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मजदूरी करने दिल्ली आया था कल्लन का बेटा ताहिर, 20 साल में खड़ा कर लिया ‘दंगों का हेडक्वार्टर’

ताहिर हुसैन जैसों ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बीच जो खूनी डिजाइन तैयार किया उसने उत्तर पूर्वी दिल्ली को दंगों की चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों बताते हैं कि ताहिर का घर दंगों का हेडक्वार्टर था। वहॉं पकड़-पकड़कर हिंदू लाए गए और उनकी हत्या की गई। इंटेलीजेंस ब्यूरो के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा को जिस तरह उसके गुंडों ने मौत के घाट उतारा गया, वह रोंगटे खड़े कर देता है।

दंगों में भूमिका सामने आने के बाद आप ताहिर से पल्ला छुड़ाने की कोशिश में है। उसे पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। हालाँकि पार्षद ताहिर हुसैन दिल्ली की राजनीति का चर्चित चेहरा नहीं है। लेकिन पूर्वोत्तर दिल्ली के शाहदरा, नेहरू नगर, चाँदबाग जैसे इलाकों में खासा रसूख रखता है। अपनी बिरादरी में उसकी अच्छी-खासी पैठ है। नेहरु विहार से पार्षद ताहिर हुसैन का घर करावल नगर में है। वह पैसे के लिहाज से भी काफी मजबूत है। उसके घर की छत से जिस तरह पेट्रोल बम, पत्थर का जखीरा मिला है उससे जाहिर करता है कि वह दंगे की पूरी तैयारी करके बैठा था।

दैनिक जागरण के अमरोहा संस्करण में प्रकाशित खबर

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार AAP पार्षद ताहिर हुसैन मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा के गाँव पौरारा का रहने वाला है। ताहिर हुसैन का मामूली मजदूर से आम आदमी पार्टी के पार्षद तक का सफर हैरान करने वाला है। ताहिर 20 साल पहले मजदूरी करने की नीयत से दिल्ली आया था। यहाँ आकर वो मजदूरी करने लगा। कुछ महीनों बाद ताहिर के पिता कल्लन सैफी भी अमरोहा से दिल्ली अपने बेटे के पास आ गए। ताहिर ने कुछ वर्ष पहले गाँव के अपने पुश्तैनी मकान को भी बेच दिया था।

फिलहाल उसकी कुछ आवासीय भूमि खाली पड़ी हुई है। ताहिर साल में एक-दो बार गाँव जाया करता था, लेकिन पिछले तकरीबन एक साल से वो गाँव नहीं गया है। उसका एक भाई गाँव में स्कूल चलाता है। ताहिर पाँच भाइयों में सबसे बड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि गाँव में किसी तरह का कोई रोजगार न होने की वजह से वो मजदूरी करने के लिए दिल्ली आ गया था। कुछ साल में ही वह बड़ा कारोबारी बन गया और राजनीति में भी उसने पैठ बना ली। इसके बाद वह AAP का निगम पार्षद बन गया।

जानकारी के मुताबिक ताहिर हुसैन करीब 18 करोड़ की संपत्ति का मालिक है। आठवीं पास ताहिर ने 2017 में पहली बार चुनाव लड़ा था और चुनाव आयोग को दिए शपथ-पत्र के अनुसार उस पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। बता दें कि ताहिर हुसैन का घर इस तरीके से बनाया गया है कि उससे चारों ओर का इलाका कवर हो और अंदर जो भी लोग हों, वो एकदम सुरक्षित रहें। स्थानीय लोगों ने बताया कि ताहिर हुसैन के घर में तकरीबन 3000 दंगाई जमा थे और कई संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा हुआ था, यानी काफ़ी पहले से इसकी साज़िश रची जा रही थी। लोगों ने हुसैन के बारे में बताया कि उसकी इमारत का परिसर बहुत बड़ा है, जिसमें एक तहख़ाना भी है।

ताहिर की छत के जो विडियो सामने आए हैं उनमें भारी मात्रा में पत्थर, पेट्रोल बम, बोलतें, डंडे शामिल हैं। अपने ऊपर लगे आरोपों के बाद भले ही ताहिर हुसैन खुद को बेगुनाह बता रहा हो मगर जो सबूत उनके मकान की छत से मिले हैं, उसने ताहिर के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर ऐसे भी विडियो तैर रहे हैं जिनमें खुद ताहिर हुसैन हाथों में डंडा लेकर अपने मकान की छत पर घूम रहा है।

ताहिर हुसैन पर गुरुवार (फरवरी 27, 2020) को दयालपुर पुलिस थाने में आईपीसी की धारा-302 (हत्या) का मामला दर्ज किया गया। ताहिर पर आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा समेत 4 लोगों को मार कर उनकी लाश को नाले में फेंकने का आरोप है। साथ ही दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर को सील कर उसके ख़िलाफ़ जाँच शुरू कर दी है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजूरी ख़ास क्षेत्र स्थित ताहिर हुसैन की फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया है। फिलहाल ताहिर फरार चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई है।

ताहिर के चाँदबाग में एजेंडा लेकर रिपोर्टिंग करने पहुँचे राजदीप सरदेसाई, युवक ने की बोलती बंद

उत्तर-पूर्वी दिल्ली का चॉंदबाग हिंदू विरोधी दंगों का केंद्र बनकर उभरा है। यहीं आप के पार्षद रहे ताहिर हुसैन की वह तहखाने वाली इमारत भी है, जहॉं स्थानीय लोग करीब 3000 दंगाइयों के जुटने की बात कहते हैं। यहॉं से पत्थर और बम फेंके गए। गोलियॉं चली। आईबी के अंकित शर्मा की निर्मम तरीके से हत्या हुई। एफआईआर दर्ज होने के बाद से ताहिर फरार है।

इसी चॉंदबाग में राजदीप सरदेसाई भी रिपोर्टिंग करने पहुॅंचे। राजदीप की गिनती उन एजेंडाबाज पत्रकारों में होती है, जिनका एक ही धर्म है समुदाय विशेष को पीड़ित दिखाओ और हिंदुओं को हमलावर। इसी एजेंडे के साथ वे चॉंदबाग भी पहुॅंचे लेकिन एक युवक ने उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया।

चाँदबाग का जायजा ले रहे राजदीप ने कई लोगों से बात की। इसी दौरान उन्होंने एक युवक ये कुछ सवाल करने शुरू किए और अपना हिंदू-मुस्लिम एजेंडा चलाने के लिए उससे पूछते नजर आए कि सामने जो दुकान जलाई गई है, वो किसकी है?

उनके इस सवाल से पहले वहाँ मौजूद सभी लोग उन्हें अपनी पीड़ा सुना रहे थे। ये बता रहे थे कि किस तरह दंगाइयों ने हमला किया। लेकिन सरदेसाई इस बीच लगातार हिंदू-मुस्लिम कर रहे थे। ऐसे में लोगों ने उन्हें समझाया भी कि हिंदू भी इंसान ही हैं। वो भी डरे हुए हैं। लेकिन जब इसके बाद भी सरदेसाई नहीं माने और सामने एक जली दुकान को लेकर सवाल किया तो वह युवक राजदीप के सवालों के पीछे छिपे उद्देश्य को समझ गया और कहने लगा, “ये मैटर नहीं करता दुकान किसकी है…मैटर ये करता है कि नुकसान किसका हुआ हुआ। आप पूछना चाहते हैं कि ये दुकान हिंदू की है या मुस्लिम की। मैं क्यों बताऊँ किसकी है। मैं तो कहूँगा कि नुकसान हमारा भी हुआ। पंचर तो वहाँ से हम भी लगवाते थे। कमाता तो वो शख्स हमसे भी था।”

इसके बाद युवक को अन्य क्षेत्र में रहने वाले अपने साथियों के बारे में बोलता सुना जा सकता है। युवक बताता है कि जब उसने भजनपुरा में अपने हिंदू साथी को फोन किया, तो उसने बताया कि वो बहुत घबराया हुआ है, कमरे में बंद है। वहीं दूसरा दोस्त हाल पूछने पर बताता है कि वो रो रहा है, क्योंकि बेटी को 2 दिन से दूध पीने के लिए लाकर नहीं दे पाया हूँ।

युवक लगातार दिल्ली हिंसा पर राजदीप सरदेसाई से सवाल करता है कि हम लोग कैसे जमाने में हैं? क्या वाकई हम पढ़े-लिखे हैं? युवक कहता है जब हमारे परिवार वाले कहते थे कि 1992 में दंगे हुए तो हम मजाक समझते थे। हम कहते थे हम दिल्ली में रहते हैं। लेकिन परिवार वाले कहते थे कि अभी यूपी में हुआ है, इसलिए संभलकर।

युवक के अनुसार, वो एक सरकारी कर्मचारी है और उसके भाई मजदूर हैं। उसके कई दोस्तों का इस हिंसा में काफी नुकसान हुआ है। उसे कभी नहीं लगा था कि दिल्ली में ये सब होगा, लेकिन अब जब ये सब देख रहे हैं तो उनके चेहरे पर डर को साफ देखा जा सकता है। ऐसी स्थिति में जब सरदेसाई युवक से पूछते हैं कि इतने के बावजूद वो इस इलाके में रहेंगे या नहीं, तो वो कहते हैं कि जब उनका परिवार पाकिस्तान नहीं गया, तो वो चाँदबाग क्यों छोड़ देंगे? इसके बाद राजदीप सरदेसाई उसे शाबाशी देते नजर आए। लेकिन बता दें युवक द्वारा सरदेसाई को दिए जवाब की क्लिप सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

इसके अतिरिक्त वीडियो के 6:30 के स्लॉट पर राजदीप को यमुना विहार के निवासियों से कपिल मिश्रा के भाषण को लेकर भी सवाल पूछते भी सुना जा सकता है। वे पूछते हैं कि क्या आप लोगों को लगता है उनके भाषण के कारण माहौल बिगड़ा? जिस पर वहाँ मौजूद जनता ने इस बात को स्पष्ट तौर पर नकारा और कहा उनकी वजह से नहीं हुआ, उन्होंने सिर्फ़ रास्ता खोलने की बात कही और कुछ भी नहीं।

ताहिर हुसैन के गुंडों से बचा नाबालिग: दंगाइयों ने हमें पकड़ा, मैं हाथ छुड़ा भागा… पीछे देखा तो तीनों गायब थे

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों में जो लोग मारे गए उनके घरों में चीख-पुकार मची हुई है। जो इस हिंसा की चपेट में तो आए, लेकिन किसी भी तरह से जिंदा बच गए वह उस पल को याद कर बार-बार बदहवास हो जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है उस नाबालिग लड़के की, जिसने IB के अंकित शर्मा के साथ दो लोगों को घसीटकर ताहिर हुसैन के घर ले जाते दंगाइयों को देखा। दंगाइयों ने इस नाबलिग को भी पकड़ लिया था। लेकिन वह भागने में कामयाब रहा और जब पीछे मुड़कर देखा तो तीनों गायब थे। इतना बताते ही वह आगे कुछ बोल नहीं पाता है और फूट-फूट कर रोने लगता है।

दंगाइयों के चुंगल से छूटकर भागा (चौथा पाड़ित) नाबालिग लड़का रोते-बिलखते हुए ऑपइंडिया को बताता है, “चाँदबाग में हिंसा भड़क रही थी। दंगाइयों की भीड़ बड़ी संख्या में ताहिर हुसैन के मकान के पास इकट्ठा हो रही थी। दंगाइयों ने शिव मंदिर पर हमला कर दिया इससे कुछ हिंदुओं में उबाल आया, लेकिन मुस्लिमों की भीड़ को देखकर कोई उन पर वार करने की हिम्मत तक नहीं जुटा सका। इसी बीच ड्यूटी से लौट रहे अंकित शर्मा ने देखा तो वह चाँदबाग का दृश्य को देख दंग रह गए। उन्होंने दंगों के बीच जिसे भी देखा बस यही क्या ‘तुम लोग क्या कर रहे हो आप हम सबको यहीं रहना है।’ इसके बाद भी दंगाई न तो सुनने को तैयार थे और न ही किसी की बात मानने को। अंकित शर्मा लोगों को समझाते हुए चाँदबाग से करावल नगर की ओर आगे बढ़ गए। उनके साथ और भी लोग थे, जिसमें मैं भी शामिल था।”

चश्मदीद(नाबालिग लड़के) के मुताबिक, “अंकित शर्मा और उनके साथ कुछ लोग ताहिर के मकान के पास पहुँचे ही थे कि दंगाइयों की भीड़ झपट पड़ी। हमें ताहिर के घर में खींचने की कोशिश की। इस बीच मैंने अपना हाथ झटके से छुड़ा लिया और वहाँ से दौड़ पड़ा। दंगाई अंकित शर्मा के साथ दो और लोगों को घर की खींच ले गए। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वह तीनों ग़ायब थे। मुझे तभी अहसास हो गया था कि अब वह लौटकर नहीं आएँगे। मैं किसी भी तरह वहाँ से भाग कर अपने घर पहुँच गया और अपने घर का दरवाजे को बंद कर लिया।” उस पल को याद करते ही नाबालिग सिहर उठा और रोने लगा।

नाबालिग ने बताया कि अंकित से उसकी कोई जान-पहचान नहीं थी। लेकिन, वह जानता था कि वे कौन हैं और क्या काम करते हैं। इसलिए जब वे दंगाइयों को समझाने निकले तो वह भी साथ हो गया। लेकिन, उस घटना के बाद से नाबालिग और उसका परिवार काफी भयभीत है। वे लोग घर से निकल पाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। उन्हें खौफ है कि यदि उनकी पहचान सार्वजनिक हो गई तो अब भी दंगाई उन्हें मार डालेंगे। नाबालिग ने रोते हुए बताय वे मेरे सामने तीन लोगों को खींच ले गए और मैं कुछ नहीं कर सका। अंकित शर्मा का शव तो नाले से बरामद किया जा चुका है। उन्हें किस कदर प्रताड़ित कर मारा गया यह भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आ चुकी है। लेकिन, उनके साथ जिन दो और लोगों को दंगाई ताहिर के घर ले गए थे उनके साथ क्या हुआ होगा यह सोचकर ही सिहरन पैदा हो जाती है।

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को बताया कि ताहिर की इमारत में करीब तीन हजार गुंडे जमा थे। वहीं से हिंदुओं पर पत्थर और पेट्रोल बम फेंके गए। गोली चलाई गई। कुछ विडियो सामने आए हैं जिसमें ताहिर भी डंडे के साथ दिख रहा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आप का निगम पार्षद रहा ताहिर फरार है।

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अलीगढ़: हिन्दुओं के घरों पर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर, जुमे की नमाज से पहले 4000 को नोटिस

अलीगढ़ में 23 फरवरी 2020 को सीएए विरोधियों ने जमकर हिंसा की थी। उपद्रव के बाद जुमे की पहली नमाज आज (फरवरी 28, 2020) है। इस नमाज को अमन-चैन से कायम कराने के लिए प्रशासन ने पूरा जोर लगा दिया है। चार हजार पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों का भारी-भरकम फोर्स लगाया गया है। पुलिस ने 4000 लोगों को निषेधात्मक नोटिस भी जारी किया है। इनलोगों को चेतावनी दी गई है कि शहर में किसी तरह की कोई अप्रिय घटना हुई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही पुलिस ने CrPc की धारा 110 (G) के तहत 200 लोगों को नोटिस भेजा और 50 लोगों के खिलाफ गुंडा एक्ट में नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा शाहजमाल, जमालपुर और जीवनगढ़ क्षेत्र के लाइसेंस के साथ हथियार रखने वाले 100 लोगों के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए कहा गया है कि अगर वो विरोध-प्रदर्शन वाले स्थानों पर पकड़े जाते हैं, तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। बता दें कि शाहजमाल, जमालपुर और जीवनगढ़ में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

अलीगढ़ के एसएसपी मुनिराज जी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बताया कि 2000 असामाजिक तत्वों को ‘रेड नोटिस’ जारी किया गया और 2000 अन्य को CrPc की धारा 107/116 के तहत नोटिस जारी करते हुए उस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, जिसमें लिखा गया था कि वो शहर की शांति को भंग करने की कोशिश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस पहले से ही हाई अलर्ट पर थी।

एसएसपी ने आगे बताया कि जुमे की नमाज को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है। जिसमें PAC की नौ कंपनियाँ और RAF की चार कंपनियाँ शामिल हैं। इन कंपनियों में तीन एडिशनल एसीपी के साथ ही 8 डिप्टी एसपी होंगे। इसके अलावा अलीगढ़ में एहतियात के तौर पर पहले से ही पड़ोसी जिलों के 8 स्टेशन हाउस अधिकारी (SHO) तैनात किए गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि संवेदनशील इलाकों में पड़ने वाले पुलिस स्टेशनों पर गैर-घातक हथियार वितरित किए गए हैं। जिसमें दंगा-रोधी बंदूकें, आँसू गैस की बंदूकें और आँसू गैस के ग्रेनेड आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनके क्षेत्र में किसी तरह की कोई हिंसा होती है तो वो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। पुलिस ने शहर में 8 स्थानों की पहचान की है जो संवेदनशील क्षेत्रों में आते हैं और शांति बनाए रखने के लिए स्थानीय नेताओं के साथ बैठकें आयोजित करते हैं।

मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले नमाजियों के आवागमन व धार्मिक स्थलों की निगरानी रखी जाएगी। ड्रोन कैमरे व सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी होगी। शहर का माहौल बिगाड़ने वालों के मंसूबे पूरे नहीं होने देंगे। उन्होंने लोगों से अफवाहों से दूर रहने व सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखने की अपील की। शहर में सुरक्षा-व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। मजिस्ट्रेटों के साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात है। किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं होगी। इंटरनेट प्रतिबंध को शुक्रवार (फरवरी 27, 2020) रात 12 बजे तक बढ़ाया गया है।

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार रविवार की हिंसा के बाद से लोग काफी दहशत में हैं। सदर क्षेत्र के बाबरी मंडी में कुछ लोगों ने अपने घर के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगा दिए। हालॉंकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा का भरोसा दिलाए जाने के बाद पोस्टर हटा लिए गए। दंगाइयों ने लोगों के घरों में भी घुसने की कोशिश की थी। बाबरी मंडी चौकी में पुलिसकर्मियों को भी घेर लिया था। इसके बाद यहॉं रहने वाली सावित्री, सुधा, द्वारिका प्रसाद, नेहा गुप्ता समेत कई लोगों ने अपने घरों के बाहर मकान बिकाऊ के पोस्टर लगा दिए। कुछ लोग घर बंद कर बाहर जा चुके हैं।

दिल्ली दंगों में अब तक 38 मौतें: 21 को गोली मारी, 4 की धारदार हथियारों से हत्या, 3 को जलाकर मारा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में भड़के दंगों में अब तक 38 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्टों से यह बात सामने आने लगी है कि किस कदर प्रताड़ित कर लोगों की निर्मम तरीके से हत्या की गई। आईबी के अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने लिखा है कि 400 से ज़्यादा बार उन्हें चाकुओं से गोदा गया। इस क्रूर अमानुषिक हत्याकांड और यातना को अंजाम देने में कम से कम 6 लोगों के शामिल होने की बात डॉक्टर बताते हैं। उन्होंने कहा है कि अंकित शर्मा को 6 लोगों ने लगातार 2 से 4 घंटे तक 400 बार चाकुओं से गोदा होगा। साथ ही, उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था।

फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार दिली पुलिस ने गुरुवार (फरवरी 27, 2020) को हिंसा में मारे गए 37 लोगों की जानकारी साझा की। पुलिस ने बताया कि हिंसा में मारे गए लोगों में 1 पुलिस अधिकारी समेत 36 आम नागरिक हैं। साथ ही ये भी बताया इस अधिकतर लोगों (21 लोग) की मौत गोली लगने के कारण हुई। 4 लोगों की हत्या धारधार हथियार घोंपने और प्रताड़ित किए जाने के कारण हुई। वहीं, 3 लोगों को जलाकर मार डाला गया।

पुलिस के मुताबिक, अभी तक जिन मृतकों की जानकारी वो जुटा पाए हैं, उनमें 15 मुस्लिम और 10 हिंदू हैं। बाकियों के धर्म/मजहब की पहचान का खुलासा अभी नहीं हुआ है। मृतकों में सबसे कम उम्र के युवक का नाम अमन था। उसकी उम्र मात्र 17 साल थी। वहीं, इस दंगे में सबसे अधिक उम्र में मरने वाले वालों में दो बुजुर्ग की उम्र 70 साल थी। इसके अलावा अभी तक की सूचना के अनुसार मालूम हुआ है कि हिंसा में 29 पुरुषों और 1 महिला ने अपनी जान गंवाई।।

गौरतलब है कि उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुई इस हिंसा में करीब 34 लोगों को जीटीबी अस्पताल में मृत घोषित किया गया। जबकि अन्य लोगों को लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में। जीटीबी अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट के मुताबिक अस्पताल में 24 फरवरी से अब तक करीब 215 दंगा पीड़ितों को भर्ती कराया गया। फिलहाल अस्पताल में सिर्फ 51 मरीज भर्ती हैं। इनमें से एक को छोड़कर बाकी सब की स्थिति स्थिर है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार मरने वालों की पहचान इस प्रकार है-

  1. रतन लाल (हेड कॉन्सटेबल)
  2. मुबारक
  3. दीपक (34)
  4. मोहम्मद फुरकान (30)
  5. वीरभान
  6. विनोद(45)
  7. मो.मुद्दस्सिर (30)
  8. इश्तियाक खान (24)
  9. अंकित शर्मा (26)
  10. दिलबर
  11. शान मोहम्मद (35)
  12. प्रवेश (48)
  13. जाकिर(24)
  14. राहुल ठाकुर (23)
  15. राहुल सोलंकी(26)
  16. मेहताब (22)
  17. शाहिद (25)
  18. अमन (17)
  19. मारूफ (32)
  20. सलमान
  21. आलोक तिवारी (32)
  22. इरफान (25)
  23. बब्बू (32)
  24. अश्फाक (22)
  25. फैजान

बता दें कि अलग-अलग अस्पतालों में लगभग 30 लोगों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। हिंसा मामले में पुलिस ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से 106 लोगों को गिरफ्तार किया है। 48 एफआईआर दर्ज की है और 514 संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

कॉन्स्टेबल पर पिस्टल तानने वाला मोहम्मद शाहरुख अब भी फरार, दिल्ली दंगों को लेकर हिरासत में 514

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में हिंसा के दौरान सरेआम पुलिसकर्मी पर पिस्तौल तानने और आठ राउंड गोलियाँ चलाने वाला मोहम्मद शाहरुख अब भी फरार बताया जा रहा है। पहले उसे गिरफ्तार कर लिए जाने की खबर आई थी। लेकिन, न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि उसकी तलाश की जा रही है। कई मीडिया रिपोर्टों में पुलिस अधिकारियों के हवाले से भी उसके फरार होने की बात कही गई है। लोकल पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल की टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। शाहरुख अपने पूरे परिवार के साथ फरार बताया जा रहा है।

एक पुलिस अधिकारी ने समाचार चैनल से बात करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस लगातार इस्लामी शूटर की तलाश कर रही है। शाहरुख के गिरफ्त में आने के बाद ही इस बात का पता चल सकता है कि उसने वह पिस्तौल और कारतूस कहाँ से खरीदे थे, जिसका इस्तेमाल उसने दंगों के दौरान किया था। न्यूज पोर्टल द क्विंट ने भी दिल्ली पुलिस अधिकारी के हवाले से लिखा है कि शाहरुख को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

वहीं गुरुवार शाम को गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि पिछले 36 घंटे में नॉर्थ-ईस्ट जिले के हिंसा प्रभावित किसी भी थाना क्षेत्र में कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है। शुक्रवार (फरवरी 28, 2020) को हालात को देखते हुए सेक्शन 144 से लोगों को 10 घंटे के लिए राहत दी जाएगी। आगे कहा गया है कि अभी तक दिल्ली हिंसा में कुल 48 FIR दर्ज की गई हैं, जिसमें दंगे भड़काने, जान से मारने, संपत्ति का नुकसान आदि के मामले शामिल हैं। आने वाले समय में और भी FIRदर्ज की जाएगी। पुलिस ने फिलहाल 514 संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। जाँच के दौरान आगे और भी गिरफ्तारी की जा सकती है।

बता दें कि कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में CAA के मुद्दे के लेकर हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 38 हो गई है। वहीं 200 से अधिक घायल लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। अलग-अलग अस्पतालों में लगभग 30 लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है। वहीं उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस ने अब तक 106 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

हिंसा की जाँच के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के तहत दो एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी की एक टीम को डीसीपी जॉय टिर्की लीड करेंगे, जबकि जबकि दूसरी टीम के हेड डीसीपी राजेश देव होंगे। दोनों एसआईटी टीमों में चार-चार ACP होंगे यानी कुल आठ एसीपी। इसके अलावा तीन-तीन इंस्पेक्टर, चार-चार सब-इंस्पेक्टर और बाकी पुलिसकर्मी रहेंगे। यह SIT क्राइम ब्रांच के एडिशनल सीपी बीके सिंह की अगुआई में काम करेगी।

ताहिर हुसैन फरार: AAP से निलंबित होते ही बचाव में आगे आया अमानतुल्लाह खान

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान आप पार्षद ताहिर हुसैन का चॉंदबाग स्थित घर हिंसा का केंद्र था। ऑपइंडिया को स्थानीय लोगों ने बताया कि उसकी इमारत में करीब 3000 दंगाई जमा थे। उसके घर की छत पर पत्थरों और पेट्रोल बम का जखीरा मिला है। यहॉं से पत्थरबाजी हुई थी और पेट्रोल बम फेंके गए थे। आईबी के अंकित शर्मा की हत्या भी उसके ही गुंडों ने की थी।

