Home Blog Page 5103

‘कश्मीरी हिन्दुओं पर थूकने का काम करती है शिकारा फिल्म, उल्टे हिन्दुओं को ही कम्युनल कहती है’

बॉलीवुड में कश्मीरी पंडितों की व्यथा दिखाने का दावा करने वाली बॉलीवुड के निर्माता और निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म शिकारा आखिरकार लम्बे इन्तजार के बाद रिलीज हो चुकी है। लेकिन शिकारा फिल्म रिलीज होने के पहले ही दिन यह विवादों के घेरे में आ गई है। इस फिल्म के नाम बदले जाने से लेकर इसमें कश्मीरी पंडितों की त्रासदी के नाम पर कश्मीरी पंडितों की भावनाओं का मजाक बनाने जैसे कारणों से बवाल खड़ा हो गया है।

विधु विनोद चोपड़ा की फ़िल्म ‘शिकारा’ के बारे में उन्होंने दावा किया था कि इस फ़िल्म में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के दर्द को दिखाया गया है। लेकिन दिव्या राजदान ऐसा नहीं मानती हैं। दिव्या राजदान एक कश्मीरी पंडित जनर्लिस्ट हैं, जो डिफेन्स मामलों पर लिखती हैं और रिसर्चर हैं। आज ही इस फिल्म के रिलीज के मौके पर PVR में दिव्या राजदान भी मौजूद थीं।

दिव्या राजदान ने यह फिल्म देखने के बाद PVR में ही इस फिल्म में दिखाए गए प्रपंच का खंडन करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडित होने के नाते वो इस फिल्म का विरोध करती हैं। इसके बाद से दिव्या राजदान चर्चा में आ गई हैं और सोशल मीडिया पर शिकारा फिल्म का विरोध करते हुए उनका वीडियो भी शेयर किया जा रहा है।

दिव्या राजदान के इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिव्या राजदान से ऑपइंडिया ने सम्पर्क किया। ऑपइंडिया सम्पादक अजीत भारती से बातचीत में दिव्या राजदान ने बताया कि किस प्रकार से कश्मीरी पंडितों की व्यथा दिखाने के नाम पर इस फिल्म में कश्मीरी पंडितों को ही कट्टर और उनके ‘पलायन’ के लिए जिम्मेदार दिखाया गया है। दिव्या ने बताया कि फिल्म को मुस्लिम तुष्टिकरण का एक नमूना बनाकर पेश किया गया है और यह फिल्म सिर्फ यही सन्देश देती है कि कश्मीर में मुस्लिम तो इंसानियत रखते हैं लेकिन सिर्फ हिन्दू ही वहाँ की परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार हैं।

दिव्या राजदान ने फिल्म के निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सिर्फ अपनी फिल्म की पब्लिसिटी के लिए कश्मीरी पंडितों की वास्तविकता बयान करने के बजाय एक ऐसी प्रेम कहानी बनाकर रख दिया जो उन पर थूकने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस फिल्म का विरोध करने पर इस फिल्म से जुड़े लोगों ने चुप रहने की भी राय दी।

ऑपइंडिया से बातचीत में दिव्या ने बताया कि वो खुद को कश्मीरी पंडित नहीं बल्कि कश्मीरी हिन्दू कहना पसंद करती हैं क्योंकि ये उन्हें अपनी वास्तविकता के ज्यादा करीब रखता है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों की जो त्रासदी उन्होंने महसूस की है वह सिर्फ कश्मीर को एक इस्लामी राज्य बना देने के मकसद से किया गया।

