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लड़की का पीरियड आ गया तो अपहरण और जबरन निकाह जायज: शरिया के हिसाब से कोर्ट का फ़ैसला

पाकिस्तान में हुमा यूनुस नामक लड़की का अपहरण कर लिया गया था। अपहरण के बाद उसका जबरन निकाह भी करा दिया गया था। अब पाकिस्तानी कोर्ट ने इन अपराधों को सिर्फ़ इसीलिए जायज ठहरा दिया है क्योंकि इस्लामिक क़ानून के अंतर्गत ये सब सही है। 14 वर्ष की हुमा ईसाई धर्म से ताल्लुक रखती हैं। वो कोर्ट में सुनवाई के दौरान मौजूद नहीं थी क्योंकि उसे अपनी जिंदगी का डर है। जजों ने पुलिस को मेडिकल रिपोर्ट्स की जाँच करने को कहा है, जिसके बाद 4 मार्च को फिर सुनवाई होगी। पाकिस्तान में जबरन मजहबी धर्मान्तरण अपराध नहीं है।

सिंध हाईकोर्ट ने हुमा के जबरन मजहबी धर्मान्तरण और निकाह को अवैध ठहराने से मना कर दिया। क्योंकि ये दोनों ही इस्लामिक क़ानून के तहत जायज हैं। इस्लामिक क़ानून के मुताबिक़, अगर किसी लड़की को पहली बार पीरियड्स आ जाते हैं तो उसका निकाह कराया जा सकता है। हुमा के वकील तबस्सुम युसूफ ने ईसाई लड़की के साथ हुई इस हरकत को शर्मनाक बताया है लेकिन वहाँ का क़ानून इससे कत्तई सहमत नहीं है। ये घटना अक्टूबर 2019 की है।

पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्थिति ये है कि सुनवाई के दौरान हुमा को अपने माँ-बाप से मिलना तो दूर, देखने तक नहीं दिया गया। मात्र 5 मिनट की सुनवाई के बाद कोर्ट ने कह दिया कि हुमा के साथ जो भी हुआ, वो जायज है। हुमा के वकील का कहना है कि वो न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगी। हुमा का तब अपहरण किया गया था, जब उसके माँ-बाप उससे 600 किलोमीटर दूर रह रहे थे। उसका परिवार कराची के जिया कॉलोनी में रहता है जबकि अपहर्ता पंजाब के डेरा गाजी ख़ान का निवासी है।

जजों ने शरिया क़ानून का हवाला देकर लड़की के साथ हुई क्रूरता को सही ठहरा दिया क्योंकि उसके पीरियड्स आ चुके थे। उसके माँ-बाप कोर्ट में ही रोने लगे। हुमा के परिजनों का कहना है कि ये मुक़दमा कई दिनों से चल रहा है और वो लोग कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन एक बार भी हुमा को कोर्ट में पेश नहीं किया गया। उनका पूछना है कि हुमा को कोर्ट में बुला कर उसका बयान क्यों नहीं लिया जा रहा? जजों का कहना है कि उसे अपने जान का डर है, इसीलिए वो कोर्ट नहीं आई।

हुमा के अपहर्ता ने ख़ुद को उसका शौहर बताते हुए कहा कि वो बालिग है और अपने हिसाब से फ़ैसले सकती है। आरोपित ने कहा कि हुमा ने अपनी इच्छा से उसके साथ शादी की है। बता दें कि पाकिस्तान में बाल-विवाह पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है और वहाँ की संसद में इससे जुड़ा बिल अटका पड़ा है। आप परिवार उम्र को लेकर ही आरोपित को कोर्ट में घेर सकता है क्योंकि जबरन धर्मान्तरण तो पाकिस्तान में ग़ैर-क़ानूनी है ही नहीं। इस घटना से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति का भी पता चलता है।

48 वर्षीय बाप ने अपनी ही 12 साल की बेटी का किया रेप, छत्तीसगढ़ फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने दी दोहरी उम्रकैद की सजा

दुर्ग की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2016 में अपनी अल्प वयस्क 12 साल की बेटी से रेप करने वाले 48 वर्षीय व्यक्ति को मृत्यु होने तक दोहरे कारावास की सजा दी। रामचरित मानस के किष्किंधा कांड की चौपाई का उल्लेख करते हुए जज ने ऐसे अपराधों के लिए कठोरतम सजा की पैरोकारी की।

जज ने अपना फैसला सुनाते समय किष्किंधा काण्ड की चौपाई “अनुज वधू भगिनी सुत नारी सुन सठ कन्या सम ए चारी इनही कुदृष्टि बिलोकहि जोई ताहि बधें कछु पाप न होइ।” जिसका अर्थ है कि छोटे भाई की पत्नी बहन बेटे की पत्नी तथा पुत्री एक समान हैं जिन पर गलत निगाह डालने वाले का वध करने में कोई पाप नहीं, का उल्लेख किया।