अब खबर आ रही है कि ताहिर हुसैन फरार हो गया है। दिल्ली हिंसा और अंकित शर्मा की हत्या के सिलसिले में मामला दर्ज होने के ठीक एक दिन बाद उसके फरार होने की खबर सामने आई है। टाइम्स नाउ ने यह जानकारी दी है।

ताहिर हुसैन को कल AAP ने पार्टी से निलंबित कर दिया था। दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने भी कहा था कि दंगा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए, चाहे वो किसी भी पार्टी का हो। इसके बाद ही पार्टी से ताहिर हुसैन की निलंबन की बात सामने आई। खुद पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से रात के 10.06 पर इसकी जानकारी दी गई।

ट्वीट में बताया गया कि दिल्ली हिंसा मामले में पार्षद ताहिर हुसैन को जाँच पूरी होने तक आम आदमी पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। लेकिन थोड़ी देर बाद ही पार्टी के ‘अज़ीज़’ नेता ताहिर के बचाव में उतर आए और उसे निर्दोष घोषित करने लगे।

AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट आने के करीब 16 मिनट बाद यानी 10: 21 पर ही अपने अकाउंट से ट्वीट किया। अमानतुल्लाह ने ताहिर खान को बेकसूर घोषित कर दिया। साथ ही भाजपा पर आरोप लगाया कि अपने नेताओं को बचाने के लिए और आम आदमी पार्टी को बदनाम करने के लिए ताहिर हुसैन को झूठे केस में फँसा रही है।

गौरतलब है कि पार्टी की ओर से आए आधिकारिक बयान और अमानतुल्लाह खान की ओर से जारी बयान में गहरा विरोधाभास है। पार्टी एक ओर जहाँ ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ एक्शन लेकर जनता के सामने अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं अमानतुल्लाह दंगों में जिसकी मुख्य भूमिका बताई जा रही उसका बचाव कर रहे हैं।

ताहिर हुसैन पर कल दयालपुर पुलिस थाने में आईपीसी की धारा-302 (हत्या) का मामला दर्ज किया गया। आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा सहित 4 लोगों को मार कर उनकी लाश को नाले में फेंकने का आरोप है। साथ ही दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर को सील कर उसके ख़िलाफ़ जाँच शुरू कर दी है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजूरी ख़ास क्षेत्र स्थित ताहिर हुसैन की फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया है।

एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले ताहिर ने विडियो जारी कर अपनी भूमिका पर सफाई दी थी। उसका कहना था, “बहुत सारी भीड़ जबर्दस्ती मेरा गेट तोड़ अंदर आना चाहती थी। मैंने पुलिस बुलाई। वो आए। हमारे मकान की तलाशी ली गई। जब कोई दंगाई नहीं दिखा तो मैं पुलिस के सहयोग से जान बचाकर बाहर निकला। पुलिसवालों की निगरानी एक दिन रही उसके बाद पुलिस चली गई। मैं एक सच्चा, अच्छा भारतीय मुस्लिम हूॅं, मैं आगे भी हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के लिए काम करता रहूॅंगा। मैं खुद जान बचाकर परिवार के साथ एक रिश्तेदार के पास हूॅं। मैं बच्चे की सौगंध खाकर कहता हूॅं कि इन सबसे मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मैं इस तरह की घटिया राजनीति नहीं कर सकता।”

ग्राउंड रिपोर्ट: ताहिर हुसैन की छत से चली गोली अनूप सिंह की गर्दन में लगी, आर-पार निकल गई

हिंसा प्रभावित क्षेत्र चाँद बाग में गुरुवार को नेशनल मीडिया का जमाबड़ा लगा हुआ था। बड़ी संख्या में हर एक जगह पुलिस फोर्स तैनात थी। दुकानों के शटर गिरे हुए थे और जिन दुकानों के शटर आधे अधूरे उठे हुए थे इलाके में हुई हिंसा के खौफनाक मंजर को बखूबी प्रदर्शित कर रहे थे। सड़कों पर पुलिस फोर्स से ज्यादा मीडिया और मीडिया से ज्यादा ईंट-पत्थरों के टुकड़ों की मौजूदगी थी। कुछ लोग टोपी लगाए दुकानों के किनारे भटक रहे थे तो कुछ लोग गलियों में लगे बंद गेट से एक कैदखाने की तरह बाहर की ओर डरावने चेहरों से झाँक रहे थे।

हमने किसी तरह एक बंद गेट के पास से करावल नगर की एक गली में प्रवेश किया और इलाके में पीड़ितों का हाल-चाल लेते हुए मूँगा नगर पहुँच गए। इस बीच जानकारी मिली कि एक अनूप नाम का व्यक्ति दंगाई भीड़ का पीड़ित है। इसके बाद हम पूछते हुए पीड़ित अनूप सिंह के घर जा पहुँचे। जहाँ हमने देखा कि मकान की दूसरी मंजिल पर कमरे में पड़े एक बेड पर अनूप सिंह घायल अवस्था में पड़े हुए हैं। इसके बाद हमने अपना परिचय दिया और उनसे आपबीती बताने का अनुरोध किया।

अनूप सिंह ने बताया, “सोमवार को क्षेत्र में हुई हिंसा के बाद से इलाके का माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन मंगलवार को दंगाईयों ने एक बार फिर से हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते दंगाई ईंट पत्थरों से हिंदुओं की बंद दुकानों को अपना निशाना बनाने लगे। तेज होती आवाजें सुनकर मैं घर से बाहर की ओर हालात को देखने और जानने के लिए निकला। गली के बाहर आते ही मैंने देखा कि ताहिर हुसैन की छत पर खड़े सैकड़ों लोग नीचे खड़े लोगों पर पहले तो ईंट-पत्थर फेंक रहे हैं इसके बाद वह काँच की बोतले से पैट्रोल बम फेंकने लगे और फिर तो दंगाईयों ने छत से सीधी फायरिंग करना शुरू कर दिया। इसी बीच मैं वहाँ से बचकर भागने ही वाला था कि अचानक से एक गोली मेरी की गर्दन में आकर लगी।”

अनूप आगे बताते हैं कि वह समझ नहीं सके कि उनको गोली लगी है या फिर कोई पत्थर लगा है, ज्यादा खून बहने पर आस-पास खड़े लोगों ने उन्हें सँभाला और इसके बाद बाईक से डॉक्टर के पास ले जाने लगे। उन्होंने बताया कि जब परिजन उन्हें घायल अवस्था में असपताल लेकर जा रहे थे। उस दौरान भी दंगाइयों ने उन पर ईंट-पत्थर बरसाए। किसी तरह वो जब डॉक्टर के पास पहुँचे तो डॉक्टर ने बताया कि उनको गर्दन में गोली लगी हुई है, न कि पत्थर से वो घायल हुए। इसके बाद अनूप को तत्काल जीटीबी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। जहाँ से अवकाश मिलने के बाद अनूप कल अपने घर पर पहुँचे। उनके दिल में बैठे डर का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जितने समय उन्होंने आपबीती हमें बताई उतने समय उनका शरीर डर के कारण काँपता रहा और वह बार बार यही कहते रहे, “मुझे अब कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।”

20 वर्षीय अनूप सिंह और उनके परिजन डरे हुए बताते हैं कि उन्होंने इस तरह की हिंसा जीवन में उन्होंने कभी नहीं देखी। इस्लामी भीड़ और उनकी तैयारी को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो वह पहले तो हिंदुओं की दुकानों को और फिर हमारे मकानों को भी वह अपना निशाना बनाना चाहते थे। अच्छा हुआ दिल्ली पुलिस का कि उसने समय रहते हालातों को काबू में किया। वह बताते हैं कि इस घटना से उनके मन में इतना डर फैला है कि वह पिछले तीन दिनों से किसी भी काम के लिए घर से बाहर तक नहीं निकले।

आँतें फाड़कर निकाल दी गई, 6 लोगों ने 400 से ज़्यादा बार चाकू भोंका: IB के अंकित शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

नृशंस हत्या की परिभाषा हर अंकित शर्मा जैसे हिन्दुओं की लाश की पोस्टमॉर्टम के रिपोर्ट के आने के बाद एक अलग क्रूरता के साथ बदल जाती है। पोस्टमॉर्टम के मुताबिक उनके शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने लिखा है कि 400 से ज़्यादा बार उन्हें चाकुओं से गोदा गया। 

इस क्रूर अमानुषिक हत्याकांड और यातना को अंजाम देने में कम से कम 6 लोगों के शामिल होने की बात डॉक्टर बताते हैं। उन्होंने कहा है कि अंकित शर्मा को 6 लोगों ने लगातार 2 से 4 घंटे तक 400 बार चाकुओं से गोदा होगा। साथ ही, उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा। 

इससे पहले, अंकित शर्मा को AAP के पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे घसीट कर ले गए और मार डाला। उनके पिता रवींद्र शर्मा ने बेटे की मौत के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार बताया है। अंकित आईबी में कार्यरत थे। उनके पिता भी आईबी में ही बतौर हेड कॉन्स्टेबल कार्यरत हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के घर से लगातार बमबारी और पत्थरबाजी होती रही।

ताहिर हुसैन के घर के बाहर भी पत्थरों का जमावड़ा लगा हुआ है। हुसैन के घर के बाहर कई बोतलें और पेट्रोल बम पड़े हुए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में उनकी इमारत की छतों पर भी पत्थर और बम देखे गए हैं। विदेशी मीडिया पोर्टल ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ)’ ने अपने लेख में लिखा है कि अंकित के भाई अंकुर ने बताया कि ‘जय श्री राम’ बोलते हुए आई मुस्लिम भीड़ ने अंकित की हत्या कर दी। अंकुर ने प्रोपेगेंडा पोर्टल की इस ख़बर को नकार दिया है। अंकुर ने ऑपइंडिया से बात करते हुए स्पष्ट कहा कि डब्ल्यूएसजे में उनके हवाले से जो बातें लिखी है वह उन्होंने कही ही नहीं है।

अंकुर ने बताया कि गुरुवार (फरवरी 25, 2020) को उनके भाई अंकित ड्यूटी से लौट कर बाइक पार्क करने के बाद मोहल्ले के लोगों से बातचीत करने निकल गए। उन्होंने कहा था कि वे इलाक़े के लोगों को जानते हैं और दंगा रोकने में कामयाब होंगे। परिवार के लाख मना करने के बावजूद अंकित हिन्दुओं और मुस्लिमों- दोनों से ही बातचीत करने और उन्हें समझाने निकल गए। हालाँकि, हिन्दुओं ने तो अंकित की बात मान ली लेकिन मुस्लिम समुदाय शांति के लिए राजी नहीं हुआ। तभी ताहिर हुसैन के इमारत से पत्थरबाजी शुरू हो गई और मुस्लिम भीड़ ने अंकित को पकड़ कर घसीटना शुरू कर दिया। वे उन्हें पकड़ कर हुसैन की इमारत में ले गए।

अंकुर ने रतन लाल और अपने भाई की हत्या के बारे में बात करते हुए बताया कि अब ‘वो लोग’ पुलिस वालों को चुन-चुन कर मार रहे हैं। अंकित को भी इसीलिए मारा क्योंकि उन्होंने बताया कि वे एक आईबी ऑफिसर हैं। अंकित मोहल्ले में सबके पसंददीदा व्यक्ति थे और वो सभी से घुलमिल कर रहते थे। उनका शव नाले में क्षत-विक्षत अवस्था में मिला था। अंकुर ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंकुर ने कहा:

“मेरे भाई अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन ने मारा है। वो यहाँ दंगाइयों का सबसे बड़ा सरगना है। वही दंगे करवा रहा है। जब मेरे भाई को मजहबी भीड़ घसीटते हुए ले जा रहे थे, तब वही उन्हें निर्देश दे रहा था कि क्या और कैसे करना है। अरविंद केजरीवाल मेरे भाई को दंगाई साबित कर देंगे। मेरा भाई दंगाई नहीं था। वो एक सरकारी अधिकारी था, जो लोगों को समझा रहा था कि झगड़ा मत करो। वो दोनों तरफ के लोगों को जानता था, इसलिए उन्हें समझाने गया था।”

अंकुर की माँग है कि उनके मृत भाई अंकित शर्मा को ‘शहीद’ का दर्जा मिले। अंकित के गर्दन और अन्य हिस्सों में कई जगह धारदार हथियार के वार से कटे हुए निशान मिले थे। अंकुर ने बताया कि मारने से पहले उन्हें काफ़ी टॉर्चर किया गया।

AAP पार्षद ताहिर हुसैन का घर व फैक्ट्री सील, FIR दर्ज: खफा जावेद अख्तर ने पुलिस को कोसा, निलंबित

आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी कहा है कि दंगा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चहीए, चाहे वो किसी भी पार्टी का हो। गुरुवार (फरवरी 27, 2020) को ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया। उस पर दयालपुर पुलिस थाने में आईपीसी की धारा-302 (हत्या) का मामला दर्ज किया गया है। आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा सहित 4 लोगों को मार कर उनकी लाश को गन्दी नाली में फेंकने का आरोप लगा है। ताहिर के घर से बमबारी और पत्थरबाजी होती रही।

नेहरू विहार के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के चाँदबाग़ स्थित निवास पर कई पत्थर और पेट्रोल बम भी देखे गए। इनका इस्तेमाल कर के हिन्दुओं पर तबाही बरपाई गई। ताहिर ने एक वीडियो जारी कर के दावा किया कि उसके घर पर उपद्रवियों का कब्ज़ा है और उसका या उसके परिवार का पूरे प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है। अब तक दिल्ली दंगों में मरने वालों की संख्या 38 पहुँच गई है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में कई हिन्दुओं के घरों व दुकानों को जला डाला गया। साथ ही मंदिरों को भी नुकसान पहुँचाया गया है। मुस्लिम भीड़ ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ चिल्लाते हुए हिन्दुओं पर टूटी थी।

वहीं दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के घर को सील कर के उसके ख़िलाफ़ जाँच शुरू कर दी है। उसके ख़िलाफ़ दंगे भड़काने का मामला भी दर्ज हुआ है। केजरीवाल ने तो यहाँ तक कहा है कि अगर उनकी पार्टी का कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे दोगुनी सज़ा मिलनी चाहिए। आप नेता संजय सिंह ने भी सभी दोषियों को सज़ा मिलने की बात कही। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजूरी ख़ास क्षेत्र में स्थित ताहिर हुसैन की फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया है। अब देखना ये है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। ताहिर हुसैन ने कहा है कि अगर पुलिस उसे गिरफ़्तार करना चाहती है तो वह पूरी तरह सहयोग करने के लिए तैयार है।

38 मौतों में से 34 जीटीबी हॉस्पिटल में हुई है जबकि 3 मौतों की ख़बर लोकनायक जेपी अस्पताल से आई है। एक मौत जग प्रवेश चंद्रा हॉस्पिटल में हुई है। दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह ख़ान ने कहा है कि बोर्ड नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के प्रभावित इलाक़ों में राशन व अन्य चीजों का वितरण करेगा। अभी तक पुलिस ने कुल 105 लोगों को विभिन्न मामलों में गिरफ़्तार किया है। उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने पूरी स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक भी की।

जावेद अख़्तर ने कहा है कि इतने लोग मर गए और अभी तक पुलिस एक फैक्ट्री सील कर के उसके मालिक को ढूँढ रही है। उन्होंने कहा कि इतने लोग मारे गए, कई घायल हुए और कइयों के घर जला दिए गए, लेकिन पुलिस ऐसे आदमी को ढूँढ रही है, जिसका नाम संयोग से ताहिर है। खफा जावेद अख्तर ताहिर के मजहब की ओर इशारा करते हुए बता रहे थे कि दिल्ली पुलिस उन्हें निशाना बना रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी (आप) ने पार्षद ताहिर हुसैन को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया।