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सिंधिया के BJP में जाते ही जमीन घोटाले की जॉंच फिर से, 2 साल पहले बंद कर दी गई थी फाइल

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर फिर से बदले की भावना से काम करने और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। असल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद आर्थिक अपराध प्ररोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने जमीन घोटाले मामले में फिर से अपनी जाँच शुरू कर दी है। 10 हजार करोड़ रुपए के जमीन घोटाले में सिंधिया के खिलाफ फाइल दो साल पहले ही बंद की जा चुकी है। इसी तरह के आरोप प्रदेश सरकार पर संजय पाठक के मामले में भी लगा था। कमलनाथ सरकार पर खतरा मॅंडराते ही पाठक के खिलाफ कार्रवाइयों का सिलसिला शुरू हो गया था। उन्होंने खुद की हत्या की आशंका तक जताई थी।

अब सिंधिया को लेकर प्रदेश सरकार घेरे में है। सिंधिया ने कहा है कि जॉंच बदलने की भावना से दोबारा शुरू की गई है। उन्हें कानून पर भरोसा है और कमलनाथ सरकार को करारा जवाब मिलेगा।

दैनिक भास्कर मे प्रकाशित संबंधित खबर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मध्य प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ की गई एक शिकायत के तथ्यों का फिर से जाँच करने का फैसला किया। इसमें ग्वालियर में एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि सिंधिया ने संपत्ति के दस्तावेजों में हेरफेर कर 6,000 फुट की जमीन का हिस्सा शिकायतकर्ता को बेचा था।

इस मामले के संबंध में पहली दफा 26 मार्च 2014 में शिकायत दर्ज की गई थी। लेकिन इसकी जाँच के बाद इस केस को 2018 में बंद कर दिया गया था। एक अधिकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 12 मार्च को फिर से आवेदन दिया है और अब उसी आधार पर शिकायत के तथ्यों को फिर से जाँच की जाएगी। ईओडब्लयू की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि सुरेंद्र श्रीवास्तव ने सिंधिया और उनके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई कि उन्होंने एक रजिस्ट्री दस्तावेज में हेरफेर कर वर्ष 2009 में ग्वालियर के महलगांव में 6,000 फुट जमीन उसे बेची।

गौर करने वाली बात है कि सिंधिया के खिलाफ पहली बार जब इस मामले में शिकायत की गई उस समय राज्य में शिवराज सिंह के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार थी। तब सिंधिया भी कॉन्ग्रेस में हुआ करते थे। मामले की जॉंच के बाद फाइल बंद भी बीजेपी सरकार के कार्यकाल में हुआ था। अब इस मामले को दोबारा ऐसे वक्त में खोला गया है जब सिंधिया बीजेपी में जा चुके हैं और उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफे के कारण कमलनाथ सरकार का गिरना तय लग रहा है।

दोबारा जाँच को अधिकारी भले शिकायतकर्ता की माँग बता रहे हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी के मुताबिक ये बदले की भावना से किया गया है। उन्होंने कहा, “सिंधिया जी के खिलाफ बदले की भावना से जो ईओडब्ल्यू की प्रक्रिया की जा रही है। उससे कुछ होने वाला नहीं है।” चतुर्वेदी ने बताया कि यह मामला सबूतों के अभाव में एक बार खत्म हो चुका है, फिर भी बदले की भावना से यह सब किया जा रहा है।

इससे पहले विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक के बांधवगढ़ स्थित रिसॉर्ट का एक हिस्सा जिला प्रशासन ने तोड़ दिया। जबलपुर में आयरन की उनकी 2 खदानें भी सील कर दी थी। पाठक ने सरकार पर विपक्ष में रहने की सजा के तहत कार्रवाई के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था, “मेरे ऊपर काफी दबाव बनाया जा रहा है। मुझे बीजेपी छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल होने के लिए कहा जा रहा है। अगर मैं ऐसा नहीं करता हूँ तो मेरे और मेरे परिवार के सदस्यों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। मेरी जान को लगातार खतरा है। मैं मर जाऊँगा लेकिन बीजेपी नहीं छोड़ूँँगा।”

दंगा प्रभावित इलाकों में फोर्स की तैनाती: लोगों ने पूछा- जुमे की नमाज में ऐसा क्या होता है?

बीते दिनों हुए हिंदू विरोधी दंगों के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली का माहौल अब शांत है। बावजूद स्थानीय लोग के मन से उन दो दिनों में बरपे कहर की कड़वी यादें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं। हिंसाग्रस्त इलाकों में रह रहे कई लोगों को अब भी डर है कि कभी भी हमला हो सकता है। कई लोग अब भी घर से बाहर निकलने में घबरा रहे हैं। इसी माहौल को देखते-परखते हुए आज यानी शुक्रवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फोर्स की तैनाती की गई है।

टाइम्स नाउ की खबर के अनुसार, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के आसपास के इलाकों में फोर्स की तैनाती जुमे की नमाज के मद्देनजर की गई है। हालाँकि, फोर्स की तैनाती एहतियातन हुई है। लेकिन, सोशल मीडिया पर लोगों का पूछना है कि आखिर इस डर के साथ कब तक रहना पड़ेगा। यूजर्स पूछ रहे हैं कि जुमे की नमाज में ऐसा क्या होता है कि हर बार फोर्स की तैनाती करनी पड़ती है।

गौरतलब है कि 24-25 फरवरी को दंगाइयों ने हिंदुओं, उनके शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों, दुकानों, घरों, वाह​नों को चुन-चुनकर निशाना बनाया था। हर जगह हुई तोड़फोड़, पहले से तैयार पेट्रोल बम, गुलेल, ईंट-पत्थर आदि इस बात का सबूत हैं कि हिंसा अचानक नहीं भड़की थी। सुनियोजित तरीके से इसे अंजाम दिया गया था।

यूजर्स की प्रतिक्रिया

दंगों के बाद से ही सबके मन में यही सवाल उठ रहा है कि अचानक उपद्रवियों के हाथ में तेजाब की थैलियाँ, पेट्रोल बम, ड्रम, ईंट-पत्थर और गुलेल आदि कहाँ से आ गए। हिंसा खत्म होने के कुछ दिन बाद की रिपोर्ट्स देखें तो धीरे-धीरे से इस पर से पर्दा उठा और सारी तस्वीर साफ हो गई। पता चला कि इन दंगों को अंजाम देने के लिए ईंट-पत्थर एक सप्ताह पहले से ही इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। बताया गया था कि इस हिंसा के लिए ट्रैक्टरों की मदद से एक हफ्ते पहले ही भट्ठों से ईंटे मँगवा ली गई थीं। सात ट्रक पत्थर तो AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के घर के पास ही उठाए गए थे।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा: तनवीर और गुलफाम गिरफ्तार, कई फोन बरामद

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को एक और सफलता मिली है। पुलिस ने हिंसा के दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान तनवीर और गुलफाम के रूप में हुई है। इन पर दंगों में शामिल होने के आरोप हैं। दोनों आरोपितों के पास से कई मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जिसे जाँच के लिए फॉरेंसिक विभाग को भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार (मार्च 12, 2020) को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के आरोप में सलमान उर्फ हसीन उर्फ मुल्ला उर्फ नन्हे को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पता चला कि मुल्ला ने न केवल अन्य दंगाइयों के साथ मिलकर अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के घर में खींचा, बल्कि उन्हें जान से मारने से पहले उनके मुँह पर काला कपड़ा डाला और साथ ही उन्हें निर्वस्त्र भी किया।

सलमान के मुताबिक दंगाइयों ने उनका मजहब जानने के लिए उनके कपड़े उतारे। धर्म पुख्ता कर उन्हें चाकूओं से गोद डाला। सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित पर 14 बार चाकू से वार किए। इस मामले में क्राइम ब्रांच आम आदमी पार्टी के निलंबित निगम पार्षद ताहिर हुसैन को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। उसके खिलाफ अंकित शर्मा की हत्या समेत तीन अन्य केस भी दर्ज हैं।

गुरुवार को ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या के सात आरोपितों को गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता एमएस रंधावा ने बताया था कि हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या के मामले में सलीम मलिक, मोहम्मद जलालुद्दीन, मोहम्मद अयूब, मोहम्मद युनूस, आरिफ व मुहम्मद सलीम खान को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी आरोपित चाँद बाग के रहने वाले हैं। इसके अलावा गिरफ्तार एक अन्य आरोपित मोहम्मद दानिश गाजियाबाद के लोनी का रहने वाला है।

बता दें कि कॉन्स्टेबल रतनलाल पर जब भीड़ ने हमला किया था तो वे उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली के गोकुलपुरी क्षेत्र के मौजपुर इलाके में तैनात थे। पत्‍थरबाजी में रतनलाल बुरी तरह से घायल हो गए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि उन्हें गोली भी मारी गई थी।

जाँच में यह सामने आया कि दंगाइयों ने साजिश के तहत पुलिसकर्मियों पर हमला किया था। घटना वाले दिन चाँद बाग इलाके में धरनास्थल के समीप अधिकांश सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए थे। ताकि, दंगाइयों की तस्वीर कैमरे में कैद न हो सके।

दिल्ली दंगों को लेकर 60 सोशल मीडिया अकाउंट रडार पर: 22 फरवरी को शुरू हुए 26 फरवरी को बंद कर दिए गए

दिल्ली में हुए दंगों पर राज्यसभा में गुरुवार (मार्च 12, 2020) को जोरदार बहस हुई। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली दंगों पर विपक्ष के सवालों के जवाब दिए। राज्यसभा में अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में गहरी साजिश के तहत दंगा कराया गया। उन्होंने कहा कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स ने दंगे के दौरान सिर्फ नफरत फैलाने का काम किया। 

शाह ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट ऐसे थे जो दंगों से पहले शुरू किए गए और हिंसा के बाद बंद कर दिए गए। इनसे दंगा, नफरत और घृणा फैलाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि ये लोग भी कहीं बैठे होंगे और मेरी बात सुन रहे होंगे, उनको लगता है कि वो बच गए, तो वे गलत हैं। ये डिजिटल युग है। हम दंगा भड़काने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने वालों को पाताल से भी खोजकर निकालेंगे और कानून के कठघरे में खड़ा करेंगे। आज के युग में ऐसे लोग बच नहीं सकते हैं।

उन्होंने कहा, “दिल्ली में हुए दंगों की जाँच पड़ताल में सोशल मीडिया में 60 ऐसे अकाउंट मिले हैं जो 22 फरवरी को शुरू हुए और 26 फरवरी को बंद हो गए। अगर ये लोग सोचते हैं कि अकाउंट बंद करके वो बच जाएँगे तो मैं बता दूँ कि वो जहाँ पर भी हैं पुलिस उनको ढूँढ निकालेगी।”

इसके साथ ही उन्होंने दंगाइयों की संपत्ति जब्त करने की भी बात कही। उन्होंने कहा, “दंगे में जनता का बहुत नुकसान हुआ है, संपत्ति तबाह हुई है। हमने दिल्ली उच्च न्यायालय को Claim Commission के गठन के लिए पत्र लिखा है। जिन लोगों ने सार्वजनिक संपत्ति तबाह की, गाड़ियाँ और दुकानें जलाई, उन सभी को वीडियोग्राफी के आधार पर पकड़ कर उनकी संपत्ति को जब्त किया जाएगा।”

गृह मंत्री ने कहा, “मैं दिल्ली हिंसा पर बात करते हुए इसकी पृष्ठभूमि में जाना चाहूँगा। इस हिंसा के पीछे दिल्ली में चल रहे सीएए विरोधी प्रदर्शनों की भी भूमिका रही है। दिल्ली हिंसा से जुड़े हर पहलू की जाँच जारी है। मैं दंगा पीड़ितों के परिजनों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि इस हिंसा में शामिल किसी भी साजिशकर्ता को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे किसी भी धर्म, जाति या राजनीतिक पार्टी के हों।”

इसके साथ ही अमित शाह ने विपक्षों के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “किसी की जान चली गई, कोई अपाहिज हो गया, किसी का घर जल गया और आप निजता की बात करते हो? पुलिस को यह अधिकार होना चाहिए कि जिसने दंगा किया है, उसको कोर्ट के सामने खड़ा करे और कठोर से कठोर सजा दी जाए। हमने किसी की निजता का कोई उल्लंघन नहीं किया है।”

इस दौरान दंगों में हुई मौतों का आँकड़ा धर्म के आधार पर माँगने पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने कहा, “मैं दंगों में हुए नुकसान का आँकड़ा तो दे सकता हूँ, लेकिन उसमें हिन्दू-मुस्लिम नहीं कर सकता। आपको भी ऐसा नहीं करना चाहिए। दंगों में जिनका नुकसान हुआ वे सभी भारतीय हैं। जो लोग धर्म के आधार पर आँकड़ा माँग रहे हैं, मैं उनको बताना चाहता हूँ कि 52 भारतीयों की मृत्यु हुई है, 526 भारतीय घायल हुए, 371 भारतीयों की दुकानें जली और 142 भारतीयों के घर जले हैं। ऐसे समय पर सदन में ऐसी राजनीति करना बहुत दुखद है। ओवैसी जी बड़े जुनून के साथ कहते हैं कि मस्जिद जल गए। ओवैसी जी, मंदिर भी जले हैं। तनिक उसके लिए भी दुख व्यक्त कर लीजिए। मैं मंदिर और मस्जिद दोनों के लिए दुख व्यक्त करता हूँ। कोई भी धर्मस्थान नहीं जलना चाहिए।”

इस दौरान उन्होंने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जी ने 27 को कहा कि सेना को बुला लीजिए। इसका कोई अर्थ नहीं था क्योंकि तब तक दंगे शांत हो चुके थे। पर उनकी भावनाओं को मैं समझ सकता हूँ क्योंकि उनके पार्षद के घर से ढेर सारी चीजें पकड़ी गई, उनको सस्पेंड करना पड़ा।” 

बता दें कि आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन पर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की मौत का आरोप है। दंगे के बाद हुई जाँच में ताहिर हुसैन की छत से बड़ी संख्या में पेट्रोल बम, तेजाब ईंंट-पत्थर वगैरह बरामद हुए थे। इस दंगे में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गृह मंत्री ने कहा कि दोनों जाँबाज अफसर अंकित शर्मा और रतनलाल की हत्या करने वालों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि ISIS से संबंध रखने वाले दो लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। ये लोग ISIS से आने वाली सामग्री का भारतीय भाषा में अनुवाद कर नफरत फैलाने का काम करते थे।  

राजस्थान की हालत भी ठीक नहीं, मंत्री खुद को राजा समझ रहे: कॉन्ग्रेस MLA का अपनी ही सरकार पर निशाना

जब से मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार पर संकट शुरू हुआ है तब से ही राजस्थान चर्चा के केंद्र में हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी अपनी उपेक्षा से नाराज हो देर-सबेर ज्योतिरादित्य सिंधिया के रास्ते पर बढ़ सकते हैं। कयासों के बीच प्रदेश में राजनीतिक हलचल भी तेजी है। कॉन्ग्रेस विधायक पीआर मीणा ने सरकार पर सवाल उठाकर प्रदेश की गहलोत सरकार में सब कुछ ठीक नहीं होने के दावों को और हवा दे दी है।

मीणा टोडाभीम से विधायक हैं। गुरुवार को विधानसभा पहुॅंचे मीणा ने कहा कि राजस्थान की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है। मंत्री अपने को राजा समझ रहे। विधायकों की कोई सुन नहीं रहा है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर भी कॉन्ग्रेस के विधायक अरसे से अपनी बातें नहीं सुने जाने का आरोप लगा रहे थे।

अब राजस्थान में भी ऐसे ही स्वर फूटने लगे हैं। मीणा ने प्रदेश सरकार की कार्यपद्धति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। इसके बाद भी पीड़ित किसानों का दर्द नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रियों को टाइट करने की जरूरत है। साथ ही उन दो-तीन विधायकों को भी जो खुद को मुख्यमंत्री से भी ऊपर समझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस हालत से ज्यादातर विधायक नाराज हैं।

मीणा पहले भी सरकार का कामकाज को लेकर सवाल उठा चुके हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अपनी ही सरकार में ही कॉन्ग्रेस के विधायकों का काम नहीं हो रहा। इतना ही नहीं विधायक ने लोकसभा में हार का जिम्मेदार उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ही ठहराया था। इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया था।

गौरतलब है कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार बनने के ही अशोक गहलोत और सचिन पायलट के मतभेद सामने आ गए थे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर दोनों के समर्थक रोड पर आ गए थे। इसके बाद अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री के पद से संतोष करना पड़ा। इसके बाद ऐसे कई मौके आए कि जब दोनों के मतभेद खुलकर जनता के सामने आए। चाहे फिर वह लोकसभा में टिकट बँटवारे का मामला हो या फिर राज्यसभा के उम्मीदवार को लेकर दोनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई। इतना ही नहीं एक बार तो सचिन पायलट अपनी ही सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं।

राजस्‍थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं। 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 99 सीटों पर जीत हासिल की थी। सहयोगी और निर्दलीय विधायकों की मदद से कॉन्ग्रेस ने आसानी से बहुमत का जादुई आँकड़ा पार कर लिया था। वहीं BJP को महज 73 सीटे ही मिल पाई थीं। इन दोनों दलों के अलावा बसपा के 6 विधायक जीतकर आए थे। माना जा रहा है कि सचिन पायलट के खेमे के ऐसे 20 विधायक हैं जो गहलोत के रवैए से नाराज हैं।

नंगा कर IB के अंकित शर्मा को गोदा: मुल्ला ने मर्डर से लेकर नाले में शव फेंकने तक पूरा राज उगला

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान IB के अंकित शर्मा की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कल (मार्च 12, 2020) सलमान उर्फ मुल्ला उर्फ़ नन्हे को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद मालूम चला कि मुल्ला ने न केवल अन्य दंगाइयों के साथ मिलकर अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के घर में खींचा, बल्कि उन्हें जान से मारने से पहले उनके मुँह पर काला कपड़ा डाला और साथ ही उन्हें निर्वस्त्र भी किया।

सलमान के मुताबिक दंगाइयों ने उनका मजहब जानने के लिए उनके कपड़े उतारे। धर्म पुख्ता कर उन्हें चाकूओं से गोद डाला। सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित पर 14 बार चाकू से वार किए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान ने पुलिस को पूछताछ में बताया, “हत्या करने वाले सभी लोगों को पता था कि अंकित IB में काम करते हैं। साजिश कर उनकी हत्या की गई। पहले उन्हें घसीटकर ताहिर हुसैन के घर ले गए और फिर 1 दर्जन से भी ज्यादा लोगों ने चाकुओं से वार किया।” सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित के शरीर पर करीब 14 वार किए थे। उसके मुताबिक अंकित को बहुत क्रूरता से तड़पा-तड़पाकर मारा गया और फिर शव नाले में फेंक दिया गया।

गौरतलब है कि उस दिन ताहिर हुसैन के घर में मौजूद दंगाइयों ने अंकित के साथ दो अन्य हिंदू युवकों को भी अंदर की ओर खींचा था। लेकिन वह दोनों किसी तरह खुद को उनके चंगुल से छुड़ाकर भागने में कामयाब हो गए। मगर, उस समय अंकित शर्मा उनके बीच फँस गए। जिसके बाद इन दरिंदों ने पहले अंकित शर्मा को मारा और बाद में डंडे से उठाकर उनके शव को गंदे नाले में फेंक दिया।

बता दें कि अंकित शर्मा की नृशंस हत्या का अंदाजा हम उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से लगा सकते हैं। जिसके मुताबिक अंकित शर्मा के शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने इस रिपोर्ट में लिखा था कि 400 से ज़्यादा बार अंकित को चाकुओं से गोदा गया।

इस क्रूर अमानुषिक हत्याकांड और यातना को अंजाम देने में कम से कम 6 लोगों के शामिल होने की बात डॉक्टर बताते हैं। उन्होंने कहा है कि अंकित शर्मा को 6 लोगों ने लगातार 2 से 4 घंटे तक 400 बार चाकुओं से गोदा होगा। साथ ही, उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा।

इससे मामले में आप का निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन भी आरोपित है। अंकित शर्मा के पिता रविन्द्र शर्मा ने दिल्ली के दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए ताहिर हुसैन के अलावे कई अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया था। अंकित का शव 26 फरवरी को चॉंदबाग के नाले से मिला था।

कोरोना से देश में पहली मौत, सऊदी से लौटे थे 76 साल के मोहम्मद हुसैन: कनाडा के PM की पत्नी भी संक्रमित

कर्नाटक में एक 76 वर्षीय व्यक्ति की कोरोना वायरस से मौत हो गई है। कोरोना वायरस से देश में यह पहली मौत है। गुरुवार (मार्च 12, 2020) को जाँच रिपोर्ट आने के बाद इसकी पुष्टि हुई है। वहीं भारत में कोरोना वायरस के 14 नए मामले सामने आने के बाद इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 74 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि नए मामलों में से से 9 मामले महाराष्ट्र से जबकि एक-एक मामला दिल्ली, लद्दाख, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में सामने आया है। वहीं एक विदेशी नागरिक भी इससे संक्रमित पाया गया है।

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री बी श्रीरामुलु ने गुरुवार को ट्वीट किया कि कलबुर्गी का जो व्यक्ति कोविड-19 का संदिग्ध मरीज था, उसके इस वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हो गई है। मोहम्मद हुसैन सिद्दिकी हाल ही में सऊदी अरब से लौटे थे। मंगलवार को उनकी मौत हुई थी। गुरुवार को उनके कोरोना वायरस से भी संक्रमित होने की पुष्टि हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया है कि उन्हें हाई ब्लडप्रेशर और अस्थमा जैसी अन्य शिकायतें भी थी। अब हेल्थ डिपार्टमेंट इस बात का पता लगा रहा है कि यह बुजुर्ग कितने लोगों के संपर्क में आया था। तेलंगाना सरकार को भी इसकी जानकारी दे दी गई है कि सिद्दीकी कोरोना से संक्रमित थे, क्योंकि अधिकारियों को इस बात का पता चला है कि इलाज के लिए वे तेलंगाना के भी एक अस्पताल में गए थे।

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली में स्कूल-कॉलेज से लेकर सिनेमा हॉल तक सब कुछ 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है। सरकार ने सरकारी, निजी कार्यालयों, शॉपिंग मॉलों सहित सभी सार्वजनिक स्थानों को संक्रमण मुक्त बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। उत्तराखंड के भी सभी स्कूलों को 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। कई खेल कार्यक्रम रद्द या स्थगित कर दिए गए हैं। 

वहीं इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कोरोना से नहीं घबराने की अपील की है। गुरुवार को उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “घबराहट को ना, सावधानी को हाँ कहिए। आने वाले दिनों में कोई केंद्रीय मंत्री विदेश यात्रा नहीं करेगा। मैं देशवासियों से भी गैर-जरूरी यात्राएँ नहीं करने की अपील करता हूँ। सभी मंत्रालयों और राज्यों ने सभी की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं।”

इससे पहले केंद्र सरकार ने बुधवार (मार्च 11, 2020) को कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के उपायों के तहत 15 अप्रैल तक सभी वीजा रद करने की घोषणा की। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, विदेशी राजनियकों, आधिकारिक, संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और रोजगार परियोजनाओं को छोड़कर अन्य सभी वीजा 15 अप्रैल तक निलंबित रहेंगे।

कोरोना वायरस की चुनौती से निपटने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी स्तर पर जहाँ संदिग्धों की पहचान कर उन्हें आइसोलेशन में रखा जा रहा है वहीं बाहर से आने वाले लोगों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए कई राज्यों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पूरी टीम लगाई गई है। इसके लिए कोरेनटाइन बेड आरक्षित किए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की पत्नी को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। कनाडाई मीडिया के हवाले से ये खबर सामने आई है। खबर है कि दोनों को आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा। बता दें कि कुछ दिनों पहले राजनीतिक कंजर्वेटिव्स के एक सम्मेलन में ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो के संचार प्रमुख से डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात हुई थी। बाद में पाया गया कि वह कोरोना संक्रमित थे। इस सम्मेलन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उपराष्ट्रपति माइक पेंस भी शामिल हुए थे। ट्रंप ने उस संक्रमित अधिकारी से हाथ भी मिलाया था। जिसके बाद हड़कंप मच गया।

कोरोना ने विश्वभर में कम से कम 4,600 लोगों की जान ले ली है और करीब 1,25,293 लोग इससे संक्रमित हैं। वायरस के केंद्र चीन में 3,100 से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसके अलावा ईरान 429 लोगों की मौत हुई है। इटली में 1,000 से ज्यादा लोग इस जानलेवा वायरस के कारण जान गँवा चुके हैं।

विपक्ष भ्रम न फैलाए, NPR में डॉक्‍यूमेंट की जरूरत नहीं, इसमें D कैटेगरी नहीं, कॉन्ग्रेस के शासन में 76% लोग दंगों में मारे गए: अमित शाह

लोकसभा के बाद राज्यसभा में दिल्ली हिंसा पर विपक्षी पार्टियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं बहुत दु:ख के साथ कहना चाहता हूँ कि पूरे देश में CAA को लेकर मुस्लिम भाइयों-बहनों के मन में एक भय का माहौल पैदा किया गया कि आपकी नागरिकता CAA से छीन ली जाएगी, जबकि ये गलत अफवाहें फैलाई जा रही हैं, CAA नागरिकता लेने का कानून है ही नहीं, ये नागरिकता देने का कानून है।

सदन में जवाब के दौरान अमित शाह ने NPR पर पैदा हुई भ्रम की स्थिति को साफ़ करते हुए कहा कि मैं स्पष्टता के साथ कहता हूँ कि NPR में कोई डॉक्यूमेंट नहीं माँगा जाएगा। जो जानकारी आपके पास नहीं हैं, वो देने की जरुरत नहीं है। इस देश में किसी को भी NPR की प्रक्रिया से डरने की जरूरत नहीं है।

अमित शाह के बयान पर कपिल सिब्बल ने कहा कि कोई यह नहीं कह रहा है कि सीएए से किसी की नागरिकता छिनेगा। जब NPR होगा तो 10 सवाल और पूछे जाएँगे और फिर D यानी डाउट फूल लगा देगा। यह सिर्फ मुस्लिम नहीं बल्कि गरीब लोगों की नागरिकता छिनेगा।

इसके बाद शाह ने दंगों को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि कॉन्ग्रेस के समय में दंगे हुए, इन्होंने दंगों को शांत करने का प्रयास किया होगा और हम भी दंगों को शांत करेंगे। परन्तु इसको मेरी पार्टी और विचारधारा पर मढ़ने का प्रयास निंदनीय है, जब हकीकत ये है कि कॉन्ग्रेस के शासन में 76% लोग दंगों में मारे गए हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर साफ कहा कि दिल्ली हिंसा के सिलसिले में किसी भी व्यक्ति के साथ कोई पक्षपात नहीं किया जाएगा और दंगा करने वाला व्यक्ति किसी भी धर्म या पार्टी का होगा, उसको नहीं छोड़ा जाएगा। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि अगर वो सोचते हैं कि हम बच गए, तो वो गलत हैं, हम उन्हें पाताल से भी खोजकर निकालेंगे और सजा दिलाएंगे।

इराक के सैन्य अड्डे पर अब तक का सबसे बड़ा रॉकेट हमला: अमेरिका, ब्रिटेन के 3 सैनिकों की मौत

इराक के सैन्य अड्डे पर बुधवार (मार्च 11, 2020) को रॉकेट हमला हुआ, जिसमें दो अमेरिकी सैनिक और एक ब्रिटिश सैनिक की मौत हो गई। इस अड्डे पर विदेशी सैनिक ठहरे हुए थे। बीते कुछ वर्षों में सैन्य अड्डे पर हुआ यह सबसे बड़ा हमला है।

बुधवार शाम को बगदाद के उत्तर में स्थित ताजी हवाईअड्डे पर कई रॉकेटों से हमला किया गया। यहाँ अमेरिकी नीत गठबंधन बलों (Coalition force) के सैनिक ठहरे हैं जो जिहादियों से लड़ाई में स्थानीय बलों की मदद करते हैं। युद्ध पर निगरानी रखने वाली एक संस्था ने कहा कि इससे लड़ाई और बढ़ने का खतरा है। पड़ोसी सीरिया में ईरान समर्थित इराकी लड़ाकों को निशाना बनाकर कुछ हवाई हमले किए गए हैं जिनके बारे में संदेह है कि इनके पीछे अमेरिका नीत गठबंधन बलों का हाथ है। बताया जा रहा है कि कम से कम 18 लड़ाके मारे गए हैं।

एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है। इराक की सेना ने कहा कि रॉकेट एक ट्रक से दागे गए। अब तक हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है, लेकिन वॉशिंगटन ने ईरान से समर्थन प्राप्त इराक के हाशेद अल शाबी के धड़ों को जिम्मेदार ठहराया है। पिछले वर्ष अक्तूबर से इराक में अमेरिकी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किया गया यह 22वाँ हमला है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने एक बयान में इस हमले को निंदनीय करार दिया है। वहीं ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बात की है और कहा कि वो इस घिनौने हमले के विवरण को पूरी तरह से समझने के लिए अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोगियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।

इजराइल के वैज्ञानिकों ने बनाई कोरोना की वैक्सीन, लोगों को जल्द मिल सकती है राहत: रिपोर्ट्स

चीन सहित विश्व के करीब 114 देशों में फैलकर जानलेवा बने कोरोना वायरस को लेकर एक राहत देने वाली खबर सामने आई। खबर आ रही है कि इजराइल के वैज्ञानिकों ने कोरोना वैक्सीन बना ली है। इसे लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि इसकी घोषणा जल्द ही की जा सकती है। इससे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने टीका विकसित करने के लिए सभी संसाधन झोंक देने के लिए कहा था।

इजराइल के अखबार हारेज की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत आने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च ने हाल ही में इस विषाणु की जैविक कार्यप्रणाली और उसकी विशेषताएँ समझने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इन विशेषताओं में नैदानिक क्षमता, इस विषाणु की चपेट में आ चुके लोगों के वास्ते एंटीबॉडीज (प्रतिरक्षी) के उत्पादन और टीके के विकास आदि शामिल हैं। हालाँकि, इस टीके को उपयोग के वास्ते कई परीक्षण करने होंगे जिनमें महीनों लग सकते हैं। ये वैक्सीन प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों पर विकसित की गई है और इसके असर काफी सकारात्मक रहे हैं।

हालाँकि, रक्षा मंत्रालय ने इस अखबार द्वारा सवाल किए जाने पर इसकी पुष्टि नहीं की। रक्षा मंत्रालय ने हारेज से कहा, ‘कोरोना वायरस के लिए टीके या परीक्षण किट्स के विकास के संदर्भ में इस बॉयोलोजिकल इंस्टीट्यूट के प्रयासों में कोई उपलब्धि हासिल नहीं हुई है। संस्थान का कामकाज व्यवस्थित कार्ययोजना के मुताबिक चलता है और उसमें वक्त लगेगा यदि और जब भी कुछ बताने लायक होगा, निश्चित व्यवस्था के तहत ऐसा किया जाएगा।”

मंत्रालय ने कहा, “यह बॉयोलोजिकल संस्थान विश्व विख्यात अनुसंधान एवं विकास एजेंसी है जो व्यापक ज्ञान वाले अनुभवी शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों एवं उत्तम बुनियादी ढाँचे पर निर्भर करती है। संस्थान में विषाणु के वास्ते अनुसंधान एवं मेडिकल उपचार विकसित करने में 50 से ज्यादा अनुभवी वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।” नेस जियोना में इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च को इजराइल के रक्षा बल विज्ञान कोर के तहत 1952 में स्थापित किया गया था और बाद में वह असैन्य संगठन बन गया। अखबार के मुताबिक तकनीकी तौर पर यह संस्थान प्रधानमंत्री कार्यालय के निगरानी में है, लेकिन यह रक्षा मंत्रालय से करीबी संवाद रखता है।

इससे पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने संस्थान को एक फरवरी को कोविड-19 का टीका विकसित करने के लिए संसाधन झोंक देने को कहा था। अखबार के अनुसार ऐसे किसी भी टीके के विकास की सामान्य प्रक्रिया में क्लीनिकल ट्रायल से पहले जानवरों पर परीक्षण की लंबी प्रक्रिया चलती है। इस दौर में इस दवा के दुष्प्रभावों को बेहतर ढंग से जानने का मौका मिलता है।

इजराइल के लोकप्रिय खबरिया पोर्ट वाईनेट ने तीन सप्ताह पहले एक खबर दी थी कि जापान, इटली और अन्य देशों से कोरोना वायरस नमूनों के पाँच खेप पहुँचे हैं। उन्हें रक्षा मंत्रालय के विशेष रूप से सुरक्षित कूरियर में इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलोजिकल रिसर्च में लाया गया और उन्हें शून्य के नीचे 80 डिग्री के तापमान पर रखा गया है। वहीं विशेषज्ञ तभी से टीके को विकसित करने में लगे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीके को पूर्ण रूप से विकसित करने में कुछ समय और लग सकता है।

दरअसल ये खबर ऐसे समय में आई है कि जब कोरोना को लेकर पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है। इजराइल से आई ये खबर लोगों को राहत देने वाली हो सकती है। आपको बता दें कि चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान से पैर पसारने वाले जानलेवा कोरोना वायरस की चपेट में अब तक विश्व के 114 देश चपेट में आ चुके हैं, जबकि वायरस की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या 4,623 हो चुकी है। वहीं 1,25,841 लोग इस वायरस से जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के बीच बुधवार को इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया।