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सनातन परंपरा: दलित श्रद्धालु को कंधे पर बिठा ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी रंगनाथ स्वामी मंदिर ले गए पुजारी

तेलंगाना में सोमवार को समाजिक समता और समरसता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहाँ एक अर्चक (पुजारी) ने रवि नामक दलित को कंधे पर उठाया और मंदिर के अंदर ले गए। यह किस्सा तेलंगाना के खम्मम स्थित रंगनायकुला गुट्टा का है।

सोमवार (फरवरी 24, 2020) को खम्मम में ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी रंगनाथ स्वामी मंदिर (रंगनायकुला गुट्टा) में समाजिक समरसता वेदिका, नरसिंह वाहिनी और अन्य संगठनों के साथ मंदिर संरक्षण आंदोलन (टीपीएम) का आयोजन किया गया।

मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित गाँधी प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ शुरुआत करते हुए, सड़क के दोनों ओर सैकड़ों महिलाओं द्वारा नादस्वरम और कोल्लम के साथ एक बड़ी शोभा यात्रा निकाली गई। इसी दौरान भद्राचलम नरसिंह स्वामी मंदिर के अर्चक (पुजारी) कृष्ण चैतन्य ने श्रद्धेय तिरुप्पनलवार के चित्रण के रूप में वैष्णव नमम को धारण करने वाले रवि को उठा लिया और उन्हें मंदिर तक ले गए।

इस उत्सव में चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन भी शामिल थे। रंगराजन ने इस मौके पर कहा कि इसे एक वैष्णव आचार्य भगवद रामानुज की शिक्षाओं के उत्सव के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने एक गैर-भेदभावपूर्ण और समतावादी समाज के लिए संघर्ष किया। रंगराजन ने कहा, “सनातन धर्म में ईश्वर के बाद सभी को एक समान माना जाता है। तथाकथित भेदभाव केवल हाल के दिनों में ही शुरू हुआ है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम दुनिया में अलग-अलग लोगों के बीच आने वाले भेदभावों को खत्म करें।”

इस अवसर पर सीएस रंगराजन ने कहा, “आचार्य रामानुज ने उपदेश दिया कि हर कोई भगवान की दृष्टि में समान है और कोई भी ऊँचा या नीचा नहीं है। संत रविदास ने अपने उपदेशों से सभी वर्गों और समुदायों के लोगों को भक्ति मार्ग में मार्गदर्शन किया। दुनिया में विभिन्न प्राणियों के बीच आई विषमताओं को दूर करने की जिम्मेदारी हमारी है।”

रंगराजन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने बस यह दिखाने का प्रयास किया है कि सनातन धर्म ने सभी को भगवान के समान माना है और तथाकथित भेदभाव ने हाल ही के कुछ समय में सनातन की व्यवस्थाओं में बदलाव कर दिया है।

ऐसे समय में, जब देश में मजहबी तनाव पर चर्चा जारी हैं, तेलंगाना निरंतर ऐसे उदाहरण पेश करता आया है।
दो साल पहले भी चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन ने ही सबसे पहले अप्रैल 2018 में एक दलित युवक आदित्य परासरी को कंधे पर बिठाकर जियागुड़ा स्थित रंगनाथ स्वामी मंदिर के अंदर पहुँचाया था। तेलंगाना में होने वाली मुनि वाहन सेवा तमिलनाडु में 2700 साल से चले आ रहे समारोह का ही एक रूप है। यह समारोह मुख्य रूप से वैष्णव मंदिर में होते हैं और इनमें सनातन धर्म के रीति-रिवाज माने जाते हैं।

ट्रंप ने कहा- इस्लामी आतंकवाद के सफाए को प्रतिबद्ध हैं भारत-अमेरिका, $3 बिलियन का रक्षा करार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी भारत यात्रा के दौरान मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच कुल 3 करार पर हस्ताक्षर किए गए। एक MoU एनर्जी सेक्टर के लिए भी फाइनल किया गया। कुल 3 बिलियन डॉलर के रक्षा करार पर हस्ताक्षर किए गए। 5G नेटवर्क को लेकर भी दोनों नेताओं बीच चर्चा हुई। तकनीक और रक्षा, ये दोनों मुद्दे भारत और अमेरिका की इस बैठक के अहम मुद्दे थे। रक्षा डील के अंतर्गत भारत को अपाचे और एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर मिलेंगे, जो दुनिया में सबसे उत्तम तकनीक वाले हेलीकॉप्टर हैं।

बैठक के बाद संयुक्त बयान के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर इस्लामिक आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका अपने नागरिकों को कट्टर इस्लामी आतंकवाद से बचाने के लिए कृत संकल्पित हैं। इस दौरान पाकिस्तान की धरती से आतंकी गतिविधियाँ संचालित किए जाने की बात भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने मानी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत में जिस गर्मजोशी के साथ उनका और उनके परिवार का स्वागत किया गया, उससे वे अभिभूत हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत और यूएस के बीच फ्री और ओपन ट्रेड को बढ़ावा देने की बात कही। ट्रंप ने कहा:

“हमने भारत-अमेरिका रिश्ते के कुछ अहम पहलुओं को लेकर बातचीत की। रक्षा से लेकर सुरक्षा तक, एनर्जी क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक मुद्दे, व्यापर और ‘पीपल टू पीपल कनेक्शन’ को लेकर भी हमारी बातचीत हुई। सबसे अहम परिणाम ये निकला कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में रिश्ते और भी प्रगाढ़ हुए हैं। हमारे कॉमर्स मंत्रियों ने भी आपस में बैठक की है और जल्द ही उसके भी सकारात्मक परिणाम आएँगे। ये बहुत ख़ास दौरा है, ये अविस्मरणीय अनुभव रहा है, एकदम अद्वितीय।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि दोनों नेताओं के बीच लोगों की सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने को लेकर अहम बातचीत हुई। तीनों MoU के बारे में जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि एक एनर्जी सेक्टर में करार हुआ, दूसरा मेन्टल हेल्थ को लेकर और तीसरा तेल के क्षेत्र में। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 8 महीने में ये उनकी और राष्ट्रपति ट्रंप की पाँचवी मुलाकात है।

हम बड़े मकसद से पैदा हुए हैं, मिलकर करेंगे इस्लामी आतंकवाद का सफाया: मोटेरा में ट्रंप

ट्रंप ने लिखा- मेरे अच्छे दोस्त मोदी, कॉन्ग्रेसी मुखपत्र नेशनल हेराल्ड ने देश को ही बता दिया- Shit Hole

अब दिल्ली को जलाया, 20 साल पहले सिखों का कत्लेआम किया: तब क्लिंटन आए थे, आज ट्रंप दौरे पर हैं

पुलिस पर गोलीबारी करने वाला मोहम्मद शाहरुख़ गिरफ़्तार, स्वामी ने कहा- सेना बुला कर इनसे निबटो

दिल्ली में दंगाइयों ने सोमवार (फरवरी 24, 2020) को पूरे दिन कहर बरपाया। एक तरफ सोशल मीडिया पर लिबरलों व मीडिया का एक गिरोह उन्हें बचाने में लगा रहा, दूसरी तरफ़ दंगाइयों ने पुलिस कॉन्स्टेबल रतनलाल को मार डाला। एक व्यक्ति की तस्वीर वायरल हुई थी, जो हाथ में पिस्तौल लहराते हुए फायरिंग कर रहा था और पुलिसकर्मियों को धमका रहा था। सोशल मीडिया पर उसकी पहचान छिपाने की भरसक कोशिश की गई लेकिन वो विफल रहे। उक्त दंगाई का नाम मोहम्मद शाहरुख़ है, जिसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। मोहम्मद शाहरुख़ के साथ कई अन्य उपद्रवी भी चिह्नित किए गए हैं।

मोहम्मद शाहरुख़ की जब तक पहचान उजागर नहीं हुई थी, तब तक उसके नाम पर ‘भगवा आतंकवाद’ की बातें की जाती रही। जब उसकी पहचान सामने आ गई, तब शाहीन बाग़ में पिस्तौल लहराने वाले कपिल गुर्जर के साथ उसकी तुलना की जाने लगी। लिबरलों का गिरोह तब ‘इसका तो ठीक है लेकिन उसका क्या..’ वाले नैरेटिव पर उतर आया। शाहरुख़ के बारे में अभी ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाया है लेकिन पूछताछ के बाद उसके बारे में और भी जानकारी सामने आने की सम्भावना है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में शाहरुख़ ने पुलिस पर फायरिंग की थी। उसने कुल 8 राउंड फायर किए थे। उस वक़्त उसने लाल रंग की टीशर्ट पहन रखी थी।

वहीं भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यन स्वामी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि इस समस्या का समाधान सेना के द्वारा कराया जाए। स्वामी ने राजनाथ को सलाह दी कि वो शाह से कहें कि दिल्ली में सीएए विरोधी दंगाइयों से निपटने के लिए सेना की सहायता लें।

स्वामी ने कहा कि ऐसा करना भले ही लोकतान्त्रिक परंपरा का उल्लंघन करने के समान होगा लेकिन देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए ये आवश्यक है। स्वामी ने स्पष्ट कहा कि सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे दंगे देशविरोधी हैं और ये भी दंगाई भी देशद्रोही हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने स्वामी के बयान का समर्थन किया है।

उधर दिल्ली में अमित शाह ने एक उच्च-स्तरीय बैठक में सीएए विरोधी दंगों और हिंसा को लेकर बातचीत की। इस बैठक में शामिल होने वाले मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि इससे सकारात्मक परिणाम निकलेंगे। शाह ने इस दौरान पुलिस और विधायकों के समन्वय पर जोर दिया। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें अधिकारियों का आश्वासन मिला है कि पुलिसकर्मियों की कमी नहीं होने दी जाएगी और क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए परस्पर सहयोग के साथ काम किया जाएगा।

दिल्ली हिंसा पर एक्शन में शाह: बैठक से निकलकर बोले केजरीवाल- जरूरत पड़ी तो सेना बुलाएँगे

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा जारी है। हिंसा में मरने वालों की संख्या सात हो गई है, जिसमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। हालात को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई थी। इस मीटिंग में दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल, सीएम अरविंद केजरीवाल, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक, कॉन्ग्रेस नेता सुभाष चोपड़ा, बीजेपी नेता और सांसद मनोज तिवारी और बीजेपी विधायक दल के नेता रामबीर सिंह बिधुड़ी के साथ ही अन्य अधिकारी शामिल हुए।

बैठक समाप्त होने के बाद गृह मंत्रालय की तरफ से बताया गया कि बैठक में नफरत फैलाने वाले मुद्दों, पुलिस-विधायकों के बीच समन्वय, पर्याप्त बल की तैनाती और अफवाहों को नियंत्रित करने पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। वहीं केजरीवाल ने शांति बहाल करने के प्रयासों से सहमति जताते हुए कहा कि हर कोई चाहता है कि हिंसा रोकी जाए। बैठक में शांति बहाल करने के उपायों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस बैठक में पार्टी पॉलिटिक्स से उठकर बातचीत हुई। गृहमंत्री ने आश्वासन दिया है कि पुलिस की कमी नहीं होने दी जाएगी। शांति व्यवस्था कायम करने की हर कोशिश की जाएगी।

जब केजरीवाल से हालात पर काबू पाने के लिए सेना बुलाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “अगर इसकी जरूरत पड़ी तो ऐसा होगा। लेकिन अभी पुलिस कार्रवाई कर रही है। बैठक के दौरान हमें गृह मंत्री की तरफ से आश्वासन दिया गया है कि आवश्यकतानुसार पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मी तैनात किए जाएँगे।”

गौरतलब है नागरिकता संशोधन कानून को लेकर रविवार को हिंसा भड़की थी। सोमवार को कई जगहों पर आगजनी और पत्थरबाजी हुई। गोलियॉं भी चलाई गई। मंगलवार की सुबह भी मौजपुर और ब्रह्मपुरी में पत्थरबाजी और आगजनी हुई।

केंद्रीय गृह मंत्री ने इससे पहले सोमवार (फरवरी 24, 2020) शाम आपात बैठक की थी। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव एके भल्ला सहित दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को सख्त हिदायत दी गई थी कि किसी भी तरह से जल्दी से जल्दी हालात पर काबू पाएँ। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को सतर्क रहने को कहा गया था। साथ ही कहा गया था कि अगर जरूरत महसूस हुई तो केंद्र सरकार अन्य कड़े कदम उठाने से भी नहीं चूकेगी।

बिना रिसर्च के हैप्पीनेस क्लास: केजरीवाल का प्रपंच, मेलानिया को बेचा जा रहा है प्रोपेगेंडा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के दौरे पर है। वे दिल्ली में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर विचार-विमर्श कर रहे थे, उसी दौरान उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में थीं। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप की पत्नी दिल्ली के स्कूलों में चल रहे हैप्पीनेस क्लास को देखने पहुँची थीं।

क्या है हैप्पीनेस क्लास?  

दिल्ली सरकार ने जुलाई 2018 में इस कार्यक्रम को कई NGO की मदद से कंटेंट तैयार कर लागू किया। हैप्पीनेस में मुख्य रूप से माइंडफुलनेस, कहानी और गतिविधियाँ शामिल हैं। प्रतिदिन कक्षा की शुरुआत 2 मिनट ध्यान करने से शुरू होती है। वहीं 45 मिनट की एक विशेष कक्षा प्रतिदिन कक्षा 3 से 8वीं तक के बच्चों के लिए आवंटित है। इसमें कहानियाँ सुनाई जाती है। कहानी के साथ-साथ कई गतिविधियाँ भी शामिल होती है।

ध्यान सुनने में भले भारतीय लगती हो, कहानियाँ सेक्युलर/लिबरल विचारों की उस मानसिकता से रची गढ़ी मालूम पड़ती है जो गरीब के बच्चों को ख़राब से बढ़िया बनाने की सोच रखती है। मानों भारत में गरीब के बच्चे और उनका परिवार हिंसक, असभ्य और तमाम बुराइयों से घिरे होते है, जिन्हें कहानियाँ सुनाकर बदला जा सकता है।

इधर हजारों बच्चों को स्कूल से निकाला, उधर ख़ुश रहने का दिखावा

जुलाई 2018 में आनन-फानन में हैप्पीनेस क्लास की शुरुआत की गई थी। तब यह साफ़ समझ में आ रहा था कि यह बिना किसी तैयारी के स्कूलों में थोपा गया कार्यक्रम है। जब दिल्ली सरकार दुनियाभर में बच्चों को ख़ुश रखने के कार्यक्रम शुरू करने का ढिंढोरा पीट रही थी, ठीक उसी समय दिल्ली के स्कूलों से जुड़े हजारों बच्चे रो रहे थे, उनके गरीब माँ-बाप अपने बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित और परेशान थे।

दरअसल वर्ष 2017-18 के एकेडमिक सत्र में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में डेढ़ लाख से अधिक बच्चें 9वीं कक्षा से लेकर 12वीं तक में फेल हो गए थे। फेल होने के बाद कानूनन इन्हें दुबारा नामांकन मिलना चाहिए था। लेकिन सरकार की अघोषित नीति के तहत फेल हुए दो तिहाई से अधिक बच्चों को दुबारा एडमिशन लेने ही नही दिया गया। दिल्ली हाई कोर्ट में सोशल जूरिस्ट बनाम दिल्ली सरकार के मामले में सुनवाई हुई तो यह पता लगा कि 10वीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षा में फेल हुए 91 फीसदी बच्चों को दुबारा नामांकन नही दिया गया। वहीं 9वीं व 11वीं में फेल हुए क्रमशः 52 एवं 58 फीसदी बच्चों को स्कूलों से बाहर निकाल दिया गया। अगर आँकड़ों की बात करें तो फेल हुए 1,55,436 में से 1,02,854 बच्चों को स्कूली व्यवस्था से बेदखल कर दिया गया। जब इतने बच्चे कोर्ट का चक्कर लगा रहे थे, रो-बिलख रहे थे, सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए ख़ुश रहने का कार्यक्रम लॉन्च कर रही थी।

कहानी सुनाने के लिए महत्वपूर्ण विषयों के क्लास किए ख़त्म

हैप्पीनेस क्लास की जब शुरुआत हुई तो इसे चलाने के लिए को-करिकुलर एक्टिविटी के दोनों क्लास खत्म कर दिए गए। ड्राइंग व संगीत के 3 में से 2 क्लास, फिजिकल एजुकेशन/स्पोर्ट्स के 3 में से 2 क्लास खत्म करके हैप्पीनेस को आवंटित कर दिए गए। बात यही नहीं खत्म हुई। हिंदी और तीसरी भाषा (पंजाबी, संस्कृत आदि) के भी एक-एक क्लास हैप्पीनेस को आवंटित कर दिए गए।

जिस दिल्ली का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर हुए नेशनल अचीवमेंट सर्वे में बेहद ख़राब रहा हो, हिंदी के मामले में जो दिल्ली नीचे से टॉपर बना हो, उस दिल्ली में हिंदी के क्लास कम करके कहानी सुनाने की कक्षा लगाना समझ से परे है।

अपने रिसर्च के दौरान मुझे कई स्कूलों के बच्चों ने बताया कि संस्कृत की कक्षा लगभग नहीं के बराबर चलती है। अगर चलती है तो उसमें ड्राइंग की कक्षा लगाई जाती है। कई स्कूलों के बच्चों ने बताया कि उनकी क्लास में ज्यादातर समय हैप्पीनेस की कहानियों में ही गुजरता है। वैसे समय में जब बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हो, ऐसे आरोपों को नजरअंदाज करना मुश्किल है कि कहानियों में ही उलझा कर बच्चों को मूल पढ़ाई से अलग की बातों में उलझाए रखने में ही सरकार की दिलचस्पी है।

बच्चों से बात करके लगा कि कहानियों की आड़ में पढ़ने के कौशल पर ध्यान नही दिया जा रहा। यही बच्चे जब फेल हो जाते है तो उन्हें स्कूलों से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

आधी अधूरी तैयारी के लॉन्चिंग, बिना रिसर्च के दावे अनगिनत

हैप्पीनेस क्लास की जब 2018 में शुरुआत हुई थी तब नर्सरी से कक्षा-2, कक्षा 3 से 5 और कक्षा 6 से 8 के लिए अलग-अलग 3 टीचर हैंडबुक तैयार किए गए थे। लेकिन पिछले वर्ष हर कक्षा के लिए अलग-अलग हैंडबुक जारी किया गया। यानी चमत्कार की जो प्रक्रिया थी, वह न तो अच्छे से योजनाबद्ध थी, न ही पूरी तैयारी के साथ लागू की गई है।

यही नहीं, इस क्लास से होने वाले परिणाम पर कोई भी रिसर्च अबतक नहीं हुई है लेकिन पिछले एक साल से हैप्पीनेस क्लास पर मीडिया में सैकड़ों ख़बर आ चुकी है। खासकर जब से ट्रंप के पत्नी के स्कूल जाने की ख़बर आई है, हैप्पीनेस क्लास से जुड़ी ख़बरें धड़ाधड़ छप रही है।

चूँकि इस कार्यक्रम में किसी तरह की परीक्षा अथवा बच्चों के ऊपर हो रहे प्रभाव को आँकने की व्यवस्था नही है, इसलिए इस कार्यक्रम से होने वाले बदलाव की सारी कहानी संदिग्ध ही लगती है। शायद यही वजह है कि ब्रुकिंग इंडिया, ड्रीम अ ड्रीम संस्था दिल्ली सरकार के साथ अक्टूबर-नवम्बर, 2018 से इस कार्यक्रम के प्रभाव को आँकने के लिए काम शुरू हुआ है, जिसकी रिपोर्ट 9 महीने की अवधि में आने की उम्मीद है कि सच में इससे क्या फायदा हुआ है!

फिलहाल जैसे निर्मल बाबा डोसा खिलाकर पारिवारिक समस्या से निजात देने की बातें करते हैं, दिल्ली सरकार भी बिना किसी रिसर्च या रिपोर्ट के हैप्पीनेस क्लास के नामपर ऐसी ऐसी कहानियाँ गढ़ रही है जिसे सुनकर लगता है कि बड़ा ही चमत्कारिक कार्यक्रम दिल्ली के स्कूलों में चल रहा है। यही नहीं, यह बातें भी लोगों को बताई जा रही है कि इस कार्यक्रम से बच्चा ही नहीं, उसका परिवार भी इस हैप्पीनेस रूपी दैवीय चमत्कार से लाभान्वित हो रहा है।

दलाई लामा के नाम का इस्तेमाल

हैप्पीनेस क्लास को लोकप्रिय बनाने के लिए आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार ने दलाई लामा के नाम और कद का इस्तेमाल किया। दलाई लामा के हाथों ही हैप्पीनेस क्लास के पाठ्यक्रम को लॉन्च भी किया गया। इस क्लास के जरिए बच्चों में बड़े-बड़े बदलाव की बातें बताई गई। हैप्पीनेस क्लास को बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसके विश्व भर में लोकप्रिय होने की बात भी दिल्ली के शिक्षा मंत्री खूब करते हैं। अपने दावे के समर्थन में मीडिया में छपे कतरन दिखाते हुए इसे विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्रम बताते हैं।

पिछले साल हैप्पीनेस क्लास के एक वर्ष पूरे पर त्यागराज स्टेडियम में एक बड़ा जलसा भी आयोजित हुआ था। उस दौरान मेट्रो से लेकर दिल्ली के हर चौक-चौराहे पर बड़े बड़े होर्डिंग लगाए गए थे, जिनमें कुछ गिने-चुने बच्चों की कहानियाँ हैप्पीनेस क्लास के चमत्कारिक बदलाव के रुप में प्रस्तुत किए गए थे।

वामपंथी प्रोपेगेंडा का हिस्सा है हैप्पीनेस

धनी व्यक्ति के घर में चोरी हो जाए और चोर पकड़ा जाए तो सजा किसे मिलेगी?

इस आसान से सवाल का हर कोई यही जबाब देगा- सजा तो चोर को ही मिलेगी।

लेकिन दिल्ली सरकार के स्कूली बच्चों के लिए इसका जबाब कुछ अलग होगा। चोर ही नहीं चोरी जिसके घर में हुई, वह भी चोर है क्योंकि उसके पास पैसे है।

हैपीनेस क्लास के लिए तैयार टीचर हैंडबुक में वैसे तो बहुत सारी कहानी है, लेकिन कई कहानी लिबरल बनाने की पहली सीढ़ी हैं। “असली चोर कौन” शीर्षक से एक कहानी शामिल है, जो टिपिकल वामपंथी सोच से प्रेरित है, जो यह मानता है कि धनवान व्यक्ति चोर है। यह कहानी 6ठी से 8वीं तक के बच्चे को पढ़ाने के लिए SCERT और दिल्ली शिक्षा विभाग द्वारा तैयार की गई थी।

दरअसल आप सरकार में शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय अधिकतर लोग वामपंथी विचारधारा से जुड़े हुए लोग रहे है। आप सरकार के शुरूआती दिनों में पूरी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की वजाये गरीब, अमीर की नैरेटिव बनाते हुए दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों को विलेन बनाया गया। फिर प्राइवेट स्कूलों को बंद करके सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन पर लगाम लगाने की कोशिश हुई। सरकारी स्कूलों में साइंस, गणित, तकनीकी शिक्षा की वजाये केवल सोशल साइंस को बढ़ावा दिया, वही बच्चों को सरकारी खेल तमाशे में उलझाते हुए कहानी सुनाने को ही पढ़ाई-लिखाई माना गया, कहानियां गढ़कर वाहवाही बटोरने की कोशिश हुई। बच्चों के लर्निंग आउटकम पर कौन ध्यान दे।

कुछ नया नहीं है हैप्पीनेस

देश भर के सरकारी स्कूलों की तुलना दिल्ली के स्कूलों से करें तो सिद्धांतः यहाँ कुछ अनोखा नहीं हो रहा। देश के लगभग सभी राज्यों में टाइम टेबल का एक हिस्सा उन गतिविधियों पर जरूर केन्द्रित रहता है, जो बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के साथ-साथ बच्चों की जीवन शैली, व्यवहार और आम-जिन्दगी की बातों से उन्हें परिचय करवाए। हर राज्य के टाइम टेबल में एक अच्छा ख़ासा समय इस बात के लिए जरूर रहता है जो बच्चों को उनकी मनमर्जी के काम करने की छूट दे, जिनसे बच्चों को ख़ुशी मिले।

अलग बस इस मायने में है कि दिल्ली सरकार ने भारी-भरकम बजट खर्च कर, सरकार की सहयोगी अनेक संस्थाओं को उपकृत करके सेक्युलर/लिबरल कहानियों का संग्रह तैयार करवाई, गतिविधियाँ जोड़ी और आकर्षक बुकलेट के फॉर्म में उसे हर विद्यालय में मुख्यमंत्री/शिक्षामंत्री के फोटो और संक्षिप्त भाषण के साथ सभी स्कूलों तक पहुँचवा दिया। कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि हैप्पीनेस पाठ्यक्रम दशकों से स्कूलों में होनेवाली गतिविधियों की रि-पैकेजिंग है, जिसमें कहानियों का संग्रह और दैनिक जीवन के व्यावहारिक गुणों के बारे में विशेष जोर है। फर्क बस इतना है कि जहाँ बाकी राज्य में स्कूल प्रचार कर सकने में पीछे रहे, दिल्ली ने पैसे खर्च करके इसे बुकलेट का शक्ल दिया, दलाई लामा जी के हाथों से लॉन्च करवाया और पूरी दुनिया में अपनी PR एक्टिविटी के जरिए वाहवाही बटोरी।

बच्चा कितना ख़ुश है अथवा नहीं, इसका अंदाजा बाद में लगेगा, लेकिन फिलहाल जो भी ख़ुशी बच्चों को मिल रही है 8वीं तक, उनपर 9वीं आते-आते ग्रहण लगना तय है क्योंकि सरकार पढ़ाने पर ध्यान देने की बजाए अच्छा प्रदर्शन न करने की क्षमता आँकते हुए उन्हें फेल करेगी ताकि 10 वीं और फिर बाद में 12वीं की परीक्षा परिणाम सुधारा जाए और दुनिया को अच्छी तस्वीरें दिखाई जाए। शायद लाखों बच्चों की रोने और रोते-बिलखते बच्चों की तस्वीर दिल्ली के किसी और स्कूल के किसी हँसते हुए बच्चों के आगे दब जाएगी।

मध्य प्रदेश का टाइम टेबल

मध्य प्रदेश का टाइम टेबल

अनुसूचित जातियों और गरीब बच्चों के साथ खिलवाड़: दिल्ली की ‘शिक्षा क्रांति’ का काला सच

दिल्ली में शिक्षा क्रांति के दावे ऊँचे, हकीकत फीकी: 500 स्कूल नहीं खुले, कमरे गिनवा रही केजरीवाल सरकार

वीडियो: AAP ने किया दिल्ली की शिक्षा का खोखला दावा, सोशल मीडिया पर तस्वीरें दिखाने तक सीमित रहा स्कूलों का विकास

‘CAA विरोधी आंदोलन से पहले सांसद मौलाना बदरुद्दीन से मिला था शाहीन बाग़ का मास्टरमाइंड शरजील इमाम’

असम पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सोमवार (फरवरी 24, 2020) को फिर से देश विरोधी बयान देने के आरोप में गिरफ्तार शरजील इमाम को अदालत में पेश किया, जहाँ से उसे चार दिनों की रिमांड पर भेज दिया गया। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध आंदोलन के दौरान नई दिल्ली में आयोजित बैठक में धुबरी के सांसद व ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल से मुलाकात होने को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं।

असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया कि शरजील इमाम न केवल अजमल के साथ बल्कि असम के कई अन्य लोगों के साथ भी फोन पर संपर्क में था। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है। राज्य सरकार शरजील से पूछताछ से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रख रही है और जानकारी समय-समय पर सामने आती रहेंगी। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग शरजील के संपर्क में थे, उन्होंने अगर किसी गैरकानूनी मामले पर चर्चा की होगी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं असम बीजेपी प्रेसीडेंट रंजीत दास ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शरजील असम को देश से अलग करने की बात कर रहा था। इसलिए जो भी उसके संपर्क में था, उसकी जाँच होनी चाहिए। गौरतलब है कि इमाम को 19 जनवरी को बिहार से गिरफ्तार किया गया था। उसकी असम को देश से काट देने की घोषणा और देश विरोधी टिप्पणी के बाद असम पुलिस ने भी शरजील के खिलाफ मामला दायर किया था। गुवाहाटी लाए जाने से पहले शरजील को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया था।

शरजील पर जामिया मामले में हिंसा भड़काने का आरोप है। उसे उसे शाहीन बाग़ का मास्टरमाइंड भी बताया जाता है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शरजील के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी। शरजील ने यह भी कबूल किया कि देश में दंगा भड़काने के लिए उसने युवाओं से सड़कों पर उतरने की अपील की थी साथ ही शरजील ने जामिया में हुई हिंसा में भी अपने साथियों के साथ हिस्सा लिया था।

कट्टरपंथ की आग में भभक रही थी दिल्ली: सरदेसाई ट्विटर पर परोस रहे थे बच्चों के लिए झूठ, CBSE ने खोली पोल

फर्जी समाचार फैलाने के लिए पहचाने जाने वाले राजदीप सरदेसाई दिल्ली के तनावपूर्ण माहौल में भी सोशल मीडिया पर झूठ परोसने से बाज नहीं आए। दरअसल, सोमवार की देर रात सोशल मीडिया पर राजदीप ने सूचना डाली कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसक सीएए विरोध प्रदर्शनों के कारण सीबीएससी के एग्जाम नहीं होंगे।

हालाँकि, कुछ ही क्षणों में उनके इस झूठ का पर्दाफाश खुद सीबीएसई हेडक्वार्टर ने कर दिया। सीबीएसई हेडक्वार्टर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए आदरपूर्वक सरदेसाई को जवाब दिया कि जिस एरिया में वो सीबीएसई के एग्जाम न होने की बात कह रहे हैं, वहाँ तो कल (यानी आज) के लिए कोई एग्जाम सेंटर निर्धारित ही नहीं हैं।

CBSE HQ ने लिखा, “सर, कल सीबीएसई परीक्षा के लिए पूर्वोत्तर दिल्ली में कोई परीक्षा केंद्र नहीं हैं।”

Rajdeep Sardesai shares misleading info about CBSE exams in Delhi

अब आखिर जब सरेआम राजदीप सरदेसाई के झूठ से पर्दा उठ गया, तो राजदीप ने बड़ी शालीनता से सीबीएससी को धन्यवाद दिया और अपनी सफाई पेश की कि तथ्य तो यह है कि इलाकों में कल (यानी आज) स्कूल बंद रहेंगे। साथ ही अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रखने के लिए उन्होंने दिल्ली के शिक्षा मंत्री मंनीष सिसोदिया का ट्वीट भी रीट्वीट किया।

गौरतलब है कि अपने इस फर्जी सूचना वाले ट्वीट में राजदीप ने केवल छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को ही भ्रमित नहीं किया। बल्कि ये भी बताना चाहा कि स्थानीय नेता और अपराधिक गैंग मिलकर हिंसा कर रहे हैं, जिससे नागरिक प्रताड़ित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ निशाना साधते हुए पूछा कि क्या इनके ख़िलाफ़ एक्शन लिया जाएगा?

बता दें, सोशल मीडिया पर केवल राजदीप सरदेसाई ही नहीं बल्कि उनकी लिबरल गैंग के बहुत से पत्रकार कल रात सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे और इस नैरेटिव को गढ़ने का प्रयास करते रहे कि ये पूरी हिंसा भाजपा नेताओं के कारण और सीएए समर्थकों के कारण हुई है। जिन्होंने भगवे झंडे लेकर पत्थरबाजी और आगजनी की।

MeToo: 60 से ज्यादा महिला कलाकारों को बनाया हवस का शिकार, अब 5 से 25 साल तक की सजा, 11 मार्च को फैसला

साल 2017 में जिस METOO अभियान ने पूरे सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था। उसकी शुरुआत अमेरिकन अदाकारा एलिसा मिलानो ने की थी जिनका शोषण पूर्व फिल्म निर्माता हॉरवे विंस्टिन ने किया था। आज उसी हॉलीवुड के फिल्म निर्माता और मीटू के मुख्य आरोपित हॉर्वे विंस्टिन को न्यूयॉर्क की अदालत ने यौन उत्पीड़न और बलात्कार मामलों में दोषी पाया है। हालाँकि विंस्टिन के ख़िलाफ़ कोर्ट 11 मार्च को अपना फैसला सुनाएगा। लेकिन कहा जा रहा है उसे 5 साल से लेकर 25 साल तक की सजा हो सकती है।

जानकारी के अनुसार 2006 में पूर्व प्रोजेक्ट रनवे उत्पादन सहायक मिरियम हेली को ओरल सेक्स के लिए मजबूर करने के लिए विंनस्टीन को पहली डिग्री में क्रिमिनल सेक्स अधिनियम का दोषी पाया गया। जिसमें 5 साल से लेकर 25 साल तक की सजा होने का प्रावधान है। इसके अलावा उसे एक महिला के साथ थर्ड डिग्री रेप का भी दोषी पाया गया। जिसमें 4 साल तक की सजा पाने का प्रावधान है। इतने के बावजूद विंस्टीन एक अन्य मामले में लॉस एजेंल्स में भी मुकदमें का सामना कर रहा है।

कल मामले के सुनवाई करते हुए मैनहट्टन के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सी वाई वेंस ने कहा, “विन्स्टिन एक शातिर, यौन शिकारी है, जिसने अपनी शक्ति का इस्तेमाल अपने पीड़ितों को धमकाने, बलात्कार, हमला, छल, अपमानित करने और चुप कराने के लिए किया।” इस दौरान डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी ने हॉरवे विंस्टन के ख़िलाफ़ शिकायत करने वाली महिलाओं की बहादुरी को सराहा और कहा कि उनके हिम्मत के कारण ही ये संभव हो पाया।

बता दें, हॉ़लीवुड के पूर्व फिल्म निर्माता विंस्टिन के दोषी पाए जाने के बाद इस फैसले को टाइम्स संस्थान की सीईओ ने ‘न्याय के नया दौर को चिह्नित करने वाला’ बताया। साथ ही कई जानी-मानी हस्तियों ने भी इसकी सराहना की।

गौरतलब है कि विंस्टिन के ख़िलाफ़ साल 2017 में मीटू अभियान छिड़ने के बाद हॉलीवुड हिरोइन एनाबेला शियोरा ने भी उसपर आरोप लगाए थे कि विंस्टन ने उनका 1990 में बलात्कार किया और बाद में कई साल तक वे उनका यौन उत्पीड़न भी करता रहा।

यूँ तो मीटू अभियान के शुरू होने के बाद कई चौकाने वाले नामों का खुलासा आरोपितों के रूप में हुआ। मगर विंस्टिन पर तो इसके बाद गाज गिरीं। धीरे-धीरे पिछले सभी कुकर्मों का खुलासा होने लगा। एक्ट्रेस नाटैसिया माल्थे ने भी इस मामले के कुछ दिन बाद हार्वे पर उनके साथ जबरन हस्तमैथुन करने का आरोप लगाया था।इतना ही नहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स, और द न्यूयॉर्कर में इन दो खुलासों के बाद ये भी पता चला था कि 60 से अधिक महिलाओं ने उनके ऊपर यौन उत्पीड़न और बलात्कार करने का आरोप लगाया।

अलीगढ़: दंगाइयों ने पुलिसकर्मियों और मंदिरों पर किया पथराव, हिंदू समुदाय में रोष, कार्रवाई की माँग

अलीगढ़ के सबसे संवदेनशील ऊपरकोट क्षेत्र में रविवार (फरवरी 23, 2020) को हुए बवाल के बाद सोमवार (फरवरी 24, 2020) को भी शहर में तनाव की स्थिति रही। सीएए के विरोध में कई बाजार बंद रहे। रविवार की रात जमालपुर में धरने पर बैठे लोगों को हटाने में पुलिस को पसीना छूट गए। तड़के भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज व आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। वहीं, एएमयू के पास चुंगी गेट पर जाम लगाने की कोशिश की। शाम को सैकड़ों महिलाएँ जीवनगढ़ पुलिया पर बैठ गईं।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर सड़क पर जाम लगा दिया। देर रात तक प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का अथक प्रयास किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों से नोंकझोंक भी हुई। सोमवार सुबह 5 बजे तक पुलिस और उपद्रवियों के बीच गोरिल्ला युद्ध चलता रहा। उसके बाद पुलिस ने स्थिति पर काबू पाया। सोमवार सुबह फिर महिलाओं ने चुंगी गेट पर इकट्ठा होकर जाम लगा दिया। इस दौरान शमशाद मार्केट से जमालपुर तक की सभी दुकानें बंद रहीं।

सुबह 11 से शुरू हुआ क्रम शाम चार बजे तक चला। पुलिस हर बार टकराव को संभालती रही, लेकिन कोतवाली के बाहर पथराव कर उपद्रवियों ने हिंसा भड़का दिया। साथ ही उपद्रवियों ने पथवारी देवी मंदिर पर पथराव किया। वो यहीं पर नहीं रुके, आगे दो और मंदिरों पर ईंट-पत्थर फेंके। इससे हिंंदुओं में रोष व्‍याप्‍त हो गया। स्थानीय लोग विरोध में आ गए और महिलाएँ धरने पर बैठ गईं। हिंदू समुदाय के लोग उपद्रवियों पर कार्रवाई की माँग करने लगे।

