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वीडियो में कोरोना को अल्लाह का अजाब बताकर नोटों से नाक-मुँह साफ करने वाला युवक गिरफ्तार

सोशल मीडिया पर एक युवक का वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें युवक कोरोना वायरस को अल्लाह का अजाब (श्राप) बताकर पाँच सौ के नोटों की गड्डी पर नाक और मुँह पोंछते हुए नजर आ रहा था। नासिक पुलिस ने उस शख्स की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।

नासिक पुलिस ने खुद ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने अपने ट्वीट में बताया कि नासिक ग्रामीण पुलिस (महाराष्ट्र ग्रामीण) की तरफ से अभियुक्त के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है और वह अब पुलिस की हिरासत में है।

ट्विटर पर यह वीडियो शेयर करते हुए इस वीडियो के साथ @THEFACTGLOBAL ने लिखा है- “यह अपराध है। यह व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो सकता है। यह नोटों से अपनी नाक पोंछ रहा है। नाक पोंछकर और थूककर यह नोटों को भी संक्रमित कर सकता है।” वीडियो में यह शख्स खुद भी ऐसे ही इशारे कर रहा है। इस वीडियो में वह यह कहता हुआ दिखाई दे रहा है – “कोरोना जैसी बीमारी का कोई इलाज नहीं है क्योंकि यह अल्लाह का अजाब है, आप लोगों के लिए।”

लॉकडाउन के बीच राशन की दुकान का जायजा लेने घूँघट-चप्पल पहनकर पहुँची SDM पल्लवी मिश्रा

कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देशभर में 21 दिन का लॉकडाउन जारी है। यह लॉकडाउन आम जनता के साथ-साथ शासन और प्रशासन की भी परीक्षा साबित हो रहा है। जहाँ एक ओर कोरोना वायरस से संक्रमित आईएएस अधिकारी को विदेश से लौटने के बाद क़्वारंटाइन से घर भागने के आरोप में निलंबित किया गया है, वहीं अधिकारियों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो दिन-रात कानून व्यवस्था बनाने से लेकर आम जनमानस की सुविधाओं का अभी ध्यान रख रहा है। ऐसे ही कुछ उदाहरणों में से एक हैं एसडीएम पल्लवी मिश्रा।

मोहनलालगंज, लखनऊ पल्लवी मिश्रा ने लॉकडाउन के दौरान राशन की दुकान, किराना स्टोर का अनोखे अंदाज में निरीक्षण किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आम जनता से कोई मनमानी कीमत ना ली जा रही हो। गरीब और मजबूर लोगों से कोई आटा, दाल, चावल, तेल आदि की रोजमर्रा की वस्तुओं की ज्यादा कीमत न वसूले इसके लिए एसडीएम पल्लवी मिश्रा ने भेष बदलकर चप्पल, और पुराने कपड़े पहनकर आम लोगों के साथ दुकान की कतार में शामिल हो गईं।

वो किसी की पहचान में न आएँ, इसके लिए उन्होंने राशन की दुकान पर घूँघट भी ओढ़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, एसडीएम पल्लवी मिश्रा ने बताया कि कई दुकानदार एमआरपी से पाँच या दस रुपए ज्यादा पर वस्तुएँ बेच रहे थे। ग्रामीण इलाकों में दुकानें कम होने के कारण इन सभी को चेतावनी दी गई हैं कि इसके बाद दोबारा ऐसे ही किसी और तहसील के अधिकारी से जाँच कराई जाएगी। इसके बाद उन्होंने बीस दुकानदारों को नोटिस भी दिया है।

इसके साथ ही उन्होंने इलाके की करीब 30 दुकानों की जाँच की और उनसे ‘कच्चे और पक्के’ बिल जैसी शिकायतों पर भी जानकारी इकट्ठी की। एसडीएम पल्लवी मिश्रा अक्सर अपनी कर्तव्यनिष्ठा के कारण चर्चा में रहती हैं। गत वर्ष ही उन्होंने अपनी बेटी को सरकारी स्कूल में भर्ती करवाकर उदाहरण पेश किया था।

MP: रात में लोगों को मस्जिद में इकट्ठा कर नमाज अदा करवा रहा था मौलवी

दिल्ली के निजामुद्दीन में जमात तब्लीगी के इज्तिमा ने कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा किना बढ़ा दिया है यह किसी से छिपा नहीं। बावजूद इसके मजहबी ठेकेदार चेत नहीं रहे। खुद के साथ दूसरों की भी जान के लिए खतरा बढ़ा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के उज्जैन से सामने आया है।

