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कोरोना इफेक्ट: सुपर पावर अमेरिका के हाथ से क्या निकल रही स्थिति? 2 हफ्तों में होगी 1-2 लाख मौत!

कहते हैं कि प्रकृति के प्रकोप के आगे सबसे मजबूत इमारत भी धराशायी हो जाती है। कुछ यही हो रहा है विश्व के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के साथ। जहाँ कोरोना के कारण हालत बद से बदतर हो रहे हैं। मौत का आँकड़ा बढ़ रहा है। एंबुलेंस इस तरह भाग रही है-जैसे मानो कभी 9/11 के समय दौड़ी थी। देश के राष्ट्रपति भी बिगड़ते हालातों को देखकर चेतावनी दे चुके हैं कि उनके देश में आने वाले 2 हफ्तों में सबसे ज्यादा मौत होंगी। और हो सकता है कि ये आँकड़ा 2 लाख तक पार कर जाए।

जी हाँ। 2हफ्तों में 2 लाख के पार। वो भी तब जब अमेरिका ने इस वायरस को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अनुमान की जानकारी खुद ट्रंप के सलाहकारों ने दी है। दरअसल, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी ऐंड इन्फेक्शन डिजिज के निदेशक डॉ. एंथनी फौसी के अनुमान के आधार पर ये बात कही गई है। जो कि बेहद डराने वाला है। उनका कहना है कि अगले कुछ दिनों में अमेरिका में लाखों लोग कोरोना की चपेट में आ जाएँगे और यह वायरस 1 से 2 लाख लोगों की मौत का कारण बन सकता है।

अब, सलाहकारों की इस चेतावनी के बाद ट्रंप ने कड़े कदम की अवधि को बढ़ाना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वह सोशल डिस्‍टेसिंग की गाइडलाइन को 30 अप्रैल तक बढ़ा रहे हैं। उन्होंने व्‍हाइट हाउस में संवाददाता सम्‍मेलन में कहा कि अमेरिका इस संकट से 1 जून तक उबर जाएगा। मगर, इससे पहले दो शीर्ष जन स्वास्थ्य सलाहकारों और कोरोना वायरस पर व्हाइट हाउस कार्यबल के सदस्यों- डॉ. देबोरा बिक्स और डॉ एंथनी फॉसी की सलाह के आधार पर उन्हें सामाजिक मेलजोल से दूरी संबंधी उपायों की अवधि 30 अप्रैल तक बढ़ानी होगी।

ट्रंप ने कोरोना वायरस पर अपनी दूसरी रोज गार्डन प्रेसवार्ता में कहा, “उनका कहना है कि जिन बचाव उपायों को हम लागू कर रहे हैं वे काफी हद तक संक्रमण के नए मामलों और असमय हो रही मौतों की संख्या घटा सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूँ कि अमेरिका के लोग यह जानें कि आपके नि:स्वार्थ एवं साहसिक प्रयास देश में कई जानें बचा रहे हैं। आप बदलाव ला रहे हैं। लेकिन अनुमान दर्शाते हैं कि दो हफ्तों में मृत्यु दर बेहद ऊँचाई पर पहुँच जाएगी।” उन्होंने कहा कि सामाजिक दूरी को लेकर नए दिशा-निर्देशों की घोषणा एक अप्रैल को की जाएगी। ट्रंप ने कहा, “हम उम्मीद कर सकते हैं कि एक जून तक हम इस संकट से पार पा लेंगे।” 

गौरतलब है कि रविवार रात तक अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या करीब 14,0000 हो गई थी और मृतकों की संख्या 2,475 पर पहुँच गई थ। न्‍यूयॉर्क शहर में ही इस महामारी से एक हजार से ज्‍यादा लोग मारे गए हैं। इस महामारी को रोकने के लिए ट्रंप ने हाल ही में अरबों डॉलर के पैकेज पर हस्‍ताक्षर किया था।

सऊदी अरब से आकर निजामुद्दीन की मस्जिद में छिपे थे 70 कोरोना संदिग्ध जमाती: सभी को किया गया आइसोलेट, जाँच जारी

