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‘कोरोना वायरस हमारे रब की NRC, कौन रहेगा और कौन जाएगा… अब वही फैसला करेगा’ – TikTok पर जहरीला ट्रेंड

इंटरनेट पर वायरल होती विडियोज़ और खबरों से अब तक मालूम चल चुका है कि देश में मुस्लिम समुदाय के अधिकाँश लोग हालातों से वाकिफ होने के बाद भी इसे लेकर गंभीर नहीं है। हर ओर से आती खबरें बता रही है कि मस्जिद में नमाज अता करने से लेकर बसों में बैठकर थूकने तक मुस्लिम समुदाय इस बात को लेकर आश्वस्त है कि ये गंभीर बीमारी उन्हें अपने चंगुल में नहीं जकड़ेगी। शायद इसलिए इसे अब उन्होंने सीएए और एनआरसी से जोड़कर टिकटॉक ट्रेंड भी बना दिया है। साथ ही इसका स्वागत भारत में कर रहे हैं।

इन कट्टरपंथियों ने कोरोना वायरस को लेकर कुछ विडियोज बनाई है। इनमें ये सभी एक ऑडियो के ऊपर चीन से आए कोरोना वायरस का भारत में स्वागत कर रहे हैं। टिकटॉक ट्रेंड होती इस तरह की विडियो में कई हिजाब वाली लड़कियाँ हैं। जो इस ऑडियो के साथ कहती हैं- “भारत में तुम्हारा स्वागत है, कोरोना वायरस। हमसे नागरिकता का सवाल माँगने वालों… अब रब की एनआरसी लागू हो गई है। अब वही फैसला करके कि कौन रहेगा और कौन जाएगा।”

गौरतलब है कि एनआरसी जिसका हिंदी मतलब – राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर होता है, उसे लेकर पिछले दिनों देश में समुदाय विशेष के लोगों ने बहुत आपत्ति जताई थी और इसे अपने समुदाय के ख़िलाफ़ तक बताया था। मगर, वास्तविकता में ये एक ऐसा रजिस्टर है, जिसमें राष्ट्र के वैध नागरिकों का ब्यौरा दर्ज होता। इसलिए यह कहना गलत नहीं है कि उनका ये विरोध निरर्थक था और अब इसे लेकर चलाया गया ये TikTok ट्रेंड हास्यास्पद।

इस TikTok ट्रेंड पर बनाए गए दर्जनों विडियो इस बात का सबूत है कि इन लोगों को संवेदनशील माहौल में भी अपने मजहब का प्रचार करना है। कोरोना को भगाने की दुआ करने की जगह उसका स्वागत करना है। टिकटॉक पर इस ट्रेंड पर विडियो बनाने वालों में कई लोगों ने अपने डिस्प्ले पिक्चर पर नो एनआरसीसी की फोटो लगा रखी है। 

इसके अलावा कई कट्टरपंथियों ने मौलाना मोहम्मद साद की फोटो लगा लगाकर भी विडियो बनाई है और दावे कर रहे हैं कि तबलीगी जमात में जाने वाले लोगों में से किसी को भी कोरोना नहीं है और वे अपने जीवन के अंतिम समय तक निजामुद्दीन मरकज़ का समर्थन करेंगे। इसके अलावा इस प्लेटफॉर्म पर इस्लामिक कट्टरपंथी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए भी अपनी नफरत निकाल रहे हैं।

हैदराबाद: जिस अस्पताल में डॉक्टर पर हमला हुआ, वहाँ अब सामूहिक रूप से अदा की गई नमाज

मूढ़मतियों के लिए एक पुरानी कहावत है कि भैंस के आगे बीन बजाने से कुछ नहीं होता। यदि आज के संदर्भ इस कहावत का मुकम्मल अर्थ जानना हो तो देश में मजहब की पट्टी बाँधकर ‘कोरोना बम’ बने समुदाय विशेष के लोगों की हरकतें देख लीजिए। सरकार जाँच के लिए अभियान चला इन्हें खोज रही है। इनकी जान बचाने के लिए कदम उठाए जा रहे। लेकिन ये अस्पताल को भी मजहब का केंद्र बना रहे हैं। वहाँ भी इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से नमाज अता कर रहे हैं।

दरअसल, तेंलगाना से कुछ तस्वीरें आई हैं। तस्वीरें हैदराबाद के गॉंधी अस्पताल की है। अस्पताल में संक्रमण संदिग्धों को क्वारंटाइन किया गया है जिससे उनके स्वास्थ्य की निगरानी रखी जा सके। मगर, समुदाय विशेष के लोगों का इससे कोई लेना-देना नहीं है कि उन्हें सुरक्षित रखने के लिए क्या कुछ किया जा रहा है। वे सिर्फ अपनी मनमानी कर रहे हैं और इसी रवैये को बरकरार रखते हुए उन्होंने अस्पताल प्रशासन के निर्देशों को भी ताक पर रख दिया है। तस्वीरों में देख सकते हैं कि ये लोग मजहब को सबसे ऊपर मानकर सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर नमाज पढ़ रहे हैं।

