भारत की संसद से लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय तक दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों का इंतजार हो रहा था। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने तो पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि दिल्ली में भाजपा की बड़ी हार होने वाली है क्योंकि उसने अनुच्छेद 370 से छेड़छाड़ किया, कश्मीरियों पर ‘अत्याचार’ किया और नागरिकता को लेकर क़ानून लाया। वहीं भारतोय मीडिया का एक बड़े तबके में भी उत्साह का माहौल है। गिरोह विशेष के पत्रकारों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है।
इसी बीच देश के बड़े मीडिया संस्थानों में से एक ‘द हिन्दू’ की पोलिटिकल एडिटर निस्तुला हेब्बर ने एक ट्वीट किया, जो दिल्ली चुनाव के बारे में देश के कुछ जनप्रतिनिधियों की राय को बयाँ करता है। आप भी उनके ट्वीट पर एक नज़र डालिए। संसद भवन में कवरेज के दौरान उन्होंने कुछ सांसदों को बातचीत करते हुए सुना। बकौल निस्तुला, बातचीत के दौरान सांसद कह रहे थे- “सीधी बात है। मुस्लिम पूरा पोलराइज हुआ, हिन्दू घंटा हुआ।“
दिल्ली विधानसभा चुनाव में शाहीन बाग़ पूरी तरह छाया रहा। अमानतुल्लाह ख़ान के क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं ने धरने पर बैठ कर मीडिया को उलझाए रखा। कॉन्ग्रेस का वोटिंग प्रतिशत धड़ाम से गिरा है और कहा जा रहा है कि ये वोट्स केजरीवाल की पार्टी को ट्रांसफर हुए। मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस की बजाए AAP पर विश्वास जताया, क्योंकि उन्हें भाजपा को हराने से मतलब था।
दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाक़ों के ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो बहुत कुछ साफ हो जाता है। ओखला, सीलमपुर, मटिया महल और बल्लीमरान विधानसभा क्षेत्रों से आम आदमी पार्टी आगे चल रही है। इन चारों ही क्षेत्रों से AAP ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। इनके अलावा मुस्तफाबाद, किराड़ी, बाबरपुर और चाँदनी चौक से भी AAP ही आगे चल रही है।
अवैध घुसपैठियों को लेकर सरकार ने आँकड़े जारी किए हैं। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने पिछले 5 वर्षों का आँकड़ा दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा पर पिछले 5 सालों में 21,348 अवैध घुसपैठियों को प्रत्यर्पित किया गया है। ये आँकड़े 2015 से लेकर अब तक के हैं। इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल द्वारा 9205 घुसपैठियों को गिरफ़्तार किया गया है। ये आँकड़े भी भारत-बांग्लादेश सीमा से सम्बंधित ही हैं और पिछले 5 सालों के हैं।
Home ministry: 21,348 infiltrators deported along Indo-Bangladesh border in last five years since 2015; 9,205 infiltrators arrested by BSF along Indo-Bangladesh border since 2015
वहीं इस दौरान गृह मंत्रालय ने कुछ अन्य जानकारियाँ भी दी। 1947 के भारत-पाक युद्ध की बात करते हुए बताया गया कि उस समय 31,619 ऐसे परिवारों को रजिस्टर किया गया था, जो विस्थापित हो गए थे। इनमें से 26,319 परिवार पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य में बस गए थे। वहीं 5300 परिवारों ने जम्मू कश्मीर छोड़ कर देश के अन्य हिस्सों में बसना पसंद किया। वहीँ 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में छम्ब नियाबत क्षेत्र से 10,065 परिवार विस्थापित हुए।
MHA in LS: 31,619 displaced families from POJK regd after Indo-Pak war of 1947. Of these, 26,319 families settled in erstwhile State of J&K and 5,300 families moved to other parts of country. During Indo-Pak wars of 1965 & 1971, 10,065 families displaced from Chhamb Niabat area.
उधर मंगलवार को ही गृह मंत्रालय ने ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ को लेकर सवाल का जवाब दिया। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया कि मंत्रालय के पास ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ को लेकर कोई सूचना नहीं है। मंत्रालय के पास इसकी कोई सूचना नहीं है कि ऐसे किसी गैंग के बारे में किसी जाँच एजेंसी ने सूचित किया हो। हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेता विन्सेंट एच पाला और जसबीर सिंह गिल का ये सवाल ही बेहूदा था, क्योंकि ‘टुकड़े-टुकड़े’ कोई आधिकारिक शब्दावली है ही नहीं।
कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार (फरवरी 11, 2020) को दिल्ली में जारी मतगणना के बीच EVM का मुद्दा उठाया है। अभी तक के रूझानों में आम आदमी पार्टी (AAP) को बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी दूसरे स्थान पर चल रही है। वहीं कॉन्ग्रेस का खाता भी नहीं खुला है। दिल्ली में 15 साल तक राज करने वाली कॉन्ग्रेस चुनाव में पूरी तरह से साफ हो गई है और खाता खोलने के लिए भी जूझ रही है।
No Machine which has a Chip is Tamper Proof. Also please do for a moment think, why no Developed Country uses EVM?
इस बीच कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जारी मतगणना के बीच EVM पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सवा अरब लोगों के जनादेश को चुराने की इजाजत नहीं दी जा सकती। दिग्विजय सिंह ने ने कहा कि ईवीएम टेंपर-प्रूफ नहीं है और कोई विकसित देश इनका उपयोग नहीं करता है। उन्होंने ट्वीट किया, “चिप वाली कोई मशीन टेंपर-प्रूफ नहीं है। और कृपया एक मिनट के लिए सोचें कि विकसित देश ईवीएम का उपयोग क्यों नहीं करते?” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तथा चुनाव आयोग से भी ईवीएम का मुद्दा उठाने का आग्रह किया।
Would CEC and Hon Supreme Court please have a fresh look on EVM voting in India? We are the largest Democracy in the World, we can’t allow some Unscrupulous People to Hack Results and steal the Mandate of 1.3 Billion People.
सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, “क्या चुनाव आयोग और माननीय सुप्रीम कोर्ट भारत में ईवीएम मतदान के मुद्दे पर एक बार फिर सोचेंगे? हम दुनिया में सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और हम कुछ बेईमान लोगों को चुनाव परिणाम हैक करने और 1.3 अरब लोगों के जनादेश को चुराने की अनुमति नहीं दे सकते।” दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि पोस्टल बैलेटों की भी गिनती की जानी चाहिए।
If they match the Votes in the Counting Unit. Declare the result. If they don’t match then count the Ballots of all Polling Booths in the Assembly. It would convince every one and save time also as this has been the consistent arguement of CEC in favour of EVM.
आगे उन्होंने कहा कि अगर उनका काउंटिंग यूनिट के वोटों से मिलान होता है तो परिणाम की घोषणा कर दें। अगर उनका मिलान नहीं होता है तो सभी मतदान केंद्र के बैलटों की गिनती सदन में की जाए। इससे सभी लोग सहमत होंगे और समय भी बचेगा क्योंकि चुनाव आयोग ईवीएम के पक्ष में लगातार यही तर्क देता रहा है।
Watch a hacker break into a voting machine at Def Con, the largest convention of hackers in the world. The event is intended to demonstrate vulnerabilities in America’s vast election infrastructure. https://t.co/HLVGoYEIjGpic.twitter.com/a8cPVG8RrR
गौरतलब है कि इससे पहले भी दिग्विजय सिंह ने EVM पर सवाल उठाया था। उन्होंने अपने ऑफिशियल टि्वटर हैंडल पर वीडियो शेयर कर चुनाव आयोग को EVM की निष्पक्षता के संबंध में चुनौती दी थी, जिसमें अमेरिका के तीन सबसे बड़े वोटिंग उपकरण निर्माताओं के सीईओ का मानना था कि वोटिंग मशीन 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं है।
बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के रुझानों में आम आदमी पार्टी फिर बहुमत की ओर बढ़ रही है। वहीं, बीजेपी का प्रदर्शन पिछली बार के मुकाबले थोड़ा सुधरा है। जबकि दूसरी तरफ शीला दीक्षित की अगुआई में राज्य में 15 साल तक राज करने वाली कॉन्ग्रेस खाता खोलने के लिए भी जूझ रही है। लेकिन अफसोस कि अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए जिस वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को लाख प्रयास करने चाहिए थे, वो सिर्फ एक काम करके निश्चिंत हैं – EVM का राग रोना! और चूँकि इनका EVM राग चुनाव दर चुनाव बरकरार है, इसलिए हर मतगणना वाले दिन ये इसका रोना रोकर अपना राजनीतिक वापसी की घोषणा भी कर देते हैं!
दिल्ली में कांग्रेस का खाता न खुलने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ: ये तो हम पहले से ही जानते थे, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा का क्या परिणाम हुआ? जो इतनी लम्बी-लम्बी बातें करते हैं। #DelhiElectionResultspic.twitter.com/HCKeYOzaGc
कॉन्ग्रेस का खाता न खुलने पर मध्य प्रदेश के मुख्यमत्री कमलनाथ कहते हैं, “ये तो हम पहले से ही जानते थे, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि भाजपा का क्या परिणाम हुआ? जो इतनी लम्बी-लम्बी बातें करते हैं।”
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी: दिल्ली में कांग्रेस पार्टी ने सत्ता पर कब्ज़ा करने का कभी नहीं सोचा, हमने सोचा था कि कांग्रेस कुछ सीटें जीते और दिल्ली में कांग्रेस पार्टी का अस्तित्व बना रहे। #DelhiElectionResultspic.twitter.com/Ay2KFdSvUZ
वहीं कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी तो पहले से ही अपनी हार से आश्वस्त नजर आए। उन्होंने कहा, “दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी ने सत्ता पर कब्ज़ा करने का कभी नहीं सोचा, हमने सोचा था कि कॉन्ग्रेस कुछ सीटें जीते और दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी का अस्तित्व बना रहे।”
नागरिकता संसोधन कानून (सीएए) बनने के बाद से ही देशभर में इसे लेकर कहीं विरोध प्रदर्शन तो कहीं समर्थन में रैली निकाली जा रही हैं, लेकिन सीएए का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों को अब इसके समर्थकों से जवाब भी मिलने लगा है। कुछ ऐसा ही हुआ कल शाम को दिल्ली के तुगलकाबाद में, जहाँ सीएए के विरोध में नारेबाजी कर रहे लोगों के सामने सीएए के समर्थक आकर खड़े हो गए। हालाँकि, पुलिस ने तत्काल ही मौके पर पहुँचकर स्थिति को काबू में कर लिया।
दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले करीब दो माह से प्रदर्शनकारियों का सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन जारी है। वहीं सोमवार देर शाम को दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र में कुछ लोग सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर आ गए और ज़ोर-ज़ोर से सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाजी करते हुए संविधान को बचाने की दुहाई देने लगे, जिसमें जामिया के कुछ छात्र भी शामिल थे। इसी बीच सीएए के समर्थन में कुछ लोग हिंदुस्तान ज़िंदाबाद, वंदे मातरम के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों के सामने आकर खड़े हो गए।
देखते ही देखते दोनों ओर से जमकर नारेबाजी होने लगी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसकी जानकारी जैसे ही दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को हुई वह तत्काल पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए, लेकिन पुलिस के मौके पर पहुँचने के बाद भी कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ और आमने-सामने खड़े होकर नारेबाजी करते रहे। आख़िर में दिल्ली पुलिस को हल्का बल प्रयोग करके सड़क पर डटे लोगों को खदेड़ना पड़ा। तब कहीं जाकर पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से पहले ही काबू में कर लिया।
A protester anguishing in anger and shouting a shoot to security forces to wear bangles somewhere and get a life of ease during anti CAA,NRC protest at Jamia Millia Islamia University New Delhi on February 10/2020. #JamiaProtests#JamiaProtest#NRC_CAA_Protestpic.twitter.com/W9zkFgzjrd
आपकों बता दें कि बीते सोमवार को मंडी हाउस में प्रदर्शनकारियों ने सीएए के विरोध में मार्च निकालने का आह्वान किया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए पहले ही बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया था कि यहाँ कोई विरोध-प्रदर्शन या धरना देने का स्थान नहीं है, किसी को धरना देना या विरोध-प्रदर्शन करना है तो वह जंतर-मंतर जाए। गौरतलब है कि पिछले करीब दो महीने से दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों का सीएए के ख़िलाफ़ रोड पर धरना जारी है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले दिनों स्थानीय लोगों ने शाहीन बाग धरने के ख़िलाफ़ भी एक विरोध मार्च निकाला था, जिसमें लोगों ने दिल्ली पुलिस से धरना हटवाने की माँग करते हुए कहा था कि, जहाँ जाना है वहाँ जाओ, लेकिन सड़क को खाली करो।
भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने नोए़डा अथॉरिटी के पूर्व इंजीनियर यादव सिंह को एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिया है। हाल ही में यादव सिंह जमानत पर रिहा हुए थे। यादव सिंह पर भ्रष्टाचार के अलावा आय से अधिक संपत्ति समेत कई मामले चल रहे रहे हैं। बता दें कि यादव सिंह नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर रह चुके हैं।
Central Bureau of Investigation (CBI) has arrested Yadav Singh, former engineer of Noida Authority in connection with Noida corruption case. pic.twitter.com/P61WbCm5KJ
पहली बार यादव सिंह के खिलाफ 2015 में जाँच शुरू हुई थी। 2016-17 में CBI ने उनके खिलाफ दो चार्जशीट तैयार की थी। CBI ने अपने आरोप पत्र में कहा था कि अप्रैल 2004 से 4 अगस्त 2015 के बीच यादव सिंह ने आय से अधिक 23.15 करोड़ रुपए जमा किए। ये उनकी आय के स्रोत से लगभग 512.6 प्रतिशत ज्यादा है। यादव सिंह पर कुल 954 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का भी आरोप लगा है। जनवरी 2018 में जब CBI ने इस मामले की जाँच शुरू की, तब वो नोएडा अथॉरिटी में बतौर चीफ इंजीनियर काम कर रहे थे।
CBI के एक अधिकारी ने बताया कि जब यादव चीफ इंजीनियर थे, तब कुल 116.39 करोड़ का टेंडर 5 प्राइवेट फर्म्स को जारी हआ था। ये टेंडर फर्म्सगुल इंजीनियरिंग, एसएमपी टेक्नोलॉजी, अबू इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और संजय इलेक्ट्रॉनिक्स तथा शाकंभरी प्रोजेक्ट को दिए गए थे। CBI इस मामले की भी जाँच कर रही है।
CBI का आरोप है कि गुल इंजीनियरिंग के मालिक जावेद अहमद, यादव सिंह के पुराने और करीबी दोस्त हैं। इस कंपनी को नियमों का उल्लंघन करके टेंडर दिया गया था। जाँच एजेंसी का कहना है कि जावेद अहमद प्राय: यादव सिंह को रिश्वत दिया करते थे। आरोप है कि यादव व अथॉरिटी के अन्य अधिकारियों ने तमाम नियमों को ताक पर रखकर इस कंपनी को 31 ठेके दिए थे। इसके बदले में डायरेक्टर जावेद अहमद ने यादव सिंह को बतौर रिश्वत एक इनोवा कार भी दी थी।
गौरतलब है कि CBI यादव सिंह को इसके पहले भी दो अन्य मामलों में गिरफ्तार कर चुकी है। जिसमें यादव सिंह लंबे समय तक जेल में रहे थे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वह हाल ही में जमानत पर जेल से रिहा हुए थे। हालाँकि कोर्ट ने CBI को इस बात की छूट दी थी कि यदि यादव सबूत के साथ छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करें तो वह जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकती है। बता दें कि यादव सिंह का नाम उत्तर प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं के साथ जोड़ा जाता रहा है और यह भी आरोप लगता रहा है कि यादव सिंह रिश्वत की रकम को नेताओं तक पहुँचाते थे।
दिल्ली विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है। हर किसी की निगाहें परिणाम पर टिकी हुई हैं। भले ही रुझानों में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिलता दिख रहा है, जोकि अभी तक 57 सीटों पर आगे चल रही है। लेकिन 13 सीटों पर बीजेपी ने भी बढ़त बना रखी है। साथ ही कॉन्ग्रेस और अन्य के खाते में एक भी सीट जाती हुई नहीं दिख रही। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया अपनी विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज से पीछे चल रहे हैं।
13 सीटों (जहाँ BJP आगे है) के अलावा दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली की करीब 9 सीटें ऐसी हैं, जहाँ बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच काँटे का टक्कर चल रहा है। इन सीटों पर बढ़त का अंतर एक हजार वोटों से कम का है। इनमें विश्वास नगर विधानसभा, सीलमपुर, आदर्श नगर, द्वारका, हरिनगर, किराड़ी, कालकाजी, नजफगढ़, मुंडका, ओखला, शालीमार बाग शामिल है।
Delhi BJP Chief Manoj Tiwari: Trends indicate that there is a gap between AAP-BJP, there is still time. We are hopeful. Whatever the outcome, being the State Chief I am responsible. #DelhiElectionResultspic.twitter.com/k2G7r0OGCu
दिल्ली चुनाव को लेकर वोटों की गिनती जारी है। रुझानों में आम आदमी पार्टी (AAP) को 50 सीट मिलती हुई दिखाई दे रही है, जो एग्जिट पोल के अनुरूप ही है। रुझानों में दिल्ली में लगातार तीसरी बार अरविंद केजरीवाल की आदमी पार्टी की सरकार बनती दिख रही है। आम आदमी पार्टी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा पर एक आरामदायक बढ़त बना ली है। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल मतदान 62.59 प्रतिशत दर्ज किया गया। ऐसे में लोगों की नजर दिल्ली की 8 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर है। आइए डालते हैं इन मुस्लिम बहुल सीटों पर एक नजर:-
ओखला विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के अमानतुल्ला खान आगे
मटिया महल विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के शोएब इकबाल आगे
बल्लीमरान विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के इमरान हसन आगे
सीलमपुर से आम आदमी पार्टी के अब्दुल रहमान आगे
मुस्तफाबाद से भारतीय जनता पार्टी के जगदीश प्रधान आगे
एक बॉलीवुड निर्देशक हैं- विधु विनोद चोपड़ा। ये खुद को कश्मीरी पंडित बताते हैं, उनके दर्द को समझने का दावा करते हुए फिल्म बनाते हैं- शिकारा। मगर जिस तरह से उन्होंने इस फिल्म में कश्मीरी पंडितों के साथ 1990 में घटित त्रासदी के साथ अन्याय किया, उसका मजाक बनाया, उसके लिए कश्मीरी पंडित उन्हें कभी माफ नहीं कर पाएँगे। कहने को तो उन्होंने कहा था कि इस फिल्म में उन्होंने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के दर्द को दिखाया है। उन्होंने दावा किया था कि इसमें दिखाया गया है कि कैसे और किन परिस्थितियों से गुजर कर कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा।
मगर अफसोस की बात है कि ये सब कश्मीरी पंडितों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ के सिवाय और कुछ नहीं था। उन्होंने ना सिर्फ कश्मीरी पंडितों के दर्द का ध्रुवीकरण कर उन्हें धोखा दिया है बल्कि इस फिल्म के जरिए उन्होंने कट्टरपंथियों को भी जस्टिफाई किया है। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि मूवी में कट्टरपंथी इस्लाम पर लीपापोती करने के लिए तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया गया है और उन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। फिल्म के रिलीज होने के बाद से हर वो कश्मीरी पंडित क्षुब्ध और आक्रोशित है, जिनसे विधु विनोद चोपड़ा ने कहा था कि ये आपकी कहानी है, हम आपके दर्द को दिखाने जा रहे हैं।
इन्हीं कश्मीरी पंडितों में से एक हैं- रोमिला टट्टू। रोमिला का घर जम्मू में है। वो ऑपइंडिया से बात करते हुए बताती हैं कि विधु विनोद चोपड़ा और फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर राहुल पंडिता ने उनके परिवार से कहा था कि वो फिल्मी पर्दे के जरिए कश्मीर में हुए नरसंहार, रेप, हत्या आदि को दिखाने वाले हैं। इसलिए हमसे जुड़िए और हमें अपनी कहानी बताइए। वो कहती हैं कि उनके परिवार को लगा कि कोई तो है जो उनके दर्द को दिखाएगा और उनका परिवार पूरी जी-जान से उनकी मदद में जुट गया। फिल्मकार ने उन्हें जहाँ-जहाँ बुलाया, वो लोग गए। उनसे प्रमोशन करावाया, उनके नाम पर हमदर्दी हासिल की और दिखाया क्या… प्रेम कहानी! रोमिला सवाल करती हैं कि जब प्रेम कहानी ही दिखाना था, तो हमें इसमें क्यों घसीटा?
और उनका सवाल भी वाजिब है। आप फिल्मकार हैं। आपके पास पैसे हैं। आप किसी भी विषय पर फिल्म बना सकते हैं। लेकिन इसके लिए उनके दर्द को कुरेदने का और फिर बिजनेस और मार्केटिंग के लिए प्रेम कहानी दिखा देना कहाँ तक उचित है? रोमिला ने बताया कि विधु विनोद चोपड़ा ने बताया कि इस फिल्म में कश्मीरी पंडितों के दर्द को दिखाने के लिए बंसी लाल मट्टू के नाम का इस्तेमाल किया। मगर फिल्म में उनके सीन कितने दिखाए गए… मात्र तीन! जिसमें से एक भी सिंगल फ्रेम में नहीं।
फिल्म रिलीज के बाद विधु विनोद चोपड़ा का ट्रांसलेटेड फेसबुक पोस्ट
बंसी लाल मट्टू, रोमिला के पति के छोटे दादाजी थे। उन्होंने हमसे अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि जिस समय विधु विनोद चोपड़ा ने बंसी लाल से फिल्म बनाने की बात कही थी और कहा था कि वो उनकी कहानी को, उनके दर्द को पर्दे पर दिखाएँगे, उस समय वो कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। मगर चोपड़ा की बात सुनकर उन्होंने ये बात ना तो उन्हें बताई और न ही परिवार में किसी को इसकी भनक लगने दी, ताकि वो शूटिंग कर सके। उन्होंने अपने कैंसर की रिपोर्ट घर वालों से छुपाई। कैंसर से जूझते हुए उन्होंने मूवी में काम किया। बंसी लाल ने फिल्म पूरी होने के बाद कैंसर वाली बात परिवार वालों को बताई, फिर उनका ट्रीटमेंट शुरू हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वो बच नहीं पाए। रोमिला कहती हैं कि अगर बंशी लाल को पता होता कि ये एक लव स्टोरी है, तो कभी भी इसमें एक्ट नहीं करते, वो भी कैंसर की हालत में! वो बिफरते हुए कहती हैं, “विधु विनोद चोपड़ा ने हर स्टेज पर कहा कि बंसी लाल जी को कैंसर था, फिर भी उन्होंने हमारे लिए काम किया। तो क्या आपने यही ईनाम दिया उनके बलिदान का?”
विधु विनोद चोपड़ा के पोस्ट पर रोमिला टट्टू की प्रतिक्रिया
रोमिला ने बताया कि पिछले एक महीने से उनके परिवार से कोई न कोई इंटरव्यू के लिए जा रहे थे। उन्हें INDIA TV, NDTV, INDIA TODAY जैसे बड़े-बड़े प्लेटफॉर्मों पर ले जाया जा रहा था। वो भी बसों से। 60 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को भी बसों में भरकर ले जाया जा रहा था। और वो भी जा रहे थे क्योंकि उन्हें लग रहा था कि उन्होंने फिल्म में उनकी कहानी दिखाई है, मगर बेहद अफसोस की बात है कि उन्होंने फिल्म में एक भी वास्तविक सीन को रिक्रिएट करके नहीं दिखाया।
विधु विनोद चोपड़ा के पोस्ट पर शिवानी मट्टू की प्रतिक्रिया
इसके अलावा राम मंदिर के लिए जो विधु विनोद चोपड़ा के दिल में नफरत भरी हुई है, उसे भी फिल्म में दिखाने से वो चूके नहीं हैं और इसके लिए उन्होंने बड़ी ही बेशरमी से एक छोटे बच्चे का इस्तेमाल किया है। मतलब वो कितना नीचे गिर सकते हैं कि एक छोटे से बच्चे से ‘मंदिर वहीं बनाएँगे’ का नारा लगवाया जाता है और इसे नफरत फैलाने वाला और देश तोड़ने वाला नारा बताया जाता है।
मगर कहीं भी जिहादी नारे नहीं दिखाए गए। पूरी फिल्म में समुदाय विशेष को शांतिप्रिय दिखाया गया है। कहीं भी मूवी में उन्होंने यह नहीं दिखाया कि आखिर कश्मीरी पंडितों के वहाँ से भागने की वजह क्या थी? उन्होंने एक भी जिहादी नारे लगते हुए नहीं दिखाए, कश्मीरी पंडितों की बहू-बेटियों के साथ हुए सामूहिक बलात्कार, नृशंस हत्या को नहीं दिखाया गया। आगजनी के नाम पर दूर से एक-दो घरों को जलते हुए दिखाया गया। क्या यही वजह है उनके वहाँ से अपने घर-बार को छोड़कर भागने की?
@VVCFilms Sach sach hota hai aur uske liye ek hi basha kafi hai woh hai sach ki…10 languages mai likhne se kuch nahi hoga sahab abh sach likhna padega. You must have understood ki YEH INDIA ABH SUNTA HI NAHI SUNATA BHI HAI. pic.twitter.com/w9VH1CILD5
रोमिला के साथ ही बंसी लाल मट्टू की पौत्री शिवानी मट्टू ने भी ऑपइंडिया से बात की। शिवानी ने कहा कि विधु विनोद चोपड़ा ने एक बार फिर से बड़ी ही निर्लज्जता से पंडितों को खंडित करने का काम किया है। वो बताती हैं कि मूवी की शुरुआत से लेकर अंत तक लतीफ नाम के एक ब्यक्ति को रहम दिल और शांतिप्रिय दिखाया जाता है। शुरुआती सीन में दिखाया जाता है कि भारत की सरकार लतीफ के अब्बू को मार देती है, जिसके बाद वो आतंकवादी बन जाता है, लेकिन उसके अंदर जमीर जिंदा रहता है। वो शिवकुमार धर नाम के किरदार से कहता है, “मैंने तो अपने अब्बू को खो दिया, तुम अपने अब्बू को बचा लो, दिल्ली चले जाओ।” यहाँ पर वो यह भी सवाल करती हैं कि उस समय भारत की सरकार कैसे कर सकती है, जबकि उस समय तो अनुच्छेद 370 लागू था। उस समय तो फारुक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती का ही शासन था। 370 तो 5 अगस्त 2019 को निरस्त हुआ है। वो यह भी कहती हैं कि फिल्म में लतीफ और शिकुमार को भाई दिखाया जाता है। ये दोनों भाई कैसे हो सकते हैं… भगवान जाने!
वो कहती हैं कि एक सीन में दिखाया जाता है कि शिवकुमार के मकान बनाने के लिए लतीफ ने पत्थर दिए थे। यानी कि उन्होंने ये दिखाया कि एक दूसरे समुदाय के व्यक्ति ने हिंदुओं की मदद की। बाकी ज्यादातर दूसरे समुदाय के कश्मीरी हिंदुओं को यही कहते हुए दिखाया गया कि भाई तुम लोगों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। हमलोग तुम्हारे साथ हैं। ये बस चंद लोग हैं, जो इस प्रकार का कर रहे हैं।
एक बड़ी ही विचित्र बात बताई रोमिला जी ने कि जिस शांति का किरदार दिखाया गया है, वो सरला भट्ट का है। सरला भट्ट नर्स थी और फिल्म में शांति को भी नर्स दिखाया गया है। मगर उन्होंने इसमें ये नहीं दिखाया कि कैसे आतंंकवादियों द्वारा सरला भट्ट का सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर बढ़ई की आरी से उसके शरीर को तीन हिस्सों में चीर कर सरे बाजार घुमाया गया। ऐसा हजारों हिन्दू महिलाओं के साथ किया गया। लेकिन यहाँ पर उन्होंने इस किरदार को शांति नाम देकर, जो कि उनकी स्वर्गीय माताजी का भी नाम है, प्रेम कहानी बना दी। रोमिला कहती हैं कि शांति के किरदार के बारे में आम आदमी नहीं समझ पाएँगे कि वो किस तरह से सरला से जुड़ा है, लेकिन चूँकि उन्होंने नजदीक से देखा है तो ये दावा कर सकती हैं।
रोमिला कहती हैं कि अगर डायरेक्टर का दावा है कि वो सच्ची घटना को दिखा रहे हैं, तो उस समय की जो त्रासदी थी, उसमें कौन रोमांस कर रहा था, जो उन्होंने लव स्टोरी दिखाई है? लोगों के सर के ऊपर छत नहीं थी, हालत खराब थी, लोग कट्टरपंथियों के शिकार होने के अलावा साँप-बिच्छू काटने से, अत्यधिक गर्मी और कई अन्य बीमारियों से मर रहे थे। इसे तो नहीं दिखाया गया। वो कहती हैं, “उस समय की त्रासदी ऐसी थी कि चोपड़ा जी लिखते-लिखते थक जाएँगे, लेकिन हम बताते-बताते नहीं थकेंगे।” वहीं जब रोमिला और शिवानी से पूछा गया कि विधु विनोद चोपड़ा और राहुल पंडित, वो दोनों भी तो कश्मीरी पंडित हैं तो वो भी इस दर्द से गुजरे होंगे, तो उन्होंने सच ही दिखाया होगा? इस पर रोमिला बिफरते हुए कहती है कि उन्हें तो इस बात पर भी शक है कि वो दोनों कश्मीरी पंडित हैं, अगर होते तो इस तरह की निर्लज्जता नहीं करते। शिवानी इसका जवाब देते हुए कहती हैं, ‘घर का भेदी लंका ढाए’। मतलब तो आप समझ ही गए होंगे।
रोमिला यहाँ पर फिल्म के कास्ट पर सवाल करते हुए कहती हैं कि वो कश्मीरी पंडित एक्टर्स को भी कास्ट कर सकते थे, लेकिन उन्होंने मुस्लिम एक्टर्स को क्यों चुना। यह राजनीति क्यों खेली? एक जगह पर सादिया, जो कि शांति का किरदार निभा रही थी, वो सामान पैक करते समय मंदिर उठाकर रखती है। रोमिला इस पर आपत्ति जताते हुए कहती हैं, “मैं किसी धर्म से नफरत नहीं करती। धर्म से हमारा मतलब एक ही है कि वो हमारा पालनहार है, लेकिन जब वो लोग हमें अपने मजहब में नहीं घुसने देते तो फिर एक मुस्लिम एक्ट्रेस ने हमारा मंदिर कैसे छुआ? क्या पता वो गाय खाकर बैठी हो। वो हमारे पवित्र मंदिर को हाथ कैसे लगा सकती है?” वो कहती है कि कश्मीर में हजारों मंदिरों को तोड़ा गया, लेकिन इसमें एक भी मंदिर को नहीं दिखाया गया। वो यहाँ पर एक और बात कहती हैं, “विधु विनोद चोपड़ा कहते हैं कि वो इस फिल्म के जरिए अपनी माँ को श्रद्धांजलि दे रहे हैं तो क्या कोई अपनी माँ को श्रद्धांजलि में लव स्टोरी देता है?”
शिवानी कहती हैं, “ट्रेलर देखकर लगा था कि किसी ने हमारी कहानी दिखाने की हिम्मत की, लेकिन प्रीमियर के समय बायस्ड लल्लनटॉप, एनडीटीवी, रवीश कुमार, बरखा दत्त वगैरह को देखकर लग गया था कि हमारी भावनाओं के साथ खिलवाड़ हुआ है। क्योंकि ये रवीश कुमार और बरखा दत्त वही लोग हैं, जिन्होंने इस मुद्दे पर काफी राजनीतिक रोटियाँ सेंकी थीं।” रोमिला मीडिया के बारे में बात करते हुए कहती हैं कि जब उनके परिवार वाले इंडिया टीवी को इंटरव्यू देने के लिए गए थे तो उनके ससुर जी भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने बंसी लाल और 1990 के दौरान घटी घटनाओं को साझा किया था। उन्होंने बताया था कि 1990 ही नहीं, बल्कि वो लोग 1967 से इस्लामिक आतंकवाद से जूझ रहे हैं। इंडिया टीवी वालों ने बड़ी ही धूर्तता से उस सेशन को ही हटा दिया था।
रोमिला बताती हैं कि फिल्म में कहीं भी इस सच्चाई को भी नहीं दिखाया गया है कि कश्मीरी पंडित मुस्लिमों के बच्चों को पढ़ाया करते थे। वो कहती हैं कि 1997 में भी आतंकियों के आतंक का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उस समय में उनके पति के मौसाजी, जिनका नाम अशोक कुमार रैना था। उनकी पोस्टिंग जम्मू में हुई थी। वो बस से वहाँ उन मुस्लिमों के बच्चों को पढ़ाने के लिए जा रहे थे। बीच में ही बस रोककर वो लोग चढ़े और पूछा कि कौन-कौन हिंदू है? तो अशोक के साथ दो अन्य के बारे में बता दिया गया। जिसके बाद इन तीनों को बस से नीचे उतारकर एक-एक करके गोली मारकर हत्या कर दी गई। शिवानी आगे बताती हैं कि विस्थापन के दौरान इन लोगों को जिस कैंप में रखा गया था, उसमें वॉशरूम वगैरह भी नहीं थे। किसी तरह से बाँस और पत्थर की सहायता से पर्दे टाँगकर काम चलाते थे। एक दिन यही पत्थर, जिससे उन लोगों ने पर्दे बाँध रखे थे, उनके एक दोस्त के सिर पर जा गिरा। वो जख्मी हो गया और फिर उसे 6 टाँके लगाने पड़े।
शिवानी और रोमिला कहती हैं कि फिल्म में एक जगह बेनजीर भुट्टो का धुँधला सा वीडियो दिखाया जाता है, इससे ज्यादा स्पष्ट तो यूट्यूब पर उपलब्ध है। वो कहती हैं कि और सोर्सेज का इस्तेमाल करके ही सही कश्मीरियों के दर्द को भी दिखा दिया होता। लेकिन इतनी हिम्मत कहाँ उनमें? रोमिला कहती हैं कि ये वही विधु विनोद चोपड़ा हैं, जिन्होंने फिल्म ‘संजू’ में संजय दत्त को क्लीन चिट दे दी थी, पीके में भगवान शिव का मजाक बनाया था। वो बताती हैं, “विधु विनोद चोपड़ा ने बंसी लाल मट्टू की मौत के बाद भी उनकी पत्नी को प्रमोशन के लिए हर स्टेज पर बुलाया और फिल्म रिलीज से एक दिन पहले फिल्म का नाम शिकारा- द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कश्मीरी पंडित से बदलकर लव स्टोरी कर दिया। वो अगर आज मूवी देखेंगी तो उनके दिल पर क्या बीतेगी? जिनका पति कुछ दिनों पहले मरा हो, वो भी उस मूवी के लिए अपनी बीमारी छुपाई।”
यहाँ पर शिवानी एक और बात पर चिंता व्यक्त करती हैं कि विधु विनोद चोपड़ा ने इस फिल्म को बनाकर जो गलत बेंचमार्क सेट किया है, उसका असर उन्हें बाद तक झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “अभी मेरे बच्चे छोटे हैं। कल को जब वो मुझसे कश्मीरी पंडितों के बारे में पूछेंगे और मैं उनको आपबीती बताऊँगी तो वो इन पर विश्वास न करके फिल्म पर विश्वास करेंगे और कहेंगे कि ये फिल्म तो कश्मीरी पंडितों पर बनी है और इसमें तो ऐसा कुछ नहीं दिखाया गया है।” वो कहती हैं, “मैं विधु विनोद चोपड़ा को बताना चाहती हूँ कि हम कश्मीरी पंडितों के साथ इतना कुछ होने के बाद भी आपको कोई भी कश्मीरी पंडित भीख माँगते हुए या आतंकवादी नहीं दिखाई देगा। सभी अपने पैरों पर खड़े हैं। ये मेरी गारंटी है आपको।”
रोमिला और शिवानी कहती हैं, “उन्हें कश्मीरी पंडितों के ऊपर फिल्म नहीं बनानी थी तो नहीं बनाते और अगर लव स्टोरी ही बनानी थी तो उन्होंने उनके परिवारवालों को इसमें क्यों घसीटा? अपने लीड एक्टर-एक्ट्रेस को ले जाते प्रमोशन के लिए और लोगों से कहते कि हमने कश्मीरी कल्चर पर लव स्टोरी बनाई है।” मतलब कश्मीरी पंडितों के नाम पर फिल्म बनाकर विधु विनोद चोपड़ा ने उनके ज़ख्मों पर नमक नहीं, बल्कि तेजाब छिड़का है।
पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर गत वर्ष की गई एयर स्ट्राइक के बाद भारत ने अपनी हवाई ताकत को बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत को इंटीग्रेटेड एयर डिफेन्स वेपन सिस्टम (IADWS) बेचने की मंजूरी दे दी है। इससे भारत को अपने आर्म्ड फाॅर्स को आधुनिक बनाने के साथ ही वर्तमान एयर डिफेन्स सिस्टम को मजबूत और इसका विस्तार करने में सहायता मिलेगी।
Donald Trump administration approves sale of Integrated Air Defense Weapon System to India https://t.co/oLr4mo2wQm
डिफेन्स डील की यह खबर ऐसे समय में आई है, जब हाल ही में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) से कहा था कि वह एयर डिफेंस कमांड के निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार करें। जनरल रावत ने इसके लिए 30 जून की समयसीमा तय की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, डिफेंस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी ने सोमवार को बताया कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संसद से स्पष्ट कहा कि उसका भारत को इंटीग्रेटेड एयर डिफेन्स वेपन सिस्टम (IADWS) बेचने का पक्का इरादा है। 1.9 बिलियन डॉलर की इस डील को अमेरिका ने मंजूरी दे दी है। अमेरिका का कहना है कि इस डिफेंस डील से दोनों देशों के सामरिक संबंध मजबूत होंगे और दोनों देशों की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा में इजाफा होगा।
संसद को दी गई सूचना के अनुसार भारत ने अमेरिका से कहा था कि वह (IADWS) खरीदना चाहता है। इस डील के अंतर्गत भारत निम्न हथियारों को खरीदने जा रहा है –
5 AN/MPQ-64Fl सेंटिनेल राडार प्रणाली
118 AMRAAM AIM-120C-7/C-8 मिसाइलें
3 AMRAAM गाइडेंस सेक्शन
4 AMRAAM कंट्रोल सेक्शन
134 स्ट्रिंगर FIM-92L मिसाइलें
इस डिफेंस सिस्टम में वही आमराम मिसाइल (AMRAAM) भी शामिल हैं, जिसे पिछले वर्ष पाकिस्तान एयरफोर्स (पीएएफ) की तरफ से विंग कमांडर अभिनंदन के मिग-21 पर दागा गया था। पाकिस्तानी लड़ाकू विमान एफ-16 ने भारतीय लड़ाकू विमान मिग-21 को निशाना बनाते हुए चार से पाँच अमेरिकी आमराम (AMRAAM) मिसाइलें दागीं थीं। हालाँकि, सभी मिसाइलें अपने लक्ष्य को भेदने में असफल रहीं। ये आमराम अमेरिकी मिसाइलें उन्नन किस्म की हैं, जो कि मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं। अमेरिकी कॉन्ग्रेस की तरफ से इस डील को लेकर नोटिफिकेशन दे दिया गया है।
दिल्ली विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है, ऐसे में उन नेताओं पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, जिन्होंने अपनी पार्टी को छोड़कर दूसरे राजनीतिक दलों में जाकर अपनी पैठ जमाई और फ़िर विधानसभा का टिकट भी हासिल किया। बस इंतजार है दिल्ली के चुनावी परिणाम का।
दिल्ली विधानसभा चुनावों को जीतने के लिए मैदान में उतरे विभिन्न दलों के प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला आज हो जाएगा। इस बीच अपने दल को छोड़ दूसरे दल से मैदान में उतरे उन प्रत्याशियों पर सभी की निगाहें हैं, क्योंकि दिल्ली का यही चुनावी परिणाम उनकी भविष्य की राजनीति तय करेगा। दिल्ली में एक-दो नहीं करीब 10 से भी अधिक प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्होंने पार्टी को छोड़कर दूसरी राजनीतिक पार्टी को ज्वॉइन किया और फ़िर उस पार्टी की टिकट से मैदान में भी उतरे। ऐसे प्रत्याशियों में आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ने वाले सबसे अधिक नेता हैं।
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय।।
हे ईश्वर! हमको असत्य से सत्य की ओर ले चलो। अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमरता के भाव की ओर ले चलो।
दल बदलकर चुनाव लड़ने वालों में सबसे अधिक आम आदमी पार्टी से मैदान में है। इसमें द्वारका से महाबल मिश्रा के बेटे विनय मिश्रा, बदरपुर से रामसिंह नेताजी, मटियामहल से शोएब इकबाल, चाँदनी चौक से प्रहलाद साहनी, हरि नगर से राजकुमारी ढिल्लन समेत अन्य नेता हैं। पार्टी के साथ इनकी भी प्रतिष्ठा दाँव पर है। दल बदलने के बाद चुनावी नतीजों से इनके आगे का राजनीतिक भविष्य तय होगा।
इस लिस्ट में कपिल मिश्रा का नाम भी आता है, जोकि आम आदमी पार्टी से विधायक रहे, लेकिन उन्होंने AAP का साथ छोड़ा और बीजेपी में शामिल हुए, फ़िर मॉडल टाउन से दिल्ली विधानसभा का टिकट भी हासिल किया। वहीं दूसरा नाम आता है अल्का लांबा का, जोकि AAP से निकलकर कॉन्ग्रेस में शामिल हुईं और चाँदनी चौक विधानसभा से टिकट भी हासिल किया। ऐसे ही कुछ अनिल वाजपेयी हैं, जोकि AAP को छोड़कर बीजेपी के टिकट से चुनावी मैदान में हैं।
वहीं टिकट कटने से नाराज AAP विधायक एनडी शर्मा भी हैं, जो इस बार बसपा से बदरपुर से चुनाव लड़े। कमांडो सुरेंद्र दिल्ली कैंट से एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़े। उनकी हार जीत आगे का राजनीतिक भविष्य तय होगा। हालाँकि यह सभी नेता अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है। वहीं गौर करें तो हरियाणा विधानसभा चुनावों में जनता ने दल-बदलू नेताओं को महत्व नहीं दिया था, जिसमें सबसे अधिक बीजेपी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था।