पटना, राँची और कोयंबटूर के बाद अब दिल्ली के निजामुद्दीन के पास के मस्जिद से 50 से 70 कोरोना संदिग्ध मरीजों को पकड़ा गया है। ये सभी कोरोना संदिग्ध दुबई की यात्रा करके आए थे और निजामुद्दीन की मस्जिद में छिप गए थे। 

इन 50 से 70 संदिग्धों को कल देर रात डीटीसी बस से लाकर लोकनायक अस्पताल के आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती किया गया। इन कोरोना संदिग्धों को पहले राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था, मगर वहाँ पर पहले से ही सारी बेड भरी हुई थी, तो फिर पुलिस ने इन्हें लोकनायक अस्पताल में भर्ती करा दिया। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि ये सभी लोग निजामुद्दीन इलाके के किसी मस्जिद में रुके हुए थे। ये सभी जमात के लिए आए हुए थे। इसमें से कई लोग तो सऊदी अरब आदि देशों से भी थे। अभी फिलहाल सभी की जाँच की जा रही है। जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस बात का खुलासा हो पाएगा कि ये सभी कोरोना पॉजिटिव हैं या नहीं।

गौरतलब है कि हाल ही में पटना की एक मस्जिद में भी कई लोग छिपे थे। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया था तब पुलिस उन्हें वहाँ से ले गई थी। बता दें कि पटना के कुर्जी इलाके में स्थित दीघा मस्जिद में तकरीबन 12 विदेशी लोगों को छिपाकर रखा गया था। इस बात का पता चलते ही आसपास के मोहल्ले में ये खबर फैल गई और लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी फौरन इलाके में पहुँची और 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया और क्वारंटाइन कर दिया गया।

इनसे पूछताछ में पता चला था कि सभी तजाकिस्तान के निवासी हैं और पटना में धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए आए थे। दीघा थानेदार मनोज कुमार सिंह ने बताया था कि एहतियातन जाँच के लिए सभी को एम्स भेजा गया। ये सभी चार महीने पूर्व धार्मिक प्रचार के लिए भारत आए थे और सोमवार (मार्च 16, 2020) की सुबह नमाज के लिए दीघा मस्जिद गए थे।

ये सभी विदेशी पहले दिल्ली, फिर मुंबई में थे। इसके बाद 4 मार्च को पटना पहुँचे थे। लेकिन यहाँ इन्हें अपने काम (मजहब प्रचार) को करने के लिए अशोक राजपथ पर नूरी मस्जिद स्थित तबलिगी जमायत मुख्यालय जाना था। क्योंकि, वहीं से इन्हें किस मस्जिद में भेजना है, ये तय होता था।

ThePrint ने लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर फैलाई अफवाह, पोल खुलते ही सोशल मीडिया पर पड़ रही गाली

देश भर में 21 दिन के लॉकडाउन के कारण निम्न वर्ग के लोगों में कितनी घबराहट है- ये हमने आनंद विहार पर इकट्ठा हुई भीड़ के रूप में पिछले दिनों देखा। हर किसी को अपने रोजगार और अपने रहने की चिंता है। ऐसे में सरकार उनकी परेशानियाँ खत्म करने के लिए बहुत प्रयास कर रही है। लेकिन ये बात सच है कि इस समय उन्हें उम्मीद से ज्यादा अफवाहें प्रभावित कर रही हैं और ये अफवाहें उनमें डर का माहौल बना रही है, जिसके कारण वे पैदल ही अपने घर लौटने पर आतुर हैं।

हालाँकि, इन अफवाहों को उनके मन से दूर करने का काम मीडिया का है। लेकिन क्या हो अगर मीडिया ही उन्हें भड़काए और कहे कि ये स्थिति अभी आगे बढ़ सकती है? जी हाँ। इस संकट की घड़ी में ये काम दि प्रिंट ने किया है। 21 दिन का लॉकडाउन सुनकर जहाँ लोग घर लौटने के लिए अस्त-व्यस्त हो गए हैं, वहीं दि प्रिंट ने एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के रूप में दावा किया है कि उनकी स्थिति सिर्फ़ 21 दिन नहीं, बल्कि आगे भी ऐसी रह सकती है यानी लॉकडाउन आगे बढ़ सकता है।

अब जैसा कि समाचार का हर पक्ष पढ़कर उस पर यकीन करने वाले लोग जानते हैं कि अभी तक सरकार की ओर से कुछ भी और किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है फिर भी दि प्रिंट के ऐसे एक्सक्लूसिव प्रयास भ्रम के माहौल में ‘हो सकता है, संभावना है’ – जैसी हेडलाइन से डर का माहौल बना रहे हैं। मगर, इनके इस अजेंडे को इस बार प्रसार भारती ने खुद खारिज किया है और कैबिनेट सेक्रेट्री ने भी सामने आकर खुद इस खबर की सच्चाई पर सरकार का मत साफ किया है।

प्रसार भारती ने दि प्रिंट की इस खबर को शेयर करते हुए बताया है कि ये फेक न्यूज है। उनका कहना है कि प्रसार भारती इस खबर को लेकर लगातार कैबिनेट के संपर्क में है और कैबिनेट ने इसे लेकर हैरानी जताई है। कैबिनेट का साफ कहना है कि अभी तक उनके पास इस तरह का कोई प्लान नहीं है कि वे लॉकडाउन को एस्टेंड करने वाले हैं।

प्रसार भारती के खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर दि प्रिंट की थू-थू हो रही है। हर कोई उन्हें उनके इस कारनामे के लिए शर्मिंदा होने को बोल रहा है। कुछ लोग केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को भी इस पर टैग कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि आखिर वो कब जाकर इन झूठी अफवाह फैलाने वाले मीडिया पोर्टल के ख़िलाफ़ एक्शन लेंगे और इन पर उचित कार्रवाई होगी। वहीं कुछ शेखर गुप्ता को इन हरकतों से बाज आने को रह रहे हैं और प्रसार भारती के जवाब को सीधा थप्पड़ बता रहे हैं।

27.5 लाख खातों में ट्रांसफर किए ₹611 करोड़: CM योगी ने दिहाड़ी मजदूरों के लिए खोला दिल

कोरोना लॉकडाउन के कारण बुनियादी जरूरतों की जद्दोजहद से जूझ रहे मजदूरों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी सौगात दी है। ताजा खबर के अनुसार सीएम योगी ने मनरेगा के तहत राज्य के 27.5 लाख श्रमिकों के बैंक खातों में सीधे 611 करोड़ रुपए भेजे हैं। इसके अलावा उन्होंने योजना सम्मेलन के माध्यम से कुछ श्रमिकों से बातचीत भी की है। साथ ही उन्हें योजना से अवगत कराया है। इसी दौरान उन्होंने मजदूरों से कहा कि आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आप लोगों को तीन महीन का राशन-पानी मुफ्त में दिया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा इस राहत की खबर के बाद मजदूरों ने सीएम योगी को धन्यवाद दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले योगी सरकार ने गरीबों के खाते में 1000-1000 रुपए ट्रांसफर कराए थे और अब ये बड़ी राहत देकर उन्होंने साबित कर दिया है कि लॉकडाउन में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार दिहाड़ी मजदूरों तथा गरीबों के साथ खड़ी है। प्रदेश में सरकार लगातार जनता से अनुरोध कर रही है कि वह पैसे कमाने के लिए घरों से बाहर न निकलें। सरकार की तरफ से प्रति श्रमिक महीना में 2250 रुपया प्रदान किया जा रहा है।

बता दें कि कोरोना वायरस से संक्रमण पर रोक लगाने के प्रयास करने के साथ ही यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पलायन रोकने के लिए अन्य राज्यों से सटी सीमाओं पर विशेष इंतजाम किए हैं। वहीं लॉकडाउन की स्थितियों में अपनी दिहाड़ी के लिए जूझ रहे मजदूरों को बड़ी राहत दी है। इसके अलावा उन्होंने यूपी से बाहर दिल्ली में रह रहे लोगों का ख्याल रखने के लिए राजधानी के सीएम केजरीवाल को पत्र भी लिखा है। उन्होंने केजरीवाल को आश्वासन दिया है कि वो दिल्ली के हर व्यक्ति का ख्याल रखेंगे और उन्हें उम्मीद है कि दिल्ली सरकार भी यूपी प्रवासियों के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं अन्य जरूरतों को मुहैया कराएगी।

