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27 सिखों का हत्यारा ISIS आतंकी भारत का, कश्मीरी मुस्लिमों का बदला लेने के लिए गुरुद्वारे पर हमला

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले में कश्मीर कनेक्शन निकला है। मालूम चला है कि 150 सिखों पर हमला करने वाले आतंकियों में से एक भारत का जिहादी था जिसने कश्मीर मुस्लिमों का बदला लेने की नियति से इसको अंजाम दिया। इतना ही नहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट में खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ये आतंकी पहले भारतीयों को मारने के लिए काबुल स्थित इंडियन एंबेसी को निशाना बनाने आए थे। लेकिन वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखकर आतंकियों ने गुरुद्वारे को निशाना बनाया।

इस हमले की जिम्मेदारी IS ने ली है। जिस बंदूकधारी ने गुरुद्वारे में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पर ताबड़तोड़ गोली चलाई वो भारत से था। आतंकी की पहचान अबु खालिद अल हिंदी के रूप में हुई है। इंटेलीजेंस ग्रुप SITE के मुताबिक खालिद ने कश्मीर का बदला लेने के लिए इस हमले को अंजाम दिया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने इस तरह के हमले को लेकर आगाह कर रखा था। इसमें कहा गया था कि अफगानिस्तान से भारत को बाहर ​निकालने के मकसद से आतंकी साजिशें रची जा रही है। इन इनपुट के आधार पर एंबेसी की सुरक्षा के इंतजाम सख्त कर दिए गए थे। इसके कारण आतंकी अपने मूल उद्देश्य को अंजाम नहीं दे पाए।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गुरुद्वारे को इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि ये एक सॉफ्ट टारगेट था। उनके मुताबिक, उनके मुताबिक, काबुल में भारतीय दूतावास पर और जलालाबाद में वाणिज्य दूतावास पर आतंकी हमले को लेकर काफी समय से अलर्ट जारी है। जिसके कारण वहाँ सुरक्षा को बढ़ा दिया गया था और एंबेसी के बाहर अधिक सैन्य टुकड़ी तैनात की गई थी। इसलिए यह उनके लिए आसान लक्ष्य नहीं था। तभी उन्होने गुरुद्वारे को हमले के लिए अपना टारगेट बनाया।

बता दें, 25 मार्च की सुबह अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सिखों को निशाना बनाकर भीषण आतंकी हमला किया गया था। सुबह के करीब 7:45 बजे ये हमला हुआ। उस वक्त वहॉं 150 श्रद्धालु मौजूद थे। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए। यहाँ सबसे पहले एक फिदायीन हमलावर ने खुद को उड़ाया। फिर उसके बंदूकधारी साथियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। घटना की सूचना मिलते ही अफगान सुरक्षाबल एक्शन में आ गए। 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया। गुरुद्वारे में फँसे लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया और थोड़ी देर में हमले की जिम्मेदारी आईएस ने ले ली।

महाराष्ट्र में एक ही परिवार के 12 सदस्य कोरोना पॉजिटिव, 4 हज करके लौटे थे

भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र है। राज्य में एक ही परिवार के 12 लोग कोरोना पॉजीटिव पाए गए हैं। इस परिवार के चार सदस्य पिछले दिनों हज कर लौटे थे। इसी के साथ राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 124 हो गई है। इस मामले के सामने आने के बाद राज्य में हड़कंप मच गया है। उन लोगों को चिह्नित कर आइसोलेट किया जा रहा है, जो लोग किसी न किसी तरह से इन लोगों के संपर्क में आए।

जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के सांगली जिले के इस्लामपुर गॉंव के रहने वाले एक ही परिवार के 12 लोगों को कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। बीते दिनों इस परिवार के हज से लौटे 4 सदस्यों को आइसोलेशन में रखा गया था। जब 23 मार्च को इनकी रिपोर्ट आई तो सभी कोरोना पॉजीटिव पाए गए। इसके बाद परिवार के 5 अन्य सदस्यों का भी टेस्ट किया गया। वे सभी भी कोरोना पॉजीटिव निकले। फिर मेडिकल टीम ने परिवार के शेष 3 अन्य लोगों को टेस्ट के लिए बुलाया। जाँच में ये तीनों भी पॉजिटिव पाए गए।

अब इस गाँव के साथ पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है और मेडिकल टीम पूरे गाँव मे घूम-घूम कर लोगों से सैंपल ले रही है। डॉक्टरों की टीम ने 23 लोगों के सैंपल लिए हैं। इन सभी लोगों को उनके घरों में ही क्वारेंटाइन किया गया है। डॉक्टरों को इस बात का डर है कि कोरोना की ये कड़ी काफी लंबी भी हो सकती है। साथ ही डॉक्टरों ने परिवार के साथ कई सारे करीबी रिश्तेदारों को भी आइसोलेट कर दिया है। महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण से अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है। मुंबई के अस्पतालों से मंगलवार को 12 लोगों को सफलतापूर्वक इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई थी।

सस्ते लोन-EMI पर तीन महीने की छूट, RBI ने कोरोना संकट में खोले राहत के दरवाजे

कोरोना वायरस और उसके कारण हुए लॉकडाउन से नुकसान को देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री के पैकेज के बाद अब RBI ने कई राहत दी है। लॉकडाउन की वजह से इनकम लॉस हो रहा है और ऐसे में आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती कर ईएमआई और घटने का रास्ता साफ कर दिया है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने पहले से चले आ रहे लोन के ईएमआई के भुगतान पर भी 3 महीने का मोरेटोरियम लगा दिया है। इससे तीन महीने तक लोगों को ईएमआई के भुगतान से राहत मिल गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को घोषणा की कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों, NBFC (हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों सहित) और ऋण संस्थानों सहित सभी वाणिज्यिक बैंकों को 1 मार्च को बकाया सभी ऋणों के लिए किश्तों के भुगतान पर 3 महीने की मोहलत देने की अनुमति दी जा रही है। इसके अलावा सभी लोन देने वाली संस्थाओं को वर्किंग कैपिटल लोन पर ब्याज के भुगतान पर भी 3 महीने की अनमुति दी गई है। 

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने नीतिगत ब्याज दरों में बड़ी कटौती की है। रेपो रेट 0.75 फीसदी की कटौती के साथ 4.4% हो गया है। कटौती के इस ऐलान से लोन की मासिक किस्तें घटेंगी, जो आम लोगों के लिए राहत की बात है। आरबीआई की रेपो रेट कटौती का फैसला ऐतिहासिक है। यह कटौती आरबीआई इतिहास की सबसे बड़ी है। बता दें कि बीते दो मौद्रिक समीक्षा बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को लेकर कोई फैसला नहीं लिया था।

रेपो रेट कटौती का फायदा होम, कार या अन्य तरह के लोन सहित कई तरह के ईएमआई भरने वाले करोड़ों लोगों को मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही नए लोन लेने वाले ग्राहकों को भी फायदा मिलेगा। वहीं आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में भी 90 बेसिस प्वाइंट कटौती करते हुए 4 फीसदी कर दी है।

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर 3 प्रतिशत कर दिया गया है। यह एक साल तक की अवधि के लिए किया गया है। गवर्नर के मुताबिक सभी कमर्शियल बैंकों को ब्याज और कर्ज अदा करने में 3 महीने की छूट दी जा रही है। इस फैसले से 3.74 लाख करोड़ रुपए की नकदी सिस्टम में आएगी। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से डिजिटल बैंकिंग की सलाह दी है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और मजबूत है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और मजबूत है। हाल के दिनों में शेयर बाज़ार में कोरोना वायरस से संबंधित अस्थिरता ने बैंकों के शेयर की कीमतों को प्रभावित किया, जिसका नतीजा ये हुआ कि लोगों ने घबराकर कुछ निजी क्षेत्र के बैंकों से जमा राशि निकाल ली। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बात की काफी संभावना है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के कई हिस्से मंदी में जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुरुवार (मार्च 26, 2020) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस संकट के मद्देनजर गरीबों के लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि आर्थिक पैकेज की राशि का इस्तेमाल 10 करोड़ गरीबों के खाते में सीधे रकम ट्रांसफर करने और उद्योगों को राहत देने के लिए किया जाएगा।

इंडिया टुडे की फिर हुई बेइज्जती: मोदी सरकार के राहत पैकेज के पोस्टमॉर्टम में गणित से छेड़छाड़

भारत में कोरोना महामारी को रोकने के लिहाज़ से 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित हुआ है। केंद्र सरकार ने इस बंदी के कारण होने वाली परेशानियों पर खुलकर बात की है। सरकार ने बताया है कि वो मानती है कि गरीबों के लिए ये संकट की घड़ी है, लेकिन इसके अलावा देश को बचाने का कोई उपाय भी नहीं है। सरकार ने देश के गरीबों को इस स्थिति से लड़ने के लिए सिर्फ़ घर में बंद नहीं किया, बल्कि उनकी बुनियादी जरूरतों का भी ख्याल रखा है। इस कड़ी में गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1.70 लाख करोड़ रुपए का पैकेज रिलीज करने का ऐलान किया ताकि इस परिस्थिति से लड़ा जा सके। मगर, जिन्हें सरकार का विरोध ही करना है, वो किसी सराहनीय काम पर भी चुप क्यों रहें… जैसे ही सरकार ने इस फंड की घोषणा की, इंडिया टुडे की पत्रकार गीता मोहन ने एक चार्ट शेयर किया। चार्ट में यह दर्शाया गया कि अन्य देशों के मुकाबले ये फंड कितना कम है।

मगर, ये चार्ट बनाया किसने? तो बता दें इस चार्ट को डाटा इंटेलिजेंस यूनिट ने बनाया। इसमें दर्शाया गया कि 1.70 लाख करोड़ रुपए का फंड या फिर $22.5 बिलियन का मतलब हर व्यक्ति के हिस्से केवल $19 आता है, जो अन्य देशों द्वारा जारी किए गए फंड से बेहद कम है। जैसे जर्मनी में $7.281, यूके में $ 6,246 और यूएसए में $6,042 आदि।

इस चार्ट में कई तरह से दूसरे देशों की भारत से तुलना की गई ताकि ये साबित किया जाए कि सरकार अन्य देशों के मुकाबले कोरोना से लड़ने के लिए कम प्रयास कर रही है। लेकिन बता दें विभिन्न देशों द्वारा घोषित पैकेजों में और भारत द्वारा जारी पैकेज में कोई कम्पैटिबिलटी नहीं है, ये किसी भी रूप में तुलनीय नहीं हैं। अन्य देशों द्वारा घोषित अधिकांश पैकेज COVID-19 के प्रकोप के कारण होने वाले नुकसान से निपटने के लिए और अर्थव्यवस्था की मदद करने के लिए व्यापक उपाय के रूप में हैं। मगर भारत का पैकेज एक आर्थिक पैकेज नहीं है, ये एक कल्याणकारी पैकेज है जो केवल समाज के एक वर्ग को लक्षित करता है।

भारत के कल्याण पैकेज में रियायती खाद्यान्न, प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण, मनरेगा मजदूरी में वृद्धि, पेंशन, मुफ्त खाना, रसोई की गैस आदि शामिल हैं। इसके अलावा इसमें महामारी से लड़ने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बीमा के सिवा किसी वेतनभोगी वर्ग, या व्यापारियों के लिए कुछ भी नहीं है। दूसरी ओर, यूके द्वारा घोषित 424 बिलियन डॉलर का पैकेज व्यवसायों के लिए एक बचाव पैकेज है। इसमें व्यवसायों के लिए ऋण और अनुदान, एयरलाइनों, दुकानों और आतिथ्य उद्योग के लिए समर्थन शामिल हैं। इसके अलावा, आम नागरिकों के लिए मॉर्टेज पेमेंट सहायता भी इसी में शामिल है।

इसी तरह, संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा घोषित $2 ट्रिलियन पैकेज भी एक बेहद व्यापक पैकेज है। इसमें व्यक्तियों को सीधे भुगतान, छात्र ऋण का निलंबन, बेरोजगारी, COVID-19 महामारी, अनुदान द्वारा प्रभावित व्यवसायों के लिए $ 500 बिलियन का कर्ज जैसे कार्यक्रम शामिल है। एयरलाइंस और हवाई अड्डों के लिए और अस्पतालों के लिए $ 117 बिलियन का अनुदान भी इसी पैकेज का भाग है।

इंडिया टुडे के चार्ट में सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि उसमें दावा किया गया है कि फ्रांस ने 335 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पैकेज की घोषणा की है। मगर, फ़्राँसीसी मीडिया की रिपोर्ट है कि पैकेज वास्तव में $50 बिलियन (€ 45 बिलियन) का है और इस पैकेज का उद्देश्य व्यवसायों और कर्मचारियों की मदद करना है। रही बात 335 बिलियन डॉलर की तो वो बैंक गारंटी है।

इसी प्रकार, अन्य देश, जिनका उल्लेख इंडिया टुडे ने किया, उन सभी ने अपने देश की अर्थव्यवस्था बचाने के लिए इस तरह के पैकेजों की घोषणा की, जो अभी भारत को करना बाकी है। इसकी तुलना अन्य देशों से केवल अजेंडा चलाने के लिए किया जा रहा है। इतना ही नहीं अन्य देशों के साथ भारत की सीधी तुलना में एक और समस्या है, जो है क्रय शक्ति समता यानी ppp (purchasing power parity)। विभिन्न देशों की मुद्राओं में अलग-अलग क्रय शक्तियाँ होती हैं।

इन सबसे अतिरिक्त विरोधियों को ये ध्यान देने की जरूरत है कि आज कोरोना से सबसे शक्तिशाली देश तक प्रभावित हैं और बड़ी तादाद में वहाँ इसे फैलने से रोकने में विफलता मिली है। लेकिन हमारे देश में अब तक इसके 700 मामले आए हैं। अब तक 13 लोगों की मौत हुई है। इसे सरकार की लापरवाही नहीं कही जा सकती, क्योंकि देश में पहला कोरोना का मामला आने के बाद से सरकार ने हर मुमकिन कदम उठाए। फिलहाल भारत की परिस्थिति अन्य देशों से अलग है।