एएनआई द्वारा जारी तस्वीरों में देख सकते हैं कि अस्पताल में मरीजों के लिए बेड भी एक-एक मीटर की दूरी पर हैं। लेकिन फिर भी, सभी नमाजी एक जगह इकट्ठा हैं और एक साथ नमाज पढ़ रहे हैं। सोचिए अगर, इन्हें यही करने की इजाजत देनी होती तो अस्पताल में भर्ती क्यों कराया जाता। यही सब तो ये लोग बाहर भी कर रहे थे।

गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को गाँधी अस्पताल से एक और विवादस्पद मामला आया था। तबलीगी जमात के मरकज से लौटे दो भाइयों में से एक की मौत हो गई। दूसरे भाई ने कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद डॉक्टर पर ही थूक दिया था। इनके परिवार ने डॉक्टर पर हमला किया।  

बंगलुरु मिरर के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर अंजनि कुमार इसकी सूचना मिलते ही अस्पताल पहुँचे थे और उन्होंने हमलावरों को हिरासत में लेकर मामला शांत कराया था। बाद में हमलावर को आइसोलेट कर दिया गया। इस घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों ने असुरक्षित परिस्थियों पर डर जताया था। तब जाकर राज्य सरकार ने इस पर संज्ञान लिया और आश्वासन दिया कि आरोपित के ख़िलाफ़ कड़ा एक्शन लिया जाएगा।

इसी तरह दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भी मरकज से निकले लोगों द्वारा डॉक्टरों और इधर उधर थूक कर संक्रमण फैलाने का मामला सामने आया है। ये लोग जॉंच कराने और अस्पताल में भर्ती होने से भी आनाकानी कर रहे थे। इसके बाद अस्पताल में पुलिस की तैनाती करनी पड़ी।

नमाज पढ़ने के लिए भी जीवित रहना जरूरी: जो CAA-NRC फेसबुक पोस्ट से समझ गए, उन्हें मोदी की अपील नहीं समझ आ रही

तमाम देश हैरान हैं। अमेरिका, इजराइल, ब्रिटेन, जैसी शक्तियाँ भी कोरोना वायरस की महामारी के सामने नतमस्तक हैं। लेकिन एक खास समुदाय है, जो स्वयं को इस वायरस से अजेय समझते हुए चल रहा है। अगर ऐसा ना होता तो भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण का ग्राफ अचानक से इस तरह उछाल भी नहीं मारता।

दिलचस्प बात यह है कि इस समुदाय विशेष ने नागरिकता कानून, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर आदि चीजें महज चंद फेसबुक और ट्विटर पोस्ट से समझकर इसके खिलाफ देशव्यापी धरने का हल्ला बोल दिया था। संविधान, शासन, व्यवस्था, सत्ता सबको नकारते हुए इस विशेष वर्ग ने दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देशभर में उत्पात मचाए रखा। और ऐसा करने के लिए उन्हें सत्ता विरोधियों का बस एक इशारा ही काफी था।

लोग हैरान रह गए कि जिस नागरिकता कानून को समझने में बड़े-बड़े राजनीतिशास्त्री, कानून के ज्ञाता और कानून निर्माताओं ने अच्छा-खासा समय लगा दिया, आखिर उसे शाहीनबाग़ में बैठी बिरियानी के साथ अचार माँगने वाली 75 साल की बुजुर्ग महिलाओं ने बस एक झटके में कैसे समझ लिया?

फिर भी, कुणाल कामरा, अनुराग कश्यप, स्वरा भास्कर के ट्वीट पढ़कर नागरिकता कानून की बारीकियाँ समझ लेने की इस अनोखी क्षमता के आगे देश तीन महीने से ज्यादा समय तक नतमस्तक रहा। लेकिन सवाल यह है कि इस उन्नत IQ क्षमता के लोगों को प्रधानमंत्री मोदी की मात्र 21 दिन तक अपने-अपने घर पर रहने की यह अपील समझने में आखिर इतनी मशक्कत क्यों करनी पड़ रही है?

21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद मुस्लिम समुदाय निरंतर नमाज पढ़ने से लेकर अपनी सामान्य दिनचर्या में नजर आ रहा है। इसी बीच दिल्ली में तबलीगी जमात के मरकज की सबसे बड़ी नौटंकी का दृश्य भी सामने आ गया। लेकिन मुस्लिम समुदाय अभी तक अपनी हठ पर नजर आ रहा है। मौलवी ही लोगों को नमाज अदा करने लिए मस्जिद में एकत्रित होने और 21 दिन के लॉकडाउन के नियमों को तोड़ने के लिए लोगों को भड़काते हुए नजर आ रहे हैं।

होली के दौरान जब देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने लोगों से अनावश्यक रूप से बाहर ना निकलने जैसी अपील की थी, उसके ठीक बाद कुछ वीडियो सामने आए। नमाज के लिए जुटी हुई भीड़ से टीवी एंकर यह सवाल करते हुए देखे गए कि क्या उन्हें डर नहीं लगता वायरस के संक्रमण से? इसके जवाब में कई प्रकार के मजहबी कारण, जो कि निसंदेह बेहद बेवकूफाना थे, सुनने को मिले। कुछ नमाजियों ने कोरोना को अल्लाह का अजाब बताया, जिसे आज नहीं तो कल आना ही था, तो कुछ ने कहा कि यह ताबीज पहनने से भाग जाएगा। यहाँ तक कि शाहीनबाग के बुद्धिजीवी वर्ग ने भी कोरोना पर अपनी राय रखते हुए कहा कि मौत तो एक न एक दिन आनी ही है।

