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दिल्ली हिंसा में अब तक 7 मौतें: अमित शाह ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग, LG और CM केजरीवाल भी होंगे शामिल

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। बैठक में उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित विभिन्न दलों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। आला अधिकारियों को भी तलब किया गया है। इस बीच, हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।

दिल्ली में कई जगहों पर सोमवार को तब हिंसा हुई थी जब शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अगवानी के लिए अहमदाबाद में थे। वहॉं से लौटते ही वे एक्शन में आ गए। हालात पर तत्काल काबू पाने के लिए अधिकारियों के साथ चर्चा की। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव एके भल्ला सहित दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक को सख्त हिदायत दी गई कि किसी भी तरह से जल्दी से जल्दी हालात पर काबू पाएँ। पुलिस और अर्धसैनिक बलों को सतर्क रहने को कहा गया है। साथ ही कहा गया कि अगर जरूरत महसूस हुई तो केंद्र सरकार अन्य कड़े कदम उठाने से भी नहीं चूकेगी। हमारा मकसद हर हाल में शांति कायम करना है। आज बुलाई गई बैठक दोपहर के करीब 12 बजे होने की उम्मीद है।

इससे पहले केजरीवाल ने भी हिंसा प्रभावित इलाकों के पार्टी विधायकों और अधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि दो महीने से ज्यादा समय से धरना चल रहा था। केंद्र ने लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का मौका दिया। लेकिन, कल जिस तरह की हिंसा हुई उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बता दें कि दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ रविवार को हिंसक घटनाओं की शुरुआत हुई थी। सोमवार को कई जगहों पर पत्थरबाजी और आगजनी हुई। गोलियॉं चलाई गई। मंगलवार की सुबह फिर से कुछ इलाकों में पत्थरबाजी और आगजनी की खबर है। हिंसा के बाद अब तक एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल समेत 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 105 लोग जख्मी हो गए। गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली पुलिस के कमिश्नर से लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने स्थिति को जल्द नियंत्रित करने को कहा है। रैपिड एक्शन फोर्स को दिल्ली में तैनात कर दिया गया है। ब्रह्मपुरी एरिया में सुबह हुई पथराव की घटना के बाद बल के जवानों ने फ्लैग मार्च निकाला।

केजरीवाल ने भी अपने आवास पर विधायकों की आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में हिंसा प्रभावित इलाकों के विधायकों को बुलाया गया है। बता दें कि मंगलवार (फरवरी 25, 2020) सुबह भी नार्थ-ईस्ट दिल्ली में हालात तनावपूर्ण है। मंगलवार को भी मौजपुर और ब्रह्मपुरी इलाके में पत्थरबाजी शुरू हो गई। सुबह-सुबह पाँच मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया गया। देर रात से सुबह तक मौजपुर और उसके आस-पास इलाकों में आगजनी के 45 मामले सामने आए, जिसमें दमकल की एक गाड़ी पर पथराव किया गया, जबकि एक दमकल की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। तीन दमकलकर्मी घायल हुए हैं।

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सोमवार को हुई हिंसा ने दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान ले ली। दंगाइयों की फायरिंग में उनकी मौत हो गई। बुराड़ी में तीन बच्चों और पत्नी के साथ रहने वाले 42 वर्षीय रतनलाल परिवार में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे। वे मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले थे और 1998 में दिल्ली पुलिस में बहाल हुए थे।

दिल्ली के मौजपुर, जाफराबाद व अन्य इलाकों में रविवार (फरवरी 23, 2020) से भड़की हिंसा के बारे में परिवार को रतनलाल ने ही जानकारी दी थी। सोमवार (फरवरी 24, 2020) को जब वह ड्यूटी पर गए तो पत्नी ने खैरियत जानने के लिए फोन भी किया था। तब सब कुछ ठीक था। दोपहर बाद जैसे ही रतनलाल की पत्नी ने टीवी पर हेडलाइन देखी तो वह परेशान हो उठीं। उन्होंने पति को फोन मिलाया लेकिन रिंग जाती रही। कुछ ही समय में पुष्टि हुई कि अब रतनलाल इस दुनिया में नहीं रहे। परिवार में चीख-पुकार मच गई। पत्नी पूनम बेसुध होकर गिर पड़ीं, जबकि बच्चे मम्मी को देखकर बुरी तरह बिलखने लगे। इस बीच रतनलाल के गाँव में उनके परिवार को इसके बारे में सूचना दी गई।

रतनलाल मूल रूप से राजस्थान के सीकर में तिहावली गाँव के रहने वाले थे। दिल्ली में वे बुराड़ी में पत्नी पूनम, दो बेटियों सिद्धि, कनक, और बेटे राम के साथ रहते थे। उनकी बड़ी बेटी सिद्धि 12 साल की, छोटी बेटी कनक 10 साल की और सबसे छोटा बेटा राम 7 साल का है। सिद्धि 7वीं, कनक 5वीं और राम पहली कक्षा में पढ़ते हैं। तीनों बच्चे एनपीएल स्थित दिल्ली पुलिस पब्लिक स्कूल में हैं। पूनम गृहिणी हैं। रतनलाल की माँ और छोटा भाई दिनेश गाँव में रहते हैं। पिता बृजमोहन की ढाई साल पहले ही मृत्यु हो गई थी। रतन ने दो दिन पहले ही माँ संतरा देवी व भाई दिनेश से फोन पर बात की थी। उन्होंने माँ से हाल-समाचार पूछने के साथ ही इस बार होली पर गाँव आने का वादा किया था, लेकिन बेबस माँ को क्या पता था कि उनकी बेटे से आखिरी बार बात हो रही है। घटना से पूरा परिवार सदमे में है।

वह दिल्ली पुलिस में 1998 में शामिल हुए थे। वह एसीपी गोकलपुरी के ऑफिस में तैनात थे। साल 2004 में जयपुर की रहने वाली पूनम से उनका विवाह हुआ था। साेमवार काे बुखार होने के बावजूद वह ड्यूटी पर गए थे। हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत पूरे परिवार को गहरा आघात दे दिया। रतन लाल का कभी किसी से लड़ाई-झगड़े की बात तो दूर, ‘तू तू मैं मैं’ से भी वास्ता नहीं रहा। फिर भी उपद्रवियों ने उन्हें मार डाला और हँसते-खेलते परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।

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देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को हिंसा की हुई। सोमवार को इसने भयावह रूप ले लिया। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में कई जगहों पर आगजनी-पत्थरबाजी हुई। गोलियॉं चलाई गई। अब तक पॉंच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मंगलवार की सुबह भी मौजपुर और ब्रह्मपुरी में पत्थरबाजी तथा आगजनी की घटना हुई। दिल्ली की सड़कों पर हिंसा की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत आने से ठीक पहले हुई। उनके अहमदाबाद में लैंड करने के बाद हिंसा तेज हो गई।

इसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा जा रहा है कि भारत की छवि खराब करने के लिए ट्रंप के दौरे को हिंसा के लिए सोच-समझकर चुना गया है। आखिर क्यों जब ट्रंप अहमदाबाद में दुनिया को इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ संदेश दे रहे थे देश की राजधानी तेजी से भभक उठी? इसके पीछे किसका हाथ है? ये किसकी साजिशें हैं?

हिंसा की पूरी जॉंच के बाद ही तस्वीरें स्पष्ट हो पाएँगी। फिलहाल जो वीडियो, तस्वीरें सामने आई हैं उससे जाहिर है कि सुनियोजित तरीके से यह सब अंजाम दिया गया है। 20 साल पुरानी एक घटना पर गौर करें तो हालात और स्पष्ट हो जाते हैं।

दरअसल, आज से बीस साल पहले यानी साल 2000 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आए थे। उस समय भी देश में बीजेपी नीत एनडीए सरकार आज की तरह ही थी। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के मुखिया थे। उस समय क्लिंटन का भारत दौरा दो कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक तौर से भारत का पक्ष लिया था। दूसरा, करीब 22 साल बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आए थे। क्लिंटन 5 दिन (19-25 मार्च) भारत में रुके। आगरा, हैदराबाद, मुंबई, जयपुर और दिल्ली का भ्रमण किया था। संसद को संबोधित किया था। ऊर्जा व पर्यावरण संधि पर हस्ताक्षर किए थे।

