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NRI आकिब ने ब्रिटेन से वीडियो कॉल करके बीवी को दिया तीन तलाक, प्रताड़ित करके माँग रहा था दहेज: मुंबई पुलिस की FIR में अम्मी-अब्बा भी नामजद

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ इंग्लैंड में रहने वाले एक युवक व उसके अम्मी अब्बा पर दहेज़ उत्पीड़न सहित तीन तलाक कानून के तहत केस दर्ज हुआ है। आरोपित शौहर का नाम आकिब है। उस पर वीडियो कॉल करके अपनी बीवी को तीन तलाक देने का आरोप है। आकिब के अन्य परिजनों द्वारा भी पीड़िता को प्रताड़ित किया गया। मुंबई पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला मुंबई के सागर पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है। यहाँ के सीवुड्स में रहने वाली पीड़िता एक मुस्लिम महिला ने अपने NRI शौहर व अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। पीड़िता ने बताया कि साल 2022 में उसका निकाह इस्लामी तौर-तरीकों से आकिब भाटीवाल से हुआ था। उनका शौहर इंग्लैंड में रह कर जॉब करता है। शुरुआत में सब कुछ सही रहा लेकिन थोड़ा समय बीतते ही पीड़िता को उसकी ससुराल में प्रताड़ित किया जाने लगा।

थोड़े समय बाद पीड़िता अपने शौहर के पास इंग्लैंड चली गई। यहाँ भी उसकी प्रताड़ना जारी रही। इस प्रताड़ना में आकिब का साथ उसके अन्य परिजन भी देते थे। पीड़िता से दहेज़ की माँग की जाती थी। इंकार करने पर उसकी पिटाई होती थी। एक दिन आकिब और उसके घर वालों ने पीड़िता के तमाम गहने हड़प लिए। जब पीड़िता ने इसे वापस माँगा तो उसे वापस भारत लौटा दिया गया। भारत पहुँच कर पीड़िता लगातार अपनी ससुराल वालों को सम्पर्क का प्रयास करती रही। हालाँकि उधर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

इस बीच एक बार आकिब ने पीड़िता को ब्रिटेन से वीडियो कॉल किया। कॉल पर ही उसने पीड़िता को तीन तलाक दे दिया। पीड़िता ने बहुत मिन्नत की पर आरोपित पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उल्टे पीड़िता की उसकी भारत स्थित ससुराल में एंट्री बंद कर दी गई। आखिरकार परेशान होकर पीड़िता ने पुलिस में आकिब और उसके अम्मी-अब्बा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में आरोपितों को दहेज़ लोभी बता कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लेकर आकिब भाटीवाला और उसके अम्मी-अब्बा के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ तीन तलाक क़ानून के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपितों के खिलाफ मुंबई पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

मोदी घृणा फैलाने में फिर बौराए रवीश कुमार, प्रोपगेंडा फैलाने में की ‘बड़ी मिस्टेक’: ₹17 लाख के हीरे को ₹68 लाख का बताया, नेटीजन्स उड़ा रहे मजाक

पूर्व पत्रकार और अब यूट्यूबर बने रवीश कुमार लगातार मोदी सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने की कोशिश में पकड़े जाते रहे हैं। वो फेक न्यूज फैलाते हैं और एक्सपोज होते हैं, लेकिन सुधरने की जगह एक बार फिर से वो फेक न्यूज फैला कर आम जनता को भ्रमित करने के काम में लग जाते हैं। इसी क्रम में एक बार फिर से उन्होंने प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश करते हुए फेक न्यूज फैलाया। इस बार रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी जिल बायडेन को 7.5 कैरेट का हीरा गिफ्ट करने को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की, लेकिन गलत आँकड़ों की वजह से खुद सवालों के घेरे में आ गए।

अमेरिका की नेशनल आर्काइव्स एंड रिकॉर्ड्स एडमिनिस्ट्रेशन ने 1 जनवरी 2025 को एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के पेज 12 पर बताया गया कि 22 जून 2023 को अमेरिकी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन की पत्नी जिल बायडेन को 7.5 कैरेट का हीरा उपहार में दिया। इसकी कीमत $20000 (करीब 17.15 लाख रुपये) बताई गई थी।

