Home Blog Page 4955

वैष्णो देवी गए 145 को हुआ कोरोना: पत्रकार अली ने फैलाया झूठ, कमलेश तिवारी की हत्या का मनाया था जश्न

पत्रकार अली सोहराब इससे पहले भी आपत्तिनजक ट्वीट करने के आरोप में यूपी पुलिस की कार्रवाई का सामना कर चुका है। अब उसने फिर से अफवाहें फैलाने और झूठे ट्वीट व पोस्ट करने का सिलसिला चालू कर दिया है। अली सोहराब ने माता वैष्णो देवी मंदिर में 400 लोगों के फँसे होने की झूठी ख़बर पोस्ट की है। इसके बाद उसने फेसबुक पर ही अगली पोस्ट में यह भी दावा किया कि उनमें से 145 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अली सोहराब ने लिखा कि बाकियों का टेस्ट जारी है और नए मामले भी सामने आ सकते हैं।

अली सोहराब ने ये सब तबलीगी जमात की हरकतों को ढकने के लिए किया। वो झूठी ख़बर फैला कर ये साबित करना चाहता था कि जैसे दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में हज़ारों जमाती इकट्ठे होकर पुलिस-प्रशासन की अवहेलना कर रहे थे, उसी तरह माता वैष्णो देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने ऐसी ही हरकत की है। जमातियों के कारण भारत में कोरोना वायरस के मामलों में अचानक से तेज वृद्धि हुई है और इसीलिए सेक्युलर गिरोह के कई पत्रकार मजहब और कौम को जिम्मेदार न ठहराने की बात करते हुए घूम रहे हैं।

बता दें कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने पहले ही ऐसी किसी भी ख़बर को नकार दिया है, जिसमें मंदिर में श्रद्धालुओं के फँसे होने की बात कही गई है। कटरा में भी कोई श्रद्धालु नहीं फँसा हुआ है। यात्रा पहले ही रोकी जा चुकी है। कई लोग मीडिया पर आरोप लगा रहे थे कि जब किसी हिन्दू धार्मिक स्थल में श्रद्धालु होते हैं तो उन्हें ‘फँसा हुआ’ बताया जाता है जबकि मस्जिद के मामले में ‘छिपा हुआ’ कहा जाता है। इसके बाद फेक न्यूज़ का दौर शुरू हुआ, जिसे अली सोहराब जैसों ने हज़ारों तक फैलाया।

इससे पहले जब लखनऊ में कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई थी, तब अली सोहराब ने दिवाली कह कर सोशल मीडिया पर जश्न मनाया था। तब अली सोहराब को दिल्ली पुलिस और यूपी पुलिस की संयुक्त ऑपरेशन के दौरान गिरफ़्तार किया गया था। उस पर आईपीसी की धारा 295 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए दुर्भावना से ग्रसित होकर और जानबूझ कर किया गया कृत्य) और 66, 67 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

तबलीगी जमात पर कसा शिकंजा, बताने होंगे फंडिंग के स्रोत और विदेशियों की डिटेल

देश में कोरोना के नए मामलों में आधे के लिए जिम्मेदार तबलीगी जमात के ऊपर अब जाँच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जाँच एजेंसियों ने देश को कोरोना संकट में डालने वाले रुढ़िवादी इस्लामी संगठन तबलीगी जमात के फंडिंग के स्त्रोत की जाँच शुरू कर दी है। इंडिया टुडे में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, फंडिंग का लाभ उठाने वाले अधिकतर जमात खाड़ी देशों से संबंधित हैं।

इसके साथ ही पुलिस ने भी फंडिंग के स्त्रोत और विदेशियों की डिटेल माँगी है। जानकारी के मुताबिक जमात ने पिछले तीन सालों में कितना टैक्स भरा है, उसके बैंक खातों में कहाँ-कहाँ से कितने पैसे आए हैं, इन सब डिटेल्स के साथ पैन नंबर का विवरण भी माँगा है। इसके अलावा मरकज प्रमुख मौलाना साद और 6 अन्य सदस्यों से उन विदेशियों और भारतीय जमातियों की लिस्ट भी माँगी गई है, जिन्होंने 12 मार्च के बाद मरकज में शिरकत की थी।

यह भी पूछा गया है कि क्या उन्होंने इस आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति ली थी। इस बाबत कोई लिखित सूचना दी गई थी। मरकज ने प्रशासन से किसी और मामले में संपर्क किया था। इतना ही नहीं जाँच एजेंसियों ने कमिटी मेंबर्स और मरकज कर्मचारियों की पूरी लिस्ट देने के लिए भी कहा है।