दिव्या ने कहा कि आज यह हकीकत बन चुकी है, और कोई भी इस बात को नकार नहीं सकता है कि कश्मीर का आज पूर्ण रूप से इस्लामीकरण कर दिया गया है। दिव्या ने अपनी बातचीत में बताया- “जब हमने सुना कि कोई निर्देशक आखिरकार हमारी त्रासदी को दिखा रहा है तो मेरी रूचि इसमें बढ़ी। ट्रेलर के समय हम लोगों के मन में कुछ सवाल उठे भी थे, फिर भी हमने सोचा कि फिल्म का इन्तजार करेंगे। आज हमने यह फिल्म देखी, मेरे साथ सुशील पंडित भी मौजूद थे। लेकिन फिल्म के पहले सीन से लेकर आखिरी तक कहीं भी कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की बात नहीं थी। इसके बजाय इस फिल्म में सिर्फ एक प्रेमी जोड़े की बात थी। यह ठीक भी है क्योंकि यह आपकी फिल्म है और आपको ऐसा दिखाने का अधिकार है।”

“…लेकिन फिर इसे ‘कश्मीरी पंडित, एक अनकही कहानी’ कहने की क्या जरूरत थी। आपको स्पष्ट कहना चाहिए था कि हम कश्मीरी पंडितों का दर्द नहीं बल्कि सिर्फ मनोरंजन के लिए एक आम फिल्म बना रहे हैं। उन्हें कहना चाहिए था कि यह बस एक प्रेम कहानी है ना कि कश्मीरी पंडितों की व्यथा! ऐसा कर के उन्होंने हमारी भावनाओं के साथ मजाक किया है, लेकिन हम इसे मजाक बनने नहीं देंगे, इसलिए हम इस फिल्म का विरोध करते हैं।”

“मैं एक कश्मीरी संगठन की प्रवक्ता थी। फिल्म के ट्रेलर देखने के बाद मैंने सोचा क्यों न मैं सवाल पूछूँ, उनसे जो कि इस फिल्म को बना रहे हैं या फिर इससे जुड़े हुए हैं। इसी कारण मैंने फिल्म निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा से सवाल पूछा कि आप ऐसा भी कर सकते थे कि सिर्फ प्रेम कहानी इसे कह देते। और अगर यह कश्मीरी पंडितों की व्यथा है तो फिर आप लीड रोल में मुस्लिम को ही क्यों रख रहे हैं, हिन्दू को क्यों नहीं? स्पष्ट है कि वो लोग घाटी में हुए इस्लामिक रेडिकलाइजेशन को छुपाना चाहते हैं। फिल्म में जो दिखाया गया है वह हमारी दर्दनाक कहानी का मजाक था।”

“इन सवालों के बदले में मुझे ट्रोल किया गया, मुझे डिफेम करने की कोशिश की गई और अकेला कर दिया गया, मेरे ऑर्गेनाइजेशन ने भी मुझसे खुद से अलग कर दिया। इन लोगों ने खुद को मुझसे इस कारण अलग कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि विधु विनोद चोपड़ा ने तो फिर भी अपना कुछ योगदान कश्मीरी पंडितों के लिए फिल्म बनाकर दिया भी है, लेकिन तुमने कश्मीरी पंडितों के लिए अपना कौन सा योगदान दिया है?”

दिव्या राजदान ने कहा कि उनकी आपत्ति इस बात को लेकर है कि इस फिल्म के निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा को प्रोपेगैंडा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा- “हम तीस साल पहले भी अपनी त्रासदी को समझ नहीं पाए थे और आज भी हमें नहीं समझने दिया जा रहा है। आप खुद इस फिल्म को देखिए और स्वयं से ही यह सवाल करना चाहिए कि क्या हमारे साथ छल नहीं किया गया है?”

अपने परिवार के कश्मीर से पलायन की कहानी बताते हुए दिव्या राजदान ने कहा- “जब घाटी में इस्लामिक रेडिकलाइजेशन शुरू हुआ तब हिट लिस्ट छपा करती थी। एक दिन मिलिटेंट्स AK 47 अपने शॉल में छुपाकर आए। उन्होंने मेरे पापा का नाम लेते हुए दरवाजा खटखटाया। मेरे पापा का नाम लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें बाहर बुलाइए। लेकिन चरमपंथियों की आवाज सुनकर पापा घर के पीछे के दरवाजे से निकल गए। यह पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम परिवार ने देख लिया। दरवाजा खोलने पर जब माँ ने कहा कि वो घर पे नहीं हैं तो पड़ोस के मुस्लिम परिवार ने उन आतंकियों से कहा कि वो अभी पीछे से भागकर गया है और उसे दौड़कर जल्दी से पकड़ लो….”

