Home Blog Page 4980

पाक का खौफनाक चेहरा: कोरोना मरीजों को जबरन भेज रही PoK, गिलगिट-बाल्टिस्तान, स्थानीय कश्मीरियों ने किया विरोध

एक तरफ पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में भी पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान इन दिनों कोरोना की मार झेल रहा है और खबर यह आ रही है कि पाक अपने कोरोना के मरीजों को पाक अधिकृत कश्मीर भेज रहा है। अब महामारी से डरे सहमे स्थानीय लोग पाक सेना के इस कदम का जमकर विरोध कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद पाक की यह हरकत अभी जारी है। वहीं POK के राजनीतिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अंतर्राष्ट्रीय मदद पाने के लिए पाकिस्तान संक्रमण को पूरे देश में फैलाना चाहता है।

पाकिस्तान के मीरपुर इलाके में स्थानीय लोग पाक सेना के इस कदम का खूब विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी लोगों का आरोप है कि पंजाब के कोरोना पॉजिटिव मरीजों को सेना से दूर करने के लिए पंजाब से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान भेजा जा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान के मीरपुर और दूसरे शहरों में स्पेशल क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ पंजाब के मरीजों को लाया जा रहा है। वहीं पाक सेना के टॉप अफसरों ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी कोरोना पॉजिटिव मरीज को आर्मी के घरों के करीब न रखा जाए। नतीजन बड़ी संख्या में गाड़ियों में बंद करके ये मरीज POK और गिलगिट-बल्टिस्तान में भेजे जा रहे हैं।

वहीं कैंप में रखे गए एक मरीज का आरोप है कि कोरोना मरीजों के लिए क्वॉरंटीन के नाम पर बनाए गए कैंप्स में सीमित मेडिकल सुविधाएँ हैं। जैसे हालात यहाँ हैं उनसे लोगों के मन में बीमारी के और फैलने का डर भी पैदा हो गया है। युवक ने दावा किया कि अगर उन्हें कैंप पहुँचने से पहले वायरस इन्फेक्शन नहीं हुआ होगा और कैंप पहुँचने के बाद वह पॉजिटिव निकले तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। यहाँ तक कि कैंपों में पानी या फ्लश की भी सुविधा नहीं है।

बताया जाता है कि पाकिस्तान में पीओके और गिलगिट-बाल्टिस्तान ये दोनों ही सबसे ज्यादा पिछड़े इलाके हैं। इस इलाके का इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से ही बहुत खराब है और ट्रेन्ड मेडिकल स्टाफ की भी कमी है। लोगों को डर है कि पूरे इलाके में वायरस फैल जाएगा और स्थानीय कश्मीरियों को खतरे में डाल दिया जाएगा। मुजफ्फराबाद के लोगों का कहना है कि पाक सेना को सिर्फ पंजाब की चिंता है। जानकारों का कहना है कि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से पंजाब के बराबर अहम नहीं है।

वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में कोरोना का कहर तेजी से फैल रहा है, क्योंकि पाकिस्तान ने भारत की तरह पहले से ही इसे लेकर बेहतर इंतजाम नहीं किए थे। पाकिस्तान में अब तक कोरोना के चलते 9 लोगों की मौत हो चुकी है साथ ही इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1190 हो गई है। इतना ही नहीं चीन से लौटे पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी खुद को 5 दिन सेल्फ- क्वारंटाइन कर लिया है। पाक की माली हालत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पाकिस्तान में कोरोना की पहली मौत के तीन दिन बाद ही पाकिस्तान सरकार ने विश्व बिरादरी से आह्वान किया था कि कोरोना की चपेट में आने वाले गरीब देशों के कर्जे को माफ कर देना चाहिए।

उत्तराखंड: लॉकडाउन में निकाली बारात, पुलिस ने रुकवाया निकाह, दुल्हा व काजी समेत 8 गिरफ्तार

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन है। इस दौरान किसी भी प्रकार के सामाजिक व धार्मिक आयोजनों पर बिना अनुमति के रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद भी कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और लगातार इसका उल्लंघन कर रहे हैं।

ऐसा ही मामला सामने आया है उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के सीमांत क्षेत्र खटीमा से। पुलिस को गुरुवार देर रात सूचना मिली कि इस्लाम नगर वार्ड नंबर तीन में अब्दुल रज्जाक के घर में भीड़ इकट्ठी है। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर बिना अनुमति के हो रहे निकाह को रुकवा दिया। काजी व दूल्हे समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही उनकी कार को भी जब्त कर लिया है।

खटीमा पुलिस जब मौके पर पहुँची तो देखा कि अब्दुल रज्जाक के घर में उसकी बेटी नजाकत की बारात आई है। बारात किच्छा तहसील के सिरौलीकला गाँव आई थी। मौके पर पुलिस ने भीड़ देखी और लोगों को फटकार लगाई। पुलिस को देखकर मौके से कई लोग भाग खड़े हुए। पुलिस ने दूल्हे सलीम, उसके पिता फहीम और निकाह करा रहे काजी समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि धारा 188 का उल्लंघन करने पर सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हालाँकि, बाद में उन्हें सख्त चेतावनी के साथ जमानत दे दी गई।

पुलिस ने बताया कि इस्लाम नगर क्षेत्र कोरोना संक्रमण के लिहाज से काफी संवेदनशील है। ये वही जगह है जहाँ दो दिन पहले आठ कोरोना संदिग्ध मिले थे। इन सभी को आइसोलेशन में रखा गया है। इसके बाद इस्लामनगर में किसी भी व्यक्ति को बाहर से जाने और वहाँ के लोगों के बाहर जाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।

गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से घर में रहने को कहा है और सोशल डिस्टेंसिंग करने को कहा है। कोरोनावायरस के चलते कई लोगों ने अपनी शादी स्थगित कर दी है, लेकिन कुछ लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं। इनके खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है।

लॉकडाउन के दौरान शिया वक्फ की मस्जिदों में पढ़ी नमाज तो होगी जेल: शिया वक्फ बोर्ड चीफ वसीम रिजवी

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने ऐलान किया है कि लॉकडाउन के दौरान बोर्ड की किसी भी मस्जिद में जुमे या रोजाना की नमाज जमात में नहीं पढ़ी जाएगी। बोर्ड ने अपने सभी मुतवल्लियों (मस्जिद का केयरटेकर) को निर्देश दिए है कि इस निर्देश की अवहेलना करने पर बोर्ड की ओर से संबंधित मुतवल्ली और मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज करा कर जेल भेजा जाएगा।

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को बताया कि शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अपने सभी मुतवल्ली को अवगत करा दिया है कि लॉकडाउन के दौरान किसी भी मस्जिद में जुमे की नमाज या रोजमर्रा की नमाज जमात के साथ नहीं पढ़ी जाएगी। अगर कोई भी मुतवल्ली बोर्ड के इस निर्देशों की अनदेखी करता है या धार्मिक भावनाओं में बहकर कर चोरी-छिपे नमाज जमात से करवा कर भीड़ जमा करता है, तो बोर्ड उस मुतवल्ली और नमाज पढ़ाने वाले मौलाना के खिलाफ FIR दर्ज करा कर जेल भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि जब तक लॉकडाउन है, तब तक यह नियम लागू रहेगा और सख्ती से पालन किया जाएगा। जनहित से जुड़े इस मामले में नियम तोड़ने वाले को बख्शा नहीं जाएगा। गौरतलब है कि कोरोना लॉकडाउन शुरु होने से वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी लगातार लोगों को मदद देने और वायरस को फैलने से रोकने के लिए सहयोग कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने सरकार से पेशकश की थी कि सरकार चाहे तो यूपी में जितनी भी शिया वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी है, उन धार्मिक स्थलों, स्कूलों, मदरसों को अस्पताल में तब्दील कर उनमें आइसोलेशन वॉर्ड बना सकती है।

बोर्ड ने प्रदेश के सभी जिलों में करीब तीन हजार से ज्यादा गरीब परिवारों के मुफ्त राशन की व्यवस्था की है। वसीम रिजवी ने 50 हजार रुपए या इससे अधिक सालाना आमदनी वाली वक्फ संपत्तियों के मुतवल्ली से 25 परिवार, एक लाख रुपए या इससे ज्यादा आमदनी वाले से 50 परिवार और 5 लाख या इससे ज्यादा आमदनी वाली संपत्ति के मुतवल्लियों से 100 गरीब परिवारों में से प्रत्येक को डेढ़ किलो दाल, चार किलो चावल, पाँच किलो आटा, एक किलो नमक और एक किलो तेल मुफ्त बाँटने के लिए कहा है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले वसीम रिजवी ने संक्रमण का प्रसार रोकने को लेकर समुदाय को एक बड़ी सलाह देते हुए कहा था कि अगर कोरोना वायरस से समुदाय विशेष किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसे कब्रिस्तान में दफनाने की जगह उसे शव को जलाकर उसका अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया है कि अगर उस शव को दफनाया जाता है तो कोरोना वायरस के फैलने की आशंका बनी रहती है।