लॉकडाउन के बावजूद यहॉं की एक मस्जिद में मौलवी बुधवार की रात 25-30 लोगों को नमाज अदा करवा रहा था। पुलिस ने मौलवी के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए मस्जिद में ताला लगवा दिया है। उल्लेखनीय है कि सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना संक्रमण को रोकने का सबसे कारगर उपाय है। कई इस्लामी धर्मगुरुओं ने भी इसका पालन करते हुए सामूहिक और मस्जिद में नमाज अदा नहीं करने की अपील की है। प्रशासन ने भी एक साथ लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा रखी है।

दैनिक भास्कर रिपोर्ट के अनुसार बुधवार रात 8.30 बजे प्रशासन को उज्जैन के आगर रोड स्थित गाँधी नगर के मोहम्मद मस्जिद में लोगों के इकट्ठा होने की खबर मिली। पुलिस मौके पर पहुँची। नमाज पढ़ते इन सभी लोगों को बाहर निकाला। मौलवी हाजी मोहम्मद युनूस वफाती खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। मौलवी के खिलाफ यह एफआईआर उन्हीं दफाओं के अंतर्गत दर्ज हुई है जिनके तहत गायिका कनिका कपूर के खिलाफ लखनऊ में मामला दर्ज किया गया था।

जिस कानून के अंतर्गत मौलवी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है वह अंग्रेजों ने 1897 में प्लेग पर काबू पाने के लिए बनाया था। इसके तहत बीमारी फैलाना गैर जिम्मेदारी भरा काम है। इसके लिए 6 महीने की सजा अथवा जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। साथ ही लोकसेवक का आदेश न मानने पर एक माह की कैद हो सकती है।

वैसे, लॉकडाउन की पाबंदियों को अनदेखी कर सामूहिक रूप से नमाज अदा करने की यह पहली घटना नहीं है। देश के कई शहरों से ऐसे मामले सामने आए हैं। कई जगहों पर सामूहिक नमाज से रोके जाने पर पुलिस से भी लोग भिड़ने से नहीं चूके। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बीते दिनों तलैया स्थित जैनब मस्जिद इस्लामपुरा में इमाम सहित करीब 30 लोग रात के वक़्त जमा होकर नमाज अदा कर रहे थे। शहर के टीला जमालपुरा इलाके में मस्जिद के इमाम शाहीद नासिर के घर में लोग इकट्ठा होकर नमाज अदा कर रहे थे। वहीं बिहार के मधुबनी में सामूहिक नमाज की सूचना मिलने पर एक मस्जिद पहुॅंची पुलिस पर भीड़ ने हमला ही कर दिया था। पुलिस को करीब एक किमी तक खदेड़ा गया। पत्थरबाजी और फायरिंग की गई।

गौरतलब है कि दिल्ली में तबलीगी जमात में शामिल होने वालों में 7 लोग उज्जैन से भी थे। इनमें 5 ने अस्पताल से सेल्फी भेज दी है जबकि 2 ने पुलिस से बात तो की है पर अस्पताल में हैं वो या नहीं इसकी कोई पुष्टि नहीं हो सकी है अब तक।

मंदिरों, मठों, ट्रस्टों ने जमकर किया कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में सरकार और जनता का सहयोग: एक छोटी सी सूची

राष्ट्रीय संकट के समय हम अक्सर कथित उदारवादी और सेक्युलर ब्रिगेड से सुना करते हैं कि भला होता जो मंदिर की जगह अस्पताल बनाए गए होते। मंदिरों पर हुए खर्च को किन्हीं बेहतर जगह खर्च करने की दुहाई दी जाती है। सामान्य दिनों में अस्पतालों के साथ-साथ विद्यालय बनाने के पक्ष में भी दलीलें होतीं हैं। अस्पताल, स्कूल चाहिए किसकी कीमत पर? मंदिरों की कीमत पर।

जबकि तथ्य यह है कि मंदिर बनाना और अस्पताल या विद्यालय बनाना बिल्कुल अलग-अलग गतिविधि नहीं है, दोनों ही जनकल्याण के लिए ही हैं। इसके बावजूद भी सोची समझी रणनीति के तहत हिन्दुओं को मंदिर बनाने के ‘गिल्ट’ में डुबो देने की कोशिशें जारी रहती हैं। हालाँकि, सामाजिक सरोकारों के प्रति सामान्य परिस्थिति में निभाई जा रही अपनी महती भूमिका के अतिरिक्त संकटकालीन स्थिति में आपदा के समय मंदिर हमेशा ही सरकारों तथा सामाजिक संगठनों को दान और सहयोग करने में सबसे आगे रहते हैं। वुहान वायरस महामारी भी इस मामले में कोई अपवाद नहीं।