“..ईश्वर की कृपा से पापा और हम लोग उस दिन सुरक्षित बच पाए। रात को एक ट्रक में बैठकर हम कश्मीर घाटी से जम्मू आ गए थे। कुछ समय बाद हम लोग नंगे पैरों और खाली हाथ दिल्ली चले आए। हम लोग इतने बेबस थे कि उस समय अस्पताल में इलाज के लिए मेरी माँ को अपने गले की सोने की चेन डॉक्टर को देनी पड़ी थी। उस समय मेरी माँ ने सोने की चेन गिरवी रखकर इलाज करवाया था। उस समय का हिन्दू ऐसा था कि वो डॉक्टर एक हिन्दू होने के बावजूद और हमारी समस्या सुनने के बाद भी मुफ्त इलाज करने को राजी नहीं हुआ। आज भी इस तरह की बातें सुनने को मिलती हैं, कि तुम्हें उनसे लड़ना चाहिए था। लेकिन सवाल यह है कि एक इस्लामिक स्टेट की स्थापना करने वाले बंदूकों से लेस आतंकवादियों से क्या हम पत्थरों से लड़ते?”

पूरी बातचीत का वीडियो यहाँ देखे:

विवादित वीडियो ट्वीट करने पर बुरे फँसे केजरीवाल, चुनाव आयोग ने जारी थमाई नोटिस, कल शाम तक देना है जवाब

दिल्ली चुनाव प्रचार के दौरान एक विवादित वीडियो ट्वीट करने के कारण चुनाव आयोग ने केजरीवाल को नोटिस भेजी है। यह विवादित वीडियो केजरीवाल ने 3 फरवरी को ट्वीट किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग ने यह कदम भाजपा की शिकायत पर उठाया है। भाजपा ने अपनी शिकायत में केजरीवाल पर वोटों के लिए साम्प्रदायिक घृणा फैलाने का आरोप लगाते हुए इसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन बताया था।

चुनाव आयोग ने अपनी नोटिस में कहा है कि केजरीवाल पर प्रथम दृष्टया मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट तथा जन प्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन का मामला बनता है। चुनाव आयोग ने केजरीवाल को भेजी अपनी नोटिस में लिखा है कि उपरोक्त ट्वीटेड वीडियो के संदर्भ में वह मानता है कि, “यह वीडियो सांप्रदायिक तथा समाजिक मनमुटावों को मौजूदा स्तर से और ज्यादा बढ़ाने की क्षमता रखता है।”

चुनाव आयोग द्वारा केजरीवाल को भेजा गया नोटिस

नोटिस के मुताबिक, केजरीवाल वीडियो में यह कहते हुए सुनाई देते हैं, “दिल्ली के इस चुनाव में कुछ पार्टियाँ चाहती हैं- भाइयो बहनों मित्रों में हिंदू मुस्लिम, हिंदू मुस्लिम…. मीडिया भी चाहती है मुस्लिम, हिंदू मुस्लिम…. केजरीवाल कहते हैं- दिल्ली के हर बच्चे को जो दिल्ली में पैदा हुआ  है उसे ग्रेजुएशन तक अच्छी शिक्षा की गारंटी मेरी है।”

चुनाव आयोग ने केजरीवाल को अपनी नोटिस का जवाब 8 फरवरी की शाम 5 बजे तक देने का निर्देश दिया है।

कोरोना का खौफ: UAE सरकार ने लगाया नाक से नाक सटाकर KISS करने पर प्रतिबंध

दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते कहर से आम लोगों को सुरक्षित रखने के लिए यूएई (UAE) ने एक गंभीर फैसला लिया है। वायरस के संक्रमण के डर से UAE के स्वास्थ्य मंत्रालय ने फरमान जारी करते हुए अपने नागरिकों को अभिवादन के अपने पारम्परिक तरीके यानी ‘एस्किमो किस’ नहीं करने का निर्देश दिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, UAE के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए लोगों को नाक से नाक सटाकर किस करने से बचने के लिए कहा है।

अरब देशों में कई प्रकार की ऐसी प्रथाएँ हैं, जिनमें एक दूसरे को स्पर्श कर के अभिवादन किया जाता है या फिर पारम्परिक रूप से कॉफ़ी के प्याले को एक व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल कर के दूसरे व्यक्ति को आगे बढ़ा दिया जाता है।

लोगों को छींक आते वक्त अपनी नाक और मुँह ढक कर रखने की सलाह भी दी गई है। निर्देश में एक-दूसरे को गले लगाने और Kiss करने की भी मनाही की गई है। ज्ञात हो कि तेजी से फ़ैल रहे कोरोना वायरस विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कोरोना वायरस को हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। UAE में अब तक कोरोना वायरस के पाँच मामले सामने आ चुके हैं। ये पाँचों संक्रमित लोग चीनी पर्यटक थे, जो वुहान से आए थे। 

वीडियो: AAP ने किया दिल्ली की शिक्षा का खोखला दावा, सोशल मीडिया पर तस्वीरें दिखाने तक सीमित रहा स्कूलों का विकास

दिल्ली में 8 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने हर तरह का हथकंडा अपनाया है। मतदाताओं को रिझाने के लिए आम आदमी पार्टी ने शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को ही अपने चुनाव प्रचार का प्रमुख जरिया बनाया। हालाँकि, खुद अरविन्द केजरीवाल भी जानते हैं कि चाहे शिक्षा हो, मुफ्त बिजली हो, CCTV हो, या फिर स्वास्थ्य का मुद्दा हो, अपने वादों पर उन्होंने जनता को सिर्फ बेवकूफ ही बनाया है।

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अक्सर दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर वाह-वाही लुटते देखे जाते हैं, जबकि वास्तविकता उन ‘वाह-वाही’ के आँकड़ों से एकदम उलट है। दिल्ली शिक्षा के आँकड़ों को देखेंगे तो पता चलता है कि 1032 में से सिर्फ 54 स्कूलों पर ही काम किया गया, बच्चों को जबरन फेल किया गया ताकि बोर्ड में सिर्फ बेहतर बच्चे ही बैठें! यहाँ तक कि मात्र गिने हुए 8 स्कूलों की ही तस्वीरें बार-बार सोशल मीडिया पर शेयर की गईं।

यही नहीं, आम आदमी पार्टी के इस प्रोपेगैंडा में उन्हें मेनस्ट्रीम मीडिया का भी खूब साथ मिला। जैसे कि NDTV के प्रोपेगैंडा पत्रकार रवीश कुमार भी अपने शो के दौरान कई बार यह कहते सुने गए कि दिल्ली में पहली बार शिक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ा जा रहा है और इसके लिए वो आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराते हुए सुने जाते रहे हैं। हालाँकि,अरविन्द केजरीवाल इस पूरे चुनाव प्रचार के दौरान हिन्दू मतदाताओं को रिझाने के लिए हनुमान चालीसा पढ़ने से लेकर हनुमान मंदिर जाकर तस्वीरें खिंचाते हुए ही देखे गए।

आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली में किए गए शिक्षा सम्बन्धी सुधार की वास्तविकता जानने के लिया यह वीडियो देखें-

मनीष सिसोदिया का OSD सहयोगी समेत गिरफ़्तार, कई बड़े नाम CBI की रडार पर

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से एक दिन पहले मनीष सिसोदिया की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सिसोदिया के ओएसडी जीके माधव को पहले ही गिरफ़्तार किया जा चुका है। जीके माधव वर्ष 2015 से दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ओएसडी के रूप में कार्यरत था। अब माधव के सहयोगी धीरज गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया है, जो दिल्ली सरकार के कई अधिकारियों के लिए दलाली का काम करता था। दलाली की पहली किस्त के रूप में 2 लाख 26 हजार रुपए लिए जा रहे थे।

सिसोदिया के करीबी जीके माधव के पास से तलाशी के दौरान दिल्ली सरकार का एक जॉब कार्ड बरामद हुआ है। उसपर ‘ऑफिस ऑफ डिप्टी सीएम’ लिखा हुआ है। 1977 में जन्मा माधव 2000 के बाद से इस नौकरी में आया था। 2014 में उसकी तैनाती उप-मुख्यमंत्री के यहाँ की गई। माधव से पूछताछ के बाद गुप्ता को गिरफ़्तार किया गया। जीके माधव से इस सम्बन्ध में जानकारी ली जा रही है।

माधव से पूछताछ की जा रही है कि वो किसके कहने पर रुपए लेता था और उस रकम को कैसे और कहाँ आगे बढ़ाया जा रहा था। मीडिया में चल रही ख़बरों के अनुसार, सीबीआई माधव के अनेक ठिकानों पर छापेमारी की गई है और अब तक वहाँ से नगदी समेत कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। दलाल धीरज गुप्ता को बुधवार (फरवरी 5, 2020) को गिरफ़्तार किया गया था। उससे पूछताछ के बाद गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। फ़िलहाल उसे 14 दिनों के लिए रिमांड पर भेजा गया है।

माधव को भी सीबीआई की विशेष कोर्ट में पेश किया जाना है। इस मामले में ख़ुद का बचाव करते हुए आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा है कि भ्रष्टाचार को किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब मामले के तार कहाँ-कहाँ जुड़े हुए हैं, ये तो आगे की जाँच के बाद ही पता चलेगा।

छिपाया जा रहा कश्मीरी पंडितों का दर्द?: ‘शिकारा’ के कुछ पोस्टरों में इसे बताया गया ‘लव स्टोरी’

विधु विनोद चोपड़ा की फ़िल्म ‘शिकारा’ के बारे में उन्होंने दावा किया था कि इस फ़िल्म में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के दर्द को दिखाया गया है। फ़िल्मकार का कहना है कि इसमें दिखाया गया है कि कैसे और किन परिस्थितियों से गुजर कर कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। इस फ़िल्म को लेकर पहले भी विवाद हुआ था जब निर्माता विधु विनोद चोपड़ा ने बयान दिया था कि हिन्दू और मुस्लिम, दोनों को ही एक-दूसरे से माफ़ी माँगनी चाहिए।

दिल्ली में हुए फ़िल्म के प्रीमियर में एनडीटीवी के रवीश कुमार की मौजूदगी से कई सवाल खड़े हो गए थे। रवीश ने भी चोपड़ा के बयान का समर्थन किया था। इस सब के बावजूद इसके कि इस पूरे घटनाक्रम में कश्मीर के कट्टरपंथियों का ही दोष है। फिर सवाल बनता है कि हिन्दू किस बात के लिए माफ़ी माँगें? अब ‘शिकारा’ के पोस्टरों को लेकर विवाद शुरू हो गया है। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने आरोप लगाया है कि फ़िल्म का टैगलाइन बदल दिया गया है।

जब हमने ‘विधु विनोद चोपड़ा फिल्म्स’ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल खँगाला तो पाया कि ‘शिकारा’ के पोस्टरों पर अभी भी ‘The Untold story of Kashmiri Pandits” टैगलाइन ही चल रहा है। इस टैगलाइन का अर्थ हुआ- ‘कश्मीरी पंडितों की वो कहानी जो अब तक सुनाई नहीं गई।’ वहीं अशोक पंडित ने ‘शिकारा’ का एक अन्य पोस्टर शेयर किया, जिसमें टैगलाइन बदला सा दिख रहा है। इसपर टैगलाइन है- “A timeless love story in the worst of times.” इसका अर्थ है- ‘अत्यंत बुरे समय की एक कालजयी प्रेम कहानी।’

‘शिकारा’ के पोस्टर बदलने को लेकर लगे आरोप

उधर एक कार्यक्रम के दौरान एक कश्मीरी पंडित महिला ने विधु विनोद चोपड़ा के सामने उनसे सवाल पूछा कि इसमें पंडितों पर हुए कट्टरपंथियों के अत्याचार को क्यों नहीं दिखाया गया है? नीचे वीडियो में आप देख सकते हैं, जिसमें लोग महिला के बयान पर ताली भी बजा रहे हैं:

अब सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ‘शिकारा’ को कश्मीरी पंडितों की व्यथा दिखाने की बजाय एक प्रेम-कहानी बताया जा रहा है? हालाँकि, वीवीसी फिल्म्स के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कश्मीरी पंडितों वाला टैगलाइन ही चल रहा है। लेकिन, सवाल ये है कि कुछ पोस्टरों में कश्मीरी पंडित वाले टैगलाइन की जगह प्रेम-कहानी को क्यों हाइलाइट किया जा रहा है?

लगातार बयान बदल रहा है शाहीन बाग़ में फायरिंग करने वाला कपिल गुर्जर, पिता व भाई से हुई पूछताछ

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने गत 1 फरवरी को संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में जारी शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट में गोलीबारी करने वाले कपिल गुर्जर के पिता व भाई से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार कपिल गुर्जर का पिता गजे सिंह तथा उसका भाई जाँच में 2 दिन देरी से शामिल हुए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने कपिल गुर्जर के सामने ही उसके पिता व भाई से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, यह पूछने पर कि शाहीन बाग़ में गोलीबारी करने में इस्तेमाल हुआ असलहा कपिल को कहाँ से मिला, वह लगातार अपने बयान बदल रहा है।

25 साल के कपिल गुर्जर ने शाहीन बाग़ प्रोटेस्ट साइट के नजदीक ही 2 फायर किए थे। जिसके बाद उसने मीडिया से बातचीत में कहा था कि इस देश में अब सिर्फ हिन्दुओं की ही चलेगी।

मीडिया को दिए अपने पहले के स्टेटमेंट्स में कपिल ने कहा था कि वो शाहीन बाग़ में जारी प्रदर्शन के कारण लगने वाले ट्रैफिक जाम से परेशान था। कपिल गुर्जर ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा था कि उसको परिवार में होने जा रही एक शादी की तैयारी के लिए अक्सर लाजपत नगर जाना पड़ता है और इस कारण वह रोज रोज के ट्रैफिक जाम से ऊब गया था।

दिल्ली पुलिस कपिल गुर्जर के दूसरे फोन की तलाश कर रही है जो अभी तक उसके हाथ नहीं लगा है।

Tokyo Olympic 2020: एथलीट और समर्थकों के नमाज पढ़ने के लिए चलती-फिरती मस्जिद की व्यवस्था

जापान की राजधानी टोक्यो में इस साल 24 जुलाई से 9 अगस्त तक ओलिंपिक गेम्स होंगे। इसमें दुनियाभर के हजारों खिलाड़ी, अधिकारी और फैन्स पहुँचेंगे। इस दौरान वहाँ आने वाले दूसरे मजहब के एथलीट, अधिकारी और समर्थकों को नमाज अता करने में कोई परेशानी न हो इसको ध्यान में रखते हुए एक चलती फिरती मस्जिद बनाई गई है।

इस बार खेलों के दौरान टोक्यो की सड़कों पर ये मस्जिद चक्कों पर चलती हुई दिखाई देगी। जानकारी के मुताबिक टोक्यो में होटलों और सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रार्थना स्थलों की कमी है, इसी को देखते हुए प्रशासन ने ‘मोबाइल मस्जिद’ का निर्माण करवाया है। यह ‘मोबाइल मस्जिद’ 48 वर्ग मीटर का ट्रक के पीछे बना एक प्रार्थना कक्ष है। जिसमें प्रार्थना के सभी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इस वाहन में पानी की भी व्यवस्था है और साथ ही इस पर अरबी में लिखा गया है ताकि किसी को कोई परेशानी ना हो।

बता दें कि इस मोबाइल मस्जिद को यासु प्रोजेक्ट के नाम से तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट के सीईओ यासुहारु इनो ने कहा कि वो चाहते हैं कि खिलाड़ी पूरी प्रेरणा के साथ प्रतिस्पर्धा में भाग लें और दर्शक भी उसी प्रेरणा के साथ खिलाड़ियों का प्रोत्साहन करें। इसके अलावा ओलंपिक खेलों में प्रार्थना के लिए खास कमरों को भी निर्माण खेल परिसर में किया जा रहा है।

यासुहारु इनो ने कहा कि उनके इस प्रयास से दुनिया भर के सभी लोगों में भेदभाव मुक्त शांतिपूर्ण ओलंपिक खेलों को बढ़ावा मिलेगा। टोक्यो ओलंपिक आयोजकों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को एक ईमेल के जरिए बताया कि वह सभी धार्मिक लोगों के लिए सुविधाएँ देने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक आस्थाओं की एक सूची तैयार की जा रही है, जिससे कि सभी धर्म के लोगों की सुविधा के लिए अलग-अलग व्यवस्था की जा सके।

Waseda University की एक रिपोर्ट के मुताबिक जापान में कुल मस्जिदों की संख्या 105 के करीब है। हालाँकि इनमें से अधिकांश टोक्यों से बाहर हैं। पाँच बार नमाज पढ़ने वाले लोगों को कोई दिक्कत न हो इसलिए ऐसी व्यवस्था की गई है। वहीं प्रोजेक्ट के अधिकारी का कहना है कि उन्होंने एथलीट्स की सुविधाओं के लिए कई ओलिंपिक समितियों से बात की थी, जिसमें इंडोनेशिया भी शामिल है।

ब्राह्मण होना पाप नहीं: अपनी ही पार्टी से लताड़े गए कॉन्ग्रेस नेता उदित राज, राम मंदिर ट्रस्ट पर उठाए थे सवाल

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने ऐसा बयान दिया है कि उनकी अपनी ही पार्टी के नेताओं ने उन्हें लताड़ लगाई है। जातिवादी ज़हर फैलाने के लिए कुख्यात उदित राज ने ‘राम मंदिर तीर्थक्षेत्र’ ट्रस्ट पर निशाना साधा। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार द्वारा 15 सदस्यीय ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसका अध्यक्ष के पराशरण को बनाया गया है। वयोवृद्ध अधिवक्ता के पराशरण ने ही सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान की तरफ से अंतिम लड़ाई लड़ी। उदित राज ने ब्राह्मणों को एक तरह से गाली देते हुए दलितों के हितैषी होने का दिखावा किया।

दिल्ली के पूर्व सांसद उदित राज ने लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़ कर कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया था।टिकट से वंचित किए जाने के बाद वो बौखला उठे थे। अब राम मंदिर ट्रस्ट के बहाने उन्होंने ब्राह्मणों पर दलितों का हक़ हड़पने का आरोप मढ़ा है। ख़ुद को सबसे बड़ा दलित नेता बताने वाले उदित राज ने अपने ट्वीट में लिखा:

“भारत में हुई आखिरी जनगणना के मुताबिक, दलितों की आबादी ब्राह्मणों से तीन गुना ज्यादा है। फिर सरकारी राम मंदिर ट्रस्ट सिर्फ ब्राह्मणों के भरोसे कैसे छोड़ा जाए? सरकार बेईमानी कर रही है। बहुजनों से लठैती करवाती है और माल (ट्रस्ट) ब्राह्मण उड़ाते हैं।” केंद्र सरकार द्वारा गठित राम मंदिर ट्रस्ट पूर्ण रूप से असंवैधानिक है। इसमें सिर्फ ब्राह्मणों को क्यों रखा गया है? राम मंदिर का खेल भाजपा ने बहुजनों के कंधे पर बंदूक रखकर खेला। जब ट्रस्ट के नाम पर मलाई खाने की बारी आई तो इनको ही गायब कर दिया।

उदित राज की अपनी ही पार्टी को उनका ये बयान नागवार गुजरा। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के मीडिया प्रभारी राजीव त्यागी ने उदित राज को लताड़ते हुए कहा कि ब्राह्मण होना पाप नहीं है। उन्होंने उदित राज को चुनौती देते हुए कहा कि वो इस विषय पर किसी के भी साथ बहस करने को तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि कॉन्ग्रेस वो गुलदस्ता है, जिसमें सभी जाति व धर्म के पुष्प पल्लवित होते हैं।

वहीं कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जतिन प्रसाद ने भी उदित राज के बयान से नाराज़गी जताई। प्रसाद ने उदित राज को सलाह दी कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी की परंपरा का पालन करें और किसी भी विषय पर बयान देते समय किसी भी जाति-धर्म पर प्रहार न करें। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस अनुसूचित जातियों के लिए सकारात्मक प्रावधानों की बात करती है और साथ ही सभी के लिए समान अवसर की बात भी करती है। राजीव त्यागी ने भी जतिन प्रसाद के बयान से सहमति जताई।

कॉन्ग्रेस पार्टी के आंतरिक कलह को सामने लाती हुई ये लड़ाई सार्वजनिक हो गई है क्योंकि सभी नेताओं ने खुलेआम ट्वीट्स कर के अपनी बात रखी है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर लगातार ज़हर उगल रहे उदित राज ने कॉन्ग्रेस नेताओं के इन बयानों पर चुप्पी साधी हुई है।

मैं अली के साथ नहीं रहना चाहती, मुझे इस्लाम कबूल नहीं: 15 साल की लड़की ने कोर्ट में लगाई गुहार

पाकिस्तान में 15 साल की हिंदू लड़की महक कुमारी ने गुरुवार (फरवरी 6, 2020) को एक स्थानीय कोर्ट में न्यायाधीश के सामने अपने लिए इंसाफ की गुहार लगाई। लड़की ने कोर्ट के सामने कहा कि जिस अली रजा मिर्ची नामक मुस्लिम व्यक्ति से उसकी शादी हुई थी, वह उसके साथ नहीं रहना चाहती और न ही वो इस्लाम कबूल करना चाहती है। लड़की ने कोर्ट के समक्ष गुहार लगाई है कि उसे उसके माता-पिता के पास भेज दिया जाए और हिंदुत्व का अनुसरण करने की अनुमति दी जाए।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, महक के वकील राजेश नारायणदास कपूर ने उनसे फोन पर बात की और उन्हें बताया कि महक कुमारी के मामले पर गुरुवार को सुनवाई हुई। जहाँ जकोबाबाद के दूसरे अतिरिक्त न्यायाधीश ने कोर्ट के अंदर और कोर्ट के बाहर मौलवियों की भारी मौजूदगी को देखते हुए बंद कमरे में पूरे मामले की सुनवाई की।

गौरतलब है कि इससे पहले 20 जनवरी को महक ने कोर्ट में माना था कि उसने अमरोत शरीफ में अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया और अली रजा से अपनी मर्जी से शादी की। लेकिन, आज वह अपने बयान से पलट गई और कोर्ट से बताया कि उसने गलती से यह बयान दिया था। महक के वकील का भी कहना है कि 21 जनवरी को महक ने भारी दबाव और धमकियों से डरके कोर्ट के सामने गलत बयान दिया था।

बता दें कि 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा 15 जनवरी को अचानक लापता हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने उसके लापता होने की शिक़ायत दर्ज कराई, इसमें बताया गया था कि नाबालिग को जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया है। वहीं, हिन्दू समुदाय ने दावा किया है कि ननकी कुमारी उर्फ़ ​​महक कुमारी उर्फ़ ​​आरोक कुमारी उर्फ़ ​​अलीजा एक कम उम्र की लड़की है, उसकी उम्र सिर्फ़ 15 वर्ष है

इस घटना के खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर इसकी घोर निंदा हुई थी। सवाल पूछे जा रहे थे कि
जो लोग नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, क्या इस तरह की घटना जानने के बाद भी वो अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखेंगे?