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अभिनन्दन का Pak भी कुछ न बिगाड़ सका, उसके फैन को दंगाइयों ने देश में ही मार डाला…

दिल्ली में सोमवार (फरवरी 24, 2020) को दिन भर दंगाइयों का तांडव चला। जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, गोकुलपुरी, करावल नगर, भजनपुरा, घोंडा से लेकर चाँदबाग़ तक, अताताइयों ने किसी भी जगह को शांत नहीं रहने दिया। जमकर आगजनी की गई। हिन्दुओं के घरों को जलाने की ख़बरें आई हैं। लेकिन, सबसे ज्यादा दुखद रहा हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल का बलिदान होना। दंगाइयों ने एक भरे-पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया। सीएए विरोध के नाम पर हिंसा करने वाले इन लोगों को इस बात का एहसास होना चाहिए कि उन्होंने इस देश को कितनी बड़ी क्षति पहुँचाई है।

रतनलाल के साथियों ने बताया है कि वो अभिनन्दन वर्तमान के प्रशंसक थे। वही अभिनन्दन, जो मौत के मुँह में जाकर सकुशल लौट आए थे। जिनके लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा था। जिन्होंने मिग-21 जैसे पुराने इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट से एफ-16 जैसे सुपरसोनिक मल्टीरोल फाइटिंग फाल्कन को मार गिराया था। हमारी विडम्बना ये है कि जिस अभिनन्दन का आतंकियों का पनाहगार पाकिस्तान तक कुछ नहीं बिगाड़ पाता, उससे प्रेरित पुलिस का एक जवान अपने ही देश में मार डाला जाता है। सरकार का विरोध करने वाले हिंदुत्व का विरोध करते हैं और फिर देश के जवानों के ही दुश्मन बन जाते हैं।

हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल के बारे में उनके परिवार व जानने वालों ने बतया है कि वो शांतिप्रिय थे। तीन बच्चों के पिता थे वो। वो मरे नहीं हैं, उनकी हत्या हुई है। उनके हत्यारे सीएए के ख़िलाफ़ विरोध करने वाला हर वो आदमी हैं, जिसने हिंसा भड़काने में योगदान दिया है। फरवरी 2018 में अपने साथियों के बीच हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल चर्चा का विषय थे, क्योंकि उनकी मूँछें भारतीय वायुसेना के जाँबाज विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान से मिलती-जुलती थी। इसके ठीक एक साल बाद, आज रतनलाल इस दुनिया में नहीं हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

वो एक योद्धा की तरह वीरगति को प्राप्त हुए, नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में सीएए विरोधी दंगाइयों से लड़ते हुए। उन्होंने 1998 में कॉन्स्टेबल के रूप में दिल्ली पुलिस ज्वाइन की थी। वह गोकुलपुरी में पोस्टेड थे। रतनलाल के साथी उन्हें एक बहादुर और आत्मविश्वासी पुलिसकर्मी के रूप में जानते हैं, जिन्होंने सफलतापूर्वक कई छापेमारियों को अंजाम दिया। गोकुलपुरी के पुलिसकर्मी उन्हें याद कर रहे हैं, क्योंकि हर कठिन परिस्थिति में वो आगे से नेतृत्व करते थे।

एडिशनल डीसीपी बृजेन्द्र यादव के अंतर्गत भी रतनलाल काम कर चुके थे। भावुक यादव बताते हैं कि वो एक क्षमतावान जवान थे, जो कभी थकते नहीं थे और उनका व्यवहार एकदम सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता था। गोकुलपुरी के एसीपी रहे यादव बताते हैं कि अपने उस कार्यकाल के दौरान उन्होंने रतनलाल की कई बार प्रशंसा की थी और उन्हें सम्मानित किया था। हम आगे उन दंगाइयों के बारे में बात करेंगे, जिन्होंने रतनलाल की जान ले ली, लेकिन उससे पहले आपको उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

उनका जन्म राजस्थान के सीकर में हुए था। तीन भाइयों और एक बहन के बीच रतनलाल सबसे बड़े थे। वो अपने पीछे तीन बच्चों को छोड़ गए हैं- 11 (कनक) और 12 (सिद्धि) साल की दो लड़कियाँ और 8 साल का बेटा (राम)। वो अपनी पत्नी व बच्चों के साथ नार्थ दिल्ली के बुराड़ी में रहते थे। उन्होंने बच्चों से वादा किया था कि अबकी पूरा परिवार होली खेलने गाँव जाएगा, सीकर के फतेहपुर तिहावली में। क़रीब एक दशक पहले रतनलाल के पिता का निधन हो गया था। सोचिए, उस माँ पर क्या बीत रही होगी, जिसका सबसे बड़ा बेटा चला गया। अब तक उनकी माँ को रतनलाल की मौत की सूचना नहीं दी गई थी। वो सोशल मीडिया से दूर रहती हैं, उन्हें नहीं पता कि सीएए विरोधियों ने उनके बेटे की हत्या कर दी है।