जाँच एजेंसी ने मरकज से बीते एक जनवरी से लेकर एक अप्रैल तक हुए सारे कार्यक्रमों की लिस्ट माँगी है। आयोजनों में शामिल लोगों की संख्या, नक्शा या साइट प्लान और परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की संख्या की डिटेल भी माँगी गई है। यह भी बताना होगा कि अगर यहाँ कोई बीमार पड़ा था उसे बाहर लेने जाने के लिए क्या-क्या किए गए थे। अगर किसी को हॉस्पिटल ले जाया गया , या फिर किसी की मौत हुई है तो उसकी भी डिटेल माँगी गई है। 

बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में आयोजित मजहबी धर्मसभा में 1700 से 3000 के आस-पास लोग शामिल हुए थे। अब तक मरकज में शामिल हुए तबलीगी जमात के 400 से अधिक लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए है और कई संदिग्धों को क्वारंटाइन किया गया है। तबलीगी जमात में शामिल होने वाले 10 लोगों की मौत भी हो चुकी है। 

तबलीगी जमात की लापरवाही ने भारत की बड़ी आबादी को कोरोना वायरस से बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के स्वास्थ्य सैनिकों की कोशिशों पर काफी हद तक पानी फेर दिया है। देशव्यापी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण पर काफी हद तक लगाम लगाने की उम्मीद थी, मगर अब आलम यह है कि तबलीगी जमात से जुड़े कोरोना वायरस मामले में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।

कोरोना संक्रमण से मरने वाले मुस्लिम जलाए जा रहे, कट्टरपंथियों ने श्रीलंका में काटा बवाल

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए श्रीलंका ने मुस्लिमों के शवों को दफनाने की जगह जलाने का फैसला लिया है। इसको लेकर कट्टरपंथियों ने विवाद शुरू कर दिया है। अब तक COVID-19 संक्रमण से मरने वाले दो मुस्लिमों को उनके परिवार की इच्छा के विरुद्ध इस्लामिक तरीके से दफन करने की बजाए जला दिया गया। कोलंबो के 73 साल के बिशरुफ हाफी मोहम्मद दूसरे मुस्लिम हैं, जिन्हें कोरोना के चलते हुई मृत्यु के बाद जला दिया गया। श्रीलंका में अब तक कोरोना के 151 मामले सामने आ चुके हैं।

बिशरुफ के बेटे 46 साल के फ़याज़ जूनुस ने बताया कि उनके पिता को किडनी की समस्या थी। लगभग दो हफ्ते पहले उनमें कोरोना संक्रमण पाया गया था। इसके बाद 1 अप्रैल को उनकी मौत हो गई और अगले दिन उन्हें जला दिया गया। फ़याज़ ने बताया कि उसके पिता के शव को पुलिस की देखरेख में एक गाड़ी में ले जाया गया जहाँ उन्हें जलाया गया। कोरोना संक्रमण के डर से हम उनका जनाजा नहीं निकाल पाए। अल जजीरा से उसने कहा कि सरकार को मुस्लिमों के लिए कुछ व्यवस्था करनी चाहिए जिससे हम अपने चहेतों का अंतिम संस्कार इस्लामिक तौर-तरीकों के अनुसार कर सकें।

याद रहे कि कोरोना संक्रमण के खतरों को देखते हुए श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को COVID-19 गाइडलाइन्स जारी करते हुए कहा था कि कोरोना संक्रमण के कारण हुई मौतों के बाद शवों को जलाना ही मानक प्रक्रिया होगी। इससे पहले मुस्लिमों को अपने मज़हबी रिवाज के अनुसार शवों को दफन करने की छूट थी। गाइडलाइन्स में यह भी स्पष्ट किया गया कहा गया है कि शवों को नहलाना नहीं है जो कि इस्लामिक परम्परा के खिलाफ है।

श्रीलंका की मुस्लिम कॉउन्सिल के वाइस प्रेसिडेंट हिलमी अहमद ने अल जजीरा से कहा कि मुस्लिम समुदाय इस घटनाक्रम को चरमपंथी बौद्ध शक्तियों के एक नस्ली एजेंडा के तौर पर देखता है। उसने कहा कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा जारी की गईं गाइडलाइन्स का ब्रिटेन, ज्यादातर यूरोपीय देशों, सिंगापुर, हांगकांग और सभी मुस्लिम देशों में (सिवाय श्रीलंका) में पालन किया जा रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी श्रीलंकाई प्रशासन से अंतिम संस्कार के संबंध में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है।

लॉकडाउन का उल्लंघन कर पढ़वा रहा था नमाज, पुलिस ने मस्जिद के इमाम को ही कर लिया गिरफ्तार

