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BCCI ने 15 अप्रैल तक टाला IPL: कोरोना से रद्द हुआ तो होगा दस हजार करोड़ रुपए का नुकसान!

इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने इस माह से शुरु होने वाले टूर्नानेंट के 13वें सीजन को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया था। राजीव शुक्ला ने कोरोना वायरस के फैलते प्रभाव के बीच आईपीएल रद्द की जाने वाली खबरों को लेकर साफतौर पर कहा था कि आईपीएल का ये सीजन किसी कीमत पर रद्द नहीं किया जाएगा और टूर्नामेंट निर्धारित समय पर होगा।

साथ ही ये भी कहा जा रहा था कि इस संबंध में अंतिम फैसला शनिवार 14 मार्च को लिया जाएगा। लेकिन, माना जा रहा है कि इस बार IPL केवल प्रसारण के उद्देश्य से होगा और मैच बिना दर्शकों के खाली स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा। वहीं अब ताजा जानकारी के अनुसार BCCI की तरफ से खबर आ रही है कि सुरक्षा लिहाज से आईपीएल को 15 अप्रैल तक पोस्टपोंड कर दिया गया है।

माना जा रहा है कि बीसीसीआई इस दौरान ये देखेगी कि देश में कोरोना वायरस का कहर कम हो रहा है या नहीं। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में ये भी कहा जा रहा है कि अगर तब तक भी हालात काबू में नहीं आते हैं तो फिर ये भी हो सकता है कि आईपीएल को रद्द ही करना पड़े। वैसे इसके लिए 15 अप्रैल 2020 तक इंतजार करना होगा कि क्या वाकई आईपीएल तब शुरू हो सकेगा या नहीं।

मीडिया रिपोर्ट में ये भी कयास लगाया जा रहा है कि अगर आईपीएल रद्द होता है तो फिर बीसीसीआई को कितना नुकसान होने की सम्भावना है? इसके जवाब में कहा जा रहा है कि अगर आँकड़ों पर विश्वास करें तो बीसीसीआई को आईपीएल रद्द होने से करीब 10 हजार करोड़ रुपए का भारी-भरकम नुकसान हो सकता है।

इसके पहले सूचनाएँ सामने आ रही थीं कि 15 अप्रैल तक आईपीएल के मैच एक ही शहर में बिना दर्शकों के खाली स्टेडियम में कराए जा सकते हैं। बता दें, इससे पहले कोरोना वायरस के खतरे से बचने के लिए पाकिस्तान सुपर लीग के बाकी बचे मैच खाली स्टेडियम में कराने का फैसला किया गया है। इसके अतिरिक्त भारत और साउथ अफ्रीका के बीच मौजूदा वनडे सीरीज के बचे दोनों मैच भी बिना दर्शकों की उपस्थिति के ही खेले जाएँगे।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने कोरोना रोकने की दिशा में गत बुधवार को सभी मौजूदा विदेशी वीजा 15 अप्रैल तक निलंबित कर दिए थे। साथ ही दिल्ली के उप मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए आईपीएल समेत सभी खेल, बड़े सेमिनार, कॉन्फ्रेंस आदि के आयोजन पर पाबंदी लगा दी है।

हिन्दू विरोधी दंगे: ट्विटर ने ऑपइंडिया द्वारा हिन्दू पीड़ितों की खबरें शेयर करने पर अकाउंट किया लॉक

हिन्दू विरोधी और वामपंथी विचारधारा ने मुख्यधारा की मीडिया ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी अपना प्रभुत्व कितनी गहराई से स्थापित किया है इसका उदाहरण हम कई बार देख चुके हैं। इस बार इसका शिकार ऑपइंडिया को बनना पड़ा है। दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की सच्चाई को सामने लाने का जो प्रयास ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए किया, उसे एक ओर जहाँ बड़े वर्ग का स्नेह और सहानुभूति मिली, वहीं दूसरी ओर एक वर्ग ऐसा भी था जिसे दंगों के इस पहलू के सामने आने से परेशानी भी हुई।

जिस खबर से ट्विटर को आपत्ति है, उसका शीर्षक है- “महीनों से हिंदुओं पर हमले की योजना बना रही मुस्लिम भीड़ आख़िर पीड़ित कैसे? – 10 कहानियों से साफ होती तस्वीर

इस रिपोर्ट में उन 10 पीड़ितों की कहानी बताई गई थी, जो दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों की योजना और अपने ऊपर होने वाले हमलों से बिल्कुल अनजान थे। इस रिपोर्ट में दंगों की सच्चाई को स्पष्ट तरीके से सामने रखते हुए बताया गया है कि दिल्ली में हुए दंगे कोई अकस्मात घटना नहीं बल्कि एक विशेष वर्ग की ओर से सुनियोजित प्रक्रिया के अंतर्गत अंजाम दिया गया। जैसे, महीनों पहले से ही पत्थर इकठ्ठा करना, पेट्रोल बम बनाना, दंगों के समय समुदाय विशेष के द्वारा पहले अपनी मोटरसाइकिल की दुकान को खाली कर खुद को पीड़ित दिखाने के लिए उसे आग के हवाले करना, आदि शामिल है।

ऑपइंडिया ने ऐसी ही एक रिपोर्ट अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट के जरिए ट्वीट की थी, जिसके लिए ऑपइंडिया के अकाउंट को बारह घंटों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही ऑपइंडिया के सम्पादक अजीत भारती (Ajeet Bharti) के व्यक्तिगत अकाउंट पर भी हमला किया गया और उनके अकाउंट को सबा नक़वी के होली पर किए ट्वीट का जवाब देने के कारण 12 घंटे के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। हालाँकि, ट्विटर का गैर-वामपंथियों की अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला कोई नई बात नहीं है। नीचे की तस्वीर में आप देख सकते हैं कि दिल्ली पुलिस और मेडिकल टीम द्वारा कही गई बातों को, जो पब्लिक में उपलब्ध हैं, उसे ही लिखने पर, और सबा नक़वी द्वारा जबरन हिन्दुओं को अपराधबोध में डालने पर अजीत भारती ने एक तथ्य लिखा था।

ऑपइंडिया सीईओ राहुल रौशन (Rahul Roushan) ने ट्विटर पर ऑपइंडिया के अकाउंट को अस्थाई रूप से प्रतिबंधित किए जाने का संदेश शेयर करते हुए लिखा है कि ट्विटर के अनुसार पीड़ित हिन्दुओं से बात करना घृणा और नफरत फैलाना है।

वास्तव में, ऑपइंडिया द्वारा की गई हिन्दू विरोधी दंगों की ग्राउंड रिपोर्टिंग से नारज होने वालों में ट्विटर अकेला प्लेटफॉर्म नहीं है। हाल ही में ख़बरों की धुलाई करने का दावा करने वाले न्यूज़लॉन्ड्री ने भी ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्टिंग को झूठ साबित करने का विफल प्रयास किया था। लेकिन जिन तथ्यों को वह ‘खंडन’ साबित करने का प्रयास कर रहे थे, वह ऑपइंडिया द्वारा कही गई बातों से किसी भी तरह से अलग साबित नहीं हो पाईं।

सिंधिया ने राज्यसभा के लिए दाखिल किया पर्चा: समर्थक MLA स्पीकर से मिलेंगे, होगी विडियोग्राफी

राज्यसभा चुनाव के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को पर्चा दाखिल कर दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनके समर्थक विधायक आज मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर से मिलेंगे। मुलाकात की विडियोग्राफी भी होगी।

इससे पहले सिंधिया ने विधानसभा परिसर पहुॅंच अपना नामांकन दाखिल किया। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और अन्य पार्टी नेता भी थे। उनके अलावा राज्यसभा के लिए बीजेपी के दूसरे सुमेर सिंह सोलंकी ने भी पर्चा दाखिल किया। नामांकन दाखिले की आज अंतिम तिथि थी। मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। कॉन्ग्रेस और भाजपा के कब्जे में एक-एक सीट जाना तय है। तीसरी सीट पर दोनों दलों के बीच रोचक मुकाबला है।

मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद गिरने के कगार पर है। कमलनाथ सरकार के गिरने का संकट सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने के कारण पैदा हुआ है। कमलनाथ ने शुक्रवार (मार्च 13, 2020) को राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की और एक पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी विधायकों की खरीद-फरोख्‍त कर रही है।

उन्‍होंने राज्‍यपाल से अनुरोध किया कि वह ‘बेंगलुरु में बंधक बनाए गए विधायकों को मुक्‍त कराएँ।’ इसके साथ ही कमलनाथ ने राज्यपाल से विधानसभा के आगामी सत्र में अध्यक्ष द्वारा निर्धारित तिथि पर फ्लोर टेस्ट की माँग की है। मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि 6 कैबिनेट मंत्रियों सहित बागी कॉन्ग्रेस विधायकों में से 19 विधायकों को बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में भाजपा ने ‘बंदी’ बनाकर रखा है।

कमलनाथ द्वारा राज्यपाल को दिए गए पत्र में कहा गया है, “बीजेपी ने 8 मार्च को तीन चार्टर्ड फ्लाइट का इंतजाम किया और कॉन्ग्रेस पार्टी के 19 विधायकों को लेकर बेंगलुरु गई। तब से 19 विधायकों, जिसमें से 6 विधायक कैबिनेट मंत्री हैं, बीजेपी द्वारा एक रिसॉर्ट में रखा गया है। 19 बंदी विधायकों से किसी को भी मिलने या फिर किसी भी प्रकार के संचार की अनुमति नहीं है।”

पत्र में आगे आरोप लगाया गया है कि 10 मार्च को होली के दिन बीजेपी के वरिष्‍ठ नेताओं ने स्‍पीकर के आवास पर मुलाकात की और उन्‍हें कॉन्ग्रेस के बागी विधायकों का इस्‍तीफा सौंपा। इस दौरान 19 में से कोई भी इस्‍तीफा देने वाला विधायक स्‍पीकर के पास मौजूद नहीं था। इन घटनाओं का हवाला देते हुए पत्र में भाजपा पर राज्य सरकार को गिराने की साजिश का आरोप लगाया गया है।

फिलहाल सत्तासीन कॉन्ग्रेस के 114 में से 22 विधायकों ने इस्तीफे दे दिए हैं। अगर इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए तो कमलनाथ सरकार का गिरना तय है। इस्तीफा देने वाले कॉन्ग्रेस विधायकों में से 6 आज स्पीकर एनपी प्रजापति से मिलेंगे। स्पीकर ने नोटिस जारी कर इन विधायकों को हाजिर होने के लिए कहा था। इनमें से 6 विधायकों को शुक्रवार, 7 को शनिवार और बाकी 9 विधायकों को रविवार को उपस्थित होना है। स्पीकर ने इन विधायकों से मिलकर इस्तीफे की सत्यता बताने को कहा था।

हमारी धरती कोरोना से लड़ रही है: COVID-19 पर पीएम मोदी ने रखा SAARC राष्ट्र प्रमुखों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बातचीत का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना के लगातार बढ़ते हुए प्रभाव की गंभीरता को देखते हुए SAARC देशों के साथ बातचीत का प्रस्ताव रखकर बड़ी पहल की है। पीएम मोदी ने अपनी वर्ल्ड लीडर की छवि के अनुसार, दक्षिण एशियाई देशों के संगठन दक्षेस (SAARC) में शामिल देशों से आह्वान किया है कि सभी आठ राष्ट्राध्यक्ष विडियो कॉन्फ्रेसिंग से जुड़कर कोरोना के खिलाफ एकजुट लड़ाई पर चर्चा करें।

