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‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में जो कुछ हुआ उसका डर अब भी हिंदुओं के चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रहा है। दंगा प्रभावित चाँदबाग में कुछ जगहों पर थोड़ी बहुत चहलकद़मी दिखी। लेकिन नाले से आगे करावल नगर की तरफ बढ़ने पर लोग बंद गली के गेट से डरी हुई आँखों से बाहर देख रहे थे। ये वही इलाका है जहॉं ताहिर हुसैन की वो इमारत है जो दंगे का केंद्र बनकर उभरा है।

ऐसे ही एक गेट पर हमारी नज़र पड़ी। गेट के दूसरी तरफ दर्जनों लोग डरी हुई आँखों से रोड पर मीडिया और पुलिस की गतिविधियों को देख रहे थे। ताहिर हुसैन के मकान से करीब 50 मीटर की दूरी पर कुछ महिलाएँ और पुरुष खड़े थे। पीपल के पेड़ के नीचे पड़ी बजरी के ढेर के पास ये लोग खड़े थे। सड़क की गतिविधियों पर इस समूह का ज्यादा ध्यान नहीं था। वे गर्दन ऊँची कर टकटकी लगाए ताहिर के मकान को देख रहे थे। जब मैं उनके पास पहुॅंचा तो कुछ लोग पीछे हट गए। हमने उनसे बातचीत करने की कोशिश की तो उनकी डरी हुई वे आँखें फूट पड़ीं।

एक बुजुर्ग महिला ने कहा, “देखो… हमारे दिलों में पाप नहीं है। ये मुस्लिम भाई अब अपने घरों को छोड़कर चले गए। हम इनके घरों में आग भी लगा सकते हैं और ताला भी तोड़ सकते हैं, लेकिन हम हिंदू ऐसा कभी नहीं करेंगे। घटना के डर से हम न तो तीन दिन से सो रहे हैं और न ही कुछ खा-पी रहे हैं। यह दिल्ली को भी पाकिस्तान बनाना चाहते हैं, जो कि ऐसा कभी हो नहीं सकता, लेकिन अब हम इसका इलाज करके मानेंगे। यह चोर बिल्डिंग है। इसमें गुंडागर्दी होती है। इस इमारत को अब यहाँ नहीं रहने देंगे, इसे हम सरकार से तुड़वाकर ही दम लेंगे। चाँदबाग को इन्होंने अपना गढ़ बना रखा है।”

एक अन्य महिला ने बताया, “जब इस इमारत से हमारे ऊपर तेजाब की बोतलें और पत्थर फेंके जा रहे थे। तब हमारी आँखें खुली कि इनका यह प्लान काफी पहले से बना हुआ था। हम दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। हर रोज़ हम इस इमारत को आते-जाते और अपनी छतों से देखते हैं, लेकिन कभी अहसास नहीं हुआ कि यहाँ कुछ हमें मारने के लिए ही योजनाएँ बनाई जा रही हैं। वहीं आज तक ये भी पता नहीं चला कि इतनी बड़ी इमारत में आख़िर होता क्या है। यह सब इसकी राजनीति का हिस्सा है।”

दिल्ली करावल नगर में ताहिर हुसैन के मकान के सामने पड़े ईंट-पत्थर

उनके साथ खड़ी महिला बताती है, “तीन दिन बाद आज हम अपने घरों से बाहर आए हैं, इन्होंने हमारे साथ तो जो किया सब आपके सामने है, लेकिन इन्होंने ट्यूशन से लौट रहीं हमारी बेटियों को भी नहीं छोड़ा और नंगा करके भेजा। उनके सामने दंगाइयों ने कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की। हम जीवन में अपने पड़ोसी को कभी मारने की सोच भी नहीं सकते, लेकिन इनकी तैयारी से ऐसा लग रहा था कि यह हम सबको खत्म करना चाहते थे।” दंगाइयों की मानसिकता का आप अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इन लोगों ने ट्यूशन से आती बच्चियों को न सिर्फ नग्न करके भेजा, बल्कि पहले भी छतों से अपने कपड़े उतार कर ये लड़कियों को आवाज़ देते थे- “आ जा… इधर आ जा…”“

