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37 लोगों के साथ 20 मार्च को सऊदी अरब से लौटी अम्मा, बेटे को भी हुआ संक्रमण: UP के पीलीभीत का मामला

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से कोरोना वायरस संक्रमण का एक और मामला सामने आया है। 33 वर्षीय युवक को कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। इस युवक का विदेश यात्रा का कोई रिकॉर्ड नहीं है। हालाँकि उसकी माँ हाल ही में सऊदी अरब की यात्रा से लौटी थी। उन्हें भी कोरोना पॉजीटिव पाया गया था। इसके साथ ही पीलीभीत जिले में 2, जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में अब तक संक्रमण के 41 मामले सामने आ चुके हैं। पीड़ित युवक को पहले से ही आइसोलेशन में रखा गया है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टर सुधीर सिंह ने युवक में संक्रमण की पुष्टि की है। उसकी माँ सऊदी अरब से लौटी थी और उनसे बेटे को संक्रमण हुआ है। यह कांटेक्ट ट्रांसमिशन का मामला है जो बेहद चिंताजनक है। इसे देखते हुए उन्होंने विदेश से हाल में लौटे लोगों को घरों में रहने की अपील की है। साथ ही कहा है कि जो भी लोग बाहर से लौटे हैं लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना दें।

पीलीभीत निवासी पीड़ित युवक की माँ 25 फरवरी को 37 लोगों के एक ग्रुप के साथ सऊदी अरब की यात्रा पर गई थी। 20 मार्च को ये लोग लौट आए थे। जाँच में युवक की माँ को कोरोना पॉजीटिव पाया गया था। इसी के साथ पूरे उत्तर प्रदेश में 41 कोरोना से संक्रमित लोगों के मामले सामने आ चुके हैं। सबसे अधिक मरीज आगरा-नोएडा के 11 हैं। इसके बाद लखनऊ के 8, गाजियाबाद के 3 और पीलीभीत के 2 मरीजों में कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया है। इसी तरह शामली, लखीमपुर-खीरी, वाराणसी, मुरादाबाद, कानपुर और जौनपुर में कोरोना वायरस से संक्रमित 1-1 मरीज़ पाए गए हैं। इनमें से 11 लोग स्वस्थ हो गए हैं और उन सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

गौरतलब है कि चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना का कहर आज विश्व के करीब 186 देशों तक पहुँच गया है। विश्व में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16961, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 3,86,300 से अधिक हो गई है। भारत में मरने वालों की संख्या 11, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 से अधिक हो गई है। इनमें से 41 मरीज ठीक हो चुके हैं। इन्ही आँकड़ों को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिन यानी 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने WHO को कुछ आँकड़े पेश करते हुए कहा कि इस महामारी से बचने के लिए घर पर ही रहें घर के बाहर लक्ष्मण रेखा खींच लें।

Covid-19: भारत के राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प की प्रयोगशाला सिद्ध होगी यह परीक्षा

पिछले वर्ष नवम्बर में चीन से शुरू हुआ कोरोना संकट अब अंतरराष्ट्रीय आपदा बन चुका है। आज विश्व के 196 देशों के 425,987 (वर्तमान में सक्रीय केस) लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। विश्वभर में इस आपदा में अब तक 18,957 लोग मारे जा चुके हैं। यह संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इस महामारी के कारण इटली, चीन, ईरान और स्पेन आदि देशों में जान-माल का सर्वाधिक नुकसान हुआ है। अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ़्रांस और भारत जैसे ताकतवर देश भी इससे अछूते और अप्रभावित नहीं हैं।

जिन देशों ने चीन के अनुभव से सबक लेकर जरूरी एहतियातन कदम उठा लिए हैं, उनमें काफी कम नुकसान हुआ है। दक्षिण कोरिया, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड ऐसे देशों में अग्रणी हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आपदा ने पहले से ही मंदी की शिकार विश्व अर्थ-व्यवस्था को धराशाई कर दिया है। इस अंतरराष्ट्रीय संकट से भयभीत विश्व-मानव ठिठक-सा गया है। हालाँकि, भारत में इस महामारी की शुरुआत अपेक्षाकृत देर से हुई है। अब भारत इतिहास की इस सर्वाधिक भयावह आपदाओं में से एक आपदा के मुहाने पर खड़ा है।

इस आपदा से लड़ने और जीत हासिल करने में न सिर्फ राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्षमता और दूरदर्शिता बल्कि प्रशासनिक कुशलता और सक्रियता की भी परीक्षा होने वाली है। इसके अलावा इस निर्णायक लड़ाई में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका भारतवासियों की होने वाली है। यह आपदा भारत के राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प की प्रयोगशाला सिद्ध होने वाली है।