मगर, उसी दौरान श्रीनगर से 70 किलोमीटर दूर दक्षिण में अनंतनाग जिले के छत्तीसिंहपुरा गाँव में जहाँ 200 सिख परिवार रहते थे, वहाँ से एक हृदयविदारक खबर आई। सूचना मिली कि 20 मार्च, 2000 की रात गाँव में बिजली नहीं थी और स्थानीय निवासी रेडियो पर अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पाँच दिन की भारत यात्रा की खबरें सुन रहे थे। तभी शाम को 7 बजकर 20 मिनट पर 40 से 50 आतंकवादी गाँव में घुस आए और उन्होंने जबरन सिख लोगों को घरों से बाहर निकालना शुरू कर दिया। सिखों को कुछ आगे समझ आता कि अचानक उन्होंने अपनी ऑटोमेटिक बंदूकों से गोलियाँ दागनी शुरू कर दी। अगले ही पल 35 लाशों का ढेर लग गया और बाद में एक व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ा। सामूहिक नरसंहार के इस तांडव में सभी लाशें सिख समुदाय के लोगों की थी।

इस घटना के उजागर होने के बाद सुरक्षा सलाहकार रहे बृजेश मिश्र ने दावा किया कि यह काम लश्कर-ए-तय्यबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन का है। और, नरसंहार के अगले दिन पाकिस्तान के विदेश मंत्री अब्दुल सत्तार ने दोनों आतंकी समूहों के समर्थन में बयान दे दिए। बता दें, सत्तार वही शख्स हैं, जो भारत के ख़िलाफ़ गतिविधियों के लिए पूरे दक्षित एशिया में कुख्यात रहे हैं।

बर्बरता की उस रात निहत्थे सिखों को दो समूहों में खड़ा किया गया था। उनमें से एक आतंकी पास के ही गाँव का रहने वाला था। उसे एक सिख ने पहचान लिया। गोलीबारी से पहले उसने आतंकी से पूछा ‘चट्टिया तू इधर क्या कर रहा है’? दरअसल चट्टिया एक आतंकी मोहम्मद याकूब का उपनाम था। इस वाकए के दो दिनों के अन्दर ही याकूब सुरक्षा बलों के हत्थे चढ़ गया। हिरासत में उसने बताया कि वह मुजाहिद्दीन के साथ काम करता हैं। नरसंहार वाले दिन वह लश्कर के एरिया कमांडर अबू माज के साथ छत्तीसिंहपुरा आया था। छह फीट लंबा पाकिस्तानी अबू माज ही लश्कर के चार आतंकियों शाहिद, बाबर, टीपू खान और मसूद को लेकर आया था। कश्मीरी मुजाहिद्दीन आतंकियों को इकठ्ठा करने की जिम्मेदारी गुलाम रसूल वानी उर्फ सैफुल्ला के पास थी।

उस दर्दनाक और क्रूर रात की यादें आज भी वहाँ के लोगों के जेहन में जिंदा हैं। उस खौफनाक मंजर को शायद ही कोई भुला सकता हैं। कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वह दर्द कैसे झेला गया होगा। साम्प्रदायिक नरसंहार की सबसे बड़ी घटनाओं में से यह एक थी।

उल्लेखनीय है कि आज भी 20 साल बाद वही सब दोहराया जा रहा है। कुछ नहीं बदला है। तब क्लिंटन का दौरा था, आज ट्रंप दौरे पर हैं। तब भी भारत-अमेरिका का संबंध नया मोड़ ले रहा था, आज भी दोनों मुल्कों के संबंधों में नई गर्मजोशी दिख रही है। जाहिर है, दिल्ली में जो कुछ हुआ है वह अचानक नहीं हुआ है। इसके पीछे साजिशें गहरी हैं।

‘हिंदू की गाड़ी जला दी, दुकानें जला रहे हैं’: दिल्ली में फिर पत्थरबाजी-आगजनी, अब तक 5 मौतें

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‘हिंदू की गाड़ी जला दी, दुकानें जला रहे हैं’: दिल्ली में फिर पत्थरबाजी-आगजनी, अब तक 5 मौतें

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की आड़ में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में मंगलवार की सुबह भी हिंसा हुई। मौजपुर में दंगाइयों ने मुॅंह ढक कर पथराव किया। कुछ वाहनों को भी फूॅंक दिया। ब्रह्मपुरी इलाके में भी पथराव हुआ। इसके बाद दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने फ्लैग मार्च किया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली से हिंसा को लेकर उसके पास लगातार कॉलें आ रही है। बीती रात सीलमपुर डीसीपी ऑफिस में बैठक कर पुलिस कमिश्नर ने खुद हालात की समीक्षा की।

हिंसा की शुरुआत रविवार को हुई थी। सोमवार को चॉंदबाग, जाफराबाद, करावल नगर, भजनपुरा सहित कई इलाकों में हिंसा हुई थी। गोकलपुरी में टायर मार्केट को आग के हवाले कर दिया गया। अब तक पॉंच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें एक दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल भी हैं। घायलों में भी करीब एक दर्जन पुलिसकर्मी हैं। डीसीपी अमित शर्मा भी जख्मी हैं।

जाफराबाद में एक शख्स ने बीच रोड पर तमंचे से 8 राउंड गोलियाँ दागीं। शख्स की पहचान शाहरुख के तौर पर हुई है। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है।

मंगलवार (फरवरी 25, 2020) सुबह भी नार्थ-ईस्ट दिल्ली में हालात तनावपूर्ण है। मंगलवार को भी मौजपुर और ब्रह्मपुरी इलाके में पत्थरबाजी शुरू हो गई। सुबह-सुबह पाँच मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया गया। मौके पर बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात है। देर रात से सुबह तक मौजपुर और उसके आस-पास इलाकों में आगजनी के 45 मामले सामने आए, जिसमें दमकल की एक गाड़ी पर पथराव किया गया, जबकि एक दमकल की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। तीन दमकलकर्मी घायल हुए हैं।

इंडिया टुडे और आज तक के पत्रकार तनुश्री पांडे ने दिल्ली हिंसा की भयावहता को दिखाने के लिए अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है। इससे आप हिंसा की साजिश का अंदाजा लगा सकते हैं। इस वीडियो के बैकग्राउंड में एक शख्स को कहते हुए सुना जा सकता है, “हिंदू की गाड़ी जला दी, हिंदू की दुकानें जलाने जा रहे हैं।” उन्होंने बताया है कि यह घटना मौजपुर की है, जब वो ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए वहाँ गई थी। हालाँकि ऑपइंडिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

दिल्ली में हिंसा की वजह से आज भी मौजपुर-बाबरपुर, गोकुलपुरी, जौहरी एन्क्लेव और शिव विहार मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। मेट्रो ट्रेन केवल वेलकम स्टेशन तक ही जाएगी। सोमवार को मौजपुर और भजनपुरा में कई दुकानों और घरों में तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी गई। उपद्रवियों ने यहाँ एक पेट्रोल पंप को जला दिया। आग बुझाने पहुँची दमकल की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई। परीक्षा देकर लौट रहे छात्रों से भी मारपीट की गई। देर शाम उपद्रवियों ने गोकुलपुरी की टायर मार्केट को भी फूँक दिया। डीसीपी शर्मा के हाथ और सिर में चोट आई है, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दस अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शीर्ष अधिकारियों की आपात बैठक लेकर स्थिति की समीक्षा की।

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जाफराबाद में गोली चलाने वाले का नाम है शाहरुख, दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

दिल्ली करीब ढाई महीने से शाहीन बाग़ में चल रहे नागरिकता कानून विरोध (CAA) के विरोध ने सोमवार को नई शक्ल ले ली। रविवार शाम से ही शुरू हुए हिंसा और दंगों ने सोमवार सुबह व्यापक दंगों और पत्थरबाजी का रूप ले लिया। दंगाइयों ने पेट्रोल पम्प से लेकर ऑटो, रिक्शा तक को आग के हवाले कर दिया।

इसी बीच एक युवक ने आठ राउंड गोलियाँ भी चलाई, जिसकी पहचान शाहरुख के तौर पर हुई है। दिल्ली पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है। शुरुआत में ‘दी प्रिंट’ की सीनियर एसोसिएट एडिटर BhardwajAnanya (अनन्या भारद्वाज) ने बन्दूक पकड़े हुए इस युवक की पहचान शाहरुख के रूप में ट्विटर पर बताई थी। बाद में आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि कर दी गई।

ट्विटर पर जारी एक वीडियो में शाहरुख को दिल्ली पुलिस की ओर गोलियाँ चलाते हुए आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है। सोमवार को मौजपुर-जाफराबाद सड़क पर उसने ताबड़तोड़ कई राउंड फायर किए थे। करीब 8 राउंड फायर किए। इस दौरान एक पुलिसवाले ने उसे रोकने की काफी कोशिश की लेकिन वो नहीं रूका और फायर करते रहा।

इस बीच सोशल मीडिया पर पत्थरबाजी कर रहे और गोलियाँ चलाने वाले प्रदर्शनकारियों द्वारा ‘नारंगी रंग’ की टोकरियाँ इस्तेमाल करने के कारण इस हिंसा को भगवा रंग से जोड़ने की भी कोशिशें की गईं। लेकिन कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने गोली चलाने वाले इस युवक के CAA और NRC विरोध प्रदर्शन में भी नजर आने की बात कही है। हालाँकि, ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि करने की स्थिति में नहीं है।

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गौरतलब है कि आज दिल्ली में हुई इस हिंसा और पत्थरबाजी के दौरान दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की मौत हो गई। वह एसीपी गोकुलपुरी ऑफिस में तैनात थे। इसके अलावा शहादरा के डीसीपी अमित शर्मा भी घायल हो गए। उन्हें पटपड़गंज के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

‘पिंचर’ बनाने वालों से डर नहीं लगता साहब, ‘IIT-IIM वालों से’ लगता है: एंटी CAA से जलता भारत

बंबइया फिल्म्स के सफल डायरेक्टर करन जौहर की पीरियड फिल्म ‘तख़्त’ में काम कर रहा हुसैन हैदरी नामक यह कथित लेखक और कवि जो हिंसा को रोमांटिसाइज करने और हिन्दुओं के खिलाफ नफरत फैलाने का आदी है, सोशल मीडिया पर ‘हिन्दू आतंकवादी’ ट्वीट करने के कारण विवादों में हैं। यह दिमागी रूप से विक्षिप्त आदमी न सिर्फ हिन्दू आतंकवादी शब्द को एक बार नहीं दो बार नहीं बल्कि 11 बार लिखता है, जो अपर कास्ट हिन्दुओं को चप्पल से पीटने की बात भी कर चुका है, कहता है – ‘हिन्दू आतंकवादी’ ये दो शब्द काफी महत्त्वपूर्ण हैं, इसके बाद सोशल मीडिया में खुद के खिलाफ पैदा गुस्से के बाद फिलहाल ये अकाउंट डिलीटेड है।

नागरिकता कानून के पास होने के बाद जैसे अपना मानसिक संतुलन खो चुका यह व्यक्ति, लगातार अनर्गल ट्वीट करता दिखता है, जेएनयू के दो छात्र गुटों के बीच हुई हिंसा इसे ‘स्टेट स्पॉन्सर्ड-हिन्दू आतंकवाद’ और ‘हिन्दू स्पॉन्सर्ड-स्टेट आतंकवाद’ जान पड़ता है।

नागरिकता कानून के खिलाफ होते विरोध प्रदर्शनों और फैलाए गए दंगों के कारण सार्वजनिक सम्पत्ति को हुई क्षति और आम देशवासियों को हुई परेशानियों का जिस बेशर्मी के साथ बचाव पिछले दिनों किया गया है वो एक बार फिर उस तथ्य को स्पष्ट करने वाला है कि ज्यादातर रेडिकल इस्लामिक संगठनों के प्रमुख, मुस्लिम आतंकी सरगनाओं की पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि किसी ‘पिंचर’ बनाने वाले की नहीं है, ये लगभग सब के सब अच्छे सम्पन्न परिवारों से आते हैं- चाहे वो ओसामा बिन लादेन हो, या अल जवाहिरी, द्वि राष्ट्र सिद्धांत का जनक दार्शनिक और शायर इक़बाल या बैरिस्टर जिन्ना।

वो IIM-इंदौर का हुसैन हैदरी हो या भारत की ‘चिकेन नेक’ काटने की धमकी देने वाला शरजील इमाम जो IIT से एमटेक और जेएनयू में इतिहास का शोधार्थी है या एएमआईएम का ओवैसी, ‘उम्मत’ के लिए जारी लड़ाई की बागडोर हमेशा पढ़े लिखे लोगों के पास ही रही है जिन्होंने अपने इस जहरीले एजेंडे के लिए पैदल सिपाहियों की भर्ती उसी तबके से की जिसे ‘पिंचर’ बनाने वाला कहा जाता है, जिसको इस्लामिक सुप्रीमेसी का घोल पिलाने के लिए ‘हमने 800 साल राज्य किया’ जैसे जुमले गढ़े गए, जिससे ‘पिंचर’ वालों की गरीबी को हिन्दू राज्य में हुई कथित नाइंसाफी के मत्थे मढ़ विक्टिमहुड का कार्ड खेला जा सके। हालाँकि ‘पिंचरवाला’ टर्म इस्लामिक सुप्रीमेसी का राग अलापने वालों का मुँह बंद करने के लिए अचूक बाण है जिससे उनको बताया जा सके कि तुमने किसी पर 800 साल राज्य नहीं किया था, बंद करो यह बकवास।

ओवैसी, शरजील इमाम, हुसैन हैदरी, इकबाल, जिन्ना, लादेन की फेहरिश्त में आप नाम जोड़ते जाइए उन सबका भी जो शायद आपके आसपास बैठा हो, जो आपके साथ काम करता हो, जिनका पेशा कुछ भी क्यों न हो लेकिन वो लगे हों उम्मत के लिए ही।

खतरा इन्हीं से है। खतरा एएमयू, जामिया में लगते “सब बुत उठवाए जाएँगे, बस नाम रहेगा अल्लाह का” से है।

भारत ने ब्रिटेन से वापस माँगी तमिलनाडु के मन्दिर से चोरी की हुई 15वीं शताब्दी की कांस्य प्रतिमा

भारत ने ब्रिटेन से तमिलनाडु के मंदिर से चोरी हुई एक तमिल संत की 15वीं शताब्दी की कांस्य प्रतिमा को वापस लौटाने की औपचारिक माँग की है। इसके लिए भारत ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय स्थित एक ब्रिटिश संग्रहालय से अनुरोध किया है।

माना जाता है कि इस मूर्ति को तमिलनाडु के एक मंदिर से चुराया गया था। जिसके बाद संत तिरुमानकई अलवार की यह मूर्ती वर्ष 1967 के साउथबेई की नीलामी में नीलाम की गई और इस तरह आखिरकार यह प्रतिमा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एश्मोलीन संग्रहालय (Ashmolean Museum) पहुँची। इस नीलामी में जेआर बेलमॉन्ट नाम के एक ब्रिटिश कलेक्टर के कलेक्शन की नीलामी की गई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एश्मोलीन संग्रहालय ने कहा कि उसे इस प्राचीन मूर्ति के मूल स्थान के बारे में एक स्वतंत्र शोधकर्ता ने पिछले साल नवंबर में सतर्क किया, जिसके बाद उसने भारतीय उच्चायोग को इस बारे में जानकारी दी। एश्मोलीन संग्रहालय द्वारा सोमवार (फरवरी 24, 2020) को जारी एक बयान में कहा गया, “IFP-EFEO (इंस्टीट्यूट फ्रैंकाइस डी’पांडिचेरी एंड द इकोल फ्रैंकाइश डी’एक्सट्रीम-ओरिएंट) के फोटो अभिलेखागार में शोध में यही कांस्य प्रतिमा वर्ष 1957 में तमिलनाडु के श्री सौंदरराजनपेरुमल कोविल मंदिर में नजर आई।”

हालाँकि, इस मूर्ति के बारे में आधिकारिक रूप से कोई दावा नहीं किया गया था। संग्रहालय ने गत वर्ष ही आधिकारिक रूप से इस मामले में भारतीय उच्चायोग का ध्यान आकर्षित किया था और उनसे इस बारे में पुलिस रिकॉर्ड समेत अन्य जानकारियाँ थीं। ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त रुचि घनश्याम ने संग्रहालय द्वारा उठाए गए कदम पर संज्ञान लिया और आगे की कार्रवाई के लिये मामले को भारतीय अधिकारियों के समक्ष भेजा। इसके बाद इस महीने के शुरू में संग्रहालय से इस मूर्ति को लौटाने को लेकर औपचारिक अनुरोध किया गया। भारत की तरफ से इस बारे में और जानकारी दिए जाने के बाद संग्रहालय अब आगे की जाँच कर रहा है।

VIDEO: ट्रम्प के भारत दौरे के बीच दिल्ली में प्रदर्शन के नाम पर गोलीबारी-आगजनी, हेड कॉन्स्टेबल की मौत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत पहुँचते ही देश का एक विशेष वर्ग नागरिकता कानून के बहाने अपनी पारम्परिक हरकतों में व्यस्त हो गया। दिल्ली के जाफराबाद, बाबरपुर, मौजपुर, कबीर नगर, करावल नगर, मालवीय नगर, भजनपुरा, सीलमपुर आदि में पत्थरबाज़ी, आगजनी, गोली चलाने की खबरें सामने आई हैं।

दिल्ली के जाफराबाद इलाके में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ धरने पर बैठे लोग सोमवार सुबह एक बार फिर से हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पहले पुलिस पर पथराव किया फिर जाफराबाद में दस गाड़ियों में भी आग लगा दी। इस पत्थरबाजी और गोलीबारी के बीच एक हेड कॉन्स्टेबल की मृत्यु भी हो गई, जिसके बाद कई इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई है। यह सब देश की राजधानी दिल्ली में हो रहा है।

CAA का विरोध करने वाली यह भीड़ इतनी ‘शांतिप्रिय’ है कि इसने आज पेट्रोल पम्प से लेकर बाइक, ऑटो, रिक्शा आदि को आग के हवाले कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया, जिसने 8 राउंड फायरिंग भी की। आज ही कई मेट्रो स्टेशंस के पास मुस्लिमों को अपने बोरिया-बिस्तरों के साथ इकट्ठा होते हुए भी देखा जा रहा है। पूछने पर पता चला कि किसी ‘दुआ’ के लिए सभी लोग इकट्ठे हो रहे हैं। उम्मीद है कि यह दुआ ही हो।

इस पूरे प्रकरण पर देखिए यह वीडियो –

मौजपुर में CAA विरोध में गोलीबारी, एक हेड कॉस्टेबल की मौत; दस जगहों पर धारा 144 लागू

गुजरात में दंगे भड़कने से 1 की मौत, दंगाइयों ने किए 25 घर आग के हवाले; इलाके में पुलिस तैनात

अयोध्या फैसले के बाद ‘ज्ञानवापी आंदोलन’ की घोषणा, ‘हर-हर महादेव’ के साथ बनारस ने किया समर्थन

अयोध्या में राममंदिर के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्साहित हुए कुछ लोगों ने वाराणसी में शिवरात्रि को ज्ञानवापी मुक्ति आंदोलन की घोषणा कर दी। आंदोलन के अगले क्रम में संकट मोचन मंदिर से ज्ञानवापी तक दंडवत यात्रा निकालने की घोषणा की गई थी। ऐसा करने वालों में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के नेता सुधीर सिंह प्रमुख हैं जिन्हें पुलिस ने रविवार को उनके घर से गिरफ्तार कर धारा 151 में जेल भेज दिया है।

सपा के आपसी टकराव के बाद शिवपाल सिंह यादव के साथ उनकी पार्टी में शामिल हुए सुधीर सिंह ने चार दिन पहले काशी विश्‍वनाथ ज्ञानवापी मुक्ति आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी। महाशिवरात्रि को अस्‍सी घाट पर उन्होंने द्वादस ज्योतिर्लिंग में शामिल बाबा विश्‍वनाथ ज्‍योतिर्लिंग तथा श्रृंगार गौरी को मुक्‍त कराने की शपथ ली।

महाशिवरात्रि के दिन ही ज्ञानवापी मुक्ति आंदोलन को काशी वासियों ने छतों से खड़े होकर हर-हर महादेव के नारे और घंटे-घड़ियाल, शंख की ध्वनि के साथ भारी संख्या में अपना समर्थन दिया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार इसी क्रम में रविवार को सुधीर सिंह और आंदोलन से जुड़े अन्य लोग मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्‍दुल बातिन के साथ ही कई मुस्लिम नेताओं से मिलकर ज्ञानवापी परिक्षेत्र से मस्जिद अन्‍य शिफ्ट करने का अनुरोध करने वाले थे। इसके बाद उनकी योजना सोमवार को संकटमोचन मंदिर से काशी विश्‍वनाथ मंदिर तक दंडवत यात्रा निकालने की तैयारी थी। पर उससे पहले उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के ठीक पहले सुधीर सिंह ने फेसबुक पर लिखी अपनी पोस्ट में कहा-


इस आंदोलन की घोषणा से पहले मंगलवार को सुधीर सिंह वाराणसी में सिविल जज की कोर्ट में ज्ञानवापी परिसर को हिंदुओं को सौंप देने की माँग करने को लेकर एक याचिका भी दाखिल कर चुके हैं। जिसमें कहा गया है, “ज्ञानवापी मस्जिद पहले भगवान शिव का मंदिर था जिसे मुगल आक्रमणकारियों ने ध्वस्त कर मस्जिद बना दिया था, इसलिए हम हिंदुओं को उनके धार्मिक आस्था एवं राग भोग, पूजा-पाठ, दर्शन, परिक्रमा, इतिहास, अधिकारों को संरक्षित करने हेतु अनुमति दी जाए।” इस वाद पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

ध्यातव्य है कि अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में आए फैसले के बाद अब द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक को लेकर खुदाई की माँग भी दुबारा उठने लगी है। इसी कड़ी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अपील प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ की ओर से सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर की गई थी।

यह सुनवाई सिविल जज (सीनियर डिवीजन-फास्ट ट्रैक) आशुतोष तिवारी की अदालत में चल रही है। जिस पर अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।

गुजरात में दंगे भड़कने से 1 की मौत, दंगाइयों ने किए 25 घर आग के हवाले; इलाके में पुलिस तैनात

एक ओर जहाँ देशभर में नागरिकता कानून को लेकर तरह-तरह के दंगे और विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं, वहीं गुजरात में आज दो समुदायों के बीच हिंसा और झड़प का मामला सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के भारत दौरे से पहले आनंद जिले के खंभात तालुका में रविवार को दो समुदायों के बीच अचानक दंगा भड़क जाने के कारण 13 लोग घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि वो अभी इस झड़प का कारण पता कर रही है।

गुजरात के आनंद जिले के खंभात तालुका में कल रविवार (फरवरी 23, 2020) को दो समुदायों के बीच अचानक दंगा भड़क गए। इस दंगों में 13 लोग घायल हो गए। दोनों समुदायों की उत्तेजित भीड़ ने एक-दूसरे के कम से कम 25 घरों-दुकानों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया। खम्भात के इस इलाके में दोनों समुदायों के बीच पिछले एक महीने में सांप्रदायिक संघर्ष की यह दूसरी घटना बताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले गत जनवरी 24, 2020 को दोनों समुदायों में दंगा भड़का था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। खम्भात स्थित आनंद जिले के कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक दिव्य मिश्रा ने बताया है कि रविवार को अकबरपुरा इलाके में दोनों समुदायों के बीच 24 जनवरी के दंगे को लेकर मौखिक बहस शुरू हो गई, जो आपस में मारपीट और पथराव में बदल गई।

पुलिस ने बताया कि दंगा भड़कने के पीछे के असली कारण की फिलहाल जाँच की जा रही है और फिलहाल इस मामले में आरोपित 46 लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया है। इसके बाद वहाँ के हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। किसी प्रकार के साम्प्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका के चलते करीब 100 पुलिसकर्मियों को क्षेत्र में तैनात किया गया है।

वहीं, कुछ लोगों का सोशल मीडिया पर कहना है कि यह दंगे, आगजनी और तोड़-फोड़ मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई है।