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सिंधिया पर सख्त हुई कॉन्ग्रेस: राहुल ने कहा भविष्य को देखकर गए RSS में, तो कमलनाथ सरकार कर सकती है जमीन सौदे के मामले में FIR

कॉन्ग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामने के बाद भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया आज पहली बार भोपाल पहुँचे। भोपाल पहुँचकर उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवराज सिंह चौहान की भी तारीफ करते हुए कहा कि शिवराज कभी न थकने वाले सीएम रहे हैं।

भाजपा अपनाते ही कॉन्ग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर हमले चालू कर दिए हैं। वहीं कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी उनकी भाजपा में ‘घरवापसी’ पर अपनी राय देते हुए कहा कि सिंधिया की जुबान पर कुछ और और दिल में कुछ और ही चल रहा है।

‘राजनीतिक भविष्य के डर के चलते RSS की विचारधारा से मिले’

राहुल गाँधी ने कहा कि वो ज्योतिरादित्य सिंधिया की विचारधारा को अच्छे से जानते हैं क्योंकि वह उनके साथ ही कॉलेज में पढ़ते थे। राहुल गाँधी ने कहा- “मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ। वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर डरे हए थे, जिसके चलते उन्होंने अपनी विचारधारा छोड़ दी और RSS के साथ चले गए। लेकिन वहाँ उनको वो जगह नहीं मिलेगी।”

सिंधिया के भाजपा में जाते ही कमलनाथ सरकार ने कसा शिकंजा, जमीन खरीद मामले में दर्ज हो सकती है FIR

वहीं दूसरी ओर कमलनाथ सरकार ने ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ यानी EOW ने एक पुराने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्वालियर के वकील सुरेंद्र श्रीवास्‍तव ने एक आवेदन लगाकर कार्रवाई की माँग की है। इसी शिकायती आवेदन पर EOW ने जाँच शुरू भी कर दी है।

इस पूरे मामले के संबंध में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ EOW का कहना है कि आवेदक सुरेंद्र श्रीवास्तव के अनुसार उसके द्वारा मार्च 26, 2014 को प्रकोष्ट में एक शिकायती आवेदन प्रस्तुत किया गया था। जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके परिजनों के उपर आरोप लगाया गया था कि ज्योतिरादित्य व उनके परिजनों ने साल 2009 में ग्वालियर के महलगाँव की जमीन (सर्वे क्रमांक 916) खरीदकर रजिस्ट्री में काट-छाँट कर आवेदक की 6000 वर्ग फीट जमीन कम कर दी गई। इसमें सिंधिया पर प्रशासन के सहयोग से फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे आरोप शामिल किए गए हैं।

सिंधिया परिवार को ललकार कर कॉन्ग्रेस ने गलती की- सिंधिया

बीजेपी से जुड़ने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया आज पहली बार भोपाल पहुँचे जहाँ उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा – “जो सही है, वह सिंधिया परिवार का मुखिया सदैव बोलता है। यह मैं बोल दूँ कि सिंधिया की मुखिया को ललकारा था 1967 में, मेरी दादी को, संविद सरकार में क्या हुआ? 1990 में मेरे पूज्य पिता के ऊपर झूठा हवाला कांड किया, उस समय क्या हुआ? और आज जब मैंने अतिथि विद्वानों और किसानों की बात उठाई और मंदसौर में किसानों के ऊपर केस लगी, जो आवाज मैंने उठाई, और मैंने कहा कि जो वचनपत्र में है, उसे पूरा नहीं किया गया तो उसके लिए सड़क पर उतरना होगा। सिंधिया परिवार सत्य के पथ पर चलता है, मूल्य पर चलता है, सिंधिया परिवार को जब ललकारा जाता है तो सिंधिया परिवार जग से भी लड़ सकता है।”

जनसभा के दौरान सिंधिया ने कहा कि आज यह उनका सौभाग्य है कि जिस दल को अपने पसीने और पूँजी के साथ उनकी दादी ने स्थापित किया, जिस दल में 26 साल की उम्र में पहली बार जनसेवा का पथ अपनाकर उनके पूज्य पिता जी चले थे आज उसी दल में ज्योतिरादित्य सिंधिया प्यार लेकर आया है।

उन्होंने जनता से कहा कि वो विश्वास रखें कि वो जो केवल एक चीज अपने साथ लेकर आए हैं वो उनकी मेहनत है और उनका लक्ष्य लोगों के दिल में स्थान पाना है। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा, “मैं विश्वास दिलाता हूँ कि जहाँ आपका एक बूंद पसीना टपकेगा, वहाँ ज्योतिरादित्य 100 बूंद पसीना टपकाएँगे।”

बागी विधायकों को बेंगलुरु मनाने पहुँचे कमलनाथ के मंत्रियों ने पुलिस से की धक्का मुक्की, हुई तीखी झड़प

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कॉन्ग्रेस छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के बाद से ही मध्य प्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल का दौर जारी है। इसी बीच बेंगलुरु में सिंधिया समर्थित विधायक मंत्रियों से मिलने पहुँचे कमलनाथ के दो मंत्रियों की वहाँ सुरक्षा में मौजूद पुलिसकर्मियों से तीखी नोकझोंक के बाद झड़प हो गई। इस दौरान पुलिस ने कॉन्ग्रेस के दोनों मंत्रियों को हिरासत में ले लिया। हालाँकि, दोनों को राजनीतिक दवाब के चलते बाद में छोड़ दिया गया।