फिर भी अगर इंडिया टुडे के डेटा की बात करें, तो गौर रखिए कि अन्य देशों ने व्यापक स्तर पर नुकसान देखने के बाद इन पैकेजों की घोषणा की, जबकि भारत ने स्थिति हाथ से निकलने से पहले एक कल्याणकारी पैकेज की घोषणा की। अब आगे भी मुमकिन है कि सरकार अर्थव्यवस्था को पहुँचे नुकसान के लिए किसी पैकेज की घोषणा करे। जब सरकार ऐसा करेगी तब जाकर कहीं उसकी तुलना अन्य देशों द्वारा रिलीज किए फंड से करना उचित होगा।

इंडिया टुडे के इस चार्ट पर सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स ने सवाल उठाए, जिसे देखते हुए राहुल कंवल ने इसे अपने हिसाब से सही करके फिर पोस्ट किया। मगर, अफसोस कि इस बार भी इसमें कई गलती रह गई और राहुल कंवल को भी फजीहत का सामना करना पड़ा। यूजर ने दोबारा उन्हें उनकी गलतियाँ इंगित की।

मेरी 3 साल की बेटी के सिर में गोली मारी, वो बार-बार बोल रही थी- डैडी मुझे बचा लो…

एक बच्ची, जो 10 दिन बाद 4 साल की होने वाली थी। अपने चौथे जन्मदिन के लिए केक लाने की तैयारियों में जुटी थी। उसकी आवाज को एक झटके में गोली मारकर हमेशा के लिए चुप करा दिया गया। आखिरी वक़्त में वो सिर्फ़ यही बोल पाई- ‘डैडी, मुझे बचा लो, मुझे बचा लो डैडी…।’ सोचिए कितना दर्दनाक मंजर होगा उस पिता के लिए जिसने अपनी बिटिया को ऐसे दम तोड़ते देखा होगा।

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के एक गुरुद्वारे पर 25 मार्च को आतंकी हमला हुआ। 26 सिखों की मौत हो गई। इनमें 3 साल की तान्या और उसकी माँ सुरपाल कौल भी शामिल हैं। तान्या को याद करते हुए उसके पिता हरिंदर सिंह सोनी (40) ने बताया कि 10 दिन बाद उसका जन्मदिन था। वो चार साल की होने वाली थी। वो तो अपने जन्मदिन पर केक लाने की तैयारी कर रही थी।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस दर्दनाक पल को याद करते हुए हर राय साहिब गुरुद्वारे के कीर्तन सेवादार हरिंदर सिंह सोनी ने बताया कि कैसे एक हमले ने उनकी पूरी जिंदगी उजाड़ दी। उनका परिवार उनसे छीन लिया। वे बताते हैं कि इस हमले में उन्होंने सिर्फ अपनी बेटी तान्या और पत्नी सुरपाल कौर को ही नहीं खोया। अपने पिता निर्मल सिंह को भी खो दिया, जो कि गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी थे। ससुर भगत सिंह (75), भतीजा कुलविंदर सिंह खालसा और उनकी माँ बुरी तरह घायल हो गए। हमले के समय गुरुद्वारे में मौजूद न होने के कारण वे, उनके दो बच्चे (गगनदीप सिंह, गुरजीत कौर) और चार भाई ही परिवार में अब बाकी बचे हैं।

आज पूरे परिवार की स्थिति देखकर हरिंदर कहते हैं कि मैंने अफगानिस्तान में जन्म लिया है लेकिन अब समय आ गया है कि मैं अपनी माँ, बच्चों और भाइयों के साथ ये देश छोड़ दूँ। इससे पहले कि वे भी किसी हमले में मार दिए जाएँ। वो बताते हैं कि उनकी बिटिया के सिर में गोली मारी गई थी। वो बार-बार बोल रही थी, “डैडी मुझे बचा लो, मुझे बचा लो डैडी…” 

