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समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं: इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फिर से विचार करने से किया इनकार, समीक्षा याचिकाओं को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 जनवरी 2025) को भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने पर विचार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्णय को चुनौती देने वाली समीक्षा याचिकाओं में कहा गया था कि सर्वोच्च न्यायालय समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं देने के अपने पुराने फैसले की समीक्षा करे। हालाँकि, शीर्ष न्यायालय ने इन याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया।

जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने चैंबर में समीक्षा याचिकाओं पर विचार किया। इसके बाद इन्हें खारिज कर दिया। अपने पुराने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी देने का कोई संवैधानिक आधार नहीं है। जुलाई 2024 में जस्टिस संजीव खन्ना ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

इसके बाद इन समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई के लिए एक नई पीठ का गठन किया गया था। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा अक्टूबर 2023 का फैसला सुनाने वाली मूल पीठ के एकमात्र सदस्य हैं, क्योंकि अन्य सभी सदस्य (सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एसके कौल, रवींद्र भट और हिमा कोहली) सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

समीक्षा पीठ ने कहा कि उसने उसने समलैंगिक विवाह पर पुराने निर्णयों को ध्यान से पढ़ा है और इन निर्णयों में कोई त्रुटि नहीं मिली। पीठ के आदेश में कहा गया है, “हमें रिकॉर्ड में कोई त्रुटि स्पष्ट नहीं मिली। हम आगे पाते हैं कि दोनों निर्णयों में व्यक्त किए गए विचार कानून के अनुसार हैं और इस तरह कोई हस्तक्षेप उचित नहीं है।”

दरअसल, 17 अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि यह विधायिका का मामला है। हालाँकि, बेंच के सभी जज इस बात पर सहमत थे कि भारत सरकार समलैंगिक रिश्ते में शामिल व्यक्तियों के अधिकारों की जाँच करने के लिए एक समिति का गठन करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से यह भी माना था कि समलैंगिक जोड़ों को हिंसा, जबरदस्ती या धमकी के बिना सहवास करने का अधिकार है। ऐसे संबंधों को विवाह के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता देने के लिए कोई निर्देश पारित करने से परहेज किया। तत्कालीन CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एसके कौल ने समलैंगिक जोड़ों के नागरिक संघ बनाने के अधिकार को मान्यता देने पर सहमत थे, लेकिन अन्य तीन न्यायाधीश असहमत थे।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कई समीक्षा याचिकाएँ दायर की गईं। इन याचिकाओं में समलैंगिक जोड़ों के साथ होने वाले भेदभाव को स्वीकार करने के बावजूद उन्हें कोई कानूनी सुरक्षा प्रदान नहीं करने के निर्णय को गलत ठहराया गया। उन्होंने तर्क दिया कि यह मौलिक अधिकारों को बनाए रखने और उनकी रक्षा करने के न्यायालय के कर्तव्य का परित्याग है।

इन याचिकाओं में यह भी तर्क दिया गया था कि निर्णय विरोधाभासी और स्पष्ट रूप से अन्यायपूर्ण है। न्यायालय ने माना कि सरकार द्वारा भेदभाव के माध्यम से याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है, लेकिन इस भेदभाव को प्रतिबंधित करने का तार्किक अगला कदम उठाने में विफल रहा।

पैसे लेकर अपनी ही बीवी का दोस्तों से करवाता था रेप, खुद सऊदी में बैठकर देखता था सेक्स वीडियो: फिरोजाबाद में बेटी से ही गंदा काम करता था अब्बा, निकाह रुकवाने को खाया जहर

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक शख्स ने अपनी बेटी की बारात आने पर आत्महत्या कर ली। उसकी बीवी ने आरोप लगाया है कि उसका शौहर नाबालिग बेटी के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया था। मृतक के खुद के भी दो वीडियो मिले हैं। इनमें से एक में वह बेटी के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और दूसरे में आपत्तिजनक बातें कह रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसका शौहर अपने दोस्तों से उसका रेप करवा रहा है। यह तीन वर्ष से जारी है। महिला का शौहर सऊदी अरब में रहता है।

बुलंदशहर में बीवी का ही रेप करवाता था शौहर

बुलंदशहर के गुलावठी की रहने वाली एक महिला ने सऊदी अरब में रहने वाले अपने शौहर पर दोस्तों से रेप करवाने और उसका वीडियो बनाने का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि एक बार उसने अपने दोस्तों को घर लाकर उसका रेप करवाया और वीडियो बनाया। बाद में यह दोस्त उनकी गैर-मौजूदगी में घर आने लगे और उसका रेप करने लगे। यह उसके वीडियो बनाकर शौहर को भेजते थे। महिला ने आरोप लगाया कि रेप करवाने के बदले उसका शौहर पैसे लेता था।

महिला ने आरोप लगाया कि यह सिलसिला तीन साल से चल रहा है और जब उसने कुछ महीने पहले इसका विरोध किया तो उसके वीडियो वायरल कर दिए गए। महिला ने आरोप लगाया कि उसे घर से भी निकाल दिया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसके कुछ बोलने पर शौहर उसे तलाक की धमकी देता है। उसने कहा कि अब तक बच्चों के चलते वह चुप थी। उसने इस सम्बन्ध में बुलंदशहर पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने कहा है कि शिकायत के आधार पर जाँच कर रही है। पुलिस ने कहा कि आरोप सही पाए जाएँगे तो कार्रवाई की जाएगी।

बेटी के साथ थे संबंध, निकाह पर दी जान

फिरोजाबाद के रामगढ़ थाना क्षेत्र में एक आदमी ने बुधवार (8 जनवरी, 2025) को जहर खाकर आत्महत्या कर ली। उसने यह आत्महत्या तब की जब उसकी नाबालिग बेटी का होने वाला शौहर फिरोजाबाद बारात लेकर आ गया था। इसके बाद निकाह टल गया। इस मामले की जानकारी पर जब पुलिस पहुँची तो उसकी बीवी ने कई खुलासे किए। बीवी ने आरोप लगाया कि उसका शौहर बेटी पर गन्दी नजर रखता था। बीवी ने कुछ दिन पहले शौहर को गलत हरकत करते हुए रात में पकड़ भी लिया था।

मृतक ने तब दो वीडियो भी बनाई थीं। इसमें एक में वह अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ कर रहा था जबकि दूसरी वीडियो में वह बीवी द्वारा पकड़े जाने के बाद बोल रहा है। इस वीडियो में वह कहता है कि जिस लड़की का निकाह होने जा रहा है वह उसके साथ सोती थी और उसकी अम्मी ने हमें पकड़ लिया है, इसलिए हम सब जाग रहे हैं।

यह वीडियो अँधेरे में बनाई गई है। उसकी बीवी ने बताया कि वह चूड़ी से जुड़ा काम करती है और जल्दी सो जाती है। रात में जब सब नींद में होते थे तो उसका शौहर लगभग 16 साल की बेटी के साथ छेड़छाड़ करता था। यह वीडियो कथित तौर पर उसने बेटी के होने वाले शौहर को भी भेजी थी।

मृतक की बीवी ने बताया कि उसने अपने शौहर ने समझाया भी लेकिन वह नहीं माना इसलिए बेटी का निकाह तय किया गया। इससे उसका शौहर गुस्सा हो गया और उसने आत्महत्या की धमकी दी और जब बारात आ गई तो शराब पीकर घर आया और फिर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इसके चलते अब निकाह रुक गया है।

मामले में ऑपइंडिया ने रामगढ़ थामा में भी सम्पर्क किया। पुलिस ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिली थी और वह अब जाँच में लगे हुए हैं। वहीं दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लकड़ी का अब्बा इस अपनी बेटी का निकाह 35 वर्ष के आदमी से तय होने से गुस्सा था इस कारण उसने आत्महत्या की।

जल रहा कैलिफोर्निया, हॉलीवुड तक पहुँची लपटें; पेरिस हिल्टन समेत कई सितारों का बंगला खाक: नोरा फतेही बोली- ऐसा कभी नहीं देखा, जानिए क्यों पैदा हुए डरावने हालात

अमेरिका के कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग अब लॉस एंजिल्स तक पहुँच गई है। खबर आ रही है कि इन आग की लपटों में कई हॉलीवुड सितारों के घर समेत 2000 इमारतें जलकर बिलकुल खाक हो गई हैं और कुल 28 हजार घर इस आग के कारण प्रभावित हुए हैं। 5 लोगों की मौत के बीच इस भयावह स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 1,30,000 लोगों को तुरंत घर खाली करने को कहा गया है और 3 लाख लोगों को सुरक्षित जगह जाने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर भी तस्वीरें सामने आ रही है जिसमें चारों तरफ आग ही आग दिख रही है। बताया जा रहा है कि जंगल से फैलना शुरू हुई आग अभी तक अलग-अलग क्षेत्रों में फैल गई है।

कहाँ-कहाँ लगी आग

रिपोर्ट्स के अनुसार, कैलिफोर्निया के जंगलों में 3 आग लगी है। इन्हें पैलिसेड्स, हर्स्ट और ईटन फायर का नाम दिया गया है। पैलिसेड्स फायर पैलिसेड्स ड्राइव के दक्षिण-पूर्व से शुरू हुई थी, जो 17,234 एकड़ इलाके को प्रभावित कर चुकी है। वहीं ईटन फायर लॉस एंजिल्स के उत्तर में फैले जंगलों में एक घाटी के पास लगी थी, जिसके कारण 10,600 एकड़ इलाका जल चुका है। हर्स्ट फायर सैन फर्नांडो के उत्तर में एक उपनगरीय इलाके में लगी थी और ये अब तक अपनी चपेट में 855 एकड़ इलाके को ले चुका है। खबरें अभी भी यही बता रही हैं कि आग पर काबू नहीं पाया जा सका है जिसके कारण कैलिफोर्निया के गवर्नर ने वहाँ आपातकाल की घोषणा कर दी है।

आग लगने की वजह

कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग के पीछे का कारण सूखी लकड़ियाँ, बारिश में कमी और तेज रफ्तार में चल रही हवाओं को बताया जा रहा है। अक्टूबर में यहाँ बहुत ही कम मात्रा में बारिश हुई थी जिसकी वजह से लकड़ियाँ सूखती गईं। 6 जनवरी को डब जंगली इलाकों में पेड़ों के जलने की शुरुआत हुई तो ये आग देखते ही देखते फैल गई। कुछ ही घंटों में हजारों एकड़ के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।

किन हॉलीवुड स्टार्स के घर हुए खाक

कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण शहरों में तबाही मची हुई है। केवल आम लोग ही नहीं हॉलीवुड स्टार्स तक अपना घर छोड़ने पर मजबूर हैं। अब तक सामने आई खबरों के मुताबिक कई हॉलीवुड स्टार्स ऐसे हैं जिन्हें अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इनमें कुछ नाम नीचे हैं।

  • एडम ब्रॉडी लीटन मेस्टर
  • पेरिस हिल्टन
  • अलबामा लैंडन बार्कर
  • रिकी झील
  • जेमी ली कर्टिस
  • एलिजाबेथ चेम्बर्स
  • कैरी एल्वेस
  • जेम्स वुड्स
  • मार्क हैमिल
  • यूजीन लेवी
  • जे जे रेडिक का परिवार
  • सैंड्रा ली
  • मैंडी मूर
  • केट बैकइनसेल
  • कैरोलिन मर्फी
  • मौली सिम्स
  • स्पेंसर प्रैट और हेइडी मोंटाग
  • डेनिस क्रॉस्बी
  • जेनिफ़र ग्रे
  • अन्ना फारिस
  • बिली क्रिस्टल

कई एक्टर्स ने ये नजारा देख रोते हुए अपनी भावना व्यक्त की। एक्टर जेम्स वुड्स जहाँ आंसू पोंछते हुए दिखे, वहीं क्रिस्टल ने इसे पूरी तरह टूटने वाला कहा। एक्टर्स ने कहा कि उन्हें इस आग के कारण अपना वो घर छोड़ना पड़ा जहाँ उनके बच्चे बड़े हुए। इसी प्रकार पेरिस हिल्टन ने भी मालिबु में लगी आग को देखने के बाद अपना दुख जताया।

लॉस एंजिल्स में फँसी नोरा फतेही

लॉस एंजिल्स तक फैली आग के कारण बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही को भी दिक्कत हुई। उन्हें आग के कारण समय से पहले उनका होटल छोड़ने को कहा गया, जिसके बाद उन्होंने अपने इंस्टा पर वीडियो शेयर की। उन्होंने कहा,

“मैं LA में हूँ और जंगल में लगी आग बहुत भयानक है। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। यह सच में भयानक है। हमें पाँच मिनट पहले ही यहाँ से निकलने का आदेश मिला है। इसलिए मैंने जल्दी से अपना सारा सामान पैक किया और मैं यहाँ से निकल रही हूँ। मैं एयरपोर्ट जाऊँगी और वहाँ आराम करूँगी क्योंकि आज मेरी फ्लाइट है और मुझे उम्मीद है कि मैं इसे पकड़ पाऊँ, वो कैंसिल न हो। ये सब बहुत ज्यादा डरावना है। मुझे उम्मीद है लोग सुरक्षित होंगे। इतना डरावना मैंने पहले कुछ नहीं देखा।”

कैलिफोर्निया में 50 सालों में लगी 78 बार आग

बता दें कि कैलिफोर्निया के जंगल में आग पहली बार नहीं लगी। पिछले 50 सालों में कैलिफोर्निया में 78 बार आग लग चुकी है। चूँकि इन जंगलों के पास रिहायशी इलाके ज्यादा हैं इसलिए इस आग से होने वाला नुकसान बहुत ज्यादा होता है। बताया जाता है कि 1933 में लॉस एंजिलिस के ग्रिफिथ पार्क में लगी आग कैलिफोर्निया की सबसे भयावह आग थी। तब, लगभग 83 हजार एकड़ इलाके को चपेट में लिया था और 3 लाख से ज्यादा लोगों को दूसरे शहरों में जाना पड़ा था।

25 साल जेल में बंद रहा, राष्ट्रपति ने भी ठुकराई याचिका, अब सुप्रीम कोर्ट ने माना ‘नाबालिग’; जिंदा व्यक्ति की ‘हत्या’ में 4 को जेल में ठूँस दिया… इस सिस्टम का क्या करें?

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे शख्स को रिहा किया है जो लगभग 25 वर्ष से ही जेल में बंद था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि जब उसने अपराध किया था तब वह नाबालिग था और जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उसके नाबालिग होने की बात को पहले नहीं स्वीकार किया गया। उसे पहले मौत की सजा मिली थी लेकिन राष्ट्रपति ने इसे उम्रकैद में बदल दिया था। अब उसकी उम्र को लेकर सच्चाई पता चलने के बाद उसे आजादी मिली है। वहीं उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को ढूँढा है, जिसकी हत्या के आरोप में 4 लोग जेल भी काट चुके हैं।

हाई कोर्ट से राष्ट्रपति तक न्याय के लिए लड़ी लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 जनवरी, 2025) को ओम प्रकाश नाम के शख्स को लगभग 25 वर्ष की जेल के बाद रिहा किया है। ओम प्रकाश को 1994 में उसके मालिक और परिवार की हत्या करने के दोष में यह जेल की सजा हुई थी। ओम प्रकाश को 2001 में पुलिस ने पकड़ा था। उसने बताया था कि 2001 में वह 20 वर्ष का था। इस मामले में निचली अदालत ने उसे बालिग़ के तौर पर सजा दी थी। निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी। हालाँकि, ओमप्रकाश ने दावा किया कि वह नाबालिग था।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी और नाबालिग वाले दावे को नहीं माना। उसकी पुनर्विचार याचिका भी ठुकराई गई। यहीं यह मामला नहीं रुका। ओम प्रकाश ने इसके बाद इस मामले में राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की। यहाँ भी उसकी याचिका ठुकरा दी गई। जब उसने दूसरी बार राष्ट्रपति को यह याचिका दी तो उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और कहा कि जब तक वह 60 साल का नहीं हो जाता, तब तक उसे रिहा नहीं किया जाएगा।

ओमप्रकाश थक हार कर फिर नाबालिग वाला दावा लेकर सुप्रीम कोर्ट के पास पहुँचा लेकिन इस बार उसका कोर्ट ने उसका केस लेने से ही इनकार कर दिया। खुद के नाबालिग होने का 2019 में उसने फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन फिर याचिका ख़ारिज कर दी गई। इसी दौरान उसकी हड्डियों का एक टेस्ट किया गया जिसमें साफ़ हुआ कि घटना के समय वह लगभग 14 वर्ष का रहा होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में उसे 7 जनवरी, 2025 को रिहा करने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह एक ऐसा मामला है जिसमें व्यक्ति कोर्ट गई गलती के कारण पीड़ित है। हमें बताया गया है कि जेल में उसका आचरण सामान्य रहा है, उसके खिलाफ कोई रिपोर्ट नहीं है। उसने समाज में फिर से घुलने-मिलने का अवसर खो दिया। उसने जो समय खोया है, वह उसकी किसी गलती के बिना कभी वापस नहीं आ सकता।” 2001 में पकड़े जाने और सजा दिए जाने के बाद ओम प्रकाश ने 7-8 बार अलग-अलग कोर्ट के सामने खुद के नाबालिग होने का दावा किया, लेकिन सिस्टम की गलती के चलते उसे 25 वर्ष बाद न्याय मिला।

जिसकी हत्या में 4 को जेल, वह जिंदा मिला

सिस्टम की विफलता से नुकसान सिर्फ ओम प्रकाश को ही नहीं हुआ बल्कि बिहार में भी 4 लोग इसका शिकार हुए। बिहार के एक शख्स को हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस ने झाँसी में रात को पेट्रोलिंग के दौरान देखा। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि यह शख्स नथुनी पाल बिहार के देवरिया का रहने वाला है और वह बीते डेढ़ दशक से उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगह रह रहा है। जब पुलिस ने स्थानीय थाने से जानकारी ली तो पता चला कि जिस शख्स को उन्होंने ढूँढा है, उसके मर्डर के लिए बिहार में 4 लोगों पर मुकदमा चल रहा है।

यह मुकदमा नथुनी पाल के चाचा और तीन चचेरे भाइयों के खिलाफ ही दर्ज करवाया गया था। मुकदमा नथुनी पाल के मामा ने दर्ज करवाया था। इस मामले में चारों लोग 8 माह की जेल भी काट चुके हैं। अभी वह जमानत पर बाहर हैं। अब इस खबर के बाद उन्होंने हत्या का दाग धुलने पर ख़ुशी जताई है। वहीं दोनों जगह की पुलिस अब मामले को लेकर आगे कार्रवाई में जुटी है।

जिस फातिमा शेख को बताते हैं पहली महिला मुस्लिम टीचर, उसका वजूद ही नहीं? लेखक-चिंतक दिलीप मंडल बोले- मैंने गढ़ा था काल्पनिक कैरेक्टर, मुझे माफ करें

महिला शिक्षा के इतिहास में सावित्री बाई फुले के साथ-साथ आपको पिछले कुछ समय से फातिमा शेख का नाम भी सुनने को मिलता होगा। फातिमा कौन हैं ये सर्च करने पर जानकारी सामने आती होगी कि वो देश की पहली महिला मुस्लिम टीचर थीं जिन्होंने लड़कियों को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अब इन्हीं फातिमा शेख को लेकर पत्रकार, लेखक, प्रोफेसर और चिंतक दिलीप मंडल ने बड़ा दावा किया है।

दिलीप मंडल ने अपने एक्स पर कन्फेशन डालते हुए लिखा, “मैंने एक मनगढ़ंत कैरेक्टर बनाया था- फातिमा शेख। कृपया मुझे माफ करें। सच्चाई तो ये है कि कोई फातिमा शेख कभी थी ही नहीं, वो कोई ऐतिहासिक हस्ती नहीं हैं। वो मेरी गलती थी कि अपने जीवन के एक निश्चित काल में मैंने इस नाम को अचानक गढ़ा। मैंने ये सब जानबूझकर ही किया था।”

दिलीप आगे कहते हैं- “आप इससे पहले गूगल में भी इस नाम की कोई एंट्री नहीं पाएँगे, न कोई किताब मिलेगी और न ही कहीं कोई जिक्र होगा।”

मंडल के अनुसार, फातिमा उन्हीं की वजह से सोशल मीडिया नैरेटिव में आईं और गायब भी हो गईं। वह अपने कन्फेशन में कहते हैं कि अब उनसे कोई सवाल न करे कि आखिर उन्होंने ऐसा किया क्यों था। ये समय और हालात वाली बात है। किसी कारणवश एक हस्ती को गढ़ना पड़ा था इसलिए उन्होंने वो किया। हजारों लोग इसकी गवाही दे सकते हैं – “जिनमें से कइयों ने तो पहली बार मुझसे ही ये नाम सुना।”

उन्होंने लिखा कि वह नैरेटिव गढ़ना, छवि निर्माण करना जानते हैं इसलिए उनके लिए ये सब कभी भी मुश्किल नहीं था। फातिमा की कोई तस्वीर भी नहीं है और जो हैं वो सब काल्पनिक ही हैं।

फातिमा के अस्तित्व में आने के बाद जिन लोगों को राजनीतिक और वैचारिक उद्देश्यों के लिए इस कहानी की ज़रूरत थी, उन्होंने इसे फैलाया और इस प्रकार यह नाम अस्तित्व में आया।

मंडल कहते हैं, “ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले का पूरा लेखन प्रकाशित हो चुका है, और उसमें कहीं भी फातिमा शेख का नाम नहीं है। यहाँ तक कि बाबा साहेब अंबेडकर ने भी कभी ऐसा नाम नहीं लिया।”

वह दावा करते हैं कि महात्मा फुले या सावित्रीबाई फुले के किसी भी जीवनीकार ने फातिमा शेख का ज़िक्र नहीं किया। 15 साल पहले तक किसी भी मुस्लिम विद्वान ने इस नाम का ज़िक्र नहीं किया। फुले दंपत्ति के शैक्षणिक प्रयासों की चर्चा करने वाले ब्रिटिश दस्तावेज़ों में भी फातिमा शेख का कोई ज़िक्र नहीं है।

दिलीप मंडल का चैलेंज

अपने इस पोस्ट के बाद मंडल ने इस मुद्दे से जुड़े कई सारे ट्वीट किए। उन्होंने बार-बार कहा कि सावित्री बाई का कैरेक्टर पूरी तरह काल्पनिक है। वहीं जब एक युवक ने कहा कि ये बात झूठ है तो उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले कोई हडप्पा काल की नहीं हैं। उनसे जुड़े रिकॉर्ड हैं। पुराने अखबार और लाइब्रेरी हैं। वहीं फातिमा शेख को लेकर उन्होंने चैलेंज दिया कि अगर कोई 2006 से पहले दिखा देगा कि कहीं फातिमा शेख का जन्मदिन मनाया गया, तो वो मान लेंगे कि उन्होंने ऐसा नहीं किया।

गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ दिलीप मंडल इस तरह के दावे कर रहे हैं कि फातिमा शेख का कैरेक्टर उन्होंने ही गढ़ा था, वहीं 1991 में पब्लिश हुई एक किताब है- Women Writing in India: 600 B.C. to the early twentieth century जिसमें ये पढ़ने को मिलता है कि फातिमा शेख, ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले की साथी थीं। इस किताब को सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क के फेमिनिस्ट प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया है।

किताब में फातिमा शेख के नाम का केवल एक ही बार जिक्र है, जिसमें कहा गया है, “पुणे में जोतिबा और सावित्रीबाई फुले ने जो स्कूल शुरू किए थे, वे खास तौर पर निचली जाति की लड़कियों के लिए थे। उनकी सहकर्मी फातिमा शेख एक मुस्लिम महिला थीं।” इसे देख लगता है कि संभव है कि फातिमा शेख नाम की महिला फुले की सहकर्मी रहीं हों, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख कार्यकर्ता न हों। यही वजह है कि पहले उनका उल्लेख इंटरनेट पर न के बराबर था।

अब बिहार की जमीन से निकला काले पत्थर का बना मंदिर, शिवलिंग की पूजा-अर्चना के लिए लगी कतार: 500 साल से भी अधिक पुराना होने का दावा

संभल में एक पुराना मंदिर खोजे जाने के बाद देश भर में मंदिरों के मिलने का सिलसिला जारी है। अब बिहार की राजधानी पटना में सैकड़ों वर्ष से बंद पड़े एक मंदिर को स्थानीय लोगों ने खोजा है। मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहाँ एक पुराना शिवलिंग भी मिला है, यह पूरी तरह सुरक्षित है। इस मंदिर में पूजा-अर्चना भी चालू हो गई है। मंदिर में दर्शन के लिए लम्बी-लम्बी लाइन लग रही हैं। प्रशासन भी मंदिर के आसपास व्यवस्था के लिए काम कर रहा है।

कचरे-मिट्टी में दबा था मंदिर

पटना में यह मंदिर आलमगंज थाना क्षेत्र के लक्ष्मणपुर इलाके में मिला है। यहाँ एक मठ भी है। स्थानीय लोगों को मठ से ही लगे हुए मंदिर के होने की कोई जानकारी नहीं थी। एक दिन मठ की चहारदीवारी के पास मिट्टी धंस गई। इसे मंदिर जैसे ढाँचे का कुछ हिस्सा दिखने लगा। इसके बाद स्थानीयों की इस पर नजर पड़ी। इसके बाद यहाँ खुदाई चालू हुई। जब मिट्टी हटाई गई तो मंदिर का ऊपरी हिस्सा दिखा। इसके बाद तेजी से मिट्टी हटाना चालू कर दिया गया।

यहाँ एक छोटा मंडपनुपा मंदिर मिला। इसमें शिवलिंग भी स्थापित था। इसके बाद इसको साफ़ किया गया। यह शिवलिंग भी एकदम सुरक्षित था। इसके बाद इसकी सफाई की गई और पूजा अर्चना चालू कर दी गई। शिवलिंग विशेष प्रकार का बना है और काफी सुंदर है। शिवलिंग के आसपास बना मंडपनुमा मंदिर भी काफी सुंदर है और इसपर नक्काशी भी की गई है। स्थानीयों ने बताया है कि जिस छोटे मंदिर में यह शिवलिंग स्थापित है, वह एक बड़े मंदिर का हिस्सा है।

सैकड़ों साल पुराना है मंदिर

स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना है। इसके आसपास के क्षेत्र का इलाका लाहौरी ईंट से बनाया गया है। इसमें अंदर जाने के लिए 4 प्रवेश द्वार हैं। इनमें से 2 अभी बंद है। मंदिर के अंदर जिस मंडपनुमा मंदिर में शिवलिंग स्थापित है, वह काले पत्थर का बना है।

संभावना है कि यह एक ही काले पत्थर की चट्टान से काट कर बनाया गया है। इसके अंदर शिवलिंग के साथ ही भगवान विष्णु के चरण स्थापित हैं। मंदिर में जल निकासी की व्यवस्था भी गोमुख के जरिए की गई है। एक स्थानीय व्यक्ति ने ईटीवी से बताया है कि मंदिर 1000 साल पुराना है और इसमें पहले 5 किलो सोना लगा हुआ था।

अब दर्शन के लिए लगी लाइन

लक्ष्मणपुर में यह मंदिर मिलने के बाद अब दर्शनार्थियों की बड़ी भीड़ लग रही है। मंदिर का प्रबंध स्थानीय लोग कर रहे हैं। यहाँ दर्शन के लिए लोगों की लाइन लगाई जा रही है। स्थानीय लोगों ने शिवलिंग को सजाया भी है। हालाँकि, भीड़ का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने माँग की है कि मंदिर में प्रबन्धन के लिए अब सरकार दखल दे और उनकी सहायता करे।

संभल के जिस दंगे में गन्ने की खोई और टायर का ढेर लगा जला दिए गए 24 हिंदू, उसकी रिपोर्ट योगी सरकार ने माँगी: 184 की हुई थी मौत

उत्तर प्रदेश के संभल में 1978 में हुए दंगों के बारे में जानकारी योगी आदित्यनाथ की सरकार ने तलब की है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य श्रीचंद्र शर्मा के नोटिस पर यह निर्देश दिए गए हैं। करीब 47 साल पहले यह दंगा होली के बाद 29 मार्च को शुरू हुआ था। 184 लोगों की हत्या की गई थी। करीब 30 दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा था।

शरुआती मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि 47 साल बाद इन दंगों की राज्य सरकार दोबारा जाँच के निर्देश दिए हैं। लेकिन संभल के पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई ने इससे इनकार किया है। उन्होंने बताया है कि विधानपरिषद सदस्य श्रीचंद्र शर्मा ने 17 दिसंबर को जो पत्र दिया था, उसके बाद शासन ने एक आख्या माँगी है। इसमें कहा गया है कि 1978 के दंगों से जुड़ी जो भी सूचना है वह उपलब्ध कराएँ। ये सूचनाएँ संकलित की जा रही और इसके बाद सरकार को उपलब्ध करवाया जाएगा।

8 जनवरी 2025 को मुरादाबाद के कमिश्नर अंजनेय सिंह ने संभल के जिलाधिकारी डॉक्टर राजेंद्र पेंसिया को इस दंगे से जुड़े सभी रिकॉर्ड सौंपने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ लोगों की शिकायतों के आधार पर कई पुराने मामलों की फिर से जाँच की जा सकती है। कमिश्नर अंजनेय सिंह ने इस मामले को लेकर एक बैठक भी बुलाई है।

इससे पहले 7 जनवरी को संभल के एसपी (पुलिस अधीक्षक) केके बिश्नोई ने डीएम पेंसिया को पत्र लिखकर बताया था कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य श्रीचंद्र शर्मा ने 1978 के दंगों की नए सिरे से जाँच की माँग की है। शर्मा ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के उप सचिव और पुलिस अधीक्षक (मानवाधिकार) से पत्र मिलने का उल्लेख किया था। गृह विभाग के उप सचिव सतेन्द्र प्रताप सिंह ने एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में रिपोर्ट माँगी है।

गौरतलब है कि संभल में दंगों का पुराना इतिहास रहा है। इन्हीं दंगों के बल पर संभल नगरपालिका क्षेत्र से धीरे-धीरे हिंदुओं को मिटाया गया। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

इन दंगों पर प्रशासन ने एक इंटरनल रिपोर्ट भी तैयार की है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इससे पता चलता है कि 1978 में संभल में सबसे बड़ा दंगा हुआ था। इसी दंगे के बाद खग्गूसराय में रहने वाले करीब 100 हिंदू परिवार इस इलाके को छोड़कर चले गए। हालात इतने बदतर थे कि अधिकतर हिंदुओं ने कपड़ों के पुतले बनाकर बृजघाट पर अपनों का अंतिम संस्कार किया था।

हिंदू शिक्षक की बेटी से बलात्कार, पत्नी को किया किडनैप


इसी दंगे के दौरान एक हिंदू शिक्षक की बेटी और पत्नी को मंजर शफी ने उठा लिया था। इस दंगे को भड़काने के पीछे भी शफी की बड़ी भूमिका थी। हिंदू शिक्षक की बेटी को बलात्कार के बाद छोड़ा गया। उनकी पत्नी को हिंदुओं ने बचा लिया था। आज इस शिक्षक परिवार संभल में नहीं रहता है।

बनवारी लाल बोले गोली मार दो, पर दंगाइयों ने काट-काटकर मारा

ऑपइंडिया के पास मौजूद इंटरनल रिपोर्ट बताती है कि दंगे भड़कने की सूचना मिलने पर बनवारी लाल गोयल प्रभावित इलाके में जाने लगे। उनकी पत्नी और बेटे ने उन्हें रोका। लेकिन वे यह कहते हुए दंगा प्रभावित इलाके में चले गए, सारे मुस्लिम मेरे मित्र और भाई जैसे हैं। सब मेरे साथ काम करते हैं। मुझे कुछ नहीं होगा। लेकिन बनवारी लाल गोयल को मुस्लिम दंगाइयों ने पकड़ लिया।

उनसे कहा कि तुम इन पैरों से पैसे लेने आए हो और उनके पैर काट दिए। फिर कहा कि तुम इन हाथों से पैसे लेने आए हो और हाथ भी काट दिए। इसके बाद गर्दन काट कर उनकी हत्या कर दी गई। इस दौरान मुस्लिम दंगाइयों के सामने बनवारी लाल गिड़गिड़ाते रहे कि मुझे काटो मत, गोली मार दो। पर किसी ने नहीं सुनी। इस घटना को हरद्वारी लाल शर्मा और सुभाष चंद्र रस्तोगी ने अपनी आँखों से देखा था। इस कत्लेआम के दौरान दोनों ने एक ड्रम में छिपकर अपनी जान बचाई थी। हाई स्कूल में पढ़ने वाले हरद्वारी लाल के सगे भाई को भी मुस्लिम दंगाइयों ने चाकू से गोदकर इसी दौरान मार डाला था।

शर्मा और रस्तोगी भी इस कत्लेआम के गवाह थे। इरफान, वाजिद, जाहिद, मंजर, शाहिद, कामिल, अच्छन जैसे नाम आरोपित थे। लेकिन 2010 में यह केस बंद करना पड़ा, क्योंकि गवाह ही हाजिर नहीं हुए। जज ने यह टिप्पणी करते हुए केस बंद किया कि मैं सोच भी नहीं सकता कि इनलोगों (आरोपितों) को फाँसी नहीं हो रही है।

गवाहों पर किस तरह का दबाव रहा होगा इसे इस बात से समझा जा सकता है कि बनवारी लाल के बेटे विनीत गोयल के कारोबारी साझेदार रहे प्रदीप अग्रवाल के भाई की वसीम ने गोली मारकर हत्या कर दी। साथ ही धमकी दी कि यदि उसके खिलाफ किसी ने एफआईआर करवाई तो उसकी भी हत्या कर दी जाएगी। उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार बनवारी लाल के परिवार पर डॉक्टर शफीकुर रहमान बर्क की ओर से भी दबाव डाला गया था। बर्क संभल से समाजवादी पार्टी से सांसद रहे हैं। फिलहाल उनके पोते जियाउर्रहमान बर्क इस सीट से सपा के सांसद हैं। जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई हिंसा में जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। 1995 के आसपास बनवारी लाल गोयल के परिवार ने संभल ही छोड़ दिया।

हाल में इन दंगों की चर्चा शुरू होने के बाद बनवारी लाल गोयल के बेटे विनीत गोयल वापस संभल लौटे थे। उन्होंने बताया था कि उनके पिता समेत अन्य हिंदुओं को हत्या के बाद इस तरह फूँक दिया गया था कि उनकी अस्थियाँ तक नहीं मिल सकी। दंगे के एक माह के बाद उन्होंने फूल-पत्तों पर आटा लपेटकर उनका सांकेतिक दाह संस्कार किया था।

ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच नहीं चाहते ब्रिटिश सांसद, सदन में 364 ने विरोध में दिया वोट: एलन मस्क बोले- PM स्टार्मर को करो बर्खास्त

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच शुरू हो ये ब्रिटेन की सत्ताधारी पार्टी को मंजूर नहीं है। यही वजह है कि ब्रिटिश संसद में जब विधेयक में संशोधन को लेकर ये माँग उठाई गई कि कि ग्रूमिंग गैंग के विरुद्ध राष्ट्रीय जाँच शुरू हो तो ब्रिटेन के सांसदों ने इसके विरुद्ध वोटिंग की।

सामने आई जानकारी के अनुसार केवल 111 सांसदों ने माँग के पक्ष में वोट किया जबकि 364 ने खिलाफ में मतदान किया। इसी के साथ लेबर पार्टी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वो बच्चों की सुरक्षा और कल्याण विधेयक को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं।

लेबर पार्टी का कहना है कि यह संशोधन बच्चों की सुरक्षा और कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों को कमजोर करेगा। सांसदों ने चेतावनी दी है कि यदि यह संशोधन पारित होता है, तो इससे बच्चों की शिक्षा और उनके विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

बता दें कि ग्रूमिंग गैंग का मुद्दा पिछले एक हफ्ते से सुर्खियों में खुद दुनिया के सबसे अमीर आदमी इस गैंग का पक्ष लेने वाले लोगों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं व ब्रिटेन की पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं।

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इस मुद्दे पर बात रखते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मस्क का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग झूठ और गलत सूचनाओं को फैला रहे हैं, उन्हें पीड़ितों में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्हें सिर्फ खुद में दिलचस्पी है।

उन्होंने ये भी कहा कि वे 2008 से 2013 के बीच प्रॉसिक्यूशन सर्विस के डायरेक्टर थे तभी ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया गया था। स्टार्मर ने कहा कि उन्होंने जिस भी मामले को हाथ में लिया, वह अदालत तक पहुंचा और उसमें पर्याप्त कार्रवाई हुई।

वहीं मस्क का कहना है कि स्टार्मर जाँच कर रही समिति के अध्यक्ष थे लेकिन फिर भी उन्होंने आरोपितों के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी नहीं दी और अब प्रधानमंत्री के रूप में भी स्टार्मर इस घटना पर पर्दा डाल रहे हैं। मस्क ने इस पूरे मामले में ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स से हस्तक्षेप कर स्टार्मर को बर्खास्त करने की अपील की। साथ ही सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए उन्हें जेल भेजने की माँग की।

भारत में भी ‘तालिबान’ बन रहा अफगानी परिवार, लड़की के हिन्दू परिवार से शादी करने पर दी धमकी: दिल्ली में दर्ज करवाया झूठा मुकदमा, सुरक्षा माँगने बॉम्बे हाई कोर्ट पहुँचे पति-पत्नी

अफगानिस्तान से शरणार्थी के तौर पर भारत आई एक लड़की को हिन्दू लड़के से शादी करने पर परिवार से धमकियाँ मिल रही हैं। लड़की के साथ रहने वाली उसकी बहन को परिवार धमकियाँ दे रहा है। परिवार ने उनके खिलाफ एक फर्जी मामला भी दर्ज करवा दिया। परिवार के खतरे से बचने के लिए अब पति-पत्नी और उसकी बहन ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 3 जनवरी, 2025 को जस्टिस रेवती मोहिते और जस्टिस नीला गोखले ने की है। उन्होंने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों को पहले ही मुंबई पुलिस सुरक्षा दे रही है। यह सुरक्षा जून, 2024 में उन्हें दी गई थी। यह सुरक्षा अफगानी लड़की के पति के मुंबई पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र के बाद दी गई थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ताओं के वकील ने हमें बताया है कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश के पालन में चंडीगढ़ पुलिस ने याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान की है। हमें यह भी बताया गया है कि वर्तमान में मुंबई पुलिस ने भी याचिकाकर्ताओं को पुलिस सुरक्षा प्रदान की है तथा यह तब तक जारी रहेगी जब तक उन पर खतरा बना रहेगा।”

हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में दर्ज केस को लेकर वह जब चाहे तब सही कदम उठा सकती है। यह याचिका एक अफगानी शरणार्थी लड़की, उसके हिन्दू पति और बहन द्वारा दायर की गई थी। लड़की 2017 में अपने परिवार के साथ अफगानिस्तान से भारत में शरण के लिए आई थी। वर्तमान में 20 साल की है। उसके साथ उसकी छोटी बहन भी आई थी।

अफगान युवतियों के पास संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) का कार्ड भी है। बाद में भारत में रहने के दौरान ही अफगानी लड़की को हरियाणा के एक हिन्दू लड़के से प्रेम हो गया और उसने उसके साथ जून, 2024 में हिन्दू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया। अफगानी लड़की के परिजनों को यह पसंद नहीं आया और उसे वह धमकियाँ देने लगे।

दोनों लड़कियों के खिलाफ परिजनों ने एक झूठा मुकदमा भी दिल्ली में दर्ज करवा दिया। अफगानी लड़की इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुँची जहाँ से उसे सुरक्षा मिली। उसके साथ उसकी छोटी बहन भी परिवार से अलग रहती है।

लड़की के हिन्दू पति को बाद में कैंसर हो गया जिसके चलते वह मुंबई इलाज करवाने चले गए, यहाँ भी उन्होंने सुरक्षा के लिए याचिका डाली। अफगान परिवार की कट्टरता और तालिबानी रवैये से तीनों नाराज हैं। इस पर अगली सुनवाई 28 जनवरी, 2025 को है।

न्यायपालिका में ना हो रिजर्वेशन, मेरिट बने आधार: SC समुदाय से आने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज CT रविकुमार का बयान, बोले- पद के लिए लोग खुद को लायक बनाएँ

सुप्रीम कोर्ट से हाल ही में रिटायर हुए जज CT रविकुमार ने न्यायपालिका में नियुक्तियाँ मेरिट के आधार पर करने की वकालत की है। उन्होंने आरक्षण के विचार को समर्थन ना देते हुए कहा है कि न्यायपालिका में पहले से ही वह व्यवस्थाएँ मौजूद हैं, जिनसे सबका प्रतिनिधित्व हो। जस्टिस CT रविकुमार अनुसूचित जाति से सम्बन्धित हैं। जस्टिस रविकुमार ने यह बातें हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में कहीं हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने न्यायपालिका में आरक्षण और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर कहा, “मेरा स्पष्ट जवाब यह है कि न्यायपालिका में ऐसा तंत्र मौजूद है और और यह आगे मौजूद भी रहेगा। अगर ऐसा नहीं होता, तो मैं इस पद पर नहीं होता। लेकिन पिछड़े समुदायों के लोगों को खुद को इतना योग्य बनाना चाहिए कि वे इस पद के लिए नियुक्त किए जाने के दायरे में आ सकें। कोई किस पृष्ठभूमि से आता है और उसे किस आधार पर नियुक्त किया गया है, सबको एक ही समान काम करना होता है।”

जस्टिस CT रविकुमार ने कहा कि इस पद के लिए योग्यता और उस व्यक्ति का सक्षम होना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि SC समुदाय से होने के कारण उन्हें भी इस पद तक पहुँचने के रास्ते में कई कठिनाइयाँ झेलनी पड़ीं। उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार में वकालत का पेशा अपनाने वाले पहले व्यक्ति थे इसलिए उन्हें और समस्याएँ हुईं। जस्टिस रविकुमार ने कहा कि न्यायपालिका में ऐसे लोगों को पहचान कर ऊपर लाया जाना चाहिए, जो योग्य हैं। उन्होंने कहा कि अभी न्यापालिका में पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व कम है।

जस्टिस रविकुमार ने कहा कि न्यायपालिका कोटा और आरक्षण व्यवस्था पर नहीं चल सकती, इसका काम न्याय देना है। न्यायपालिका की आलोचना को लेकर उन्होंने कहा कि जजों को कोई भी फैसला देते समय काफी सावधानी बरतनी चाहिए औए फैसले के पीछे के तर्कों को साफ़ तौर पर सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि फैसला दिए जाने के बाद उसे सही सिद्ध करने की कोशिश जजों को नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर न्यायपालिका कोई नियम बना रही तो भी उसे काफी सावधान रहना रहना चाहिए।

जस्टिस CT रविकुमार 5 जनवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए हैं। यहाँ वह अगस्त, 2021 में नियुक्त किए गए थे। केरल के अलप्पुझा से आने वाले जज CT रविकुमार SC समुदाय से हैं और सुप्रीम कोर्ट से पहले वह केरल हाई कोर्ट में 2009 से लेकर 2021 तक जज रहे थे। केरल हाई कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए थे। इससे पहले वह सरकारी वकील भी रहे थे। उनकी पत्नी भी तमिलनाडु हाई कोर्ट में वकील हैं।