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‘चीफ जस्टिस के बंगले में हनुमान मंदिर था ही नहीं’: वकीलों ने मंदिर तुड़वाने का लगाया था आरोप, MP हाई कोर्ट ने नकारा, कहा – हो सकती है अवमानना की कार्रवाई

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने चीफ जस्टिस के बंगले में बने हनुमान मंदिर को तोड़े जाने के आरोप नकारे हैं। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने कहा है कि मीडिया में चलाई जा रही खबरें मनगढ़ंत हैं और इन पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। MP हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने कहा है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के अनुसार इस बंगले में कोई मंदिर था ही नहीं। हाई कोर्ट ने कहा है कि यह खबरें न्यायपालिका की विश्वसनीयता कम करने के उद्देश्य से चलाई गई हैं। बार काउंसिल का आरोप था कि जस्टिस सुरेश कुमार कैत के आने के बाद यह मंदिर तोड़ा गया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह ने हनुमान मंदिर तोड़े जाने के आरोपों को लेकर कहा, ” हाई कोर्ट के संज्ञान में यह बात आई है कि माननीय चीफ जस्टिस के बंगले से भगवान हनुमान के मंदिर को हटाने का आरोप लगाते हुए कुछ रिपोर्ट चलाई की जा रही हैं। ये रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी, भ्रामक और निराधार हैं। मैं इन दावों को स्पष्ट तौर पर नकारता हूँ और और उनका खंडन करता हूँ। PWD ने भी मामले में स्पष्टीकरण दिया है कि इस बंगले में कभी कोई मंदिर मौजूद ही नहीं था।”

रजिस्ट्रार जनरल ने आगे अपने बयान में कहा, “मीडिया में प्रसारित किए जा रहे आरोप पूरी तौर पर मनगढ़ंत हैं और ऐसा लगता है कि यह जनता को गुमराह करने और न्यायपालिका की विश्वसनीयता को बदनाम करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है।” रजिस्ट्रार जनरल ने कहा कि ऐसी खबरों पर अवमानना की कार्रवाई हो रही है।

उन्होंने आगे कहा, “रजिस्ट्रार जनरल का कार्यालय इन निराधार आरोपों की निंदा करता है और मजबूती से कहता है कि मंदिर तोड़े जाने की यह रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी हैं और हमारी न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को बदनाम करने के अलावा कोई और उद्देश्य पूरा नहीं करतीं। न्यायपालिका निष्पक्षता के साथ न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

बार काउंसिल ने क्या आरोप लगाए थे?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिख कर शिकायत की थी और जाँच तथा कार्रवाई की माँग भी की थी। बार एसोसिएशन के पत्र के अनुसार, जबलपुर के पचपेड़ी में बने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के बंगले में एक पुराना हनुमान मंदिर था। एसोसिएशन ने कहा था कि इस मंदिर में जस्टिस बोबडे,जस्टिस खानविलकर समेत बाकी पूर्व चीफ जस्टिस पूजा किया करते थे। एसोसिएशन ने बताया था कि इस मंदिर में उनके स्टाफ भी पूजा करते थे जिससे किसी को कोई परेशानी नहीं थी।

पत्र में कहा गया था कि यहाँ जस्टिस रफत आलम और जस्टिस रफीक अहमद भी अपने कार्यकाल के दौरान रहे, उन्होंने भी कभी इस मंदिर पर कोई आपत्ति नहीं जताई। एसोसिएशन की शिकायत में कहा गया था कि यह मंदिर सरकारी था और इसकी समय-समय पर मरम्मत भी सरकारी पैसे से करवाई जाती रही थी। शिकायत के अनुसार, जस्टिस सुरेश कुमार कैत के यहाँ आने के बाद इस मंदिर को तोड़ दिया गया और मूर्तियाँ हटा दी गईं। यह कार्रवाई बिना किसी सरकारी या न्यायिक आदेश के की गई।

पत्र में कहा गया था कि इस कृत्य से हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों की भावनाओं का अपमान हुआ है तथा सरकारी सम्पत्ति का भी नुकसान हुआ है। एसोसिएशन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना से माँग की है कि वह जाँच करवाएँ और दोषियों पर कार्रवाई करें। अभी जस्टिस कैत का पक्ष सामने नहीं आया है।

बार काउंसिल के अध्यक्ष ने भी की जाँच की माँग

इस मामले में ऑपइंडिया ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट धन्य कुमार जैन से बात की थी। धन्य कुमार जैन ने बताया था,”यह मंदिर यहाँ चीफ जस्टिस का बँगला बनने से पहले से था। यह एक नीम के पेड़ के पास बना था। बाद में यह बंगले में शामिल हो गया। इसमें समय के साथ छोटा-मोटा निर्माण भी करवाया गया। मंदिर लगभग 5×6 फीट के साइज का था, इसमें हनुमान जी और शिवलिंग स्थापित थे। यहाँ पूर्व में रहे चीफ जस्टिस पूजा करते थे, उनके स्टाफ भी यहाँ पूजा करते थे।”

सीनियर एडवोकेट जैन ने बताया था, “यहाँ तक कि जस्टिस पटनायक यहाँ रोज सुबह धोती पहन कर पूजा करने आते थे चीफ जस्टिस रहे रफत आलम साहब ने इसका जीर्णोद्धार तक करवाया था। वह इसके सामने चप्पल उतार देते थे। किसी को इससे आपत्ति नहीं थी। लेकिन तीन महीने पहले यहाँ जस्टिस कैत आए और इसके बाद इस मंदिर को तोड़ दिया गया। अब कहा जा रहा है कि यहाँ कुछ था ही नहीं। संविधान में सभी धर्मों को आजादी दी गई है, लेकिन जब न्यायपालिका से जुड़े लोग मंदिर हटवा देंगे तो संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा।”

उन्होंने इस मामले में जाँच करवाने की माँग की थी और कहा था कि यदि संभव हो तो सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कैत का ट्रांसफर किसी दूसरे हाई कोर्ट में करे। उन्होंने मंदिर का निर्माण दोबारा करवाए जाने की माँग की थी। गौरतलब है कि इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के बार एसोसिएशन को एक वकील रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी की तरफ से शिकायत मिली थी। जिसके बाद यह यह पत्र लिखा गया था। वकील त्रिपाठी ने माँग की थी कि जस्टिस कैत के खिलाफ आरोप सिद्ध होने पर आपराधिक कार्रवाई भी चालू की जाए।

मस्जिद नहीं ‘विवादित ढाँचा’ कहो, सनातन प्रतीकों की होने दो वापसी: संभल मामले पर CM योगी की टो टूक, बोले- हिंदुओं की मानी जाएँ माँगें

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सनातन धर्म से जुड़े प्रतीकों को शांतिपूर्वक वापस दिया जाना चाहिए और इसमें कोई विवाद नहीं होना चाहिए। सीएम योगी ने यह भी कहा कि जहाँ भी ऐसे दावे हैं, उन्हें मस्जिद ना कह कर ‘विवादित ढाँचा’ कहा जाए। उन्होंने संभल की मस्जिद के विषय में आइन-ए-अकबरी का हवाला दिया है। उन्होंने चेताया है कि यह देश मुस्लिम लीग की विचारधारा से नहीं चलेगा।

सीएम योगी ने यह सारी बातें टीवी चैनल आजतक द्वारा प्रयागराज में आयोजित धर्मसंसद में कही हैं। सीएम योगी ने संभल के प्रश्न पर कहा, “संभल में श्रीहरि विष्णु का 10वाँ अवतार जन्म लेने वाला है। यह हमारे पुराणों में उल्लेख है, कब विष्णु का कौन सा अवतार आएगा, इसको लेकर लिखा हुआ है और संभल भी उसी में है। संभल में आजकल जो कुछ देखने को मिल रहा है। वह सब सनातन धर्म से जुड़ा है और इसके प्रमाण प्राप्त हो रहे हैं… भारत में जितने पुराण बने हैं, इन सबकी रचना 3500 वर्ष से 5000 वर्ष में हुआ था।”

उन्होंने आगे कहा, “जिस कालखंड में यह रचे गए तब इस धरती पर इस्लाम नहीं था और तब केवल सनातन था। उसमें भी इसका उल्लेख है। जब इस्लाम ही नहीं था तब जामा मस्जिद कहाँ से आ गई। आइन-ए -अकबरी में इस बात का उल्लेख है कि यहाँ श्रीहरि विष्णु के मंदिर को तोड़ कर मस्जिद का ढाँचा खड़ा किया गया है। यह उनका ग्रन्थ कह रहा है तो उन्हें अपनी गलती माननी चाहिए। ऐसे में सनातन के जो प्रतीक उन्हें शांतिपूर्वक वापस दिया जाना चाहिए।”

सीएम योगी ने कहा कि ऐसे प्रतीक वापस दिए जाने पर विवाद नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग की मानसिकता से नहीं बल्कि भारतीय विचारधारा से यह देश चलेगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत ने हमेशा ही दुनिया से आए बाकी पीड़ित लोगों को शरण दी है। सीएम योगी ने कहा,” आइन-ए-अकबरी यह बताता है कि 1526 में संभल और 1528 में अयोध्या में मंदिर तोड़कर ढाँचे खड़े किए गए, तो अगर हिन्दू इन्हें माँगते हैं तो उसे मान लिया जाना चाहिए, आप प्रमाण देखिए।”

सीएम योगी ने काशी, मथुरा और संभल समेत बाकी जिन जगह पर विवाद है, उन्हें मस्जिद कहे जाने पर आपति जताई। उन्होंने कहा, “विवादित ढांचों को मस्जिद नहीं कहा जाना चाहिए, जिस दिन हमने यह बोलना बंद कर दिया, उस दिन लोग जाना बंद कर देंगे। इस्लाम में भी यह है कि किसी धर्म को ठेस पहुँचा कर जो मस्जिदनुमा खड़े किए गए ढाँचे में की गई इबादत खुदा को मंजूर नहीं होती… इस्लाम में उपासना के लिए कोई ढाँचा जरूरी नहीं है। सनातन में है। इस बात पर जिद नहीं की जा सकती। समय है कि नए भारत पर सोचा जाए।”

3 बेटी, अब्बा की तीसरी शादी, अम्मी की दूसरी… सबको पत्थर काटने वाली मशीन से काट डाला: 1 देवरानी और 2 भाई पर FIR, एक्शन में UP पुलिस

मेरठ के लिसाड़ी गेट इलाके के सुहेल गार्डन में एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। घटना में मोइनुद्दीन उर्फ मोइन, उनकी बीवी आसमा और तीन बेटियाँ – अफ्सा (8), अजीजा (4), और अदीबा (1) शामिल हैं। सभी के गले कटे हुए थे। पास में ही पत्थर काटने वाली मशीन मिली, जो खून से सनी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (9 जनवरी 2025) सुबह से मोइन और उनके परिवार से संपर्क न होने पर उनके भाई तसलीम और मोमिन चिंतित हो गए। तसलीम ने घर के रोशनदान से झाँककर देखा तो अंदर खून बिखरा था। सूचना पर पुलिस पहुँची और गेट का ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुई।

अंदर का नजारा दिल दहला देने वाला था। कपड़े, बर्तन और अन्य सामान बिखरा था। मोइन का शव बेड के पास गठरी में बंधा मिला, जबकि उसकी बीवी और तीनों बेटियों के शव बेडबॉक्स में बंद थे। दोनों छोटी बेटियों को चादरों में लपेटकर और एक बोरी में बंद करके रखा गया था। पुलिस ने घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम को बुलाया। टीम को वहाँ पत्थर काटने की मशीन और खून के धब्बे मिले। पुलिस को इलाके में सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर भी कुछ सुराग मिले हैं।

बताया जा रहा है कि ये मोइन ने 3 निकाह किए थे, जिसमें पहली बीवी की बेटी के जन्म के समय मौत हो गई थी, तो दूसरी बीवी से तलाक हो गया था। आसमा के साथ उसका तीसरा निकाह था। वहीं, आसमा का भी ये दूसरा निकाह था, पहले शौहर से उसकी कोई औलाद नहीं थी।

मृतका आसमा के भाई शमीम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आसमा की देवरानी नजराना, एक भाई तख़लीम और एक अन्य भाई को नामजद किया गया। इनके अलावा तीन अज्ञात पर भी शक जताया गया है। मोईन सात भाइयों में तीसरे नंबर का था। मोईन के अन्य भाइयों के नाम सलीम, अनीस, कलीम, तसलीम, मोमिन, अमजद हैं। वहीं, पुलिस ने नजराना समेत दो अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एडीजी जोन, कमिश्नर, डीआईजी, डीएम और एसएसपी भी मौके पर पहुँचे और हत्या की वजह जानने के लिए क्राइम सीन भी रीक्रिएट कराया।

एसएसपी विपिन टाडा ने बताया कि पुलिस हर पहलू से जाँच कर रही है। सभी संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि हत्याकांड में कई लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस और प्रशासन ने जनता को भरोसा दिलाया है कि दोषियों को जल्द ही कानून के कठघरे में लाया जाएगा।

अरविंद केजरीवाल के लिए यूपी-बिहार के वोटर फर्जी: BJP बोली- बांग्लादेशी-रोहिंग्या को बसाने वाली AAP को दूसरे लोग पसंद नहीं

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में जारी विधानसभा चुनावों के नाम पर स्कैम का आरोप लगाया है। यूपी-बिहार के लोगों को फर्जी वोटर बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर रही है और स्थानीय चुनाव अधिकारी बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं। वहीं, भाजपा ने केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा है।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर करते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में चुनाव के नाम पर स्कैम हो रहा है। बीजेपी बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेराफेरी कर रही है। स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं। आज चुनाव आयोग से मिलकर शिकायत की है। अगर चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो दिल्ली में लोकतंत्र की हत्या हो जाएगी।”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे दिल्ली के मुख्यमंत्री आतिशी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और सांसद संजय सिंह के साथ चुनाव आयुक्त से मिलने के लिए गए। वहाँ उन्होंने भाजपा को लेकर कई शिकायतें कीं। केजरीवाल ने कहा, “हमारे कुछ मुद्दे थे। इनमें से एक था दिल्ली विधानसभा के अंदर 15 दिसंबर से 7 जनवरी के बीच यानी 22 दिन में 5500 वोट कटने के लिए आ गए हैं।”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ एक लाख मतदाता हैं और इसमें से साढ़े पाँच लाख वोट काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी अधिकारियों ने जब इन मामलों में सुनवाई की तो पता चला इन लोगों में से किसी ने वोटर लिस्ट में से अपना नाम हटाने का आवेदन नहीं दिया था। केजरीवाल का कहना है कि इन लोगों के नाम से फर्जी आवेदन दिया गया था।

केजरीवाल ने घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा, “इसका मतलब ये हुआ कि बहुत बड़े स्केल पर स्कैम चल रहा है। बहुत बड़ा फ्रॉड चल रहा है। पिछले 15 दिनों में 13000 नए वोटरों का नाम जोड़ने के लिए आवेदन आए हैं। ये लोग अचानक कहाँ से आ गए? जाहिर है ये यूपी-बिहार से ला-ला कर… यूपी और आसपास के स्टेट से ला-ला कर फर्जी वोट बनवा रहे हैं ये लोग (भाजपा)।”

उन्होंने कहा कि किसी विधानसभा में 18.5 प्रतिशत वोट इधर-उधर कर दिए जाएँ तो ये चुनाव थोड़े है, ये तो तमाशा है… नाटक है। इसके अलावा, केजरीवाल ने नई दिल्ली से भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वर्मा पर नोट बाँटने और जॉब लगाने जैसे वोटरों को लुभाने का आरोप लगाया और इसकी शिकायत भी चुनाव आयोग से की।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “प्रवेश वर्मा खुलेआम नई दिल्ली क्षेत्र में जॉब कैंप लगा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। खुलेआम पैसे बाँटे जा रहे हैं। हेल्थ कैंप में खुलेआम चश्मे बाँटे जा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि 15 जनवरी को जॉब फेयर लगाए जाएँगे। ये सब कुछ चुनाव आयोग के विभिन्न नियम-कानूनों के तहत भ्रष्ट कृत्य के तहत आता है।”

उन्होंने कहा कि प्रवेश वर्मा के घर पर रेड मारकर पता लगाने और चुनाव लड़ने से रोकने का आग्रह किया। उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर भी आरोप लगाए और भाजपा के कथित गलत कामों को उनके द्वारा आसान बनाने का आरोप लगाया गया। उन्होंने लोकल DO और ERO को हटाने की माँग की। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों को भाजपा को रोकने की हिम्मत नहीं है।

अरविंद केजरीवाल द्वारा यूपी-बिहार के लोगों को ‘फर्जी’ वोटर कहने पर भाजपा ने जबरदस्त पलटवार किया है। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में रह रहे यूपी-बिहार के लोग अरविंद केजरीवाल के लिए फर्जी! लेकिन रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिये इनके रिश्तेदार? अब नहीं चाहिए आप-दा…।”

बता दें कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम आकर दिल्ली में बसे। उन्हें दिल्ली सरकार बिजली-पानी जैसी मुफ्त सुविधाएँ लगातार उपलब्ध करा रही हैं, जिसको लेकर AAP सरकार की बड़े पैमाने पर आलोचना होती है। इन बांग्लादेशी-रोहिंग्याओं के पहचान का काम बड़े पैमाने पर शुरू किया गया है।

10 लोगों की जिंदा जलकर मौत, 10000 इमारतें बिलकुल खाक: पुलिस को शक- कैलिफोर्निया के जंगल में खुद नहीं लगी आग, जाँच में 1 गिरफ्तार

अमेरिका लॉस एंजिल्स समेत बाकी कैलिफोर्निया के बाकी इलाकों में में लगी आग के चलते शहर को भी काफी नुकसान हुआ है। इस आग के कारण अब तक 10 लोग मारे जा चुके हैं जबकि 10000 से अधिक स्कूल, अस्पताल, घर और बाकी ढाँचे जल चुके हैं। आग 30000 एकड़ इलाके में फ़ैल चुकी है। इस आग के पीछे साजिश का एंगल भी सामने आया है। इस संबंध में पुलिस ने एक आदमी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अपनी शुरुआती जाँच के आधार पर आग जानबूझकर लगाई गई, यह बताया है।

अमेरिकी मीडिया के अनुसार, पकड़ा गया व्यक्ति एक बेघर है और उसकी उम्र 30-40 साल के बीच है। यह भी बताया गया है कि उसे पहले स्थानीय लोगों ने पकड़ा जिसके बाद पुलिस पहुँची। उसे आग लगने के 20-30 मिनट के भीतर पकड़ा गया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके पूछताछ चालू कर दी है। उस पर आग की तीसरी लहर ‘केनेथ फायर’ लगाने का आरोप है। हिरासत में लिए गए शख्स के विषय में अधिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लॉस एंजिल्स पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि वह केनेथ फायर को अपराध का ही मामला मान रहे हैं।

अमेरिकी फायर विभाग ने अभी आग का स्पष्ट कारण नहीं बताया है। इस आग के पीछे साजिश मानने के चलते और भी कई कारण बताए जा रहे हैं। दरअसल, लॉस एंजिल्स में इससे पहले भी आग लगती आई है। इन जंगलों में आग का कारण या तो बिजली गिरना या फिर जमीन पर लगे बिजली के तार रहे हैं। हालाँकि, इस बार लगी आग से पहले ऐसा बिजली गिरने का कोई भी मामला सामने नहीं आया था लेकिन इसने विकराल रूप धारण कर लिया।

लॉस एंजिल्स में पहले आग की दो लहरें आईं। इन्हें ईटन और पैलिसेड फायर का नाम दिया गया। इसके बाद गुरुवार (9 जनवरी, 2025) को केनेथ फायर चालू हो गई। अब तक इन आग के चलते लगभग 2 लाख लोगों को इलाका खाली करने का आदेश दिया जा चुका है। 10000 ढाँचे जल चुके हैं। इसके चलते लगभग 3 लाख लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ रहा है। कैलिफोर्निया के गवर्नर के इसके चलते राज्य में आपातकाल की घोषणा कर दी है। आग पर पूरी तरीके से काबू नहीं पाया जा सका है।

आग ने हॉलीवुड इंडस्ट्री को भी काफी नुकसान पहुँचाया है। यह लॉस एंजिल्स शहर में ही स्थित है। इसके चलते कानून व्यवस्था की स्थिति भी पैदा हो रही है और लुटेरे बचा हुआ सामान लूटना चाह रहे हैं। पुलिस और फायर डिपार्टमेंट इस आग को बुझाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि, कैलिफोर्निया के जंगल में आग पहली बार नहीं लगी। पिछले 50 सालों में कैलिफोर्निया में 78 बार आग लग चुकी है। चूँकि इन जंगलों के पास रिहायशी इलाके ज्यादा हैं इसलिए इस आग से होने वाला नुकसान बहुत ज्यादा होता है।

परमाणु बम-एनर्जी बनाने वाले 17 पाकिस्तानियों को बंदूक से डरा कर तालिबानियों ने किया अपहरण: खदान से यूरेनियम भी लूटा, Video जारी कर दी जानकारी

पाकिस्तान अपने ही न्यूक्लियर साइंटिस्ट, इंजीनियरों को नहीं बचा पा रहा है। पाकिस्तान के तहरीक-ए-तालिबान-पाकिस्तान (TTP) ने उसके 17 साइंटिस्टों-इंजीनियरों-कामगारों को अगवा कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लक्की मरवत इलाके में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमिशन के 17 कर्मचारियों को अगवा कर लिया। इन कर्मचारियों को कबूल खैल एटॉमिक एनर्जी माइनिंग प्रोजेक्ट में काम के दौरान किडनैप किया गया। इस दौरान टीटीपी के आतंकियों ने कर्मचारियों की गाड़ियाँ भी जला दीं। टीटीपी ने एक वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि इन कर्मचारियों को तब तक रिहा नहीं किया जाएगा, जब तक पाकिस्तान की जेलों में बंद उनके कैदियों को छोड़ा नहीं जाता। वीडियो में अगवा कर्मचारी पाकिस्तान सरकार से अपनी रिहाई के लिए बातचीत करने की अपील करते नजर आए।

खास बात ये है कि पाकिस्तान सरकार ने पहले तो नकार दिया कि ऐसी कोई घटना भी हुई है, फिर कहा कि वो उसके आदमी ही नहीं थे… लेकिन तालिबान ने पाकिस्तानी सरकार को पूरी दुनिया के सामने बेपर्दा करते हुए अगवा किए कर्मचारियों के आईडी कार्ड तक जारी कर दिए, तब जाकर पाकिस्तान ने माना कि उसे तालिबान ने बड़ी चोट दी है। इसके बाद तालिबान ने 8 अगवा लोगों को रिहा कर दिया, तो पाकिस्तान ये दावा करते हुए खुद की पीठ थपथपाने लगा कि उसने 8 बंधकों को छुड़ा लिया है, लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान को फिर से आईना दिखाते हुए कहा कि उसने खुद ही अगवा किए लोगों को छोड़ा है और महत्वपूर्ण लोगों को अपने पास रखा है, ताकि वो अपने लड़ाकों को पाकिस्तान की कैद से आजाद करा सके।

कुछ समय बाद पाकिस्तान सरकार ने दावा किया कि उन्होंने 17 में से 8 अगवा कर्मचारियों को बचा लिया है। इसमें कुछ घायल भी हैं। हालाँकि, टीटीपी ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि उसने खुद ही इन बंधकों को छोड़ा है। तालिबान ने सभी बंधकों की आईडी भी जारी की है। TTP ने ये भी है कि उसने इन लोगों को सिर्फ सौदेबाजी के लिए अपने पास रखा है, वो इन्हें नुकसान नहीं पहुँचाएगा।

अगवा लोगों में मजदूर और एटॉमिक एनर्जी कमिशन के अधिकारी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि टीटीपी ने खदान से यूरेनियम भी लूटा है, तो परमाणु उर्जा-बम बनाने के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण खनिज है। लक्की मरवत इलाका अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और टीटीपी की गतिविधियों का गढ़ माना जाता है।

संभल में हिंसा वाली एक और जगह बन रही पुलिस चौकी, कुख्यात वाहन चोर शारिक साठा की जब्त की गई है जमीन: आतंकी दाऊद इब्राहिम और ISI संग मिल कर रहा काम

उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा के बाद पुलिस ने विवादित शाही जामा मस्जिद के ठीक सामने पुलिस चौकी बनाई है। अब आतंकी दाऊद इब्राहिम के करीबी शारिक साठा से जब्त की गई जमीन पर पुलिस चौकी बनाने का काम शुरू किया गया है। देश के सबसे बड़े ऑटोरिक्शा चोर की जब्त यह जमीन हिंदूपूरा खेड़ा इलाके में स्थित है। हिंसा की चपेट में यह इलाका भी आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने साठा की करीब एक करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी।

दरअसल, कोर्ट के आदेश पर विवादित जामा मस्जिद ढाँचे का सर्वे किया जा रहा था। सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को कट्टरपंथी मुस्लिमों ने सर्वे टीम और पुलिस पर हमला कर दिया था। हजारों की भीड़ ने पुलिस पर फायरिंग, पथराव और वाहनों में आगजनी की थी। इसी दौरान हिंदूपुरा खेड़ा क्षेत्र में भी भीड़ ने हिंसा की थी। यहाँ एक दरोगा की मैगजीन लूटकर बाइक में आग लगा दी थी।

इसके साथ ही डीएम और एसपी की मौजूदगी में कट्टरपंथियों ने पुलिस पर पथराव व फायरिंग की गई थी। इसी जगह पर गोली लगने से पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई और उनके पीआरओ संजीव कुमार घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने कई आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरे आरोपितों की अभी भी तलाश जारी है।

इसके पहले विवादित मस्जिद के ठीक सामने खाली पड़ी जमीन पर पुलिस चौकी का निर्माण कराया गया है। उसका नाम सत्यव्रत चौकी रखा गया है। संभल का प्राचीन नाम सत्यव्रत नगर ही है। अब हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित दूसरी जगह हिंदूपुरा है, जहाँ एक दूसरी चौकी का निर्माण कराया जा रहा है। संभल हिंसा में शारिक साठा की संलिप्तता सामने आई है। उसने यहाँ हथियार एवं पैसे आदि भेजे थे।

मूल रूप से मेरठ के दीपा सराय का रहने वाला शारिक साठा की यह जमीन गैंगस्टर ऐक्ट में जब्त की गई है। पिछले कुछ समय समय साठा भागकर दुबई में रह रहा है। शारिक साठा कभी ट्रक और बस पर हेल्पर का काम करता था। इसके बाद अपराधियों के संपर्क में आया और चोरी वह लूटपाट, चोरी, डकैती और वाहन चोरी जैसी घटनाओं में शामिल हो गया।

शारिक साठा ने एक गैंग बनाया और वाहनों की चोरी करने लगा। वह लग्जरी गाड़ियों तक को नहीं छोड़ता था। गाड़ियों को चुराने के बाद वह उन्हें नेपाल में बेच देता था। इस तरह शारिक साठा भारत के सबसे बड़े वाहन चोर गिरोह का सरगना बन बैठा। उसने खूब अवैध कमाई भी की। एक मामले में शारिक को जेल हुई और साल 2018 में वह जेल से छूटा तो फर्जी पासपोर्ट बनाकर दुबई भाग गया।

कुछ रिपोर्ट का कहना है कि वह साल 2020 में दुबई भागा था। साल 2021 में उसके दुबई में होने का पता चला था। साठा पर देश भर में 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। नखासा में ही लूट, डकैती, वाहन चोरी, गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत 12 मामले दर्ज हैं। एसपी कृष्ण विश्नोई के मुताबिक, पुलिस उसके आपराधिक नेटवर्क को उजागर करने के लिए अन्य राज्यों से भी जानकारी जुटा रही है।

दुबई भागने के बाद वह उसका गैंग गाड़ी चोरी के बजाय जाली नोट का कारोबार करते हैं। शारिक साठा इस काम के लिए पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI और दाऊद इब्राहिम के गैंग से जुड़ा हुआ है। उसके चेले भारत में उसका कारोबार संभालते हैं और जरूरत पड़ने पर दुबई उससे मिलने भी जाते हैं। 2021 में उसके दो गुर्गे ₹4 लाख के नकली नोट के साथ पकड़े गए थे।

उन्होंने उसका नाम लिया था। यह दोनों भी संभल के रहने वाले थे। संभल पुलिस को अब शक है कि 24 नवंबर, 2024 को हुई हिंसा में उसके गुर्गे शामिल थे और उसने ही दुबई से इन्हें हिंसा के लिए मदद भेजी थी। पुलिस को हिंसा के कुछ दिन बाद नाली में पाकिस्तान की सरकारी आयुध फैक्ट्री में बने कारतूस भी बरामद किए थे। आशंका है कि कारतूस भी किसी गुर्गे के जरिए शारिक ने ही भिजवाए थे।

‘किसी से युद्ध को लेकर निष्पक्ष नहीं… लेकिन शांति चाहता हूँ’: PM मोदी ने अपने पहले पॉडकास्ट में बताई ‘दिल्ली को समझने’ वाली बात भी

तकनीक का इस्तेमाल करके अलग-अलग माध्यमों के जरिए जनता से जुड़े रहने का प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से करते रहे हैं। कभी ‘मन की बात’ करके, तो ‘कभी परीक्षा पे चर्चा’ के जरिए। इस बार उन्होंने एक नए माध्यम को आधार बनाया है-पॉडकॉस्ट को।

पीएम मोदी ने पहली बार जीरोधा के फाउंडर निखिल कामथ को अपना इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने राजनीति से परे भी कई मुद्दों पर चर्चा की। वीडियो में जब कामथ ने उनसे कहा, “मैं यहाँ आपके सामने बैठा हूँ और बात कर रहा हूँ, लेकिन मुझे घबराहट बहुत ज्यादा है।। यह मेरे लिए एक कठिन बातचीत है।”

इस पर पीएम ने निखिल कामथ से कहा कि वो भी पॉडकॉस्ट में पहली बार आए हैं। उन्हें भी लग रहा है कि पता नहीं कि ये पॉडकॉस्ट दर्शकों को पसंद आएगा या नहीं।

प्रधानमंत्री ने इस पॉडकॉस्ट में कामथ से कहा कि राजनीति में हर इंसान को एक मिशन से आना चाहिए। उन्होंने इस इंटरव्यू में ये भी पक्ष रखा कि आज के समय दुनिया जिस युद्ध की स्थिति में है उसमें उनका ये मत साफ है कि वो न्यूट्रल नहीं है बल्कि सिर्फ शांति चाहते हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में पहले और दूसरे टर्म को लेकर पीएम ने कहा- “पहली टर्म में तो लोग मुझे भी समझने की कोशिश करते थे और मैं भी दिल्ली को समझने की कोशिश कर रहा था।”

मानवीयता को लेकर उन्होंने कहा- “जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मेरा एक भाषण था और सार्वजनिक रूप से मैंने कहा था गलतियाँ होती हैं। मुझसे भी होती हैं। मैं भी मनुष्य हूँ, मैं कोई देवता थोड़ी हूँ।’

कामथ ने जब पीएम से कहा कि वो एक ऐसे घर में पले-बढ़े जहाँ राजनीति को काफी नकारात्मक रूप से देखा जाता था तो इस पर पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर आपको अपनी कही बातों पर अब भी यकीन होता तो आज हम लोग इस बातचीत को ही नहीं कर रहे होते।

बता दें कि इस ट्रेलर के पॉडकॉस्ट को यूट्यूब, एक्स पर बहुत पसंद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी झलक शेयर की है। उन्होंने इस ट्रेलर को साझा करते हुए कहा- “मुझे आशा है कि आप सभी इसका उतना ही आनंद लेंगे जितना हमें आपके लिए इसे बनाने में आया!”

CJI और सुप्रीम कोर्ट के बाकी जजों के खिलाफ जाँच नहीं कर सकता लोकपाल, लेकिन PM, केन्द्रीय मंत्री समेत बाक़ी सभी दायरे में: शिकायत पर दिया फैसला

लोकपाल ने कहा है कि देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के बाकी जज उसकी जाँच के दायरे में नहीं आते। लोकपाल ने यह फैसला पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ के खिलाफ दर्ज करवाई गई एक शिकायत पर सुनाया है। उनके खिलाफ शिकायत तब की गई थी जब वह CJI के पद पर थे। लोकपाल ने यह शिकायत भी ख़ारिज कर दी।

लोकपाल ने इस शिकायत को लेकर कहा, “असल मुद्दा, जिसका उत्तर सबसे पहले दिया जाना चाहिए, वह यह है कि क्या CJI या सुप्रीम कोर्ट के जज लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 14 के अनुसार लोकपाल के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।” लोकपाल कानून की धारा 14 में उन पदों के नाम नाम लिखे हैं, जिनके खिलाफ लोकपाल जाँच हो सकती है।

लोकपाल क़ानून की धारा 14 में लिखा है कि देश के प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, सांसद और ग्रुप A,B,C और D के कर्मचारी तथा किसी सोसायटी, ट्रस्ट, बोर्ड, बॉडी के सदस्य या चेयरमैन समेत और किसी भी शख्स, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का आरोप है, उसके खिलाफ लोकपाल जाँच कर सकता है।

CJI के खिलाफ की गई शिकायत पर सुनवाई में लोकपाल ने इसी धारा 14 का हवाला देते हुए कहा कि जाँच सिर्फ उनके खिलाफ हो सकती है जिनका नाम इस क़ानून में लिखा है। लोकपाल ने अपने फैसले में कहा कि यही लोग लोकपाल की जाँच के दायरे में आते हैं।

लोकपाल ने कहा कि इसमें CJI या सुप्रीम कोर्ट के जज का नाम नहीं लिखा गया ऐसे में यह इसके अंतर्गत नहीं आते। इसके अलावा लोकपाल ने 2013 के क़ानून में दी गई ‘बॉडी’ की परिभाषा को भी सुप्रीम कोर्ट के ऊपर नहीं लागू पाया। लोकपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ना ही संसद के किसी अधिनियम से बना है और ना ही वह पैसे के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर है, ऐसे में वह ‘बॉडी’ की परिभाषा में नहीं आता।

लोकपाल ने यह सभी तर्क रखते हुए अपने फैसले में कहा, “ऐसे में इस दृष्टांत के अनुसार CJI और सुप्रीम कोर्ट के बाकी कार्यरत जज लोकपाल की जाँच के दायरे में नहीं आएँगे।” लोकपाल ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ के खिलाफ दायर की शिकायत भी ख़ारिज कर दी। लोकपाल ने कहा कि हाई कोर्ट के जजों के मामलों में यह नियम लागू नहीं होगा।

इस शिकायत में आरोप था कि पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है और एक राजनीतिक पार्टी तथा एक राजनीतिक व्यक्ति को फायदा पहुँचाया है, जो कि शक्तियों का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार है। यह शिकायत अक्टूबर, 2024 में दी गई थी, तब डीवाई चंद्रचूड़ CJI थे। वह नवम्बर, 2024 में रिटायर हो गए थे।

यह फैसला लोकपाल के चेयरमैन के तौर पर जस्टिस AM खानविलकर ने सुनाया है। जस्टिस खानविलकर स्वयं भी सुप्रीम कोर्ट में जज रहे हैं। वह 2016 में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किए गए थे। उनका सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर कार्यकाल 2022 तक रहा था।

कर्नाटक के सरकारी अस्पताल ने नहीं दिया आयुष्मान योजना का लाभ, वरिष्ठ नागरिक ने की आत्महत्या: NRHC ने माँगा सरकार से जवाब

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक सरकारी अस्पताल द्वारा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत इलाज से इनकार किए जाने पर 72 वर्षीय एक वरिष्ठ नागरिक ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लेते हुए केंद्र और कर्नाटक सरकार से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट माँगी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (Cancer Hospital) में हुई, जहाँ अस्पताल ने एक वरिष्ठ नागरिक को ₹5 लाख की चिकित्सा सहायता देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि राज्य सरकार के आदेश अभी तक नहीं पहुँचे हैं। एनएचआरसी ने इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला बताते हुए कहा कि अगर वरिष्ठ नागरिकों को उनके कल्याण के लिए बनाई गई योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, तो यह उनके जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी कर यह भी पूछा है कि राज्य और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में योजना का क्रियान्वयन कैसा चल रहा है।

गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana -AB PM-JAY) का उद्देश्य गरीब और वरिष्ठ नागरिकों को स्पेशल हेल्थ सर्विस देना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को इलाज के लिए ₹5 लाख तक का कवर दिया जाता है। लेकिन बेंगलुरु की इस घटना ने दिखाया कि योजना के सही ढंग से लागू न होने के कारण नागरिकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कर्नाटक में अन्य सरकारी अस्पतालों में भी योजना के तहत इलाज देने में रुकावटें आ रही हैं। योजना के लाभार्थियों से अनायास के कागजों की माँग की जा रही है और फिर सरकारी आदेशों की कमी के नाम पर योजनाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है।