22 मार्च को रविवार के दिन प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना की कड़ी को तोड़ने के लिए ‘जनता कर्फ्यू’ और मीडिया/स्वास्थ्य/पुलिस/सफाईकर्मियों एवं परचून, दूध, फल-सब्जी आदि रोजमर्रा की वस्तुएं उपलब्ध कराने वालों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ‘थाली बजाओ-ताली बजाओ’ का आह्वान करके राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प का परीक्षण प्रारम्भ कर दिया है।

भारतवासियों ने उनके इस आह्वान का पूर्ण पालन करते हुए अत्यंत सकारात्मक संकेत दिए हैं। ‘जनता कर्फ्यू’ और ‘थाली बजाओ-ताली बजाओ’ में देशवासियों ने उत्साहजनक भागीदारी करते हुए कोरोना संकट के खिलाफ शंखनाद किया है। हालाँकि, यह राष्ट्रीय चरित्र और संकल्प की अभिव्यक्ति की शुरुआत मात्र है। आने वाले दिन और भी मुश्किल होने वाले हैं, और आने वाली परीक्षाएँ और भी कठिन होने वाली हैं। कल ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए गए 21 दिनों के ‘लॉक डाउन’ से उन कठिन दिनों की भी शुरुआत हो रही है।

अगर भारतवासी इन मुश्किल दिनों और कठिन परीक्षाओं के लिए एक परिवार के रूप में, एक राष्ट्र के रूप में एकजुट होते हैं, तो कोरोना को निश्चित रूप से पराजित होना पड़ेगा। भारतीय संस्कृति के आधारभूत विचार ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के निर्णायक आत्मसातीकरण का क्षण निकट है। इस संकट की घड़ी में हमें तीन बातों का विशेष ध्यान रखना है- रोजमर्रा की वस्तुओं का अति-संग्रह नहीं करना है; अपेक्षाकृत असमर्थ, अक्षम, ‘अभागे’ लोगों/परिवारों के साथ वस्तुओं, साधनों और सुविधाओं को साझा करना है; सरकार और शासन-प्रशासन के निर्देशों का मन से अनुपालन करना है।

कोरोना संकट ने वर्तमान सभ्यता की समीक्षा का भी अवसर उपलब्ध कराया है। उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण ने वर्तमान सभ्यता के स्वरूप और संवेदना का केंद्र बदल दिया है। यांत्रिकता और व्यक्तिवाद, ये दो घटक इस नई बनी सभ्यता के आधार-स्तम्भ हैं। यांत्रिकता और व्यक्तिवाद की गिरफ़्त में हाँफती इस सभ्यता की धमनियों में उपभोक्तावाद संचारित हो रहा है।

वास्तव में यह यांत्रिक सभ्यता उपभोक्तावाद का उपनिवेश है। इसकी सांसों में धुआँ उड़ाते असंख्य वाहनों की दुर्गन्ध और कानों में कोलाहल है। पिघलते ग्लेशियरों, कटते जंगलों और उजड़ते पशु-पक्षियों की कराह इस सभ्यता की उपलब्धि है। असीम उत्पादन, अति संचय और अंध उपभोग ने विश्व-मानव का अवमूल्यन करके उसे उपभोक्ता मात्र बना दिया है।

क्रमशः क्षरित मनुष्यता ने इस आत्मजीवा इकाई को आत्म-निर्वासित कर दिया है। अपनी भौतिक प्राप्तियों को सेलिब्रेट करती यह सभ्यता बेहद अकेली, उदास और अवसादग्रस्त है। यह विडम्बना ही है कि आवागमन के साधनों की अनवरत उन्नति, संचार माध्यमों की अकल्पनीय प्रगति और सोशल मीडिया माध्यमों की अबाध उपलब्धता के बावजूद दिलों की दूरियाँ बढ़ती ही जा रही हैं।

सामाजिकता और आत्मीय संवाद रहित सभ्यता अपने अकेलेपन में अवाक् है। भौतिक साधन-सुविधाओं की दासता और उनके अधि-ग्रहण ने मनुष्य को न सिर्फ समाज और परिवार से दूर कर दिया है, बल्कि स्वयं से भी अलगा दिया है। आत्मीय संबंधों से रहित आत्म-निर्वासित मनुष्य एक रोबोट बन गया है। निश्चय ही, वर्तमान सभ्यता अति भौतिकता, अति यांत्रिकता और अति बौद्धिकता से आक्रांत है। भरी-भरी और सुखी-संतृप्त दिखने पर भी खाली, खोखली, व्यथित और बेचैन…!

ऐसी सभ्यताएँ किसी भी आपदा या आक्रमण के लिए सर्वाधिक भेद्य होती हैं। इसलिए अगर समय रहते सभ्यता समीक्षा करते हुए इसके चाल-चलन को ठीक न किया गया तो इसका हस्र भी माया, बेबिलोनिया, मेसोपोटामिया, इन्का आदि सभ्यताओं वाला ही होगा।

इस सभ्यता को अपनी गति को थामकर तनिक आत्म-चिंतन करने की आवश्यकता है। कोरोना की आपदा ने वह अवसर उपलब्ध कराया है। जिनके पास खाने-पीने तक का समय न था, परिवार से बोलने-बतियाने और स्वयं तक को जानने-समझने की फुर्सत न थी, वे हाथ-पर-हाथ धरकर घर में बैठे हैं और सोच रहे हैं कि उनकी दुनिया कितनी प्रदूषित और संक्रमित हो गई है।

‘वर्ल्ड इज वन न्यूज़ (WION)’ नामक चैनल ने इधर प्रसारित की गई अपनी एक ताजा रिपोर्ट में लोगों की गतिविधियाँ सीमित हो जाने के बाद प्रकृति के स्वरूप में आए सकारात्मक परिवर्तन को दिखाया है। इस रिपोर्ट में दिखाया गया है कि लोगों की भागमभाग और भीड़भाड़ कम हो जाने से समुद्र तटों, पहाड़ों और सड़कों का चेहरा एकदम बदल गया है। वह फिर से सुन्दर, सुरम्य और शांत होने लगा है।

प्रकृति मनुष्य की सबसे निकटस्थ मित्र और सहचरी होती है। परन्तु अत्यधिक दोहन और शोषण करके मनुष्य ने उसे अपना शत्रु बना लिया है। असंतुलित विकास और जनसंख्या विस्फोट ने कोढ़ में खाज का काम किया है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है? आज यह बात सर्वाधिक विचारणीय और प्रासंगिक है कि इस दुनिया को सुन्दर और जीने लायक कैसे बनाया जा सकता है!

प्राचीनतम भारतीय संस्कृति और उसके जीवन-मूल्य इस हाँफती-जूझती सभ्यता के घावों पर मलहम लगा सकते हैं। स्वयं भारतवासियों को भी अपनी उन जड़ों की और लौटना होगा, जिनको कि वे कालिदास बनकर रात-दिन काटने में लगे हैं। गौतम बुद्ध, महात्मा गाँधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन और चिंतन में ऐसे एकाधिक सूत्र हैं, जो रोबोट बने विश्व-मानव को राह दिखा सकते हैं।

गौतम बुद्ध का ‘अष्टांग मार्ग’, महात्मा गाँधी का ‘हिन्द स्वराज’ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानव-दर्शन’ अंध-सभ्यता के ज्योतिपुंज हैं। इनका जीवन और चिन्तन भारतीय संस्कृति का सारभूत है। ‘मध्यमार्ग’ के अनुकरण में ही वर्तमान सभ्यता की गति है। सीमित उत्पादन और संयमित उपभोग ही भविष्य का मार्ग है। व्यष्टि, समष्टि, सृष्टि और परमेष्टि की एकात्मता से ही जीवन को उन्नत और आनंदमय बनाया जा सकता है।

सत्य, अहिंसा, बंधुत्व, अस्तेय और अपरिग्रह आदि को अपनाकर ही इस हिंस्र सभ्यता को मानवीय बनाया जा सकता है। मानव–सभ्यता को तनिक ठहरने और विचारने का जो अवसर कोरोना संकट ने दिया है, उसे यूँ ही हाथ से फिसल न जाने देना चाहिए, बल्कि वैकल्पिक जीवन-शैली और मानवीय संकल्पों की उद्गम-स्थली बनाना चाहिए।

कारवाँ के संपादक ने फैलाया झूठ, कहा- देश में नहीं है कोरोना के फ्री टेस्ट की सुविधा

चीन के वुहान शहर से निकलकर पूरे विश्वभर में आतंक मचाने वाले कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ हर देश ने जंग छेड़ रखी है। लेकिन इतने संवेदनशील मौक़े पर भी वामपंथी मीडिया गिरोह की ओछी हरकतें जारी है। भारत में जहाँ सरकार संक्रमित लोगों को हर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में प्रयासरत है। वहीं मीडिया गिरोह उनके ख़िलाफ़ फेक न्यूज फैलाने में। कल हमने देखा कि किस तरह कुछ फर्जी ट्विट्स को आधार बनाकर चुनिंदा लोगों द्वारा सरकार पर सवाल उठाए गए। अब कारवाँ मैग्जीन के एक्जिक्यूटिव एडिटर भी इसी खेल को आगे बढ़ाते यानी झूठ फैलाते पकड़े गए हैं।

विनोद के. जोस ने एक ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें दावा किया गया कि अन्य देशों में कोरोना वायरस का टेस्ट फ्री है, जबकि भारत में इसके लिए बहुत रुपए लिए जा रहे हैं। विनोद ने ट्विटर पर जिस स्क्रीनशॉट को शेयर किया, वो @devil-ind नाम के यूजर का है। इस यूजर ने दावा किया है कि इरान, चीन, यूरोप, अमेरिका, श्रीलंका में ये टेस्ट फ्री है। लेकिन पाकिस्तान में इसे कराने की कीमत 500 है, बांग्लादेश में 300 और भारत में 4500। अब हालाँकि, जो लोग सरकार की कोशिशों के गवाह है उन्हें ये समझने में बिलकुल समय नहीं लगेगा कि ये झूठी खबर है। लेकिन जो उनके विरोधी हैं उनके लिए ये प्रमाण की तरह है। इसलिए आपको बता दें कि जो दावे विनोद द्वारा किए जा रहे हैं वो देश की निजी लैब द्वारा निर्धारित दामों पर किए जा रहे हैं, क्योंकि भारत में सरकार द्वारा किए जा रहे कोरोना वायरस के टेस्ट बिलकुल फ्री हैं।

अब हालाँकि, ये बात सच है कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर सरकार ने कुछ प्राइवेट लैब को टेस्ट करने के लिए अप्रूव किया है। जिसमें ICMR ने टेस्ट की अधिकतम कीमत 4500 रखी है। यानी प्राइवेट लैब में ये टेस्ट कराने वाले मरीज को प्राइवेट लैब 4500 तक चार्ज कर सकती हैं। लेकिन ये भी सच है कि सरकार ने इस बात की अपील है कि या तो वे इस टेस्ट को फ्री करें या फिर अपने दामों को कम करें।

ये सब लेफ्ट लिबरलों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ से बिल्कुल उलट है। सरकार ने टेस्ट के दाम 4500 रुपए तय नहीं किए हैं, बल्कि यह केवल दाम की अधिकतम सीमा है। प्राइवेट लैब से इससे काम पैसा लेने की उम्मीद की जाती है। यहाँ स्पष्ट कर दें कि ये स्थिति सिर्फ़ भारत के साथ नहीं है। बल्कि यूएस में भी है जहाँ सरकार ने टेस्ट को मुफ्त किया हुआ है। लेकिन अगर प्राइवेट लैब में चेक करवाया जाता है तो वह पैसा या तो मरीज को देना होता है या फिर वो पैसा उसके इंश्योरेंस से कटता है। इसलिए लेफ्ट मीडिया द्वारा लगाए जा रहे आरोप बिलकुल गलत है कि कोरोना वायरस का टेस्ट भारत में फ्री नहीं है।

सच ये है कि सरकारी लैब में ये टेस्ट फ्री हैं और प्राइवेट प्रयोगशालाओं में इनके लिए कुछ पैसे लगते हैं। यह 4500 रुपए से ज्यादा नहीं हो सकता। साथ ही सरकार लगातार कहती रही है कि सरकारी प्रयोगशालाओं में जाँच की पर्याप्त क्षमता है।

कमलनाथ हुए क्वारंटाइन: इस्तीफे वाली प्रेस वार्ता में था संक्रमित पत्रकार, दिग्विजय समेत 200 अन्य पर भी खतरा

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खुद को क्वारंटाइन यानी सबसे अलग कर लिया है। उनके राजनीतिक सलाहकार आरके मिगलानी की कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके साथ ही, कमलनाथ की आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सारे पत्रकारों को क्वारंटाइन किए जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं।

दरअसल, भोपाल में हुए कमलनाथ के प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद एक पत्रकार की बेटी कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। इस वजह से यह फैसला लिया गया है कि संपर्क में आए सभी पत्रकारों को कोरोना के संक्रमण के भय से क्वारंटाइन होना पड़ेगा। इसके अलावा प्रशासन की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नेताओं की भी लिस्ट बनाई जा रही है, जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।

20 मार्च को इस्तीफे की घोषणा करने के लिए मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने आवास पर एक पत्रकार वार्ता की थी। जिसमें से एक पत्रकार की बेटी की कोरोना वायरस की जाँच में रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है।

कमलनाथ के पिए राजेंद्र मिगलानी से संक्रमित युवती के पिता (जो कि प्रेस वार्ता में मौजूद थे) ने मुलाकात की थी और मिगलानी मुख्यमंत्री आवास में कमलनाथ के साथ लगातार मौजूद रहते हैं। 21 मार्च को कमलनाथ के PA मिगलानी की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें 23 मार्च को भोपाल के स्मार्ट सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 25 मार्च को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

कमलनाथ की इस प्रेस वार्ता में कोरोना पॉजिटिव मरीज के पिता और पेशे से पत्रकार केके श्रीवास्तव भी मौजूद थे। यह खबर सामने आने से अब अन्य नेताओं को भी खुद को अलग करना पड़ सकता है क्योंकि इस पत्रकार वार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सहित कॉन्ग्रेस के सभी विधायक और प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों सहित लगभग 200 पत्रकार मौजूद थे।

शाहीन बाग़ के कारण रोज खर्च होते थे 6 घंटे: कैंसर मरीज की मौत, बेटे ने की थी अमित शाह से अपील

शाहीन बाग़ वालों ने 100 से अधिक दिनों तक दिल्ली में सड़क जाम कर पिकनिक मनाया लेकिन इसके कारण आम जनता को क्या परेशानियाँ झेलनी पड़ीं, इसे बारे में न तो लिबरल गैंग ने बात की और न ही मीडिया ने इसे उठाया। बच्चों को रोज स्कूल जाने में तकलीफ हुई, रोज लोगों को ऑफिस आने-जाने में घंटों देरी हुई और कई लोगों को तो अस्पताल तक पहुँचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एक व्यक्ति को हार्ट अटैक आने के बाद समय पर हॉस्पिटल नहीं पहुँचाया जा सका, जिससे उसकी मृत्यु हो गई और तीन बेटियों के सिर से पिता का साया छिन गया।

ऐसी ही एक कहानी है मिन्टी शर्मा की, जिनके पिता कैंसर से जूझ रहे थे। जब सबा नकवी जैसे लिबरपंथी रोज शाहीन बाग़ वालों की तस्वीरें शेयर कर के गर्व महसूस कर रहे थे, तब मिन्टी अपने पिता को दिल्ली से रोज नोएडा ले जाने में व्यस्त थे। उनके पिता को रोज यात्रा करनी पड़ती थी और शाहीन बाग़ के उपद्रवियों के कारण उनकी तबियत बिगड़ती जा रही थी क्योंकि वहाँ घंटों जाम लगता था। एक बीमार व्यक्ति को आने-जाने में प्रतिदिन 6 घंटे लग जाते थे। मिन्टी ने सोशल मीडिया पर भी अपना दर्द बयाँ किया था।

उन्होंने 16 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की थी कि वो इस ‘पागलपन’ पर लगाम लगाएँ और साथ ही अपने पिता के दुःख को साझा किया था। शाहीन बाग़ वालों का सीएए विरोधी प्रदर्शन अनवरत जारी रहा और मिन्टी के पिता की मृत्यु हो गई। उससे पहले वो काफ़ी दिनों तक हॉस्पिटल में भर्ती भी थे। क्या उनकी मृत्यु के लिए शाहीन बाग़ वालों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए? शाहीन बाग़ वालों के कारण ऐसे न जाने कितने ही मरीजों को दिक्कतें आई होंगी लेकिन सोशल मीडिया पर न साझा किए जाने के कारण उनके बारे में पता नहीं चला।

अभी भी सेक्युलर गिरोह शाहीन बाग वालों का गुणगान करने में लगा हुआ है कि उन्होंने एक सफल ‘आंदोलन’ चलाया। दिल्ली पुलिस को मजबूरन वहाँ जाकर तम्बुओं को हटाना पड़ा क्योंकि कोरोना से उपजे खतरों को नज़रअंदाज़ करते हुए वो वहीं पर जमे हुए थे। भले ही ये उपद्रव ख़त्म हो गया लेकिन जिनका घर उनके कारण सूना हो गया, क्या उसके लिए गिरोह विशेष माफ़ी माँगेगा? ये एक ऐसा ‘गाँधीवादी’ आंदोलन था, जहाँ गाँधी को ही फासिस्ट बताया गया।

AIIMS में 14 दिन से लगातार लोगों की सेवा में लगे डॉक्टर का भावुक करने वाला यह वीडियो हम सबके लिए है

पूरे देशभर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कल शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आखिरकार 21 दिन के लिए पूरे देशभर में पूर्ण लॉकडाउन का ऐलान कर ही दिया। लेकिन इसके बावजूद भी कुछ स्थानों से लोग इस लॉकडाउन की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए अपने मनोरंजन के लिए सड़कों पर देखे जा रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर एम्स अस्पताल के एक डॉक्टर का बेहद भावुक करने वाला सन्देश सामने आया है।

एम्स अस्पताल के एक डॉक्टर संजय कुमार का यह वीडियो आज तक न्यूज़ चैनल के पत्रकार रोहित सरदाना ने ट्वीट किया है। वीडियो में डॉक्टर कह रहे हैं- “मैं घर नहीं गया। पंद्रह दिन पहले शादी की सालगिरह थी तो उस समय दो दिन के लिए घर जाने का मौका मिला। मेरी घर पर एक बेटी है, उसे नहीं देख पा रहा हूँ।”

डॉक्टर संजय कुमार भावुक होकर आगे कहते हैं- “कृपया घर पर रहिए, बाहर मत निकलिए। इस बिमारी को फैलने से कृपया रोकिए, देश पर बड़ी समस्या आ सकती है।”

दरअसल, डॉक्टर संजय कुमार उन सैकड़ों-हजारों लोगों में से एक हैं, जो कोरोना के संकट के दौरान भी अपने कर्तव्य पथ पर डटकर हम लोगों की सहायता में खड़े हैं। एक ओर, कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण घोषित किए गए 21 दिन के इस लॉकडाउन को जहाँ कुछ लोग अपने घर और परिवार के साथ बिताने का अवसर समझ रहे हैं, उसी समय दूसरी ओर कई डॉक्टर, सफाई कर्मी, अधिकारी आदि निरंतर और तत्परता से कोरोना के खिलाफ संघर्षरत हैं और 24 घंटे से भी ज्यादा अवधि तक काम कर रहे हैं।

रोहित सरदाना ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है – “डॉक्टर संजय दो महीने की अपनी बच्ची को देख नहीं पा रहे, ताकि आप-हम अपने बच्चों को देख पाएँ! कम से कम इन बातों को सुनिए, समझिए, घर पर रहिए, सुरक्षित रहिए। #GharBaithoZindaRaho”

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ़ते हुए खतरे को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भारत में लॉकडाउन का ऐलान किया है। पीएम मोदी ने देश में 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कोरोना की गंभीरता के प्रति देशवासियों को चेतावनी देते हुए कहा कि 21 दिन नहीं संभले, तो देश 21 साल पीछे चला जाएगा।

मंत्रियों से इस तरह सोशल डिस्टें​सिंग निभा रहे PM मोदी, 130 करोड़ जनता को भी कर रहे प्रोत्साहित

कोरोना वायरस को रोकने के लिए सबसे कारगर उपाय सोशल डिस्टेंसिंग है। यानी एक-दूसरे से दूरी बनाना। फिर चाहे वो घर हो या फिर पब्लिक प्लेस। हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग इस समय मानवता को बचाने के लिए सबसे पहली शर्त है। सरकार लगातार इसके लिए जनता को जागरूक कर रही है और खुद भी इस पर अमल कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी इस पर अमल कर रहे हैं और देश की जनता को भी इसके लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। आज उनकी कैबिनेट बैठक में इसकी झलक दिखी। साथ ही सोशल मीडिया में कई तस्वीरें सामने आई हैं जिससे पता चलता है कि आवश्यक वस्तुओं की दुकानों पर किस तरह लोग सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल कर रहे हैं। तस्वीरें अलग-अलग जगहों (राज्यों) की हैं। लेकिन इन्हें देखकर अंदाजा लग सकता है कि सरकार की गुहार आमजनों तक पहुँचने लगी है और उन्होंने इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। इसके अलावा अमित शाह ने भी लोगों को इसकी महत्तवता बताने के लिए केंद्रीय कैबिनेट की बैठक की फोटो शेयर की है जिसमें पीएम की अपील का अनुपालन किया जा रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा शेयर की गई बैठक की तस्वीर में सभी मंत्री थोड़ी-थोड़ी दूर पर बैठे देखे जा सकते हैं जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी द्वारा की जा रही है। इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने केंद्र सरकार के प्रयासों की तारीफ की।

अमिताभ बच्चन ने भी इसे लेकर कुछ फोटोज़ ट्वीट की और सोशल डिस्टेंसिग को लेकर दिखाई जा रही गंभीरता पर भारतीयों की तारीफ की। इन तस्वीरों में दुकान के बाहर दूर-दूर खड़े होने के लिए बनाए घेरों में खड़े लोगों की तस्वीर नजर आई।

गुजरात से भी इन निर्देशों का पालन करती जनता की तस्वीर आई और देखा गया कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग के लिए घेरे में खड़े हैं जिन्हें सब्जी की दुकान के बाहर बनाया गया है।

जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला और लोग सफेद चूने से बने घेरे में बैठे नजर आए।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने भी इस महामारी के समय में लोगों को खाने-पीने की बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने के लिए आश्वस्त किया है। उन्होंने एक विडियो ट्वीट किया है जिसमें बताया गया है कि खाने की आपूर्ति के लिए सरकार क्या इंतजाम कर रही है। उन्होंने लिखा, “खाद्यान्नों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मंदिर हसौद, छत्तीसगढ मे अनाज की लोडिंग कर उसे रेलवे द्वारा भेजा जा रहा है।” उन्होंने बताया, “अपने कर्मचारियों के बल पर रेलवे द्वारा इस प्रकार की गतिविधियां पूरे देश में जारी हैं जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को सुनिश्चित हो रही हैं।”

बता दें इस समय देश में कोरोना के 512 मामले आ चुके हैं। इनमें से 40 रिकवर हो गए है जबकि बाकियों का इलाज जारी है। सरकार इस आपदा से निबटने के लिए हर मुमकिन प्रयास कर रही है। इसके तहत कल PM मोदी ने पूरे देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोसना की थी।

कोरोना: मजहब की आड़ में जाहिलपना करते ‘धरती के सबसे बड़े मूर्खों’ के वीडियो

कोरोना वायरस को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा की जा चुकी है। लोगों को घर में रहने को कहा गया है। केवल ज़रूरी सेवाएँ चालू रहेंगी। ऐसे में हर नागरिक का भी ये कर्तव्य बनता है कि वो सरकार के निर्देशों का पालन करे। दुनिया भर में कोरोना द्वारा मचाई गई तबाही, विशेषज्ञों और डॉक्टरों की सलाहों और भारत में उपजी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने लॉकडाउन का निर्णय लिया। लेकिन, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी सनक दिखाने में लगे हैं। वो अपनी जाहिल मानसिकता बयाँ कर के कोरोना वायरस के प्रति लोगों के दिमाग में ग़लत बातें भर रहे हैं।

यहाँ हम आपके लिए कुछ ऐसे वीडियो लेकर आए हैं, जो कोरोना वायरस पर मजहबी उन्माद फैलाने वालों को बेनकाब करती हैं। इनमें से एक वीडियो में एक युवक अपने दोस्तों को कहता है कि आज मु###न हाथ मिलाने और गले मिलने से डर रहे हैं तो क्या कल कोरोना के कारण इस्लाम छोड़ देंगे? वहीं एक अन्य वीडियो में एक युवक कहता दिखता है कि दिन में 5 बार नमाज पढ़ने वालों को कोरोना नहीं हो सकता।

अब इन्हें कौन बताए कि कोरोना वायरस मजहब नहीं देखता। जिस ईरान में मजहबी इस्लामी तीर्थयात्रा पर गए थे, वहाँ स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें भारत सरकार वापस ला रही है। फिर भी ये लोग सोशल मीडिया के माध्यम से बकैती करने में लगे हुए हैं। यहाँ लोगों को पता होना चाहिए कि इस तरह के वीडियो आम लोगों पर गहरा प्रभाव डालते हैं। अतः ऐसी मूर्खतापूर्ण हरकत लोगों की जान जोखिम में डाल सकती है। आगे और भी है।

इस वीडियो थ्रेड में सपा नेता रमाकांत यादव का भी बयान है, जिन्होंने पीएम मोदी पर ही कोरोना वायरस बनाने का आरोप लगा दिया था। ध्रुव राठी का भी वीडियो है, जिसने कहा था कि ये वायरस चीन तक ही सिमित है और मीडिया तो सिर्फ़ एक प्रकार का हौव्वा बना रहा है। एक अन्य वीडियो में एक व्यक्ति कहता है कि वो नमाज पढ़ने तो जाएगा ही क्योंकि एक अच्छा काम करते समय अगर प्राण निकल भी जाएँ तो इससे अच्छी क्या बात होगी? एक दूसरे वीडियो में युवक कहता है कि मजहबी भाइयों का जूठा पीने या खाने से भला होता है। इसके बाद वो एक-दूसरे का जूठा पानी पीते हैं।

टिक-टॉक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। एक महिला तो यहाँ तक कहती है कि कोरोना क़ुरान से निकला वायरस है। एक अन्य वीडियो में एक ही मस्जिद में लोग पानी से हाथ-मुँह धोते नज़र आते हैं और बाद में मीडिया के सामने अपने इस क़दम का बचाव भी करते हैं। एक वीडियो में आप गैदरिंग न जुटाने की तमाम चेतावनियों के बावजूद लोगों को सड़क पर इकट्ठे होकर नमाज पढ़ते देख सकते हैं।

एक वीडियो में एक युवक दावा करता है कि कोरोना वायरस अल्लाह की तरफ़ से एनआरसी है और अल्लाह जिसे चाहेगा उसे दुनिया में रखेगा और जिसे चाहेगा उसे अपने पास बुला लेगा। एक मौलवी दावा करता है कि उसे अल्लाह-ताला ने बताया कि कबूतर खाने से कोरोना वायरस ख़त्म हो जाता है। एक महिला जो सीएए प्रदर्शनकारी भी है, ने दावा किया कि इसकी क्या गारंटी है कि बाहर निकलने से कोरोना नहीं होगा? इस तरह की सोच वाले लोगों के वीडियो देख कर आपको अंदाज़ा लग जाएगा कि ये किस कदर समाज को गुमराह कर रहे हैं।

यही हाल रहा तो देने पड़ेंगे देखते ही गोली मारने के आदेश: लॉकडाउन उल्लंघन पर तेलंगाना के CM

चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण आज पूरी दुनिया को रुला रहा है। इसका प्रसार रोकने के लिए सरकारों को एक के बाद एक सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं। PM मोदी ने कल पूरे देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोसना की थी। इसके बाद बाजारों में राशन और अन्य सामान लेने वालों की उमड़ पड़ी। सरकार की अपील के बाद भी लोग अपने घरों से निकलने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे नाराज तेलंगाना के सीएम के चन्द्रशेखर राव ने लोगों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने लॉकडाउन का पालन नहीं किया गया तो उनके पास सेना बुलाने और देखते ही गोली मारने का आदेश पुलिस को देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा।

मीडिया से बात करते हुए राव ने कहा कि अगर इसी तरह से लॉकडाउन के आदेश का उल्लंघन होता रहा तो उन्हें 24 घंटे के कर्फ्यू का आदेश देना पड़ेगा। इसलिए ऐसे हालात मत पैदा कीजिए, जिससे सरकार को पुलिस को देखते ही गोली मारने का आदेश देना पड़े। साथ ही राव ने कहा कि कर्फ्यू शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक लगाया जाएगा और शाम 6 बजे दुकाने बंद कर दी जाएँगी। लोगों को सड़कों से दूर रखने के लिए पेट्रोल पंप भी बंद रहेंगे। वहीं सरकार लॉकडाउन का पालन कराने के लिए प्रदेश में सेना की मदद लेने पर भी विचार कर रही है। दरअसल, तेलंगाना में अब तक कोरोना के कुल 35 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 10 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ग्रोफर और बिग बास्केट जैसी कुछ खाद्य वितरण कंपनियों से बातचीत कर रही है ताकि वे अपनी डिलीवरी सर्विस को फिर से शुरू कर सकें। सरकार ऐसे 19000 लोगों पर निगरानी रखे हुए है, जो विदेश से आए हैं साथ ही उनके संपर्क में आने वाले लोगों पर भी निगरानी रखी जा रही है। साथ ही सरकार ने चेतावानी देते हुए कहा है कि दूसरे देशों से आए जो लोग क्वारेंटाइन के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लॉकडाउन और क्वारेंटाइन के आदेशों का उल्लंघन करने वालों के पासपोर्ट भी रद्द किए जा सकते हैं।

आपको बता दें कि कोरोना महामारी की चपेट में अब तक विश्व के 186 से अधिक देश आ चुके हैं। वहीं विश्व में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16961, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 3,86,300 से अधिक हो गई है।भारत में मरने वालों की संख्या 11, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 से अधिक हो गई है। इनमें से 41 मरीज ठीक हो चुके हैं। इन्ही आँकड़ों को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिन यानी कि 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है।

ईरान से लाए गए 277 और भारतीय, जोधपुर मिलिट्री स्टेशन के आइसोलेशन वार्ड में रहेंगे 14-28 दिन

भारत में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच ईरान से लौटा भारतीयों का नया जत्था जोधपुर उतरा है। इस दल में 277 लोग शामिल हैं। भारत सरकार की पहल पर इन्हें विशेष विमान से यहाँ लाया गया गया है। अब अगले 14 दिन ये लोग आइसोलेशन में रखे जाएँगे। इन सभी लोगों ने वतन वापसी पर विदेश मंत्री एस जयशंकर का आभार जताया है। इससे पहले 15 मार्च को ईरान से 234 भारतीयों का जत्था आया था, जिसकी सूचना खुद विदेश मंत्री ने दी थी। साथ ही ईरान में भारतीय राजदूत और वहाँ के अधिकारियों को धन्यवाद दिया था। इस वायरस के संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित देशों में ईरान भी शामिल है।

जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया के 2 विमान आज सुबह करीब 6.30 बजे जोधपुर एयरपोर्ट पर उतरे। इन दोनों विमानों में 277 भारतीयों को लाया गया। यहाँ से जाँच-पड़ताल करने के बाद उन्हें आर्मी इलाके में बनाए गए वेलनेस सेंटर ले जाया गया। इस वेलनेस सेंटर में 500 बेड की व्यवस्था है। यहाँ इन्हें 14 से 28 दिन तक रखा जाएगा। ईरान से जोधपुर लाए गए भारतीयों की यह पहली खेप है। इससे पहले ईरान से भारतीयों को एयरलिफ्ट कर जोधपुर संभाग के ही जैसलमेर लाया गया था। पश्चिमी राजस्थान में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित जैसलमेर में भी आर्मी की तरफ से वेलनेस सेंटर बनाया गया है। वहाँ भी ईरान से लाए गए सैकड़ों भारतीयों को रखा गया है।

बता दें, एक ओर जहाँ भारत सरकार विदेश में फँसे अपने लोगों को इस संकट की घड़ी में भी घरवापसी करवा रही है। वहीं बड़ी तादाद में लौटे लोगों की संख्या को देखकर राज्य सरकार की चिंता बढ़ती जा रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले 1 महीने में पंजाब में 90,000 लोग अपने वतन लौटे हैं। ऐसे में अब सरकार इन सभी की जाँच करना चाहती है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र से 150 करोड़ रुपए का स्पेशल पैकेज माँगा है। बता दें, इनमें से कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका जताई जा रही है। ये बात खुद राज्य के मंत्री बलबीर सिंह सिंधू ने कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब के 22 जिलों में पहले ही कर्फ्यू लगा हुआ है। इसके अलावा राज्य के मंत्री बलबीर सिंह संधू ने इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को चिट्ठी लिखी है और केंद्र से 150 करोड़ रुपए की मदद के साथ ही माँग की है। उन्होंने चिट्ठी में कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें सेना से भी हेल्प की अपील करनी होगी।