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दिल्ली में ‘आप-दा’ बनकर टूट पड़ी है AAP, ये कट्टर बेईमान: विधानसभा चुनावों से पहले बोले PM मोदी- मैं भी शीशमहल बनवा लेता, लेकिन मेरा सपना लोगों को पक्का घर देना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों को देखते हुए शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को चुनाव प्रचार की शुरूआत कर दी। अशोक विहार में जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि AAP दिल्ली में आपदा बनकर टूटी है। ये लोग कट्टर बेईमान लोग हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वे चाहते तो अपने लिए भी शीशमहल बनवा लिए होते, लेकिन उनका सपना है कि देशवासियों को अपना घर मिले।

‘आपदा को हटाना है, भाजपा को लाना है’ का नारा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “सत्ता में खुद को कट्टर बेईमान बताने वाले लोग बैठे हैं, जो खुद शराब घोटाले के आरोपित हैं। ये भ्रष्टाचार करते हैं और उसका महिमामंडन करते हैं। ये चोरी भी करते हैं और सीनाजोरी भी। दिल्ली वालों को इस आपदा सरकार को सत्ता से हटाना है। आज हर गली कहती है- आपदा को नहीं सहेंगे, बदलकर रहेंगे।”

पीएम मोदी, “बीते 10 वर्षों से दिल्ली एक बड़ी आप-दा से घिरी है। अन्ना हजारे जी को सामने करके कुछ कट्टर बेईमान लोगों ने दिल्ली को आप-दा में धकेल दिया। शराब के ठेकों में घोटाला, बच्चों के स्कूल में घोटाला, गरीबों के इलाज में घोटाला, भर्तियों के नाम पर घोटाला… ये लोग दिल्ली के विकास की बात करते थे, लेकिन ये लोग आप-दा बनकर दिल्ली पर टूट पड़े हैं। दिल्ली वालों ने आप-दा के विरुद्ध जंग छेड़ दी है। दिल्ली का वोटर, दिल्ली को आप-दा से मुक्त करने की ठान चुका है।”

उन्होंने कहा, “मैं तो दिल्ली वालों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली ‘आयुष्मान भारत’ योजना का लाभ देना चाहता हूँ। आप-दा सरकार को दिल्ली वालों से बड़ी दुश्मनी है। पूरे देश में आयुष्मान योजना लागू है, लेकिन इस योजना को आप-दा वाले यहाँ (दिल्ली) लागू नहीं होने दे रहे। इसका नुकसान दिल्ली वालों को उठाना पड़ रहा है।”

AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी ने कभी अपने लिए घर नहीं बनाया, लेकिन बीते 10 वर्षों में 4 करोड़ से अधिक लोगों का सपना पूरा किया है। मैं भी कोई शीशमहल बना सकता था, लेकिन मेरे लिए तो मेरे देशवासियों को पक्का घर मिले, यही सपना था।” उन्होंने कहा कि अभी भी जो लोग झुग्गी में रहते हैं, आज नहीं तो कल उनके लिए पक्का घर बनेगा मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार देशवासियों को आयुष्मान योजना का लाभ देना चाहती है, लेकिन AAP वालों को दिल्लीवासियों से दुश्मनी है। वह इस योजना को लागू नहीं होने दे रही है। इसके कारण दिल्ली के लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पीएम ने कहा कि दिल्ली में 500 जनऔषधि केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 80 फीसदी दवाओं पर डिस्काउंट मिलता है। 100 रुपए की दवा 15 रुपए में मिलती है।

पीएम मोदी ने आज दिल्ली में 4500 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने दिल्ली के अशोक विहार में बने 1,675 फ्लैट्स का भी उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “स्वाभिमान अपार्टमेंट्स,’ गरीबों के स्वाभिमान को, उनकी गरिमा को बढ़ाने वाले हैं। इन घरों के मालिक भले ही दिल्ली के अलग-अलग जगहों के लोग हों, लेकिन ये सब के सब मेरे परिवार के ही सदस्य हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “दिल्ली राजधानी है, बड़े खर्चों वाले बहुत से काम यहां होते हैं वो केंद्र सरकार के जिम्मे है। सड़कें, मेट्रो, अस्पताल, कॉलेज कैंपस सब केंद्र ही बना रही है। लेकिन यहां की आपदा सरकार के पास ब्रेक लगी हुई है।” उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में CBSE की बड़ी भूमिका है और इसका दायरा बढ़ रहा है। उच्च शिक्षा के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा भी बढ़ रही है।

इस्लामी ‘ब्लड मनी’ से भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को नहीं होगी फाँसी: कौन दलाल लेकिन खा गया ₹30-35 लाख, पीड़ित परिवार के पास क्यों नहीं पहुँचा पैसा – जानिए सब कुछ

केरल की भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को 2017 में यमन के एक नागरिक की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। यमनी राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने 2018 में दिए गए इस फैसले को मंजूरी दे दी थी, और उनकी फाँसी अगले एक महीने में तय है। हालाँकि, निमिषा प्रिया को बचाने का एक तरीका मौजूद है। इस्लामी शरिया कानून के तहत मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन कुरान में माफी और मुआवजे (जिसे ‘दिया – Diyya’ या ‘ब्लड मनी – Blood Money’ कहा जाता है) को सजा से बेहतर विकल्प बताया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, निमिषा प्रिया की रिहाई के लिए ईरान ने मध्यस्थता की इच्छा जताई है, लेकिन माफी मिलने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। निमिषा प्रिया के वकील सुभाष चंद्रन ने बताया कि यमनी जनजातीय नेताओं ने बातचीत शुरू करने के लिए पहले $40,000 (करीब 34 लाख रुपये) की माँग की थी। पहले $20,000 की राशि कुछ महीने पहले ही दी गई थी, लेकिन सकारात्मक जवाब न मिलने के कारण बाकी भुगतान में देरी हुई।

जानकारी के मुताबिक, दिसंबर के अंत में भारतीय राजनयिक मिशन के माध्यम से सऊदी अरब में $20,000 की दूसरी किश्त दी गई। हालाँकि, इसके तीन दिन बाद ही खबर आई कि यमनी राष्ट्रपति ने निमिषा प्रिया की मौत की सजा को मंजूरी दे दी है। यमनी राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद भारत सरकार ने कहा कि वो इस मामले में परिवार के साथ है।

निमिषा प्रिया को बचाने की कोशिश में पैसा जुटा रहे लोग

निमिषा प्रिया के मामले में ब्लड मनी जुटाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल’ सक्रिय है। उनके वकील ने बताया कि निमिषा को बचाने के लिए बातचीत शुरू हो, इसके लिए 20-20 हजार डॉलर की राशि दो बार में भेजी गई थी, लेकिन पीड़ित परिवार को अभी तक ये पैसा नहीं मिला। इसलिए ब्लड मनी पर अभी बातचीत भी शुरू नहीं हो पाई है।

यह भी कहा जा रहा है कि ब्लड मनी की कुल राशि $300,000–$400,000 (2.57 करोड़ रुपये से 3.40 करोड़ रुपये) हो सकती है, जिसे जुटाने के लिए परिवार और समर्थक क्राउडफंडिंग कर रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम के अनुसार, समय पर दूसरा भुगतान न होने के कारण बातचीत का मौका हाथ से निकल गया। अब ईरान की मध्यस्थता और भारत के कूटनीतिक प्रयास ही निमिषा प्रिया की जान बचा सकते हैं।

ब्लड मनी क्या है और कैसे तय की जाती है?

इस्लामिक कानून के मुताबिक, हत्या के मामलों में सजा के 2 विकल्प है किसास और दूसरा दिया। किसास का मतलब ‘जान के बदले जान’ और दिया यानी ब्लड मनी। इस्लामिक कानून में ‘दिया’ यानी ब्लड मनी ऐसा प्रावधान है जो सुलह का अवसर प्रदान करता है। शरिया कानून के अनुसार, हत्या के मामलों में पीड़ित परिवार को यह तय करने का अधिकार होता है कि वे हत्यारे को माफ करेंगे या सजा दिलाएँगे। कुरान के अनुसार, माफी और ब्लड मनी को न्याय और दया का माध्यम बताया गया है।

कुरान की सूरह अल-बकरा, आयत 178 में उल्लेख है: “मगर यदि हत्यारे को पीड़ित के संरक्षक द्वारा क्षमा कर दिया जाए, तो ब्लड मनी को न्यायपूर्वक तय किया जाए और सम्मानपूर्वक भुगतान किया जाए। यह तुम्हारे पालनहार की ओर से एक दया और सुविधा है।”

यमन और कई अन्य इस्लामी देशों में ब्लड मनी का भुगतान परिवारों के बीच आपसी सहमति से तय होता है। हालाँकि यमन जैसे देश, जहाँ गृहयुद्ध और आर्थिक संकट हैं, वहाँ इतनी बड़ी रकम जुटाना एक चुनौती है।

क्या था पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, निमिषा प्रिया पर आरोप लगे थे कि उन्होंने साल 2017 में एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी को ड्रग्स का ओवरडोज दे दिया था, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं, निमिषा ने अपने बचाव में कहा था कि मृतक ने उनका पासपोर्ट छीन लिया था, जिसे वो वापस पाना चाहती थी। निमिषा ने दावा किया था कि उन्होंने महदी को बेहोशी की दवा दी थी। उसकी हत्या करने का इरादा नहीं था।

निमिषा प्रिया शादीशुदा हैं। केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा अपने पति और बेटी के साथ पिछले लगभग एक दशक से यमन में काम कर रही थीं। इस बीच यमन में गृहयुद्ध शुरु हो गया तो उनका परिवार भारत आ गया था। हालाँकि, यमनी नागरिक द्वारा पासपोर्ट ले लेने के कारण निमिषा वापस नहीं लौट पाईं और ये घटनाएँ घट गईं। इस मामले में उन्हें 2020 में मौत की सजा सुनाई गई।

अब, ब्लड मनी के माध्यम से हो सकता है कि निमिषा मौत की सजा पाने से बच जाएँ। हालाँकि क्या समय रहते यह प्रयास सफल हो पाएगा? यह देखना बाकी है।

चंदन गुप्ता हत्याकांड में सभी 28 दोषियों को उम्रकैद की सजा, NIA कोर्ट ने दिया फैसला: तिरंगा यात्रा निकालने पर इस्लामी भीड़ ने कर दी थी हत्या, 7 साल बाद परिवार को मिला न्याय

चंदन गुप्ता हत्याकांड में लखनऊ की NIA कोर्ट ने दोषियों को सजा सुना दी है। NIA कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इससे पहले उन्हें दोषी ठहराया गया था। चंदन गुप्ता की 26 जनवरी, 2018 को उत्तर प्रदेश के कासगंज में हत्या कर दी गई थी। यह फैसला लगभग 7 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ के NIA कोर्ट ने शुक्रवार (3 जनवरी, 2025) को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में दोषी पाए गए 28 लोगों को उम्रकैद की सजा दी है। इससे पहले गुरुवार को इन्हें दोषी ठराया गया था जबकि 2 आरोपितों को बरी कर दिया गया था। इन्हें सबूत ना होने के चलते बरी किया गया था।

NIA कोर्ट ने चंदन गुप्ता हत्याकांड में आसिफ कुरैशी उर्फ हिटलर, असलम, असीम, शबाब, साकिब, मुनाजिर रफी, आमिर रफी, सलीम, वसीम, नसीम, बबलू, अकरम, तौफीक, मोहसिन, राहत, सलमान, आसिफ जिम वाला, निशु, वासिफ, इमरान , शमशाद, जफर, शाकिर, खालिद परवेज, फैजान, इमरान, शाकिर, जाहिद उर्फ जग्गा को यह उम्रकैद की सजा दी है।

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2018) के दिन चंदन गुप्ता बाकी युवाओं के साथ कासगंज में एक बाइक रैली निकाल रहे थे। यह बाइक रैली तिरंगों के साथ निकाली गई थी। जब यह रैली राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पास पहुँची तो यहीं पर मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया। मुस्लिम युवकों ने हिन्दुओं पर फायरिंग की और पत्थर बरसाए।

चंदन गुप्ता को निशाना बना कर गोली मारी गई, इसके चलते उनकी मौत हो गई। इसके बाद कासगंज में काफी हिंसा हुई। मामले में वसीम, नसीम समेत कई आरोपित पुलिस ने पकड़े थे। इनमें से एक को छोड़ कर बाकी को जमानत भी मिल गई थी। चंदन गुप्ता का परिवार इसके बाद कानूनी लड़ाई लड़ रहा था।

चंदन गुप्ता का परिवार बीते लगभग 7 वर्षों में कई कठिनाइयाँ झेल चुका है। चंदन गुप्ता के भाई और बाकी परिवार को सुरक्षा संबंधी चिंताएँ भी थी। उन पर कई बार समझौते के लिए भी दबाव बनाया गया था। उनके परिवार ने ऑपइंडिया से बातचीत में वादे ना पूरे होने की बात कही थी।

‘काफिर अब तुम्हारा कोई यूज नहीं’: ‘सूरज’ बन कर जाबिर ने हिंदू महिला से बनाया सेक्स-संबंध, फिर किया निकाह… गहने-संपत्ति लेने के बाद घर से निकाला

उत्तराखंड में जाबिर अली नाम के मुस्लिम शख्स ने खुद को सूरज बताते हुए एक हिंदू महिला से दोस्ती कर ली। उसके बाद शादी का झाँसा देते हुए उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान जाबिर ने युवती की अश्लील वीडियो बना ली और बदनाम करने डर दिखाकर उससे जबरन निकाह कर लिया। जाबिर ने महिला की पैसे पर खूब मौज-मस्ती की और जब उसके पैसे खत्म हो गए तो 6 साल बाद उसे छोड़ दिया।

यह मामला उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के किच्छा का है। यहाँ रहने वाली एक महिला ने इस संबंध में पुलिस से शिकायत की है। अपनी शिकायत में महिला ने कहा कि उसके पति जाबिर ने उससे अपनी पहचान छिपाई और अपना नाम सूरज बताया। सूरज बनकर उसने उससे जान-पहचान बढ़ाई। कुछ समय के बाद सूरज बना जाबिर ने उससे प्रेम करने का नाटक किया और शादी के नाम पर शारीरिक संबंध बना लिए।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कठर्रा के गौघाट की रहने वाली अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली 33 साल की पीड़िता ने कहा, “उसने (जाबिर ने) मुझसे प्यार का नाटक किया और एक अश्लील वीडियो भी बना लिया। इसका इस्तेमाल वह ब्लैकमेल कर जबरन निकाह करने के लिए करता था।” बदनामी की आशंका से महिला डर गई। हालाँकि, जाबिर अली अपनी साजिश में लगा रहा।

एक दिन जाबिर अली पीड़िता को जहानाबाद रहने वाली अपनी बड़ी बहन के घर ले गया और वहाँ उससे निकाह करने के लिए पीड़िता को मजबूर करने लगा। पीड़िता ने कहा, “जब मैंने इनकार कर दिया तो जाबिर और उसके भाइयों- अब्बास अली, रियासत, जाकिर और शाकिर ने वीडियो वायरल करने और मुझे जान से मारने की धमकी देने लगे।” आखिरकार पीड़िता निकाह के लिए मजबूर हो गई।

पीड़िता ने बताया कि निकाह के लिए मजबूर करने से पहले वह जाबिर अली को हिंदू समझती थी। हालाँकि, असलियत का पता चलते के बाद काफी देर हो चुकी थी। जाबिर महिला के साथ मारपीट करता था और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालता था। जब पीड़िता इसके लिए तैयार नहीं हुई तो जाबिर और उसके घर वाले उसे जान से मारने की धमकी देने लगे।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा है कि निकाह के समय उसके गले में दो तोला सोने की चेन, एक-एक तोला के दो कान के झुमके, लैपटॉप सहित कई सामान थे। इसके साथ ही उसके पास एक लाख रुपए भी थे। पीड़िता का कहना है कि निकाह के कुछ समय के बाद उसकी संपत्ति खत्म हो गई तो उस पर दहेज लाने का दबाव डाला जाने लगा। आखिरकार पीड़िता को उसके 6 साल के बच्चे के साथ घर से निकाल दिया गया।

महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जाबिर अली के खिलाफ और उसके भाइयों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आरोपितों के खिलाफ दहेज निवारण अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 498A (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पीड़िता ने ऑर्गनाइजर को बताया कि जाबिर एक फकीर है और वह ‘झाड़-फूँक’ का काम करता है। महिला का कहना है, “सूरज बनकर उसने मुझे सम्मोहित कर लिया। उसने जादू-टोना किया और इस हद तक मेरे साथ छेड़छाड़ की कि मैं ठीक से सोच भी नहीं पाती थी। उसने जो कुछ भी कहा या किया, वह मुझे उस समय सही लगा था।”

पीड़िता ने बताया कि जब वह गर्भवती हो गई तो जाबिर ने उसे जबरन निकाह के लिए मजबूर किया। पीड़िता ने कहा, “मैंने कभी अपना नाम या धर्म नहीं बदला और नवरात्रि के दौरान उपवास, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या भोज का आयोजन जैसी हिंदू प्रथाओं का पालन करना जारी रखा। निकाह के बाद जाबिर ने मेरी सभी मूर्तियाँ और धार्मिक पुस्तकें फेंक दीं।”

पीड़िता ने बताया कि उसके बेटे के जन्म के बाद ही उसे पता चला कि जाबिर पहले से ही शादीशुदा था और उसके बच्चे भी थे। पीड़िता का आरोप है कि जाबिर ने यह सब कुछ उसके गहने और पैसे हड़पने के लिए किया था। पीड़िता ने यह भी कहा कि इस दौरान जाबिर और उसके घरवाले उसे काफिर कहकर बुलाते थे और उसकी जाति को लेकर उसे गाली देते थे।

पीड़िता के अनुसार, “जाबिर ने मुझे घर से निकालते हुए कहा कि मैंने अपना काम कर लिया। अब मेरे लिए तुम्हारा कोई यूज नहीं है।” पीड़िता ने यह भी कहा कि उसके बच्चे का जन्म होने के तुरंत बाद जाबिर ने उसका खतना करवा दिया और उसे नमाज आदि पढ़ाने की बात करते हुए उसे मुस्लिम रीति-रिवाज से पालने लगा। हालाँकि, महिला ने इसका विरोध किया तो उसे घर से निकाल दिया।

‘बड़े हिप्स और भारी ब्रेस्ट हो तो 13 साल की लड़की से भी कर लो सेक्स’: समझें छोटी बच्चियों के यौन शोषण को कैसे जायज बताते हैं इस्लामी स्कॉलर, ग्रूमिंग गैंग इसी का नतीजा

इंगलैंड में ग्रूमिंग गैंग का शिकार हुई 1400+ लड़कियों को इंसाफ दिलाने के लिए जहाँ एक तरफ मुहीम छिड़ी हुईी है तो वहीं इसी बीच कुछ इस्लाम के जानकारों की कुछ वीडियो भी सामने आई है। इन वीडियोज में वो तर्क देकर समझा रहे हैं कि कैसे छोटी उम्र की लड़कियों से सेक्स करना जायज होता है।

नीचे वीडियो में यूट्यूबर मोहम्मद हिजाब की बातें सुनें…

मोहम्मद हिजाब, बच्चों के यौन शोषण को सही ठहराने के लिए एक 100 साल की महिला के साथ सेक्स और 13 साल की लड़की के साथ सेक्स का उदाहरण देता है।

इस्लाम का कॉन्सेप्ट समझाते हुए मोहम्मद हिजाब कहता है कि अगर वो 100 साल की महिला के साथ सेक्स करेंगे तो शायद उसे कोई स्वास्थ्य समस्या आ जाए, लेकिन अगर 13 साल की लड़की, जिसके बड़े हिप्स और बड़ी ब्रेस्ट हो तो उसके साथ सेक्स करने में ऐसी कोई समस्या नहीं आएगी।

मोहम्मद हिजाब के यूट्यूब पर 1.28 मिलियन लोग तक जुड़े हुए हैं जहाँ वो लोगों को इस्लाम के बारे में जागरूक करने का दावा करता है लेकिन हकीकत ये है कि इस रीच का इस्तेमाल करके वो न केवल इस्लाम को मानने वालों को कट्टरपंथी बनाता है बल्कि हिंदुत्व के खिलाफ जहर भी खुलकर घोलता है।

दुखद बात ये है कि ऐसी सोच वाला सिर्फ मोहम्मद हिजाब नहीं है। हर दूसरा इस्लामी कट्टरपंथी इसी घृणित मानसिकता का प्रचार करता है कि छोटी लड़कियों से सेक्स करना कैसे जायज है। ग्रूमिंग गैंग का पूरा मामला कट्टरपंथियों की सोच को समझने का सबसे अच्छा जरिया है।

लड़कियों को सड़क पर पड़ी च्विंग गम मानते हैं इस्लामी कट्टरपंथी

पाकिस्तान के कुछ इस्लामी कट्टरपंथियों ने ब्रिटेन में अपनी पूरी गैंग बनाई और चुन-चुन कर उन्हीं गैर-इस्लामी, गोरी लड़कियों को निशाने पर लिया जो उम्र में छोटी (कोई 5, कोई 7, कोई 10) थीं। इसके बाद उनका रेप हुआ, उनके साथ अप्राकृतिक ढंग से सेक्स किया गया, उन्हें कभी किसी के हाथों बेचा गया तो कभी खुद नोचा गया।

शुरू में मामला न खुलने का नतीजा हुआ कि हजार से ज्यादा लड़कियाँ प्रताड़ित की गईं…। बाद में इनके दोषी जब कोर्ट में पहुँचे तो पता चला कि इनके मन में काफिर लड़कियों के लिए कैसा जहर भरा है। पीड़िताओं ने बताया कि ये गैंग गोरी लड़कियों को कचरा और वेश्या मानती है, जिनके साथ वो कुछ भी कर सकते हैं।

कोर्ट रूम में भी एक पाकिस्तानी अपराधी के वकील ने इस बात को कहा था कि उनके मुअक्किल को सिखाया ही इस तरह से गया है कि लड़कियाँ सड़क पर पड़ी एक च्विंग गम जैसी होती हैं।

ऐसी मानसिकता वाले लोगों के लिए अजीब ये बिलकुल भी नहीं कि कोई छोटी बच्चियों से सेक्स की बात करे, वो लड़कियों से हुए रेप की घटनाओं में भी गलती लड़कियों की मानते हैं। ऊपर पाकिस्तानी मुस्लिम को सुन सकते हैं जो कहता है कि बच्ची का अगर गैंगरेप हुआ तो उसमें उसके ‘भाई राशिद’ की गलती नहीं है, बल्कि गलती उस बच्ची की है जो रात में सड़क पर आई।

छोटी बच्चियों से सेक्स करना इस्लामी कट्टरपंथियों के लिए सही

जिम जारविस नाम के सोशल मीडिया क्रिएटर ने अपने हैंडल पर एक वीडियो डाली जिसमें वो मुस्लिमों से कुछ सवाल करते हैं जिसके जवाब में मुस्लिम उन्हें घेरकर खुलेआम कहते हैं कि ये बिलकुल जायज है कि छोटी लड़कियों के साथ सेक्स किया जाए।

युवक विरोध करते हुए फौरन उन्हें बीमार मानसिकता का कहता है लेकिन वहाँ खड़े मुस्लिम उसकी कोई बात सुनने को तैयार तक नहीं होते।

इस्लामी कट्टरपंथी ऐसे लोगों को जेल भेजने के लिए या सजा देने के लिए हर प्रयास करते हैं लेकिन इस्लाम से ऊपर किसी को नहीं होने देते चाहे बात इंसानियत की ही क्यों न हो। यहाँ तक कि महिला इस्लामी स्कॉलर्स तक इस बात को खुलेआम कहती हैं कि मुस्लिम पुरुष काफिर महिलाओं का रेप कर सकते हैं।

सेक्स, निकाह और छोटी बच्चिाँ

मालूम हो कि इस्लाम में प्यूबर्टी आने को लड़की के हर रूप से सयानी होने से जोड़कर देखा जाता है और इस्लामी कट्टरपंथी ऐसा मानते हैं कि इसके बाद लड़की से संबंध बनाना गलत नहीं है। इस्लामी कानून भी कहता है कि अगर लड़की प्यूबर्टी को छूटी है तो उसके साथ निकाह तक हो सकता है। चाहे फिर वो उम्र 12-13 हो या 14-15।

रही बात सेक्स की तो मौजूदा जानकारी के अनुसार, इस पर ईरान के संस्थापक अयातुल्लाह खुमैनी ने अपनी बात रखी हुई है।

उन्होंने कहा,  “लड़की के 9 साल के होने से पहले सेक्स नहीं करना चाहिए। भले ही वह स्थाई या अस्थाई निकाह ही क्यों न हो। इसके अलावा अन्य तमाम हरकतें की जा सकती हैं जिसमें कामुक टच, गले लगाना और पैरों के बीच में प्राइवेट पार्ट रगड़ना शामिल है। यहाँ तक कि ये सब किसी दूध पीती बच्ची के साथ भी जायज है।”

मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की दुकान पर किया हमला, वक्फ प्रॉपर्टी बता सामान फेंका: पीड़ित बोले- PWD का है मालिकाना हक, FIR दर्ज

राजकोट में मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की दुकानों हमला कर दिया। यह हमला दुकान खाली करवाने के नाम पर किया गया। मुस्लिम भीड़ ने दावा किया कि हिन्दुओं की दुकान वक्फ की सम्पत्ति हैं। उन्होंने दुकानों में तोड़फोड़ की और सामान बाहर फेंक दिया। यह हमला रात को किया गया ताकि हिन्दू दुकानदारों को पता ना लगे। इस मामले में पुलिस ने 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जाँच चालू कर दी है। हिन्दू दुकानदारों ने स्पष्ट किया है कि दुकानें PWD की हैं ना कि वक्फ की।

यह घटना 31 दिसंबर, 2024 की रात को घटी। इस मामले में पीड़ित वीरेंद्रभाई कोटेचा ने फारूक मुसानी समेत बाकी लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। इस FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। FIR के अनुसार, फारूक मुसानी और अन्य ने वक्फ बोर्ड के आदेश का हवाला देते हुए राजकोट के पुराने दानपीठ इलाके में दुकानों में तोड़फोड़ की।

उन्होंने दो दुकानों के ताले तोड़ दिए और हिंदू दुकानदारों का सामान सड़कों पर फेंक दिया। गौरतलब है कि ये दुकानें हिंदू व्यापारियों द्वारा दशकों पहले पट्टे पर ली गई थीं और इस घटना के बाद यहाँ के दुकानदार काफी आक्रोशित हैं। FIR दर्ज करवाने वाला शख्स वर्षों से एक दुकान से मंडप सर्विस का काम करता था।

कोटेचा ने FIR में बताया कि ने शुरू में दुकानों की देखभाल नवाब मस्जिद ट्रस्ट द्वारा की जाती रही, लेकिन ये दशकों से पट्टे पर चल रही हैं। बाद में यह सामने आया कि जिस जमीन पर दुकानें बनी थीं, वह असल में PWD विभाग की थी। इसी मस्जिद और वक्फ बोर्ड के आदेश का हवाला देते हुए उनकी दुकानों पर हमला किया गया।

यह हमला फारूक मुसानी के नेतृत्व में हुआ। फारूक मुसानी ने दावा किया कि उसके पास वक्फ बोर्ड का आदेश है जिसमें दुकानों को खाली करवा कर नवाब मस्जिद को देने की बात कही गई है। फारूक ने 19 दिसम्बर, 2024 का एक कथित आदेश भी दिखाया।

ऑपइंडिया ने वीरेंद्रभाई कोटेचा से इस मामले में बात की है। उन्होंने बताया है कि फारूक मुसानी सहित लगभग 20 से 25 लोगों की एक भीड़ ने एकाएक उनकी दुकान पर धावा बोल दिया। उन्होंने कहा, “उन्होंने जबरन ताले तोड़ दिए और सामान सड़क पर फेंकना शुरू कर दिया। अभी भी मेरी दुकान का सामान सड़क पर पड़ा है।”

कोटेचा ने आगे बताया, “वक्फ बोर्ड का आदेश दिखाए जाने के बाद, हमने अहमदाबाद में अपने वकील से सलाह ली थी। वक्फ बोर्ड के नियमों के अनुसार, किसी भी संपत्ति पर कब्जे के लिए तीन महीने पहले सूचना दी जाती है। हालाँकि, हमें एक भी नोटिस नहीं मिला। आदेश 19 दिसंबर को दिया गया और ताले सीधे 31 दिसंबर को तोड़े गए, जो नियमों के खिलाफ है।”

इस मामले पर बात करते हुए डीसीपी जगदीश बांगरवा ने कहा, “फारूक मुसानी सहित 5 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। एक पत्र भी मिला है जिसमें दावा है कि वक्फ बोर्ड के आदेश के बाद दुकानें खाली कर दी गई हैं। इस पत्र का सत्यापन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया, “वक्फ बोर्ड के निर्देशों में कहा गया है कि सही प्रक्रिया का पालन करते हुए कब्जा लिया जाना चाहिए। इसके अंतर्गत नोटिस जारी करना और पुलिस की मौजूदगी में बेदखली करना है। चूंकि इन नियमों का पालन नहीं किया गया, इसलिए कार्रवाई शुरू की गई है।”

पुलिस ने दुकानों का कब्जा हिंदू व्यापारियों को वापस लौटा दिया है। यह भी सामने आया है कि जिन दुकानों को वक्फ संपत्ति बताया जा रहा था, वे असल में अतिक्रमण की शिकार थीं और PWD विभाग की थीं।

लव जिहाद को बरेली कोर्ट ने बताया था अंतरराष्ट्रीय साजिश, मुस्लिम शख्स समुदाय के खिलाफ बताते हुए पहुँचा सुप्रीम कोर्ट: शीर्ष न्यायालय बोला- तथ्यों पर आधारित है टिप्पणी, सनसनीखेज मत बनाइए

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 जनवरी) को बरेली कोर्ट की टिप्पणियों को ‘सनसनीखेज’ बनाने का प्रयास करने के लिए एक व्यक्ति को फटकार लगाई। दरअसल, बरेली कोर्ट ने मोहम्मद आलिम (या अलीम) नामक व्यक्ति को लव जिहाद मामले में दोषी ठहराते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश शैली के धर्मांतरण को लेकर चेतावनी दी थी। कोर्ट के इन टिप्पणियों को हटाने के लिए अनस नामक शख्स ने जनहित याचिका दायर की थी।

अनस ने अधिवक्ता मनस पी हमीद के माध्यम से दायर अपनी जनहित याचिका में कहा था कि बरेली कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियाँ मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हैं। जस्टिस हृषिकेश रॉय और एसवीएन भट्टी की पीठ ने अनस की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका दायर करने वाला उस मामले में पक्षकार नहीं था और वह इस विषय को ‘सनसनीखेज’ बना रहा था।

अधिवक्ता हमीद ने भी माना कि उनका मुवक्किल उत्तर प्रदेश के संबंधित मामले में पक्षकार नहीं था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस रॉय ने कहा, “आप एक व्यस्त व्यक्ति हैं… बस किसी ऐसी चीज़ में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जो आपके लिए बिल्कुल भी काम की नहीं है। आप इस तरह के मामले के लिए अनुच्छेद 32 याचिका दायर नहीं कर सकते हैं।”

जस्टिस भट्टी ने सवाल उठाया कि अदालत इस तरह के स्वतंत्र मुकदमे से जुड़ी टिप्पणियों को कैसे हटा सकती है। उन्होंने कहा, “यह मानते हुए कि सत्र न्यायालय के समक्ष साक्ष्य से एक विशेष निष्कर्ष की पुष्टि होती है और एक निष्कर्ष दर्ज किया जाता है जो हमारे समक्ष याचिकाकर्ता से नहीं है, क्या इसे इस तरह के स्वतंत्र मामले में हटा दिया जाना चाहिए? मामले को इस तरह से सनसनीखेज बनाना सही नहीं है।”

शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य के आधार पर की गई टिप्पणियों को अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका के आधार पर हटाया नहीं जा सकता। संविधान का अनुच्छेद 32 कहता है कि नागरिक अपने मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए कोर्ट जा सकते हैं। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह दावा नहीं कर सकता कि साक्ष्य के आधार पर की गई टिप्पणियों ने उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।

क्या कहा था बरेली कोर्ट ने?

बरेली कोर्ट ने 30 सितंबर 2024 को अपने फैसले में मोहम्मद आलिम को एक हिंदू महिला के साथ लव जिहाद करने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उस पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका था। अपने बेटे की करतूत में सहयोगी बने आलिम के अब्बा साबिर को भी 2 साल की कैद की सजा गई है। अदालत ने भारत में पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी हालात पैदा करने की साजिश चलने की आशंका जताई थी।

मोहम्मद आलिम ने आनंद बनकर हिंदू महिला को फाँसा था और उसके साथ यौन संबंध बनाकर धर्मांतरण कर निकाह करने के लिए दबाव बनाया था। इसके लिए वह महिला के साथ हिंसा भी करता था। अपने फैसले में बरेली कोर्ट ने लव जिहाद को भारत में कुछ धर्म विशेष के लोगों द्वारा जनसंख्या वृद्धि का हथियार बताया था। साथ ही इसे धर्मान्तरण की एक अंतरराष्ट्रीय साजिश करार दिया था।

बरेली जिला के अपर सत्र न्यायाधीश (फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) रवि कुमार दिवाकर ने अवैध मतांतरण को देश की एकता व सम्प्रभुता के लिए खतरा बताया था। इसके साथ ही उन्होंने इस तरह की गतिविधियों में विदेशी फंडिंग होने की भी आशंका जाहिर की थी। उन्होंने यह भी आशंका जाहिर की थी कि अगर भारत में इस पर अंकुश नहीं लगा तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

क्या था पूरा मामला?

बरेली जिले का यह पूरा मामला साल 2022 का है। तब आलिम ने खुद को आनंद बताते हुए हिन्दू लड़की से दोस्ती की थी। वह हाथ में कलावा बाँधता था और मंदिर भी जाता था। पीड़िता कम्प्यूटर की कोचिंग करने जाती थी जहाँ अ उसका पीछा करता था। किसी तरह उसने लड़की को अपने झाँसे में ले लिया। उसके बाद शादी का झाँसा देते हुए 13 मार्च 2022 को आलिम ने एक मंदिर में पीड़िता की माँग भरी।

शादी का दिखावा करने के बाद आलिम ने लड़की से कई बार रेप किया। इसके कारण पीड़िता गर्भवती हो गई। उसने आलिम पर घरवालों के मुताबिक शादी का दबाव बनाया तो आलिम इससे मुकरने लगा। उसने पीड़िता का गर्भपात भी करवा दिया। मई 2023 में पीड़िता आलिम के घर पहुँच गई। यहाँ पर उसे पता चला कि जिसे वह आनंद समझ रही थी, वह मुस्लिम है और उसका नाम आलिम है।

इसके बाद पीड़िता ने आलिम के परिजनों को इसके बारे बताई तो उन्होंने पीड़िता की ही पिटाई शुरू कर दी। पिटाई के साथ आलिम के अब्बा साबिर ने निकाह के लिए पीड़िता को इस्लाम कबूल करने का विकल्प दिया। लड़की ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। कुछ ही दिनों में कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी गई थी।

पूरा संभल शहर ही बता दिया वक्फ प्रॉपर्टी, कोतवाली-डाकघर और कल्कि मंदिर पर भी ठोंका दावा: वक्फनामा निकला फर्जी, पुलिस बोली- अब करेंगे मुकदमा

संभल में विवादित जामा मस्जिद के सामने पुलिस चौकी बनने के बाद पूरे शहर को ही वक्फ सम्पत्ति बता दिया गया है। संभल का 4 किलोमीटर का इलाका वक्फ की सम्पति होने का दावा एक फर्जी वक्फनामे में किया गया है। इसको लेकर जिला प्रशासन को कुछ कागज भी कुछ मुस्लिमों ने दिए थे। जिन लोगों ने दावा किया है, उनके खिलाफ अब कार्रवाई की तैयारी हो रही है। संभल के जिला प्रशासन ने अब कई वक्फ संपत्तियों की जाँच करवाने की बात कही है, मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।

मुस्लिमों ने क्या दावा किया?

संभल में मुस्लिमों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जामा मस्जिद के 4 किलोमीटर चौहद्दी का इलाका ही वक्फ की सम्पत्ति बता दिया है। उन्होंने दावा किया कि 1929 में किसी अब्दुल समद नाम के आदमी ने यह सारी सम्पत्ति मदरसा बनाने के लिए वक्फ को दे दी थी। संभल में विवादित जामा मस्जिद के सामने बनाई गई पुलिस चौकी, शहर की कोतवाली और यहाँ तक कि कल्कि मंदिर को भी वक्फ की सम्पत्ति बता दिया गया है। इसको लेकर संभल जिले के डीएम राजेन्द्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई को मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल ने कुछ कागज सौंपे हैं।

डीएम-एसपी ने क्या बताया?

दोनों अधिकारियों ने इस संबंध में गुरुवार (2 जनवरी, 2025) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इन दावों की सच्चाई बताई है। संभल जिले के डीएम राजेन्द्र पैंसिया ने कहा, “संभल जिले के विवादित धर्मस्थल के सामने बन रही सत्यव्रत चौकी को लेकर एक प्रतिनिधि मंडल हमसे मिला था और कुछ कागज सौंपे थे। उन्होंने कहा था कि विवादित धर्मस्थल के चारों तरफ 4 किलोमीटर का इलाका वक्फ है… 23 अगस्त, 1929 को मोहम्मद अब्दुल समद का किया गया एक बिना रजिस्टर्ड वक्फनामा सामने आया है। इसमें नम्बर 1 से लेकर नम्बर 20 तक की संपत्तियों का जिक्र है।”

डीएम पैंसिया ने आगे बताया, “इस दावे को लेकर 3 सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इसमें SDM, CO और EO ने जाँच की है। लेकिन अभी तक इन जमीनों को लेकर किसी ने हमारे सामने मालिकाना हक़ का दावा नहीं रखा है। इसके अलावा इस वक्फनामे में दर्ज संपत्तियों की जाँच करवाने पर इनमें रहने वाले किसी व्यक्ति या किसी रिकॉर्ड का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। तीसरी बात यह है कि दो गाँवों के 4 किलोमीटर के बीच दूरी की जमीन वक्फ बताई गई है, ये बिना रजिस्टर्ड है और ना ही इसका कोई मालिक है। इसमें मालिकाना हक़ भी नहीं दिया है।”

डीएम पैंसिया ने इसके बाद जमीनों के वक्फ होने को लेकर दावे को लेकर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि कथित वक्फनामे में संभल जिले की हजारों बीघा जमीन वक्फ को दी गई और कहा गया कि यह मदरसा निर्माण के लिए है। उन्होंने प्रश्न पूछा कि क्या मदरसा बनाने के लिए हजारों बीघा जमीन दी जाती है, इसके अलावा इस वक्फनामे में यह जिक्र नहीं है कि मदरसा कहाँ बना है या बनेगा। डीएम ने बताया कि इस वक्फनामे में कल्कि मंदिर, पुलिस चौकियाँ, डाकघर, कोतवाली और कल्कि मंदिर समेत सब पर दावा कर दिया गया है।

फर्जी लगते हैं दावे

डीएम संभल राजेन्द्र पैंसिया ने कहा है कि अगर इन संपत्तियों को वक्फ मान भी ले तो इनका मौखिक रूप से क्रय-विक्रय कैसे हो रहा है। उन्होंने कहा कि जाँच के आधार पर इसमें संपत्तियों पर किए गए दावे और वक्फनामे में लगाए गए कागज फर्जी मालूम होते हैं। इसमें अब आगे हम कानूनी कार्रवाई करेंगे। एसपी कृष्ण बिश्नोई ने कहा है कि दिए गए वक्फनामे के आधार पर तो संभल की कोतवाली भी वक्फ सम्पत्ति है। उन्होंने कहा है कि अब सब वक्फ सम्पत्ति की जाँच होगी और जहाँ भी फर्जीवाड़ा मिलेगा, उस मामले में मुकदमा कायम होगा।

संभल एसपी ने बताया है कि अब इस वक्फनामे के मामले में फर्जीवाड़े पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा और जाँच के आधार पर लोगों को आरोपित बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संभल में वक्फ की संपत्तियों की अगर खरीद-बिक्री अवैध तरीके से हुई है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा है कि इस मामले में भी मुकदमे दर्ज किए जाएँगे।

5 साल की बच्ची तूने सेक्स के लिए ‘हाँ’ कहा था… और वो बाप जो अपनी ही बेटी को गैंगरेप से बचाने के लिए हो गया गिरफ्तार: इंग्लैंड में मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग को ऐसे बचाती है पुलिस

इंगलैंड में ग्रूमिंग गैंग का काला सच दोबारा से सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बीच कुछ ऐसी कहानियाँ निकलकर सामने आ रही हैं जिनमें पुलिस की भूमिका को सुन कोई भी हक्का-बक्का हो जाए। कल एक पिता की आपबीती सामने आई थी जिन्होंने अपनी बेटी को ग्रूमिंग गैंग से छुड़ाने का फैसला लिया, लेकिन जब वो उस स्थान पर पहुँचे तो पुलिस ने वहाँ पहुँचकर उन्हें अरेस्ट कर लिया।

वीडियो में पिता को कहते सुन सकते हैं कि एक बार उन्हें कॉल आई जिसमें बताया गया कि ग्रूमिंग गैंग ने उनकी बेटी को कहाँ रखा गया है। वो चूँकि उस जगह के करीब ही थे तो वो उस अपार्टमेंट में गए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और फिर अंदर देखा तो कुछ लोग पर्दे के पीछे थे। इसके बाद पुलिस भी वहाँ 5 मिनट के भीतर आ गई लेकिन उन्होंने आरोपितों को पकड़ने की बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया और सवाल पूछा- “तुम यहाँ क्या कर रहे हो।” इसके बाद पुलिस फिर उस पिता को उनके घर लेकर गई और वहाँ भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले को एलन मस्क ने भी अपनी टाइमलाइन पर उठाया और हर व्यक्ति की गिरफ्तारी की माँग की जिसके कारण उस पिता के साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ।

अब इसी क्रम में एक पीड़िता की भी वीडियो सामने आई है। पीड़िता बता रही है कि जब उसने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में सामने आकर सीएसई टीम के जासूस को बताया, तो कार्रवाई की बजाय ये पूछा गया कि क्या तुमने सेक्स के लिए हाँ कहा था। पीड़िता ने बताया कि वो केवल पाँच साल की थीं जब उनके साथ ये सब हुआ था और तब बाकी के 96.5% केसों की तरह सीपीएस ने कोर्ट में उनका मामले में भी आरोपितों को कोर्ट तक ले जाने से मना कर दिया था।

पुलिस प्रशासन से निराश होने के बाद पीड़िता नेशनल टीवी पर गई और शहर में हो रहे बाल यौन शोषण के बारे में टीवी पर सब कुछ बताया। पीड़िता कहती हैं कि उनके इस कदम के बाद पुलिस दौड़ी-दौड़ी उनके दरवाजे आई और उन्हें अपने साथ बयान देने के लिए थाना चलने को कहा। पीड़िता के मुताबिक पुलिस उन्हें सिर्फ इसलिए ले जाना चाहती थी ताकि उन्हें चुप करवा सके।

ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ एक्शन

बता दें कि ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ की गई कार्रवाई में पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई एक विशेष पुलिस टास्कफोर्स द्वारा की गई, जिसे अप्रैल 2023 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा स्थापित किया गया था। इस टास्कफोर्स का उद्देश्य बाल यौन शोषण और ग्रूमिंग से संबंधित मामलों की जाँच को बेहतर बनाना और बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना था।

यह टास्कफोर्स इंग्लैंड और वेल्स के सभी 43 पुलिस बलों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसमें विशेषज्ञ अधिकारी और डेटा विश्लेषक शामिल हैं, जो ग्रूमिंग गैंग के मामलों की जाँच पहले भी कर चुके हैं। इस टास्कफोर्स की वजह से 4,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जा चुकी है।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। ग्रूमिंग गैंग चलाने वाले दरिंदों का साफ मानना था कि गोरी लड़कियाँ कचरा और वेश्या हैं इनका इस्तेमाल कैसे भी हो सकता है।

हैरानी की बात ये है कि लड़कियों को टारगेट करने वाले अपना धंधा एक दशक तक ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों (लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, रोशडेल, रोदरहैम आदि) में चलाते रहे लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस पर कोई एक्शन तक नहीं लिया। नतीजतन 1997 से 2013 तक एशियाई देशों (मुख्यत: पाकिस्तान) के इस्लामी कट्टरपंथी 1400 लड़कियों को अपने निशाना बना चुके थे। मामले का खुलासा आखिर में तब हुआ कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर ध्यान दिया। इन्हीं लोगों की पहल से इस मामले में एक स्वतंत्र रिपोर्ट आई जिसने इस मुद्दे को उठाया और पीड़िताएँ सामने आईं।

प्लास्टर से छिपाए मंदिर होने के सबूत, घंटे वाली जगह पर झूमर लटकाया: संभल के जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश, भीतर मिला वटवृक्ष, कुआँ और कलाकृतियाँ

उत्तर प्रदेश के संभल में विवादित शाही जामा मस्जिद ढाँचे की सर्वे रिपोर्ट कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने सीलबंद लिफाफे में चंदौसी कोर्ट को सौंप दी है। यह रिपोर्ट 45 पन्नों की है। सूत्रों के अनुसार, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह की अदालत में पेश किए गए रिपोर्ट में ढाँचे वाली जगह पर हिंदू मंदिर होने के पुख्ता सबूत हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस सीलबंद लिफाफे को खोला जाएगा।

जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिद परिसर में दो बरगद के पेड़ हैं, जो आमतौर पर हिंदू मंदिरों से जुड़े होते हैं और वहाँ उनकी पूजा होती है। इसके अलावा, वहाँ एक कुआँ भी है, जिसका एक हिस्सा परिसर में और दूसरा बाहर स्थित है। कुएँ के बाहरी हिस्से को ढक दिया गया था। सर्वे रिपोर्ट में लगभग साढ़े चार घंटे की वीडियोग्राफी शामिल थी, जिसके दौरान लगभग 1,200 तस्वीरें ली गई थीं।

सर्वेक्षण के पहले दिन 19 नवंबर 2024 को करीब डेढ़ घंटे की वीडियोग्राफी की गई थी। इसके बाद 24 नवंबर को तीन घंटे की वीडियोग्राफी की गई थी। जामा मस्जिद के अंदर पचास से ज़्यादा फूलों के पैटर्न की पहचान की गई है। इसके अलावा, मूल संरचना में बदलाव के साथ-साथ नए निर्माण के संकेत भी मिले हैं। मंदिर के स्वरूप पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया है और उस पर रंग-रोगन किया गया है।

कहा जा रहा है कि विवादित मस्जिद में ऐसे प्रतीक हैं, जो उस ऐतिहासिक काल के मंदिरों और हिंदू स्थलों पर हुआ करते थे। मंदिर की मूल वास्तुकला को उसके दरवाजों, खिड़कियों और विस्तृत रूप से सजाए गए दीवारों पर प्लास्टर और पेंट के जरिए छिपा दिया गया है। गुंबद के बीच घंटा लटकाने वाली लोहे की जंजीर भी मिली है। इस पर फिलहाल झूमर लटकाया गया है।

इस तरह की जंजीर आमतौर पर मंदिरों में घंटा लटकाने या शिवलिंग पर 24 घंटे जलाभिषेक करने वाले घड़े को टाँगने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गुंबद के हिस्से को प्लेन कर दिया गया है। मंदिर के दीवारों, झरोखों और विभिन्न तरह से अलंकृत दीवारों पर करीब 50 कलाकृतियाँ मिली हैं। इन कलाकृति को ढकने के लिए उन पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया है।

कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने कहा, “19 नवंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें दावा किया गया था कि शाही जामा मस्जिद मूल रूप से हरिहर मंदिर है। उसी दिन मस्जिद का सर्वेक्षण किया गया था। जब यह पूरा नहीं हो सका तो कोर्ट कमिश्नर ने DM और SP के साथ आगे के सर्वेक्षण कार्य के लिए 24 नवंबर को फिर से मस्जिद का दौरा किया।”

उन्होंने बताया, “इस दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें करीब चार लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट पहले 9 दिसंबर को कोर्ट में पेश की जानी थी, लेकिन कोर्ट कमिश्नर ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 15 दिन का अतिरिक्त समय माँगा। आज करीब 40 से 45 पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई है।” बता दें कि सर्वे के बाद कट्टरपंथियों द्वारा हमला कर दिया गया था, जिससे संभल में सांप्रदायिक तनाव हो गया था।

संभल में पुलिस और सर्वे टीम पर हमला करके हिंसा भड़काने वाले लोगों के खिलाफ़ कार्रवाई जारी है। इस मामले में अब तक 50 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। इनमें से कई लोग दिल्ली तक से गिरफ्तार हुए हैं। हिंसा में शामिल अन्य करीब 90 लोगों को पकड़ने के लिए पुलिस टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस मामले में अभी तक 11 मामले दर्ज किए गए हैं।

कहा जाता है कि संभल के कोट गर्वी में स्थित शाही जामा मस्जिद मुगल काल की है। यह जिले के सबसे पुराने स्मारकों में से एक है। मस्जिद के बारे में दावा किया जाता है कि इसे मीर बेग ने बाबर के निर्देश पर 1529 में बनवाया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद हिंदुओं के हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। इसको लेकर कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। कोर्ट के आदेश पर यहाँ सर्वे किया गया था।