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निजामुद्दीन मरकज का असर अब नेपाल तक: 18 लोगों को किया क्वारंटाइन, बाकियों की तलाश में सभी जिले अलर्ट

नेपाल के सप्तरी जिले में बुधवार (मार्च 2, 2020) को वहाँ के प्रशासन ने कम से कम 18 मुस्लिमों को पकड़कर लक्ष्मी नारायण स्कूल में क्वारंटाइन किया। सभी निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात द्वारा आय़ोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वापस लौटे थे। इसके साथ ही उनके अन्य साथियों की तलाश में सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है।

नेपाल पुलिस के अनुसार 200 से अधिक लोग दिल्ली के तब्लीगी मरकज के लिए गए थे, जो वापस नेपाल आ चुके हैं। कोरोना जैसी महामारी देश में न फैले, इसलिए जल्द से जल्द सभी को पुलिस कस्टडी में क्वारंटाइन करने का फरमान नेपाल सरकार ने दिया है। नेपाल के सप्तरी और बारा जिले में गुरुवार को नेपाल पुलिस ने मदरसों में छापेमारी कर 20 लोगों को हिरासत में लिया है। 

वहीं एक अन्य मामले में नेपाल के विभिन्न भागों में गए 400 भारतीयों के बीरगंज इलाके में बॉर्डर बंद होने के कारण फँसे होने की सूचना है। परसा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गंगा पांटा के अनुसार, बॉर्डर पार कर भारत की ओर जाने वाले भारतीय नागरिकों के विशाल जनसमूह को एक शिक्षा संकाय भवन में रखा गया है। इन्हें नेपाल पुलिस खाना मुहैया करवा रही है।

इसके अलावा बता दें कि सप्तरी से नेपाल के काठमांडू पहुँचे 13 इंडोनेशियाई लोगों को गोदावरी विलेज रिज़ॉर्ट में कोरोंटाइन के लिए भेजा गया है। उन्हें शुरुआत में पुलिस द्वारा एक मस्जिद में ले जाया गया था, लेकिन जल्द ही सीमित सुविधाओं के कारण उन्हें रिसोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसमें 50 लोगों को रखा जा सकता है।

अब तक नेपाल में कोरोनोवायरस के केवल 5 मामलों के पुष्टि होने की सूचना है। लेकिन तब्लीगी जमात के कारण यहाँ पर इस संख्या में बढ़त होने के आसार हैं। क्योंकि, यदि भारत के संदर्भ में देखें तो अब तक जिस राज्य में भी इस जमात में शामिल लोग लौटें, वहाँ पर अकस्मात संक्रमण के मामलों में इजाफा हुआ।

बता दें कि नेपाल ने अपने देश को इस प्रकोप से बचाने के लिए काफी उपाय किए हैं। उन्होंने 23 मार्च से ही भारत और चीन की सीमा को सील किया हुआ है। साथ ही अपने देश के कई इलाकों में लॉकडाउन भी कर रखा है।

गौरतलब है कि जिस तब्लीगी जमात ने पूरे भारत में कोरोना के केसों को बढ़ाकर नेपाल की ओर अपने पैर बढ़ाए हैं। उसके प्रमुख की वायरल ऑडियो ने इस कार्यक्रम की मंशा को साफ कर दिया था। जिसमें वो कहता सुना जा सकता था कि लोग लॉकडाउन करके मस्जिदों को बंद करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इन सबसे कुछ नहीं होगा। इस समय में मस्जिदों को आबाद रखना सबसे ज्यादा जरूरी है और डॉक्टरों से ज्यादा अल्लाह पर विश्वास करना सबसे बड़ा काम।

भारत में संक्रमण के नए मामलों में दो-तिहाई मतलब 66% लोग निजामुद्दीन में जुटी तबलीगी भीड़ से

दिल्ली का निजामुद्दीन भारत में कोरोना वायरस का नया हॉटस्पॉट बन गया है। यहाँ मजहबी कार्यक्रमों में शामिल हुए ढाई हजार लोगों की पहचान में मुश्किलें आ रही हैं। देश में कोरोना वायरस का कहर तेजी से फैल रहा है। अब तक इस खतरनाक वायरस ने दो हजार से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है, वहीं 53 लोगों की मौत हो चुकी है। 