स्थानीय मालती देवी का कहना है कि भीड़ में शामिल लोगों ने मंदिर पर ईंट-पत्थर मारे। सरकार से लड़ाई है तो वहाँ जाकर लड़े। उन्होंने कहा हमारे मंदिर पर पत्थर मारोगे तो हम भी बदला लेंगे। वहीं भाजपा मंडलअध्‍यक्ष देवेंद्र सैनी ने कहा कि रोजाना कहीं न कहीं प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन हम खामोश हैं। धरना शांतिपूर्वक करें। जगह-जगह बदतमीजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अशोक चौधरी ने कहा कि माहौल लगातार खराब किया गया। डेढ़ महीने से पुलिस की निष्क्रियता के चलते नाटक चल रहा है। प्रदर्शनकारियों के हौसले बुलंद है। उन्होंने शहर की अशांति के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया।

उल्लेखनीय है कि अलीगढ़ में शाहजमाल ईदगाह के बाहर पिछले काफी दिनों से धरना चल रहा है। गुरुवार रात आँधी-बरसात के चलते शाहजमाल ईदगाह के बाह टेंट लगाने की कोशिश की गई थी, जिसे पुलिस ने रोक दिया। इससे नाराज महिलाएँ शुक्रवार रात शहर कोतवाली आ गईं और प्रदर्शन के बाद धरने पर बैठ गईं। शनिवार शाम अधिकारियों ने शाहजमाल में टेंट लगवाने का अनुमति दे दी थी। रात को वहाँ टेंट भी लगा दिया गया, लेकिन शहर कोतवाली से महिलाएँ नहीं हटी। कोतवाली के बाहर एक धरना चल रहा था तो दूसरा प्रदर्शन मुख्य तिराहे पर था। दोनों तरफ से 50-100 लोगों के झुंड इधर-उधर घूम रहे थे। जहाँ से टोली गुजर रही थीं, तनाव बढ़ता जा रहा था।

दिल्ली दंगों पर पत्रकार, बॉलीवुड कलाकर, RJ ने की केजरीवाल की आलोचना, तुरंत UnFollow कर छुड़ाया पीछा

दिल्ली के जाफराबाद इलाके में हुई हिंसा के बाद अरविंद केजरीवाल की सरकार पर कई सवाल उठे। कानून, सत्ता, प्रशासन की लापरवाही को लेकर बड़ी-बड़ी नामी हस्तियों ने उनसे जवाब माँगा। इसी बीच उनके कई समर्थकों ने भी इस मामले पर उनकी चुप्पी की आलोचना की। आलोचना करने वालों में आर जे सायमा, अभिसार शर्मा, स्वाति चतुर्वेदी, स्वरा भास्कर आदि नाम प्रमुख रहे।

आरजे सायमा ने चाँद बाग में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा को लेकर अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने आप पार्टी का साथ छोड़ चुके योगेंद्र यादव का ट्वीट शेयर करते हुए अपनी भड़ास निकाली और रिप्लाई देते हुए अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “और यहाँ तक ​​कि यह घटना भी लोकप्रिय रूप से चुने गए लोगों की प्रतिक्रिया के लायक नहीं है।”

गौरतलब है कि आरजे सायमा के इसी ट्वीट के बाद अरविंद केजरीवाल का ट्वीट आया था। जिसमें उन्होंने एलजी और गृह मंत्रालय को टैग करते हुए ट्वीट किया और कानून-व्यवस्था को सुनिश्चित करने की गुहार लगाई। लेकिन बाद में दिल्ली सीएम ने आरजे सायमा को अनफॉलो कर दिया।

इसी प्रकार अभिसार शर्मा- जिन्हें पत्रकारिता जगत में कट्टर मोदी विरोधी माना जाता है। उन्होंने भी केजरीवाल से इस मामले पर बोलने की गुहार लगाई और कहा कि उन्हें अपनी अवसरवादी राजनीति अब बंद कर देनी चाहिए। जिसके बाद अरविंद केजरीवाल ने उन्हें भी अनफॉलो कर दिया।

गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने भी इस बीच अरविंद केजरीवाल से आवाज़ उठाने की माँग की। मगर, केजरीवाल ने चतुर्वेदी को अनफॉलो नहीं किया, क्योंकि दिल्ली के सीएम उन्हें कभी फॉलो ही नहीं करते थे।

लेकिन, उन्होंने इस बीच स्वरा भास्कर को अनफॉलो जरूर कर दिया। क्योंकि स्वरा भास्कर ने माँग करने की जगह सलाह दी थी कि आम आदमी नेताओं को इन मामले पर थोड़े और ट्वीट करने चाहिए।

हैरानी की बात तो तब और ज्यादा हुई, जब केजरीवाल ने कृष्ण प्रताप सिंह और अरविंद झा जैसे अपने पार्टी नेताओं को अनफॉलो कर दिया। ऐसा सिर्फ़ इसलिए क्योंकि वे पिछले कुछ समय से पार्टी की मुखर होकर आलोचना कर रहे थे। बता दें इससे पहले अरविंद केजरीवाल अपने बेहद करीबी कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत कई लोगों को पार्टी से अलग कर चुके हैं।