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मोदी ने खाते में ₹1000 डाले हैं: अफवाह फैलते ही बैंक दौड़ीं महिलाएँ, समुदाय विशेष की जुटी भारी भीड़

दिल्ली के शाहीन बाग़ सहित पूरे देश में हुए सीएए विरोधी आन्दोलनों का लब्बोलुआब यही था कि कागज़ नहीं दिखाएँगे। लेकिन, कोरोना वायरस से उपजे ख़तरों के बीच सरकारी सहायता लेने के लिए लोग न सिर्फ़ लाइन में लगे हुए हैं, बल्कि कागज़ भी दिखा रहे हैं। मेरठ में अफवाह फैला दी गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के खाते में हज़ार रुपए डाले हैं। इसके बाद महिलाओं की भारी भीड़ मेरठ के कई बैंकों में पासबुक लेकर दौड़ी चली गई। बैंकों के बाहर भारी भीड़ जुट गई और महिलाओं की अधिकारी लगातार समझाते रहे। इनमें अधिकतर दूसरे मजहब महिलाएँ थीं, जिन्होंने हंगामा किया।

समुदाय विशेष के पुरुष भी अपने-अपने घर की महिलाओं को लेकर बैंक पहुँचे। महिलाएँ माँग कर रही थीं कि उनके पासबुक पर प्रिंट कर दिखाया जाए कि रुपए आए हैं या नहीं। बता दें कि भारत सरकार ने ऐलान किया है कि जिन महिलाओं के पास जन-धन अकाउंट हैं, उनके खाते में अगले तीन महीने तक 500 रुपए डाले जाएँगे, यानी कुल 1500 रुपए की सहायता मिलेगी। जबकि महिलाओं के बीच अफवाह फ़ैल गई कि 1000 रुपए मोदी ने उनके अकाउंट में डाल दिए हैं। फिर क्या था। सभी अपने-अपने रुपए निकालने के लिए बैंकों की ओर भागीं।

इन महिलाओं ने ‘इंडिया टीवी’ से बात करते हुए दावा किया कि मोदी ने उन्हें जो पैसे दिए हैं, उसे निकालने नहीं दिया जा रहा है। कई लोगों ने इस भीड़ को देख नोटबंदी के बाद बैंकों में लगी भीड़ को याद किया। मेरठ ही नहीं बल्कि अलीगढ़ में भी भीड़ जुटी। एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि अफरातफरी के माहौल के कारण लोग 100 रुपए भी निकाल के ले जा रहे हैं। सभी महिलाएँ पासबुक व अन्य कागज़ लेकर बैंक पहुँची हुई थीं। बैंक के अधिकारियों ने सरकार से सहायता की गुहार लगाई। अलीगढ़ में तो अफवाह के कारण नगर निगम और डीएम ऑफिस के बाहर भी लोग पहुँच गए।

आज की बात: देखें 9:35 के बाद (साभार: इंडिया टीवी)

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने महिलाओं को रुपए के लिए कतार में लगे देख कर उन पर तंज कसा। लोगों ने कहा कि कोई भी सरकारी सहायता तभी मिलेगी, जब सही कागज़ दिखाए जाएँगे। बता दें कि मोदी सरकार द्वारा जो वित्तीय मदद का ऐलान किया गया है, वो सभी लाभार्थियों के खाते में ‘डायरेक्ट ट्रांसफर’ के जरिए भेजा जाएगा।

बाराबंकी: मस्जिद में जबरन नमाज पढ़ने पर जान मोहम्मद, सलमान और रफी गिरफ्तार

देश भर में जारी लॉकडाउन के चलते लोगों को एक जगह इकट्ठा होने की अनुमति नहीं है। सभी धार्मिक स्थल बंद हैं। किसी भी धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद कुछ जगहों की मस्जिदों में जुमे की नमाज के लिए भीड़ देखी गई। पुलिस ने इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से। यहाँ पर सामूहिक नमाज पढ़ने को लेकर 35 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। तीन आरोपितों जान मोहम्मद, सलमान व मोहम्मद रफी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इंस्पेक्टर संजय मौर्य ने इसकी जानकारी दी। एसपी अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि थाना रामनगर के सत्तीनपुरवा मस्जिद में करीब 30-35 लोग जबरन घुस गए और नमाज अदा की। इसके लिए पहले ही प्रशासन के साथ ही सभी धर्मगुरुओं ने खुद मना किया था। इस मामले में पुलिस ने महामारी अधिनियम के अलावा आईपीसी की कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

इसी तरह अयोध्या में नमाज के लिए मस्जिद में भीड़ लगाने को लेकर आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मना करने के बावजूद मखदूमपुर गाँव के कुछ लोग समूह बनाकर मस्जिद के बाहर इकट्ठा थे। एसओ संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आठों व्यक्ति के खिलाफ धारा-3 महामारी अधिनियम 1897 व धारा-51 आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत धारा 269, 271 व 188 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। इसके अलावा मेरठ, अमरोहा, मजफ्फरनगर और बदायूँ समेत कई अन्य जिलों से इस तरह की खबरें सामने आई हैं।

गौरतलब है कि शुक्रवार को जुमे की नमाज को लेकर पुलिस-प्रशासन बीते कई दिन से अलर्ट थी। कोरोना के खौफ के बीच लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराना बड़ी चुनौती बना थी। आशंका थी कि एक ही जगह जमा होकर नमाज पढ़ने से कोरोना वायरस पैर पसार सकता है। इसको लेकर आला पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से भी अपील की थी। पुलिस-प्रशासन का सहयोग करते हुए मुस्लिम धर्म गुरुओं ने भी घरों में ही नमाज पढ़ने का आह्वान किया था। शुक्रवार को इसका कड़ाई से पालन कराने के लिए पुलिस-प्रशासन अलर्ट रहा। दिन भर पुलिस टीमें मस्जिदों व आसपास इलाकों में गश्त लगाती रही।

आप देवता हैं, सभी देशों को आप जैसा प्रधानमंत्री मिले: भावुक नर्स ने फोन पर PM मोदी को सराहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वायरस के खतरों के मद्देनज़र लगातार लोगों से सीधा संपर्क कर रहे हैं। सबसे पहले तो उन्होंने 2 बार राष्ट्र को सम्बोधित किया। उसके बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनका हालचाल जाना। कई डॉक्टरों और प्रोफ़सरों सहित विदेश से लौटे लोगों से भी पीएम ने संवाद किया। देश भर के कई रेडियो जॉकी से बात कर पीएम मोदी ने कोरोना को लेकर जागरूकता फैलाने की अपील की। इसका सकारात्मक असर भी हो रहा है और लोगों को ऐसा महसूस हो रहा है कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है।

इसी क्रम में पीएम मोदी ने एक नर्स से बात की और पूछा कि वो कोरोना मरीजों का डर कैसे दूर करती हैं? उन्होंने पुणे के नायडू हॉस्पिटल में कार्यरत नर्स छाया से बातचीत की। छाया ने बताया कि उनका पूरा हॉस्पिटल प्रधानमंत्री को सलाम करता है, क्योंकि उन्होंने इतने छोटे हॉस्पिटल को फोन कर के हालचाल जाना और चीजों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री से नर्स ने कहा कि वो तो एक हॉस्पिटल में ड्यूटी कर रही हैं, लेकिन आप तो 24 घंटे पूरे देश की सेवा में लगे हुए हैं। अचानक पीएम का फोन आने से नर्स की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था।

पीएम मोदी से नर्स छाया ने कहा कि वो देवता की तरह हैं और दुनिया के सभी देशों को उनके जैसा प्रधानमंत्री मिले। पीएम मोदी ने छाया को उनकी भावनाओं के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वो जो भी कर रहे हैं, वो उनका कर्तव्य है। पीएम ने वुहान से लौटे एक कश्मीरी मेडिकल छात्र से भी बातचीत की और कहा कि युवाओं को अन्य लोगों से बात कर के कोरोना के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए। छात्र निजाम ने वुहान से वापस लाने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया।

निज़ाम ने कहा कि पीएम मोदी द्वारा लॉकडाउन की घोषणा जनहित में की गई है और सभी को इसका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे और उनके सभी साथी चीन में फँस गए थे, जहाँ से भारत सरकार ने उन्हें वापस निकाला। निज़ाम ने बताया कि वहाँ से लौटे सभी कश्मीरी छात्रों को काफ़ी अच्छे तरीके से रखा गया था, जिसके लिए वो प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं। सभी छात्रों को अच्छी सुविधाएँ दी गईं।

कोरोना पर The Quint का फर्जीवाड़ा: जिस इंजीनियर को डॉक्टर बता दिखाई भयावह तस्वीर, उसने ही बताया झूठा

ऐसे समय में, जब पूरा विश्व चाइनीज Covid-19 वायरस के संक्रमण से लड़ रहा है, देश का लेफ्ट-लिबरल मीडिया गिरोह अपने प्रोपेगंडा से बाहर नहीं निकल रहा है। कुछ दिन पहले ऑल्ट न्यूज़ ने एक फर्जी ट्विटर अकाउंट के ऐसे दावे को हवा दी थी जिसमें अस्पताल में डॉक्टर्स के पास मास्क ना होने और रोगियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होने की बात कही गई थी। बाद में यह ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया गया।

इसी क्रम में ऑल्ट न्यूज़ के ही समान लेफ्ट-लिबरल मीडिया के नाम पर सरकार और व्यवस्था के खिलाफ नैरेटिव चलाने वाले द क्विंट ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और वो भी एक कदम आगे बढ़कर। दरअसल, दी क्विंट ने एक इंजीनियर को डॉक्टर बना कर उसके विचारों को सनसनी बनाकर पेश किया है।

बृहस्पतिवार (मार्च 26,2020) को द क्विंट ने डॉ. गिरिधर ज्ञानी का एक इंटरव्यू प्रकाशित किया। द क्विंट वेबसाइट ने दावा किया कि डॉ. ज्ञानी Covid-19 के खिलाफ तैयार की गई टास्क फ़ोर्स के संयोजक थे। उन्होंने मंगलवार (24 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में प्रमुख डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की एक बैठक में भाग लिया था।

इस इंटरव्यू में द क्विंट ने विशेष जोर देते हुए बताया कि वह एक ‘डॉक्टर’ हैं, जिन्होंने खुलासा किया था कि भारत कोरोना वायरस के संक्रमण के तीसरे चरण, यानी कम्युनिटी ट्रांसफर में पहुँच चुका है। इस साक्षात्कार के माध्यम से, क्विंट ने यह दावा करते हुए सरकार पर हमला किया कि वह कोरोना वायरस परीक्षण में अभी भी पुरानी कठोर नीति का पालन कर रही है। वामपंथी समाचार वेबसाइट ने यह भी दावा किया कि कथित ‘डॉक्टर’ ने उनसे कहा कि देश पहले से ही इस ट्रान्समिशन के चरण-3 में था, लेकिन मोदी सरकार इसे आधिकारिक नहीं बना रही थी।

द क्विंट के दावों और उसकी भ्रमक हेडलाइन को डॉ. ज्ञानी ने ही नकार दिया है। उन्होंने कहा है कि क्विंट ने भ्रामक हेडलाइन के माध्यम से उनकी बातों को कुछ और ही बनाकर पेश किया है। ज्ञानी ने स्पष्ट करते हुए कहाए- “सौभाग्य से अभी तक कोरोना संक्रमितों के मामलों में सामान्य रूप से ही वृद्धि देखी गई है, जबकि कम्युनिटी ट्रांसफर के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।”

द क्विंट ने अब अपने इस सनसनीखेज इंटरव्यू को हर जगह से डिलीट कर इसे ‘अपडेट’ करते हुए अपने आरोपों को ‘संभवाना’ नाम दिया है।

यहाँ पर यह जानना भी आवश्यक है कि एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (AHPI) के संस्थापक डॉ. गिरधर ज्ञानी ‘डॉक्टर’ भी नहीं हैं, जैसा कि द क्विंट वेबसाइट की ‘पत्रकार’ पूनम अग्रवाल ने दावा किया है। वास्तव में, डॉ. ज्ञानी एक क्वालिटी मैनेजमेंट इंजीनियर हैं, जिन्होंने बाद में पीएचडी की डिग्री ग्रहण की थी। ना ही वे मेडिकल प्रैक्टिस करते हैं और ना ही वे कोई महामारी विशेषज्ञ हैं।

AHPI ने भी स्पष्ट किया है कि डॉ. ज्ञानी ने द क्विंट से यह कभी नहीं कहा कि भारत पहले से ही संक्रमण के तीसरे चरण में है। एक ट्वीट में AHPI ने स्पष्टीकरण देते हुए लिखा है कि डॉ. ज्ञानी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत तीसरे चरण में तो नहीं है, लेकिन यह बेहतर होता अगर सरकार यह सोचकर सभी जरूरी तैयारियाँ की होती कि भारत पहले से ही संक्रमण के तीसरे चरण में है।

इस पूरे सनसनीखेज दावे में जो सबसे बड़ा झूठ द क्विंट ने कहा है वो ये कि डॉ. ज्ञानी टास्क फ़ोर्स की उस मीटिंग का हिस्सा थे, जिसे पीएम मोदी ने संबोधित किया था। द क्विंट का यह दावा भी फर्जी साबित हुआ है। क्विंट ने लिखा है कि “Covid-19 हॉस्पिटल्स के लिए टास्क फ़ोर्स” जबकि किसी भी सरकारी वेबसाइट पर ऐसी किसी भी टास्क फ़ोर्स का जिक्र ही नहीं है। ICMR ने जरूर एक Covid-19 टास्क फ़ोर्स का गठन किया है, लेकिन वह स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय कमेटी है ना कि “Covid-19 अस्पताल।”

वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द क्विंट’ की उस रिपोर्ट का वह हिस्सा, जो अब नहीं रहा;

ICMR, जिसने कि NITI आयोग के सहयोग से डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स की कमेटी का गठन किया था, द्वारा जारी आधिकारिक डॉक्यूमेंट में किसी भी डॉ. ज्ञानी का जिक्र नहीं है।

ICMR द्वारा 18 मार्च को जारी डॉक्यूमेंट;

इस तरह द क्विंट ने पूरी तरह से बेबुनियाद और काल्पनिक आधारों पर कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी सरकार विरोधी अपने एजेंडे को फैलाने का एक और नाकाम प्रयास किया है।

‘कोरोना हेलमेट’ पहन सड़क पर उतरी पुलिस, लॉकडाउन में बाहर निकले लोगों को समझाने का अनोखा तरीका

कोरोना वायरस महामारी की गंभीरता को लेकर लोगों के बीच जागरूक फैलाने के लिए चेन्नई पुलिस ने एक अनोखा तरीका अपनाया है। एक स्थानीय कलाकार ने एक पुलिस अधिकारी के साथ मिलकर लॉकडाउन के दौरान लोगों को सड़कों पर निकलने से रोकने के लिए एक अनोखा ‘कोरोना’ हेलमेट बनाया है। सड़कों पर 24 घंटे सेवा दे रहे पुलिस कर्मियों ने कहा कि हेलमेट लोगों को जागरूक करने में उपयोगी साबित हो रहा है।

सड़क पर कोरोना हेलमेट पहनकर लोगों से मिलने वाले पुलिस इंस्पेक्टर राजेश बाबू ने कहा, “हम लोगों को जागरूक करने के लिए उनसे बात कर रहे थे। लेकिन उनके बीच जागरूकता बहुत कम है। इसलिए हमने कुछ अलग करने की सोची। हमने एक हेलमेट डिजाइन किया है जो कोरोना वायरस की तरह दिखता है। हमने कुछ ऐसा करने के बारे में सोचा, जो लोगों को डराए और उन्हें घर पर बनाए रखे।”

उन्होंने कहा, “हम सभी कदम उठाते हैं लेकिन फिर भी लोग सड़कों पर निकल आते हैं। इसलिए यह कोरोना हेलमेट एक ऐसा कदम है जो हम यह सुनिश्चित करने के लिए उठा रहे हैं कि लोग पुलिस की बात को गंभीरता से लें। हेलमेट कुछ अलग करने की कोशिश है। जब मैं इसे पहनता हूँ तो कोरोना वायरस का विचार यात्रियों के दिमाग में आता है। विशेष रूप से बच्चे इसे देखकर प्रतिक्रिया देते हैं।” इंस्पेक्टर राजेश ने कहा कि उन्होंने यह हेलमेट पहनकर लोगों को इससे बचने और लॉकडाउन के दौरान घर रहने के फायदों के बारे में बताया। 

बता दें कि इस ‘कोरोना हेलमेट’ को चेन्नई के आर्टिस्ट गौतम ने डिजाइन किया। उन्होंने यह हेलमेट लोगों में जागरूकता लाने के लिए तैयार किया है। पुलिस इससे लोगों को जागरूक कर रही है। गौतम ने इस संबंध में बात करते हुए कहा, “पुलिस 24 घंटे काम कर रही है। वहीं लोग इसको लेकर गंभीर नहीं है। मैं पुलिस के लिए कुछ करना चाहता था इसलिए ये तैयार किया।”

स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के मुताबिक अभी तक तमिलनाडु में कोरोना वायरस के कुल 38 मामले सामने आए हैं। इनमें से 6 विदेशी नागरिक हैं। वहीं एक आदमी की कोरोना से राज्य में मौत हो चुकी है। साथ ही दो लोग अस्पताल से ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। 

तमिलनाडु: क्वारन्टाइन से नंगा भागा 34 साल का युवक, 90 साल की बुजुर्ग के गले में काटा, मौत

कोरोना संक्रमण के खिलाफ जारी वैश्विक लड़ाई के बीच तमिलनाडु से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। राज्य के थेनी से शुक्रवार की रात 34 साल का एक व्यक्ति अपने घर से भाग गया। 90 साल की एक महिला के गले में काट लिया जिससे उनकी मौत हो गई।

यह व्यक्ति पिछले हफ्ते ही श्रीलंका से लौटा था। उसे उसके घर में ही क्वारंटाइन किया गया था। पुलिस के अनुसार इसकी वजह से वह दिमागी रूप से असंतुलित हो चुका है। यह व्यक्ति टेक्सटाइल व्यापारी है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक शुक्रवार देर रात यह व्यक्ति अपने घर से निर्वस्त्र भाग खड़ा हुआ। 90 वर्षीय नचियाम्मल नामक बुजुर्ग महिला जो अपने घर के बाहर सो रहीं थीं, उनके गले में काट लिया। बुजुर्ग की आवाज सुन लोग बाहर आए और इस व्यक्ति को पुलिस के हवाले कर दिया। महिला को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।

याद रहे कि देश में इस समय 21 दिन का देशव्यापी लॉकडाउन चल रहा है। इसकी घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने-अपने घरों की देहरी को ही खुद के लिए लक्ष्मण रेखा मानने की अपील की थी। इसके बावजूद देश में लॉकडाउन तोड़ने के समाचार आ रहे हैं, जिनके खिलाफ पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन एक्शन भी ले रहा है।

कोरोना से लड़ने को भारतीय रेल तैयार: ट्रेन की बोगियों को बनाया आइसोलेशन वार्ड

इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रही है। इस संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। इस बीच भारतीय रेलवे ने सराहनीय कदम उठाया है। महामारी से लड़ने के लिए रेलवे ने एक कोच में आइसोलेशन केबिन तैयार किया है। इस संबंध में भारतीय रेलवे ने कहा है कि फिलहाल एक प्रोटोटाइप को आइसोलेशन वार्ड में बदला गया है। अगर इसे अंतिम रूप दिया जाता है तो रेलवे योजना बना रहा है कि हर जोन में हर हफ्ते 10 कोच को आइसोलेशन वार्ड में बदला जाए।

रेलवे ने एक कंपार्टमेंट में मौजूद रहने वाली कुल 8 सीटों में से 6 सीटों को निकाल दिया है। आइसोलेशन वॉर्ड के लिए बोगियों के एक कंपार्टमेंट में केवल दो सीट ही रखी गई है। इसके तहत मरीज के लिए केबिन तैयार करने के लिए एक तरफ से मिडिल बर्थ हटा दिया गया। वहीं मरीज के बर्थ के सामने की सभी तीनों बर्थों को हटाया दिया गया है। बर्थ पर चढ़ने के लिए लगाई गईं सीढ़ियों को भी हटाया गया है। आइसोलेशन कोच तैयार करने के लिए बाथरूम, गलियारे और दूसरी जगहों पर भी बदलाव किया गया है। रेलवे ने बोगियों में बनाए गए आइसोलेशन वॉर्ड के साथ ही मरीजों के लिए साफ-सुथरे टॉयलेट का भी प्रबंध किया है। टॉयलेट में नए नल के अलावा बाल्टी भी रखी गई है।

कुछ दिनों पहले भारतीय रेलवे ने घोषणा की थी कि कोरोना वायरस के मामले बढ़ने पर वह ट्रेन के कोच में आइसोलेशन केबिन तैयार करेगा। अब रेलवे ने इसे अमली जामा पहना दिया है। रेलवे कोरोना से संक्रमित मरीजों को इन आइसोलेशन कोच में रखेगा। इन ट्रेन कोचों में डॉक्‍टर्स और नर्स के लिए केबिन, मरीजों के लिए केबिन और चिकित्‍सा उपकरण व दवाओं को रखने के लिए अलग-अलग केबिन बनाए गए हैं। कोच में हर केबिन को कवर करने के लिए विशेष प्रकार के पर्दे लगाए गए हैं। 

ट्रेनों को सेनेटाइज करने के बाद उसके एक-एक कोच को एक वार्ड के रूप में इस्तेमाल करने पर विचार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए इस तरह की तैयारियाँ की जा रही है ताकि बाद में संक्रमण बढ़ने पर पीड़ितों को ट्रेनों के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जा सके।  

देश भर में मंगलवार (मार्च 24, 2020) मध्य रात्रि से 21 दिनों के ‘लॉकडाउन’ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद भारतीय रेल ने भी कहा था कि उसकी सभी यात्री सेवाएँ अब 14 अप्रैल तक बंद रहेंगी। हालाँकि, आवश्यक वस्तुओं को पहुँचाने के लिए माल ढुलाई जारी है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी ट्वीट कर बताया कि कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में रेलवे अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा है। पूरे देश में खाद्यान्न समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को कंट्रोल रुम से मॉनिटर किया जा रहा है। रेलवे राज्य सरकारों के साथ लगातार सम्पर्क बनाए हुए है और यह सुनिश्चित करने में लगी हुई है कि जहाँ भी खाद्य आपूर्ति की जरूरत हो, वहाँ मालगाड़ी से सामान भेजा जा सके।

जहाँ मिला कोरोना संक्रमित युवक, वहाँ की मस्जिद में बैठ कर माइक से नमाज के लिए बुला रहा था मौलाना, गिरफ्तार

पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद लोग घर में रहकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। नवरात्र के दौरान मंदिरों के कपाट बंद हैं। लोग घर में ही नव दुर्गा की उपासना करने में लगे हुए हैं। इसके विपरीत कुछ कट्टरपंथी सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी मस्जिद में नमाज पढ़ने से बाज नहीं आ रहे। अब ऐसे लोगों पर पुलिस-प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी बीच बागपत में एक मस्जिद से माइक द्वारा ऐलान कर रहे मौलवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

देश में लॉकडाउन घोषित होने के बाद से ही सरकार लगातार लोगों से सोशल डिस्टेंश बनाए रखने की अपील कर रही है, लेकिन बागपत जिले के एक गाँव में बीते शुक्रवार को एक मौलाना मस्जिद में बैठकर माइक से लोगों को नमाज के लिए इकट्ठा करने का एलान कर रहा था। इसकी जानकारी किसी ग्रामीण ने पुलिस को दे दी। सूचना पर गाँव में पहुँची पुलिस ने मौके से आरोपित मौलाना को दबोच लिया।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक गाँव में पहले से ही एक युवक कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। इसके बाद भी गाँव में समुदाय के लोग मस्जिद में एकत्र होकर नमाज अदा करने सा बाज नहीं आ रहे। कोतवाली प्रभारी अरविंद कुमार के मुताबिक गिरफ्तार किए गए मौलाना के खिलाफ में धारा 269 और 270 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर की कटिंग

वहीं गाजियाबाद के थाना मुरादनगर इलाके में स्थित मदरसे से पुलिस ने दो शिक्षक इमरान और मदन को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल दे दोनों शिक्षक लॉकडाउन के बावजूद मदरसे में 20 बच्चों की परीक्षा करवा रहे थे। वहीं इटावा में लॉकडाउन और धारा 144 का उल्लंघन करना समुदाय विशेष के कुछ लोगो को पड़ा भारी। एक मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ रहे लोगों पर पुलिस ने जमकर लाठियाँ भाँजी और 7 लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। उधर संभल कोतवाली इलाके के सैफ खां सराय में पाबंदी के बावजूद मस्जिद में सामूहिक नमाज को लेकर पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देश की सबसे बड़ी इस्लामिक संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने जुमे की नमाज को लेकर लोगों से कहा था कि जुम्मे के दिन मस्जिद में इकट्ठा होकर नमाज न पढ़ें। साथ ही अपील की थी कि सभी लोग अपने घर के अंदर जाकर ही नमाज पढें। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। वहीं पूरे देश में इससे 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 800 पार हो गई है।

मोजे, टेलीफोन बुक, नैपकिन और तौलिए: टॉयलेट पेपर की जगह इन चीजों का प्रयोग कर रहे हैं अमेरिकी

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए क्वारंटाइन में रह रहे लोग तरह-तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन देशों में ऐसी समस्याएँ और ज्यादा हैं जो इससे काफी प्रभावित हैं। अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 1 लाख से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जो किसी भी देश में सबसे ज्यादा है। 1700 से भी अधिक लोगों को इस खतरनाक संक्रमण के कारण अपनी जान गँवानी पड़ी। ऐसे में क्वारंटाइन में जी रहे अमेरिकियों को किसी एक चीज की कमी सबसे ज्यादा खल रही है तो वो है टॉयलेट पेपर।

एक वेबसाइट पर अमेरिकी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि अगर किसी के घर में टॉयलेट पेपर ख़त्म हो गया है तो वो कैसे काम चला रहा है? एक व्यक्ति ने बताया कि वो इसके विकल्प के रूप में फेसिअल टिश्यू, पेपर टॉवल और नैपकिन्स का प्रयोग कर रहा है। अमेरिकी इस चिंता में डूबे हुए हैं कि जब टॉयलेट पेपर्स पूरी तरह ख़त्म हो जाएँगे तो वो क्या करेंगे? एक व्यक्ति ने बताया कि वो अकेले रह रहा है और उसने टॉयलेट पेपर का बड़ा बण्डल ख़रीद रखा है, जिससे उसका काम चल जाएगा।

अमेरिका में टॉयलेट पेपर की कमी से जूझते लोग इसके विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं

अमेरिका में मॉल्स और सुपरमार्केट खाली पड़े हुए हैं। दुकानें बंद हैं और लोगों को सामान नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में स्थिति और भी विकट है। वहीं कुछ लोग तो मोजे से काम चला रहे हैं। एक व्यक्ति ने अपना अनुभव साझा करते हुए सलाह दी कि मोजों के एक दर्जन पैकेट्स ख़रीद लो और उनका टॉयलेट पेपर के रूप में प्रयोग कर के फिर ‘ड्राई वाश’ कर के सूखने के लिए डाल दो, फिर टॉयलेट पेपर की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। वहीं एक व्यक्ति ने टेलीफोन बुक को ही टॉयलेट पेपर के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी।

कुछ लोगों ने तो अख़बारों तक को टॉयलेट पेपर के रूप में प्रयोग किया है। अमेरिका कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए चीन से डाटा लेने में लगा हुआ है। सूचनाएँ और जानकारियाँ इकट्ठी की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से बातचीत की। इससे पहले ट्रंप इसे लगातार ‘चाइनीज वायरस’ कहते रहे हैं।

श्रीनगर में कोरोना संक्रमण से मौत, यूपी में दहशत: 5 साथियों संग 4 दिनों तक देवबंद की मस्जिद में रहा था मृतक

जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस के संक्रमण से एक 65 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। उसकी ट्रैवल हिस्ट्री से उत्तर प्रदेश में दहशत फैली हुई है। दरअसल श्रीनगर के हैदरपोरा निवासी इसे मृतक ने अपने पाँच साथियों के साथ यूपी के देवबंद का दौरा किया था। इतना ही नहीं वह चार दिनों तक यहाँ की मस्जिद में भी रुका था। इस बात की जानकारी मिलते ही देवबंद से लेकर लखनऊ तक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं देवबंद की खानकाह मस्जिद को सील कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक मृतक ने अपने पाँच साथियों के साथ देवबंद का दौरा किया था। इस दौरान इन लोगों का समूह 9 से 12 मार्च के बीच एक मस्जिद में रुका था। कश्मीर प्रशासन ने मृतक की पहचान सार्वजानिक नहीं की है। बताया जाता है कि 65 वर्षीय मृतक तबलीगी जमात से जुड़ा था। मूलत: उत्तरी कश्मीर में सोपोर का रहने वाला यह व्यक्ति बीते कई सालों से श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में रह रहा था।

मृतक कुछ दिन पूर्व दिल्ली में आयोजित एक मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लेने गया था। इस सम्मेलन में मलेशिया, इंडोनेशिया, दुबई व अन्य कई मुल्कों से भी इस्लामिक विद्वान और प्रचारक आए थे। श्रीनगर लौटने से पूर्व यह व्यक्ति जम्मू के निकट एक मदरसे में भी रुका था। उसकी मौत के बाद इन सभी स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ऐसे लोगों की तलाश कर उनको क्वारंटाइन करने में लगी हुई है, जो किसी न किसी माध्यम से इन लोगों के संपर्क में आए थे।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 42 पहुँच गई है, जिसमें सबसे अधिक नोएडा से 14 केस हैं। आगरा से आठ, गाजियाबाद से तीन, लखनऊ से आठ, पीलीभीत से दो और लखीमपुर खीरी, कानपुर, मुरादाबाद, वाराणसी, जौनपुर, बागपत और शामली से एक-एक मामले सामने आए हैं। वहीं जम्मू कश्मीर में 65 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जम्मू-कश्मीर के 5124 लोगों को निगरानी में रखा है। साथ ही 3061 लोगों को घरों में और 80 लोगों को अस्पतालों में क्वारंटाइन किया गया है। अब तक 326 सैंपल जाँच के लिए भेजे गए हैं, जिसमें 294 निगेटिव आए हैं।