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‘मामाजी’ आसानी से विश्‍वासमत हासिल करने के बाद कोरोना से प्रदेश को बचाने के लिए हुए सक्रिय

मध्य प्रदेश की सत्ता हासिल करने के अगले ही दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में बड़ी ही आसानी से विश्वासमत हासिल कर लिया। गौर करने वाली बात यह कि विपक्षी पार्टी सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों ने भी विश्वासमत के पक्ष में अपना वोट दिया। इसी के साथ शिवराज सिंह चौहान फ्लोर टेस्ट में पास हो गए।

दरअसल, सोमवार रात 9 बजे सीएम पद की शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 24 मार्च सुबह को ही विधानसभा सत्र बुला लिया और सदन की कार्यवाही शुरु होते ही शिवराज सिंह ने बहुमत का प्रस्ताव पेश कर दिया। बहुमत का प्रस्ताव पेश होते ही मुख्य विपक्षी दल कॉन्ग्रेस ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया और कॉन्ग्रेस के किसी भी विधायक ने सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। वहीं बसपा विधायक रामबाई और संजीव सिंह, सपा के विधायक राजेश शुक्ला के साथ निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा और विक्रम राणा भी सदन में मौजूद रहे। इतना ही नहीं इन सभी विधायकों ने बीजेपी को अपना समर्थन दिया। इसी के साथ बीजेपी को कुल 112 विधायकों का समर्थन मिला और मुख्यमंत्री ने अपना बहुमत साबित कर दिया।

दरअसल, इस प्रस्ताव का सदन में मौजूद सभी 107 बीजेपी विधायकों के अलावा 2 निर्दलीय, बीएसपी और एक एसपी के विधायक ने समर्थन किया। बहुमत प्रस्ताव पारित कराने के लिए सदन में आसंदी पर मौजूद सभापति जगदीश देवड़ा ने मतदान की औपचारिकता पूरी करवाई। इस दौरान हुए मतदान में विश्वास मत को ध्वनिमत के जरिए सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। गौर करने वाली बात यह कि इस दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी का एक भी विधायक सदन में मौजूद नहीं था। यही कारण था कि शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में बिना किसी विरोध के आसानी से विश्‍वासमत हासिल कर लिया था।

वहीं आपको बता दें कि सत्र से पहले सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस का समर्थन करने की बात कही थी। इसके बावजूद सपा के विधायक ने शिवराज के समर्थन में वोट किया। हालाँकि, सदन में अपने संबोधन के दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यपाल ने सरकार को पंद्रह दिनों के अंदर सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा था, इसलिए वे विश्वास मत पेश कर रहे हैं। शिवराज ने कहा कि उनकी सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता मौजूदा हालात में कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकना है। इसके बाद सभापति जगदीश देवड़ा ने सदन की कार्यवाही 27 मार्च शुक्रवार को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 15 महीने की सरकार चलाने के बाद 20 मार्च को कमलनाथ ने फ्लोर टेस्ट से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद ही 23 मार्च राज 9 बजे शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और इसके बाद उन्होंने तत्काल कोरोना वायरस से निपटने के लिए भोपाल और जबलपुर में कर्फ्यू लगाने के‌ निर्देश दिए थे।

लॉकडाउन मतलब? जानिए क्या मिलेगा, कहाँ जा सकते हैं, क्या-क्या करने पर पाबन्दी नहीं है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कम्प्लीट लॉकडाउन की घोषणा की है। पीएम ने कहा, “कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की गलत सोच, आपको, आपके बच्चों को, आपके माता-पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को, पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी। साथ ही उन्होने बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि आज रात 12 बजे से पूरे देश में, ध्यान से सुनिएगा, पूरे देश में, आज रात 12 बजे से पूरे देश में, संपूर्ण लॉकडाउन होने जा रहा है।”

तो क्या लॉकडाउन का मतलब लाइफ का लॉक हो जाना? खाना-पीना सब बंद? नहीं। घबराएँ नहीं। आज की रात से पहले जो लॉकडाउन किया गया था, कुछ वैसा ही आगे भी मतलब 14 अप्रैल तक चलेगा।

लॉकडाउन
लॉकडॉउन मतलब क्या? क्या होंगे हमारे दायित्व? किनको व किन परिस्थितियों में मिलेगी छूट (साभार: दैनिक जागरण, यह 24 मार्च की रात के पहले का है, ऐसा ही कुछ 14 अप्रैल तक भी जारी रहेगा)
लॉकडाउन
लॉकडॉउन मतलब क्या? क्या होंगे हमारे दायित्व? किनको व किन परिस्थितियों में मिलेगी छूट (साभार: दैनिक जागरण, यह 24 मार्च की रात के पहले का है, ऐसा ही कुछ 14 अप्रैल तक भी जारी रहेगा)

हालाँकि, इस लॉकडाउन से आपको पैनिक होने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि कई ऐसी सेवाएँ हैं जो खुली रहेंगी। जैसे कि अगर आपके घर में कोई बीमार है तो आप दवा लेने जा सकते हैं। यानी मेडिकल की दुकानें खुली रहेंगी और फार्मेसी की दुकानों पर आप जा सकते हैं। इसके अलावा हॉस्पिटल खुले रहेंगे, वहाँ आप ज़रूरत पड़ने पर जा सकते हैं। ग्रॉसरी स्टोर्स भी खुले ही रहेंगे और राशन लेने के लिए आप जा सकते हैं।

निम्नलिखित सेवाएँ लॉकडाउन के दौरान भी काम करती रहेंगी- मजिस्ट्रेट ड्यूटी वाले दफ्तर, पुलिस, स्वास्थ्य, बिजली, जेल, फायर ब्रिगेड, नगर सेवा, दिल्ली विधान सभा, वेतन कार्यालय, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, बैंक कैशियर, डाक व दूरसंचार सेवाएँ, खाना व दवा की इ-कॉमर्स, खाद्य पदार्थों की दुकानें, मिल्क और किराना प्लांट्स, रेस्टॉरेंट्स की होम डिलीवरी, पेट्रोल पम्प और मेडिकल की दुकानें।

लॉकडाउन
लॉकडॉउन मतलब क्या? क्या होंगे हमारे दायित्व? किनको व किन परिस्थितियों में मिलेगी छूट (साभार: दैनिक जागरण, यह 24 मार्च की रात के पहले का है, ऐसा ही कुछ 14 अप्रैल तक भी जारी रहेगा)

हाँ, ट्रांसपोर्ट सेवाओं पर ज़रूर असर पड़ेगा क्योंकि आपको अपने आसपास की दुकानों से ही चीजें लेनी पड़ेंगी। हाँ, शादी-विवाह फंक्शन इत्यादि नहीं हो पाएँगे। जो व्यक्ति ज़रूरी इमरजेंसी सेवाओं में हैं, उन्हें छोड़ कर बाकी लोग ऑफिस वगैरह नहीं जाएँगे। सभी कंपनियों के कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ ही काम करेंगे। सभी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे और बच्चे घर के भीतर ही रहेंगे। पहले ही कहा जा चुका है कि सभी प्रकार की परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ाई जाएगी।

PM मोदी का बड़ा ऐलान: सम्पूर्ण देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन, आज रात 12 बजे से कोई घर से बाहर नहीं निकलेगा

6 पॉइंट में समझें क्या होता है लॉकडाउन? आखिर क्यों इससे घबराने की जरूरत नहीं

PM मोदी का बड़ा ऐलान: सम्पूर्ण देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन, आज रात 12 बजे से कोई घर से बाहर नहीं निकलेगा

भारत में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लोग सख्ती से लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। इसीलिए विभिन्न राज्यों की पुलिस ने कड़े तेवर अपनाए हैं। पिछली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब देश को सम्बोधित किया था, तब उन्होंने कहा था कि 22 मार्च को सभी लोग दिन भर ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करें और शाम 5 बजे अपने-अपने घर, बालकनी या खिड़की के पास खड़े होकर थाली, ताली या घंटी बजा कर डॉक्टरों व सार्वजनिक सेवाओं में रत अन्य कर्मचारियों को धन्यवाद दें। पीएम मोदी की इस अपील का अच्छा असर हुआ और लोगों ने उनके कहे अनुसार कार्य किया। अब उन्होंने दूसरी बार राष्ट्र को सम्बोधित किया है।

दूसरी बार राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दिन के जनता कर्फ़्यू से भारत ने दिखा दिया कि जब देश पर संकट आता है, जब मानवता पर संकट आता है तो किस प्रकार से हम सभी भारतीय मिलकर, एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। बच्चे-बुजुर्ग, छोटे-बड़े, गरीब-मध्यम वर्ग-उच्च वर्ग, हर कोई परीक्षा की इस घड़ी में साथ आया। पीएम ने जनता से कहा कि आप ये भी देख रहे हैं कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है।

पीएम मोदी ने बताया कि इन सभी देशों के दो महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है और एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि कोरोना से प्रभावी मुकाबले के लिए एकमात्र विकल्प है- सोशल डिस्टन्सिंग। कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है, कोई रास्ता नहीं है। बकौल पीएम, कोरोना को फैलने से रोकना है, तो इसके संक्रमण की सायकिल को तोड़ना ही होगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्टन्सिंग केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक है। ये सोचना सही नहीं है। उन्होंने कहा:

“कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की गलत सोच, आपको, आपके बच्चों को, आपके माता-पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को, पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी। आज रात 12 बजे से पूरे देश में, ध्यान से सुनिएगा, पूरे देश में, आज रात 12 बजे से पूरे देश में, संपूर्ण लॉकडाउन होने जा रहा है।”

पीएम मोदी ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि हिंदुस्तान को बचाने के लिए, हिंदुस्तान के हर नागरिक को बचाने के लिए आज रात 12 बजे से, घरों से बाहर निकलने पर, पूरी तरह पाबंदी लगाई जा रही है। पीएम ने निश्चित तौर पर इस लॉकडाउन की एक आर्थिक कीमत देश को उठानी पड़ेगी। लेकिन, एक-एक भारतीय के जीवन को बचाना इस समय मेरी, भारत सरकार की, देश की हर राज्य सरकार की, हर स्थानीय निकाय की, सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

कोरोना से लड़ रहा है पूरा देश लेकिन समझने को तैयार नहीं समुदाय विशेष, मेरठ में पाबंदियों को लेकर पुलिस से भिड़े नमाजी

चीन के बुहान शहर से निकला कोरोना वायरस का प्रकोप आज पूरे विश्व में फैल चुका है, इसकी रोकथाम के लिए देश अपने-अपने तरीके से तरह-तरह की पाबंदियाँ लगा रहे हैं। कुछ इसी तरह से भारत में भी सभी राज्य कोरोना को रोकने के लिए पाबंदियाँ लगा रहे हैं और इसमें आम जनता अपना पूरा समर्थन देकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है, लेकिन इस बीच कुछ अल्लाह के बंदे कोरोना को लेकर नहीं बल्कि कुछ तथाकथित उसूलों को लेकर अपने ही पुलिस प्रशासन से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ से।

22 मार्च को पूरा देश मोदी जी की एक अपील पर जनता कर्फ्यू का पालन कर रहा था। सभी लोग घरों में कैद थे। घड़ी में पाँच बजते ही लोग अपने-अपने घरों से निकले और दरवाजों पर खड़े होकर कोई थाली बजा रहा था कोई ताली, कोई शंख तो कोई घंटी बजाने में लगा हुआ था, क्योंकि मोदी जी ने जनता कर्फ्यू का पालन करने के बाद उन लोगों की ताली या थाली बजाकर धन्यवाद करने की अपील की थी, जो लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर घरों से बाहर निकलें हैं और कोरोना के खिलाफ जंग भी लड़ रहे हैं। इसी बीच कुछ ऐसा दिखाई देता है, जिसने न चाहकर भी अपने इंसान होने पर शंका पैदा कर दी। जब सभी लोग घरों में कैद थे तो वह लोग किसी न किसी बहाने से घरों के बाहर घूम रहे थे। जब लोग घरों से निकलकर थाली, ताली बजाकर पात्रों का अभिनंदन कर रहे थे, तो वह लोग मायूस और मुँह लटकाए अपने घरों में कैद थे, क्योंकि अपील राष्ट्रभक्त मोदी ने की थी न कि किसी इमाम या मौलवी ने।

इसके बाद घड़ी में शाम के 6 बजते हैं और सैकड़ों की संख्या में समुदाय विशेष के लोग घरों से बाहर आते हैं और मेरठ के सोतीगंज, सेफ्टी टैंक, राजबंध बाजार, कोतवाली लिसाड़ी गेट नौचंदी समेत कई मस्जिदों में जुटने लगते हैं और पुलिस प्रशासन के उस अपील का विरोध करने लगते हैं, जिसमें पुलिस ने कहा था कि 25 तक जिले में लॉक डाउन लगा दिया गया है लिहाजा अब नमाज के लिए मस्जिदों में एकत्र न हों। काफी देर विरोध के बाद पुलिस ने कई बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन तथाकथित शांति प्रिय समुदाय के लोग समझने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए वीडियोग्राफी करानी शुरू कर दी। इसके बाद ही समुदाय विशेष के लोग अपने स्थानों से हटे।

इसके बाद पुलिस ने माईक लेकर पूरे शहर के लोगों से घरों के अंदर रहने का आह्वान किया साथ ही मस्जिदों के मौलवियों से अपील की कि वह अपने लोगों से कहें कि कुछ दिनों तक सभी लोग मस्जिद में न आकर अपने घर पर ही नमाज पढ़ें। इसके बाद ही मामला शांत हुआ।

आपको बता दें कि योगी सरकार ने प्रदेश के प्रमुख शहरों को 25 मार्च कर लॉक डाउन कर दिया था, लेकिन महामारी की गंभीरता को देखते हुए योगी सरकार ने प्रदेश के 15 जिलों में कर्फ्यू घोषित कर दिया है। साथ ही सभी जिलों के जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि अगर कहीं इसका पालन नहीं होता है तो वह ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। गौरतलब है कि भारत में कोरोना से मरने वालों की सँख्या 10, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 471 हो गई है।

सोती महिलाओं के कपड़ों में हाथ डालता था पत्रकार दिलीप ख़ान, शराब पिला करता था सेक्स: नहीं हुई कोई कार्रवाई

भारत में एक बार फिर से ‘मी टू’ के और भी कई मामले सामने आए थे। इसी क्रम में दिलीप ख़ान नामक पत्रकार पर आरोप लगे थे। तब वो ‘हिन्द किसान’ का पत्रकार था। उस पर आरोप हिमांशी जोशी ने लगाया था। हिमांशी ने बताया था कि ख़ान ने सोती हुई लड़की के कपड़ों के भीतर हाथ डाला था। इस आरोप के बाद दिलीप ख़ान के ख़िलाफ़ किसी ने आवाज़ तक नहीं उठाई। बकौल हिमांशी, दिलीप ख़ान ने एक बार कहा था कि दिल्ली में 1500 लोग जो उसके दोस्त हैं, ऐसे है जो बिना सोचे उसके एक बार कहने पर अपना और दूसरों का खून उसके लिए बहा सकते हैं।

हिमांशी जोशी ने तब लगाए थे आरोप

दिलीप ख़ान ने ‘सहमति से सेक्स’ के दावे करके अपना बचाव किया था लेकिन हिमांशी का ये कहना था कि किसी को जानबूझ कर नशे में ढकेल देना और फिर उसके साथ कुछ करना सहमति में तो हरगिज नहीं आता है। दिलीप के साथियों ने हिमांशी के फेसबुक टाइमलाइन पर जाकर यौन शोषण आरोपित पत्रकार का बचाव किया था। आज भी जब हिमांशी इस मामले को उठाती है, दिलीप के गुंडे उसे प्रताड़ित करने फेसबुक पर पहुँच जाते हैं।

आश्चर्य की बात ये कि दो साल होने को आए लेकिन अभी भी दिलीप ख़ान के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई है और उलटा उसके समर्थक सोशल मीडिया पर उसका बचाव करते रहे हैं। ये मामला 2018 का है, जिसे लोगों ने नज़रअंदाज़ कर दिया। लेकिन हाँ, इसे उठाने के लिए हिमांशी को आज भी सोशल मीडिया में प्रताड़ित किया जा रहा है। हम इस लेख में विभिन्न स्क्रीनशॉट्स संलग्न कर रहे हैं, जिन्हें पढ़ कर आप इस पूरे मामले को जान और समझ सकते हैं। हिमांशी ने बताया था:

दिलीप खान ने अपनी पोस्ट में यह स्वीकार तो किया ही है कि लड़कियों को देर शाम अपने घर पर बुलाना, वहाँ रात बिताने के लिए उकसाना, उन्हें दारू ऑफ़र करना और उनकी सहमति से उनके साथ सेक्स करना उसकी सहज आदत है। लेकिन यही वो बिंदु है जो उसे कटघरे में खड़ा करता है क्योंकि दवाओं के असर के दौरान, शराब के नशे में और नींद में सहमति कोई मायने नहीं रखती। साफ है कि यह धूर्त न केवल अपनी छवि और लोकप्रियता के प्रभाव से नई-नई लड़कियों को अपने जाल में फँसाता है बल्कि जब वे अपनी व्यथा दुनिया को बताती हैं तो यह एक बार फिर अपनी मित्रमंडली के प्रभाव से उन्हें चुप करवा देने का प्रयास करता है और अपनी करनी से मुकरता है। अब उन लोगों को फ़ैसला करना है, जो इसके सपोर्ट में अंधे हुए जा रहे हैं कि क्या अपने घर की बच्चियों को वे दिलीप खान जैसे चरित्र के लोगों के साथ सुरक्षित समझते हैं या नहीं?”

‘हिन्द किसान’ ने कोई कार्रवाई नहीं की

ऊपर के बयान से आप समझ सकते हैं कि दिलीप ख़ान पर वहशी होने के आरोप लगाए जा रहे हैं और उसे एक ‘सीरियल प्रिडेटर’ बताया जा रहा है। साथ ही कई लोग ऐसे हैं जो उसका साथ भी दे रहे हैं। उसका साथ देने वालों में एक कथित फेमिनिस्ट अविनाश पांडे का नाम भी सामने आया, जो सोशल मीडिया पर अपना नाम समर अनार्य लिखता है। वो खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता भी कहता है और पत्रकार भी है। कानपुर में कार्यरत कश्यप किशोर मिश्रा ने बताया- “इस आदमी पर अक्सर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे। कोई महिला यदि इससे दूर जाने की कोशिश करती, यह खुद उस महिला और अपने किस्से उड़ाने लगता। बेहद अशिष्टता से इसे महिलाओं से मैंने बात करते देखा है।” दिलीप ख़ान, समीर अनार्य और अजित साहनी- ये तीनों ही क़ानून की जद से फ़िलहाल बाहर हैं।

दिलीप ख़ान पर लगे आरोपों का विवरण

इसी क्रम में एक अजित साहनी नामक व्यक्ति का भी नाम सामने आया है, जो हिमांशी को बार-बार फोन करके परेशान करता था। साहनी भी दिलीप के मित्रों में से एक है। अब तक इस मामले में ‘हिन्द किसान’ ने भी कोई कार्रवाई नहीं की है। दिलीप ख़ान ‘राज्य सभा टीवी’ में भी काम कर चुका है। अब लोग पुलिस और मीडिया संस्थान ‘हिन्द किसान’ से सवाल पूछ रहे हैं कि कार्रवाई के वादे के 2 साल बाद अब क्या स्थिति है, क्या एक्शन लिया गया है? उधर दिलीप ख़ान अब भी खुल्ला घूम रहा है, फेसबुक पर पोस्ट लिख कर अपना मोदी-विरोध दिखाने में लगा हुआ है। फ़िलहाल वो ‘AsiaVille Hindi’ में कार्यरत है।

मूर्तिपूजक देशों को जवाब है कोरोना, यातना और ज्‍यादा बढ़ाएँ, विद्रोह करने वालों को दंडित करें अल्लाह: ISIS

कोरोना वायरस से जहाँ पूरे देश में दहशत फैला हुआ है, वहीं समुदाय विशेष ने इसको लेकर एक अलग ही राग छेड़ रखी है। किसी ने इसे अल्लाह का अजाब करार दिया तो किसी ने इसे अल्लाह का प्रकोप। कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश देवबंद के उलेमा ने कोरोना वायरस पर अजीबेगरीब और बेतुका सा बयान देते हुए कहा था कि अल्लाह नाराज है, इसलिए कोरोना वायरस फैल रहा है। लोगों ने अल्लाह को मानना छोड़ दिया है या फिर अपने ही नियम कायदे शुरू कर दिए, इस वजह से अल्लाह नाराज है।

अब कोरोना वायरस से बचने के लिए अपने जिहादी लड़कों को वर्क फ्रॉम होम का फरमान सुनाने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने कोरोना महामारी को मूर्ति पूजा करने वाले देशों के लिए अल्लाह का जवाब बताया है। आईएसआईएस ने खुदा से अपील की है कि वह नास्तिकों पर कोरोना वायरस का कहर और ज्‍यादा बढ़ाए। उसने कहा कि कोरोना महामारी की वजह से युद्धरत देशों को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा है। आईएसआआएस ने कहा, “हमने अल्‍लाह से कहा है कि यातना को और ज्‍यादा बढ़ाएँ तथा इससे अपने मानने वाले बंदों की रक्षा करें। अल्‍लाह अपने खिलाफ विद्रोह करने वालों को दंडित करें और जो उसकी बात मानते हैं, उनकी रक्षा करें।”

वहीं अगर अल्लाह की इबादत करने वाले देशों में फैली कोरोना महामारी के आँकड़ों पर गौर करें तो यह बेहद ही चिंतनीय है। चीन और इटली के बाद कोरोना वायरस से अगर कोई देश सबसे ज्यादा संकटग्रस्त है तो वह इस्लामिक मुल्क ईरान है जहाँ अब तक इस वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 23,049 पहुँच चुकी है जिसमें से कुल 1812 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह मलेशिया में 1518 मामले और 14 मौतें, तुर्की में 1236 मामले और 30 मौतें, और पाकिस्तान में अब तक 825 संक्रमण के मरीज तथा 6 मौतों की खबर आई है।

इनके अलावा इंडोनेशिया से 579 मामले और 49 मौतें, बहरीन से क्रमशः 339 और 2, सऊदी अरबिया से 562 कोरोना मामले और शून्य मौतें फिलहाल तक, तथा इराक से 266 मामले सामने आए हैं जिनमें से 23 की मौत हो चुकी है। इसी प्रकार क़तर से 494 कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि की खबरें आईं हैं, जबकि अल्जीरिया से अब तक 201 पॉजिटिव मामले और 17 मौतों की खबर आ चुकी है। तो क्या अल्लाह ने इन इस्लामी देशों के लिए भी कोरोना वायरस अल्लाह का जवाब है?

बिहार: कोरोना से सैफ अली की मौत के बाद संपर्क में आए 62 लोगों पर मंडरा रहा संक्रमण का खतरा, परिवार के साथ डॉ. भी जद में

कोरोना वायरस का कहर आज पूरे विश्व में जारी है। अगर बात करें भारत की तो यहाँ जिसने भी इस बीमारी को हल्के में लिया या फिर जिस किसी ने भी इसे लेकर लापरवाही बरती आज उन्हीं के ऊपर यह बीमारी आफत बन कर बरस रही है। दुख की बात है कि कुछ लोगों की जरा सी लापरवाही आज देश के हजारों लोगों के लिए मुसीबत बन कर सामने खड़ी है। कुछ ऐसी ही एक खबर सामने आई है बिहार राज्य के जिला मुंगेर से। जहाँ बीते दिनों कोरोना वायरस के चलते हुई 38 वर्षीय युवक की मौत के बाद मृतक के संपर्क में आए सैकड़ों लोगों की जान आफत में आ गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम उन लोगों को वेरीफाई करने में जुटी हुई है, जो किसी न किसी तरह से मृतक के संपर्क में आए या फिर कि उसके नजदीक भी आए।

दरअसल, कतर से बिहार लौटे 38 वर्षीय सैफ अली को कोरोना के लक्षण पाए गए थे। इसके बाद बीते दिनों उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब तक 62 ऐसे लोगों को वेरीफाई करके एक सूची तैयार की है, जो किसी न किसी तरह से मृतक सैफ के संपर्क में आए थे। इसके बाद उन लोगों में हड़कंप मच गया है, जो सैफ के संपर्क में आए। साथ ही अब सभी को आइसोलेट करने की तैयारी की जा रही है और कुछ को किया भी जा चुका है। अब लोगों को आशंका है कि इस एक लापरवाही के कारण गाँव के लोगों को भयानक अंजाम भुगतने पड़ सकते हैं।

वहीं सैफ के संपर्क में आने वाली लिस्ट में सबसे अधिक सैफ के परिवार के लोग शामिल है, चाहे फिर वह माँ-बाप, पत्नी-बच्चे हों या फिर वह भाई-बहन हो। इसके बाद आस-पड़ोस के लोग और फिर लिस्ट में कुछ रिश्तेदारों के नाम भी शामिल हैं। वहीं सैफ को गंभीर हाताल में जिन-जिन अस्पतालों में भर्ती किया गया उनसे भी कई नामों को स्वास्थ्य विभाग ने अपनी लिस्ट में शामिल किया है, जिसमें डॉक्टर और नर्स भी शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मृतक सैफ से मिलने वालों की तैयार की गई सूची

दरअसल, कतर से बिहार के मुंगेर लौटे सैफ अली को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। उक्त मरीज पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान में किडनी का इलाज करा रहा था। इसके बाद सैफ की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। स्वास्थ विभाग के प्रधान सचिव ने उसके कोरोना इन्फेक्टेड होने की पुष्टि की थी साथ ही युवक की मौत की भी जानकारी दी थी। इसके बाद से ही गाँव के लोगों को जो सैफ के संपर्क में आए थे कोरोना पॉजीटिव पाए जाने का खतरा सता रहा है। आपको बता दें कि भारत में कोरोना वायरस प्रकोप के चलते अब तक 10 मौतें हो चुकी हैं साथ ही इससे संक्रमित लोगों की संख्या 471 हो गई है। वहीं मोदी की अपील पर लगाए गए जनता कर्फ्यू से भले दिल्ली नोएडा जैसे शहरों की हवा साफ हो गई है, लेकिन कोरोना का प्रकोप अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। यही कारण है कि अब तक देश के कई राज्य अपने यहाँ लॉकडाउन घोषत कर चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई सूची
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी की गई सूची

मार्क्स पर चर्चा के बहाने कौमार्य की बात… तो किसी ने शराब पिला किया सेक्स: वामपंथी यौन शोषण की कहानियाँ

वामपंथी गैंग में हलचल मची हुई है क्योंकि एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं – यौन उत्पीड़न के मामले, गंभीर मामले। सीपीआई के छात्र संगठन एसएफआई ने लड़कियों का यौन शोषण किया, उन्हें प्रताड़ित किया या फिर उन्हें परेशान किया। ऐसे ही एक मामला प्रियंका दास का था, जिसे मायाबन गांगुली ने प्रताड़ित किया था। अब ऐसी कई घटनाओं के बारे में पता चला है, जिसे विभिन्न पीड़ित युवतियों के बयान के आधार पर हम आपके सामने रख रहे हैं।

सबसे पहले बात देबद्रीता साहा की, जिन्हें उनके एक क्लासमेट ने ही प्रताड़ित किया। वो एक कॉमरेड भी था। साहा ने एसएफआई के ही एक व्यक्ति का बिना नाम लिए बताया कि वो उन्हें लेकर एक व्यक्ति के फ्लैट पर गया, जहाँ उसने उनके साथ सेक्स करने की साज़िश रच रखी थी। इसके बाद उसने पूछा कि क्या देबद्रीता का हाइमेन अभी भी सुरक्षित है? देबद्रीता के शरीर को लेकर उसने तरह-तरह की बातें पूछनी शुरू कर दी। दरअसल वो उसे वहाँ मार्क्स के बारे में बात करने ले गया था और वामपंथ के बारे में ज्ञान देना चाहता था। जब साहा ने उसे बताया कि वो पहले से ही रिलेशनशिप में हैं तो उस वामपंथी ने कहा कि थोड़ी-मोड़ी चीटिंग तो चलती है।

वहीं मयाबन गांगुली को लेकर एक युवती ने बिना पहचान जाहिर किए हुए एक घटना के बारे में बताया, जब वो दूसरे सेमेस्टर में थी। वो किसी आंदोलन की वजह से रात में कॉलेज में ही रुकी थीं। मयाबन भी वहीं पर था। जब उसने देखा कि वहाँ और कोई नहीं है तो उसने आपत्तिजनक रूप से युवती के शरीर को इधर-उधर छूना शुरू कर दिया। बाद में वो वहाँ से किसी तरह भाग निकली। मयाबन ने अफवाह फैलाई थी कि उसने उस युवती के साथ सेक्स किया है। पूरे कॉलेज ये अफवाह फैला दी गई थी लेकिन पीड़िता शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई

श्रेयोसी ने अपने अकाउंट पर शेयर किए डिटेल्स

बनाश्री दास ने भी एक घटना शेयर की है, जब वो तीसरे सेमेस्टर में थीं। वो कॉमरेड सत्यव्रत पॉल के साथ एक प्राइवेट ट्यूशन करने जाती थीं। एक दिन वो उनके पीछे लग गया। स्टडी मटेरियल के बारे में बात करते-करते उसने बनाश्री को किस करने का प्रयास किया। फिर लिफ्ट में जाते समय उसने ड्रामा शुरू कर दिया और कहने लगा कि वो बनाश्री से प्यार करता है। बनाश्री ने बताया कि उसने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ब्रेकअप की बात कह के उनके साथ ‘काफी क़रीबी संबंध’ बना लिया, जिसका उन्हें अब पछतावा है।

मयाबन गांगुली के बारे में एक अन्य युवती ने भी अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि जब वो नशे में थीं, तब मयाबन ने उसे किस किया। रोकने के बावजूद वो लगातार किस करता रहा। एक अन्य एक छात्रा ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि मयाबन दारु पीकर उसके पास आ गया और उसकी गोद में सोने की माँग करने लगा। उसने इमोशनल ब्लैकमेल करते हुए उसके हाथ पकड़ लिए और रोने लगा। कौशिकी दत्ताचौधरी ने बताया कि मयाबन ने शराब पी कर अपने हाथ को उनके कंधे पर रख दिया था। बाद में उसने अपने होठों को कौशिकी के कंधे और गर्दन पर रगड़ना शुरू कर दिया।

श्रेयोसी ने कई अन्य पीड़ित छात्राओं के साथ हुई घटनाओं का विवरण भी बताया

एक अन्य छात्रा ने कॉमरेड सुमित मंडल पर प्रताड़ना का आरोप लगाया। अर्चिता पॉल ने बताया कि सुमित ने उसे खूब शराब पिलाई और फिर उसके स्तनों को छूने लगा और किस करने लगा। अर्चिता के पेट में बहुत दर्द हो रहा था और जब वो सुबह उठी तो वो एक हॉस्पिटल में थीं। सुमित ने रात को उसके साथ जो कुछ भी किया था, उसने उसे रिकॉर्ड कर लिया था और साथ ही कहा कि सब कुछ सहमति से हुआ है। हॉस्पिटल के डॉक्टर ने अर्चिता का इलाज करते समय उन्हें कॉलेज बदल लेने की सलाह दी।

जिस डॉक्टर ने कोरोना के बारे में सबसे पहले बताया, उसे ही चीन ने प्रताड़ित किया: करनी वामपंथियों की, भुगत रही पूरी दुनिया

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपने गिरफ्त में ले लिया है l इसने अभी तक पूरी दुनिया में 381,462 लोगों को संक्रमित किया है और 16,550 लोगों की जान ले ली है। 101,069 लोग इससे पूर्णतया स्वस्थ हो गए हैं l 3 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा जारी एक आँकड़े के अनुसार इस रोग की मृत्युदर 3.8 प्रतिशत हैl इस वायरस के संक्रमण में आए 70 या उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों की मृत्युदर सबसे ज्यादा हैl यह मृत्युदर विशेष कर उन परिस्थियों में ज्यादा होता है जब संक्रमित व्यक्ति क्रमशः ह्रदय रोग, डायबिटीज, श्वांस संबधी गंभीर रोग, हायपरटेंशन और कैंसर के मरीज होंl ऐसा संक्रमित व्यक्ति जो कि उपरोक्त रोगों से कभी भी पीड़ित नहीं रहा है उसकी मृत्युदर अबतक के आँकड़ों के अनुसार मात्र 0.9 प्रतिशत मापी गई हैl भारत में अबतक इस विषाणु के 500 से अधिक सक्रीय संक्रमित मरीज हैं और इस विषाणु से भारत में अबतक 35 संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हैं और 9 व्यक्तियों की मौत हो चुकी हैl 

क्या है कोरोना 

कोरोना एक (+) ssRNA एकरेशीय आर एन ए वायरस हैl इस विषाणु की खोज 1960 में ही हो गई थी, लेकिन इसके विभिन्न स्वरूपों की खोज आगे आने वाले दशकों में होते रहीl कोरोना वायरस की संक्रमण क्षमता का एहसास पहली बार वर्ष 2002 में हुआl यह संक्रमण दक्षिण चीन से शुरू होकर अमरीका, यूरोप और एशिया को अपनी जद में ले लिया थाl चूँकि, कोरोना वायरस श्वसन तंत्र को गंभीरतम क्षति पहुँचता है, अतः इसे सार्स (severe acute respiratory syndrome) कहा गया l यह रोग भी चीनी लोगों के हिमालयन पाम सिवेट (Himalayan Palm Civet) को खाने के कारण फैला थाl वैसे ही जैसे कोरोना चाइनीज लोगों के चमगादड़ खाने से फैलाl चीन के लोग जंगली जानवरों, कीड़े-मकोड़े, कुत्ते, बिल्ली, साँप और गीदड़ खाने के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात हैं। इस विषाणु का नाम कोरोना इसलिए पड़ा क्योंकि इसकी आकृति यूरोप की प्रचलित मुकुटों की तरह मिलती जुलती है।  

सार्स 2002 और चाइनीज प्रोपगेंडा की कहानी 

नवम्बर 2002 का महीना था चीन के गुवांगझू प्रान्त के दक्षिणपूर्वी भाग के शहर फूशान को एक अनजान रोग ने अपने गिरफ्त में ले लिया। इस अनजाने रोग के निशान फूशान शहर से होते हुए हूयान और झोंगशान शहर में मिलने लगे। दिसंबर के मध्य माह तक इस रोग को चीन के स्थानीय चिकित्सा विभाग ने गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। जनवरी के पहले सप्ताह में चीन के स्वास्थ्य विभाग ने एक जाँच समिति को हूयान शहर भेजा और इस रोग के विषाणुजनित होने की पहचान हुई। जनवरी के अंतिम सप्ताह तक इस रोग पर चीन ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर ली और इस रिपोर्ट को अत्यंत गोपनीय श्रेणी में रखा। इस रहस्यमयी बीमारी की रिपोर्ट बनकर जब तैयार हुई थी उस समय चीन में चीनी नववर्ष के उत्सव की तैयारी जोरों पर थी और पूरा सरकारी अमला नववर्ष की छुट्टियाँ मना रहा था। इसी बीच चीनी सरकार का वह काला कानून जिसमें किसी भी जीवाणु या विषाणु जनित रोग की जानकारी कोई भी स्वास्थ्य एजेंसी या कोई व्यक्ति संप्रभु रूप से बिना चीनी कम्युनिस्ट सरकार को बताए सार्वजानिक करने पर प्रतिबंधित है और इस नियम को भंग करने वाले को कठोरतम सजा का प्रावधान है l ऐसी स्थिति में स्थानीय सरकार को इस रहस्यमयी बीमारी की पूरी जानकारी होने के बावजूद चीनी कम्युनिस्ट सरकार के आला अधिकारियों के प्रतिक्रिया का इंतजार करती रह गई और इधर सार्स 2002 ने अपना कहर बरपाना जारी रखा।   

लोग लगातार बीमार पड़ रहे थे, वर्ष 2002 का चीनी नववर्ष की चमक फीकी पड़ गई और लोगों ने परेशान होकर रोग को लेकर अफवाह फैलाना शुरू कर दिया और सरकार को कोसने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 10 फरवरी को एक प्रेस रिलीज जारी कर इससे बचने के उपाय को सार्वजानिक किया। लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी और हजारों लोग इसके संक्रमण में आ गए। 11 फरवरी को चाइनीज सरकार ने अपना मौन तोड़ते हुए एक प्रेस वार्ता के जरिए इस रोग के सन्दर्भ में लोगों को बताया कि यह एक विषाणुजनित रोग है जिसकी कोई दवा उपलब्ध नहीं है। इस बीच दुनिया भर में चीन की बदनामी ना हो, इसलिए चीनी कम्युनिस्ट सरकार ने अप्रैल महीने तक इस बीमारी के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी सीमित जानकारी ही दी और इस बीमारी की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को मुँह बंद रखने की हिदायत दी। रिपोर्ट की अति गोपनीयता और वैश्विक जगत को इस रोग से अनभिग्य रखना सरकार को इतना भारी पड़ा कि वह इस रोग के सन्दर्भ में आधी-अधूरी जानकारी ही जमा कर पाई। रोग के प्रकृति की व्यवस्थित पहचान न होने के कारण अकेले चीन के गुवांगझू प्रान्त में ही 900 स्वास्थ कर्मी इस रोग से प्रभावित हो गए थे। इधर ये रोग चीन से चलकर कनाडा पहुँच गया और उधर चाइनीज कम्युनिस्ट सरकार को अपने पार्टी प्रोपगंडा की पड़ी थी। रोगों को लेकर कम्युनिस्ट सरकार की गोपनीयता और कम्युनिस्ट प्रोपगंडा ने पूरी दुनिया में चाइना को एक fragmented authoritarian state के रूप में कुख्यात कर दिया l 

राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर थू-थू होने पर चीनी कम्युनिस्ट सरकार अप्रैल में इस गंभीर बीमारी को लेकर जागरूक हुआ। चीन को ऐसा लग रहा था कि ख़बरों को दबाने से रोग भी दब जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ थियानमेन चौक पर लोकतंत्र समर्थकों के नरसंहार के बाद उपजे हालातों के बाद सार्स (SARS) चीन के लिए सबसे बड़ा सामाजिक-आर्थिक चुनौती बन गया था। 17 अप्रैल 2002 को चीनी कम्युनिस्ट पोलित ब्यूरो ने सार्स 2002 को लेकर एक मीटिंग की और इससे लड़ने के लिए व्यापक रूप-रेखा बनाई। इस बैठक के बाद सरकार ने अपनी नाकामी का ठीकरा अपने कई मंत्रियों पर फोड़ते हुए उन्हें पदच्युत कर दिया। साथ ही इस रोग से लड़ने के लिए चाइना की माओवादी सरकार ने “Patriotic Hygiene Campaign” चलाया और लाखों माओवादियों को घर और सड़कों की साफ-सफाई के लिए लगा दिया। हालाँकि, जबतक चीन की सड़कों पर माओवादी उतरकर मोर्चा संभालते तबतक कम्युनिस्ट सरकार की विश्वसनीयता बहुत कम हो गई थी। बाद में चीन ने इस घटना से कुछ सबक भी लिया जब उसने अप्रैल के अंतिम सप्ताह में एक चाइनीज सबमरीन के दुर्घटना की खबर को बिना छुपाए सार्वजानिक कर दिया।  

लेकिन यह सबक चीन के सामूहिक याददाश्त में तबतक ही जिन्दा रहा जबतक कि वह एक आर्थिक ताकत नहीं बन गया। एक बार पुनः वैश्विक पहचान प्राप्त करने के बाद चीन फिर से अहंकारी हो गया। और इसी अहंकार के दोहराव के चलते चीन ने कोविड-2019 के बारे में पहली बार जानकारी देने वाले डॉक्टर डी वेनलियांग को बहुत प्रताड़ित किया और उसे सामाजिक शांति भंग करने का दोषी करार कर दियाl हालाँकि उस डॉक्टर की कोरोना से मौत हो गई? लेकिन चाइना ने जिस ऐतिहासिक गलती को पुनः दोहराया उसकी कीमत आज पूरी मानव सभ्यता चुका रही है l आज चीन के लोग डॉ डी. वेनलियांग की समाधि पर फूल चढ़ा रहे हैं। और जो लोग वुहान जाकर उसकी समाधी पर फूल नहीं चढ़ा पा रहे हैं, वो डॉ वेंलियांग के सोशल मिडिया अकाउंट पर अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं, और अबतक कुल दो लाख से अधिक लोगों ने उनके अकाउंट पर प्रतिक्रिया देकर अपनी श्रधांजलि व्यक्त कर चुके हैं। आज अगर चीन अपनी गलतियों से सीखा होता और वहाँ लोकतान्त्रिक मूल्यों की रक्षा और प्रेस को स्वन्त्रता होती तो शायद नवम्बर में ही इस रोग से दुनियाँ आगाह हो गया होता और सभ्यता पर ऐसे संकटों के बादल नहीं छाते।  

कांस्पीरेसी थ्योरी और राजनीति 

चीन में चाइनीज लोगों के चमगादड़ खाने से फैले रोग को अमरीकी कांस्पीरेसी करार देने की कोशिश की गई। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। वायरस के जैविक तत्वों का अध्ययन और इसके प्रसार के तरीके को देखते हुए इसे चीन के वुहान शहर से ही उत्पन्न रोग माना गया है। चूँकि, सार्स 2002 पर चाइना ने घृणित अंकुश लगाया था इसलिए पूरी दुनिया चीन के लोगों से दूरी बनाने लगी। और उसे प्रताड़ित करने लगी। बेशक इस रोग के लिए डायस्पोरा चाइनीज जिम्मेदार नहीं थे लेकिन सामाजिक पूर्वाग्रह ने चीन या उसके तरह दिखने वाले लोगों को कोरोना वायरस कहकर उनके प्रति खूब घृणा बाँटने का काम किया। हालाँकि, इससे निपटने के और भी कई उपाय थे लेकिन इटली जहाँ कि सबसे ज्यादा चाइनीज टूरिस्ट जाते हैं, वहाँ के एक सनकी वामपंथी ने ‘हग अ चाइनीज’ (एक चाइनीज को गले लगाओ) कैम्पेन चलाया। हालाँकि, चाइनीज को गले लगाने में कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन उस सनकी इटालियन वामपंथी ने ऐसे समय चाइनीज लोगों को गले लगाया जबकि यह ज्ञात हो गया था कि कोरोना संपर्क से होने वाली बीमारी है। उस समय चाइनीज ही क्या इटालियन, जर्मन, फ्रेंच या अमरीकी जिसे भी कोई संक्रमित व्यक्ति गले लगता उनको संक्रमण होना तय था।

आज एक वामपंथी सनक का सबब पूरी दुनिया देख रही है। एक राजनीति तो इसके नाम पर भी चल रही है लोग यह कह रहे हैं कि जब जापानी इन्सेफेलाईटिस, जो कि जापान के नाम पर है तो कोरोना वायरस को चाइनीज वायरस क्यों नहीं कह सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने तो इसे चाइनिज वायरस कहकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अभी भी भारत के गाँवों में इसे चाइनीज वायरस ही कहते हैं लेकिन इससे भारत के विभिन्न हिस्सों में रह रहे उत्तर-पूर्व के लोगों के प्रताड़ित होने की खबर आ रही है। हालाँकि, भारतीय हितों को ध्यान में रखते हुए इस शब्द का इस्तेमाल ठीक नहीं है। लेकिन वैश्विक स्तर पर इसने चीन के लोगों की नस्लीय पहचान पर एक दाग लगा दिया है। जिसकी जिम्मेदार वहाँ की जनता नहीं बल्कि एक बेरहम कम्युनिस्ट सरकार है।

कोरोना वायरस: 90,000 लोगों की घरवापसी से पंजाब सरकार हलकान, कई के पॉजिटिव होने की सम्भावना, केंद्र से माँगा ₹150 करोड़

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप पर काबू पाने के लिए पंजाब में सरकार पहले ही कर्फ्यू का निर्देश दे चुकी है। मगर, इसी बीच सरकार के सामने एक नई मुसीबत आ गई है। ताजा जानकारी के अनुसार, देश-विदेश में रहने वाले करीब 90,000 नागरिक राज्य में वापस लौट आए हैं। ऐसे में अब सरकार इन सभी की जाँच करना चाहती है। जिसके लिए मुख्यमंत्री ने केंद्र से 150 करोड़ रुपए का स्पेशल पैकेज माँगा है। बता दें, इनमें से कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका जताई जा रही है। हो सकता है इन लोगों का मेडिकल चेक अप होने के बाद पंजाब के आँकड़ो में वृद्धि हो। ये बात खुद राज्य के मंत्री बलबीर सिंह सिंधू ने कही है।

प्राप्त सूचना के मुताबिक पंजाब के 22 जिलों में पहले ही कर्फ्यू लगा हुआ है। इसके अलावा राज्य के मंत्री बलबीर सिंह संधू ने इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को चिट्ठी लिखी है और केंद्र से 150 करोड़ रुपए की मदद के साथ ही माँग की है। उन्होंने चिट्ठी में कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें सेना से भी हेल्प की अपील करनी होगी।

केंद्रीय मंत्री सिंधू ने विदेश से लौटे नागरिकों के बारे में केंद्र को सूचित करते हुए बताया कि कम से कम 90 हजार लोग वापस आए हैं। उनमें से कई लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो राज्य में संख्या एकाएक बहुत तेजी से बढ़ जाएगी।

गौरतलब है कि पंजाब में सुरक्षा के मद्देनजर और लॉकडाउन का उल्लंघन होता देख सरकार ने पहले ही कर्फ्यू लगा दिया था। सरकार ने इस कड़े कदम के पीछे जनता की मनमानियों को वजह बताया था। सरकार ने कहा था कि जनता लॉकडाउन का पालन नहीं कर रही। इसलिए उन्होंने कर्फ्यू लगाया। ताकि लोग घरों में रहे।

एक आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, लोग लॉकडाउन के बाद भी बड़ी संख्या में घरों से निकल रहे थे इसलिए कर्फ्यू लागू किया गया। इसका मकसद लोगों को घरों में रखना है। इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि उपायुक्तों को आवश्यक आदेश देने को कहा गया है। प्रवक्ता ने कहा कि यदि कोई प्रतिबंध से छूट चाहता है तो उसे एक तय अवधि और काम के लिए यह छूट दी जाएगी।