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संभल में हिंसा वाली एक और जगह बन रही पुलिस चौकी, कुख्यात वाहन चोर शारिक साठा की जब्त की गई है जमीन: आतंकी दाऊद इब्राहिम और ISI संग मिल कर रहा काम

उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा के बाद पुलिस ने विवादित शाही जामा मस्जिद के ठीक सामने पुलिस चौकी बनाई है। अब आतंकी दाऊद इब्राहिम के करीबी शारिक साठा से जब्त की गई जमीन पर पुलिस चौकी बनाने का काम शुरू किया गया है। देश के सबसे बड़े ऑटोरिक्शा चोर की जब्त यह जमीन हिंदूपूरा खेड़ा इलाके में स्थित है। हिंसा की चपेट में यह इलाका भी आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने साठा की करीब एक करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी।

दरअसल, कोर्ट के आदेश पर विवादित जामा मस्जिद ढाँचे का सर्वे किया जा रहा था। सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को कट्टरपंथी मुस्लिमों ने सर्वे टीम और पुलिस पर हमला कर दिया था। हजारों की भीड़ ने पुलिस पर फायरिंग, पथराव और वाहनों में आगजनी की थी। इसी दौरान हिंदूपुरा खेड़ा क्षेत्र में भी भीड़ ने हिंसा की थी। यहाँ एक दरोगा की मैगजीन लूटकर बाइक में आग लगा दी थी।

इसके साथ ही डीएम और एसपी की मौजूदगी में कट्टरपंथियों ने पुलिस पर पथराव व फायरिंग की गई थी। इसी जगह पर गोली लगने से पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई और उनके पीआरओ संजीव कुमार घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने कई आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरे आरोपितों की अभी भी तलाश जारी है।

इसके पहले विवादित मस्जिद के ठीक सामने खाली पड़ी जमीन पर पुलिस चौकी का निर्माण कराया गया है। उसका नाम सत्यव्रत चौकी रखा गया है। संभल का प्राचीन नाम सत्यव्रत नगर ही है। अब हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित दूसरी जगह हिंदूपुरा है, जहाँ एक दूसरी चौकी का निर्माण कराया जा रहा है। संभल हिंसा में शारिक साठा की संलिप्तता सामने आई है। उसने यहाँ हथियार एवं पैसे आदि भेजे थे।

मूल रूप से मेरठ के दीपा सराय का रहने वाला शारिक साठा की यह जमीन गैंगस्टर ऐक्ट में जब्त की गई है। पिछले कुछ समय समय साठा भागकर दुबई में रह रहा है। शारिक साठा कभी ट्रक और बस पर हेल्पर का काम करता था। इसके बाद अपराधियों के संपर्क में आया और चोरी वह लूटपाट, चोरी, डकैती और वाहन चोरी जैसी घटनाओं में शामिल हो गया।

शारिक साठा ने एक गैंग बनाया और वाहनों की चोरी करने लगा। वह लग्जरी गाड़ियों तक को नहीं छोड़ता था। गाड़ियों को चुराने के बाद वह उन्हें नेपाल में बेच देता था। इस तरह शारिक साठा भारत के सबसे बड़े वाहन चोर गिरोह का सरगना बन बैठा। उसने खूब अवैध कमाई भी की। एक मामले में शारिक को जेल हुई और साल 2018 में वह जेल से छूटा तो फर्जी पासपोर्ट बनाकर दुबई भाग गया।

कुछ रिपोर्ट का कहना है कि वह साल 2020 में दुबई भागा था। साल 2021 में उसके दुबई में होने का पता चला था। साठा पर देश भर में 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। नखासा में ही लूट, डकैती, वाहन चोरी, गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत 12 मामले दर्ज हैं। एसपी कृष्ण विश्नोई के मुताबिक, पुलिस उसके आपराधिक नेटवर्क को उजागर करने के लिए अन्य राज्यों से भी जानकारी जुटा रही है।

दुबई भागने के बाद वह उसका गैंग गाड़ी चोरी के बजाय जाली नोट का कारोबार करते हैं। शारिक साठा इस काम के लिए पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI और दाऊद इब्राहिम के गैंग से जुड़ा हुआ है। उसके चेले भारत में उसका कारोबार संभालते हैं और जरूरत पड़ने पर दुबई उससे मिलने भी जाते हैं। 2021 में उसके दो गुर्गे ₹4 लाख के नकली नोट के साथ पकड़े गए थे।

उन्होंने उसका नाम लिया था। यह दोनों भी संभल के रहने वाले थे। संभल पुलिस को अब शक है कि 24 नवंबर, 2024 को हुई हिंसा में उसके गुर्गे शामिल थे और उसने ही दुबई से इन्हें हिंसा के लिए मदद भेजी थी। पुलिस को हिंसा के कुछ दिन बाद नाली में पाकिस्तान की सरकारी आयुध फैक्ट्री में बने कारतूस भी बरामद किए थे। आशंका है कि कारतूस भी किसी गुर्गे के जरिए शारिक ने ही भिजवाए थे।

‘किसी से युद्ध को लेकर निष्पक्ष नहीं… लेकिन शांति चाहता हूँ’: PM मोदी ने अपने पहले पॉडकास्ट में बताई ‘दिल्ली को समझने’ वाली बात भी

तकनीक का इस्तेमाल करके अलग-अलग माध्यमों के जरिए जनता से जुड़े रहने का प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से करते रहे हैं। कभी ‘मन की बात’ करके, तो ‘कभी परीक्षा पे चर्चा’ के जरिए। इस बार उन्होंने एक नए माध्यम को आधार बनाया है-पॉडकॉस्ट को।

पीएम मोदी ने पहली बार जीरोधा के फाउंडर निखिल कामथ को अपना इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने राजनीति से परे भी कई मुद्दों पर चर्चा की। वीडियो में जब कामथ ने उनसे कहा, “मैं यहाँ आपके सामने बैठा हूँ और बात कर रहा हूँ, लेकिन मुझे घबराहट बहुत ज्यादा है।। यह मेरे लिए एक कठिन बातचीत है।”

इस पर पीएम ने निखिल कामथ से कहा कि वो भी पॉडकॉस्ट में पहली बार आए हैं। उन्हें भी लग रहा है कि पता नहीं कि ये पॉडकॉस्ट दर्शकों को पसंद आएगा या नहीं।

प्रधानमंत्री ने इस पॉडकॉस्ट में कामथ से कहा कि राजनीति में हर इंसान को एक मिशन से आना चाहिए। उन्होंने इस इंटरव्यू में ये भी पक्ष रखा कि आज के समय दुनिया जिस युद्ध की स्थिति में है उसमें उनका ये मत साफ है कि वो न्यूट्रल नहीं है बल्कि सिर्फ शांति चाहते हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में पहले और दूसरे टर्म को लेकर पीएम ने कहा- “पहली टर्म में तो लोग मुझे भी समझने की कोशिश करते थे और मैं भी दिल्ली को समझने की कोशिश कर रहा था।”

मानवीयता को लेकर उन्होंने कहा- “जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मेरा एक भाषण था और सार्वजनिक रूप से मैंने कहा था गलतियाँ होती हैं। मुझसे भी होती हैं। मैं भी मनुष्य हूँ, मैं कोई देवता थोड़ी हूँ।’

कामथ ने जब पीएम से कहा कि वो एक ऐसे घर में पले-बढ़े जहाँ राजनीति को काफी नकारात्मक रूप से देखा जाता था तो इस पर पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर आपको अपनी कही बातों पर अब भी यकीन होता तो आज हम लोग इस बातचीत को ही नहीं कर रहे होते।

बता दें कि इस ट्रेलर के पॉडकॉस्ट को यूट्यूब, एक्स पर बहुत पसंद किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी झलक शेयर की है। उन्होंने इस ट्रेलर को साझा करते हुए कहा- “मुझे आशा है कि आप सभी इसका उतना ही आनंद लेंगे जितना हमें आपके लिए इसे बनाने में आया!”

CJI और सुप्रीम कोर्ट के बाकी जजों के खिलाफ जाँच नहीं कर सकता लोकपाल, लेकिन PM, केन्द्रीय मंत्री समेत बाक़ी सभी दायरे में: शिकायत पर दिया फैसला

लोकपाल ने कहा है कि देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के बाकी जज उसकी जाँच के दायरे में नहीं आते। लोकपाल ने यह फैसला पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ के खिलाफ दर्ज करवाई गई एक शिकायत पर सुनाया है। उनके खिलाफ शिकायत तब की गई थी जब वह CJI के पद पर थे। लोकपाल ने यह शिकायत भी ख़ारिज कर दी।

लोकपाल ने इस शिकायत को लेकर कहा, “असल मुद्दा, जिसका उत्तर सबसे पहले दिया जाना चाहिए, वह यह है कि क्या CJI या सुप्रीम कोर्ट के जज लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 14 के अनुसार लोकपाल के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।” लोकपाल कानून की धारा 14 में उन पदों के नाम नाम लिखे हैं, जिनके खिलाफ लोकपाल जाँच हो सकती है।

लोकपाल क़ानून की धारा 14 में लिखा है कि देश के प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, सांसद और ग्रुप A,B,C और D के कर्मचारी तथा किसी सोसायटी, ट्रस्ट, बोर्ड, बॉडी के सदस्य या चेयरमैन समेत और किसी भी शख्स, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का आरोप है, उसके खिलाफ लोकपाल जाँच कर सकता है।

CJI के खिलाफ की गई शिकायत पर सुनवाई में लोकपाल ने इसी धारा 14 का हवाला देते हुए कहा कि जाँच सिर्फ उनके खिलाफ हो सकती है जिनका नाम इस क़ानून में लिखा है। लोकपाल ने अपने फैसले में कहा कि यही लोग लोकपाल की जाँच के दायरे में आते हैं।

लोकपाल ने कहा कि इसमें CJI या सुप्रीम कोर्ट के जज का नाम नहीं लिखा गया ऐसे में यह इसके अंतर्गत नहीं आते। इसके अलावा लोकपाल ने 2013 के क़ानून में दी गई ‘बॉडी’ की परिभाषा को भी सुप्रीम कोर्ट के ऊपर नहीं लागू पाया। लोकपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ना ही संसद के किसी अधिनियम से बना है और ना ही वह पैसे के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर है, ऐसे में वह ‘बॉडी’ की परिभाषा में नहीं आता।

लोकपाल ने यह सभी तर्क रखते हुए अपने फैसले में कहा, “ऐसे में इस दृष्टांत के अनुसार CJI और सुप्रीम कोर्ट के बाकी कार्यरत जज लोकपाल की जाँच के दायरे में नहीं आएँगे।” लोकपाल ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ के खिलाफ दायर की शिकायत भी ख़ारिज कर दी। लोकपाल ने कहा कि हाई कोर्ट के जजों के मामलों में यह नियम लागू नहीं होगा।

इस शिकायत में आरोप था कि पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है और एक राजनीतिक पार्टी तथा एक राजनीतिक व्यक्ति को फायदा पहुँचाया है, जो कि शक्तियों का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार है। यह शिकायत अक्टूबर, 2024 में दी गई थी, तब डीवाई चंद्रचूड़ CJI थे। वह नवम्बर, 2024 में रिटायर हो गए थे।

यह फैसला लोकपाल के चेयरमैन के तौर पर जस्टिस AM खानविलकर ने सुनाया है। जस्टिस खानविलकर स्वयं भी सुप्रीम कोर्ट में जज रहे हैं। वह 2016 में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किए गए थे। उनका सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर कार्यकाल 2022 तक रहा था।

कर्नाटक के सरकारी अस्पताल ने नहीं दिया आयुष्मान योजना का लाभ, वरिष्ठ नागरिक ने की आत्महत्या: NRHC ने माँगा सरकार से जवाब

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक सरकारी अस्पताल द्वारा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत इलाज से इनकार किए जाने पर 72 वर्षीय एक वरिष्ठ नागरिक ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) लेते हुए केंद्र और कर्नाटक सरकार से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट माँगी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (Cancer Hospital) में हुई, जहाँ अस्पताल ने एक वरिष्ठ नागरिक को ₹5 लाख की चिकित्सा सहायता देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि राज्य सरकार के आदेश अभी तक नहीं पहुँचे हैं। एनएचआरसी ने इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला बताते हुए कहा कि अगर वरिष्ठ नागरिकों को उनके कल्याण के लिए बनाई गई योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, तो यह उनके जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी कर यह भी पूछा है कि राज्य और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में योजना का क्रियान्वयन कैसा चल रहा है।

गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana -AB PM-JAY) का उद्देश्य गरीब और वरिष्ठ नागरिकों को स्पेशल हेल्थ सर्विस देना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को इलाज के लिए ₹5 लाख तक का कवर दिया जाता है। लेकिन बेंगलुरु की इस घटना ने दिखाया कि योजना के सही ढंग से लागू न होने के कारण नागरिकों को इसका लाभ नहीं मिल रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कर्नाटक में अन्य सरकारी अस्पतालों में भी योजना के तहत इलाज देने में रुकावटें आ रही हैं। योजना के लाभार्थियों से अनायास के कागजों की माँग की जा रही है और फिर सरकारी आदेशों की कमी के नाम पर योजनाओं का लाभ नहीं दिया जा रहा है।

समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं: इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फिर से विचार करने से किया इनकार, समीक्षा याचिकाओं को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 जनवरी 2025) को भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने पर विचार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्णय को चुनौती देने वाली समीक्षा याचिकाओं में कहा गया था कि सर्वोच्च न्यायालय समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं देने के अपने पुराने फैसले की समीक्षा करे। हालाँकि, शीर्ष न्यायालय ने इन याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया।

जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने चैंबर में समीक्षा याचिकाओं पर विचार किया। इसके बाद इन्हें खारिज कर दिया। अपने पुराने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी देने का कोई संवैधानिक आधार नहीं है। जुलाई 2024 में जस्टिस संजीव खन्ना ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

इसके बाद इन समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई के लिए एक नई पीठ का गठन किया गया था। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा अक्टूबर 2023 का फैसला सुनाने वाली मूल पीठ के एकमात्र सदस्य हैं, क्योंकि अन्य सभी सदस्य (सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एसके कौल, रवींद्र भट और हिमा कोहली) सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

समीक्षा पीठ ने कहा कि उसने उसने समलैंगिक विवाह पर पुराने निर्णयों को ध्यान से पढ़ा है और इन निर्णयों में कोई त्रुटि नहीं मिली। पीठ के आदेश में कहा गया है, “हमें रिकॉर्ड में कोई त्रुटि स्पष्ट नहीं मिली। हम आगे पाते हैं कि दोनों निर्णयों में व्यक्त किए गए विचार कानून के अनुसार हैं और इस तरह कोई हस्तक्षेप उचित नहीं है।”

दरअसल, 17 अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि यह विधायिका का मामला है। हालाँकि, बेंच के सभी जज इस बात पर सहमत थे कि भारत सरकार समलैंगिक रिश्ते में शामिल व्यक्तियों के अधिकारों की जाँच करने के लिए एक समिति का गठन करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से यह भी माना था कि समलैंगिक जोड़ों को हिंसा, जबरदस्ती या धमकी के बिना सहवास करने का अधिकार है। ऐसे संबंधों को विवाह के रूप में औपचारिक रूप से मान्यता देने के लिए कोई निर्देश पारित करने से परहेज किया। तत्कालीन CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एसके कौल ने समलैंगिक जोड़ों के नागरिक संघ बनाने के अधिकार को मान्यता देने पर सहमत थे, लेकिन अन्य तीन न्यायाधीश असहमत थे।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कई समीक्षा याचिकाएँ दायर की गईं। इन याचिकाओं में समलैंगिक जोड़ों के साथ होने वाले भेदभाव को स्वीकार करने के बावजूद उन्हें कोई कानूनी सुरक्षा प्रदान नहीं करने के निर्णय को गलत ठहराया गया। उन्होंने तर्क दिया कि यह मौलिक अधिकारों को बनाए रखने और उनकी रक्षा करने के न्यायालय के कर्तव्य का परित्याग है।

इन याचिकाओं में यह भी तर्क दिया गया था कि निर्णय विरोधाभासी और स्पष्ट रूप से अन्यायपूर्ण है। न्यायालय ने माना कि सरकार द्वारा भेदभाव के माध्यम से याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है, लेकिन इस भेदभाव को प्रतिबंधित करने का तार्किक अगला कदम उठाने में विफल रहा।

पैसे लेकर अपनी ही बीवी का दोस्तों से करवाता था रेप, खुद सऊदी में बैठकर देखता था सेक्स वीडियो: फिरोजाबाद में बेटी से ही गंदा काम करता था अब्बा, निकाह रुकवाने को खाया जहर

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक शख्स ने अपनी बेटी की बारात आने पर आत्महत्या कर ली। उसकी बीवी ने आरोप लगाया है कि उसका शौहर नाबालिग बेटी के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया था। मृतक के खुद के भी दो वीडियो मिले हैं। इनमें से एक में वह बेटी के साथ छेड़छाड़ कर रहा है और दूसरे में आपत्तिजनक बातें कह रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसका शौहर अपने दोस्तों से उसका रेप करवा रहा है। यह तीन वर्ष से जारी है। महिला का शौहर सऊदी अरब में रहता है।

बुलंदशहर में बीवी का ही रेप करवाता था शौहर

बुलंदशहर के गुलावठी की रहने वाली एक महिला ने सऊदी अरब में रहने वाले अपने शौहर पर दोस्तों से रेप करवाने और उसका वीडियो बनाने का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि एक बार उसने अपने दोस्तों को घर लाकर उसका रेप करवाया और वीडियो बनाया। बाद में यह दोस्त उनकी गैर-मौजूदगी में घर आने लगे और उसका रेप करने लगे। यह उसके वीडियो बनाकर शौहर को भेजते थे। महिला ने आरोप लगाया कि रेप करवाने के बदले उसका शौहर पैसे लेता था।

महिला ने आरोप लगाया कि यह सिलसिला तीन साल से चल रहा है और जब उसने कुछ महीने पहले इसका विरोध किया तो उसके वीडियो वायरल कर दिए गए। महिला ने आरोप लगाया कि उसे घर से भी निकाल दिया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसके कुछ बोलने पर शौहर उसे तलाक की धमकी देता है। उसने कहा कि अब तक बच्चों के चलते वह चुप थी। उसने इस सम्बन्ध में बुलंदशहर पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने कहा है कि शिकायत के आधार पर जाँच कर रही है। पुलिस ने कहा कि आरोप सही पाए जाएँगे तो कार्रवाई की जाएगी।

बेटी के साथ थे संबंध, निकाह पर दी जान

फिरोजाबाद के रामगढ़ थाना क्षेत्र में एक आदमी ने बुधवार (8 जनवरी, 2025) को जहर खाकर आत्महत्या कर ली। उसने यह आत्महत्या तब की जब उसकी नाबालिग बेटी का होने वाला शौहर फिरोजाबाद बारात लेकर आ गया था। इसके बाद निकाह टल गया। इस मामले की जानकारी पर जब पुलिस पहुँची तो उसकी बीवी ने कई खुलासे किए। बीवी ने आरोप लगाया कि उसका शौहर बेटी पर गन्दी नजर रखता था। बीवी ने कुछ दिन पहले शौहर को गलत हरकत करते हुए रात में पकड़ भी लिया था।

मृतक ने तब दो वीडियो भी बनाई थीं। इसमें एक में वह अपनी बेटी के साथ छेड़छाड़ कर रहा था जबकि दूसरी वीडियो में वह बीवी द्वारा पकड़े जाने के बाद बोल रहा है। इस वीडियो में वह कहता है कि जिस लड़की का निकाह होने जा रहा है वह उसके साथ सोती थी और उसकी अम्मी ने हमें पकड़ लिया है, इसलिए हम सब जाग रहे हैं।

यह वीडियो अँधेरे में बनाई गई है। उसकी बीवी ने बताया कि वह चूड़ी से जुड़ा काम करती है और जल्दी सो जाती है। रात में जब सब नींद में होते थे तो उसका शौहर लगभग 16 साल की बेटी के साथ छेड़छाड़ करता था। यह वीडियो कथित तौर पर उसने बेटी के होने वाले शौहर को भी भेजी थी।

मृतक की बीवी ने बताया कि उसने अपने शौहर ने समझाया भी लेकिन वह नहीं माना इसलिए बेटी का निकाह तय किया गया। इससे उसका शौहर गुस्सा हो गया और उसने आत्महत्या की धमकी दी और जब बारात आ गई तो शराब पीकर घर आया और फिर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इसके चलते अब निकाह रुक गया है।

मामले में ऑपइंडिया ने रामगढ़ थामा में भी सम्पर्क किया। पुलिस ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना मिली थी और वह अब जाँच में लगे हुए हैं। वहीं दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि लकड़ी का अब्बा इस अपनी बेटी का निकाह 35 वर्ष के आदमी से तय होने से गुस्सा था इस कारण उसने आत्महत्या की।

जल रहा कैलिफोर्निया, हॉलीवुड तक पहुँची लपटें; पेरिस हिल्टन समेत कई सितारों का बंगला खाक: नोरा फतेही बोली- ऐसा कभी नहीं देखा, जानिए क्यों पैदा हुए डरावने हालात

अमेरिका के कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग अब लॉस एंजिल्स तक पहुँच गई है। खबर आ रही है कि इन आग की लपटों में कई हॉलीवुड सितारों के घर समेत 2000 इमारतें जलकर बिलकुल खाक हो गई हैं और कुल 28 हजार घर इस आग के कारण प्रभावित हुए हैं। 5 लोगों की मौत के बीच इस भयावह स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 1,30,000 लोगों को तुरंत घर खाली करने को कहा गया है और 3 लाख लोगों को सुरक्षित जगह जाने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर भी तस्वीरें सामने आ रही है जिसमें चारों तरफ आग ही आग दिख रही है। बताया जा रहा है कि जंगल से फैलना शुरू हुई आग अभी तक अलग-अलग क्षेत्रों में फैल गई है।

कहाँ-कहाँ लगी आग

रिपोर्ट्स के अनुसार, कैलिफोर्निया के जंगलों में 3 आग लगी है। इन्हें पैलिसेड्स, हर्स्ट और ईटन फायर का नाम दिया गया है। पैलिसेड्स फायर पैलिसेड्स ड्राइव के दक्षिण-पूर्व से शुरू हुई थी, जो 17,234 एकड़ इलाके को प्रभावित कर चुकी है। वहीं ईटन फायर लॉस एंजिल्स के उत्तर में फैले जंगलों में एक घाटी के पास लगी थी, जिसके कारण 10,600 एकड़ इलाका जल चुका है। हर्स्ट फायर सैन फर्नांडो के उत्तर में एक उपनगरीय इलाके में लगी थी और ये अब तक अपनी चपेट में 855 एकड़ इलाके को ले चुका है। खबरें अभी भी यही बता रही हैं कि आग पर काबू नहीं पाया जा सका है जिसके कारण कैलिफोर्निया के गवर्नर ने वहाँ आपातकाल की घोषणा कर दी है।

आग लगने की वजह

कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी आग के पीछे का कारण सूखी लकड़ियाँ, बारिश में कमी और तेज रफ्तार में चल रही हवाओं को बताया जा रहा है। अक्टूबर में यहाँ बहुत ही कम मात्रा में बारिश हुई थी जिसकी वजह से लकड़ियाँ सूखती गईं। 6 जनवरी को डब जंगली इलाकों में पेड़ों के जलने की शुरुआत हुई तो ये आग देखते ही देखते फैल गई। कुछ ही घंटों में हजारों एकड़ के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।

किन हॉलीवुड स्टार्स के घर हुए खाक

कैलिफोर्निया के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण शहरों में तबाही मची हुई है। केवल आम लोग ही नहीं हॉलीवुड स्टार्स तक अपना घर छोड़ने पर मजबूर हैं। अब तक सामने आई खबरों के मुताबिक कई हॉलीवुड स्टार्स ऐसे हैं जिन्हें अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इनमें कुछ नाम नीचे हैं।

  • एडम ब्रॉडी लीटन मेस्टर
  • पेरिस हिल्टन
  • अलबामा लैंडन बार्कर
  • रिकी झील
  • जेमी ली कर्टिस
  • एलिजाबेथ चेम्बर्स
  • कैरी एल्वेस
  • जेम्स वुड्स
  • मार्क हैमिल
  • यूजीन लेवी
  • जे जे रेडिक का परिवार
  • सैंड्रा ली
  • मैंडी मूर
  • केट बैकइनसेल
  • कैरोलिन मर्फी
  • मौली सिम्स
  • स्पेंसर प्रैट और हेइडी मोंटाग
  • डेनिस क्रॉस्बी
  • जेनिफ़र ग्रे
  • अन्ना फारिस
  • बिली क्रिस्टल

कई एक्टर्स ने ये नजारा देख रोते हुए अपनी भावना व्यक्त की। एक्टर जेम्स वुड्स जहाँ आंसू पोंछते हुए दिखे, वहीं क्रिस्टल ने इसे पूरी तरह टूटने वाला कहा। एक्टर्स ने कहा कि उन्हें इस आग के कारण अपना वो घर छोड़ना पड़ा जहाँ उनके बच्चे बड़े हुए। इसी प्रकार पेरिस हिल्टन ने भी मालिबु में लगी आग को देखने के बाद अपना दुख जताया।

लॉस एंजिल्स में फँसी नोरा फतेही

लॉस एंजिल्स तक फैली आग के कारण बॉलीवुड अभिनेत्री नोरा फतेही को भी दिक्कत हुई। उन्हें आग के कारण समय से पहले उनका होटल छोड़ने को कहा गया, जिसके बाद उन्होंने अपने इंस्टा पर वीडियो शेयर की। उन्होंने कहा,

“मैं LA में हूँ और जंगल में लगी आग बहुत भयानक है। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। यह सच में भयानक है। हमें पाँच मिनट पहले ही यहाँ से निकलने का आदेश मिला है। इसलिए मैंने जल्दी से अपना सारा सामान पैक किया और मैं यहाँ से निकल रही हूँ। मैं एयरपोर्ट जाऊँगी और वहाँ आराम करूँगी क्योंकि आज मेरी फ्लाइट है और मुझे उम्मीद है कि मैं इसे पकड़ पाऊँ, वो कैंसिल न हो। ये सब बहुत ज्यादा डरावना है। मुझे उम्मीद है लोग सुरक्षित होंगे। इतना डरावना मैंने पहले कुछ नहीं देखा।”

कैलिफोर्निया में 50 सालों में लगी 78 बार आग

बता दें कि कैलिफोर्निया के जंगल में आग पहली बार नहीं लगी। पिछले 50 सालों में कैलिफोर्निया में 78 बार आग लग चुकी है। चूँकि इन जंगलों के पास रिहायशी इलाके ज्यादा हैं इसलिए इस आग से होने वाला नुकसान बहुत ज्यादा होता है। बताया जाता है कि 1933 में लॉस एंजिलिस के ग्रिफिथ पार्क में लगी आग कैलिफोर्निया की सबसे भयावह आग थी। तब, लगभग 83 हजार एकड़ इलाके को चपेट में लिया था और 3 लाख से ज्यादा लोगों को दूसरे शहरों में जाना पड़ा था।

25 साल जेल में बंद रहा, राष्ट्रपति ने भी ठुकराई याचिका, अब सुप्रीम कोर्ट ने माना ‘नाबालिग’; जिंदा व्यक्ति की ‘हत्या’ में 4 को जेल में ठूँस दिया… इस सिस्टम का क्या करें?

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे शख्स को रिहा किया है जो लगभग 25 वर्ष से ही जेल में बंद था। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि जब उसने अपराध किया था तब वह नाबालिग था और जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उसके नाबालिग होने की बात को पहले नहीं स्वीकार किया गया। उसे पहले मौत की सजा मिली थी लेकिन राष्ट्रपति ने इसे उम्रकैद में बदल दिया था। अब उसकी उम्र को लेकर सच्चाई पता चलने के बाद उसे आजादी मिली है। वहीं उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को ढूँढा है, जिसकी हत्या के आरोप में 4 लोग जेल भी काट चुके हैं।

हाई कोर्ट से राष्ट्रपति तक न्याय के लिए लड़ी लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 जनवरी, 2025) को ओम प्रकाश नाम के शख्स को लगभग 25 वर्ष की जेल के बाद रिहा किया है। ओम प्रकाश को 1994 में उसके मालिक और परिवार की हत्या करने के दोष में यह जेल की सजा हुई थी। ओम प्रकाश को 2001 में पुलिस ने पकड़ा था। उसने बताया था कि 2001 में वह 20 वर्ष का था। इस मामले में निचली अदालत ने उसे बालिग़ के तौर पर सजा दी थी। निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी। हालाँकि, ओमप्रकाश ने दावा किया कि वह नाबालिग था।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी सजा बरकरार रखी और नाबालिग वाले दावे को नहीं माना। उसकी पुनर्विचार याचिका भी ठुकराई गई। यहीं यह मामला नहीं रुका। ओम प्रकाश ने इसके बाद इस मामले में राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की। यहाँ भी उसकी याचिका ठुकरा दी गई। जब उसने दूसरी बार राष्ट्रपति को यह याचिका दी तो उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और कहा कि जब तक वह 60 साल का नहीं हो जाता, तब तक उसे रिहा नहीं किया जाएगा।

ओमप्रकाश थक हार कर फिर नाबालिग वाला दावा लेकर सुप्रीम कोर्ट के पास पहुँचा लेकिन इस बार उसका कोर्ट ने उसका केस लेने से ही इनकार कर दिया। खुद के नाबालिग होने का 2019 में उसने फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन फिर याचिका ख़ारिज कर दी गई। इसी दौरान उसकी हड्डियों का एक टेस्ट किया गया जिसमें साफ़ हुआ कि घटना के समय वह लगभग 14 वर्ष का रहा होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में उसे 7 जनवरी, 2025 को रिहा करने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह एक ऐसा मामला है जिसमें व्यक्ति कोर्ट गई गलती के कारण पीड़ित है। हमें बताया गया है कि जेल में उसका आचरण सामान्य रहा है, उसके खिलाफ कोई रिपोर्ट नहीं है। उसने समाज में फिर से घुलने-मिलने का अवसर खो दिया। उसने जो समय खोया है, वह उसकी किसी गलती के बिना कभी वापस नहीं आ सकता।” 2001 में पकड़े जाने और सजा दिए जाने के बाद ओम प्रकाश ने 7-8 बार अलग-अलग कोर्ट के सामने खुद के नाबालिग होने का दावा किया, लेकिन सिस्टम की गलती के चलते उसे 25 वर्ष बाद न्याय मिला।

जिसकी हत्या में 4 को जेल, वह जिंदा मिला

सिस्टम की विफलता से नुकसान सिर्फ ओम प्रकाश को ही नहीं हुआ बल्कि बिहार में भी 4 लोग इसका शिकार हुए। बिहार के एक शख्स को हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस ने झाँसी में रात को पेट्रोलिंग के दौरान देखा। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि यह शख्स नथुनी पाल बिहार के देवरिया का रहने वाला है और वह बीते डेढ़ दशक से उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगह रह रहा है। जब पुलिस ने स्थानीय थाने से जानकारी ली तो पता चला कि जिस शख्स को उन्होंने ढूँढा है, उसके मर्डर के लिए बिहार में 4 लोगों पर मुकदमा चल रहा है।

यह मुकदमा नथुनी पाल के चाचा और तीन चचेरे भाइयों के खिलाफ ही दर्ज करवाया गया था। मुकदमा नथुनी पाल के मामा ने दर्ज करवाया था। इस मामले में चारों लोग 8 माह की जेल भी काट चुके हैं। अभी वह जमानत पर बाहर हैं। अब इस खबर के बाद उन्होंने हत्या का दाग धुलने पर ख़ुशी जताई है। वहीं दोनों जगह की पुलिस अब मामले को लेकर आगे कार्रवाई में जुटी है।

जिस फातिमा शेख को बताते हैं पहली महिला मुस्लिम टीचर, उसका वजूद ही नहीं? लेखक-चिंतक दिलीप मंडल बोले- मैंने गढ़ा था काल्पनिक कैरेक्टर, मुझे माफ करें

महिला शिक्षा के इतिहास में सावित्री बाई फुले के साथ-साथ आपको पिछले कुछ समय से फातिमा शेख का नाम भी सुनने को मिलता होगा। फातिमा कौन हैं ये सर्च करने पर जानकारी सामने आती होगी कि वो देश की पहली महिला मुस्लिम टीचर थीं जिन्होंने लड़कियों को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अब इन्हीं फातिमा शेख को लेकर पत्रकार, लेखक, प्रोफेसर और चिंतक दिलीप मंडल ने बड़ा दावा किया है।

दिलीप मंडल ने अपने एक्स पर कन्फेशन डालते हुए लिखा, “मैंने एक मनगढ़ंत कैरेक्टर बनाया था- फातिमा शेख। कृपया मुझे माफ करें। सच्चाई तो ये है कि कोई फातिमा शेख कभी थी ही नहीं, वो कोई ऐतिहासिक हस्ती नहीं हैं। वो मेरी गलती थी कि अपने जीवन के एक निश्चित काल में मैंने इस नाम को अचानक गढ़ा। मैंने ये सब जानबूझकर ही किया था।”

दिलीप आगे कहते हैं- “आप इससे पहले गूगल में भी इस नाम की कोई एंट्री नहीं पाएँगे, न कोई किताब मिलेगी और न ही कहीं कोई जिक्र होगा।”

मंडल के अनुसार, फातिमा उन्हीं की वजह से सोशल मीडिया नैरेटिव में आईं और गायब भी हो गईं। वह अपने कन्फेशन में कहते हैं कि अब उनसे कोई सवाल न करे कि आखिर उन्होंने ऐसा किया क्यों था। ये समय और हालात वाली बात है। किसी कारणवश एक हस्ती को गढ़ना पड़ा था इसलिए उन्होंने वो किया। हजारों लोग इसकी गवाही दे सकते हैं – “जिनमें से कइयों ने तो पहली बार मुझसे ही ये नाम सुना।”

उन्होंने लिखा कि वह नैरेटिव गढ़ना, छवि निर्माण करना जानते हैं इसलिए उनके लिए ये सब कभी भी मुश्किल नहीं था। फातिमा की कोई तस्वीर भी नहीं है और जो हैं वो सब काल्पनिक ही हैं।

फातिमा के अस्तित्व में आने के बाद जिन लोगों को राजनीतिक और वैचारिक उद्देश्यों के लिए इस कहानी की ज़रूरत थी, उन्होंने इसे फैलाया और इस प्रकार यह नाम अस्तित्व में आया।

मंडल कहते हैं, “ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले का पूरा लेखन प्रकाशित हो चुका है, और उसमें कहीं भी फातिमा शेख का नाम नहीं है। यहाँ तक कि बाबा साहेब अंबेडकर ने भी कभी ऐसा नाम नहीं लिया।”

वह दावा करते हैं कि महात्मा फुले या सावित्रीबाई फुले के किसी भी जीवनीकार ने फातिमा शेख का ज़िक्र नहीं किया। 15 साल पहले तक किसी भी मुस्लिम विद्वान ने इस नाम का ज़िक्र नहीं किया। फुले दंपत्ति के शैक्षणिक प्रयासों की चर्चा करने वाले ब्रिटिश दस्तावेज़ों में भी फातिमा शेख का कोई ज़िक्र नहीं है।

दिलीप मंडल का चैलेंज

अपने इस पोस्ट के बाद मंडल ने इस मुद्दे से जुड़े कई सारे ट्वीट किए। उन्होंने बार-बार कहा कि सावित्री बाई का कैरेक्टर पूरी तरह काल्पनिक है। वहीं जब एक युवक ने कहा कि ये बात झूठ है तो उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले कोई हडप्पा काल की नहीं हैं। उनसे जुड़े रिकॉर्ड हैं। पुराने अखबार और लाइब्रेरी हैं। वहीं फातिमा शेख को लेकर उन्होंने चैलेंज दिया कि अगर कोई 2006 से पहले दिखा देगा कि कहीं फातिमा शेख का जन्मदिन मनाया गया, तो वो मान लेंगे कि उन्होंने ऐसा नहीं किया।

गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ दिलीप मंडल इस तरह के दावे कर रहे हैं कि फातिमा शेख का कैरेक्टर उन्होंने ही गढ़ा था, वहीं 1991 में पब्लिश हुई एक किताब है- Women Writing in India: 600 B.C. to the early twentieth century जिसमें ये पढ़ने को मिलता है कि फातिमा शेख, ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले की साथी थीं। इस किताब को सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क के फेमिनिस्ट प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया है।

किताब में फातिमा शेख के नाम का केवल एक ही बार जिक्र है, जिसमें कहा गया है, “पुणे में जोतिबा और सावित्रीबाई फुले ने जो स्कूल शुरू किए थे, वे खास तौर पर निचली जाति की लड़कियों के लिए थे। उनकी सहकर्मी फातिमा शेख एक मुस्लिम महिला थीं।” इसे देख लगता है कि संभव है कि फातिमा शेख नाम की महिला फुले की सहकर्मी रहीं हों, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख कार्यकर्ता न हों। यही वजह है कि पहले उनका उल्लेख इंटरनेट पर न के बराबर था।

अब बिहार की जमीन से निकला काले पत्थर का बना मंदिर, शिवलिंग की पूजा-अर्चना के लिए लगी कतार: 500 साल से भी अधिक पुराना होने का दावा

संभल में एक पुराना मंदिर खोजे जाने के बाद देश भर में मंदिरों के मिलने का सिलसिला जारी है। अब बिहार की राजधानी पटना में सैकड़ों वर्ष से बंद पड़े एक मंदिर को स्थानीय लोगों ने खोजा है। मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहाँ एक पुराना शिवलिंग भी मिला है, यह पूरी तरह सुरक्षित है। इस मंदिर में पूजा-अर्चना भी चालू हो गई है। मंदिर में दर्शन के लिए लम्बी-लम्बी लाइन लग रही हैं। प्रशासन भी मंदिर के आसपास व्यवस्था के लिए काम कर रहा है।

कचरे-मिट्टी में दबा था मंदिर

पटना में यह मंदिर आलमगंज थाना क्षेत्र के लक्ष्मणपुर इलाके में मिला है। यहाँ एक मठ भी है। स्थानीय लोगों को मठ से ही लगे हुए मंदिर के होने की कोई जानकारी नहीं थी। एक दिन मठ की चहारदीवारी के पास मिट्टी धंस गई। इसे मंदिर जैसे ढाँचे का कुछ हिस्सा दिखने लगा। इसके बाद स्थानीयों की इस पर नजर पड़ी। इसके बाद यहाँ खुदाई चालू हुई। जब मिट्टी हटाई गई तो मंदिर का ऊपरी हिस्सा दिखा। इसके बाद तेजी से मिट्टी हटाना चालू कर दिया गया।

यहाँ एक छोटा मंडपनुपा मंदिर मिला। इसमें शिवलिंग भी स्थापित था। इसके बाद इसको साफ़ किया गया। यह शिवलिंग भी एकदम सुरक्षित था। इसके बाद इसकी सफाई की गई और पूजा अर्चना चालू कर दी गई। शिवलिंग विशेष प्रकार का बना है और काफी सुंदर है। शिवलिंग के आसपास बना मंडपनुमा मंदिर भी काफी सुंदर है और इसपर नक्काशी भी की गई है। स्थानीयों ने बताया है कि जिस छोटे मंदिर में यह शिवलिंग स्थापित है, वह एक बड़े मंदिर का हिस्सा है।

सैकड़ों साल पुराना है मंदिर

स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना है। इसके आसपास के क्षेत्र का इलाका लाहौरी ईंट से बनाया गया है। इसमें अंदर जाने के लिए 4 प्रवेश द्वार हैं। इनमें से 2 अभी बंद है। मंदिर के अंदर जिस मंडपनुमा मंदिर में शिवलिंग स्थापित है, वह काले पत्थर का बना है।

संभावना है कि यह एक ही काले पत्थर की चट्टान से काट कर बनाया गया है। इसके अंदर शिवलिंग के साथ ही भगवान विष्णु के चरण स्थापित हैं। मंदिर में जल निकासी की व्यवस्था भी गोमुख के जरिए की गई है। एक स्थानीय व्यक्ति ने ईटीवी से बताया है कि मंदिर 1000 साल पुराना है और इसमें पहले 5 किलो सोना लगा हुआ था।

अब दर्शन के लिए लगी लाइन

लक्ष्मणपुर में यह मंदिर मिलने के बाद अब दर्शनार्थियों की बड़ी भीड़ लग रही है। मंदिर का प्रबंध स्थानीय लोग कर रहे हैं। यहाँ दर्शन के लिए लोगों की लाइन लगाई जा रही है। स्थानीय लोगों ने शिवलिंग को सजाया भी है। हालाँकि, भीड़ का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने माँग की है कि मंदिर में प्रबन्धन के लिए अब सरकार दखल दे और उनकी सहायता करे।