केरल के कासरगोड जिले के एक मस्जिद में लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करके नमाज अता करवाने वाले इमाम और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूरे देश में तेजी से पाँव पसार रही कोरोना महामारी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार हर तरह के जतन कर रही है, लेकिन कुछ लोग इन प्रयासों पर पानी फेरने पर आमादा हैं।

बता दें कि कासरगोड जिले के मडिक्की गाँव की अरई जुमा-मस्जिद में इमाम लॉकडाउन के बावजूद लोगों को नमाज पढ़वा रहा था। जिसकी सूचना मिलने पर नीलेश्वरम पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मस्जिद के इमाम व एक अन्य को गिरफ्तार कर लिया। जिला कलेक्टर ने आईपीसी की धारा 269 के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों केरल में चर्च के पादरी को गिरफ्तार किया गया था। चलाकुडी निथ्या सह्या मठ चर्च के पादरी ने सरकार के आदेश की अवहेलना करते हुए एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था, जिसमें कम से कम 100 लोगों ने हिस्सा लिया था।

पुलिस ने बताया कि पादरी ने चर्च में सुबह 6:30 बजे प्रार्थना सभा का आयोजन किया था। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस वहाँ पर पहुँची और पादरी को गिरफ्तार कर लिया। पहले पुलिस ने सुरक्षा का पूरा ध्यान रखते हुए पादरी को पुलिस स्टेशन ले जाने से पहले उसे सैनिटाइजर से हाथ धोने के लिए कहा।

हालाँकि, बाद में पादरी को जमानत पर छोड़ दिया गया। पुलिस ने कहा कि पादरी और प्रार्थना सभा में भाग लेने वाले 100 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 269 और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 118 के तहत केस दर्ज किया गया।

चीन से पूरी दुनिया में फैल गए इस वायरस ने हाहाकार मची रखी है। हर दिन लोगों की मौत हो रही है। कई देशों में लॉकडाउन लागू है। भारत में भी हालत खराब हो चुके हैं। भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला जनवरी में केरल से सामने आया था। चीन के वुहान शहर से तीन छात्र लौटे थे जो कोरोना वायरस से संक्रमित थे। 

हालाँकि वह तीनों ही ठीक हो गए हैं। इसके बाद से केरल में संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा। महाराष्ट्र के बाद केरल ही ऐसा राज्य है, जहाँ कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन कर दिया है। ताकि लोग इधर से उधर ना जा सकें और इसे संक्रमण पर काबू पाया जा सके।

जाँच में भी नंगे हुए जमाती: नर्सों के सामने उतारे थे कपड़े, गाए थे अश्लील गाने

गाजियाबाद के एमएमजी अस्पताल में क्वारंटाइन किए गए तबलीगी जमात के सदस्यों द्वारा नर्सों के साथ बदसलूकी करने का मामला सामने आया था। एडीएम सिटी और एसपी ने इसकी जॉंच की। जॉंच में नर्सों के आरोप सही पाए गए हैं। तबलीगी जमात के 5 लोगों के ख़िलाफ़ अश्लील व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है। जाँच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है जो आगे की कार्रवाई तय करेंगे। अस्पताल में इस्लामी संगठन के लोगों ने नर्सों पर ओछी टिप्पणी की थी। उनके सामने कपड़े उतार कर घूम रहे थे।

मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन सभी के ख़िलाफ़ ‘नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA)’ के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। सभी आरोपितों को डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल से एक प्राइवेट शैक्षिक संस्थान में बने आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। ये सभी जमाती उन हज़ारों लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में हुए मजहबी कार्यक्रमों में शिरकत की थी। इनमें से कई काफ़ी दिनों तक लॉकडाउन को धता बताते हुए छिपे हुए थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन सभी को ‘मानवता का दुश्मन’ करार दिया था। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोग न तो क़ानून का पालन करते हैं और ही व्यवस्था का अनुसरण करते हैं। उन्होंने कहा था कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा क्योंकि महिलाओं के साथ उन्होंने जो भी किया है, वो घृणित अपराध की श्रेणी में आता है। चीफ मेडिकल ऑफिसर द्वारा लिखित में शिकायत दाखिल किए जाने के बाद जीटी रोड कोतवाली थाना में इन सभी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया। एसपी कलानिधि नैथानी ने आश्वासन दिया है कि उन सभी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जमात के ये सभी लोग हॉस्पिटल में न तो दवा खा रहे थे और न ही अपने बिस्तर पर रह रहे थे। वो नर्सों को देख कर अश्लील गाने भी गए रहे थे। वो स्टाफ से बीड़ी-सिगरेट और पान मसाले की माँग कर रहे थे। ये सभी जमाती मसूरी के रहने वाले हैं। जाँच के दौरान नर्सों ने अधिकारियों को बताया कि जमाती उनकी तरफ देख कर अश्लील इशारे कर रहे थे और हँस रहे थे। उन्हें समझाने की कोशिश भी की गई लेकिन वो नहीं माने। इसके बाद सीएमओ से शिकायत की गई।