रवीश कुमार ने 3 जनवरी 2024 को इसे लेकर सोशल मीडिया पर मोदी सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि यह हीरा 68 लाख रुपये का है। उन्होंने भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर के एक्सचेंज रेट को सही से समझे बिना यह दावा कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हीरा लैब में तैयार किया गया था और ये इको-फ्रेंडली है। रवीश ने इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए सरकार पर कटाक्ष किया। लेकिन असलियत यह है कि $20000 का मतलब भारतीय करेंसी में सिर्फ 17.15 लाख रुपये है।

इसके अलावा, टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों का कहना है कि यह हीरा मात्र ₹2 लाख (लगभग $2331) का था। इस खुलासे के बाद रवीश कुमार के दावे और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बहुत बार फेक न्यूज फैलाते पकड़े जा चुके हैं रवीश कुमार

बता दें कि रवीश कुमार कई बार फेक न्यूज फैलाते पकड़े जा चुके हैं। यूट्यूबर बनने से पहले जब वो एनडीटीवी में थे, तब भी उन्होंने जान-बूझकर लोगों को भ्रमित करने के लिए फेक न्यूज फैलाने के काम किए थे। ऐसा ही काम उन्होंने जनवरी 2021 में किया था, जब किसान आंदोलन के बहाने आम जनता और किसानों को उन्होंने भ्रमित करने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें लताड़ भी लगी थी।

साल 2020 में वो लगातार फेक न्यूज फैलाते पकड़े गए थे। उन्होंने एक के बाद एक लगातार तीन फेक न्यूज फैलाए थे, जिसमें रेलवे को लेकर भी फर्जी खबरें शामिल थी। किसी फेक न्यूज में वो ट्रेनों के 90 घंटे से लेट चलने का दावा करते दिख रहे थे, तो किसी में वो टाइम मैगजीन के बहाने फर्जी न्यूज फैलाने की कोशिश करते दिखे थे।

यही नहीं, रवीश कुमार लव जिहाद जैसी जघन्य घटनाओं को भी कम करके बता रहे थे और लव जिहाद को मनगढंत बात बता रहे थे। जिसके बाद पीड़ित नेशनल शूटर ने सार्वजनिक तौर पर उनकी बघिया उघेड़ी थी।

‘जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा…’ : प्रधानमंत्री ने ‘ग्रामीण भारत महोत्सव’ का किया उद्घाटन, कहा- 2012 में 26% थी गाँव की गरीबी, अब 5% रह गई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (4 जनवरी 2025) को दिल्ली के भारत मंडपम में ‘ग्रामीण भारत महोत्सव 2025’ का उद्घाटन किया, जो 9 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014 में सरकार बनते ही ग्रामीण भारत को समृद्ध बनाने के लिए कई कदम उठाए गए। इसके नतीजे भी आने शुरू हो गए। पीएम मोदी ने कहा कि जब इरादे नेक होते हैं तो नतीजे भी संतोष देने वाले होते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने गाँव के हर वर्ग के लिए विशेष नीतियाँ बनाई हैं। उन्होंने कहा, “2014 से ही मैं लगातार, हर पल ग्रामीण भारत की सेवा में लगा हूँ। गाँव के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देना मेरी सरकार की प्राथमिकता है। हमारा विजन है, भारत के गाँव के लोग सशक्त बनें, उन्हें गाँव में ही आगे बढ़ने के ज्यादा से ज्यादा अवसर मिले, उन्हें पलायन न करना पड़े।”

उन्होंने कहा, “गाँव के लोगों का जीवन आसान हो, इसलिए हमने गाँव-गाँव में मूलभूत सुविधाओं की गारंटी का अभियान चलाया। अभी दो-तीन दिन पहले ही कैबिनेट ने ‘पीएम फसल बीमा योजना’ को एक वर्ष अधिक तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। दुनिया में DAP का दाम बढ़ रहा है, लेकिन हमने निर्णय किया कि हम किसान के सिर पर बोझ नहीं आने देंगे और सब्सिडी बढ़ाकर DAP का दाम स्थिर रखा है।”

उन्होंने कहा, “कृषि के अलावा भी हमारे गाँव में अलग-अलग तरह के पारंपरिक कला और कौशल से जुड़े हुए कितने ही लोग काम करते हैं। रूरल इकोनॉमी और लोकल इकोनॉमी में इनका बड़ा योगदान रहा है, लेकिन पहले इनकी भी उपेक्षा हुई। अब हम उनके लिए पीएम विश्वकर्मा योजना चला रहा हैं। ये योजना देश के लाखों विश्वकर्मा साथियों को आगे बढ़ने का मौका दे रही है।”

पिछड़े और दलित समाज की समस्याओं को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “पहले की सरकारों ने SC-ST-OBC की आवश्यकताओं की ओर ध्यान नहीं दिया। गाँव से पलायन होता रहा, गरीबी बढ़ती रही, गाँव और शहर के बीच की खाई बढ़ती रही। जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा है। जो इलाके दशकों से विकास से वंचित थे, अब उन्हें बराबरी का हक मिल रहा है।”

SBI की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “अभी कल ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आई है, जिसके अनुसार 2012 में भारत में ग्रामीण गरीबी करीब 26 प्रतिशत थी। जबकि 2024 में भारत में ग्रामीण गरीबी घटकर 5 प्रतिशत से भी कम हो गई है।” उन्होंने कहा, “हमारी सरकार की नीयत, नीति और निर्णय ग्रामीण भारत को नई ऊर्जा से भर रहे हैं।”

छत्तीसगढ़ के जिस ठेकेदार ने की पत्रकार मुकेश की हत्या, वह कॉन्ग्रेस का पदाधिकारी निकला: देखते ही देखते बन गया बड़ा नाम, हेलीकॉप्टर से ले गया था बारात

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में मुकेश चंद्राकर नाम के एक पत्रकार की हत्या कर दी गई है। शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को मुकेश का शव सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ है। वह 1 जनवरी से लापता थे। आरोप है कि सड़क निर्माण में कमियाँ उजागर करने की वजह से ठेकेदार सुरेश चंद्राकर द्वारा मुकेश की हत्या की गई। मुख्य आरोपित सुरेश चंद्राकर और उसके भाई सहित 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

ठेकेदार का कॉन्ग्रेस कनेक्शन सामने आया है। ठेकेदार सुरेश चंद्राकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश सचिव हैं। सुरेश चंद्राकर को कॉन्ग्रेस के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष दीपक बैज का बेहद करीबी बताया जाता है। भाजपा का कहना है कि दीपक बैज के कहने पर ही सुरेश चंद्राकर को पार्टी में यह पद मिला है।

इस घटना को लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा है, “कॉन्ट्रैक्टर है या कॉन्ग्रेसी कॉन्टैक्ट किलर!!” घृणित येन-केन-प्रकारेण की राजनीति के परिचायक कॉन्ग्रेसियों… ज़रा अपने गिरेबाँ पर झाँककर देखो, क्या जल्दबाज़ी में तुमने अपना ही कच्चा चिट्ठा खोल दिया है!!” भाजपा ने इस मामले में राहुल गाँधी से जवाब माँगा है।

भाजपा ने आगे लिखा, “बीजापुर के युवा पत्रकार स्व. मुकेश चंद्राकर जी की हत्या का मुख्य आरोपित कॉन्ट्रैक्टर सुरेश चंद्राकर की कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से घनिष्ठता जगज़ाहिर है। दीपक बैज ने ही सुरेश को कॉन्ग्रेस के SC मोर्चा के प्रदेश सचिव के पद से नवाजा है। मोहब्बत की तथाकथित कॉन्ग्रेसी दुकान से तरह-तरह के अपराध के सामान बिक रहे हैं।”

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने X पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “ठेकेदार, जिस पर पत्रकार की हत्या का इल्जाम है, उसका नाम सुरेश चंद्राकर है। सुरेश चंद्राकर कॉन्ग्रेस का बड़ा नेता है, जिसे हर चुनाव में कॉन्ग्रेस की तरफ से बड़ी ज़िम्मेदारियाँ सौंपी जाती हैं। कॉन्ग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के साथ आरोपित।”

कॉन्ग्रेस नेता सुरेश चंद्राकर मूलरूप से बासागुड़ा का रहने वाला है। राज्य में सलवा जुड़ूम आंदोलन के बाद से वह और उसका परिवार बीजापुर में रहने लगा था। बीजापुर में आकर सुरेश ने ठेकेदारी शुरू कर दी। देखते ही देखते वह बड़ा ठेकेदार बन गया। साल 2021 में हेलीकॉप्टर से बरात लेकर जाने पर वह चर्चा में आया था। यह बात भी सामने आ रही है कि मुकेश और सुरेश आपस में रिश्तेदार थे।

मृतक मुकेश ने बस्तर में 120 करोड़ रुपए की लागत वाली सड़क निर्माण परियोजना में धाँधली के खिलाफ एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग की थी। गंगालूर में इस सड़क को सुरेश चंद्राकर ने बनवाया था। इसके बाद से सुरेश की तरफ से पत्रकार को चेतावनी मिल रही थी। इस रिपोर्ट के बाद कॉन्ग्रेस नेता सुरेश के भाई रितेश ने 1 जनवरी को मुकेश को मिलने के लिए बुलाया था। इसके बाद मुकेश घर नहीं लौटे थे।

मुकेश चंद्राकर के लापता होने पर उनके पत्रकार भाई युकेश चंद्राकर ने इसका आरोप सुरेश चंद्राकर पर लगाया था। उन्होंने कहा था कि सुरेश चंद्राकर ने उनके भाई को लापता किया है। इसके बाद पुलिस ने मुकेश की खोजबीन शुरू कर दी। एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना के मुताबिक, मुकेश के मोबाइल की आखिरी लोकेशन कॉन्ग्रेस नेता सुरेश चंद्राकर की कंस्ट्रक्शन कंपनी में मिली थी।

ASP के अनुसार, इसके बाद फोन बंद हो गया था। सुरेश चंद्राकर की यह कंपनी चट्टानपारा में स्थित है। इसके बाद खोज में मुकेश की लाश मिली। मुकेश चंद्राकर बस्तर इलाके से एनडीटीवी के लिए रिपोर्टिंग करते थे और ‘बस्तर जंक्शन’ नाम से अपना यूट्यूब चैनल चलाते थे। साल 2021 में नक्सलियों द्वारा CRPF के एक जवान को अपहरण करने के बाद उसे रिहा कराने में मुकेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

टूरिस्ट बनकर भारत में घुसे बांग्लादेशी, फिर यहीं बस गए: दिल्ली पुलिस ने 5 को दबोचकर वापस भेजा, जिस गेस्ट हाउस में मिले उसके मालिक पर भी केस

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में अवैध तौर पर रह रहे बांग्लादेश के 5 नागरिकों को हिरासत में लिया है। ये सभी वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में ही रह रहे थे। इसमें महिलाएँ भी शामिल हैं। इन सभी को जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद उनके मुल्क वापस भेज दिया गया है। शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी दी है। घुसपैठियों को चिन्हित करके उनकी धरपकड़ का अभियान अभी भी जारी है।

शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए दक्षिण पूर्व दिल्ली पुलिस के DCP रवि कुमार ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी व अन्य घुसपैठियों को चिन्हित करने के लिए पुलिस ने एक अलग से टीम बना रखी है। इसी टीम की निगरानी के दौरान पुलिस को सरिता विहार इलाके में आने वाले मदनपुर खादर क्षेत्र के मवासी गेस्ट हाउस के अंदर रह रहे कुछ संदिग्धों का पता चला। इस सूचना पर पुलिस ने दबिश दी तो गेस्ट हाउस में 5 लोग मिले। इनकी जाँच में ये सभी बांग्लादेश के नागरिक निकले।

जाँच में यह पता चला कि पाँचों बांग्लादेशियों की टूरिस्ट वीजा अवधि अगस्त 2024 में खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद ये सभी अपने देश वापस नहीं लौटे। इन पाँचों को कस्टडी में लेकर जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद वापस बांग्लादेश भेज दिया गया है। पुलिस ने गेस्ट हाउस के मालिक के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि गेस्ट हाउस के मालिक ने पाँचों बांग्लादेशियों को अपने यहाँ किराये पर रखने से पहले उनके कागजातों की सही से जाँच नहीं की थी।

गौरतलब है कि गुरुवार को दक्षिण पश्चिम जिले में भी पुलिस ने एक तलाशी अभियान चलाया था। तब पुलिस ने साल 2012 से अवैध तौर पर भारत में रह रहे 2 बांग्लादेशियों को पकड़ा था। इनकी पहचान 54 वर्षीय लियाकत और 39 वर्षीया नसरीन के तौर पर हुई थी। लियाकत और नसरीन रिश्ते में मियाँ-बीवी हैं। इन दोनों को भी विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) के माध्यम से बांग्लादेश वापस लौटा दिया गया है।

