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कॉन्ग्रेस नेता ने डेढ़ घंटे में ही मान ली हार, ट्वीट कर ‘पहली फुरसत’ में निकल लिए

दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणामों के बीच सबसे पहले कॉन्ग्रेस के नेता मैदान छोड़ते नजर आ रहे हैं। वोटिंग के परिणाम और रुझान आने के बाद दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की संभावना देखी जा रही है।

मतगणना शुरू होने के बाद सबसे पहले कॉन्ग्रेस नेता मुकेश शर्मा ने ट्वीट के माध्यम से अपनी हार स्वीकार की है।उन्होंने ट्वीट में लिखा है- “मैं अपनी हार स्वीकार करते हुए, विकासपुरी विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदाताओं व कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि क्षेत्र का चौमुखी (चहुमुखी) विकास होगा। मैं भविष्य में भी दिल्ली, विकासपुरी व उत्तम नगर विधानसभा क्षेत्र के चौमुखी विकास के लिए लड़ाई लड़ता रहूँगा।”

वोटों की गिनती शुरू होने के बाद से ही आम आदमी पार्टी बढ़त बनाए हुए आगे चल रही है, जबकि भाजपा फिलहाल दुसरे स्थान पर नजर आ रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अभी तक भाजपा और आम आदमी पार्टी 10-10 सीटों पर आगे चल रही हैं।

ज्ञात हो कि सभी एग्जिट पोल आम आदमी पार्टी की जीत की घोषणा कर चुके हैं। जबकि भाजपा नेता मनोज तिवारी और कपिल मिश्रा यह कहते हुए देखे गए कि चुनाव परिणाम के दिन सब्भी एग्जिट पोल झूठे साबित होंगे और भाजपा 48 सीटों पर कब्जा जमाने में सफल रहेगी।

‘अच्छी महिला बनो, जो कहते हैं करो’ – कैब के अंदर सईद और नजीरुल ने बारी-बारी से किया रेप

इंग्लैंड में 23 वर्षीय महिला के साथ रेप का मामला सामने आया है। सईद अहमद और नजीरुल मियाँ ने नकली कैब ड्राइवर के साथ मिलकर रेप किया। अदालत में रेप और यौन उत्पीड़न के दोषी साबित होने के बाद दोषियों को कुल 23 साल की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने सईद अहमद को 11 साल की, जबकि नजीरुल मियाँ को 12 साल की सजा सुनाई है।

जानकारी के मुताबिक घटना इंग्लैंड के संडरलैंड का है। जहाँ पर पीड़िता के मोबाइल की बैट्री खत्म हो चुकी थी, जिसकी वजह से उसका फोन बंद हो गया था। उसने घर जाने के लिए लिफ्ट लेने का सोचा। तभी सईद अहमद और नजीरुल मियाँ उसके पास नकली कैब ड्राइव बनकर आए। तो पीड़िता ने उनसे घर छोड़ देने के लिए कहा। जिस पर दोनों तैयार हो गए और पीड़िता गाड़ी में बैठ गई।

गाड़ी अहमद चला रहा था। अहमद ने कुछ दूर तक तो सही रास्ते पर गाड़ी चलाई। इसके बाद उसने बीच रास्ते में गाड़ी को मोड़ दिया और सुनसान जगह पर ले गया। पीड़िता इससे पहले कि कुछ समझ पाती अहमद और मियाँ ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। इतना ही नहीं, जब महिला ने रोकने की कोशिश की और विरोध जताया तो उसने कहा,  “अच्छी महिला बनो, जो कहते हैं करो।”

कोर्ट में पीड़िता की तरफ से दिए बयान में कहा गया कि वारदात का महिला के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। वह इस घटना से इतना ज्यादा टूट चुकी है कि वो घर से बाहर निकलने से घबरा रही है और किसी भी अनजान आदमी से डरती है। उसका लोगों पर से भरोसा उठ गया है। कोर्ट में कहा गया कि घटना ने पीड़िता का जीवन तबाह कर दिया है। पीड़िता ने कोर्ट में दिए अपने एक बयान में कहा कि उस रात कार में आने का उसका फैसला उसके लिए जीवन भर का पछतावा है। पीड़िता ने कहा कि उस रात वो उनके लिए एक आसान विकल्प थी और उन्होंने उसका फायदा उठाया। वो कहती है कि जैसा जिंदगी वो जी रही है, वैसा किसी ने अपने बुरे से बुरे सपने में भी नहीं सोचा होगा।

वहीं अहमद की पार्टनर ने भी पीड़ित महिला से फेसबुक पर संपर्क किया और उसे इमोशनल ब्लैकमेल करने की कोशिश की। उसने पैसे के बदले आरोप वापस लेने पर मजबूर करने की कोशिश की। कोर्ट ने ऐसा करने पर महिला को 16 महीने कैद की सजा सुनाई है।

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दिल्ली की कुर्सी: AAP ने ली बढ़त, भाजपा अभी तक दूसरे स्थान पर – 51 Vs 19 का है गणित

एग्जिट पोल और EVM की बहस के बाद आखिरकार 8 फरवरी को हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के फैसले का दिन आ चुका है। आज सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू होने के बाद शुरुआती नतीजों में आम आदमी पार्टी बढ़त के साथ आगे चल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, AAP अभी तक 51 सीट और बीजेपी 19 सीट पर आगे चल रही है। हालाँकि, चुनाव आयोग के आधिकारिक रुझानों के मुताबिक फिलहाल बीजेपी और आम आदमी पार्टी 10-10 सीट पर आगे चल रही हैं।

दिल्ली में किस की सरकार बनने जा रही है, यह दोपहर के बाद तक स्पष्ट हो जाएगा। हालाँकि, आम आदमी पार्टी के कार्यालय पर जश्न शुरू हो चुका है और भारी संख्या में कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय के बाहर जमा होने लगे हैं।

दिल्ली में हरिनगर विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी तजिंदर पाल सिंह बग्गा और मॉडल टाउन से भाजपा नेता कपिल मिश्रा आगे चल रहे हैं।

पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने 70 में से 67 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत वाली सरकार बनाने में कामयाब रही थी। इस बार के एक्जिट पोल की मानें तो इस बार भी दिल्ली में AAP की ही सरकार बननी तय है। लगभग सभी एक्ज़िट पोल में AAP को 50 से ज्यादा सीट बताई गईं हैं।

अमित शाह कल ला रहे हैं यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल 2020? भाजपा सांसदों को जारी हुआ व्हिप

देर शाम यह खबर आई कि भाजपा ने अपने सारे सांसदों को कल संसद में उपस्थित रहने को कहा है और निर्देश दिया है कि वो सरकार के समर्थन में खड़े रहें। हालाँकि, इस ‘व्हिप’ में कहीं भी विषय का जिक्र नहीं है कि समर्थन आखिर किस बात का करना है। खबरों के मुताबिक यह कहा गया है कि कुछ अतिमहत्वपूर्ण मुद्दे कल संसद में उठाए जा सकते हैं, अतः सारे सांसदों को मंगलवार, 11 फरवरी, को राज्यसभा में उपस्थित रहना है।

इसके साथ ही अटकलबाज़ी का दौर शुरु हो गया और लोगों ने तमाम तरह की अटकलें लगानी शुरु कर दीं। ज्ञात हो कि कल दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिणाम भी आने वाले हैं, अतः कल का दिन दिल्ली में वैसे भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन भाजपा की तरफ से आई इस खबर के कारण सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें हो रही हैं।

इन सबके बीच, ट्विटर पर एक कागज का प्रिंटआउट घूमता पाया गया जिसके निचले हिस्से में राज्यसभा में कुछ विधेयकों की प्रस्तुति की बात है। इसके ऊपरी भाग में पार्लियामेंट हाउस एनेक्स छपा हुआ है और नीचे कुछ संसदीय कागजात की बातें हैं। इसी पत्र के निचले हिस्से में राज्यसभा में प्रस्तुत होने वाले विधेयकों का भी जिक्र है।

ऐसे कुल छः विधेयक हैं, लेकिन एक विधेयक जो सबसे ज्यादा ध्यानाकर्षण करता है वो है तीसरे नंबर पर लिखा ‘द यूनिफॉर्म सिविल कोड ऑफ इंडिया बिल, 2020’। और पाँचवे नंबर पर संविधान संशोधन बिल का भी जिक्र है। हालाँकि, जिस बिल का जिक्र इस दस्तावेज में है, जो कि दिनांक 6 फरवरी का है, वो एक प्राइवेट मेंबर बिल है न कि सरकार द्वारा लाया जाने वाला बिल।