यूपी के अलग-अलग जिलों में जमातियों द्वारा हॉस्पिटल में बदतमीजी किए जाने की ख़बरें आ रही हैं। बिजनौर में 8 इंडोनेशियाई जमातियों ने अंडा-करी और बिरयानी की माँग की थी। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की थी। बस्ती और आगरा में भी बिरयानी माँग कर हॉस्पिटल कर्मचारियों को परेशान किया। मुरादाबाद में जमातियों ने दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया।

MP: अब खरगोन में पुलिस पर पथराव, इंदौर में स्वास्थ्यकर्मियों को बनाया था निशाना

हाल ही में उपद्रवियों ने मध्य प्रदेश के इंदौर में डॉक्टरों पर पथराव कर उन्हें घायल कर दिया था। अब मध्य प्रदेश के खरगोन में पुलिस पर हमले की ख़बर आई है। इलाक़े में पुलिस लोगों को जागरूक करने में लगी हुई थी और उनसे अपील कर रही थी कि वे घरों में रहें। लॉकडाउन का पालन करने की सलाह दे रही पुलिस पर अचानक से हमला बोल दिया गया। इस हमले में पुलिसकर्मियों को चोटें आईं और नगर निरीक्षक कोतवाली का एक वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया। ये घटना खसखस वाड़ी क्षेत्र में हुई।

देश भर में पुलिसकर्मी और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जान की बाजी लगा कर ड्यूटी कर रहे हैं लेकिन मुस्लिम बहुल इलाक़ों में उन पर हमले का सिलसिला थम नहीं रहा है। ये घटना शुक्रवार (अप्रैल 3, 2020) को हुई, जब पुलिस लोगों को समझाने के लिए सड़कों पर निकली हुई थी। इस दौरान जैसे ही पुलिस इलाक़े में पहुँची, लोगों ने विवाद किया और उपद्रव शुरू कर दिया। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुला सर्चिंग अभियान शुरू किया गया। ड्रोन कैमरे से इलाके की निगरानी भी की जा रही है। एसपी ने भी घटना की पुष्टि की है। साथ ही बताया है कि स्थिति अब नियंत्रण में है।

ये घटना रात के साढ़े 9 बजे हुई। शाम 5 बजे भी पुलिस ने आकर लोगों को चेताया था और घर के अंदर रहने को कहा था। पुलिस अब पूरे शहर में घूम कर स्थिति को सामान्य करने में जुटी है। नगर निरीक्षक का कहना है कि उस इलाक़े के लोग बार-बार घर के बाहर निकल रहे थे, इसीलिए उन्हें पहले भी चेताया गया था। बता दें कि हाल ही में खरगोन में एक 62 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट सामने आई थी। यह जिले में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला था।

इससे पहले इंदौर में टाट पट्टी बाखल इलाक़े में डॉक्टरों पर पथराव किया गया था, जिसमें 2 डॉक्टर घायल हो गए थे। दरअसल, स्वास्थ्यकर्मियों की टीम वहाँ एक बुजुर्ग महिला के चेकअप के लिए गई थी, जिसमें डॉक्टर, नर्स और आशाकर्मी शामिल थीं। तभी वहाँ के लोगों ने लाठी-डंडे से हमला कर दिया। खदेड़ते हुए उनका काफ़ी दूर तक पीछा किया गया।

जहाँ हुआ डॉक्टरों पर पथराव, वहाँ 2 कोरोना पॉजिटिव: 6 को पुलिस ने दबोचा, अब तक कुल 13 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के टाटपट्‌टी बाखल में संक्रमितों की स्क्रीनिंग करने पहुँची डाॅक्टरों की टीम पर पथराव कर जानलेवा हमला करने वाले 6 और आरोपितों को छत्रीपुरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसे मिलाकर कुल 13 आरोपित अब तक पकड़े जा चुके हैं। वहीं अब भी पुलिस कई आरोपितों की तलाश में जुटी है। देर रात पुलिस की एक टीम ने टाटपट्‌टी बाखल में जाकर वीडियो के आधार पर पथराव करने वाले आरोपितों को चिन्हित किया और उनका इलाके में जुलूस भी निकाला।

यहाँ पर 17 और 55 साल की दो महिलाएँ कोरोना पॉजिटिव भी मिली हैं। सीएसपी डीके तिवारी ने बताया कि गुरुवार को हुई गिरफ्तारी के अलावा 6 और आरोपितों को उनकी टीम ने पकड़ा है। इनमें मोहम्मद नावेद, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद युसूफ, मोहम्मद सावेज, मोहम्मद अनस और नफीस का नाम शामिल है। ये भी टाटपट्‌टी बाखल के निवासी हैं। 

दैनिक भास्कर के इंदौर संस्करण में प्रकाशित खबर

बता दें कि कोरोना संक्रमितों की जाँच करने के लिए बुधवार को टाटपट्‌टी बाखल में पहुँची स्वास्थ्य विभाग की टीम पर हमला करने के मामले में पुलिस ने पहले जिन 7 लोगों को गिरफ्तार किया था, उनके नाम हैं- मज्जू उर्फ मजीद खान, शाहरुख अंसारी, मोहम्मद गुलरेज हाजी अब्दुल गनी, मुबारिक उर्फ मोहम्मद इसार, शोएब उर्फ शोभी, नौशाद कादरी और मोहम्मद मुस्तफा हसन। इनमें से मजीद, मोहम्मद गुलरेज, सोयब और मोहम्मद मुुस्तफा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई। इनके ऊपर रासुका लगाकर रीवा सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। 

गिरफ्तार आरोपितों ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने समोसे वाली चाची के उकसाने पर पथराव किया था। आरोपितों ने पूछताछ में कुबूला कि मुबारिक की अम्मी (समोसेवाली चाची) के घर में स्वास्थ्यकर्मी स्क्रीनिंग कर रहे थे, तभी चाची ने आवाज लगाई। इस पर भीड़ जुट गई। इसके बाद चाची ने डॉक्टरों को धमकाया और हमें उकसाया। इसके बाद हमने पथराव शुरू कर दिया।

गौरतलब है कि बुधवार (1 अप्रैल, 2020) को इंदौर के टाटपट्टी बाखल और सिलावट पुरा में कोरोना वायरस की जाँच के लिए गई डॉक्टरों की टीम पर गली में पहले से मौजूद लोगों ने पथराव किया था, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम को वहाँ से जान बचाकर भागना पड़ा। इतना ही नहीं, जब सूचना पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची तो आरोपितों ने महिलाओं को आगे कर दिया और फिर घरों की छतों से पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर फिर से पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान वहाँ लगी बैरिकेडिंग को भी उपद्रवियों ने तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस फोर्स ने तत्काल पूरे इलाके को सील कर दिया।

मधुबनी, कैमूर, सिवान में सामूहिक नमाज: मस्जिद के बाहर लाठी लेकर औरतें दे रही थी पहरा

कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए देशभर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है। इसका उल्लंघन कर बिहार के मधुबनी, कैमूर और सिवान ​में शुक्रवार को सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। कैमूर में रोके जाने पर पथराव हुआ तो मधुबनी में समुदाय विशेष की औरतें मस्जिद के बाहर लाठी और मिर्च पाउडर लेकर पहरा दे रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मधुबनी जिले के अंधाराठाढ़ी प्रखंड के हरना गॉंव में सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। यहॉं से तबलीगी जमात के 11 सदस्य क्वारंटाइन में भेजे गए हैं। बताया जाता है कि वे भी नमाज में शामिल थे। पुरुष जब भीतर नमाज अदा कर रहे थे दर्जनों औरतें लाठी और मिर्च पाउडर लेकर बाहर खड़ी थीं।

सिवान के महाराजगंज के सिकटिया पंचायत के खानपुरा गॉंव की मस्जिद में भी शुक्रवार को नमाज अदा की गई। करीब 50 लोग इसमें शामिल हुए। मस्जिद के इमाम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की खबर है।

इसी तरह की घटना कैमूर जिले के मोहनियाँ थाना क्षेत्र स्थित अहिनौरा गाँव से भी सामने आई है। वहॉं की मस्जिद में दोपहर के वक्त नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट गए। सूचना मिलने पर पुलिस पहुॅंची। नमाजियों को चेतावनी देकर उनके घर भेज दिया। इसके बाद शाम में फिर बड़ी संख्या में लोग मस्जिद पहुॅंच गए। इस बार विरोध करने पर दो पक्षों के बीच मारपीट और पथराव हुआ।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

महाराजगंज की सिकटिया पँचायत के खानपुरा गाँव की मस्जिद में भी शुक्रवार को करीब 50 लोगों ने एकत्रित होकर जुमे की नमाज अदा की। पुलिस ने इमाम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग सबसे कारगर उपाय है। लोगों से एक जगह इकट्ठा नहीं होने की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी सामूहिक रूप से नमाज नहीं पढ़ने की अपील की है। बावजूद इसके इस तरह की घटनाओं का सिलसिला थम नहीं रहा।

शुक्रवार को ही उत्तर प्रदेश के कन्नौज में एक मकान की छत पर जुमे की नमाज अदा करने के लिए जुटान हुआ था। पुलिस रोकने पहुॅंची तो उस पर हमला कर दिया गया। इसमें कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। इससे पहले अलीगढ़ की एक मस्जिद में गुरुवार की रात मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग जुटे थे। यहॉं भी पुलिस पर हमला किया गया था। बुधवार को मुजफ्फरनगर से लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची पुलिस टीम पर हमले की खबर आई थी। सहारनपुर के जमालपुर गाँव में भी नमाज पढ़ने को लेकर मस्जिद के बाहर इकट्ठा भीड़ को हटाने और छह लोगों को हिरासत में लेने पर लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया था। लाठी-डंडों का प्रयोग कर पकड़े गए लोगों को छुड़वा लिया था।

बिहार के मधुबनी की एक मस्जिद में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस को समुदाय विशेष की भीड़ ने एक किमी तक खदेड़ दिया था। जमकर पत्थरबाजी की थी। फायरिंग की और पुलिस की जीप को तलाब में पलट दिया था। गुजरात के अहमदाबाद स्थित गोमतीपुर में भी भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की थी। गोमतीपुर में पुलिस उन लोगों की तलाश में गई थी, जिन्होंने तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

मजहबी मर्द न छेड़छाड़ कर सकते हैं, न ही बलात्कार: तबलीगी जमात की नंगई का स्तंभकार ने किया बचाव

तबलीगी जमात की लापरवाही ने भारत की बड़ी आबादी को कोरोना वायरस से बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के स्वास्थ्यकर्मियों की कोशिशों पर काफी हद तक पानी फेर दिया है। देशव्यापी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण पर काफी हद तक लगाम लगाने की उम्मीद थी, मगर अब आलम यह है कि तबलीगी जमात से जुड़े कोरोना वायरस मामले में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।

तब्लीगी जमात द्वारा आयोजित मजहबी धर्मसभा में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी तकरीबन 1500 लोगों ने हिस्सा लिया था। इस मजहबी सभा में भाग लेने वाले लोगों में से 10 की कोरोना वायरस की वजह से मौत भी हो चुकी है, वहीं 400 से अधिक तबलीगी जमात के सदस्यों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। दक्षिणी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज भारत के विभिन्न भागों में कोरोना वायरस फैलने का एक केंद्र बन गया है। अभी तक तबलीगी जमात से जुड़े लगभग 9000 लोगों की पहचान कर क्वारंटाइन किया जा चुका है।

‘हैदराबाद चलो, वहाँ जन्नत की सैर कराऊँगा’ – नर्सों को देख सीटी बजाते, छूने की कोशिश करते जमाती: एक और हॉस्पिटल से आई शिकायत

डॉक्टरों के साथ जमातियों की बदसलूकी अब कानपुर मेडिकल कॉलेज में: थूक-थूक कर फैलाई गंदगी, बैठते हैं साथ

अब ये जाहिल जमाती इलाज के दौरान महिला मेडिकल स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ कर रहे हैं और डॉक्टरों के ऊपर थूक कर उन्हें संक्रमित करने की बेहूदी कोशिश कर रहे हैं। एक तरफ जहाँ पूरा देश इन तबलीगी जमात द्वारा फैलाए गए संकट से लड़ने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ इतना बड़ा क्राइम करने के बाद भी ये लोग अपनी बेहूदगी से बाज नहीं आ रहे। गाजियाबाद और कानपुर समेत कई जगहों से इनके द्वारा महिला स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ की खबरें सामने आई। गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए तबलीगी जमाती बिना कपड़ों, पैंट के नंगे घूम रहे थे, अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही ये जमाती नर्सों को गंदे-गंदे इशारे कर रहे थे और नर्सों से बीड़ी-सिगरेट की माँग भी कर रहे थे।

कोरोना मरीज बनकर फीमेल डॉक्टर्स को भेज रहे हैं अश्लील सन्देश, चैट में सेक्स की डिमांड: नौकरी छोड़ने को मजबूर है स्टाफ

जैसे ही यह खबर सामने आई, इस्लामी कट्टरपंथियों की वकालत करने वाला समूह सक्रिय हो गया। इनको हमेशा माफ कर देने वाले समूह ने इनके समर्थन में उतरकर उनके बचाव की भरपूर कोशिश की। इन्हीं में से एक थे- वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के स्तंभकार सदानंद धुमे। उन्होंने ये साबित करने का भरसक प्रयास किया कि देश को कोरोना संकट में डालने वाले तबलीगी जमात के सदस्य निर्दोष हैं।