सार्क संगठन में भारत के अलावा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, श्रीलंका और नेपाल शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल अंतरराष्ट्रीय एकजुटता सुनिश्चित करने की दिशा में भी बड़ी मिसाल मानी जा सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने आज ट्वीट में लिखा- “मैं सार्क राष्ट्रों के नेतृत्व के सामने कोरोना वायरस से लड़ने की मजबूत रणनीति बनाने का प्रस्ताव रखता हूँ। हम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने नागरिकों को स्वस्थ रखने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। हम एकजुट होकर दुनिया के सामने एक मिसाल पेश कर सकते हैं और इसे स्वस्थ रखने में योगदान दे सकते हैं।”

उन्होंने दुनियाभर में फैलते कोरोना वायरस के संक्रमण पर चिंता जाहिर करते हुए इस चुनौती से निपटने की दिशा में सरकारों एवं संगठनों के सम्मिलित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “हमारी दुनिया कोविड- 19 नोवेल कोरोना वायरस से लड़ रही है। सरकार और लोग विभिन्न स्तर पर इससे लड़ने का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस कोविड-19 को लेकर देश के लोगों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह से सजग है और लोग बड़े समूह में एकत्र होने से बचकर इसके फैलाव को रोक सकते हैं। मोदी ने कोविड-19 पर अपने ट्वीट में कहा, “घबराहट को ना, सावधानी को हाँ कहिए।”

उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में कोई केंद्रीय मंत्री विदेश यात्रा नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “मैं देशवासियों से भी गैर-जरूरी यात्राएँ नहीं करने की अपील करता हूँ। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम बड़े समूह में एकत्र होने से बचकर इसके फैलाव को रोक सकते हैं और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।”

बेटे अनस ने करवाई थी पूर्व BSP विधायक हाजी अलीम की हत्या, माँ के मर्डर में बेल पर था जेल से बाहर

बीएसपी के पूर्व विधायक हाजी अलीम की मौत की गुत्थी सुलझ गई है। सीबीसीआईडी ने उनके बेटे अनस को इस मामले में गिरफ्तार किया है। अपनी सौतेली मॉं की हत्या का भी आरोपित अनस इन दिनों जमानत पर है। अनस को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया जहॉं से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

हाजी अलीम 9 अक्टूबर 2018 की रात अपने कमरे में मृत मिले थे। पुलिस ने मौके से पिस्टल बरामद किया था। इससे दो गोलियॉं चली थी। एक गोली दीवार और दूसरी उनकी कनपटी को पार करते हुए निकल गई थी। दो बार बुलंदशहर की सदर सीट से विधायक रहे अलीम की मौत को शुरुआत में सब आत्महत्या बता रहे थे।

हालाँकि हाजी अलीम के भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख हाजी युनूस ने इसे हत्या बताते हुए अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने अपनी जाँच के इसे आत्महत्या माना और केस बंद कर दिया। हाजी युनूस पुलिस का जाँच को कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर मामले की जाँच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। इसके करीब डेढ़ साल बाद सीबीसीआईडी ने बीते दिन गुरुवार को मेरठ से अनस को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद अनस काफी भड़का हुआ दिखाई पड़ रहा था। अपनी खीझ उतारते हुए मीडिया के कैमरे पर भी कई बार हाथ मारा।

मीडिया रिपोर्टों में सीबीसीआईडी एसपी मोहिनी पाठक के हवाले से बताया गया है पारिवारिक विवाद में अनस ने अपने पिता की हत्या कराई थी। हत्या में दो और लोगों के नाम भी सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि अनस अपनी सौतेली माँ का भी 2013 में दिल्ली में मर्डर करने का आरोपित है। इसमें उसका सगा भाई दानिश भी शामिल था। इस मामले में दोनो भाई जेल में बंद थे। तिहाड़ जेल में बंद रहा अनस इन दिनों जमानत पर था।

7 महीने बाद आखिरकार फारुख अब्दुल्ला आएँगे बाहर, बाप के बनाए कानून के कारण हुए थे नजरबंद

आखिरकार जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी को खत्म कर दिया गया है। फारुक अब्दुल्ला की नजरबंदी हटाने का आदेश राज्य सरकार ने शुक्रवार (मार्च 13, 2020) को जारी किया।

घाटी में नेताओं की नजरबंदी पर उठे सवालों पर सरकार ने स्पष्ट किया था कि फारूक को (Public Safety Act) के तहत नजरबंद किया गया था। यह महज संयोग ही है कि फारूक अब्दुल्ला को जिस ऐक्ट के तहत नज़रबंद किया गया है, उसे उनके पिता शेख अब्दुल्ला ही लेकर आए थे। वास्तव में 1978 में इस एक्ट को लकड़ी की तस्करी करने वालों के खिलाफ लाया गया था।

दरअसल, घाटी में अनुच्छेद-370 के कुछ प्रावधानों को निरस्त करने के बाद अगस्त 05, 2019 को फारूक अब्दुल्ला को उनके ही घर पर नजरबंद किया गया था। करीब 7 महीने बाद सरकार ने उनकी नजरबंदी को खत्म किया है।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के कुछ प्रावधानों को निष्क्रीय करने और विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होने के बाद से घाटी में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए वहाँ के स्थानीय नेताओं को नजरबंद कर लिया गया था। इनमें फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और सज्जाद लोन सहित कई अन्य नेता शामिल थे।

मुस्लिम पड़ोसियों से तंग आकर पलायन को मजबूर हिंदू परिवार: शब्बीर ने उनके पालतू कुत्ते को पीट-पीट कर मार डाला

मेरठ के पांचली खुर्द गाँव में एक परिवार घर छोड़कर जाने की योजना बना रहा है। दरअसल इस परिवार ने यह फैसला अपने मुस्लिम पड़ोसियों के बार-बार परेशान किए जाने के बाद किया है। परिवार के पालतू कुत्ते को हाल ही में उनके मुस्लिम पड़ोसियों ने पीट-पीटकर मार डाला।

बता दें कि पांचली खुर्द गाँव में रामचरित्र का परिवार मुस्लिम बहुल इलाके में रहता है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक रामचरित्र एक ठेकेदार हैं। वो बेंगलुरु में काम करते हैं। उनका परिवार गाँव में ही रहता है। रामचरित्र की नाबालिग बेटी दीपा ने बताया कि 14 फरवरी को उनके पालतू कुत्ते ने उनके पड़ोसी शब्बीर के पोते को काट लिया था। शब्बीर का परिवार इस घटना से नाराज था और उन्होंने आरोप लगाया था कि रामचरित्र के परिवार ने जानबूझकर अपने कुत्ते से शब्बीर के पोते पर हमला करवाया था। दीपा ने बताया कि 8 मार्च को शब्बीर के परिवार ने मौका पाकर कुत्ते पर हमला किया और उसे पीट-पीटकर मार डाला।

रामचरित्र के परिवार ने स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क किया था लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। दीपा ने बताया कि पालतू कुत्ते को मारने के लिए शब्बीर के परिवार पर शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई करने के बार-बार प्रयास करने के बावजूद अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपित शब्बीर के परिवार पर कार्रवाई के लिए एसएसपी से भी मिल चुके हैं, लेकिन फिर भी आरोपित पक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

परिवार का आरोप है कि इलाके में मुस्लिम-बहुल आबादी होने के कारण, पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने से हिचकिचाती है, पुलिस भी उनके दबाव में रहती है। साथ ही परिवार ने यह भी बताया है कि रामचरित्र गाँव में नहीं रहते हैं। इस दौरान उनके परिवार को पड़ोसियों से बार-बार धमकी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। दीपा ने बताया कि गाँव में वो अपनी माँ और एक बड़ी बहन के साथ रहती है।

नाबालिग बेटी ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार को पहले भी शब्बीर के परिवार ने पीटा है। बार-बार उत्पीड़न की घटनाओं से परेशान होने के बाद अब परिवार ने कहा है कि अगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर शब्बीर के परिवार की गिरफ्तारी नहीं की तो गाँव से पलायन कर जाएँगे। वो गाँव छोड़कर बेंगलुरु चले जाएँगे। हालाँकि, स्थानीय एसएसपी अजय साहनी ने कहा कि सीओ सरधना से पीड़िता की शिकायत पर जाँच कराई जाएगी। जाँच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘हमने एक को गोद दिया’: वो फोन कॉल जिससे पकड़ा गया मुल्ला, अंकित शर्मा के मर्डर में मूसा की तलाश

