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CAA विरोधी मास्टर-माइंड की हरकत से 400-450 महिलाओं पर कोरोना का खतरा: सबको ट्रैक करना सरकार के लिए बड़ा चैलेंज!

दिल्ली के जहाँगीरपुरी में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में चल रहे धरने के आयोजकों में से एक ने अपनी बहन के कोरोना पॉजीटिव पाए जाने की बात स्वीकार ली है। इसके बाद युवक ने अपना टेस्ट कराने के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में पहुँच गया है। वहीं युवक ने बताया है कि वह अपनी बहन से मिलने के बाद कई बार जहाँगीरपुरी में सीएए के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ है। इस खबर के बाद जहाँगीरपुरी स्थित धरने में भूचाल आना स्वाभाविक है, क्योंकि 400 से 500 महिलाओं से उन महिलाओं की पहचान कर पाना मुस्किल है, जो धरने के आयोजक युवक के करीब आई हो।

द प्रिंट की खबर के मुताबिक सीएए विरोधी धरने का आयोजक और पीड़ित तबरेज खान का कहना है कि 11 मार्च को सऊदी अरब से लौटने के बाद बहन का कोरोना पॉजीटिव पाया गया था, इसके बाद भी उसने उमराह की तीर्थयात्रा के लिए देश का दौरा किया था, जिसे साल में कभी भी किया जा सकता है, जोकि कोई अनिवार्य भी नहीं था। इसके बाद ही वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण सऊदी अरब ने तीर्थ स्थलों की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इससे पहले ही बहन ने देश में प्रवेश कर लिया था।

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक 35 वर्षीय आयोजक व्यक्ति ने कहा कि वह 13 मार्च को अपनी बहन से मिला था और उसके साथ बैठकर कुछ समय भी बिताया था। इसके बाद ही वह दिल्ली के जहाँगीरपुर में सीएए के विरोध में चल रहे धरने में भी शामिल हुआ। युवक ने अपनी सफाई देते हुए कहा, “मुझे उस समय अपने अंदर बीमारी का कोई लक्षण नहीं दिखा, इसलिए हर रोज की तरह ही निश्चिंत था और इसे लेकर कोई ध्यान ही नहीं दिया। युवक ने बताया कि बहन से मुलाकात के दो दिन बाद ही कोरोना पॉजीटिव पाया गया। इसके बाद से ही उनका इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है।

इसके बाद जब बहन के कोरोना पॉजीटिव पाया गया तो युवक को ध्यान आया कि वह उसके संपर्क में आया है तो अपनी भी जाँच कराई जाए। हालाँकि, आयोजक को अपने अंदर कोई लक्षण तो दिखाई नहीं दिया, लेकिन शक जरूर था और वही हुआ कि 16 मार्च को खाँसी आई और वह बढ़ती चली गई। इसके बाद से ही युवक दिल्ली के लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में अपनी जाँच के लिए भर्ती है और अपनी जाँच के परिणाम का इंतजार कर रहा है।

वहीं कोरोना के रोगियों के लिए अस्पताल-वार डेटा के अभाव में बहन की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है। वैसे स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 11 लोग अब तक दिल्ली में कोरोनोवायरस पॉजिटिव है, जिसमें दो ठीक हो गए हैं और एक मृतक है। वहीं गुरुवार दोपहर तक देश में कोरोना के मामलों की संख्या 169 हो गई थी। आयोजक युवक ने सफाई देते हुए कहा कि जहाँगीरपुरी में चल रहे सीएए विरोधी धरने में बहन ने कभी हिस्सा नहीं लिया। युवक ने बताया कि धरना स्थल पर लगभग 400-450 लोग आते हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएँ हैं।

बहुत मुश्किल समय है, भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं: ‘बेहद डरे हुए’ हामिद अंसारी

समय-समय पर देश की संस्थाओं के प्रति कुछ भी गैरजिम्मेदाराना बयान देना पूर्व उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी की फितरत बन चुकी है। वैसे भी आप इसे उनकी मजबूरी भी कह सकते हैं, क्योंकि जिस गाँधी परिवार का अपने निजी हितों को साधने के लिए जिंदगी भर ढोल बजाया और पेट भरकर खाया हो, उसको पचाने के लिए यह सब भी जरूरी है, खैर एक बार फिर हामिद अंसारी ने अपनी वही भूमिका दोहराते हुए कहा है कि भारत में बहुत ही खतरनाक प्रक्रिया चल रही है, आज देश की प्रमुख संस्थाएँ खतरे में हैं।