सदानंद धुमे ने द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी, जिन्होंने भी तबलीगी जमात के सदस्यों का बचाव किया और नर्सों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया, के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो तबलीगी जमात के विचारों के प्रशंसक नहीं है, लेकिन जिस किसी ने भी उनके साथ समय बिताया है, उनको पता है कि उनका रुढ़िवाद महिलाओं के लिए कितना उपयुक्त और पवित्र है। सदानंद धुमे यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि तबलीगी जमात के सदस्यों के अभद्रता की बातें झूठी हैं और सामान्य तौर पर समुदाय विशेष को बरगलाने की यह कोशिशें नीचता से परे है।

दरअसल धुमे अपने ट्वीट के माध्यम से यह कहना चाह रहे थे कि सबसे पहली बात तो ये कि मजहबी मर्द न तो छेड़छाड़ कर सकते हैं और न ही बलात्कारी हो सकते हैं और दूसरी बात उन्होंने कही कि जिन नर्सों ने तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी, वे झूठ बोल रही थीं क्योंकि वो समुदाय विशेष की छवि को धूमिल करना चाहती थीं। धुमे ने समुदाय विशेष के लोगों को धार्मिक पुरुष साबित करने की कोशिश और उनके बचाव में नर्सों द्वारा लिखित शिकायत को नकार दिया।

इन जाहिलों और अशिष्ट व्यक्तियों के बचाव में उतरने पर कई लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लिया। लोगों ने ना सिर्फ उनसे कट्टरपंथी इस्लाम के लिए माफी माँगने के लिए कहा, बल्कि उन्हें महिला के खिलाफ हो रहे अपराध के लिए भी जिम्मेदार ठहराया।

प्रत्याशा रथ नाम की एक ट्विटर यूजर ने कहा कि धूमे ने पीड़ितों को मजहबी कट्टरता के साथ दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि धूमे पीड़ितों पर अपने कथित अनुभवों के आधार पर दोषारोपण कर रहे हैं और उस अनुभव के कारण, वह इस बात की उपेक्षा कर रहे हैं कि उन पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जो अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना ईलाज कार्य में जुटे थे।

ऋषा नाम की एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह मानसिकता ही एकमात्र कारण है, जिसकी वजह से कई मामलों में इन धर्मगुरुओं द्वारा बलात्कार करते हुए देखा जाता है। हाँ, वे सभी सार्वजनिक स्थान पर अपनी कामुकता के बारे में आपसे अधिक पवित्र दिखते (दिखने की कोशिश करते हैं) हैं, फिर अपने पीड़ितों को यह कहते हुए ब्लैकमेल करते हैं कि “तुम पर विश्वास कौन करेगा”।”

दिलचस्प बात यह है कि ऋषा की यह बातें काफी प्रांसगिक हैं, क्योंकि धुमे ने मी टी मूवमेंट के दौरान भी अपनी इस मानसिकता का परिचय दिया था। हालाँकि उस समय उन्होंने धर्मगुरुओं के बारे में नहीं बोला था, लेकिन महिलाओं को लेकर अपनी मानसिकता दर्शाई थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले शक्तिशाली पुरुष कैसे दूर हो जाते हैं क्योंकि महिलाएँ डर जाती हैं। पुरुषों के पास शक्ति थी और इसीलिए महिलाओं ने बात नहीं की क्योंकि उन्हें डर था कि शक्तिशाली पुरुषों के खिलाफ उनके आरोपों पर विश्वास नहीं किया जाएगा। अब धुमे अपनी इसी मानसिकता को आगे बढ़ाते हुए तबलीगी जमात के कट्टरपंथी इस्लामियों को बचाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

सदानंद धुमे ने अपने ट्वीट में कहा कि चूँकि उन्होंने तबलीगी जमात के कुछ लोगों से मुलाकात की है और उनके अनुसार वो लोग ‘पवित्र’ थे, तो इसका मतलब ये है कि तबलीगी जमात का कोई भी सदस्य महिलाओं के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। इसलिए महिलाएँ झूठ बोल रही हैं।

दरअसल 2011 का एक मामला ही साबित करता है कि वास्तव में धूमे का ज्ञान कितना छिछला, तुच्छ और अधूरा है। 2011 में टोरंटो में एक इमाम पर यौन उत्पीड़न के लिए 13 मामलों के तहत आरोप लगाया गया था। 48 वर्षीय मोहम्मद मसरूर ने एक इमाम के रूप में काम किया और कई देशों का दौरा किया था, जिसमें बच्चों और युवाओं को कुरान की शिक्षा दी थी। पुलिस ने अपनी जाँच में मसरूर के पास से उसके खुद के पासपोर्ट के अलावा तीन अन्य नाम का पासपोर्ट पाया था। मसरूर के खिलाफ पाँच पूर्व छात्राओं ने खिलाफ दुर्व्यवहार के 13 आरोप लगाए गए थे। जानकारी के मुताबिक इमाम तबलीगी जमात का सदस्य था, जिसका उद्देश्य इस्लामिक आंदोलन को जमीनी स्तर पर चलाना था। यह आंदोलन काफी हद तक बांग्लादेश में सक्रिय है।

दरअसल इमामों और मौलवियों द्वारा बलात्कार और नाबालिग का यौन उत्पीड़न करने वाले इतने मामले सामने आए हैं कि एक थीसिस हो सकती है, और शायद इस पर लिखा जाना चाहिए कि इस्लामिक धर्मगुरु महिलाओं और नाबालिग लड़कों के खिलाफ अपराधों में लिप्त क्यों होते हैं। हालाँकि तबलीगी जमात के सदस्यों को बचाने की इनकी ये कोशिश दिखाती है कि ये सच्चाई को देखना ही नहीं चाहते हैं।

98 जमाती सिर्फ एक गाँव में, पुलिस ने पूरे गाँव को किया सील: आने-जाने के सभी रास्ते बंद, सभी के सैंपल जाँच के लिए भेजे

पूरे देश में कोरोना महामारी फैलाने का केन्द्र बने दिल्ली के निजामुद्दीन से निकले जमातियों ने हर किसी को संकट में डाल दिया है। यही कारण है कि मदरसों से लेकर मस्जिद तक स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें दिल्ली से निकले जमातियों की खोज में लगी हुई हैं। इसी बीच उत्तराखंड पुलिस को जानकारी मिली कि हरिद्वार जिले के एक गाँव में दिल्ली से कई जमाती लौट कर आए हैं। सूचना पर पहुँची पुलिस ने इसे सही पाया। इसके बाद गाँव को तत्काल सील करके पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया।

दरअसल हरिद्वार जिले के गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में सूचना पर पहुँची पुलिस ने गाँव में बड़ी संख्या में जमातियों को देखा। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे गाँव को ही सील कर दिया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी लोगों के सैंपल लेकर जाँच के लिए भेज दिए हैं। इतना ही नहीं, गाँव से कोई बाहर न जा सके और गाँव में कोई अंदर न प्रवेश करे, इसके लिए गाँव के बाहर कैंप लगाकर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।

मामल में श्यामपुर थाने के थानाध्यक्ष दीपक सिंह कठैत ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस प्रशासन की टीम को जानकारी मिली थी कि गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में दिल्ली, देवबंद और अन्य स्थानों से लौटकर सैकड़ों जमाती आए हैं। इस जानकारी के बाद तत्काल पुलिस स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गाँव में पहुँची तो यह जानकारी सही पाई गई। थानाध्यक्ष दीपक सिंह ने बताया कि पूरे गाँव में 98 जमाती पाए गए। इसके बाद गाँव के सभी लोगों को घर में ही क्वारंटीन कर दिया गया। साथ ही पूरे गाँव को एहतियात के तौर पर सील कर दिया गया।

वहीं दिल्ली निजामुद्दीन की घटना के बाद से ही लगातार उत्तराखंड पुलिस को अलग-अलग स्थानों पर तबलीगी जमात के लोगों के होने की सूचनाएँ मिल रही हैं। इन्हें गँभीरता से लेते हुए पुलिस ने मुस्लिम आबादी वाले थानों में सेक्टर मैजिस्ट्रेट और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को तैनात किया है ताकि सूचना मिलते ही ऐसे लोगों की जाँच करके तत्काल क्‍वारंटाइन किया जा सके।

आपको बता दें कि इससे पहले भी पुलिस ने बहादराबाद के बौंगला गाँव स्थित आर्य इंटर कॉलेज में करीब 40 लोगों को क्वारंटाइन किया हुआ है। वहीं ज्वालापुर के मोहल्ला तेलियान कैथवाड़ा से एक जमात मरकज से होकर अंबाला गई थी। इसके बाद जमात वापस ज्वालापुर लौटकर आई। जानकारी मिलने पर पुलिस ने जमात के लोगों के साथ दो ड्राइवरों को भी क्वारंटाइन किया गया था। निजामुद्दीन मरकज से लौटे जमातियों को घर में ठहराने और इसकी जानकारी छिपाने के मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।