपीट की थी। यह मामला पुलिस चौकी तक भी पहुँचा, लेकिन सभ्रांत लोगों की मौजूदगी में इसे सहमति के बाद रफा-दफा कर दिया गया। वहीं गाँव कमालपुर में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस फोर्स के साथ आरएएफ को तैनात कर दिया गया है। साथ ही पुलिस आरोपितों की धरपकड़ में लगातार छापेमारी कर रही है।
कोरोना वायरस के फैलते प्रकोप के बावजूद भी समुदाय विशेष के कुछ लोग अभी भी इसे लेकर गंभीर नहीं है। कई राज्यों से खबरें आ रही हैं कि हर जगह ये लोग स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों का विरोध कर रहे हैं। उनसे बदसलूकी कर रहे हैं। ताजा मामला उत्तराखंड के देहरादून का है। जहाँ न केवल मेडिकल टीम को समुदाय विशेष के लोगों ने जाँच करने से रोका। बल्कि उन्हें मारने की धमकी दी और उनपर हमले का प्रयास भी किया।
इस वाकए की सूचना भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष डॉ देवेंद्र भाषिन ने अपने ट्विटर पर शेयर की। उन्होंने वीडियो के जरिए दिखाया कि आखिर कैसे देहरादून के माजरा में भाजपा पार्षद समेत स्वास्थ्यकर्मियों को घेरा गया और फिर गाली-गलौच करके धमकी देकर उन्हें भगाने का पूरा प्रयास हुआ।
इस वीडियो के साथ ट्वीट में उन्होंने लिखा, “देहरादून के माजरा में कोरोना जाँच के लिए गई मेडिकल टीम को मुस्लिम सेवा संगठन के लोगों ने रोका। भाजपा पार्षद आफ़ताब आलम के मेडिकल टीम की मदद व जाँच हेतु समझाने के लिए पहुँचने पर संगठन के लोगों ने उन्हें घेर लिया और मारने की धमकी देते हुए हमले का प्रयास किया।”
देहरादून के माजरा में #कोरोना जाँच केलिए गई मेडिकल टीमको मुस्लिम सेवा संगठन के लोगोंने रोका।#भाजपा पार्षद आफ़ताब आलम के मेडिकल टीम की मदद व जाँच हेतु समझाने के लिए पहुँचने पर संगठन के लोगों ने उन्हें घेर लिया,मारनेकी धमकी देते हुए हमलेका प्रयास किया।@uttarakhandcops@DehradunSsppic.twitter.com/MVLgUsQUiF
वीडियो में हम देख सकते हैं कि एक गली में कुछ लोगों को चारों ओर से घेरकर भीड़ खड़ी है और आसपास के लोगों में काफी हलचल हैं। एक युवक बार-बार स्वास्थ्यकर्मी को मारने के लिए आगे बढ़ रहा है। मगर, कुछ लोग उसे रोककर पीछे ले जा रहे हैं। बाकी लोग वहीं झुंड बनाकर हैं। इसके बाद कत्थई कुर्ते में नजर आ रहा युवक गाली देने लगता हैं। फिर भागकर आगे आता है और पत्थर उठा लेता है। हालाँकि, 2 पुरुष और एक महिला यहाँ उसे रोक लेते हैं।
इस वीडियो में एक और चीज जो देखने वाली है वो ये कि वीडियो में स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा किसी के पास भी (एक दो को छोड़कर) मास्क नहीं हैं। जिसे देखकर समझा जा सकता है कि न तो ये लोग खुद सावधानी बरत रहे हैं और जब कोई इन्हें समझाने आता है तो उससे दुर्व्यवहार करते हैं।
जी ! अवश्य होनी चाहिए। कल गुरु जी @DrDBhasin ने बोला था की @uttarakhandcops को इस नंबर 0135 2722100 पर कॉल कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने DGP Sir @Ashokkumarips को भी टैग किया था. उत्तराखंड पुलिस इस वीडियो का स्वतः संज्ञान ले अवश्य कार्यवाही करेगी ! RT!https://t.co/XxLm1Wk3k0
बता दें, ये वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही है। कई लोग ये भी कह रहे हैं कि इस दौरान पार्षद को जान से मारने की धमकी दी गई और सरकारी कर्मचारियों को परेशान किया जाता रहा। इसलिए अब इनके ऊपर कोई कार्रवाई होगी या नहीं?
गौरतलब है कि उत्तराखंड में 4 जमातियों के मिलने के बाद प्रशासन वहाँ पर काफी सख्त हो गया है। अभी हाल ही उत्तराखंड सरकार के आग्रह पर देहरादून जिले से ऐसे 64 लोग सामने आए थे, जो देहरादून के उन चार जमातियों के संपर्क में आए थे, जिन्होंने दिल्ली हजरत निजामुद्दीन स्थित तबलीगी मरकज में हिस्सा लिया थ।
एक तरफ कोरोना से जंग जीतने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन जारी है, तो दूसरी ओर कुछ असामाजिक तत्व मौके का फायदा उठाकर माहौल को खराब करने की कोशिश में लगे हुए हैं। कुछ ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से आई जहाँ कुछ असामाजिक तत्वों ने एक मंदिर को अपना निशाना बनाया और पहले तो मंदिर में रखी मूर्तियों को तोड़कर कुँए में फेंका और फिर माहौल को खराब करने के इरादे से दूसरे मंदिर में माँस का टुकड़ा फेंक दिया। फिलहाल गाँव में तनाव को देखते हुए पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।
आज लखैया कला थाना नानपारा जिला बहराइच उत्तर प्रदेश मे किसी ने मस्जिद के सामने बनी मंदिर तोड़ दिया उसमे रखी शिवलिंग और मूर्ति को कुवा मे फेक दिया और बात यही तक नही रही गाव मे बनी दूसरी मंदिर मे मास भी फेका इसलिए हिंदुत्व की रक्षा करने वालो से अपील है बात को ज्यादा से ज्याद भेजो pic.twitter.com/1rQOpIhGDl
— Rakesh Vishwakarma (@Rakeshvish7317) April 7, 2020
अमर उजाला की खबर के मुताबिक बहराइच जिले के कोतवाली नानपारा अंतर्गत लखैया कला गाँव में सोमवार की शाम कुछ लोगों ने गाँव में कोरोना की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगे पोस्टरों को फाड़ दिया। इसके बाद देर रात गाँव में स्थित एक शिव मंदिर में शिवलिंग को तोड़कर उसे पास के ही कुएँ में फेंक दिया। इतना ही नहीं आरोपितों ने गाँव के दूसरे राधा-कृष्ण मंदिर में भी माँस का टुकड़ा फेंक दिया।
इसकी जानकारी सुबह ग्रामीणों को हुई तो बात पूरे गाँव में यह बात आग की तरह फैल गई और सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा होकर रोष व्यक्त करने लगे। देखते ही देखते गाँव में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इसी बीच सूचना मिलने पर थाना प्रभारी कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए। साथ ही घटना से जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया, जिस पर सीओ अरुण चंद्र, एएसपी ग्रामीण रवींद्र कुमार सिंह भी मौके पर पहुँच गए और लोगों को समझाकर टूटी हुई मूर्तियों को ठीक कराया गया।
वहीं राधा-कृष्ण मंदिर की साफ-सफाई कराकर माँस के टुकड़े को जाँच के लिए भेज दिया। हालाँकि, अभी तक आरोपितों का पता नहीं लग सका है। वहीं पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों की तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ में मुकदमा दर्ज कर लिया। इसी के साथ पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।
वहीं पुलिस अधीक्षक विनय मिश्रा ने बताया कि लखैया गाँव में टूटी मूर्तियों को दुरुस्त करा दिया गया है। साथ ही धर्मस्थल को धुलवाया गया है। मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गाँव के माहौल को देखते हुए फिलहाल पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।
‘न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBA)’ ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के उस बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोरोना के प्रति जागरूकता फैलाने वाले एड को छोड़ कर बाकी सभी सरकारी एडवर्टाइजमेंट पर रोक लगाई जाए। सरकारी और सार्वजनिक कंपनियों और संस्थाओं द्वारा किसी प्रिंट, टीवी या ऑनलाइन किसी भी प्रकार के एडवर्टाइजमेंट को प्रतिबंधित करने की सलाह की एनबीए ने निंदा की है। उसने कहा कि मीडिया के लोग इस परिस्थिति में भी जीवन संकट में डाल कर जनता के लिए काम कर रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
एसोसिएशन ने कहा कि एक तो मंदी की वजह से पहले ही उन्हें एडवर्टाइजमेंट्स में कमी हो गई थी और लॉकडाउन की वजह से वित्तीय संकट भी आन पड़ा है, ऐसे में सोनिया गाँधी की सलाह उनके लिए काफ़ी ख़तरनाक है। एसोसिएशन ने कहा कि सभी न्यूज़ चैनल अपने रिपोर्टरों और कर्मियों की सुरक्षा के लिए पूरा इंतजाम कर रहे हैं। एसोसिएशन ने माँग की है कि सोनिया गाँधी अपना सुझाव वापस लें।
News Broadcasters Association (NBA) “strongly deplores” statement by Sonia Gandhi in which she suggested to PM @narendramodi to impose ban on media ads for TV, print and online. This at a time when “Media is carrying out its duty in national interest without fearing for lives” pic.twitter.com/86u8gFEC1p
बता दें कि कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने एक और सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए स्थापित किए गए PM केयर्स के अंतर्गत अब तक जमा हुई संपूर्ण धनराशि को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) में ट्रांसफर करने के लिए प्रधानमंत्री से कहा है। सोनिया गाँधी के अनुसार बेहतर पारदर्शिता, जवाबदेही के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है।
तय तारीख के मुताबिक 14 अप्रैल तक देश में लॉकडाउन जारी है। कोरोना से जंग जीतने के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन के बाद भी लगातार कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती चली जा रही है। ऐसे में लोगों में संदेह है कि लॉकडाउन तय समय पर समाप्त हो जाएगा या फिर कि इसकी मियाद बढ़ा दी जाएगी। वहीं मंगलवार शाम को स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना पर जानकारी देते हुए कहा कि देश में अब तक 4421 कोरोना से संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं।
Till now 326 persons have been discharged after recovery. Till now there are 4,421 #COVID19 positive cases in the country, including 354 cases in the last 24 hours: Lav Aggarwal, Joint Secretary, Health Ministry pic.twitter.com/fIW5i0o9JZ
देश में जारी लॉकडाउन की स्थिति पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि ICMR के अध्ययन से पता चलता है कि कोविड-19 से संक्रमित एक मरीज 30 दिनों में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है, यदि वह लॉकडाउन, सामाजिक दूरी का पालन नहीं करता है तो। अगर हम लॉकडाउन कर दें तो एक व्यक्ति केवल 2.5 को संक्रमित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अब तक लॉकडाउन को बढ़ाने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। सोशल मीडिया की खबरों के कारण इस तरह की कोई अटकल न लगाएँ।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के रमन गंगाखेडकर ने जानकारी देते हुए बताया कि पूरे देश में अब तक कोरोना वायरस के 1,07,006 टेस्ट किए गए हैं। वर्तमान में 136 सरकारी प्रयोगशालाएँ काम कर रही हैं। इनके साथ में 59 और निजी प्रयोगशालाओं को टेस्ट करने की अनुमति दी गई है, जिससे टेस्ट मरीज के लिए कोई समस्या न बन सके। वहीं 354 केस बीते सोमवार से आज तक सामने आ चुके हैं।
लव अग्रवाल ने कहा कि भारतीय रेलवे ने 2,500 डिब्बों में 40,000 आइसोलेशन बेड तैयार किए हैं। वे प्रतिदिन 375 आइसोलेशन बेड तैयार कर रहे हैं और यह देश भर में 133 स्थानों पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार क्लस्टर नियंत्रण और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है। कोरोना वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए एक रणनीति अपना रही है। यह रणनीति विशेष रूप से आगरा, गौतमबुद्ध नगर, पठानमथिट्टा, भीलवाड़ा और पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में सकारात्मक परिणाम दे रही है।
वहीं गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की स्थिति संतोषजनक है। गृह मंत्री ने आवश्यक वस्तुओं और लॉकडाउन उपायों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की है, जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सभी राज्यों को निर्देश भी दिए गए हैं। आपको बता दें कि अभी तक भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या 137, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 4921 हो गई है। वहीं 326 लोग अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं।
वहीं अगर पूरे विश्व की बात करें तो इससे मरने वालों की संख्या 76,533, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1,366,205 हो चुकी है।
‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने बदजबान शोएब जमाई को अपने शो से निकाल बाहर किया था क्योंकि उसने पैनलिस्टों पर ओछी और अपमानजनक टिप्पणी की थी। शोएब ने दावा किया था कि भारतीय मीडिया शत प्रतिशत समुदाय विशेष-विरोधी और सांप्रदायिक हो गया है। उसने धमकी दी थी कि एक दिन उन्हें कथित अल्पसंख्यकों के जीवन को ख़तरा पहुँचाने की सज़ा भुगतनी पड़ेगी। उसने मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप मढ़ा था। उसने दावा किया था कि समुदाय के 25 करोड़ मीडिया पर काफ़ी गुस्सा हैं।
शोएब ने भी धमकी दी थी कि मजहब के 25 करोड़ लोग आगे क्या करेंगे, इसका उसे कुछ नहीं पता। उस समय तो उसने धमकी दी थी कि गुस्साए लोग कुछ भी कर डालेंगे, वहीं अब वह अपने बयान का अलग-अलग अर्थ निकाल कर उसके बचाव में जुट गया है। अब उसने बताया है कि उसके कथन का मतलब है कि मजहबी संस्थाएँ अब ‘फेक न्यूज़ फ़ैलाने वाले चैनलों’ के ख़िलाफ़ एफआईआर करेंगे। वो इस बात से नाराज़ है कि ‘कोरोना बम’ और ‘कोरोना जिहाद’ जैसी बातें क्यों कही जा रही है।
उसने कहा कि ये सब शुरू हो चुका है। अपने पहले ट्वीट के क़रीब 13 घंटा बाद उसने ट्वीट करते हुए बताया कि वो न्यूज़ चैनलों की उन बातों को हलके में नहीं ले सकता और ऐसा करने वालों को क़ानून का सामना करना पड़ेगा। उसने कहा कि अब बहुत हो गया है। शोएब ने साथ ही 25 करोड़ लोगों वाली बात की भी व्याख्या की। उसने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार के लिए मजहब को जिम्मेदार ठहराया जाएगा तो निश्चित है कि समुदाय विशेष के लोग गुस्सा होंगे। साथ ही उसने दावा किया कि वो हिंसा में विश्वास नहीं रखता लेकिन क़ानूनी लड़ाई आवश्यक है।
शोएब जमाल ने 13 घंटे बाद अपने ट्वीट की ‘व्याख्या’ की
बता दें कि अर्नब के शो में सोमवार (जनवरी 27, 2020) को PFI द्वारा सीएए के ख़िलाफ़ हुए दंगों को फंड दिए जाने के खुलासे पर डिबेट चल रहा था। इसी डिबेट के वीडियो में करीब 33 मिनट 50 सेकेंड के स्लॉट में शोएब को नेशनल टेलीवीजन पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते सुना जा सकता है। गौर करने वाली बात है कि शोएब ने डिबेट से जुड़ने के बाद ही इधर-उधर की बातें करनी शुरू कर दी थी।
जिसके कारण अर्नब ने कई बार उन्हें डिबेट से हटाने की बात की। लेकिन लगातार हस्तक्षेप के कारण जब उन्हें बोलने दिया गया तो वह किसी पैनेलिस्ट की बात पर नाराज हो गए। शोएब को डिबेट में कहते सुना जा सकता है, “तवायफ के बच्चे की हिम्मत कैसे हुई औरतों और बच्चों के बारे में बोलने की।”
यूके में कोरोना महामारी ने तेजी से अपने पैर पसारे और फिर देखते ही देखते एक के बाद एक सैकड़ों, हजारों और फिर लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। सरकार ने जब तक कठोर कदम उठाए, तब तक यह महामारी पूरे देश में फैल चुकी थी। इस बीच यूनाइटेड किंगडम के इस्कॉन मंदिर में पिछले महीने हुए एक विशेष बैठक को कुछ लोगों ने कोरोना संक्रमण का केन्द्र घोषित कर दिया है। साथ ही भारत के कुछ चिढ़े हुए अभिनेता अब इस्कॉन और यूके में कोरोनो वायरस के मामलों की तुलना भारत में तबलीगी जमात की हरकतों से करने में लगे हुए हैं।
शाहिद सिद्दीकी ने दावा किया, “अंध भक्ति, अंध विश्वास सभी समस्याओं का स्रोत है, टीजे (तबलीगी जमात) या इस्कॉन नहीं है।“
साभार-ट्विटर
विद्या कृष्णन, जोकि एक स्वास्थ्य और विज्ञान पत्रकार है, जिन्होंने पहले राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वुहान कोरोना वायरस की प्रतिक्रिया के बारे में दुर्भावनापूर्ण झूठ फैलाया था, ने कहा, “लंदन में, हिंदू डायसटॉस एक क्लस्टर प्रकोप के केंद्र में है।”
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अन्य इस्लामिक प्रोपगैंडाबाज मैदान में उतरे हैं और दिखावा कर रहे हैं जैसे कि ब्रिटेन में इस्कॉन और भारत में तबलीगी जमात का मामला समान है, भले ही दोनों मामलों में दूर-दूर तक कोई समानता नहीं है।
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अब आपको इस मामले की सच्चाई बताते है। 12 और 15 मार्च को इटली के एक इस्कॉन मंदिर में दो बैठकें आयोजित की गई थीं, जिनमें करीब एक हजार से अधिक भक्तों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद हुई जाँच में इनमें से 21 श्रद्धालुओं को कोरोना पॉजीटिव पाया गया, जबकि इनमें से पाँच की मौत हो गई। दरअसल, इटली में हुई कुल मौत की तुलना में यह एक बहुत छोटा सा आँकड़ा है, जबकि अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक इटली में 5373 लोगों की मौत हो चुकी है और इससे संक्रमित लोगों की संख्या 51,608 हो चुकी है।
इस प्रकार यूके में सामने आए मामलों में 0.04%, जबकि कुल मौतों में 0.9% मौतें इस्कॉन मंदिर से जुड़ी हुई हैं। इस आँकडे से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कोरोना वायरस के कारण यूके में आए कुल मामलों और मौतों की संख्या में इस्कॉन की संख्या बहुत ही कम है। अब अगर बात करें भारत की तो स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। 6 अप्रैल तक भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 4067 है, जबकि इन मामलों में से 1445 इस्लामिक मिशनरी संगठन से जुड़े हैं। यानी 35.5% मामले इससे इस्लाम से जुड़े हुए हैं। इसलिए ब्रिटेन में इस्कॉन की तुलना भारत में जमातियों की घटना से जोड़ना एक हास्यास्पद है, क्योंकि ये दोनों मामले एक जैसे नहीं हैं।
वहीं यह याद रहे कि जब इस्कॉन मंदिर में 12 और 15 मार्च को कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। तो इन कार्यक्रमों ने किसी भी तरह से सरकारी दिशानिर्देश या आदेश का उल्लंघन नहीं किया था, क्योंकि यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने 23 मार्च को कोरोना के लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए लोगों को घरों में रहने का आदेश जारी किया था, जबकि भारत में जब तबलीगी जमात के एक हजार से अधिक लोगों के साथ निजामुद्दीन मरकज में कार्यक्रम किया था, उससे पहले ही भारत सरकार द्वारा जारी विभिन्न दिशा निर्देशों के साथ दिल्ली की सरकार ने 50 से अधिक लोगों के एक स्थान पर जमा होने पर प्रतिबंध लगा दिया था। जमातियों के इस कार्यक्रम ने दोनों आदेशों का साफ तौर पर उल्लंघन किया था। इसलिए ये दोनों दो उदाहरण भी कहीं से भी समान नहीं हैं।
वहीं भारत में तबलीगी जमात और यूनाइटेड किंगडम में इस्कॉन के आचरण की अगर बात करें तो तबलीगी जमात के विपरीत, इस्कॉन भक्त जानबूझकर संदिग्ध मामलों का पता लगाने से बचने के लिए कहीं भी छिप नहीं रहे, बल्कि सामने आकर सरकार का सहयोग और अपनी जाँच भी करा रहे हैं। उन्होंने तबलीगी जमात की तरह अपने कार्यक्रम में यह भी दावा नहीं किया कि उनके भगवान किसी तरह उन्हें महामारी से बचा लेंगे या फिर यह वायरस उनके धर्म के खिलाफ एक साजिश है। वास्तव में सभी इस्कॉन मंदिरों को 16 मार्च को ही बंद कर दिया गया था, क्योंकि एक सप्ताह पहले ही बोरिस जॉनसन ने लॉकडाउन के आदेश जारी किए थे।
वहीं दूसरी ओर तबलीगी जमात के लोगों ने हर किसी के साथ गलत व्यवहार किया है। इनके सदस्यों ने अस्पताल के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया है, वे अस्पताल में नग्न घूमते रहे और महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों पर यौन अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने भोजन के लिए नखरे किए और माँग की कि उन्हें इसके बजाय जो वो माँग कर रहे हैं वो परोसा जाए। उन्होंने अधिकारियों से दुर्व्यवहार किया और वायरस फैलाने के लिए डॉक्टरों पर तक थूक दिया।
इसके अलावा, उन्होंने क्वारटाइन के नियमों का पालन भी नहीं किया। उन्होंने क्वारंटाइन रहते समय मनोरंजन के संसाधन उपलब्ध कराने की भी माँग की औऱ जिन लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया उन लोगों ने दवा लेने तक से इंकार कर दिया, जबकि इस्कॉन के भक्तों ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है जो कुछ का कोरोना पॉजिटिव पाए जाने में लोगों ने समानता ढूँढी और इसी का सहारा लेकर कुछ लोग तबलीगी जमात के अत्याचारपूर्ण आचरण की गंभीरता को कम करने के लिए जानबूझकर प्रोपेगेंडा चलाने में लगे हुए हैं।
भारत में तबलीगी जमात और यूनाइटेड किंगडम में इस्कॉन के आचरण की बराबरी करने वाले लोग पूरी तरह से जानते हैं कि दोनों मामले समानताओं से कोसों दूर हैं, लेकिन ये लोग सच्चाई की परवाह किए बिना दावा कर रहे हैं क्योंकि यह उनके राजनीतिक एजेंडे को पूरा करता है। आपको बता दें कि यह न केवल भारत में है कि तबलीगी जमात सुपर स्प्रेडर के रूप में उभरा है। इस्लामिक मिशनरी संगठन ने पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में और यहाँ तक कि फिलिस्तीन जैसे स्थानों में भी इस वायरस को फैला दिया है। इसलिए यह दावा करना कि दोनों मामलों के बीच समानता है तो यह बिल्कुल गलत है।
इसके अलावा कुछ बुद्धजीवी लोग आरोप लगा रहे हैं कि भारत सरकार ने ‘सांप्रदायिकता’ को महामारी बना दिया है और इसकी आड़ में समुदाय विशेष को निशाना बना रही है, क्योंकि तबलीगी जमात ने अपनी गंदी हरकतों के कारण सभी क्षेत्रों से जुड़े लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। ये वहीं लोग हैं जो हर बार एक ही बात करते हैं कि समुदाय विशेष का हर आदमी आतंकवादी नहीं होता, जबकि इन लोगों को पता रहता है कि हर एक आतंकवादी मजहब विशेष का होता है। जब भी कोई आतंकवादी हमला होता है, तबलीगी जमात के लोगों के पाए जाने के बाद भी इसकी आलोचना को पूरे समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के रूप में प्रचारित किया जाता है। ये कुछ और नहीं बल्कि इन प्रोपेगेंडाबाजों द्वारा तबलीगी जमात की निष्पक्ष आलोचना से भी दूर करने का यह एक सुनियोजित प्रयास है।
कुछ ऐसा ही यह एक ताजा उदाहरण है कि इन लोगों ने उन पापों के लिए इस्कॉन पर अनुचित दोष लगाने का प्रयास किया है जो उन्होंने नहीं किए थे। यह तर्क दिया जा सकता है कि उन्हें 12 और 15 मार्च को कार्यक्रमों का आयोजन नहीं करना चाहिए था, यहाँ तक कि इस्कॉन ने भी कुछ किया, लेकिन उनके कार्यों को ब्रिटिश सरकार के आचरण की पृष्ठभूमि पर ही आँका जाना चाहिए, जिसने वायरस को गंभीरता से नहीं लिया और जब लिया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस प्रकार यूके में कोरोना वायरस मामलों में इस्कॉन का दूर-दूर तक कोई योगदान नहीं है। ये लोग जानबूझकर इस्कॉन को दोषी ठहरा रहे हैं और अपने कार्यों की तुलना तबलीगी जमात से कर रहे हैं। ताकि बाद में आने वाली सभी निष्पक्ष आलोचनाओं से किनारा किया जा सके।