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भारत में 25 करोड़ लोगों को होगा कोरोना: NDTV ने जिस यूनिवर्सिटी के हवाले से चलाई ख़बर, उसी ने लगाई फटकार

आजकल लोगों को डराने का चलन चल निकला है। कई चैनलों पर फर्जी एपिडोमिलोजिस्ट बैठ कर ज्ञान दे रहे हैं। कोई कह रहा है कि भारत में इतने हजार लोग मर जाएँगे तो कई इसे लाख में बता रहे हैं। ‘फियर-मोंगरिंग’ कर के लोगों को डराया जा रहा है, बजाए उन्हें सावधान करने के। इसी क्रम में एनडीटीवी ने भी अपने हाथ धोए। NDTV ने लोगों को डराने के लिए एक विदेशी यूनिवर्सिटी का ‘अध्ययन’ क्रिएट किया और फिर उसे ख़बर की शक्ल दे दी। बाद में चोरी पकड़ी गई तो उसे ये ख़बर हटानी पड़ी।

दरअसल, एनडीटीवी ने एक ख़बर चलाई, जिसमें कहा गया कि अगले तीन महीने में भारत में कोविड-19 के 25 करोड़ मामले आ सकते हैं। चैनल द्वारा दिए गए आँकड़ों की मानें तो देश की 20% जनता कोरोना वायरस से पीड़ित होगी। बकौल प्रोपेगेंडा मीडिया संस्थान एनडीटीवी, ये आँकड़े जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अध्ययन में सामने आए हैं। ऐसे ‘अध्ययन’ का हवाला दिया गया, जिसे करने वाले को ही इसके बारे में कुछ पता नहीं था। एनडीटीवी ने यूनिवर्सिटी के हवाले से लिखा कि अप्रैल-मई तक ऐसी तबाही आएगी। उसने बताया कि इस अध्ययन में एक स्वास्थ्य रिसर्च संस्था CDDEP भी शामिल है।

इस ख़बर के सामने आने के बाद जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने इसे नकार दिया। अमेरिका के मेरीलैंड में स्थित यूनिवर्सिटी ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि उसने ऐसा कोई रिसर्च प्रकाशित नहीं किया है। यूनिवर्सिटी ने लिखा कि इस कथित ‘रिसर्च’ में उसके लोगो और नाम का भी ग़लत इस्तेमाल किया गया है। लोगों ने ट्विटर पर जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी से इस बारे में पूछा था, जिसके बाद उसने ये स्पष्टीकरण दिया। लोगों ने यूनिवर्सिटी को टैग कर के पूछा था कि ये ‘रिसर्च’ भारत में खूब वायरल हो रहा है, क्या ये यूनिवर्सिटी के छात्रों का है? लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसे स्पष्ट तौर पर नकार दिया।

बाद में पोल खुलने पर एनडीटीवी ने इस ख़बर को डिलीट कर दिया और ट्विटर पर बताया कि उसने जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण के बाद इस ख़बर को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। साथ ही प्रोपेगंडा पोर्टल ने इसके लिए अप्रत्यक्ष रूप से न्यूज़ एजेंसी IANS को दोष दिया और कहा कि ये ख़बर उसकी ही थी और ग़लत साबित होने के बाद इसे हटा दिया गया है। हालाँकि, ये पहले बार नहीं है जब एनडीटीवी इस तरह की हरकत करते धराया हो।

मेथनॉल पीने से मर जाता है कोरोना वायरस! 300 मरे-1000 बीमार, 5 साल के बच्चे की आँखों की रोशनी गई

ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है जो कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। लेकिन, इस इस्लामिक मुल्क में लड़ाई दोहरी है। एक तरफ खतरनाक वायरस का संक्रमण और दूसरी ओर आग की तेजी से फैलते अफवाह। ये अफवाह भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। असल में ईरान में लोगों के बीच यह बात फैल गई कि मेथनॉल (इंडस्ट्रियल अल्कोहल) पीने से कोरोना संक्रमण का इलाज हो सकता है। इसके सेवन से कोरोना के वायरस मर जाते हैं। बॉडी सैनिटाइज हो जाती है। इस अफवाह पर विश्वास कर कई लोगों ने जहरीली शराब का सेवन कर लिया। इसके कारण अब तक 300 लोग अपनी जान गँवा बैठे हैं, जबकि एक हजार से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं।

इसमें एक पाँच साल का बच्चा भी शामिल है। उसकी आँखों की रोशनी चली गई है। उसे माता-पिता ने जबरन मेथनॉल पिला दिया था। शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को ईरान में संक्रमण के 2926 नए मामले आए। 144 और मौतों के साथ मृतकों का आँकड़ा 2378 हो गया है। अब तक 32,300 लोगों के संक्रमित होने की खबर है।

बता दें कि ईरान में शराब पीना बैन है और लोग अवैध तरीके से इसे ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह अफवाह ऐसे समय में फैल गई जब लोगों का सरकार पर से भरोसा कम होता जा रहा है। दरअसल, सरकार ने पहले कोरोना के हालात को कम गंभीर दिखाने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे हालात खराब होते चले गए। ओस्लो के क्लिनिकल टॉक्सिकॉलजिस्ट डॉ. नूट एरिक होवडा का कहना है कि वायरस से लोग मर रहे हैं और उन्हें यह भी नहीं पता कि इसके अलावा दूसरे खतरे भी उनके आस-पास हैं। उनका कहना है कि लोग अगर ऐसे ही पीते रहे तो और लोगों के बीच यह जहर फैल जाएगा।

वहीं ईरान के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के सलाहकार डॉक्‍टर हुसैन हसनैन ने कहा कि दूसरे देशों में बस कोरोना वायरस महामारी ही अकेली समस्‍या है। मगर यहाँ सरकार को दो मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है। उन्‍होंने बताया कि शराब पीकर आने वाले लोगों का इलाज भी करना है और फिर कोरोना से भी उन्‍हें बचाना है। हसनैन ने बताया कि दुर्भाग्‍य से कुछ प्रांतों मे मेथनॉल पीने से मरने वाले लोगों की संख्‍या में इजाफा हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक ईरान में सोशल मीडिया पर यह मैसेज फॉरवर्ड किया गया कि एक ब्रिटिश स्कूल टीचर और दूसरों ने ह्विस्की और शहद से कोरोना वायरस को ठीक कर लिया। अल्कोहल बेस्ड हैंड-सैनिटाइजर्स के मैसेज से भी लोगों ने यह अंदाजा लगा लिया कि अल्कोहल पीने से उनके शरीर के अंदर का वायरस मर जाएगा। वायरस का डर पहले ही था अब कम शिक्षा के कारण इंटरनेट पर उड़ रही अफवाहों के चलते दर्जनों ने ईरान के खुजेस्तान और शिराज में मेथनॉल युक्त अल्कोहल पीना शुरू कर दिया जो किसी जहर से कम नहीं।

50 लोगों को जमा कर छत पर पढ़वा रहा था जुमे की नमाज, UP पुलिस ने सगे भाइयों दीन और आस को किया गिरफ्तार

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश भर में जारी लॉकडाउन के कारण सभी धर्मस्थलों को बंद कर दिया गया है। किसी को भी धार्मिक आयोजन करने की अनुमति नहीं है। मुस्लिम समुदाय से भी जुमे की नमाज घर पर ही पढ़ने के लिए कहा गया है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इसे लेकर ऐलान किया था। हालाँकि कुछ जगहों पर इसका पालन भी हुआ, लेकिन कुछ लोगों ने गुपचुप तरीके से सामूहिक नमाज भी पढ़ी।

ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के परतापुर क्षेत्र के डूंगरावली में देखने को मिला, जहाँ दो भाइयों ने अपने घर की छत पर 50 लोगों को सामूहिक नमाज पढ़वाई। इसकी सूचना गाँव वालों ने पुलिस को दी। पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।

जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

बता दें कि गाँव के दो सगे भाइयों दीन मोहम्मद और आस मोहम्मद ने जुमे की नमाज के लिए लोगों को अपनी छत पर इकट्ठा किया था। थाना प्रभारी आनंद प्रकाश मिश्रा के मुताबिक इसके लिए गाँव वालों ने मना भी किया था। इस पर दोनों भाइयों की गाँव वालों के साथ बहस हो गई और फिर ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। 