लेकिन कोरोना के बढ़ते हुए मामलों के साथ मजहब का सबसे वाहियात चेहरा अब सामने आ रहा है। इंदौर जैसी घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। संवेदनशील इलाकों में डॉक्टर और पुलिसकर्मियों पर थूका जा रहा है। तबलीगी जमात के क़्वारंटाइन किए गए लोग अधिकारी और डॉक्टर्स पर थूक रहे हैं, उनसे बदसलूकी कर रहे हैं। आइसोलेशन के दौरान लजीज पकवान की शिफारिश कर तंत्र की कार्यशैली में बाधा डाल रहे हैं।

सोचिए, यदि यही डॉक्टर, जो बिना अपनी जान की परवाह किए लोगों की जाँच के लिए उनके पीछे भाग रहे हैं, आज ही इस बर्ताव से नाराज होकर काम करने से मना कर दें तो पूरे भारत को इटली और चीन बनते कितना टाइम लगेगा?

कोरोना वायरस किसी का मजहब नहीं देखता है, यह एकदम सेक्युलर प्रकृति का वायरस है। लोगों पर थूककर यदि यह वायरस सिर्फ एक धर्म के लिए संकट खड़ा करता, तब भी इन नमाजियों का तर्क समझा जा सकता था लेकिन यह वायरस हर प्रकार की सीमा से परे है। यह जितना जानलेवा ‘काफिरों’के लिए हो सकता है, उतना ही नमाजियों के लिए भी है।

वायरस के प्रकोप की गंभीरता यदि इटली, स्पेन और अमेरिका जैसे देशों में बढ़ती हुई लाशों की संख्या देखकर भी समझ नहीं आती है, तो भारत सरकार को फिलीपींस के राष्ट्रपति का बयान चप्पे-चप्पे पर चिपका देना चाहिए। फिलीपींस के राष्ट्रपति रॉड्रिगो दुतेर्ते (Rodrigo Duterte) ने ऐलान किया है कि देश में अगर कोई व्यक्ति लॉकडाउन का उल्लंघन करेगा तो उसे गोली मार दी जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी चाहिए कि 21 दिनों के लॉकडाउन की अपील को हाथ जोड़कर स्पेनिश भाषा में बोलने के बजाए फिलीपींस के राष्ट्रपति की भाषा में बोलना चाहिए। शायद यही एक तरीका है कि लोग लॉकडाउन के महत्व को समझें और स्वविवेक से फैसला ले सकें कि नमाज भी नामजियों से ही है, और उसे पढ़ने के लिए कोरोना वायरस से जीवित रहना जरूरी है।

LNJP अस्पताल में पुलिस तैनात, तबलीगी जमात के सदस्य जाँच से कर रहे थे आनाकानी

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात का मरकज देश में कोरोना वायरस संक्रमण का एपिक सेंटर बनकर उभरा है। बावजूद इसके यहॉं से निकाले गए लोगों इस महामारी को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे। कई लोगों को 1 अप्रैल को यहॉं से निकाल कर एलएनजेपी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। लेकिन, ये मेडिकल स्टाफ के साथ सहयोग नहीं कर रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार जॉंच और अस्पताल में भर्ती रहने से आनकानी कर रहे हैं।

एलएनजेपी हॉस्पिटल के डायरेक्टर किशोर सिंह ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को बताया कि अस्पताल में भर्ती किए गए तबलीगी जमात के ज्यादातर सदस्य जाँच में सहयोग नहीं कर रहे। जाँच का विरोध कर रहे। इसके कारण हमारे स्टाफ की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इसे देखते हुए जिन तीन ब्लॉक में इन्हें रखा गया है वहॉं पुलिस की तैनाती करनी पड़ी है।

तबलीगी जमात के लोगों द्वारा डॉक्टरों और दूसरे मेडिकल स्टॉफ पर थूकने की रिपोर्ट्स कल बुधवार को लगातार आती रही थीं। इन सारी रिपोर्ट्स में इसी बात का जिक्र था कि Covid-19 के लक्षण दिखने के बाद क्वारन्टाइन किए गए जमात के सदस्य किस तरह की उद्दंडता उन डॉक्टर्स और मेडिकल स्टॉफ से कर रहे हैं, जो इनके जैसे संक्रमितों की देखभाल में अपने प्राणों की परवाह किए बगैर दिन-रात एक किए हुए हैं। इन लोगों ने न सिर्फ स्टाफ के साथ बदसलूकी की, बल्कि खाने आदि की गैर जरूरी माँग कर परेशान किया। मेडिकल स्टाफ और आसपास थूक कर उन्हें संक्रमित करने की भी कोशिश की। इसके अलावा ये हॉस्पिटल बिल्डिंग में सारे नियमों की अवहेलना करते हुए छुट्टा साँड़ की तरह घूमते रहे।

