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17 साल के प्रेमी से मिलने उत्तराखंड पहुॅंची 37 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला, रेलवे स्टेशन से क्वारेंटाइन में भेजी गई

पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इसके संक्रमण से बचने के लिए लोग अपने घरों में कैद हैं। पीड़ित अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे। ऐसे वक़्त में उत्तराखंड से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 37 वर्षीय एक ऑस्ट्रेलियाई महिला अपने 17 वर्षीय प्रेमी से मिलने उत्तराखंड के काठगोदाम रेलवे स्टेशन पहुँच गई। रेलवे स्टेशन पर महिला को अकेले देख अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पूछताछ के बाद अधिकारियों ने उसे क्वारेंटाइन में भेज दिया।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को रानीखेत एक्सप्रेस में सवार होकर ऑस्ट्रेलियाई महिला कोलकाता से उत्तराखंड के काठगोदाम रेलवे स्टेशन पहुँची। पूछताछ में महिला ने अधिकारियों को बताया कि वह नैनीताल में अपने पति से मिलने जा रही है। इसके बाद पुलिस ने उक्त व्यक्ति से संपर्क किया, जिसके बाद 17 वर्षीय युवक महिला को लेने के लिए रेलवे स्टेशन पहुँच गया। लेकिन युवक ने महिला का पति होने से इनकार कर दिया और बताया कि वह उसका प्रेमी है। इसी बीच सूचना पर रेलवे स्टेशन एक एम्बुलेंस पहुँची, और मेडिकल जाँच के बाद महिला को क्वारेंटाइन कर दिया गया।

पूछताछ में युवक ने अधिकारियों को बताया कि वह गोवा के एक होटल में शेफ का काम करता है। इसी बीच महिला से उसकी मुलाकात हुई थी। इसके बाद वे कई बार कोलकाता में भी मिले। वहीं महिला ने बताया कि वह पिछले करीब एक साल से भारत में रह रही है। एक दोस्त के साथ वाराणसी से मुरादाबाद पहुँची थी।

वहीं बीते सोमवार को बीडी पांडे अस्पताल के क्वारेंटाइन वार्ड से दो विदेशी सैलानी सुबह को भाग निकले। इससे अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। बाद में बमुश्किल पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने दोनों विदेशियों को पकड़ लिया और उन्हें अस्पताल लाने के बाद मोतीनगर हल्द्वानी में बनाए क्वारेंटाइन वार्ड में भेज दिया। हालाँकि दोनों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है।

जानकारी के अनुसार एक इजरायली युवक और बेल्जियम निवासी युवती अलग-अलग समय में भारत भ्रमण पर आए थे। कई जगह घूमने के बाद 20 मार्च को दोनों नैनीताल पहुँचे। नैनीताल में इन दोनों पर्यटकों को कहीं भी होटल नहीं मिला तो शुक्रवार शाम वह बीडी पांडे अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों से जाँच का अनुरोध किया था। विदेशी सैलानियों की स्वास्थ्य जाँच करने के बाद उन्हें अस्पताल के क्वारेंटाइन वार्ड में भर्ती कर दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने दोनों पर नजर रखने के लिए एसडीआरएफ की टीम को वार्ड के बाहर तैनात किया था, लेकिन सोमवार सुबह साढ़े दस बजे के करीब यह दोनों विदेशी एसडीआरएफ के जवानों को चकमा देकर अस्पताल से भाग निकले।

अस्पताल प्रबंधन ने सैलानियों के अस्पताल से गायब होने की सूचना अपने अफसरों के अलावा जिला प्रशासन और पुलिस को दी। खोजबीन के दौरान लगभग दो घंटे के बाद दोनों सैलानी मल्लीताल स्थित अंडा मार्केट में नजर आए। पुलिस और एसडीआरएफ के जवान दोनों को पकड़कर बीडी पांडे अस्पताल लाए, जहाँ से उन्हें हल्द्वानी के मोतीनगर स्थित क्वारेंटाइन वार्ड में भेज दिया। इस दौरान विदेशी सैलानियों ने अस्पताल प्रबंधन पर कई आरोप भी मढ़े। आपको बता दें कि 22 मार्च से ही उत्तराखंड पूरी तरह से लॉकडाउन है। पूरे देश में 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन की घोषणा कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। कोरोना से भारत में मरने वालों की संख्या 11 हो गई है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 है।

गुरुद्वारे पर आतंकी हमला: फिदायीन ने खुद को उड़ाया, बंदूकधारियों से चल रही मुठभेड़, 4 की मौत

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे पर आतंकी हमले की खबर है। मीडिया रिपोर्टों में अफगान आंतरिक मंत्रालय ने काबुल में हुए इस हमले की पुष्टि की है। बताया जा रहा है की पहले फिदायीन हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। हमले में 4 लोगों के मरने की खबर है।

आत्मघाती धमाके के बाद बंदूकधारी गुरुद्वारे में दाखिल हो गए। अफगानी मीडिया रिर्पोटों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि सुरक्षा बलों ने गुरुद्वारे के पहले तल को खाली करा लिया है। मुठभेड़ जारी है। अंदर फॅंसे कई लोग सकुशल बाहर निकाल लिए गए हैं।

अल जजीरा के मुताबिक ने सांसद नरेंद्र सिंह खालसा ने बताया कि जब यह हमला हुआ, तो वह घटनास्थल के पास ही थे। उनके अनुसार, धमाके की आवाज सुनते ही वे गुरुद्वारे की ओर भागे और देखा कि वहाँ कम से कम 4 सिखों की मृत्यु हुई थी। अभी तक किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। लेकिन इस महीने की शुरुआत में राजधानी काबुल में ही IS (दाएश) ने अल्पसंख्यक शिया समुदाय के एक समूह पर हमला किया था, जिसमें 32 लोग मारे गए थे। अब इस हमले को भी उससे जोड़कर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में लंबे समय सिखों को व्यापक भेदभाव का सामना करना पड़ा है और कई बार आतंकवादियों ने भी उन्हें निशाना बनाया है। हालिया दिल्ली दंगों के बाद भी काबुल में सिखों की दुकान पर हमला हुआ था। अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना का विडियो अपने ट्विटर पर भी शेयर की था जिसमें अधेड़ उम्र का सिख दुकानदार हाथ जोड़कर हताश खड़ा था और उसकी दुकान का सामान जमीन पर बिखरा था।

बता दें, अल्पसंख्यक सिखों पर यह पहला हमला नहीं है। पहले भी अफगानिस्तान में उनपर हमले होते आए हैं और डरकर वे भारत आने को मजबूर हुए हैं। 2018 में भी जलालाबाद में आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 13 सिख मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। हमले से सिख समुदाय इतना डर गया था कि उन्होंने देश छोड़ने का फैसला कर लिया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब 300 से भी कम सिख परिवार बचे हैं। इनके पास दो ही गुरुद्वारा है। एक जलालाबाद और दूसरा काबुल में।

LOC से सटे कुपवाड़ा में आतंकियों ने बना रखा था ठिकाना, हथियारों का जखीरा मिला, 6 गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर में आतंकी मंसूबों को अंजाम देने के लिए लश्कर ए-तैयबा ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की मदद से ‘द रजिस्टेंस फ्रंट जम्मू-कश्मीर’ (टीआरएफ जेके) नामक नया आतंकी संगठन तैयार किया। इससे पहले ये संगठन कोई नापाक हरकत करता, पुलिस ने सेना की मदद से इसके 6 सदस्यीय मॉड्यूल को ध्वस्त कर बड़ी कामयाबी हासिल की। पुलिस ने इनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किया है।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, इस संगठन के आतंकियों को उत्तरी कश्मीर में कुछ खास लोगों की हत्या करने और सुरक्षाबलों पर हमले करने का जिम्मा सौंपा गया था। साथ ही इन्हें अपने संगठन में और लड़कों को शामिल करने के लिए भी कहा गया था। इस काम के लिए ये लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम मैसेंजर और वाट्सएप के जरिए पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर से संपर्क में थे। हैंडलर की पहचान एंड्रयू जोनस व खान बिलाल के रूप में हुई है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि सोपोर में अस्पताल के पास हथियारों की डिलीवरी होने वाली है। इसी सूचना पर पुलिस ने अपने दस्ते को अस्पताल के आसपास तैनात कर दिया। हथियारों के लेनदेन के लिए जब 4 संदिग्ध पहुँचे तो फौरन उन्हें पकड़ लिया गया। इनकी पहचान एहतिशाम फारूक मलिक, शफकत अली टागू, मुसैब हसन बट व निसार अहमद गनई के रूप में हुई है।

पुलिस ने पकड़े गए संदिग्धों के पास से 1 पिस्तौल और 12 ग्रेनेड बरामद किए। पकड़े गए चारों युवक सोपोर के विभिन्न हिस्सों के निवासी हैं। इसके अलावा इस कार्रवाई में कुपवाड़ा जिले के केरन का कबीर अहमद लोन व शराफत को भी पुलिस ने पकड़ा है। एसएसपी सोपोर जावेद इकबाल के मुताबिक पकड़े गए सभी लोग लश्कर से हैं और इनकी गिरफ्तारी बीते 24 घंटों के दौरान हुई है।

पुलिस के अनुसार, उन्हें शराफत से पूछताछ में इस बात का पता चला उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा से सटे कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में बनाए गए ठिकाने में हथियारों को छिपाया गया है। इसके बाद, पुलिस ने सेना की 6 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों की मदद से हथियारों के जखीरे को जब्त कर लिया।

इसमें 8 एसाल्ट राइफलें, 25 एके मैगजीन, 750 एके कारतूस, 16 मैगजीन और 351 कारतूसों समेत 9 पिस्तौल, 77 ग्रेनेड व 21 डेटोनेटर फ्यूज हैं। बता दें सुरक्षाबलों ने रविवार रात को ही इस ठिकाने को नष्ट किया था।

CM योगी की गोद में बैठ अस्थायी मंदिर गए रामलला, भव्‍य राम मंदिर का निर्माण होने तक यहीं देंगे दर्शन

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि परिसर से रामलला की मूर्ति को निकालकर एक अस्थायी मंदिर में चाँदी के सिंहासन पर विराजमान कर दिया। भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा होने तक रामलला की मूर्ति को इसी अस्थायी मंदिर में रखा जाएगा। इस दौरान सीएम योगी ने मंदिर निर्माण के लिए राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को 11 लाख का चेक भी भेंट किया।

मंगलवार शाम को ही तय कार्यक्रम के मुताबिक CM योगी अयोध्या पहुँच गए थे। तड़के 3 बजे रामलला की मूर्ति को गोद में लेकर सीएम योगी ने अस्थायी मंदिर में 9.5 किलो चाँदी के सिंहासन पर पूरी मंत्रोच्चार के साथ विराजमान कर दिया। अब भव्य राम मंदिर का निर्माण मूल ‘गर्भगृह’ में किया जाएगा। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या मंदिर निर्माण का आह्वान करती है। मंदिर निर्माण के मद्देनजर पहला चरण पूरा हो गया है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम त्रिपाल से नए आसन पर विराजमान हो गए हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर माह में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में राम जन्मभूमि स्थल को हिंदुओं को सौंप दिया था। साथ ही आदेश देते हुए कहा था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन दी जाएगी। इस फैसले के बाद ही राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया था। इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया, जिसकी देखरेख में भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा।

लॉकडाउन के बाद मदरसे में 500 बच्चियों को बना रखा था बंधक, ताला तोड़ पुलिस ने करवाया आजाद

झारखंड में कोरोना के प्रकोप से जनता को बचाने के लिए पूर्ण रूप से लॉकडाउन घोषित है। बावजूद इसके विशेष समुदाय के लोगों की मनमानियाँ कम होती नहीं दिख रहीं। सरकार और प्रशासन के बार-बार समझाने के बावजूद राँची के रातू थाना क्षेत्र के परहेपाट गाँव के मदरसे में मंगलवार (मार्च 24, 2020) को शिक्षण कार्य जारी रखा गया। मदरसे का दरवाजा बंद करके बच्चों को यहाँ पढ़ाया गया। जानकारी के मुताबिक इस मदरसे में 600 छात्राएँ पढ़ती हैं। 

उल्लेखनीय है कि मदरसे के संचालक पर बच्चियों को बंधक बनाकर रखने का आरोप लगा है। छात्राओं के परिजनों ने कहा है कि उन्होंने मदरसे के संचालक से छुट्टी के लिए कहा था। मगर न तो बच्चियों को छुट्टी दी गई और न ही उनसे उन्हें मिलने दिया गया। वहीं, मदरसे के मोहतमीम (मदरसे के प्रधानाध्यापक) अब्दुल्लाह अंसारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई दी। अंसारी और मदरसे के सचिव इदरीश अंसारी ने बताया कि मदरसे में परीक्षा चल रही थी। इसी कारण छात्रों को मदरसे में रखा गया।

एक ओर जहाँ लॉकडाउन के दौरान शिक्षण कार्य जारी रखने और अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई मदरसे के उच्च अधिकारियों द्वारा दी जा रही है। तो दूसरी ओर ये बात निकलकर सामने आई है कि अभिभावकों की शिकायतें निराधार नहीं है। दरअसल, मदरसे में रह रही एक बच्ची ने खुद अपने परिजनों को सूचना दी थी कि उन्हें वहाँ जबरन बंधक बना कर रखा गया है। इसके बाद ही पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई और ग्रामीण एसपी, रातू सीओ, रातू थाना प्रभारी सहित अन्य अधिकारी मौक़े पर पहुँचे।

पहले पुलिस प्रशासन को मदरसे का गेट बाहर से बंद मिला। लेकिन जब पुलिस ने गेट तोड़ा तो वहाँ पर बच्चियाँ मौजूद थीं। अधिकारियों ने फौरन बच्चियों को बाहर निकाला और अभिभावकों को बुलाकर उन्हें उनके-उनके घर भेजा। खबरों के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान हॉस्टल में 500 छात्राएँ मौजूद थीं।

इसके बाद मदरसे के संचालक पर लॉकडाउन उल्लंघन के लिए एफआईआर की माँग हुई। हालाँकि अभी ये पुष्टि नहीं हुई है कि अब्दुल्ला अंसारी पर केस दर्ज हुआ कि नहीं। लेकिन पुलिस ने आरोपितों को हिरासत में लेकर कार्रवाई की बात की है। बता दें परिजनों ने पुलिस को बताया कि बच्चियों की छुट्टी 18 मार्च को ही कर दी गई थी। लेकिन फिर भी सभी को रोककर रखा गया और उन्हें बंधक बनाया गया।

घर-घर जरूरत का सामान पहुँचाएगी योगी सरकार, आपूर्ति के काम में लगाए जाएँगे 10000 वाहन

कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की है। इसके बाद लोगों में जरूरी सामानों को घरों में इकट्ठा करने की होड़ सी मच गई थी। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश की जनता के लिए घरों तक जरूरी सामान पहुँचाने की घोषणा की है। मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई की चेन को मजबूत कर लिया गया है। हम लोगों ने इसकी पहले से ही तैयारी कर रखी है। उन्होंने प्रदेश की 23 करोड़ जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार के पास सभी चीजों का पर्याप्त भंडार है। लेकिन खरीददारी के लिए लोग अपने घरों ने बाहर न निकलें।

CM योगी ने लोगों को राहत देते हुए घोषणा की कि बुधवार से सब्जी, फल, दूध, दवा और अन्य आवश्यक वस्तुएँ लोगों के दरवाजे पर पहुँचाया जाएगा। इस काम के लिए सरकार ने करीब दस हजार वाहनों को तैयार किया गया है। इस काम के लिए पीआरवी-112 के वाहन, 108 और 102 सेवा की एंबुलेंस, प्रशासन और खाद्य और रसद विभाग के वाहन और संसाधन का प्रयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि वे अपने परिवार के आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए बाजार न जाएँ और अपने घरों में ही रहें। साथ ही सामाजिक दूरी भी बनाए रखें।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में अब तक कोरोना संक्रमण के 32 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं पूरे देश में कोरोना के चलते अब तक 11 मौतें हो चुकी हैं, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 के पार पहुँच गई है। यही कारण है कि तेज़ी से बढ़ते इस वायरस की रोकथाम के लिए सरकार ने पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसकी घोषणा करते हुए लोगों से अपील की थी कि देश हित में लोग घरों से बाहर न निकलें।

अब राँची की मस्जिद में छिपे मिले 11 विदेशी मौलवी, 3 चीनी: क्वारेंटाइन में भेजे गए

झारखंड की राजधानी राँची के एक जिले में स्थित मस्जिद से 11 विदेशी मौलवियों को पुलिस प्रशासन ने हिरासत में लिया है। इससे पहले बिहार के पटना में 12 विदेशियों को एक मस्जिद से हिरासत में लिया गया था। राँची में तमाड़ जिले स्थित राड़गाँव मस्जिद में छिपे मौलवियों में से 3 मौलवी चीन से हैं, जबकि 4-4 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से हैं।

पड़ताल के दौरान प्राप्त पहचान पत्रों से इनकी शिनाख्त चीन के मा मेंनाई, ये देहाइ, मा मेरली, किर्गिस्तान के नूर करीम, नारलीन, नूरगाजिन, अब्दुल्ला और कजाकिस्तान के मिस्नलो, साकिर, इलियास आदि के रूप में हुई है। पटना मामले की तरह इन मौलवियों ने भी खुद को अब तक पूछताछ में मजहब प्रचारक बताया है। इनका कहना है कि इन्होंने 1 महीने से भारत के विभिन्न मस्जिदों में पनाह ली और 19 मार्च को राँची से बस द्वारा जमशेदपुर जाने के दौरान तमाड़ में रड़गाँव के पास स्थित एक मस्जिद में रुके। यानी ये सभी राँची के इस मस्जिद में पिछले 5 दिन से थे।

हालाँकि, पहले इनके बारे में किसी को कोई खबर नहीं थी। लेकिन कोरोना वायरस के कारण फैलती अफवाहों के बीच इनके मस्जिद में छिपे होने की खबर मालूम पड़ी। जानकारी पाते ही ग्रामीणों में कानाफूसी शुरू हुई। लोग एक-दूसरे से इनके बारे में बात करने लगे। आखिर में इनकी सूचना प्रशासन को मिली।

दैनिक जागरण के रॉंची संस्करण में 25 मार्च 2020 को प्रकाशित खबर

मामले की जानकारी पाते ही प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी मस्जिद पहुँचे। जहाँ उन्हें ये 11 विदेशी मौलवी छिपे मिले। पुलिस ने इन्हें हिरासत में लेकर अपनी जाँच पड़ताल की। फिर इन सभी को सुरक्षा लिहाज से क्वारेंटाइन के लिए मुसाबनी स्थिति कांस्टेबल ट्रेनिंग स्कूल भेज दिया गया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, डीएसपी अजय कुमार ने बताया, “कोरोनावायरस के प्रभाव के कारण पुलिस ने काफी सावधानी बरतते हुए सभी के कागजात की जाँच की जा रही है। सभी के वीजा-पासपोर्ट भी जब्त किए गए हैं।”

गौरतलब है कि बिहार के पटना मामले में भी पड़ताल के दौरान मालूम हुआ था कि सभी विदेशी मजहब का प्रचार करने वहाँ आए थे। लेकिन यहाँ इन्हें अपने काम (मजहब प्रचार) को करने के लिए अशोक राजपथ पर नूरी मस्जिद स्थित तबलिगी जमायत मुख्यालय जाना था। इस दौरान इन लोगों ने अपनी जाँच भी नहीं करवाई थी और स्थानीयों को संदेह होने पर इनके बारे में प्रशासन को मालूम पड़ा था।

मौलवियों ने कहा- काफिरों को इस्लाम में बदलो, लेकिन उसके कारण कामयाब न हो पाया मिरखशाह

भगवान झूलेलाल जयंती सिंधी समाज में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। हिंदू पञ्चाङ्ग के अनुसार झूलेलाल जयंती चैत्र मास की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि झूलेलाल जी भगवान वरुणदेव के अवतार हैं। भगवान झूलेलाल की जयंती को सिंधी समाज चेटीचंड के रूप में मनाता है। यह सिंधी नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। चेटीचंड हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन अर्थात चैत्र शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। सिंधी समाज में मान्यता है कि जल से ही सभी सुखों और मंगलकामना की प्राप्ति होती है इसलिए इसका विशेष महत्व है।

चेटीचंड सिंधियों का प्रमुख त्योहार है और सिंधी नववर्ष भी। हिन्दू नववर्ष का पहला माह ‘चैत्र’ होता है और सिंधी में इसे ‘चेट’ कहते हैं। इसी वजह से इस उत्सव को ‘चेट-ई-चंड’ कहते हैं। यह दिन सिंधियों के इष्ट देव उदेरोलाल झूलेलाल की जयंती होती है। इसी कारण से सिंधियों में यह पर्व अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

जन्म की कहानी

सिंध में मोहम्मद बिन कासिम ने अंतिम हिन्दू राजा दाहिर को विश्वासघात कर हरा दिया। इसके बाद सिंध को अल-हिलाज के खलीफा द्वारा अपने राज्य में शामिल किया गया। इसके बाद खलीफा के प्रतिनिधियों द्वारा सिंध में शासन-प्रशासन चलाया गया। इस्लामिक आक्रमणकारियों ने पूरे क्षेत्र में तलवार की नोंक पर लगातार धर्मांतरण किया और इस्लाम को फैलाया।

इसके बाद 10वीं शताब्दी में सिंध स्योमरा राजवंश (SOOMRA Dynasty) के शासन में आया। सिंध क्षेत्र में इस्लाम में मतांतरित होने वाले स्थानीय लोगों में यह सबसे पहले थे। इनकी पूरी जाति इस्लाम में मतांतरित हो चुकी थी। ये समुदाय ना ज्यादा धार्मिक था ना ही ज्यादा कट्टरपंथी। इस्लाम के आक्रमण के बाद यही दौर अपवाद रहा जिसने कट्टरपंथ और तलवार की नोंक पर इस्लाम को फैलाने पर जोर नहीं दिया।

सिंध की राजधानी थट्टा की अपनी अलग पहचान और अलग प्रभाव था। यहाँ का शासक मिरखशाह ना केवल अत्याचारी और दुराचारी था, बल्कि कट्टर इस्लामिक आक्रमणकारी था। उसने आसपास के क्षेत्र में इस्लाम को फैलाने के लिए अनेक आक्रमण किए और नरसंहार किया। मिरखशाह जिन सलाहकारों और मित्रों से घिरा हुआ था उन्होंने उसे सलाह दी थी कि ‘इस्लाम फैलाओ तो तुम्हें मौत के बाद जन्नत या सर्वोच्च आनंद प्रदान किया जाएगा।’

इसके बाद मिरखशाह ने हिंदुओं के ‘पंच प्रतिनिधियों’ को बुलाया और उन्हें आदेश दिया कि ‘इस्लाम को गले लगाओ या मरने की तैयारी करो।’ मिरखशाह की धमकी से डरे हिंदुओं ने इस पर विचार करने को कुछ समय मॉंगा जिस पर मिरखशाह ने उन्हें 40 दिन का समय दिया।

यह सर्वविदित है कि जब मनुष्य के लिए सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं तो वह ईश्वर के बारे में सोचता है। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के भगवद्गीता के उद्बोधन का उल्लेख करते हुए तत्कालीन ग्राम प्रमुख ने कहा- जब-जब पाप सीमा लॉंघती है और धर्म पर खतरा बढ़ता है तब-तब ईश्वर अवतार लेते हैं।

अपने सामने मौत और धर्म पर संकट को देखते हुए सिंधी हिंदुओं ने नदी (जल) के देवता वरुण देव की ओर रुख किया। चालीस दिनों तक हिंदुओं ने तपस्या की। उन्होंने ना बाल कटवाए, ना कपड़े बदले और ना भोजन किया। उपवास कर केवल ईश्वर की स्तुति और प्रार्थना कर रक्षा की उम्मीद लिए बैठे रहे। 40वें दिन स्वर्ग से एक आवाज़ आई- डरो मत, मैं तुम्हें उसकी बुरी नज़र से बचाऊँगा। मैं एक नश्वर के रूप में नीचे आऊँगा। नसरपुर के रतनचंद लोहानो के घर माता देवकी के गर्भ में जन्म लॅूंगा।

इसके बाद से सिंधी समाज इस 40वें दिन को आज भी ‘धन्यवाद दिवस’ के रूप में उत्सव मनाते हैं। इस घटना के बाद हिंदुओं ने मिरखशाह से जाकर अपने ईश्वर के आने तक रुकने की प्रार्थना की। मिरखशाह अहंकार में डूबा था और ‘भगवान’ से भी लड़ लेने की उत्सुकता में उसने हिंदुओं को कुछ दिन का और समय दिया। 3 महीने के बाद आसू माह (आषाढ़) की दूसरी तिथि में माता देवकी ने गर्भ में शिशु होने की पुष्टि की। इसके बाद पूरे हिन्दू समाज ने जल देवता का प्रार्थना कर अभिवादन किया। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन आकाश से बेमौसम मूसलाधार बारिश हुई और माता देवकी ने एक चमत्कारी शिशु को जन्म दिया। भगवान झूलेलाल के जन्म लेते ही उनके मुख को खोला गया, जिसमें सिंधु नदी के बहने का दृश्य था। पूरे हिन्दू समुदाय ने बच्चे के जन्म लेते ही गीतों और नृत्यों के साथ उसका स्वागत किया।

नामकरण

झूलेलाल जी का नाम बचपन में उदयचंद रखा गया। उदयचंद को उदेरोलाल भी कहा जाने लगा। नसरपुर के लोगों ने प्यार से बच्चे को अमरलाल (Immortal) कहने लगे। जिस पालने में वह रहते थे वह अपने आप झूलने लगता था, जिसके बाद ही उन्हें झूलेलाल कहा जाने लगा और वह इसी नाम से लोकप्रिय हुए।

मिरखशाह के मंत्री और भगवान झूलेलाल

रहस्यमय और चमत्कारी बच्चे के जन्म की बात सुनकर मिरखशाह ने पंचों को अपने दरबार में बुलाया। लेकिन इस बार सिंधी हिन्दू समुदाय पूरी तरह आश्वस्त था कि उनका उद्धारक अब आ चुका है। मिरखशाह को जब जल देवता की बच्चे (झूलेलाल जी) के रूप जन्म लेने की बात पता चली तो उसने सबके सामने उसका जमकर मजाक उड़ाया। मिरखशाह ने कहा- ना तो मैं मरने जा रहा हूँ और ना ही तुम लोग यह जमीन जिंदा छोड़ने जा रहे हो। मैं तुम्हारे उस उद्धारक से ही इस्लाम कबूल करवाऊँगा और उसके बाद तुम लोग भी यही करोगे।

मिरखशाह ने अपने एक मंत्री अहिरियो से उस बच्चे को जाकर देखने को कहा। अहिरियो गुलाब के फूल में जहर मिलाकर अपने साथ लेकर बच्चे से मिलने गया। जब अहिरियो ने बच्चे को देखा तो वह पूरी तरह चौंक गया। उसने झूलेलाल जी को जहर से भरा गुलाब का फूल दिया जिसे झूलेलाल जी ने रख लिया। फिर एक फूॅंक में गुलाब को उड़ा दिया। इसके बाद अहिरियो ने देखा कि एक बूढ़ा व्यक्ति उसके सामने था। फिर अचानक वह 16 वर्ष के किशोर में बदल गया। इसके बाद अहिरियो ने झूलेलाल जी को घोड़े पर बैठे और हाथ में धधकती तलवार के साथ देखा। उसके पीछे और योद्धा भी थे। यह सब देखकर अहिरियो भाग खड़ा हुआ।

अहिरियो ने मिरखशाह को आकर सारी जानकारी दी। लेकिन मिरखशाह ने इसे मजाक समझा। मिरखशाह ने इसे सामान्य जादू या आँखों का धोखा कहा। लेकिन उसी रात मिरखशाह के सपने में भी कुछ दिखा। मिरखशाह ने देखा कि एक बच्चा उसकी गर्दन पर बैठा हुआ है। फिर वह बूढ़ा बन गया और इसके बाद तलवार पकड़ा हुआ एक योद्धा भी बन गया। अगली सुबह मिरखशाह ने अहिरियो को बुलाकर उस बच्चे से निपटने के आदेश दिए, लेकिन अहिरियो ने जल्दबाजी नहीं करने की सलाह दी।

चमत्कार

इन सब के बीच, बालक उदेरोलाल (भगवान झूलेलाल) चमत्कार कर रहा था। नसरपुर के लोग पूर्णतः आश्वस्त थे कि उन्हें बचाने साक्षात ईश्वर ने जन्म लिया है। उदेरोलाल ने गोरखनाथ से ‘अलख निरंजन’ का गुरु मंत्र भी प्राप्त किया। उदेरोलाल की सौतेली माँ उन्हें फल देकर बेचने भेजती थी। उदेरोलाल बाजार जाने के बजाए सिंधु तट पर जाकर उन्हें बुजुर्गों, बच्चों, भिक्षा मॉंगने वालों और गरीबों को दे देते थे। फिर खाली बक्से को लेकर वह सिंधु में डुबकी लगाते और जब निकलते तो वह बक्सा उन्नत किस्म के चावल से भरा होता जिसे ले जाकर वह अपनी माँ को दे देते। रोज-रोज उन्नत किस्म के चावल को देख एक दिन उनकी मॉं ने उनके पिता को भी साथ भेजा। जब रतनचंद ने छिपकर उदेरोलाल (भगवान झूलेलाल) का यह चमत्कार देखा तो उन्होंने झुककर उन्हें प्रणाम किया और उन्हें साक्षात ईश्वर के रूप में स्वीकार किया।

मिरखशाह और भगवान झूलेलाल

मिरखशाह के ऊपर मौलवी लगातार हिंदुओं को इस्लाम में लाने का दबाव डाल रहे थे। उन्होंने उसे अल्टीमेटम दिया। काफिरों को इस्लाम में बदलने का आदेश दिया। मौलवियों की बात और अपने अहंकार में मिरखशाह ने उदेरोलाल से खुद मिलने का फैसला किया। उसने अहिरियो से मिलने की व्यवस्था करने को कहा। अहिरियो, जो इस बीच में जलदेवता का भक्त बन गया था, सिंधु के तट पर गया और जल देवता से अपने बचाव में आने की विनती की। अहिरियो ने एक बूढ़े आदमी को देखा, जिसकी सफेद दाढ़ी थी, जो एक मछली पर तैर रहा था। अहिरियो का सिर आराधना में झुका और उन्होंने समझा कि जल देवता उदेरोलाल हैं। फिर अहिरियो ने एक घोड़े पर उदेरोलाल को छलांग लगाते हुए देखा और और उदेरोलाल एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में एक झंडा लिए हुए निकल गए।

मिरखशाह जब उदेरोलाल जी के सामने आया तो उन्हें भगवान झूलेलाल (उदेरोलाल) ने ईश्वर का मतलब समझाया। लेकिन कट्टरपंथी मौलवियों की बातें और इस्लामी कट्टरपंथ के जूनून में मिरखशाह सभी बातों को अनदेखा कर अपने सैनिकों को झूलेलाल जी गिरफ्तार करने का आदेश देता है। जैसे ही सैनिक आगे बढ़े वैसे ही पानी की बड़ी-बड़ी लहरें आँगन को चीरती हुई आगे आ गई। आग ने पूरे महल को घेर लिया और सब कुछ जलना शुरू हो गया। सभी भागने के मार्ग बंद हो गए। उदेरोलाल (भगवान झूलेलाल) ने फिर कहा- मिरखशाह इसे खत्म करो! आखिर तुम्हारे और मेरे भगवान एक हैं तो फिर मेरे लोगों को तुमने क्यों परेशान किया?

मिरखशाह घबरा गया और उसने झूलेलाल जी से विनती की- मेरे भगवान, मुझे अपनी मूर्खता का एहसास है। कृप्या मुझे और मेरे दरबारियों को बचा लो। इसके बाद सारी जगह पानी की बौछार आई और आग बुझ गई। मिरखशाह ने सम्मानपूर्वक नमन किया और हिंदुओं और मुस्लिमों के साथ एक जैसा व्यवहार करने के लिए सहमत हुआ। इससे पहले कि वे तितर-बितर होते, उदेरोलाल ने हिंदुओं से कहा कि वे उन्हें प्रकाश और पानी का अवतार समझें। उन्होंने एक मंदिर बनाने के लिए भी कहा। उन्होंने कहा- मंदिर में एक मोमबत्ती जलाओ और हमेशा पवित्र घूॅंट के लिए पानी उपलब्ध रखो। यहीं उदेरोलाल ने अपने चचेरे भाई पगड़ को मंदिर का पहला ठाकुर (पुजारी) नियुक्त किया। भगवान झूलेलाल ने पगड़ को सात सिंबॉलिक चीजें दी। भगवान झूलेलाल ने पगड़ को मंदिरों के निर्माण और पवित्र कार्य को जारी रखने का संदेश दिया।

सांसारिक त्याग

थिझर गॉंव के पास एक स्थान का चयन करते हुए भगवान झूलेलाल जी ने अपना सांसारिक रूप त्याग दिया। इस घटना को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। जैसे ही उनकी आत्मा निकली हिंदुओं और मुस्लिमों में फिर उस स्थल पर समाधि और दरगाह बनाने को लेकर बहस छिड़ गई। इसके बाद आकाशवाणी हुई- ऐसा धर्मस्थल बनाया जाए जिसमें हिन्दू और मुस्लिम दोनों आ सके।

निष्कर्ष

भगवान झूलेलाल ने अपने चमत्कारिक जन्म और जीवन से ना सिर्फ सिंधी हिंदुओं के जान की रक्षा की बल्कि हिन्दू धर्म को भी बचाए रखा। मिरखशाह जैसे ना जाने कितने इस्लामिक कट्टरपंथी आए और धर्मांतरण का खूनी खेल खेला। लेकिन भगवान झूलेलाल की वजह से सिंध में एक दौर में यह नहीं हो पाया। भगवान झूलेलाल आज भी सिंधी समाज के एकजुटता, ताकत और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र हैं।

भगवान झूलेलाल ने अपने भक्तों से कहा कि मेरा वास्तविक रूप जल एवं ज्योति ही है। इसके बिना संसार जीवित नहीं रह सकता। उन्होंने समभाव से सभी को गले लगाया तथा साम्प्रदायिक सद्भाव का संदेश देते हुए दरियाही पंथ की स्थापना की।

सिंधी समुदाय को भगवान राम का वंशज माना जाता है। महाभारत काल में जिस राजा जयद्रथ का उल्लेख है वो सिंधी समुदाय का ही था। सिंधी समुदाय चेटीचंड पर्व से ही नववर्ष प्रारम्भ करता है। चेटीचंड के अवसर पर सिंधी भाई अपार श्रद्धा के साथ झूलेलाल की शोभायात्रा निकालते हैं। इस दिन सूखोसेसी प्रसाद वितरित करते हैं। चेटीचंड के दिन सिंधी स्त्री-पुरुष तालाब या नदी के किनारे दीपक जला कर जल देवता की पूजा-अर्चना करते हैं।

संकट की घड़ी में ‘द लायर’ ने पेश किए देश के लोगों को डराने वाले आँकड़े, जबकि भारत की तैयारी मरीजों की तुलना में बेहतर

चीन के बुहान शहर से निकला कोरोना वायरस का कहर आज पूरे विश्व में फैल चुका है। हर कोई इसकी रोकथाम के लिए लगा हुआ है। कोई इससे बचने के उपाय बता रहा है तो कोई घरों से बाहर न निकलने की नसीहत दे रहा है। वहीं आज भारत के प्रधानमंत्री ने पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा कर दी है, लेकिन इन सभी सकारात्मक अपील और सकारात्मक खबरों के बीच प्रोपेगेंडा फैलाने वाले पोर्टल ‘द वायर’ ने अपनी एक खबर में केन्द्र सरकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लोगों के सामने डराने वाले मेडिकल से जुड़े आँकडे पेश किए हैं।

‘द वायर’ अर्थात ‘द लायर’ ने अपने लेख की शुरूआत कुछ ऐसी हेडलाइन से की है कि उसे पढ़कर कोई भी व्यक्ति इस बात से भयभीत हो सकता है कि अगर मुझे कोरोना हो भी गया तो इसका किसी भी हाल में सही तरीके से इलाज नहीं मिल पाएगा और मैं मौत के मुँह में चला जाउँगा, क्यों कि ‘द लायर’ की रिपोर्ट कुछ ऐसी है। लायर ने लिखा है कि देश के 84,000 लोगों पर एक आइसोलेशन बेड और 36,000 लोगों पर एक क्वारंटाइन बेड है। दरअसल यह आँकड़े देश की पूरी जनसंख्या के हिसाब से पेश किए गए हैं और उसी जनसनसंख्या पर आइसोलेशन के और क्वारंटाइन बेडों की गिनती कर दी गई है, जबकि लायर ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि बेड खाने की रोटी नहीं बल्कि मरीजों के बेहतर इलाज के लिए होते हैं। तो फिर आइसोलेशन और क्वारंटाइन बेड की संख्या का देश की जनसंख्या से क्या संबंध है।

वायर की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट
द वायर ने लोगों को निराश करने वाले आँकड़े किए पेश

अगर बात करें देश में कोरोना आने से पूर्व की तो केन्द्र सरकार ने दिल्ली में सबसे पहला आइसोलेशन सेंटर बना दिया था। देश में कोरोना का मरीज पाए जाने के बाद की बात करें तो आज भी देश में कोरोना से संक्रमित लोगों की जितनी संख्या है उतनी संख्या का योगी सरकार ने गाजियाबाद के हज हाउस को आइसोलेसन सेंटर बना दिया था। तो उत्तर प्रदेश के स्थिति की बात करें तो अकेले लखनऊ में 1268 से अधिक क्वारंटाइन बेड हैं। वहीं राजस्थान में 500 बेड का आइसोलेशन बेड, छत्तीसगढ़ में 1500 मरीजों के लिए क्वारंटाइन बेड और 450 मरीजों के लिए आइसोलेशन बेड हैं, आंध्र प्रदेश की हर विधानसभा में 100 आइसोलेशन बेड की सुविधा है। झारखंड में 200 आइसोलेशन बेड की सुविधा, दिल्ली में 768 आइसोलेशन बेड की सुविधा, कर्नाटक में 1700 बेड, पश्चिम बंगाल में 150 आइसोलेशन बेड, वहीं बिहार में 500 बेड का आइसोलेशन बेड तैयार हैं।

द वायर ने लोगों को भ्रमित करने वाले दिए आँकड़े

देश में इन चिकित्सा सुविधाओं, सरकार की गंंभीरता और देश की जागरुकता का ही परिणाम है कि 133 करोड़ आबादी वाले देश में कोरोना सबसे धीमी गति से फ़ैल रहा है, लेकिन द लायर जैसे पोर्टल को शायद देश में इटली जैसी तबाही का इंतजार है। खैर, देश की जनता कोरोना से जंग लड़ने के लिए तैयार है और जल्द ही इसमें लोगों को विजय मिलेगी। आपको बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक दिन जनता कर्फ्यू लगाने के बाद 21 दिन के पूरे देश में लॉकडाउन करने की घोषणा की है, इस फैसले का देश की जनता ने स्वागत भी किया है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस से देश में अब तक दस लोगो की मौत हो चुकी है, जबकि 519 लोग इससे संक्रमित पाए गए हैं।

कोरोना से सिंगापुर में एक भी मौत नहीं: शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ ने शेयर किया पुराना डेटा, लगी लताड़

पीएम मोदी की बुराई के चक्कर में वामपंथी किसी भी हद तक जा सकते हैं। शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ ने दावा किया है कि सिंगापुर में कोरोना वायरस के कारण एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। ‘द प्रिंट’ ने 18 मार्च को एक लेख लिखा और फिर से 24 मार्च को इसे रीपब्लिश किया। शायद उसे पता नहीं था कि इस बीच सिंगापुर में कोरोना वायरस के कारण 2 लोगों की जान जा चुकी है। यहाँ तक कि इसके संस्थापक और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के अध्यक्ष शेखर गुप्ता ने भी ट्विटर पर इस ख़बर को शेयर करते हुए दावा किया कि सिंगापुर में कोरोना के 266 मामले सामने आए हैं लेकिन एक भी मृत्यु नहीं हुई है।

साथ ही उन्होंने ये भी दावा किया कि वहाँ पर ‘इन्फेक्शन रेट’ बाकी दुनिया से एकदम अलग है। साथ ही उन्होंने लिखा कि ये सब बिना लॉकडाउन के ही संभव हुआ। हालाँकि, आज ही ख़बर आई है कि सिंगापुर के दो इंटरनेशनल स्कूलों के बच्चों के 6 पेरेंट्स कोरोना वायरस के शिकार हो गए हैं। वहाँ के अधिकतर स्कूल ‘रिमोट लर्निंग’ पर काम कर रहे हैं ताकि बच्चों को स्कूल न जाना पड़े। कोरोना वायरस से दुनिया भर में दहशत फ़ैल रहा है।

कोरोना को लेकर शेखर गुप्ता का ग़लत डेटा

भारत के विभिन्न राज्यों में कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन की घोषणा की गई है। कई जगहों पर कर्फ्यू भी लगा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दूसरी बार राष्ट्र को सम्बोधित किया हैं। वहीं कई लोगों ने ‘द प्रिंट’ को उसकी हरकत के लिए लताड़ लगाई। लोगों ने कहा कि मोदी विरोधी मीडिया हमेशा भाजपा के विरोध के चक्कर में फेक न्यूज़ को भी शेयर करने से नहीं हिंचकता।