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लिबरल ब्रीड को रामायण-महाभारत में दिख रहा हिंदुत्व और गुंडागर्दी, हिन्दूघृणा की उलटी में नहा रहे

कोरोना वायरस की कड़ी को तोड़ने के लिए देशभर में लॉकडाउन की घोषणा की गई है और लोगों से अपील की गई है कि 21 दिन की इस अवधि तक लोग अपने ही घरों में रहें और बाहर ना निकलें। ऐसे में विश्वभर के देशों में ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइट्स से लेकर टीवी सीरीज लोगों को घर पर बैठकर अपना समय बिताने के लिए कई रोचक पहल कर रहे हैं।

ऐसे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी शुक्रवार को पहल करते हुए स्पष्ट किया कि जनता की माँग पर दूरदर्शन में शनिवार (मार्च 28, 2020) से बीते हुए दौर के मशहूर रामायण सीरियल का प्रसारण होगा। इसका पहला एपिसोड कल सुबह 9 बजे और दूसरा कल ही रात 9 बजे दिखाया जाएगा। लेकिन इस एक फैसले ने हिन्दुफोबिया से ग्रसित कुछ ‘विचारकों’ को घर में बैठे बैठे अनावश्यक सरदर्द दे दिया है।

ट्विटर से लेकर तमाम सोशल मीडिया पर इस धारावाहिक के प्रसारण में भी केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार के किसी छुपे हुए ‘एजेंडा’ को तलाशने का नैरेटिव जोर पकड़ता जा रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि सरकार ने इस फैसले से कोरोना के कारण छवि को होने वाले नुकसान की भरपाई का जरिया बनाते हुए यह भी साबित करने का प्रयास किया है कि रामानंद सागर द्वारा निर्मित इस धारावाहिक के पीछे आरएसएस के हिंदुत्ववादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार था। उल्लेखनीय है कि दूरदर्शन पर पहली बार रामायण सीरियल का प्रसारण 25 जनवरी, 1987 में शुरू हुआ और इसका आखिरी एपिसोड 31 जुलाई, 1988 को दिखाया गया था।

रामायण सीरियल के दोबारा प्रसारण से वैचारिक उलटी करने वालों में एक प्रमुख नाम है कॉन्ग्रेस राज में प्रसार भारती की पूर्व अध्यक्ष और 2006 में पद्म श्री से नवाजी जा चुकी मृणाल पांडे का। ट्विटर पर अक्सर मोदी सरकार विरोधी करतबों के कारण चर्चा में रहने वाली मृणाल पांडे ने केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का ट्वीट शेयर करते हुए लिखा है- “Bwahahahaha…धन्य हो ! घर में नहीं खाना, पर्दे पर रामायना!” इसके साथ ही उन्होंने घंटी और हँसने की इमोजी के माध्यम से अपनी भवनाओं को सामने रखा है।

हालाँकि, मृणाल पांडे के ट्वीट के जवाब में प्रशांत पटेल उमराव ने निंदनीय जवाब देते हुए लिखा है- “रामायण के नाम पर रावण की बहन सूर्पनखा के पेट में मरोड़ उठना स्वाभाविक है।”

एक अन्य ट्वीट में जग्गी वासुदेव द्वारा ब्लॉक किए जाने को अपनी पहचान बताने वाले स्वघोषित इतिहासकार अद्वैद (@Advaidism) ने लिखा है- “नई बोतल में पुरानी शराब। 1980 के आखिर में रामायण एक अभियान था, जिसने हिंदुत्व को आरएसएस की शाखाओं से बाहर लाकर आम भारतीयों के मस्तिष्क में बिठाने में मदद की। लगता है केंद्र सरकार इस लॉकडाउन के कारण कुछ पिछड़ने का अनुमान लगा रही है और यह फैसला इसी की भरपाई के लिए लिया गया है।”

@hadiyashafin ने ट्वीट में लिखा है – “21 दिन के लॉकडाउन के कारण दूरदर्शन कल से रामायण सीरियल दिखाने जा रहा है। रामायण एक ऐसा सीरियल था, जिसने हिंदुत्व आंदोलन और भारत में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बीज बोए थे। हिंदुत्व के गुंडे, जो अब कोरोना वायरस से थक चुके हैं, घर पर बैठ सकते हैं और अपनी नफरत को तरोताजा कर सकते हैं।”

@alokkirti1990 नाम के एक ट्विटर अकाउंट ने, जिसके बायो में “जय भीम, नमोबुद्धाय, जय संविधान, जय भारत” लिखा है, ने रामायण के प्रसारण से आहत होकर कटाक्ष करते हुए ट्वीट में लिखा है – “क्या दुनिया का सबसे बड़े सामाजिक संगठन आरएसएस कहीं कुछ सेवा करते हुए नजर आया है?” उनके इस ट्वीट के जवाब में कुछ लोगों ने उन्हें आरएसएस स्वयंसेवकों को, टोपी पहने हुए एक युवक को सेनीटाइजर देते हुए तस्वीर पोस्ट की है।

रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण 25 जनवरी 1987 में शुरू हुआ था दूरदर्शन पर इसका आखिरी एपिसोड 31 जुलाई 1988 को देखने को मिला।

लॉकडाउन तोड़ने वाले 11,317 लोगों के खिलाफ 3710 FIR, 5732 गिरफ्तार, कालाबाजारी पर भी योगी सरकार ने लिया एक्शन

कोरोना महामारी से देश को बचाने के लिए घोषित किए गए 21 दिन के लॉकडाउन का उत्तर प्रदेश में पूरी सतर्कता के साथ पालन करवाने के प्रति राज्य प्रशासन अडिग नजर आ रहा है। राज्य सरकार की इस विषय पर मुस्तैदी से लॉकडाउन का पालन न करने वालों के विरुद्ध लगातार जारी कार्यवाहियों को देखा जा सकता है। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने शुक्रवार को प्रेस से बातचीत में बताया कि अबतक लॉकडाउन का पालन न करने वाले ऐसे 11,317 लोगों के खिलाफ 3710 एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं 5732 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। लॉकडाउन के उल्लंघन करने वालों के अतिरिक्त प्रदेश में कालाबाजारी के खिलाफ भी 20 एफआईआर दर्ज की गई है।

याद रहे कि कल 26 मार्च को ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कालाबाजारी के खिलाफ कड़े एक्शन लेने की बात कही थी। बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने लॉकडाउन से आम लोगों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े इसलिए घर-घर सामान की डिलीवरी करवाने और कालाबाजारी, जमाखोरी करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त एक्शन लेने का निर्देश दिया था।

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने आज शुक्रवार को अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की। अवनीश अवस्थी ने कोरोना से लड़ाई में प्रदेश सरकार की तैयारियों को पर्याप्त बताया। और, यह भी बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जहाँ एक तरफ दूसरे राज्यों में फँसे हुए प्रदेशवासियों से उन्हीं प्रदेशों में बने रहने की अपील की है, वहीं उनके लिए समुचित व्यवस्था करने के लिए भी देश के भिन्न-भिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर निवेदन किया है। इसके अतिरिक्त 12 प्रदेशों के लिए प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को नोडल अधिकारी भी बना दिया गया है जिससे इन 12 प्रदेशों में फँसे हुए उत्तर प्रदेश के लोगों को किसी प्रकार की असुविधा से बचाया जा सके।

इसके अलावा इस प्रेस कॉन्फ्रेन्स में धार्मिक स्थलों पर भीड़ न लगाने के लिए जारी दिशा-निर्देश, कम्युनिटी किचन शुरू करना, फूड पैकेट्स का वितरण आदि सरकारी पहलों की विस्तार से जानकारी दी गई। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान मौजूद प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि इस 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान भी प्रदेश में उर्वरक की दुकानें खुली रहेंगीं, साथ ही हार्वेस्टर के लिए भी पास जारी किए जाएंगे। जिससे सावधानी रखते हुए फसल की कटाई का काम सुचारु ढंग से चलता रह सके।

इसके साथ ही योगी ने गायों के लिए बनाए गए आश्रय स्थलों, मुर्गी, बतख, मछलियों आदि के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रदेश में एम्बुलेंस व्यवस्था को भी लॉकडाउन के मद्देनजर अलर्ट मोड पर रखा हुआ है जिससे अस्पताल जाने वाले मरीजों को कोई परेशानी न हो। साथ ही सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं को सिर्फ गर्भवती महिलाओं के लिए ही जारी रखा गया है। प्रदेश सरकार ने चिकित्सा इमरजेंसी के लिए अस्पताल जाने वालों को 108 नंबर पर फोन करने और गर्भवती महिला को जरूरत पड़ने पर 112 नंबर पर फोन कर एम्बुलेंस बुलाने की बात कही।

घर में क्वारंटाइन को मैंने घर जाने की अनुमति समझ ली: केरल IAS अफ़सर हुए सस्पेंड

कोरोना वायरस के संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के लिए पूरा देश वर्तमान में लॉकडाउन है। ऐसे में एक जूनियर आईएएस अधिकारी बेहद मूर्खतापूर्ण बहाने के साथ नियमों का मजाक उड़ाते हुए एकांतवास यानी क्वारंटाइन से भाग निकला। कोरोना वायरस के संदिग्ध और केरल के आईएएस अधिकारी (सब कलेक्टर) अनुपम मिश्रा को निर्देशों का उलंघन करने के कारण निलंबित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले अनुपम मिश्रा ने बताया कि उन्होंने घर में क्वारंटाइन को अपने घर जाने की अनुमति समझ लिया था। लेकिन उनकी इस भूल को जिला प्रशासन ने मानने से साफ़ इनकार कर दिया है।

अनुपम मिश्रा के निलंबन की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई है। अनुपम मिश्रा विदेश से हनीमून मना कर 19 मार्च को स्वदेश लौटे थे, जिसके बाद उनमें कोरोना के लक्षण मिलने के बाद उनको घर में ही क्वारंटाइन किया गया था। 21 मार्च को वो बिना किसी का सूचना दिए वहाँ से गायब हो गए थे।

अनुपम मिश्रा, 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और हाल ही में केरल के कोल्लम में सब कलेक्टर का पदभार संभालने के लिए आए थे। उन्होंने अपने वरिष्ठों को सूचित किया कि वह अपनी पत्नी के साथ हनीमून पर सिंगापुर में थे, तब उन्हें वहाँ से लगभग 70 किलोमीटर दूर कोल्लम स्थित सरकारी आवास में आइसोलेशन में अलग-थलग रहने का निर्देश दिया गया था। लेकिन ऐसा करने की बजाए वह उस जगह से निकल गए और बाद में पता चला कि मिश्रा उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में स्थित अपने घर पहुँच गए हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने अनुपम मिश्रा को कम से कम दो सप्ताह तक घर में रहने की सलाह दी थी, लेकिन वे बिना किसी को बताए वहाँ से लापता हो गए। उनके लापता होने की सूचना तब मिली जब स्वास्थ्य अधिकारी बृहस्पतिवार (मार्च 26, 2020) को उनके सरकारी आवास पर उनकी स्थिति के बारे में पूछताछ करने पहुँचे। बिना किसी को सूचना दिए क्वारंटाइन से लापता होने को लेकर उनके खिलाफ धारा 188, 269, 270, 271 के तहत मुकदमा भी दर्ज किया।

कोल्लम के जिला कलेक्टर बी अब्दुल नासर ने शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को मीडिया से बात करते हुए बताया कि उनकी तरफ से स्पष्टीकरण दिया गया है कि जब उन्हें क्वारंटाइन रहने के लिए कहा गया था तो उन्होंने कानपुर अपने घर जाने की बात कही थी। नासर ने कहा कि यह प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है और उन्होंने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने कहा कि यह बड़ी भूल एक ऐसे व्यक्ति ने की है जिसे कि ऐसे समय में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए था।

घरों से बाहर निकलो, भीड़ में छींक कर कोरोना फैलाओ, कहने वाला इन्फोसिस कर्मी मुजीब मोहम्मद हुआ गिरफ्तार

वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ने के लिए जहाँ एक तरफ सारी दुनिया एक साथ खड़ी नजर आ रही है वहीं कुछ लोग इस मौके पर भी घृणात्मक विचार फैलाने से बाज नहीं आ रहे। इन्फोसिस में काम करने वाला मुजीब मोहम्मद नामक व्यक्ति ऐसे ही लोगों में शुमार है, जिसे आज पुलिस ने नफरत फैलाने वाले विचारों के आरोप में गिरफ्तार किया।

यह व्यक्ति कोरोना संक्रमण से मानवता की लड़ाई के इस वक्त में भी उलटे सीधे बयान देकर लोगों में नफरत फैलाने का काम कर रहा था। अंशुल सक्सेना ने एक ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी। अंशुल ने अपने ट्वीट के जरिए बताया कि मुजीब मोहम्मद ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से लोगों से अपील की थी कि आओ घर से बाहर निकलो, कोरोना को फैलाने में हाथ मिलाएँ और पब्लिक के बीच मुँह खोल कर छींकें जिससे यह कोरोना वायरस और फ़ैल सके।

अंशुल के अलावा एक अन्य ट्विटर यूजर ने भी इस बारे में ट्वीट कर अंशुल सक्सेना के ट्वीट की पुष्टि की। इन ट्वीट्स पर अन्य ट्विटर यूजर्स की प्रतिक्रिया बेहद आक्रामक और गुस्से से भरी आ रही हैं। कुछ लोगों ने इसे जहाँ जिहाद का एक फॉर्म बताया, तो कुछ ने इसके जरिए मीडिया गैंग की पुअर हेडमास्टर संस थ्योरी को याद किया।

फाइंडिंग लाइफ नाम के इस ट्विटर यूजर ने लिखा कि बरखा दत्त को इसकी खबर देनी चाहिए, शायद इसकी भी कोई दर्दनाक स्टोरी हो इसके पास्ट से जुड़ी हुई जहाँ क्लास 5th में किसी क्लासमेट ने इसे पीटा हो या ऐसा कुछ।

याद रहे कि कोरोना वायरस को लेकर इस तरह की नफरत फैलाने वाली बात कहने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी चरमपंथी इस्लामिस्ट्स राणा अयूब ने भी कोरोना के संबंध में पूरे देश को बद्दुआ देते हुए कहा था कि जो देश इतना नैतिक रूप से पतित हो चुका हो उसका कोरोना भी क्या करेगा? जिस पर मीडिया गैंग की भी तरफ से काफी तीखी प्रतिक्रिया आई थी। लेकिन बरखा दत्त की जिहादिनों ने जिसका समर्थन किया था।

लखनऊ से निकला, गलत बस में बैठा, नहीं मिली जब कोई मदद तो ‘हाथ गाड़ी’ के सहारे ही पहुँच गया जौनपुर

देश में लॉकडाउन के ऐलान के बाद दूसरे राज्य में फँसे लोग पैदल ही अपने घर की ओर निकल पड़े हैं। सोशल मीडिया पर इन लोगों की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इनके लिए प्रशासन से मदद माँगी जा रही है, ताकि इन्हें सही सलामत इनके घर पहुँचाया जा सके। मगर, इसी बीच एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। जहाँ एक विकलांग युवक बिना किसी की मदद के अपने घर भी पहुँच गया, वो भी सिर्फ़ हाथ गाड़ी के सहारे। ये युवक गोखपुर से निकलकर गाजीपुर और फिर जौनपुर के मुफ्तीगंज इलाके पहुँचा। लेकिन, इस बीच किसी ने इसकी मदद नहीं की।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, ये युवक जौनपुर के मछलीशहर थाना क्षेत्र के देवरिया गाँव का निवासी है। जो लखनऊ की किसी सड़क पर पान गुटका बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालता था। मगर, कोरोना के कारण लॉकडाउन का हल्ला सुनकर बस में बैठ गया, लेकिन वो बस जौनपुर न जाकर सीधे गोरखपुर चली गई। 

इसके बाद इस शख्स ने गोरखपुर से गाजीपुर की बस पकड़ी और फिर वहाँ पहुँचा। पर जब गाजीपुर से इसे कोई साधन नहीं मिला और न ही किसी ने उसे वहाँ कोई सहारा दिया। बस फिर क्या? अगले दिन वह गाजीपुर से बुधवार की सुबह-सुबह अपनी हाथ गाड़ी के सहारे अपने घर थाना मछली शहर के लिए निकल पड़ा और गुरुवार देर शाम जौनपुर पहुँच गया।

गौरतलब है कि इस समय दूसरे राज्यों में रहकर कमाने वाले लोग अपने गाँव, घर, शहर की ओर कूच कर चुके हैं। इन लोगों के लिए उत्तरप्रदेश में सीएम योगी ने मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव परिवहन तथा प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है। जिसमें कहा गया है कि मानवीय आधार पर ऐसे व्यक्तियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की जाए और स्वास्थ्य संबंधी पूरी सावधानी बरतते हुए इन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए।

धोनी, सचिन, रोजर फेडरर समेत फुटबॉलर्स ने कोरोना के लिए जमा किए करोड़ों

कोरोना वायरस के संकट ने देशवासियों को एकजुट होने का अवसर दिया है और कुछ लोग इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा भी रहे हैं। इस महामारी के कारण गरीब, अमीर और मध्यम, सभी वर्ग प्रभावित हो सकते हैं यही वजह है कि काफी लोग आगे आकर आर्थिक मदद की घोषणा कर रहे हैं। हर संकट के समय बॉलीवुड से लेकर खेल की मशहूर हस्तियों से लोग उम्मीद करते हैं कि वो अपना सहयोग करेंगे, इसी कारण से बॉलीवुड और खेल जगत की हस्तियों से भी उम्मीद लगाई जा रहीं थी कि वो कोरोना की महामारी के समय भी सहयोग करेंगे।

ऐसे में लोग जिस नाम का बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे वह था क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का। आखिरकार सचिन तेंदुलकर ने कोरोना वायरस से जंग में 50 लाख रुपए की सहायता की है। विश्व क्रिकेट के लगभग सभी बड़े रिकॉर्ड्स अपने नाम करने वाले तेंदुलकर ने शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को प्रधानमंत्री राहत कोष में 25 लाख तो महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री राहत कोष में भी इतने ही रुपए का सहयोग किया है।

उल्लेखनीय है कि स्विट्जरलैंड के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर और उनकी पत्नी मिर्का ने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए करीब 8 करोड़ रुपए की धनराशि दान की है। जबकि पुर्तगाल के मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 8.28 करोड़ दान दिए और लियोनल मेसी ने भी 8 करोड़ रुपए दान दिए हैं।

भारत में सचिन के अलावा इस जानलेवा महामारी के खिलाफ आगे आने वाले खिलाड़ियों में पठान बंधुओं का भी नाम प्रमुख है। इरफान और यूसुफ पठान ने बड़ौदा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को 4000 फेस मास्क दान किए हैं। पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पुणे स्थित एक एनजीओ के माध्यम से 1 लाख रुपए का योगदान दिया।

यूँ तो, कई लोग इस पर भी सवाल कर रहे हैं लेकिन कई बार सारी जानकारी हमारे पास नहीं होती। धोनी ने सिर्फ एक NGO को वेबसाइट के जरिए एक लाख दिए हैं। कई बार दान दाता अपना नाम नहीं बताना चाहते, या हम उनसे जिस समय उम्मीद लगाते हैं, उसके कुछ दिन बाद देते हों।

ज्ञात हो कि विश्व का सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस सन्दर्भ में अभी तक कोई पहल नहीं की है। हालाँकि, BCCI ने पहले भी CRPF समेत भारतीय सेनाओं को IPL के समारोह शुरु होने वाले दिन सहयोग राशि दी है। इस कारण, हम सवाल नहीं उठा सकते, हो सकता है आने वाले दिनों में वो भी कुछ करें। उसी तरह सेलिब्रिटीज भी गुप्त सहयोग भी करते हैं, या जो जब सक्षम महसूस करते हैं, तब अपने स्तर से मदद करते हैं। जरूरी बात यह है कि कोई भी, कितना भी सहयोग दे रहा है, वो एक बड़े कार्य में लगेगा। अतः, हम सब को अपने स्तर से आर्थिक या अन्य सहयोग देना चाहिए ताकि इस महामारी से लड़ा जा सके।

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से भारत सहित पूरी दुनिया प्रभावित है और देश में अब तक इससे संक्रमितों की संख्या 700 से ऊपर पहुँच चुकी है, जबकि अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इस सम्बन्ध में भारत सरकार ने एहतियातन देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की हुई है।

18 जनवरी से 23 मार्च के बीच विदेशों से भारत आए 15 लाख से ज़्यादा यात्री, केंद्र ने राज्‍यों से कहा सब पर रखें निगरानी