संक्रमित लोगों का आँकड़ा पिछले 3 दिनों में तेजी से बढ़ा है। संक्रमित लोगों में 295 वह हैं, जो पिछले महीने दिल्ली के निजामुद्दीन के तबलीगी जमात में शामिल हुए थे। मंगलवार से लेकर अब तक 485 संक्रमित मामलों में 60% वह लोग हैं, जो तबलीगी जमात का हिस्सा रहे थे।

दिल्ली में मंगलवार तक कुल 141 कोरोना वायरस के केस पाए गए हैं, जिसमें से 129 वह लोग हैं, जो तबलीगी जमात में शामिल हुए थे। वहीं तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटका से 143 संक्रमण के मामले सामने आए हैं, जो तबलीगी जमात का हिस्सा रहे थे। तमिलनाडु में 75 मामलों में से 74 मामले ऐसे हैं, जो तबलीगी जमात से लौटे लोगों के संपर्क में आए थे।

वहीं तेलंगाना में 27 में से 26 मामले ऐसे हैं, जो इसी तरह से तबलीगी जमात में आए लोगों के संपर्क में आए थे। कर्नाटक में 14 में से 11 मामले ऐसे हैं, जो निजामुद्दीन में हुए मजहबी बैठक से लौटे लोगों के संपर्क में आए थे। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में सभी 32 मामले ऐसे हैं, जो तबलीगी जमात से लौटे लोगों के संपर्क में आए थे।

इसी तरह से मध्य प्रदेश, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में गुरुवार को ऐसे मामले सामने आए हैं, जो तबलीगी जमात में शामिल हुए लोगों के संपर्क में आए थे। मध्य प्रदेश में 5 नए मामले सामने आए हैं तो वहीं असम में तीन और मणिपुर और अरुणाचल में एक-एक मामले सामने आए हैं।

राजस्थान में 13 में से 3 मामले इसी तरीके से हैं, जो तबलीगी जमात के लोगों के संपर्क में आए थे। महाराष्ट्र जो कि कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित है, वहाँ पर 88 में से 8 मामले ऐसे हैं, जो तबलीगी जमात में हिस्सा लेने वाले लोगों के संपर्क में आए थे। तबलीगी जमात मामले के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 3 दिन के आँकड़ों को खंगाला गया, जिसमें से 143 मामलों में आंध्र प्रदेश में तीन चौथाई की बढ़त दर्ज की गई है।

राज्य के नोडल ऑफिसर के श्रीकांत ने बताया स्वास्थ्य विभाग ने 758 लोगो की जाँच की, जो तबलीगी जमात से लौटे थे उसमें से 91 लोगों में संक्रमण पाया गया। उन्होंने बताया कि उनके पास उन सभी लोगों की जानकारी है, जो इस धार्मिक बैठक में शामिल हुए थे। जिला के अधिकारी इन सभी की जाँच कर रहे हैं।

असम राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हिमांत विश्व शर्मा ने कहा कि राज्य से 503 लोगों ने दिल्ली के निजामुद्दीन में इस धार्मिक बैठक में हिस्सा लिया था। जिसमें से 488 लोगों से संपर्क किया जा चुका है और 361 लोगों के सैंपल से लिए गए हैं ताकि जाँच किया जा सके बाकी 15 लोगों की खोज जारी है।

भारत में भी बिलकुल मलेशिया की तरह ही, तबलीगी जमात के सेरी पेटालिंग मस्जिद वाले मरकज की तरह कुल संक्रमण का दो तिहाई निजामुद्दीन मरकज के कारण है। मलेशिया में संक्रमण के पहले कुछ दिनों में यह संख्या दो तिहाई (675) थी, जबकि 30 मार्च तक के कुल 2626 संक्रमण में से 1290 लोग (लगभग आधे) उसी एक मस्जिद से संक्रमित हो कर लौटे थे।

बता दें कि मलेशिया में भी इसी तरह की तबलीगी जमात की एक बैठक हुई थी। मलेशिया कुआलालंपुर के बाहरी इलाके में सेरी पेटालिंग मस्जिद में एक विशाल मजहबी सभा आयोजित की गई थी, जिसमें 16,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे। इसकी वजह से घातक कोरोना वायरस का काफी प्रसार हुआ। यह मजहबी सभा 27 फरवरी से 1 मार्च के बीच आयोजित की गई थी। इनमें 15 अलग-अलग देशों के लोग शामिल हुए थे। अब इस मजहबी आयोजन में हिस्‍सा लेने वाले 1,290 लोग कोरोना वायर से संक्रमित हो गए हैं। 