सूचना पर पहुँची पुलिस को देखकर नमाज पढ़ रहे लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई लोग छत से लटककर कूद गए। पुलिस ने दोनों भाई दीन और आस मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए दोनों भाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

गौरतलब है कि मेरठ में बुधवार (मार्च 25, 2020) को भी 200 लोगों को नमाज पढ़ा रहे मौलाना के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। डाबका गाँव में बुधवार को मौलाना एक साथ दो सौ लोगों को नमाज पढ़ा रहे थे। बुधवार को गाँव के मस्जिद में करीब 200 लोग नमाज पढ़ने के लिए पहुंँच गए। कुछ क्षेत्रवासियों ग्रामीणों और बुजुर्गो ने इसका विरोध भी किया, लेकिन लोग नहीं माने। जिसके बाद गाँव के ही कुछ लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। मौके पर पहुँचे इंस्पेक्टर ने मौलाना सलीम, सुलेमान और मोहम्मद शहजाद को गिरफ्तार कर लिया।

इसके अलावा पुलिस ने हरदोई पाली कस्बे के काजीसराय उत्तरी मोहल्ले की मस्जिद में सामूहिक नमाज पढ़ने पर पुलिस ने 20 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। वहीं भावनपुर स्थित जामा मस्जिद में मौलाना जियाउल हक ने नमाज अदा करवाई। जिसके बाद पुलिस ने मौलना के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके साथ ही मुजफ्फरनगर के पुरकाजी व सिसौली की मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा करने के आरोप में मौलाना समेत 36 लोगों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। 

रामपुर के टांडा नगर में नमाज अदा करने के लिए एकत्रित हुए लोगों का पुलिस ने पाँच-पाँच सौ का चालान काटा। इधर अमरोहा के हसनपुर में मस्जिद में सामूहिक नमाज पढ़ने के मामले में पुलिस ने इमाम समेत 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं बदायूँ की मस्जिद में शुक्रवार को सामूहिक नमाज अदा करने को लेकर 16 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई और साथ ही मस्जिद के इमाम दीदार शाह को हिरासत में लिया गया, क्योंकि इमाम ने ही मस्जिद खोलकर नमाज अदा करवाई थी।

1000 स्पेशल बसों के साथ घर तक पहुँचाने का फैसला: बिहार-UP के मजदूरों के लिए ‘मसीहा’ बने CM योगी

कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण सैकड़ों-हजारों प्रवासी अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हैं। ट्रेन और बसें बंद होने से इन प्रवासियों के सामने भूखे-प्यासे पैदल ही अपने घरों की ओर लौटने की मजबूरी है। इनमें से ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। लिहाजा अब इन असहाय लोगों की मदद के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार ने अहम कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पैदल अपने घर को पलायन होने वाले मजदूरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने सभी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए 1000 बसों से मजदूरों को उनके घर भेजने का निर्णय किया है। 

मजदूरों की सुरक्षा को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात में मीटिंग कर मजदूर हित में यह बड़ा फैसला लिया है। बस का इंतजाम नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ समेत कई अन्य जिलों में किया गया, जहाँ से मजदूर पलायन कर सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस बड़े फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग अपने अपने घर तक पहुँच सकेंगे।

सीएम योगी की मीटिंग के बाद रातों रात घरों से जगाकर परिवहन अधिकारियों को बुलाया गया। फिर ड्राइवर और कंडक्टरों के साथ रातों रात 1000 बसों का इंतजाम किया गया। कोरोना वायरस महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में आमजन की सुविधा के लिए की जा रही व्यवस्थाओं को बिती रात को सीएम योगी ने सतत समीक्षा की। इस क्रम में उन्होंने मंडलायुक्तों/जिलाधिकारियों/पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर कई दिशा-निर्देश दिए। बता दें कि बसें पूरी तरह से निशुल्क भेजी जा रही है। प्रशासन द्वारा बसों के भेजने पर यात्री भी काफी खुश हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इन आश्रय स्थलों में भारत सरकार के स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे मजदूरों और व्यक्तियों को भोजन, दवा तथा अन्य जरूरी सुविधाओं की कोई कमी न हो। इस मद में समस्त 75 जनपदों को कुल 13.50 करोड़ की धनराशि निर्गत की गई है। मुख्यमंत्री ने दूसरे प्रदेश या जनपदों से मजदूरों अथवा अन्य जनों की आवाजाही की सूचना के दृष्टिगत समस्त जनपदों को आश्रय स्थल/स्क्रीनिंग कैम्प स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा फँसे हुए लोगों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। इस नंबर के जरिए लोग अपनी मुसीबत को बता सकेंगे।

पूरी दुनिया में कंडोम की कमी, सप्लाई में 50% तक की गिरावट: सिर्फ 2 महीने तक का और बचा है भंडार

जब पूरी दुनिया कोरोना की महामारी से जूझ रही है, तो इसी बीच कंडोम की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी ने वैश्विक कमी की चेतावनी दी है। कंपनी का कहना है कि आपूर्ति में लगभग 50% की गिरावट आई है, जबकि इसका भंडार केवल दो महीने तक और चल सकता है।

मलेशिया स्थित कंपनी कैरेक्स, जो दुनिया भर में हर पाँच में से एक कंडोम बनाती है, ने एक सप्ताह तक लगातार बंद होने के बाद शुक्रवार को अपने कारखानों को फिर से चालू कर दिया है। वहीं कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का पालन करते हुए कंपनी मात्र आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। कंपनी ने कहा कि कंडोम मुख्य रूप से चीन और भारत में बनाए जाते हैं, जबकि दोनों ही देश महामारी से बुरी तरह से जूझ रहे हैं।

इस बीच कंडोम की माँग बढ़कर दहाई में पहुँच रही है, क्योंकि दुनिया भर की सरकारें लॉकडाउन घोषित कर लोगों को घरों में रहने के निर्देश दे रही है। ऐसे में लोग घरों में रहकर भविष्य के ताने बाने में और अधिक बच्चे पैदा करने से परहेज कर रहे हैं।

दरअसल यह कंपनी ड्यूरेक्स जैसे ब्रांडों के लिए उत्पादन करती है और साथ ही ड्यूरियन-फ्लेवर्ड वाले अपने खुद के विशेष कंडोम का भी उत्पादन करती है। वहीं यह कंपनी प्रति वर्ष 5 बिलियन से अधिक कंडोम का उत्पादन करती है और उन्हें 140 से अधिक देशों को निर्यात करती है। अब यह और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि सरकारें अपने देशों की सीमाओं को बंद कर रही हैं, साथ ही विभिन्न एयरलाइंस जहाजों की उड़ानें रद्द कर रही हैं।

गोह ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा, “मैं निश्चित रूप से कहूँगा कि यह एक अभूतपूर्व स्टेज है क्योंकि हमने कभी इस तरह की मुश्किल पहले नहीं देखी। कंडोम और भी महँगा हो सकता है। हम अभी भी अपने सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन दे रहे हैं, जबकि कंपनी के कर्मचारी केवल आधे समय ही काम कर रहे हैं। इसलिए आगामी समय में कंडोम की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।”

कोरोना संकट के लिए अजीम प्रेमजी ने दिया ₹50000 करोड़? लोगों ने इसमें भी ढूँढ लिया हिंदू-मुस्लिम – Fact Check

कोरोना वायरस संकट के बीच शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को सोशल मीडिया पर खबर उड़ी कि विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी ने बड़ी रकम चैरिटी के लिए दी है। दावा किया गया कि उन्होंने कोरोना महामारी के लिए 50 हजार करोड़ रुपए चैरिटी में दिए हैं। इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी ऐसी ही बात कही गई। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर काफी खबरें फैलीं। सोशल मीडिया पर अजीम प्रेमजी की तारीफ की गई। इसके अलावा अजीम प्रेमजी के दान को लेकर लोग कुछ लोग धर्म के नाम पर राजनीति करने से भी बाज नहीं आए। अशोक स्वैन ने लिखा कि अभी तक ‘हिंदू’ अरबपति अंबानी और अडाणी ने दान क्यों नहीं दिया। इसके लिए इससे बेहतर समय और क्या हो सकता है?

अशोक स्वैन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

सच क्या है? 

अजीम प्रेमजी ने 50 हजार करोड़ रुपए का दान किया है लेकिन क्या यह कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई के लिए दिया गया? उनकी कंपनी से जब इस वायरल दावे के बारे में पूछा गया तो जवाब ‘नहीं’ में था। CNBC-TV18 से बातचीत में विप्रो ने कहा, “यह ऐलान मार्च 2019 में हुआ था। आज ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।” करीब एक साल पहले मार्च 2019 में जब अजीम विप्रो के चेयरमैन थे, तो उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के लिए 52750 करोड़ रुपए दान किया था। उन्होंने विप्रो में अपनी हिस्सेदारी का 34 पर्सेंट दान करने का फैसला किया था। CNBC-TV18 पर यह खबर 14 मार्च 2019 को प्रकाशित हुई थी। प्रेमजी फाउंडेशन ने कहा कि प्रेमजी के दान का कुल मूल्य उस समय 1.45 लाख करोड़ रुपए था, जिसमें विप्रो का 67 प्रतिशत आर्थिक स्वामित्व शामिल था।

2019 में किए गए इस दान को लोग अभी फिर से रिपोर्ट कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इसी लगभग एक साल पुरानी खबर को शेयर किया जा रहा है। अशोक स्वैन ने भी इसी एक साल पुरानी खबर को शेयर करके अंबानी और अडाणी पर निशाना साधा है। बता दें कि अपनी माँ के सामाजिक कार्यों एवं चैरिटेबल कामकाज से प्रेरित होकर प्रेमजी ने 2001 में अपनी दान यात्रा शुरू की थी। उन्होंने 875 करोड़ रुपए के साथ ‘द अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ की शुरुआत की थी।

इससे पहले 22 मार्च को प्रेमजी ने टि्वटर संदेश के जरिए देशवासियों से अपील की थी, “मैं आप सभी से कहना चाहता हूँ कि आप सभी सुरक्षित रहें। आप सभी एक्सपर्ट्स और सरकार के प्रयासों का सहयोग करें। हम सभी इस संकट (कोरोना) में फँसे हैं। आप अपने आप का, परिवार व दोस्तों का और आसपास के लोगों का ख्याल रखें।”

दूरदर्शन पर रामायण का पहला एपिसोड: वामपंथियों की गाली के बीच वेबसाइट क्रैश, गूगल-ट्विटर पर टॉप ट्रेंड

देश में जारी 21 दिनों के लॉकडाउन के बीच जनता की माँग पर दूरदर्शन ने शनिवार से रामायण और महाभारत को प्रसारित कर लोगों का मनोरंजन करने का फैसला किया। रामानंद सागर की ‘रामायण’ और बी आर चोपड़ा निर्देशित ‘महाभारत’ को भला कोई भूल सकता है! 80 के दशक के आखिर में इस सीरियल ने सफलता की जो इबारत लिखी, वह ऐतिहासिक साबित हुआ। टीवी की दुनिया में वैसा जादू फिर से दोहराया न जा सका। शनिवार को बेहद लोकप्रिय टीवी सीरियल ने दूरदर्शन पर वापसी की और रामायण का पहला एपिसोड आज सुबह 9 बजे प्रसारित किया गया।

गूगल टॉप सर्च

जैसे ही रामायण का पहला एपिसोड शुरू हुआ, लोगों ने गूगल पर रामानंद सागर की रामायण सर्च करना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से यह गूगल में टॉप सर्च में आ गया। दरअसल लोग यह जानने को काफी उत्सुक थे कि इसका प्रसारण कब शुरू होगा और वो इसे ऑनलाइन कैसे देख पाएँगे। इसके लिए लोग लगातार ऑनलाइन लिंक सर्च कर रहे थे।

ट्विटर ट्रेंड्स
ट्विटर ट्रेंड्स

बता दें कि सिर्फ गूगल पर ही नहीं, बल्कि सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर भी टॉप 10 ट्रेंड में रामायण, रामानंद सागर और दूरदर्शन से संबंधित चीजें ही शामिल रहीं।

उल्लेखनीय है कि रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण साल 1987 में पहली बार दूरदर्शन पर हुआ था। वहीं बीआर चोपड़ा की महाभारत का प्रसारण भी साल 1988 में पहली बार दूरदर्शन पर हुआ था।  रामायण और महाभारत को लोग इतने चाव से देखते थे कि सड़कों पर एकदम सन्नाटा होता था। इन धार्मिक कार्यक्रमों के प्रसारण के वक्त बाहर सड़कों का माहौल एकदम कर्फ्यू की तरह ही होता था।

1987-88 में रामायण और महाभारत को लोग बड़े ही चाव से देखते थे। कहा जाता है कि उस दौर में अफसर से लेकर नेता तक किसी से मिलना तो क्या किसी का फोन भी उठाना पसंद नहीं करते थे। 78 एपिसोड वाले रामायण का प्रसारण जब होता था, तो देश की सड़कों और गलियों में कर्फ्यू जैसा सन्नाटा छा जाता था। भारत के तमाम शहरों और गाँवों में रामायण के टेलीकास्ट के समय लोग अगरबत्ती जलाकर बैठा करते थे। चप्पलें कमरे के बाहर उतार दी जाती थीं। 

लिबरल ब्रीड को रामायण-महाभारत में दिख रहा हिंदुत्व और गुंडागर्दी, हिन्दूघृणा की उलटी में नहा रहे

…जब इलाके में मास्क की कमी हुई तो सिलाई मशीन लेकर खुद मास्क बनाने जुट गईं BJP विधायक कमलेश

कोरोना की महामारी से पूरा विश्व जूझ रहा है। वहीं भारत में घोषित लॉकडाउन के बाद हर कोई कोरोना के खिलाफ जंग छेड़े हुए है। यही कारण है कि हर एक भारतीय नागरिक किसी न किसी तरह इस लड़ाई में भारत सरकार की मदद करना चाहता है। कोई अपने घरों में रहकर तो कोई अपनी जान की परवाह किए बिना घरों से बाहर निकलकर। कुछ ऐसा ही और दूसरों को भी प्रेरणा देने वाली तस्वीर देश के छोटे से राज्य हिमाचल प्रदेश से आई, जहाँ देश में घोषित लॉकडाउन के बीच मास्क की कमी होने पर हिमाचल की एक महिला विधायक घर में ही सिलाई मशीन लेकर मास्क बनाने में जुट गईं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद देश का हर एक नागरिक कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने के लिए तैयार है। इसी का परिणाम हिमाचल प्रदेश में देखने को मिला। दरअसल हिमाचल प्रदेश के भोरंज विधानसभा से कमलेश कुमारी विधायक हैं, जोकि इन दिनों लॉकडाउन के बीच अपने घर पर ही सिलाई मशीन से लोगों के लिए मास्क बनाने में जुटी हुई हैं। कमलेश कुमारी बताती हैं कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद हर कोई घर में सेनेटाइजर लाने के लिए और मुँह पर मास्क लगाने के लिए बाजारों में भीड़ लगाए हुए था। इसी बीच बाजार से मास्क समाप्त हो गए। मैंने देखा कि इलाके के अधिकांश लोग बिना मास्क लगाए ही घूम रहे थे।

कमलेश आगे बताती हैं कि जब वो मास्क के बिना लोगों को बाहर घूमते देखीं तो मन बनाया कि इनके लिए घर पर ही मास्क बनाएँगी और इसी के साथ वो अपने काम में जुट गईं। जैसे-जैसे वो मास्क बनाती गईं, वैसे-वैसे पास के पुलिस प्रशासन और क्षेत्र की जनता को बाँटती भी गईं। साथ ही महिला विधायक अपने प्रयासों से लोगों को सेनेटाइजर भी उपलब्ध करवा रही हैं। इसके बाद भी बहुत से लोगों के पास मास्क नहीं हैं, जिस पर विधायक ने समाजसेवियों और सामाजिक संस्थाओं से आह्वान किया कि वह सरकार की अपील का पालन करें और कोरोना के खिलाफ इस जंग में लोगों की हर संभव मदद करें। वहीं महिला विधायक को घर में लोगों के लिए मास्क बनाता देख बहुत से लोग प्रेरणा ले रहे हैं और अपने बचाव के लिए खुद ही मास्क बना रहे हैं।

भाजपा विधायक कमलेश कुमारी ने कहा कि एक भूल के कारण पूरा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है। ऐसे समय में हमें सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लॉकडाउन को दौरान अपने घरों में ही रहना चाहिए। इस समय यही सहयोग सबसे बड़ी देशभक्ति होगी। साथ ही इस महामारी से घबराकर भाग-दौड़ कर रहे लोगों से उन्होंने कहा कि वह धैर्य रखें और अफवाहों पर ध्यान न देकर पुलिस-प्रशासन का सहयोग करें। इतना ही नहीं महिला विधायक ने एक माह का वेतन भी राहत कोष को दिया है। आपको बता दें कि विधायक कमलेश कुमारी जिला परिषद सदस्य और पंचायत प्रधान भी रह चुकी हैं। 

कोरोना+ आदमी, परिवार में 32 लोग, 12 दिन तक मस्जिद में नमाज: संपर्क में आए हजारों लोग की खोज में प्रशासन

21 दिन के लॉकडाउन के बीच गुरुवार (मार्च 26, 2020) को जयपुर में एक नया कोरोना पॉजिटिव केस सामने आया। जिसके बाद शुक्रवार (मार्च 27, 2020) शाम से रामगंज इलाके में रहमानिया मस्जिद से एक किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू लगा दिया गया, क्योंकि वो वहाँ पर नमाज पढ़ने जाया करता था। इस संबंध में डीसीपी नार्थ डॉ राजीव पचार ने आदेश जारी किए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम सात थानों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। जिसमें सुभाष चौक, रामगंज, कोतवाली, माणकचौक, ब्रह्मपुरी, नाहरगढ़ व गलता गेट इलाके शामिल हैं।

बता दें कि रामगंज में पॉजिटिव केस सामने आने के बाद जयपुर में संक्रमित लोगों का आँकड़ा 9 के करीब पहुँच गया, जबकि राज्य में लगभग 50 लोग संक्रमित पाए गए हैं। रामगंज से पीड़ित व्यक्ति की पत्नी व बच्चों सहित करीब 32 जनों को एक बस में बैठाकर आईशोलेट करने के लिए एसएमएस और प्रताप नगर के आरयूएचएस अस्पताल भेज दिया गया। रामगंज का रहने वाला यह 45 वर्षीय मरीज 12 मार्च को ओमान से भारत आया था। खाँसी व बुखार के लक्षण मिलने के बाद 24 मार्च को एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आइसोलेशन में शिफ्ट गिया गया।

रामगंज में इस केस सामने आने के बाद यहाँ आवाजाही बंद कर दी गई है। अब बड़ी चौपड़ से रामगंज की तरफ रास्ता बंद कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अजयपाल लांबा व डीसीपी डॉ राजीव पचार सहित जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँचे। तब करीब तीन घंटे चली मीटिंग के बाद देर रात 12 बजे कर्फ्यू की घोषणा कर दी गई।

ओमान से लौटने के बाद सीएमएचओ और मेडिकल टीम ने इस व्यक्ति को क्वारंटाइन में रहने के लिए कहा था। लेकिन, वह न केवल परिजनों और खुद के बच्चों से मिलता रहा, बल्कि दोस्तों और रिश्तेदारों से भी मिला। यहाँ तक कि नमाज पढ़ने रहमानिया मस्जिद भी गया। यहाँ नमाज पढ़कर कई लोगों से मिला। लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि गुरुवार को उसके कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उसके संपर्क में आए 200 से ज्यादा लोग दहशत में आ गए। इसके अलावा पूरा प्रशासन और सरकार सकते में आ गई है कि परिवार के 32 लोग जिन हजारों लोगों से मिले, उन्हें कहाँ और कैसे ढूँढा जाए। 

पुलिस उन लोगों को ढूँढ़ने की पूरी कोशिश कर रही है, जो इस परिवार के 32 लोगों के संपर्क में आए थे। इसी बीच जयपुर में शुक्रवार को सामने आए एक 50 वर्षीय कोरोना मरीज ने खुद को ओमान से लौटा 45 वर्षीय कोरोना मरीज का दोस्त बताया है। उसने डॉक्टरों को बताया कि उसका दोस्त (ओमान से आए कोरोना पॉजिटिव) ने उसे बताया था कि उसकी जाँच हो चुकी है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। इसलिए वो उससे मिलने चला गया। उसने बताया कि वो ओमान से आए कोरोना पॉजिटिव मरीज दोस्त से 3-4 बार मिला था, क्योंकि उसने कहा था कि वो बिल्कुल ठीक है, उसके रिपोर्ट नॉर्मल हैं।

इधर पुलिस कोरोना पॉजिटिव मरीज के मोबाइल की कॉल डिटेल व लोकेशन के आधार पर संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के बारे में पता लगा रही है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील भी की है कि अगर किसी व्यक्ति ने संक्रमित से मुलाकात की हो, तो प्रशासन को सूचना जरूर दे। इन दिनों कोरोना संक्रमण का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, इसे रोकने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है और बार-बार लोगों से अपील कर रही है कि वो घरों में रहें और विदेश से आने के बाद 14 दिन तक आइसोलेशन में रहें, लेकिन यहाँ पिछले 3 दिनों से लॉकडाउन होने के बाद भी नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही थी। लोग बेपरवाह होकर सड़कों पर निकल रहे थे। सब्जी सामान राशन की दुकानों पर भीड़ लगी हुई थी।

बहरहाल 45 साल के इस व्यक्ति ने चिकित्सा विभाग का आदेश न मानकर पूरे शहर को खतरे में डाल दिया। ओमान से लौटने के बाद व्यक्ति को क्वारैंटाइन होना था, लेकिन वह दोस्तों से मिलता रहा, मस्जिद जाकर नमाज पढ़ता रहा और शहर में घूमता रहा। उसने दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह बस से जयपुर आया था। अब पुलिस बस में यात्रा करने वाले अन्य यात्रियों की तलाश में जुटी है।

दिल्ली में लॉकडाउन के बाद भुखमरी के डर से पैदल ही पलायन को मजबूर लोग, देखें वीडियो

कोरोना संक्रमण के चलते लागू देशव्यापी लॉकडाउन के बाद भी लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित नहीं हो सका है। आज समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें भारी संख्या में लोग दिल्ली-यूपी सीमा को गाजीपुर के पास क्रॉस करके, उत्तर प्रदेश में दाखिल होते देखे जा सकते हैं। जहाँ हैं वहीं बने रहने की, प्रधानमंत्री की अपील भी लोगों को रोक पाने में असफल हुई है।

ये पलायन कर रहे लोग भूखों मरने के डर से सैंकड़ों हजारों किलोमीटर पैदल चल कर भी अपने गाँव पहुँच जाना चाहते हैं। याद रहे कि महामारी से निपटने के लिए 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश में अगले 21 दिनों के लिए लॉकडाउन लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ उन्होंने सभी को अपने-अपने घरों में बने रहने और घरों की सीमाओं को ही लक्ष्मण रेखा मानने का निर्देश दिया था। इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी कहा है कि जो दिल्ली में हैं उन्हें कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है, हमने आज 2 लाख लोगों तक खाने के पैकेट्स पहुँचाए हैं, और कल के लिए हमने 4 लाख फूड पैकेट्स का लक्ष्य रखा है।

केजरीवाल ने उन लोगों से भी वापस आने की अपील जो दिल्ली से अपने अपने गाँवों की तरफ पलायन कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार लॉकडाउन ही कोरोना संक्रमण से लड़ने का सबसे प्रभावी उपाय है। लेकिन इस लॉकडाउन के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों का पैदल ही दिल्ली से अपने अपने जिलों के लिए चल देने का यह दृश्य न सिर्फ विचलित कर देने वाला है बल्कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के हमारे संकल्प को नुकसान पहुँचाने वाला हो सकता है।

याद रहे कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही सभी प्रदेश के बाहर रह रहे सभी प्रदेश वासियों से वहीं बने रहने की अपील आकर चुके हैं। साथ ही योगी ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर प्रदेश के लोगों के लिए समुचित व्यवस्था करने का भी निवेदन किया है।