हरिंदर के मुताबिक, “उस दिन साढ़े 6 बजे रोज की तरह अरदास करने के लिए सब गुरुद्वारे में एकत्रित हुए। मैं स्टेज पर था। वहाँ 100 से ज्यादा श्रद्धालु थे। तभी एक श्रद्धालु की चिल्लाने की आवाज आई, चोर आ गए हैं, डाकू आए हैं। बस इसके बाद वहाँ हड़कंप मच गया।” वे कहते हैं कि गुरुद्वारे में 4 आतंकी घुसे और ताबड़तोड़ गोली चलानी शुरू कर दी। मैं स्टेज पर था। मेरे भतीजे ने मुझे नीचे उतारा। मगर जैसे ही मैं नीचे आया मेरी बेटी और पत्नी का शव मुझ पर आ गिरा। उनके अनुसार, आतंकियों का कहर 4 घंटे जारी रहा। इस दौरान उन आतंकियों ने कोशिश की कि हर श्रद्धालु के सिर पर गोली मारी जाए। लेकिन उनकी पत्नी और पिता के छाती में गोली लगी। इस बीच मोहर्रम अली नाम का सुरक्षा गार्ड भी भेंट चढ़ा। वो गुरुद्वारे में 5 साल से काम करता था, सबसे पहले उसे ही गोली मारी गई।

हरिंदर के अनुसार, अफगानिस्तान में करीब 80 सिख परिवार बचे हैं। ज्यादातर काबुल, जलालाबाद और गजनी में रहते हैं। इनमें से अधिकतर ने आतंकी हमले में किसी न किसी अपने को खोया है। अब शायद ही कोई परिवार यहाँ हो जिनका कोई अपना इस हमले में नहीं मरा। इसलिए सब यहाँ से जाना चाहते हैं। खुद 40 वर्ष उस देश में गुजार चुके हरिंदर कहते हैं, “पहले मुझे लगता था कि अफगानिस्तान मेरा देश हैं। पर अब नहीं। मैं यहाँ बिलकुल नहीं रहना चाहता।” उनसे जब पूछा गया कि वे कहाँ जाएँगे तो उन्होंने सिर्फ़ यही कहा, जहाँ पनाह मिलेगी चले जाएँगे पर अब यहाँ नहीं रहेंगे।

शनिवार से दूरदर्शन पर लौटेगा 80 का वो दौर, लॉकडाउन के बीच रामायण का फिर से होगा प्रसारण

रामानंद सागर की ‘रामायण’ को भला कोई भूल सकता है! 80 के दशक के आखिर में इस सीरियल ने सफलता की जो इबारत लिखी वह ऐतिहासिक साबित हुआ। टीवी की दुनिया में वैसा जादू फिर से दोहराया न जा सका। रामानंद सागर की रामायण को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है, “जनता की माँग पर हम कल (शनिवार, 28 मार्च) से डीडी नेशनल पर ‘रामायण’ का पुन: प्रसारण शुरू कर रहे हैं। एक एपिसोड सुबह 9 बजे से सुबह 10 बजे और दूसरा रात के 9 बजे से 10 बजे के बीच प्रसारित होगा।”

बता दें कि 21 दिनों के लॉकडाउन की वजह से लगातार रामायण के दोबारा प्रसारण की माँग उठाई जा रही थी। पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर दर्शक लगातार रामायण को एक बार फिर से दूरदर्शन पर प्रसारित करने की माँग कर रहे थे। ऐसे में उन सभी की इस माँग को पूरा करते हुए फिलहाल रामायण का प्रसारण दोबारा से शुरू कर दिया गया है।

बता दें कि रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण साल 1987 में पहली बार दूरदर्शन पर हुआ था। वहीं बीआर चोपड़ा की महाभारत का प्रसारण भी साल 1988 में पहली बार दूरदर्शन पर हुआ था।  रामायण और महाभारत को लोग इतने चाव से देखते थे कि सड़कों पर एकदम सन्नाटा होता था। इन धार्मिक कार्यक्रमों के प्रसारण के वक्त बाहर सड़कों का माहौल एकदम कर्फ्यू की तरह ही होता था।

1987-88 में रामायण और महाभारत को लोग बड़े ही चाव से देखते थे। कहा जाता है कि उस दौर में अफसर से लेकर नेता तक किसी से मिलना तो क्या किसी का फोन भी उठाना पसंद नहीं करते थे। 78 एपिसोड वाले रामायण का प्रसारण जब होता था तो देश की सड़कों और गलियों में कर्फ्यू जैसा सन्नाटा छा जाता था। भारत के तमाम शहरों और गाँवों में रामायण के टेलीकास्ट के समय लोग अगरबत्ती जलाकर बैठा करते थे। चप्पलें कमरे के बाहर उतार दी जाती थीं। 

गौरतलब है कि रामायण में भगवान राम का किरदार अरुण गोविल ने तो वहीं सीता का किरदार दीपिका चिखलिया ने निभाया था। उनकी एक्टिंग ऐसी थी कि लोग उन्हें असल जीवन में भी भगवान की तरह पूजते थे। इसके साथ ही दारा सिंह ने हनुमान का रोल निभाया था। वहीं रावण का रोल निभाकर अरविंद त्रिवेदी ने खासी लोकप्रियता बटोरी थी। रामानंद सागर की रामायण हर मायनों में ऐतिहासिक थी। शो का हर किरदार अमर हो गया था। लोगों ने इस शो को इतना प्यार दिया था कि इसके बाद कई बार रामायण बनाई गई, लेकिन वैसा अनुभव कभी नहीं हुआ जो रामानंद सागर की रामायण को देख होता था।

मस्जिदों में जाने से नहीं रोका तो… इकट्ठा होकर नमाज पढ़ने से पहले फतेहपुरी मस्जिद के इमाम की सुन लें

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। इससे पहले से ही लोगों से एक जगह इकट्ठा न होने और सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की जा रही है। इस संक्रमण से बचाव का सबसे कारगर उपाय सोशल डिस्टेंसिंग ही है। बावजूद इसके देश के अलग-अलग हिस्सों से नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में लोगों के जमा होने की खबरें आती रही है। प्रशासन की सख्ती के बाद अब उलमा भी लोगों से नमाज के लिए मस्जिद में जमा नहीं होने की अपील कर रहे हैं। शुक्रवार को जुमा के बावजूद लोगों से मस्जिद नहीं आने और घरों से ही नमाज अदा करने की अपील कर रहे हैं।

फतेहपुरी मस्जिद के इमाम मुकर्रम अहमद ने अपील की है कि लोग अपने घरों में नमाज अदा करें और पुलिस-प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा है कि यही समय की माँग है। इससे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि मुस्लिमों को मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा करने के बजाय घर पर रहकर नमाज अदा करनी चाहिए, जिससे कि अपने नागरिकों को नुकसान पहुँचाने से बचाया जा सके।

इस बीच मस्जिद में नमाज के लिए इकट्ठा नहीं होने और एक जगह जमा होने से कोरोना संक्रमण के खतरे से आगाह करता एक ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसे एक बार समुदाय विशेष के उन लोगों को जरूर सुनना चाहिए, जो लॉकडाउन के बाद भी मस्जिद में जाने और वहाँ नमाज पढ़ने के लिए पुलिस-प्रशासन से भिड़ने के लिए तैयार हैं।

ऑडियो में आप सुन सकते हैं कि एक शख्स मौलाना मुफ्ती से फोन कॉल पर बात करते हुए बताता है कि बीते दिन हमारी जामिया में एक बैठक हुई थी, जिसमें हिंदुस्तान के टॉप 8 डॉक्टर शामिल थे। वह कहता है कि इस बैठक में मुफ्ती और कुछ मौलाना भी मौजूद थे, लेकिन बैठक में जो बातें सामने आई हैं वह बेहद हैरान करने वाली और मन को दुखी करने वाली हैं। कहा जा रहा है कि पहली जो जंग हुई थी या फिर पहली बार जब न्यूक्लियर बम इस्तेमाल किया गया था उसमें जितने लोग मारे गए थे, उससे कहीं ज्यादा कोरोना नाम की बीमारी लोगों का शिकार कर ले जाएगी। अगर बात की जाए भारत में इस बीमारी के फैलने की जो रफ्तार है वह 2.5 है। चीन ने इस पर कंट्रोल किया है जो कि बाद में दूसरे मुल्कों में यह 4 प्रतिशत और बाद में 6 प्रतिशत तक फैला। खास तौर पर इटली और ईरान में।

ऑडियो में आगे शख्स कहता है कि हालाँकि हिंदुस्तान में अभी इस बीमारी ने वो रफ्तार नहीं पकड़ी है, लेकिन अगर रफ्तार पकड़ लेती है तो दो करोड़ से अधिक लोग इसकी चपेट में आ जाएँगे और ईरान जैसे हालात देश में पैदा हो सकते हैं। जैसे कि वहाँ बुलडोजरों से लाशों को दफन किया जा रहा है। अगर ऐसे में हमने अपने लोगों को मस्जिदों में जाने से नहीं रोका तो यह बीमारी देश में और भी भयानक रूप ले सकती है। वहीं हैदराबाद में जिन मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया है उनका डेटा आ गया है कि उनमें से 80 फीसद लोग समुदाय विशेष के हैं और 20 फीसदी में अन्य समुदाय के लोग हैं।

तो यह बीमारी अब दूसरी ओर मुड़ चुकी है और इस मामले में सोशल मीडिया पर बहस भी छिड़ गई है और ज्यादा देर नहीं लगेगी यह बात संसद तक भी पहुँच जाएगी कि समुदाय विशेष की लापरवाही की वजह से और लॉकडाउन के बाद भी लगातार मस्जिदों में जाने की वजह से देश में तबाही मची और इसे मुस्लिमों ने ही हवा दी है। इस तरह बड़े पैमाने पर मुस्लिमों का बायकॉट होगा और फिर पूरा मीडिया और राजनीतिक लोग मुस्लिमों के खिलाफ लिखेंगे। इसलिए एक पैगाम देने की कोशिश करता हूँ “मौलाना पूरी कोशिश कर डालिए कि मुस्लिम जमात और ज़ुमा से अभी रुक जाएँ और अपने घरों में ही नमाज पढ़े” और नियम के मुताबिक ज़ुमा में 4 लोग ही शामिल रहें और फिर नमाज के बाद मस्जिद को बंद कर दिया जाए।

केरल के IAS अधिकारी कोल्लम के क्वारेंटाइन से कानपुर निकल लिए, 19 मार्च को सिंगापुर से लौटे थे

केरल के एक आईएएस अधिकारी के क्वारेंटाइन से निकलकर उत्तर प्रदेश का कानपुर आने की खबर सामने आई है।उपजिलाधिकारी अनुपम मिश्रा 19 मार्च को सिंगापुर से लौटे थे। इसके बाद उन्हें कोल्लम में क्वारेंटाइन में रखा गया था। जिला कलेक्टर ने इस संबंध में राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें कहा गया है कि उप कलेक्टर ने क्वारेंटाइन प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है।

एक वरिष्ठ सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि उप जिलाधिकारी की यह बहुत बड़ी लापरवाही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में यूपी सरकार से संपर्क किया जा रहा है। साथ ही इस मामले को केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के ध्यान में लाया जाएगा। बताया जा रहा है कि अनुपम मिश्रा 21 मार्च को कानपुर के लिए निकल गए थे।

एहतियात के तौर पर कोल्लम प्रशासन ने अनुपम मिश्रा के ड्राइवर, निजी सुरक्षा गार्ड और सचिव को आइसोलेशन में रखा है। प्रवक्ता ने कहा कि एक उप जिलाधिकारी का इस तरह से लापता हो जाना सरकार को शर्मिंदा करने जैसा है। प्रवक्ता ने कहा कि एक कप्तान इस तरह से जहाज नहीं छोड़ सकता है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

वहीं कोल्लम के जिला कलेक्टर अब्दुल नासिर ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को सरकार के ध्यान में लाया है और उन्होंने बताया है कि मिश्रा की यात्रा के बारे में उन्हें सूचित नहीं किया गया था। उनके लापता होने की जानकारी उस समय सामने आई जब दो दिन बाद स्वास्थ्य अधिकारी उनके घर पर गए। घर पहुँचने के बाद वो वहाँ पर नहीं मिले। साथ ही प्रवक्ता ने बताया कि उनके द्वारा किए गए फोन कॉल को ट्रेस किया गया तो लोकेशन कानपुर दिखा रहा था।

बता दें कि देश में कोरोना वायरस का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। देश में अब कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 727 हो गई, जबकि इस वायरस की वजह से पूरे देश में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं केरल की बात करें तो यहाँ पर कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 129 है।

पैदल कूच कर रहे लोगों की मदद के लिए आगे आई योगी सरकार, गुजरात के डिप्टी CM भी मोर्चे पर

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। इसे लागू किए जाने के बाद से ही देश के अलग-अलग हिस्सों से मजूदरों के अपने गॉंवों की तरफ पैदल कूच करने की तस्वीरें सामने आ रही थी। ये वो लोग हैं जो दो जून की रोटी के लिए बड़े शहरों में रह रहे थे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के बाॅर्डर पर पैदल आ रहे मजदूरों और कर्मकारों के लिए मानवीय आधार पर विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव परिवहन और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री को निर्देशित किया है कि मानवीय आधार पर ऐसे व्यक्तियों के लिए भोजन व पानी की व्यवस्था की जाए और स्वास्थ्य संबंधी पूरी सावधानी बरतते हुए इन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को आश्वस्त किया कि बिहार जाने वाले ऐसे सभी व्यक्तियों का पूरा ख्याल रखा जाएगा और इन व्यक्तियों को सुरक्षित उनके गन्तव्य स्थल तक भेजा जाएगा। उन्होंने उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को भी आश्वस्त किया कि उत्तराखंड निवासी सभी लोगों के भोजन व संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लाॅकडाउन को ध्यान में रखते हुए हरियाणा राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से वार्ता कर हरियाणा में उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए उनके प्रदेश में यथा स्थान ठहरने और भोजन आदि की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि मनोहर लाल खट्टर ने उन्हें आश्वस्त किया कि हर व्यक्ति की सुविधा-सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

इसके साथ ही सीएम योगी ने यह भी निर्देश दिए कि वाराणसी सहित प्रदेश के विभिन्न तीर्थ स्थानों पर फँसे अन्य राज्यों जैसे गुजरात आदि के तीर्थ यात्रियों के लिए भी भोजन व सुरक्षा आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

इसी तरह जब अहमदाबाद से बड़ी तादाद में मजदूरों के पैदल ही राजस्थान कूच करने की खबर आई तो गुजरात के डिप्टी सीएम नितिन पटेल खुद सड़कों पर निकल पड़े। उन्होंने मजदूरों से बात की और उनके लिए खाने का इंतजाम किया। साथ ही उन्होंने राजस्थान जाने वाले लगभग 700 प्रवासी श्रमिकों के लिए परिवहन की व्यवस्था की। पटेल के ट्विटर हैंडल पर बताया गया, उपमुख्यमंत्री कल रात राजमार्ग पर 700 प्रवासी श्रमिकों से मिले। वे सभी अहमदाबाद से राजस्थान अपने पैतृक गाँव लौट रहे थे। इसमें बताया गया कि उन्होंने राज्य के अधिकारियों और गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा को मौके पर बुलाया। श्रमिकों के भोजन और परिवहन की व्यवस्था की ताकि उन्हें राजस्थान की सीमा तक पहुँचाया जा सके।

उल्लेखनीय है कि देशबंदी हजारों दिहाड़ी मजदूरों पर भारी पड़ रही है। फैक्ट्रियाँ, दुकानें, ढाबे बंद हुए तो इनके पास काम नहीं रहा। घर जाने के सारे साधन बंद हैं तो पैरों का सहारा बचा। ऐसी हालत में कुछ लोग मसीहा बनकर सामने आ रहे हैं।

चीन ने विदेशियों की एंट्री पर लगाई पाबंदी, कोरोना संक्रमण पर दुनिया को कर चुका है गुमराह

चीन के वुहान शुरू से हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण पूरी दुनिया में फैल चुका है। बताया जा रहा है कि चीन ने इस महामारी पर अब काबू पा लिया है। लेकिन, उस पर शुरुआत में इस संक्रमण को लेकर दुनिया को गुमराह करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण की बात चीन ने छिपाई नहीं होती तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते। जब चीजें उसके नियंत्रण से बाहर हुई तो उसने इसके बारे में दुनिया को बताया।

इस बीच चीन ने विदेशी नागरिकों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। चीन के विदेश मंत्रालय ने इसकी घोषणा गुरुवार (मार्च 26, 2020) को की। मंत्रालय ने बताया कि ये प्रतिबंध उन्होंने विदेशों में रहने वाले अपने उन नागरिकों तक के लिए लगाया है जिनके पास वीजा और रेजीडेंट परमिट हैं। ये बैन शुक्रवार रात 12 बजे से लागू होगा।

मीडिया खबरों के मुताबिक, इस प्रतिबंध की घोषणा करते हुए चीन ने कहा, ये निलंबन सिर्फ़ एक अस्थायी उपाय है, जिसे चीन ने हालातों और दूसरे देशों के फैसलों को मद्देनजर रखते हुए लिया है। संक्रमण के आगे के हालात को देखते हुए चीन बैन हटाने या इसे जारी रखने पर फैसला लेगा। इसके बारे में अलग से घोषणा की जाएगी।

चीन की एक वेबसाइट साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक इस बैन से कुछ विदेशी नागरिकों को छूट हासिल होगी। साथ ही राजनयिकों और सी वीजा वालों का प्रवेश प्रभावित नहीं होगा। वहीं, आवश्यक आर्थिक, व्यापार, वैज्ञानिक या तकनीकी गतिविधियों या आपातकालीन मानवीय आवश्यकताओं के लिए चीन आने वाले विदेशी नागरिक, चीनी दूतावासों या वाणिज्य दूतावासों में वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यहाँ बता दें कि बीते दिनों खबर आई थी कि चीन ने अपने यहाँ इस फैलते संक्रमण पर काबू पा लिया थ। लेकिन, बावजूद इसके संक्रमण के जो भी मामले सामने आ रहे थे, वो विदेश से आने वाले नागरिकों में मिल रहे थे। ऐसे में संक्रमण से बचने के लिए विदेश से आने वाले हर व्यक्ति के लिए चीन ने 14 दिन का क्वारांटाइन जरूरी कर दिया था। लेकिन संक्रमण को रोकने के लिए अब वो इससे भी एक कदम आगे बढ़ गया है और चीन ने विदेशियों की अपने यहाँ एंट्री ही बैन कर दी है।

गौरतलब है की चीन ही वो पहला देश है जहाँ से कोरोना की शुरूआत हुई और देखते-देखते ये संक्रमण दुनिया के बाकी देशों तक फैल गया। ईरान और इटली में तो इसका ऐसा प्रभाव दिखा कि हर कोई सहम गया। स्थिति इतनी भयावह हुई की स्वास्थ्य सुविधाओं से लबरेज देश खुद को इसकी चपेट में आने से नहीं रोक पाए।