Home Blog Page 511

प्लास्टर से छिपाए मंदिर होने के सबूत, घंटे वाली जगह पर झूमर लटकाया: संभल के जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश, भीतर मिला वटवृक्ष, कुआँ और कलाकृतियाँ

उत्तर प्रदेश के संभल में विवादित शाही जामा मस्जिद ढाँचे की सर्वे रिपोर्ट कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने सीलबंद लिफाफे में चंदौसी कोर्ट को सौंप दी है। यह रिपोर्ट 45 पन्नों की है। सूत्रों के अनुसार, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह की अदालत में पेश किए गए रिपोर्ट में ढाँचे वाली जगह पर हिंदू मंदिर होने के पुख्ता सबूत हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस सीलबंद लिफाफे को खोला जाएगा।

जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिद परिसर में दो बरगद के पेड़ हैं, जो आमतौर पर हिंदू मंदिरों से जुड़े होते हैं और वहाँ उनकी पूजा होती है। इसके अलावा, वहाँ एक कुआँ भी है, जिसका एक हिस्सा परिसर में और दूसरा बाहर स्थित है। कुएँ के बाहरी हिस्से को ढक दिया गया था। सर्वे रिपोर्ट में लगभग साढ़े चार घंटे की वीडियोग्राफी शामिल थी, जिसके दौरान लगभग 1,200 तस्वीरें ली गई थीं।

सर्वेक्षण के पहले दिन 19 नवंबर 2024 को करीब डेढ़ घंटे की वीडियोग्राफी की गई थी। इसके बाद 24 नवंबर को तीन घंटे की वीडियोग्राफी की गई थी। जामा मस्जिद के अंदर पचास से ज़्यादा फूलों के पैटर्न की पहचान की गई है। इसके अलावा, मूल संरचना में बदलाव के साथ-साथ नए निर्माण के संकेत भी मिले हैं। मंदिर के स्वरूप पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया है और उस पर रंग-रोगन किया गया है।

कहा जा रहा है कि विवादित मस्जिद में ऐसे प्रतीक हैं, जो उस ऐतिहासिक काल के मंदिरों और हिंदू स्थलों पर हुआ करते थे। मंदिर की मूल वास्तुकला को उसके दरवाजों, खिड़कियों और विस्तृत रूप से सजाए गए दीवारों पर प्लास्टर और पेंट के जरिए छिपा दिया गया है। गुंबद के बीच घंटा लटकाने वाली लोहे की जंजीर भी मिली है। इस पर फिलहाल झूमर लटकाया गया है।

इस तरह की जंजीर आमतौर पर मंदिरों में घंटा लटकाने या शिवलिंग पर 24 घंटे जलाभिषेक करने वाले घड़े को टाँगने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गुंबद के हिस्से को प्लेन कर दिया गया है। मंदिर के दीवारों, झरोखों और विभिन्न तरह से अलंकृत दीवारों पर करीब 50 कलाकृतियाँ मिली हैं। इन कलाकृति को ढकने के लिए उन पर प्लास्टर चढ़ा दिया गया है।

कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव ने कहा, “19 नवंबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें दावा किया गया था कि शाही जामा मस्जिद मूल रूप से हरिहर मंदिर है। उसी दिन मस्जिद का सर्वेक्षण किया गया था। जब यह पूरा नहीं हो सका तो कोर्ट कमिश्नर ने DM और SP के साथ आगे के सर्वेक्षण कार्य के लिए 24 नवंबर को फिर से मस्जिद का दौरा किया।”

उन्होंने बताया, “इस दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें करीब चार लोगों की मौत हो गई। रिपोर्ट पहले 9 दिसंबर को कोर्ट में पेश की जानी थी, लेकिन कोर्ट कमिश्नर ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 15 दिन का अतिरिक्त समय माँगा। आज करीब 40 से 45 पन्नों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई है।” बता दें कि सर्वे के बाद कट्टरपंथियों द्वारा हमला कर दिया गया था, जिससे संभल में सांप्रदायिक तनाव हो गया था।

संभल में पुलिस और सर्वे टीम पर हमला करके हिंसा भड़काने वाले लोगों के खिलाफ़ कार्रवाई जारी है। इस मामले में अब तक 50 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। इनमें से कई लोग दिल्ली तक से गिरफ्तार हुए हैं। हिंसा में शामिल अन्य करीब 90 लोगों को पकड़ने के लिए पुलिस टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस मामले में अभी तक 11 मामले दर्ज किए गए हैं।

कहा जाता है कि संभल के कोट गर्वी में स्थित शाही जामा मस्जिद मुगल काल की है। यह जिले के सबसे पुराने स्मारकों में से एक है। मस्जिद के बारे में दावा किया जाता है कि इसे मीर बेग ने बाबर के निर्देश पर 1529 में बनवाया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद हिंदुओं के हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाई गई है। इसको लेकर कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। कोर्ट के आदेश पर यहाँ सर्वे किया गया था।

भारत स्वतंत्र हुआ, पर कैद ही रह गया पुराणों का अक्षयवट: पहली बार प्रयागराज महाकुंभ में हिंदू कर सकेंगे दर्शन, अकबर का लगाया प्रतिबंध मोदी राज में हटा

गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर बसे प्रयागराज में इस बार 144 साल बाद महाकुंभ का आयोजन होने जा रहा है। साधु-संत कुंभ क्षेत्र में पहुँच चुके हैं। शास्त्रों में महाकुंभ की महिमा अपार बताई जाती है। यही कारण है कि हर सनातनी अपने जीवन में कम-से-कम एक बार प्रयागराज कुंभ में स्नान ज़रूर करना चाहता है। त्रिवेणी पर सिर्फ स्नान का ही महात्म्य नहीं है, बल्कि अक्षयवट आदि के दर्शन भी महत्वपूर्ण हैं।

कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक एवं सांस्कृतिक समागम है, जो पूर्णत: वैज्ञानिक अवधारणाओं पर आधारित है। खगोल विज्ञान के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों के विशेष सिद्ध में आने के बाद अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ का आयोजन होता है। वैसे कुंभ के आयोजन के बारे में सबसे पुरानी लिखित जानकारी चीनी यात्री ह्वेन त्सांग के यात्रा विवरणों से मिलती है, लेकिन धार्मिक ग्रंथों में इसके बारे में सृष्टि के प्रारंभ को माना गया है।