यह मलेशिया में कोरोना मामलों को बढ़ाने में योगदान देने वाला अब तक का सबसे बड़ा क्लस्टर था। महानिदेशक ने कहा कि मजहबी सभा में सोलह हजार लोग शामिल हुए थे, जिसमें से 14,111 लोगों के सैंपल लिए गए थे। इनमें से 8,083 के टेस्ट निगेटिव आए हैं।

भारत में भी तबलीगी जमात की 18 मार्च को हुई एक बैठक से पूरे देश में हड़कंप जैसी स्थिति है। दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में हुई इस बैठक में हिस्‍सा लेने वाले 10 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो गई है। यह पूरा इलाका ही अब कोरोना का केंद्र बन गया है। यहाँ पर कोरोना के खतरे के बावूजद बिना इजाजत 18 मार्च को मजहबी कार्यक्रम किया गया, जिसमें 300 विदेशियों के साथ 1900 लोग शामिल हुए। इससे कोरोना के प्रसार में काफी वृद्धि देखने को मिली। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि अभी तक तबलीगी जमात से जुड़े लगभग 9000 लोगों की पहचान कर क्वारंटाइन किया जा चुका है। इनमें से 400 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं।

जो आतंकी गाजियाबाद की जेल में था, उसे Pak की कोर्ट ने फाँसी से बचा लिया: कश्मीर-कंधार-पत्रकार का है मामला

अमेरिका को कोरोना के साथ जंग लड़ता देख पाकिस्तान अपने आतंकी मंसूबों को जमीन पर उतारने के लिए सक्रिय हो गया है। खबर आई है कि वहाँ खूँखार आतंकी अहमद उमर शेख सईद को रिहा करने के लिए रास्ता ढूँढ लिया गया है। अब जल्द ही उसे फाँसी की कैद से बचाकर सलाखों से आजाद कराया जा सकता है। बता दें कि उमर शेख ने 18 वर्ष पहले अमेरिका के खोजी पत्रकार डेनियल पर्ल को मारा था। ये उन्हीं आतंकियों में से एक है, जिन्हें 1999 में कंधार (अफगानिस्तान) में एयर इंडिया के विमान को छोड़ने के बदले रिहा किया गया था।

पाकिस्‍तानी अखबार दी एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक इस मामले के मुख्य आरोपी ब्रिटेन में जन्मे अहमद उमर शेख को आतंकवाद निरोधी अदालत ने जो फाँसी की सजा सुनाई थी, उसे सिंध उच्च न्यायालय ने पलट दिया। अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रहे सईद के तीन अन्य साथियों फहद नसीम, सलमान साकिब और शेख आदिल को बरी कर दिया। वहीं, अदालत ने कहा कि सईद को मौत की सजा की जगह 7 साल की सजा दी जाए। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब अमेरिका समेत पूरी दुनिया कोरोना संकट में फँसी हुई है। इसलिए माना जा रहा है कि आईएसआई ने कोर्ट के फैसले के बहाने एक बड़ी साजिश रची है।

इधर, इस खबर की सूचना मिलने के बाद अमेरिका शांत नहीं है। उसने पाकिस्तान को चेताया है। अमेरिकी विदेश मामलों की हाउस कमिटी के चेयरमैन ने चेतावनी भरे लहजे में पाकिस्तान को आगाह करते हुए कहा कि पाकिस्तान की अदालत ने आतंकी उमर की सजा को जिस तरह से बदला है, वह चिंता की बात है। यह काफी जरूरी है कि पाकिस्तान अपनी बेहद पुरानी आतंकवाद की समस्या के खिलाफ वास्तविक प्रतिबद्धता दर्शाए।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि आईएसआई और पाकिस्‍तानी सेना का मानना है कि उमर सईद के बाहर आने से कश्‍मीर में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देना और आसान हो जाएगा। हालाँकि खबर ये भी कि अदालत के इस फैसले से इमरान सरकार खुद असमंजस में है। इसलिए उनकी सरकार अभी तक यह फैसला नहीं कर सकी है कि इस फैसले के खिलाफ अपील की जाए या नहीं।