खबरों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमण के 82 मामलों के सामने आने के बाद सरकार अब पूरी तरह से हरकत में है। हर तरफ लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराने के साथ सरकार गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने के प्रयास में भी लगी है। मेडिकल कॉलेज से लेकर आयुर्विज्ञान संस्थानों में भी मेडिकल किट के साथ अन्य दवा भी उपलब्ध कराई जा रही है। संक्रमितों के साथ संदिग्धों को भी उपचार दिया जा रहा है।

डॉक्टर की पर्ची दिखाकर लॉकडाउन में भी ले सकते हैं शराब, Online बिक्री पर भी विचार कर रही राज्य सरकार

केरल में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के कारण शराब की बिक्री बंद होने से राज्य के विभिन्न हिस्सों से आत्महत्या के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने आबकारी विभाग को डॉक्टरों की पर्ची के बाद लोगों को शराब देने का निर्देश दिया है। बता दें कि शराब नहीं मिलने से परेशान होकर रविवार को केरल में दो लोगों की आत्महत्या का मामला सामने आया था।

केरल सरकार ने आबकारी विभाग को ऐसे लोगों को नशामुक्ति केंद्रों में नि:शुल्क उपचार देने के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शराब की ऑनलाइन बिक्री पर भी विचार कर रही है क्योंकि अचानक शराब न मिलने से सामाजिक समस्याएँ पैदा हो सकती हैं।

देश में कोरोना संक्रमण मामलों की संख्या बढ़कर हजार के करीब पहुँच गई है। बढ़ते मामलों और कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन जारी है। भारत में कोरोना ने सबसे ज्यादा कहर महाराष्ट्र के बाद केरल में बरपाया है। केरल में अब तक कोरोना संक्रमण मामले बढ़कर 213 हो गई है, जबकि शनिवार को ही राज्य से कोरोना से पहली मौत का मामला सामने आया था। 

लॉकडाउन के चलते राज्य में शराब की दुकानें बंद है, जिससे एक अलग ही तरह की त्रासदी खड़ी हो गई है। शराब नहीं मिलने से परेशान होकर केरल में दो लोगों ने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने बताया कि 32 वर्षीय सुनीश ने शराब न मिलने से परेशान होकर नदी में कूदकर जान दे दी तो वहीं नोफाल ‘आफ्टर शेव’ लोशन पी लिया, जिससे उसकी जान चली गई। परिवार वालों का कहना है कि एक साल पहले विदेश से लौटने के बाद वह नियमित रूप से शराब का सेवन कर रहा था। पुलिस ने कहा कि उसे शराब ना मिल पाने के बाद उसने आफ्टर शेव लोशन पिया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसमे दम तोड़ दिया।

बता दें कि केरल में पहले भी कई मौकों पर शराब पर पाबंदी लगती रही है लेकिन यह पहली बार है जब देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राज्य में शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लग गई है। बताया जा रहा है कि केरल सरकार ने शराब को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रखते हुए लॉकडाउन के दौरान इसकी बिक्री जारी रखने को कहा था, लेकिन विपक्ष के दबाव में उन्हें यह फैसला वापस लेना पड़ा। इसके बाद राज्य में शराब की सारी दुकानें बंद कर दी गईं।

राज्य सरकार ने पहले सूचित किया था कि जिन लोगों में शराब का सेवन न करने के कारण बैचेनी होती हैं, वे जिलों में नशामुक्ति केंद्रों का उपयोग कर सकते हैं। केरल में राज्य द्वारा संचालित बेवरेजेस कॉरपोरेशन आउटलेट सहित शराब की दुकानों को लॉकडाउन के बाद बंद कर दिया गया। 

संकट की इस घड़ी में Pak हिंदुओं की कौन कर रहा मदद? RSS के कार्यकर्ता लगे हैं सेवा में, देखें तस्वीरें

लॉकडाउन के दिनों में जब काम और मेहनताना की कमी के कारण हर मजदूर अपने राज्य में पलायन करने को एक विकल्प मान रहा है। वहीं, पाकिस्तान से आए हिंदू वो बेसहारों का जत्था है, जो अपनी आस सिर्फ़ सरकार से लगाए बैठी है। ऐसे समय में जब सीएए के कारण सेकुलरों ने उन्हें भारत का निवासी मानने से पूरी तरह से खारिज कर दिया और उन पर ध्यान देना भी उचित न समझा, उस समय आरएसएस के सदस्य इनके लिए मददगार साबित हुए। 

अब आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने किस तरह पाकिस्तानी हिंदुओं से मिलकर उनका हाल जाना, उन्हें राशन मुहैया कराया, इसी दरियादिली और सेवाभाव की कुछ तस्वीरें नीचे मौजूद हैं। ये सभी तस्वीरें आदर्श नगर की हैं।

राशन देते आरएसएस के सदस्य
मुहैया कराया गया राशन
राशन
राशन लेने के लिए लगी लाइन
राशन देते आरएसएस के सदस्य

गौरतलब है कि आरएसएस इस समय सिर्फ़ पाकिस्तानी हिंदुओं को ही नहीं बल्कि जगह-जगह अपनी सेवा गरीबों को प्रदान कर रही है। पिछले दिनों स्वंयसेवकों ने जनता के बीच जाकर उन्हें सुरक्षा के लिए जागरूक किया था और उन्हें मास्क-टोपी मुहैया कराया था। इसके बाद उन्होंने लॉकडाउन के कारण पैदा हुई परेशानी को खत्म करने के लिए खाद्य सामग्री वितरित करने का भी काम किया और पलायन करने वालों में 10 लोगों को समझा-बुझा कर उनके स्थान पर ही रोके रखने में कामयाब हुए। आरएसएस ने आदर्श नगर के अलावा नया गाँव में भी लद्दाखी छात्रों को 200 किलो आटा पहुँचाकर मदद की है। असम में भी ये कार्य जारी है और मुंबई में भी इस आपदा से लड़ने के लिए आरएसएस प्रबंध करने में जुटा है।

कॉन्ग्रेस विधायक के खिलाफ FIR दर्ज, मुफ्त राशन देने के नाम पर भीड़ इकट्ठा करने का आरोप

कोरोना वायरस की चपेट में आने से लोगों को बचाने के लिए पीएम मोदी ने देश भर लॉकडाउन किया है। वो लगातार लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग की अपील कर रहे हैं, लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो सब कुछ जानकर भी अनसुना कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ बिलासपुर कॉन्ग्रेस विधायक शैलेष पांडेय ने धारा 144 लागू होने के बावजूद भीड़ को इकट्ठा किया। जिसके बाद पुलिस ने सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के मामले में कॉन्ग्रेस विधायक शैलेश पांडे के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। उन्होंने बिलासपुर में मुफ्त राशन देने की घोषणा की जिसके बाद उनके घर के बाहर भीड़ इकट्ठा हो गई।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओपी शर्मा ने कहा, “हमें जानकारी मिली थी कि बड़ी संख्या में लोग आवश्यक वस्तुओं को लेने के लिए विधायक के आवास पर एकत्र हुए हैं। वहाँ पर लगभग एक हजार लोग थे। यह राज्य सरकार द्वारा लगाई गई धारा 144 का उल्लंघन है। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 279 के तहत कार्रवाई की जाएगी।”

कोरोनोवायरस के प्रसार को रोकने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में धारा 144 लगाई हुई है। अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए पांडे ने कहा, “जब मैं अपने आवास पर पहुँचा तो वहाँ बहुत बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा थी। मैंने पुलिस को फोन करके भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कहा। मैं बस जरुरतमंद लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहा था, इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उस वक्त पुलिस ने भीड़ को रोका क्यों नहीं? यह अपराध कैसे हो सकता है? मैंने लोगों को आने के लिए नहीं कहा था।”

विधायक का कहना है कि लोग वहाँ पर इसलिए आए क्योंकि कर्फ्यू में ढील दी गई। पुलिस को लोगों को रोकना चाहिए था। उन्होंने इस घटना के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि पुलिस ने यह कार्रवाई क्यों की? दरअसल लॉकडाउन के बीच विधायक शैलेष पांडेय लोगों की मदद के लिए खाना बाँट रहे थे, जिससे उनके आवास पर भारी भीड़ एकत्रित हो गई। खाना वितरित करते समय सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल नहीं रखा गया। इसीलिए सिविल लाइन पुलिस ने मौके पर पहुँच कर उन पर धारा 279 और 188 के तहत केस दर्ज कर लिया।

यह सच है कि लॉकडाउन का सबसे बुरा असर गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है। इसके बावजूद सोशल डिस्टेंसिंग की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। सरकार उनके लिए सारी सुविधाएँ उपलब्ध करवा रही है। ऐसे हालात में कॉन्ग्रेस विधायक लोगों को डोर-टू-डोर सर्विस दे सकते थे। इसके अलावा जो भी लोग इकट्ठा हुए थे उनको एक मीटर की दूरी बनाकर राशन बाँटा जा सकता था। कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी, जिसका अभी तक कोई इलाज नहीं निकला है, समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसे रोकने के लिए अपनी भागीदारी निभानी होगी। वरना वो समाज का नुकसान तो करेंगे ही, खुद को भी नहीं बचा पाएँगे।

मोतीलाल नेहरू ने अपने पास बिठाकर लिखवाई थी तुलसीदास से रामचरितमानस, दिग्विजय सिंह की जानकारी अधूरी!

अभी इस घटना को बहुत समय नहीं हुआ है, जब हमने आपके सामने फैक्ट चेकर वेबसाइट फॉल्ट न्यूज़ से सत्यापित करने के बाद यह रहस्यमयी खुलासा किया था कि स्वयं श्री जवाहरलाल नेहरू ने ही आजादी के दौरान बाहुबली रॉकेट की छुच्छी में आग लगाई थी। इस खुलासे के ठीक एक साल बाद आज हम आपके सामने प्रसिद्ध ग्रन्थ रामायण के बारे में एक बड़ा तथ्य लेकर आए हैं, जिसके लिए समस्त राष्ट्र वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का आभारी है।

दूरदर्शन चैनल पर रामायण धारावहिक के पुनः प्रसारण के बाद लोकप्रिय नेता दिग्विजय सिंह ने आदत से मजबूर होकर ट्वीट कर बताया कि रामानंद सागर ने यह धारावहिक तत्कालीन प्रधानमंत्री और राहुल गाँधी के स्वर्गीय पिता राजीव गाँधी के कहने पर बनाया था, लेकिन यह जानकारी अधूरी है। दअरसल दिग्विजय सिंह यह तथ्य सबके सामने रखना भूल गए कि रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास को पंडित जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू ने अपने पास बिठाकर लिखवाई थी।

कुछ फैक्ट चेकर्स अभी भी रामचरितमानस की उस प्रति की तलाश में हैं, जो मोतीलाल नेहरू ने स्वयं तुलसीदास से लिखवाई थी किन्तु कोरोना वायरस के कारण देशभर में चल रहे लॉकडाउन से घरों में कैद होने की वजह से फैक्ट चेकर समुदाय उसे ढूँढ पाने में नाकामयाब रहा है।

जब हमने दिग्विजय सिंह के ट्वीट का ‘रिवर्स फैक्ट’ चेक किया तो पाया कि उन्होंने अमुक कारणों से मोतीलाल नेहरू के योगदान को राजीव गाँधी के योगदान से कम करने के लिए यह तथ्य सार्वजनिक नहीं किया।

हनुमान नहीं बल्कि जवाहर को याद दिलाया था जामवंत ने भूला हुआ बल

मोतीलाल नेहरू ने ही गोस्वामी तुलसीदास को उन सभी जगहों के बारे में बताया, जहाँ-जहाँ भगवान राम अपने वनवास के दौरान गए थे। मोतीलाल नेहरू ने अपनी एक अप्रकाशित जीवनी में इस बात का जिक्र किया था कि वास्तव में जामवंत ने समुद्र किनारे जिस व्यक्ति को उनका बल याद दिलाया था, वह रामभक्त हनुमान नहीं बल्कि मोतीलाल नेहरू के पुत्र जवाहरलाल नेहरू थे। इसके बाद ही वो एडविना माउण्टबेटन के साथ क़्वालिटी समय बिताने के बजाए स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे।

मोतीलाल नेहरू की इस अप्रकाशित जीवनी में और भी कई बड़े खुलासे होने बाकी थे लेकिन इसके प्रकाशित न होने के कारण यह सामने नहीं आ सकी और ये राज भी उन्हीं के साथ चले गए। जिस कारण दिग्विजय सिंह नेहरू भक्तिधारा के ज्यादा गीत नहीं गा सके।

मारीच नहीं था स्वर्ण मृग

उल्लेखनीय है कि मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व में तुलसीदास द्वारा लिखी गई इस रामचरितमानस में यह भी खुलासा किया गया है कि रावण ने जिस स्वर्ण मृग को सीता माता के पास भेजा था, वह मारीच नहीं बल्कि दिग्विजय सिंह नाम का कोई असुर सेनापति था, जिसका आभास होने पर ही भगवान राम ने उसे असली तीर मारा था।

जर्मनी के वित्तमंत्री ने की आत्महत्या, मुंबई के डॉ आलीम ने पूछा – इंडियन FM किधर है? कई कट्टरपंथियों ने दिया साथ

अपने देश की अर्थव्यवस्था से परेशान होकर और कोरोना संकट को देखते हुए अनिश्चित भविष्य की चिंताओं के कारण जर्मनी के वित्त मंत्री के आत्महत्या कर लेने की खबर वाकई झकझोर देने वाली है। सोशल मीडिया पर कल जब ये खबर आई कि जर्मनी के हेस प्रांत (Hesse region) के वित्त मंत्री थॉमस शेफर ने सुसाइड कर ली है, उस समय सब लोग सकते में रह गए। हर किसी के मन में उन्हें लेकर बहुत सवाल उठे। किसी ने उन्हें निराश मन के साथ श्रद्धांजलि दी, तो किसी ने इसे गलत अंत बताया। मगर, इसी बीच एक जिहादी मानसिकता ने इस खबर पर भी अपने भीतर के जहर को परोस दिया और आत्महत्या की खबर पर पूछ डाला कि भारतीय वित्त मंत्री कहाँ हैं?

देश में रहकर वरिष्ठ पद पर आसित एक नेता को लेकर ऐसी टिप्पणी करने वाले ‘जिहादी’ का नाम आलीम सिद्दकी है। आलीम पेशे से खुद को डॉक्टर लिखता है और है भी। लेकिन अफसोस, मानसिकता बिलकुल कट्टरपंथियों वाली है। एक देश के वित्त मंत्री की मौत पर ऐसा ट्वीट करना और उनके समकक्ष भारतीय वित्त मंत्री को रख कर आत्महत्या (परोक्ष रूप से) के लिए सवाल पूछना – उसकी इसी मानसिकता का परिचायक है। 

डिएक्टिवेट ट्विटर अकॉउंट

यहाँ बता दें कि आलीम ने एनडीटीवी के ट्वीट पर अपनी ये इच्छा जाहिर की थी। लेकिन, जैसे ही अन्य यूजर्स ने उसे इस पर घेरना शुरू किया और उसके ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल होना शुरू हुआ, उसने फौरन अपना अकॉउंट डिएक्टिवेट कर दिया और मुजरिमों की तरह ट्विटर से फरार हो गया।

डॉ आलीम सिद्दकी का लिबरेट पर अकॉउंट

ट्विटर अकाउंट डिएक्टिव करके वो सोचा कि मुसिबत टल गई, ईज्जत बच गई। लेकिन तकनीकी रूप से मूर्ख डॉक्टर को गूगल पर मौजूद अपने अन्य अकाउंट की जानकारी शायद नहीं थी। जैसे लिंक्डइन और लिबरेट पर, जहाँ इस ऑर्थोपेडिक सर्जन की सारी जानकारी मौजूद है।

आलीम के अलावा एनडीटीवी के ट्वीट पर कुछ और भी कट्टरपंथी लोग अपनी जेहादी मानसिकता का प्रमाण देते दिखाई पड़े। एक अबरार नाम का यूजर भी आलीम की तरह लिखता है, “अपना टाइम कब आएगा?? अपने वाले का आइ मीन।”

वहीं इमरान अशरफ नाम का यूजर जो खुद को प्राउड इंडियन और सेकुलर बताता है, वो इस खबर को पढ़कर लिखता है कि हमारा वित्त मंत्री तो हमें मार डालेगा।

इसी तरह आसिफ तारिक नाम का यूजर तो साफ-साफ लिखता है कि अब ये समय निर्मला ताई का है कि वो इस दुनिया को छोड़ दें।

इसके बाद सदफ खानुम इस ट्वीट पर पूछती हैं कि अपना फाइनेंस मिनिस्टर कहाँ है और आबिद खान लिखता है कि हमारे वित्त मंत्री को इससे सीखना चाहिए।

अब सोचिए, जहाँ इस मानसिकता के लोग ऐसी संकट की घड़ी में भी अपनी नफरत परोसने से बाज नहीं आते हों, वहाँ पर आलीम जैसों के पद और शिक्षा पर क्यों न सवाल उठे। सोशल मीडिया पर इस समय आलीम के ख़िलाफ़ एक्शन लेने की माँग जोर-शोर से हो रही है।

लोग उसके मरीजों का रिव्यू भी शेयर कर रहे है और बता रहे हैं कि कैसे उसी के मरीज उसे उसके घटिया बर्ताव के लिए दुत्कारते हैं और कहते हैं कि उसे अपने मरीजों से बात तक करनी नहीं आती।


2 IAS अधिकारी निलंबित, 2 को कारण बताओ नोटिस: दिल्ली लापरवाही मामले में गृह मंत्रालय की कड़ी कार्रवाई

कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान दिल्ली में लापरवाही बरतने पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने चार नौकरशाहों पर कार्रवाई की है। इनमें से दो अधिकारियों को निलंबित और दो को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। इन नौकरशाहों पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत बनाए गए आपतकालीन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने और लॉकडाउन के दौरान इस अधिनियम को लागू करने में गंभीर खामियों के पाए जाने की वजह से कार्रवाई की गई है।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) और प्रधान सचिव (वित्त) को त्वरित प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। ये डिविजनल कमिश्नर का पद भी संभालते थे। इसके अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं भूमि इमारत) और सीलमपुर के सब डिविजनल मेजिस्ट्रेट को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि यह अधिकारी प्रथम दृष्टया सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहे हैं।

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के चार अधिकारियों के खिलाफ कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कर्तव्यों के निर्वहन में खामियाँ पाए जाने के चलते अनुशासनात्मक कार्यवाही की है।

गृह मंत्रालय ने अपने एक आदेश में कहा है कि यह पाया गया कि ये अधिकारी कोरोना वायरस के प्रसार की रोकथाम के संबंध में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत गठित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के अध्यक्ष द्वारा जारी निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन वो ऐसा करने में नाकाम रहे हैं। ये अधिकारी कोरोना वायरस से निपटने के लिए लॉकडाउन प्रतिबंध के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।

गृह मंत्रालय ने जिन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है, उनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) रेणु शर्मा और प्रधान सचिव (वित्त) राजीव वर्मा शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि ये अपने दायित्व को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाने में विफल रहे। इसके साथ ही इनके खिलाफ जुर्माना लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।

बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट सचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने लॉकडाउन के दौरान हो रहे उल्लंघन को लेकर शनिवार की देर शाम और आज सुबह राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशक के साथ लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे। दिशा निर्देशों में कहा गया था कि जिले के डीएम और एसपी को इन निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए जो आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी किए गए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को देशभर में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की। लॉकडाउन का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से जहां हैं वहीं रहने की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि इस खतरनाक वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं खोजा गया है। इसलिए लॉकडाउन और एक दूसरे से दूरी ही सबसे सफल उपाय है। मगर शनिवार (मार्च 28, 2020) को शहरों से लोगों के पलायन के चलते लॉकडाउन फेल होता दिखा। दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में भारी भीड़ देखी गई। इस दौरान सोशल डिस्टेंस नहीं होने से कोरोना का खतरा भी और बढ़ गया है। दिल्ली के सभी बार्डर पर शनिवार को अफरा-तफरी का माहौल दिखा।