संकट की इस घड़ी में अब तक देश भर से कई सारे मंदिर आगे आ कर कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में अपने अंशदान की घोषणा कर चुके है। कोरोना संक्रमण, और उसको फैलने से रोकने के लिए लगाए गए इस लॉकडाउन जैसी विषम स्थिति में देश के मंदिर न सिर्फ नगद के रूप में बल्कि भोजन आदि कल्याणकारी गतिविधियों के मार्फत से भी देश को इस संकट के समय सहयोग करते देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद भी मंदिरों को अपनी भूमिका के एवज में कभी न्यायोचित क्रेडिट नहीं दिया जाता। इस कारण मंदिरों के खिलाफ एक झूठे प्रोपेगण्डे को पर्याप्त जगह मिल जाती है, जिसमें मंदिरों पर सामाजिक हित में पर्याप्त भूमिका न निभाने का आरोप लगाया जाता है। जबकि यह सच्चाई से कोसों दूर की बात है।

इस वजह से हमने निर्णय लिया कि हम उन मंदिरों तथा मठों की एक लिस्ट बनाने का काम करें, अपने पाठकों के लिए, जो अब तक इस संकटकालीन परिस्थिति में अपने-अपने सहयोग की घोषणा कर चुके हैं। किसी भी प्रकार से यह लिस्ट सम्पूर्ण नहीं है क्योंकि बहुत सारे बड़े-बड़े मंदिर जिनका ट्रस्ट सरकार के पास है, और उनके फंड्स का क्या करना है वो सरकार तय करती है। ऐसे मंदिर इस लिस्ट में शामिल नहीं हैं, आने वाले समय में शायद सरकारें इन मंदिरों के सहयोग पर कुछ निर्णय लें। साथ ही इस लिस्ट में उन छोटे छोटे सैंकड़ों हजारों मंदिरों के भी नाम नहीं आ सकते थे जो कोरोना वायरस के खिलाफ जारी लड़ाई में अपने-अपने उपलब्ध संसाधनों के जरिए अपनी-अपनी यथोचित भूमिका के निर्वहन में लगे हुए हैं।

  • शिरडी साईं बाबा संस्थान : महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शिरडी साईं बाबा मंदिर ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रिलीफ फंड में 51 करोड़ रूपए दान किए।
  • बाबा रामदेव और पतंजलि ट्रस्ट : योग गुरु बाबा रामदेव ने घोषणा की है कि वे प्रधानमंत्री राहत कोश में 25 करोड़ का सहयोग करेंगे इसके साथ ही साथ पतंजलि और रूचि सोया के सभी एम्प्लॉई अपने एक दिन का वेतन भी प्रधानमंत्री कोष में दान करेंगे जो कुलमिलाकर 1.5 करोड़ बैठता है। इसके अतिरिक्त योग गुरु ने अपने हरिद्वार स्थित दोनों संस्थानों और कोलकाता, मोदी नगर-यूपी, सोलन-हिमाचल प्रदेश स्थित आश्रमों को कोरोना रोगियों के इलाज के लिए देने की घोषणा की। इन सभी स्थानों में 1500 रोगियों को आइसोलेशन में रखा जा सकता है। यहाँ जिन्हें भर्ती किया जाएगा उनके लिए भोजन की व्यवस्था भी पतंजलि करेगा।
  • महावीर हनुमान मंदिर, पटना : पटना स्थित महावीर हनुमान मंदिर ने कोरोना से लड़ने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपए दान किए।
  • अम्बाजी मंदिर : अम्बा जी माता मंदिर ट्रस्ट, ‘आरासुरी अम्बा जी माता देवस्थानम ट्रस्ट’ ने 1 करोड़ 1 रुपए का दान किया
  • स्वामीनारायण मंदिर: गुजरात भर में फैले 7 स्वामीनारायण मंदिरों ने कुलमिलाकर 1.88 करोड़ रुपए का सहयोग किया। इसके अलावा कोरोना संक्रमित मरीजों को आइसोलेशन में रखने के लिए तकरीबन 500 बेड का भी इंतजाम स्वामीनारायण ट्रस्ट ने किया है।
  • सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट : सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने गुजरात के मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपए दान किए।
  • कांची मठ : कांची कामकोटि पीठम ने 21 मार्च को जारी किए स्टेटमेंट में प्रधानमंत्री राहत कोष तथा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री राहत कोष में 10-10 रुपए के अंशदान की घोषणा की।
  • माता वैष्णों देवी मंदिर : जम्मू-कश्मीर स्थित माता वैष्णों देवी मंदिर के गैर राजपत्रित स्टॉफ ने जहाँ राज्य के राहत कोष में एक दिन की सैलरी देने का निर्णय लिया, वहीं ट्रस्ट के राजपत्रित स्टॉफ ने अपनी दो दिनों की सैलरी राज्य के राहत कोष में दान की। इसके अतिरिक्त बोर्ड के वाइस चेयरमैन मुर्मू के निर्देश पर कटरा बस्ती में जरूरतमंदों के बीच राशन किटों का भी वितरण किया गया। इसके अलावा श्राइन बोर्ड ने अपने आशीर्वाद काम्प्लेक्स को जिला प्रशासन के लिए सौंप दिया है जो 600 बेडों के अस्पताल के लिए काम आ सकता है।
  • महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन : महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने कुल 5 लाख रुपए, 2.5 लाख प्रधानमंत्री राहत कोष और 2.5 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए।
  • माँ महामाया मंदिर ट्रस्ट, विलासपुर छत्तीसगढ़ : मंदिर ने मुख्यमंत्री सहायता कोष में 5 लाख 11 रुपए दान किए और रेड क्रॉस सोसाइटी को कोरोना के खिलाफ अभियान में 1 लाख 11 हजार दान किए।
  • श्री नित्य चिंताहरण गणपति मंदिर ट्रस्ट : रतलाम मध्य प्रदेश के गणपति मंदिर ट्रस्ट ने भूखों को खाना खिलाने के लिए 1 लाख 11 हजार का दान किया।
  • इसके अलावा सिद्ध विनायक मंदिर रक्त संकलन करने में अपना योगदान देगा।

तबलीगी जमात में शामिल 960 विदेशियों का वीजा MHA ने किया रद्द: टूरिस्ट वीजा पर मजहबी गतिविधि में थे शामिल

गृह मंत्रालय ने दिल्ली में निजामुद्दीन तबलीगी जमात के मरकज में शामिल 960 विदेशियों के वीजा ब्लैकलिस्ट कर दिए हैं। ये सभी लोग पर्यटक वीजा पर भारत आए थे। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने इन सबका पर्यटक वीजा भी रद्द कर दिया है जिससे कि ये अब कभी भी भारत नहीं आ सकेंगे। देश में अब तक सामने आए कोरोना के मामलों में से लगभग 20% तबलीगी जमात से जुड़े बताए जा रहे हैं।

इन्हें वीजा सूची के नियमों के उल्लंघन का दोषी माना गया है क्योंकि ये सभी लोग पर्यटक वीजा पर भारत आए थे, लेकिन निजामुद्दीन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। ज्ञात हो कि पर्यटक वीजा धारक धार्मिक समारोह में शामिल नहीं हो सकते है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, देशभर में तबलीगी जमात के सदस्यों सहित उनके संपर्क में आए करीब 9000 लोगों को क्वारंटाइन किया गया है। दिल्ली में तब्लीगी जमात के करीब 2000 सदस्यों में से 1,804 को क्वारंटाइन किया गया है, जबकि 334 लोगों को अस्पतालों मे भर्ती कराया गया है।

इसके अलावा गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस और अन्य राज्यों के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ विदेशी एक्ट 1946 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है। सरकार पहले भी कह चुकी है कि इनमें से अधिकतर पर्यटन वीजा पर भारत आए हैं। ऐसे में ये किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकते। क्योंकि इसके लिए दूसरा वीजा जारी किया जाता है।

2 मंत्री: एक ने बस में ठूँस-ठूँस कर लोगों को भिजवाया, दूसरे ने बेटे के मरकज में जाने की बात छिपाई

झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन की सरकार चल रही है। इस सरकार के दो मंत्री हैं- आलमगीर आलम और हाजी हुसैन अंसारी। अंसारी झामुमो के कोटे से हैं और अल्पसंख्यकों के कल्याण वाले महकमे की जिम्मेदारी सॅंभाल रहे हैं। आलमगीर आलम कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता हैं और ग्रामीण विकास महकमे की जिम्मेदारी सॅंभाल रहे हैं। उन पर दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर लॉकडाउन के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में लोगों को बस में ठूॅंस-ठूॅंस कर भिजवाने का आरोप लगा है। हाजी हुसैन के बेटे के लिए कहा जा रहा है कि वह दिल्ली में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। मंत्री का पूरा परिवार होम क्वारंटाइन में चला गया है। बेटे का सैंपल जॉंच के लिए भेजा गया है।

उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात का निजामुद्दीन स्थित मरकज कोरोना वायरस संक्रमण का एपिक सेंटर बनकर उभरा है। जमात के इज्तिमा में देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों के साथ विदेशी भी मौजूद थे। मरकज से निकाले गए लोगों में से कई संक्रमित मिले हैं। अब देश भर में यहॉं आए लोगों की तलाश की जा रही है ताकि उनकी जॉंच की जा सके। इसी क्रम में झारखंड में भी ऐसे लोगों की तलाश हो रही है। राज्य में संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि एक मलेशियाई महिला में हुई है। वह भी जमात के इज्तिमा में शामिल हुई थी। उसके अलावा भी राज्य के मस्जिदों से कई विदेशी धर्म प्रचारक मिले हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विशेष शाखा ने इज्तिमा में शामिल हुए राज्य के लोगों की एक सूची जारी की है। इसमें मंत्री हाजी हुसैन के बेटे मोहम्मद तनवीर का भी नाम है। बुधवार को देवघर जिला प्रशासन की टीम तनवीर को लेकर मधुपुर थाने में आई। थाने में ही उनका सैंपल लिया गया। इस दौरान उनके पिता मंत्री हाजी हुसैन भी थाने में मौजूद थे। लेकिन, हैरान करने वाली बात यह है कि मंत्री पर जानकारी छिपाने का आरोप लग रहा है। मंत्री हाजी हुसैन के हवाले से प्रभात खबर ने बताया है, “मेरा पुत्र छात्र जीवन में दिल्ली गया है। उसके बाद वर्षों से वह दिल्ली नहीं गया है। हैरानी की बात है कि इसके बावजूद उसका नाम कार्यक्रम में शामिल होने वालों की सूची में आया है।”

तनवीर ने भी इज्तिमा में शिरकत करने से इनकार किया है। हालॉंकि तनवीर सहित पूरा परिवार होम क्वारंटाइन में है और जॉंच रिपोर्ट का इंतजार है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार संवैधानिक पद पर रहते गंभीर कोताही बरतने का आरोप आलमगीर आलम पर भी है। उन्होंने आपदा प्रबंधन के सख्त नियमों को दरकिनार करते हुए लोगों को विभिन्न जिलों में भेजे। ऐसे 400 लोगों को पाकुड़ में रोककर क्वारंटाइन किया गया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश का कहना है ऐसा करने के लिए मंत्री ने 29 मार्च को पत्र लिखकर रॉंची जिला प्रशासन पर दबाव डाला। लॉकडाउन के बीच 600 लोगों को रॉंची से बाहर ले जाने के लिए बस चलाने की मॅंजूरी दी। कोडरमा, साहेबगंज आदि जगहों पर लोग भेजे गए। बकौल बीजेपी अध्यक्ष इनमें अधिकांश बांग्लादेशी थे।

MP: डॉक्टर्स को पीटने वालों की CCTV से पहचान, गैरजमानती वारंट पर होगी गिरफ्तारी, इंदौर में अर्धसैनिक बल तैनात

देशभर में जारी 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान इंदौर के डॉक्टर्स और पुलिसकर्मियों के साथ संवेदनशील इलाकों में बदसलूकी की घटनाएँ सामने आई हैं, जिसके बाद मध्य प्रदेश में अर्धसैनिक बल तैनात करने की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि इंदौर में स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी करने वालों को सीसीटीवी के माध्यम से पहचान लिया गया है और अब अर्धसैनिक बल को तैनात किया जा रहा है। सम्भव है कि दोषियों को गैरजमानती वारंट के अंतर्गत गिरफ्तार भी किया जा सकता है।

मध्य प्रदेश के टाटपट्टी बाखल में कोरोना संदिग्धों की जाँच के लिए जब टीम पहुँची तो डॉक्टरों से बहस के बाद देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। लोगों ने वहाँ स्वास्थ्यकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट के साथ-साथ भीड़ ने जमकर पथराव भी किया। इंदौर में मुस्लिम बाहुल्य बस्तियों में लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से बड़े स्तर पर प्रभावित हैं। इस कारण क़रीब एक दर्जन प्रभावित बस्तियों को पूरी तरह से सील किया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर प्रशासन ने वहाँ अर्धसैनिक बल की तैनाती करने का निर्णय लिया है। पथराव और हमला करने वालों के वीडियो वहाँ मौजूद स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए थे। चश्मदीदों से भी वीडियो में नज़र आने वालों की शिनाख्त करवाई जा रही है।

आज ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक ट्वीट ने भी खलबली मचा दी है। शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर एकाउंट से चेतावनी देते हुए कहा है कि मानवाधिकार सिर्फ मानवों के लिए होते हैं और इसे महज एक ट्वीट समझने की भूल ना करें।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अर्धसैनिक बल की पाँच कम्पनी बुलाई गई हैं, जबकि फ्लैग मार्च खजराना में बदसलूकी की पहली घटना के बाद ही जारी करवा दिया गया था और पत्थरबाजी करने वालों में से कुछ की पहचान कर के गिरफ्तारी भी कर दी गई हैं। बाकी की तलाश जारी है।

उल्लेखनीय है कि आज सुबह ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्य के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीटिंग भी की। तबलीगी जमात के कारनामे के उजागर होते ही कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा अब कई गुना बढ़ चुका है। क्योंकि मरकज में शामिल हुए लोग देश के कई हिस्सों में पहुँच चुके हैं। सरकार कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर कोई भी लचीला रवैया अपनाने के पक्ष में नजर नहीं आ रही हैं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में कोरोना वायरस को लेकर जब डॉक्टरों की टीम जाँच के लिए पहुँची तो उन पर हमला कर दिया गया। यही नहीं, स्वास्थ्यकर्मियों के ऊपर थूकने के साथ-साथ उन पर पथराव भी किया गया। इंदौर के टाटपट्टी बाखल में बुधवार को कोरोना संक्रमितों की जाँच करने पहुँची स्वास्थ्य विभाग की टीम पर लोगों ने पथराव कर दिया जिसके बाद स्वास्थ्यकर्मी वहाँ से जान बचाकर भागे। उपद्रवियों ने बैरिकेड्स भी तोड़ दिए। पुलिस ने इनके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा का केस दर्ज किया है।

JNU छात्र ने गॉर्ड से की बद्तमीजी, पकड़ा कॉलर, कहा- खाँसकर फैला दूँगा Corona, देखें वायरल वीडियो

एक समय तक बुद्धिजीवियों को तैयार करने का दावा करने वाला शैक्षणिक संस्थान जेएनयू अब ‘जाहिलों’ से घिरा नजर आ रहा है। बीते दिनों विरोध के नाम पर मारपीट और लड़ाई झगड़े के कई मामले वहाँ से सुनने में आए। मगर, अब कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच में एक ऐसी वीडियो आई है। जिसे देखकर आप भी सवाल करेंगे कि आखिर संस्थान में वामपंथी बनने के अलावा बच्चों को क्या सिखाया जा रहा है। दरअसल, जेएनयू से आई एक वीडियो में एक छात्र सुरक्षा गार्ड को कोरोना फैलाने की धमकी दे रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लॉकडाउन के बीच ये छात्र विश्वविद्यालय परिसर से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन जब उसे सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोका गया, तो वह वहीं बैठ गया और सुरक्षाकर्मियों से जिरह करने लगा। जब सिक्योरिटी गार्ड ने गेट खोलने से इंकार कर दिया और उसे वहाँ से उठाने की कोशिश की, तो उसने कहा कि अगर कोई पास आया तो वह खाँसकर कोरोना फैला देगा।

इस पूरे वाकये के दौरान वे लगातार बाहर जाने की जिद करता रहा और सिक्योरिटी गार्ड को मनाने के लिए बिना हस्ताक्षर हुए वॉर्डन का अनुमति का पत्र भी दिखाया। मगर, सुरक्षाकर्मियों का कहना था कि वे उस अनुमति पत्र पर स्टैंप लगवा कर आए, तभी गेट से बाहर जाने को मिलेगा। लेकिन छात्र इसके लिए तैयार नहीं हुआ। बात बढ़ने पर उसने सिक्योरिटी गार्ड पर मारपीट का आरोप लगाया और ये भी कहा कि उसे एम्स के ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। बता दें वीडियो में नजर आ रहे जिद्दी छात्र की पहचान प्रणव के रूप में हुई है। जिसने सिक्योरिटी गार्ड के मुँह से उसका मास्क भी खींचा और उनका कॉलर भी पकड़ा।

गौरतलब है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग जेएनयू पर काफी सवाल उठा रहे हैं और प्रशासन को टैग कर करके पूछ रहे हैं कि आखिर इस तरह के व्यवहार एवं छात्रों को क्यों सहा जा रहा हैं। सरकार इनपर करोड़ों खर्च कर रही हैं और ये लोग ये सब सीख रहे हैं। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि एक ऐसा आदेश आना चाहिए जिसमें अगर कोई इस महामारी के समय में खाँसने के नाम पर धमकाए तो उसपर उचित कानूनी एक्शन लिया जाए।

सैंपल जुटाने सादिक मोहल्ला गई थीं आशा वर्कर और नर्स, मस्जिद से ऐलान होते ही भीड़ ने किया हमला

कोरोना वायरस संक्रमण की जॉंच में जुटी टीमों को निशाना बनाने की हाल में देश के कई शहरों से घटनाएँ सामने आई है। अब इसमें कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का नाम भी जुड़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार बेंगलुरु के सादिक मोहल्ले में कोरोना संक्रमण के लक्षणों के बावत जाँच पड़ताल करने और नमूने लेने के लिए नर्स और आशा कार्यकर्ता गई थीं। लेकिन उन पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया।

मेडिकल टीम मोहल्ले में से बुखार या कफ आदि लक्षण के संदर्भ में डाटा जुटा रही थी। यह कवायद राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार थी। सरकार ने कोरोना के लक्षणों की पहचान के लिए सैंपल इकट्ठा करने और टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्हें आइसोलेशन में रखने की योजना बना रखी है। इसका मकसद महामारी पर काबू पाना है।

हैरतअंगेज तरीके से नमाज वाली टोपी पहने लोग आशा वर्कर्स पर हमला करते और उनके द्वारा बनाई गई रिपोर्ट को फाड़ कर फेंकते दिखाई पड़ रहे हैं। इसके अलावा इन मुस्लिमों ने अपने साथ रहने वाले दूसरों से भी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को धार्मिक यात्राओं से संबंधित किसी भी तरह की ट्रेवल हिस्ट्री और निजी जानकारी देने से भी मना किया हुआ है।

मुस्लिम मोहल्ले सादिक में कोरोना से मिलते-जुलते लक्षणों के बावत जानकारी जुटाने गई आशा वर्कर ने जो आपबीती सुनाई है, वह सिहरन पैदा करने वाली है।

आशा वर्कर के अनुसार मस्जिद से घोषणा की गई। इसके बाद तकरीबन 100 लोगों की भीड़ ने आकर उन्हें घेर लिया। कोरोना की आशंका वाले लोगों से संबंधित जानकारी जुटाने से उन्हें रोका। पीड़ित महिला ने भीड़ को भड़काने के लिए मस्जिद प्रबंधन के खिलाफ तुरंत एक्शन लेने की माँग की है।

जिस समय देश का अमूल्य संसाधन कोरोना संक्रमण को रोकने में उपयोग होना था, वह मरकज में शामिल हुए लोगों को ट्रेस करने में जाया हो रहा है। इतना ही नहीं मेडिकल टीमों और पुलिस-प्रशासन पर मुस्लिम भीड़ के हमलों की ख़बरें लगातार आ रही है।

कल (बुधवार) को ही इंदौर के टाटपट्टी भाखल इलाके में भी कोरोना वायरस संक्रमण की आशंका वाले एक रोगी की जाँच करने गई मेडिकल टीम पर पत्थरों से हमला बोला गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार मोहल्ले में इकट्ठा हुई भीड़ ने भेड़ियों की तरह मेडिकल टीम पर हमला बोल दिया, उन पर छतों से पत्थर फेंके। मेडिकल टीम की मदद करने की कोशिश करती पुलिस टीम पर भी हमले हुए। मुस्लिम भीड़ ने औरतों को मानव शील्ड की तरह इस्तेमाल करते हुए पुलिस पर हमले जारी रखे।

इसी तरह अहमदनगर में भी मरकज में शामिल हुए लोगों के सम्पर्क में आने वालों का डाटा जुटाने गई मेडिकल टीम पर हमला हुआ। हमले की वजह यह शक बताया जा रहा कि मेडिकल टीम नागरिकता संशोधन और एनआरसी के लिए आँकड़े जुटा रही है, जबकि स्वास्थ्य टीम केवल उन लोगों की जानकारी जुटाने में लगी थी जिनके कोरोना संक्रमित होने या कोरोना संक्रमित के सम्पर्क में आने की आशंका थी।

या अल्लाह ऐसा वायरस भेज, जो 50 करोड़ भारतीयों को मार डाले: मंच से मौलवी की बद-दुआ, रिकॉर्डिंग वायरल

एक ओर जहाँ कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के कारण पूरा विश्व एकजुट होकर इससे लड़ रहा है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस वैश्विक महामारी के दौरान भी अपनी मजहबी भावनाओं से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। खासकर सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के मौलवियों के कुछ ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें कोरोना वायरस को अल्ल्लाह का अजाब बताने से लेकर इसे ताबीज पहनकर ठीक करने जैसे बयान भी देखने को मिले हैं।

ऐसा ही एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक बंगाली मौलवी अल्लाह से एक ऐसे वायरस की डिमांड कर रहा है, जो भारतवर्ष के करीब 50 करोड़ लोगों को एक ही बार में मार दे।

इस वीडियो में मौलाना बंगाली में कह रहा है – “बहुत जल्द मेरे पास खबर आई है कि पिछले दो दिनों से मस्जिदों में आग लगाईं जा रही है, माइक जलाए जा रहे हैं। मुझे लगता है कि एक महीने के अंदर ही कुछ होने वाला है। अल्लाह हमारी दुआ कबूल करे। अल्लाह हमारे भारतवर्ष में एक ऐसा भयानक वायरस दे कि भारत में दस-बीस या पचास करोड़ लोग मर जाएँ। क्या कुछ गलत बोल रहा मैं? बिलकुल आनंद आ गया इस बात में।” इसके बाद वहाँ मौजूद भीड़ मौलवी की कही बात पर खूब शोर के साथ अपनी सहमती दर्ज कराती है।

@porbotialora ने ट्विटर पर यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि बंगाली सुन्नी कह रहा है कि उसे इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि वह मरेगा या बचेगा लेकिन वो हिन्दुओं को अपने साथ लेकर जाएगा।

यह वीडियो ऐसे समय पर सामने आया है जब दिल्ली स्थित निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मौलाना साद समेत तबलीगी के सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। हाल ही में दिल्ली निजामुद्दीन इलाके में हुए इस्लामिक धार्मिक आयोजन (तबलीगी जमात मरकज) के बाद मरकज में शामिल कई मुस्लिमों के देशभर में फ़ैल जाने से बवाल खड़ा हो गया है।

इसी बीच तबलीगी जमात के मुखिया मोहम्मद साद का एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें वो कह रहा था- “अल्लाह पर यकीन न रखने वालों की चाल और स्कीमें मुस्लिमों को बीमारी से बचाने के बहाने से मुस्लिमों को रोकने के लिए आ गई हैं। उन्हें मुस्लिमों को रोकने और बिखेरने की तरकीब नजर आ गई है ताकि इनके दिल में हमेशा के लिए ये बात बैठ जाए कि किसी के पास मत जाओ, किसी के पास मत बैठो नहीं तो बीमारी लग जाएगी। आज अगर इस बीमारी की वजह से मुस्लिमों के अकीदत बदल जाते हैं तो बीमारी तो खत्म हो जाएगी, लेकिन अकीदत खत्म नहीं होगी।”

वीडियो में साद आगे कहते हैं, “ये बीमारी बदल जाएगी, लेकिन तुम्हारे माशरे के आदाब, तुम्हारे साथ बैठना, एक प्लेट में खाना, इसका असर मुद्दतों के आसरे कभी खत्म ना हो। ये तो मुस्लिमों के दरमियाँ शक पैदा करने, इनके दरमियाँ मोहब्बत खत्म करने के लिए एक प्रोग्राम तैयार किया गया है, एक प्रोग्राम बनाया गया है कि मुस्लिमों को मुस्लिमों से अलग करने के लिए ये बहाना अच्छा है।”

जिस तबलीगी जमात के अमीर मौलाना साद हैं वो दुनिया के करीब 190 मुल्कों में काम करती है। इसके हजारों सदस्य हैं। कोरोना के संकटकाल में मरकज ने देश के सामने मुसीबतें खड़ी कर दी हैं।

इस ऑडियो में साद कहते हुए सुने गए- “मौत से भागकर जाओगे कहाँ, मौत तो तुम्हारे आगे-आगे चल रही है। इसलिए जरा इस मौके पर अपनी अकल-समझ को जरा ठिकाने रखो। ऐसा ना हो कि महज डॉक्टरों की बातों में आकर नमाजें छोड़ दो, मुलाकातें छोड़ दो, मिलना-जुलना छोड़ दो। 70 हजार फरिश्तों पर तुम क्यों नहीं यकीन रखते? जब अल्ला ताला ने बीमारी मुकद्दर कर दी तो किसी डॉक्टर या दवा के साथ मैं कैसे बच सकूँगा, क्या कर लूँगा जब 70 हजार फरिश्ते मुझे नहीं बचा पाए?”

साद मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच यह अफवाह फैलाते हुए पाए गए कि इस बात पर यकीन ना करें कि वो मस्जिद में मिलेंगे तो बीमारी फैलेगी। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को इस बात का यकीन करना चाहिए कि अगर वो मस्जिदों में जमा होंगे तो अल्ला ताला इस समय में फरिश्तों को हाजिर करेंगे।

दिल्ली पुलिस ने मुहम्मद साद समेत मरकज के 6 अन्य आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। हालाँकि, मौलाना साद 28 मार्च से ही गायब बताए जा रहे हैं।