यह बातें दो बार देश के उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी ने नई दिल्ली में मंगलवार को राज्यसभा सदस्य रहे भालचंद्र मुंगेकर की किताब के विमोचन के अवसर पर कहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जिन सिद्धांतों पर संविधान की प्रस्तावना की गई आज उनकी अवहेलना की जा रही है। अंसारी ने आगे कहा कि लोग मुश्किल समय में जी रहे हैं और प्रतिक्रिया करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यदि यह जारी रहा तो बहुत देर हो जाएगी। हालाँकि, अंसारी को शायद अपने ऊपर चिदंबरम जैसी कार्रवाई होने का डर था, इसीलिए वह अपने पूरे संबोधन में खुलकर कुछ नहीं बोल सके और चारों ओर नजरें धुमाते हुए बस एक ही बात को दोहराते रहे, “हम बहुत मुश्किल समय में जी रहे हैं। मुझे इसके विस्तार में जाने की जरूरत नहीं है, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत के गणतंत्र की संस्थाएँ बहुत खतरे में हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “इस प्रक्रिया में काफी कुतर्क शामिल है इसलिए अधिकतर नागरिकों द्वारा इसे समझ पाना आसान नहीं है। हालाँकि, सच्चाई यह है कि बहुत खतरनाक प्रक्रिया चल रही है। यह हमारे लिए, देश के नागरिकों के लिए खतरनाक है।” अंसारी ने कहा कि भारत के मित्र देश स्थिति को खतरे की स्थिति के तौर पर देख रहे हैं जबकि देश के दुश्मन खुश हैं। हालाँकि, अंसारी ने यह नहीं बताया कि देश की कौन सी स्थिति खतरे वाली है, जिसे वह पड़ोसी देश तो देख पा रहे हैं, लेकिन वह नहीं बोल पा रहे। उन्होंने यह तो कह दिया कि देश के दुश्मन इस स्थिति से खुश हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि देश के दुश्मन कौन हैं। उन्होंने आगे कहा, “इसलिए कुछ ऐसा(अंसारी ने कुछ का मतलब नहीं बताया) है, जिस पर गौर किया जाना चाहिए, मैं डा. मुंगेकर के शब्दों को जगाने वाला और यह याद दिलाने वाला मानता हूँ कि हमें भ्रमित किया जा रहा है और यदि हम इस प्रक्रिया को जारी रहने देंगे तो जगने में बहुत देर हो जाएगी।”

दरअसल, उन्होंने यह टिप्पणी शिक्षाशास्त्री और राज्यसभा सदस्य रहे भालचंद्र मुंगेकर की पुस्तक ‘माय एनकाउंटर्स इन पार्लियामेंट’ के विमोचन के मौके पर की। इस मौके पर राकांपा प्रमुख शरद पवार, भाकपा महासचिव डी. राजा और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी उपस्थित थे।

वैसे हामिद अंसारी से देशहित में बयान देने की उम्मीद करना बेमानी होगी, क्योंकि जिस गाँधी परिवार ने देश पर 60 वर्षों तक राज किया उस पर अंसारी आज तक कुछ बोल नहीं सके, लेकिन जैसे ही मोदी सरकार केन्द्र की सत्ता में आई ऐसे ही देश में संविधान की अवहेलना होने लगी। गौर हो कि मोदी सरकार के बनने के बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिन हामिद अंसारी ने कहा था कि देश के मुस्लिम समुदाय में आज असुरक्षा का माहौल है, अपने आखिरी इंटरव्यू के जरिए हामिद अंसारी ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि भारत का समाज सदियों से बहुलतावादी रहा है, लेकिन सबके लिए ये स्वीकार्यता का माहौल अब खतरे में है, लोगों की भारतीयता पर सवाल खड़े करने की प्रवृत्ति भी बेहद चिंताजनक है। कानून व्यवस्था को लागू करने की सरकारी अधिकारियों की क्षमता भी अलग-अलग स्तर पर खत्म हो रही है।

वैसे हामिद अंसारी का विवादों से गहरा नाता रहा है। बंगाल में जन्मे और एएमयू जैसे शिक्षण संस्थान में अपनी पढ़ाई करने वाले वह हामिद अंसारी ही थे, जिन्होंने भारत में यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा की उपस्थिति में गणतंत्र दिवस तो मनाया था, लेकिन हामिद अंसारी ने भारत के राष्ट्रध्वज को सलामी नहीं दी थी। इसके बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी। अंसारी ने वर्ष 2018 में देश के बंटवारे को लेकर विवादित बयान दिया था, उन्‍होंने कहा कि देश के विभाजन के लिए सिर्फ पाकिस्तान ही जिम्मेदार नहीं था, बल्‍क‍ि हिंदुस्तान भी जिम्मेदार था। इतना ही नहीं अंसारी ने कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के उस बयान को भी सही ठहराया था, जिसमें थरूर ने कहा था कि अगर साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी जीती, तो हिंदुस्तान का संविधान खतरे में पड़ जाएगा और भारत हिंदू पाकिस्तान बन जाएगा।

अब अंसारी की विचारधारा जिन्ना वाली है या गाँधी वाली इस बात का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 21 जून 2015, भारत के अलावा दुनिया के 190 देश पहली बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहे थे। राजपथ पर हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरा मंत्रिमंडल मौजूद था, लेकन बड़े संवैधानिक पद पर रहते हुए भी कार्यक्रम में हामिद अंसारी मौजूद नहीं हुए। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी तबियत खराब होने का हवाला दिया था। इतना ही नहीं मोदी सरकार द्वारा पाकिस्तान पर की गई बालाकोट स्ट्राईक के बाद जो लोग सेना पर सवाल उठा रहे थे, उस पर बोलते हुए अंसारी ने कहा था कि बालाकोट पर सवाल उठाना देशद्रोह नहीं बल्कि लोगों का अधिकार है। वहीं पिछले वर्ष रॉ के एक पूर्व अधिकारी ने पिछले वर्ष एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा था कि पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेटअप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की जिन्दगी को खतरे में डाल दिया था।

22 मार्च से एक हफ्ते तक कोई भी अंतरराष्ट्रीय विमान नहीं कर सकेगा भारत में लैंड: कोरोना पर सख्त फैसला

कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते हुए मामलों के देखते हुए भारत सरकार ने एक हफ्ते तक सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की लैंडिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना अब तक दुनिया के 166 देशों में पहुँच चुका है। इसके साथ ही, भारत सरकार की तरफ से राज्य सरकारों को यह कहा गया है कि वे निर्देश दें ताकि 65 साल से ज्यादा के बुजुर्ग अपने घरों पर ही रहें।

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से चौथे व्यक्ति की मौत हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि कोरोना संक्रमित ये मरीज पंजाब राज्य से था।

चीन के बाद यूरोप महाद्वीप में स्थित इटली में पिछले 24 घंटों में 475 मौतें हो चुकी हैं और इस कारण वहाँ लॉकडाउन की अवधि भी बढ़ा दी गई है। इटली के आँकड़ों को देखकर यह आकलन लगाया जा रहा है कि कोरोना वायरस के कारण वहाँ पर होने वाली मौतों की संख्या चीन से भी आगे निकल जाएगी।

दुनिया भर में छह देश ऐसे हैं, जहाँ कोरोना वायरस के संक्रमण के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं- इनमें चीन, इटली, ईरान, स्पेन, कोरिया और फ्रांस शामिल हैं।

भाजपा कोरोना से बड़ी बीमारी, मॉं-बहनों से अपील है, एक बार इस मर्ज से लड़ लीजिए: अखिलेश यादव

जिस समय भारत सहित समूचा विश्व घातक कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है जिसके कारण अब तक कुल 7500 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है ठीक उसी वक्त कुछ पॉलिटिकल लीडर्स अपनी राजनीति चमकाने के फेर में भाषाई मर्यादा को ताक पर रख, कोरोना वायरस से विपक्षियों की तुलना में व्यस्त हैं। लखनऊ में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आज एक चौंकाने वाला बयान दिया। सपा चीफ अखिलेश ने प्रेस से बातचीत में भाजपा को कोरोना वायरस से बड़ा वायरस करार दिया।

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेन्स में अखिलेश ने योगी सरकार पर हमला बोलते हुए, उस पर कोरोना वायरस को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया। अखिलेश यादव ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा, “जिस विषय को लेकर लोग चिंतित हैं वह कोरोना से ज्यादा खतरनाक है। हम इस बीमारी के खिलाफ कुछ दिन लड़ लेंगे, लेकिन यह भाजपा जो अपने स्वार्थ के लिए देश भर में घृणा फैला रही है, यह गंभीर बीमारी है। मैं अपनी सभी मॉं बहनों से अपील करता हूँ कि कोरोना से बचने के लिए जो करना हो वो करिए लेकिन एक बार इस मर्ज से लड़ लीजिए फिर उसके बाद हम सभी को भाजपा जैसी गंभीर दीर्घकालिक बीमारी से लड़ने को तैयार रहना होगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार याद रहे कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी शैक्षणिक संस्थानों, सिनेमा घरों मल्टीप्लेक्सेस और पर्यटक स्थलों को 2 अप्रैल तक बंद कर दिया है, साथ ‘वर्क फ्रॉम होम’ प्रोटोकॉल को यथासम्भव पालन करने का आदेश दिया है। इसके अलावा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों से भीड़भाड़ वाली जगहों पर न जाने और इस संबंध में गैर जरूरी भय से बचने की सलाह दी है। प्रदेश सरकार ने लखनऊ में जारी अपने स्टेटमेंट में सभी कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों का इलाज और जाँचें मुफ्त कराने की बात भी कही है।

राहुल गाँधी ने दिया कोरोना पर ज्ञान: ट्विटर वालों ने कहा बेहतर क्वालिटी का गाँजा पिया करो

एक ओर जहाँ भारत सरकार और तमाम तंत्र कोरोना की महामारी से लड़ने में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं देश का विपक्षी राजनीति दल इसका भी राजनीतिकरण करते हुए देखा जा रहा है। यह पहल इस बार कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने की है लेकिन उन्हें इसके बदले में ट्विटर यूजर्स की तीखी प्रतिक्रिया का भी सामना करना पड़ा। बुधवार (मार्च 18, 2020) को उन्होंने सरकार पर कोरोना वायरस को लेकर निर्णायक कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया और कहा कि उसकी (सरकार की) ‘अक्षमता’ की भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वायरस की समस्या से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए।

राहुल गाँधी के इस ट्वीट पर काफी लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनके ट्वीट के जवाब में सबसे ज्यादा निंदनीय कमेन्ट में उन्हें किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने की सलाह वाला जवाब था।

robin_osho नाम के एक व्यक्ति ने कोरोना वायरस पर राहुल गाँधी को सामान्य ज्ञान देते हुए लिखा- “तुम्हारी जन्म भूमि इटली में कोरोना का पहला केस 31 जनवरी को मिला था, जबकि भारत में 30 जनवरी को पहला मामला आया था। इटली में अब 2,503 लोगों की मौत के साथ 31,506 मामले हैं। भारत में 3 मौतों के साथ 147 मामले हैं। अगली बार बेहतर गुणवत्ता वाला गाँजा पिएँ।

राहुल गाँधी को मिली कुछ अन्य प्रतिक्रियाएँ और भी ज्यादा निदनीय और असंवेदनशील हैं। @SK_Sanketjain24 ने राहुल गाँधी को जवाब देते हुए लिखा है- “लगता है इस **** की अलग इकॉनमी हैं… बहुत बड़ा चरसी है.. लोगों को बस गुमराह करना इसका काम है।”

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव देव ने भी राहुल गाँधी के ट्वीट के जवाब में लिखा है, “पूरे देश में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की जा रही है, एडवाइजरी पहले ही जारी की जा चुकी है। हर जगह क्वारंटाइन सेंटर खुल चुके हैं। सरकार पहले ही कोरोना के खिलाफ आक्रामक एक्शन ले रही है। कृपया इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए कार्टून नेटवर्क छोड़कर न्यूज चैनल पर जाएँ।

हालाँकि, राहुल गाँधी के इस ट्वीट से सभी लोग असहमत नहीं थे। @sarojtiwaryinc नामके एक शख्स ने राहुल गाँधी को जवाब में लिखा है- “मैं सिर्फ राहुल गाँधी को भारत का पीएम बनते हुए देखना चाहता हूँ। वो यकीनन ऐतिहासिक रूप से भारत के बेस्ट पीएम बनेंगे।”

चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस ने दुनिया के सौ से अधिक देशों में पैर पसार लिए हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं। यहाँ पिछले चंद दिनों के अंदर कोरोना वायरस के मामले 150 का आँकड़ा पार कर चुके हैं।

4 साल की बच्ची का रेप कर भाग रहा था इरफान, गाँव वालों ने पकड़कर पीटा, मासूम की हालत गंभीर

वाराणसी के बड़ागाँव थाना क्षेत्र में गुरुवार (मार्च 19, 2020) को 4 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म किया गया। वारदात के बाद बच्ची की हालत गंभीर है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपित युवक पकड़ा जा चुका है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। युवक की पहचान इरफान के रूप में हुई है।

दरिंदगी की ये वारदात बाबतपुर चौराहे के पास स्थित एक स्कूल के नजदीक घटी। जानकारी के मुताबिक, बच्ची को उसके पिता सुबह शौच के लिए खेत में छोड़कर आए थे। मगर जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी तो उसकी खोजबीन शुरू हुई।

घरवाले बच्ची को ढूँढते-ढूँढते खेत में पहुँचे। लेकिन बच्ची उन्हें नहीं दिखी। इसके बाद वहाँ से कुछ दूर अरहर के खेतों से एक युवक उन्हें भागता दिखाई दिया। ग्रामीणों ने फौरन उसे पकड़ लिया। आगे जाकर देखा तो बच्ची खून से लथपथ बदहवास पड़ी थी। बच्ची को देखकर वहाँ मौजूद सभी लोग सन्न रह गए और उन्होंने गुस्से में आकर आरोपित को बहुत पीटा।

इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौक़े पर पहुँचकर मामले में उचित कार्रवाई की। जब ऑपइंडिया ने इस संबंध में पुलिस से बात करने का प्रयास किया तो वे युवक को रिमांड पर लेने जा रहे थे।

पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बच्ची की हालत को देखते हुए उसे कबीरचौरा अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अब वहाँ उसका इलाज जारी है। आरोपित युवक हिरासत में लिया जा चुका है। उससे पूछताछ की जाएगी। युवक की पहचान रामपुर निवासी इरफान (पुत्र तय्यूब) के रूप में हुई है।

गौरतलब है कि ये पहला मामला नहीं है जब वाराणसी में किसी बच्ची के साथ इस तरह की दरिंदगी को अंजाम दिया गया हो। इससे पहले भी 10 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। उस समय पुलिस ने शहनवाज नाम के युवक को गिरफ्तार किया था। इस मामले में शहनवाज ने बच्ची को चादर देने के बहाने अपने कमरे में बुलाया था और उसके साथ गलत हरकत की थी। जब बच्ची ने शोर मचाया तो उसे वहाँ से भगा दिया। बाद में बच्ची ने घरवालों को इस पूरे संबंध में आपबीती सुनाई थी और शहनवाज पकड़ा गया था।

गाय के पैर बाँध मो. अंसारी ने किया दुष्कर्म, नारियल तेल के साथ गाँव वालों ने रंगे हाथ पकड़ा: देखें Video

अल्लाह की कसम मुझे छोड़ दो, भैया आप तो मुझे जानते हो… फिर भी आदिल, नाजिक ने रेप कर बनाया वीडियो

बिहार में हुआ गर्भवती बकरी के साथ बलात्कार, शराब-बंद प्रदेश में नशे में था मोहम्मद सिमराज़

विपक्षी नेता या मीडिया से नहीं… गाँव-देहात के किसी चौपाल पर बैठिए और जानिए योगी सरकार के 3 साल की उपलब्धियाँ

तीन वर्ष पूर्व जनता कराह रही थी और तब गोपाल दास नीरज की यह कविता याद आती थी- “है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए, जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए।” अराजकता, अपराध, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, विकास-हीनता, पिछड़ेपन के भयावह ‘समाजवादी’ सत्ता से त्रस्त जनता ने अंतत: मौसम बदल ही दिया और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत की भाजपा की सरकार बनी। अंधियारे से उजाले की ओर जाने की आशा में जनता जनार्दन द्वारा तीन वर्ष पूर्व लिए गए निर्णय से प्रदेश विकास के सूरज को उगता हुआ देख रहा है।

यूँ तो सैकड़ों कार्य हैं, जिन पर भाजपा सरकार को गर्व करना चाहिए। लेकिन इनमें से कुछ ऐसे कार्य हैं, जिसने उत्तर प्रदेश की तस्वीर के साथ तकदीर भी बदली है। किसी भी राज्य के विकास के लिए जो सबसे बड़ी मूलभूत आवश्यकता होती है, वे हैं कानून व्यवस्था और आधारभूत सुविधाएँ। इन दोनों मोर्चों पर प्रदेश दशकों से बदहाली झेल रहा था। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही जिस प्रकार प्राथमिकता के आधार पर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति को ठीक करने का काम किया, वह वर्तमान ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी एक ऐसा प्रशासनिक निवेश है, जो प्रदेश के औद्योगिक विकास और जनजीवन को बेहतर बनाने के कीर्तिमान गढ़ने में नींव का पत्थर बन गया है।

कानून व्यवस्था

भाजपा की सरकार आने के बाद जनता भयमुक्त और अपराधी भय में रहने लगे हैं। प्रदेश के विभिन्न भागों में पेशेवर अपराधियों पर कानून का शिकंजा कस कर संगठित अपराध पर नियंत्रण लगाने से एक ओर पूरे प्रदेश में जनता सुरक्षित महसूस कर रही है। वहीं, हाल ही में सीएए (CAA) के विरोध के नाम पर जिस प्रकार प्रदेश को दंगे व हिंसा की आग में झोंकने के प्रयासों को सरकार ने विफल किया है, वह इस सरकार में कानून व्यवस्था की उत्तम स्थिति को दर्शाता है। योगी सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश लोक तथा निजी सम्पत्ति क्षति वसूली अध्यादेश-2020’ से स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में उपद्रव व हिंसा करने वालों को इसका परिणाम भुगतना होगा।

अर्थव्यवस्था

राज्य में कानून व्यवस्था बेहतर हुई तो राज्य में​ निवेश बढ़ने लगा और प्रदेश औद्योगिक विकास की ओर तेजी से बढ़ने लगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने में उत्तर प्रदेश का योगदान देने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर का बनाने का संकल्प लिया है। इस दिशा में काम करते हुए प्रदेश में हुए सफल निवेश समिट में साढ़े चार लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए और जिनमें से ढाई लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों का शिलान्यास कर उन पर काम शुरू हो चुका है। 2 लाख लोगों को 18 हजार करोड़ रुपए का ऋण देकर उद्यमी बनाया जा रहा है।

निवेश और उद्योग

इसके अतिरिक्त ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ODOP) परियोजना शुरू कर प्रदेश के सभी जनपदों को देश के औद्योगिक मानचित्र पर लाने का सराहनीय कदम उठाया गया है। ओडीओपी योजना के अंतर्गत सरकार ने प्रदेश के 75 जिलों के अपने विशेष उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए पिछले तीन सालों में 8875 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता ऋण के रूप में दी है। राज्य सरकार जनपद स्तर पर 24 घंटे, तहसील स्तर पर 20 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली दे रही है।

अन्नदाता: गाँव और किसान

विकास के विभिन्न पैमाने पर औद्योगिक विकास एक महत्वपूर्ण पक्ष है। किंतु गाँव, किसान, रोजगार, आधारभूत ढाँचा विकास जैसे अनेक पहलू हैं, जिनके एकीकृत विकास के बिना विकास की गति को सतत बनाए रखना संभव नहीं हो सकता है। यही कारण है कि 18 मार्च, वर्ष 2017 को सरकार का गठन होते ही मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में कैबिनेट ने 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपए कर्ज माफ करने की न सिर्फ घोषणा की, बल्कि यह कार्य त्वरित गति व पारदर्शिता से करके पूरा भी किया। इस राहत से प्रदेश के किसानों का आत्मविश्वास पुन: लौटा और वे प्रदेश को अन्न उत्पादन में नंबर एक बनाने में जुट गए।

रोजगार

इसी प्रकार युवाओं के लिए योगी सरकार की नीतियाँ व कार्यक्रमों का परिणाम यह हुआ कि तीन साल के कार्यकाल में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 53 लाख लोगों को रोजगार मिला है। इसमें 3 लाख लोगों को तो सरकारी नौकरी दी गई हैं। इसके अतिरिक्त निवेश समिट के बाद प्रदेश में आए निवेश से 33 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला, जबकि कौशल विकास योजना से पौने दो लाख लोगों को रोजगार मिला। प्रदेश में हाल ही हुए डिफेंस एक्सपो से 5 लाख से ज्यादा लोगों के रोजगार मिलने की आशा है।

पर्यटन: धर्म एवं संस्कृति

प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के विकास के लिए इस सरकार ने बड़ी समग्रता में नीतियाँ बनाई हैं। चाहे औद्योगिक विकास हो अथवा पर्यटन विकास हो, या फिर नगरों साथ ही गाँवों के विकास की बात हो, सभी क्षेत्रों के विकास पर सरकार आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में पर्यटन क्षेत्र को सरकार आगे बढ़ा रही है, जिससे प्रदेश में सेवा क्षेत्र के साथ अन्य सहायक क्षेत्रों का विकास होगा। अयोध्या में दीपोत्सव, मथुरा में रंगोत्सव और प्रयागराज में कुम्भ का सफल व भव्य आयोजन कर प्रदेश के पर्यटक स्थलों व संस्कृति के वैभव व विराटता को समस्त विश्व को दिखाकर सरकार ने प्रदेश में देश व विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने का सफल प्रयास किया है।

ट्रांसपोर्ट

दुनिया भर के लोग उत्तर प्रदेश में घूमने अथवा कारोबार के उद्देश्य से आएँ, इसके लिए सरकार ने सुविधाएँ व संसाधन उपलब्ध कराए हैं। योगी सरकार आने के बाद प्रदेश में छह नए हवाईअड्डे बने और इस प्रकार अब राज्य में हवाई अड्डों की संख्या 8 हो गई है, जबकि 11 नए हवाईअड्डों का निर्माण चल रहा है। प्रदेश हवाई सेवा के मामले में विश्व के 55 शहरों से जुड़ गया है। नोएडा के जेवर में तो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बन रहा है। साथ ही पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस, बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और देश का सबसे बड़ा गंगा एक्सप्रेस वे सहित अनेक नए राजमार्गों का निर्माण चल रहा है। आधारभूत ढाँचों का यह विकास क्षेत्र के कृषि, वाणिज्यिक, पर्यटन और औद्योगिक विकास में निर्माण मील का पत्थर साबित होगा।

शिक्षा

विकास और प्रगति के इस पथ का उद्देश्य जनता के जीवन स्तर को सुधारना होता है और इसमें भौतिक विकास के साथ ही जन स्वास्थ्य व चिकित्सा सुविधा का विकास भी शामिल होना चाहिए। योगी सरकार इसी उद्देश्य से प्रदेश की चिकित्सा सेवाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। प्रदेश के 45 जनपदों में नए मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं। 12 जनपदों में निजी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की स्थापना कराई जा रही है। शेष 18 जनपदों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए नई नीति तैयार की जा रही है। सरकार की नई चिकित्सा नीति के अनुसार प्रदेश के सभी जनपदों में मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा। इस क्षेत्र में सरकार की संजीदगी का ही परिणाम है कि इंसेफेलाइटिस से बच्चों की होने वाली मृत्यु पर लगभग नियंत्रण पा लिया गया है। पिछले तीन सालों में इंसेफेलाइटिस के रोगियों की संख्या में 65% कमी आई है।

योगी सरकार के तीन साल की उपलब्धियाँ जाननी हो तो गाँव-देहात के किसी चौपाल पर बैठिए, जहाँ पूर्ववर्ती सरकारों में चौपालोंं में चर्चा का विषय यह होता था- कितने करोड़ का घोटाला हुआ, कहाँ हत्या, लूटमार या जमीन-मकान पर कब्जे हुए, कहाँ बलात्कार हुए, वहीं योगी सरकार के तीन बरस के कार्यकाल में जनता तक पहुँचे विकास, सुरक्षा और सुविधाओं का परिणाम यह है कि अब इन चौपालों पर चर्चा होती है कि गाँव-गाँव बिजली, पानी और सड़क की सुविधा पहुँची हैं, अपराधी प्रदेश छोड़कर भाग रहे हैं या फिर जेलों में सड़ रहे हैं, सुरक्षा का वातावरण है और प्रदेश के विकास के साथ ही सामान्य नागरिक भी प्रगति की राह पर है। योगी सरकार की तीन साल की उपलब्धियों पर विपक्ष भले ही अनर्गल बयानबाजी करे, ले​किन जनता देख रही है कि प्रदेश में सकारात्मक व अभूतपूर्व बदलाव हुआ है।

चीनी वायरस: जिसे चीन ने ही बनाया, और अब चीन ही इसे ‘चाइनीज वायरस’ कहे जाने से नाराज है

ऐसे समय में, जब पूरा विश्व चीन के वुहान प्रांत से शुरू हुए इस कोरोना (COVID-19) जैसी महामारी से लड़ रहा है, चीन की सरकार द्वारा ऐसे मीडिया कैम्पेन चलाए जा रहे हैं, जो न केवल विक्टिम कार्ड के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं, बल्कि ‘नस्लीय’ और ‘पूर्वग्रह’ का प्रलाप करते हुए सबका ध्यान चाइनीज वायरस के उदय से हटाने का भी प्रयास कर रहे हैं। और ऐसा करने में उसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीति के लिबरल वर्ग का भी पूरा समर्थन मिल रहा है।

यह सर्वविदित है कि कोरोना वायरस के संक्रमण ने नवम्बर 2019 से ही अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी थी। जनवरी 14, 2020 तक भी चीन की सरकार ने यह दावा किया कि यह वायरस एक से दूसरे इंसान के संपर्क से नहीं फैलता है। WHO के एक ट्वीट से यह पुष्टि होती है कि किस तरह से चीन ने दुनिया को बेवकूफ बनाने की कोशिश की है।

WHO के ट्वीट में चीनी अधिकारियों के इस दावे का हवाला दिया गया है कि नावेल कोरोनो वायरस मानव द्वारा संक्रमित नहीं होता है। यह एक ऐसा दावा था जिसकी पोल चीन में हुई हजारों मौतों के बाद अब इटली के अलावा दुनिया के अन्य देशों में बड़े पैमाने पर हुई मौतों ने खोल दिया है। बड़े पैमाने पर फैलने के मुख्य कारणों में से एक मानव द्वारा होने वाला संक्रमण ही है।

कोरोनो वायरस, एक ऐसे वायरस से सम्बंधित है, जो जूनोटिक यानी, पशुजन्य है। यह जानवरों से मनुष्यों और लोगों के बीच फैलता है। कोरोना वायरस एक अत्यधिक संक्रामक, घातक श्वसन रोग है, जिसका प्रकोप सबसे पहले वुहान, चीन में बताया गया था। वायरस का संचरण तब होता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के संपर्क में आता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ खाँसना, छींकना या यहाँ तक ​​कि हाथ मिलाने से भी इसे फैलने का मौका मिल सकता है।

वहीं, दक्षिण कोरिया के एक खास धार्मिक समूह के लोगों में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। दक्षिण कोरिया में अब तक मिले कोरोना के मरीजों में से आधे लोग यानी, 1600 संक्रमित शिन्चोओनजी चर्च ऑफ जीसस से जुड़े बताए जा रहे हैं। व्यापार और पर्यटन के माध्यम से बड़ी संख्या में चीनी यात्री इटली जाते हैं जो कि अभी तक इस वायरस के संक्रमण से दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश है।

ऐसी रिपोर्ट भी अब सामने आ रही हैं जिनमें देखा जा रहा है कि किस तरह से चीनी अधिकारियों ने उन डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को चुप कराने की कोशिश की जिन्होंने इस बीमारी और इसके संभावित खतरों के बारे में सतर्क करने की कोशिश की थी।

वुहान केंद्रीय अस्पताल के आपातकालीन विभाग के एक डॉक्टर ने 30 दिसंबर को अपने सहकर्मियों के साथ डायाग्नोस्टिक ​​रिपोर्ट साझा की थी, जिसमें एसएआरएस (SARS) जैसी महामारी के बारे में चिंता व्यक्त की गई थी, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों द्वारा इसकी यह कहकर निंदा की गई थी कि यह अफवाहें फैलाने वाली बात है। डॉक्टर को उसके परिवार के साथ भी इस बारे में बोलने से मना किया गया था।

डॉक्टर ली वेनलियांग ने अपने साथियों को कहा था कि वह अपने परिजनों को इस बारे में गोपनीय तरीके से बता दें। मगर उनका स्क्रीनशॉट कुछ ही समय में वायरल हो गया। वुहान के स्वास्थ्य प्रशासन ने ली को नोटिस भेजकर पूछा कि आखिर आपको इस बारे में कैसे पता चला। डॉक्टर ली को लिखित में ऐसा दोबारा नहीं करने की बात कहते हुए माफी माँगनी पड़ी। बाद में खुद डॉक्टर ली खुद कोरोना वायरस का शिकार हो गए। और बाद में उनका निधन हो गया।

चीन ने यात्रा प्रतिबंध और लॉकडाउन को भी बहुत देर से लागू किया था। चीनी अधिकारियों ने कथित तौर पर मरीजों के सेम्पल्स को भी नष्ट कर दिया, आवाज उठाने वालों को धमकी दी और यहाँ तक ​​कि तेजी से फैलने वाली संभावित महामारी की रिपोर्ट्स पर भी सक्रिय रूप से निगरानी रखी। अब कुछ ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं जिनमें परीक्षण किए जा रहे जीनोमिक्स के नमूने वुहान अधिकारियों के आदेश पर नष्ट कर दिए गए थे।

3 जनवरी को, चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयुक्त ने कथित तौर पर सभी प्रयोगशालाओं को किसी भी जानकारी को प्रकाशित नहीं करने का आदेश दिया था और वायरस के सभी परीक्षण नमूने छीन लिए थे। WION की एक रिपोर्ट ने घटनाक्रम को संक्षेप में प्रस्तुत किया है।

इसके बाद अचानक से दुनिया भर के देशों के इस महामारी ले शिकार होने और यात्रा प्रतिबंध लगाने के बाद, चीन ने ‘नस्लवाद’ जैसे प्रपंच उठाने की भी कोशिश की और यहाँ तक कि अमेरिकी सेना को इस भीषण महामारी के लिए जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से इसे जैसे ही ‘चीनी वायरस’ की संज्ञा दी, चीनी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय उदारवादियों ने ‘विक्टिम कार्ड’ खेलकर खुद को पीड़ित साबित करने की भी कोशिश की। उनका दावा है कि महामारी को चीनी बीमारी और चीनी वायरस और वुहान वायरस जैसे शब्द कहना नश्लीय और जातिवादी है।

चीन का ‘अतिसक्रिय’ प्रोपेगेंडा-तंत्र अपनी धरती से शुरू हुए इस वैश्विक महामारी को छुपाने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा काम करती हुई स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। यही नहीं, भारत द्वारा चीन को की जा रही मदद के बावजूद भी चीन भारत पर ‘चीन-विरोधी’, नस्लीय और जातिवादी होने का आरोप लगा रहा है।

यूनिवर्सिटी ऑफ साउथहैम्पटन के एक अध्ययन में कहा गया है कि यदि चीनी अधिकारियों ने कम से कम 1 सप्ताह, 2 सप्ताह या 3 सप्ताह पहले बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए सक्रिय उपाय करना शुरू कर दिया होता तो वे कोरोना वायरस के संक्रमण को विश्वभर में फैलने से क्रमश 66%, 86% और 95% तक रोक सकते थे।

वुहान कोरोना वायरस चीन के वन्यजीव और समुद्री खाद्य बाजारों में शुरू हुआ। वन्यजीवों की खपत और माँग ने दुनिया की कई प्रजातियों को विलुप्ति के कगार पर ला दिया है। इस पर चीनी अधिकारियों की लापरवाही और इसे छुपाने की कोशिश ने दुनिया को एक महामारी से लड़ने के लिए मजबूर कर दिया है। लेकिन इस सबके इतर, चीन सिर्फ इस बात से नाराज है क्योंकि उसने जिस महामारी को जन्म दिया है, उसे ‘चीनी वायरस’ कहा जा रहा है।

नोट: यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में संघमित्रा द्वारा लिखा गया है, जिसका हिंदी अनुवाद आशीष नौटियाल द्वारा किया गया है। अंग्रेजी में इस लेख की मूल प्रति आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।

आतंकी हाफिज सईद के नाम से अलीगढ़ में जारी हुए फतवे: साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने का था लक्ष्य, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में पुलिस ने मुम्बई हमले के मास्टरमइंड आतंकी हाफिज सईद के नाम से जारी कथित फतवे के सिलसिले में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। हाफिज सईद संयुक्त राष्ट्र में सूचित वैश्विक आतंकी है जिसके सिर पर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर का इनाम रखा हुआ है। जिले के एसपी अरविन्द कुमार ने मीडिया को बताया कि इस मामले की पड़ताल हम गहराई से कर रहे हैं। एसपी अरविन्द कुमार ने बताया कि जो पर्चा बाँटा गया है वह काफी आपत्तिजनक है और जिले में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला हो सकता था।

पुलिस ने लोगों के बीच डर फैलाने के लिए आईपीसी की दफा 505 (1)(b) और पब्लिक सर्वेंट के दिए आदेश की नाफ़रमानी के लिए दफा 188 के तहत कोतवाली पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार, बड़ी संख्या में पैम्प्लेट्स मिले हैं जो इस बात का साफ़ संकेत करता है ये शहर का माहौल बिगड़ना चाहते थे।

याद रहे कि अलीगढ़ के ऊपरकोट इलाके में 23 फरवरी के बवाल के दौरान बाबरी मंडी में इलाके में सांप्रदायिक विवाद हुआ था। जिसमें एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई थी जिसके बाद से बाबरी मंडी में रह रही हिन्दू आबादी बेहद डरी सहमी रही थी। 11 मार्च को जुम्मे की नमाज से पहले स्थितियाँ ऐसी बनीं थीं कि मुस्लिम फ़सादियों के डर से लोगों ने रातभर जागकर काटीं। इसी दौरान यहाँ के बजरिया क्षेत्र में वो पर्चे बाँटे गए थे, जिसे आतंकवादी हाफिज सईद का फतवा कहा गया था और जिसके संबंध में पुलिस जाँच कर रही है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार बाँटे गए पर्चे में कहा गया था कि इस पत्र को भारत की साढ़े तीन लाख मस्जिद में जुमे के दिन पढ़ाया गया है। खबरों के अनुसार इस पर्चे में प्रधानमंत्री से लेकर देश के लिए आपत्तिजनक बातें लिखी हुईं थीं। यह पर्चे बजरिया के अलावा प्रमुख दुकानों पर भी बाँटे गए थे।

‘सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम…’ – शाहीन बाग़ से हिंसा की अपील

देश भले युद्ध स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण से बचने में दिन-रात एक किए हुए हो, शाहीन बाग अभी भी पब्लिक सेफ्टी पर दी जा रही सारी सलाहों को धता बता झूठ, घृणा और डर की खेती में मशगूल है। ‘जामिया वर्ल्ड’ नामक फेसबुक पेज ने एक वीडियो अपलोड किया है। यह वीडियो इस बात की बानगी है कि कैसे कुछ लोग नियम, व्यवस्था, कानून और सरकारी एजेंसियों की हरेक सलाह की नाफ़रमानी के लिए कटिबद्ध हैं। कोरोना को देखते हुए पब्लिक गैदरिंग के खिलाफ सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी कर रखी हैं, इसके बावजूद न सिर्फ शाहीन बाग़ में धरना बदस्तूर जारी है बल्कि नागरिकता रजिस्टर आदि पर झूठ और घृणा फैलाने से भी बाज नहीं आ रहे।

3 मिनट 30 सेकण्ड्स लम्बे इस वीडियो में वक्ता जिहादी इस्लामिस्ट टीपू सुल्तान का जिक्र करता हुआ कहता है – सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम आजादी के 70 बाद हमसे नागरिकता का सबूत माँगते हो, कहते हो कि हमें नागरिकता रजिस्टर की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ये लालकिला जहाँ से झंडा फहराते हो, ये क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया? जहाँ ट्रम्प को लेकर गए थे वो ताजमहल क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया था?

ताजमहल, क़ुतुब मीनार और लालकिला पर अपना दावा ठोंकने के बाद बोलने वाला कहता है कि तुमने शौचालय बनवाए हैं, जाओ और वहाँ से झंडा फहराओ।

हिंसा करने की खुलेआम अपील करते हुए यह फ़सादी वीडियो में शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे लोगों और बाकी मुस्लिमों को कहता दिखता है कि अगर तुमने बाबरी मस्जिद की शहादत को चुपचाप स्वीकार न कर लिया होता तो ये नौबत न आती, हमारी माँ-बहनों को यूँ सड़कों पर न बैठना पड़ता, आज हमारे भाई-बहनों को बेइज्जत किया जा रहा है अगर अब भी तुम बाहर न निकले तो अगला नंबर तुम्हारा होगा।

एक दूसरे वीडियो में एक दूसरा वक्ता रिलायंस और अडानी के आर्थिक बहिष्कार की अपील करते हुए कहता है कि अगर रिलायंस और अडानी को नुकसान होगा तो वह सीधे मोदी-शाह को हिट करेगा। वह आगे कहता है कि कोरोना-वोरोना सिर्फ एक साजिश है इनकी, जिससे ये हमें हमारे घरों में बंद कर सकें, हमें इससे कुछ नहीं होगा। वो लक्ष्मी की पूजा करते हैं वो डरें कोरोना से, हम लक्ष्मी की पूजा नहीं करते हमें क्या डर है इससे?

ऐसा पहली बार नहीं है कि इस तरह के नफरत फैलाने वाले घृणात्मक वीडियो शाहीन बाग़ से निकल कर आए हों। प्रधामंत्री मोदी और अमित शाह को कत्ल करने से लेकर, हिन्दुओं की कब्र कितनी गहरी खुदेगी तक के वीडियो नागरिकता कानून के विरोध के चलते देश भर के प्रदर्शनों से आते रहे हैं।

याद रहे कि दिल्ली सरकार के कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए हर तरह के सामुदायिक जुटाव पर रोक लगा रखी है, इसके बावजूद भी वहाँ प्रदर्शन जारी है जो सरकारी नियम कानून की खुली अवहेलना है।