कोर्ट ने अपने निर्णय को स्पस्ट करते हुए कहा कि अभियुक्त को हुई उम्र कैद का अर्थ है कि उसे बाकी जिंदगी सलाखों के पीछे ही गुजारनी होगी।

48 वर्षीय अभियुक्त पत्नी की मृत्यु के बाद अपनी दो बेटियों जिनकी उम्र क्रमशः 12 साल व नौ साल है, के साथ स्टील सिटी भिलाई में रहता था। अभियोजन पक्ष के अनुसार अभियुक्त 2016 में लगातार 4 माह तक अपनी बड़ी बेटी से रेप करता रहा। जिसके बाद बेटी ने अपने पड़ोस की एक महिला को चिट्ठी लिख अपनी आपबीती सुनाई। बाद में इस महिला ने बच्ची के नाना को खबर की, जिन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई।

रेप सर्वाइवर ने अपनी शिकायत में पिता पर जबरदस्ती पोर्न फ़िल्में दिखाने का भी आरोप लगाया, जो यौन हिंसा का विरोध करने पर उसे बेल्ट से पीटता भी था।

साक्ष्यों को परखने के बाद जज ने 48 वर्षीय अभियुक्त को दफा 376 (2 )(f) तथा 376 (2)(i) के अंतर्गत मृत्यु होने तक दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ-साथ दफा 506 (भाग 2 ) के अंतर्गत 5 साल के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई। सारी सजाएँ साथ साथ चलेंगीं।

जज ने इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 376 (2) (f) तथा (i) के तहत अभियुक्त पर 5000-5000 के दो जुर्माने भी लगाए। साथ ही अभियुक्त पर 500 रूपए का जुर्माना जान से मारने की धमकी देने के लिए भी लगाया गया।

इसके साथ साथ जज ने दुर्ग डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को विक्टिम कम्पेन्सेशन स्कीम 2011 के अंतर्गत रेप सर्वाइवर को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।

लोकसभा में कॉन्ग्रेस सांसद की ‘गुंडागर्दी’: स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के साथ हाथापाई की नौबत, सदन स्थगित

लोकसभा में शुक्रवार (फरवरी 7, 2020) को प्रश्नकाल के दौरान उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के एक प्रश्न का उत्तर देने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में गाँधी के एक बयान की आलोचना शुरू कर दी। इस पर कॉन्ग्रेस के एक सदस्य हंगामा करते हुए सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्ति तक पहुँच गए और हर्षवर्धन को घेर लिया। विवाद बढ़ता देख लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की बैठक दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

दरअसल लोकसभा में आज राहुल गाँधी ने लिखित में एक सवाल पूछा था। राहुल के सवाल का जवाब केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को देना था। लेकिन हर्षवर्धन ने सवाल का जवाब देने से पहले कहा, “मैं राहुल गाँधी के पीएम मोदी पर दिए गए बयान की निंदा करता हूँ, जिसमें उन्होंने पीएम को डंडे से मारने की बात कही है।’’

उनके इतना कहते हुए विपक्षी कॉन्ग्रेसी, तृणमूल, द्रमुक और अन्य सांसद अपनी सीटों पर खड़े हो गए और हर्षवर्धन के इस बयान की आलोचना करने लगे। इसके बाद कॉन्ग्रेसी सांसद आग बबूला हो गए और पहले शोर-शराबा किया, फिर बाद में हर्षवर्धन की तरफ दौड़ पड़े और उन्हें घेर लिया। इसी बीच कॉन्ग्रेस सांसद मणिकम टैगोर आक्रामक ढंग से डॉ हर्षवर्धन के बहुत नजदीक आ गए। जिसके बाद लोकसभा में हाथापाई की नौबत तक आ गई थी। इसलिए कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन राहुल गाँधी के बयान पर लोकसभा में बोल रहे थे, जब कॉन्ग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने उनकी ओर आने लगे। यह लोकतंत्र के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।”

संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि राहुल गाँधी के शह पर कॉन्ग्रेस सदस्यों ने ‘डंडे वाला रास्ता’ दिखाया। यह डॉ हर्षवर्धन से हाथापाई करने का प्रयास था। यह कॉन्ग्रेस के हताशा स्तर को दर्शाता है और उनकी गुंडई की पराकाष्ठा है।

बता दें कि राहुल गाँधी ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा था, “ये जो नरेंद्र मोदी भाषण दे रहे हैं, 6 महीने बाद ये घर से बाहर नहीं निकल पाएँगे। हिन्दुस्तान के युवा इनको ऐसा डंडा मारेंगे, इनको समझा देंगे कि हिन्दुस्तान के युवा को रोजगार दिए बिना ये देश आगे नहीं बढ़ सकता।”

AAP के स्वास्थ्य मंत्री ने बोला झूठ, मोहल्ला क्लिनिक को लेकर छपवाई फर्जी खबर: स्तंभकार ने खुद किया खुलासा

दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी ने स्वास्थ्य के मुद्दे को भुनाने की कोशिश की है। इसके लिए ‘मोहल्ला क्लिनिक’ को एक क्रांतिकारी योजना बताकर दिल्ली की जनता को समझाया जा रहा है कि केजरीवाल सरकार की इस योजना की तारीफ केवल देश के अलग-अलग राज्यो में ही नहीं, बल्कि विश्व का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका भी इसकी सराहना करता है और इससे सीखना चाहता है।

जी हाँ। सोशल मीडिया पर कल आम आदमी पार्टी के ट्विटर अकॉउंट से एक वीडियो शेयर की गई है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पहले लोग कहते थे अमरीका से सीखो, लेकिन अब अमरीका वाले कहते हैं भारत से सीखो, दिल्ली से सीखो, केजरीवाल सरकार से सीखो। अपनी बात प्रमाणित करने के लिए इस वीडियो में ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ अखबार का एक स्क्रीनशॉट भी लगाया गया है।

आम आदमी पार्टी द्वारा यह वीडियो शेयर किए जाने के बाद वॉशिंगटन पोस्ट पर यह लेख लिखने वाले लेखक ने खुद सोशल मीडिया पर इस ट्वीट को शेयर करते हुए केजरीवाल सरकार के झूठ का पर्दाफाश किया। उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा शेयर विज्ञापन को बेईमानी बताया और कहा कि उनके पोस्ट को गलत तरह से पेश किया गया साथ ही, मोहल्ला क्लिनिक को लेकर गलत दावे किए गए। विवेक वाधवा का कहना है कि आम आदमी पार्टी के स्वास्थ्य मंत्री ने उनसे इस मामले में साफ झूठ बोला।

इस वीडियो में कुल मिलाकर केजरीवाल सरकार द्वारा ‘बेहतरीन स्वास्थ्य सेवा के नाम’ शुरू किए गए मोहल्ला क्लिनिक का गुणगान है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि इस योजना के शुरू होने के बाद से दिल्ली में करीब 2 करोड़ लोगों ने इसका फायदा उठाया और इसी प्रोग्राम से अमेरिका को सीखना चाहिए। लेकिन अब इसका सच क्या है, इसे जानें –

वॉशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार के अनुसार, दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने मोहल्ला क्लिनिक को लेकर उनसे कहा था कि इस प्रोग्राम से न केवल लोगों की पीड़ा कम होगी, बल्कि बीमारी का इलाज कराए जाने वाले खर्चे में भी कमी आएगी। लोगों को इसके जरिए टाइमली केयर मिलेगी और अस्पतालों के इमरजेंसी कमरों का बोझा भी कम होगा।

अब जाहिर है, ये स्वास्थ्य सुविधाएँ देने के बारे में ये सभी बातें आदर्श मानी जा सकती हैं। कोई भी इनसे प्रभावित होगा। लेकिन, ये ध्यान देने वाली बात है कि चूँकि केजरीवाल सरकार ने ही ये प्रोग्राम चालू किया, तो उन्होंने और उनके नेताओं ने इससे होने वाले अलग-अलग फायदों का वैश्विक स्तर पर दावा किया। लेकिन क्या ये दावे सच हुए? सवाल उठता है कि क्या वाकई मोहल्ला क्लिनिक में वही सब होता है, जिसके कारण वॉशिंगपोस्ट उनकी तारीफ कर रहा है। तो निष्कर्ष में जवाब होगा- नहीं। क्योंकि, अगर केंद्रीय सतर्कता आयोग की रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो मालूम होगा कि सत्येंद्र जैन ने केवल अपनी वाह-वाही के लिए ही वॉशिंगटन पोस्ट से सिर्फ़ झूठ बोला। जबकि वास्तविकता में मोहल्ला क्लिनिक दिल्ली में स्वास्थ्य दिशा में कोई क्रांति लेकर नहीं आया।

डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने कुछ दिन पहले ये बात सार्वजनिक की थी कि उनके पास मोहल्ला क्लिनिक को लेकर शिकायतें आ रही हैं। जिनमें दावा किया जा रहा है कि मोहल्ला क्लिनिक में काम करने वाले डॉक्टर केवल 4 घंटों में 533 मरीजों को देखते हैं। यानी, गणित के मुताबिक जोड़ा जाए तो एक मरीज को केवल 36 सेकेंड दिए जाते हैं। क्या इसे मरीजों की टाइमली केयर कहते हैं?

इन शिकायतों पर जब विभाग ने अपनी पड़ताल की, तो खुलासा हुआ कि यहाँ मरीजों के नाम की फर्जी एंट्री होती है। साथ ही मरीजों को क्लिनिक पर दोबारा बुलाने के लिए उनका पहली बार में उचित उपचार नहीं किया जाता। ऐसा इसलिए, ताकि डॉक्टर अपना 4 लाख प्रति महीने से भी ज्यादा अपनी आय बना सकें। जो कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की आय से भी ज्यादा है। इसके अलावा बता दें मोहल्ला क्लिनिक को लेकर मरीजों की शिकायत अक्सर रहती है कि वहाँ दवाइयाँ भी सही मात्रा में उपलब्ध नहीं होतीं।

गौरतलब है कि दिल्ली चुनावों के मद्देनजर आम आदमी पार्टी द्वारा तरह-तरह के हथकंडे इस्तेमाल करके दिल्ली की जनता को लुभाने की कोशिश हो रही है। पोस्टर हो, पैम्लेफ़ट हो, अखबार हो, एसएमएस हो, या फिर सोशल मीडिया पर वीडियो के रूप में वायरल होता केजरीवाल सरकार का रिपोर्ट कार्ड; हर मुमकिन तरह से आम आदमी पार्टी अपने किए कामों को जनता को दिखाकर वोट माँग रही हैं। हालाँकि, ये काम बाकी पार्टियाँ भी कर रही हैं। लेकिन आम आदमी के इस प्रचार-प्रसार में झूठ का घाल-मेल ज्यादा है। इसलिए सोशल मीडिया पर सक्रिय यूजर उन्हें लगातार ट्रोल कर रहे हैं। उसकी मंशा पर सवाल उठा रहे हैं, उनके झूठे दावों को सबूतों से खारिज कर रहे हैं।

केजरीवाल और मंत्रियों के इलाज में लुटाए ₹50 लाख: विज्ञापन में मोहल्ला क्लिनिक, ख़ुद का इलाज प्राइवेट में

कंटाप पड़ने के बाद केजरीवाल पहुँचे मोहल्ला क्लिनिक, जुगाली कर रही गायों ने किया इलाज से इनकार

‘धरना और लड़ाई-झगड़े में केजरीवाल ने काट दिए 5 साल, मोहल्ला क्लीनिकों में लगा है कूड़े का ढेर’

‘ला इलाहा… पढ़कर हम जैसी हो जाओ’ – गुंजा कपूर के साथ शाहीन बाग में जो हुआ, वो TV पर दिखाया नहीं गया

शाहीन बाग में बुधवार (फरवरी 5, 2020) को सीएए के विरोध में बैठी महिला प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार गुंजा कपूर को बुर्का पहनकर प्रदर्शनस्थल का वीडियो बनाने पर घेर लिया और उनसे बदसलूकी की। इन महिलाओं ने गुंजा को पकड़कर सवाल उठाया कि आखिर वो इस प्रदर्शन में बुर्का पहनकर क्यों आईं?

गुंजा कपूर के साथ बदसलूकी के दो दिन बाद अब इसके पीछे के असली मंसूबे का खुलासा हुआ है। रक्षा विशेषज्ञ अभिजीत अय्यर मित्रा ने गुंजा कपूर से इस बाबत बात की और फिर उन्होंने ट्विटर पर पूरे घटनाक्रम को साझा किया। अभिजीत अय्यर ने बताया कि गुंजा कपूर के साथ हुई घटना की सच्चाई इससे कहीं ज्यादा भयावह और डरावनी है, जितना कि टीवी पर दिखाई गई। अय्यर का कहना है कि गुंजा के साथ ना सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि उनके साथ हाथापाई भी की गई। उन्होंने कहा कि इस सब के पीछे उपासना शर्मा नाम की एक महिला का हाथ है।

अभिजीत अय्यर ने कहा कि गुंजा कपूर शाहीन बाग में महिला प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने गई थी और कपूर के मुताबिक वहाँ की महिलाओं को इस भीड़ में से किसी को भी CAA, NRC या NPR के बारे में कोई जानकारी नहीं है। गुंजा ने बताया कि वो उन महिलाओं से बात कर ही रही थी कि तभी अचानक से उपासना नाम की महिला वहाँ आई और उनसे सवाल-जवाब करने लगी। उपासना ने खुद को ‘ऑर्गेनाइजर’ बताया था।

गुंजा कपूर के खिलाफ हुई डरावनी घटना को शेयर करते हुए अभिजीत अय्यर ने बताया कि उपासना को पता था कि क्या पूछना है और चूँकि गुंजा को इस बारे में कुछ नहीं पता था तो वो आसानी से पकड़ में आ गई। इसके बाद उपासना और उसके साथियों ने गुंजा को बाल से खींचते हुए फर्स्ट एड कैंप की तरफ ले गए।

इतना ही नहीं उपसाना ने गुंजा कपूर का फोन और आधार कार्ड जब्त कर लिया और साथ ही उनके पर्स से कैश भी छीन लिए। इसके बाद एक अन्य महिला प्रदर्शनकारी ने बजतमीजी करने के साथ ही ये आरोप लगाने लगी कि उन्होंने प्रदर्शनस्थल पर बुर्का पहनकर उसका अपमान किया है।

इसके बाद भीड़ ने गुंजा से इस्लामिक नारे लगाने के लिए कहा। भीड़ में से एक शख्स ने उससे कलीमा (ला इलाहा इल्लल्लाह) पढ़कर उनमें से एक हो जाने के लिए कहा। भीड़ ने कहा कि अगर वो ये इस्लामिक नारे लगाएगी तो वो लोग उन्हें अपना लेंगे। मित्रा ने गुंजा के हवाले से कहा कि वो लोग उनका धर्म परिवर्तन कराना चाहते थे। लेकिन गुंजा ने इस्लामिक नारे लगाने से इनकार कर दिया। अभिजीत ने बताया कि वो लोग लगातार गुंजा के साथ बदतमीजी कर रहे थे। कभी थप्पड़ मार रहे थे, कभी धक्का दे रहे थे तो कभी बाल पकड़कर खींच रहे थे।

मित्रा ने बताया कि उपासना इसे होस्टेज क्राइसिस के रूप में भुनाना चाहती थी। एक अन्य शख्स भी इससे सहमत था और चाहता था कि बीजेपी आए और गुंजा की रिहाई की भीख माँगे। उसका कहना था कि अब बीजेपी के साथ इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है। शाहीन बाग पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार नहीं किया क्योंकि यह हिंसक हो सकता था। हालाँकि, सरिता विहार पुलिस शाहीन बाग पहुँची।

मगर ऑर्गेनाइजर्स ने गुंजा को सरिता विहार पुलिस को सौंपने से इनकार कर दिया। कथित तौर पर वो गुंजा को बंधक बनाकर रखना चाहते थे और उन्हें सौंपने के लिए शर्तें रख रहे थे। अभिजीत मित्रा ने कहा, “यह अपहरण और बंधक बनाने का स्पष्ट मामला था।”

बताया जा रहा है कि जब पुलिस ने गुंजा कपूर को बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों की भीड़ को हटाने की कोशिश की तो धक्का देकर उन्हें ही पीछे की तरफ धकेल दिया गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज की बात कही। जिसके बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने पुलिस को जाने दिया। गुंजा कहती है कि इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा था, “यदि उन्होंने लाठीचार्ज किया तो वह विरोध का अंत होगा।” इसके बाद बंधक वाली स्थिति समाप्त हुई।

अभिजीत मित्रा के अनुसार, फोन और नकदी और आईडी कार्ड छीनने के अलावा गुंजा पर कई बार शारीरिक हमले किए गए। मित्रा ने ट्वीट किया कि इन सभी अपराधों की सजा वर्षों तक जेल होती है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी साफ किया कि गुंजा के फोन और आधार कार्ड का किस तरह से दुरुपयोग किया गया। इसके बारे में कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

मित्रा ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए सबूत भी दिए कि शाहीन बाग में भीड़ ने न केवल गुंजा कपूर का अपहरण किया बल्कि उन्हें बंधक बनाकर रखा।

उल्लेखनीय है कि शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन सुरक्षा की दृष्टि से काफी खतरनाक साइट में तब्दील हो गया है। न्यूज नेशन के पत्रकार दीपक चौरसिया और दूरदर्शन के पत्रकारों पर हमला करने के बाद शाहीन बाग की भीड़ ने लाइव शो के दौरान वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र चौबे पर हमला किया था। शाहीन बाग में शुरू हुआ CAA विरोध प्रदर्शन अब न केवल हिंसक हो गया है बल्कि एक वामपंथी इवेंट का प्रतीक बन गया है, जहाँ खुले तौर पर भारत विरोधी और हिंदू विरोधी नारे लगाए जाते हैं।