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान आईबी के अंकित शर्मा की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार (मार्च 12, 2020) को सलमान उर्फ मुल्ला उर्फ़ नन्हे को गिरफ्तार किया था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उसने पूछताछ में शर्मा की हत्या से जुड़े सारे राज उगल दिए हैं। इसके मुताबिक दंगाई अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के घर खींचकर ले गए। जान से मारने से पहले उनके मुँह पर काला कपड़ा डाला। निर्वस्त्र कर उनके हिंदू होने की पहचान की। फिर चाकुओं से गोद उनका शव नाले में फेंक दिया गया।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार मुल्ला एक फोन कॉल से गिरफ्त में आया। असल में पुलिस ने चॉंदबाग में दंगों के दौरान एक अपराधी मूसा के फोन को सर्विलांस पे रखा था। उसी बातचीत में मुल्ला का नाम सामने आया था। इसके बाद जब मुल्ला का फोन सर्विलांस पर लिया गया तो वह किसी से बात करते हुए सुनाई पड़ा- हमने एक को गोद दिया। मूसा की भी तलाश की जा रही है। अंकित की हत्या में उसके शामिल होने का भी संदेह है।

मुल्ला मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला है। 2005 से वह दिल्ली के सुंदर नगरी इलाके में रह रहा है। वह प्याज की रेहड़ी लगाने का काम करता है। शनिवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस ने उपद्रवियों से सैकड़ों फोन भी बरामद किए हैं। इनकी फोरेंसिक जॉंच के बाद कई और राज सामने आ सकते हैं।

बता दें कि अंकित शर्मा की नृशंस हत्या का अंदाजा हम उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लगा सकते हैं। जिसके मुताबिक अंकित शर्मा के शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने इस रिपोर्ट में लिखा था कि 400 से ज़्यादा बार अंकित को चाकुओं से गोदा गया।

इससे मामले में आप का निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन भी आरोपित है। अंकित शर्मा के पिता रविन्द्र शर्मा ने दिल्ली के दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए ताहिर हुसैन के अलावे कई अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया था। अंकित का शव 26 फरवरी को चॉंदबाग के नाले से मिला था। ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम भी हिरासत में है। अंकित की हत्या के वक्त वह भी मौके पर मौजूद बताया जा रहा है।

कुलदीप सेंगर को 10 साल की कैद, ₹10 लाख जुर्माना: उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या का मामला

उन्नाव दुष्कर्म कांड में पीड़िता के पिता की हत्या में दोषी ठहराए गए भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत सभी दोषियों को अदालत ने 10 साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही सेंगर और उसके भाई अतुल सेंगर पर 10-10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह रकम पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने 4 मार्च को सेंगर समेत 7 लोगों को दोषी करार देते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने इस मामले में 11 आरोपितों में से 4 आरोपितों को बरी कर दिया था। पीड़िता के पिता की मृत्यु 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में हो गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि हालाँकि सेंगर का पीड़िता के पिता की हत्या करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन उन्हें इतनी बुरी तरह से पीटा गया कि उनकी मौत हो गई।

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में गुरुवार (मार्च 12, 2020) को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने इसे वीभत्स मामला बताते हुए कठोर सजा देने की माँग की। इसके बाद सेंगर ने जिला जज धर्मेश शर्मा के सामने गिड़गिड़ाते हुए कहा, “मुझे इंसाफ दिया जाए या फिर फाँसी पर लटका दिया जाए। अगर मैंने कुछ गलत किया है, तो मेरी आँखें तेजाब से जला दी जाएँ।”

सेंगर ने कहा कि उनकी दो बेटियाँ हैं और न्यायाधीश से आग्रह किया कि उन्हें छोड़ दिया जाए। न्यायाधीश ने कहा कि आपका परिवार है। हर किसी का परिवार है। आपको यह सब अपराध करते समय सोचना चाहिए था, लेकिन आपने सभी कानूनों को तोड़ा। अब आप हर चीज को ना कहेंगे? आप कब तक इनकार करते रहेंगे?

गौरतलब है कि उन्नाव में कुलदीप सेंगर और उसके साथियों ने 2017 में नाबालिग को अगवाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले की जाँच सीबीआई ने की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को 20 दिसंबर को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए उसे मृत्यु तक जेल में रखने के आदेश दिए थे। 

इसके साथ ही सेंगर पर 25 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया था। कुलदीप सेंगर की विधानसभा सदस्यता भी रद्द की जा चुकी है। इससे पहले सेंगर को भारतीय दंड संहिता के तहत दुष्कर्म और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत किसी लोकसेवक द्वारा किसी बच्ची के खिलाफ यौन हमला किए जाने के अपराध का दोषी ठहराया था।

पूर्व CEC कुरैशी की ‘दुआ’- PM मोदी को हो जाए कोरोना: विवाद के बाद ट्वीट डिलीट, मॉंगी माफी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी वैसे तो अपनी सेकुलर छवि के लिए जाने जाते हैं, लेकिन गुरुवार को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उनकी कुंठा दिखाई पड़ी। उन्होंने ट्विटर पर अप्रत्यक्ष रूप से पीएम के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की कामना की। जब इसके लिए आलोचना शुरू हुई तो उन्होंने ट्वीट डिलीट कर माफी मॉंग ली। उनका कहना है कि ऐसा गलत बटन दबने के कारण हुआ।

कुरैशी ने एक कट्टरपंथी के ट्वीट को रीट्वीट किया। इस ट्वीट में यूजर ने ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलोनसरो के कोरोना से संक्रमित होने की खबर को शेयर किया था। साथ ही उनकी दूसरी फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लगाई थी, जिसमें वे ब्राजील के राष्ट्रपति से हाथ मिलाते नजर आ रहे थे।

दोनों नेताओं की यह तस्वीर गणतंत्र दिवस समारोह के आसपास की है। मगर, कोरोना वायरस की खबर के साथ इस तस्वीर को लगाना यूजर की मंशा को साफ दर्शाता है। यह मंशा और भी स्पष्ट उसके कैप्शन से होती है। इसमें वो लिखता है, “दुआ की दरख्वास्त है।”

इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हैं एसवाई कुरैशी। लेकिन जब उन्हें शेफाली वैद्य जैसी वरिष्ठ पत्रकारों की लताड़ लगती है, तो तुरंत वह इस ट्वीट को डिलीट कर देते हैं और शेफाली वैद्य के ट्वीट पर लिखते हैं, “मैं इसके लिए माफी माँगता हूँ। मैं केवल इस ट्वीट की रिपोर्ट करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन मुझसे गलत बटन दब गया।”

इसके अलावा वह शख्स जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीमार होने की कामना की थी। वह भी इस पर अपनी सफाई लिखता है कि उसने दुआ प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए की है।

गौरतलब है कि ये पहला मौक़ा नहीं है, जब नरेंद्र मोदी के लिए इस तरह के हितैषी निकलकर सामने आए हों। इससे पहले साल 2009 में एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार सुनेत्रा चौधरी ने भी नरेंद्र मोदी के बीमार होने पर अपनी खुशी व्यक्त की थी। साल 2009 में जब नरेंद्र मोदी स्वाइन फ्लू से संक्रमित हुए थे। उस समय सुनेत्रा ने लिखा था- नरेंद्र मोदी को स्वाइन फ्लू है। मुझे नहीं पता क्यों… लेकिन ये खबर मुझे उत्साहित कर रही है।

इसके अलावा दि क्विंट के भी एक पत्रकार थे सुप्रतीक चौधरी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुभकामनाएँ देने की बजाय इस बात पर खुशी जाहिर की थी कि वे अपनी मौत के एक साल और करीब पहुँच गए।