साथी महिलाओं को बात करता देख पीछे खड़ी महिला भी इसी दौरान आगे आईं। ऑपइंडिया को अपनी पीड़ा बताते-बताते उनकी आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने बताया, “हमारे पास (हिंदुओं) एक-एक दो-दो बच्चे हैं, और उनके दस-दस बारह-बारह बच्चे हैं। सभी के हाथ में हथियार थे वह हमारे घरों के ऊपर पत्थर बरसा रहे थे। हमने डर के कारण अपनी खिड़कियों को भी बंद कर लिया और तीन दिनों तक घर से बाहर तक नहीं निकले। दंगाइयों ने इसका फ़ायदा उठाया और हमारे मंदिर को भी जला दिया। यहाँ तक कि मोहल्ले में मौजूद अधिकांश हिंदूओं के घरों को भी आग के हवाले कर दिया। दंगाइयों ने गरीब श्याम चाय वाले और मेडिकल स्टोर वाले को भी नहीं छोड़ा। उनकी दुकानों में पहले तो लूटपाट की और फिर उनको आग लगा दी।”

ग्रुप में खड़ी एक महिला ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा और कहा, “अब क्या है दिल्ली के लोग फ्री के चक्कर में पड़े गए। अब इसका परिणाम हमें पाँच साल तक झेलना पड़ेगा।”

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‘तुम सड़क पर उतरो, कॉन्ग्रेस तुम्हारे साथ खड़ी’ – सोनिया, राहुल, प्रियंका के हेट स्पीच पर HC का नोटिस

सीएए विरोधी प्रदर्शनों में जनता को ट्वीट और भाषणों के जरिए भड़काने के आरोप में सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर, बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर, रेडियो जॉकी सायमा, AAP नेता अमानतुल्लाह खान के ख़िलाफ़ दर्ज हुई याचिका पर सुनवाई के दौरान आज (फरवरी 28, 2020) दिल्ली हाइकोर्ट में एनआई जाँच के लिए अपील की गई। इसके बाद कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।

कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा पर भी भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दिल्ली हाईकोर्ट में दर्ज हुई याचिका पर आज सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, केंद्र और राज्य सराकर को नोटिस भेजा। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी। इसमें अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा के खिलाफ दी गई याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट में आज तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इन याचिकाओं में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी, असदुद्दीन ओवैसी, अकबरुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान और अभिनेत्री स्वरा भास्कर, आरजे सायमा समेत अन्य लोगों पर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया गया था।

इस सुनवाई के दौरान आज याचिकाकर्ता ने कोर्ट में सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी के उन बयानों को पढ़कर सुनाया, जिसमें उन्होंने सीएएए का विरोध करने के लिए सड़क पर उतरने की बात कही थी। साथ ही कहा था कि कॉन्ग्रेस इस तरह का विरोध करने वाले लोगों के साथ खड़ी है।

इसके साथ ही सुनवाई के दौरान मनीष सिसोदिया के उस बयान का जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस पर बस में आग लगाने का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं असदुद्दीन ओवैसी, वारिस पठान द्वारा दिए गए भाषण को भी कोर्ट के सामने रखा गया। इसके साथ ही जिन अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उनके बयानों की कॉपी हाईकोर्ट के सामने पेश की गई।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई करते हुए बाद आज केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है कि इन तीनों पक्षों का इन याचिकाओं पर क्या कहना है, क्योंकि याचिका में माँग की गई है कि भड़काऊ बयान देने वाले सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए।

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कयामत का दिन कभी नहीं आएगा: CAA की आड़ में हिंसा करने वालों को CM योगी की चेतावनी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर यूपी में हो रहे प्रदर्शनों और दिल्ली में हिंसा को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। सीएए, एनपीआर और एनआरसी के नाम को लेकर विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए बुधवार (फरवरी 26, 2020) को सवाल किया कि सीएए पर इतना बवाल क्यों हो रहा है?

सीएम योगी ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान विपक्ष पर तंज कसते हुए पूछा, “आखिर देश की छवि खराब करके आप क्या पाना चाहते हैं। देश में आगजनी करके तोड़फोड़ करके निर्दोष लोगों को निशाना बनाकर क्या चाहते हैं? आज भी तो आप सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। बुद्धिमान व्यक्ति बार-बार ठोकर नहीं खाता। आप सीएए, एनपीआर और एनआरसी के नाम पर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। आप समाज की अपूरणीय क्षति कर रहे हैं। आने वाली पीढ़ी इस कृत्य के लिए कभी माफ नहीं करेगी।”

सीएम ने कहा, “अगर कुछ लोगों को गलतफहमी हुई है कि वो कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेकर चीजों को अपने तरीके से चला सकते हैं तो सरकार को इसका समाधान निकालना आता है।” आगे उन्होंने यह भी कहा कि कुछेक लोग दूसरों को मार रहे हैं और अगर वो उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उन पर लाठीचार्ज नहीं करेगी, तो ऐसा नहीं होने जा रहा है।

सीएम योगी आदित्यनाथ यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “एक बात नोट कर लें… किसी गलतफहमी का शिकार होंगे… ये ‘कयामत का दिन’ कभी नहीं आने वाला है।” उन्होंने आगे कहा, “प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों की छूट है मगर लोकतंत्र की आड़ में आगजनी करने की छूट सरकार नहीं देगी…तोड़ फोड़ करने की छूट सरकार नहीं देगी और जिसने किया है उससे वसूली भी करेगी।”

विधानसभा में बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सबका विकास करेगी, लेकिन तुष्टिकरण किसी का नहीं करेगी। सभी अपनी परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाएँ, लेकिन दूसरों के मामलों में दखल देंगे तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा। पिछली सरकार में पुलिस लाइन में जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती थी, काँवड़ यात्रा में डीजे नहीं बजा सकते थे। हमने दोनों परंपराओं को लागू किया। इस दौरान जब समाजवादी पार्टी सदस्य राकेश प्रताप सिंह ने योगी सरकार से पूछा कि क्या सरकार हिंसा में मारे गए परिवार के लोगों को कोई मुआवजा देगी। इसके जवाब में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- जी नहीं। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

सीएम योगी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर विरोध प्रदर्शन अनावश्यक है। यह नागरिकता देने का कानून है। प्रधानमंत्री बार-बार कह चुके हैं कि इससे किसी से नागरिकता नहीं जाने वाली है। यह कानून 1955 में कॉन्ग्रेसी सरकार ने बनाया था, इसमें सिर्फ एक संशोधन किया गया है। 11 वर्ष के जगह पर 5 वर्ष कर दिया गया है। सीएम योगी ने कहा कि वह बनाएँगे तो ठीक है, हम बना दें तो बुरा है?

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दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों की सच्चाई और उसे छिपाने का प्रोपेगेंडा: 9 कार्टून से खुली पोल

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों से डर का ऐसा माहौल बना है कि नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के हिन्दू अभी भी दहशत में हैं। कइयों के घर जला दिए गए तो कइयों की जानें चली गईं। इस पूरे प्रकरण में मीडिया रोल एकदम संवेदनहीन रहा और उसने सच्चाई दिखाने से परहेज किया। ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने तो अपनी ख़बर में यहाँ तक दावा कर दिया कि आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को ‘जय श्री राम’ चिल्लाती हुई भीड़ ने मारा है। जबकि अंकित के भाई अंकुर लगातार इस ख़बर को नकार रहे हैं क्योंकि ताहिर हुसैन के गुंडों ने प्रताड़ित कर के अंकित को मार डाला।

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इधर दंगों की सच्चाई और मीडिया के पक्षतापूर्ण रवैये को दिखाते हुए एक कार्टूनिस्ट ने काफी बढ़िया टून्स बनाए हैं, जो आपको वास्तविकता से रूबरू कराते हैं। नीचे हम उनके कुछ कार्टून्स संलग्न कर रहे हैं, जो इन दंगों की वास्तविकता को बयान करते हैं। नीचे इस तस्वीर में आप कार्टूनिस्ट अमोल की उन 9 कार्टून्स को देख सकते हैं, जो मुस्लिम भीड़ के इस तांडव की पोल खोलते हैं:

दंगों की साफ-सफाई करती झाड़ू!
पहले दंगा, फिर प्रोपेगेंडा
सामने से गोली और पीछे से राजनीति
पुलिसवाले की हत्या लेकिन करने वाले शांति के दूत!
नाले से निकलती लाश और संविधान की रक्षा!
माथे में स्क्रू ड्राइवर और सेक्यूलरिजम से लेकर भाईचारे जैसे शब्दों का गढ़ा जाना
स्क्रू ड्राइवर से टपकता खून और बचता संविधान!
सेल्फ डिफेंस के नाम पर हत्या के पीछे का प्रोपेगेंडा
जहर घोलते नेताओं पर चोट करता कार्टून

आप अमोल के इंस्टाग्राम अकाउंट (instagram.com/PR1CELES5/) पर भी जाकर उन्हें फॉलो कर सकते हैं, जहाँ वो कार्टून्स के माध्यम से लगातार वामपंथियों के प्रोपेगेंडा की पोल खोलते रहते हैं। इससे पहले भी हमने आपको कार्टूनिस्ट ‘टीपुडा’ के बारे में बताया था। तब वो एक ‘बड़े’ कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के पक्षपाती कार्टून्स को ट्विटर (twitter.com/PR1CELES5) पर सही रूप देकर चर्चा में आए थे।

मोदी-विरोध में डूबे कार्टूनिस्ट को दिखाया आईना, मस्त-मस्त कार्टून बनाकर ईंट का जवाब दिया पत्थर से

टीपूडा का ही असली नाम अमोल है। वो प्रोफेशनल कार्टूनिस्ट नहीं है, लेकिन कार्टून के माध्यम से चीजों का खंडन करने के लिए वो काफी पॉपुलर है। अमोल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने ये सब कार्टून मजे के लिए बनाए थे, लेकिन साथ ही वो एक मैसेज भी देना चाहते थे। उन्होंने कहा कि समय मिलने पर वो और भी कार्टून बनाएँगे।

बांग्लादेशी छात्रा को भारत छोड़ने का फरमान, घुसपैठियों का पता बताने पर राज ठाकरे की पार्टी देगी ₹5000

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बांग्लादेशी छात्रा को भारत छोड़ने का फरमान सुनाया है। छात्रा पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। अफसरा अनिका मीम नाम की यह छात्रा पश्चिम बंगाल की विश्वभारती
विश्वविद्यालय में पढ़ रही है। छात्रा को कोलकाता में फॉरन रिजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस की तरफ से नोटिस थमाया गया है। उसे 29 फरवरी तक भारत छोड़ना होगा। बता दें कि यह विभाग केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आता है।

जानकारी के मुताबिक अफसरा अनिका मीम ने 8 फरवरी को CAA के खिलाफ पश्चिम बंगाल में आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। यह प्रदर्शन बीरभूम जिले में हुआ था और लेफ्ट विंग के छात्रों की तरफ से आयोजित किया गया था। अनिका बांग्लादेश की कुश्तिया जिले की रहनेवाली है। उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनों की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट की थीं। उसने 2018 में विश्वभारती यूनिवर्सिटी के डिजाइनिंग कोर्स में दाखिला लिया था। पिछले साल भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून को संसद से पास किया था, जिसके बाद से वह उसका विरोध कर रही थी।

आरोप है कि छात्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से सीएए विरोधी प्रदर्शन की तस्वीरें शेयर की। यह पोस्ट काफी वायरल हुआ था और उसकी काफी आलोचना भी हुई थी। इसके बाद छात्रा को फॉरन रिजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस की तरफ से 14 फरवरी को नोटिस थमा दिया गया। उसे 15 दिन का समय दिया गया था। चूँकि अब 29 फरवरी नजदीक है तो ये मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है। हालाँकि कोलकाता में मौजूद बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन ने कहा है कि उन्हें इस नोटिस के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है।

नोटिस में वीजा शर्तों के उल्लंघन की भी बात कही गई है। नोटिस के मुताबिक छात्रा को सरकार विरोधी गतिविधि में संलिप्त पाया गया है। इस तरह की गतिविधि वीजा नियमों का उल्लंघन है। वहीं बांग्लादेशी छात्रा ने कहा कि वो अभी भी इस बात को समझ नहीं पाई हैं कि उसने ऐसी कौन सी गलती की कि इस तरह की सजा दी गई।

उसने कहा, “मैंने उत्सुकतावश कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं क्योंकि मेरे कई दोस्तों ने विरोध-प्रदर्शन रैली में भाग लिया था। लेकिन जब मैंने पाया कि लोगों का एक विशेष समूह मुझे सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहा है, तो मैंने तुरंत अपना फेसबुक अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया। मैं वाकई में निर्दोष हूँ। जब मुझे डिपार्टमेंट से पत्र मिला, तो मुझे काफी गहरा सदमा पहुँचा। मैं एक कलाकार बनना चाहती हूँ, इसलिए मैं विश्व भारती में पढ़ाई करने के लिए भारत आई थी। मगर मुझे नहीं पता कि अब मेरा क्या होगा।”

इस बीच राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने औरंगाबाद में पोस्टर लगाया गया है, जिसमें मराठी में लिखा है कि पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठियों के बारे में जानकारी देने वालों को 5,000 रुपए का इनाम दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज ठाकरे ने मुंबई में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी और बांग्लादेशियों के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने घुसपैठियों को निकालने के लिए रैलियाँ भी की थी।

नालों से निकले 4 शव, पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी: दिल्ली दंगों में अब तक 42 की मौत

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में अब तक 42 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। नालों से चार शव मिले हैं। ताजा जानकारी के अनुसार क्षेत्र के अलग-अलग इलाके के नालों से पुलिस ने अब तक 4 शव बरामद किए हैं। सबसे पहले बुधवार (फरवरी 26, 2020) को चाँदबाग के नाले से आईबी के अंकित शर्मा का शव निकाला गया था। इसके बाद गुरुवार को 3 अन्य लोगों के शव भी निकाले गए।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडिया एक्सप्रेस को इस संबंध में बताया, “उत्तर-पूर्वी जिले के नालों से 4 लाशें बरामद हुईं है। ये सभी उन इलाकों में मिली, जहाँ सोमवार (24 फरवरी) और मंगलवार (25 फरवरी) को हिंसा भड़की थी। हमारे पास लापता लोगों की सूची है। अब हम इन शवों की शिनाख्त करने में जुटे हैं। स्थानीय पुलिस को घरों और इमारतों की तलाशी के लिए तैनात कर दिया गया है। साथ ही सभी नालों की तलाशी ली जाएगी।”

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने गुरुवार को जिन शवों को बरामद किया है, उनमें एक की पहचान मुशर्रफ के रूप में हुई है। उसे चाँदबाग के नाले में मारकर फेंका गया था। मृतक की बहन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “हम हर जगह गए, पर हमें उनकी जानकारी कहीं नहीं मिली। फिर हमें किसी ने बताया कि उसे नाले में फेंक दिया गया था। जब हमने नाला देखा तो उसका शव वहाँ भी नहीं था। फिर गुरुवार को हम जीटीबी अस्पताल गए तो वहाँ उसका शव हमें मिला।”

दूसरे शव की पहचान मोहसिन के रूप में हुई। पुलिस को मोहसिन का शव भजनपुरा नाले से मिला। मोहसिन के अंकल ने बताया, “मंगलवार को करीब पाँच बजे वो भजनपुरा किसी काम से गया था। यहाँ उसकी कार को एक भीड़ ने घेर लिया और उससे पैंट उतारने को कहा। उसने किसी तरह अपने साथी को फोन किया। लेकिन जब तक उसे बचाने के लिए कोई कुछ कर पाता उन लोगों ने उसे मार कर नाले में फेंक दिया।”

जीटीबी अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार, “गुरुवार को सुबह करीब साढे दस बजे तीनों शव लेकर आए गए। जरूर मृतकों को नाली में फेंके जाने से पहले भयानक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा होगा। तीनों शव सड़ चुके थे। शुरुआती जाँच में इनके सिर, चेहरे और छाती पर चोट के निशान मिले हैं। मगर, हो सकता है कुछ जलने के भी घाव हों। सारी चीजें सिर्फ़ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता पाएगी।”

गौरतलब है कि पुलिस ने इससे पहले इस हिंसा में मारे गए 37 लोगों की जानकारी साझा की थी। पुलिस ने बताया था कि हिंसा में मारे गए लोगों में 1 पुलिस अधिकारी समेत 36 आम नागरिक हैं। साथ ही ये भी बताया इस अधिकतर लोगों (21 लोग) की मौत गोली लगने के कारण हुई। 4 लोगों की हत्या धारधार हथियार घोंपने और प्रताड़ित किए जाने के कारण हुई। वहीं, 3 लोगों को जलाकर मार डाला गया।

स्कूल की छत पर सेट किया गया था बड़ा गुलेल, हिंदुओं की संपत्ति को चुन-चुनकर बनाया निशाना

दिल्ली में बीते दिनों हिंदुओं के ख़िलाफ़ हुई हिंसा पूर्व नियोजित होने के कई सबूत सामने आ रहे हैं। हिंसाग्रस्त इलाकों से लगातार ऐसी तस्वीरें और विडियो सामने आ रही हैं, जो इस बात को प्रमाणित करती हैं कि ये हिंसा दो समुदायों के आमने-सामने आने से नहीं भड़की, बल्कि ये सब एक प्लान के तहत हुआ। मुस्लिम दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों, उनकी गाड़ियों और उनके शैक्षणिक संस्थानों पर हमला करने के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी।

सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो वायरल हो रहा है। विडियो शिव विहार के एक स्कूल का है। यह स्कूल एक मुस्लिम का है। इसके आसपास ही अमर विहार और मुस्तफाबाद है। विडियो में देखा जा सकता है कि इस स्कूल की छत पर एक बडा गुलेल सेट किया है। इससे पत्थर और पेट्रोल बम जमकर बरसाए जा सके। विडियो में आप देख सकते हैं कि ये गुलेल आम गुलेल की तरह नहीं है। लोहे की रॉड पर रबड़ लगाकर बड़े आकार में इसे बनाया गया है। इसमें यदि कोई चीज फँसाकर दागी जाए, तो वो दूर जाकर गिरेगी।

वीडियो बनाने वाले शख्स को कहते सुना जा सकता है कि गुलेल को निशाना लगाने के लिए जिस जगह सेट किया गया है उसके सामने अमर विहार का इलाका है और वहाँ हिंदुओं की दो पार्किंग हैं। जहाँ पर मुस्लिम के स्कूल की छत से पेट्रोल बम फेंके गए। इसके अलावा युवक इस स्कूल के बगल की एक बिल्डिंग को भी दिखा रहा है जहाँ पर हिंदू व्यक्ति को मार दिया गया।

युवक को कहते सुना जा सकता है कि इस युद्ध में कबाड़ की चीज़ों का भी दंगाइयों ने इस्तेमाल किया। युवक कहता है कि ये लड़ाई नहीं है, ये युद्ध है। इसे ही सिविल वार कहा जाता है। हालात देखकर युवक कहता है कि इजराइल के साथ भी ऐसा ही युद्ध लड़ा जाता है और हमारे (हिंदुओं) साथ भी ऐसा ही युद्ध लड़ा जाता है।

विडियो में हम देख सकते हैं कि युवक स्कूल की छत से बगल के एक स्कूल की इमारत को भी दिखाता है जो कि एक हिंदू का है। विडियो में साफ दिख रहा है कि दंगाइयों ने हिन्दू के स्कूल को तहस-नहस कर दिया है। एक क्लासरूम भी नहीं छोड़े गए हैं, जबकि मुस्लिम के स्कूल में हल्के नुकसान से अतिरिक्त कुछ नजर नहीं आ रहा।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर इस विडियो को जमकर शेयर किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि लोग अपने दिमाग से इन बातों को निकाल दें कि ये हिंसा सीएए के विरोध में हुई। ये हिंसा हिंदुओं के ख़िलाफ़ पूर्व नियोजित थी। वरना कौन पत्थर और पेट्रोल बम फेंकने के लिए गुलेल लगाता है।

एसएन श्रीवास्तव होंगे दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर: दंगों पर काबू पाने के लिए बुलाए गए थे

वरिष्ठ आईपीएस सच्चिदानंद श्रीवास्तव दिल्ली पुलिस का नए कमिश्नर होंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है। दिल्ली में हिंदू विरोधी हिंसा के पर काबू पाने लिए 25 फरवरी को बतौर स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) उनकी विशेष नियुक्ति की गई थी। वे अमूल्य पटनायक की जगह लेंगे, जो 29 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं। पटनायक का कार्यकाल 31 जनवरी को ही खत्म हो गया था, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्हें एक महीने का एक्सटेंशन दिया गया था।

जर्नलिस्ट आदित्य राज कौल ने एसएन श्रीवास्तव के दिल्ली पुलिस कमिशनर के तौर पर नियुक्ति की खबर की पुष्टि करते हुए गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ऑर्डर को शेयर किया है।

एसएन श्रीवास्तव का कार्यकाल 1 मार्च 2020 से शुरू होगा। बीते दिनों एसएन श्रीवास्तव सीआरपीएफ में थे और दो साल पहले वो जम्मू-कश्मीर में भी रहे। इस दौरान घाटी में उन्होंने ऑपरेशन ऑल आउट में आर्मी का साथ दिया था। श्रीवास्तव को गृह मंत्रालय ने विशेष रूप से सीआरपीएफ से बुलाकर दिल्ली का स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) बनाया था, ताकि हिंदू विरोधी दंगों पर काबू पाया जा सके। दंगों में अब तक 42 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है। स्पेशल कमिश्नर के रूप में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, श्रीवास्तव ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था।

बता दें कि एसएन श्रीवास्तव AGMUT कैडर में 1985 बैच के अधिकारी हैं। उन्हें एक तेजतर्रार अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। बतौर डीसीपी वे दक्षिण पश्चिम और उत्तर जिले का प्रभार सँभाल चुके हैं। वे दिल्ली पुलिस की ट्रैफिक डिवीजन में भी तैनात रह चुके हैं। श्रीवास्तव दिल्ली पुलिस में ट्रेनिंग ब्रांच के अलावा हेड क्वार्टर शाखा भी रहे हैं।

इसके बाद उन्हें दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में तैनात किया गया था जहाँ उन्होंने कई एंटी टेरर ऑपरेशन किए। साथ ही मशहूर आईपीएल मैच फिक्सिंग कांड का खुलासा भी उनके समय में ही हुआ था। अपने काम के लिए मशहूर श्रीवास्तव को सीआरपीएफ में पश्चिमी जोन का एडीजी बनाया गया जहाँ उन्होंने सेना के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ अनेक एनकाउंटर में शामिल हुए।

एसएन श्रीवास्तव ने साल 2017 में दक्षिण कश्मीर में ऑपरेशन ऑल आउट के तहत कई ऐसे एनकाउंटर किए जिसमें हिज्बुल मुजाहिदीन समेत अनेक आतंकवादी गुटों के कई टॉप कमांडर शामिल थे। इसके बाद उन्हें सीआरपीएफ की ट्रेनिंग शाखा में भेज दिया गया था जहाँ से उन्हें दिल्ली पुलिस में बतौर अपर विशेष आयुक्त कानून व्यवस्था के पद पर लाया गया था।

पहले से जमा कर रखे थे पत्थर, हिंदुओं पर हमले के लिए बहू-बेटियों को भी दे रहे थे लाठी: महिला चश्मदीद

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीएए विरोध के अचानक से हिंदू विरोधी दंगों में तब्दील होने से हर कोई सकते में है। हर कोई यह जानना चाहता है कि इस साजिश के पीछे कौन लोग थे। इसे कैसी रची गई। अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं उसमें ताहिर हुसैन की भूमिका मुख्य संदिग्ध के तौर पर उभरी है। उसकी इमारत से जो पत्थर और पेट्रोल बम का जखीरा मिला है उससे लगता है कि साजिशें लंबे समय से रची जा रही थी। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हमारी जिन लोगों से बात हुई उससे भी ऐसा लगता है। एक चश्मदीद ने हमें दंगाइयों की हर उस तैयारी के बारे में बताया जो सीएए विरोध की आड़ में पिछले काफी समय से रची जा रही थी।

ग्राउंड रिपोर्ट के लिए हम अपने दफ्तर से निकलकर मेट्रो से शास्त्री पार्क पहुँचे। यहाँ से हिंसा प्रभावित क्षेत्र जाने के लिए हमने एक ऑटो लिया। ऑटो में बैठते ही हमने चालक से इलाके के हालात के बारे में पूछना शुरू कर दिया। इसी बीच रास्ते से कुछ महिला सवारी बैठीं, जिनमें से एक महिला ने ऑटो में बैठते ही अपनी आँखों देखी बतानी शुरू कर दी। ऑटो से उतरने के बाद हमने अपना परिचय देते हुए महिला से पूरी बात बयाँ करने का अनुरोध किया। महिला हमसे बात करने के लिए तो राजी हो गई, लेकिन एक शर्त के साथ वह ये कि उनका नाम नहीं आना चाहिए।

सोनिया विहार में किराए के मकान पर रहने वाली उस महिला ने ऑपइंडिया को बताया, “देर रात का समय था। मैं दूसरी मंजिल पर कमरे में डर के मारे सो भी नहीं पा रही थी। इसी बीच पड़ोस से भीड़-भाड़ के साथ लोगों की जोरों से आवाज आ रही थी। मैंने देखा कि इस्लामी भीड़ हाथों में लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर, सरिया, रॉड, तमंचे आदि हथियार लेकर गली से मेन रोड की तरफ जा रही है। इस भीड़ में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। मैंने देखा कि परिवार के बड़े लोग हिंदुओं पर हमला करने के लिए अपने बच्चों और महिलाओं को घरों से बाहर निकाल रहे थे। इसे देखकर मैं दंग रह गई।”

महिला आगे बताती है, “इतना ही नहीं सभी ने अपने घरों के अंदर और छतों पर पहले से ही ईंट-पत्थर रखे हुए थे। वहाँ से लोग लगातार ईंट-पत्थरों को बाहर निकाल रहे थे। यह सब देख मेरे अंदर इतना डर पैदा हो गया कि मैं पूरी रात सो भी नहीं सकी, क्योंकि वह पूरा मोहल्ला दूसरे मजहब का है और जहाँ में रहती हूँ वह एक मात्र हिंदू परिवार का घर है।” महिला बार-बार एक ही बात पर आश्चर्य जता रही थी कि हम (हिंदू) लड़ाई होने पर अपने बच्चों को घर के अंदर करते हैं, लेकिन वह अपने बच्चों और महिलाओं को लाठी डंडे देकर लड़ाई करने के लिए बाहर कर रहे थे।

मूल रूप के बिहार की रहने वाली महिला सोनिया विहार के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में एक किराए के मकान में रहती है। सात साल पहले पति की मौत के बाद वह बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए घरों में काम करती है। हिंसा के बाद से वह इतनी डरी हुई है कि पिछले तीन दिनों से अपने काम पर नहीं गई और सोचने के लिए मजबूर है कि दिल्ली में अब रहा जाए कि नहीं। हिंसा से डरी सहमी वह महिला बार-बार एक ही बात कहती रही, “मेरा नाम नहीं लेना, नहीं तो वे लोग मुझे मार डालेंगे।”

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दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे: ड्रोन फुटेज में मस्जिद पर ईंट-पत्थरों का ढेर, NDTV ने तस्वीर ही एडिट कर दी

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (फरवरी 27, 2020) को हिंदू विरोधी दंगों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगाप्रभावित इलाकों में ड्रोन की मदद से लिए कुछ विडियो जारी किए। विडियो में स्पष्ट तौर पर देखा गया कि न केवल स्थानीय लोगों ने अपने घरों की छत पर ईंट-पत्थर जमा किए हुए हैं, बल्कि एक मस्जिद की छत पर भी ईंट-पत्थरों का बड़ा ढेर लगा है।

विडियो में मस्जिद की तस्वीरें और उसपर इकट्ठा किए गए ईंट-पत्थर एकदम क्लियर हैं। लेकिन एनडीटीवी की एकतरफा पत्रकारिता की हद देखिए…अपने पाठकों को बरगलाने के लिए और रिपोर्ट के जरिए इस्लामी आतताइयों की हकीकत को छिपाने के लिए उसने ड्रोन से ली तस्वीर का तो इस्तेमाल किया, लेकिन उसमें से मस्जिद को क्रॉप कर दिया। ताकि उनका कोई पाठक इन दंगों में मुस्लिमों की भूमिका पर सवाल न उठा सके।

सोचिए, क्या एनडीटीवी ऐसा उस समय तब करता जब उसे किसी मंदिर की छत पर पत्थर दिखते? तब तो शायद उनकी रिपोर्ट की हेडलाइन भी प्रमुखता से इसी बिंदु पर होती।

एनडीटीवी के ऐसे ओछे कारनामे की सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि एनडीटीवी खुद की एकतरफा पत्रकारिता को जस्टिफाई भी नहीं कर सकता। क्योंकि क्रॉप इमेज के जरिए एनडीटीवी इस बात का दावा भी नहीं कर रहा कि वो आखिर तस्वीर में मौजूद विशेष एंगल से कुछ बताना चाहता है या उससे कुछ पता चल रहा है। वहीं हेडलाइन भी देखें तो एकदम फ्लैट है।

बता दें, तस्वीर के जिस एंगल को एनडीटीवी ने शेयर किया है उसमें सिर्फ़ दो बिल्डिंग, दो सड़क और पुलिस वालों का एक समूह नजर आ रहा है। लेकिन अगर इसी की पूरी तस्वीर (बिन एडिट की हुई) को जूम करके देखा जाए तो पता चलेगा कि मस्जिद की छत पर भारी संख्या में ईंट पत्थर देखकर ही एनडीटीवी ने इसे क्रॉप किया।

गौरतलब है कि विशेष समुदाय के अपराधों को छिपाने का एनडीटीवी का पुराना इतिहास रहा है। सोशल मीडिया आ जाने के कारण और यूजर्स की सक्रियता के कारण अब इसके उसके एजेंडे का खुलासा खुलकर होने लगा है। पिछले दिनों की यदि बात करें, तो हमने देखा था कि किस तरह रवीश कुमार पुलिस के सामने बंदूक तानकर खड़े होने वाले युवक का नाम शाहरूख की जगह अनुराग मिश्रा बताना चाह रहे थे। वहीं उसी चैनल के एक अन्य रिपोर्टर श्रीनिवासन जैन घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद दंगाइयों को अपने कैमरे में कैप्चर नहीं कर रहे थे, सिर्फ इसलिए क्योंकि पत्थर बरसा रही वह भीड़ अल्पसंख्यक समुदाय की थी।