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खालिस्तानी सांसद अमृतपाल बना रहा नया राजनीतिक दल, इंदिरा गाँधी के हत्यारे का MP बेटा भी साथ: शिरोमणि अकाली दल (आनंदपुर साहिब) होगा नाम, 14 जनवरी को ऐलान

खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह पंजाब के लिए नई राजनीतिक पार्टी बनाने जा रहा है। इंदिरा गाँधी के हत्यारे का सांसद बेटा सरबजीत सिंह खालसा भी इस काम में उसके साथ है। अमृतपाल सिंह अभी असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। वह जब बाहर आएगा तो वह इसका मुखिया बनेगा। इस पार्टी की अधिकारिक शुरुआत लोहड़ी के अगले दिन (14 जनवरी, 2025) को श्री मुक्तसर साहिब माघी मेला में होगी। पार्टी का नाम शिरोमणि अकाली दल (आनंदपुर साहिब) रखा जाएगा।

वारिस पंजाब दे मुखिया अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने बताया, “हमने माघी मेले पर श्री मुक्तसर साहिब में एक कॉन्फ्रेंस बुलाई है जिसमें एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति को नई राजनीतिक पार्टी का संविधान तैयार करने, उसका नाम तय करने, सलाहकार समिति बनाने, हर जिले समितियाँ बनाने और पार्टी के गठन के लिए आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने का काम सौंपा जाएगा।” तरसेम सिंह ने बताया कि अमृतपाल सिंह के बाहर आने तक वह खुद ही इस पार्टी के मुखिया होंगे।

इंदिरा गांधी के हत्यारे बेअंत सिंह के बेटे और फरीदकोट के सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने कहा कि शुरुआत में वे पंजाब के लोगों से जुड़ने के लिए 5 या 11 सदस्यों वाली समिति बनाएँगे। उन्होंने कहा कि पार्टी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के चुनाव भी लड़ेगी। खालसा ने कहा है कि अच्छे चरित्र वाले और पंजाब को बचाने की मंशा रखने वाले लोग उनकी पार्टी में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब के लोगों को एक राजनीतिक विकल्प उपलब्ध करवाएगी।

अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि पार्टी का मुख्य फोकस किसानों के मुद्दे, राज्य में बढ़ता धर्मांतरण और ड्रग्स की समस्या होगी। गौरलतब है कि अमृतपाल सिंह 2024 में खडूर साहिब जबकि सरबजीत सिंह खालसा ने फरीदकोट से निर्दलीय चुनाव जीता था। अमृतपाल सिंह ने यह चुनाव जेल से ही जीत लिया था। अमृतपाल सिंह का नया राजनीतिक दल राज्य में पंथिक राजनीति में असर डालेगा। अभी तक शिरोमणि अकाली दल ही मूल रूप से पंथिक मामलों की अगुवा पार्टी रही है।

बीते कुछ वर्षों में शिरोमणि अकाली दल की लोकप्रियता को गहरा झटका लगा है। उसकी पंजाब विधानसभा और लोकसभा, दोनों चुनावों में भी बुरी हालत हुई है। इसके अलावा SAD में नेतृत्व को भी लेकर संकट आया है। हाल ही में उसके मुखिया रहे सुखबीर सिंह बादल को पद छोड़ना पड़ा था। उन्हें अकाल तख़्त ने तनखैया घोषित कर दिया था। इसके बाद उन पर गुरूद्वारे में सेवा के दौरान जानलेवा हमला भी हुआ था। पंजाब में बीते कुछ सालों में कॉन्ग्रेस और SAD द्वारा खाली छोड़ी गई जगह को AAP ने भरा है। लेकिन लोग उससे भी परेशान हैं।

अमृतपाल सिंह की पार्टी का पहला टेस्ट पंजाब के 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव होंगे। हालाँकि, यह पहला मौक़ा नहीं है जब पंथिक राजनीति में SAD को चुनौती को मिली हो। इससे पहले पूर्व IPS और सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने भी इसी नाम से पार्टी बनाई थी। हालाँकि, यह पार्टी कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई।

फरियादी महिला को बाथरूम में ले गया DSP, स्तन दबाकर करवाया मुखमैथुन: वीडियो वायरल होने के बाद पहले सस्पेंड, फिर गिरफ्तार

कर्नाटक के तुमकुरु जिले में एक फरियादी महिला का डिप्टी एसपी द्वारा यौन शोषण किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपित DSP का नाम बी रामचंद्रप्पा है जिसे शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को सस्पेंड करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। DSP ने यह हरकत अपने ऑफिस के बाथरूम में की। पुलिस अधिकारी की इस करतूत का वीडियो भी गुरुवार (2 जनवरी 2025) से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला तुमकुरु जिले के मधुगिरी सब डिवीजन का है। शुक्रवार को यहाँ 35 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियो में एक पुलिस अधिकारी किसी लड़की को बाथरूम में ले गया। यहाँ उसने पीड़िता के स्तनों को दबाकर मुख मैथुन करवाया। बाहर से छिप कर इस वीडियो को बनाया गया। पुलिस अधिकारी को शक हुआ तो उसने मुड़ कर पीछे देखा। तब तक वीडियो बनाने वाला भाग चुका था। कुछ ही देर में यह वीडियो वायरल हो गई।

वायरल वीडियो की जाँच के दौरान पुलिसकर्मी की पहचान 58 वर्षीय डिप्टी एसपी बी रामचंद्रप्पा के तौर पर हुई। आरोपित DSP उस मधुगिरी क्षेत्र में तैनात हैं जो कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर की विधानसभा क्षेत्र है। आनन-फानन में मामले की जाँच करवाई गई और डिप्टी एसपी को सस्पेंड कर दिया गया। बी रामचन्द्रप्पा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 68, 75 और 79 के तहत FIR दर्ज कर ली गई और शनिवार (4 दिसंबर) को उन्हें जेल भेज दिया गया।

आरोपित DSP के खिलाफ विभागीय जाँच भी खोल दी गई है। तुमकुरु जिले के पुलिस अधीक्षक आशोक केवी के मुताबिक जाँच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मिली जानकारी के मुताबिक 30 वर्षीया पीड़िता घटना के दिन जमीनी विवाद की शिकायत करने DSP रामचन्द्रप्पा के पास गई थी। तब DSP ने मदद के बदले उस से आपत्तिजनक डिमांड की थी। फिलहाल मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

खोपड़ी की हड्डी तोड़ी, सिर से खून निकाला: बांग्लादेश में हिंदू पत्रकार के परिवार पर धारदार हथियार से हमला, माता-पिता-पत्नी किसी को नहीं छोड़ा

बांग्लादेश के फरीदपुर में अज्ञात हमलावर द्वारा एक हिन्दू परिवार को निशाना बनाया गया है। पीड़ितों परिवार पत्रकार का है। घायलों में महिलाएँ भी शामिल हैं। हमले में धारदार हथियारों का प्रयोग किया गया है। घटना शुक्रवार (3 जनवरी 2025) की है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना फरीदपुर के मधुखली गाँव की है। यहाँ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामलेंदु बोस अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनका बेटा सौगात बोस दैनिक अजमेर पत्रिका में पत्रकार है। शुक्रवार की रात लगभग 8:30 पर श्यामलेंदु बोस का पूरा परिवार टीवी देख रहा था। तब उन्होंने अपने घर के अंदर किसी को देखा। खुद को देखे जाने पर घुसपैठी भाग कर मकान की दूसरी मंजिल पर चला गया।

जब बोस परिवार ने घुसपैठी का पीछा किया तो उसने धारदार हथियार निकाल लिया। हमलावर ने श्यामलेंदु सहित उनकी पत्नी पर भी हमला कर दिया। दोनों को मारकर घायल कर दिया गया। श्यामलेंदु और उनकी पत्नी की देखभाल करने वाली 15 वर्षीया प्रीति को भी हमलावर ने नहीं छोड़ा। श्यामलेंदु के घर से मची चीख-पुकार सुन कर पड़ोसी जमा हुए। मौक़ा पाकर हमलावर हथियार लहराते हुए भाग निकला।

सभी घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया है। पत्रकार सौगात बोस समय घर पर नहीं थे। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता के साथ प्रीति भी गंभीर रूप से घायल है जिसका इलाज चल रहा है। बकौल सौगात बोस उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। सौगात को अभी तक यह भी नहीं पता कि हमलावर अकेले आया था या उसके साथ अन्य कुछ लोग भी थे। पीड़ित दम्पति के बेटे ने इस घटना को चोरी या डकैती के नहीं माना है। उनका कहना है कि हमले की वजह कुछ और ही है जिसकी जाँच पुलिस को करनी चाहिए।

डॉक्टरों के मुताबिक श्यामलेन्दु बोस के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। उनका काफी खून बह गया है और खोपड़ी की हड्डी टूट चुकी है। बेहतर इलाज के लिए श्यामलेंदु को ढाका ले जाने की सलाह दी गई है। बाकी अन्य दोनों घायलों का स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने शुरुआती तौर पर इस घटना को डकैती का प्रयास माना है। उनकी तरफ से हमलावर के नाबालिग किशोर होने की बात कही जा रही है। हालाँकि आगे की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई जारी है।

₹4 करोड़ की गाड़ी, ₹25 लाख का किराया, 5 स्टार होटल वाली सुख सुविधा: अनशन पर बैठे प्रशांत किशोर की वैनिटी वैन देखकर सबकी आँख फटी, सवाल उठने पर भड़के

जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर परीक्षा को मुद्दा बनकार पटना के गाँधी मैदान में आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके आमरण स्थल पर ही ही करोड़ों रुपए की लग्जरी वैनिटी वैन खड़ी है, जिसमें वे आराम करने और बाथरूम आदि के जाते हैं। बॉलीवुड स्टार्स के तर्ज वाली इस वैन को लेकर सियासी हलचल मच गई है। उन्होंने सुविधाभोगी और छात्रों को आंदोलन को दिग्भ्रमित करने वाला बताया जा रहा है।

बिहार की प्रमुख विपक्षी दल राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि बीपीएससी परीक्षार्थियों के आंदोलन को प्रशांत किशोर दूसरी दिशा में भटका रहे हैं। अहमद ने आरोप लगाया कि वे लग्जरी सुविधाओं वाली वैनिटी वैन का उपयोग कर रहे हैं। इस वैनिटी वैन का रोजाना खर्च 25 लाख रुपए है। अहमद ने कहा कि प्रशांत किशोर के जनआंदोलन करने वाले नहीं, बल्कि सुविधाभोगी हैं।

सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें प्रशांत किशोर वैनिटी वैन से बाहर निकल कर अनशन स्थल पर जा रहे हैं। वहीं, सैकड़ों लोग उनकी लग्जरी वैनिटी वैन को निहार रहे हैं। वैनिटी वैन के पास कोई जा ना सके, इसके लिए सुरक्षाकर्मी भी वीडियो में तैनात दिख रहे हैं। कई लोग वैन की तस्वीरें खींचते या वीडियो बनाते हुए नजर आए।

भाजपा और राजद का दावा है कि इस वैनिटी वैन की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए है और प्रशांत किशोर इसका प्रतिदिन का किराया 25 लाख रुपए देते हैं। इसमें 5 स्टार होटल वाली सारी सुविधाएँ मौजूद हैं। शानदार बेड से लेकर टॉयलेट, वाई-फाई, टीवी आदि सब कुछ है। इसमें सारी सुख-सुविधाएँ हैं। प्रशांत किशोर जब से गाँधी मैदान में अनशन पर बैठे हैं, तब से यह वैनिटी वैन वहाँ खड़ी है।

वैनिटी वैन के सवाल पर प्रशांत किशोर भड़क गए। उन्होंने कहा कि गाँधी मैदान में वैनिटी वैन खड़ी जरूर है, लेकिन वे अपना अनशन खुले आसमान के नीचे ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “किस वैनिटी वैन की बात कर रहे हो? यहाँ एक बस खड़ी है, जिसका इस्तेमाल मैं शौच करने के लिए करता हूँ।” उन्होंने कहा, “जो लोग कह रहे हैं कि इस बस का किराया 25 लाख रुपए है, उन्हें मैं ये बस भेजवा दे रहा हूँ और वे रोज मुझे 25 लाख दे दें।”

राजद प्रवक्ता ने यह भी आऱोप लगाया कि प्रशांत किशोर की ऐसी सुख-सुविधा वाली राजनीति की पोल खुल गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के सत्याग्रह आंदोलन को प्रशांत किशोर ने गर्दनीबाग से गाँधी मैदान लाकर पहले छात्रों को पिटवाया और अब वे लग्जरी सुविधा में रहते हुए आंदोलन में छात्रों के साथ होने का दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बताया।

बता दें कि बिहार में बीपीएससी सेवा की 70वीं पीटी परीक्षा को फिर से आयोजित कराने की माँग करते हुए छात्रों ने आंदोलन किया था। इसके बाद 29 दिसंबर 2024 को पुलिस ने बीपीएसपी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज किया था। लाठी चार्ज से से पहले प्रशांत किशोर वहाँ से निकल गए थे। छात्रों के एक गुट ने प्रशांत किशोर पर आंदोलन को हाईजैक करने का आरोप लगाया था। हालाँकि प्रशांत ने सफाई दी थी।

अब उनकी जन सुराज पार्टी ने वैनिटी वैन के विवाद पर भी सफाई दी है। पार्टी के प्रवक्ता विवेक कुमार का कहना है कि अनशन करने वाले लोगों के वॉशरूम के उद्देश्य से वैनिटी वैन रखा गया है। विवेक कुमार ने कहा कि मुद्दा वैनिटी वैन का नहीं, पेपर लीक का है। छात्रों को सरकार लाठी से पिटवा रही और विपक्ष के राजकुमार घर पर आराम फरमा रहे हैं।

विवेक कुमार ने कहा, “हम विपक्षी नेताओं खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और भाजपा नेताओं को चुनौती देते हैं कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे इस कड़ाके की ठंड में एक रात गाँधी मैदान में महात्मा गाँधी की मूर्ति के नीचे बिताकर दिखाएँ। पीके आठों पहर मीडिया के कैमरे के सामने बैठे हैं। विपक्ष को छात्रों के मुद्दों से कोई मतलब नहीं है, इसलिए अनावश्यक बातें हो रही हैं।”

UPA सरकार में ‘भगवा आतंकी’ बता पकड़े गए 12 लोग निर्दोष साबित, नांदेड़ की अदालत ने दिया फैसला: 3 की हो चुकी मौत, 19 साल तक लड़ी न्याय की लड़ाई

कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान लाई गई हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी एक बार फिर झूठ सिद्ध हुई है। महाराष्ट्र के नांदेड़ में बम ब्लास्ट के आरोप में पकड़े गए 12 हिन्दुओं को कोर्ट ने निर्दोष करार दिया है। यह सभी बरी कर दिए गए हैं। इनमें से तीन की मौत हो चुकी है। इन सभी को 2006 में कॉन्ग्रेस सरकार ने कथित बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस धमाके में 2 लोगों की मौके पर मौत हुई थी। कोर्ट में यह साबित नहीं हो सका कि यह एक बम धमाका था या सिलेंडर अथवा पटाखों के फटने से हुआ हादसा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर की एक कोर्ट ने शनिवार (4 जनवरी, 2025) को 2006 नांदेड़ ब्लास्ट मामले में 12 लोगों को बरी किया है। इस मामले में 12 हिन्दू आरोपित बनाए गए थे। इनमें से 2 की धमाके के दौरान ही मौत हो गई थी जबकि 1 की मौत इस मुकदमे के दौरान हो गई थी। बाकी 9 जीवित लोग 2006 के बाद से ही इस मामले में मुकदमा लड़ रहे थे। मामले में यह आरोप सिद्ध नहीं हो पाए कि धमाका एक बम में हुआ था और यह सिलेंडर या ऐसी ही किसी चीज का धमाका नहीं था।

कोर्ट ने इस मामले में राहुल पांडे (मृतक), हिमांशु पानसे (मृतक), नरेश राजकोंडवार (मृतक), लक्ष्मण राजकोंडवार, संजय चौधरी, रामदास मुलगे, डॉ. उमेश देशपांडे, मारुति वाघ, योगेश विडोलकर, गुरुराज टुपतेवार, मिलिंद एकताटे, मंगेश पांडे, राकेश धावड़े को बरी कर दिया है। यह कथित धमाका 4-5 अप्रैल, 2006 को नांदेड़ के पतबंधारे नगर में हुआ था। धमाका लक्ष्मण राजकोंडावार के घर पर हुआ था और इसमें हिमांशु पानसे और नरेश राजकोंडावार की मौत हो गई थी। बाद में मुकदमे के दौरान राहुल पांडे की मौत हो गई थी।

तब महाराष्ट्र और केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस मामले में पुलिस ने आरोप लगाया था कि यह धमाका बम बनाने के दौरान हुआ है। यह भी दावा हुआ था कि यहाँ से एक ज़िंदा बम भी बरामद हुआ था और कुछ गोलियाँ बरामद हुई थी। इस मामले में हिन्दुओं के पकड़े जाने के बाद ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी गढ़ने की कोशिश हुई थी। यह मामला पुलिस से ATS और फिर CBI को सौंप दिया गया था। तब कॉन्ग्रेस ने इन्हें हिन्दू आतंकी बता कर खूब शोर मचाया था।

इस मामले में 19 साल तक न्याय की लड़ाई लड़ने के बाद अब इन हिन्दुओं को न्याय मिल सका है। इससे पहले यह जेलों में जिन्दगी गुजार चुके थे। इनको अपने पर से आतंकी का ठप्पा हटाने के लिए लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी। कॉन्ग्रेस सरकार में इनके साथ जेलों में सही व्यवहार नहीं हुआ। इनके माध्यम से हिन्दुओं को हिंसक और आतंकी बताने की कोशिश हुई। अब यह सब दावे जमीन पर मुंह के बल गिरे हैं। इस मामले में फैसला आने के बाद भाजपा और VHP के लोगों ने प्रसन्नता जताई है।

VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है, “नांदेड़ मामले में कोर्ट का फैसला कॉन्ग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा है। उन्होंने इस मामले में को मालेगाँव की तरह हिन्दू आंतकवाद साबित करने का प्रयास किया था। आज सम्पूर्ण कॉन्ग्रेसी कुनबा बेनकाब हुआ है… अब कॉन्ग्रेस को पूरे देश से माफ़ी माँगनी चाहिए। सबसे बड़ा सवाल है कि हिन्दुओं को फंसाने के चक्कर में असल अपराधी बच गए। यह न्यायिक तंत्र पर हमला है।” भाजपा नेता अतुल भट्खालकर ने कहा है कि UPA सरकार के दौरान साजिश के चलते निर्दोष हिन्दू फंसाए गए थे जो अब मुक्त हैं।

लोगों ने जेल के नाम पर डराया, लेकिन मोदी सरकार ने दिया सहारा: बिहार में पहली बार CAA के तहत सुमित्रा प्रसाद को मिली नागरिकता, 40 साल से वीजा पर रहने को थीं मजबूर

बिहार के भोजपुर जिले में बांग्लादेश की मूल निवासी एक हिन्दू महिला को भारत की नागरिकता प्रदान की गई है। महिला का नाम सुमित्रा प्रसाद है जो पिछले 40 वर्षों से भारतीय नागरिकता के लिए प्रयासरत थीं। अब तक वीजा पर रह रहीं सुमित्रा की राह नागरिकता संसोधन कानून (CAA) के जरिए आसान हुई। शुक्रवार (3 जनवरी 2025) से सुमित्रा भारत की नागरिक बन चुकी हैं। बिहार में CAA के तहत किसी विदेशी को भारत की नागरिकता देने का यह पहला मामला है। सुमित्रा ने स्वीकार किया कि बांग्लादेश में हिन्दुओं को इस्लामी चरमपंथी प्रताड़ित करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 वर्ष की उम्र में सुमित्रा प्रसाद उर्फ़ रानी शाहा बांग्लादेश में अपनी बुआ के घर गई थीं। यहाँ जाने की वजह सुमित्रा के पिता की खराब आर्थिक स्थिति थी। उनके पिता मदन गोपाल अपनी पत्नी के साथ 2 बेटियों और इतने ही बेटों का खर्च उठाने में सक्षम नहीं थे। सुमित्रा की बुआ बांग्लादेश के राजशाही जिले में रहती थीं। साल 1971 में पाकिस्तान का विभाजन हुआ। इस दौरान काफी उथल-पुथल रही और सुमित्रा वहीं रह गईं। अपनी बुआ के ही घर से सुमित्रा ने कक्षा 10 पास किया।

सुमित्रा बताती हैं कि बांग्लादेश में हिन्दुओं को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है। चरमपंथियों की आए दिन की प्रताड़ना से सुमित्रा 1985 में वापस भारत आ गईं। इसके बाद सुमित्रा कभी लौट कर बांग्लादेश नहीं गईं। जब सुमित्रा भारत आईं तब उनकी उम्र 20 साल थी। भारत लौट कर वो अपने पिता के पास कटिहार चली गईं। 1985 में सुमित्रा का ब्याह आरा (भोजपुर) जिले के परमेश्वर से हुआ। सुमित्रा के पति होम एप्लायंस की दुकान चलाते हैं। शादी के बाद सुमित्रा 3 बेटियों की माँ बनीं।

साल 2010 में सुमित्रा के पति की बीमारी से मौत हो गई। बांग्लादेश से लौटने के बाद से ही सुमित्रा भारत की नागरिकता के लिए प्रयासरत थीं। वह हर साल वीजा के कार्यालयों के चक्कर लगाती थीं। सुमित्रा बताती हैं कि बिहार में उनके मोहल्ले के ही तमाम लोग अक्सर बांग्लादेश वापस चले जाने की नसीहत दिया करते थे। वीजा में देरी हो जाने की वजह से उनको साल 2023 में पुलिस ने भी यही सलाह दी थी। सुमित्रा को कुछ लोगों ने कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में फँसने और जेल आदि जाने की बातों से डराया भी था।

आखिरकार उनकी बेटी ऐश्वर्या को CAA (नागरिकता संसोधन कानून) के बारे में पता चला। ऐश्वर्या ने इसी कानून के तहत अपनी माँ का आवेदन किया। आवेदन के महज 3 माह के अंदर सुमित्रा को भारत की नागरिकता मिल गई है। अब सुमित्रा का परिवार बेहद खुश है। ऐश्वर्या बताती हैं कि अब तक उनकी माँ के भारतीय पहचान पत्र नहीं बन पाए थे जिसकी वजह से उनका परिवार गैस कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित था।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी फौजियों से भरी बस में ब्लास्ट, 6 की मौत, SSP सहित 32 घायल: BLA ने ली अटैक की जिम्मेदारी, 2024 में Pak के 685 सुरक्षाकर्मी मारे गए

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर एक बस को निशाना बनाते हुए हमला किया गया है। इस हमले में कम-से-कम 6 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 32 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर है। कराची से तुर्बत जा रही इस बस को न्यू बहमन में निशाना बनाया गया। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठन ‘बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी’ (BLA) समूह ने ली है।

ज़्यादातर पीड़ित फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) अर्धसैनिक बल के सदस्य थे। FC पाकिस्तान की सीमाओं की रक्षा करता है और आतंकवाद विरोधी अभियानों को सँभालता है। क्षेत्र के पुलिस अधिकारी रोशन बलूच ने बताया कि सड़क किनारे खड़ी एक कार में विस्फोटक छिपाकर रखा गया था और उसे दूर से ही उसे ब्लास्ट कर दिया गया। वहीं, BLA ने कहा कि उसके सुसाइड बॉम्बर ने यह अटैक किया था।

घायलों में गंभीर अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जोहैब मोहसिन और उनका परिवार भी शामिल हैं। उनके परिवार के छह सदस्य घायल हो गए हैं। जिस समय विस्फोट हुआ था, उस समय SSP अपने परिवार के सदस्यों के साथ उस रोड से गुजर रहे थे। सामने आए वीडियो एवं तस्वीरों के अनुसार, विस्फोट होने के बाद आग की चपेट में आसपास के कई वाहन आ गए थे।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले की निंदा की है और मृतकों एवं घायलों के लिए प्रार्थना की। शनिवार (4 जनवरी 2025) हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “आतंकवादी अपने नापाक इरादों में सफल नहीं होंगे। सरकार और सुरक्षा बल आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी मेहनत कर रहे हैं। पाकिस्तान से आतंकवाद को खत्म करने का दृढ़ संकल्प है।”

इससे पहले बुधवार (1 जनवरी 2025) को किला सैफुल्लाह जिले में एक गैस कंपनी के वाहन पर हुए बम फेंका गया था। इस हमले में एक व्यक्ति घायल हो गया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों ने किला सैफुल्लाह के बाहरी इलाके में स्थित तेल एवं गैस विकास निगम लिमिटेड के शिविर पर हमला करने की योजना बनाई थी।

ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और यह प्राकृतिक संपदा से भरपूर है। यहाँ पर बलूचिस्तान लिबरेशन ग्रुप पाकिस्तान सरकार पर बलूचों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हैं और वहाँ की संपदा को चीन को सौंपने पर ऐतराज जताते हैं। इसके साथ ही वे अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं।

पिछले साल नवंबर में अलगाववादियों ने क्वेटा के रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट की थी। इस हमले में 14 सैनिकों सहित कम से कम 26 लोग मारे गए थे। उससे पहले अगस्त में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने दर्जनों हमलावरों के साथ समन्वित हमले किए थे, जिसमें कम से कम 39 लोग मारे गए थे। BLA आमतौर पर सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर हमले करता है।

अगर आँकड़ों को देखें तो हाल के महीनों में पाकिस्तान में इस तरह के हमलों में बढोतरी देखी गई है। ये हमले खास तौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अधिक हो हुए हैं। पाकिस्तानी सेना के अनुसार, सिर्फ 2024 में 444 हमलों में 685 सुरक्षाबलों की जान गई है। वहीं, 1612 नागरिकों की मौत हुई है और 934 अपराधी मारे गए हैं।

हमास की कैद में इजरायल की महिला सैनिक क्या हुआ हाल, पहली बार वीडियो सामने आई: देखकर परिवार का बेहाल, PM नेतन्याहू बोले- जल्द छुड़वाएँगे

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने एक 19 वर्षीय इजरायली महिला सैनिक का वीडियो जारी किया है। यह महिला सैनिक बीते लगभग 14 महीने से हमास की बंधक है। उसे 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमले में इस्लामी आतंकी उठा ले गए थे। महिला सैनिक को 6 और साथियों के साथ बंधक बनाया गया था। उसके एक साथी की हत्या हो चुकी है जबकि एक को इजरायल ने मुक्त करवा लिया था। महिला सैनिक ने वीडियो में अपनी पीड़ा बताई है और जल्दी अपने को मुक्त करवाने की बात कही है।

इजरायली मीडिया के अनुसार, 14 महीने से हमास की कैद में रहने वाली इस सैनिक का नाम लिरी अलबाग है। वह 19 साल की हैं। वह 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के समय इजरायल-गाजा सीमा पर तैनात थीं। वह एक टोही दस्ते में तैनात थीं। उनकी पोस्ट पर हुए हमले में 15 सैनिक मारे गए थे जबकि लिरी अलबाग को 6 और सैनिकों के साथ इस्लामी आतंकी उठा ले गए थे। लिरी अलबाग का यह वीडियो हमास ने हाल ही में जारी किया है ताकि इजरायली सरकार पर जनता का दबाव बन सके और वह अपनी आतंक रोधी कार्यवाही को रोक दे।

इस वीडियो में लिरी अलबाग कहती हैं, “मैं सिर्फ़ 19 साल की हूँ। अभी मेरे सामने पूरी ज़िंदगी है, लेकिन अब मेरी जिंदगी रुक सी गई है…हम यहाँ एक बहुत ही खराब साल की शुरुआत कर रहे हैं, दुनिया हमें भूलने लगी है। कोई भी हमारी परवाह नहीं करता। हम एक दुखी सपने में जी रहे हैं।” लिरी के वीडियो के बाद उनके माता-पिता ने इसकी पुष्टि की है। उहोने कहा है कि इस वीडियो के कहते उनका दिल टूट गया और उन्होंने अपनी बेटी को इस हालत में कभी नहीं देखा।

उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री से बातचीत की है। उन्होंने लिरी को संदेश दिया है कि वह उसको मुक्त करवाने के लिए हर प्रयत्न कर रहे हैं। उन्होंने हमास इस वीडियो को प्रकाशित ना करने का अनुरोध किया है। नेतन्याहू ने उन्हें विश्वास दिलाया है कि जल्द ही उनकी बेटी को छुड़वा लिया जाएगा। उन्होंने कहा है कि इसके लिए सारे प्रयास किए जा रहे हैं और बातचीत चल रही है।

लिरी अलबाग के साथ 4 और साथी भी अभी हमास की कैद में हैं। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला बोल दिया था। इस हमले में उन्होंने 1200 से अधिक लोगों को मार दिया था जबकि 3000 से अधिक लोगों को घायल कर दिया था। उन्होंने इस हमले में बड़ी संख्या में सैनिकों समेत 251 लोगों को बंधक बना लिया था। इनमें से अब भी 96 हमास की कैद में हैं। इनमें से 34 की मौत भी हो चुकी है, उनके शव भी वापस नहीं किए गए हैं।

दुर्गा मंदिर में भजन बंद कराने पहुँचा कॉन्ग्रेस नेता नासिर अली, पुजारी के साथ की गाली-गलौच: पूजा में बाधा डालने पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के जसपुर जिले में हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं के अपमान में पुलिस ने कॉन्ग्रेस पार्टी के एक नेता को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपित का नाम नासिर अली खान है, जो जसपुर कॉन्ग्रेस का जिला उपाध्यक्ष है। नासिर अली के खिलाफ 3 जनवरी 2025 (शुक्रवार) को एक मंदिर के पुजारी ने शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने मंदिर में हो रही पूजा को रुकवाने की कोशिश की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना जसपुर के थाना क्षेत्र बगीचा की है। यहाँ माँ दुर्गा का एक मंदिर है। हर दिन की भाँति इस मंदिर में 3 जनवरी की सुबह 6 से 7 बजे के बीच पूजा हो रही थी। उसी दौरान वहाँ कॉन्ग्रेस का जिला उपाध्यक्ष नासिर अली पहुँचा और पूजा रोकने के लिए कहने लगा। जब पुजारी भूपेंद्र पाठक ने उसे रोकने की कोशिश की तो वह मारपीट पर उतारू हो गया।

नासिर ने पुजारी को गंदी-गंदी गालियों के साथ धमकी भी दी। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी नासिर को समझाना चाहा, लेकिन वह नहीं माना और उलटे श्रद्धालुओं को ही भला-बुरा कहने लगा। वह भजन-कीर्तन एवं आरती के दौरान बज रहे लाउडस्पीकर को बंद करने के लिए भी कहा। कुछ देर की तनातनी के बाद नासिर पुजारी और श्रद्धालुओं को धमकी देते हुए चला गया।

कॉन्ग्रेस नेता की इस हरकत को को लेकर पुजारी ने बगीचा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने इस हरकत को अपनी भावनाओं का अपमान बताया है। पुजारी ने अपनी शिकायत में नासिर पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस ने मामले को गंभीरता को देखते हुए नासिर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (2) और 299 के तहत केस दर्ज कर लिया है।

केस दर्ज होने के बाद से नासिर फरार हो गया था। पुलिस ने नासिर अली की पड़ताल में अपने मुखबिरों को लगा दिया था। शनिवार (4 जनवरी 2025) को पुलिस ने नासिर अली को गिरफ्तार कर लिया। जसपुर के पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने मीडिया से बातचीत में नासिर की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगे की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘₹1000 का किया था वादा, अब तक कुछ नहीं मिला’ : अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर जुटीं पंजाब की महिलाएँ, बोलीं- हमारे बाद दिल्ली को भी ठगने की हो रही कोशिश

पंजाब की महिलाओं के एक समूह ने शनिवार (4 दिसंबर 2024) को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। इन महिलाओं का आरोप था कि पंजाब में AAP सरकार ने हर महिला को ₹1000 प्रति माह देने का जो चुनावी वादा किया था, वह अब तक पूरा नहीं हुआ। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि अब दिल्ली में ₹2100 प्रति माह का नया वादा करके केजरीवाल फिर से जनता को गुमराह कर रहे हैं।

महिलाओं ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे पंजाब के अमृतसर और गुरदासपुर से आई हैं। एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा, “लोग वहाँ बहुत गरीब हैं। केजरीवाल और भगवंत मान ने ₹1000 प्रति महिला देने का वादा करके वोट लिए और सरकार बनाई। लेकिन अब तक कुछ भी नहीं मिला।” उन्होंने कहा कि दिल्ली की महिलाओं को भी इसी तरह झूठे वादों के जाल में फंसाया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस ने इन महिलाओं को प्रदर्शन स्थल से हिरासत में ले लिया। हिरासत में ली गई महिलाओं ने कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने केजरीवाल से सवाल किया कि अगर पंजाब में ₹1000 का वादा पूरा नहीं हुआ, तो दिल्ली में ₹2100 देने का वादा क्यों किया जा रहा है।

प्रदर्शन के बाद केजरीवाल ने अपने विरोधियों पर पलटवार करते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रही महिलाएँ कॉन्ग्रेस और बीजेपी की कार्यकर्ता हैं। उन्होंने दावा किया, “ये महिलाएँ पंजाब से नहीं आईं। पंजाब की महिलाएँ आम आदमी पार्टी के साथ हैं और उन पर विश्वास करती हैं। बीजेपी और कॉन्ग्रेस को साफ-साफ कहना चाहिए कि वे दिल्ली में मिलकर AAP के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं।”

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने दिसंबर में ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ का ऐलान किया था। इस योजना के तहत दिल्ली की महिलाओं को ₹2100 प्रति माह देने की बात कही गई। हालाँकि, दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास (WCD) विभाग ने बाद में स्पष्ट किया कि इस योजना को अब तक औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। ऐसी कोई योजना वजूद में ही नहीं है।

इस बीच, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना ने मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत दिल्ली निवासियों से व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने के आरोपों की जाँच शुरू कर दी है। इस मामले में अधिकारियों पर यह आरोप है कि वे गैर-सरकारी लोगों को पंजीकरण के नाम पर डेटा इकट्ठा करने दे रहे हैं।

पानी के बिल को लेकर भी केजरीवाल ने दिया बयान

पानी के बिल को लेकर भी केजरीवाल ने एक बयान दिया है। केजरीवाल ने कहा, “अगर किसी का पानी का बिल बढ़ा हुआ आता है, तो उसे भरने की जरूरत नहीं है। हमारी सरकार जब सत्ता में लौटेगी, तो इन बिलों को माफ कर दिया जाएगा या सही किया जाएगा।”

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने केजरीवाल के इस बयान पर भी सवाल उठाए और इसे जनता को गुमराह करने की नई कोशिश बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केजरीवाल झूठे वादे करके वोट लेने की राजनीति कर रहे हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में होने वाले हैं। इससे पहले केजरीवाल सरकार पर चुनावी वादों को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। 2020 के चुनाव में AAP ने 70 में से 62 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को केवल 8 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, कॉन्ग्रेस जो कभी दिल्ली की सत्ता पर 15 साल तक काबिज थी, पिछले दो चुनावों में शून्य पर सिमट चुकी है।