दुनिया लॉकडाउन में लेकिन लल्लनटॉप अपने कर्मपथ से डिगा नहीं है

अगर आपको लगता है कि जब आप 21 दिन तक कोरोना के संक्रमण के खतरे से घर पर बैठे हुए हैं, और ऐसे में सिर्फ पुलिस और प्रशासन ही आम आदमी की मदद कर रहे हैं तो आप एक सौ एक प्रतिशत गलत हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपने दिमाग और हुनर का सौ प्रतिशत इस्तेमाल करके आजकल लोगों को घर बैठे मारक मजा दे रहे हैं। इनमें से कुछ चुनिन्दा नाम हैं- इन्टरनेट का हाशमी दवाखाना ये, दी लल्लनटॉप, छुपी हुई प्रतिभाओं का मंच टिकटोक और शाहीन बाग़ से गानों की प्रेक्टिस कर हाल ही में घर पर कैद हो चुके लेफ्टिस्ट सुर-कोकिलाएँ।

सबसे पहले बात करते हैं हाशमी दवाखाना की। हिटलर के लिंग की सटीक नाप बताकर चर्चा में आए दी लल्लनटॉप आजकल किलोमीटर के हिसाब से (लोकोक्ति) यूट्यूब पर वीडियो बनाते हुए देखे जा रहा है, इनमें से एक सबसे ज्यादा जोशीला वीडियो, जिसने घर पर बंद बैठे युवाओं का ध्यान आकर्षित किया, वो था – “सेक्स पावर बढ़ाने जैसी चाहत से आया कोरोना वायरस”

इस वीडियो की गहराई में जाने की जरूरत तो नहीं है लेकिन इस वीडियो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस वायरस के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने में जुटे हुए वैज्ञानिकों को तो दे ही देना चाहिए। अगर यह सम्भव ना हो तो इस विडियो की यूट्यूब लिंक कम से कम से कम नॉर्थ कोरिया को तो दे ही देनी चाहिए। क्योंकि जो लोग हिटलर की मौत के इतने वर्षों बाद भी उसके गुप्तांग पर पीएचडी कर सकते हैं, वो कोरोना के लिए कोई एंटीडॉट भी जरूर तैयार कर देंगे।

यही नहीं, दी लल्लनटॉप अपनी ऑडियंस का ख़ास ध्यान रखते हुए उनके मतलब का फैक्ट चेक करते हुए यह भी साबित करते हुए देखा गया है कि सरसों के तेल से कोरोना वायरस से बचाव नहीं हो पाता है। यह वो ऑडियंस है जो दैनिक सस्ते इन्टरनेट की पूरी डेढ़ जीबी या तो टिकटॉक, या फिर दी लल्लनटॉप के चरणों में ही समर्पित करती है।    

दी लल्लनटॉप के बाद नम्बर आता है उसी की सम्पादकीय नीतियों से मिलते-जुलते एक अन्य वैचारिक मंच का, जिसे ‘फाल्ट न्यूज़’ के वैज्ञानिकों ने मानव सभ्यता के लिए हुई सबसे बड़ी खोज में शरीक माना है- TikTok। किसने सोचा था कि ट्विटर और फेसबुक पर दिन-रात टिकटोकवासियों पर चुटकुले बनाने वाले लॉकडाउन की घोषणा के अगले ही मिनट पहली फुर्सत में अपने मोबाइल पर टिकटॉक इनस्टॉल करते हुए देखे जाएँगे।

यदि टिकटॉक सभ्यता का समय पर पता न चलता तो विश्व की कुछ चुनिन्दा उन्नत सभ्यताओं में से एक यह टिकटॉक भी आज विलुप्त हो चुकी होती। कुछ सूत्रों का तो यह भी कहना है कि चीन ने हमें सिर्फ वामपंथ और कोरोना जैसे वायरस ही नहीं दी बल्कि टिकटॉक भी दिया है इसलिए हमें उनका शुक्रगुजार होना चाहिए। एवेंजर्स फिल्म में थानोस ने भी कहा था कि यही ब्रह्माण्ड का संतुलन है।

इसके बाद नम्बर आता है उस हस्ती का जिसके आप दीवाने हैं। यह नाम है उस स्वर कोकिला का, जिसने तीन महीने तक शाहीन बाग़ में कुछ कविताओं की रिहर्सल तो की लेकिन करमजले कोरोना ने उसकी इस सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया। अब उन्होंने इसका बदला लेने का खुद को वचन दे दिया है और लॉकडाउन के दौरान रोजाना ट्विटर पर अपनी सुरीली नज्में पोस्ट कर के लोगों को लॉकडाउन की बोर जिन्दगी में बाहर लाने की कोशिश कर रही हैं। हालाँकि, राष्ट्रवादी किसी का एहसान मानते नहीं हैं लेकिन वह अनवरत रूप से अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ रही हैं।

एक नाम, जिसने सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस जितना ही समानांतर आपदा को जारी रख रखा है, वह है वाट्सएप यूनिवर्सिटी के कुलपति रवीश कुमार। रवीश कुमार ने जिस महामारी का नेतृत्व किया है, वह कोरोना से भी कई वर्ष पहले से सोशल मीडिया पर मौजूद थी, बस लोग इसकी मारक क्षमता से अनजान थे। यकीन ना हो तो खुद देख लो –

घर से निकलते ही –

कुछ दूर चलते ही –

अगर आपको लॉकडाउन के दौरान रवीश कुमार के समाज के लिए दी गए योगदान पर यकीन नहीं हो रहा है, तो उन लोगों से पूछिए जिन्हें रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज और प्रोफाइल से ब्लॉक कर रखा है। उनकी हालत आजकल कुछ ऐसी है –

इन सबमें सबसे दुखभरी हालात में आजकल अगर कोई है तो वो हैं देश के हर वर्ग के चहेते ‘लव मशीन शशि थरूर।’ इससे बड़ी विपत्ति क्या होगी कि आजकल उनकी तस्वीरें अकेले ही देखने को मिल रही हैं। स्वयं विचार करें।

सऊदी अरब: शॉपिंग ट्रॉली पर थूकने वाला युवक निकला कोरोना पॉजिटिव, मिल सकती है सजा-ए-मौत

सऊदी अरब में एक युवक को शॉपिंग ट्रॉली पर थूककर कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने के अपराध में गिरफ्तार किया गया। युवक को इस हरकत के लिए मौत की सजा हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक को ट्रॉली पर थूकते हुए वहाँ मौजूद कर्मचारियों ने देखा। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई। सुरक्षा लिहाज से जब उसका टेस्ट किया गया तो वह कोरोना संक्रमित पाया गया।

जानकारी के अनुसार, युवक विदेशी नागरिक है। वह सऊदी अरब के बलजुराशी शहर में रहता था। उसने ऐसा क्यों किया इसकी पड़ताल की जा रही है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने उस स्टोर में जाने वाले हर शख्स को अस्पताल जाकर अपना चेकअप कराने की सलाह दी है। इसके अलावा सीसीटीवी के जरिए हर उस जगह की पहचान की जा रही है, जहाँ-जहाँ इस युवक ने जगह को इंफेक्ट किया।

गौरतलब है कि सऊदी अरब में इस हरकत को एक बड़ा अपराध माना गया है और अरब के ऑनलाइन पोर्टल के मुताबिक उसे सख्त सजा हो सकती है। अजेल पोर्टल के अनुसार, “यह व्यवहार धार्मिक और कानूनी रूप से निंदनीय है। इसे समाज के सदस्यों के बीच जान-बूझकर कोरोनोवायरस महामारी फैलाने और उनके बीच दहशत फैलाने के रूप में माना जाता है।”

सऊदी अधिकारियों ने बताया कि उसके कार्यों को एक तरह की प्रथम श्रेणी की हत्या माना जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार, जिस समय उसने ये किया उस समय उसे बुखार, खाँसी थी और उसकी ये हरकत केवल अन्य लोगों को मारने के उद्देश्य से थी। बता दें कि सऊदी अरब के अधिकारियों ने घातक कोरोना वायरस के कारण अपने देश में 900 मामले सामने आने की पुष्टि की हैं। 2 लोगों के मौत की बात भी सामने आई है। परिस्थितियों को देखते हुए वहाँ देश भर में कर्फ्यू लगाया जा चुका है। शुरुआत में केवल 13 शहरों में कर्फ्यू लगाया गया था।

कोरोना से जंग लड़ने के लिए भारतीय सेना तैयार: ‘ऑपरेशन नमस्ते’ का ऐलान, मात्र 6 घंटे का प्लान

भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने आज कहा कि भारतीय सेना कोरोना महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। जनरल नरवणे ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आर्मी की भूमिका को रेखांकित करते कहा कि इस घड़ी में सेना का दायित्व है कि वह देश की सरकार और नागरिक प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर यह लड़ाई लड़े।

मीडिया के अनुसार देश के आर्मी चीफ ने आज कोरोना के खिलाफ सेना की तैयारियों को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि सेना के पास 6 घंटे का एक प्लान तैयार है जिसके अंतर्गत आवश्यकता पड़ने पर तुरंत ही आइसोलेशन सेंटर और आईसीयू आदि तैयार किए जा सकते हैं। आर्मी ने COVID 19 के खिलाफ अपने ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन नमस्ते’ नाम दिया है। सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना आज तक अपने सभी ऑपरेशन्स में सफल हो कर निकली है और इस कोरोना वायरस के खिलाफ शुरू किए गए ‘ऑपरेशन नमस्ते’ में भी भारतीय सेना सफलता प्राप्त करेगी। यहाँ यह भी बताना जरुरी है कि अबतक सेना ने देशभर में 8 क्वारंटाइन सेंटर पूरे देश में शुरू कर दिए हैं।

जनरल नरवणे ने कहा- कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हम अलग-अलग स्तर पर तैयारियों में जुटे हैं। हमें नहीं पता कि आगे स्थितियाँ कैसी बनेंगीं लेकिन हम हर स्थिति से निपटने को तैयार हैं। सेना ने जवानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की हुई है, उन्हें कोरोना से बचने के दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त हम बेहद कम नोटिस पर मेडिकल सुविधाएँ, बेड, आइसोलेशन सेंटरों आदि भी तैयार कर के देने को पाबंद हैं।

याद रहे कि देश में अब तक कोरोना से संक्रमित होने वालों की संख्या 700 पार कर गई है जिसमें सबसे बुरे हाल महाराष्ट्र और केरल राज्यों के हैं, जहाँ मरीजों की संख्या 100 से ज्यादा हो चुकी है। जबकि पूरे देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 20 पहुँच चुकी है।

विदेश से भारत आए कोरोना संक्रमितों में से आधे इस्लामी मुल्कों से लौटे, सबसे ज्यादा 105 दुबई से

कोरोना वायरस का संक्रमण चीन के वुहान से शुरू होकर पूरी दुनिया में फैला। भारत में पहला मामला 30 जनवरी को केरल में सामने आया। वुहान यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे एक छात्र के देश लौटने के बाद संक्रमण का यह पहला मामला दर्ज हुआ। इसके बाद से अब तक देश में 724 संक्रमित सामने आ चुके हैं। इनमें से 66 पीड़ित रिकवर कर चुके हैं। 17 मरीज इस संक्रमण से नहीं लड़ पाए और उनकी मृत्यु हो गई।

भारत में इस संक्रमण के आँकड़ों का विश्लेषण करने पर एक चौंकाने वाले बात सामने आती है। भारत में 300+ संक्रमण के मामले उन लोगों के हैं, जिनका प्रत्यक्ष रूप से विदेश यात्राओं का इतिहास रहा है। इन 300 मामलों में से भी 142 पॉजिटिव मामले उन लोगों के हैं, जो मध्य-पूर्व के इस्लामी मुल्कों से लौटे हैं। 

दरअसल, covid19indiaOrg द्वारा इकट्ठा किए गए डाटा का दिल्ली के डॉ. अनुपम सिंह ने विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया कि करीब 300 मामले ऐसे मरीजों के थे, जिनका ऐसे देशों में ट्रैवल करने का इतिहास सामने आया, जो संक्रमण की जकड़ में बुरी तरह फँसे हैं। नमें 142 मामले ऐसे थे जो मिडिल ईस्ट की यात्रा करके लौटे थे। यानी दुबई, कतर, सऊदी अरब, मक्का और ईरान। इनमें भी दुबई टॉप पर है। जहाँ से करीब 105 लोग संक्रमित होकर देश लौटे। लेकिन इनमें संक्रमण की पहचान भारत आने के बाद हुई।

यहाँ बता दें इससे पहले कई लोगों ने इस बात का अनुमान लगाया था कि विदेश से लौटे संक्रमित लोगों में अधिकतर दुबई से हो सकते हैं, क्योंकि दुबई अन्य देशों के मुकाबले भारत वापस आने वाले कई लोगों के लिए पारगमन बिंदु है। मगर, उन दावों के बीच पॉजिटिव केसों की साफ तस्वीर साफ नहीं हुई थी। पर अब ये तस्वीर आँकड़ों के साथ साफ है।

डॉ. सिंह द्वारा किए गए विश्लेषण के परिणामों से ये भी मालूम चलता है कि भारत में इस आपदा के कारण मृत्यु दर वरिष्ठ नागरिकों में लगभग 2 प्रतिशत हैं। वही पुरुषों और महिलाओं में इसके होने का अनुपात, 60:40 का है।

डॉ. सिंह ने वापस लौटे संक्रमित मरीजों के डाटा में से ऐसे लोगों की भी शिनाख्त की है जिन्होंने भारत आकर कोरोना वायरस को अन्य 16 लोगों में फैलाया और घातक साबित हुए।

बता दें, डॉ. सिंह ने अपना अध्य्यन जिस आधार पर किया है, उसे covid19org ने सबसे लिए उपलब्ध कराया है। इसे आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

डॉ. सिंह द्वारा किए गए अध्य्यन से कुछ बातें और भी शीशे की तरह साफ होती हैं। सबसे पहले ये कि जो भारत सरकार ने पूरे देश को 21 दिन के लॉकडाउन करने का फैसला लिया है, वो फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। इसे इस वायरस के संक्रमण को देश में फैलने से रोकने में मदद मिलेगी। बावजूद इसके किसी को लॉकडाउन के पीछे का कॉन्सेप्ट समझने में दिक्कत हो तो वह डॉ. सिंह की रिसर्च में सामने आए परिणामों को देखकर समझ सकता है कि आखिर किस तरह ये वायरस फैलता है और 2 से 27 लोगों को इंफेक्ट करता है।

यहाँ ये भी बता दें कि मध्य-पूर्व से लौटे संक्रमित मरीजों के आँकड़े और उनसे संक्रमित हुए लोगों की संख्या देखकर ये भी स्पष्ट होता है कि लॉकडाउन के अलावा 14 अप्रैल तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भारत में आने-जाने से रोकने का फैसला भी बेहद अहम है। इससे यक़ीनन कोरोना के बढ़ते प्रभाव को रोकने में मदद मिलेगी।

हम केले के लिए बाहर हैं, शहर में घूम रहे, डरने की कोई बात नहीं, मेरा नाम है काला दादा: जलगाँव पुलिस ने किया गिरफ्तार

एक तरफ लोग कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लॉकडाउन के दौरान घरों में कैद हैं। तो वहीं कुछ लोग बेवजह की बेहूदगी दिखाते लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए सड़क पर घूम रहे हैं। कुछ ऐसी ही एक वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल महाराष्ट्र के जलगाँव में एक व्यक्ति ने लॉकडाउन के दौरान पूरे शहर में बाईक घुमाते हुए वीडियो बनाई थी। इसके बाद इलाका पुलिस ने आरोपित व्यक्ति को शहर में कर्फ्यू के आदेशों की अवहेलना के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया।

वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि आरोपित व्यक्ति बिना हेलमेट के एक हाथ से तो बाइक चला रहा है और दूसरे हाथ से खुद की वीडियो बना रहा है, जबकि पीछे एक छोटा बच्चा भी बैठा हुआ है, जो कि केले का एक गुच्छा हाथ में लिए हुए है।

ट्विटर हैंडल पर पॉलिटिकल कीड़ा द्वारा अपलोड किए गए एक वीडियो में, आरोपित व्यक्ति यह कहते हुए दिखाई दे रहा है कि हम केले खरीदने के लिए बाहर हैं और हम शहर में घूम रहे हैं। हमें डरने की कोई बात नहीं है। हम निडर हैं क्योंकि मेरा नाम काला दादा है। अब ऐसे में पूरी दुनिया लॉकडाउन के तहत अपने-अपने घरों में कैद है और ये पिता-पुत्र बिना किसी चिंता के लॉकडाउन के बाद भी बाइक से शहर में घूम रहे हैं।

वहीं दूसरी वीडियो में आप देख सकते हैं कि आरोपित व्यक्ति एक पुलिस स्टेशन के अंदर पुलिस की गिरफ्त में दिखाई दे रहा है, जो कि कान पकड़े पुलिस की मौजूदगी में कहता है मैंने बहुत बड़ी गलती की है। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। मुझे अब अपनी गलती का एहसास हुआ। मैं फिर कभी ऐसा काम नहीं करूँगा और जैसी गलती मैंने की है ऐसी कोई गलती आप मत करना। साथ ही आरोपित ने कहा कि मैं उन पुलिस कर्मियों का शुक्रगुजार हूँ, जो 24 घंटे ड्यूटी पर हैं।

आपको बता दें कि लॉकडाउन के दौरान आदेशों की अवहेलना करने वाले कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। तो वहीं कई ऐसे भी केस सामने आए जब ऐसे लोगों पर पुलिस ने सख्ती की तो उन लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। कुछ ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों कोलकाता से आया था, जहाँ एक लड़की को एक पुलिसकर्मी को गाली देते और उस पर थूकते हुए देखा गया था। दरअसल, लॉकडाउन के दौरान पुलिसस ने लड़की की कार को रोक लिया था। वहीं बुधवार को बेंगलुरु के संजय नगर से दो उपद्रवियों को पुलिस कर्मियों पर हमला करने और उनकी बाइक रोकने पर उन पर पथराव करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना से अब तक 4 मौतें, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 130 हो गई है। वहीं बात करें पूरे भारत की तो अब तक इससे 16 मौतें और इससे संक्रमित लोगों की संख्या 700 से अधिक हो गई है। वहीं 14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन जारी है। साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से 21 दिनों तक घरों में रहने की ही अपील की है।

तरन्नुम ने नवजात बेटे का नाम रखा रणविजय: लॉकडाउन में मसीहा बनी खाकी को बरेली के दंपती का सलाम

कोरोना वायरस की विश्‍वव्‍यापी महामारी की वजह से पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। घरों में कैद लोगों की जिंदगी की रफ्तार जैसे थम सी गई लगती है। लेकिन जिंदगी की जरूरतें कभी नहीं थमतीं। संकट की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश पुलिस का ऐसा सहृदय और मददगार रूप सामने आया है। पुलिस के इस जज्बे को सलाम करते हुए बरेली के दपंती ने अपने नवजात बेटे का नाम नोएडा के एडिशनल DCP रणविजय के नाम पर रखने का फैसला किया है।

असल में बरेली की रहने वाली तरन्नुम उर्फ़ तमन्ना अली खान को 25 मार्च को लेबर पेन शुरू हो गया। उसकी हालत बेहद खराब थी। उसका शौहर नोएडा में था। लॉकडाउन की वजह से उसका बरेली पहुॅंचना मुमकिन नहीं था और तमन्ना को कोई अस्पताल ले जाने वाला भी नहीं था। संकट की इस घड़ी में तमन्ना के लिए पुलिस मसीहा बनी। खाकी ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए बरेली में मौजूद गर्भवती महिला के पास नोएडा में फँसे उसके पति को पहुँचाया। प्रसव पीड़ा से परेशान महिला ने सोशल मीडिया पर विडियो जारी कर अपना दर्द बयाँ किया। बरेली पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए नोएडा पुलिस से संपर्क किया। फिर नोएडा पुलिस ने तमन्ना के शौहर अनीस खान को सकुशल बरेली पहुँचा दिया।

तमन्‍ना की डिलिवरी सकुशल हुई और उसने एक बेटे को जन्‍म दिया। होश में आने के बाद उन्‍होंने सबसे पहले बरेली और नोएडा पुलिस का आभार जताया। तमन्‍ना ने कहा, “सचमुच आप लोग खाकी में भगवान हैं।’ तमन्ना ने डिलीवरी के बाद एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “मेरा नाम तमन्ना है, मैं बरेली की रहने वाली हूँ। अब से कुछ ही वक्त पहले शायद चार या पाँच घंटे पहले मैं मौत और जिंदगी से लड़ रही थी। मेरे हसबैंड नोएडा में फँसे हुए थे और यहाँ मुझे लेबर पेन हो रहा था। मुझे हॉस्पिटल पहुँचाने वाला भी कोई नहीं था और आज मेरा प्यारा सा बेटा है और मेरे हसबैंड मेरे पास हैं और ये सब पॉसिबल हुआ एसएसपी बरेली, बरेली पुलिस, कमिश्नर सर और एडिशनल DCP रणविजय सर। वैरी स्पेशल थैंक्स यू टू ऑल ऑफ यू आप लोगों के प्रयास की वजह से मेरे हसबैंड बरेली आ पाए और मुझे हॉस्पिटल में एडमिट कर पाए और मैंने प्यारे से बेटे को जन्म दिया है। खाकी में भगवान हैं आप लोग सचमुच, बहुत-बहुत शुक्रिया। आज आप लोगों की वजह से ही शायद मैं जिंदा हूँ।”

तमन्ना ने अपने नवजात बेटे का नाम एडिशनल DCP रणविजय सिंह के नाम पर रणविजय खान रखा है। बता दें कि इससे पहले तमन्‍ना ने नोएडा के अडिशनल डीसीपी कुमार रणविजय का धन्‍यवाद देते हुए एक मैसेज में इच्‍छा जताई थी कि अगर उनका बेटा हुआ तो वह उसका नाम रणविजय रखेंगी।

तमन्ना के शौहर अनीस ने एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में कहा, “जब मेरी बीबी ने मुझे देखा तब उसकी आँखों के आँसू रुके। उसने तुरंत रणविजय सर को मैसेज किया कि अगर बेटा हुआ तो वह उसका नाम रणविजय ही रखेगी। मेरे बरेली पहुँचने के करीब 45 मिनट के बाद मैं पिता बना। हमने उसका नाम रणविजय खान रखा है। मेरी बीबी को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मैं उसके पास पहुँच पाऊँगा लेकिन पुलिस की मदद से पहुँच गया।”

मोदी ताली बजवा सकता है तो तुम कोरोना रोकने के लिए करो अजान: ममता का पार्षद अख्तर हुसैन

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दुनिया भर की सरकारें इसे रोकने के हरसंभव प्रयास में जुटी हैं। भारत में भी व्यापक स्तर पर इससे निपटने के उपाय किए जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर 14 अप्रैल तक देशव्यापी लॉकडाउन भी किया गया है। लोगों को घरों से ना निकलने की हिदायत दी गई है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक नेता अपने क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के लोगों से अजान के लिए एक जगह पर इकट्ठा होने की अपील कर रहे हैं।

इस टीएमसी नेता का नाम है अख्तर हुसैन। अख्तर हुसैन पश्चिम बंगाल के आसनसोल में पार्षद हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के लॉकडाउन के आदेश की खिल्ली उड़ाते हुए लोगों से अपील की है, “अगर मोदी ताली बजाकर कोरोना को रोक सकते हैं तो क्यों न हमें इसे हराने के लिए प्रार्थना (अजान) में जुटना चाहिए।” बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दौरान शाम 5 बजे स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिस का हौसला बढ़ाने के लिए लोगों से पाँच मिनट तक ताली, घंटी या थाली बजाने की अपील की थी। लेकिन यहाँ पार्षद उनके नाम से दुष्प्रचार कर रहा है।

जब टाइम्स नाउ ने अख्तर हुसैन से उनकी इस अपील के बारे में पूछा तो उन्होंने ढिठाई के साथ कहा, “क्या अब तक कोरोना बीमारी का कोई इलाज पता चला है? अगर हम अजान के जरिए इससे लड़ना चाहते हैं तो उसमें बुराई क्या है। मैंने कहा है कि कोरोना को अजान से रोका जा सकता है। लोग किसी न किसी तरह सड़क पर आ-जा रहे हैं। तो अगर अजान में लोग आते हैं तो हर्ज ही क्या है?” बता दें कि गुरुवार (मार्च 26, 2020) को आसनसोल में अजान के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे। यहाँ पर कोई पुलिस भी नजर नहीं आ रही थी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सड़क पर कुछ सब्जी वालों के ठीक सामने पहुँचती है। जिसके बाद वो हाथ में चॉक लेकर सड़क पर गोले बनाना शुरू कर देती हैं। ममता एक साथ कुछ दूरी पर कई गोले बनाती है। ऐसा करके ममता ने लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग सिखाने की कोशिश की।

हालाँकि, जब वह सड़क पर चॉक से गोले बना रही थीं, तब उन्हें देखने के लिए पीछे काफी लोग खड़े हो गए। लोग एक दूसरे से काफी करीब खड़े थे। जो वीडियो में साफ देखा जा सकता है। इसीलिए ट्विटर यूजर्स ने इसे लेकर ममता की खूब खिंचाई भी की कि ममता के पीछे जमा लोग कौन सी सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो कर रहे हैं?

बता दें कि लॉकडाउन के तहत किसी को भी सामूहिक धार्मिक आयोजन करने की मनाही है। तमाम मुस्लिम संगठनों ने भी कोरोना के संक्रमण को देखते हुए जुमे की नमाज के लिए मस्जिदों में ना इकट्ठा होने की अपील की है। सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर पीएम मोदी की पहल की उनके विरोधी नेता भी तारीफ कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी के अलावा पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी कोरोना की चेन को तोड़ने के लिए पीएम की मुहिम का समर्थन किया है। लेकिन टीएमसी नेता का यह रवैया उनके राज्य में कोरोना के खतरे को बढ़ा रहा है।

जानकारी के मुताबिक देश भर में कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो मई तक 13 लाख लोग संक्रमित हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक कोरोना के मामलों में मृत्यु दर 3.4 फीसदी है, जबकि आम फ्लू के संक्रमण में मृत्यु दर 1 फीसदी ही है। बात अगर भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की करें तो अब तक 727 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जबकि इस वायरस की वजह से पूरे देश में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है।