ट्विटर पर यह तस्वीर खूब घूम रही है

जब इसको ले कर सोशल मीडिया पर खूब हल्ला होने लगा तो हमने राज्यसभा की साइट पर जा कर देखा कि क्या वाकई ऐसी कोई बात लिस्ट की गई है? वहाँ ऐसा कुछ नहीं मिला। कल की लिस्टिंग में राज्यसभा की कार्यवाही में किसी भी ऐसे बिल के प्रस्तुत होने की बात नहीं लिखी हुई है।

11 फरवरी की राज्यसभा की कार्यवाही में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल का जिक्र नहीं है

यह कागज आधिकारिक दस्तावेज़ों को किसी अधिकारी तक पहुँचाने की बात करता है। 6 फरवरी के इस कागज में ऊपर में यह लिखा है कि ‘निम्नलिखित काग़ज़ात प्राप्त किए जाएँ’ और नीचे उनके नाम हैं। यह तय है कि यह कागज राज्यसभा के कल की कार्यवाही का बिलकुल नहीं है। यह भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लाए गए यूनिफार्म सिविल कोड ऑफ इंडिया बिल, 2020 की बात करता प्रतीत होता है। हमने राज्यसभा की साइट पर जा कर खोजा, तो इस बिल के बावत हुई कार्यवाही का भी जिक्र मिला।

लेकिन, भाजपा के व्हिप के मद्देनजर, हो सकता है कि कोई महत्वपूर्ण बिल कल सामने आए। CAA और NRC के मुद्दे पर छिटपुट आंदोलन झेलती सरकार क्या यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसा विधेयक लाएगी, यह एक बड़ा प्रश्न है। लेकिन, नई सरकार ने जिस तेजी से लगातार अपने मेनिफेस्टो में किए गए वादों पर कार्य किया है, असंभव तो कुछ भी नहीं लगता।

नेहरू और माइनॉरिटी की परिभाषा पर खेला गेम: अजीत भारती का वीडियो | Ravish lies on Nehru-Liyaqat pact, blames Modi

रवीश कुमार ने आज-कल लिखना बहुत कम कर दिया है। 4-5 दिन में 1 से 2 पोस्ट लिखे जा रहे हैं। प्राइम टाइम भी कम कर दिया है। वैसे जो भी लिखा है बकवास ही लिखा है। फिलहाल हम उनके दो प्राइम टाइम पर चर्चा करेंगे। पहला- प्रधानमंत्री के भाषण के ऊपर लिखे गए उनके पोस्ट और दूसरा, ‘शाहीन बाग से मुगल राज आ जाएगा क्या?’

रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री के भाषण का हेडलाइन दिया- ‘तथ्यों और संदर्भों से जूझता प्रधानमंत्री का भाषण।’ नहीं रवीश जी, आप जूझ रहे हैं तथ्यों और संदर्भों से। आपने प्रधानमंत्री के भाषण को शब्दश: लिया है। उन्होंने शाहीन बाग के धरने को अहिंसापूर्ण बताया। स्वास्तिक जलाना, गाय को काट कर कमल पर दिखाना, आजादी के नारे, तेरा बाप भी देगा आजादी, खिलाफत की बातें, बुर्के में हिंदू औरतों को दिखाना, ये भी एक तरह की हिंसा है। इसे वैचारिक हिंसा कहते हैं। जिसको आप जैसे वामपंथी समय-समय पर कोट करते रहते हैं।

पूरा वीडियो यहाँ देखें

‘पीके’ के मीडिया मैनेजमेंट से उपजे दिल्ली के Exit Polls?: उनकी ही कोर टीम के सदस्य का बड़ा खुलासा

दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार का सारा दारोमदार उन्हीं की कम्पनी पर था। उन्होंने ख़ुद व्यक्तिगत रूप से परदे के पीछे से कमान संभाल रखी थी। मोदी की लोकप्रियता के कारण चुनावी गणितज्ञ का तमगा पाने वाले किशोर ने मोदी को धोखा देकर 2015 में नीतीश-लालू गठबंधन का साथ दिया था। हालिया दिल्ली चुनाव में उनके द्वारा मीडिया को मैनेज करने की ख़बर आई। प्रेस क्लब में हुई बैठक में एक-एक पत्रकार को समझाया गया कि माहौल कैसे बनाना है।

मीडिया संस्थान ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के संपादक ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने प्रशांत किशोर की कोर टीम के ही एक सदस्य से बातचीत की। बातचीत के दौरान पता चला कि इस बार के एग्जिट पोल्स भीषण तरीके से ग़लत होने वाले हैं। ऐसा ख़ुद दिल्ली चुनाव की कमान संभाल रहे प्रशांत किशोर की कोर टीम के सदस्य ने कहा। हालाँकि, पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने उक्त व्यक्ति का नाम जाहिर करने से इनकार कर दिया। लेकिन, इससे कई सवाल उभर कर आते हैं? क्या प्रशांत किशोर ने जनता के बीच मेहनत करने से ज्यादा मीडिया में हाइप बनाने में सारा जोर लगाया?

2014 में माहौल ही ऐसा था और नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ही इतनी थी कि उन्हें सत्ता मिली। ज्ञात हो कि केंद्र में होने वाले चुनावों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी ही है, घटी नहीं है। इसके बाद प्रशांत किशोर बिहार पहुँचे। मीडिया ने ऐसा प्रचारित किया कि वो राजनीति के ‘चाणक्य’ हो गए हैं और उनसे बड़ा चुनावी रणनीतिकार कोई है ही नहीं। बिहार में लालू-नीतीश की जीत ने मीडिया को इस नैरेटिव को हवा देने में और मदद की। बिहार का समीकरण सीधा है। अगर दो प्रमुख दल मिल जाएँ तो वहाँ सरकार बनने में दिक्कत नहीं आती। राज्य के दो सबसे बड़े जनाधार वाली पार्टियाँ मिल गईं और क्रेडिट प्रशांत ने लूटा।

पंजाब में उन्होंने कॉन्ग्रेस के लिए चुनाव प्रचार किया। बादल परिवार के ख़िलाफ़ माहौल और अकाली-भाजपा सरकार की एंटी-इंकम्बेंसी का उन्होंने ख़ूब फायदा उठाया। कॉन्ग्रेस की जीत की सम्भावना पहले से ही जताई जा रही थी लेकिन प्रशांत किशोर ने फिर लहरिया लूटने की कोशिश की। मीडिया ने फिर उनका साथ दिया। आंध्र प्रदेश में किसे नहीं पता था कि जगनमोहन रेड्डी की सरकार आने वाली है? उनकी बड़ी जीत हुई और प्रशांत किशोर फिर से ख़ुद को बड़ा ‘रणनीतिकार’ साबित करने में जुट गए। श्रेय लेने के लिए वो हर उस जगह गए, जहाँ माहौल अनुरूप था।

प्रशांत किशोर ने क्या आम आदमी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए अपने हिसाब से एग्जिट पोल्स तैयार किए? क्या मीडिया ने वही किया जो ‘सेटिंग-गेटिंग’ के तहत उन्हें पाठ पढ़ाया गया? जिस तरह से केजरीवाल मीडिया में रह-रह कर मोदी के मुकाबले खड़े किए जाते हैं, उनके प्रति मीडिया के एक बड़े वर्ग की वफादारी छिपी नहीं है। ऐसे में, सवाल तो पूछे जाएँगे। ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के सम्पादक ने जो खुलासा किया है, उसे आधार बना कर ऐसे कई सवाल पूछे जा सकते हैं।

‘EVM अभी प्रेग्नेंट, डिलीवरी नॉर्मल होगी तो आम आदमी पार्टी ऑपरेशन हुआ तो भाजपा’

दिल्ली में शनिवार को विधानसभा चुनाव 2020 के लिए मतदान संपन्न हो गया है। तो एक ओर जहाँ अब सभी दलों को चुनाव परिणाम का इंतजार है वहीं अब EVM को लेकर भी बयानबाजी शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के हरियाणा इकाई के प्रवक्ता और आईटी एवं सोशल मीडिया प्रमुख सुधीर यादव ने बड़ा अजीबोगरीब बयान दिया है। उन्होंने कहा, “अभी ईवीएम (EVM) प्रेग्नेंट है। अगर नॉरमल डिलिवरी हुई तो आम आदमी पार्टी (AAP) पैदा होगी और अगर ऑपरेशन हुआ तो बीजेपी (BJP)”

रिपोर्ट्स के अनुसार चुनाव के बाद लोगों में अब इस बात की चर्चा जोरों पर है कि दिल्ली में आखिर किसकी सरकार बन रही है? दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। सारे एक्जिट पोल में इस बार भी AAP की सरकार बनती दिख रही है। इस बार के चुनावी घमासान से मुख्य तौर पर दो बातें सामने निकलकर आई हैं। पहली यह कि इस बार के चुनाव में दिल्ली की जनता ने आम मुद्दे को ज्यादा तवज्जो दी है, दूसरी बात यह है कि जहाँ इस चुनावी जंग की शुरुआत में भाजपा को काफी कम सीटें मिलती दिख रही थीं, वहीं उसके काफी बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

शाहीन बाग

AAP संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भाजपा के सांसद और दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस लड़ाई को बखूबी लड़ा। हालाँकि, केजरीवाल इस लड़ाई को अपने पक्ष में भुनाने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं। पहले जहाँ केजरीवाल की पार्टी इस मुद्दे पर कथित लिबरल गुटों के साथ सुर में सुर मिलाती दिख रही थी लेकिन चुनाव नजदीक आते-आते उसने पलटी मारते हुए शाहीन बाग़ के कारण आम दिल्ली वासियों को होती दिक्कतों पर घड़ियाली आंसू बहाने शुरू कर दिए थे और उल्टा भाजपा को ही शाहीन बाग़ का जिम्मेदार ठहरा दिया था कि आखिर क्यों नहीं अमित शाह शाहीन बाग़ के सड़क को खुलवाते हैं।

फ्री बिजली फ्री पानी फ्री मेट्रो फ्री बस खूब चले

केजरीवाल ने मोदी के विकास के जवाब में बिजली पानी मुफ्त करने को खूब मार्केटिंग की। इसके आलावा शिक्षा में किए गए खुद की सरकार के काम पर भी केजरीवाल ने जमकर भाषण दिए।

एग्जिट पोल्स के दावों के बावजूद AAP की हालत पस्त नज़र आ रही है। उसे किसी भी एग्जिट पोल्स पर भरोसा नहीं हो रहा है। वहीं बीजेपी के इस दावे ने कि वह सरकार बनाने जा रही है। केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी की नींदें उड़ा दी है।

Pak में भी हो रहा दिल्ली चुनाव परिणाम का इंतजार, विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा- BJP की होगी बड़ी हार

दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम मंगलवार (फरवरी 11, 2020) को आने वाले हैं। इसके लिए जहाँ भारत में हर ओर लोग इंतजार कर रहे हैं क्योंकि मामला देश की राजधानी का है, वहीं पाकिस्तान में भी चुनाव परिणाम का बेसब्री से इन्तजार हो रहा है। कम से कम वहाँ के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान से तो यही लगता है। कुरैशी ने दावा किया है कि भाजपा को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि भाजपा इस चुनाव में बुरी तरह हारने वाली है।

कराची में एक सभा को सम्बोधित करते हुए कुरैशी ने कहा कि भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनावों में भले ही भारी जीत दर्ज कर ली, उसके बाद से उन्हें 3 राज्यों में परेशानियों का सामना करना पड़ा है। बकौल पाकिस्तानी विदेश मंत्री, हार का कारण सीएए होगा। नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर उन्होंने कहा कि इसके कारण मोदी से एक बड़ा तबका नाराज़ है। उन्होंने कहा कि मोदी ने नागरिकता पर जो फैसले लिए हैं, उसके कारण उनकी पार्टी को बुरी हार मिलेगी।

कुरैशी ने कहा कि जम्मू कश्मीर में जो ‘अत्याचारी नीति’ अपनाई है, उसके कारण उसे चुनाव में हार मिलने जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सीएए और एनआरसी के कारण पूरे भारत में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालाँकि, इस दौरान पाकिस्तान को अन्य देशों से समर्थन न मिल पाने का उनका दुःख भी झलका। उन्होंने कहा कि भारत का सभी देश समर्थन इसीलिए करते हैं क्योंकि वो बहुत बड़ा बाजार है और अन्य देशों को अपना बाजार खोने का डर है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा जब से सत्ता में आई है, तब से भारत की विकास दर आधे से भी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत फिर से ‘पुलवामा जैसे घटना’ करा सकता है, ताकि वहाँ की जनता देश की आर्थिक समस्याओं की तरफ ध्यान न देकर पाकिस्तान की बातें करें। बता दें कि पुलवामा में हुए पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ के जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

भारतीयों ने 50 सालों से J&K की माँ-बहन एक कर दी है: सामने आए ‘शिकारा’ वाले चोपड़ा के पुराने बयान

मूवी ‘शिकारा’ ने दावा किया था कि वो कश्मीरी पंडितों की अनकही कहानी कहेगी। अब यही फ़िल्म कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को कमतर दिखाने के आरोपों का सामना कर रही है। उम्मीद थी कि कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार को नकारने के संगठित प्रयासों के खिलाफ, बम्बइया फिल्म इंडस्ट्री पहली बार शिकारा मूवी के जरिए अपनी भूमिका का निर्वहन करेगी।

लेकिन हुआ इसके उलट। लोगों की अपेक्षाओं पर खरी न उतरने के कारण शिकारा मूवी आलोचनाओं के केंद्र में है। एक कश्मीरी पंडित लड़की ने मूवी देखते हुए अपना संयम खो डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा को खूब जली कटी सुनाई। उन्हें शांत करते हुए विधि विनोद चोपड़ा ने कहा,”सत्य के दो पहलू होते हैं।” हर किसी का अपना दृश्टिकोण होता है, विभिन्न विचार हो सकता है। शिकारा डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा यहीं पर नहीं रुके और उस कश्मीरी पंडित लड़की के दुःख का मजाक उड़ाते लहजे में कहने लगे कि मैं आपके लिए शिकारा का सीक्वल बनाऊँगा।

इस प्रकार का असंवेदनशील बयान चोपड़ा के वैचारिक झुकाव की तरफ भी इशारा करने वाला है। विधु विनोद चोपड़ा के वैचारिक झुकाव पर स्थिति तब और भी साफ हो जाती है जब 2000 में आई उनकी फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ की स्क्रिप्ट लिखने वाले सुकेतु मेहता की किताब ‘मैक्सिमम सिटी: बॉम्बे लॉस्ट एंड फाउंड’ को कोई पढ़ने बैठता है। मेहता अपनी किताब में चोपड़ा को उद्धृत करते हुए लिखते हैं, “The Indians have f**ked Kashmir. मैं कश्मीरी हूँ, मुझे पता है। They have been f**king Kashmir for fifty years.”

मेहता अपनी किताब में लिखते हैं कि विनोद चाहते थे कि फिल्म के द्वारा कश्मीरियत के विचार को आम लोगों तक दुबारा पहुँचाया जाए जहाँ एक ही देश में समुदाय विशेष के लिए हजरत बल दरगाह और हिन्दुओं के लिए शंकराचार्य मंदिर में पूजा करने की बराबर जगह हो।

मेहता के शब्दों में विधु विनोद चोपड़ा के लिहाज से कश्मीर एक खुशनुमा बाग़ जैसा ही था जहाँ अलग अलग समुदायों के लोग ‘बूमरो बूमरो’ गाया करते थे कि तभी केंद्र सरकार रंग में भंग डालने पहुँच गई। मिशन कश्मीर नामक फिल्म इसी विचार से बनी होने के कारण न सिर्फ इस्लामिक आतंकवाद के लिए ज़रूरी जस्टिफिकेशन मुहैय्या करती है बल्कि कश्मीर में चल रहे आतंकवाद पर पर्दा डालती हुई भी दिखती है।

मेहता अपनी किताब में लिखते हैं कि इस फिल्म के लिए स्क्रिप्ट लिखते समय विधु विनोद चोपड़ा समुदाय विशेष की भावनाओं का ख्याल रखने, पोलिटिकली करेक्ट बने रहने पर खासा जोर देते थे।

इस किताब के लेखक और मिशन कश्मीर फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर के खुद के विचार भी बेहद समस्या परक हैं। अपनी किताब में वो लिखते हैं, “फिल्म के कई सारे सीन्स से मैं खुद को रिलेट नहीं कर पाता। मैं चाहता था कि कश्मीरी आतंकवाद की जड़ में वहाँ की सामाजिक और आर्थिक स्थितियों पर भी बात हो। मैं अपने 1987 के कश्मीर दौरे पर भी बात करना चाहता था, जिसमें मैंने देखा है कि वहाँ की राज्य सरकार देश की सबसे भ्रष्ट राज्य सरकार है।” उन्होंने आगे लिखा है:

“वहाँ जिनसे मेरी बात हुई उनमें से ज्यादातर स्थानीय लोग भारत से अलग होने की ख्वाहिश रखते थे। साथ ही मैं कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद के भारत में विलय के संबंध में भारत की जो दोहरी नीति रही है, जिसमें हैदराबाद और जूनागढ़ का भारत में विलय कर लिया गया क्योंकि वहाँ की अधिसंख्य आबादी हिन्दू थी पर कश्मीर में महाराजा जो हिन्दू था और राज्य की जनता जो मुस्लिम बहुसंख्यक थी पर फिर भी कश्मीर का विलय भारत में कर लिया गया, आदि पर बात करना चाहता था लेकिन मेरी हैसियत उतनी नहीं थी इसलिए मैंने अपने पॉइंट पर बहुत जोर नहीं दिया।”

मैक्सिमम सिटी नामक यह किताब कई पुरस्कार जीत चुकी है। 2005 में पुलित्जर अवार्ड की फाइनलिस्ट, तथा किरियामा अवार्ड जीतने वाली यह किताब 2004 में इकोनॉमिस्ट द्वारा चुनी हुई किताबों में शामिल थी। इसे 2005 सामुएल जॉनसन पुरस्कार भी मिला था।

यह किताब जो कुछ भी बताती है विधु विनोद चोपड़ा के बारे में उसके बाद शिकारा को लेकर किसी भी प्रकार के आश्चर्य की अब कोई जगह शेष नहीं रह जाती। विधु विनोद चोपड़ा ने ‘शिकारा’ नामक फिल्म को उसी तरह ट्रीट किया है जिस दृष्टि से वह कश्मीर घाटी में इस्लामिक आतंकवाद को देखते हैं। और वह अपने वर्ल्ड व्यू में ‘मिशन कश्मीर’ से लेकर ‘शिकारा’ तक इसी विचारधारा से चलते रहे हैं। ऐसे आदमी की बनाई मूवी कश्मीरी हिन्दुओं के नरसंहार के साथ कितना न्याय कर सकती थी, अब इस पर कोई संदेह नहीं है। इस कारण कश्मीरी पंडित अगर खुद को छला गया महसूस करते हैं, खुद के नरसंहार को किसी के द्वारा भुनाने की कोशिशों पर क्रोधित होते हैं, अपना संयम खो बैठते हैं भरे सिनेमा हॉल में, तो वह बेहद नैसर्गिक मानवीय प्रतिक्रिया है।

दर्शकों के अनुसार, ‘शिकारा’ मूवी कश्मीरी पंडितों की जगह जिहादियों के प्रति ज्यादा संवेदना व्यक्त करती दिखती है। दर्शकों ने यह भी कहा है कि इस मूवी में कट्टरपंथी इस्लाम पर लीपापोती करने के लिए तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया गया है और उन्हें तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। मूवी पर यह भी आरोप है कि इसने कश्मीरी पंडितों की अनकही कहानी के नाम पर प्रेम कहानी दिखा, उनके जख्मों पर नमक रगड़ने का काम किया गया है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता हिलाल अकबर लोन को PSA के तहत किया गया गिरफ़्तार

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता हिलाल अकबर लोन को छह माह तक हिरासत में रखने के बाद सोमवार को प्रशासन ने एक बार फ़िर से जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ़्तार कर लिया। हिलाल अकबर के पिता मोहम्मद अकबर लोन पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य विधानसभा के स्पीकर और बारामूला-कुपवाड़ा संसदीय क्षेत्र के मौजूदा सांसद हैं।

हिलाल अकबर लोन को भी कश्मीर घाटी में पाँच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को लागू किए जाने के मद्देनजर प्रशासन ने हिरासत में लिया था। इसके साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, कॉन्ग्रेस, माकपा व अन्य दलों के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया था। शुरूआत में इन नेताओं को सेंटूर की एक जेल में रखा गया था, लेकिन पिछले वर्ष नवंबर माह से हिलाल अकबर लोन और कुछ अन्य नेताओं को सब जेल के एमएलए हॉस्टल में रखा गया था।

वहीं PSA के तहत बंदी बनाए जाने के बाद हिलाल अकबर लोन को गुपकार रोड पर एक बंगले में बनाई गई अस्थायी सब जेल में ले जाया गया है। इससे पूर्व गत सप्ताह प्रशासन ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अली मोहम्मद सागर, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पीडीपी के वरिष्ठ नेता सरताज मदनी, नईद अख्तर को PSA के तहत बंदी बनाया है।