दरअसल, बेंगलुरु के रिसॉर्ट में ठहरे सिंधिया समर्थक मंत्रियों-विधायकों से मिलने के लिए गुरुवार को कमलनाथ सरकार के दो मंत्री जीतू पटवारी और लाखन सिंह पहुँचे थे। इस दौरान वहाँ सुरक्षा में तैनात पुलिस के साथ कॉन्ग्रेस के दोनों मंत्रियों की पहले तो बागी विधायकों से मिलने को लेकर नोकझोंक हुई इसके बाद यह नोकझोंक तीखी झड़प में बदल गई। इस दौरान पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों मंत्रियों को हिरासत में ले लिया। ये दोनों ही मंत्री जबरन बागी विधायकों से मिलने की कोशिश कर रहे थे। इस पर कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा के दबाव में उसके दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल इन मंत्रियों के साथ विधायक मनोज चौधरी के पिता नारायण चौधरी भी मौजूद थे।

उधर मध्य प्रदेश में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने 6 और विधायकों को नोटिस जारी कर दिया है, जिसे मिलाकर अब तक कुल 13 विधायकों को नोटिस जारी किया जा चुका है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी अभी तक 19 विधायकों के इस्तीफे मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने यह भी कहा सारी कार्रवाई नियम और प्रक्रिया के तहत की जा रही है। पक्ष-विपक्ष कुछ भी हो, मैं निष्पक्ष हूँ।

आपको बता दें कि 9 मार्च को कॉन्ग्रेस से इस्तीफा देने के बाद 12 को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जेपी नड्डा की मौजूदगी में बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद बीजेपी ने सिंधिया को मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया। वहीं दूसरी ओर सिंधिया समर्थित 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद से कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मँडरा रहे हैं।

कत्ल से पहले उतारे गए थे कपड़े; काला कपड़ा डालकर खींचकर ले गए थे IB अधिकारी अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के घर की तरफ: दिल्ली पुलिस

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने पाँच नाम वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया है। इसका नाम सलमान उर्फ हसीन उर्फ नन्हें उर्फ मोमिन उर्फ मुल्ला है।

सलमान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कुछ अहम जानकारियाँ भी मिली हैं जिनमें बताया जा रहा है कि आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को मारने से पहले उनके ऊपर काला कपड़ा डाला गया था। इसके बाद उन्हें खींचकर आम आदमी पार्टी नेता तरीक हुसैन के घर की ओर ले जाया गया था। यही नहीं, उनकी हत्या करने से पहले उनके कपड़े भी निकाल लिए गए थे।

ताहिर हुसैन मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी का पार्षद है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय जाँच एजेंसी ने हुसैन के खिलाफ इंटेलीजेंस ब्यूरो (आइबी) के अधिकारी की हत्या का आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया है। हुसैन इस समय दिल्ली पुलिस की हिरासत में है।

गौरतलब है कि छब्बीस वर्षीय IB अधिकारी अंकित शर्मा के परिवार ने हत्या का आरोप आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन पर लगाया है। अंकित शर्मा 25 फरवरी को लापता हो गए थे। इसके ठीक अगले दिन उनका शव उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित चाँद बाग इलाके में उनके घर के पास एक नाले से मिला था।

अंकित शर्मा के भाई और पिता के बयान के आधार पर AAP नेता ताहिर हुसैन पर हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद आम आदमी पार्टी ने उसे पार्टी से भी निलंबित कर दिया था। बाद में पुलिस ने इस मामले में ताहिर हुसैन को गिरफ्तार किया। हालाँकि, ताहिर हुसैन ने इस आरोपों को निराधार बताया है।

ताहिर हुसैन के साथ ही हिंसा फैलाने के अरोपित रियासत अली और दिलबर नेगी के हत्यारोपित शाहनवाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इससे पहले कोर्ट ने रियासत अली को पुलिस रिमांड पर भेजा था। केंद्र सरकार दिल्ली दंगों में शामिल लोगों की पहचान तत्परता से कर रही है और दोषियों की गिरफ्तारियाँ कर रही है।

जो सोचते हैं कि वो बच गए, हम उन्हें पाताल से भी खोजकर सजा दिलाएँगे: दिल्ली दंगों पर अमित शाह

गृहमंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी कि दिल्ली दंगों में चर्चा से भागें। अमित शाह ने कहा कि इस चर्चा के माध्यम से यह संदेश न जाए कि हम कुछ चीजों को बचाना चाहते थे या भागना चाहते थे।

बीते दिन लोकसभा में दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों पर दिए सवालों के जवाब के बाद आज गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में दिल्ली हिंसा पर विपक्षियों के सवालों के जवाब दिए। गृहमंत्री अमित शाह ने सबसे पहले राज्यसभा में कहा, “मैं सदन को और सदन के माध्यम से देश को विश्वास दिलाता हूँ कि दंगो के लिए जिम्मेदार लोग और दंगों का षड्यंत्र करने वाले लोग, चाहे वे किसी भी जाति, मजहब या पार्टी के हो, उन्हें किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा।” गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दोषियों पर पारदर्शी और वैज्ञानिक जाँच के माध्यम से मुकदमा चलाया जाएगा और उन्हें दंडित किया जाएगा, ताकि वे लंबे समय तक कानून का भय महसूस करें।

गृह मंत्री अमित शाह के भाषण की कुछ प्रमुख बातें:

  • दंगों के उपरांत अब तक 700 FIR दर्ज की गई है और जिसने भी FIR दर्ज करवाई है, उसे रजिस्टर करने से पुलिस ने कहीं भी ना नहीं की है।
  • हिंसा को भड़काने वाले फेशियल रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर द्वारा 1,900 से अधिक चेहरों को मान्यता दी गई है। ये लोग आगजनी कर रहे थे और बुनियादी ढाँचे को तोड़ रहे थे।
  • चेहरा पहचान प्रक्रिया में आधार डेटा का उपयोग नहीं किया गया है, केवल ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर आईडी डेटाबेस का उपयोग किया गया है। हालाँकि, पुलिस को अपराधियों को बुक करने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करने का अधिकार होना चाहिए और गोपनीयता भंग करने के नाम पर रोका नहीं जाना चाहिए।
  • दिल्ली में कई सारी घटनाओं में से निजी हथियार चलने की भी घटना आई है।
  • ऐसे 49 मामले दर्ज किए गए हैं और 52 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
  • दंगों में जो हथियार उपयोग हुए थें उनमें से लगभग सवा सौ हथियार जब्त कर लिए गए हैं।
  • 25 फरवरी की सुबह से ही दिल्ली के हर थाने में शांति समितियों की बैठक बुलाना शुरू कर दी गई थी।
  • जिनकी पहचान हो चुकी है, उनकी सारी डिटेल हमारे पास उपलब्ध हो चुकी है।
  • ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए 40 से अधिक विशेष दलों का गठन किया है जो रात-दिन गिरफ्तार करने का काम कर रही है।
  • इन दंगों में 52 भारतीयों की मृत्यु हुई है, 526 घायल हैं, 371 की दुकाने जली हैं और 142 भारतीयों के घर जले हैं।
  • सोशल मीडिया के माध्यम से लगभग 60 ऐसे अकाउंट मिले, जो 22 फरवरी को शुरू हुए और 26 फरवरी को बंद हो गए।
  • अगर ये लोग सोचते हैं कि अकाउंट बंद करके वो बच जाएँगे, तो मैं बता दूँ कि वो जहाँ पर भी हैं पुलिस उनको ढूँढ निकालेगी।
  • इस दंगे के दौरान बहुत सारी संपत्ति जली। लोगों के पसीने की कमाई जलकर राख हो गई।
  • जिन लोगों ने सार्वजनिक संपत्ति, गाड़ियाँ और दुकानें जलाई हैं, उनको वीडियोग्राफी के आधार पर पकड़ कर उनकी संपत्ति को जब्त किया जाएगा।
  • अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा को दोषी ठहराया गया जिनका बयान 20 जनवरी और 28 जनवरी का था, जबकि हिंसा 23 फरवरी को शुरू हुई।
  • कपिल मिश्रा को अमानतुल्ला खान, शरजील इमाम और ताहिर हुसैन के कृत्यों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। जबकि हिंसा का जिम्मेदार कोई और लोग है।
  • मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि अगर वो सोचते हैं कि हम बच गए, तो वो गलत हैं, हम उन्हें पाताल से भी खोजकर निकालेंगे और सजा दिलाएँगे।
  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी कि दिल्ली दंगा में चर्चा से भागे। अमित शाह ने कहा कि इस चर्चा के माध्यम से यह संदेश न जाए कि हम कुछ चीजों को बचाना चाहते थे या भागना चाहते थे।
  • लोकतंत्र इस स्टेज पर आज पहुँचा है जहाँ आज कोई भी चाहे तो वह नहीं छुपा सकता है। शाह ने कहा कि कहीं दंगा और न हो जाए, दंगाईयों को पकड़ा जाए और समुचित इलाज हो इसलिए हमने सदन में चर्चा को लेकर थोड़ा वक्त माँगा था।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब ये पूछा गया कि जब दंगा हो रहा था तो क्या किया गया। इसके साथ ही, कई तरह की लोगों की आशंकाएं मन में थी। ऐसे में जो अब तक कार्रवाई हुई वह सदन में रखना चाहता हूँ। इस केस में 700 एफआईआर दर्ज कर ली गई है। 2647 गिरफ्तारी हुई है और वो सभी गिरफ्तारी साइंटिफिक तरीके से की जा रही है।

दंगाइयों की पहचान के लिए आधार कार्ड के इस्तेमाल के आरोप पर अमित शाह ने साफ किया कि लोगों की पहचान के लिए ड्राईविंग लाइसेंस जैसी चीजों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी खबर कुछ जगहों पर चलाई गई कि इसमें फेस की पहचान के लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यह गलत है। अमित शाह ने कहा कि इस हिंसा के दौरान लोगों ने देशी हथियारों का इस्तेमाल किया है। ऐसे में इन सभी चीजों की जाँच की जा रही है।

अमित शाह ने कहा कि जाँबाज आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा और दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्सटेबल रतनलाल के हत्यारे को पकड़कर उसे हिरासत में ले लिया गया है। गृह मंत्री ने आगे कहा कि किसी के भी मन में यह शंका नहीं रहना चाहिए कि जो आरोप हम पर लग रहे हैं वो सही नहीं है, इसलिए सदन में जवाब दे रहा हूँ। दंगों को सिर्फ 4 प्रतिशत क्षेत्र तक दिल्ली पुलिस ने सीमित रखा।

अमित शाह ने कहा कि दिल्ली पुलिस की यह सबसे बड़ी सफलता है कि उसने दिल्ली के सिर्फ चार प्रतिशत हिस्से तक इस दंगा को सीमित रखा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के बाकी कई इलाकों में दोनों मजहब साथ रहते हैं, लेकिन कहीं से भी ऐसी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई। उन्होंने कहा कि केवल 36 घंटे तक ही यह दंगा हुई है। शाह ने कहा कि दोनों ओर से उकसावपूर्ण घटना के बाद इस दंगा को सिर्फ 36 घंटे में काबू पा लिया गया, जो दिल्ली पुलिस की सबसे बड़ी कामयाबी थी।

दुखद खबर: कोरोना वायरस को चीन पर ‘अल्लाह का कहर’ बताने वाले ईरानी इमाम खुद हुए कोरोना वायरस के शिकार

कोरोना वायरस का संक्रमण धीरे-धीरे कर पूरे विश्व को अपनी चपेट में लेते जा रहा है। चीन और इटली के बाद ईरान में भी इससे प्रभावित और मरने वालों कि संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ईरान में कोरोना वायरस पीड़ितो की संख्या 6 हज़ार को पार कर चुकी है। लेकिन विडंबना देखिए कि इन पीड़ितों में से एक ईरानी ईमाम वो भी है, जिसने हाल ही में कोरोना वायरस को चीन पर ‘अल्लाह का अजाब’ (अल्लाह का कहर) बताया बताया था।

इराक मूल के ईरान में रहने वाले इस्लामिक नेता अयातुल्ला सैयद हादी-अल-मुदारिसी ने 28 फरवरी को MEMRI-TV पर दिए एक वीडियो संदेश में चीन पर निशाना साधते हुए कहा था कि- नि:संदेह अल्लाह ने चीन को ये सज़ा दी है, चीन के उन कारनामों के लिए, जिसमें वो मुस्लिम औऱ इस्लाम के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि जाहिर सी बात है कि ये कोरोना वायरस चीन पर अल्लाह का अज़ाब है।

देखिए ईरानी इमाम द्वारा जारी किया गया वीडियो-

इस वीडियों में अयातुल्ला सैयद हादी-अल-मुदारिसी कह रहे हैं, “चीन में एक अरब से ज्यादा लोग हैं। वहाँ की सरकार ने एक मिलियन से ज्यादा मुस्लिमों कैद में रखा हुआ है। वहाँ के पत्रकार मुस्लिम महिलाओं के नकाब का मज़ाक उड़ा रहे हैं। मुस्लिमों को जबरन पोर्क खिलाया जा रहा है और शराब पिलाई जा रही है। आज अल्लाह ने उनके तमाम लोगों को निकाब (मास्क) पहनने पर मज़बूर कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अल्लाह उनको इसकी सज़ा दे रहा है।”

फिलहाल दुखद खबर यह है कि अयातुल्ला सैयद हादी-अल-मुदारिसी आज खुद कोरोना वायरस के शिकार बन गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनको अलग-थलग करके रखा गया है। जहाँ उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है।

ज्ञात हो कि चीन के वुहान से संक्रमित हुआ कोरोना वायरस कोई अल्लाह का कहर नहीं बल्कि एक वायरस द्वारा हुआ संक्रमण है। इसके संक्रमण के दायरे में हॉलीवुड की मशहूर हस्ती टॉम हैंक्स से लेकर अन्य कई बड़ी हस्तियाँ भी हो चुकी हैं। हर देश की सरकार इससे बचाव के लिए लगातार सूचना जारी कर रही हैं और अफवाहों से बचने का भी सन्देश दे रही हैं।

‘मीडिया के जिहादी! हिन्दू आतंकवाद ठीक, जिहाद से भड़क गए दरबारी’- सुधीर चौधरी ने ली राजदीप की क्लास

समाचार चैनल ज़ी न्यूज़ द्वारा बुधवार (मार्च 11, 2020) को जम्मू-कश्मीर में हो रहे ‘जमीन जिहाद’ पर चर्चा ने तमाम पत्रकारों और कुछ सोशल मीडिया विचारकों को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया। राजदीप सरदेसाई इन्हीं में से एक ऐसे व्यक्ति थे जो ज़ी न्यूज़ पर चैनल के एडिटर सुधीर चौधरी के इस शो पर ‘ज्ञान’ देने से खुद को नहीं रोक पाए। लेकिन इसके बदले में सुधीर चौधरी ने भी बिना कोई कसर छोड़े ऐसा जवाबी हमला दिया, जिसने राजदीप की बोलती बंद कर दी है।

राजदीप सरदेसाई ने सुधीर चौधरी के शो पर सवाल खड़े करते हुए आज सुबह ही ट्वीट में लिखा था- “इस चैनल द्वारा दैनिक आधार पर फैलाई जा रही अकथनीय सांप्रदायिक घृणा चौंकाने वाली, शर्मनाक और खतरनाक है। और यह एक चैनल है, जिसका समर्थन सरकार का ही एक सांसद करता है! क्या सत्ता में मौजूद कोई व्यक्ति इस पर ध्यान देगा, और इस गंदगी को रोक पाएगा? या इसे आगे बढ़ाएगा?”

कुछ ही घंटों बाद इस ट्वीट के जवाब में सुधीर चौधरी ने राजदीप के ट्वीट को ही शेयर करते हुए सीधे और स्पष्ट शब्दों में लिखा- “हमने जेहाद का सच दिखाया तो ‘मीडिया के जेहादी’ भड़क गए। गुजरात दंगो को बेच बेच कर पद्म पुरस्कार पाने वाले ये दरबारी पत्रकार पिछली सरकारों के एजेंट बनकर दर्शकों को झूठ दिखाते रहे।अब सच इनसे देखा नहीं जा रहा। हैरान हूँ, इन्हें अब भी रोज़गार मिल जाता है। हिंदू आतंकवाद ठीक, जेहाद ग़लत?”

दरअसल, सुधीर चौधरी ने ज़ी न्यूज़ पर ही एक शो के दौरान जम्मू-कश्मीर में ‘कमजोर कानूनों’ की आड़ में चल रहे जमीन घोटालों के सच को ‘जमीन जिहाद’ के नाम से सामने लाया। जिसके बाद सोशल मीडिया पर इस शो के पक्ष और विपक्ष, दोनों तरह से चर्चा तेज हो गई। इस शो में सुधीर चौधरी ने सवाल उठाए थे कि हिंदू बहुल जम्मू की ज़मीन पर करीब 90% मामलों में समुदाय विशेष को ही कब्ज़ा क्यों दिया गया? उन्होंने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में आशंका जताई की जम्मू की डेमोग्राफी बदलने के लिए ही शायद सरकार ने ऐसे कानून बनाए जिनका फायदा कई लोगों ने उठाया।

अपने चैनल के शो ‘डीएनए’ में सुधीर चौधरी ने जम्मू-कश्मीर में आबादी के जरि जम्मू क्षेत्र के इस्लामीकरण के प्रयास पर खुलासे किए। सुधीर चौधरी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “रोशनी एक्ट एक बहुत बड़ा घोटाला था जिसमें अवैध कब्जा करने वालों को बेशकीमती ज़मीनें कौड़ियों के भाव बेच दी गयी थीं। फिलहाल ये मामला जम्मू-कश्मीर के हाई कोर्ट में लंबित है किन्तु ये एक बहुत बड़ी साजिश थी। हिन्दू बहुल जम्मू में अवैध कब्जे वाली सरकारी ज़मीन का मालिक केवल एक ‘धर्म विशेष’ के लोगों को बनाया गया।”

ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण के बाद सामने आएगा सच?: 18 मार्च को होगी अगली सुनवाई

ज्ञानवापी मस्जिद के पक्षकारों का दावा था कि इलाहबाद हाईकोर्ट से एक आदेश की कॉपी न मिल पाने के कारण निचली अदालत में उनका मामला कमजोर पड़ रहा है। अब उस आदेश की कॉपी मिल गई है। ये कॉपी वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत में 18 मार्च को पेश की जाएगी और साथ ही मस्जिद पक्ष द्वारा माँग की जाएगी कि इस मामले की सुनवाई को तत्काल रोक दी जाए। मस्जिद के पक्षकारों का दावा है कि उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक़ निचली अदालत में इसकी सुनवाई नहीं हो सकती।

मस्जिद के वकील इस कॉपी को 18 मार्च को फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश कर मामले की सुनवाई निचली अदालत में रोके जाने की माँग करने की तैयारी में जुट गए हैं। इस सम्बन्ध में बयान देते हुए अंजुमन इंतजामिया मस्जिद के जॉइंट सेक्रेटरी सैयद यासीन ने कहा:

“सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत के समक्ष यह माँग रखी गई थी कि इस मामले पर हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा रखी है, इसलिए इसकी सुनवाई निचली अदालत में नहीं की जा सकती। इसे 4 फरवरी को सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत ने रिजेक्ट कर दिया था। 4 फरवरी के इस आदेश को 26 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया था। इसीलिए, अब यह मामला निचली अदालत में नहीं चल सकता। हम इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी 18 मार्च को सुनवाई की निर्धारित तारीख पर सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत में पेश कर मामले की सुनवाई रोके जाने की माँग करेंगे।”

मंदिर पक्ष द्वारा पुरातत्व विभाग द्वारा पूरे ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अपील की गई है। एक बार फिर से इस मामले की सुनवाई तो टल गई है लेकिन देश भर में मामले की चर्चा चल रही है। फ़िलहाल आशुतोष तिवारी की अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही है। हिन्दू पक्ष ने इस मंदिर की महत्ता को उजागर करते हुए अपनी दलील में बताया था कि 15 वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर के कार्यकाल में हिन्दू राजाओं मान सिंह और टोडरमल द्वारा इस मंदिर के पुनरोद्धार का कार्य संपन्न कराया गया था।

हिन्दू पक्ष का ये भी मानना है कि इसके पुरातात्विक और ऐतिहासिक साक्ष्य अभी भी मौजूद हैं, जो सामने आएँगे। सर्वेक्षण के लिए राडार तकनीक का इस्तेमाल करने की माँग की गई है। आशा है कि खुदाई के बाद जो रिपोर्ट आएगी, उससे मंदिर पक्ष का दावा और पुख्ता हो जाएगा। जबकि मस्जिद पक्ष लगातार सुनवाई को रोकने और इसमें व्यावधान पैदा करने में लगा हुआ है।

इससे पहले अखिल भारतीय संत समिति ने अयोध्या विवाद की तर्ज पर श्रीकाशी ज्ञानवापी मुक्ति यज्ञ समिति का गठन किया था। मथुरा में आयोजित समिति की राष्ट्रीय कार्य परिषद की बैठक में काशी और मथुरा विवाद पर हर तरह का संघर्ष करने का फैसला किया गया था। बैठक में तय किया गया था कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मुक्ति के लिए रामजन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति की तर्ज पर इसके लिए भी एक मुक्ति यज्ञ का गठन किया जाए। भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी को इसका अध्यक्ष बनाया गया है।

अस्थाई मंदिर में विराजमान होंगे रामलला: 24 मार्च को प्राण प्रतिष्ठा, पूजा-अर्चना में शामिल होंगे सीएम योगी