उल्लेखनीय है कि नियम-कायदों की परवाह किए बगैर मरकज में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे। यहॉं हुए इज्तिमा में देश के कई राज्यों के अलावा विदेशियों ने भी शिरकत की थी। इसके बाद से लगातार इनके संक्रमित होने की खबरें आई हैं। यहॉं से निकले लोगों की देशभर में तलाश की जा रही है ताकि उनकी जॉंच की जा सके और संक्रमण पर काबू पाया जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में कोरोना संक्रमित पाए गए लोगों में से एक तिहाई जमात से ही संबंधित हैं।

मस्जिदों में छिपे तबलीगी जमातियों पर योगी सरकार सख्त: टूरिस्ट वीजा के दुरुपयोग पर कार्रवाई के निर्देश, पासपोर्ट जब्त करने का आदेश

भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों की लगातार बढ़ती संख्या ने केन्द्र सहित सभी राज्यों की सरकारों को चिंता में डाल दिया है। यही कारण है कि दिल्ली के निजामुद्दीन से निकलकर पूरे भारत में फैले जमातियों को राज्य सरकारें अपने-अपने तरीके से खोजने में लगी हुई हैं। उधर मस्जिदों में छिपे जमातियों पर यूपी सरकार ने अपनी टेड़ी नजर कर ली है। इसका परिणाम बीते दिनों लखनऊ में हुई सीएम की बैठम में देखने को मिला, जहाँ सीएम योगी आदित्यनाथ ने आदेश जारी करते हुए कहा कि जमात से जुड़े सभी विदेशियों के पासपोर्ट जब्त किए जाएँ।

दरअसल, सीएम योगी ने कोरोना को लेकर बुधवार को समीक्षा के लिए बनी टीम 11 के साथ बैठक की। बैठक में सीए ने दो टूक कहा कि इन लोगों की पूरी पड़ताल की जाए, जहाँ भी हों, उन्हें क्वारंटाइन किया जाए। योगी ने साफ कहा कि जिन लोगों ने तथ्यों को छिपाया है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इन लोगों को प्रदेश में कोरोना संक्रमण का वाहक किसी भी हालत में नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मानवता के खिलाफ किसी भी तरह की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन लोगों ने मानवता खिलाफ जाकर कार्य किया है, वह कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि अब तक की कार्रवाई में जो 218 विदेशी नागरिक सामने आए हैं, वे अलग-अलग समय पर टूरिस्ट वीजा पर उत्तर प्रदेश में आए थे। इनमें कई विदेशी तबलीगी जमात में भी शरीक हुए हैं। ऐसे सभी विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट कब्जे में लेकर उन्हें क्वारंटाइन किया गया है। अपर मुख्य सचिव गृह ने टूरिस्ट वीजा का दुरुपयोग करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है।

उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों में सबसे अधिक संख्या में जमाती मिले हैं। सिर्फ मेरठ और आसपास के जिलों में 1180 जमाती पकड़ में आए हैं। इनमें 951 देश के विभिन्न राज्यों से हैं जबकि 139 लोग विदेशी हैं। आगरा व उसके आसपास के जिलों मथुरा, मैनपुरी, एटा, कासगंज, फिरोजाबाद में 256 जमातियों को क्वारंटाइन किया गया। मथुरा में 60 जमाती मिले। पूर्वांचल में भी यह संख्या ढाई सौ से अधिक है। हापुड़ में थाईलैंड के नौ लोगों समेत 53 लोगों को क्वारंटाइन किया गया। गाजियाबाद में हजरत निजामुद्दीन स्थित तबलीगी मरकज जमात में शामिल होने वाले 135 लोगों का पता चला है।

बता दें कि तबलीगी जमात के तहत दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए मजहबी सम्मेलन में शामिल कई लोगों के कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। जानकारी के मुताबिक इस सम्मेलन में यूपी से भी बड़ी संख्या में जमातियों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद से ही पूरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है और लगातार प्रदेश की मस्जिदों में छापेमारी करके देश-विदेश से आए जमातियों की तलाश की जा रही है। इस बीच दिल्ली की तबलीगी जमात में शरीक हुए यूपी के 569 लोगों को अब तक विभिन्न जिलों में क्वारंटाइन किया गया है। वहीं प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 2, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 117 से अधिक हो गई है।

निजामुद्दीन मरकज़ का असर नॉर्थ इस्ट तक फैला: अरुणाचल में आया पहला मामला, मणिपुर में दूसरे की पुष्टि

दिल्ली के मरकज़ ने नॉर्थ ईस्ट में कोरोना के कहर से अछूते एक प्रदेश में भी अपना जहर फैला दिया। खबर है कि अरुणाचल प्रदेश में कोरोना का पहला मामला आ गया है और इसके तार निजामुद्दीन में हुए तबलीगी जमात से जुड़े हैं। इसकी जानकारी प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम खांडू ने स्वयं दी है।

सीएम प्रेम खांडू ने अपने ट्वीट पर बताया, “एक गैर अरुणाचली 31 वर्षीय व्यक्ति, जिसने निजामुद्दीन मरकज़ में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में भाग लिया था, उसे कोरोना का पॉजिटिव केस पाया गया है। ये कोविड 19 का पहला मामला है। वर्तमान में उसमें बीमारी के लक्षण नहीं दिख रहे हैं। मगर उसे आइसोलेशन में रखा गया है। उसकी हालत स्थिर है।”

जानकारी के अनुसार, प्रदेश के तेजू जिले में इस व्यक्ति को रखा गया है। इससे पहले 7 लोगों को कोरोंटाइन किया गया था। इनमें से 6 लोग निमसई में रखे गए थे और 1 लोहित में। इनके सैंपल को बुधवार को असम के डिब्रूगढ़ भेजा गया था। जिसकी रिपोर्ट आज आई।

इस्टमोजो के अनुसार, सूत्रों के जरिए इनकी ट्रैवल हिस्ट्री मालूम हुई है। पता चला है कि इन्होंने असम के तिंसुकिया से दिल्ली तक सफर किया। फिर मार्च 19 से 20 के बीच नमसई, लोहित और इटानगर लौटे।

बता दें कि कोरोना के कहर से बचा उत्तर पूर्वी क्षेत्र में अब कोरोना के मामले लगातार सुनने को मिल रहे हैं। पहले सिर्फ़ संदिग्धों पर बात हो रही थी। लेकिन अब कोरोना संक्रमण के पॉजिटिव केसों की पुष्टि हो रही है। जैसे मणिपुर में कोरोना वायरस के दूसरे मामले की पुष्टि हुई है।

मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि राज्य में कोरोना संक्रमित मरीज़ों की संख्या दो हो चुकी है। उन्होंने बताया था कि निज़ामुद्दीन के तबलीग़ी जमात के एक कार्यक्रम में शामिल हुआ एक व्यक्ति कोविड-19 पॉज़िटिव पाया गया है। इसके बाद से कुछ लोगों को क्वरंटीन सेंटर में भेजा गया है बाकि कुछ पर निगरानी रखी जा रही है।

लॉकडाउन का उल्लंघन और स्वास्थ्यकर्मियों से बदसलूकी अब और बर्दाश्त नहीं, सीधे गोली मारने का आदेश: फिलीपिंस

कोरोना वायरस से अपने देश की जनता को बचाने के लिए फिलीपिंस के राष्ट्रपति रॉड्रिगो डूटर्ट ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने वालों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यव्हार करने वालों को चेताया है। उन्होंने ऐसे मनमानी करने वाले लोगों के लिए साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें उनकी इन हरकतों के लिए गोली मारी जा सकती है। और इसके लिए उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को आदेश दे दिए हैं।

बता दें देश के नाम संबोधन में फिलीपींस (Philippines) के राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा अधिकारी दिन रात मेहनत कर रहे हैं। वह देश के कोरोना के संक्रमण को कम करने में दिन रात लगे हैं ऐसे में जो भी लोग सरकार की बात नहीं मानेंगे और लॉकडाउन को तोड़ने का प्रयास करेंगे उसे गंभीर अपराध माना जाएगा। मैंने पुलिस और सेना को आदेश दिया है कि अगर कोई व्यक्ति बात नहीं माने तो ऐसे लोगों को गोली मार दी जाए।

जानकारी के मुताबिक, फिलीपींस में अभी तक कोरोना के कारण 96 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा वहाँ संक्रमितों की संख्या 2300 से भी ज्यादा हो चुकी है। सरकार कोरोना से निपटने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। इन्ही कोशिशों का नतीजा है कि पिछले 3 हफ्तों में वहाँ केवल कोरोना के 3 मामले सामने आए हैं जो इस बात की पुष्टि करते है कि फिलीपींस कोरोना से लड़ाई जीत रहा है।

हालाँकि, राष्ट्रपति के इस ऐलान के बाद कुछ एक्टिविस्ट उनकी आलोचना कर रहे हैं। उनके बयान को हिंसक बता रहे हैं और कह रहे हैं कि यही सब ड्रग्स के खिलाफ शुरू हुई जंग के दौरान उन्होंने किया था, वे वैसा ही दोबारा कर रहे हैं। उस समय भी पुलिसवालों ने हजारों लोगों को मार दिया था और अब भी यही आदेश दे रहे हैं। जबकि पुलिस ने एंटी-ड्रग अभियान के तहत लिए सभी एक्शन को कानूनी बताया था और इस बार भी राष्ट्रपति के बयान के आने के बाद राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख ने गुरुवार को कहा कि पुलिस समझ रही है कि डुटर्ट ने सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर अपनी गंभीरता का प्रदर्शन किया। हालाँकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि किसी को गोली नहीं मारी जाएगी।

दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब रोड्रिगो डूटर्ट ने देशवासियों को गोली मारने का आदेश दिया हो। साल 2016-17 में राष्ट्रपति ने ड्रग डीलर्स को बिना कानूनी कार्रवाई के मारने का आदेश दिया था।

बता दें फिलीपींस में इस समय 2311 से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हैं। वहीं, 96 लोगों की मौत हो चुकी है। 12 मार्च के आसपास राष्ट्रपति रोड्रिगो डूटर्ट ने भी कोविड-19 की जाँच कराई थी। वह निगेटिव निकले थे। हालाँकि, एहतियात के तौर पर वह खुद सेल्फ आइसोलेशन में चले गए थे। इसके अलावा फिलीपींस के संसद और केंद्रीय बैंक को भी क्वारंटीन किया गया था। राष्ट्रपति के प्रवक्ता सेल्वाडोर पनेलो ने कहा था कि हमारे स्वास्थ्य अधिकारियों की सलाह पर हमने सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाए हैं।

‘…जो डॉक्टर मुहल्ले में आ रहे, वो दे रहे जहरीला इंजेक्शन’ – WhatsApp पर इरशाद ने फैलाई अफवाह, इंदौर में गिरफ्तार

एक तरफ भारत के साथ पूरा विश्व कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर लाख कोशिशों के बाद भी कुछ कट्टरपंथी लोगों को भड़काने से बाज नहीं आ रहे हैं, लेकिन ऐसे लोगों पर पुलिस प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कुछ ऐसे ही व्हाट्सएप ग्रुर पर लोगों को डॉक्टरों के खिलाफ भड़काने वाले एक युवक को इंदौर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते हुए आरोपित के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

क्राइम ब्रांच एएसपी राजेश दंडोतिया ने बताया आरोपित इरशाद नाम के युवक ने व्हाट्सएप पर ‘मस्ती की पाठशाला’ नाम से ग्रुप बना रखा था। इस ग्रुप में जुड़े कई युवक लगातार संदेश लोगों को संदेश भेजकर यह भ्रम फैला रहे थे कि कोरोना के इलाज की आड़ में जो डॉक्टर उनके मोहल्लों में आ रहे हैं, वे जहरीला इंजेक्शन दे रहे हैं। इसलिए उनका बहिष्कार करें।

इसकी जानकारी जैसे ही क्राइम ब्रांच को हुई वैसे ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ग्रुप के एडमिन इरशाद को गिरफ्तार कर लिया। इरशाद नाम का आरोपित कोहिनूर कॉलोनी आजादनगर इंदौर का निवासी है। इसी के साथ पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपित के खिलाफ वैश्विक महामारी कोरोना के संदर्भ में लोगों को भड़काने और समाज में उन्माद फैलाने वाले मैसेज भेजने जैसी संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एसएसपी ने बताया कि आरोपित के अलावा ग्रुप के कुछ अन्य सदस्यों को भी भड़काऊ पोस्ट करने के मामले में आरोपित बनाया जाएगा।

भास्कर में प्रकाशित खबर की कटिंग

वहीं एएसपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने बताया कि महामारी की गंभीरता तो देखते हुए इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सतत निगरानी रखे हुए है। इस दौरान सोशल मीडिया पर अफवाह और लोगों को भड़काने के उद्देश्य से भड़काऊ पोस्ट या शेयर करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वह किसी भी प्रकार की अपुष्ट खबरों अथवा अफवाहों पर भरोसा ना करें, ना ही ऐसी अफवाहों को प्रसारित करें।

गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर के टाटपट्टी बाखल और सिलावटपुरा में कोरोना वायरस की जाँच के लिए गई डॉक्टरों की टीम पर गली में पहले से मौजूद लोगों ने पथराव किया था। इसके बाद डॉक्टरों की टीम को वहाँ से जान बचाकर भागना पड़ा था। इतना ही नहीं जब सूचना मिलने पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुँची तो आरोपितों ने महिलाओं को आगे कर दिया और फिर घरों की छतों से पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर फिर से पथराव शुरू कर दिया था। इस दौरान वहाँ लगी बैरिकेडिंग को भी उपद्रवियों ने तोड़ दिया। इसके बाद पुलिस फोर्स ने तत्काल पूरे इलाके को सील कर दिया था।

पुलिस जब खोज में उतरी तो निज़ामुद्दीन के मौलाना साद को याद आए डॉक्टर, कहा उनकी बात मानें लोग

दिल्ली के मरकज़ में देश-विदेश के लोगों को इकट्ठा करके उन्हें मस्जिदों को आबाद करने की बात सिखाने वाले मौलाना साद का नया ऑडियो आ गया है। इस ऑडियो में वो अपने पहले वाले बयान से उलट एक अलग बयान दे रहा है। ऑडियो में वो अपने समर्थकों से कहते सुना जा सकता है कि डॉक्टरों की सलाह मानने में कोई बुराई नहीं है। ये इस्लाम के ख़िलाफ़ नहीं है। वीडियो को आज ही थोड़ी देर पहले दिल्ली मरकज़ के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है।

इस नए ऑडियो में मौलाना साद न केवल डॉक्टर की हिदायत पर अमल करने के लिए उसे शरीयत के अनुकूल बताता है बल्कि ये भी कहता है कि ऐसा करना इस्लाम का बुनियादी उसूल है। उसे इस ऑडियो में एहितयात बरतने की बात पर जोर देते भी सुना जा सकता है। कोरोना को लेकर लापरवाही करने की बात को भी साद यहाँ उठाता है और कहता है कि बीमारी में एहतियात न बरतना कोई अकलमंदी की बात नहीं है।

बता दें कि इससे पहले बुधवार को साद मुहम्मद ने जमात की इंतजामिया कमिटी के सदस्यों को अपनी ऑडियो क्लिप भेजी थी। करीब एक मिनट की इस क्लिप में साद मुहम्मद ये कह रहा है कि वह डॉक्टरों की सलाह पर दिल्ली में ही क्वारंटाइन हो गया है और जमात के सभी सदस्यों से ये अपील करता है कि देश में जहाँ कहीं भी हों, कानून का पालन करें एवं अपने घरों में रहे।

उल्लेखनीय है कि निजामुद्दीन की मरकज से पर्दा उठने के बाद दिल्ली पुलिस ने साद समेत कुछ लोगों पर कानूनी एक्शन लिया था। मगर कल सुबह खबर आई कि वो फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुट गई। इसके बाद ऑडियो जारी करके उसने सूचना दी कि वो क्वारंटाइन हो रखा है। अब सवाल उठता है कि वो है कहाँ? तो बता दें साद ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हजारों लोगों को जुटाने का आरोपित साद मुहम्मद दिल्ली में ही किसी रिश्तेदार के यहाँ क्वारंटाइन है।

याद दिला दें कि इससे पहले मरकज प्रमुख का एक ऑडियो और वायरल हुआ था। ऑडियो में उसे कहता उक्त बातों से बिलकुल उलट कहते सुना जा रहा था। पहली विडियो में वो कह रहा था – ये मौका मस्जिदों को आबाद करने का है। इन बातों का नहीं कि मस्जिदों को छोड़ दो, क्योंकि हालात सही नहीं है… जिनकी अक्लों पर दूसरों का पहरा होता है, वे ऐसे मशवरे देते हैं। मौलाना साद ये भी कहता है कि इस परेशानी से लड़ने के लिए अल्लाह का आजाब हटाने के लिए घर में मत बैठो, औरतों को, बच्चों को, जानवरों को, बकरियों को, बैलों को, भैंसों को, ऊँटों सबको मैदान में ले आओ… और अल्लाह की मदद से इस आजाब को हटाओ।

कौन है मौहम्मद साद?

मौलाना साद का पूरा नाम मौलाना मुहम्मद साद कंधलावी है। वह भारतीय उपमहाद्वीप में सुन्नी समुदाय के सबसे बड़े संगठन तबलीगी जमात के संस्थापक मुहम्मद इलियास कंधलावी का पड़पोता हैा। वो जमात का मुखिया बनने से लेकर पैगंबर मुहम्मद के बयान के ख़िलाफ़ दिए बयान के कारण विवादों में रहा है। 2017 की फरवरी महीने में दारुल उलूम देवबंद ने तबलीगी जमात से जुड़े लोगों को फतवा जारी कर कहा कि साद कुरान और सुन्ना की गलत व्याख्या करते हैं। देवबंद का यह फतवा मौलाना साद के भोपाल सम्मेलन में दिए गए बयान के बाद आया था, जिसमें उसने कहा कि (निजामुद्दीन) मरकज मक्का और मदीना के बाद दुनिया का सबसे पवित्र स्थल है। इसे दारुल उलूम के मौलाना ने पैगंबर मुहम्मद के ख़िलाफ़ बताया था।

अभी मस्जिदों को आबाद करो, लॉकडाउन मुस्लिमो को डराने का, मिलने से रोकने की साजिश है: मरकज का मौलाना

कहते हैं गुरु और धर्म गुरू जीवन में पथ प्रदर्शक होते हैं। मगर किसी आम इंसान को अगर इनमें से कोई भी गलत मिल जाए तो जीवन अंधकार में चला जाता है। आज कुछ यही मुसलामनों के साथ हो रहा है। मोहम्मद साद कंधालवी- जमाती प्रमुख। जिसकी बातों में आकर समुदाय के लोगों ने न केवल खुद को बल्कि पूरे भारत को खतरे में डाल दिया है। जी हाँ। दिल्ली में बढ़ते कोरोना के मामलों के पीछे निजामुद्दीन की मरकज़ का खुलासा होने के बाद तबलीग जमात के प्रमुख का एक ऑडियो वायरल हुआ है।

इस ऑडियो ने सबको झकझोर दिया है। इसमें सुना जा सकता है कि धर्मगुरू जिसके ‘उपदेश’ सुनने के लिए न केवल भारत के अलग अलग राज्यों से लोग इकट्ठा हुए बल्कि विदेशों से भी भारत आए। उसने न सिर्फ उनके बीच में गलत जानकारी फैलाई, बल्कि उन्हें गलत रास्ते पर चलने के लिए उकसाया, प्रशासन के निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

ऑडियो में कोरोना विषय पर बात करते हुए कंधालवी ने डॉक्टर, सरकार, प्रशासन, विज्ञान सबको खारिज कर दिया। मौलवी ने सिर्फ सुन्नत की बातें की। मस्जिदों को आबाद करने की बात की। साथ ही लॉकडाउन को एक प्रोग्राम बताया। पूरी ऑडियो ने वायरल होने के बाद तस्वीर साफ कर दी है। मालूम चल चुका है कि तेलंगाना में हुई मौत, आँध्र प्रदेश, यूपी, दिल्ली में अकस्मात बढ़े मामलों के लिए कौन जिम्मेदार है।

कंधालवी को ऑडियो में स्पष्ट कहते सुना जा सकता है, “ये मौका मस्जिदों को आबाद करने का है। इन बातों का नहीं कि मस्जिदों को छोड़ दो, क्योंकि हालात सही नहीं है… जिनकी अक्लों पर दूसरों का पहरा होता है, वे ऐसे मशवरे देते हैं।” मौलाना साद ये भी कहता है कि इस परेशानी से लड़ने के लिए अल्लाह का आजाब हटाने के लिए घर में मत बैठो, औरतों को, बच्चों को, जानवरों को, बकरियों को, बैलों को, भैंसों को, ऊँटों को… सबको मैदान में ले आओ… और अल्लाह की मदद से इस आजाब को हटाओ।

बता दें कि अपने हर दूसरे वाक्य में साद को बार-बार मस्जिदों को आबाद रखने के लिए कहते सुना जा सकता है और ये पूछते भी सुना जा सकता है कि आखिर लोगों को क्यों यकीन आ गया कि दूर रहने से समाधान होगा। इसका यकीन क्यों नहीं है कि इकट्ठा होंगे तो अल्लाह फरिश्ते तैनात करेंगे, जिनके करम से दुनिया में सुकून और राहत आएगी।

“लॉकडाउन और कोरोना का खौफ फैलाना सिर्फ़ एक स्कीम है। ताकि मुस्लिम दूसरे मुस्लिम से न मिल सके। एक थाली में साथ न खा सके।” वायरल ऑडियो में कंधालवी साद को यह भी कहते सुना जा सकता है कि यह सब प्रोग्राम है ताकि मुस्लिमों को बिखेरा जा सके। जिससे दिमाग में बैठ जाए कि साथ में मत बैठो वरना बीमारी लग जाएगी। वो कहता है कि अगर आज मुस्लिमों में इस बीमारी का खौफ फैल जाता है, तो बीमारी खत्म हो जाएगी, लेकिन मुस्लिम अलग हो जाएगा। ये सब एक प्रोग्राम बनाया गया है, जिससे मुस्लिम-मुस्लिम से अलग हों और इस बहाने से इन्हें अछूत बनाया जा सके। अंत में बातों में तालमेल बिठाने के बाद साद ये भी कहता है कि अगर बीमारी हो जाए तो एहतियात बरती जानी चाहिए क्योंकि ये भी सुन्नत है। मगर मुस्लिम का मुस्लिम से न मिलना जहालत है।

उल्लेखनीय है कि उक्त बातें, वो बातें हैं जो बताती है कि एक मौलाना ने किस तरह हजारों की संख्या में मुस्लिमों को भड़काया और मजहब के नाम पर डराया। उसने अपनी बात की शुरुआत में ही कुरआन की आयतों का हवाला देते हुए पूछ लिया कि मौत से भाग कर कहाँ जाओगे, वो तो तुम्हारे आगे-आगे चल रही है, पीछे नहीं। मौत इंसान के आगे रखा है अल्लाह ने, सामने, पीछे नहीं। इसीलिए, मौलाना ‘न भागने’ की सलाह देता है।

इसके अलावा ये भी समझाता है कि इस हालात में भागना अल्लाह के गुस्से को और बढ़ा देगा। इसके बाद उसने एक कहानी सुनाई। इस कहानी में एक कातिल होता है, जो खून करने के बाद अदालत में पेश किया जाता है तो जज को ही मार डालने की धमकी देता है। इसके बाद मौलाना ने पूछा कि क्या उस मुजरिम को छोड़ दिया जाएगा? फिर वो बताता है कि अदालत में अपील की जाती है, माफ़ी माँगी जाती है, जज का क़त्ल नहीं किया जाता। फिर वो समझाता है कि अल्लाह की तरफ़ से जब ऐसी कोई स्थिति आए तो ये मौका अल्लाह-ताला से माफ़ी माँगने का है।

साथ ही मौलवी लोगों को डॉक्टरों की सलाह न मानने की भी सलाह देता है। वो कहता है कि उनके कहने पर मिलना-जुलना नहीं छोड़ना चाहिए और नमाज भी जारी रखना चाहिए। मौलवी का कहना है कि अगर बीमारी है तो 70000 फरिश्तों से दुआ करो, किसी भी डॉक्टर से नहीं। वो कहता है कि अगर 70000 फ़रिश्ते साथ हैं तब बचाव नहीं हो पाया तो कोई मेडिकल विशेषज्ञ या डॉक्टर क्या कर लेगा? वो बार-बार मुस्लिमों को कहता है कि जब ऐसी आपदा आए तो अल्लाह की ज्यादा इबादत करो।