राजनीतिक विश्लेषक गुंजा कपूर के साथ शाहीन बाग में बदसलूकी, Video वायरल

कोरोना वायरस का तोड़ ढूँढने के करीब पहुँची भारतीय वैज्ञानिक की टीम

चीन में फैले कोरोना वायरस के कहर ने अब तक सैकड़ों लोगों की जान ले ली है। चीन समेत पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस का इलाज ढूँढ़ने के लिए प्रयासरत है। इसी बीच ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के एक साइंटिस्ट एसएस वासन की टीम ने इस वायरस से निबटने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की काॅमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिचर्स ऑर्गेनाइजेशन (CSIRO) में कार्यरत प्रोफेसर एसएस वासन और उनकी टीम कोरोना वायरस का इलाज ढूँढने के काफी करीब पहुँच गई है। दरअसल, पिछले हफ्ते ऑस्ट्रेलिया की डोहार्टी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने मानव शरीर से कोरोना वायरस को निकालने में कामयाबी हासिल की थी। जिसके बाद इस वायरस को सीएसआईआरओ लाया गया, जहाँ इस पर अब अध्ययन जारी है।

इस रिचर्स को लेकर एसएस वासन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “हम डोहार्टी इंस्टीट्यूट के साथियों को धन्यवाद देना चाहेंगे, जिन्होंने वायरस निकालकर हमें दिया ताकि उस पर रिचर्स की जा सके। फिलहाल पूरी टीम इस पर गहन अध्ययन कर रही है। इस वायरस के विकास के लक्षण और अन्य कारकों का पता लाकर इसका वैक्सिन बनाया जा सकेगा।”

इसके अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया से बात में वासन ने आगे बताया कि ऑस्ट्रेलियन एनिमल हेल्थ लैब में उनके सहयोगी भी डायग्नोस्टिक, सर्विलांस और रिस्पॉन्स पर काम कर रहे हैं। CSIRO का एक दूसरा हिस्सा (मैन्युफैक्चरिंग) यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन एंटीजेंस को बढ़ाने में समर्थन कर रहा है।

उनके मुताबिक उनकी लैब अभी वायरस स्टॉक को बढ़ाने पर काम कर रही है। हालाँकि, उन्होंने अभी इसकी संख्या की जानकारी नहीं दी। लेकिन, दुनिया भर में करॉना वायरस के लिए दवा बनाने के लिए चल रहे काम पर उन्होंने कहा, “प्री-क्लिनिकल स्टडी के लिए जरूरी वैक्सीन उपलब्ध कराने के अलावा, इससे दवा बनाने में तेजी आएगी।”

गौरतलब है कि चीन में कोरोना वायरस के चलते अब तक 563 मौतें हो चुकी हैं। यह वायरस इंसान और जानवरों दोनों में पाया जाता है। इसे लेकर WHO ग्लोबल इमरजेंसी घोषित कर चुका है। ऐसे में भारतीय मूल के साइंटिस्ट की टीम के हाथों लगी ये कामयाबी बहुत बड़ी है। अगर इसके आगे भी उन्हें सफलता मिलती हैं, तो कोरोना वायरस का तोड़ जल्द वैज्ञानिकों के पास होगा।

यहाँ बता दें कि इंडियन मूल के साइंटिस्ट एसएस वासन BITS पिलानी और IISc- बेंगलुरु के एलुमनाई हैं। वासन ने स्कॉलरशिप हासिल करने के बाद ऑक्सफॉर्ड के ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ाई की थी। वहाँ से डॉक्टरेट हासिल करने के बाद उन्होंने डेंगू, चिकनगुनिया और ज़ीका जैसे वायरस के लिए काम किया और अब वह कोरोना वायरस का तोड़ ढूँढने में एक पूरी टीम को लीड कर रहे हैं।

उइगर मुस्लिमों पर किया अत्याचार, इसलिए चीन का कोरोना वायरस से हुआ ये हाल: इलियास शराफुद्दीन

चीन दफनाने की जगह क्यों जलाएगा Corona Virus से मरने वालों को?

डोनाल्ड ट्रंप ने किया बाजीराव पेशवा डांस! Meme वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

बॉलीवुड फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ रिलीज के लंबे अरसे बाद एक बार फिर से चर्चा में है। दरअसल फिल्म में रणवीर सिंह पर फिल्माया गया एक गाना ‘मल्हारी’ वायरल हो रहा है। लेकिन इस बार आपको इस वायरल वीडियो में रणवीर सिंह नहीं दिखेंगे। क्योंकि इस बार ‘मल्हारी’ पर थिरकने वाला शख्स कोई आम इंसान नहीं, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं। इस वीडियो में ट्रंप को जोश के साथ नाचते हुए देखा जा सकता है। और इसे शेयर किया है डोनल्ड ट्रंप के बेटे ने।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रणवीर सिंह की तरह ‘बाजीराव मस्तानी’ के एक गाने पर डांस करता हुआ एक वीडियो ट्विटर और इंस्टाग्राम सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहा है।

‘पेशवा वारियर ट्रंप’ के कैप्शन वाले वीडियो में ‘मल्हारी’ गाने पर थिरक रहे रणवीर सिंह के चेहरे को ट्रंप के चेहरे से रिप्लेस कर दिया गया है। इसकी वजह से कॉमिक इफेक्ट पैदा हो गया है।

इस मीम को सोशल मीडिया पर खूब लाइक और शेयर किया जा रहा है। वीडियो को देखकर यूजर्स कमेंट्स भी कर रहे हैं। यूजर्स वायरल हो रहे इस मजाकिया वीडियो की एडिटिंग को लेकर लोग इसकी काफी तारीफ कर रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, ‘मुझे हँसने के लिए आज ऐसी ही किसी चीज की जरूरत थी। अफसोस बस इस बात का है कि मैं उनके साथ डांस करने के लिए वहाँ पर नहीं था। एक ने कमेंट करते हुए लिखा- “मैं अपनी लाइफ में इतना कभी नहीं हँसा, जितना इस वीडियो को देखकर हँसा हूँ। पेशवा वॉरियर ट्रंप ने मुझे खूब हँसाया।”

एक यूजर ने हँसते हुए लिखा कि ये रणवीर कपूर से बेहतर दिख रहे हैं।

कई यूजर्स इस वीडियो की तारीफ कर रहे हैं और इसे क्रिएट करने वाले से पूछ रहे हैं कि इसे बनाने में कितना समय लगा।

बालाकोट में 27 आतंकियों की ट्रेनिंग, पंजाब-अफगानिस्तान कनेक्शन: खुफिया एजेंसियों ने जारी किया अलर्ट

पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकियों का कैंप एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। इंटेलीजेंस और काउंटर टेरर ऑपरेटिव्स द्वारा दी जानकारी के अनुसार, यहाँ भारत पर हमला करने के लिए जैश-ए-मोहम्मद के 27 आतंकियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसे लेकर खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट भी जारी किया है।

इस कैंप का नेतृत्व आतंकी मसूद अजहर के बेटे यूसुफ अजहर द्वारा किया जा रहा है। इस कैंप में तैयार किए जा रहे 27 आतंकियों में से 8 आतंकी POK से हैं। जबकि इन्हें तैयार करने वाले 2 प्रशिक्षक पाकिस्तान के पंजाब से और बाकी 3 अफगानिस्तान से हैं।

मालूम हुआ है कि इन 27 आतंकियों की ट्रेनिंग इस हफ्ते खत्म हो जाएगी, जिसके बाद ये भारत में आतंकी मनसूबों को अंजाम देने के लिए तैयार होंगे। ऑपरेटिव्स के मुताबिक, पिछले साल पाकिस्तान के बालाकोट में जिस वक्त भारत ने एयर स्ट्राइक किया था, उस वक्त इस कैंप में करीब 300 आतंकी ट्रेनिंग ले रहे थे।

बता दें कि बालाकोट में आतंकियों द्वारा चालू किए गए कैंप से संबंधित ये जानकारियाँ उस समय सामने आई हैं, जब सुरक्षाबलों द्वारा लगातार घाटी में आतंकियों पर कार्रवाई चालू है और आए दिन किसी न किसी आतंकी के मारे जाने की सूचना मिलती रहती है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसर कश्मीरी घाटी में अब भी कम से कम 102 आंतकी सक्रिय हैं। इनमें 59 लश्कर ए तैयबा के, 27 जैश-ए-मोहम्मद के और 6 हिजबुल मुजाहिद्दीन के हैं।

पिछले दिनों इन्हीं आतंकियों के मनसूबों को नाकाम करते हुए पुलिस ने सर्च अभियान के दौरान अवंतीपोरा से जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों को दौड़ते हुए गिरफ्तार किया था। प्राथमिक पूछताछ में पता चला था कि ये चारों जेएमएम के सक्रिय आतंकवादियों को सहायता प्रदान कर रहे थे और इसी सिलसिले में वे फ़िर से आए थे।

गौरतलब है कि पुलवामा हमले के बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप पर बमबारी की थी और कैंप को तबाह कर दिया था। हालाँकि, पाकिस्तान बार-बार इस स्ट्राइक से इनकार करता रहा लेकिन बाद में भारत सरकार ने इसके सबूत भी दिए थे और पाकिस्तान के झूठे दावों को खारिज किया था।

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कन्हैया कुमार पर फिर हमला, 24 घंटे में दूसरी बार: भारी पथराव के बीच बाल-बाल बचे

CPI नेता और जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के काफिले पर बिहार के मधेपुरा जिले के पास गुरुवार (फरवरी 6, 2020) को अज्ञात उपद्रवियों द्वारा फिर से पथराव किया गया। हालाँकि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। बीते 24 घंटों में कन्हैया के साथ दूसरी बार इस तरह की घटना हुई है। भाकपा के राज्य सचिव सत्य नारायण सिंह ने पटना में बयान जारी कर इस घटना की कड़ी निंदा की और हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले बिहार के सुपौल में काफिले पर हुए पथराव में कन्हैया कुमार घायल हो गए थे। घटना के वक्त सुपौल में एक रैली को संबोधित करने के बाद कन्हैया सहरसा की ओर जा रहे थे। इस हमले में कन्हैया कुमार के ड्राइवर भी घायल हो गए थे। उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इससे पहले झंझारपुर में CPI नेता कन्‍हैया के काफिले को काला झंडा दिखाया गया था। वहीं अपने कार्यक्रम के लिए शिवहर से सीतामढ़ी जाते समय कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी रोककर काले झंडे दिखाए और साथ ही कॉमरेड मुर्दाबाद के नारे लगाए। कन्हैया कुमार इन दिनों बिहार में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में ‘जन-गण-मन यात्रा’ पर हैं। एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान वे बिहार के लगभग सभी प्रमुख शहरों में पहुँचेंगे और करीब 50 सभाएँ करेंगे। कन्हैया ने इस यात्रा की शुरुआत 30 जनवरी को बेतिया से की थी।

हालाँकि सीएए और एनआरसी के खिलाफ बिहार में चल रहे प्रोपेगेंडा के तहत गाँव-गाँव घूम रहे सीपीआई के नेताओं को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले कन्हैया के काफिले को शहर के अंदर पुनौरा में भी रोकने की कोशिश की गई थी। वहाँ भी युवाओं ने काले झंडे दिखाकर कन्हैया मुर्दाबाद के नारे लगाए थे। वहीं पिछले शनिवार को भी कन्हैया के सीवान से छपरा जाने के क्रम में कोपा बाजार में कुछ लोगों ने कन्हैया कुमार के काफिले पर पथराव किया था। इस हमले में कन्हैया की गाड़ी के शीशे टूट गए थे जबकि कन्हैया बाल-बाल बच गए थे।

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पश्चिम बंगाल में एक और BJP नेता की हत्या: गोली मारने के बाद चाकू से ताबड़तोड़ वार, पार्टी ने TMC पर लगाया आरोप

पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में एक बीजेपी नेता की निर्मम हत्या की खबर सामने आ रही है। बांगला हंट के मुताबिक बीजेपी नेता नारायण विश्वास की नृशंस हत्या कर दी गई है। भाजपा ने हत्या का आरोप टीएमसी पर लगाया है। बताया जा रहा है कि पहले मृतक को गोली मारी गई और जब वो जख्मी होकर नीचे गिर गए, तो हमलावरों ने धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी। हमले में गंभीर रूप से घायल हुए बीजेपी नेता को अस्पताल ले जाया गया, जहॉं उन्होंने दम तोड़ दिया।

नारायण विश्वास भारतीय जनता व्यापार संघ के सोनारपुर दक्षिण विधानसभा संख्या 4 के अध्यक्ष थे। बताया जा रहा है कि कुछ अजनबी कई दिनों से नारायण विश्वास का पीछा कर रहे थे। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि सुबह 3 बजे गुंडों ने हमला किया, जब वो मछलियों को दाना देने के लिए तालाब की तरफ निकले थे।

बीजेपी नेता बाइक से तालाब की तरफ जा रहे थे। इस दौरान 4 गुंडों ने उनका पीछा किया और फिर मौका पाकर उन पर गोली चला दी। गोली बीजेपी नेता के पैरों में जा लगी। जिससे घायल होकर वह जमीन पर गिर गए। इसके बाद उन गुंडों ने धारदार चाकू से उनके दम तोड़ने तक ताबड़तोड़ वार कि। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने आतंकवादियों की तरह बीजेपी नेता की हत्या के वारदात को अंजाम दिया।

नारायण विश्वास की नृशंस हत्या करने के बाद हमलावर बाइक से फरार हो गए। इस घटना से बाजार में अफरा-तफरी मच गई। गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुँचे और उनको अस्पताल पहुँचाया। हालाँकि अस्पताल में डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि हत्या के मुख्य आरोपित प्रवास मंडल को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपित पहले भी सुंदरवन कोस्टल इलाके में एक हत्या की कोशिश कर भागा हुआ आरोपित है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में कई बीजेपी नेता, कार्यकर्ता और समर्थकों के हत्या की खबर सामने आ चुकी है। 13 मार्च 2019 को नॉर्थ 24 परगना जिले के बशीरहाट इलाके में महिला भाजपा कार्यकर्ता सरस्वती दास की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। 18 जून 2019 को कूचबिहार जिले में भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक कार्यकर्ता की गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। वहीं राज्य में जय श्री राम का नारा लगाने की वजह से भाजपा कार्यकर्ता कृष्ण देवनाथ को इस कदर पीटा गया कि उनकी मौत हो गई।

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