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पाक में नाबालिग हिंदू लड़की के जबरन धर्म परिवर्तन पर भारतीयों का लंदन में इंसाफ दिलाने के लिए प्रदर्शन जारी

ब्रिटेन के लंदन में भारतीय प्रवासियों ने संयुक्त राष्ट्र (UN) कार्यालय के बाहर पाकिस्तान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। भारतीय प्रवासियों ने पाकिस्तान में एक नाबालिग हिंदू लड़की महक कुमारी, जिसे जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया गया था और सिंध में मुस्लिम व्यक्ति से शादी कराई गई थी, के लिए न्याय की माँग की।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘जस्टिस फॉर महक कुमारी’, ‘स्टैंड अप फॉर ह्यूमन राइट्स’ जैसे पोस्टर लेकर नारे लगाते दिखे। बता दें कि महक कुमारी को इंसाफ दिलाने के लंदन में पाकिस्तान के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

बीते 15 जनवरी को सिंध प्रांत के जकोबाबाद निवासी विजय कुमार की 15 वर्षीय बेटी महक कुमारी को अली रजा नाम के एक युवक ने अगवा कर लिया था। जिसके बाद आरोपित युवक ने महक कुमारी को जबरन इस्लाम धर्म कबूल कराकर उससे निकाह कर लिया।

इस घटना में आरोपित दो बार शादी कर चुका है और उसके 4 बच्चे भी है, उसके बाद उसने ऐसी घिनौनी हरकत को अंजाम दिया था। मामला कोर्ट में पहुँचने के बाद महक ने जज के सामने कहा कि उसे इस्लाम धर्म में नहीं रहना, ना ही उसे किसी मुस्लिम युवक के साथ रहना है। पीड़ित महक कुमारी ने कहा था कि उसे अपने घर जाना है और अपने माता-पिता के साथ रहना है।

महक के इस बयान के बाद पाकिस्तानी मौलवियों ने उसे मौत के घाट उतारने का फतवा भी जारी किया था। अभी हाल ही में जकोबाबाद सेशन कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि महक कुमारी को चाइल्ड शेल्टर होम में दो साल तक रखा जाएगा। हालाँकि, कोर्ट के इस फैसले से कोई भी खुश नहीं है। ज्ञात हो कि इससे पहले बीते 17 और 18 फरवरी को भी प्रवासी भारतीयों ने महक को इंसाफ दिलाने के लिए लंदन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।

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ज़मीन पर चाहे जो भी स्थिति हो, लिबरलों के गिरोह विशेष का का पूरा जोर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अपने अनुरूप माहौल बनाने का रहता है। वो चाहते हैं कि देश के 0.045% क्षेत्र के कुछ हिस्से में हुए विरोध-प्रदर्शन को यूँ दिखाया जा रहा है जैसे कि पूरा देश सुलग रहा हो। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आए हुए हैं और इंटरनेशनल समुदाय की नज़र भी दिल्ली पर है। सीएए विरोधी इसका पूरा फायदा उठा कर उनका अटेंशन लेना चाहते हैं। इसके लिए भले ही उन्हें ख़ून ही क्यों न बहाना पड़े। इतना हिंसक माहौल बना दो कि हर विदेशी नेता और सेलेब्रिटी मोदी के ख़िलाफ़ बोले।

इसी क्रम में एक मौलाना का विडियो वायरल हो रहा है। जैसा कि आपको पता है, कई मुल्ला-मौलवी सीएए को जबरन मजहब का मुद्दा बना कर लोगों को भड़काने में लगे हुए हैं। भले ही ये विडियो बिहार के अररिया का हो लेकिन इससे इनके पूरे देश में चल रहे इनके ख़तरनाक एजेंडे का पता चलता है। इस वीडियो में मौलाना कहता दिख रहा है कि विरोध-प्रदर्शन का मुख्य मकसद देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करना है। मौलाना ने लोगों को भड़काते हुए बताया कि प्रोटेस्ट्स के बहुत सारे फ़ायदे होते हैं, जैसे कि विदेशी कम्पनियाँ और निवेशक भारतीय बाजार में रुपया लगाना बंद कर देते हैं।

मौलाना ने समुदाय विशेष को उकसाते हुए कहा कि विदेशी निवेशक रोज भारत के शेयर बाजार में अपना पैसा लगाते हैं, अगर रोज विरोध-प्रदर्शन होंगे तो वो पैसा नहीं लगाएँगे, जिससे भारतीय शेयर बाजार धड़ाम हो जाएगा। मौलाना ने लोगों से कहा कि अगर वो फलाँ चौक पर खड़े होकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें ये नहीं सोचना चाहिए कि इससे कुछ असर नहीं पड़ेगा। मौलाना ने धूर्ततापूर्वक समझाया कि अगर वो कहीं भी खड़े होकर विरोध प्रदर्शन करते हैं तो उसका असर होता है। ‘पॉलिटिकल कीड़ा’ द्वारा जारी किए गए वीडियो में मौलाना ने कहा है:

“अपने-आप को कमतर मत आँकिए। जब पत्थर का छोटा सा टुकड़ा भी कहीं पानी में गिरता है तो वो बड़ा सुराख कर देता है। विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ये तब तक चलता रहेगा, जब तक दोनों भ्रष्टाचारी लोग (मोदी-शाह) उल्टी न कर दें। हम सीएए को रद्द करने के चक्कर में हैं। इंशाअल्लाह, हमारे बहुत सारे लोग जो ज़मीन पर उतरे हुए हैं और इस कोशिश में लगे हुए हैं कि एनआरसी एवं एनपीआर लागू नहीं हो, वे सफल होंगे।”

मौलाना ने ऐलान किया कि मु*म अगर डरता है तो सिर्फ़ अल्लाह से डरता है और किसी और से नहीं डरता। उसने साथ ही कहा कि मु*म गद्दारों से नहीं डरेगा, वो कल भी नहीं झुका था, आज भी नहीं झुकेगा। दिल्ली में भड़की ताज़ा हिंसा के बीच मौलाना का ये बयान गौर करने लायक है क्योंकि ट्रंप के दौरे के दौरान अचानक से गोलीबारी और पत्थरबाजी का क्या मकसद हो सकता है? स्पष्ट है, उपद्रवी भारत के बाजारों को ठप्प कर इकोनॉमी को चोट पहुँचाना चाहते हैं।

मौलाना की बातों और हिंसा की क्रोनोलॉजी को समझिए। भारत में हर साल 1 करोड़ से भी अधिक पर्यटक आते हैं। देश की छवि एकदम से नकारात्मक बना दी जाए तो सोचिए पर्यटन इंडस्ट्री पर कितना बुरा असर पड़ेगा? इसी तरह विदेशी कम्पनियाँ व निवेशक पीछे हटेंगे तो रोजगार से लेकर शेयर बाजार तक पर बुरा असर पड़ेगा। यही इनकी साज़िश है। सीएए को देश के बाहर इतना बुरा कर पेश किया जाए कि लोगों को सच में लगने लगे कि ये एक ख़तरनाक क़ानून है। दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन को देशव्यापी बता कर इंटरनेशनल मीडिया का अटेंशन लेने के प्रयास जारी है।

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शाहरुख चला रहा था गोलियॉं, पीछे से दंगाई फेंक रहे थे पत्थर: फिर भी सीना ताने खड़े रहा पुलिसकर्मी कौन?

सोमवार को दिल्ली के कई इलाकों में इस्लामिक पत्थरबाजों ने नागरिकता कानून के विरोध के बहाने गोलियाँ, पत्थरबाजी और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया जिसमें हाथ में बन्दूक लिए लाल कमीज पहने मोहम्मद शाहरु को एक के बाद एक कई राउंड फायरिंग करते हुए देखा गया।

दिनभर चले पत्थरबाजी और फायरिंग के नाटक के बीच एक पुलिसकर्मी रतन लाल को अपनी जान गँवानी पड़ी और एक पुलिस अधिकारी को गंभीर हालातों में अस्पताल भर्ती किया गया। लेकिन इस फायरिंग और दंगाई मोहम्मद शाहरुख की पहचान की चर्चा के बीच एक जाँबाज पुलिसकर्मी खो गया और उन पर चर्चा नहीं की गई।

दंगाई शाहरुख ने कल दिल्ली के मौजपुर में तकरीबन 8 राउंड फायरिंग की। उग्रवादी मोहम्मद शाहरुख जब बन्दूक से फायरिंग करते हुए आगे बढ़ रहा था, तब एक जाँबाज पुलिसकर्मी को उसकी बन्दूक के सामने आकर उसे रोकने का प्रयास करते हुए देखा गया। बावजूद इसके शाहरुख गोलियाँ बरसता रहा।

लेकिन हेड कॉन्स्टेबल नीरज दहिया एक दीवार की तरह दंगाई शाहरुख के सामने डटकर खड़े नजर आए। इसके बाद भी जब पुलिसकर्मी फायरिंग कर रहे शाहरुख के सामने से नहीं हटा तो शाहरुख के समर्थन में उसके पीछे से पत्थरबाजों की एक बड़ी तादाद आती है और नीरज दहिया को पीछे हटाने की कोशिश करती है।

मोहम्मद शाहरुख के सामने दीवार बनकर खड़े हेड कॉन्स्टेबल नीरज दहिया

अब याद करिए जब गत दिसंबर के माह सीएए के विरोध में दंगा भड़काने वालों पर पुलिस की कार्रवाई की गई। देश के ‘इंटरनेट उदारवादियों’ की फ़ौज ने दंगे में हुए नुकसान और उसके परिणाम की चर्चा को किनारे रखकर फौरन अपने नायक तलाश लिए।

लेफ्ट-लिबरल गैंग ने हिजाब लगाई दो लड़‍कियों की तस्वीर खूब शेयर की। दिखाया गया कि हिजाब वाली यह लड़कियाँ दंगा कर रहे एक कथित छात्र को पुलिस की पिटाई से बचाने की कोशिश कर रही थीं। तुरंत बरखा दत्त की इन ‘Sheroes’ की पहचान निकाली गई और देखते ही देखते लदीदा सखलून और आयशा रेन्ना जामिया के विरोध प्रदर्शन का चेहरा बन गईं।

हालाँकि, बरखा दत्त की इन Sheroes का गुब्बारा ज्यादा दिन चला नहीं और जल्द ही उनके जिहादी उद्देश्य उनके सोशल मीडिया एकाउंट्स के जरिए जनता के सामने आ गए। और इसके बाद लेफ्ट-लिबरल गैंग अपनी व्यक्तिगत छवि को बचाने के लिए खुद को इनसे पीछा छुड़ाते हुए भी देखा गया।

लेकिन हम अपने नायक चुनने में लेफ्ट-लिबरल गिरोह जितने होशियार और तत्पर नहीं हैं। जेएनयू से ही इसका उदाहरण देख सकते हैं। उमर खालिद और कन्हैया कुमार को देखते ही देखते कुछ लोगों ने राष्ट्रीय चेहरा बना दिया। स्वरा भास्कर और अनुराग कश्यप जैसे रोजगार के लिए तरसते लोगों को ट्विटर पर दिन-रात सरकार विरोधी पोस्ट करने का रोजगार दे दिया गया। लेकिन बन्दूक के सामने प्रहरी की भाँति खड़े इस पुलिस कर्मी की पहचान अभी तक सबके सामने नहीं आ सकी है। नीरज दहिया ने जो किया, वह बेहद हीरोइक और वीरतापूर्ण कार्य है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर हेड कॉन्स्टेबल नीरज दहिया को खूब प्रसंशा मिल रही है। यह आवश्यक भी है। क्योंकि हम देख चुके हैं कि सोशल मीडिया के प्रभाव से ही आज देश को टुकड़ों में बाँटने का सपना देखने वाले लोग पलक झपकते ही नायक बना दिए जाते हैं, जबकि महान वैज्ञानिक नम्बी नारायण और नीरज दहिया जैसे कर्तव्यपरायण देशभक्त गुमनामी में जीते नजर आते हैं।

इस तस्वीर को ध्यान से देखिए और निहारते रहिए। कल के दंगों में सामने आई इस तस्वीर में नजर आ रहे पुलिसकर्मी की पहचान पर स्केच जारी नहीं किए जा रहे हैं। फर्ज को छोड़ दीजिए और एक बार के लिए हम खुद को उस पुलिसकर्मी की जगह पर खड़े कर के देखें, एक मानसिक रूप से विक्षिप्त युवा शाहरुख लगातार फायरिंग करते हुए हमारी ओर बढ़ रहा है। क्या हम ऐसी स्थिति में होते कि उसी पुलिस कर्मी जैसी दृढ़ता के साथ शाहरुख की ओर बढ़ते? जवाब हम सब जानते हैं।

अभिनन्दन का Pak भी कुछ न बिगाड़ सका, उसके फैन को दंगाइयों ने देश में ही मार डाला…

दिल्ली में सोमवार (फरवरी 24, 2020) को दिन भर दंगाइयों का तांडव चला। जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, गोकुलपुरी, करावल नगर, भजनपुरा, घोंडा से लेकर चाँदबाग़ तक, अताताइयों ने किसी भी जगह को शांत नहीं रहने दिया। जमकर आगजनी की गई। हिन्दुओं के घरों को जलाने की ख़बरें आई हैं। लेकिन, सबसे ज्यादा दुखद रहा हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल का बलिदान होना। दंगाइयों ने एक भरे-पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया। सीएए विरोध के नाम पर हिंसा करने वाले इन लोगों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि उन्होंने इस देश को कितनी बड़ी क्षति पहुँचाई है।

रतनलाल के साथियों ने बताया है कि वो अभिनन्दन वर्तमान के प्रशंसक थे। वही अभिनन्दन, जो मौत के मुँह में जाकर सकुशल लौट आए थे। जिनके लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा था। जिन्होंने मिग-21 जैसे पुराने इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट से एफ-16 जैसे सुपरसोनिक मल्टीरोल फाइटिंग फाल्कन को मार गिराया था। हमारी विडम्बना ये है कि जिस अभिनन्दन का आतंकियों का पनाहगार पाकिस्तान तक कुछ नहीं बिगाड़ पाता, उससे प्रेरित पुलिस का एक जवान अपने ही देश में मार डाला जाता है। सरकार का विरोध करने वाले हिंदुत्व का विरोध करते हैं और फिर देश के जवानों के ही दुश्मन बन जाते हैं।

हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल के बारे में उनके परिवार व जानने वालों ने बतया है कि वो शांतिप्रिय थे। तीन बच्चों के पिता थे वो। वो मरे नहीं हैं, उनकी हत्या हुई है। उनके हत्यारे सीएए के ख़िलाफ़ विरोध करने वाला हर वो आदमी हैं, जिसने हिंसा भड़काने में योगदान दिया है। फरवरी 2018 में अपने साथियों के बीच हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल चर्चा का विषय थे, क्योंकि उनकी मूँछें भारतीय वायुसेना के जाँबाज विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान से मिलती-जुलती थी। इसके ठीक एक साल बाद, आज रतनलाल इस दुनिया में नहीं हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

वो एक योद्धा की तरह वीरगति को प्राप्त हुए, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में सीएए विरोधी दंगाइयों से लड़ते हुए। उन्होंने 1998 में कॉन्स्टेबल के रूप में दिल्ली पुलिस ज्वाइन की थी। वह गोकुलपुरी में पोस्टेड थे। रतनलाल के साथी उन्हें एक बहादुर और आत्मविश्वासी पुलिसकर्मी के रूप में जानते हैं, जिन्होंने सफलतापूर्वक कई छापेमारियों को अंजाम दिया। गोकुलपुरी के पुलिसकर्मी उन्हें याद कर रहे हैं, क्योंकि हर कठिन परिस्थिति में वो आगे से नेतृत्व करते थे।

एडिशनल डीसीपी बृजेन्द्र यादव के अंतर्गत भी रतनलाल काम कर चुके थे। भावुक यादव बताते हैं कि वो एक क्षमतावान जवान थे, जो कभी थकते नहीं थे और उनका व्यवहार एकदम सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता था। गोकुलपुरी के एसीपी रहे यादव बताते हैं कि अपने उस कार्यकाल के दौरान उन्होंने रतनलाल की कई बार प्रशंसा की थी और उन्हें सम्मानित किया था। हम आगे उन दंगाइयों के बारे में बात करेंगे, जिन्होंने रतनलाल की जान ले ली, लेकिन उससे पहले आपको उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

उनका जन्म राजस्थान के सीकर में हुए था। तीन भाइयों और एक बहन के बीच रतनलाल सबसे बड़े थे। वो अपने पीछे तीन बच्चों को छोड़ गए हैं- 11 (कनक) और 12 (सिद्धि) साल की दो लड़कियाँ और 8 साल का बेटा (राम)। वो अपनी पत्नी व बच्चों के साथ नार्थ दिल्ली के बुराड़ी में रहते थे। उन्होंने बच्चों से वादा किया था कि अबकी पूरा परिवार होली खेलने गाँव जाएगा, सीकर के फतेहपुर तिहावली में। क़रीब एक दशक पहले रतनलाल के पिता का निधन हो गया था। सोचिए, उस माँ पर क्या बीत रही होगी, जिसका सबसे बड़ा बेटा चला गया। अब तक उनकी माँ को रतनलाल की मौत की सूचना नहीं दी गई थी। वो सोशल मीडिया से दूर रहती हैं, उन्हें नहीं पता कि सीएए विरोधियों ने उनके बेटे की हत्या कर दी है।

रतनलाल के छोटे भाई ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बात करते हुए बताया कि वो शुरू से ही पुलिस की वर्दी पहनना चाहते थे। उनके भीतर धैर्य की अद्भुत क्षमता थी। उनके भाई बताते हैं कि उन्होंने कभी रतनलाल को आपा खोते या किसी पर चिल्लाते नहीं देखा था। क़रीब एक महीने पहले पूरा परिवार मिला था, जब एक रिश्तेदार की मौत हो गई थी। उनके छोटे भाई दिनेश कहते हैं कि आज उन्होंने अपने भाई को खोया है, कल को उनकी जगह कोई और हो सकता है। उनका बयान सही है क्योंकि दिल्ली में कई ऐसे मोहम्मद शाहरुख़ घूम रहे हैं, जो पुलिस पर फायरिंग करते चलते हैं। लिबरल गैंग ऐसे शाहरुखों के बचाव में सदैव तत्पर हैं। उन्हें लगातार एहसास दिलाया जा रहा है कि वो एकदम ठीक कर रहे हैं।

रतनलाल ने 2013 में दो आदिवासी महिलाओं का बलात्कार करने वाले को धर दबोचा था। सीमापुरी के एक रेस्टॉरेंट में कुछ पहलवानों ने तबाही मचाई थी, तब उनसे रतनलाल ही निपटने गए थे। उनके साथी बताते हैं कि जब भी कोई कठिन टास्क आता तो वो आगे बढ़ कर उसे करने के लिए निकल पड़ते थे। गाँव वालों की माँग है कि उनकी धरती के लाल को ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाए। रतनलाल वीरगति को प्राप्त हुए हैं, दुनिया का हर दर्जा उनके कारनामे से नीचे ही है। लेकिन, जब भी आप रतनलाल को याद करें, सीएए विरोधी दंगाइयों की करतूतों को भी ज़रूर याद करें।

दुख की बात तो ये है कि अभी तक किसी भी नेता ने रतनलाल या उनके परिवार से मुलाकात नहीं की है। उनके लिए आवाज़ नहीं उठाई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हत्यारों से अपील करते हैं कि वो शांत हो जाएँ। यही केजरीवाल जब कोई हिन्दू चींटी भी मार दे तो रामायण और गीता का उपदेश देने लगते हैं। भगवद्गीता को लेकर झूठ बोलते हैं। क्या इससे हत्यारों, दंगाइयों और उपद्रवियों को बढ़ावा नहीं मिलता? सीएए विरोधी हिंसा का समर्थन कर रहा हर एक नेता उसी तरह दोषी है, जैसे कश्मीर में अलगावादियों और आतंकियों को संरक्षण देने वाले नेतागण थे। इनमें से कई आज जेल व नज़रबंदी की हवा खा रहे हैं।

अगर रतनलाल की जगह कोई दंगाई मारा गया होता, तो उसके दरवाजे पर अब तक नेताओं का मेला लग गया होता। यूपी में हमने देखा कि कैसे हर एक दंगाई के घर जाकर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने अपना समर्थन दिया। यही प्रियंका गाँधी जेएनयू के दंगाइयों से मिलने भी पहुँचीं। और रतनलाल? देश के लिए जान देने वाले, दंगाइयों के हाथों मारे जाने वाले और अपना पूरा जीवन जनता की सुरक्षा में खपा देने वाले जवान के लिए कोई नेता आवाज़ क्यों नहीं उठा रहा? वो ऐसा क्यों नहीं बोल रहा कि सीएए विरोधियों ने ग़लत किया है और उन पर कार्रवाई हो। हिंसा की निंदा करने वालों से सवाल है कि तुम हिंसा करने वालों का नाम क्यों नहीं ले रहे?

माँ से किया वादा पूरा नहीं कर पाए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल, बुखार के बावजूद कर रहे थे ड्यूटी

दंगाइयों की गोली से ही हुई हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

दिल्ली में फिर गोलीबारी और पत्थरबाजी, 9 की मौत: दंगाइयों के बचाव में लिबरल गैंग सक्रिय

दिल्ली में दंगाई एक बार फिर से अपने खतरनाक मंसूबों के साथ निकल पड़े हैं। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कर्दमपुरी में हिंसा भड़क गई है। वहाँ गोलीबारी भी हुई है। गोलीबारी की सूचना मिलते ही अर्धसैनिक बलों को वहाँ के लिए रवाना कर दिया गया है। वहीं खजूरी ख़ास क्षेत्र में पत्थरबाजी फिर से तेज़ हो गई है। करावल नगर की तरफ़ जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया गया है। खजूरी ख़ास में लगातार तीसरे दिन हिंसा भड़की है और वहाँ पुलिस की उपस्थिति भी नगण्य है, जिससे दंगाई खुलेआम तांडव कर रहे हैं। वहाँ कई घरों को जलाए जाने की ख़बरें भी आ रही हैं

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में एक पत्रकार को भी गोली मारने की ख़बर आई है। अभी इस बारे में और सूचना आनी बाकी है। वहीं शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। इन्हीं उपद्रवियों का आधिकारिक सोशल मीडिया पेज झूठे अफवाह फैला रहा था। सोमवार की रात भजनपुरा-यमुना विहार में दंगाइयों ने हिंसा की एक के बाद एक वारदातों को अंजाम दिया। एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान ने दावा किया है कि टीवी चैनल के दो पत्रकारों की पिटाई की गई है।

वहीं सोशल मीडिया के लिबरल गिरोह ने दंगाइयों के बचाव का सिलसिला तेज़ कर दिया है। पुलिस किसी पत्थरबाज को शिकंजे में ले रही है, तब उसकी फोटो को वायरल कर के उसे 2002 के गुजरात दंगे से जोर कर दिखाया जा रहा है। वहीं दंगाइयों द्वारा मार डालें गए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल और हॉस्पिटल में भर्ती डीसीपी अमित शर्मा को लेकर गिरोह विशेष लगातार चुप्पी साधे हुए है। अब तक कुल 9 लोगों के मारे जाने की ख़बर है।

कुछ लोग पुलिस की तैनाती को दिखाकर समुदाय विशेष को पीड़ित के तौर पर पेश कर रहे हैं। विडियो बना कर दावा कर रहे हैं कि पुलिस बजरंग दल वालों के साथ उन्हें मारने आई है। ट्विटर सेलेब्रिटियों द्वारा ऐसे वीडियो को ख़ूब प्रसारित किया जा रहा है।

ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा कि सभी क्षेत्रों में शांति समितियों को सक्रिय कर दिया गया है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के 5 मेट्रो स्टेशन मंगलवार को भी दिन भर बंद रहे। गोकुलपुरी मेट्रो स्टेशन के पास टायर जला डाला गया। ब्रह्मपुरी क्षेत्र में पत्थरबाजी के बाद एक विरोध-प्रदर्शन रैली निकाली गई। वहीं शाहदरा के घायल डीसीपी अमित शर्मा के बारे में ख़बर आई है कि उनकी हालत अब ख़तरे से बाहर है। वो फ़िलहाल हॉस्पिटल में रहेंगे।

दिल्ली और अलीगढ़ दंगों के जुड़ रहे तार, हिंसा भड़काने के पीछे PFI और भीम आर्मी का हाथ

‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारों के बीच ब्रह्मपुरी में मुस्लिम भीड़ ने की हिंदू युवक की हत्या

दंगाइयों की गोली से ही हुई हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

दलितों ने मुस्लिमों की हत्या की, महिलाओं का रेप किया: इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार इरेना अकबर

इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार और लखनऊ में रहकर बतौर उद्यमी काम करने वाली इरेना अकबर ने ट्विटर पर दलितों के प्रति अपनी कुंठा निकाली है। अकबर ने एक सवाल के जवाब में साफ कहा है कि वे दलितों पर यकीन नहीं करतीं। ऐसा इसलिए क्योंकि दलितों ने गुजरात दंगों में मुस्लिम मर्दों की हत्या की थी। साथ ही मुस्लिम महिलाओं का रेप भी किया था। अपने जवाब में इरेना ने दलितों को दंगे में शामिल ‘फुट सोल्जर’ कहा। इसके अलावा ये भी कहा है कि दलितों को अपर कास्ट हिंदुओं ने प्रताड़ित किया था। उनके साथ मुस्लिमों ने कुछ नहीं किया है।

इरेना ने लिखा, “गुजरात में 2002 में मुस्लिमों के हुए नरसंहार में दलित फुट सोल्जर थे। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं का रेप कर और आदमियों की हत्या करने का घृणित काम किया था। मैं उनपर कभी यकीन नहीं करती। उन्हें उनके ही ऊँची जाति वाले हिंदू भाइयों ने प्रताड़ित किया था। हमने उनके साथ कुछ नहीं किया।”

गौरतलब है कि दलितों को लेकर पत्रकार खातून की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक महीने पहले ही मध्यप्रदेश के सागर जिले में धान प्रसाद अहिरवार नामक एक दलित को उसके मुस्लिम पड़ोसियों ने आग के हवाले कर दिया था। करीब 10 दिन जिंदगी-मौत के बीच झूलने के बाद उसने दम तोड़ दिया था।

इरेना की दलित विरोधी टिप्पणी देखने के बाद जब किसी यूजर ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि मुस्लिम और दलितों के बीच इस तरह की स्थिति आरएसएस को मदद करेगी, तो इरेना यूजर पर ही भड़क गई और कहने लगीं कि दलितों ने मुस्लिमों महिलाओं का रेप किया, मर्दों की हत्या की, ये एक तथ्यात्मक बात है। उन्होंने अपनी बात को इसके बाद फिर दोहराया कि दलितों को अपर कास्ट हिंदुओं ने प्रताड़ित किया था। इसका इससे कोई लेना-देना नहीं है कि उन्होंने मुस्लिमों के संहार में सक्रिय भूमिका निभाई।

इसके बाद जब एक शुभचिंतक उन्हें समझाने उनके ट्वीट पर आया तो वह उसपर भी नाराज होती दिखीं और कहने लगीं कि वो किसी भी कीमत पर मुस्लिम बहनों का रेप करने वालों का बचाव नहीं करेंगी। बता दें अपने इन ट्विट्स में इरेना लगातार दलितों को गुजरात दंगों का ‘फुट सोल्जर’ कहती रहीं।


गौरतलब है कि साल 2002 में 27 फरवरी को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में गुजरात के गोधरा स्टेशन पर समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने आग लगा दी थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में अधिकतर कार सेवक थे। इस घटना के बाद 28 फरवरी से 31 मार्च तक गुजरात में दंगे भड़के। इसमें 1200 से अधिक लोग मारे गए थे और साथ ही 1500 लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।

दिल्ली हिंसा: मौजपुर में दंगाइयों ने JK24*7News के संवाददाता को मारी गोली, हालत नाजुक

दिल्ली के मौजपुर में सोमवार से शुरू हुई हिंसा बढ़ती हुई नजर आ रही है। मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को ही मौजपुर में दंगाइयों की भीड़ द्वारा JK24X7News के पत्रकार आकाश नापा को निशाना बनाया गया और उन्हें गोली मार दी गई।

दंगाइयों ने आकाश के कंधे पर गोली चलाई इसके बाद उन्हें घायल अवस्था में जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत नाजुक है।

JK247News के पत्रकार आकाश चैनल के लिए नार्थ-ईस्ट दिल्ली की घटनाओं को कवर करते थे। सोमवार को दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल को भी दंगाइयों ने गोली मार दी थी।

गौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को हिंसा की शुरुआत हुई थी। इसके बाद इस हिंसा ने भयावह रूप ले लिया। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में कई जगहों पर आगजनी-पत्थरबाजी हुई। गोलियॉं चलाई गई। अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मंगलवार की सुबह भी मौजपुर और ब्रह्मपुरी में पत्थरबाजी तथा आगजनी की घटना हुई। दिल्ली की सड़कों पर हिंसा की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत आने से ठीक पहले हुई। उनके अहमदाबाद में लैंड करने के बाद हिंसा तेज हो गई।

इसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा जा रहा है कि भारत की छवि खराब करने के लिए ट्रंप के दौरे को हिंसा के लिए सोच-समझकर चुना गया है। आखिर क्यों जब ट्रंप अहमदाबाद में दुनिया को इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ संदेश दे रहे थे देश की राजधानी तेजी से भभक उठी? इसके पीछे किसका हाथ है? ये किसकी साजिशें हैं?

‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारों के बीच ब्रह्मपुरी में मुस्लिम भीड़ ने की हिंदू युवक की हत्या

अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के बीच राष्ट्रीय राजधानी में आगजनी, पत्थरबाजी चालू है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों से अब भी हिंसा की ख़बरें आ रही है। बाजारों में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर तोड़फोड़ की जा रही है। दुकानों पर हमले हो रहे हैं। सार्वजनिक वाहनों को फूँका जा रहा है और एक समुदाय के लोग दूसरे समुदाय को मारने-काटने पर आतुर हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर इन घटनाओं की कुछ वीडियो वायरल भी होने लगे हैं। इनमें से एक विडियो ब्रह्मपुरी इलाके की सामने आई है।

विडियो में देखा जा सकता है कि 2-3 लोग एक हिंदू के शव को मुस्लिमों की भीड़ से दूर लेकर जा रहे हैं। लेकिन मुस्लिमों की भीड़ अचानक से गली के बाहर आकर अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर का नारा लगाने लगती है। सोशल मीडिया के अनुसार मृतक युवक का नाम विनोद है।

इसके बाद इसी मामले से संबंधित एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वीडियो में ब्रह्मपुरी इलाके के आसपास रहने वाले मुस्लिमों को कहते सुना जा सकता है कि हिंदू के शव उन्हें इसी तरह पूरी रात मिलेंगे।

वीडियो में शख्स को कहते सुना जा सकता है, “मुस्लिमों ने गली नंबर 1 में हमारे हिंदू भाई के शव को भेजा है, वो भी इस संदेश के साथ कि वो पूरी रात इस तरह के शव भेजेंगे।”

Hindu man killed by Muslim mob in Delhi's Brahmapuri area
हिंदू युवक विनोद का शव

गौरतलब है कि रविवार रात से जाफराबाद, कबीरनगर, गोकलपुरी, भजनपुरा, ब्रह्मपुरी जैसे उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इलाकों में हालात काबू में नहीं हैं। यहाँ सीएए के कानून के विरोध और समर्थन का मुद्दा बहुत पीछे छूट गया है और अब इस मतभेद ने साम्प्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया है।

हिंदू युवक को मारकर उसके शव को इस तरह फेंकने वाली घटना दिल दहलाने वाली है। साथ ही वो संदेश भी जो एक समुदाय ने दूसरे समुदाय को दिया। इसके अलावा बता दें कि कल दंगाइयों ने पेट्रोल पम्प से लेकर ऑटो, रिक्शा तक को आग के हवाले कर दिया था। इसी बीच एक युवक ने आठ राउंड गोलियाँ भी चलाई थी, जिसकी पहचान शाहरुख के तौर पर हुई है।

दंगाइयों की गोली से ही हुई हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

सोमवार को नॉर्थ-ईस्‍ट दिल्‍ली में नागरिकता कानून के विरोध में हुई हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल की मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि उनकी मृत्यु गोली लगने के कारण हुई। अभी तक उनकी मृत्यु की वजह पत्थर लगना बताया जा रहा था और अन्य अज्ञात कारण बताए जा रहे थे।

मृतक रतनलाल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि 42 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल की मौत गोली लगने से हुई न कि पथराव के कारण। न्यूज नेशन की एक रिपोर्ट में यह दवा किया गया है कि उनके पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विवरण है। रिपोर्ट में लिखा गया है, “रतन लाल के शरीर में एक गोली लगी थी। यह गोली बाएँ कंधे से प्रवेश करते हुए दाएँ कंधे पर जाती है। शव परीक्षण के दौरान इसे हटा दिया गया था। ऑटोप्सी रिपोर्ट से ही यह जानकारी प्राप्त हुई है।”

मृतक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल राजस्थान के सीकर जिले के गाँव फतेहपुर तिहवाली के निवासी थे। सीकर निवासी रतनलाल वर्ष 1998 में कॉन्स्टेबल के पद पर दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। सोमवार को हुई हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल बुरी तरह जख्मी हो गए थे। रतनलाल की मौत की खबर जैसे ही उनकी पत्नी पूनम को मिली, वह बेहोश हो गईं। देखते ही देखते उनके घर भीड़ जमा हो गई। रतनलाल की दो बेटियाँ और एक बेटा है।

मृतक रतनलाल की माँ और छोटा भाई दिनेश गाँव में रहते हैं। पिता बृजमोहन की ढाई साल पहले ही मृत्यु हो गई थी। रतन ने दो दिन पहले ही माँ संतरा देवी व भाई दिनेश से फोन पर बात की थी। उन्होंने माँ से हाल-समाचार पूछने के साथ ही इस बार होली पर गाँव आने का वादा किया था, लेकिन माँ को क्या पता था कि उनकी बेटे से आखिरी बार बात हो रही है। घटना से पूरा परिवार सदमे में है।

दिल्ली और अलीगढ़ दंगों के जुड़ रहे तार, हिंसा भड़काने के पीछे PFI और भीम आर्मी का हाथ

दिल्ली और अलीगढ़ के हालिया दंगों के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और भीम आर्मी का हाथ होने की बात सामने आई है। इससे पहले बीते साल भी यूपी और दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुई हिंसा के पीछे पीएफआई का हाथ सामने आया था। ​उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रविवार को हिंसा भड़की थी। मंगलवार को भी कई इलाकों में आगजनी और पत्थरबाजी की खबरें हैं। हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके साथ ही अलीगढ़ में भी हिंसक घटनाएँ हुई हैं।

हिंसा के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और भीम आर्मी की भूमिका संदिग्ध दिख रही है। पीएफआई कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है। भीम आर्मी का प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण है।

उत्तर प्रदेश राज्य खुफिया विभाग (UP State Intelligence) ने कुछ प्रमुख मोबाइल फोन नंबरों की कॉल डिटेल के आधार पर खुलासा किया है कि दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में पिछले दो दिनों में आगजनी और गोलीबारी की विभिन्न घटनाओं के तार अलीगढ़ में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन से जुड़े हुए हैं। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अलीगढ़ के अंबेडकर पार्क में विरोध-प्रदर्शन करने वाले भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपने के बाद पीएफआई के अधिकारियों से मुलाकात की थी।

इसी दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्रों के एक संगठन ने भी भीम आर्मी और पीएफआई नेताओं से मुलाकात की। रिपोर्ट में कहा गया है कि भीम आर्मी की अगुआई में एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल शहर के बीच एक धार्मिक स्थान पर पहुँचा, जहाँ उन्होंने पोस्टर हटाने शुरू कर दिए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने मंदिरों पर पत्थरबाजी की। पुलिस द्वारा विरोध करने पर आक्रोशित भीड़ ने पुलिस बल पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद शहर के ऊपरकोट क्षेत्र तथा जमालपुर क्षेत्र में भी हिंसा शुरू हो गई, जहाँ पहले से ही सीएए को लेकर पिछले काफी दिनों से विरोध-प्रदर्शन चल रहा था।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक अलीगढ़ पुलिस के एक सर्किल ऑफिसर (CO) ने फोन पर बताया, “विभिन्न स्थानों पर एक साथ ही हिंसक घटनाएँ शुरू हो गईं। ऐसा लगता है कि यह (पत्थरबाजी) सुनियोजित थी और दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिला में हुई हिंसा से संबद्ध है। हम कुछ महत्वपूर्ण फोन नंबरों के डाटा ले रहे हैं।” बताया जा रहा है कि दिल्ली और अलीगढ़ में सीएए संबंधित हिंसाओं के समय और पैटर्न में काफी समानताएँ हैं।

रिपोर्ट में बताया कि दिल्ली और यूपी दोनों जगहों पर हिंसा की शुरुआत पत्थरबाजी से हुई। भीड़ बढ़ने के बाद हिंसा करने वालों, जिनमें ज्यादातर हथियारों से लैस थे ने आगजनी करना और दुकानें लूटना शुरू कर दिया। वहीं अलीगढ़ में खैर मार्ग क्षेत्र में दुकानों में लूटपाट हुई, दिल्ली के जाफराबाद क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप में आग लगा दी गई और कई दुकानों को लूटा गया।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि हिंसक प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर हमला किया। इन हमलों में दिल्ली में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत हो गई। इसी तरह अलीगढ़ में पुलिस निरीक्षक रविंद्र कुमार सिंह और कई अन्य कॉन्स्टेबलों पर भीड़ ने हमला कर दिया। सीएए-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों समेत अन्य सरकारी संपत्तियों को भी नष्ट कर दिया।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया कि पीएफआई ने अपने बैंक खाते से सीएए-विरोधी प्रदर्शनों में संलिप्त कई लोगों को रुपए भेजे थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसे 73 बैंक खाते चिह्नित किए गए थे। ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रमुख लेन-देन पीएफआई के दिल्ली स्थित मुख्य खाते से हुई थी।

पीएफआई का मुख्यालय शाहीन बाग में स्थित है, जहाँ सीएए विरोध के नाम पर दो महीने से ज्यादा समय से धरना चल रहा है। पीएफआई नेताओं और भीम आर्मी के पदाधिकारियों के बीच संबंध ईडी ने भी अपनी रिपोर्ट में उजागर किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि पीएफआई का दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद शाहीन बाग प्रदर्शन का प्रमुख हिस्सेदार है। परवेज, भीम आर्मी के कई व्हाट्सएप ग्रुपों से भी जुड़ा हुआ है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले दिल्ली के जामिया में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के पीछे भी PFI का हाथ सामने आया था। पुलिस ने कहा था कि PFI के अराजक तत्वों द्वारा पथराव और आगजनी की शुरुआत की गई। पुलिस ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत दिल्ली में हुई, क्योंकि कार्यकर्ताओं को पता था कि मीडिया इस ख़बर को तुरंत ब्रेक कर देगा और इससे हिंसा को फैलाने में अधिक मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि जामिया में हिंसा से दो दिन पहले 13 दिसंबर को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI के लगभग 150 सदस्यों ने विभिन्न राज्यों से दिल्ली में प्रवेश किया था। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, जामिया इलाक़े में हिंसा भड़कने से पहले वो कहीं छिप गए थे।

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