रतनलाल के छोटे भाई ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बात करते हुए बताया कि वो शुरू से ही पुलिस की वर्दी पहनना चाहते थे। उनके भीतर धैर्य की अद्भुत क्षमता थी। उनके भाई बताते हैं कि उन्होंने कभी रतनलाल को आपा खोते या किसी पर चिल्लाते नहीं देखा था। क़रीब एक महीने पहले पूरा परिवार मिला था, जब एक रिश्तेदार की मौत हो गई थी। उनके छोटे भाई दिनेश कहते हैं कि आज उन्होंने अपने भाई को खोया है, कल को उनकी जगह कोई और हो सकता है। उनका बयान सही है क्योंकि दिल्ली में कई ऐसे मोहम्मद शाहरुख़ घूम रहे हैं, जो पुलिस पर फायरिंग करते चलते हैं। लिबरल गैंग ऐसे शाहरुखों के बचाव में सदैव तत्पर हैं। उन्हें लगातार एहसास दिलाया जा रहा है कि वो एकदम ठीक कर रहे हैं।

रतनलाल ने 2013 में दो आदिवासी महिलाओं का बलात्कार करने वाले को धर दबोचा था। सीमापुरी के एक रेस्टॉरेंट में कुछ पहलवानों ने तबाही मचाई थी, तब उनसे रतनलाल ही निपटने गए थे। उनके साथी बताते हैं कि जब भी कोई कठिन टास्क आता तो वो आगे बढ़ कर उसे करने के लिए निकल पड़ते थे। गाँव वालों की माँग है कि उनकी धरती के लाल को ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाए। रतनलाल वीरगति को प्राप्त हुए हैं, दुनिया का हर दर्जा उनके कारनामे से नीचे ही है। लेकिन, जब भी आप रतनलाल को याद करें, सीएए विरोधी दंगाइयों की करतूतों को भी ज़रूर याद करें।

दुख की बात तो ये है कि अभी तक किसी भी नेता ने रतनलाल या उनके परिवार से मुलाकात नहीं की है। उनके लिए आवाज़ नहीं उठाई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हत्यारों से अपील करते हैं कि वो शांत हो जाएँ। यही केजरीवाल जब कोई हिन्दू चींटी भी मार दे तो रामायण और गीता का उपदेश देने लगते हैं। भगवद्गीता को लेकर झूठ बोलते हैं। क्या इससे हत्यारों, दंगाइयों और उपद्रवियों को बढ़ावा नहीं मिलता? सीएए विरोधी हिंसा का समर्थन कर रहा हर एक नेता उसी तरह दोषी है, जैसे कश्मीर में अलगावादियों और आतंकियों को संरक्षण देने वाले नेतागण थे। इनमें से कई आज जेल व नज़रबंदी की हवा खा रहे हैं।

अगर रतनलाल की जगह कोई दंगाई मारा गया होता, तो उसके दरवाजे पर अब तक नेताओं का मेला लग गया होता। यूपी में हमने देखा कि कैसे हर एक दंगाई के घर जाकर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने अपना समर्थन दिया। यही प्रियंका गाँधी जेएनयू के दंगाइयों से मिलने भी पहुँचीं। और रतनलाल? देश के लिए जान देने वाले, दंगाइयों के हाथों मारे जाने वाले और अपना पूरा जीवन जनता की सुरक्षा में खपा देने वाले जवान के लिए कोई नेता आवाज़ क्यों नहीं उठा रहा? वो ऐसा क्यों नहीं बोल रहा कि सीएए विरोधियों ने ग़लत किया है और उन पर कार्रवाई हो। हिंसा की निंदा करने वालों से सवाल है कि तुम हिंसा करने वालों का नाम क्यों नहीं ले रहे?

माँ से किया वादा पूरा नहीं कर पाए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल, बुखार के बावजूद कर रहे थे ड्यूटी

दंगाइयों की गोली से ही हुई हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

दिल्ली में फिर गोलीबारी और पत्थरबाजी, 9 की मौत: दंगाइयों के बचाव में लिबरल गैंग सक्रिय

दिल्ली में दंगाई एक बार फिर से अपने खतरनाक मंसूबों के साथ निकल पड़े हैं। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कर्दमपुरी में हिंसा भड़क गई है। वहाँ गोलीबारी भी हुई है। गोलीबारी की सूचना मिलते ही अर्धसैनिक बलों को वहाँ के लिए रवाना कर दिया गया है। वहीं खजूरी ख़ास क्षेत्र में पत्थरबाजी फिर से तेज़ हो गई है। करावल नगर की तरफ़ जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया गया है। खजूरी ख़ास में लगातार तीसरे दिन हिंसा भड़की है और वहाँ पुलिस की उपस्थिति भी नगण्य है, जिससे दंगाई खुलेआम तांडव कर रहे हैं। वहाँ कई घरों को जलाए जाने की ख़बरें भी आ रही हैं।

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में एक पत्रकार को भी गोली मारने की ख़बर आई है। अभी इस बारे में और सूचना आनी बाकी है। वहीं शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। इन्हीं उपद्रवियों का आधिकारिक सोशल मीडिया पेज झूठे अफवाह फैला रहा था। सोमवार की रात भजनपुरा-यमुना विहार में दंगाइयों ने हिंसा की एक के बाद एक वारदातों को अंजाम दिया। एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान ने दावा किया है कि टीवी चैनल के दो पत्रकारों की पिटाई की गई है।

वहीं सोशल मीडिया के लिबरल गिरोह ने दंगाइयों के बचाव का सिलसिला तेज़ कर दिया है। पुलिस किसी पत्थरबाज को शिकंजे में ले रही है, तब उसकी फोटो को वायरल कर के उसे 2002 के गुजरात दंगे से जोर कर दिखाया जा रहा है। वहीं दंगाइयों द्वारा मार डालें गए हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल और हॉस्पिटल में भर्ती डीसीपी अमित शर्मा को लेकर गिरोह विशेष लगातार चुप्पी साधे हुए है। अब तक कुल 9 लोगों के मारे जाने की ख़बर है।

कुछ लोग पुलिस की तैनाती को दिखाकर समुदाय विशेष को पीड़ित के तौर पर पेश कर रहे हैं। विडियो बना कर दावा कर रहे हैं कि पुलिस बजरंग दल वालों के साथ उन्हें मारने आई है। ट्विटर सेलेब्रिटियों द्वारा ऐसे वीडियो को ख़ूब प्रसारित किया जा रहा है।

ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा कि सभी क्षेत्रों में शांति समितियों को सक्रिय कर दिया गया है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के 5 मेट्रो स्टेशन मंगलवार को भी दिन भर बंद रहे। गोकुलपुरी मेट्रो स्टेशन के पास टायर जला डाला गया। ब्रह्मपुरी क्षेत्र में पत्थरबाजी के बाद एक विरोध-प्रदर्शन रैली निकाली गई। वहीं शाहदरा के घायल डीसीपी अमित शर्मा के बारे में ख़बर आई है कि उनकी हालत अब ख़तरे से बाहर है। वो फ़िलहाल हॉस्पिटल में रहेंगे।

दिल्ली और अलीगढ़ दंगों के जुड़ रहे तार, हिंसा भड़काने के पीछे PFI और भीम आर्मी का हाथ

‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारों के बीच ब्रह्मपुरी में मुस्लिम भीड़ ने की हिंदू युवक की हत्या

दंगाइयों की गोली से ही हुई हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

दलितों ने मुस्लिमों की हत्या की, महिलाओं का रेप किया: इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार इरेना अकबर

इंडियन एक्सप्रेस की पूर्व पत्रकार और लखनऊ में रहकर बतौर उद्यमी काम करने वाली इरेना अकबर ने ट्विटर पर दलितों के प्रति अपनी कुंठा निकाली है। अकबर ने एक सवाल के जवाब में साफ कहा है कि वे दलितों पर यकीन नहीं करतीं। ऐसा इसलिए क्योंकि दलितों ने गुजरात दंगों में मुस्लिम मर्दों की हत्या की थी। साथ ही मुस्लिम महिलाओं का रेप भी किया था। अपने जवाब में इरेना ने दलितों को दंगे में शामिल ‘फुट सोल्जर’ कहा। इसके अलावा ये भी कहा है कि दलितों को अपर कास्ट हिंदुओं ने प्रताड़ित किया था। उनके साथ मुस्लिमों ने कुछ नहीं किया है।

इरेना ने लिखा, “गुजरात में 2002 में मुस्लिमों के हुए नरसंहार में दलित फुट सोल्जर थे। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं का रेप कर और आदमियों की हत्या करने का घृणित काम किया था। मैं उनपर कभी यकीन नहीं करती। उन्हें उनके ही ऊँची जाति वाले हिंदू भाइयों ने प्रताड़ित किया था। हमने उनके साथ कुछ नहीं किया।”

गौरतलब है कि दलितों को लेकर पत्रकार खातून की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक महीने पहले ही मध्यप्रदेश के सागर जिले में धान प्रसाद अहिरवार नामक एक दलित को उसके मुस्लिम पड़ोसियों ने आग के हवाले कर दिया था। करीब 10 दिन जिंदगी-मौत के बीच झूलने के बाद उसने दम तोड़ दिया था।

इरेना की दलित विरोधी टिप्पणी देखने के बाद जब किसी यूजर ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि मुस्लिम और दलितों के बीच इस तरह की स्थिति आरएसएस को मदद करेगी, तो इरेना यूजर पर ही भड़क गई और कहने लगीं कि दलितों ने मुस्लिमों महिलाओं का रेप किया, मर्दों की हत्या की, ये एक तथ्यात्मक बात है। उन्होंने अपनी बात को इसके बाद फिर दोहराया कि दलितों को अपर कास्ट हिंदुओं ने प्रताड़ित किया था। इसका इससे कोई लेना-देना नहीं है कि उन्होंने मुस्लिमों के संहार में सक्रिय भूमिका निभाई।

इसके बाद जब एक शुभचिंतक उन्हें समझाने उनके ट्वीट पर आया तो वह उसपर भी नाराज होती दिखीं और कहने लगीं कि वो किसी भी कीमत पर मुस्लिम बहनों का रेप करने वालों का बचाव नहीं करेंगी। बता दें अपने इन ट्विट्स में इरेना लगातार दलितों को गुजरात दंगों का ‘फुट सोल्जर’ कहती रहीं।


गौरतलब है कि साल 2002 में 27 फरवरी को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में गुजरात के गोधरा स्टेशन पर समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने आग लगा दी थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में अधिकतर कार सेवक थे। इस घटना के बाद 28 फरवरी से 31 मार्च तक गुजरात में दंगे भड़के। इसमें 1200 से अधिक लोग मारे गए थे और साथ ही 1500 लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज हुई थी।

दिल्ली हिंसा: मौजपुर में दंगाइयों ने JK24*7News के संवाददाता को मारी गोली, हालत नाजुक

दिल्ली के मौजपुर में सोमवार से शुरू हुई हिंसा बढ़ती हुई नजर आ रही है। मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को ही मौजपुर में दंगाइयों की भीड़ द्वारा JK24X7News के पत्रकार आकाश नापा को निशाना बनाया गया और उन्हें गोली मार दी गई।

दंगाइयों ने आकाश के कंधे पर गोली चलाई इसके बाद उन्हें घायल अवस्था में जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत नाजुक है।

JK247News के पत्रकार आकाश चैनल के लिए नार्थ-ईस्ट दिल्ली की घटनाओं को कवर करते थे। सोमवार को दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल को भी दंगाइयों ने गोली मार दी थी।

गौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली में रविवार को हिंसा की शुरुआत हुई थी। इसके बाद इस हिंसा ने भयावह रूप ले लिया। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में कई जगहों पर आगजनी-पत्थरबाजी हुई। गोलियॉं चलाई गई। अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मंगलवार की सुबह भी मौजपुर और ब्रह्मपुरी में पत्थरबाजी तथा आगजनी की घटना हुई। दिल्ली की सड़कों पर हिंसा की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत आने से ठीक पहले हुई। उनके अहमदाबाद में लैंड करने के बाद हिंसा तेज हो गई।

इसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा जा रहा है कि भारत की छवि खराब करने के लिए ट्रंप के दौरे को हिंसा के लिए सोच-समझकर चुना गया है। आखिर क्यों जब ट्रंप अहमदाबाद में दुनिया को इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ संदेश दे रहे थे देश की राजधानी तेजी से भभक उठी? इसके पीछे किसका हाथ है? ये किसकी साजिशें हैं?

‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारों के बीच ब्रह्मपुरी में मुस्लिम भीड़ ने की हिंदू युवक की हत्या

अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के बीच राष्ट्रीय राजधानी में आगजनी, पत्थरबाजी चालू है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों से अब भी हिंसा की ख़बरें आ रही है। बाजारों में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर तोड़फोड़ की जा रही है। दुकानों पर हमले हो रहे हैं। सार्वजनिक वाहनों को फूँका जा रहा है और एक समुदाय के लोग दूसरे समुदाय को मारने-काटने पर आतुर हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर इन घटनाओं की कुछ वीडियो वायरल भी होने लगे हैं। इनमें से एक विडियो ब्रह्मपुरी इलाके की सामने आई है।

विडियो में देखा जा सकता है कि 2-3 लोग एक हिंदू के शव को मुस्लिमों की भीड़ से दूर लेकर जा रहे हैं। लेकिन मुस्लिमों की भीड़ अचानक से गली के बाहर आकर अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर का नारा लगाने लगती है। सोशल मीडिया के अनुसार मृतक युवक का नाम विनोद है।

इसके बाद इसी मामले से संबंधित एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वीडियो में ब्रह्मपुरी इलाके के आसपास रहने वाले मुस्लिमों को कहते सुना जा सकता है कि हिंदू के शव उन्हें इसी तरह पूरी रात मिलेंगे।

वीडियो में शख्स को कहते सुना जा सकता है, “मुस्लिमों ने गली नंबर 1 में हमारे हिंदू भाई के शव को भेजा है, वो भी इस संदेश के साथ कि वो पूरी रात इस तरह के शव भेजेंगे।”

Hindu man killed by Muslim mob in Delhi's Brahmapuri area
हिंदू युवक विनोद का शव

गौरतलब है कि रविवार रात से जाफराबाद, कबीरनगर, गोकलपुरी, भजनपुरा, ब्रह्मपुरी जैसे उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इलाकों में हालात काबू में नहीं हैं। यहाँ सीएए के कानून के विरोध और समर्थन का मुद्दा बहुत पीछे छूट गया है और अब इस मतभेद ने साम्प्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया है।

हिंदू युवक को मारकर उसके शव को इस तरह फेंकने वाली घटना दिल दहलाने वाली है। साथ ही वो संदेश भी जो एक समुदाय ने दूसरे समुदाय को दिया। इसके अलावा बता दें कि कल दंगाइयों ने पेट्रोल पम्प से लेकर ऑटो, रिक्शा तक को आग के हवाले कर दिया था। इसी बीच एक युवक ने आठ राउंड गोलियाँ भी चलाई थी, जिसकी पहचान शाहरुख के तौर पर हुई है।

दंगाइयों की गोली से ही हुई हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

सोमवार को नॉर्थ-ईस्‍ट दिल्‍ली में नागरिकता कानून के विरोध में हुई हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल की मौत हो गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि उनकी मृत्यु गोली लगने के कारण हुई। अभी तक उनकी मृत्यु की वजह पत्थर लगना बताया जा रहा था और अन्य अज्ञात कारण बताए जा रहे थे।

मृतक रतनलाल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि 42 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल की मौत गोली लगने से हुई न कि पथराव के कारण। न्यूज नेशन की एक रिपोर्ट में यह दवा किया गया है कि उनके पास पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विवरण है। रिपोर्ट में लिखा गया है, “रतन लाल के शरीर में एक गोली लगी थी। यह गोली बाएँ कंधे से प्रवेश करते हुए दाएँ कंधे पर जाती है। शव परीक्षण के दौरान इसे हटा दिया गया था। ऑटोप्सी रिपोर्ट से ही यह जानकारी प्राप्त हुई है।”

मृतक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल राजस्थान के सीकर जिले के गाँव फतेहपुर तिहवाली के निवासी थे। सीकर निवासी रतनलाल वर्ष 1998 में कॉन्स्टेबल के पद पर दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। सोमवार को हुई हिंसा में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल बुरी तरह जख्मी हो गए थे। रतनलाल की मौत की खबर जैसे ही उनकी पत्नी पूनम को मिली, वह बेहोश हो गईं। देखते ही देखते उनके घर भीड़ जमा हो गई। रतनलाल की दो बेटियाँ और एक बेटा है।

मृतक रतनलाल की माँ और छोटा भाई दिनेश गाँव में रहते हैं। पिता बृजमोहन की ढाई साल पहले ही मृत्यु हो गई थी। रतन ने दो दिन पहले ही माँ संतरा देवी व भाई दिनेश से फोन पर बात की थी। उन्होंने माँ से हाल-समाचार पूछने के साथ ही इस बार होली पर गाँव आने का वादा किया था, लेकिन माँ को क्या पता था कि उनकी बेटे से आखिरी बार बात हो रही है। घटना से पूरा परिवार सदमे में है।

दिल्ली और अलीगढ़ दंगों के जुड़ रहे तार, हिंसा भड़काने के पीछे PFI और भीम आर्मी का हाथ

दिल्ली और अलीगढ़ के हालिया दंगों के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और भीम आर्मी का हाथ होने की बात सामने आई है। इससे पहले बीते साल भी यूपी और दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुई हिंसा के पीछे पीएफआई का हाथ सामने आया था। ​उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रविवार को हिंसा भड़की थी। मंगलवार को भी कई इलाकों में आगजनी और पत्थरबाजी की खबरें हैं। हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके साथ ही अलीगढ़ में भी हिंसक घटनाएँ हुई हैं।

हिंसा के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और भीम आर्मी की भूमिका संदिग्ध दिख रही है। पीएफआई कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है। भीम आर्मी का प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण है।

उत्तर प्रदेश राज्य खुफिया विभाग (UP State Intelligence) ने कुछ प्रमुख मोबाइल फोन नंबरों की कॉल डिटेल के आधार पर खुलासा किया है कि दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले में पिछले दो दिनों में आगजनी और गोलीबारी की विभिन्न घटनाओं के तार अलीगढ़ में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन से जुड़े हुए हैं। खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अलीगढ़ के अंबेडकर पार्क में विरोध-प्रदर्शन करने वाले भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपने के बाद पीएफआई के अधिकारियों से मुलाकात की थी।

इसी दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्रों के एक संगठन ने भी भीम आर्मी और पीएफआई नेताओं से मुलाकात की। रिपोर्ट में कहा गया है कि भीम आर्मी की अगुआई में एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल शहर के बीच एक धार्मिक स्थान पर पहुँचा, जहाँ उन्होंने पोस्टर हटाने शुरू कर दिए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने मंदिरों पर पत्थरबाजी की। पुलिस द्वारा विरोध करने पर आक्रोशित भीड़ ने पुलिस बल पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद शहर के ऊपरकोट क्षेत्र तथा जमालपुर क्षेत्र में भी हिंसा शुरू हो गई, जहाँ पहले से ही सीएए को लेकर पिछले काफी दिनों से विरोध-प्रदर्शन चल रहा था।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक अलीगढ़ पुलिस के एक सर्किल ऑफिसर (CO) ने फोन पर बताया, “विभिन्न स्थानों पर एक साथ ही हिंसक घटनाएँ शुरू हो गईं। ऐसा लगता है कि यह (पत्थरबाजी) सुनियोजित थी और दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिला में हुई हिंसा से संबद्ध है। हम कुछ महत्वपूर्ण फोन नंबरों के डाटा ले रहे हैं।” बताया जा रहा है कि दिल्ली और अलीगढ़ में सीएए संबंधित हिंसाओं के समय और पैटर्न में काफी समानताएँ हैं।

रिपोर्ट में बताया कि दिल्ली और यूपी दोनों जगहों पर हिंसा की शुरुआत पत्थरबाजी से हुई। भीड़ बढ़ने के बाद हिंसा करने वालों, जिनमें ज्यादातर हथियारों से लैस थे ने आगजनी करना और दुकानें लूटना शुरू कर दिया। वहीं अलीगढ़ में खैर मार्ग क्षेत्र में दुकानों में लूटपाट हुई, दिल्ली के जाफराबाद क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप में आग लगा दी गई और कई दुकानों को लूटा गया।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि हिंसक प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर हमला किया। इन हमलों में दिल्ली में हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की मौत हो गई। इसी तरह अलीगढ़ में पुलिस निरीक्षक रविंद्र कुमार सिंह और कई अन्य कॉन्स्टेबलों पर भीड़ ने हमला कर दिया। सीएए-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों समेत अन्य सरकारी संपत्तियों को भी नष्ट कर दिया।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गृह मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया कि पीएफआई ने अपने बैंक खाते से सीएए-विरोधी प्रदर्शनों में संलिप्त कई लोगों को रुपए भेजे थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसे 73 बैंक खाते चिह्नित किए गए थे। ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रमुख लेन-देन पीएफआई के दिल्ली स्थित मुख्य खाते से हुई थी।

पीएफआई का मुख्यालय शाहीन बाग में स्थित है, जहाँ सीएए विरोध के नाम पर दो महीने से ज्यादा समय से धरना चल रहा है। पीएफआई नेताओं और भीम आर्मी के पदाधिकारियों के बीच संबंध ईडी ने भी अपनी रिपोर्ट में उजागर किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि पीएफआई का दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद शाहीन बाग प्रदर्शन का प्रमुख हिस्सेदार है। परवेज, भीम आर्मी के कई व्हाट्सएप ग्रुपों से भी जुड़ा हुआ है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले दिल्ली के जामिया में हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन के पीछे भी PFI का हाथ सामने आया था। पुलिस ने कहा था कि PFI के अराजक तत्वों द्वारा पथराव और आगजनी की शुरुआत की गई। पुलिस ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत दिल्ली में हुई, क्योंकि कार्यकर्ताओं को पता था कि मीडिया इस ख़बर को तुरंत ब्रेक कर देगा और इससे हिंसा को फैलाने में अधिक मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि जामिया में हिंसा से दो दिन पहले 13 दिसंबर को कट्टरपंथी इस्लामी संगठन PFI के लगभग 150 सदस्यों ने विभिन्न राज्यों से दिल्ली में प्रवेश किया था। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, जामिया इलाक़े में हिंसा भड़कने से पहले वो कहीं छिप गए थे।

शाहीन बाग में फ्री लंगर का AIMIM कनेक्शन: AAP, कॉन्ग्रेस, PFI के बाद अब ओवैसी का भी साथ

UP: 4 दिनों में PFI के 108 सदस्य गिरफ्तार, CAA की आड़ ले प्रदेश के कई शहरों में भड़काई थी हिंसा

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सनातन परंपरा: दलित श्रद्धालु को कंधे पर बिठा ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी रंगनाथ स्वामी मंदिर ले गए पुजारी

तेलंगाना में सोमवार को समाजिक समता और समरसता की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहाँ एक अर्चक (पुजारी) ने रवि नामक दलित को कंधे पर उठाया और मंदिर के अंदर ले गए। यह किस्सा तेलंगाना के खम्मम स्थित रंगनायकुला गुट्टा का है।

सोमवार (फरवरी 24, 2020) को खम्मम में ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी रंगनाथ स्वामी मंदिर (रंगनायकुला गुट्टा) में समाजिक समरसता वेदिका, नरसिंह वाहिनी और अन्य संगठनों के साथ मंदिर संरक्षण आंदोलन (टीपीएम) का आयोजन किया गया।

मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित गाँधी प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ शुरुआत करते हुए, सड़क के दोनों ओर सैकड़ों महिलाओं द्वारा नादस्वरम और कोल्लम के साथ एक बड़ी शोभा यात्रा निकाली गई। इसी दौरान भद्राचलम नरसिंह स्वामी मंदिर के अर्चक (पुजारी) कृष्ण चैतन्य ने श्रद्धेय तिरुप्पनलवार के चित्रण के रूप में वैष्णव नमम को धारण करने वाले रवि को उठा लिया और उन्हें मंदिर तक ले गए।

इस उत्सव में चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन भी शामिल थे। रंगराजन ने इस मौके पर कहा कि इसे एक वैष्णव आचार्य भगवद रामानुज की शिक्षाओं के उत्सव के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने एक गैर-भेदभावपूर्ण और समतावादी समाज के लिए संघर्ष किया। रंगराजन ने कहा, “सनातन धर्म में ईश्वर के बाद सभी को एक समान माना जाता है। तथाकथित भेदभाव केवल हाल के दिनों में ही शुरू हुआ है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम दुनिया में अलग-अलग लोगों के बीच आने वाले भेदभावों को खत्म करें।”

इस अवसर पर सीएस रंगराजन ने कहा, “आचार्य रामानुज ने उपदेश दिया कि हर कोई भगवान की दृष्टि में समान है और कोई भी ऊँचा या नीचा नहीं है। संत रविदास ने अपने उपदेशों से सभी वर्गों और समुदायों के लोगों को भक्ति मार्ग में मार्गदर्शन किया। दुनिया में विभिन्न प्राणियों के बीच आई विषमताओं को दूर करने की जिम्मेदारी हमारी है।”

रंगराजन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने बस यह दिखाने का प्रयास किया है कि सनातन धर्म ने सभी को भगवान के समान माना है और तथाकथित भेदभाव ने हाल ही के कुछ समय में सनातन की व्यवस्थाओं में बदलाव कर दिया है।

ऐसे समय में, जब देश में मजहबी तनाव पर चर्चा जारी हैं, तेलंगाना निरंतर ऐसे उदाहरण पेश करता आया है।
दो साल पहले भी चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन ने ही सबसे पहले अप्रैल 2018 में एक दलित युवक आदित्य परासरी को कंधे पर बिठाकर जियागुड़ा स्थित रंगनाथ स्वामी मंदिर के अंदर पहुँचाया था। तेलंगाना में होने वाली मुनि वाहन सेवा तमिलनाडु में 2700 साल से चले आ रहे समारोह का ही एक रूप है। यह समारोह मुख्य रूप से वैष्णव मंदिर में होते हैं और इनमें सनातन धर्म के रीति-रिवाज माने जाते हैं।

ट्रंप ने कहा- इस्लामी आतंकवाद के सफाए को प्रतिबद्ध हैं भारत-अमेरिका, $3 बिलियन का रक्षा करार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी भारत यात्रा के दौरान मंगलवार (फरवरी 25, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच कुल 3 करार पर हस्ताक्षर किए गए। एक MoU एनर्जी सेक्टर के लिए भी फाइनल किया गया। कुल 3 बिलियन डॉलर के रक्षा करार पर हस्ताक्षर किए गए। 5G नेटवर्क को लेकर भी दोनों नेताओं बीच चर्चा हुई। तकनीक और रक्षा, ये दोनों मुद्दे भारत और अमेरिका की इस बैठक के अहम मुद्दे थे। रक्षा डील के अंतर्गत भारत को अपाचे और एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर मिलेंगे, जो दुनिया में सबसे उत्तम तकनीक वाले हेलीकॉप्टर हैं।

बैठक के बाद संयुक्त बयान के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर इस्लामिक आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका अपने नागरिकों को कट्टर इस्लामी आतंकवाद से बचाने के लिए कृत संकल्पित हैं। इस दौरान पाकिस्तान की धरती से आतंकी गतिविधियाँ संचालित किए जाने की बात भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने मानी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत में जिस गर्मजोशी के साथ उनका और उनके परिवार का स्वागत किया गया, उससे वे अभिभूत हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत और यूएस के बीच फ्री और ओपन ट्रेड को बढ़ावा देने की बात कही। ट्रंप ने कहा:

“हमने भारत-अमेरिका रिश्ते के कुछ अहम पहलुओं को लेकर बातचीत की। रक्षा से लेकर सुरक्षा तक, एनर्जी क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक मुद्दे, व्यापर और ‘पीपल टू पीपल कनेक्शन’ को लेकर भी हमारी बातचीत हुई। सबसे अहम परिणाम ये निकला कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में रिश्ते और भी प्रगाढ़ हुए हैं। हमारे कॉमर्स मंत्रियों ने भी आपस में बैठक की है और जल्द ही उसके भी सकारात्मक परिणाम आएँगे। ये बहुत ख़ास दौरा है, ये अविस्मरणीय अनुभव रहा है, एकदम अद्वितीय।”

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि दोनों नेताओं के बीच लोगों की सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने को लेकर अहम बातचीत हुई। तीनों MoU के बारे में जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने बताया कि एक एनर्जी सेक्टर में करार हुआ, दूसरा मेन्टल हेल्थ को लेकर और तीसरा तेल के क्षेत्र में। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 8 महीने में ये उनकी और राष्ट्रपति ट्रंप की पाँचवी मुलाकात है।

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ट्रंप ने लिखा- मेरे अच्छे दोस्त मोदी, कॉन्ग्रेसी मुखपत्र नेशनल हेराल्ड ने देश को ही बता दिया- Shit Hole

अब दिल्ली को जलाया, 20 साल पहले सिखों का कत्लेआम किया: तब क्लिंटन आए थे, आज ट्रंप दौरे पर हैं

पुलिस पर गोलीबारी करने वाला मोहम्मद शाहरुख़ गिरफ़्तार, स्वामी ने कहा- सेना बुला कर इनसे निबटो

दिल्ली में दंगाइयों ने सोमवार (फरवरी 24, 2020) को पूरे दिन कहर बरपाया। एक तरफ सोशल मीडिया पर लिबरलों व मीडिया का एक गिरोह उन्हें बचाने में लगा रहा, दूसरी तरफ़ दंगाइयों ने पुलिस कॉन्स्टेबल रतनलाल को मार डाला। एक व्यक्ति की तस्वीर वायरल हुई थी, जो हाथ में पिस्तौल लहराते हुए फायरिंग कर रहा था और पुलिसकर्मियों को धमका रहा था। सोशल मीडिया पर उसकी पहचान छिपाने की भरसक कोशिश की गई लेकिन वो विफल रहे। उक्त दंगाई का नाम मोहम्मद शाहरुख़ है, जिसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। मोहम्मद शाहरुख़ के साथ कई अन्य उपद्रवी भी चिह्नित किए गए हैं।

मोहम्मद शाहरुख़ की जब तक पहचान उजागर नहीं हुई थी, तब तक उसके नाम पर ‘भगवा आतंकवाद’ की बातें की जाती रही। जब उसकी पहचान सामने आ गई, तब शाहीन बाग़ में पिस्तौल लहराने वाले कपिल गुर्जर के साथ उसकी तुलना की जाने लगी। लिबरलों का गिरोह तब ‘इसका तो ठीक है लेकिन उसका क्या..’ वाले नैरेटिव पर उतर आया। शाहरुख़ के बारे में अभी ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाया है लेकिन पूछताछ के बाद उसके बारे में और भी जानकारी सामने आने की सम्भावना है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में शाहरुख़ ने पुलिस पर फायरिंग की थी। उसने कुल 8 राउंड फायर किए थे। उस वक़्त उसने लाल रंग की टीशर्ट पहन रखी थी।

वहीं भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यन स्वामी ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की है कि इस समस्या का समाधान सेना के द्वारा कराया जाए। स्वामी ने राजनाथ को सलाह दी कि वो शाह से कहें कि दिल्ली में सीएए विरोधी दंगाइयों से निपटने के लिए सेना की सहायता लें।

स्वामी ने कहा कि ऐसा करना भले ही लोकतान्त्रिक परंपरा का उल्लंघन करने के समान होगा लेकिन देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए ये आवश्यक है। स्वामी ने स्पष्ट कहा कि सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे दंगे देशविरोधी हैं और ये भी दंगाई भी देशद्रोही हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने स्वामी के बयान का समर्थन किया है।

उधर दिल्ली में अमित शाह ने एक उच्च-स्तरीय बैठक में सीएए विरोधी दंगों और हिंसा को लेकर बातचीत की। इस बैठक में शामिल होने वाले मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि इससे सकारात्मक परिणाम निकलेंगे। शाह ने इस दौरान पुलिस और विधायकों के समन्वय पर जोर दिया। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें अधिकारियों का आश्वासन मिला है कि पुलिसकर्मियों की कमी नहीं होने दी जाएगी और क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए परस्पर सहयोग के साथ काम किया जाएगा।