गौरतलब है कि उमर सईद ने ही 1994 में कश्‍मीर में 4 विदेशी पर्यटकों का अपहरण कर लिया था। बाद में सुरक्षा बलों ने एक कार्रवाई में उमर सईद को गिरफ्तार किया था। उमर गाजियाबाद समेत देश की कई जेलों में रहा है। फिर साल 1999 में उसे एयर इंडिया के विमान के अपहरण के बाद छोड़ा गया। अब कहा जा रहा है कि ISI 46 साल के सईद का इस्‍तेमाल एकबार फिर से भारत में आतंकी वारदातों को बढ़ाने में कर सकती है। बता दें पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने उसे अपनी आत्मकथा में डबल एजेंट बताया था।

महाराष्ट्र: तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वालों की जानकारी देने पर पिटाई

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सूचना स्थानीय अधिकारियों को देने पर एक व्यक्ति की पिटाई कर दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक 56 वर्षीय एक व्यक्ति ने पिंपड़ी में ‘ग्रामसेवक’ को सूचना दी कि यहॉं के सात लोग दिल्ली गए थे। वहॉं निजामुद्दीन में जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए और हाल में गॉंव लौटे हैं। उसने इनका कोरोना वायरस टेस्ट कराने पर भी जोर दिया। इससे नाराज जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने उसकी मंगलवार को पिटाई कर दी।

पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है। सोलापुर के एसपी मनोज पाटिल ने बताया कि इन सात लोगों की जाँच रिपोर्ट में संक्रमण नहीं होने की पुष्टि हुई है। अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने सभी सात लोगों की जाँच कराई। सभी की रिपोर्ट में उन्हें कोरोना वायरस ना होने की पुष्टि हुई है।’’ 

उल्लेखनीय है कि जमात का निजामुद्दीन स्थित मरकज कोरोना संक्रमण का एपिक सेंटर बनकर उभरा है। यहॉं ठहरे कई लोग संक्रमित पाए गए हैं। अब देश भर में यहॉं से निकले लोगों की तलाश की जा रही है ताकि उनकी जॉंच की जा सके। लेकिन, लोग न केवल वहॉं जाने की जानकारी छिपा रहे हैं बल्कि अस्पतालों में भी बदतमीजी कर रहे हैं। गाजियाबाद के अस्पताल में जमात के लोगों ने नर्सों के साथ बदसलूकी की। दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में जॉंच में इनके द्वारा आनाकानी किए जाने पर पुलिस की तैनाती करनी पड़ी।

गुरुवार (अप्रैल 2, 2020) को बेंगलुरु के सादिक मोहल्ले में कोरोना संक्रमण के लक्षणों के बावत जाँच पड़ताल करने और नमूने लेने के लिए पहुँची नर्स और आशा कार्यकर्ता पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। महिला ने हमले की वजह मस्जिद से हुए अनाउंसमेंट को बताया। कर्नाटक की आशा कार्यकर्ता कृष्णावेणी ने कहा कि उन पर बेंगलुरु के ब्यातारायनपुरा में उस वक्त हमला हुआ था जब वे कोरोना वायरस से जुड़ा हुआ डाटा संग्रहित कर रहीं थी। उन्होंने कहा, “परेशानी उस वक्त शुरू हुई जब हमारे खिलाफ मस्जिद से अनाउंसमेंट किया गया, जिसने भी यह अनाउंसमेंट किया उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले इंदौर के टाटपट्टी बाखल में बुधवार को कोरोना संक्रमितों की जाँच करने पहुँची स्वास्थ्य विभाग की टीम पर मुस्लिम भीड़ ने पथराव कर दिया था। स्वास्थ्यकर्मी जान बचाकर भागे। उपद्रवियों ने बैरिकेड्स भी तोड़ दिए। पुलिस ने इनके खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा का केस दर्ज किया है। जाँच टीम में दो महिला डॉक्टर भी शामिल थीं। हमला करने वालों पर अब राज्य सरकार रासुका के तहत कार्रवाई करेगी।

इसी तरह अहमदनगर में भी मरकज में शामिल हुए लोगों के सम्पर्क में आने वालों का डाटा जुटाने गई मेडिकल टीम पर हमला हुआ। हमले की वजह यह शक बताया जा रहा कि मेडिकल टीम नागरिकता संशोधन और एनआरसी के लिए आँकड़े जुटा रही है, जबकि स्वास्थ्य टीम केवल उन लोगों की जानकारी जुटाने में लगी थी जिनके कोरोना संक्रमित होने या कोरोना संक्रमित के सम्पर्क में आने की आशंका थी।

अब अलीगढ़ में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुँची पुलिस पर पथराव, रात के वक्त मस्जिद में जुटे थे लोग

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस पर पथराव की घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार रात शहर के सराय रहमान स्थित गड्डा मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग जुटे थे। सूचना मिलने पर पुलिस पहुॅंची तो इनलोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस मामले में अलीगढ़ पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।

अलीगढ़ पुलिस को गुरुवार देर शाम को सूचना मिली कि बन्ना देवी थाना क्षेत्र के रघुवीरपुरी पुलिस चौकी के नजदीक तकिया मोहल्ले की एक मस्जिद में कुछ लोग सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं। मौके पर पहुँच पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की। उनसे मस्जिद में इकट्ठा नहीं होने और अपने घरों में नमाज पढ़ने को कहा। इसको लेकर स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच नोंकझोंक हो गई।

इसी बीच किसी ने अफवाह फैला दी कि पुलिस मौलवी को पीटते हुए थाने ले जा रही है। इस अफवाह के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस से मारपीट शुरू कर दी और छतों से पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। माहौल बिगड़ता देख पुलिस को जान-बचाकर भागना पड़ा। इसके बाद कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही सीओ पंकज श्रीवास्तव पूरे दल-बल और कई थानों की फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए। इसके बाद उपद्रवी घरों में जाकर छिप गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर मौलवी समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया है। फ्लैगमार्च के बाद इलाके में फोर्स तैनात कर दिया गया है।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर की कटिंग

सीओ पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि लोग नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में इकट्ठा हुए थे। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो वे पथराव करने लगे। उन्होंने लोगों से लॉकडाउन के नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा है कि इसका उल्लंघन करने पर सख्त कानून कार्रवाई की जाएगी।

16 वर्षीय छात्र वुहान में दोबारा ले आया कोरोना, पिछले 1 हफ्ते में सामने आया पहला केस

कोरोना वायरस से निजात पाने के जश्न में डूबा चीन का वुहान अब दोबारा खतरे में है। खबर है कि वहाँ कोरोना दोबारा लौट आया है। इस बार इसे लाने वाला एक 16 वर्षीय छात्र है। जानकारी के मुताबिक छात्र का नाम झोहू है। बताया जा रहा है कि जब झोहू लौटा उस समय उसमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए। मगर बीजिंग उतरकर वुहान लौटने के बाद उसका टेस्ट पॉजिटिव आया। बता दें पिछले एक हफ्ते में ये चीन में सामने आया कोरोना वायरस का पहला केस है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, झोहू ने वुहान से बीजिंग और दुबई होते हुए यूके के न्यूकैसल तक सफर किया था। वुहान हेल्थ कमीशन के अनुसार, झोहू यूके में रहकर पढ़ता है। उसने न्यूकैसल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 21 मार्च को दुबई होते हुए बीजिंग के लिए उड़ान भरी थी। इसके बाद शुरुआत में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग हुई। उसे मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया। फिर उसे हाई स्पीड ट्रेन से उसके घर वुहान भिजवा दिया गया। साथ ही क्वारंटाइन होने के आदेश दिए।

अब वुहान में लौटे इस केस ने वहाँ प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि आने वाले हफ्ते में चीन में कोरोना पर स्थिति साफ होगी। चीन के मुताबिक वहाँ बाहर से आए कोरोना वायरस के 841 मामले हैं, जबकि हुबेई प्रांत में लोकल ट्रांसमिशन का कोई केस नहीं है। मगर, चूँकि झोहू यूरोप से संक्रमित होकर लौटा है, जहाँ कोविड 19 का कहर बरपा हुआ है, इसलिए उसपर खास निगाह रखी जा रही है।

वहीं, हांगकांग विश्वविद्यालय के शोधकर्ता गैब्रिएल का मानना है कि चीन में अभी भी तमाम लोग कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं। इन लोगों में बाद में कोरोना का संक्रमण प्रभावी रूप से सामने आ सकता है। सरकार के मुताबिक कोरोना के कहर के दौरान चीन में करीब 81,589 लोग इससे संक्रमित हुए और 3,318 लोग मारे गए। स्था​नीय लोगों ने इस डाटा खारिज करते हुए कहा है करीब 42 हजार लोग मारे गए हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों खबर आई थी कि कोरोना संक्रमण पर काबू पाते ही चीन की वेट मार्केट दोबारा से शुरू हो गई है। वहाँ चमगादड़, बतख और कुत्तों का मीट बिकना प्रारंभ हो गया है। बता दें, आमतौर पर वेट मार्केट का पर्याय एक बाजार से होता है, जहाँ माँस-मछली आदि बिकते हैं। मगर, चीन के संदर्भ में इस शब्द की परिभाषा अलग है, क्योंकि चीन में जंगली जानवरों की बिक्री धड़ल्ले से की जाती हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसी मार्केट के कारण हुबेई प्रांत में रहने वाली 55 वर्षीय महिला कोरोना की चपेट में आई थी। इसके बाद ये वायरस अन्य लोगों में पहुँचा। इसी मार्केट को महामारी फैलने की वजह माना गया था। मेल ऑन संडे की पत्रकार के अनुसार, ये मार्केट उसी तरह चालू हो गया है जैसे कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से पहले चल रहा था।

कोरोना का अंधकार मिटाएँ, 5 अप्रैल को 9 मिनट के लिए बत्तियाँ बुझा दें, दीया जलाएँ: PM मोदी

कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार (अप्रैल 3, 2020) को वीडियो संदेश जारी किया। शुक्रवार सुबह जारी किए गए वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ देशव्यापी लॉकडाउन को आज नौ दिन हो रहे हैं। इस दौरान आप सभी ने अनुशासन और सेवा भाव का परिचय दिया। शासन-प्रशासन और जनता जनार्दन ने इस स्थिति को अच्छे तरीके से सँभालने का काम किया है।

पीएम ने कहा कि इस रविवार (अप्रैल 5, 2020) को सभी को कोरोना के संकट को चुनौती देनी है। उन्होंने कहा, “इस रविवार 5 अप्रैल को कोरोना के अंधकार को चुनौती देनी है। उस दिन रात के 9 बजे सबके 9 मिनट चाहिए। घर की सभी लाइट बंद कर, घर के दरवाजे पर, बॉलकनी में खड़े होकर 9 मिनट, मोमबत्ती, दीया, टॉर्च, फ्लैशलाइट जलाएँ। जनता रूपी महाशक्ति से बातचीत करते रहना चाहिए, इससे मनोबल मिलता है, इससे मार्ग ज्यादा स्पष्ट होता है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि लोग सोशल डिस्टेंस को बनाकर जरूर रखें। कहीं एकजुट न हों और न ही घर से बाहर निकलें। आगे उन्होंने कहा, “हमें निरंतर प्रकाश की ओर जाना है, जो इस कोरोना संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, हमारे गरीब भाई-बहन उन्हें कोरोना संकट से पैदा हुई निराशा से आशा की तरफ ले जाना है।”

पीएम ने जनता का धन्यवाद देते हुए कहा, “आपने जिस प्रकार 22 मार्च को कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले हर किसी का धन्यवाद किया वो भी आज सभी देशों के लिए एक मिसाल बन गया है। आज कई देश इसको दोहरा रहे हैं।” मोदी ने कहा, “ये लॉकडाउन का समय जरूर है, हम अपने अपने घरों में जरूर हैं, लेकिन हम में से कोई अकेला नहीं है। 130 करोड़ देशवासियों की सामूहिक शक्ति हर व्यक्ति के साथ है, हर व्यक्ति का।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही, राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उद्योगपतियों, मीडिया प्रमुखों से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत कर चुके है। उन्होंने इन सभी विभागों से मुसीबत की इस घड़ी में मदद का आग्रह किया था। इससे पहले 24 मार्च को रात आठे बजे देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 21 दिनों के संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की थी। मोदी ने तब कहा था कि विशेषज्ञों की सलाह पर लॉकडाउन किया जा रहा है। कोरोना से बचाव के लिए यही एकमात्र कठोर रास्ता बचा था।

दिल्ली दंगा: जामिया का छात्र गिरफ्तार, लालू यादव की पार्टी के स्टूडेंट विंग का प्रदेश अध्यक्ष है मीरान हैदर

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में पुलिस ने कल (मार्च 2, 2020) जामिया मिलिया इस्लामिया के एक पीएचडी छात्र को गिरफ्तार किया है। उसकी पहचान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की छात्र इकाई के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मीरान हैदर के रूप में हुई। उस पर दंगों की साजिश रचने का आरोप है। वह मूल रूप से बिहार के सीवान का रहने वाला है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित संबंधित खबर

अधिकारियों ने बताया कि बुधवार सुबह दस बजे हैदर को पुलिस की स्पेशल सेल ने पूछताछ के लिए लोधी कॉलोनी स्थित कार्यालय बुलाया था। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने मीरान के बचाव में ट्वीट किया। उन्होंने लिखा ”दिल्ली पुलिस ने उसे जाँच के लिए बुलाया था, लेकिन ऊपर से आदेश आने के बाद मीरान हैदर को गिरफ्तार कर लिया गया जो कोरोना वायरस महामारी के समय लोगों की मदद कर रहा था। बात बिलकुल साफ है।”

राजद की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र शाखा ने भी हैदर की रिहाई की माँग की है और पुलिस के इस एक्शन को भयभीत करने वाला बताया है। उनका कहना है कि पुलिस को जनता का मित्र बनना चाहिए ना कि उन्हें भयभीत करने वाला। पुलिस ने बताया है कि हैदर के खिलाफ दंगों को भड़काने और साजिश के सबूत मिले हैं।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक, स्पेशल सेल के मुताबिक, फरवरी माह में हुए दिल्ली दंगों में पुलिस टीम लंबे समय से छानबीन कर रही थी। इसे लेकर क्राइम ब्रांच ने एक मामला भी दर्ज किया था, जिसकी जाँच बाद में स्पेशल सेल को सौंप दी गई थी। स्पेशल सेल ने छानबीन के दौरान जामिया से पीएचडी कर रहे छात्र मीरान को नोटिस देकर बुधवार को पूछताछ के लिए बुलाया था। इस नोटिस पर पूछताछ के लिए वह लोधी कॉलोनी स्थित स्पेशल सेल के दफ्तर में पहुँचा। जहाँ पड़ताल के बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी कर ली। अफसरों का कहना है मीरान के खिलाफ दंगे की साजिश रचने के अहम साक्ष्य मिले हैं, जिसके बाद ही उसकी गिरफ्तारी की गई है।

मीरान हैदर पर आरोप है कि मीरान हैदर ने शाहीन बाग, जामिया व अन्य जगहों पर चले विरोध प्रदर्शन के दौरान बढ़-चढ़कर न सिर्फ हिस्सा लिया, बल्कि लोगों को उकसाया। सेल के मुताबिक, मीरान के साथ दंगों में आरोपी कई अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी जल्द ही हो सकती है।

गौरतलब है कि 24-25 फरवरी को हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों में 50 से अधिक लोगों की जान गई थी व सैकड़ों घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने हिंसा के संबंध में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। सबसे सुर्खियों में रहा नाम आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन का है। वह फिलहाल जेल में बंद हैं। उस पर इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की निर्मम हत्या की साजिश रचने का भी आरोप है।

क्वारंटाइन में नर्सों के सामने नंगा होने वाले जमात के 6 लोगों पर FIR, दूसरी जगह शिफ्ट किए गए

गाजियाबाद के एमएमजी अस्पताल में नर्सों के साथ बदतमीजी करने के मामले में तबलीगी जमात के 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इन्हें एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में शिफ्ट कर दिया गया है।

बता दें कि गुरुवार (अप्रैल 2, 2020) शाम सीएमओ ने जिले के डीएम से एमएमजी हॉस्पिटल में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती तबलीगी जमात के लोगों द्वारा नर्सों से बदतमीजी करने की शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँच कर जाँच की थी। सीएमओ ने शिकायत में बताया कि क्वारंटाइन में रखे गए तबलीगी जमात के लोग बिना पैंट के घूम रहे हैं। नर्सों को देखकर भद्दे इशारे करते हैं। बीड़ी और सिगरेट की डिमांड करते हैं। 

मामले की शिकायत मिलते ही डीएम ने जाँच के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन 6 लोगों को एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में शिफ्ट किया गया है। गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि चीफ मेडिकल सुप्रीटेंडेंट द्वारा एक पत्र मिला, जिसमें आरोप लगाया गया कि अस्पताल (एमएमजी जिला अस्पताल) के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीज अस्पताल के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे।

जिसके बाद उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 294, 509, 269, 272 और 271 के तहत FIR दर्ज की गई है। साथ ही मामले में निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

इससे पहले दिल्ली में कई जमाती बुधवार को बसों में बैठते वक्त पुलिस-सरकारी कर्मचारियों के ऊपर थूक रहे थे। निजामुद्दीन स्थित मरकज की इमारत से बुधवार सुबह तक दो हजार से ज्यादा जमातियों को बाहर निकाला गया था। एलएनजीपी हॉस्पिटल भी इनकी मनमानियों से परेशान है। जॉंच में सहयोग नहीं करने पर अस्पताल में पुलिस की तैनाती करनी पड़ी थी।

टेस्टिंग, ट्रेसिंग, आइसोलेटिंग और क्वारन्टाइन हमारी प्राथमिकता: PM मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार (2 अप्रैल 2020) को मुख्यमंत्रियों के साथ हुई दूसरी वीडियो कॉन्फ्रेन्स में लॉकडाउन की समाप्ति के बाद अपनाई जाने वाली साझा रणनीति पर चर्चा की। इसका मकसद लॉकडाउन खत्म होने पर सामान्य कामकाज में किसी तरह की देरी न हो यह सुनिश्चित करना था। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रत्येक भारतीय के जीवन की रक्षा को सभी सरकारों का साझा लक्ष्य बताया।

मीडिया के अनुसार मोदी ने अगले कुछ हफ्तों के लिए ‘टेस्टिंग, ट्रेसिंग, आइसोलेटिंग और क्वारन्टाइन’ को सभी की पहली प्राथमिकता करार दिया। इसके लिए सभी जिला स्तर तक समन्वय बना कर काम करने की जरूरत बताई। मोदी ने कहा, “सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए अलग से अस्पताल की व्यवस्था हो। इलाज करने वाले डॉक्टरों की सुरक्षा के उपाय किए जाएँ। मैं आप सबसे यह भी निवेदन करता हूँ कि COVID-19 के उपचार के संबंध में डॉक्टरों के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग की सुविधा भी प्रदान की जाए।”

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों से इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार कदमों जैसे पारम्परिक औषधियों के उपयोग पर जोर देने को कहा। उन्होंने आयुर्वेद तथा इस संदर्भ में आयुष मंत्रालय द्वारा जारी की गईं गाइडलाइन्स का जिक्र करते हुए इनके पालन की सलाह दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज के एक अन्य महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम में गृह मंत्रालय ने बताया कि निजामुद्दीन मरकज में शामिल हुए तबलीगी जमात के 9000 सदस्यों और उनके संपर्कों की पहचान कर ली गई है जिन्हें क्वारन्टाइन में रखा गया है। साथ ही सरकार ने कोरोना महामारी के लिए हॉटस्पॉट बन चुके इस तबलीगी जमात के 960 विदेशी सदस्यों का वीजा भी कैंसिल कर दिया है।

अब तक देश में कोरोना पॉजिटिव के जितने मामलों की पुष्टि हुई है उनमें से 20 फीसदी तबलीगी जमात से संबंधित बताए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने गुरुवार को प्रेस से बातचीत में जानकारी दी कि अभी तक जमात के जिन कार्यकर्ताओं और उनसे कांटेक्ट में आए लोगों की पहचान हो पाई है उनकी कुल संख्या 9000 है। इनमें 1306 विदेशी और बाकी हैं।