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CJI और सुप्रीम कोर्ट के बाकी जजों के खिलाफ जाँच नहीं कर सकता लोकपाल, लेकिन PM, केन्द्रीय मंत्री समेत बाक़ी सभी दायरे में: शिकायत पर दिया फैसला

लोकपाल क़ानून की धारा 14 में लिखा है कि देश के प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, सांसद और ग्रुप A,B,C और D के कर्मचारी तथा किसी सोसायटी, ट्रस्ट, बोर्ड, बॉडी के सदस्य या चेयरमैन समेत और किसी भी शख्स, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का आरोप है, उसके खिलाफ लोकपाल जाँच कर सकता है।

लोकपाल ने कहा है कि देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के बाकी जज उसकी जाँच के दायरे में नहीं आते। लोकपाल ने यह फैसला पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ के खिलाफ दर्ज करवाई गई एक शिकायत पर सुनाया है। उनके खिलाफ शिकायत तब की गई थी जब वह CJI के पद पर थे। लोकपाल ने यह शिकायत भी ख़ारिज कर दी।

लोकपाल ने इस शिकायत को लेकर कहा, “असल मुद्दा, जिसका उत्तर सबसे पहले दिया जाना चाहिए, वह यह है कि क्या CJI या सुप्रीम कोर्ट के जज लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 14 के अनुसार लोकपाल के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।” लोकपाल कानून की धारा 14 में उन पदों के नाम नाम लिखे हैं, जिनके खिलाफ लोकपाल जाँच हो सकती है।

लोकपाल क़ानून की धारा 14 में लिखा है कि देश के प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, सांसद और ग्रुप A,B,C और D के कर्मचारी तथा किसी सोसायटी, ट्रस्ट, बोर्ड, बॉडी के सदस्य या चेयरमैन समेत और किसी भी शख्स, जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का आरोप है, उसके खिलाफ लोकपाल जाँच कर सकता है।

CJI के खिलाफ की गई शिकायत पर सुनवाई में लोकपाल ने इसी धारा 14 का हवाला देते हुए कहा कि जाँच सिर्फ उनके खिलाफ हो सकती है जिनका नाम इस क़ानून में लिखा है। लोकपाल ने अपने फैसले में कहा कि यही लोग लोकपाल की जाँच के दायरे में आते हैं।

लोकपाल ने कहा कि इसमें CJI या सुप्रीम कोर्ट के जज का नाम नहीं लिखा गया ऐसे में यह इसके अंतर्गत नहीं आते। इसके अलावा लोकपाल ने 2013 के क़ानून में दी गई ‘बॉडी’ की परिभाषा को भी सुप्रीम कोर्ट के ऊपर नहीं लागू पाया। लोकपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ना ही संसद के किसी अधिनियम से बना है और ना ही वह पैसे के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर है, ऐसे में वह ‘बॉडी’ की परिभाषा में नहीं आता।

लोकपाल ने यह सभी तर्क रखते हुए अपने फैसले में कहा, “ऐसे में इस दृष्टांत के अनुसार CJI और सुप्रीम कोर्ट के बाकी कार्यरत जज लोकपाल की जाँच के दायरे में नहीं आएँगे।” लोकपाल ने पूर्व CJI चंद्रचूड़ के खिलाफ दायर की शिकायत भी ख़ारिज कर दी। लोकपाल ने कहा कि हाई कोर्ट के जजों के मामलों में यह नियम लागू नहीं होगा।

इस शिकायत में आरोप था कि पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है और एक राजनीतिक पार्टी तथा एक राजनीतिक व्यक्ति को फायदा पहुँचाया है, जो कि शक्तियों का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार है। यह शिकायत अक्टूबर, 2024 में दी गई थी, तब डीवाई चंद्रचूड़ CJI थे। वह नवम्बर, 2024 में रिटायर हो गए थे।

यह फैसला लोकपाल के चेयरमैन के तौर पर जस्टिस AM खानविलकर ने सुनाया है। जस्टिस खानविलकर स्वयं भी सुप्रीम कोर्ट में जज रहे हैं। वह 2016 में सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किए गए थे। उनका सुप्रीम कोर्ट में जज के तौर पर कार्यकाल 2022 तक रहा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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