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‘बम बाँध कर कौन फटता है? – एयरलाइन के CEO का बयान, लिबरल्स आग बबूला

लंदन में टाइम्स न्यूज़ पेपर से बात करते हुए एयरलाइन्स रेनएयर (Ryanair) के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर माइकल ओ’ लियरी ने “सच को कहने की जरूरत” पर जोर देते हुआ कहा, “आज बम बाँध कर फटने वाले ज्यादातर आतंकी आखिर और किस मजहब को मानने वाले हैं? अगर इन में से ज्यादातर मुस्लिम ही हैं तो क्यों नहीं इनकी प्रोफाइलिंग की जाए?”

माइकल ओ’ लियरी ने यह बात एयरपोर्ट सुरक्षा पर टिप्पणी करते हुए टाइम्स से बातचीत में कही।

रिपोर्ट्स के अनुसार शनिवार को पब्लिश हुए इस इंटरव्यू में एयरलाइन के बॉस ने कहा, “ज्यादातर बॉम्बर्स अकेले यात्रा करने वाले मुस्लिम पुरुष ही हैं… यदि आप अपने बच्चों के साथ परिवार समेत यात्रा कर रहे हैं तो इस बात की सम्भावना बहुत कम है कि आप बम बाँध कर फटेंगे।”

58 साल के एयरलाइन चीफ ने अपने इंटरव्यू में कहा कि आप सच बोलने से इसलिए नहीं कतरा सकते हैं कि यह नस्लीय कहा जाएगा। 30 साल पहले ऐसा करने वाले आयरिश थे, आज मुस्लिम हैं, यही सच है। सीईओ ने आगे कहा, “जहाँ से खतरा है, डील वहाँ करना होगा।”

इस ‘पॉलिटिकली नॉट सो करेक्ट’ बयान पर जो बवाल होने अपेक्षित थे, वे हुए ही। लेबर पार्टी के एमपी खालिद महमूद ने अखबार से कहा,”ओ’ लियरी नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा दे रहे।”

ब्रिटिश मुस्लिम कॉउन्सिल के प्रवक्ता ने भी ओ’ लियरी पर इस्लामोफ़ोबिक होने का आरोप लगाया।


सुबह करतारपुर जाने वाला शाम तक आतंकी बनकर लौटता है, देश की सुरक्षा को खतरा: पंजाब DGP

पंजाब के डीजीपी ने करतारपुर कोरिडोर खुलने के बाद वहाँ बिना किसी वीजा के जाने वाले तीर्थ यात्रियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पंजाब के डीजीपी ने कहा है कि यहाँ से सुबह को जाने वाला व्यक्ति शाम को वहाँ से आतंकी बनकर लौटता है। यह देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंता का विषय है। वहीं डीजीपी के बयान को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बिना वीज़ा के करतारपुर में एंट्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एंट्री फ्री होने से सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। डीजीपी के मुताबिक पाकिस्तान में कुछ ऐसे लोग हैं जो श्रद्धालुओं को लगातार रिझाने की कोशिश में लगे हुए हैं और यही वजह है कि इतने सालों से इस कॉरिडोर को खोला नहीं जा रहा था।

पंचकुला में इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में बोलते हुए डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कहा, “करतारपुर में ऐसी क्षमता है कि अगर आप किसी साधारण शख्स को भी सुबह भेजते हैं तो शाम तक वो ट्रेंड आतंकी के तौर पर लौटता है। आप वहाँ छह घंटे तक रहते हैं। आपको वहाँ फायरिंग रेंज तक ले जाया जा सकता है। आपको वहाँ IED बनाना भी सिखाया जा सकता है।

ये बड़ी चिंता की बात है। मैं इंटेलिजेंस ब्यूरो में 8 सालों तक रहा और इन चीजों को देखता था। हम लोग ये सोचते थे कि सुरक्षा को देखते हुए कॉरिडोर को खोलना बड़ी चुनौती होगी। लेकिन बाद में सिख समुदाय के लोगों की माँग पर इसे खोल दिया, सुरक्षा चिंताओं को हमने ठंडे बस्ते में डाल दिया। सुरक्षा को लेकर ये बड़ी चिंता की बात है।

वहीं डीजीपी के इस बयान को शिरोमणि अकाली दल के बिक्रम मजीठिया ने एक बड़ी साजिश करार दिया है।
बिक्रम मजीठिया ने कहा, “दिनकर गुप्ता का बयान पूरी तरह से अस्वीकार्य है। दिनकर का बयान हर सिख को आतंकवादी बताने की इंदिरा गाँधी की विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है। यह एक गहरी साजिश है।”

वहीं एसएडी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी करतारपुर कोरिडोर पर पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता द्वारा दिए गए बयान की घोर निंदा की है। साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से डीजीपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

गौरतलब है कि करतारपुर साहिब कोरिडोर को पिछले साल 9 नंवबर को गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव के मौके पर खोला गया था। भारत की तरफ पड़ने वाले हिस्से का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने, जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसका उद्घाटन किया था। दरअसल भारत की सीमा से करतारपुर साहिब पाकिस्तान की सीमा ने 3-4 किलोमीटर अंदर है। पिछले काफी समय से सिख समुदाय के लोग इसे वीजा मुक्त खोलने की माँग कर रहे थे। इससे पहले लोग भारत की सीमा में ही खड़े होकर दूरबीन के माध्यम से इस पवित्र स्थान का दर्शन किया करते थे।

महिला कॉन्ग्रेस नेता ने कहा – नागाओं के पास CAA के कागज़ नहीं, जो दिखाएँगे वो चलेगा? लोगों ने कहा- देख पाओगी?

शायद कॉन्ग्रेस में कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर होड़ लगी रहती है कि कौन कितना हिन्दू विरोधी बयान देकर अपने आकाओं की नजरों में आ सकता है। और हो सकता है कि कॉन्ग्रेस में तरक्की करने की यही पहली योग्यता रखी गई हो कि वह हिन्दुओं की आस्था को कितना अपमानित कर सकता है या फिर वह ‘गाली’ देने में कितना कर्मठ है।

सेकुलरिज्म का राग अलापने वाली कॉन्ग्रेस हिन्दुओं को अपमानित करने का कोई भी मौक़ा नहीं चूकती है। एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह अक्सर हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्द को स्थापित करने की पुरजोर मेहनत करते देखे जाते हैं वहीं अब नई पीढ़ी में भी कॉन्ग्रेस ऐसे लोगों को तैयार करते हुए देखी जा रही है। इस बार राजस्थान महिला कॉन्ग्रेस सचिव रीना मिमरोत ने ट्विटर पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ ट्ववीट करते हुए नागा साधुओं के खिलाफ अपमानजनक ट्वीट किया है।

रीमा मिमरोत ने नागरिकता कानून के लिए कागज ना होने की बात को लेकर चुटकुला बनाने की कोशिश की लेकिन वह हिन्दू नागा साधुओं को अपमानित करने का प्रयास करते नजर आ रही हैं। रीना मिमरोत ने एक ट्वीट शेयर किया- “नागा साधु भी CAA के खिलाफ, बोले हमारे पास काग़ज़ नहीं है, जो है वही दिखाएँगे, चलेगा क्या।?”

ट्ववीट में रीना मिमरोत ने भाजपा के राष्ट्रीय आईटी सेल इन चार्ज मालवीय को भी टैग है। रीना मिमरोत का यह ट्वीट दिल्ली भाजपा प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी शेयर किया है।

रीना मिमरोत के इस ट्वीट पर एक अन्य ट्विटर यूजर ने जवाब देते हुए लिखा है- “हमारा सवाल- तुम देख पाओगी?”

ज्ञात हो कि शरीर पर कोई कपड़ा ना पहनने के कारण शिव भक्त नागा साधु दिगंबर भी कहलाते हैं, यानी जो आकाश को ही अपना वस्त्र मानते हैं। शिव भक्त नागा कपड़ों के नाम पर पूरे शरीर पर धूनी की राख लपेटे ये साधु कुम्भ मेले में सिर्फ शाही स्नान के समय ही खुलकर श्रद्धालुओं के सामने आते हैं। आमतौर पर मीडिया से ये दूरी ही बनाए रहते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता रीना मिमरोत सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता के लिए पहले भी फर्जी खबरों के द्वारा घटिया और बेहद मूर्खतापूर्ण हरकतें करते हुए देखी गई है। सितंबर 2019 में भी रीना मिमरोत यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जैसे दिखने वाले किसी आदमी की महिलाओं के साथ तस्वीरें शेयर करते हुए देखी गई थी। रीना का कहना था कि यह अमेरिका का राष्ट्रपति है। साथ ही रीना ने अपने ट्वीट में लिखा था- “नागपुरिया संघियों की शाखा से ज्ञान प्राप्त कर के, अपने संस्कारों को सार्वजनिक करते अंधभक्तों के ज्येष्ठ पिताजी, जिनके प्रचार के इनके पापा लगे हैं।”

तुम्हारी शेरनियाँ ₹500 लेकर रोड पर बैठती हैं, शेर नपुंसक हैं क्या?: भाजपा MLA ने वारिस पठान को चेताया

सीएए के ख़िलाफ गुलबर्ग में आयोजित रैली में AIMIM के नेता वारिश पठान द्वारा हिंदुओं के खिलाफ उगला गया ज़हर अब उनके गले की फाँस बनता जा रहा है। पहले औवेसी ने पठान के मीडिया में बयान देने से रोक लगाई। फिर हिंदुओं के साथ मुस्लिम संगठनों ने भी पठान के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन करना शरू कर दिया। यहाँ तक कि एक मुस्लिम संगठन ने तो पठान का सिर कलम करने पर 11 लाख रुपए का इनाम भी रख दिया। अब पठान को
महाराष्ट्र के बीजेपी विधान पार्षद गिरिश व्यास ने गुजरात की याद दिला दी है, साथ ही उसे कभी न भूलने की सलाह भी दी है।

गिरीश व्यास ने शुक्रवार को एक पत्रकार से बात करते हुए कहा, “इस देश के युवा देभभक्त हैं और बीजेपी का प्रत्येक युवा वारिस पठान को उसी भाषा में जवाब दे सकता है जैसा कि उन्होंने इस्तेमाल किया है। हम बहुत सहिष्णु और धैर्यवान हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम इससे निपट नहीं सकते हैं। क्या गुजरात के कालुपुर में जो हुआ था, वह याद है। अगर उसे याद रखें। तो मेरा विश्वास है कि मुस्लिम आज उठने की कोशिश का साहस नहीं करेंगे।”

नागपुर के रहने वाले व्यास ने पठान को शहर आने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि हम आपके लिए सही व्यवस्था करेंगे कि क्या आप यह समझते हैं कि हमने चूड़ियाँ पहन रखी हैं? हम आप से निपटने के लिए तैयार हैं, लेकिन हम यह चाहते हैं कि समाज में आपसी भाईचारा बना रहे। व्यास ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पठान के खिलाफ राजद्रोह की कार्रवाई करनी चाहिए और भारत सरकार को उसे पाकिस्तान भेज देना चाहिए।

वहीं तेलंगाना के गोशामहल से बीजेपी विधायक टाइगर राजा सिंह ने वारिस पठान के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वारिस पठान कहता है कि 15 करोड़ मुस्लिम 100 करोड़ पर भारी पड़ेंगे। उन्होंने कहा-

“ये किस भाषा का उपयोग कर रहे हो। क्या तुम लोग हम पर भारी पड़ोगे? उन्होंने कहा है कि वो वारिस है या लावारिस है। कहता है कि इनकी शेरनियाँ सड़कों पर बैठी है तो हमें पसीने आ गए। इनकी शेरनियाँ 500 रुपये देकर रोड पर बैठती है। इनकी शेरनियाँ अगर रोड पर आ गईं तो शेर क्या जंगल में झक मारने गए हैं और क्या इनके शेर नपुंसक हैं। अगर हमारे हिंदुस्तानी शेर घर से निकल गए तो किन-किन शेरनियों का शिकार करेंगे। खुला चैलेंज देता हूँ कि आ जा।”

बीते दिनों सीएए के ख़िलाफ गुलबर्ग में रैली आयोजित करते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पूर्व MLA वारिस पठान के भाषण का एक वीडियो सामना आया था। भाषण में वारिस पठान ने सीएए के ख़िलाफ़ बोलते हुए कहा था, “उनकी संख्या अभी 15 करोड़ है, लेकिन ये 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है। अगर ये 15 करोड़ साथ में आ गए, तो सोच लो उन 100 करोड़ हिंदुओं का क्या होगा?”

आपको बता दें कि वारिस पठान वही नेता हैं, जिनकी 2016 में महाराष्ट्र विधानसभा से सदस्यता इसलिए खत्म कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने सदन में भारत माता की जय बोलने से इनकार कर दिया था।

दूरदर्शी PM ने 1500 फालतू क़ानूनों को उखाड़ फेंका: सुप्रीम कोर्ट के जज ने मोदी की तारीफ़ों के बाँधे पुल

सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा ने आज प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करते हुए उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ‘विजनरी लीडर’ कहा, “जिसकी दृष्टि वैश्विक है, और कार्यान्वयन – स्थानीय जरूरतों के अनुसार।”

तकरीबन 1500 गैर जरूरी कानूनों को रूल बुक से निकाल फेंकने के लिए जज मिश्रा ने पीएम मोदी और केंद्रीय विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद की तारीफ़ करते हुए कहा कि भारत आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक समुदाय का जिम्मेदार और सबसे मित्रतापूर्ण संबंध रखने वाला देश है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अन्तर्राष्ट्रीय न्यायिक कॉन्फ्रेन्स-2020 पर ‘वोट ऑफ थैंक्स’ भाषण के दौरान ‘न्यायपालिका और बदलता विश्व’ पर बोलते हुए जज मिश्रा ने कहा, “राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिन चुनौतियों का न्यायपालिका आज सामना कर रही है, वे समान हैं, और इस लगातार बदलते विश्व में न्यायपालिका का एक अति महत्वपूर्ण रोल है।”

जस्टिस मिश्रा जो सुप्रीम कोर्ट में जजों की वरिष्ठता में तीसरे नंबर पर आते हैं, ने मोदी द्वारा कॉन्फ्रेन्स के उद्घाटन करने पर उनका शुक्रिया अदा करते हुए, उन्हें “विजनरी लीडर” बताया।

न्यायधीश मिश्रा ने भारत के लोकतंत्र की तरीफ करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दुनिया यह देख आश्चर्य मानती है कि लोकतंत्र किस तरह इतने सहजता पूर्वक काम कर सकता है।

मीडिया ख़बरों के अनुसार, न्यायपालिका के आधुनिकीकरण की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हम अब इक्कीसवीं सदी में हैं और हमें न सिर्फ आज के लिए, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी न्यायपलिका के लिए अत्याधुनिक ढाँचे की आवश्यकता है।

न्यायिक प्रणाली को लोकतंत्र की रीढ़ कहते हुए जस्टिस मिश्रा ने उसे सुदृढ़ करने को आज के समय की माँग करार दिया, उन्होंने कहा, “न्यायपालिका लोकतंत्र की रीढ़ है, तो वहीं विधायिका उसका हृदय और कार्यपालिका उसका दिमाग। राज्य के इन तीनों अंगों को अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए आपस में सामंजस्य बनाये रखने से ही लोकतंत्र सुचारू रूप में काम कर सकता है।”

भूमंडलीकरण पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था में कुछ लोगों के हाशिये पर चले जाने की स्थिति चिंताजनक है। इस कॉन्फ्रेन्स में 20 से ज्यादा देशों के जज शामिल हुए हैं।

तुमने J&K पर कब्जा किया है, आज़ादी दो: TISS में कॉलेज कार्यक्रम के नाम पर लगे भड़काऊ पोस्टर

स्कूल-कॉलेजों में तरह-तरह के फेस्ट्स, कार्यक्रम और अभियान चलते रहते हैं, आयोजित किए जाते रहते हैं। लेकिन, मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद से कई कॉलेजों में आयोजित होते रहे इन्हीं कार्यक्रमों को वामपंथी प्रोपेगंडा फैलाने का मंच बना कर रख दिया है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी पढ़ाई करने वाले उन छात्रों को होती है, जो राजनीति से दूर रहना चाहते हैं। ‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज’ (TISS) में कुछ इस तरह के ही नज़ारे देखने को मिल रहे हैं, जहाँ छात्रों व प्रोफेसरों का एक गुट मिल कर इसे दूसरा जेएनयू बनाने में जी-जान से मशगूल है।

दरअसल, टीआईएसएस में सोशल वर्क स्कूल का ‘समीक्षा’ कार्यक्रम चल रहा है। इस कार्यक्रम के तहत सामाजिक कार्यक्रम और सीएए व एनआरसी का विरोध ज्यादा किया जा रहा है। सबसे बड़ी ग़लती तो ये कि एक कॉलेज कार्यक्रम के बहाने देश के एक क़ानून का विरोध किया जा रहा है और दूसरी बड़ी ग़लती ये कि ऐसा आपत्तिजनक नारों और भड़काऊ पोस्टरों का इस्तेमाल करते हुए हो रहा है।

TISS कैम्पस में भरे पड़े हैं ‘आज़ादी’ के पोस्टर

आइए आपको बताते हैं कि टीआईएसएस में कॉलेज कार्यक्रम के नाम पर लगे पोस्टरों में क्या-क्या है:

  • मुझे प्यार करती परजात लड़की, हमारे यहाँ तो मुर्दे भी एक जगह नहीं जलाए जाते; परजात- दूसरी जाति की
  • जम्मू कश्मीर में तालाबंदी: हमें चाहिए आज़ादी
  • सीएए, एनआरसी और एनपीआर को वापस लो। ट्रांस बिल और डेटा प्राइवेसी बिल वापस लो।
  • कश्मीर को आज़ादी दो। फ्री कश्मीर।
  • नागरिकता वो अधिकार है, जिसके तहत आपको सारे अधिकार मिलते हैं। सीएए और एनआरसी वापस लो।
  • जम्मू कश्मीर पर तुमने कब्जा कर रखा है। 200 से भी ज्यादा दिनों की तालाबंदी ख़त्म करो। आज़ादी दो।
अंग्रेजी में ‘अच्छी-अच्छी बातें ‘लिख कर उसे सीएए और एनआरसी से जोड़ा जा रहा है

कॉलेज में ‘आज़ादी’ से जुड़े कई पोस्टर चस्पे मिल जाएँगे। जम्मू कश्मीर की ‘आज़ादी’ से इनका क्या तात्पर्य है और जम्मू कश्मीर पर किसने कब्ज़ा कर रखा है, इस सम्बन्ध में इनके सवालों के जवाब हमें पता ही है। इसीलिए पता है क्योंकि इससे पहले जेएनयू से लेकर शाहीन बाग़ तक ऐसे ट्रेंड्स देखने की मिले हैं।

कौन किसकी नागरिकता छीन रहा है?: TISS में वामपंथियों का प्रपंच

इससे पहले मंगलवार (फरवरी 18, 2020) को टीआईएसएस छात्रों ने बिना पुलिस की अनुमति के सीएए और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन किया था और रैली निकाली थी। इसके बाद कई उपद्रवियों को हिरासत में भी लिया गया था। प्रदर्शनकारी दावा कर रहे थे कि उन्हें सीधा डीजीपी की अनुमति हासिल है। वामपंथी छात्र संगठनों ने इस मार्च का आयोजन किया था।

जम्मू कश्मीर पर ‘कब्जा’ किया गया है: TISS में भड़काऊ पोस्टर

इससे पहले टीआईएसएस छात्रों के एक व्हाट्सप्प ग्रुप में एक व्यक्ति ने मैसेज कर के लिखा था कि पुलवामा में वीरगति को प्राप्त जवानों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर हज़ारों निर्दोष नागरिकों की हत्या की है और कइयों का बलात्कार किया है। उक्त व्यक्ति ने एक तरह से जवानों के बलिदान की खिल्ली उड़ाते हुए हँसने की बात कही थी। एक अन्य व्यक्ति ने सेना को हिंसक और शक्तिशाली संगठन बताया। इसके अलावा ‘एबीवीपी की कब्र खुदेगी’ जैसे भड़काऊ नारे भी लगाए थे।हॉस्टल के दरवाजों पर ‘MUCK FODI’ लिखा गया था। इसका इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी की ओर था।

सेना को रेपिस्ट बताना, शरजील के लिए नारेबाजी, बलात्कारियों का समर्थन: TISS में फैलता वामपंथी ज़हर

उद्धव ने पलटा पिछली फणनवीस सरकार का फैसला, राज्यपाल ने किया हस्ताक्षर से इनकार

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार द्वारा पेश किए गए एक अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उद्धव सरकार और राज्यपाल के बीच मतभेद की खबरें आने लगी। बता दें कि महाविकास अघाड़ी सरकार ने राज्यपाल से सीधे जनता से सरपंच चुनने के पूर्ववर्ती सरकार के निर्णय को रद्द कर ग्राम पंचायत सदस्यों में से सरपंच चुनने संबंधी अध्यादेश जारी करने की सिफारिश की थी।

महाराष्ट्र सरकार की इस सिफारिश को राज्यपाल ने खारिज कर दिया और कहा कि 24 फरवरी से शुरू होने वाले विधानमंडल के सत्र में तत्संबंधी कानून बनाया जाए। राज्यपाल द्वारा अध्यादेश पर हस्ताक्षर न करने की वजह से अब विधानमंडल में कानून बनने तक सीधे सरपंच चुनने का पहले का निर्णय बरकरार रहेगा।

जब उद्धव ठाकरे से इस बाबत सवाल किया गया तो उन्होंने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मतभेद होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि राज्य विधानमंडल का सत्र होने वाला है और राज्यपाल ने सुझाव दिया है कि सदस्यों में से सरपंच चयन का निर्णय सदन में कराया जाना चाहिए। वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने अब अध्यादेश जारी करने के बजाय कैबिनेट के फैसले पर नए सिरे से विधेयक बनाने का फैसला किया है।

बता दें कि राज्य मंत्रिमंडल ने 29 जनवरी को फडणवीस सरकार के सीधे सरपंच चुने जाने के फैसले को पलट दिया और अध्यादेश को राज्यपाल के सामने हस्ताक्षर के लिए पेश किया। लेकिन राज्यपाल ने हस्ताक्षर से मना कर दिया। इसके अलावा ठाकरे सरकार ने नगरपालिका परिषदों जैसे स्थानीय स्व-सरकारी निकायों में डायरेक्ट इलेक्शन को लेकर किया गया भाजपा सरकार का एक और निर्णय भी पलट दिया।

गौरतलब है कि हाल ही में शिवसेना के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दि दिया था। जानकारी के मुताबिक दोनों मंत्रियों ने लाभ का पद मामले में विपक्ष के आरोपों से बचने के लिए इस्तीफा दिया था। ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि विपक्ष बजट सत्र के दौरान विधानसभा में इस मसले को प्रमुखता से उठा सकती है। वह दोनों की नियुक्तियों को मुद्दा बना सकती है। बताया जा रहा है कि आपसी मतभेद में घिरी सरकार को और ज्यादा संकट में डालने से बचाने के लिए दोनों नेताओं ने अपना इस्तीफा उद्धव को भेज दिया।

ये 7 डिमांड मानो, फिर हम सड़क खाली कर देंगे: शाहीन बाग वालों की कुछ माँग बहुत ही हास्यास्पद

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ शाहीन बाग में पिछले दो महीनों से प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शन के कारण बंद रास्ते को खुलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकार साधना रामचंद्रन शनिवार (फरवरी 22, 2020) को चौथे दिन शाहीन बाग में प्रदर्शकारियों से बातचीत करने पहुँचीं। हालाँकि ये बातचीत बेनतीजा रही।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके सामने 7 डिमांडें रखीं। जो इस प्रकार हैं-

1.प्रदर्शनकारी सुरक्षा चाहते हैं। वे चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट भी इस पर एक आदेश जारी करे। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट हमारी सुरक्षा की पूरी तरह से जिम्मेदारी ले और लिखित में आश्वासन दे, तभी हम सड़क खाली करने के बारे में सोच सकते हैं।” अगर आधी सड़क खुलती है तो सुरक्षा और अलुमिनियम शीट चाहिए।

2. जामिया के छात्रों के खिलाफ सभी मुकदमे वापस लिए जाएँ।

3. NPR दिल्ली में लागू न हो।

4. सभी भड़काऊ भाषणों की जाँच हो।

5. शाहीन बाग में ही एक वैकल्पिक विरोध स्थल बनाए जाए।

6. शाहीन बाग विरोध को लेकर दर्ज किए गए युवाओं के खिलाफ सभी मामलों को रद्द करें।

7. पूरे भारत में सीएए के विरोध के कारण हुए मौतों का संज्ञान लिया जाए।

वार्ताकार साधना रामचंद्रन सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शाहीन बाग पहुँची थीं और उन्होंने करीब डेढ़ घंटे प्रदर्शन स्थल पर बिताए और प्रदर्शकारियों से बातचीत की। कोर्ट ने रास्ता खुलवाने के लिए प्रदर्शकारियों से बातचीत के लिए वकील संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को वार्ताकार बनाया था। 

इससे पहले शुक्रवार (फरवरी 21, 2020) को हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए कहा था कि हम सब देख रहे हैं और आपकी बात कोर्ट में उठाएँगे। वार्ताकारों ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि आप सड़क खोल दें फिर देखिए कितने रास्ते खुल जाएँगे। इस बीच, सीएए को लेकर हो रहे प्रदर्शन की वजह से बंद नोएडा-फरीदाबाद सड़क को शुक्रवार को कुछ देर के लिए खोला गया था। हालाँकि कुछ देर बाद इसे फिर बंद कर दिया गया।

गौरतलब है कि CAA के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण देश में शरण लेने आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के उन लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था। ऐसे सभी लोग भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस कानून के विरोधियों का कहना है कि इसमें सिर्फ गैर मुस्लिमों को ही नागरिकता देने की बात कही गई है, इसलिए यह कानून धार्मिक भेदभाव वाला है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

हैदराबाद विश्वविद्यालय में ‘शाहीन बाग नाईट’ का आयोजन करने वाले तीन छात्रों पर 15 हज़ार का जुर्माना

शाहीनबाग के CAA विरोधी प्रदर्शन में फूट, अलग-अलग बने गुटों में दरार लेकिन अड़ियल रवैया बरक़रार

शाहीन बाग की ‘शेरनी’ योगी प्रशासन का डंडा पड़ते ही बनी ‘बिल्ली’: गिड़गिड़ाकर माँगी माफी, Video वायरल

यही तो है असली आज़ादी, अच्छे दिन: सालों बाद जगमगाया श्रीनगर का शंकराचार्य शिव मंदिर, बढ़ी रौनक

जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में डल झील के किनारे स्थित शंकराचार्य शिव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर वर्षों बाद रौनक देखने को मिली। जहाँ पहले श्रद्धालु आतंकियों के भय से ठीक से जा भी नहीं पाते थे, वहाँ भारी संख्या में भक्तों ने पहुँच कर महादेव का दर्शन किया। शुक्रवार (फरवरी 21) की शाम के बाद वहाँ ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जैसा पिछले कुछ दशकों में शायद ही देखने को मिला हो। पूरा मंदिर प्रकाश से जगमग था और फूलों से सजाया गया था। पर्व के अवसर पर महा अभिषेक सहित कई अन्य प्रकार के पूजा-पाठ का आयोजन किया गया।

जम्मू कश्मीर दौरे पर पहुँचे पर्यटकों ने भी इस मौके पर भगवान शिव का दर्शन किया। आसपास के इलाक़ों में तैनात सशस्त्र बलों के जवानों ने भी देवाधिदेव भगवान महादेव के मंदिर में जाकर उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर के मुख्य पुजारी राकेश भान शास्त्री ने कहा; शिवरात्रि के अवसर पर सुबह की बेला से ही पूजा-पाठ शुरू हो जाता है। हमने एक ख़ास पूजा का भी आयोजन किया था, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं से लेकर सुरक्षा बलों के जवानों तक ने हिस्सा लिया। महाशिवरात्रि के इस त्यौहार के अवसर पर हमने जम्मू कश्मीर में शांति बहाली हेतु प्रार्थना की।”

लोगों ने लम्बी लाइन में लग कर भगवान शिव को पुष्प, दूध और जल अर्पण किया। इस दौरान भक्तों के कश्मीरी पंडितों के लिए भी प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जो भी लोग कश्मीर दौरे पर आते हैं, उन्हें शंकराचार्य शिव मंदिर में दर्शन ज़रूर करना चाहिए। महाशिवरात्रि को जम्मू कश्मीर में ‘हेराथ’ कहते हैं। मंदिर व आसपास के इलाकों में ‘बम बम भोले’ की गूँज सुनाई दे रही थी। बिहार और उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि यहाँ आकर एक तरह से उनका पुराना सपना पूरा हो गया है क्योंकि पिछले कुछ सालों में ये संभव नहीं था।

पूर्व विधायक कपिल मिश्रा ने कहा कि दशकों बाद शंकरायचर्य शिव मंदिर की रौनक यह बताती है कि यही असली आज़ादी है, हमने असली आज़ादी पा ली है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने लिखा कि हम तो ये भूल ही गए थे कि दक्षिण के संत शंकरायाचार्य का एक मंदिर सुदूर उत्तर में स्थित श्रीनगर में भी है। जबलपुर के विधायक इन्दु तिवारी ने मंदिर का जगमगाता फोटो शेयर करते हुए लिखा कि हमारे लिए तो यही अच्छे दिन हैं। ‘न्यूज़ नेशन’ के दीपक चौरसिया ने भी इस बात कि पुष्टि की कि कई सालों बाद ये मंदिर जगमगाया है।

कश्मीरी पंडितों के लिए महाशिवरात्रि का ख़ास महत्व है और ये त्यौहार 3 दिनों का होता है। पहले दो दिन विभिन्न प्रकार के पूजा-पाठ होते हैं और तीसरे दिन सब साथ मिल कर इसे मनाते हैं। ये भी जानने लायक बात है कि कश्मीरी पंडित समुदाय विशेष को भी इस त्यौहार का हिस्सा बनाते रहे हैं और उन्हें बुला कर खिलाते रहे हैं।

मंदिर में मांस, शिवरात्रि पर इस्लामपुर में तनाव: विरोध करने वालों हिंदुओं पर ही पश्चिम बंगाल पुलिस का लाठीचार्ज

पश्चिम बंगाल में आए दिन हिन्दुओं की आस्था को आहत करने की ख़बरें सामने आती रही हैं। कभी मंदिर तोड़ने, मंदिर में जानवर का मांस फेंकने, तो कभी जय श्री राम के नारे लगाने वालों को गिरफ्तार किए जाने की खबरें बंगाल में आम हो चुकी हैं। बृहस्पतिवार (फरवरी 20, 2020) को ऐसा ही एक नया मामला प्रकाश में आया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल में उत्तर दिनाजपुर के पांजीपाड़ा में किसी ने एक मंदिर में मांस के टुकड़े फेंक दिए। यह घटना शिवरात्रि से ठीक एक दिन पहले की है। सुबह जब लोग मंदिर गए तो उन्हें मंदिर में मांस के टुकड़े मिले। लोगों को इसके बीफ़ होने का भी शक हुआ। इसके बाद स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश देखा गया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन भी किया और नेशनल हाइवे 31 पर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि मंदिर में मांस फेंकने वालों की पुलिस तलाश कर उन्हें गिरफ्तार करे। लेकिन अपराधियों की पहचान करने के बजाए पुलिस ने लोगों को वहाँ से हटाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी अपनी माँग पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया और तैयार गैस का भी इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस ने उन पर फायरिंग भी की। हालाँकि, पुलिस ने फायरिंग की बात से इंकार किया है।

बताया जा रहा है कि मंदिर में मांस फेंके जाने के विरोध में शांतिपूर्वक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने वाले 200 लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज करने के बाद उन्हें जबरन गिरफ्तार भी किया। मांस का टुकड़ा फेंकने वालों की अभी तक शिनाख्त नहीं हो सकी है और ना ही इस मामले में किसी की गिरफ्तारी हुई है, जिसे लेकर इलाके में रोष बढ़ रहा है।

इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोला है। मंदिर परिसर में मांस के टुकड़े फेंके जाने को लेकर उन्होंने ममता बनर्जी को घेरा है। विरोध कर रही महिलाओं का वीडियो शेयर करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने पूछा है कि आखिर ममता बनर्जी बताएँ कि बंगाल में आखिर क्या हो रहा है?

विजयवर्गीय ने ट्विटर पर लिखा है, “पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कितना भी सेक्युलर बनने का ढोंग करे, पर असलियत में हिंदू धर्मस्थलों की हालत बहुत ख़राब है। इस्लामपुर के पंजीपाड़ा इलाके में एक मंदिर में गोमांस फ़ेंकने वालों पर जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो महिलाओं को लाठी-डंडे उठाना पड़े।”