देश के टॉप मोस्ट ब्यूरोक्रेट कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने आज सभी राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों से कहा कि बीती 18 जनवरी से 23 मार्च के बीच 15 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री भारत आए हैं, जिनकी सही प्रकार से निगरानी की जानी चाहिए थी, किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि जितने यात्रियों की निगरानी अपेक्षित थी और जितनों की मॉनिटरिंग की गई उस के बीच एक बड़ा फासला रह गया है, जो कोरोना महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को काफी क्षति पहुँचा सकता है।

कैबिनेट सचिव गाबा ने राज्य सरकारों से यह भी कहा कि भारत में बाहर से आने वाली कामर्शियल फ्लाइट्स पर बैन लगाने के पहले जितने अंतरराष्ट्रीय यात्री बाहर से आए थे उनकी मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए। मीडिया के अनुसार ये पहली बार नहीं है कि केंद्र ने राज्यों को उन भारतीय तथा गैर भारतीय लोगों पर निगाह रखने को कहा है जो बीते दिनों बाहर से आए हैं। इससे पहले भी स्वास्थ्य मंत्रालय राज्यों से इस संदर्भ में और अधिक प्रयास करने को कहता आया है लेकिन राज्यों से अपेक्षित प्रतिक्रिया न आने पर आज कैबिनेट सेक्रेटरी को इस बारे में दिशा निर्देश जारी करने पड़े।

ध्यातव्य है कि कोरोना से संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स में लगातार ऐसे समाचार जगह बनाते रहें हैं जहाँ कहीं किसी बाहर से यात्री ने अपनी क्वारंटाइन मुहर इत्र से मिटा दी तो कहीं बाहर से आए लोग जाँच पड़ताल से बचने के लिए देश के भीतर हवाई यात्रा की जगह ट्रेनों और बसों के जरिए यात्रा करते पाए गए। मीडिया में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि विदेशों से आने वाले कुछ यात्री अपना कोरोना संक्रमण छिपाने के लिए की जाने वाली थर्मल जाँच से पहले पैरासिटामॉल की दवाएं ले रहे थे। जानकारों के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज का यह बर्ताव न सिर्फ उसके खुद के लिए बल्कि सारे समाज और देश के लिए बेहद खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना है।

याद रहे कि दिसंबर में चीन के वुहान से शुरू हुआ यह कोरोना वायरस संक्रमण आज पूरी दुनिया में फैल चुका है। जिसमें कोरोना के सबसे अधिक पॉजिटिव केसों के मामलों में अमेरिका अब चीन को भी पीछे कर पहले स्थान पर पहुंच गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 81,321 हो गई है। पूरी दुनिया में जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या अब बढ़कर पाँच लाख से अधिक हो गई है जिसमें से 22,000 के ज्यादा लोग इस महामारी के कारण जान गँवा चुके हैं। इसकी वजह से दुनिया की एक तिहाई आबादी आज लगभग 2.8 अरब लोग पूरी दुनिया में लॉकडाउन की स्थिति में हैं। वहीं भारत में अबतक 724 कोरोना पॉजिटिव केसेस की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 17 की मौत इस बीमारी के कारण हुई है।

 

‘खाने का इंतजाम न हो तो थाने में आओ, लेकिन बाहर मत घुमो’: बेसहारा लोगों को खर्चा दे रही है UP पुलिस

लॉकडाउन के दौरान पूरे भारत भर में लोगों को घर से बाहर ना निकलने के सख्त निर्देश दीए गए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है और लोगों को अपने घरों से बाहर ना निकलने की सलाह दी है। वायरस के संक्रमण का खतरा इतना अधिक है कि अनावश्यक रूप से बाहर देखे जा रहे लोगों के साथ पुलिस सख्ती से पेश आ रही है जिस कारण वह मीडिया के निशाने पर भी है। हालाँकि, पुलिस विभाग का मानवीय चेहरा भी इस लॉकडाउन के दौरान बाहर आया है। इन्हीं में से एक है सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश पुलिस।

इस वीडियो में देखा जा रहा है कि सड़क पर घूम रहे एक गरीब, बेसहारा को पुलिसकर्मी अपनी जेब से 100 रुपए दे रहे हैं। बेसहारा आदमी पुलिसकर्मी के आगे हाथ फैलाते हुए देखा जा रहा है। पुलिसकर्मी उसे सौ रुपए देते हुए कह रहे हैं – “खाने का इंतजाम नहीं हो रहा है, तो थाने पर आ जाना, सुबह-शाम भोजन नहीं मिल रहा है तो थाना नजदीक है वहाँ आ जाना। लेकिन घर से बाहर मत निकलो, सुबह 10 बजे सिद्धार्थ नगर थाने पर आ जाना, वहीं भोजन हो जाएगा तुम्हारा।”

लॉकडाउन के दौरान देखा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही गरीब और बेसहारा लोगों की मदद कर रही है। दिल्ली सरकार ने भी गरीब लोगों के लिए सामूहिक भोजन का प्रबंध किया है। कई जगहों पर देखा जा रहा है कि लॉकडाउन तोड़कर सड़कों पर निकले युवकों से पुलिस ने पहले राष्ट्रगान गवाया के साथ ही लोगों को शपथ दिलवा रहे हैं कि वे बिना कारण घर से बाहर नही निकलेंगे।

ज्ञात हो कि आज लॉकडाउन का तीसरा दिन है। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए देशवासियों से 21 दिन तक घर से बाहर ना निकलने की सलाह दी है। पुलिस और प्रशासन निरंतर लोगों की निगरानी कर रही है और उनकी आवश्यकताओं का भी ध्यान रख रही है।

कोरोना से जंग: देश में कहीं भी हों यूपी के गरीब मजदूर लोग, खाने-पीने का खर्च उठाएगी योगी सरकार

24 मार्च से देश में लागू लॉकडाउन के बाद से ही पूरे देश में यातायात प्रतिबंधित है। इस बीच दूर दराज क्षेत्रों में फँसे गरीब, मजदूरों का अपने गंतव्यों तक पहुँचने के लिए पलायन जारी है। इसी बीच योगी सरकार ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि वह घबराएँ नहीं और यथास्थान रहें साथ ही योगी सरकार ने घोषणा की है कि हमने उत्तराखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र के सीएम से बात कर कहा है कि उनके राज्यों में जो भी यूपी के रहने वाले लोग हैं उनके रहने और खाने के लिए इंतजाम किए जाएँ। ऐसे में इन सुविधाओं का खर्चा योगी सरकार द्वारा दिया जाएगा।

लॉकडाउन के बाद अपने गंतव्यों की ओर लगातार पैदल चल रहे लोगों को देख सीएम योगी ने अपील करते हुए कहा है कि जो जहाँ हैं वहीं रहे, दूसरे राज्यों के सीएम से हमने उनके लिए बेहतर व्यवस्था कराने के लिए बात की हैं। ऐसे लोगों से निवेदन है कि वह घबराएँ नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मजदूर वर्ग के लोग ज्यादा कर रहे हैं। इसके साथ ही योगी ने कहा कि दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, जहाँ भी यूपी के लोग हैं उनसे अपील है कि वे घबराएँ नहीं। वे लोग सरकार की जिम्मेदारी हैं और उनके लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। सीएम ने कहा कि यूपी के मुख्य सचिव ने भी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि यूपी के जो निवासी वहाँ रह रहे हैं, उन्हें सुविधाएँ दें। यूपी की सरकार हर किसी का ख्याल रखेगी।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ऐसे लोगों पर पूरी तरह फोकस कर रही है, जो लोग घबराकर रात और दिन पैदल चल रहे हैं। उन्हें कोई समस्या नहीं आएगी। परिवार, देश समाज और सुरक्षित भविष्य के लिए उनका लॉकडाउन का पालन करना आवश्यक है। कोरोना के खिलाफ जो लड़ाई है जिसमें सबको सहभागी बनना है। सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में 12 राज्यों के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। उन राज्यों के नागरिक किसी भी परेशानी पर उन नोडल अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकते हैं और उन राज्यों में फँसे लोग संबंधित नोडल अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकते हैं। इन लोगों के साथ एक आईपीएस अधिकारी को तैनात किया है जो 24 घंटे इन लोगों से जुड़े रहेंगे।

सीएम योगी ने कहा कि उन्होंने जिलों के सभी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि डोर टू डोर डिलीवरी पर ध्यान दें। किरानों की दुकान खोलने को कहा है। इन किराने की दुकानों में सोशल डिस्टेंस के लिए भी विभागों को निर्देशित किया गया है। गौरतलब है कि योगी सरकार ने पिछले दिनों कहा था कि लोग घरों से बाहर नहीं निकलें। सरकार जरूरी सामान को उनके घरों तक पहुँचाएगी।

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लॉकडाउन के चलते दिल्ली में फँसे अपने नागरिकों के भोजन, आवास और आवागमन की व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 50 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

वहीं लॉकडाउन के बाद उत्तराखंड में फँसे विभिन्न राज्यों के नागरिकों को उनके घरों तक सकुशल भेजने के लिए बसों का इंतजाम कर रही है। इसके लिए राज्य ने केन्द्र सरकार से अनुमति ली है। दरअसल एक आँकड़े के मुताबिक उत्तराखंड में 2100 से अधिक पर्यटक फँसे हुए हैं, जिनमें गुजरात और उत्तर प्रदेश के लोग सबसे अधिक शामिल हैं। गौरतलब है कि देश में 21 दिनों के लिए यानि कि 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से 21 दिनों तक घरों में रहने की अपील की है।

केरल से भागकर ISIS में शामिल हुआ था काबुल के गुरुद्वारे का आतंकी, कश्मीरी मुस्लिमों का बदला लेने के लिए था यह हमला

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले में कश्मीर कनेक्शन निकला है। साथ ही इस आतंकी के केरल से जुड़े होने की बात भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि 150 सिखों पर हमला करने वाले आतंकियों में से एक भारत का जिहादी था, जिसने कश्मीर मुस्लिमों का बदला लेने की नियति से इसको अंजाम दिया।

काबुल के गुरुद्वारा में बुधवार (25 मार्च) को हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP) ने ली है और साथ में हमलावर की तस्वीर भी जारी की है। ISKP ने कहा कि इस हमले को अबू खालिद-अल-हिन्दी नाम के उसके एक फिदाईन ने अंजाम दिया है।

समाचार एजेंसी का दावा है कि यह अबू खालिद-अल-हिन्दी और कोई नहीं बल्कि केरल का ही एक दुकानदार मोहम्मद साजिद था, जो चार साल पहले चौदह लोगों के साथ ISIS ज्वाइन करने निकला था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि अबू खालिद-अल-हिन्दी जिसका एक और नाम अब्दुल खयूम भी है, केरल के कासरगोड का रहने वाला है, जो साल 2015 में अफगानिस्तान में जाकर इस्लामिक स्टेट का आतंकी बन गया था।

एक रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “हमें शक है कि अबू खालिद-अल-हिन्दी केरल के कासरगोड का है जो 2015 में इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गया था। केरल से सीरिया और अफगानिस्तान गए आतंकियों के बारे में हम और जानिकारी इकट्ठी कर रहे हैं, जिससे अबू खालिद-अल-हिन्दी की असली पहचान के बारे में पता लगाया जा सके।”

समाचार एजेंसी के माध्यम से जारी एक बयान में बताया जा रहा है कि गुरूद्वारे पर हमले को कश्मीरी मुस्लिमों के लिए बदले की कार्रवाई के रूप में अंजाम दिया गया था। संदेह है कि यही अबू खालिद-अल-हिन्द केरल, वालापट्टनम के आईएसआईएस केस में भी आरोपित था। वर्ष 2017 में, NIA ने आईएस से तार जुड़े होने के मामले में कन्नूर जिले के वालापट्टनम में अबू खालिद सहित पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

केरल के आईएसआईएस मॉड्यूल पर नजर रखने वाले अधिकारियों का मानना है कि काबुल के गुरुद्वारा पर हुए आतंकी हमले को ISI के इशारे पर लश्कर और हक्कानी नेटवर्क ने ही अंजाम दिया है और दुनिया को गुमराह करने के लिए ISKP से इस हमले की जिम्मेदारी लेने को कहा गया है। जाँच एजेंसियों को शक है कि अबू खालिद-अल-हिन्दी काबुल पर हमले से कुछ महीने पहले लश्कर ए तैयबा में शामिल हो गया था।