अथर्ववेद में कुंभ मेले के वर्णन की बात कही जाती है। अथर्ववेद में ‘चतुर्था ददामि’ और ‘पूर्णा: कुंभोषधिकाल आहितस्तं’ का जिक्र है। हालाँकि, 14वीं-15वीं शताब्दी के विद्वान सायण और 17वीं शताब्दी के विद्वान उद्गीथ बताते हैं कि पहला श्लोक विश्तारी यज्ञ की महिमा में एक भजन से संबंधित है और दूसरा ‘ईश्वरीय समय’ से संबंधित है। यहाँ, कुंभ का अर्थ है ‘पानी का घड़ा’, न कि त्योहार।

पुराणों में कुंभ का विस्तार से वर्णन

जो भी हो, लेकिन कुंभ का वर्णन पुराणों में है। मत्स्य पुराण में इसकी कहानी है। जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से एक रत्न के रूप में अमृत कलश भी निकला। अमृत असुर ना पी जाएँ, इसलिए देवता इसे लेकर भागने लगे और असुर उनका पीछा करने लगे। इस दौरान अमृत की बूँदे प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिर गईं। जहाँ-जहाँ अमृत की बूँदे गिरीं, वहाँ-वहाँ आज कुंभ मेले का आयोजन होता है।

ऐसा ही वर्णन स्कंद पुराण एवं पद्म पुराण में है। पद्म पुराण में कहा गया है, “पृथिव्यां कुम्भयोगस्य चतुर्धा भेद उच्चते। चतु:स्थले नितनात् सुधा कुम्भस्थ भूतले।। चन्द्र प्रस्रवणा रक्षां सूर्यों विस्फोटनात् दधौ। दैत्येभ्यश्च गुरु रक्षां सौरिदेवेंद्रजात् भयात्।।” इसका अर्थ हुआ कि पृथ्वी पर कुम्भयोग के चार प्रकार होते हैं। चार स्थानों पर हर समय अमृत (सुधा) का प्रवाह होता है। यहाँ सूर्य और चंद्रमा के माध्यम से रक्षा का प्रवाह होता है।

कुंभ को लेकर स्कंद पुराण में कहा गया है, “माघे मासे गंगे स्नानं यः कुरुते नरः। युगकोटिसहस्राणि तिष्ठंति पितृदेवताः।।” अर्थात, माघ महीने में गंगा में स्नान करने वाले व्यक्ति के पितर स्वर्ग में वास करते हैं। वहीं, पद्म पुराण में कहा गया है, “त्रिषु स्थलेषु यः स्नायात् प्रयागे च पुष्करे। कुरुक्षेत्रे च धर्मात्मा स याति परमं पदम्।।” अर्थात, जो धर्मात्मा प्रयाग, पुष्कर और कुरुक्षेत्र में स्नान करता है वह परम धाम जाता है।

गरुण पुराण में कहा गया है, “अग्निष्टोमसहस्राणि वाजपेयशतानि च। कुंभस्नानस्य कलां नार्हंते षोडशीमपि।।” (हजारों अग्निष्टोम और सैकड़ों वाजपेय यज्ञ भी कुंभ स्नान के सोलहवें भाग के बराबर नहीं हैं।) ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, “प्रयागे माघमासे तु स्नात्वा पार्थिवमर्दनः। सर्वपापैः प्रमुच्येत पितृभिः सह मोदते।।” अर्थात, माघ मास में प्रयाग में स्नान करने से सभी पापों से मुक्त हो जाता है और उसके पितर प्रसन्न होते हैं।

अग्नि पुराण के अनुसार, “कुंभे कुंभोद्भवः स्नात्वा प्रायच्छति हि मानवान्। ततः परं न पापानि तिष्ठन्ति शुभकर्मणाम्।।” अर्थात, कुंभ में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और वह शुभ कर्मों की ओर अग्रसर होता है। विष्णु पुराण के अनुसार, “अयं कुंभः परं पुण्यं स्नानं येन कृतं शुभम्। सर्वपापक्षयं याति गच्छते विष्णुसन्निधिम्।।” अर्थात, कुंभ में स्नान अत्यंत पुण्यदायक है और आदमी विष्णु लोक जाता है।

श्रीमदभागवत पुराण के अनुसार, “तत्रापि यः स्नानकृत् पुण्यकाले। गंगा जलं तीर्थमथाधिवासम्।। पुण्यं लभेत् कृतकृत्यः स गत्वा। वैकुण्ठलोकं परमं समेति।।” अर्थात, पवित्र समय में गंगा में स्नान करने वाला व्यक्ति पुण्य प्राप्त कर वैकुण्ठ धाम जाता है। महाभारत के वन पर्व में कहा गया है, “त्रिपुरं दहते यज्ञः स्नानं तीर्थे तु दहते। सर्वपापं च तीर्थे स्नात्वा सर्वं भवति शुद्धये।।”

अर्थात, यज्ञ तीनों लोकों को शुद्ध करता है, लेकिन तीर्थ में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति पूरी तरह शुद्ध हो जाता है। कूर्म पुराण में कहा गया है कि कहता है कि कुंभ स्नान से सारे पाप नष्ट होते हैं। कुंभ में पापों को नष्ट करने और स्नान को फलदायी बनाने के लिए पाप नहीं करने का भी संकल्प लेना चाहिए।

सम्राट हर्ष के समय चीनी यात्री ने किया जिक्र

मस्त्य पुराण एवं पद्म पुराण के अलावा कुंभ का वर्णन स्कंद पुराण, अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्म पुराण, कूर्म पुराण, पद्म पुराण, भागवत पुराण, विष्णु पुराण, गरुड़ पुराण और वाल्मीकि रामायण आदि में भी है। मान्यताओं के अनुसार, कुंभ का आयोजन अनादि काल से होता है। वहीं, कुछ इसे सिंधु सभ्यता से भी पुराना बताते हैं। कहा जाता है कि यह हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यता से 1,000 साल पुरानी है।

ईसा के जन्म से 500 पूर्व हुए परमार वंश के सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों में शामिल रहे कालिदास ने अपनी अमर कृति रघुवंशम में भी इसका जिक्र किया है। सम्राट हर्षवर्धन बैंस, जिन्हें इतिहास में सम्राट हर्ष के नाम भी जानते हैं, के शासनकाल में 629-645 ईस्वी तक भारत में रहे चीनी यात्री ह्वेन त्सांग (या Xuanzang) ने भी कुंभ का वर्णन किया है। मुगल काल में इसको लेकर कई जगह वर्णन है।

यह माना जाता है कि अधिकतर पुराण बाद के काल में लिखे गए हैं। कई तो 15-16वीं सदी में भी लिखे गए। कुछ धर्मग्रंथों में कहा गया है कि सबसे पहले कुंभ मेले का आरंभ सम्राट हर्षवर्धन ने किया था। ह्वेन त्सांग अपनी यात्रा के दौरान प्रयागराज आया था और उसने अपनी यात्रा वृतांत में लिखा है कि सम्राट हर्षवर्धन हर पाँच साल पर नदियों के संगम पर आयोजन करते थे और वहाँ गरीबों को दान देते थे।

अक्षयवट का महात्म्य, सीएम योगी ने मुगलकाल के प्रतिबंध हटाए

कहा जाता है कि प्रयागराज कुंभ में स्नान का फल तभी मिलता है, जब वहाँ स्थित अक्षयवट का दर्शन किया जाए। संगम तट पर एक प्राचीन किला है, जिसमें यह अक्षय वट स्थित है। अक्षयवट का जिक्र पुराणों में भी वर्णन है। कहा जाता है कि यह वट सृष्टि के विकास और प्रलय का साक्षी रहा है। इसका कभी नाश नहीं होता है। अकबर ने अक्षयवट के दर्शन-पूजन पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने यहाँ आकर पातालपुरी मंदिर का दर्शन किया था और बाद में उनके प्रयास से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साल 2018 में यहाँ आम लोगों के दर्शन पर से प्रतिबंध हटा दिया था। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहाँ आए और इस अनादि अक्षयवट का दर्शन किया था।

इस वट को बारे में कहा जाता है कि इस वृक्ष को माता सीता ने आशीर्वाद दिया था कि प्रलय काल में जब धरती जलमग्न हो जाएगी और सब कुछ नष्ट हो जाएगा तब भी वह हरा-भरा रहेगा। इसके अलावा, एक मान्यता यह भी है कि बाल रूप में भगवान कृष्ण इसी वट वृक्ष पर विराजमान हुए थे। तब से श्रीहरि इसके पत्ते पर शयन करते हैं। पद्म पुराण में अक्षयवट को तीर्थराज प्रयाग का छत्र कहा गया है।

ह्वेन त्सांग ने अक्षयवट के बारे में लिखा है कि नगर में एक मंदिर है और उसमें एक विशाल वट है। इसकी शाखाएँ और पत्तियाँ दूर दूर तक फैली हुई हैं। इस वट का वर्णन वाल्मीकि रामायण में भी मिलता है। कहा जाता है कि भारद्वाज मुनि ने भगवान श्रीराम से कहा था कि वे दोनों भाई गंगा-यमुना के संगम पर जाएँ और वहाँ बहुत बड़ा वट वृक्ष मिलेगा। वहीं, से दोनों भाई यमुना को पार कर जाएँ।

भारद्वाज मुनि अक्षयवट के बारे में भगवान राम से कहते हैं कि वह चारों तरफ से दूसरे वृक्षों से घिरा होगा। उसकी छाया में बहुत से सिद्ध पुरुष रहते होंगे। वहाँ पहुँचकर वटवृक्ष से आशीर्वाद की कामना करनी चाहिए। कहा जाता है माता सीता ने ऐसा ही किया और साथ ही अक्षयवट को आशीर्वाद दिया कि संगम स्नान करने के बाद जो कोई अक्षयवट का पूजन-दर्शन करेगा, उसे ही स्नान का फल मिलेगा।

कहा जाता है कि ब्रह्मा ने सृष्टि के आरंभ में प्रयागराज के संगम पर यज्ञ आरंभ किया था। इसमें भगवान विष्णु यजमान बने थे और भगवान शिव देवता बने थे। यज्ञ के अंत में तीन देवों ने अपनी शक्तिपुँज से एक वृक्ष उत्पन्न किया, जिसे आज अक्षयवट कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वटवृक्ष की उम्र 5270 वर्ष बताई जाती है। कहा जाता है कि इस अक्षयवट की जड़े पाताल लोक में स्थित हैं।

कहा जाता है कि अक्षयवट को मुगलकाल में इसे खत्म करने के प्रयास किए गए। इसके अलावा भी कई मुस्लिम आक्रमणकारियों ने इसे काट एवं जलाकर नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। माना जाता है कि इस तरह के वट वृक्ष पृथ्वी पाँच हैं। पहला प्रयागराज में अक्षयवट, दूसरा उज्जैन में सिद्धवट, तीसरा वृंदावन में वंशीवट, चौथा गया में मोक्षवट और पाँचवाँ पंचवटी में पंचवट।

कब आयोजित होता है महाकुंभ, कुंभ और अर्धकुंभ

इस बार प्रयागराज में 144 साल बाद लगने वाला कुंभ लग रहा है। दरअसल, कुंभ पाँच प्रकार का होता है- महाकुंभ, पूर्ण कुंभ, अर्ध कुंभ, कुंभ और माघ कुंभ, जिसे माघ मेला भी कहते हैं। 144 बाद लगने वाले महाकुंभ का आयोजन सिर्फ प्रयागराज के संगम पर ही होता है। शास्त्रों के अनुसार, जब बृहस्पति वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में किया जाता है।

पूर्ण कुंभ 12 वर्षों में आयोजित किया जाता है। पूर्ण कुंभ का आयोजन 4 तीर्थस्थलों- हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में होता है। हरिद्वार गंगा नदी, उज्जैन शिप्रा नदी, नासिक गोदावरी नदी और प्रयागराज गंगा, यमुना एवं सरस्वती नदियों के संगम पर बसा है। जब सूर्य मेष राशि और बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार में किया जाता है। .

वहीं, अर्ध कुंभ का आयोजन हर 6 साल पर होता है। इसका आयोजन केवल दो स्थानों- प्रयागराज और हरिद्वार में होता है। माघ कुंभ हर साल सिर्फ प्रयागराज में आयोजित किया जाता है। जब सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करते हैं तो उज्जैन में जो कुंभ मनाया जाता है उसे सिंहस्थ कुंभ कहते हैं। जब सूर्य और बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह कुंभ मेला नासिक में मनाया जाता है

घसीटकर हिंदू युवक को ले गए इस्लामी कट्टरपंथी, जमकर किया प्रताड़ित… बांग्लादेश में ‘ईशनिंदा’ की आड़ में लिंचिंग की कोशिश: देखिए Video, सुनिए ‘नारा-ए-तकबीर’ का यलगार

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की कोई सीमा नहीं रह गई है। इस बार खबर चटगाँव के पटेंगा काठगढ़ से है। वहाँ एक हिंदू युवक को मुस्लिम भीड़ ने पहले अगवा कर लिया और उसके बाद उसे ले जाकर खूब प्रताड़ित किया। युवक की स्थिति गंभीर है। उसकी पहचान प्रांत तालुकदार के तौर पर हुई है।

बताया जा रहा है कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने प्रांत पर पहले ईशनिंदा का आरोप लगाया और उसके बाद उसका अपहरण करके उसे लालखान बाजार अमीन सेंटर की पार्किंग में ले जाकर प्रताड़ित किया। पुलिस अगर सही समय पर आकर भीड़ से प्रांत को नहीं छुड़ाती तो शायद हिंदुओं की मॉब लिंचिंग वाली लिस्ट में एक नाम प्रांत का भी जुड़ता।

पुलिस ने इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ से प्रांत को छुड़ाकर उसे चटगाँव मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। अब पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

प्रांत के अपहरण की एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। इस वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे एक पतली गली से इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ निकलती है और वो अपने साथ खींचते हुए प्रांत को लेकर जाते हैं। सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, प्रांत को लेकर जाते हुए भीड़ जोर जोर से नारा-ए-तकबीर का नारा भी लगा रही थी।

बता दें कि बांग्लादेश में ऐसी ही घटना दिसंबर 2024 में भी हुई थी जब मुस्लिम भीड़ ने आकाश दास नाम के युवक पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर 130 हिंदू घरों और 20 मंदिरों पर आगजनी की थी।

उससे पहले अक्तूबर 2024 में एक उन्मादी मुस्लिम बीड़ ने हृदय पाल नाम एक हिंदू लड़के पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाकर फरीदपुर जिले के बोलमारी में कादिरदी डिग्री कॉलेज को घेर लिया था।

श्रावस्ती के मदरसे में नकली नोट की छपाई, अपनी 5 बीवियों से मार्केट में खपाने का धंधा करवाता था मुबारक अली: यूट्यूब से सीख बहराइच तक फैलाया काला कारोबार

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में एक मदरसा संचालक अपनी पाँच बीवियों के जरिए नकली नोट का धंधा चला रहा था। वह प्रिंटर से ही मदरसे के भीतर नकली नोट छापता था और फिर अपनी बीवियों को पकड़ा देता था। इसके यह जगह-जगह यह नोट खपा देती थीं। उसके गैंग में 4 और लोग शामिल थे। पुलिस ने उनके पास से नकली नोट छापने की मशीन और हजारों के नकली नोट बरामद किए थे। उनके पास से अवैध हथियार भी बरामद हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रावस्ती के हरदत्त नगर इलाके में लक्ष्मणपुर इलाके में चल रहे एक मदरसे में हाल ही में छापा मारा। यहाँ से मदरसे के संचालक मुबारक अली और उसके गुर्गे पकड़े गए। इनके पास से ₹34500 नकली नोट बरामद किए। इसके अलावा इनके पास से एक प्रिंटर भी बरामद हुआ। साथ ही नोट छापने की और सामग्री भी मिली। इनके पास से एक तमंचा भी मिला। पुलिस ने इनसे पूछताछ की तो असलियत का खुलासा हुआ।

पुलिस ने बताया कि मदरसा संचालक मुबारक अली इस गैंग का सरगना था, यही नोट छापने का पूरा काम देखता था। यह नोट पहले प्रिंटर से मदरसे के एक कमरे में छापे जाते और फिर इनको असली नोट जैसा दिखाने के लिए तैयार किया जाता। नोट छापने के लिए अच्छे क्वालिटी का कागज भी यूज होता था। यह ₹500 के अलावा छोटे नोट भी छापते थे ताकि किसी को शक ना हो। मुबारक अली की पाँच बीवियाँ हैं। इनमें से दो अलग-अलग जगह मदरसों में ही पढ़ाती हैं। मुबारक अली फर्जी नोट छाप कर इन पाँचों को देता था।

इसके बाद यह बाजार में यह नोट खपा देती थीं, इसके लिए यह रात के अँधेरे का फायदा उठाती थी। उसकी बीवियों पर पुलिस ने अभी कार्रवाई नहीं की है। गैंग में शामिल बाकी लोग भी यही काम करते थे। मुबारक अली ने यह नोट छापना यूट्यूब से सीखा था। उसके गैंग में जलील, धर्मराज, अवधेश और रामसेवक हैं। इनमें से कुछ पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं। इनके पास से ₹500, ₹200 और ₹100 के नकली नोट पाए गए हैं। इनके पास ₹14500 के असली नोट भी मिले हैं।

यह सिर्फ नकली नोट छाप कर खुद नहीं चलाते थे बल्कि दूसरों को भी इस धंधे में शामिल होने को लेकर झाँसा देते थे। यह उन्हें ₹1000 के बदले ₹2000 के बकली नोट देने का वादा करते थे। पुलिस अब इस मामले में जाँच कर रही है। वह पता लगा रही है कि इस धंधे में और कौन शामिल रहा है।

‘मुस्लिम औरतें कम इसलिए चेहरा छिपाने की हो इजाजत’: नए साल में स्विट्जरलैंड में ‘बुर्का बैन’ से मानवाधिकार संगठनों को लगी मिर्ची, जानिए क्यों लिया यह फैसला-कहाँ होगी छूट

स्विट्जरलैंड में 1 जनवरी 2025 को आधिकारिक रूप से बुर्के बैन करने वाला कानून लागू हो गया। इस कानून के लागू होने के साथ ही सार्वजनिक जगहों पर कोई भी पूरा चेहरा ढककर नहीं घूम सकेगा। अगर किसी ने इस कानून का उल्लंघन किया तो उसे 1000 स्विस फ्रैंक (तकरीबन 95 हजार रुपए) तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।

कैसे लगा बैन

बता दें कि बुर्के पर प्रतिबंध 2021 के एक जनमत संग्रह के आधार पर लगाया गया है जिसमें नागरिकों ने चेहरा ढकने के विरोध में अपना मत दिया था। इस जनमत संग्रह में कानून के पक्ष में 51.2 प्रतिशत और कानून के विरोध में 48.8 फीसद वोट पड़े थे।

संसद में लगी मुहर

इसके बाद 20 सितंबर 2023 को स्विस संसद के निचले सदन ने इस पर मुहर लगाई। इसके मुताबिक स्विट्जरलैंड में सार्वजनिक स्थानों पर नाक, मुँह और आँखों को ढकने वाले नकाब या बुर्के को पहनना गैर कानूनी माना जाएगा। ऐसा करने पर एक हजार स्विस फ्रैंक यानी करीब 95 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा।

स्विटज़रलैंड की संसद के निचले सदन में बुर्का एवं नकाब प्रतिबंधित करने को लेकर हुए मतदान में 151 सांसदों ने इसके पक्ष में मत दिया, जबकि 29 सांसद इसके विरोध में रहे। इस प्रस्ताव को निचली सदन से पहले स्विट्जरलैंड का उच्च सदन स्वीकार कर चुका था।

कहाँ-कहाँ ढक सकते हैं चेहरा

संसद से पास कानून का आशय यह है कि कोई भी महिला या पुरुष चेहरा ढक कर अपनी पहचान न छिपा पाए। हालाँकि नए नियम में कुछ छूट भी दी गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह छूट मजहबी आयोजनों, स्थानीय रीति-रिवाज से जुड़े कार्यक्रमों और थिएटर आदि में किए जाने वाले अभिनय आदि पर लागू होगी।

इसके अलावा सर्दी-गर्मी से बचने के लिए चेहरे को ढकने की अनुमति होगी। और तो और विज्ञापनों में भी चेहरा ढकने पर पाबंद नहीं लगेगा। यह बैन वाला कानून फ्लाइट्स या राजनयिक एवं वाणिज्य दूतावास परिसरों पर भी नहीं लागू होगा। साथ ही स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से भी अगर कोई चेहरा ढकना चाहे तो ढक सकता है।

मानवाधिकार संगठनों का विरोध

गौरतलब है कि बुर्का इस्लामी रिवाज का हिस्सा है, लेकिन स्विट्जरलैंड में लोग इसे चरमपंथ का प्रतीक मानते हैं इसलिए उन्होंने इसे बैन करवाने के लिए अपना वोट दिया, लेकिन ये चीज मानवाधिकार संगठन वालों को नहीं पसंद आई। वह इस कानून का विरोध इसलिए भी करते दिखे थे क्योंकि उनका मत था कि स्विट्जरलैंड की कुल संख्या (89 लाख में) में मुस्लिमों की संख्या (5.4 फीसदी) बहुत कम है।

उनके तर्क अनुसार, चूँकि मुस्लिम महिलाओं की तादाद कम है इसलिए उन्हें मुँह छिपाकर घूमने की आजादी दी जानी चाहिए। कानून की आलोचना करने वालों का कहना है कि इससे मुस्लिम महिलाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे एक खतरनाक कानून बताया

कौन लेकर आया प्रस्ताव?

स्विट्जरलैंड में बुर्का बैन का प्रस्ताव दक्षिणपंथी पार्टी स्विस पीपुल लेकर आई थी। उन्होंने बुर्के के विरोध की मुहीम ‘चरमपंथ रोको’ नारे के साथ शुरू की थी। पार्टी का कहना था कि उनकी मुहीम के जरिए इस्लाम को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। इसका माँग का मतलब किसी से उसकी अभिव्यक्ति की आजादी छीनना नहीं है।

पत्नी का शरीर पति की ‘जागीर’ नहीं, उसके भरोसे का सम्मान करें: हाई कोर्ट, जानिए अंतरंग पलों का वीडियो रिकॉर्ड करने वालों को क्यों माना ‘विश्वासघाती’

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पति द्वारा पत्नी के साथ अंतरंग पलों के वीडियो शेयर के मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि पतियों के लिए विक्टोरियन युग की पुरानी मानसिकता को त्यागने और यह समझने का समय आ गया है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी का शरीर, उसकी गोपनीयता और उसके अधिकार उसके अपने हैं। उस पर पति का नियंत्रण या स्वामित्व नहीं है।

हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा कि अपने अंतरंग संबंधों से संबंधित वीडियो साझा करना पति और पत्नी के बीच के बंधन को परिभाषित करने वाली अंतर्निहित गोपनीयता का उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वह अपनी पत्नी द्वारा उस पर जताए गए विश्वास, आस्था और भरोसे का सम्मान करे।

जस्टिस दिवाकर ने कहा, “पत्नी का शरीर उसकी अपनी संपत्ति है। उसके निजी और अंतरंग जीवन के सभी पहलुओं में उसकी सहमति सर्वोपरि है। पति की भूमिका स्वामी या मालिक की नहीं, बल्कि एक समान भागीदार की है, जो उसकी स्वायत्तता और व्यक्तित्व का सम्मान करने के लिए बाध्य है। इन अधिकारों को नियंत्रित करने या उनका उल्लंघन करने का प्रयास विश्वास और वैधता का घोर उल्लंघन है।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला ने अपने पति के खिलाफ उनके अंतरंग पलों का वीडियो बनाने और फिर फेसबुक पर अपलोड करने एवं उसके चचेरे भाई को भेजने का आरोप लगाया था। इसको लेकर पत्नी ने पति के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज। कराया था। पति के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67B के तहत आपराधिक कार्रवाई की गई थी।

इसके बाद पति ने इस मामले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट से पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आग्रह किया था। पति ने तर्क दिया कि वह कानूनी रूप से विवाहित और महिला का पति है। इसलिए उसके खिलाफ आईटी अधिनियम की धारा 67B के तहत कोई अपराध नहीं बनता है। हालाँकि, हाई कोर्ट ने पति के तर्क को खारिज कर दिया।

आसिफ, असलम, असीम, सलीम… ऐसे नाम वाले कुल 28 चंदन गुप्ता की हत्या के दोषी, 3 जनवरी को कोर्ट सुनाएगी सजा: कासगंज में तिरंगा यात्रा के दौरान मारी थी गोली

कासगंज में चंदन गुप्ता हत्याकांड मामले में NIA कोर्ट ने 28 आरोपितों को दोषी माना है। 2 आरोपितों को बरी कर दिया गया है। यह सुनवाई उत्तर प्रदेश के लखनऊ NIA कोर्ट में गुरुवार (2 जनवरी, 2025) को हुई है। इन 28 आरोपितों को शुक्रवार (3 जनवरी, 2025) को सजा सुनाई जाएगी। चंदन गुप्ता हत्याकांड में इस फैसले को लेकर लम्बे समय से परिवार इंतजार कर रहा था। चंदन गुप्ता की हत्या मुस्लिमों ने 26 जनवरी, 2018 को कर दी थी जब वह एक तिरंगा यात्रा में शामिल थे।

NIA स्पेशल कोर्ट ने चंदन गुप्ता हत्याकांड में आसिफ कुरैशी उर्फ हिटलर, असलम, असीम, शबाब, साकिब, मुनाजिर रफी, आमिर रफी, सलीम, वसीम, नसीम, बबलू, अकरम, तौफीक, मोहसिन, राहत, सलमान, आसिफ जिम वाला, निशु, वासिफ, इमरान , शमशाद, जफर, शाकिर, खालिद परवेज, फैजान, इमरान, शाकिर, जाहिद उर्फ जग्गा को दोषी माना है। इन्हें हत्या समेत कई धाराओं में कोर्ट में दोषी ठहराया है। इन्हें शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी।

गणतंत्र दिवस के दिन चंदन गुप्ता बाकी युवाओं के साथ कासगंज में एक बाइक रैली निकाल रहे थे। यह बाइक रैली तिरंगों के साथ निकाली गई थी। जब यह रैली राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के पास पहुँची तो यहीं पर मुस्लिम युवकों ने हमला कर दिया। मुस्लिम युवकों ने हिन्दुओं पर फायरिंग की और पत्थर बरसाए। चंदन गुप्ता को निशाना बना कर गोली मारी गई, इसके चलते उनकी मौत हो गई। इसके बाद कासगंज में काफी हिंसा हुई। मामले में वसीम, नसीम समेत कई आरोपित पुलिस ने पकड़े थे। इनमें से एक को छोड़ कर बाकी को जमानत भी मिल गई थी।

मामले में 7 साल बाद चंदन गुप्ता के परिवार को न्याय मिलने जा रहा है। इस बीच चंदन गुप्ता का परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से जूझता रहा है। उनके घर में सुरक्षा को लेकर चिंताएँ भी रही हैं। उनके परिवार से किए गए कई वादे भी नहीं पूरे हुए। परिवार को किया गया नौकरी का वादा भी आधा अधूरा रहा और यहाँ तक कि उनके परिवार पर दबाव भी बनाया गया। केस खत्म करने तक के ऑफर दिए गए थे। इसको लेकर ऑपइंडिया ने चंदन गुप्ता के परिवार से 2022 में बात की थी।

चंदन गुप्ता के पिता सुशील गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया था, “चंदन की हत्या के बाद लगभग 1 साल तक मेरे परिवार को पुलिस सुरक्षा मिली थी। बाद में यह हटा ली गई। मेरा बड़ा बेटा विवेक गुप्ता इस केस का गवाह है। पहले वो मेडिकल रिप्रेजेंटिव की नौकरी करता था। लेकिन अब हमने डर से उसकी नौकरी छुड़वा दी है। हमें कई बार धमकियाँ भी मिली है। अब घर के खर्चों की पूरी जिम्मेदारी अकेले मेरे ऊपर है। मैं एक प्राइवेट अस्पताल में कम्पाउंडर हूँ। एक बेटी की शादी की भी जिम्मेदारी है।”

भावुक हो गए थे पिता

सुशील गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया था कि चंदन की हत्या में आरोपित 29 नामजदों में से 28 जेल से बाहर आ गए हैं। हाई कोर्ट से इन सबको जमानत मिल गई थी। सुशील गुप्ता ने बताया था कि आरोपित आर्थिक तौर पर मजबूत हैं, इसके कारण उन्हें मुकदमा लड़ने में सहूलियत है।

गुप्ता ने कहा था, “कासगंज कोर्ट में जब सुनवाई होती थी तो हमारी तरफ से 3-4 लोग होते थे, जबकि आरोपितों की तरफ से 100-200 लोग जमा हो जाते थे। वे दवाब बनाने की कोशिश करते थे। इसलिए हमने अपने पैसे से हाई कोर्ट में मुकदमा लड़ा और केस लखनऊ ट्रांसफर करवाया है। अब हम पैरवी के लिए लखनऊ बिना सुरक्षा के जाते हैं।”

सुशील गुप्ता के मुताबिक, “चंदन की हत्या के केस में आधे दर्जन से अधिक गवाह थे। लेकिन, अब एकाध को छोड़ अन्य गवाही देने से पीछे हट रहे हैं। अब उनका ही बेटा चश्मदीद गवाह बचा है। इसलिए परिवार उसकी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित रहता है।”

सुशील गुप्ता लोग इस बातचीत में भावुक भी हो गए थे। रोते हुए उन्होंने बताया, “चंदन के न रहने के बाद वादों की झड़ी लगा दी गई थी। मेरी बेटी को सरकारी नौकरी और शहर के एक चौराहे का नाम चंदन के नाम पर रखने की बात कही गई थी। मेरी बेटी MSc की पढ़ाई पूरी कर चुकी है। उसको ब्लॉक स्तर पर एक नौकरी दी गई जो 5 महीने बाद खत्म कर दी गई।”

रक्षाबंधन के दिन नहीं बना घर में खाना

सुशील गुप्ता ने बताय, “रक्षाबंधन के दिन मेरी बेटी अपने भाई को याद कर लगातार रोती रही। उस दिन दुःख में हमारे घर में खाना नहीं बना। बहन ने अपने भाई की फोटो के आगे राखी और मिठाई रखी हुई है। चंदन की माता अक्सर उस दिन को याद करते हुए बीमार पड़ जाती हैं। सरकार ने तब हमें 20 लाख रुपए की मदद की थी, वो पैसे इस केस की पैरवी और आरोपितों को सजा दिलाने में ही काम आ रहे हैं।”

सुशील गुप्ता ने आरोप लगाया था कि लेकिन उन पर केस खत्म करने का दबाव बनाने के लिए जो लोग भेजे जा रहे हैं, वे हिन्दू ही हैं। वे उनके पास तमाम तरह के ऑफर और प्रलोभन लेकर आते हैं। उन्होंने बताया था कि मेरा बेटा नहीं रहा तो मैं भी मरने को तैयार हूँ लेकिन दोषियों को सजा दिलाने के लिए अंतिम साँस तक लड़ूँगा।

गोरी लड़कियाँ कचरा और वेश्या, इनका कैसे भी यूज करो… ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग का काला सच, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल: एलन मस्क ने कहा- सरकार के लोगों को भी जेल में डालो

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। ग्रूमिंग गैंग चलाने वाले दरिंदों का साफ मानना था कि श्वेत लड़कियाँ कचरा और वेश्या हैं इनका इस्तेमाल कैसे भी हो सकता है।

हैरानी की बात ये है कि लड़कियों को टारगेट करने वाले अपना धंधा एक दशक तक ब्रिटेन के अलग-अलग शहरों (लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, रोशडेल, रोदरहैम आदि) में चलाते रहे लेकिन पुलिस प्रशासन ने इस पर कोई एक्शन तक नहीं लिया। नतीजतन 1997 से 2013 तक एशियाई देशों (मुख्यत: पाकिस्तान) के इस्लामी कट्टरपंथी 1400 लड़कियों को अपने निशाना बना चुके थे। मामले का खुलासा आखिर में तब हुआ कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर ध्यान दिया। इन्हीं लोगों की पहल से इस मामले में एक स्वतंत्र रिपोर्ट आई जिसने इस मुद्दे को उठाया।

पीड़ितों की आपबीती

आज एक बार फिर अगर ये मामला दोबारा चर्चा में है तो इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर रॉदरहैम बाल यौन शोषण कांड की रिपोर्ट शेयर हो रही है। लोगों को फिर बताया जा रहा है कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने पीड़िताओं को अलग-अलग ढंग से प्रताड़ित किया और जब वो अपनी शिकायतें लेकर पुलिस के पास गईं तो उनकी कोई सुनवाई तक नहीं हुई। यहाँ तक पीड़िताओं के अभिभावकों के साथ भी अभद्रता की गई।

रिपोर्ट में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक पीड़िता का बयान है। इस बयान के अनुसार 15 साल की उम्र में लड़की किसी बशरत हुसैन के साथ रिश्ते में थी। इस रिश्ते के दौरान ही उसे पता चला था कि बशरत के भाइयों के बीच और साउथ योर्कशायर पुलिस थाने के अधिकारियों का आपस में उठना-बैठना है।

इसी तरह एक अन्य मामले में एक रेप पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी के साथ जो हुआ उसके बाद उसे सर्जरी तक करवानी पड़ी थी, लेकिन न्याय की माँग लेकर जब वो पुलिस के पास गए तो एक अधिकारी ने कार्रवाई करने की बजाय उन्हें कहा कि इस घटना से उनकी बेटी को सबक मिलेगा।

अन्य मामले में एक लापता हुई लड़की के पिता को अधिकारी द्वारा कहा गया था कि रोथरहैम में तो अपनी उम्र से बड़े एशियाई बॉयफ्रेंड बनाने को लड़कियों ने फैशन बना लिया है। घबराने की बात नहीं है लड़की खुद आ जाएगी।

एक वीडियो भी वायरल है जिसमें एक पीड़ित पिता अपनी आपबीती बता रहा है। सुन सकते हैं कि पीड़ित पिता कहता है कि एक बार उन्हें कॉल आई कि उनकी बेटी को कहाँ रखा गया है। वो चूँकि उस जगह के करीब ही थे तो वो उस अपार्टमेंट में गए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और फिर अंदर देखा तो कुछ लोग पर्दे के पीछे थे। इसके बाद पुलिस भी वहाँ 5 मिनट के भीतर आ गई लेकिन उन्होंने आरोपितों को पकड़ने की बजाय उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया और सवाल पूछा- “तुम यहाँ क्या कर रहे हो।” इसके बाद पुलिस फिर उस पिता को उनके घर लेकर गई और वहाँ भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

ग्रूमिंग गैंग पर बोले एलन मस्क और जेके रॉलिंग

इन्हीं ग्रूमिंग गैंग की रिपोर्ट देखकर मामले पर प्रतिक्रिया एलन मस्क से लेकर हैरी पॉटर को लिखने वाली जे के रॉलिंग तक ने दी है। एलन मस्क ने इस पर ट्वीट करते हुए कहा है कि ब्रिटेन में तो सत्ता के सभी स्तरों के बहुत से लोगों को इसके लिए जेल में होना चाहिए। उन्होंने खुलेआम ये प्रतिक्रिया ब्रिटिश लेबर पार्टी की मंत्री रही जेस फिलिप्स को लेकर दी जिन्होंने एक समय में मुस्लिम ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ जाँच का विरोध किया था। वहीं जेके रॉलिंग भी कहती हैं कि इस पूरे मामले में पुलिस का भ्रष्टाचार विश्वास से भी परे है। उन्होंने इस गैंग का नाम ग्रूमिंग गैंग रखे जाने पर भी सवाल उठाए।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के संदिग्धों पर कार्रवाई

बता दें कि ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ की गई कार्रवाई में पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई एक विशेष पुलिस टास्कफोर्स द्वारा की गई, जिसे अप्रैल 2023 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा स्थापित किया गया था। इस टास्कफोर्स का उद्देश्य बाल यौन शोषण और ग्रूमिंग से संबंधित मामलों की जाँच को बेहतर बनाना और बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना था।

यह टास्कफोर्स इंग्लैंड और वेल्स के सभी 43 पुलिस बलों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसमें विशेषज्ञ अधिकारी और डेटा विश्लेषक शामिल हैं, जो ग्रूमिंग गैंग के मामलों की जाँच पहले भी कर चुके हैं। इस टास्कफोर्स की वजह से 4,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की जा चुकी है।

प्रसाद बाँटने के लिए गरीबनाथ धाम को बिहार सरकार ने 3 महीने के लिए दी जमीन, वक्फ बोर्ड ने ठोक दिया दावा: सचिव बोले- इनको मंदिर से दिक्कत

बिहार के मुजफ्फरपुर में स्थित गरीबनाथ मंदिर को दी गई एक जमीन को लेकर वक्फ बोर्ड ने नोटिस भिजवा दिया। यह जमीन मंदिर को शासन द्वारा आवंटित हुई थी। मंदिर को यह जमीन नैवेद्यम प्रसाद की बिक्री के लिए दी गई थी। हालाँकि, इस पर वक्फ बोर्ड को आपत्ति हो गई और उसने शिकायत दर्ज करवा दी। जिस जमीन पर विवाद है, वह एक मस्जिद के सामने है।

यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर के मुशहरी में स्थित गरीबनाथ शिव मंदिर से जुड़ा हुआ है। मंदिर में पूरे साल भर बिहार समेत बाकी जगहों से लाखों श्रद्धालु आते हैं। यह भीड़ सावन माह में कई गुने बढ़ जाती है, यहाँ कई जिलों से काँवड़ लाकर चढ़ाई जाती है। इसके चलते मंदिर में जगह का अभाव हो जाता है। ऐसे में यहाँ नैवेद्यम प्रसाद बेचने के लिए जगह कम पड़ रही थी।

गरीबनाथ मंदिर न्यास के सचिव एनके सिन्हा ने बताया, “इसी समस्या को देखते हुए मंदिर न्यास के मुखिया रहे एक IAS अधिकारी ने मुजफ्फरपुर के DM को नैवेद्यम प्रसाद बिक्री के लिए जगह आवंटित करने को कहा था। इसके लिए मंदिर के बाहर जमीन का 270 स्क्वायर फीट का टुकड़ा दिया गया था। यह जमीन तीन माह के लिए अस्थायी रूप से आवंटित की गई थी।”

उन्होंने ऑपइंडिया से बताया, “जमीन मस्जिद के सामने स्थित है और इसके साथ ही वक्फ बोर्ड की जमीन का कुछ हिस्सा है। यह जमीन मंदिर के न्यास ने वक्फ बोर्ड की जमीन छोड़ कर ली थी। हालाँकि, मस्जिद के लोगों को इससे ऐतराज हो गया। उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए वक्फ ट्रिब्यूनल में मुकदमा दर्ज करवा दिया।”

एनके सिन्हा ने बताया कि जमीन राजस्व रिकॉर्ड में नगर निगम मुजफ्फरनगर के नाम है और इसीलिए हमें आवंटित हुई थी। उन्होंने कहा, “जमीन मात्र तीन महीने के लिए हमें दी जानी थी और उसे पहले भी यह खाली ही पड़ी थी लेकिन मस्जिद को इस बात से समस्या थी कि आखिर मंदिर के उपयोग में यह जमीन क्यों आ रही है।”

जमीन पर नगर निगम और मस्जिद तथा वक्फ बोर्ड के बीच विवाद होने पर यहाँ नैवेद्यम की अस्थायी दुकान नहीं बनाई गई। इसके चलते यहाँ नैवेद्यम की बिक्री ही बंद हो गई और अब श्रद्धालुओं को समस्या उठानी पड़ रही है। एनके सिन्हा ने बताया कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नैवेद्यम प्रसाद की व्यवस्था हाल ही में स्वर्गवासी हुए आचार्य कुणाल किशोर ने करवाई थी।

उन्होंने कहा, “प्रसाद बिकने से दो फायदे थे, एक तो श्रद्धालुओं को गुणवत्ता वाला प्रसाद यहाँ मिलता था तथा दूसरी ओर मंदिर को इससे हर वर्ष न्यास को लगभग ₹5 लाख की कमाई होती थी। लेकिन अब यह पूरी व्यवस्था ठप हो गई है और जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ है, उस पर कुछ और लोग आकर दुकान लगा रहे हैं।”

इस मामले में वक्फ ट्रिब्यूनल सुनवाई कर रहा है। उसने इस मामले में नोटिस भी जारी किया है। इसको लेकर नगर निगम जवाब दे रहा है। वहीं मंदिर के पक्ष से भी वकील इस मामले में ट्रिब्यूनल में पेश होंगे। एनके सिन्हा ने बताया है कि असल लड़ाई वक्फ और नगर निगम के बीच है। अब इसको लेकर अगली सुनवाई 23 जनवरी, 2025 को है।

मंदिर के पुरोहित आनंद शास्त्री ने बताया है कि यहाँ जो शिवलिंग स्थापित है, वह स्वयंभू है और वह कैसे प्रकट हुआ, इसके विषय में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि मंदिर के भीतर मुंडन, गोदभराई समेत तमाम सामाजिक कार्यक्रम होते हैं और बिहार में सबसे अधिक सत्यनारायण कथा यहीं होती हैं।

जामिया मस्जिद हिंदू विरोधी गतिविधियों का अड्डा, हिमाचल की महिलाओं को बड़ी संख्या में ले गए बाहरी मुस्लिम… सरकार को बंद कर देना चाहिए: अल्पसंख्यक कल्याण परिषद अध्यक्ष एसएनए गिलानी

हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एसएनए गिलानी ने राज्य में अशांति के लिए दूसरे राज्यों के मुस्लिमों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों से आए मुस्लिम लोग मस्जिद और कब्रिस्तान बनाकर हिमाचल प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ रहे हैं। उन्होंने राज्य में हिंदू महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता जताई।

हिमाचल प्रदेश में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा राष्ट्रवादी समिति के सदस्य रहे गिलानी ने दावा किया कि इन मुस्लिमों ने हजारों हिंदू महिलाओं को अपने साथ दूसरे राज्यों में ले गए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित धरमपुर जामिया मस्जिद को राज्य में हो रही सभी हिंदू विरोधी गतिविधियों का मुख्यालय बताया।

गिलानी ने कहा, “धर्मपुर के आसपास कई आर्मी स्टेशन हैं, जिनमें आर्मी स्टेशन हेडक्वार्टर कसौली, आर्मी स्टेशन ढिकसाई, सपाटू और सोलन शामिल हैं। धर्मपुर में सीआरपीएफ का भी एक सेंटर है। इन सभी को धर्मपुर जामिया मस्जिद से खतरा है।” उन्होंने उस राज्य में इतनी बड़ी संख्या में मस्जिदों के निर्माण की जरूरत पर सवाल उठाया, जहाँ मुस्लिम आबादी ना के बराबर है।

गिलानी ने दावा किया, “हर शुक्रवार को सैकड़ों लोग (मुस्लिम) बाहर से धरमपुर मस्जिद आते हैं। उनमें से कोई भी धरमपुर में नहीं रहता। धरमपुर में एक भी स्थायी निवासी (मुस्लिम) नहीं है। मुश्किल से 3-4 परिवार (मुस्लिम) धरमपुर में किराए के घरों में रहते हैं।” उन्होंने कहा कि किसी भी शुक्रवार को धर्मपुर मस्जिद में आने-जाने वाले की मुस्लिमों की बड़ी संख्या को देखा जा सकता है।

एसएनए गिलानी ने कहा कि अगर हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में सैन्य केंद्रों को बचाना चाहती है और हिंदू महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है तो उसे धर्मपुर जामिया मस्जिद को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार को इस बात की भी जाँच करने का आग्रह किया कि धर्मपुर मस्जिद का निर्माण करने के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं।

गिलानी ने कहा कि अगर जाँच में पाया जाता है कि मस्जिद के निर्माण के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी तो इसे उसी तरह गिरा दिया जाना चाहिए, जैसे संजौली में अवैध मस्जिद को गिराया गया था। पिछले साल अक्टूबर में हिमाचल प्रदेश की एक अदालत ने संजौली में एक मस्जिद के अनधिकृत हिस्सों को गिराने का आदेश दिया था।

स्थानीय हिंदुओं ने मस्जिद के अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। उसके बाद कोर्ट ने यह आदेश दिया था। हाल ही में हिमाचल प्रदेश के स्थानीय लोगों में राज्य के विभिन्न शहरों में कई अवैध मस्जिदों के निर्माण को लेकर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि इन अवैध मस्जिदों में राज्य के बाहर से बड़ी संख्या में मुस्लिम आते रहते हैं।

मस्जिद-मदरसों की संख्या तेजी से बढ़ी

हिमाचल प्रदेश में मात्र मुस्लिम आबादी और बाहरी घुसपैठ ही एक समस्या नहीं है। राज्य में मस्जिद-मदरसे भी तेजी से बढ़े हैं। हिन्दू जागरण मंच ने एक रिपोर्ट में बताया है कि राज्य कोरोना काल से पहले 393 मस्जिदें थी। लेकिन कोरोना के बाद इनकी संख्या 520 हो गई। बताया गया कि सिरमौर जिले में सबसे अधिक 130 मस्जिदें बन गई हैं। इसके अलावा चंबा में 87 और ऊना में 52 मस्जिदें हैं। प्रदेश में मदरसों की संख्या भी 35 है।