श्रीराम मंदिर जन्मभूमि विवाद को लेकर पिछले साल आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता तो साफ हो गया है, लेकिन उसे मूर्त रूप देने में जिला प्रशासन से लेकर पूरा अमला लगा हुआ है। राम मंदिर निर्माण का कार्य सही से और बेहतर ढंग से किया जा सके इसके लिए रामलला की मूर्ति को एक अस्थाई मंदिर में रखने का निर्णय लिया गया। माना जा रहा है कि 24 मार्च को प्राण प्रतिष्ठा के साथ रामलला को अस्थाई मंदिर में विराजमान कर दिया जाएगा। इस कार्यक्रम में सीएम योगी भी हिस्सा लेंगे। योगी के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयारियों में जुट गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 24 मार्च को अयोध्या के दौरे पर रहेंगे। सीएम योगी राम जन्मभूमि परिसर में बन रहे रामलला के अस्थाई मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। इसके बाद अयोध्या में ही रात्रि प्रवास के बाद सीएम योगी 25 मार्च की सुबह नवरात्र के प्रथम दिन रामलला के नए अस्थाई मंदिर में ही रामलला का पूजन अर्चना करेंगे। वहीं राम मंदिर निर्माण को लेकर रामलला के गर्भगृह को शिफ्ट करने की प्रक्रिया लगभग अंतिम दौर में है। दरअसल, मानस भवन के गैलरी में बने फाइबर के मंदिर में संत धर्माचार्य वैदिक मंत्रों के बीच रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। इसके बाद रामलला अपने नए अस्थाई मंदिर में विराजमान होंगे। इस कार्यक्रम में राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और ट्रस्ट के अन्य सदस्यों के भी मौजूद रहने की उम्मीद है।

वहीं सीएम योगी के रामलला के पूजन के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए नए अस्थाई मंदिर को रामलला के दर्शन-पूजन के लिए खोल दिया जाएगा। अयोध्या जिला प्रशासन और राम जन्मभूमि क्षेत्र के ट्रस्टी ने रामलला को शिफ्ट करने के लिए तैयारियाँ तेज कर दी हैं। बताया जा रहा है कि अब भक्तों को नजदीक से रामलला के दर्शन होंगे इसके लिए रास्ते की दूरी को कम किया गया है। आपको बता दें कि राम मंदिर पर सुप्रीम का फैसला आने के बाद राम जन्म भूमि की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। वहीं राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट की दूसरी बैठक 4 अप्रैल को तय है। माना जा रहा है कि आगामी बैठक में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन की तिथि सुनिश्चित की जा सकती है।

मुगलों को धूल चटा दिल्ली में भगवा लहराने वाले सिंधिया, दिग्विजय के ‘गद्दार’ पूर्वज को सबक सिखाने वाले सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉन्ग्रेस क्या छोड़ी, कॉन्ग्रेस की पूरी फौज उनके परिवार की कुंडली खगालने लगी। उनके विकिपीडिया से छेड़छाड़ की गई। सन् 1957 की उस घटना का हवाला दे उन्हें ‘गद्दार’ कहने की कोशिश की गई जिस पर इतिहासकार एकमत नहीं हैं। लेकिन, हम आपको आज उस इतिहास में ले चलते हैं जो सन् 57 से भी पुराना है। जिसके लिखित और प्रमाणिक दस्तावेज हैं। जिसे अपनी सत्यता की पुष्टि के लिए लिबरल वामपंथियों के प्रभाव वाले विकिपीडिया प्रोपेगेंडा की दरकार नहीं है। इस इतिहास की रोशनी में आप सिंधिया राजपरिवार और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के राघोगढ़ घराने की अदावत को भी बेहतर तरीके से समझ पाएँगे। जान सकेंगे कि क्यों ज्योतिरादित्य और उनके दिवगंत पिता माधराव सिंधिया का कॉन्ग्रेस में सीढ़ी चढ़ते जाना दिग्विजय को खटकता रहा है। मध्य प्रदेश के राजनीतिक उठापठक के बीच यह जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि ज्योतिरादित्य के कॉन्ग्रेस से मोहभंग का सबसे बड़ा कारण पर्दे के पीछे दिग्विजय सिंह के तीन-तिकड़म ही बताए जाते हैं।

आज याद दिलाया जा रहा है कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सिंधिया के पूर्वजों ने अंग्रेजों का साथ दिया था। लेकिन, क्या किसी खानदान में किसी एक व्यक्ति की भूल के कारण पूरी वंशावली को बदनाम किया जा सकता है? ज्योतिरादित्य सिंधिया के अंदर महादजी शिंदे का भी तो रक्त है, जिन्होंने पानीपत की तीसरी लड़ाई के एक दशक बाद दिल्ली जीत कर पूरे हिंदुस्तान पर मराठा साम्राज्य का झंडा लहराने में अहम किरदार निभाया था। महादजी शिंदे एक ऐसा नाम है, जिनकी वीरता की गाथाओं के सामने ज्योतोरादित्य सिंधिया को गाली देने वाले एकदम तुच्छ नज़र आते हैं।

महादजी शिंदे के पिता राणोजी राव शिंदे ग्वालियर के सिंधिया राजवंश के संस्थापक थे। उत्तर भारत में मराठा परचम लहराने का श्रेय सिंधिया राजवंश को ही दिया जाता है। पेशवा के सबसे विश्वस्त सिपहसालारों में से एक थे वे। सम्पूर्ण भारतवर्ष पर अपना अधिपत्य कायम करने वाला मराठा महासाम्राज्य जब अपने शबाब पर था तो इसके तीन प्रमुख स्तम्भ थे- पेशवा माधवराव, उनके मंत्री नानाजी फडणवीस और तीसरे सिंधिया महादजी। ये वो समय था जब मुग़ल भी मराठाओं के तलवे चाट रहे थे और दिल्ली भी पुणे के इशारे पर नाचती थी।

सन् 1771 में दिल्ली पर भगवा फहराने वाले के खानदान को सिर्फ़ क्या इसीलिए गाली दी जानी चाहिए क्योंकि उनके वंश में कथित तौर पर कोई एक अंग्रेजों का साथी निकल गया? इतिहास 1857 से तो शुरू नहीं होता। राम मंदिर मामले में भी वामपंथियों का इतिहास बाबरी मस्जिद बनने से ही शुरू होती है। महादजी शिंदे ने 1771 में दिल्ली की तरफ कूच किया और वहाँ भगवा लहराया। इसके बाद उन्होंने मिर्ज़ा जवान बख्त को दिल्ली की गद्दी के लिए चुना और उसके सामने ही मुगलों की सारी सम्पत्ति जब्त की।

हालाँकि, बाद में मुग़ल बादशाह शाह आलम मराठाओं के तलवे चाटने लगा। जब बादशाह ने सारी शर्तें मान ली तो महादजी ने उसे दिल्ली की गद्दी वापस दे दी और पानीपत के युद्ध में जो मराठाओं का खोया गौरव था, उसे हासिल किया। इसके बाद मराठा का एक ही दुश्मन बचा और वो था रोहिल्ला शासक। रोहिल्ला नजीब ख़ान ने सिंधिया खानदान को बड़ा नुकसान पहुँचाया था। क्रोधित महादनी ने नजीब ख़ान की कब्र को तहस-नहस कर डाला। माधवराव पेशवा जब तक ज़िंदा रहे, महादजी उनके विश्वस्त बने रहे। पेशवा पुणे में बैठ कर अन्य कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित रख सकते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि उत्तर भारत का कामकाज देखने के लिए सिंधिया परिवार है। उन्होंने अपना ध्यान निज़ाम और हैदर को सबक सिखाने में लगाया।

उस दौरान राघोगढ़ के राजा थे बलवंत सिंह। पहले तो वो पेशवा के सामने सिर झुकाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने गद्दारी का रास्ता चुना। जब अंग्रेजों और महादजी शिंदे के बीच युद्ध हुआ (पहला मराठा-अंग्रेजी युद्ध), तब बलवंत ने ब्रिटिश का पक्ष लिया। गुस्साए महादजी शिंदे ने 1785 में अम्बाजी इंगले के नेतृत्व में एक भारी सेना राघोगढ़ भेजी और गद्दारी का सबक सिखाया। राजा बलवंत सिंह और उनके बेटे जय सिंह को बंदी बना लिया गया। इसके बाद जयपुर और जोधपुर के राजपुर घराने लगातार महादजी पर दबाव बनाने लगे कि वो राघोगढ़ राजपरिवार को पुनर्स्थापित करें। दोनों राजघराने राघोगढ़ राजपरिवार के रिश्तेदार थे। महादनी ने आखिर में उनकी माँगें मान ली।

बाद में दौलत राव सिंधिया ने भी राघोगढ़ को हराया और उसे ग्वालियर स्टेट के अंतर्गत ले आए। उस समय तक अंग्रेजों और ग्वालियर के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके थे। जय सिंह अंग्रेजों के प्रति काफ़ी अच्छी राय रखता था। कहता था कि अंग्रेज जहाँ भी जाएँगे, सफल होंगे और सिंधिया का विनाश हो जाएगा। लेकिन, सच्चाई ये है कि महादजी शिंदे और दौलत राव सिंधिया, दोनों ने ही अपने-अपने समय में राघोगढ़ के राजाओं को परास्त किया। ये वही राजघराना है, जिससे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ताल्लुक रखते हैं।

राघोगढ़ राजपरिवार के वंशज आजादी के बाद भी सिंधिया राजघराने से मिली हार का ठीस नहीं भूल पाए। इसलिए कहा जाता है कि सियासत में उन्हें जब भी मौका मिला सिंधिया घराने के लोगों को किनारे धकेलने का प्रयास किया। चाहे 1993 में माधवराव सिंधिया को पीछे छोड़ दिग्विजय सिंह का मुख्यमंत्री बनना हो। या फिर 2018 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को दरकिनार करने के लिए कमलनाथ का समर्थन करना। यही कारण है कि कमलनाथ के सीएम रहते दिग्विजय सिंह को ‘सुपर सीएम’ कहा जाता रहा। कई मंत्रियों का कहना था कि पर्दे के पीछे से सरकार वही चला रहे हैं।

(सोर्स 1: The Great Maratha Mahadaji Scindia By N. G. Rathod)
(सोर्स 2: History of the Marathas By R.S. Chaurasia)

दिलबर नेगी का भी एक सपना था, उसका भी एक परिवार था जो दिल्ली हिन्दू-विरोधी दंगों में जल गया!

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में क्रूरता से मारे गए लोगों में से एक नाम उत्तराखंड के रहने वाले महज बीस साल के दिलबर नेगी (दिलावर नेगी) का भी था। दंगों में हुई कुछ क्रूर हत्याओं में से दिलबर नेगी की हत्या भी एक है। उत्तराखंड की कुछ कड़वी सच्चाइयों में से एक यह भी है कि आज भी सुदूर गाँव के छोटे बच्चों को भी रोजगार और पढ़ाई के लिए पहाड़ के अपने पैतृक गाँव छोड़कर शहरों में जाना होता है। आर्थिक रूप से गरीब परिवार की मदद करने के लिए फ़ौज में भर्ती होने के अपने सपने को छोड़कर बीस साल के दिलबर नेगी को अभी दिल्ली आए हुए कुछ ही महीने हुए थे।

ऑपइंडिया की दिलबर के परिवार से बातचीत

मृतक दिलावर नेगी (आधार कार्ड के अनुसार) को घर में दिलबर बुलाते थे। उनके घर में 2 भाई और 2 बहनें हैं। घर पर एक छोटा भाई देवेंद्र भी है, जिन्होंने ऑपइंडिया के साथ बातचीत में परिवार का हाल साझा किया। दिलबर के पिता पिछले 8 साल से बीमार हैं और बच्चे ही पारम्परिक खेती करते आ रहे हैं। दिलबर के घरवालों ने बताया कि भारतीय सेना में जाना दिलबर का सपना था। आखिरी बार जब फ़ौज की भर्ती आई थी तो दिलबर दौड़ में सेलेक्ट भी हो गया था, लेकिन लम्बाई कम होने के कारण उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर होना पड़ा था। हालाँकि, दिलबर के हौंसले तब भी बुलंद थे और वो फिर से सेना में भर्ती होने की कोशिश करने वाले थे।

दिलबर नेगी ने अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए दिल्ली में एक हलवाई की दुकान में नौकरी शुरू की थी। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के दिलबर ने 12वीं पास करने के बाद घर छोड़ दिया था। वो दिल्ली गया और शाहदरा के चमन पार्क में एक दुकान में काम करने लगा था। कमाई का कुछ हिस्सा वो घर भेज दिया करता था और जितना बचना था उससे अपना खर्च चलाता था। लेकिन 24 फरवरी की रात दिलबर की जिंदगी की आखिरी रात साबित हुई, उस रात में अचानक सब कुछ बदल गया। दंगों की आग में दिलबर को जलाया गया। दिलबर नेगी की हत्या में आरोपित मोहम्मद शाहनवाज को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। उसने जलती हुई दुकान से भाग रहे दिलबर के हाथ-पैर काटकर तड़पते हुए जलती हुई आग में झोंक दिया था।

इस घटना के कुछ देर बाद दंगों के बीच ही दिलबर के दोस्त श्याम के साथ ऑपइंडिया की बात हुई थी। श्याम ने ही ऑपइंडिया से बातचीत में दिलबर नेगी के साथ हुई क्रूरता के बारे में अवगत कराया था। उस समय दिलबर नेगी के साथी श्याम दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में अपने उपचार के लिए भर्ती थे। श्याम भी उत्तरखंड के पौड़ी गढ़वाल के ही रहने वाले हैं। दंगों के समय श्याम पर भी हमला हुआ।

24 फरवरी की रात को जब दिलबर नेगी दुकान की बेकरी के गोदाम में सो रहा था, उसी समय दंगाइयों ने गोदाम में आग लगा दी। दंगाइयों ने दिलबर के हाथ-पैर काटे और अधमरी अवस्था में ही उसे आग के हवाले कर दिया। दिलबर के साथी श्याम का कहना था कि दंगाइयों ने उस पर भी हमला किया, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गया। होश आने पर उसने अपने आप को गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती पाया। श्याम पौड़ी गढ़वाल के ईडा गाँव का ही रहने वाला है।

पौड़ी जिले से ही हैं CDS बिपिन रावत और NSA अजीत डोभाल, भारतीय सेना को लेकर है युवाओं में जूनून

गौरतलब है कि इस समय भारत के CDS जनरल बिपिन रावत और NSA अजीत डोभाल भी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से ही हैं। उत्तराखंड में युवाओं के अंदर भारतीय सेना के प्रति विशेष लगाव देखा जाता है। खासकर ग्रामीण वर्ग के युवा सुबह दौड़ लगाने से लेकर स्कूल में होने वाले खेलकूद में खूब प्रतिभाग करते हैं और इसके पीछे वो शान से भारतीय सेना में शामिल होने को अपना उद्देश्य बताते हैं। यही कारण है कि देवभूमि के साथ ही उत्तराखंड को वीरभूमि भी कहा जाता है। देश की आजादी से पहले जहाँ तीन विक्टोरिया क्रॉस सहित 364 वीरता पदक उत्तराखंड के नाम रहे हैं वहीं, आजादी के बाद भी उत्तरखंड के जवानों ने देश और सरहद की रक्षा में तत्परता से भाग लिया है। आजादी के बाद से अब तक यहाँ के बहादुरों ने एक परमवीर चक्र, छह अशोक चक्र, 13 महावीर चक्र, 32 कीर्ति चक्र सहित 1343 वीरता पदक अपने नाम किए हैं।

दिलबर नेगी के परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए विवरण

यदि आप भी मृतक दिलबर नेगी के परिवार की आर्थिक सहायता करना चाहते हैं तो दिलबर नेगी के पिता श्री गोपाल सिंह के बैंक खाते में सहायता राशि जमा कर सकते हैं। गोपाल सिंह (Gopal Singh) एसबीआई बैंक खाता (SBI Bank Account) विवरण इस प्रकार हैं-

एकाउंट संख्या – 32890125631
(शब्दों में– THREE,TWO,EIGHT,NINE,ZERO,ONE,TWO,FIVE,SIX,THREE,ONE)
IFSC : SBIN0007928
(शब्दों में – एसबीआई एन जीरो, जीरो, जीरो, सात, नौ, दो, आठ)