इसी के साथ साथ दिल्ली पुलिस ने कई अन्य स्थानों पर अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन्हीं में से एक घुसपैठी को लवली खतूम इस्लाम के तौर पर चिन्हित हुई थी। लवली खातून पिछले 4 वर्षों से दिल्ली में रह रही थी। घुसपैठियों के खिलाफ एक अन्य कार्रवाई में वसंत कुञ्ज इलाके से भी एक बंगलदेश पकड़ कर वापस अपने मुल्क भेजा गया था। उसकी पहचान ढाका के डेमरा गाँव निवासी मोहम्मद बबलू के तौर पर हुई थी।

ट्रेन में लूटपाट के बाद फैयाज, समीर ने साथियों संग शशांक को बेरहमी से पीटा, खून की उल्टियों के बाद हुई युवक की मौत: 4 पर केस दर्ज, रेलवे ने की मुआवजे की घोषणा

हैदराबाद-दिल्ली दक्षिण एक्सप्रेस में मोहम्मद फैयाज, सय्यद समीर, एम. श्याम कोटेश्वर राव और मोहम्मद अमन ने यूपी के शशांक रामसिंह राज की पीटपीट कर हत्या कर दी। इन हत्यारों ने शशांक की जेब से रुपए निकाल लिए और मोबाइल छीन लिया, जिसका विरोध करने पर शशांक और उसके दोस्त की जमकर पिटाई की, जिसमें शशांक की मौत हो गई। शशांक यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के राजापुर कैमहारा के रहने वाले थे, लेकिन अब उनका शव उनके घर पहुँचा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना गुरुवार (2 दिसंबर 2024) की सुबह तेलंगाना के पास हुई। शशांक अपने दोस्तों के साथ ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर कर रहा था। वे सभी शौचालय के पास सो रहे थे। इसी दौरान चार हमलावरों ने शशांक की जेब से ₹1,700 चोरी कर लिए। जब एक अन्य यात्री का मोबाइल चोरी हुआ और उसने जागकर फोन वापस छीन लिया, तब शशांक को अपने पैसे चोरी होने का पता चला। शशांक ने तुरंत उन हमलावरों का सामना किया और अपने पैसे लौटाने की माँग की।

हमलावरों ने शशांक पर क्रूरता से हमला किया। उन्होंने उसे लात-घूंसों से मारा और अन्य यात्रियों को भी पीटा। यह पूरा हमला करीब 30 मिनट तक चला, उसके बाद अन्य सह-यात्रियों ने बीच-बचाव किया। पिटाई के दौरान शशांक को गंभीर चोटें आईं और उसने खून की उल्टी की। इसके बाद वह बेहोश हो गया।

सुबह करीब 9:15 बजे ट्रेन नागपुर स्टेशन पहुँची, जहाँ रेलवे के डॉक्टरों ने शशांक को मृत घोषित कर दिया। यात्रियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दो हमलावरों को पकड़ लिया, जबकि बाकी दो ट्रेन में छिप गए थे।

नागपुर जीआरपी ने चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। हमलावरों की पहचान मोहम्मद फैयाज S/o मोहम्मद हाशिमुद्दीन (19), सय्यद समीर S/o सय्यद जिमाल (18), एम. श्याम (21), और मोहम्मद अमन S/O मोहम्मद अकबर (19) के रूप में हुई है। सभी आरोपित हैदराबाद के रहने वाले हैं।

रेलवे पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। रेलवे प्रशासन ने शशांक के परिजनों को ₹1.5 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है।

सड़क निर्माण पर पत्रकार ने की रिपोर्टिंग, कॉन्ट्रैक्टर ने मारकर सेप्टिक टैंक में फिंकवाया: 3 दिन बाद लाश मिली, छत्तीसगढ़ CM बोले- अपराधी को किसी हाल में नहीं बख्शेंगे

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में मुकेश चंद्राकर नाम के एक पत्रकार की हत्या कर दी गई है। शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को मुकेश का शव सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ है। वह 1 जनवरी से लापता चल रहे थे। आरोप है कि सड़क निर्माण में कमियाँ उजागर करने की वजह से ठेकेदार द्वारा मुकेश की हत्या की गई। पुलिस ने आरोपित ठेकेदार सुरेश सहित कुछ अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कातिलों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्रकार मुकेश चंद्राकर बुधवार (1 जनवरी 2025) को अचानक लापता हो गए थे। उनके भाई युकेश ने पुलिस में एक गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस ने जाँच शुरू की तो मुकेश के मोबाइल की अंतिम लोकेशन एक स्थानीय ठेकेदार सुरेश चंद्राकर की एक प्रॉपर्टी के पास पाई गई। यह निर्माण छत्तानपारा बस्ती के पास है जहाँ सुरेश चंद्राकर के कर्मचारियों के आवास हैं। सुरेश भी यहाँ अक्सर बैडमिंटन खेलने आया करता था।

इस जगह की जाँच के दौरान पुलिस को यहाँ बने सेप्टिक टैंक के पास नया निर्माण नजर आया। इस निर्माण तो तुड़वाया गया तो सेप्टिक टैंक के अंदर मुकेश की लाश पड़ी दिखी। लाश तेजी से सड़ रही थी। उसके कपड़ों से मुकेश की पहचान परिजनों ने की। लाश को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। मृतक के परिजनों से तहरीर लेकर जाँच शुरू कर दी। ठेकेदार सुरेश चंद्राकर और उसके कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।

युकेश चंद्राकर की शिकायत में इस बात का जिक्र है कि उनके भाई ने कुछ दिनों पहले गंगालूर से नेलशानार जाने वाली निर्माणाधीन सड़क पर ग्राउंड रिपोर्ट की थी। तब मुकेश ने इसके निर्माण में हो रही कई खामियों को उजागर किया था। मुकेश की इसी रिपोर्ट पर जगदलपुर लोक निर्माण विभाग ने जाँच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि इस सड़क को ठेकेदार सुरेश चंद्राकर बनवा रहा था। वह मुकेश की रिपोर्टिंग से काफी नाराज हुआ था।

बताया यह भी गया है कि पूर्व में भी पत्रकार मुकेश और ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो चुका था। मुकेश को लगातार धमकियाँ दी जा रहीं थीं। कहा जा रहा है कि 1 जनवरी को सुरेश चंद्राकर ने मिलने का झाँसा देकर मुकेश को अपने यहाँ बुलवाया। यहाँ उसने मुकेश की हत्या करके लाश को सेप्टिक टैंक में फेंक दिया और ऊपर से नया प्लास्टर चढ़वा दिया। मृतक के भाई की शिकायत में सुरेश चंद्राकर के साथ 2 अन्य लोगों का भी जिक्र है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटना का संज्ञान लिया है। शुक्रवार को उन्होंने अपने X हैंडल पर मृतक की आत्मा की शांति की कामना की है। इसी के साथ उन्होंने लिखा, “इस घटना के अपराधी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अपराधियों को जल्द से जल्द से गिरफ्तार कर के कड़ी से कड़ी सजा देने के निर्देश हमने दिए हैं।” CM ने मुकेश चंद्राकर की हत्या पत्रकारिता जगत के लिए कभी न भर सकी जा सकने वाला नुकसान बताया है।

गौरतलब है कि एक राष्ट्रीय संस्थान का संवाददाता होने के साथ मुकेश चंद्राकर अपना खुद का यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं। साल 2021 में जब नक्सलियों ने CRPF के एक जवान का अपहरण कर लिया था तब उसे रिहा करवाने में मुकेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। छत्तीसगढ़ सहित देश भर के तमाम पत्रकारों ने मुकेश की हत्या पर गुस्सा जताया है। उन सभी ने हत्यारों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

‘PM मोदी न चढ़ाएँ अजमेर शरीफ पर चादर, रोक लगे’ : अदालत में डली याचिका, दावा- पहले दरगाह की जगह था शिव मंदिर

अजमेर की एक अदालत में याचिका दाखिल की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर उर्स के मौके पर चादर पेश करने पर अस्थायी रोक लगाने की माँग की गई है। यह याचिका हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दायर की है। उनका कहना है कि अजमेर शरीफ दरगाह का स्थल विवादित है और वहाँ चादर भेजने से अदालत की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि यह दरगाह एक प्राचीन शिव मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। गुप्ता ने अदालत से अपील की है कि केंद्र सरकार को दरगाह पर चादर भेजने से रोका जाए, क्योंकि इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। गुप्ता का कहना है कि अदालत में मामला लंबित रहने के दौरान चादर पेश करना अदालत की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन होगा।

गुप्ता की याचिका में कहा गया है कि दरगाह की संरचना और वहाँ मौजूद कुछ विशेषताएँ यह साबित करती हैं कि यह स्थल मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था। याचिका में दावा किया गया है कि मुख्य प्रवेश द्वार की छत और छतरियों की डिजाइन हिंदू वास्तुकला का संकेत देती है। याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से स्थल की जाँच कराने और वहाँ भगवन श्री संकटमोचन महादेव मंदिर की पुनर्स्थापना की माँग की गई है।

गुप्ता का यह भी कहना है कि दरगाह के भूमिगत मार्ग में एक शिवलिंग मौजूद है, जिसकी पूजा करने का हिंदुओं का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अधिकार वर्तमान में बाधित हो रहा है। पिछले महीने इसी मामले में अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी किया था।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (2 जनवरी 2025) को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू को चादर सौंपी थी, जो उर्स के मौके पर दरगाह पर पेश की जानी है। यह चादर हर साल प्रधानमंत्री की ओर से भेजी जाती है। रिजिजू ने इसे ट्वीट कर प्रधानमंत्री की भावना को ‘भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक’ बताया था। पीएम मोदी ने भी इसे री-ट्वीट किया था।

मणिपुर में कुकी दंगाइयों ने पुलिस पर फेंके पेट्रोल बम, डिप्टी कमीशनर के ऑफिस पर भी हमला: घायल SP की तस्वीर सामने आई, जवाबी कार्रवाई में 15 घायल

मणिपुर के कांगपोकपी जिले के सैबोल गाँव में कुकी उग्रवादियों की भीड़ ने शुक्रवार (3 जनवरी) को पुलिस पर हमला कर दिया। यह हमला पुलिस अधीक्षक (SP) और डिप्टी कमिश्नर के दफ्तरों पर किया गया था। इसमें पुलिस अधीक्षक मनोज प्रभाकर घायल हो गए है। सामने आई तस्वीरों में दिख रहा है कि एसपी प्रभाकर के माथे से खून बह रहा है।

हमलावर कुकी उग्रवादी अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे और वे छद्म वेश में थे। कहा जा रहा है कि कुकी समर्थित कमिटी ऑफ ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने केंद्रीय बलों की तैनाती के खिलाफ क्षेत्र में ‘पूर्ण बंद’ की घोषणा की थी। वे सैबोल गाँव में केंद्रीय बलों द्वारा ‘सामुदायिक बंकरों’ पर कब्जे और मंगलवार (31 दिसंबर) को महिलाओं पर कथित लाठीचार्ज के खिलाफ ‘विरोध’ कर रहे थे।

दरअसल, CoTu ने सैबोल से केंद्रीय बलों को हटाए जाने तक ‘आर्थिक नाकेबंदी’ का आह्वान किया था। शुक्रवार (3 जनवरी) को कुकी उग्रवादियों ने पूरे दिन विरोध प्रदर्शन किया। शाम को उन्होंने पुलिस अधीक्षक के कार्यालय की घेराबंदी की और उसे सील करने की कोशिश की। उन्होंने परिसर में तोड़फोड़ की और कई वाहनों को नष्ट कर दिया। कुकी उग्रवादियों ने पुलिस पर पत्थर और पेट्रोल बम भी फेंके।

हमले के दौरान केंद्रीय बलों ने उग्रवादियों को रोकने की कोशिश की और हिंसक कुकी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए खाली कारतूस और आँसू गैस के गोले दागे। कमिटी ऑफ ट्राइबल यूनिटी के अनुसार, इसमें करीब 15 लोग घायल हो गए हैं। उनमें से 11 लोगों को ICU में भर्ती कराया गया है।

सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बयान में मणिपुर पुलिस ने बताया, “स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की बड़ी टुकड़ियाँ तैनात की गई हैं। स्थिति अब नियंत्रण में है और इस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।” इस बीच, कमिटी ऑफ ट्राइबल यूनिटी ने ‘पूर्ण बंद’ को 24 घंटे के लिए बढ़ाने की घोषणा की है।

धार्मिक विवादों की समय से सुनवाई के लिए जरूरी है रिलीजियस ट्रिब्यूनल: कोर्ट और सरकार को अब इस दिशा में सोचने की क्यों है जरूरत, जानिए

धर्म की रक्षा में न्याय का आधार ही समाज को एकता और शांति प्रदान करता है। सरकार को धार्मिक स्थलों से संबंधित विवादों के समाधान के लिए एक अलग ट्रिब्यूनल की स्थापना करनी चाहिए। यह ट्रिब्यूनल सामान्य अदालतों से अलग हो और इसमें विशेष रूप से धार्मिक विवादों का निपटारा किया जाए। इसके लिए एक अलग धार्मिक ट्रिब्यूनल का गठन एक प्रभावी कदम हो सकता है।

इससे न केवल इन विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होगा, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। भारत जैसे बहुधर्मी और बहुसांस्कृतिक देश में धार्मिक विवाद अक्सर समाज में तनाव और अस्थिरता का कारण बनते हैं। इन विवादों का त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान आवश्यक है, ताकि देश में धार्मिक सौहार्द्र और कानून व्यवस्था बनी रहे।

धार्मिक विवाद संवेदनशील होते हैं और इनके कारण समाज में तनाव और अशांति का माहौल बन सकता है। एक विशेष ट्रिब्यूनल के माध्यम से इन विवादों को सुलझाने से विवादित पक्षों को निष्पक्ष और विशेषज्ञ समाधान मिलेगा। इसके अलावा, यह पहल सामान्य अदालतों के बोझ को भी कम करेगी और अन्य मामलों के निपटारे में तेजी लाएगी।

भारत का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है। अनुच्छेद 25-28 हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन, प्रचार और अभ्यास करने की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानून का समान संरक्षण सुनिश्चित करता है। वहीं, अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय को विशेष शक्तियाँ प्रदान करता है कि वह न्यायिक या अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा कर सके।

हालाँकि, संविधान धार्मिक विवादों के लिए अलग ट्रिब्यूनल का स्पष्ट उल्लेख नहीं करता, लेकिन संसद को विशेष कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है। अनुच्छेद 323B के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं को विशेष ट्रिब्यूनल स्थापित करने का अधिकार है। धार्मिक मुद्दों पर शीघ्र और प्रभावी न्याय के लिए धार्मिक विवादों को सिविल कोर्ट में सुलझाने में वर्षों लग सकते हैं।

ट्रिब्यूनल में धार्मिक और कानूनी विशेषज्ञों की नियुक्ति की जानी चाहिए, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही इन ट्रिब्यूनल के निर्णयों पर उच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान होना चाहिए, ताकि संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हो। धार्मिक विशेषज्ञता के कारण ट्रिब्यूनल में धार्मिक और कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे, जो जटिल धार्मिक मामलों को बेहतर तरीके से समझ कर उसे सुलझा सकते हैं।

समाज में शांति बनाए रखने के साथ-साथ ट्रिब्यूनल विवादों को निपटाने के लिए एक केंद्रीय मंच प्रदान करेगा, जिससे जगह-जगह विवाद और हिंसा से बचा जा सकेगा। क्षेत्राधिकार की बात करें तो ट्रिब्यूनल को केवल धार्मिक विवादों, धार्मिक स्थलों और संबंधित मामलों तक सीमित रखा जाए। धार्मिक विवादों का समाधान हिंसा से नहीं, संवाद और कानून के माध्यम से ही संभव है।

ट्रिब्यूनल का गठन इस दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। यह ट्रिब्यूनल सुनिश्चित करेगा कि हर धर्म को न्याय मिले और कोई भी निर्णय तटस्थता और संविधान के दायरे में रहे। भारत में धार्मिक विवादों के समाधान के लिए अलग ट्रिब्यूनल का गठन संविधान सम्मत और समय की आवश्यकता है। राज्य सरकारों को इस दिशा में पहल करनी चाहिए ताकि भविष्य में धार्मिक विवाद राष्ट्रीय एकता और कानून व्यवस्था को बाधित न करें।